Superstition Crime Story: तांत्रिक को न्योते का खतरनाक नतीजा

Superstition Crime Story:  उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के नौशाद नामक शख्स के गेहूं के खेत में 11 अप्रैल, 2016 की सुबह लोगों ने एक नौजवान की लाश देख कर पुलिस को सूचना दी. तकरीबन 30 साला नौजवान खून से लथपथ था. उस की हत्या किसी धारदार हथियार से गरदन काट कर की गई थी. उस की पैंट भी नदारद थी. पुलिस नौजवान की शिनाख्त कराने में नाकाम रही. मामला दर्ज कर के पुलिस ने जांचपड़ताल शुरू कर दी. कई दिनों तक कोई नतीजा नहीं निकला.

इधर 16 अप्रैल, 2016 को दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके के कुछ लोग थाना कोतवाली पहुंचे. उन लोगों के मुताबिक, उन के परिवार का एक नौजवान ब्रजेश यादव लापता था. उन्हें पता चला कि उन के यहां कोई लाश मिली है. पुलिस ने फोटो और बरामद सामान दिखाया, तो मृतक की पहचान ब्रजेश के रूप में हो गई.

पुलिस को ताज्जुब यह था कि वे लोग दिल्ली से बागपत किस सूचना पर पहुंचे थे. ब्रजेश के परिवार वालों ने अपने साथ आए नौजवान की ओर इशारा कर के बताया कि वह तांत्रिक है और उस के सिर पर आए जिन्न ने ही बताया था कि लापता ब्रजेश बागपत में यमुना किनारे मरा मिला है. पुलिस को उस तथाकथित तांत्रिक की हरकतें कुछ ठीक नहीं लगीं, तो उसे हिरासत में ले लिया गया. उस तांत्रिक से सख्ती से पूछताछ हुई, तो मामला खुला.

यों उलझे जाल में

दरअसल, गिरफ्तार तांत्रिक इलियास बागपत इलाके का ही रहने वाला था. आवारागर्दी और ठगबाज लोगों की संगत ने उसे पाखंडी बना दिया. उस ने दाढ़ी बढ़ाई और सफेद कपड़े पहन कर तंत्रमंत्र के ढोंग कर लोगों को ठगना शुरू कर दिया. उस ने अपने कई आवारा दोस्त भी अपने साथ मिला लिए, जो उस के चमत्कार के किस्से लोगों को मिर्चमसाला लगा कर सुनाते थे.

समाज में पाखंडियों पर भरोसा करने वाले लोगों की कमी नहीं होती. आज भी लोग तांत्रिकों की तमाम बुरी करतूतों के बाद अपनी तकलीफों का इलाज झाड़फूंक, तंत्रमंत्र में खोजते हैं. ऐसे ही लोगों के पैसे पर वह भी मौज करने लगा.

जहांगीरपुरी के रहने वाले राजू यादव की पत्नी लीला देवी की तबीयत खराब रहती थी. पहले उस का डाक्टर से इलाज कराया. जब उसे कोई फायदा नहीं हुआ, तो उन्होंने मुल्लामौलवियों में झाड़फूक के सहारे इलाज की खोज शुरू कीं. वे इलियास से मिले, तो उस ने खुद को पहुंचा हुआ तांत्रिक बताया और तंत्र विद्या के बल पर इलाज करने को तैयार हो गया. यादव परिवार उसे आसान शिकार लगा. अपने सिर पर वह जिन्न आने की बात करता और इलाज करने का ढोंग करता. चमत्कार की आस में पूरा परिवार उस के झांसे में आ गया.

इलियास अकसर उस के घर पहुंच जाता. इस दौरान उस की खूब इज्जत होती और मुंहमांगी रकम भी मिलती. जिन्न को खुश करने के नाम पर वह शराब और कबाब की दावत भी उड़ाता. यादव परिवार उसे न्योता दे कर सोच रहा था कि वह उन्हें सारे दुखों से नजात दिला देगा. पाखंड के दम पर तांत्रिक मौज करता रहा. महीनों इलाज का फायदा नहीं दिखा, तो उस ने बहका दिया कि बुरी आत्माओं का साया पूरे परिवार पर है. उन्होंने लीला देवी को जकड़ लिया है. वे आत्माएं धीरेधीरे ही उस की तंत्र क्रियाओं से जाएंगी.

एक दिन लीला देवी का बेटा ब्रजेश अचानक गायब हुआ, तो परिवार के लोगों ने उस की खोजबीन शुरू की. दिल्ली में कई जगह वह उसे ढूंढ़ते रहे. कोई समझ नहीं पा रहा था कि वह कहां चला गया था. इस खोजबीन में इलियास भी उन के साथ रहता. जब सभी थक गए, तो इलियास ने तंत्र विद्या के बल पर ब्रजेश का पता लगाने की बात की और तंत्र क्रिया के नाम पर रुपए ऐंठ लिए. इस के बाद उस ने बताया कि उस के सिर पर आए जिन्न ने बताया है कि बागपत में यमुना किनारे ब्रजेश को मार दिया गया है.

सब लोगों के साथ वह भी थाने पहुंचा, तो उस की बात एकदम सच निकली, लेकिन वह पुलिस के जाल में खुद ही उलझ गया.

इसलिए की हत्या

दरअसल, यादव परिवार तांत्रिक  इलियास का पूरी तरह मुरीद हो गया था. उन के पैसे पर वह मौज कर रहा था. तंत्र क्रियाओं के नाम पर शराब के साथ दावतें लेता था. परिवार की एक लड़की को भी उस ने अपने प्रेमजाल में फांस लिया और डोरे डालने शुरू कर दिए. ब्रजेश को उस की हरकतें पसंद नहीं आईं. उसे यह भी लगने लगा कि तंत्र क्रिया की आड़ में इलियास उन लोगों को लूट रहा है.

इलियास को यह बात अखर गई. यादव परिवार उस के लिए सोने के अंडे देने वाली मुरगी बन गया था. उन की जायदाद पर उस की नजर थी. सभी का विश्वास उस ने अपने पाखंड से जीत लिया था. अपने पाखंड के पैर जमाए रखने के लिए उस ने ब्रजेश को ही रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया. एक दिन उस ने ब्रजेश को बताया कि उसे अपनी तंत्र क्रियाओं से पता चला है कि बागपत में गंगा किनारे खजाना दबा हुआ है, लेकिन उसे वह खुद नहीं निकाल सकता. उस ने ब्रजेश को समझाया कि उसे वह निकाल ले, बाद में दोनों आधाआधा बांट लेंगे. ऐसे में उस से जिन्न भी नाराज नहीं होंगे.

ब्रजेश को उस ने यह भी समझाया कि वह यह बात किसी को न बताए, वरना खजाना गायब हो जाएगा और उस के हाथ कुछ भी नहीं आएगा. ब्रजेश उस के झांसे में आ गया. 10 अप्रैल की शाम को वह इलियास के साथ बागपत पहुंच गया. अंधेरा होने पर इलियास उसे खेत में ले गया. ब्रजेश को जान का खतरा महसूस हुआ, तो वहां दोनों के बीच लड़ाई हो गई, लेकिन इलियास ने गंड़ासे से उस की गरदन काट कर हत्या कर दी.

ब्रजेश की पहचान जल्द न हो, इसलिए उस ने उस की पैंट उतार कर छिपा दी. इस दौरान इलियास के माथे पर भी चोट आई. बाद में वह ब्रजेश के परिवार में पहुंचा. वह भी ब्रजेश की खोजबीन कराता रहा. उस पर शक न हो, इसलिए उस ने जिन्न वाली मनगढ़ंत कहानी बताई. पाखंडी की पोल खुलने से यादव परिवार के पास पछताने के सिवा कुछ नहीं बचा था. तांत्रिक को न्योता दे कर उस ने धनदौलत और बेटा गंवा दिया था. पाखंडी तांत्रिक अब सलाखों के पीछे है, लेकिन अपनी करतूत का उसे कोई अफसोस नहीं है.

तांत्रिक के कहने पर बनाया चोर

एक नौजवान को तांत्रिक के कहने पर पूरे गांव ने चोर मान लिया. मामला बदायूं के लभारी गांव में सामने आया. दरअसल, हरीकश्यप नामक शख्स के घर से 15 अप्रैल, 2016 को कुछ गहने चोरी हो गए थे. हरी अपने एक तांत्रिक गुरु की शरण में पहुंच गया. तांत्रिक ने पहले पूरी बात सुनी और उस का शक जान कर एक परची पर ‘द’ शब्द से शुरू होने वाला नाम लिख कर उसे थमा दिया. हरी का शक एक झोंपड़ी में रहने वाले दिनेश पर चला गया. अगले दिन गांव में तांत्रिक की मौजूदगी में पंचायत हो गई.

तांत्रिक का कहा लोगों के लिए पत्थर की लकीर हो गया. तांत्रिक ने उस पर जुर्माना थोपने के साथ ही अपनी 5 हजार फीस और आनेजाने का खर्चा भी मांग लिया. दिनेश ने जुर्माना भरने से मना किया, तो उसे गांव से निकल जाने का फरमान सुनाया गया. दिनेश पुलिस की शरण में पहुंच गया. Superstition Crime Story

Hindi Crime Stories: 18 टुकड़ों में मिली लाश का रहस्य

Hindi Crime Stories: टुकड़ों में बरामद लाश की पहचान करना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर होती है. ऐसा ही एक मामला राजधानी दिल्ली में आया. हत्यारे ने लाश के 1-2, नहीं बल्कि 18 टुकड़े कर दिए थे. जानिए हत्यारे की क्रूरता की कहानी…

पश्चिमी दिल्ली में मोहन गार्डन थाने के प्रभारी राजेश मौर्या को 72 साल की वृद्धा के लापता होने की शिकायत मिली थी. शिकायतकर्ता मोहन गार्डन में ही रामा गार्डन के रहने वाले ग्रोवर दंपति थे. वे किराए के मकान में रहते थे. लापता कविता ग्रोवर मनीष ग्रोवर की मां और मेघा की सास थीं. थानाप्रभारी ने मामले को आए दिन की सामान्य घटना मानते हुए मनीष को समझाया कि उन की मां यहीं कहीं आसपास गई होंगी, आ जाएंगी.

साथ ही सुझाव भी दिया कि वह अपनी रिश्तेदारी या जानपहचान में पता कर लें. शायद वहीं मिल जाएं! फिर भी उन्होंने मनीष की तसल्ली के लिए पूछ लिया कि उन की या घर में किसी दूसरे सदस्य की मां के साथ हालफिलहाल में कोई कहासुनी तो नहीं हुई? मनीष ने ऐसी किसी भी बात से इनकार कर दिया. लेकिन मौर्या की निगाह जब खामोश बैठी मेघा पर गई तो उन्हें थोड़ा अजीब लगा. उन्होंने मेघा की ओर सवालिया नजरों से देखा.

मेघा झट से बोल पड़ी, ‘‘सर, जब से मैं ब्याह कर आई हूं, तब से कभी भी मैं ने सास से ऊंची आवाज तक में बात नहीं की. सासूमां भी मुझे बेटी की तरह मानती थीं. वह बिना बताए ऐसे कहीं नहीं जाती थीं.’’

‘‘आप लोगों को ऐसा क्यों लग रहा है कि कविता ग्रोवर गायब हो गई हैं? मुझे थोड़ा और विस्तार से बताइए.’’ मौर्या ने कहा.

‘‘सर, हम लोग रिश्तेदारी में एक मौत की खबर पा कर 30 जून को सिरसा चले गए थे. वहां से जब 3 जुलाई को लौटे तब घर में ताला लगा मिला. हम ने दूसरी चाबी से ताला खोला. पहले तो हम ने सोचा मां इधरउधर कहीं पड़ोस में गई होंगी. थोड़ी देर में आ जाएंगी. लेकिन…’’

मेघा बोल ही रही थी कि बीच में मनीष बोलने लगे, ‘‘सर, एक पड़ोसी ने बताया कि घर में 2 दिनों से ताला लगा हुआ था. उस के बाद से ही हमें चिंता हो गई. हम ने उन की आसपास तलाश भी की.’’

‘‘ठीक है, आप लोग गुमशुदगी की सूचना दर्ज करवा दीजिए.’’ राजेश मौर्य ने कहा.

मनीष ने सूचना लिखवाने के बाद साथ लाई मां की एक फोटो भी उन्हें दे दी और वापस अपने घर आ गए. पुलिस ने काररवाई शुरू करते हुए गुमशुदा कविता ग्रोवर की तसवीर सभी थानों में भिजवा दी. वृद्धा की तलाश तेजी से जारी थी. 4 दिन गुजर गए थे, फिर भी कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था. मौर्या परेशान थे. पांचवें दिन 8 जुलाई, 2021 को उन्हें मेघा का फोन आया. उन्हें लगा मेघा उन से फिर से अपनी सासूमां की तलाश नहीं हो पाने की शिकायत करेंगी. लेकिन मेघा ने उन्हें फ्लैट में ही कविता ग्रोवर के बारे में कुछ सुराग मिलने की जानकारी दी.

यह सुन कर थानाप्रभारी भागेभागे मनीष के घर आ गए. अपने साथ एसआई अनिल कुमार और हैडकांस्टेबल रतनलाल को भी ले गए थे. मनीष बिल्डिंग में थर्ड फ्लोर पर रहते थे. वे मेघा के साथ कविता के रहने के कमरे में गए. वहां एक पलंग, एक अलमारी और बैठने के लिए 2 आरामदायक कुरसियां थीं.

‘‘कमरे के सामान को हम ने जरा भी छेड़ा नहीं है. आज जब मैं ने कमरे के बिस्तर को ध्यान से देखा. तब मुझे बिस्तर की चादर काफी सिमटी दिखी. उसे देख कर मैं कह सकती हूं कि सासूमां रात भर करवटें बदलती रही होंगी.’’ मेघा बोली.

इस पर इंसपेक्टर ने ध्यान से बिस्तर का निरीक्षण किया. उन्होंने भी अनुमान लगाया कि सामान्य तरह से सोने पर बिस्तर की सिलवटें बहुत अधिक नहीं बनती हैं. तभी उन्होंने सवाल किया, ‘‘मेघाजी, आप सास का एक बैग गायब होने की बात बता रही थीं.’’

‘‘जी हां सर, सासूमां का एक बैग गायब है, जिस में उन की ज्वैलरी और बैंक के कागजात थे. और हां, मेरी सासूमां का मोबाइल भी नहीं मिल रहा है.’’ मेघा बोली.

इस पर थानाप्रभारी मौर्या ने गंभीरता दिखाते हुए कमरे का कोनाकोना छान मारा. इस सिलसिले में बाथरूम की दीवारें संदिग्ध लगीं. कारण दीवारों को रगड़रगड़ कर धोने के निशान साफ दिख रहे थे.

ध्यान से देखने पर एकदो छोटे काले निशान अभी भी दिख रहे थे. उस की जांच के लिए फोरैंसिक टीम बुलाई गई.

जांच के लिए तमाम तरह के नमूने एकत्रित किए गए. घर के बाहर सीसीटीवी कैमरे से 30 जून और एक जुलाई की रात के फुटेज निकलवाए गए. सीसीटीवी फुटेज में 2 बड़े बैग के साथ घर से रात को निकलते हुए 2 लोग दिखे. उन की तसवीर प्रिंट करवा कर मेघा से पहचान करवाई गई. मेघा ने देखते ही कहा कि ये दोनों उन के पड़ोसी अनिल आर्या और कामिनी आर्या हैं. उन की गैरमौजूदगी में यही सासूमां का खयाल रखते थे. पुलिस ने बताया कि ये दोनों 30 जून की रात को 11 बजे आप के घर आए थे और सुबह साढ़े 6 बजे आप के घर से निकले थे. तब उन के पास 2 बड़े बैग थे.

अब मेघा समझ चुकी थी कि जरूर कुछ गड़बड़ है. उस ने बताया कि उन की सास के पास इतना बड़ा बैग नहीं था. फिर खुद ही सवाल किया, ‘‘बैग में क्या हो सकता है, घर का सारा सामान तो यूं ही पड़ा है.’’

तहकीकात से मालूम हुआ कि आर्या दंपति गुरुद्वारा रोड पर किराए के मकान में रहते थे. पहली जुलाई के बाद से वे नहीं दिखे. उधर फोरैंसिक जांच की रिपोर्ट से पता चला कि बाथरूम की दीवार पर वह काले निशान खून के धब्बे थे. इस का मतलब स्पष्ट था कि कविता ग्रोवर की किसी ने हत्या कर दी. आगे की जांच के लिए जांच टीम बनाई गई और हत्यारे की तलाश की जाने लगी. इस मामले में शक की सुई पूरी तरह से अनिल आर्या और उस की पत्नी कामिनी आर्या की तरफ घूम चुकी थी. सवाल यह था कि दोनों बैग ले कर कहां लापता हो गए?

काफी पूछताछ के बाद मालूम हुआ कि दोनों उत्तराखंड में रानीखेत के मूल निवासी हैं. उन की तलाश के लिए पुलिस टीम रानीखेत पहुंची, लेकिन वे हाथ नहीं आए. केवल इतना पता चल सका कि 3 जुलाई, 2021 को टैक्सी स्टैंड पर दिखे थे. इसी बीच दोनों के बारे में दिल्ली के एक आटो वाले से कुछ जानकारी मिली. उस ने बताया कि दोनों उस के परमानेंट ग्राहक थे. हमेशा उस के आटो से ही कहीं भी आतेजाते थे.

आटो ड्राइवर ने बताया कि 30 जून की आधी रात को मुझे फोन कर अगले रोज सुबह आने के लिए कहा था. मैं उन के पास ठीक सवा 6 बजे पहुंच गया था. अनिल आर्या और उस की पत्नी 2 बैग घसीटते हुए ले कर आए थे. उन्होंने कहा था कि दोस्त के यहां पार्टी है, उन के लिए चिकन का बैग पहुंचाना है. और वे आटो पर सवार हो गए. थोड़ी दूर पर ही वे नजफगढ़ के पास उतर गए. उस के बाद वे कहां गए, मालूम नहीं. पूछने पर सिर्फ इतना बताया कि उन का दोस्त यहीं गाड़ी ले कर आएगा.

पुलिस ने आटो वाले से अनिल आर्या का मोबाइल नंबर ले लिया. मोबाइल से बात नहीं बनी, लेकिन आटो और दूसरे दरजनों टैक्सी वालों से पूछताछ के बाद आर्या दंपति को उत्तर प्रदेश के बरेली से 12 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया गया. उन्हें दिल्ली लाया गया. उन से गहन पूछताछ की गई. जल्द ही दोनों ने कविता ग्रोवर की हत्या की बात स्वीकार ली. उन्होंने जो बताया, वह किसी हैवानियत से जरा भी कम नहीं था. मानवता को शर्मसार करने वाली घटना को बड़ी क्रूरता से अंजाम दिया गया. उन्होंने स्वीकार कर लिया कि 30 जून की रात को क्याक्या हुआ था. उन्होंने कविता ग्रोवर की हत्या करने का कारण भी बताया.

इवेंट मैनेजमेंट का काम करने वाले अनिल आर्या के अनुसार उस के लालच और स्वार्थ से भरे इस हत्याकांड की नींव 2 साल पहले ही पड़ गई थी. उस ने कविता ग्रोवर से जानपहचान बढ़ा कर उन से डेढ़ लाख रुपए उधार लिए थे, जिस की मांग वह लगातार करती थीं. अनिल ने बताया कि 30 जून, 2021 को मनीष और मेघा सिरसा चले गए थे. उसी रात वह पत्नी के साथ पूरी तैयारी के साथ कविता के पास जा पहुंचा था. कविता ग्रोवर उन दोनों को अपना हितैषी समझती थीं, इसलिए देर रात को आने पर कोई सवालजवाब नहीं किया.

उन के बीच देर रात तक इधरउधर की बातें होती रहीं. इसी बीच कविता अपनी उधारी मांग बैठीं. बात बढ़ गई. कविता ने नाराजगी दिखाते हुए कह दिया कि पैसे वापस नहीं लौटाए तो वह इस बारे में अपने बहूबेटे को बता देगी. फिर क्या था. तब तक अनिल को भी काफी गुस्सा आ गया था. उस ने तुरंत कविता के मुंह पर जबरदस्त मुक्का जड़ दिया. वह बिछावन पर वहीं गिर पड़ीं. अनिल ने उन के सीने पर सवार हो कर साथ लाई नायलौन की रस्सी से गला घोंट डाला.

कविता की मौत हो जाने के बाद अनिल लाश को बाथरूम में ले गया और साथ लाए बड़े चाकू से लाश के 18 टुकड़े कर डाले. सारे टुकड़े उस ने 2 बड़ेबड़े बैगों में भरे. इस काम में उन दोनों को करीब 4 घंटे का समय लगा. उस की पत्नी कामिनी ने इस में पूरा साथ दिया और उस ने बाथरूम की दीवारें साफ कीं. फिर टुकड़े ठिकाने लगाने के लिए अपने जानपहचान के आटो वाले को फोन कर बुला लिया.

आटो से वह दोनों नजफगढ़ तक आए. आटो के जाने के बाद वहीं नाले में बैग फेंक दिए. उस के बाद वह उसी रोज कविता के घर से लाए जेवरों को मुथुट फाइनैंस में गिरवी रख आए. उस से मिले 70 हजार रुपए ले कर उन्होंने अपने कुछ जेवर छुड़वाए और रानीखेत चले गए. पकड़े जाने के डर से वह वहां 2 घंटे ही रुके. यहां तक कि अपने घर भी नहीं गए. रास्ते में ही अपने मोबाइल का सिम और हत्या में इस्तेमाल चाकू आदि सामान को फेंक दिया. फिर बरेली जा कर एक कमरा किराए पर लिया और रहने लगे.

पुलिस ने उस के बताए अनुसार न केवल थैले से लाश के टुकड़े बरामद कर लिए, बल्कि हत्या में इस्तेमाल सामान भी हासिल कर लिया. लाश के कुल 18 टुकड़े किए गए थे, जो सड़गल चुके थे. पुलिस ने मुथुट फाइनैंस से गिरवी रखे जेवर भी हासिल कर लिए. उन की शिनाख्त मेघा ग्रोवर ने कर दी. इस तरह अनिल और कामिनी द्वारा हत्या का जुर्म स्वीकार करने के बाद अपहरण के केस को हत्या कर लाश ठिकाने लगाने की धारा 302, 201 आईपीसी में तरमीम कर दिया गया. फिर दोनों को अदालत में पेश कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया. Hindi Crime Stories

Family Crime Story: कर्ज चुकाने को भुलाया फर्ज

Family Crime Story: कांचनगरी के नाम से प्रसिद्ध उत्तर प्रदेश के शहर फिरोजाबाद के थाना उत्तर का घनी आबादी वाला मोहल्ला है आर्यनगर. इसी मोहल्ले की गली नंबर-9 में रहते हैं कोयला व्यवसाई लोकेश जिंदल उर्फ बबली. उन की के.डी. कोल ट्रेडर्स नाम से फर्म है.

पहली अप्रैल, 2022 को शाम साढ़े 4 बजे लोकेश के दरवाजे पर लगी कालबैल को किसी ने बजाया. उस समय घर में नौकरानी रेनू शर्मा के अलावा लोकेश की 74 वर्षीय मां कमला अग्रवाल दूसरी मंजिल पर मौजूद थीं. घंटी की आवाज सुन कर रेनू ने दरवाजा खोला. दरवाजे पर 2 युवक खड़े थे. कारोबारी को पूछते हुए दोनों युवक दूसरी मंजिल पर कारोबारी की मां कमला देवी के पास पहुंच गए. दोनों युवक कमला देवी से बातचीत करने लगे. कुछ देर बाद कमला देवी ने रेनू को बुलाया और दोनों मेहमानों के लिए चाय बनाने को कहा. रेनू किचन में चाय बनाने चली गई. जब वह चाय ले कर कमरे में पहुंची तो वहां का नजारा देख कर सन्न रह गई.

माताजी बिस्तर पर लहूलुहान पड़ी थीं. वाशबेसिन का शीशा टूटा पड़ा था. कांच के कुछ टुकड़े बिस्तर पर भी पड़े थे. बदमाशों ने कमला देवी का कांच से गला रेत कर हत्या कर दी थी. कमरे का यह दृश्य देख कर रेनू की चीख निकल गई. एक बदमाश ने रेनू को दबोच लिया. उस की पिटाई कर उसे भी कांच के टुकड़े से घायल कर दिया. धमकी दी कि अगर शोर मचाया तो उसे भी मार देंगे. बदमाश कमरे की अलमारी में रखी नकदी व आभूषण लूट कर भाग गए.

बदमाशों के जाने के बाद रेनू ने शोर मचाया. शोर सुन कर पड़ोसी आ गए. बिस्तर पर कमला देवी की लाश पड़ी थी. इस के साथ ही रेनू घायल थी. वह घबराई हुई थी और रो रही थी. उस दिन अर्पित मां तथा बुआ व चाचा के परिवार के सदस्यों के साथ आसफाबाद स्थित डीडी टाकीज में 3 से 6 बजे शो की मूवी देखने गए हुए थे. वे सब घर से दोपहर ढाई बजे निकले थे. शाम 5 बजे पड़ोसी भाटिया ने फोन कर उन्हें घटना की जानकारी दी.

सभी लोग शो छोड़ कर दौड़ेदौड़े घर पहुंचे. वहां भीड़ और पुलिस को देखते ही परिजनों में हाहाकार मच गया. इस से पहले सूचना मिलने पर थाना उत्तर के थानाप्रभारी संजीव कुमार दुबे अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पंहुच गए थे. तब तक वहां भीड़ जमा हो चुकी थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने उच्चाधिकारियों को घटना से अवगत कराया. इस पर एसएसपी आशीष तिवारी, एसपी (सिटी) मुकेशचंद्र मिश्र व अन्य पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए.

एसएसपी आशीष तिवारी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. उन्होंने देखा कि कमला देवी की मौत हो चुकी थी. कमरे में सामान बिखरा पड़ा था. अलमारी खुली पड़ी थी. मृतका के गले, सिर पर चोट के निशान थे. बैड के नीचे खून से सना तकिया पड़ा था. पुलिस ने टापा कलां निवासी घायल नौकरानी रेनू शर्मा को उपचार के लिए प्राइवेट ट्रामा सेंटर भेज दिया. जरूरी काररवाई निपटाने के बाद कमला देवी के शव को मोर्चरी भिजवा दिया.

शहर के व्यस्ततम और तंग गलियों वाले आर्यनगर में दिनदहाड़े दिल दहलाने वाली घटना से सनसनी फैल गई. लोगों के मन में इस बात को ले कर आक्रोश था कि घटनास्थल से थाना कुछ ही दूरी पर स्थित होने के बावजूद पुलिस सूचना देने के आधे घंटे बाद घटनास्थल पर आई. गुस्साए लोगों को एसएसपी आशीष तिवारी ने भरोसा दिया कि इस जघन्य घटना का शीघ्र खुलासा कर दिया जाएगा. कोयला कारोबारी लोकेश जिंदल पिछले 15 दिनों से व्यापार के सिलसिले में गुवाहाटी गए हुए थे. घर पर उन की पत्नी शोभा व बेटा अर्पित थे. अर्पित अपनी मां, चाचा व बुआ के परिवार के साथ मूवी देखने चला गया था.

ऐसा लगता था कि वारदात को अंजाम देने वाले बदमाशों को पहले से घर की पूरी स्थिति का पता था. पुलिस समझ गई थी कि घटना को अंजाम परिचितों द्वारा ही दिया गया है. उपचार के बाद रेनू से पुलिस ने पूछताछ की. रेनू ने बताया कि वह युवकों को नहीं पहचानती. उस ने पूरी घटना पुलिस को बताते हुए कहा, जब उस ने दरवाजा खोला तो 2 लोग खड़े थे. लोकेश बाबूजी को पूछते हुए दोनों अंदर चले आए और सीधे दूसरी मंजिल पर कमरे में माताजी के पास बैठ कर बातें करने लगे. इस से लगा कि वह घरवालों के परिचित हैं. इस तरह नौकरानी ने पूरी बात पुलिस को बता दी.

कारोबारी की मां की हत्या व लूट की गुत्थी नौकरानी के बयानों से उलझ गई थी. जिस तरह से कमला देवी की हत्या की गई, उस से यह बात समझ नहीं आ रही थी कि हत्यारों ने वाशबेसिन पर लगे शीशे को तोड़ कर कांच से हत्या क्यों की? यदि वे हत्या व लूट करने ही आए थे तो अपने साथ कोई हथियार क्यों नहीं लाए? कमला देवी ने चाय बनाने को कहा तो जरूर वे परिचित ही होंगे. घटना के बाद कमला देवी के कमरे में पुलिस को कई अहम सुराग मिले. इन में नौकरानी रेनू की चूडि़यां, चप्पल व कान के कुंडल आखिर वहां कैसे आ गए?

रेनू का कहना था कि बदमाशों द्वारा उस के साथ बुरी तरह मारपीट करने के दौरान ये सभी चीजें वहां गिर गई थीं. नौकरानी के बयानों के हिसाब से पुलिस को साक्ष्य नहीं मिले. परिवार की महिलाओं ने बताया कि यहां से 6 किलोमीटर दूर आसफाबाद स्थित भारत टाकीज में परिवार के सदस्य मूवी ‘द कश्मीर फाइल्स’ देखने गए थे. इस बात की जानकारी केवल रेनू व मां को थी. चाय के प्याले भी नहीं मिले. जिस बरतन में रेनू द्वारा चाय बनाने की बात कही जा रही थी, वह किचन में उसी जगह पर रखा मिला. जहां घर वाले उसे छोड़ कर गए थे. चाय बनाने के कोई सबूत भी नहीं दिखाई दे रहे थे. आसपास के लोगों ने भी 2 लोगों के बाइक से आनेजाने की पुष्टि नहीं की.

इन सब बातों के चलते पुलिस के संदेह की सुई नौकरानी पर भी घूम रही थी. परिवार की महिलाओं ने पुलिस से आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई. पूछताछ के दौरान घर वालों ने बताया कि नौकरानी रेनू उन के यहां स्थाई रूप से काम नहीं करती थी. नौकरानी को जरूरत पड़ने पर बुलाया जाता था. बीचबीच में वह अपनी मरजी से आतीजाती थी. शुक्रवार को सभी लोग पिक्चर देखने जा रहे थे, इसलिए मां की देखभाल के लिए उसे बुला लिया था. 3 माह पहले मां की बैक बोन का औपरेशन कराया गया था. तब से ज्यादातर समय वह बिस्तर पर ही गुजारती थीं. लेकिन बेंत के सहारे आसानी से चलफिर लेती थीं.

ऐसा लगता था कि वारदात को अंजाम देने वाले बदमाशों को पहले से ही घर की पूरी स्थिति का पता था कि पहली अप्रैल शुक्रवार को घर में कौनकौन था. एसएसपी आशीष तिवारी ने घटना के खुलासे के लिए फोरैंसिक टीम को भी मौके पर बुला लिया. बदमाशों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरे खंगालने के साथ ही आसपास के लोगों से घटना के बारे में पूछताछ की. एसओजी के साथ ही 3 थानों की 5 पुलिस टीमें खुलासे के लिए गठित कीं. घटना की जानकारी मिलने पर सदर विधायक मनीष असीजा के साथ ही कई भाजपा नेता भी वहां पहुंच गए. विधायक ने परिजनों को ढांढस बंधाया.

पुलिस टीम में शामिल हत्याकांड का परदाफाश करने वाली टीम में एसपी (सिटी) मुकेश कुमार मिश्र, सीओ (सिटी) हरिमोहन सिंह, थानाप्रभारी (उत्तर) संजीव कुमार दुबे, एसओजी प्रभारी रवि त्यागी, थानाप्रभारी (दक्षिण) रामेंद्र कुमार शुक्ला, थानाप्रभारी (लाइनपार) आजाद पाल, महिला थानाप्रभारी हेमलता, थानाप्रभारी (रामगढ़) हरवेंद्र मिश्रा शामिल थे.

लोकेश जिंदल के मकान पर बदमाशों द्वारा दिनदहाड़े हत्या व लूट को अंजाम दिया गया था. वहां से एसपी (सिटी) मुकेश चंद्र मिश्र का कार्यालय व थाना (उत्तर) करीब 500 मीटर की दूरी पर है. वहीं नगर विधायक मनीष असीजा का आवास महज डेढ़ सौ मीटर व शिकोहाबाद विधायक मुकेश वर्मा का आवास मात्र 50 मीटर दूर है.

इस के बाद भी बदमाश बेखौफ हो कर वारदात को अंजाम दे कर साफ निकल गए. पुलिस को इस की भनक तक नहीं लगी. मामला लोकेश जिंदल की तहरीर पर दर्ज कर लिया गया. सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली थे. पुलिस को अगर उम्मीद थी तो नौकरानी रेनू शर्मा से ही थी. वही मौके की प्रत्यक्षदर्शी थी. वही बदमाशों के हुलिया की सही जानकारी दे सकती थी, जिस से बदमाश पुलिस की गिरफ्त में आ सकते थे.

पुलिस ने रेनू को विश्वास में ले कर उस से बदमाशों के बारे में गहनता से पूछताछ की. पुलिस ने उसे न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया. तब रेनू ने पुलिस को सारी घटना बता दी. तब पुलिस ने बिना देरी किए रात में ही लोहिया नगर से तरुण गोयल को गिरफ्तार कर लिया. दूसरे दिन 2 अप्रैल को एसएसपी आशीष तिवारी ने प्रैस कौन्फ्रैंस बुला कर आर्यनगर में हुई हत्या व लूट की घटना का परदाफाश करते हुए जानकारी दी कि कर्ज में डूबे रिश्तेदार ने ही हत्या व लूट की घटना को अंजाम दिया था.

बदमाश एक ही था. वह भी कोई बाहरी व्यक्ति न हो कर मृतका की बेटी का दामाद था. दामाद होने के कारण उस का घर आनाजाना था उसे सभी सम्मान देते थे. नौकरानी रेनू शर्मा उस से अच्छी तरह परिचित थी. पुलिस ने हत्यारोपी को गिरफ्तार करने के साथ ही उस के कब्जे से लूटे गए 77,620 रुपए तथा ज्वैलरी जिस में सोने की 4 चूडि़यां, कानों के टौप्स, 2 अंगूठियां, चांदी के नोट के साथ आलाकत्ल पेचकस भी बरामद कर लिया. आरोपी ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया था. कमला देवी की हत्या लूट के उद्देश्य से की गई थी. पुलिस को वारदात के 12 घंटे बाद ही आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता मिल गई थी.

हत्या व लूट की वारदात को तरुण गोयल ने अंजाम दिया था. वह मूलरूप से मेरठ के सदर बाजार थाना क्षेत्र के बंगला एरिया के मकान नंबर 195 का निवासी है. तरुण मृतका कमला देवी की बेटी रंजना उर्फ पिंकी का दामाद है. वह मेरठ में सेनेटरी का काम करता था. उस का अच्छा कारोबार था. परिजनों के अनुसार क्रिकेट मैचों पर औनलाइन सट्टा खेलने के कारण उस पर 50-60 लाख रुपए का कर्ज हो गया था. तब वह लौकडाउन में भाग कर फिरोजाबाद आ गया था. वह फिरोजाबाद के थाना उत्तर के लोहिया नगर की गली नंबर 2 में घरजमाई बन कर रहने लगा था. यहां रह कर वह सेनेटरी का काम करता था.

तरुण को पता चला कि उस के और नानी सास के परिजन शुक्रवार को एक साथ फिल्म देखने गए हैं और नानी सास ही घर पर अकेली हैं. उस की नजर नानी सास कमला देवी के रुपयों व आभूषणों पर थी. उसे पता था कि लोकेश का कोयले का बड़ा व्यवसाय है. उस ने सुनियोजित षडयंत्र रचा और पहली अप्रैल, 2022 की शाम साढ़े 4 बजे वह आर्यनगर में उन के घर पर पहुंच गया. घंटी बजाने पर रेनू ने दरवाजा खोल दिया. घर पर नौकरानी रेनू को देख कर उसे अपनी योजना पर पानी फिरते दिखा. लेकिन लालच के चलते वह खुद को रोक नहीं सका. दूसरी मंजिल पर वह सीधे कमला देवी के कमरे में पहुंचा.

उस समय कमला देवी सो रही थीं. तरुण ने जैसे ही कमरे में रखी अलमारी खोली. आहट सुन कर कमला देवी जाग गईं. इस पर कमला देवी ने टोका. तभी तरुण ने कमरे में रखे पेचकस से उन के सिर पर वार किया. शोर मचाने पर तरुण ने वाशबेसिन के शीशे को तोड़ दिया और उस के कांच से कमला देवी का गला रेत दिया. आवाज सुन कर रेनू कमरे में आ गई. तरुण ने उसे दबोच लिया और मारपीट करते हुए कांच से उस के शरीर पर वार किए. तरुण ने रेनू की हत्या करने के लिए उस के गले में शीशा फंसा दिया. मगर रेनू गिड़गिड़ाई और पेट में पल रहे बच्चे की दुहाई व राज किसी को न बताने की बात कह कर अपनी जान बचाई.

आरोपी ने रेनू को धमकी देते हुए कहा कि वह घर में 2 बदमाशों के आने की कहानी सभी को बताए. लेकिन उस का नाम हरगिज अपनी जुबान पर न लाए, वरना अंजाम बुरा होगा. इस के बाद अलमारी से नकदी व जेवर लूट कर भाग गया. रेनू ने घटना के बाद हत्यारे द्वारा दी गई धमकी को ध्यान में रखते हुए वैसा ही किया. वह पुलिस को घुमाती रही. इस से पुलिस का शक उसी पर बढ़ता गया. कई घंटे की पूछताछ के बाद आखिर रेनू ने सारा भेद खोल दिया.

हत्याकांड के बाद तरुण खून लगे कपड़े बदलने के लिए अपने घर गया, कपड़े बदले, इस के बाद थाना उत्तर से पुलिस को बुलाने की बात पर वह स्वयं अपनी बाइक से थाने पहुंचा और घटना की जानकारी दी. वारदात के बाद वह लगातार घटनास्थल पर ही रहा ताकि घटना पर नजर रख सके. उसे पता था कि नौकरानी रेनू उस के खिलाफ कुछ नहीं बोलेगी और वह बच निकलेगा. पुलिस द्वारा नानी सास की हत्या कर उन के यहां लूट करने वाले बेटी के दामाद तरुण गोयल को जब जेल ले जाया जा रहा था, तब पत्रकारों ने उस से प्रश्न किया कि जब नौकरानी रेनू शर्मा तुम्हें अच्छी तरह जानती थी, तब तुम ने उस चश्मदीद गवाह को क्यों छोड़ दिया था?

इस पर तरुण ने कहा कि रेनू ने गर्भवती होने की बात बताते हुए 2 जिंदगियों की हत्या नहीं करने की बात कह कर जान की भीख मांगी थी. इस पर उसे जिंदा छोड़ दिया. आरोपी तरुण गोयल को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया. आरोपी औनलाइन सट्टा खेलने से कर्जदार हो गया था. उस के शौक भी शानोशौकत वाले थे. उस ने परिस्थितियों का हल निकालने की कोशिश नहीं की.

पैसे के जुनून के चलते घिनौनी साजिश रच कर हत्या व लूट जैसे जघन्य अपराध को अंजाम दे कर रिश्तों में जहर घोलने का काम ही किया. कातिल दामाद के शैतानी दिमाग ने उसे कहीं का नहीं छोड़ा. Family Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Thriller Hindi Story: अभिनेत्री शनाया की मोहब्बत का कांटा

Thriller Hindi Story: वह वर्गाकार बड़ा हाल था. हाल में मुख्यद्वार से सटे 3×6 के 2 मेज एकदूसरे को आपस में सटा कर बिछाए गए थे. नया और रंगीन कवर उन पर बिछाया गया था. मेज से सटी 4 कुरसियां थीं. कुरसियों पर कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की उभरती हुई अभिनेत्री शनाया काटवे, फिल्म के डायरेक्टर राघवंका प्रभु और 2 अन्य मेहमान बैठे  हुए थे.

मेज के सामने करीब 4 फीट की दूरी पर कुछ और कुरसियां रखी हुई थीं. उन पर शहर के नामचीन, वीआईपी, रिश्तेदार, दोस्त और स्थानीय समाचारपत्रों के खबरनवीस बैठे हुए थे. हाल का कोनाकोना दुलहन की तरह सजा था. रंगीन और दूधिया रौशनी के सामंजस्य से पूरा हाल नहा उठा था. खूबसूरत और शानदार सजावट से किसी की आंखें हट ही नहीं रही थीं.

अभिनेत्री शनाया काटवे की ओर से यह शानदार पार्टी उस के फिल्म प्रमोशन ‘आेंडू घंटेया काठे’ के अवसर पर आयोजित की गई थी. पार्टी देर रात तक चलती रही. घूमघूम कर शनाया मेहमानों का खयाल रख रही थी. पार्टी में शामिल आगंतुकों ने वहां जम कर लुत्फ उठाया था. पार्टी खत्म हुई तो देर रात शनाया काटवे अपने मांबाप के साथ घर पहुंची. वह बहुत थक गई थी. कपड़े वगैरह बदल कर हाथमुंह धो कर अपने कमरे में बिस्तर पर लेटी तो दिन भर की थकान के चलते लेटते ही सो गई. उस के मांबाप अपने कमरे में जा कर सो गए थे. यह बात 9 अप्रैल, 2021 की है.

अगली सुबह जब शनाया और उस के मांबाप की नींद खुली और वे फ्रैश हो कर डायनिंग हाल में नाश्ता करने बैठे तो उन्हें अपने इर्दगिर्द एक कमी का एहसास हुआ. जब वे देर रात घर वापस लौटे थे तो भी घर पर उन का बेटा राकेश काटवे कहीं नजर नहीं आया था. जब सुबह नाश्ता करने के लिए सभी एक साथ डायनिंग हाल में बैठे तो भी राकेश वहां भी मौजूद नहीं था.

यह देख कर शनाया के पापा बलदेव काटवे थोड़ा परेशान हो गए कि आखिर वह कहां है, घर में कहीं दिख भी नहीं रहा है. ऐसा पहली बार हुआ था जब वह घर से कहीं बाहर गया और हमें नहीं बताया, लेकिन वह जा कहां सकता है. यह तो हैरान करने वाली बात हुई. बलदेव काटवे और उन की पत्नी सोनिया का नाश्ता करने का मन नहीं हो रहा था. दोनों एकएक प्याली चाय पी कर वहां से उठ गए. मांबाप को उठ कर जाते देख शनाया भी नाश्ता छोड़ कर उठ गई और उन के कमरे में जा पहुंची, जहां वे बेटे को ले कर परेशान और चिंतित थे.

बात चिंता करने वाली थी ही. जो इंसान घर छोड़ कर कहीं न जाता हो और फिर वह अचानक से गायब हो जाए तो यह चिंता वाली बात ही है. बलदेव, सोनिया और शनाया ने अपनेअपने स्तर से परिचितों और दोस्तों को फोन कर के राकेश के बारे में पता किया, लेकिन वह न तो किसी परिचित के वहां गया था और न ही किसी दोस्त के वहां ही. उस का कहीं पता नहीं चला.

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राकेश का जब कहीं पता नहीं चला तो बलदेव काटवे ने बेटे की गुमशुदगी की सूचना हुबली थाने में दे दी. एक जवान युवक के गायब होने की सूचना मिलते ही थानाप्रभारी एस. शंकराचार्य हरकत में आए और राकेश की खोजबीन में अपने खबरियों को लगा दिया. यह 10 अप्रैल, 2021 की बात है. राकेश काटवे कोई छोटामोटा आदमी नहीं था. उस के नाम के पीछे अभिनेत्री शनाया काटवे का नाम जुड़ा था, इसलिए यह मामला हाईप्रोफाइल बन गया था. मुकदमा दर्ज कर लेने के बाद पुलिस राकेश काटवे का पता लगाने में जुटी हुई थी.

5 टुकड़ों में मिली लाश

इसी दिन शाम के समय हुबली थाना क्षेत्र के देवरागुडीहल के जंगल में एक कटा हुआ सिर बरामद हुआ तो इसी थाना क्षेत्र के गदर रोड से एक कुएं में गरदन से पैर तक शरीर के कई टुकड़े पानी पर तैरते बरामद हुए. टुकड़ों में मिली इंसानी लाश से इलाके में दहशत फैल गई थी. जैसे ही कटा सिर और टुकड़ों में बंटे शरीर के अंग पाए जाने की सूचना थानाप्रभारी एस. शंकराचार्य को मिली, वह चौंक गए. वह तुरंत टीम ले कर देवरागुडीहल जंगल की तरफ रवाना हो गए थे.

चूंकि राकेश काटवे की गुमशुदगी की सूचना थाने में दर्ज थी, घर वालों ने उस की एक रंगीन तसवीर थाने में दी थी. कटा हुआ सिर तसवीर से काफी हद तक मेल खा रहा था, इसलिए थानाप्रभारी ने घटनास्थल पर बलदेव काटवे को भी बुलवा लिया, जिस से उस की शिनाख्त हो जाए.  छानबीन के दौरान संदिग्ध अवस्था में घटनास्थल से कुछ दूरी पर एक मारुति रिट्ज और एक हुंडई कार बरामद की थी. दोनों कारों की पिछली सीटों पर खून के धब्बे लगे थे, जो सूख चुके थे. पुलिस का अनुमान था कि हत्यारों ने कार को लाश ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किया होगा. पुलिस ने दोनों कारों को अपने कब्जे में ले लिया.

दोनों कारों को कब्जे में लेने के बाद उन्होंने इस की सूचना एसपी (ग्रामीण) पी. कृष्णकांत और पुलिस कमिश्नर लभु राम को दे दी थी. दिल दहला देने वाली घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे. उन्होंने घटनास्थल और कटे हुए अंगों का निरीक्षण किया. शरीर के अंगों को देखने से ऐसा लगता था जैसे हत्यारों ने बड़े इत्मीनान से किसी  धारदार हथियार से उसे छोटेछोटे टुकड़ों में काटा होगा. पुलिस उन तक पहुंच न पाए, इसलिए लाश जंगल में ले जा कर अलगअलग जगहों पर फेंक दी, ताकि लाश की शिनाख्त न हो सके.

बहरहाल, थानाप्रभारी की यह तरकीब वाकई काम कर गई. उन्होंने जब बलदेव काटवे को सिर के फोटो दिखाए तो फोटो देखते ही बलदेव काटवे पछाड़ मार कर जमीन पर गिर गए. यह देख कर पुलिस वालों को समझते देर न लगी कि कटे हुए सिर की पहचान उन्होंने कर ली है. थोड़ी देर बाद जब वह सामान्य हुए तो वह दहाड़ मारमार कर रोने लगे. वह कटा हुआ सिर उन के लाडले बेटे राकेश काटवे का था. पुलिस यह जान कर और भी हैरान थी कि कहीं गदग रोड स्थित कुएं से बरामद कटे अंग राकेश के तो नहीं हैं. लेकिन पुलिस की यह आशंका भी जल्द ही दूर हो गई थी. बलदेव काटवे ने हाथ और पैर की अंगुलियों से लाश की पहचान अपने बेटे के रूप में कर ली थी.

24 घंटे के अंदर पुलिस ने राकेश काटवे की गुमशुदगी के रहस्य से परदा उठा दिया था. हत्यारों ने बड़ी बेरहमी से उसे मौत के घाट उतारा था. पुलिस ने लाश का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया. लेकिन एक बात से राकेश के मांबाप और पुलिस हैरान थे कि राकेश की जब किसी से दुश्मनी नहीं थी तो उस की हत्या किस ने और क्यों की? इस का जबाव न तो पुलिस के पास था और न ही उस के मांबाप के पास. दोनों ही इस सवाल से निरुत्तर थे.

किस ने और क्यों, का जबाव तो पुलिस को ढूंढना था. राकेश की हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों को अपना हथियार बनाया. पुलिस ने सब से पहले राकेश काटवे के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स से पुलिस यह पता लगाने की कोशिश में जुट गई कि आखिरी बार राकेश से किस की और कब बात हुई थी? जांचपड़ताल में आखिरी बार उस की बहन शनाया से बातचीत के प्रमाण मिले थे. रात में 7 और 8 बजे के बीच में शनाया और राकेश के बीच लंबी बातचीत हुई थी. उस के बाद उस के फोन पर किसी और का फोन नहीं आया था. इस का मतलब आईने की तरह साफ था कि राकेश की हत्या रात 8 बजे के बाद की गई थी.

पुलिस के सामने एक और हैरानपरेशान कर देने वाली सच्चाई सामने आई थी. घटना वाले दिन शनाया ने अपने फिल्म के प्रमोशन पर एक पार्टी रखी थी. उस पार्टी में राकेश को छोड़ घर के घर सभी सदस्य शमिल थे तो उस का भाई राकेश पार्टी में शामिल क्यों नहीं हुआ? वह कहां था? इंसपेक्टर एस. शंकराचार्य के दिमाग में यह बात बारबार उमड़ रही थी कि जब घर के सभी सदस्य पार्टी में शमिल थे तो राकेश किस वजह से घर पर रुका रहा? इस ‘क्यों’ का जबाव मिलते ही हत्या की गुत्थी सुलझ सकती थी.

आखिरकार पुलिस की मेहनत रंग लाई. घटनास्थल से बरामद हुई दोनों कारों में से एक मारुति रिट्ज कार मृतक राकेश काटवे की बहन शनाया काटवे के नाम पर रजिस्टर्ड थी. दूसरी हुंडई कार किसी अमन नाम के व्यक्ति के नाम पर थी. यह जान कर पुलिस के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई कि शनाया काटवे की कार घटनास्थल पर कैसे पहुंची? राकेश के मर्डर से शनाया का क्या संबंध हो सकता है? क्या शनाया का हत्यारों के साथ कोई संबंध है? ऐसे तमाम सवालों ने पुलिस कमिश्नर लभु राम, एसपी (ग्रामीण) पी. कृष्णकांत और थानाप्रभारी को हिला कर रख दिया था.

एसपी (ग्रामीण) पी. कृष्णकांत के नेतृत्व में राकेश काटवे हत्याकांड की बिखरी कडि़यों को जोड़ने के लिए थानाप्रभारी बेताब थे. उन्होंने घटना का परदाफाश करने के लिए मुखबिरों को लगा दिया था. घटना के 4 दिनों बाद 14 अप्रैल को मुखबिर ने जो सूचना दी, उसे सुन कर थानाप्रभारी को मामले में प्रगति नजर आई. मुखबिर ने उन्हें बताया था कि भाईबहन शनाया और राकेश के बीच में अच्छे रिश्ते नहीं थे. बरसों से उन के बीच में छत्तीस का आंकड़ा बना हुआ था.

मुखबिर की यह सूचना पुलिस के लिए काम की थी. पुलिस ने दोनों के बिखरे रिश्तों का सच तलाशना शुरू किया तो जल्द ही सारा सच सामने आ गया. दरअसल, राकेश शनाया के प्रेम की राह में एक कांटा बना हुआ था. शनाया का नियाज अहमद काटिगार के साथ प्रेम संबंध था. इसी बात को ले कर अकसर दोनों भाईबहन के बीच में झगड़ा हुआ करता था. राकेश को बहन का नियाज से मेलजोल अच्छा नहीं लगता था, जबकि शनाया को भाई की टोकाटोकी सुहाती नहीं थी. यही दोनों के बीच खटास की वजह थी. घटना के खुलासे के लिए इतनी रौशनी काफी थी. सबूतों के आधार पर 17 अप्रैल को हुबली पुलिस ने नियाज अहमद काटिगार को उस के घर से गिरफ्तार कर लिया और पूछताछ के लिए थाने ले आई.

अपराधी चढ़े पुलिस के हत्थे

थाने में कड़ाई से हुई पूछताछ में नियाज अहमद पुलिस के सामने टूट गया और राकेश की हत्या का अपना जुर्म कबूल कर लिया. आगे की पूछताछ में उस ने यह भी बताया कि इस घटना में उस के साथ उस के 3 साथी तौसीफ चन्नापुर, अलताफ तैजुद्दीन मुल्ला और अमन गिरनीवाला शमिल थे. उस के बयान के आधार पर उसी दिन तीनों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए.

पुलिस पूछताछ के दौरान नियाज अहमद ने प्रेमिका शनाया काटवे के कहने पर राकेश की हत्या करना कबूल किया था. 5 दिनों बाद 22 अप्रैल, 2021 को राकेश हत्याकांड की मास्टरमाइंड शनाया काटवे को हुबली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. शनाया ने बड़ी आसानी से पुलिस के सामने घुटने टेक दिए. उस ने भाई राकेश की हत्या कराने का अपना जुर्म मान लिया था. पुलिस पूछताछ में राकेश काटवे हत्याकांड की कहानी ऐसे सामने आई—

25 वर्षीया शनाया काटवे मूलरूप से उत्तरी कर्नाटक के धारवाड़ जिले की हुबली की रहने वाली थी. वह मां सोनिया काटवे और पिता बलदेव की इकलौती संतान थी. इस के अलावा काटवे दंपति की कोई और संतान नहीं थी. एक ही संतान को पा कर दोनों खुश थे और खुशहाल जीवन जी रहे थे. लेकिन बेटे की चाहत कहीं न कहीं पतिपत्नी के मन में बाकी थी. पतिपत्नी जब भी अकेले में होते तो एक बेटे की अपनी लालसा जरूर उजागर करते. आखिरकार उन्होंने फैसला किया कि वे एक बेटे को गोद लेंगे, अपनी कोख से नहीं जनेंगे. जल्द ही काटवे दंपति की वह मंशा पूरी हो गई.

गोद लिया भाई था राकेश

उन्होंने अपने एक रिश्तेदार के बेटे को कानूनी तौर पर गोद ले लिया और पालपोस कर उसे बड़ा किया. तब राकेश साल भर का रहा होगा. काटवे दंपति के गोद में राकेश पल कर बड़ा हुआ. उन की अंगुलियां पकड़ कर चलना सीखा. सयाना और समझदार हुआ तो मांबाप के रूप में उन्हें ही सामने पाया. वही उस के मांबाप थे, राकेश यही जानता था. उन्होंंने भी शनाया और राकेश के बीच कभी फर्क नहीं किया. लेकिन शनाया जानती थी कि राकेश उस का सगा भाई नहीं है, उसे मांबाप ने गोद लिया है.

बचपन से ही शनाया राकेश से नफरत करती थी, उस से चिढ़ती थी. चिढ़ उसे इस बात से हुई थी कि उस के हिस्से की आधी खुशियां और सुख राकेश की झोली में जा रहे थे. शनाया फुरसत में जब भी होती, यही सोचती कि वह नहीं होता तो जो सारी खुशियां, लाड़प्यार राकेश को मिलता है, उसे ही नसीब होता. लेकिन उस के हिस्से के प्यार पर डाका डालने न जाने वह कहां से आ गया.

यही वह खास वजह थी जब शनाया बचपन से ले कर जवानी तक राकेश को फूटी आंख देखना नहीं चाहती थी. उस से नफरत करती थी. लेकिन इस से राकेश को कोई फर्क नहीं पड़ता था कि शनाया उसे प्यार करती थी या नफरत. वह तो उस की परछाईं को अपना समझ कर उस के पीछे भागता था, उसे बहन के रूप में प्यार करता था. क्योंकि उस के मांबाप ने उसे यही बताया था.

खैर, शनाया और राकेश बचपन की गलियों को पीछे छोड़ अब जवानी की दहलीज पर खड़े थे. जिस प्यार को मांबाप ने दोनों में बराबर बांटा था, दोनों के अपने रास्ते अलगअलग थे. हुबली से ही स्नातक की डिग्री हासिल कर शनाया काटवे की बचपन से रुपहले परदे पर स्टार बन कर चमकने की दिली ख्वाहिश थी. अपने सपने पूरे करने के लिए वह दिनरात मेहनत करती थी. इस के लिए उस ने मौडलिंग की दुनिया को सीढ़ी बना कर आगे बढ़ना शुरू किया.

शनाया बला की खूबसूरत और बिंदास लड़की थी. अपनी सुंदरता पर उसे बहुत नाज था. आदमकद आईने के सामने घंटों खड़ी हो कर खुद को निहारना उस के दिल को सुकून देता था. यही नहीं, जीने की हसरत उस में कूटकूट कर भरी थी. उस के खयालों में नियाज अहमद काटिगार सुनहरे रंग भर रहा था.

अमीर बाप की बिगड़ी औलाद था नियाज

हुबली का रहने वाला 22 वर्षीय नियाज अहमद अमीर मांबाप की बिगड़ी हुई औलाद था. बाप के खूनपसीने से कमाई दौलत यारदोस्तों में दोनों हाथों से पानी की तरह बहा रहा था. उन यारदोस्तों में एक नाम शनाया काटवे का भी था. नियाज के दिल की धड़कन थी शनाया. उस के रगों में बहने वाला खून थी शनाया. शनाया के बिना जीने की वह कभी कल्पना नहीं कर सकता था. शनाया और नियाज एकदूसरे से बेपनाह मोहब्बत करते थे. दोनों की मुलाकात एक पार्टी में हुई थी. शनाया की खूबसूरती देख कर नियाज घायल हो गया था. वह पहली नजर में ही शनाया को दिल दे बैठा था. उठतेबैठते, सोतेजागते, खातेपीते हर जगह उसे शनाया ही नजर आती थी.

ऐसा नहीं था कि मोहब्बत की आग एक ही तरफ लगी हो. शनाया भी उसी मोहब्बत की आग में जल रही थी. मोहब्बत की आग दोनों ओर बराबर लगी थी. एकदूसरे के साथ जीनेमरने की कसमें दोनों ने खाईं और भविष्य को ले कर सपने देख रहे थे. खुले आसमान के नीचे अपनी बांहें फैलाए नियाज और शनाया भूल गए थे कि उन का प्यार ज्यादा दिनों तक चारदीवारी में कैद नहीं रह सकता. वह फिजाओं में खुशबू की तरह फैल जाता है.

शनाया और नियाज की मोहब्बत भी ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रही. शनाया के भाई राकेश काटवे को बहन के प्रेम की सूचना मिली तो वह आगबबूला हो गया था. उस ने अपनी तरफ से सच्चाई का पता लगाया तो बात सच निकली.

बहन को हिदायत दी थी राकेश ने

शनाया एक मुसलिम युवक नियाज अहमद से प्यार करती थी. उस ने बड़े प्यार से एक दिन बहन से पूछा, ‘‘यह मैं क्या सुन रहा हूं शनाया?’’

‘‘क्या सुन रहे हो भाई, मुझे भी तो बताओ.’’ शनाया ने पूछा.

‘‘क्या तुम सचमुच नहीं जानती कि मैं क्या कहना चाहता हूं?’’ वह बोला.

‘‘नहीं, सचमुच मैं नहीं जानती, आप क्या कहना चाहते हो और मेरे बारे में आप ने क्या सुना है?’’ शनाया ने सहज भाव से कहा.

‘‘उस नियाज से तुम दूरी बना लो, यही तुम्हारी सेहत के अच्छा होगा. मैं अपने जीते जी खानदान की नाक कटने नहीं दूंगा. अगर  तुम ने मेरी बात नहीं सुनी या नहीं मानी तो यह नियाज मियां के सेहत के लिए अच्छा नहीं होगा.’’ भाई के मुंह से नियाज का नाम सुनते ही शनाया के होश उड़ गए.

‘‘जैसा तुम सोच रहे हो भाई, हमारे बीच में ऐसी कोई बात नहीं है. हम दोनों एक अच्छे दोस्त भर हैं.’’ शनाया ने सफाई देने की कोशिश की, लेकिन वह घबराई हुई थी.

‘‘मेरी आंखों में धूल झोंकने की कोशिश मत करना. तुम दोनों के बारे में मुझे सब पता है. कई बार मैं ने खुद तुम दोनों को एक साथ बांहों में बांहें डाले देखा है. जी तो चाहा कि तुम्हें वहीं जान से मार दूं, लेकिन मम्मीपापा के बारे में सोच कर मेरे हाथ रुक गए. तुम अब भी संभल जाओ. तुम्हारी सेहत के लिए यही अच्छा होगा. नहीं तो इस का अंजाम बहुत बुरा हो सकता है, जो न मैं जानता हूं और न ही तुम, समझी.’’

‘‘प्लीज भाई, मम्मीपापा से कुछ मत कहना,’’ शनाया भाई के सामने गिड़गिड़ाई, ‘‘नहीं तो उन के दिल को बहुत ठेस लगेगी. वे मेरे बारे में क्या सोचेंगे. मेरी उन की नजरों में सारी इज्जत खत्म हो जाएगी. प्लीज…प्लीज… प्लीज, मम्मीपापा से कुछ मत कहना, मेरे अच्छे भाई.’’

‘‘ठीक है, ठीक है, सोचूंगा. मुझे क्या करना होगा लेकिन तुम ने अपनी आदत में बदलाव नहीं लाया तो सोचना कि मैं तुम्हारे लिए कितना खतरनाक बन जाऊंगा, मैं खुद भी नहीं जानता.’’

राकेश ने शनाया को प्यार से समझाया भी और धमकाया भी. उस के बाद उस ने मम्मीपापा से बहन की पूरी हकीकत कह सुनाई. बेटी की करतूत सुन कर वे शर्मसार हो गए.

मांबाप ने भी बेटी को समझाया और नियाज से दूर रहने की सलाह दी. वैसे भी शनाया भाई से छत्तीस का आंकड़ा रखती थी. उस के मना करने के बावजूद राकेश ने उस के प्यार वाली बात मांबाप से बता दी थी.  यह सुन कर उस के सीने में भाई के प्रति नफरत की आग धधक उठी थी.

प्यार की राह का कांटा बना राकेश

राकेश बहन के प्रेम की राह का कांटा बना हुआ था. राकेश के कई बार समझाने के बावजूद शनाया ने नियाज से मिलना बंद नहीं किया था. इसे ले कर दोनों में अकसर झगड़े होते रहते थे. रोजरोज की किचकिच से शनाया ऊब चुकी थी. वह नहीं चाहती थी कि उस के और उस के प्यार के बीच में कोई कांटा बने. भाई की टोकाटोकी से तंग आ कर शनाया ने उसे रास्ते से हटाने की खतरनाक योजना बना ली. शनाया ने अपनी अदाओं से प्रेमी नियाज अहमद को उकसाया कि अगर मुझे प्यार करते हो तो हमारे प्यार के बीच कांटा बने भाई राकेश को रास्ते से हटा दो, नहीं तो मुझे हमेशा के लिए भूल जाओ.

नियाज अहमद शनाया से दूर हो कर जीने की कल्पना भी कर नहीं सकता था. उस ने प्रेमिका का दिल जीतने के लिए राकेश को रास्ते से हटाने के लिए हामी भर दी. इस खतरनाक योजना को अंजाम देने के लिए उस ने अपने 3 साथियों तौसीफ चन्नापुर, अलताफ तैजुद्दीन मुल्ला और अमन गिरनीवाला को शमिल कर लिया. इस के बाद राकेश को रास्ते से हटाने की योजना बनी. खतरनाक योजना खुद शनाया ने ही बनाई. इसे 9 अप्रैल, 2021 को अंजाम देने की तारीख तय की गई. उस दिन उस ने अपनी नई फिल्म ‘आेंडू घंटेया काठे’ की प्रमोशन रखवाई थी. चतुर शनाया ने इसलिए यह तारीख निर्धारित की थी ताकि उस पर किसी का शक न जाए और रास्ते का कांटा सदा के लिए हट भी जाए. यानी सांप भी मर जाए, लाठी भी न टूटे.

योजना के मुताबिक, 9 अप्रैल, 2021 को शनाया काटवे फिल्म प्रमोशन के लिए जब पार्टी में पहुंची, तभी उस ने नियाज अहमद को फोन कर के बता दिया कि राकेश पार्टी में नहीं आएगा, वह घर पर अकेला है. मांबाप भी पार्टी में आए हुए हैं. यही सही वक्त है, काम को अंजाम दे दो.

घर पर ही किए थे राकेश के टुकड़े

शनाया की ओर से हरी झंडी मिलते ही नियाज अहमद, साथियों के साथ अमन गिरनीवाला की हुंडई कार ले कर पार्टी वाली जगह पहुंचा. वहां से शनाया की मारुति रिट्ज कार ले कर रात साढ़े 8 बजे उस के घर पहुंचा. उस की कार नियाज अहमद खुद ड्राइव कर रहा था. उस कार में नियाज के साथ तौसीफ चन्नापुर बैठा था जबकि अमन गिरनीवाला की हुंडई कार में अलताफ तैजुद्दीन मुल्ला सवार था.

खैर, रात साढ़े 8 बजे जब नियाज शनाया के घर पहुंचा तो राकेश काटवे घर पर ही था. नियाज ने कालबैल बजाई तो राकेश ने दरवाजा खोल दिया. सामने नियाज को देख कर वह चौंक गया. इस से पहले कि वह सावधान हो पाता, नियाज और उस के साथी अचानक उस पर टूट पड़े.

नियाज ने गला दबा कर उसे मौत के घाट उतार दिया. फिर लाश को ठिकाने लगाने के लिए नियाज ने अपने साथ लाए धारदार चाकू से राकेश के शरीर को 5 टुकड़ों में काट दिया और फर्श पर पड़े खून को एक कपड़े से साफ कर साक्ष्य मिटा दिए. फिर एक पैकेट में सिर और दूसरे पैकेट में बाकी अंग रख कर चारों लोग 2 गाडि़यों में सवार हो कर देवरागुडीहल जंगल की तरफ रवाना हो गए. नियाज ने राकेश का कटा सिर जंगल में फेंक दिया और दोनों कार वहीं छोड़ कर चारों गदग रोड जा पहुंचे. वहां एक कुएं में कटे अंग डाल कर सभी फरार हो गए.

शनाया काटवे ने मौत की परफैक्ट प्लानिंग की थी. लेकिन वह यह भूल गई थी कि अपराधी कितना ही चालाक क्यों न हो, कोई न कोई सुराग छोड़ ही जाता है. शनाया ने भी वैसा ही किया. वह कानून के लंबे हाथों से बच नहीं पाई और पुलिस के हत्थे चढ़ गई. सभी अभियुक्तों से विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. Thriller Hindi Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

True Crime Story: जाल में फंसी कुसुमलता – परिवार बना मोहरा

True Crime Story: पहली अप्रैल, 2021 को सुबह के करीब पौने 8 बज रहे थे. राजस्थान के अलवर जिले के बहरोड़ थाने  के थानाप्रभारी विनोद सांखला को फोन पर सूचना मिली कि जखराना बसस्टैंड के पास एक बाइक और स्कौर्पियो गाड़ी की भिड़ंत हो गई है. सूचना मिलते ही विनोद सांखला पुलिस टीम ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. घटनास्थल पर काफी भीड़ जमा थी. पुलिस को देखते ही भीड़ थोड़ा हट गई. पुलिस ने देखा कि वहां एक व्यक्ति की दबीकुचली लाश सड़क पर पड़ी थी. थोड़ी दूरी पर मृतक की मोटरसाइकिल गिरी पड़ी थी.

घटनास्थल पर प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि नीमराना की तरफ से स्कौर्पियो गाड़ी आई थी. स्कौर्पियो में सवार लोगों ने जानबूझ कर मोटरसाइकिल को टक्कर मारी थी. बाइक सवार स्कौर्पियो की टक्कर से उछल कर दूर जा गिरा. तब स्कौर्पियो यूटर्न ले कर आई और बाइक से गिरे युवक को कुचल कर चली गई. गाड़ी के टायर युवक के सिर से गुजरे तो सिर का कचूमर निकल गया. जब स्कौर्पियो सवार निश्चिंत हो गए कि बाइक सवार की मौत हो गई है, तब वे वापस उसी रोड से भाग गए.

वहां मौजूद लोगों ने थानाप्रभारी विनोद सांखला को बताया कि यह दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या है. स्कौर्पियो में सवार अज्ञात लोगों ने बाइक सवार को जानबूझ कर टक्कर मार कर हत्या की है. थानाप्रभारी ने घटना की खबर उच्च अधिकारियों को दे दी. खबर पा कर बहरोड़ के सीओ और एसडीएम घटनास्थल पर आ गए. बाइक सवार युवक की पहचान कृष्णकुमार यादव निवासी भुंगारका, महेंद्रगढ़, हरियाणा के रूप में हुई.

कृष्णकुमार यादव वर्तमान में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जखराना में अपर डिविजन क्लर्क के पद पर कार्यरत था. कृष्णकुमार के एक्सीडेंट होने की खबर पा कर विद्यालय के प्रधानाचार्य ने बताया कि कृष्णकुमार यादव अपने पिताजी की औन ड्यूटी मृत्यु होने पर उन की जगह मृतक आश्रित कोटे से नौकरी पर लगा था. कृष्णकुमार अपने मांबाप का इकलौता बेटा था. वह अपने गांव भुंगारका से रोजाना बाइक द्वारा ड्यूटी आताजाता था. सीओ देशराज गुर्जर ने भी घटनास्थल का मुआयना किया और उपस्थित लोगों से जानकारी ली. जानकारी में यही सामने आया कि कृष्णकुमार की हत्या की गई है.

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज निकाले. फुटेज से पता चला कि प्रत्यक्षदर्शियों ने जो बातें बताई थीं, वह सच थीं. हत्यारे कृष्णकुमार की हत्या को दुर्घटना दिखाना चाह रहे थे. मगर लोगों ने यह सब अपनी आंखों से देखा था.

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मृतक के परिजनों को भी हत्या की खबर दे दी गई. खबर मिलते ही मृतक के घर वाले एवं रिश्तेदार घटनास्थल पर आ गए. उन से भी पुलिस ने पूछताछ की और शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद वह परिजनों को सौंप दिया. मृतक के परिजनों की तरफ से कृष्णकुमार की हत्या का मामला बहरोड़ थाने में दर्ज करा दिया गया. थानाप्रभारी विनोद सांखला, एसआई सुरेंद्र सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों की टीम ने सीसीटीवी फुटेज और स्कौर्पियो गाड़ी के नंबरों के आधार पर जांच शुरू की. पुलिस ने स्कौर्पियो गाड़ी का नंबर दे कर सभी थानों से इस नंबर की गाड़ी की जानकारी देने को कहा.

तभी जयपुर पुलिस ने सूचना दी कि इस नंबर की स्कौर्पियो गाड़ी पावटा जयपुर में खड़ी है. पुलिस टीम ने पावटा पहुंच कर वहां से स्कौर्पियो गाड़ी सहित 2 युवकों अशोक और पवन मेघवाल को भी हिरासत में ले लिया. गाड़ी के मालिक अजीत निवासी भुंगारका सहित कुछ और संदिग्ध युवकों को भी पुलिस ने पूछताछ के लिए उठा लिया.

थाने में इन सभी से पूछताछ की. अशोक व पवन मेघवाल एक ही रट लगाए थे कि उन की कृष्णकुमार से कोई दुश्मनी नहीं थी. अचानक वह गाड़ी से टकरा गया था. बाइक के एक्सीडेंट के बाद हड़बड़ाहट में गाड़ी घुमाई तो कृष्णकुमार पर गाड़ी चढ़ गई. उन्होंने बताया कि उन्हें इस बात का डर लग रहा था कि लोग उन्हें पकड़ कर मार न डालें, इस डर के कारण वे गाड़ी भगा ले गए. मगर आरोपियों की यह बात पुलिस के गले नहीं उतर रही थी. भुंगारका निवासी अजीत ने पुलिस को बताया कि उस ने अपनी स्कौर्पियो गाड़ी एक लाख 80 हजार रुपए में सन्नी यादव को बेच दी. सन्नी ने अशोक के नाम पर यह गाड़ी खरीदी थी.

अजीत ने पुलिस को सन्नी का नाम बताया. तब तक पुलिस को लग रहा था कि अजीत का इस मामले से कोई संबंध नहीं है. अशोक और पवन मेघवाल 4 दिन तक पुलिस को एक ही कहानी बताते रहे कि अचानक बाइक से गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया था. पुलिस को भी लगने लगा था कि मामला कहीं दुर्घटना का ही तो नहीं है. मगर सीसीटीवी फुटेज में जो एक्सीडेंट का दृश्य था, वह बता रहा था कि कृष्णकुमार की साजिश के तहत हत्या की गई थी. हत्या को उन्होंने साजिश के तहत दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की थी.

तब पुलिस अधिकारियों ने अपना पुलिसिया रूप दिखाया. बस फिर क्या था. पुलिस का असली रूप देख कर वे टूट गए और स्वीकार कर लिया कि उन्होंने जानबूझ कर कृष्णकुमार यादव की हत्या की थी, फिर उन्होंने हत्या की कहानी बता दी. हरियाणा के नांगल चौधरी इलाके के भुंगारका गांव में कृष्णकुमार यादव अपनी पत्नी कुसुमलता (35 वर्ष) के साथ रहता था. कृष्णकुमार की 4 बहनें हैं, जिन की शादी हो चुकी थी. वे सब अपनी ससुराल में हैं. पिता की औनड्यूटी मृत्यु होने के बाद आश्रित कोटे के तहत कृष्णकुमार की क्लर्क पद पर सरकारी स्कूल में नौकरी लग गई थी. वह अपने मातापिता का इकलौता बेटा था.

कृष्णकुमार के पड़ोस में उस के चाचा मुकेश यादव रहते थे. उन का बड़ा बेटा सन्नी 10वीं कक्षा में फेल हो गया तो उस ने स्कूल छोड़ दिया. वह कोई कामधंधा नहीं करता था. कृष्णकुमार के परिवार के ठाठबाट देखता तो उसे जलन होती थी. क्योंकि कृष्णकुमार के पास करोड़ों रुपए की संपत्ति थी. कृष्णकुमार के नाम करीब 50 बीघा जमीन थी. जोधपुर, राजस्थान के फलोदी में 17 बीघा जमीन, बहरोड़ में 2 कामर्शियल प्लौट, भुंगारका गांव में 32 बीघा जमीन व आलीशान मकान था. यह सब कृष्णकुमार के नाम था.

सन्नी ने योजना बनाई कि अगर कुसुमलता को वह प्यार के जाल में फंसा क र कृष्णकुमार को रास्ते से हटा दे तो वह कुसुमलता से विवाह कर के उस की करोड़ों की प्रौपर्टी का मालिक बन सकता है. आज से करीब 3 साल पहले सन्नी ने कुसुमलता पर डोरे डालने शुरू किए. कुसुमलता रिश्ते में उस की भाभी लगती थी.

सन्नी से कुसुमलता उम्र में 10 साल बड़ी थी. मगर वह जायदाद हड़प कर करोड़पति बनने के चक्कर में अपने से 10 साल बड़ी भाभी के आसपास दुम हिलाने लगा. कृष्णकुमार ड्यूटी पर चला जाता तो कुसुमलता घर में अकेली रह जाती थी. कृष्णकुमार की गैरमौजूदगी में सन्नी उस की बीवी के पास चला आता था. सन्नी कुसुमलता के चाचा ससुर का बेटा था. वह भाभी से हंसीमजाक करतेकरते उसे बांहों में भर कर बिस्तर तक ले आया. कुसुमलता भी जवान देवर की बांहों में खेलने लगी. वह सन्नी की दीवानी हो गई. सन्नी की मजबूत बांहों में कुसुमलता को जो शारीरिक सुख का चस्का लगा, वह दोनों को पतन के रास्ते पर ले जा रहा था.

सन्नी ने कुसुमलता को अपने रंग में ऐसा रंगा कि वह उस के लिए पति के प्राण तक लेने पर आमादा हो गई. आज से करीब डेढ़ साल पहले सन्नी ने कुसुमलता से कहा, ‘‘कुसुम, तुम रात में कृष्णकुमार को बिजली के करंट का झटका दे कर मार डालो. इस के बाद हम दोनों के बीच कोई तीसरा नहीं होगा. पति की जगह तुम्हारी नौकरी भी लग जाएगी. फिर मैं तुम से विवाह कर लूंगा और फिर हम मौज की जिंदगी जिएंगे.’’

‘‘ठीक है सन्नी, मैं पति को रास्ते से हटाने का इंतजाम करती हूं.’’ कुसुमलता ने हंसते हुए कहा.

वह देवर के प्यार में पति की हत्या करने करने का मौका तलाशने लगी. एक दिन कृष्णकुमार रात में गहरी नींद में था. तब कुसुमलता ने उसे बिजली का करंट दिया. करंट का कृष्णकुमार को झटका लगा तो वह जाग गया. तब बीवी ने कूलर में करंट आने का बहाना बना दिया. कृष्णकुमार को करंट का झटका लगा जरूर था, मगर वह मरा नहीं.

यह सुन कर सन्नी बोला, ‘‘कुसुम, जल्द से जल्द कृष्ण का खात्मा करना होगा.’’

‘‘तुम ही यह काम किसी से करा दो. मैं तुम्हारे साथ हूं मेरी जान.’’ कुसुमलता बोली.

कुसुमलता और सन्नी जल्द से जल्द कृष्णकुमार को रास्ते से हटाना चाहते थे. कृष्ण के ड्यूटी जाने के बाद वाट्सऐप कालिंग पर दोनों बातचीत करते थे. सन्नी ने अपने छोटे भाई की शादी कर दी थी. खुद शादी नहीं की थी. उस का मकसद तो करोड़ों की मालकिन कुसुमलता से शादी करना था. सन्नी भाभी से शादी कर के वह जल्द से जल्द करोड़पति बनना चाहता था.

एक दिन सन्नी और कुसुमलता के संबंधों की जानकारी किसी ने कृष्णकुमार को दे दी. बीवी और चचेरे भाई के संबंधों की बात सुन कर कृष्णकुमार को बहुत गुस्सा आया. उस ने अपनी बीवी से इस बारे में बात की तो वह त्रियाचरित्र दिखाने लगी. आंसू बहाने लगी. मगर कृष्णकुमार के मन में संदेह पैदा हुआ तो वह उन दोनों पर निगाह रखने लगा. इस के बाद कुसुमलता ने सन्नी को सचेत कर दिया. दोनों छिप कर मिलने लगे. मगर उन्हें हर समय इसी बात का डर लगा रहता कि कृष्णकुमार को कोई बता न दे.

कृष्णकुमार ने सन्नी से भी कह दिया था कि वह उस के घर न आए. यह बात कृष्ण, कुसुम और सन्नी के अलावा कोई नहीं जानता था. किसी को पता नहीं था कि कृष्ण अपनी बीवी और सन्नी पर शक करता है. ऐसे में कुसुमलता और सन्नी ने उसे एक्सीडेंट में मारने की योजना बनाई ताकि उन पर कोई शक भी न करे और राह का कांटा भी निकल जाए. सन्नी ने इस काम में कुछ खर्चा होने की बात कही तो कुसुमलता ने खुद के नाम की 4 लाख रुपए की एफडी मार्च 2021 के दूसरे हफ्ते में तुड़वा दी. 4 लाख रुपए कुसुम ने सन्नी को दे दिए.

सन्नी ने योजनानुसार 18 मार्च, 2021 को भुंगारका के अजीत से एक लाख 80 हजार रुपए में एक स्कौर्पियो गाड़ी एग्रीमेंट के तहत अशोक कुमार के नाम से खरीदी. अशोक को उस ने 2 छोटे मोबाइल व सिम दिए. इन्हीं सिम व मोबाइल के जरिए अशोक की बात सन्नी से होती थी. कृष्णकुमार को मारने के लिए सन्नी ने अशोक को डेढ़ लाख रुपए भी दे दिए.

उसी स्कौर्पियो गाड़ी से अशोक ने सन्नी के कहने पर कृष्णकुमार का एक्सीडेंट करने की कई बार कोशिश की मगर वह सफल नहीं हुआ. तब 26 मार्च, 2021 को राहुल अपने दोस्त पवन मेघवाल को भुंगारका के हरीश होटल पर ले आया. यहां अशोक से पवन की जानपहचान कराई. रात में तीनों शराब पी कर खाना खा कर होटल पर रुके और सुबह चले गए. 30 मार्च, 2021 को अशोक ने पवन से कहा कि मुझे स्कौर्पियो से एक आदमी का एक्सीडेंट करना है. तुम मेरे

साथ गाड़ी में रहोगे तो मैं तुम्हें 40 हजार रुपए दूंगा.

पवन की अशोक से नई दोस्ती हुई थी और वैसे भी पवन को सिर्फ गाड़ी में बैठे रहने के 40 हजार रुपए मिल रहे थे, इसलिए 40 हजार रुपए के लालच में पवन ने हां कर दी. 31 मार्च, 2021 को अशोक और पवन मेघवाल स्कौर्पियो गाड़ी ले कर जखराना आए लेकिन उस दिन कृष्णकुमार ड्यूटी पर नहीं गया. अशोक रोजाना की बात सन्नी को बता देता था. सन्नी अपनी प्रेमिका भाभी कुसुमलता को सारी बात बता देता था. पहली अप्रैल 2021 को सुबह साढ़े 7 बजे कृष्णकुमार अपने गांव भुंगारका से ड्यूटी पर जखराना निकला. यह जानकारी कुसुमलता ने अपने देवर प्रेमी सन्नी को दी. सन्नी ने अशोक को यह सूचना दे दी.

अशोक कुमार गाड़ी में पवन को ले कर जखराना बसस्टैंड पहुंच गया. जैसे ही कृष्णकुमार मोटरसाइकिल से जखराना बसस्टैंड से स्कूल की ओर जाने लगा, तभी अशोक ने स्कौर्पियो से कृष्णकुमार को सीधी टक्कर मार दी. टक्कर लगते ही कृष्णकुमार उछल कर दूर जा गिरा. इस के बाद अशोक ने गाड़ी को यूटर्न लिया और कृष्णकुमार के ऊपर एक बार चढ़ा दी, जिस के बाद उस की मौके पर ही मौत हो गई. इस के बाद सूचना पा कर बहरोड़ पुलिस आई. प्रत्यक्षदर्शियों ने इसे हत्या बताया. तब पुलिस ने जांच कर हत्या के इस राज से परदा हटाया.

अशोक कुमार और पवन मेघवाल से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने इस हत्याकांड में शामिल रहे सन्नी और उस की प्रेमिका कुसुमलता को भी गिरफ्तार कर लिया. इन दोनों ने भी कृष्णकुमार की हत्या में शामिल होने का अपराध स्वीकार कर लिया. पूछताछ के बाद कुसुमलता, सन्नी यादव, अशोक यादव और पवन मेघवाल को बहरोड़ कोर्ट में पेश किया, जहां से सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया. True Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Bengaluru Crime: रेप नहीं कर सका तो सौफ्टवेयर इंजीनियर की कर दी हत्या

Bengaluru Crime: एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिस ने समाज को झकझोर दिया है. एक सौफ्टवेयर इंजीनियर महिला की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई, क्योंकि उस ने संबंध बनाने से मना कर दिया. आखिर कौन था वह शख्स जो महिला पर दबाव बना रहा था और उस के इंकार करने पर उस की जान ले ली. चलिए जानते हैं पूरी कहानी.

यह सनसनीखेज मामला बेंगलुरु से सामने आया है. किराए के घर में रहने वाली सौफ्टवेयर इंजीनियर के घर 3 जनवरी, 2026 की रात करीब 9 बजे एक व्यक्ति स्लाइडिंग खिड़की से घुस आया. उस ने महिला इंजीनियर के साथ जबरदस्ती संबंध बनाने की कोशिश की और विरोध पर उस का मुंह और नाक दबा दी, जिस से वह अर्धबेहोश हो गई. इस दौरान झड़प में उसे गंभीर चोटें आईं और काफी खून भी बहा.

पुलिस को शुरुआती जांच में शक हुआ कि आग लगने के बाद दम घुटने से मौत हुई होगी. लेकिन जांच तकनीकी साक्ष्यों के आधार आगे हुई तो पुलिस ने पड़ोसी कर्नल कुरई को आरोपी के रूप में चिन्हित किया, जो उस के बगल में रहता था.

पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. पुलिस के अनुसार सबूत मिटाने के लिए उस ने महिला के कपड़े और सामान गद्दे पर रखकर आग लगा दी और वहां से भाग गया. भागते समय उस ने महिला का मोबाइल भी चोरी कर लिया था.

लाश मिलने के बाद पुलिस भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 194(3)(iv) के तहत मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ा रही है. Bengaluru Crime

UP Crime News: नशे में डूबे पति का कहर – गर्भवती पत्नी और मासूम बेटे की हत्या

UP Crime News: एक दिल दहला देने वाली वारदात, जिस ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया. यहां एक शराबी पति ने अपनी गर्भवती पत्नी और ढाई साल के मासूम बेटे को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया. आखिर ऐसी क्या वजह रही कि उस ने अपने ही परिवार को खत्म कर दिया? क्या है इस डबल मर्डर का पूरा सच, पढ़िए पूरी कहानी, जो आप को आने वाले खतरों के प्रति सचेत और सावधान करेगी.

यह दर्दनाक घटना उत्तर प्रदेश में कानपुर (देहात) के घाटमपुर कोतवाली क्षेत्र के गोपालपुर गांव के मजरा सर्देपुर से सामने आई. यहां सुरेंद्र नाम के शख्स ने शराब के नशे में अपनी गर्भवती पत्नी रूबी और ढाई साल के बेटे पर बांके से हमला कर दिया, जिस से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. यह घटना रात करीब 9 बजे की है, जब सुरेंद्र नशे में घर पहुंचा तो पत्नी ने विरोध किया. इसी बात पर दोनों के बीच झगड़ा बढ़ गया और गुस्से में उस ने पहले पत्नी के गले पर बांके से वार किया, फिर मासूम बेटे के सिर पर कई वार कर दिए.

घर से शोर सुनकर आसपास के लोग पहुंचे, लेकिन सुरेंद्र ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. लोगों ने इसे रोज का घरेलू झगड़ा समझ कर अनदेखा कर दिया और वहां से चले गए. इसी बीच मौका पा कर सुरेंद्र घटनास्थल से फरार हो गया. कुछ देर बाद जब आरोपी का भाई पप्पू घर पहुंचा तो वह खून से सने शव देखकर दंग रह गया और तुरंत पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंची पुलिस और फोरैंसिक टीम ने सबूत जुटाए.

डीसीपी दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि जांच में सामने आया है कि नशे में पतिपत्नी में विवाद हुआ और गुस्से में सुरेंद्र ने पत्नी के गले और बेटे के सिर पर बांके से वार कर दोनों की हत्या कर दी. दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. पुलिस ने आरोपी सुरेंद्र को गोपालपुर रेलवे क्रासिंग के पास से गिरफ्तार कर लिया है. UP Crime News

UP Crime: खाना नहीं दिया तो ली पत्नी की जान

UP Crime: अकसर परिवार में घरेलू विवाद होते रहते हैं. क्या आप ने सुना है कि खाने को ले कर भी झगड़ा हो जाता है, लेकिन कोई सिर्फ खाने की वजह से किसी की हत्या कर देगा, यह कम ही सुनने को मिलता है. अब हम आप को ऐसी घटना बता रहे हैं, जिस में पति को समय पर खाना नहीं मिला तो उस ने पत्नी की जान ले ली. आखिर ऐसा क्या हुआ कि पत्नी पति को खाना नहीं दे रही थी, जिस से पति ने यह खौफनाक कदम उठा लिया. आइए जानते हैं इस क्राइम की घटना को विस्तार से.

यह दर्दनाक घटना उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद शहर के कटघर थाना क्षेत्र के देवापुर गांव से सामने आई है. यहां पत्नी पूनम के समय से खाना नहीं देने पर नाराज पति राजू सैनी ने फावड़े से हमला कर उस की हत्या कर दी. वारदात के बाद वह तब तक पत्नी के शव के पास बैठा रहा, जब तक पुलिस मौके पर नहीं पहुंच गई.

परिजनों और गांव वालों का कहना है कि राजू सैनी शराब पीने का आदी है.
एएसपी (नगर) रणविजय सिंह ने बताया है कि राजू लंबे समय से शराब पीने का आदी है. इसी बात को ले कर कई दिनों से उस पत्नी से उस का विवाद चल रहा था. गुरुवार की सुबह दोनों के बीच शराब पीने को ले कर कहासुनी हुई थी, जिस के बाद राजू खेतों पर काम करने चला गया. इस के बाद वह शाम करिब 5 बजे खेतों से लौटा तो उसे पत्नी घर पर नहीं मिली.

वह पास की पशुशाला में पहुंचा तो देखा कि पूनम पशुओं के लिए चारा तैयार कर रही थी. राजू ने पत्नी से खाना देने को कहा, लेकिन पूनम ने कहा कि अभी खाना तैयार नहीं है, जब बनेगा तब दे पाएगी. इसी बात पर दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया. बात इतनी बढ़ गई कि गुस्से में राजू सैनी ने पास पड़ा फावड़ा उठा लिया और पत्नी के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिस से पूनम की मौके पर ही मौत हो गई.
पत्नी के मर जाने के बाद राजू वहीं शव के पास बैठ गया.

इस के बाद आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी. पुलिस पहुंची तो राजू अपनी पत्नी की लाश के पास बैठा मिला, जिसे तुरंत हिरासत में ले लिया गया. UP Crime

West Bengal: नहाने गई तो देखा, नल के नीचे लाश धो रहा था युवक

West Bengal: एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली खौफनाक घटना सामने आई है, जिसे जानकर हर कोई हैरान रह जाएगा. एक महिला जब नहाने के लिए बाहर निकली तो वहां का नज़ारा देखकर उस की सांसें थम गईं. उस ने देखा कि एक शख्स नल के नीचे एक लाश को धो रहा था. यह दृश्य इतना डरावना था कि महिला पल भर के लिए सन्न रह गई.

आखिर वह व्यक्ति कौन था, जो नल के नीचे लाश साफ कर रहा था? उस की मंशा क्या थी? महिला कौन थी और उस का इस घटना से क्या संबंध था? इस सनसनीखेज वारदात के पीछे छिपा पूरा सच क्या है?

यह दर्दनाक घटना पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले से सामने आई है. यहां फिरदौस आलम नाम के युवक ने एक बुजुर्ग की निर्मम हत्या कर दी. जांच में सामने आया कि आरोपी की मंशा बेहद डरावनी थी. वह शव का मांस खाने की नीयत से लाश को साफ कर रहा था.

घटना उस वक्त सामने आई, जब एक महिला नहाने के लिए घर से बाहर निकली. उस ने देखा कि आरोपी नल के नीचे शव को धो रहा है. यह नजारा देखकर वह घबरा गई. पुलिस के मुताबिक यह घटना 16 जनवरी, 2026 शुक्रवार की है. फिरदौस गांव के श्मशान घाट के पास पहुंचा, जहां एक बुजुर्ग व्यक्ति आराम कर रहा था. उस ने बुजुर्ग को बहाने से बुलाया और धान के खेत के पास ले गया. मौका पा कर उस ने चाकू निकाला और बुजुर्ग के गले पर 3 बार वार कर उस की हत्या कर दी.

हत्या के बाद आरोपी शव को कंधे पर उठाकर करीब एक किलोमीटर दूर ले गया और पड़ोसी खातून मलिक के घर के नल के नीचे रख दिया. उस ने शव को साफ करने के लिए मोटर चालू कर दी. मोटर की आवाज सुनकर खातून बाहर आई, तो सामने लाश देखकर उस के होश उड़ गए. खातून के पूछने पर फिरदौस ने कहा कि इस के शरीर से बदबू आ रही है, इसलिए वह इसे नहला रहा है.

यह सुनते ही खातून चीख पड़ी. घबराकर फिरदौस लाश को वहीं से उठाकर भाग गया. इस के बाद आरोपी ने खून से सने कपड़े जला दिए और घर लौट आया. पुलिस ने काररवाई करते हुए फिरदौस को गिरफ्तार कर लिया है. उस के पास से हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद हुआ है. पुलिस ने बताया कि फिरदौस ने कुछ साल पहले अपने पेरेंट्स को खो दिया था और वह मानसिक तनाव में था. हालांकि पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है. आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस भी इस घटना की भयावहता देखकर हैरान रह गई. West Bengal

True Crime Story: लीना मारिया जालसाजी की नायिका

True Crime Story: बात 25 मई, 2013 की है. चेन्नई सेंट्रल क्राइम ब्रांच के इंसपेक्टर विजय कुमार के नेतृत्व में एक पुलिस टीम दिल्ली पुलिस॒ आयुक्त नीरज कुमार से मिली. टीम ने पुलिस आयुक्त को 2 फोटोग्राफ्स दिखाते हुए कहा कि ये दोनों बहुत बड़े जालसाज हैं और चेन्नई के कई लोगों से करोड़ों रुपए ठग कर फरार हो चुके हैं. इन के मोबाइल की लोकेशन बता रही है कि ये दोनों ठग दिल्ली में ही कहीं छिपे हुए हैं. इंसपेक्टर विजय कुमार ने यह भी बताया कि फोटो में जो युवती है, वह एक फिल्म अभिनेत्री है.

पुलिस आयुक्त ने इंसपेक्टर विजय कुमार से दोनों ठगों की काल डिटेल्स ले कर उस पर नजर डाली, तो पता चला कि उन के फोन की लोकेशन दक्षिणी दिल्ली के फतेहपुर बेरी इलाके की आ रही थी. इसलिए उन्होंने चेन्नई सेंट्रल क्राइम ब्रांच की टीम को दक्षिणी दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त बी.एस. जायसवाल के पास भेज दिया. चेन्नई पुलिस टीम दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी बी.एस. जायसवाल के पास पहुंच गई. टीम से बात करने के बाद पुलिस उपायुक्त ने वाहन चोर निरोधी दस्ते के इंचार्ज एसआई बलिहार सिंह को बुलाया और चेन्नई पुलिस के साथ मिल कर इस मामले में जौइंट औपरेशन चलाने को कहा.

चूंकि बलिहार सिंह अंतरराज्यीय अपराध के कई बड़े मामलों का खुलासा कर चुके थे इसलिए सब से पहले उन्होंने पूरे मामले को समझने के बाद चेन्नई क्राइम ब्रांच टीम से आरोपियों के रहनसहन, शौक आदि के बारे में जानकारी हासिल की.  इंसपेक्टर विजय कुमार ने उन्हें बताया कि जिन आरोपियों की उन्हें तलाश है, उन के नाम लीना मारिया पौल और बालाजी उर्फ शेखर रेड्डी उर्फ सुकेश चंद्रशेखर हैं. लीना मारिया पौल एक अभिनेत्री है. खास बात यह है कि ये दोनों ही शाही अंदाज में रहते हैं, महंगी गाडि़यां इस्तेमाल करते हैं और गाड़ी पर नीली या लालबत्ती लगा कर चलते हैं. बलिहार सिंह ने जब दोनों ठगों के फोन की करेंट लोकेशन चेक की तो वह फतेहपुर बेरी क्षेत्र की ही आ रही थी.

फतेहपुर बेरी इलाके में कई बड़े फार्महाउस भी हैं. इस से उन्होंने यही अनुमान लगाया कि वे लोग शायद किसी फार्महाउस में ही रह रहे होंगे. बलिहार सिंह ने एएसआई सुखविंदर सिंह, कांस्टेबल अमित कुमार, नरेश कुमार, मुनिंदर, अनिल कुमार आदि की टीम बना कर तुरंत फतेहपुर बेरी इलाके में भेज दिया और जिस मोबाइल टावर के क्षेत्र में आरोपियों के फोन थे, उस के आसपास के फार्महाउसों पर निगरानी करने को कहा. इस के अलावा उन्होंने फतेहपुर बेरी इलाके के कई प्रौपर्टी डीलरों से भी यह पता लगाने की कोशिश की कि उन की मार्फत किसी आदमी या औरत ने कोई फार्महाउस तो किराए पर नहीं लिया है. लेकिन प्रौपर्टी डीलरों से उन्हें कोई खास जानकारी नहीं मिली.

दिल्ली पुलिस की जो टीम फतेहपुर बेरी इलाके में फार्महाउसों के बाहर वाच कर रही थी, उस ने देखा कि वहां स्थित असोला गांव के खारी फार्महाउस में महंगीमहंगी गाडि़यां आजा रही हैं. एएसआई सुखविंदर ने यह बात बलिहार सिंह को बता दी. बलिहार सिंह ने सुखविंदर से कह दिया कि वह अपना काम इस तरह करें कि उस फार्महाउस में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को भनक न लगे. पुलिस टीम गोपनीय रूप से अपने काम को अंजाम देती रही. अगले दिन पुलिस टीम से बलिहार सिंह को जो रिपोर्ट मिली, वह चौंकाने वाली थी.

उन्हें बताया गया कि फार्महाउस से जो लग्जरी कार निकलती है, उस के शीशों पर काली फिल्म चढ़ी होती है तथा उस के आगे हूटर बजाती हुई एक पायलट कार चलती है और पीछे सुरक्षाकर्मियों की कार. वह सुरक्षाकर्मी काले रंग के सफारीसूट पहने हुए होते हैं. जिस फार्महाउस से वे गाडि़यां निकलती थीं, उस पर एक राजनीतिक पार्टी का झंडा भी लगा हुआ था इसलिए उन्होंने सोचा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि वहां कोई वीवीआईपी रहता हो. इस बारे में बलिहार सिंह ने डीसीपी से बात की तो डीसीपी ने सतर्कता के साथ औपरेशन जारी रखने को कहा.

डीसीपी के आदेश पर बलिहार सिंह भी उस फार्महाउस से कुछ दूर खडे़ हो कर निगरानी करने लगे. शाम के समय उन्होंने फार्महाउस से एक गाड़ी को निकलते हुए देखा. उस गाड़ी के शीशों पर काली फिल्म चढ़ी हुई थी. उस गाड़ी के आगे हूटर बजाती हुई एक पायलट गाड़ी चल रही थी जबकि पीछे सुरक्षाकर्मियों की गाड़ी थी. इस से ऐसा लगा कि फार्महाउस से निकलने वाला कोई महत्त्वपूर्ण व्यक्ति ही होगा.

दिल्ली पुलिस की टीम प्राइवेट गाड़ी में थी. फार्महाउस से निकलने वाला व्यक्ति कौन है और कहां जा रहा है, पता लगाने के लिए दिल्ली पुलिस की टीम भी कुछ फासला बना कर उन कारों के पीछे लग गई. कुछ देर बाद कारों का काफिला वसंतकुंज के एंबियंस मौल के सामने जा कर रुका. बीच वाली कार के रुकते ही पीछे वाली कार में चल रहे 4 बौडीगार्ड फुरती से उतर कर उस कार के पास जा कर खड़े हो गए. 1 बौडीगार्ड ने कार का पिछला दरवाजा खोला तो उस में से एक युवती उतरी. उतरने वाली युवती बेहद खूबसूरत थी.

उस ने जो कपड़े पहन रखे थे, उन से उस की खूबसूरती में और भी चार चांद लग गए थे. बलिहार सिंह ने जेब से फोटो निकाल कर उस युवती से चेहरा मिलाने की कोशिश की. वह मन ही मन खुश हुए क्योंकि वह युवती वही लीना मारिया पौल ही थी. जिस की तलाश में चेन्नई पुलिस दिल्ली आई हुई थी.  लीना मारिया पौल कार से अकेली ही उतरी थी. उस का साथी बालाजी उस के साथ नहीं दिखा. दिल्ली पुलिस दोनों को एक साथ गिरफ्तार करना चाहती थी इसलिए उस ने अकेली लीना मारिया को गिरफ्तार करना उचित नहीं समझा, बल्कि उस के वापस लौटने का इंतजार करने लगी.

थोड़ी खरीदारी कर के लीना मौल से बाहर आई और हूटर बजाती हुई पायलट गाड़ी के साथ असोला गांव के खारी फार्महाउस की तरफ रवाना हो गई. पुलिस उस के पीछेपीछे थी. दिल्ली पुलिस ने लीना मारिया को पहचान लिया था. वह खारी फार्महाउस में रह रही थी. इस का मतलब था कि बालाजी भी वहीं रह रहा होगा. उस वक्त शायद वह फार्महाउस में नहीं था. उम्मीद थी कि रात को वह जरूर आएगा. इसलिए दोनों को गिरफ्तार करने के लिए रात में ही दबिश देना ठीक था. बलिहार सिंह ने टीम के सदस्यों को फार्महाउस की निगरानी पर लगा दिया और अगली काररवाई पर रणनीति बनाने के लिए अपने औफिस लौट आए.

चेन्नई क्राइम ब्रांच की टीम दिल्ली के ही एक होटल में ठहरी हुई थी. डीसीपी बी.एस. जायसवाल ने चेन्नई क्राइम ब्रांच और दिल्ली पुलिस टीम के साथ मीटिंग की और इस संयुक्त टीम को कुछ जरूरी दिशानिर्देश दे कर फार्महाउस में दबिश डालने की इजाजत दे दी. दबिश के लिए उन्होंने जिले के अन्य थानों के कुछ पुलिसकर्मियों को भी उन के साथ भेज दिया. रात होने पर दिल्ली पुलिस ने खारी फार्महाउस को चारों ओर से घेर लिया. हालांकि फार्महाउस की दीवारें 10-12 फुट ऊंची थीं फिर भी फार्महाउस के बाहर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त थे.

पुलिस ने फार्महाउस का गेट खुलवाया तो पहरे पर कई सिक्योरिटी गार्ड तैनात मिले. पुलिस सिक्योरिटी गार्डों से बात ही कर रही थी कि 4 बौडीगार्ड वहां आ गए. उन के हाथों में रिवाल्वर थे. इतनी ज्यादा पुलिस फोर्स देख कर बौडीगार्ड भी सकपका गए. पुलिस ने चारों बौडीगार्डों को काबू में कर के लीना मारिया को भी हिरासत में ले लिया. पुलिस ने पूरा फार्महाउस छान मारा लेकिन लीना मारिया का साथी बालाजी नहीं मिला. पूछताछ करने पर लीना ने बताया कि बालाजी फरार हो चुका है. तलाशी के दौरान वहां से 81 महंगी घडि़यां बरामद हुईं.

ये सभी घडि़यां विदेशी थीं. फार्महाउस में रोल्स रायस फैंटम, निसान जीटीआर, एस्टन मार्टिन, हमर-2, औडी-4, रेंज रोवर, मित्सुबिशी इवो, बीएमडब्ल्यू-5300, लैंड क्रूजर जैसी महंगी गाडि़यां खड़ी हुई थीं. जिन्हें देख कर लीना मारिया की शानोशौकत का अंदाजा लगाया जा सकता था. ये सभी गाडि़यां ऐसी थीं जिन्हें सिर्फ अरबपति ही खरीद सकते हैं. एक साथ इतनी गाडि़यां देख कर पुलिस भी सोच में पड़ गई कि इन लोगों का ऐसा कौन सा काम है जिस की बदौलत इन्होंने इतनी महंगी गाडि़यों का जखीरा खड़ा कर दिया.

पुलिस ने 25 वर्षीया लीना मारिया पौल से जब पूछताछ की, तो ठगी के धंधे से जुड़ने की उस की एक दिलचस्प कहानी सामने आई. लीना मारिया पौल के पिता सी.एस. पौल मूलरूप से केरल के त्रिशूर जिले के रहने वाले थे. शादी से पहले वह एक भारतीय कंपनी में इंजीनियर थे. उन की शादी के कुछ दिनों बाद ही उन की दुबई की मेस्को कंपनी में इंजीनियर के पद पर नौकरी लग गई. कुछ दिनों तक वह दुबई में अकेले रहे, बाद में वह पत्नी को भी साथ ले गए. सी.एस. पौल को अच्छीखासी तनख्वाह मिलती थी इसलिए उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी. उन की जिंदगी मौजमजे से बीत रही थी.

इसी दौरान सी.एस. पौल एक बेटी के बाप बने. जिस का नाम लीना मारिया पौल रखा गया. लीना बेहद खूबसूरत थी. पौल दंपति उसे बहुत प्यार करते थे. उस की परवरिश बहुत ही नाजों में हुई. वह मांबाप की लाडली बेटी थी. घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी. पौल साहब बेटी की हर फरमाइश पूरी करते थे. पौल दंपति ने लाड़प्यार के साथसाथ लीना की पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान दिया. जिस की वजह से वह शुरू से ही पढ़ाई में होशियार रही. पिता ने लीना की दिलचस्पी को देखते हुए उसे बीडीएस (बैचलर औफ डेंटल सर्जरी) कराया. 20 साल की उम्र में वह दांतों की डाक्टर बन गई. लेकिन बीडीएस करने के बाद लीना का विचार ऐसा बदला कि घर वाले देखते ही रह गए.

पौल दंपति का केरल से पैदाइशी जुड़ाव था. अपने नातेरिश्तेदारों से मिलने के लिए वे दुबई से केरल आते रहते थे. बाद में लीना को भी भारत आना अच्छा लगने लगा, तो वह कभीकभार अकेली ही केरल आने लगी. लीना को बौलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्में पसंद थीं. लीना की खूबसूरती और फिगर बहुत ही प्रभावशाली थी. जब भी वह कोई भारतीय फिल्म देखती तो खुद की तुलना फिल्म की हीरोइन से करने लगती थी. वह सोचती थी कि यदि वह भी किसी तरह फिल्मी दुनिया में चली जाए, तो किस्मत खुल जाएगी. दौलत और शोहरत उस के कदमों में होगी. यही सोच कर उस ने डाक्टरी पेशा शुरू करने का विचार छोड़ दिया.

सी.एस. पौल को इस बात का पता नहीं था कि लीना ने दिमाग में कोई दूसरा प्लान बना रखा है. वह तो यही सोच रहे थे कि लीना या तो दुबई के ही किसी अस्पताल में नौकरी करेगी या फिर दांतों का अपना क्लिनिक खोलेगी. मगर एक दिन लीना ने जब पिता को अपने मन की बात बताई तो वह चौंके. उन्होंने उसे समझाया, ‘‘बेटा, फिल्मी दुनिया में जाना इतना आसान नहीं है. इस के लिए बाकायदा ट्रेनिंग की जरूरत होती है. जबकि तुम्हारे पास इस तरह का कोई अनुभव नहीं है. इसलिए तुम ये फालतू की बातें छोड़ कर अपनी प्रैक्टिस करो या कहीं नौकरी कर लो.’’

‘‘डैडी, पता नहीं क्यों मेरा मन डाक्टरी करने को नहीं कर रहा. मैं फिल्म लाइन में अपनी किस्मत आजमाना चाहती हूं. मुझे उम्मीद है कि कोशिश करने पर मुझे सफलता जरूर मिलेगी.’’ लीना ने अपने मन की बात कह दी.

‘‘ठीक है, जैसी तुम्हारी मरजी. मगर ध्यान रखना कि इस लाइन में धोखेबाज बहुत हैं, उन से होशियार रहना.’’

पिता से अनुमति ले कर लीना दुबई से केरल आ गई. लीना खूबसूरत और आकर्षक फिगर की मल्लिका जरूर थी लेकिन उसे एक्टिंग का कोई अनुभव नहीं था. वह जानती थी कि दक्षिण भारतीय फिल्मों और बौलीवुड की फिल्मों में कई हीरोइनों ने मौडलिंग के रास्ते एंट्री की थी और अब वे सफल हैं. लीना ने कुछ ऐसी मौडलिंग एजेंसियों से संपर्क किया जहां मौडलिंग कर के कई लड़कियां फिल्मी दुनिया में गई थीं. लीना के आकर्षक लुक की वजह से एक मौडलिंग कंपनी ने उस के अलगअलग ऐंगल से कुछ फोटो खींचे और छपने के लिए उन्हें एक फेमस मैगजीन में भेज दिया.

मैगजीन में फोटो छपने से लीना मारिया को अच्छी पब्लिसिटी मिली. इस के बाद उस के फोटो कई मैगजीनों में छपे. इस की एवज में लीना को नाममात्र के ही पैसे मिले थे. लीना को इस रास्ते से आगे बढ़ना था इसलिए उस ने पैसों की तरफ ध्यान न दे कर और ज्यादा मेहनत की. कुछ दिनों बाद उस की खुशी तब और बढ़ी जब उसे कुछ विज्ञापन फिल्मों में काम करने का मौका मिला. इस के बाद लीना ने अलगअलग कंपनियों के कई उत्पादों की मौडलिंग की. इस से उसे नाम और दाम दोनों मिले. विज्ञापन फिल्मों में काम करने से लीना मारिया को जो पैसे मिलते, उन से वह अपना लिविंग स्टैंडर्ड मेंटेन करने लगी.

वह फाइवस्टार होटलों में विज्ञापन कंपनियों की तरफ से आयोजित होने वाली पार्टियों में शिरकत करती रहती थी. ऐसी ही एक पार्टी में उस की मुलाकात दक्षिण भारतीय फिल्मों के एक डाइरैक्टर से हुई. वह डाइरैक्टर सुप्रसिद्ध अभिनेता मोहनलाल के साथ ‘रेड चिलीज’ नाम से एक फिल्म बना रहे थे. उन्हें हीरोइन के लिए एक नए चेहरे की तलाश थी. लीना मारिया उन्हें अपनी फिल्म के लिए पसंद आ गई. लीना से उन्होंने अपनी फिल्म में काम करने के बारे में बात की, तो उस ने तुरंत हामी भर दी. क्योंकि यही उस का सपना था. उस के लिए खुशी की बात यह थी कि उसे पहली ही फिल्म में मोहनलाल जैसे सुप्रसिद्ध अभिनेता के साथ काम करने का मौका मिल रहा था. इसलिए उस ने डाइरैक्टर से पैसों के बारे में भी कोई बात नहीं की.

फिल्म बन जाने के बाद रिलीज हुई और दर्शकों को पसंद भी आई. पहली ही फिल्म सफल हो जाने पर लीना का आत्मविश्वास और बढ़ा. लीना की हिंदी और अंगरेजी के अलावा तमिल, तेलुगू और मलयालम भाषाओं पर भी अच्छी पकड़ थी. इसलिए उस ने तय कर लिया था कि उसे जिस भाषा की भी फिल्म मिलेगी, वह साइन कर लेगी. इस के बाद लीना मारिया को मलयालम फिल्म ‘कोबरा’ में काम करने का मौका मिला. इस फिल्म में हीरो ममूटी थे. यह फिल्म भी हिट हुई. फिर उस ने तमिल फिल्म ‘हसबैंड इन गोवा’ में काम किया. कई हिट फिल्में करने के बाद लीना ने बौलीवुड की तरफ कदम बढ़ाने शुरू कर दिए. अपनी अदाकारी के बूते वह बौलीवुड में जाना चाहती थी. इसलिए बौलीवुड में एंट्री के लिए उस ने अपने संपर्क बढ़ाने शुरू कर दिए.

लीना की मेहनत रंग लाई और सुजीत सरकार ने उसे अपनी फिल्म ‘मद्रास कैफे’ के लिए साइन कर लिया. लीना मारिया को इस फिल्म में लिट्टे के एक सदस्य का किरदार निभाना था. फिल्म में मशहूर अभिनेता जौन अब्राहम को लिया गया था. इस फिल्म की शूटिंग भी शुरू हो गई थी. लीना को हर जगह सफलता मिल रही थी इसलिए वह बहुत खुश थी. चूंकि यह सारी सफलताएं उसे फाइवस्टार होटलों की पार्टियों में शरीक होने के बाद ही मिली थीं, इसलिए शूटिंग से निपटने के बाद वह ऐसी पार्टियों में जरूर जाती थी.

ऐसी ही एक पार्टी में लीना मारिया की मुलाकात बालाजी नाम के व्यक्ति से हुई. बालाजी आकर्षक व्यक्तित्व का आदमी था. परिचय में उस ने खुद को पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि का पोता और बड़ा बिल्डर बताया. उस ने लीना की फिल्में देखी थीं, साक्षात मुलाकात होने पर वह मन ही मन उसे चाहने लगा. बालाजी लीना को हर हाल में अपने जाल में फांसना चाहता था इसलिए उस ने उस से कहा, ‘‘आप रामू को तो जानती ही होंगी?’’

‘‘रामू यानी रामगोपाल वर्मा…’’ लीना ने चौंक कर पूछा, तो बालाजी ने हां कहा.

‘‘सर, उन्हें कौन नहीं जानता. वह तो बौलीवुड के जानेमाने डाइरैक्टर हैं. उन्होंने न जाने कितनी हीरोइनों को फर्श से अर्श तक पहुंचा दिया.’’

‘‘वह मेरा दोस्त है. अभी 2 दिन पहले ही उस से मेरी मुलाकात हुई थी.’’ बालाजी ने कहा तो लीना की आंखों में चमक आ गई. वह मन ही मन सोचने लगी कि जब रामगोपाल वर्मा उस का दोस्त है तो उस की मार्फत उसे रामू की फिल्म में काम मिल सकता है. इसलिए वह चहकते हुए बोली, ‘‘सर, मैं खुशनसीब हूं जो आप से मुलाकात हुई. वैसे भी मैं इस वक्त बौलीवुड की तरफ ही ध्यान लगाए हुए हूं. एक फिल्म तो मिल भी चुकी है जिस की शूटिंग कुछ दिनों में खत्म होने वाली है.’’

‘‘लीना, पहली बात तो यह कि मुझे सर..सर कह कर बात मत करो. और दूसरी बात यह है कि रामू से जब मेरी बात हुई थी तो उस ने बताया था कि वह एक फिल्म बना रहा है जिस का अभी नाम नहीं रखा गया है. हीरोइन के लिए उसे किसी नई लड़की की तलाश है. यदि आप इच्छुक हों, तो उस से बात करूं?’’

रामगोपाल वर्मा की फिल्मों में काम करने के लिए तमाम लड़कियां लालायित रहती हैं. जबकि लीना मारिया को यह मौका बड़ी आसानी से मिल रहा था. इसलिए उस ने तुरंत हां कर दी. वह सोचने लगी कि रामगोपाल वर्मा की फिल्मों में काम मिलने से उस की किस्मत चमक जाएगी. इस मुलाकात के बाद लीना की बालाजी के साथ अकसर मुलाकातें होने लगीं. जल्दी ही दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई. बालाजी ने लीना को बौलीवुड के और भी कई डाइरैक्टरों के साथ मुलाकात कराने का आश्वासन दिया. लीना बालाजी के रहनसहन और ठाठबाट से बहुत प्रभावित थी. दोनों की दोस्ती धीरेधीरे प्यार में बदल गई. बाद में लीना ने उसे अपना तन तक सौंप दिया.

बालाजी ने लीना को शाही जिंदगी जीने का ऐसा चस्का लगा दिया कि वह उस की हकीकत जानने के बाद भी उस से दूर नहीं जा सकी. प्यार हो जाने के बाद लीना को पता लगा कि न तो वह पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि का पोता है और न ही कोई बड़ा बिल्डर बल्कि एक बड़ा जालसाज है. उस ने जालसाजी से करोड़ों रुपए कमाए थे. रातदिन मेहनत करने के बावजूद भी लीना इतने रुपए नहीं कमा पाई थी, जितने बालाजी ने उस के सामने ला कर रख दिए थे. बड़ेबड़े बिजनैसमैनों को ठगना बालाजी के बाएं हाथ का खेल था. लीना को बालाजी के साथ रह कर ऐश और कैश दोनों मिल रहे थे इसीलिए वह उस के साथ खुशीखुशी लिवइन रिलेशन में रह रही थी.

लीना ने जौन अब्राहम के साथ जो ‘मद्रास कैफे’ फिल्म की थी, वह अगस्त 2013 में रिलीज होगी. अगर वह चाहती तो उसे बौलीवुड की और भी फिल्मों में काम मिल सकता था लेकिन बालाजी के चंगुल में फंसने के बाद उस ने और फिल्मों में काम करने की कोशिश करनी बंद कर दी थी. मूलरूप से बंगलुरु का रहने वाला बालाजी खुद को कर्नाटक कैडर का आईएएस बताता था. वह कभी अपना नाम शेखर रेड्डी, तो कभी सुरेश चंद्रशेखर रख लेता था. कोच्चि के रहने वाले बैजू की इमैनुवल सिल्क के नाम से एक टेक्सटाइल कंपनी थी.

अपने बिजनैस के प्रमोशन के लिए कुछ बिजनैसमैनों ने प्रसिद्ध हीरो और हीरोइनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है. बैजू ने भी कोट्टायम में अपने एक शोरूम का उद्घाटन कराने के लिए तेलुगू फिल्मस्टार अल्लु अर्जुन को बुलाया था, जिस की वजह से शहर में उन की खासी चर्चा हुई थी. वर्ष 2012 में वह चेन्नई में अपना नया शोरूम खोल रहे थे. इस के लिए वह बौलीवुड की किसी अभिनेत्री को बुलाना चाहते थे. बैजू बालाजी को जानते थे. उन्होंने बालाजी से किसी फिल्मस्टार को बुलाने के बारे में बात की. इस पर बालाजी ने बैजू को आश्वासन दिया कि वह उन के शोरूम के उद्घाटन के लिए बौलीवुड अभिनेत्री कैटरीना कैफ को बुला सकता है मगर वह 20 लाख रुपए लेगी.

बैजू खुश हो गए. उन्होंने बालाजी को 20 लाख रुपए दे दिए और अपने शोरूम का उद्घाटन अभिनेत्री कैटरीना कैफ से कराने के निमंत्रणपत्र छपवा कर बंटवा दिए. इस की पूरे इलाके में चर्चा फैल गई. बौलीवुड की फेमस हीरोइन के आने पर उसे देखने वालों की संख्या बढ़ना लाजिमी था. पुलिस को जब कैटरीना कैफ के आने की बात पता चली तो वह भी सक्रिय हो गई. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने भी पूरी योजना बना ली.

जिस दिन बैजू के शोरूम का उद्घाटन होना था, उस दिन सुबह से ही लोग उन के शोरूम के आसपास जुटने शुरू हो गए थे. भारी तादाद में पुलिस भी वहां पहुंच गई. भीड़ अनियंत्रित होती जा रही थी. सभी लोग कैटरीना कैफ के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. भीड़ को देख कर बैजू खुश हो रहे थे. निर्धारित समय के बाद भी जब कैटरीना कैफ वहां नहीं पहुंची तो दर्शक निराश होने लगे.

बैजू बारबार बालाजी का नंबर मिला रहे थे लेकिन उस का फोन उस समय स्विच्ड औफ आ रहा था. भीड़ काबू करने में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ रही थी इसलिए पुलिस वाले बैजू से बारबार कैटरीना के बारे में मालूमात कर रहे थे. परेशान बैजू की समझ में नहीं आ रहा था कि वह लोगों को क्या जवाब दे. निर्धारित कार्यक्रम के कई घंटों बाद भी जब कैटरीना कैफ वहां नहीं आईं, तो थकहार कर लोग गालियां देते हुए अपनेअपने घर चले गए. बैजू ने किसी और व्यक्ति से शोरूम का उद्घाटन कराया.

बालाजी का नंबर स्विच्ड औफ आने के बाद बैजू को शक हो गया. उन्होंने किसी तरह कैटरीना कैफ के मुंबई स्थित औफिस का फोन नंबर ले कर फोन किया तो पता चला कि कैटरीना कैफ तो इस समय लंदन में एक फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं. उन्होंने किसी को शोरूम वगैरह के उद्घाटन के लिए कोई डेट नहीं दी थी. यह सुन कर बैजू समझ गए कि वह ठगे जा चुके हैं. उन्होंने बालाजी के खिलाफ थाना कलसमरी में धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज करा दी. इस की जांच सबइंसपेक्टर अब्दुल लतीफ को सौंपी गई.

उधर शातिरदिमाग बालाजी ने चेन्नई के अन्नानगर (वेस्ट) एक्सटेंशन में फ्यूचर टेक्निक प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी खोली. इस कंपनी की मार्फत इस बार उस का इरादा मोटा हाथ मारने का था. उस ने अपने एक परिचित एम.बालासुब्रह्मण्यम और उन की पत्नी चित्रा को कंपनी का मैनेजिंग डाइरैक्टर बनाया. इस के बाद उस ने केनरा बैंक की एक शाखा से कंपनी के नाम 19 करोड़ का लोन ले लिया और लीना मारिया के साथ वहां से रफूचक्कर हो कर अंडरग्राउंड हो गया.

बाद में जब बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने कागजों की जांच की, तो पता चला कि बालाजी ने 19 करोड़ रुपए के लोन के लिए जो कागजात जमा किए थे, वे फरजी थे. इस पर बैंक के डिप्टी जनरल मैनेजर टी.एस. नालाशिवम ने बालाजी के खिलाफ भादंवि की धारा 420, 419, 406, 170, 34 के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी. मामला करोड़ों रुपए की जालसाजी का था, इसलिए पुलिस भी हरकत में आ गई और उस ने तुरंत काररवाई करते हुए उस कंपनी के मैनेजिंग डाइरैक्टर एम. बालासुब्रह्मण्यम और उन की पत्नी चित्रा को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने बालाजी की बहुत तलाश की लेकिन वह नहीं मिल सका.

दूसरी ओर बालाजी अंडरग्राउंड रह कर ठगी की दूसरी योजना को अंजाम देने की फिराक में लगा हुआ था. ठगी के कारनामों में अब लीना मारिया भी उस का साथ देने लगी थी. इस बार उस ने ठगी की अलग तरह की वारदात को अंजाम दिया. चेन्नई स्थित स्काइलार्क टेक्सटाइल ऐंड आउटफिटर नाम की फर्म के प्रोपराइटर श्री चक्रवर्ती राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की वर्दियां बनाने का टेंडर लेते थे. टेंडर लेने के लिए वह सरकारी अधिकारियों से भी सांठगांठ रखते थे.

लीना और बालाजी ने चक्रवर्ती को कर्नाटक राज्य के मैडिकल तथा ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के कर्मचारियों की वर्दियां सिलवाने का टेंडर दिलाने के नाम पर उन से करीब 63 लाख रुपए ठग लिए. चक्रवर्ती से बालाजी ने खुद को तमिलनाडु अरबन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का डाइरैक्टर जयकुमार (आईएएस) और लीना मारिया को अपनी सेक्रेटरी बताया था. करोड़ों का फायदा होता देख चक्रवर्ती ने यह रकम खुशीखुशी बालाजी को सौंपी थी. कुछ दिनों तक तो चक्रवर्ती की जयकुमार उर्फ बालाजी से फोन पर बात होती रही, लेकिन बाद में उस का फोन बंद हो गया.

कई दिनों बाद भी बालाजी का फोन चालू नहीं हुआ, तो उन्होंने तमिलनाडु अरबन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के औफिस में संपर्क किया. उस औफिस में पता चला कि वहां जयकुमार नाम का कोई डाइरैक्टर है ही नहीं. ठगी का अहसास होने पर चक्रवर्ती ने 6 मई, 2013 को थाने में भादंवि की धारा 406, 419, 420, 120बी के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी. इस तरह की ठगी के कई मामले हो चुके थे. पुलिस को यह पता चल ही चुका था कि इन मामलों को बालाजी और उस की प्रेमिका अभिनेत्री लीना मारिया ही अंजाम दे रहे हैं इसलिए पुलिस दोनों के फोटो हासिल कर के उन की तलाश में जुट गई. जब थाना पुलिस को सफलता नहीं मिली, तो इस मामले की जांच चेन्नई सेंट्रल क्राइम ब्रांच के हवाले कर दी.

सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने अपने सोर्स के आधार पर लीना मारिया पौल और बालाजी उर्फ शेखर रेड्डी उर्फ सुकेश चंद्रशेखर की तलाश शुरू कर दी. टीम ने कई संभावित जगहों पर दबिशें दीं लेकिन वे दोनों नहीं मिले. उधर लीना मारिया और बालाजी को इस बात की भनक लग चुकी थी कि क्राइम ब्रांच उन के पीछे पड़ी हुई है इसलिए दोनों करीब 2 महीने पहले दिल्ली भाग आए. दिल्ली में उन्हें एक ऐसी जगह की तलाश थी, जो उन के लिए सुरक्षित हो. इस के लिए उन्होंने दक्षिणी दिल्ली के फतेहपुर बेरी के पास असोला गांव में स्थित मोहिंदर सिंह के खारी फार्महाउस को 4 लाख रुपए प्रति महीने किराए पर ले लिया. बातचीत करने के बाद वे दोनों दिल्ली से कहीं चले गए और 15 दिन पहले ही उस फार्महाउस में रहने के लिए आए थे.

चूंकि वे दोनों इस बार कोई बड़ा हाथ मारना चाहते थे इसलिए उन्होंने अपने पास कई लग्जरी और कीमती गाडि़यां रख रखी थीं. साथ ही लीना ने अपने लिए एक एजेंसी से 4 बौडीगार्ड भी ले रखे थे जो काले रंग के सफारी सूट पहनते थे तथा अपने पास रिवाल्वर रखते थे. फार्महाउस के गेट पर बैठने के लिए उन्होंने एक सिक्योरिटी एजेंसी से करीब आधा दरजन सिक्योरिटी गार्ड भी ले रखे थे. लीना मारिया और बालाजी जब भी बाहर निकलते, 3 गाडि़यों के साथ वीवीआईपी अंदाज में निकलते थे. चेन्नई की सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने दोनों के मोबाइल नंबरों को इलैक्ट्रौनिक सर्विलांस पर लगा रखा था.

उन्हें पता चला कि उन्होंने अपने मोबाइल सेटों में वोडाफोन कंपनी के सिमकार्ड डाल रखे हैं. उन की लोकेशन दिल्ली आ रही थी. इसलिए चेन्नई क्राइम ब्रांच टीम ने दिल्ली पुलिस से संपर्क किया और आरोपियों को गिरफ्तार करने में सहयोग मांगा. इस तरह दिल्ली पुलिस ने अभिनेत्री लीना मारिया पौल को गिरफ्तार करने के बाद उसे 28 मई, 2013 को साकेत कोर्ट में चीफ मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जहां से चेन्नई सेंट्रल क्राइम ब्रांच उसे ट्रांजिट रिमांड पर अपने साथ चेन्नई ले गई. इस के अलावा दिल्ली पुलिस ने फार्महाउस से जो 4 बौडीगार्ड हिरासत में लिए थे, उन्हें फतेहपुर बेरी थाना पुलिस के हवाले कर दिया.

फतेहपुर बेरी थाना पुलिस ने जब उन बाउंसरों से पूछताछ की, तो उन्होंने अपने नाम नरेंद्र, राजकुमार निवासी झज्जर, राहुल निवासी फतेहपुर बेरी और प्रदीप निवासी पानीपत बताया. जांच में पता चला कि उन के हथियारों के लाइसेंस हरियाणा और जम्मूकश्मीर से बने थे जो समस्त भारत के लिए वैध थे. लेकिन दिल्ली में कई महीने से रहने के बावजूद उन्होंने इस की सूचना दिल्ली की लाइसेंसिंग अथारिटी को नहीं दी थी. जबकि 1 महीने से ज्यादा रहने पर नियमानुसार सूचना अथारिटी को दी जानी चाहिए थी. इसलिए फतेहपुर बेरी पुलिस ने चारों बाउंसरों के खिलाफ 30 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत कर के उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

फार्महाउस में जो महंगी और लग्जरी गाडि़यां पाई गईं, उन के बारे में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं वे गाडि़यां चोरी की तो नहीं हैं. क्योंकि बालाजी और लीना मारिया ने भले ही करोड़ों रुपए ठगे थे, लेकिन यह रकम इतनी बड़ी नहीं थी कि इतनी महंगी गाडि़यां खरीदी जा सकें. पुलिस उन गाडि़यों के मालिकों का पता लगाने की कोशिश कर रही है. True Crime Story

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित