रोमानिया का जालसाज : एटीएम क्लोनिंग से अकाउंट साफ – भाग 1

डिजिटल तकनीक के इस युग में बैंक अकाउंट में सेंध लगाने वाले जालसाज भी नईनई तरकीबें अपना रहे हैं. इन जालसाजों का नेटवर्क भारत में ही नहीं विदेशों में भी फैला हुआ है. रोमानिया के एक जालसाज ने भोपाल और इंदौर के ग्राहकों के बैंक अकाउंट से दिल्ली के एटीएम बूथों से लाखों रुपए उड़ा दिए. भोपाल क्राइम ब्रांच की टीम ने एक महीने तक दिल्ली शहर में रुक कर इन जालसाजों को आखिर कैसे खोज निकाला?

भोपाल के रहने वाले सैयद फारुख अली ने बैंक औफ बड़ौदा की ब्रांच में लगी पासबुक प्रिंटिंग मशीन में अपनी पासबुक डाली तो कुछ ही देर में उन की पासबुक प्रिंट हो कर बाहर निकल आई. बैंक से बाहर निकल कर उन्होंने पासबुक चैक की तो एक एंट्री देख कर वह चौंक पड़े.

इसी साल जुलाई की 9 तारीख को उन के बैंक खाता नंबर 3537010000xxxx से 75 हजार रुपए की रकम की निकासी एटीएम कार्ड के जरिए होनी दिखाई गई थी. सैयद फारुख अली को आश्चर्य इस बात पर हो रहा था कि उन्होंने यह रकम निकाली ही नहीं थी. वह हैरान थे कि यदि किसी और ने यह रकम निकाली है तो उन के मोबाइल पर ओटीपी क्यों नहीं आया. फारुख अली ने फिर से बैंक काउंटर पर जा कर इस की शिकायत की तो बैंक क्लर्क ने उन्हें डपटते हुए कहा, ‘‘आप ने एटीएम कार्ड से रुपए निकाले हैं, इस में बैंक क्या कर सकता है.’’

सैयद फारुख अली मुंह लटकाए अपने घर आ गए. वह प्रौपर्टी के कारोबार से जुड़े हुए हैं. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की बीडीए कालोनी कोहेफिजा में रहने वाले 38 वर्षीय सैयद फारुख अली जानना चाहते थे कि उन के खाते से ये पैसे किस ने निकाले हैं. लिहाजा 10 जुलाई, 2023 को वह साइबर क्राइम ब्रांच में एक शिकायत ले कर पहुंच ही गए.

थोड़ी देर इंतजार कर वह साइबर क्राइम ब्रांच के डीसीपी श्रुतकीर्ति सोमवंशी के पास पहुंचे तो अरजी ले कर उन के सामने हाजिर फरियादी को देखते ही डीसीपी बोले, ‘‘कहिए, क्या समस्या है?’’

फारुख अली ने कागज पर लिखी अरजी उन की टेबल पर रखते हुए कहा, ‘‘साहब, मेरे बैंक खाते  से 75 हजार रुपए किसी जालसाज ने निकाल लिए हैं, जबकि मैं ने ऐसा कोई ट्रांजैक्शन नहीं किया है.’’

‘‘कौन से बैंक में है आप का अकाउंट?’’

‘‘जी सर, बैंक औफ बड़ौदा में मेरा अकाउंट है.’’ फारुख अली ने बताया.

‘‘किसी को ओटीपी तो नहीं बताया, मोबाइल पर किसी लिंक पर क्लिक तो नहीं किया?’’ डीसीपी सोमवंशी ने फारुख से पूछा.

‘‘नहीं सर, न तो कोई ओटीपी आया और न ही किसी लिंक पर मेरे द्वारा क्लिक किया गया है,’’ फारुख हाथ जोड़ कर बोले.

डीसीपी सोमवंशी ने सैय्यद फारुख की अरजी को ले कर उन्हें भरोसा दिलाया कि जल्द ही साइबर पुलिस जांच कर के जालसाज तक पहुंचेगी और उन के अकाउंट से फरजी तरीके से निकाली गई रकम उन्हें वापस दिलाई जाएगी.

डीसीपी सोमवंशी के निर्देश पर फारुख अली की तरफ से अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420 के तहत मामला दर्ज किया कर लिया गया.

अनेक लोगों के साथ हुई ऐसी ही धोखाधड़ी

इस शिकायत के अगले दिन अशोका गार्डन, भोपाल के विनोद सहदेव और सतीश बजरंगी ने भी अपने बैंक अकाउंट से रुपए निकाले जाने की शिकायत थाने में दर्ज कराई. फारुख अली की शिकायत के बाद 5 दिन के भीतर ही भोपाल के अलगअलग पुलिस थानों में  53 लोगों ने अपने साथ हुए इसी तरह के फ्रौड की शिकायतें दर्ज कराईं.

इसी तरह इंदौर के विभिन्न थानों में अनेक शिकायतें दर्ज हुईं. ताज्जुब की बात यह थी कि ये सारे फ्रौड बैंक औफ बड़ौदा के ग्राहकों के साथ ही हुए थे.

2023 के जुलाई महीने में हुए इस फ्रौड को पुलिस और बैंक अधिकारी भी नहीं समझ पा रहे थे. शिकायतकर्ताओं का कहना था कि न उन के पास कोई ओटीपी आया, न कोई काल आई, न ही कोई लिंक आया, न ही कहीं एटीएम में कार्ड यूज किया, न ही फोन पर उन्होंने कोई ऐप डाउनलोड किया, इस के बावजूद उन के अकाउंट से लाखों रुपए निकाल लिए गए.

पुलिस टीम ने दिल्ली में डेरा डाल आरोपियों को खोज निकाला

मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल के पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्रा के निर्देश पर एक पुलिस टीम बनाई. एसआई रमन शर्मा के नेतृत्व में टीम दिल्ली पहुंची. टीम में हैडकांस्टेबल, आदित्य साहू, कांस्टेबल तेजराम सेन, प्रताप सिंह, सुनील कुमार को शामिल किया गया था. जांच में पुलिस टीम को यह जानकारी मिली कि ज्यादातर पैसे दिल्ली में स्थित एटीएम कियोस्क से निकले हैं, इसलिए टीम दिल्ली पहुंच गई.

टीम को पता चला कि जालसाजों ने दिल्ली के अलगअलग क्षेत्रों में स्थित 9 एटीएम कियोस्कों से पैसे निकाले थे, इसलिए टीम ने सब से पहले उन 9 एटीएम कियोस्कों के सीसीटीवी कैमरे खंगाले, जहां से जालसाजों द्वारा पैसे निकाले गए थे. ये एटीएम कियोस्क ग्रेटर कैलाश, चाणक्यपुरी और नेहरू प्लेस में स्थित थे. जिन खाताधारकों के फोन पर एटीएम से पैसे निकालने के मैसेज आए थे. पुलिस को उन की टाइमिंग मैच करते हुए आसपास के 200 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखे, मगर कोई भी क्लू हाथ नहीं आ रहा था.

इस की वजह यह थी कि आरोपी एटीएम से रुपए निकालते वक्त पहचान छिपाने के लिए टोपी और स्कार्फ से खुद को ढंक लेते थे. रुपए निकाल कर वे आटो से या पैदल आते और गलियों में गायब हो जाते थे.

डस्टबिन से मिला जालसाजों का सुराग

भोपाल क्राइम ब्रांच की टीम को दिल्ली में आरोपियों की पतासाजी करते हुए 20 दिन से अधिक हो गए थे. अपने घरपरिवार से दूर रहते हुए पुलिस टीम के सदस्यों को घर की याद भी सता रही थी.

एक दिन हैडकांस्टेबल आदित्य साहू अपने टीम लीडर एसआई रमन शर्मा से बोले, ‘‘सर, हम ने दिल्ली के सैकड़ों एटीएम बूथों को चैक कर लिया है, लेकिन आरोपियों का कुछ पता नहीं चल रहा है. अब तो हमें वापस लौटना चाहिए.’’

‘‘सभी लोग कुछ दिन और धैर्य रखें, हमारी मेहनत जरूर सफल होगी, कोई न कोई क्लू हमें अपराधियों तक जरूर पहुंचाएगा.’’ एसआई रमन शर्मा बोले.

इस के बाद टीम फिर नए जोश के साथ आरोपियों की पतासाजी में जुट गई. पुलिस टीम जब दिल्ली के नेहरू प्लेस के कैमरों की आखिरी फुटेज देख रही थी तो इस फुटेज के आखिरी कुछ सेकेंड्स में हर बार पैदल या आटो से रवाना हो जाने वाले ये लोग एक टैक्सी में बैठ कर जाते दिखे. इस फुटेज में टैक्सी का नंबर भी साफ दिख रहा था.

टैक्सी के इसी नंबर के सहारे पुलिस टैक्सी प्रोवाइडर कंपनी रंजीत ब्रदर्स के औफिस पहुंच गई. वहां पुलिस टीम को बताया गया कि इस टैक्सी को फिरोज नाम के किसी शख्स ने बुक किया था. कंपनी से पुलिस को टैक्सी बुक करने वाले का मोबाइल नंबर और घर का पता भी मिल गया. जब पुलिस ने उस मोबाइल पर काल करने की कोशिश की तो वह नंबर बंद था.

पति की आशिकी का अंजाम – भाग 2

कमलेश शादी लायक हो गया था. वह नौकरी भी कर रहा था, इसलिए उस की शादी के लिए रिश्ते आने लगे थे. मनोहर और किरण भी बेटे की शादी करना चाहते थे, इसलिए वे बेटे के लिए लड़की देखने लगे थे. काफी खोजबीन के बाद आखिर उन्होंने नागदा के रहने वाले नंदकिशोर पांचाल की बेटी प्रियंका उर्फ पिंकी को पसंद कर लिया था.

जैसा कमलेश के मांबाप चाहते थे, पिंकी वैसी ही पढ़ीलिखी, खूबसूरत, सुशील और समझदार घरेलू लड़की थी. सारी बातचीत के बाद पूरी रस्मोरिवाज के साथ 12 मई, 2013 को कमलेश और पिंकी का धूमधाम से विवाह हो गया. पिंकी बाबुल के घर से विदा हो कर अपने सपनों के राजकुमार के घर आ गई.

अब पिंकी को उस पल का इंतजार था, जो जिंदगी में सिर्फ एक बार आता है. वह पल आ गया, लेकिन उस का पति कमलेश उस का घूंघट उठा कर प्यार करने के बजाय उतनी रात को भी न जाने किस से फोन पर बातें करने में लगा था. पिंकी को यह सब अच्छा तो नहीं लग रहा था, लेकिन संकोचवश वह कुछ कह नहीं पा रही थी. वह भले ही कुछ नहीं कह पा रही थी, लेकिन यह जरूर सोच रही थी कि ऐसा कौन सा खास आदमी है, जिस से वह उसे छोड़ कर फोन पर बातें करने में लगा है.

कमलेश ने सुहागरात तो मनाई, लेकिन उस में वह जोश नहीं था, जो होना चाहिए था. जिस की कसक पिंकी साफ महसूस कर रही थी. उस की यह कसक बढ़ती जा रही थी, क्योंकि कमलेश का लगभग रोज का वही नियम था. वह होता तो पिंकी के पास था, लेकिन बातें किसी और से करता रहता था. उस की बातें सुन जब पिंकी को लगा कि वह लड़कियों से बातें करता है तो उस की कसक और बढ़ गई.

कमलेश की काल सेंटर की नौकरी कोई बहुत अच्छी नहीं थी, इसलिए वह किसी अच्छी नौकरी की तलाश में था. उसे एक एनजीओ में काम मिल गया तो उस ने काल सेंटर वाली नौकरी छोड़ दी. यह लगभग 6 महीने पहले की बात है. उस एनजीओ की ओर से वह मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत लोगों को प्रशिक्षण देता था. उस ने अपना यह काम पूरी ईमानदारी और लगन से किया था. इसलिए उसे मुख्यमंत्री ने अवार्ड भी प्रदान किया था. एनजीओ से जुड़ने के बाद कमलेश फोन पर कुछ ज्यादा ही व्यस्त रहने लगा था. वह देर रात तक फोन पर बातें करता रहता था. पिंकी अकसर उकता कर सो जाती थी.

पिंकी इस का पुरजोर विरोध कर रही थी. लेकिन कमलेश में कोई सुधार नहीं आ रहा था. तब पिंकी ने इस बात की शिकायत अपने सासससुर से ही नहीं, मांबाप से भी की. कमलेश के मांबाप ने जब उसे टोका तो यह बात उसे बड़ी नागवार लगी. पिंकी का इस तरह जिंदगी में दखल देना उसे अच्छा नहीं लगा. इस के बाद पतिपत्नी में तनाव रहने लगा.

कमलेश पिंकी को इसलिए कुछ नहीं कह पाता था, क्योंकि उस के मांबाप बहू को बहुत प्यार करते थे. उन की बहू थी भी इस लायक. वह सासससुर का हर तरह से खयाल रखती थी. उन्हें हमेशा हाथों पर लिए रहती थी.

ऐसी बहू की हत्या हो जाने से मनोहर और किरण बहुत परेशान थे, इसलिए वे केस को खोलने और हत्यारे को पकड़वाने के लिए पुलिस पर दबाव बनाए हुए थे. चूंकि वह ज्युडिशियरी से जुड़े थे, इसलिए पुलिस पर इस मामले को जल्द से जल्द खोलने का दबाव भी था.

कमलेश अगर अपना बयान दे देता तो पुलिस को हत्यारे तक पहुंचने में आसानी होती. इसलिए पुलिस उस से पूछताछ के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रही थी. लेकिन पुलिस जब भी अस्पताल पहुंचती, पता चलता वह बेहोश है. जबकि डाक्टरों के अनुसार वह पूरी तरह से स्वस्थ था. अब पुलिस को उसी पर शक होने लगा. लेकिन पुलिस उस पर शक के आधार पर हाथ नहीं डाल सकती थी, क्योंकि उस के पिता हाईकोर्ट के जज की गाड़ी चलाते थे. जरा भी इधरउधर हो जाता तो पुलिस को जवाब देना मुश्किल हो जाता. इसलिए पुलिस उस के खिलाफ सुबूत जुटाने लगी.

पुलिस ने सब से पहले उस के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. इस काल डिटेल्स से ऐसे तमाम नंबर मिले, जिन पर उस की लंबीलंबी बातें हुई थीं. पुलिस ने जब उन नंबरों के बारे में पता किया तो वे सभी नंबर लड़कियों के थे. इस से यह बात साफ हो गई कि वह काफी आशिकमिजाज लड़का था.

थानाप्रभारी मंजू यादव की समझ में आ गया था कि कमलेश पुलिस की पूछताछ से बचने के लिए बेहोश और कमजोरी होने का नाटक कर रहा है. वैसे भी वह नाटकों में काम कर चुका था. कालेज के समय में उसे अभिनय सम्राट कहा जाता था. उसे नाटकों के लिए कई अवार्ड भी मिले थे. इसलिए मंजू यादव ने भी उस के साथ नाटक करने की योजना बनाई.

वह सबइंसपेक्टर राजेंद्र सिंह दंडोत्या, भीम सिंह रघुवंशी और कुछ पुलिस वालों को साथ ले कर अस्पताल पहुंचीं. क्योंकि अब तक उन्हें कुछ ऐसे सुबूत मिल चुके थे, जिस से उन्हें लग रहा था कि पिंकी की हत्या कमलेश ने ही की है. इस की वजह यह थी कि कमरे में केवल उसी की अंगुली के निशान मिले थे. जांच के लिए कमलेश के खून से सने कपड़े और पलंग के नीचे से मिले जो गहने पुलिस ने बरमाद किए थे, उन पर जो खून के दाग लगे थे, वह पिंकी के खून के थे.

अपने शक को दूर करने के लिए पुलिस ने कमलेश की काल डिटेल्स से मिले एक नंबर पर उसी के फोन से फोन किया, जिस पर उस ने उसी रात काफी लंबीलंबी बातचीत की थी. फोन लगते ही दूसरी ओर से फोन रिसीव कर लिया गया था, इधर से बिना कुछ कहे ही दूसरी ओर से सीधे कहा गया, ‘‘कमलेश, तुम ने जो किया, वह ठीक नहीं किया. तुम बहुत ही गंदे आदमी हो. आखिर तुम ने अपनी पत्नी की हत्या कर ही दी. लेकिन अब इस मामले में मुझे मत फंसाना, क्योंकि इस में मेरी कोई भूमिका नहीं है. और हां, अब कभी मुझे भूल कर भी फोन मत करना.’’

इतना कह कर फोन रिसीव करने वाली लड़की ने फोन काट दिया था. पुलिस ने लड़की की यह बातचीत टेप कर ली थी. बाद में पुलिस ने उस  लड़की के बारे में पता किया तो वह बाणगंगा मोहल्ले की निकली.

थानाप्रभारी मंजू यादव अपने साथियों के साथ सीएचएल अस्पताल के उस कमरे में जैसे ही पहुंचीं, जिस में कमलेश भरती था, उन्हें देख कर कमलेश तुरंत बेहोश हो गया. कमलेश की मां किरण उस की देखभाल के लिए वहीं थीं. पुलिस उन्हें बाहर भेज कर कमलेश से बात करने की कोशिश करने लगी. कमलेश बेहोशी का नाटक तो किए ही था, अब कराहने भी लगा.

थानाप्रभारी मंजू यादव भी कम नाटकबाज नहीं थीं. उन्होंने सच्चाई का पता लगाने के लिए एक योजना बनाई. उस योजना के तहत उन्होंने एक सिपाही को परदे के पीछे छिपा कर खड़ा कर दिया और एक मोबाइल फोन का वाइस रिकौर्ड चालू कर के कमलेश के बेड पर इस तरह रख दिया कि उसे पता नहीं चला. इस के बाद उन्होंने साथियों के साथ बाहर आ कर कमलेश की मां से कहा, ‘‘कमलेश अभी बयान देने लायक नहीं है. जब वह बयान देने लायक हो जाए, आप हमें सूचना भिजवा दीजिएगा. हम सभी आ कर बयान ले लेंगे.’’

इतना कह कर थानाप्रभारी मंजू यादव ने किरण को अंदर भेज दिया. मां के अंदर आते ही कमलेश को होश आ गया. उस ने तुरंत पूछा, ‘‘पुलिस वाले चले गए?’’

मां ने हां में सिर हिलाया तो वह उन से अच्छी तरह बातें करने लगा. उसे अच्छी तरह बातें करते देख परदे के पीछे छिप कर खड़े सिपाही ने मिसकाल दे कर थानाप्रभारी मंजू यादव को अंदर आने का इशारा कर दिया. वह साथियों के साथ तुरंत अंदर आ गईं. कमरे में अचानक पुलिस को देखते ही कमलेश फिर से बेहोशी का नाटक कर के कराहने लगा.

मंजू यादव ने हंसते हुए पलंग पर छिपा कर रखे मोबाइल फोन को उठा कर रिकौर्ड हुई मांबेटे की बातचीत सुनाई तो कमलेश का कराहना बंद हो गया. उसे तुरंत अस्पताल से छुट्टी करा कर थानाप्रभारी मंजू यादव रानीसराय स्थित पुलिस मुख्यालय ले गईं. उन्होंने वहां वीडियोग्राफी की तैयारी पहले से ही करा रखी थी.

वीडियोग्राफी कराते हुए कमलेश से पूछताछ शुरू हुई. इस पूछताछ में उस ने पुलिस को भरमाने के लिए एक कहानी सुनाई, जो इस प्रकार थी.

कमलेश ने बताया कि 4-5 दिनों से काले रंग की एक पलसर मोटरसाइकिल से 2 लड़के मुंह पर कपड़ा बांध कर उस के घर के आसपास चक्कर लगा रहे थे. उस दिन वही दोनों लड़के उस के घर में घुस आए और उस के सिर पर डंडा मार कर उसे बेहोश कर दिया. इस के बाद उन्होंने लूटपाट की होगी. पिंकी ने विरोध किया होगा या उन्हें पहचान लिया होगा, जिस की वजह से उन्होंने उस की हत्या कर दी होगी.

पति की आशिकी का अंजाम – भाग 1

राहुल इंदौर के एयरोड्रम रोड पर स्थित कृष्णबाग कालोनी में रहने वाले अपने मामा मनोहर पांचाल के यहां शादी का कार्ड देने पहुंचा  तो घर में सन्नाटा छाया हुआ था. पहली मंजिल पर जा कर उस ने कमरे का दरवाजा खटखटाया तो अंदर कोई हलचल नहीं सुनाई दी. कुछ देर उस ने इंतजार किया. जब दरवाजा नहीं खुला तो उसे हैरानी हुई. क्योंकि दरवाजे के बाहर की कुंडी खुली थी. इस का मतलब घर खाली नहीं था.

राहुल ने एक बार फिर दरवाजा खटखटाया. इस बार भी दरवाजा नहीं खुला तो उस ने दरवाजे पर धक्का दिया. अंदर से सिटकनी बंद नहीं थी, इसलिए दरवाजा खुल गया. वह अंदर कमरे में पहुंचा तो कोई दिखाई नहीं दिया. उस ने बेडरूम में झांका. वहां भी कोई दिखाई नहीं दिया तो वह किचन की ओर बढ़ा. वहां उस ने जो देखा, उस की रूह कांप उठी. उस के मामा के बेटे कमलेश की पत्नी खून से लथपथ फर्श पर पड़ी थी. उसी के ऊपर कमलेश औंधा पड़ा था.

यह भयानक दृश्य देख कर वह घबरा तो गया, लेकिन धैर्य नहीं खोया. उस ने तुरंत 108 नंबर पर एंबुलेंस के लिए फोन किया. इस के बाद उस ने अपने कुछ दोस्तों को फोन किया. यह 17 फरवरी, 2014 की बात है. उस समय शाम के साढ़े 4 बज रहे थे. राहुल को पता था कि उस समय उस के मामा मनोहर पांचाल ड्युटी पर होंगे. वह हाईकोर्ट जज की गाड़ी चलाते थे. मामी किरण पांचाल के पिता की मौत हो गई थी, इसलिए वह अपने मायके गई हुई थीं. उन का मायका बड़नगर के पास लोहाना गांव में था. बाकी बच्चे स्कूल गए हुए थे.

थोड़ी ही देर में राहुल के दोस्त तो आ गए, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई. राहुल ने कमलेश और पिंकी की नब्ज टटोली. पता चला पिंकी मर चुकी है. लेकिन कमलेश की सांस अच्छी तरह चल रही थी. वह सिर्फ बेहोश था. वे कार से कमलेश को नजदीक के एक प्राइवेट अस्पताल ले गए, जहां डाक्टरों ने जांच कर के बताया कि यह पूरी तरह से स्वस्थ है. शायद घबरा गया है, जिस से चक्कर खा कर गिर गया है.

लेकिन राहुल और उस के दोस्तों को डाक्टरों की इस बात पर भरोसा नहीं हुआ, इसलिए वे कमलेश को दूसरे बड़े सीएचएल अस्पताल ले गए, जहां उसे आईसीयू में भरती करा दिया. एक राहुल और उस के दोस्त कमलेश को इलाज के लिए अस्पताल ले कर चले गए थे, जबकि दूसरी ओर इस घटना की सूचना थाना एयरोड्रम पुलिस को दे दी गई थी. मामला हत्या का था, इसलिए सूचना मिलते ही थानाप्रभारी मंजू यादव पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गईं.

लाश निरीक्षण और पूछताछ में उन्हें मामला रहस्यमय लगा, इसलिए थानाप्रभारी ने अधिकारियों को सूचना देने के साथ जरूरी साक्ष्य एकत्र करने के लिए एफएसएल अधिकारी डा. सुधीर शर्मा को बुला लिया था. निरीक्षण के दौरान सुधीर शर्मा ने देखा कि वहां 2 चाकू पडे़ हैं. दोनों ही चाकू अपराध को अंजाम देने वाले न हो कर किचन के उपयोग में लाए जाने वाले थे. उन में से एक चाकू टूटा हुआ था. जो चाकू टूटा था, उस पर खून नहीं लगा था.

इस से अंदाजा लगाया गया कि हमला करने में वह चाकू टूट गया होगा, तब हत्यारे ने दूसरा चाकू ले कर हत्या की होगी, क्योंकि दूसरा चाकू खून से लथपथ था. डा. सुधीर शर्मा ने घटनास्थल का निरीक्षण कर के अंगुलियों के निशान, खून के नमूने और चाकू वगैरह अपने कब्जे में ले लिए तो पुलिस ने अपना काम शुरू किया.

जांच में पुलिस ने देखा कि कमरे का सामान बिखरा हुआ था. अलमारियां खाली पड़ी थीं. पुलिस ने इधरउधर देखा तो पलंग के नीचे कुछ गहने उसे मिल गए. मृतका के शरीर पर भी सारे गहने मौजूद थे. इस से पुलिस और एफएसएल अधिकारी डा. सुधीर शर्मा ने अनुमान लगाया कि वारदात को किसी जानपहचान वाले ने ही अंजाम दिया है. शायद हत्या उस ने पहचाने जाने की वजह से की है.

पुलिस लाश और घटनास्थल का निरीक्षण कर ही रही थी कि सूचना पा कर मनोहर पांचाल आ गए थे. पुलिस ने उन से कहा कि वह देख कर बताएं कि घर का क्या क्या सामान गायब है. इस पर उन्होंने कहा, ‘‘घर का सामान तो गायब नहीं लगता, रही बात गहनों की तो उस के बारे में मैं ज्यादा कुछ बता नहीं सकता. लेकिन जो गहने मिले हैं, वे पूरे नहीं हैं. हो सकता है, घर में कहीं और रखे हों या अपराध को अंजाम देने वाले अपने साथ ले गए हों.’’

लूट के बारे में मनोहर से ज्यादा कुछ जानकारी नहीं मिल सकी थी. औपचारिक पूछताछ के बाद पुलिस ने घटनास्थल की जरूरी काररवाई निपटा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया.

घटनास्थल की काररवाई पूरी करने के बाद मामले की जांच आगे बढ़ाने के लिए कमलेश से पूछताछ करना जरूरी था. क्योंकि राहुल द्वारा मिली जानकारी के अनुसार वह लाश के पास ही बेहोश मिला था. इसलिए घटना के बारे में उसी से कुछ पता चल सकता था. उस से पूछताछ करने पुलिस अस्पताल पहुंची तो पता चला कि वह अभी भी बेहोश है. पुलिस ने डाक्टरों से पूछा तो उन्होंने बताया कि वह शारीरिक रूप से तो स्वस्थ है. लेकिन शायद घटना से घबरा गया है, इसलिए बेहोश है. पुलिस बिना पूछताछ के ही लौट आई.

घटना की जांच के लिए थानाप्रभारी मंजू यादव ने सबइंसपेक्टर राजेंद्र सिंह दंडोत्या और भीम सिंह रघुवंशी के नेतृत्व में एक टीम बना कर लगा दी. इन दोनों सबइंसपेक्टरों ने जो जानकारी जुटाई, उस के अनुसार मृतका पिंकी का पति कमलेश पांचाल इंदौर की कृष्णबाग कालोनी के मकान नंबर 126 में रहने वाले मनोहर पांचाल का बेटा था. बीकौम करने के बाद वह एक काल सेंटर में नौकरी करने लगा था.

अभिनय का शौकीन कमलेश कालेज के नाटकों में भी भाग लेता रहा था. नाटकों में भाग लेने की ही वजह से वह काफी फ्रैंक हो गया था. हर किसी से वह बेझिझक बात कर लेता था. ऐसे में उसे किसी से भी दोस्ती करने या बातचीत में जरा भी हिचक नहीं होती थी. यही वजह थी कि उस की कालेज की तमाम लड़कियों से तो दोस्ती हो ही गई थी, काल सेंटर में साथ काम करने वाली लडकियों से भी दोस्ती हो गई थी. इन लड़कियों से अकसर वह फोन पर बातें करता रहता था.

कविता ने लिखी खूनी कविता

कविता ने लिखी खूनी कविता – भाग 3

कविता अकसर दीपचंद को अपने से दूर रखती थी. इस से दीपचंद का संदेह और पुख्ता हो गया था. वह कविता पर दबाव बनाने लगा कि वह बृजेश से मेलजोल बंद कर दे और न ही उस से फोन पर बात करे. बृजेश को ले कर उस का कविता से विवाद भी होने लगा था.

इस कहासुनी में वह कभीकभी कविता की पिटाई भी कर देता था. यहां तक कि दीपचंद ने पत्नी कविता को खर्च के लिए पैसे देने भी बंद कर दिए तो कविता को समझ आ गया था कि अब पति के जिंदा रहते वह बृजेश से अपने संबंधों को जारी नहीं रख पाएगी.

बृजेश भी कविता के प्यार में इतना पागल हो चुका था कि उसे कविता से मिले बगैर चैन नहीं मिलता. कविता के मन में हरदम यही विचार आता था कि वह पति को रास्ते से हटा दे और उस के बाद बृजेश के साथ इसी तरह नाजायज संबंध बनाए रखेगी. इस से उस के ससुर की जमीनजायदाद में भी उस का हिस्सा बना रहेगा और प्रेमी की बाहों का झूला भी उसे मिलता रहेगा. यहीं से कविता ने बृजेश के साथ मिल कर पति को रास्ते से हटाने की साजिश रची.

प्रेमी के लिए मिटाया सिंदूर

जब कविता पति की हत्या के लिए तैयार हो गई तो बृजेश ने अपने साथ टेंटहाउस में साथ काम करने वाले दोस्त गणेश विश्वकर्मा को साजिश में शामिल कर लिया. उस ने गणेश को दोस्ती का वास्ता दे कर रुपए देने का लालच दिया.

योजना के मुताबिक कविता इस बीच मायके चली गई, जिस से दीपचंद के अचानक लापता होने पर संदेह न हो. हत्या के लिए 19 जुलाई, 2023 की तारीख तय की गई. उस दिन दीपचंद ने काम से छुट्टी ले रखी थी, यह बात कविता ने दीपचंद को फोन कर के तसल्ली भी कर ली थी कि वह घर पर ही है. इस के बाद उस ने बृजेश को फोन कर दीपचंद की लोकेशन बता दी.

बृजेश ने पन्ना जिले के अमानगंज निवासी बिट्टू दुबे की चार पहिया गाड़ी एमपी20 सीई 6749 किराए पर ले ली. इस के बाद वह सुनवानी से गणेश विश्वकर्मा को साथ ले कर खैरा गांव पहुंचा. वहां दीपचंद को फोन कर घर के बाहर मिलने बुलाया. फिर पार्टी के बहाने दीपचंद को साथ ले कर वर्धा होते हुए खजरूट स्थित पेट्रोल पंप के पास पहुंचे. वहां एक गुमटी से सिगरेट, पानी और नमकीन के पैकेट लिए. बृजेश ने शराब पहले ही खरीद ली थी. रास्ते में एक जगह रुक कर तीनों ने शराब पी.

बृजेश और गणेश ने दीपचंद को ज्यादा शराब पिलाई. दीपचंद जल्दी ही शराब के नशे में धुत हो गया. इस के बाद बृजेश ने गाड़ी पंडवन पुल के पास बने मंदिर की ओर मोड़ दी. कल्लू ने मंदिर के पास गाड़ी रोक कर दीपचंद को गाड़ी से उतारा. इस के बाद गणेश और बृजेश ने दीपचंद को जमीन पर पटक दिया और उस का गला दबा दिया. इस से दीपचंद बेहोश हो गया.

दीपचंद के बेहोश होने के बाद बृजेश बर्मन उर्फ कल्लू ने गाड़ी में रखी लाठी उठाई और सिर पर तब तक वार किए, जब तक वह मर नहीं गया. इस के बाद उस के लोअर से मोबाइल और पर्स निकाल लिए. पर्स में करीब 700 रुपए थे, जो बृजेश ने रख लिए और पर्स और चप्पलें झाड़ी में फेंक दीं.

पुलिस ने बरामद किए अहम सबूत

इस के बाद बृजेश बर्मन और गणेश विश्वकर्मा ने दीपचंद की लाश को गाड़ी नंबर एमपी20 सीई6749 में डाल कर पंडवन की केन नदी में ले जा कर बहा दिया. दीपचंद का मोबाइल और घटना में प्रयुक्त खून से सना डंडा भी नदी में फेंक दिया. तब तक रात के साढ़े 10 बज चुके थे.

दोनों ने गाड़ी में लगे खून को साफ किया और रात में ही गाड़ी उस के मालिक बिट्टू दुबे को सौंप कर अपने अपने घर आ गए. 3 दिन बाद जब दीपचंद के लापता होने की खबर फैली तो बृजेश भी दिलासा देने उस के घर गया, जिस से किसी को उस पर शक न हो.

आरोपियों ने खजरूट की जिस दुकान से शराब व सिगरेट खरीदी थी, पुलिस ने उस दुकान मालिक वीरभान सिंह से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस दिन बृजेश बर्मन व गणेश विश्वकर्मा गाड़ी से आए थे और शराब व सिगरेट खरीदी थी. वीरभान ने यह भी बताया कि ड्राइवर वाली सीट पर बृजेश बर्मन बैठा था, बगल वाली सीट पर दीपचंद बैठा था.

बृजेश बर्मन और गणेश विश्वकर्मा पन्ना के सुनवानी के जिस टेंटहाउस में काम करते थे, उस के मालिक कमलेश विश्वकर्मा से भी पुलिस टीम ने पूछताछ की तो कमलेश ने बताया कि 21 अगस्त को जब गैसाबाद की पुलिस जांच करने सुनवानी आई थी, उस रात गणेश ने शराब के नशे में बृजेश बर्मन के साथ मिल कर दीपचंद की हत्या की बात बताई थी.

टीआई विकास सिंह चौहान ने बृजेश और गणेश की निशानदेही पर झाड़ियों में छिपाई चप्पलें और खाली पर्स जब्त कर लिया. इस के अलावा घटना में प्रयुक्त बिट्टू दुबे की गाड़ी भी जब्त कर ली. जहां दीपचंद का शव फेंका गया, वह जगह पन्ना जिले में आती है. केन नदी पन्ना जिले की सब से बड़ी नदी है और इस में बड़ी संख्या में मगरमच्छ भी रहते हैं.

इस से यह आशंका भी व्यक्त की जा रही थी कि नदी में बहाए गए शव को मगरमच्छों ने अपना ग्रास न बना लिया हो. स्थानीय पुलिस और एसडीआरएफ के सहयोग से केन नदी में दीपचंद की लाश की सर्चिंग करवाई, लेकिन लाश बरामद नहीं हो सकी.

25 अगस्त, 2023 को गैसाबाद पुलिस ने हत्या, साक्ष्य छिपाने और साजिश रचने का मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया, जहां से उन्हें दमोह जेल भेज दिया गया.

दीपचंद की हत्या को एक माह से अधिक समय हो गया था, मगर दीपचंद का शव बरामद नहीं हुआ था. इसे ले कर दीपचंद के परिवार और रिश्तेदारों ने पुलिस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था. एसडीआरएफ की टीमें केन नदी में लगातार शव तलाश रही थीं, परंतु सफलता नहीं मिल रही थी. एक माह के दौरान नदी में बाढ़ भी आ चुकी थी, इस से यह अनुमान लगाया जा रहा था कि शव कहीं दूर निकल गया हो. दमोह जिले के एसपी और एसडीओपी नितिन पटेल लगातार पुलिस टीमों को खोजबीन के लिए भेज रहे थे.

30 अगस्त, 2023 को गैसाबाद पुलिस को सूचना मिली कि अमानगंज थाने के जिज गांव के नाले के पास एक क्षतविक्षत शव के अवशेष पड़े हुए हैं. सूचना पर पहुंची पुलिस टीम को केन नदी और एक नाले के बीच बने टापू पर देर रात शव के अवशेष बरामद हुए.

शिनाख्त के लिए एसडीओपी (हटा) नीतेश पटेल के निर्देश पर गैसाबाद थाना पुलिस टीम मौके पर दीपचंद के पिता हाकम को ले कर पहुंची. हाकम ने हाथ में बंधे रक्षासूत्र और उस के पहने हुए कपड़ों से उस की शिनाख्त अपने बेटे दीपचंद पटेल के रूप में की.

पुलिस ने शव को बरामद कर पंचनामा और पोस्टमार्टम की काररवाई कर शव के अवशेष डीएनए टेस्ट के लिए सुरक्षित करने के बाद वह परिजनों के सुपुर्द कर दिया.

एसपी सुनील तिवारी ने शव की खोजबीन में लगे पुलिसकर्मियों और एसडीआरएफ टीम के प्रयासों की सराहना की. कविता पटेल ने एक गलती से अपनी मांग का सिंदूर पोंछ कर अपनी बसी बसाई घरगृहस्थी उजाड़ ली और जेल की हवा खानी पड़ी.

कविता ने लिखी खूनी कविता – भाग 2

शादी के पहले के प्रेमी से जोड़े संबंध

शादी के बाद दीपचंद जैसा पति और हाकम जैसा नेकदिल ससुर पा कर कविता भी काफी खुश थी, उस ने ससुराल को ही अपना घर मान लिया था. कविता के मम्मीपापा राजस्थान के जोधपुर में एक सीमेंट फैक्टी में काम करते थे.

दीपचंद का मन खेतीबाड़ी में नहीं लगता था. इस वजह से वह उन दिनों काम की तलाश कर रहा था. जब कविता के पिता ने उसे जोधपुर में काम दिलाने की बात की तो वह शादी के कुछ महीनों बाद ही राजस्थान पहुंच गया. दीपचंद तब राजस्थान की एक सीमेंट फैक्ट्री में नौकरी पर चला गया.

घर में अकेली कविता को तन्हाई ने डस लिया. उस के मन के एक कोने में अब भी अपने बचपन के प्यार बृजेश बर्मन उर्फ कल्लू की यादें थीं. जब अकेलापन भारी पड़ने लगा तो उस ने बृजेश से फिर तार जोड़ लिए. कविता का मायका सुनवानी पन्ना में था, वह पहले शराब कंपनी में काम करता था. तब कविता के पापा के घर में ही किराए पर रहता था.

कविता ने बीएससी तक की पढ़ाई की थी और वह शुरू से ही सपनों की दुनिया में सैर करने वाली लड़की थी. बृजेश तब शराब कंपनी में काम कर के अच्छे पैसे कमा रहा था. उसे कविता पहली ही नजर में पसंद आ गई थी. वह आतेजाते कविता से बात करने के बहाने ढूंढता. उस समय कविता की उम्र महज 19 साल थी.

एक दिन बृजेश शाम को जल्दी अपने रूम पर आ गया. उस समय कविता की मां मंदिर गई थीं और पिता किसी काम से बाहर गए हुए थे. बृजेश ने मौका देखते ही अपने प्यार का इजहार करते हुए कहा, “कविता, तुम बहुत खूबसूरत हो. आई लव यू कविता.’’

कविता भी मन ही मन बृजेश को चाहने लगी थी, मगर डर के मारे यह बात दिल में दबाए बैठी थी. जब बृजेश ने प्यार का इजहार किया तो उस ने भी कह दिया, “आई लव यू टू बृजेश.’’

कविता की स्वीकृति मिलते ही बृजेश ने उस का हाथ पकड़ा और गालों पर चुंबन लेते हुए कहा, “कविता, मैं तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं रह सकता.’’

कविता का चेहरा मारे शर्म के लाल हो गया, उस ने जल्दी से अपना हाथ छुड़ाया और अपने कमरे की तरफ भाग गई. धीरेधीरे दोनों में गहरी दोस्ती और फिर प्यार परवान चढ़ने लगा. बृजेश अकसर कविता के लिए महंगे गिफ्ट भी ला कर देने लगा.

कविता पटेल और बृजेश बर्मन अलगअलग जाति के थे. दोनों शादी के लिए राजी थे, मगर सामाजिक रीतिरिवाजों में इस की इजाजत नहीं थी. बृजेश उसे घर से भगा कर शादी करना चाहता था, लेकिन कविता घर से भाग कर शादी करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई. आखिर में मई, 2021 में कविता की शादी उस के घर वालों ने दमोह जिले के खैरा गांव निवासी दीपचंद से कर दी.

किराएदार से हुआ था प्यार

23 साल की कविता की शादी दीपचंद पटेल से हुई थी. उस समय कविता हायर सेकेंडरी तक पढ़ी थी. जब उस ने अपने ससुर से आगे पढ़ने की इच्छा जताई तो उन्होंने उस का एडमिशन पन्ना के अमानगंज कालेज में करवा दिया. शादी से पहले कविता का उस के मकान में रहने वाले किराएदार बृजेश बर्मन उर्फ कल्लू से अफेयर जरूर था, मगर दोनों की जाति अलग होने की वजह से उन की शादी नहीं हो पाई.

शादी के बाद सब ठीकठाक चल रहा था. कविता के ससुर उसे बेटी की तरह प्रेम करते थे. शादी के बाद कविता अपने प्रेमी बृजेश को भी भुला चुकी थी. कविता के पति की नौकरी राजस्थान की सीमेंट फैक्ट्री में थी. शादी के कुछ दिन बाद दीपचंद वापस नौकरी पर लौट गया तो कविता को खाली घर काटने लगा.

एक दिन वह मोबाइल के कौंटैक्ट नंबर देख रही थी, तभी उसे बृजेश का नंबर दिखा. उसे पुराने दिन याद आने लगे. वह बृजेश से बात करने की कोशिश तो करती, लेकिन कुछ सोच कर रुक जाती थी. आखिरकार एक दिन उस ने बृजेश से बात करने की गरज से फोन किया तो बृजेश ने काल रिसीव करते हुए कहा, “हैलो कौन?’’

“बृजेश, पहचाना नहीं मुझे. तुम तो बहुत बदल गए, अब तो मेरी आवाज भी भूल गए.’’ कविता ने शिकायत की.

“जानेमन तुम्हें कैसे भूल सकता हूं. इस अननोन नंबर से काल आई तो पहचान नहीं सका.’’ बृजेश सफाई देते हुए बोला.

“तुम ने तो मेरी शादी के बाद कभी काल भी नहीं की,’’ कविता बोली.

“कविता, मैं तुम्हें दिल से चाहता था, इसलिए मैं तुम्हारा बसा हुआ घर नहीं उजाड़ना चाहता था. मैं ने अपने दिल पर पत्थर रख कर तुम्हारी खुशियों की खातिर समझौता कर लिया था,’’ बृजेश बोला.

“सच में इतना प्यार करते हो तो मुझ से मिलने दमोह आ जाओ, तुम्हारी जुदाई बरदाश्त नहीं हो रही.’’ कविता ने फिर से उस के प्रति चाहत दिखाते हुए कहा.

कई महीने बाद बृजेश और कविता ने अपने दिल की बातें कीं तो उन का पुराना प्यार जाग गया. उस के बाद दोनों की मेल मुलाकात का सिलसिला चल निकला. बृजेश से जब कविता का दोबारा संपर्क हुआ तो उस समय वह टेंट हाउस में काम करने लगा था. कविता से उस की मुलाकात अकसर कालेज जाते समय होती थी. जब बृजेश कविता की ससुराल भी आने लगा तो कविता ने अपने ससुर और पति से उस का परिचय मुंहबोले भाई के तौर पर कराया.

बृजेश ने दीपचंद से भी दोस्ती कर ली थी. दीपचंद खाने पीने का शौकीन था, इसलिए अकसर ही दीपचंद की बैठक बृजेश के साथ होने लगी. दीपचंद और उस के पिता हाकम को यह शक तक नहीं हुआ कि वह यहां कविता के लिए आता है.

दीपचंद को उस की गैरमौजूदगी में जब बृजेश के कुछ अधिक ही घर आने की खबर मिलने लगी तो उसे संदेह हुआ. फिर दीपचंद राजस्थान से नौकरी छोड़ कर लौट आया. वह पन्ना की सीमेंट फैक्ट्री में काम पर लग गया. वह अपने गांव खैरा के घर से ही ड्यूटी आनेजाने लगा. दीपचंद के लौटने के बाद दोनों का मिलना मुश्किल हो गया था.

धीरेधीरे दीपचंद को पत्नी कविता और बृजेश के संबंधों की भनक लग चुकी थी. हालांकि दोनों ने अपने संबंधों को दीपचंद के सामने स्वीकार नहीं किया. कविता हमेशा बृजेश को मुंहबोला भाई ही बताती रही. शादी के 2 साल बाद भी उन के संतान नहीं हुई थी.

कविता ने लिखी खूनी कविता – भाग 1

एक दिन कविता पटेल मोबाइल के कौंटैक्ट नंबर देख रही थी, तभी उसे शादी से पहले के प्रेमी बृजेश का नंबर दिखा. नंबर देखते ही उसे पुराने दिन याद आने लगे. वह बृजेश से बात करने की कोशिश तो करती, लेकिन कुछ सोच कर रुक जाती थी.

आखिरकार एक दिन उस ने बृजेश से बात करने की गरज से फोन किया तो बृजेश बर्मन ने काल रिसीव करते हुए कहा, “हैलो कौन?’’

“बृजेश, पहचाना नहीं मुझे. तुम तो बहुत जल्दी बदल गए, अब तो मेरी आवाज भी भूल गए.’’ कविता ने शिकायती लहजे में कहा.

“जानेमन तुम्हें कैसे भूल सकता हूं. इस अननोन नंबर से काल आई तो पहचान नहीं सका.’’ बृजेश सफाई देते हुए बोला.

“तुम ने तो मेरी शादी के बाद कभी काल भी नहीं की,’’ कविता बोली.

“कविता, मैं तुम्हें दिल से चाहता था, इसलिए मैं तुम्हारा बसा हुआ घर नहीं उजाड़ना चाहता था. मैं ने अपने दिल पर पत्थर रख कर तुम्हारी खुशियों की खातिर समझौता कर लिया था,’’ बृजेश बोला.

“सचमुच इतना प्यार करते हो तो मुझ से मिलने दमोह आ जाओ, मुझ से तुम्हारी जुदाई बरदाश्त नहीं हो रही.’’ कविता ने फिर से उस के प्रति चाहत दिखाते हुए कहा.

इतना सुनते ही बृजेश का दिल बागबाग हो गया. फिर एक दिन वह कविता से मिलने उस की ससुराल पहुंच गया. कई महीने बाद बृजेश और कविता ने अपने दिल की बातें कीं तो उन का पुराना प्यार जाग गया. उस के बाद दोनों की मेलमुलाकात का सिलसिला चल निकला. बृजेश से जब कविता का दोबारा संपर्क हुआ तो उस समय वह टेंट हाउस में काम करने लगा था. कविता से उस की मुलाकात अकसर कालेज जाते समय होती थी.

प्रेमी को बताती थी मुंहबोला भाई

जब बृजेश कविता की ससुराल भी आने लगा तो कविता ने अपने ससुर और पति से उस का परिचय मुंहबोले भाई के तौर पर कराया. वैसे तो कविता को दीपचंद जैसा नेक पति मिल गया था, परंतु पति के शादी के बाद नौकरी के लिए चले जाने से कविता का पुराना प्यार जाग गया था.

दीपचंद को जब कविता और बृजेश के प्रेम संबंधों का पता चला तो हंसते खेलते परिवार में कलह होते देर न लगी. लाख समझाने के बाद भी जब कविता नहीं मानी तो दीपचंद ने कविता पर सख्त पहरा लगा दिया. इस का अंजाम यह हुआ कि कविता के कहने पर बृजेश ने कविता की मांग का सिंदूर मिटा दिया.

22 जुलाई, 2023 दोपहर के करीब 2 बज रहे थे. मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल के दमोह जिले के गैसाबाद थाने में टीआई विकास सिंह चौहान अपने कक्ष में बैठे कुछ जरूरी फाइल देख रहे थे. तभी अधेड़ उम्र के एक व्यक्ति ने उन के कक्ष के बाहर से आवाज लगाई, “साब, क्या मैं अंदर आ सकता हूं?’’

टीआई चौहान ने एक नजर सामने खड़े उस व्यक्ति पर डालते हुए कहा, “हां, आ जाइए. बैठिए.’’

जब वह व्यक्ति कुरसी पर बैठ गया तो उन्होंने पूछा, “बताइए, क्या काम है?’’

“साहब, मेरा नाम हाकम पटेल है और मैं खैरा गांव का रहने वाला हूं. मेरा बेटा पिछले 3 दिनों से लापता है.’’

टीआई विकास सिंह चौहान ने एक कर्मचारी को पानी लाने का इशारा करते हुए हाकम पटेल से कहा, “आप इत्मीनान से मुझे पूरी बात विस्तार से बताइए.’’

“जी साहब, 19 जुलाई, 2023 की शाम 7 बजे मेरा 26 साल का इकलौता बेटा दीपचंद पटेल घर से निकला था. तब से उस का कुछ पता नहीं चल रहा है. उस का मोबाइल भी बंद आ रहा है.’’ यह कहते हुए हाकम ने कर्मचारी के हाथ से पानी का गिलास ले लिया.

“शादी हो गई बेटे की?’’ टीआई चौहान ने पूछा.

“हां साहब, 2021 में उस की शादी हो गई. बेटेबहू में किसी तरह का कोई मनमुटाव भी नहीं था.’’ गटागट पानी पीने के बाद हाकम ने बताया.

“किसी पर शक है तुम्हें, किसी से कोई रंजिश तो नहीं थी?’’

“नहीं साहब, हमारी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी, इसलिए किसी पर शक भी नहीं है.’’

दीपचंद की गुमशुदगी दर्ज कराते हुए टीआई चौहान ने हाकम को भरोसा दिलाया कि पुलिस जल्द ही उस के बेटे दीपचंद को खोज निकालेगी. दीपचंद के लापता होने की खबर उस के ससुराल दमोह से सटे हुए पन्ना तक पहुंची तो दीपचंद के ससुर और साले के साथ कुछ नातेरिश्तेदार भी दमोह पहुंच गए. वे हाकम के साथ मिल कर दामाद की तलाश में जुट गए.

जैसेजैसे दिन बीत रहे थे, टीआई विकास सिंह चौहान को दीपचंद के बिना वजह लापता होने की बात खटक रही थी. दमोह जिले के एसपी सुनील तिवारी के निर्देश पर एसडीओपी (हटा) नितिन पटेल ने दीपचंद की खोजबीन के लिए एक पुलिस टीम गठित कर टीआई चौहान को पतासाजी करने के निर्देश दिए.

हाकम पटेल अपनी करीब 8-10 एकड़ जमीन पर खेतीबाड़ी करते हैं. हाकम ने 2 शादियां की थीं. पहली पत्नी से कोई बच्चा नहीं हुआ और कुछ समय बाद बीमारी के चलते उस की मौत हो गई तो हाकम ने दूसरी शादी कर ली तो दूसरी पत्नी से दीपचंद पैदा हुआ.

दीपचंद जब छोटा ही था कि उस की मां घर छोड़ कर किसी दूसरे मर्द के साथ चली गई. पिता हाकम ने दीपचंद को लाड़प्यार से पालापोसा. दीपचंद केवल 12वीं कक्षा तक ही पढ़ाई कर पाया था. जवान होते ही दीपचंद की शादी पन्ना जिले के सुनवानी गांव की कविता से कर दी गई.

कविता के कदम दीपचंद के घर में पड़ते ही बाप बेटे काफी खुश थे, क्योंकि लंबे अरसे बाद घर में कोई महिला आई थी. दोनों चूल्हा फूंकफूंक कर थक चुके थे, ऐसे में कविता ने जब इस घर की दहलीज पर कदम रखा तो जल्द ही वह दोनों की आंखों का तारा हो गई. ससुर हाकम उसे बेटी की तरह दुलारते तो दीपचंद भी उस की हर ख्वाहिश पूरी करता.

पुलिस के लिए दीपचंद की गुमशुदगी एक पहेली बनी हुई थी. दीपचंद की न तो किसी से रंजिश थी और न ही कोई दुश्मनी. गांव में पूछताछ के दौरान भी कोई सुराग पुलिस के हाथ नहीं लगा, जिस से दीपचंद का पता चल सके. पुलिस की आखिरी उम्मीद दीपचंद की काल डिटेल्स रिपोर्ट पर टिकी हुई थी.

पुलिस ने जब दीपचंद के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि दीपचंद की 19 जुलाई की शाम आखिरी बार पन्ना के लोहरा गांव में रहने वाले बृजेश बर्मन उर्फ कल्लू से बात हुई थी. इस के बाद पुलिस ने बृजेश बर्मन के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि बृजेश की सब से ज्यादा बात चिकला निवासी गणेश विश्वकर्मा से हुई थी. दीपचंद समेत तीनों के फोन नंबर भी टावर लोकेशन में एक साथ खैरा गांव में मिले. इस से साफ हो गया था कि घर से दीपचंद इन दोनों के साथ ही निकला था.

दीपचंद का मोबाइल बंद होने से पहले की आखिरी टावर लोकेशन गांव वर्धा की थी. इसी टावर लोकेशन में गणेश विश्वकर्मा व बृजेश बर्मन के मोबाइल फोन भी बंद हो गए थे. यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम को पूरा भरोसा हो गया कि दीपचंद के लापता होने के बारे में इन दोनों को जरूर कुछ पता होगा.

पुलिस टीम के लिए एक चौंकाने वाली बात यह पता चली कि बृजेश बर्मन उर्फ कल्लू की काल डिटेल्स में दीपचंद की पत्नी कविता का नंबर भी मिला. 19 जुलाई, 2023 को भी बृजेश और कविता के बीच बातचीत हुई थी. इस के पहले भी दोनों के बीच लगातार बात होने की पुष्टि हुई.

पुलिस ने बृजेश बर्मन और फिर गणेश विश्वकर्मा को हिरासत में ले कर पूछताछ की. पहले तो बृजेश ने यह कह कर पुलिस को बरगलाने की कोशिश की कि वह कविता को बहुत पहले से जानता है वह उस के मायके में किराए पर रह चुका है. इसी जानपहचान के चलते कविता से बात करता रहता था. पुलिस को उस की बात पर भरोसा नहीं हुआ. पुलिस के संदेह की सुई बृजेश के इर्दगिर्द घूम रही थी.

पुलिस ने तुक्का मारते हुए बृजेश से कहा, “कविता ने सब कुछ बता दिया है, अब तुम्हारी बारी है. सच बताओगे तो ठीक नहीं तो दूसरा ही तरीका अपनाना पड़ेगा.’’

आखिरकार, तीर निशाने पर लगा और पुलिस की सख्ती के आगे बृजेश बर्मन टूट गया. बृजेश ने दीपचंद की हत्या की पूरी साजिश और हत्या की जो कहानी सुनाई, वह पुराने प्रेम संबंधों की कहानी निकली, जिस में अपने प्रेमी के लिए कविता ने अपनी मांग का सिंदूर ही मिटा दिया. बहू की यह करतूत जान कर दीपचंद के पिता हाकम पटेल के पैरों से तो जैसे जमीन ही खिसक गई.

जहां मां बाप ही करते हैं बेटियों का सौदा

छिप कर की जाने वाली जिस्मफरोशी भले ही अंधेरे में होती हो, लेकिन इस धंधे में उतारी गई लड़कियों की सौदेबाजी खुलेआम होती है. हैरानी तो इस बात की है कि मासूम बच्चियों की बोलियां लगाने वाले उस के परिवार के अपने ही लोग होते हैं. कहीं मां तो कहीं भाई या फिर कहीं दूसरे करीबी चाचा मामा, यहां तक कि बाप भी उस की कीमत तय कर बेटी को सैक्स के बाजार में ढकेल देते हैं. ऐसा मध्य प्रदेश और राजस्थान के जिन इलाके में होता है, उस का चौंकाने वाला खुलासा एक स्टिंग आपरेशन के जरिए हुआ…

दिल्ली के एक बड़े मीडिया हाउस का एक रिपोर्टर खास रिपोर्टिंग के लिए खाक छानता हुआ राजस्थान के एक गांव के बौर्डर पर जा पहुंचा था. धुंधलका गहराने में अभी कुछ वक्त था. उस की एक व्यक्ति से मुलाकात हुई. उस ने अपना नाम लाखन बताया. रिपोर्टर से उस के बारे में पूछा.

गांव आने का कारण पूछा, हालांकि रिपोर्टर ने अपनी असली पहचान और आने का सही कारण बताने के बजाए कुछ और ही बताया. जब वह व्यक्ति उस की बातों से संतुष्ट हुआ, तब उस ने खुद को पास के गांव का निवासी बताया और यह भी आश्वासन दिया कि उस के मकसद को वही पूरा कर सकता है.

फिर दोनों के बीच औपचारिक बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया, “आप को लड़कियां चाहिए? हां, भेज देंगे. बहुत सारी लड़कियां हैं गांव में. कम से कम 50 से 60 लड़किया हैं.”

बातूनी लाखन बोला.

“अरे उतनी का क्या करना है, सिर्फ 2-4. उन की कितनी उम्र होगी?” रिपोर्टर ने झिझकते हुए पूछा.

“कम से कम 14 साल या 15 साल,” लाखन बोला.

रिपोर्टर हामी भरता हुआ बोला, “ठीक है.”

“अभी चल सकते हैं, लड़कियां दिखा दूंगा… जो पसंद आए बता देना. लडक़ी के मांबाप से बात कर लेंगे.”

“ठीक है, चलो मिलवाओ उन से. लेकिन यह बताओ कि आप लोग जब लड़कियों को भेजते हो तो लिखापढ़ी में क्या लिखते हो?” रिपोर्टर ने पूछा.

“जी, लिखापढ़ी पूरी सही करते हैं. हम यहां लिखते हैं कि लड़कियों को नाचनेगाने के लिए होटल में भेजा जा रहा है,” लाखन बोला.

“लेकिन ऐसा क्यों?” रिपोर्टर ने पूछा.

“अरे साहब जी, आप नहीं समझते. यही तो हमारी कलाकारी है. ऐसा बताना तो अपना बहाना है. अगर कोई पुलिस वाला देख ले या उसे शक हो जाए तो ऐसा बोलते हैं.” लाखन ने समझाया.

“अच्छा! बड़े समझदार हो और होशियार भी.” रिपोर्टर ने आश्चर्य जताया.

“लड़कियों को जबरदस्ती थोड़े ही भेज रहे हैं. उन के मांबाप से राय लेंगे. उन के मांबाप को पैसे देंगे. कोई ऐसे ही लड़कियों को उठा के थोड़े ही भेज देंगे कहीं भी.”

“तो लड़कियों को भेजने के लिए एग्रीमेंट क्या लडक़ी के मांबाप करेंगे?” रिपोर्टर पूछा.

“हां, लडक़ी के मांबाप ही करेंगे,” लाखन बोला.

बिचौलिए करा देते हैं लड़कियों का सौदा

इस तरह से बिचौलिया लाखन और ग्राहक बने रिपोर्टर के बीच लड़कियों की सौदेबाजी की बुनियादी शुरुआत हो गई. लाखन ने कथित ग्राहक को आश्वासन दिया कि वह सब कुछ बहुत आसानी से करवा देगा. कहीं कोई मुश्किल नहीं आएगी. कौन्ट्रैक्ट के नाम पर खानापूर्ति भी पूरी करवा देगा. सब से बड़ी बात कि लड़कियां अपनी मरजी से साथ जाएंगी या फिर उस के बताई जगह पर पहुंचा दी जाएंगी.

यह सब राजस्थान के बूंदी जिले के एक गांव रामनगर में हुआ था, जहां हर तरफ गरीबी का आलम साफ नजर आ रहा था. रिपोर्टर को इतना तो अहसास हो ही गया था कि गांव के लोग चंद रुपयों की खातिर अपनी बेटियों को बेचने को तैयार हो जाते हैं. उस के साथ सौदेबाजी की पहल करने वाला गांव में लाखन गरीब परिवारों का बिचौलिया है.

बिचौलिया लाखन ने बताया कि वह लड़कियों की सौदेबाजी तय होने के बाद कैसे लड़कियों को काफी आसानी से ठिकाने पर पहुंचा देगा. सारा काम बहुत आसानी से चुटकी बजाते हुए ऐसे करवा देगा कि किसी को कानोकान खबर तक नहीं होगी, पुलिस को भनक लगनी तो दूर की बात है.

ग्राहक और खुद के बचाव के कौन्ट्रैक्ट की खानापूर्ति भी हो जाएगी. उन्हें यह बताया जाएगा कि लड़कियों को होटल में नाचगाने के लिए भेजा गया है. यह सब जान कर रिपोर्टर को बेहद हैरानी हुई. उसे मालूम हुआ कि बिचौलिए लड़कियों से वेश्यावृत्ति कराने के लिए कैसे आंखों में धूल झोंकते हैं. यही नहीं, बाकायदा बेटियों को बेचने के लिए मांबाप कौन्ट्रैक्ट करते हैं.

दरअसल, एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल ने पिछले दिनों मानव तसकरी की जमीनी हकीकत जानने के लिए इनवैस्टिगेशन टीम बनाई थी. टीम पहले राजस्थान के 3 गांवों में गई थी. उन्होंने स्टिंग औपरेशन किया. उन्होंने जिस्मफरोशी के लिए बेटियों से की जाने वाली सौदेबाजी को अपने कैमरे में रिकौर्ड किया था. उस से पता चला कि राजस्थान के उन गांवों में बेटियों की बोलियां लगाई जा रही हैं.

इन की जम कर सौदेबाजी हो रही है और वहां एक तरह से बेटियों का बाजार बन चुका है, जिन में बिचौलियों की भी भरमार हो चुकी है. टीम द्वारा नाबालिग लड़कियों की तसकरी और वेश्यावृत्ति का सच उजागर होने के क्रम में कई तरह के खुलासे हुए. इस में रिश्ते नाते और समाज का एक बदसूरत चेहरा भी उजागर हो गया.

मालूम हुआ कि बेटियों की बोली लगाने वालों में कहीं मां, कहीं चाचा, कहीं भाई तो कहीं दूसरे करीबी रिश्तेदार हैं. बिचौलिए राजस्थान के बूंदी जिले के अंतर्गत एक गांव रामनगर के बारे में बताया कि वहां 50-60 लड़कियां बेचे जाने को तैयार हैं.

परिवार के लोग भी तैयार हुए नाबालिग का सौदा करने को

मीडिया की जांच टीम को बिचौलिए ने नाबालिग लड़कियों के रिश्तेदारों से भी बातचीत करवाई. उन में लडक़े की मां, चाचा, बुआ और भाई तक थे. इन्हीं में भतीजी को बेचने के लिए सौदेबाजी कर रहे चाचा ने अपना नाम जितेंद्र बताया. साथ ही उस ने रिपोर्टर को 2 नाबालिग लड़कियां दिखाईं. उस ने बताया कि एक नाबालिग लडक़ी की कीमत 6 से 7 लाख रुपए है और इसी के साथ उस ने एक साल के कौन्ट्रैक्ट की बात की.

“लडक़ी की उम्र क्या होगी?” ग्राहक बन रिपोर्टर ने जितेंद्र से पहला सवाल पूछा.

“15-16 साल,” जितेंद्र की जगह लाखन तुरंत बोला.

“उम्र कम नहीं है? कानूनी बाधा आई तो…” रिपोर्टर ने फिर सवाल किया.

इस बार जवाब जितेंद्र ने दिया, “कोई दिक्कत की बात नहीं है, अदालत से नोटरी करवा लेना. एक साल के लिए रख लो… लेकिन हां, पैसे 6 से 7 लाख देने होंगे.”

“ऐं! 6 से 7 लाख रुपए. लडक़ी एक साल बाद वापस भी आ जाएगी.” रिपोर्टर बोला.

“हांहां! और नहीं तो क्या? जैसे ही टाइम पूरा होगा, लडक़ी अपने घर आ गई. एक साल के बाद दूसरी लडक़ी खरीद देंगे, फिर हम पर विश्वास हो जाएगा, तब आप जितना बोलोगे, उतनी भिजवा देंगे.” जितेंद्र ने समझाते हुए रिपोर्टर को अपने विश्वास में ले लिया. इस तरह से उन के बीच बात पक्की हो गई. रिपोर्टर मिलने का समय तय कर चला गया और अपनी टीम से जा मिला.

3 लाख में बहन का सौदा करने को तैयार हुआ भाई

उस के बाद जांच टीम का अगला पड़ाव राजस्थान का ही सवाई माधोपुर था. वहां के अदलवाड़ा गांव में रिपोर्टर की मुलाकात किसी बिचौलिए या रिश्तेदार से नहीं, बल्कि लडक़ी के मांबाप से ही हो गई. वे अपनी एक नहीं, बल्कि दोनों बेटियों की बोली लगाने को तैयार बैठे थे. लडक़ी की मां तन्नो ने एक बेटी की कीमत 3 लाख रुपए लगाई, जो उन के पास में थी, जबकि दूसरी मुंबई में थी.

रिपोर्टर ने तन्नो से जब पूछा कि वह बेटियों के बदले में मिले पैसे का क्या करेगी, तब इस के जवाब में उस ने बताया कि बेटी को बेचना उस की मजबूरी है. उसे मकान बनवाना है. उस का मकान नहीं है, इसलिए बेच रही है.

मीडिया इनवैस्टीगेशन का सिलसिला यहीं नहीं रुका. वह राजस्थान के टोंक जिले के जयसिंह गांव भी गई. वहां उन्हें लडक़ी की बोली लगाने वाला उस का मामा मिला. लडक़ी नाबालिग थी, जबकि बाप की उम्र के मामा ने उस की बोली एक लाख 70 हजार रुपए लगा दी. उस ने भी एग्रीमेंट बनवा कर देने की बात कही.

जांच टीम को न केवल राजस्थान, बल्कि मध्य प्रदेश में भी कई परिवार अपनी बेटियों की सौदेबाजी करने वाले मिले. मध्य प्रदेश के ऐसे ही एक गांव बोरखेड़ी में रिपोर्टर को विजय नाम का युवक मिला, जो अपनी ही बहन की सौदेबाजी कर रहा था. उस की बहन मात्र 16 साल की थी. उस के बदले में उस ने 3 लाख रुपए मांगे.

इतना ज्यादा पैसा मांगे जाने को ले कर विजय ने बताया कि उस की बहन कोई नखरे नहीं करेगी, इसे चाहो तो एक दिन में 4 ग्राहकों के पास भेज दो या फिर किसी के पास ही पूरी रात के लिए भेज सकते हो. रिपोर्टर के लिए अपनी ही बहन के बारे में विजय द्वारा किया गया दावा बेहद हैरान करने वाला लगा, फिर भी उन्होंने पूछ लिया, “इस का एग्रीमेंट कैसे होगा?”

जवाब में विजय बोला, “स्टांप पेपर पर.”

“एग्रीमेंट पर साइन कौन करेगा?”

यह पूछे जाने पर विजय बोला, “एग्रीमेंट लडक़ी के नाम पर बनेगा, उस पर मैं साइन करूंगा. दूसरा साइन तुम्हारे नाम के साथ होगा.”

“एग्रीमेंट में क्या लिखा जाएगा?”

“उस में पैसा उधार लेने के बारे में लिखा जाएगा. पैसे चुकाने की शर्त लिखी होगी, लेकिन हां, याद रखना लडक़ी का चार्ज एक दिन के हिसाब से 10 हजार होगा.” विजय ने समझाया.

मध्य प्रदेश के बरदिया गांव में भी बेटियों को बेचने वाले लोग मिल गए. वहां के एक बिचौलिए ने तो अपने परिवार और रिश्तेदारों की कई लड़कियों की सौदेबाजी की बात कही. बबलू नाम के बिचौलिए ने रिपोर्टर को बताया कि उस के पास मौजूद लड़कियों की उम्र 15 के आसपास है. उन की संख्या भी 15 है, लेकिन उन में सिर्फ 5 ही सौदे के लिए तैयार हैं.

मध्य प्रदेश के ही रतलाम जिले में पिपलिया जोधा गांव की एक औरत किरण अपनी भतीजी की सौदेबाजी के लिए सामने आई. उस ने बताया कि उसे अपनी बहन की बेटी के लिए 2 लाख रुपए चाहिए. पूरा पेमेंट वही लेगी. उस के लिए कोई विरोध नहीं करेगा. न मांबाप और न ही कोई दूसरा करीबी रिश्तेदार. किरण ने बताया कि लडक़ी का एग्रीमेंट स्टांप पेपर पर होगा.

इस तरह की वेश्यावृति को बढ़ाने वाले मानव तस्करी को ले कर खबर आने के बाद संसद तक में सवाल उठे. राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने सवाल उठाए. इस तरह के मामले को ले कर पहले भी कलेक्टर के पास जा चुके हैं, लेकिन पिछले 4 साल में मामले और भी बढ़ गए हैं.

—संवाददाता

मानव तस्करी पर चिंता

सालोंसाल से चली आ रही मानव तस्करी में कमी आने के बजाय बढ़ती ही जा रही है, जबकि इसे रोकने के लिए कानून बने हैं. वैश्विक प्रयास किए जा रहे हैं और इस में शामिल यौन अपराधों की रोकथाम के लिए भी कई कानून हैं.

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी. लोकुर ने इसे ले कर चिंता जताई और कहा कि देश में मानव तस्करी के मामलों में ज्यादातर आरोपी बरी हो जाते हैं. जैसे 2020-2021 में 89 प्रतिशत का बरी हो जाना बेहद ही चिंता का विषय है. उन्होंने केरल न्यायिक अकादमी द्वारा मानव तस्करी विरोधी विषय पर आयोजित एकदिवसीय न्यायिक संगोष्ठी में कहा कि पिछले साल केरल में दर्ज किए गए 201 मामलों में से केवल एक को दोषी ठहराया गया.

पुलिस अकसर बड़ी संख्या में मानव तस्करी के मामलों को अपहरण और लापता व्यक्तियों के मामलों के रूप में गलत तरीके से रिपोर्ट कर देती है. कोई भी यह मानने को तैयार नहीं होता कि मानव तस्करी के मामले भी होते हैं. साइबर जगत में तो और भी प्रचलित हो गया है. इस से जबरन विवाह, बाल विवाह, बंधुआ मजदूरी और आर्थिक कारणों को बल मिला है.

इस बारे में आई 2022 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि मानव तस्करी के 2,189 मामले में 6,533 पीडि़त शामिल थे. उन में 4,062 महिलाएं और 2,877 नाबालिग थे.

मानव तस्करी में यौन शोषण, जबरन श्रम, घरेलू दासता, जबरन भीख मांगना, ऋण बंधन और बच्चों या किशोरों को उन की इच्छा के विरुद्ध सेवा करने के लिए मजबूर करना शामिल हैं. इस के व्यापक रूप के मूल कारणों को समझना महत्त्वपूर्ण है. वैसे इस का मुख्य कारण गरीबी, शिक्षा तक सीमित पहुंच, लैंगिक असमानता और बेरोजगारी है.

रोकने के कानून

मानव तस्करी के कई पहलू हैं. जैसे जालसाजी, जोरजबरदस्ती, धमकी, अवैध यात्राएं, अनैतिक भर्तियां, स्थानांतरण, आश्रय, घरेलू नौकरी, निजी सेवा, स्वागत आदि. इन का मुख्य उद्देश्य ही व्यक्तियों का शोषण करना होता है. यह शोषण वेश्यावृत्ति, अंग तस्करी , यौन शोषण, जबरन श्रम, गुलामी और दासता सहित विभिन्न रूपों में होता है.

कहने को तो यह मामला विश्व स्तर पर मौजूद है. जिस में अफ्रीका, मध्य एशिया और दक्षिण एशिया जैसे कुछ क्षेत्र विशेष रूप से प्रभावित हैं. भारत की स्थिति भी चिंताजनक है.

यूनिसेफ का अनुमान है कि हर साल दुनिया भर में लगभग 1.2 मिलियन बच्चों की तस्करी की जाती है और भारत इस का बड़ा स्रोत है. भारत में बाल तस्करी से सब से अधिक प्रभावित राज्यों में पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र शामिल हैं.

इस मुद्दे के समाधान के लिए कई अंतरराष्ट्रीय पहल की गई हैं. संयुक्त राष्ट्र वैश्विक पहल (यूएन जीआईएफटी: यूनाइटेड नेशंस ग्लोबल इनिशिएटिव टू फाइट ह्यूमन ट्रैफिकिंग) मानव तस्करी को रोकने के लिए बनाया गया है.

इसी तरह से बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र कनवेंशन (सीआरसी) की स्थापना 1989 में की गई थी. साल 2000 में भारत ने पलेर्मो प्रोटोकाल पर हस्ताक्षर किए थे, जिस में इस से निपटने में सहायता के लिए तसकरी की स्पष्ट परिभाषा बताई गई है.

भारत सरकार ने बाल तसकरी को संबोधित करने और बच्चों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए कई कानून और नियम बनाए हैं. वे हैं—

—अनैतिक तस्करी (रोकथाम) अधिनियम, 1956 (आईटीपीए): यह कानून व्यावसायिक यौन शोषण के उद्ïदेश्य से तस्करी  को अपराध मानता है और पीडि़तों के बचाव, पुनर्वास और स्वदेश वापसी का प्रावधान करता है.

—यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम, 2012: यह अधिनियम विशेष रूप से बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित है और जांच और परीक्षण के दौरान उन की सुरक्षा प्रदान करता है.

—यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम 2012: 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों के खिलाफ किए गए यौन अपराधों को संबोधित करता है, जिन्हें कानूनी तौर पर बच्चा माना जाता है.

—बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976: यह अधिनियम बंधुआ मजदूरी पर रोक लगाता है, जिसे अकसर बाल तस्करी से जोड़ा जाता है.

—किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015: यह अधिनियम बच्चों की देखभाल, सुरक्षा और पुनर्वास पर केंद्रित है, जिस में तस्करी की रोकथाम और नियंत्रण के प्रावधान भी शामिल हैं.

मानव तस्करी की शिकायत को गंभीरता से ले कर स्थानीय पुलिस थाने, प्रशासनिक अधिकारी जैसे कि स्थानीय सबडिवीजनल मजिस्ट्रैट (एसडीएम) या उपनिरीक्षक जनरल (स्क्कत्र) को की जा सकती है. अगर शिकायत गंभीर है और संबंधित राज्य की स्थिति में है तो शिकायत को राज्य सरकार के गृह (आंतरिक मामले) विभाग में भी दर्ज किया जा सकता है. ऐसी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा और उचित जांच की जाएगी.

खुद ही लिख डाली मौत की स्क्रिप्ट

खुद ही लिख डाली मौत की स्क्रिप्ट – भाग 3

परिवार के साथ बैठ कर बनाया प्लान

कल्लू ऐशोआराम पर बड़ी रकम खर्च करता था. यही कारण रहा कि उस पर कर्ज बढ़ता चला गया. जिन से कर्ज लिया था, वह आए दिन तगादा करने घर पर आते थे. इस वजह से कल्लू का घर से निकलना मुश्किल हो गया था.

कल्लू जब लिए गए कर्ज की मासिक किस्त नहीं भर पा रहा था तो प्राइवेट बैंक के लोन वसूली करने वाले कर्मचारी उसे मकान नीलाम करने की धमकी देने लगे थे. जिस बैंक से कल्लू ने कार लोन लिया था, वह भी कार खींच कर ले जाने की तैयारी में थे. कर्ज में कल्लू बुरी तरह डूब चुका था. आसपास रहने वाले लोगों की नजर में उस के ऐशोआराम की जिंदगी की पोल खुल गई. इन सब कारणों से अब कल्लू को कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था.

एक दिन उस ने अपनी पत्नी से कहा, “मुझ पर कर्ज बढ़ता ही जा रहा है, मेरे मन में एक विचार आ रहा है.”

“कैसा विचार? कुछ उलटापुलटा मत कर लेना. कामधंधा अच्छे से करो. पैसा आएगा तो धीरेधीरे कर्ज भी पटा देंगे.” प्रियंका ने उसे ढांढस बंधाते हुए कहा.

“नहीं प्रियंका, इतना कर्ज अब कामधंधा करने से नहीं चुकेगा. यदि किसी तरह मैं अपने आप को मरा हुआ साबित कर दूं तो कर्ज से मुक्ति मिल जाएगी और जो हम ने बीमा पौलिसी ले रखी हैं, उस से तुम्हें लाखों रुपए भी मिल जाएंगे.” कल्लू ने अपना प्लान समझाते हुए कहा.

कल्लू ने अपने इस प्लान की जानकारी साथ में रहने वाले छोटे भाई दीनदयाल को भी बताई तो उस ने भी सहमति दे दी. इस साजिश में उस की पत्नी और परिवार ने भी साथ देने का वादा किया. कल्लू ने खुद को मरा साबित करने के लिए टीवी पर कई क्राइम शो देखे और अपने प्लान को अंतिम रूप दिया.

13 अप्रैल, 2023 को कल्लू ने पत्नी प्रियंका, छोटे भाई दीनदयाल चढ़ार के साथ भोपाल के भानपुर स्थित अपने घर पर यह प्लान बनाया कि पत्नी और भाई पड़ोसियों को यह कह देंगे कि कल्लू की एक्सीडेंट में मौत हो गई है. इस के बाद कल्लू भानपुर भोपाल स्थित अपने घर से इंद्रपुरी स्थित एक होटल में गया और रूम ले लिया. पत्नी प्रियंका और छोटा भाई दीनदयाल भानपुर स्थित घर पर ही रुक गए.

मौका देख कर दोनों ने रोनापीटना शुरू कर दिया. जब पड़ोसियों ने उन से रोने का कारण पूछा तो बोल दिया कि कल्लू का विदिशा में एक्सीडेंट हो गया है और मौत हो गई है. उन्होंने पड़ोसियों को बताया कि हम गांव के लिए निकल रहे हैं. यहां से दोनों अपने गांव पहुंचे और गांव जा कर रहने लगे.

कल्लू ने मोबाइल सिम प्रियंका के मोबाइल में डाल दी और खुद नया नंबर ले लिया. जब कर्जदारों के फोन आए तो पत्नी ने उन्हें भी कल्लू की मौत की कहानी सुना दी.

दोस्त को बनाया बलि का बकरा

कल्लू ने खुद को मृत घोषित करने के लिए प्लान तो बना लिया, लेकिन इस के लिए उसे एक लाश की जरूरत थी. भोपाल के आरिफ नगर, करोंद निवासी 25 साल के सलमान खान से उस की दोस्ती थी. कुछ साल पहले दोनों भोपाल के शिखा होटल में काम करते थे.

सलमान मूलरूप से विदिशा के गंज बासौदा का रहने वाला था. वह अपनी बहन के पास भोपाल के आरिफ नगर में रहता था. एक ही जिले के होने के कारण सलमान की दोस्ती कल्लू से हो गई. कल्लू ने अपने ही दोस्त से दगाबाजी कर उस की हत्या की प्लानिंग कर डाली.

सलमान नौकरी की तलाश में था. सलमान की इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए कल्लू ने नौकरी दिलाने का झांसा देते हुए कहा, “सलमान भाई, उदयपुरा में एक अस्पताल में मेरा एक परिचित है, वह तुम्हारी नौकरी लगवा देगा. तुम मेरे साथ उदयपुरा चलो.”

अंधा क्या चाहे दो आंखें. सलमान झट से तैयार हो गया. 19 अप्रैल को दोनों भोपाल से बस में सवार हो कर उदयपुरा रवाना हो गए. रात करीब 9 बजे वे बस से सिलवानी पहुंचे और एक ढाबे पर दोनों ने खाना खाया. खाना खा कर रात करीब 11 बजे कल्लू सलमान से बोला, “भाई, रात में उदयपुरा के लिए बस तो मिलेगी नहीं, सडक़ पर पैदल चलते हैं, रास्ते में कोई ट्रक मिलेगा तो लिफ्ट ले कर उदयपुरा चलेंगे.

सिलवानी से रात करीबन 11 बजे पैदल उदयपुरा जाने के लिए दोनों पठापोड़ी गांव के तिराहा पर पहुंच गए. वहां पहुंच कर कल्लू ने सलमान से कहा, “पैदल चल कर काफी थक गए हैं थोड़ा आराम कर लेते हैं, फिर आगे बढ़ते हैं.”

इस के बाद दोनों तिराहे पर जगह देख कर बैठ गए. कुछ देर बाद कल्लू ने कहा, “यहां बैठना खतरे से खाली नहीं है, कोई हमें चोर न समझ बैठे. आगे खेत में आराम से बैठेंगे.”

इस के बाद दोनों एक खेत पर पहुंचे. खेत में मूंग की फसल थी और वहां ठंडक का अहसास भी हो रहा था. कल्लू ने सलमान से कहा, “कुछ देर लेट कर आराम कर लेते हैं, फिर उदयपुरा चलेंगे.”

यहां सलमान ने सहमति देते हुए खेत में रुमाल आंखों पर डाल कर आंखें बंद कर लीं. कल्लू भी बगल में सो गया, मगर नींद उस से कोसों दूर थी. सलमान के गले में अंगोछा डला हुआ था. थकान की वजह से सलमान को जल्द ही नींद आ गई. कल्लू ने मौका पा कर सलमान के गले में पड़े अंगोछे को कस कर खींच दिया, फिर उस ने उसे पीछे की ओर इतनी जोर से खींचा कि वह बेसुध हो गया यानी उस की मौत हो गई.

कल्लू ने खेत के किनारे पड़े बड़े पत्थर को उठा कर सलमान के चेहरे पर 3-4 बार दे मारा. चेहरा बुरी तरह से कुचलने के बाद उस का मोबाइल, पर्स समेत सब कुछ निकाल लिया. इस के बाद कल्लू ने अपना आधार कार्ड और पाकेट डायरी, जिस में उस ने अपने घर का मोबाइल नंबर लिखा था, वह सलमान की जेब में रख दिया और सलमान की लाश को खेत पर ही छोड़ कर भोपाल लौट आया. भोपाल आ कर उस ने फोन कर के गांव में रह रही अपनी पत्नी प्रियंका को सलमान को मारने की पूरी बात बता दी.

अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के लंबे हाथ उस तक पहुंच ही जाते हैं. ऐसा ही कल्लू चढ़ार के मामले में हुआ. पुलिस ने कल्लू की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त पत्थर, सलमान का पर्स और मोबाइल भी बरामद कर लिया.

23 अप्रैल, 2023 को तीनों आरोपियों कल्लू चढ़ार, दीनदयाल चढ़ार और प्रियंका के खिलाफ धारा 302 और 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें रायसेन जेल भेज दिया गया.

24 अप्रैल को रायसेन जिले के सिलवानी पुलिस थाने में एसपी विवेक साहबाल ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर घटना का खुलासा किया. चादर से ज्यादा पैर पसारने की कल्लू की फितरत ने उसे संगीन जुर्म करने पर मजबूर कर दिया. अपने दोस्त का कत्ल कर उस परिवार का चिराग बुझा दिया और खुद को पत्नी, भाई के साथ जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित