मनहूस कदम : खाली न गयी मजलूम की आह – भाग 4

वकील ने अजीम से पूछ कर तारीख ले ली. 3 तारीखें यूं ही निकल गईं. चौथी तारीख पर मैं ने उसे जिरह के लिए तलब कर लिया. उस की पूरी तैयारी नहीं थी. उस ने जवाब में लिखा था कि ताहिरा उस की बीवी जरूर थी, लेकिन वह शादी के कुछ दिनों बाद ही सारे गहने ले कर अपने किसी यार के साथ भाग गई थी. बदनामी के डर से उस ने रिपोर्ट नहीं लिखाई. वह खुद घर छोड़ कर गई थी. इसलिए उस ने मेंटीनेंस एलाउंस लेने से मना कर दिया था.

सच बोलने का हलफ लेने के बाद मैं ने पूछा, ‘‘बुखारी साहब, बेगम ताहिरा का दावा है कि वह आप की कानूनी और शरई बीवी है. इस पर आप क्या कहना है?’’

‘‘जो बीवी महीनों से घर से गायब हो, उस का होना भी न होने के बराबर है.’’ अजीम ने जवाब में कहा तो जज ने टोका, ‘‘जज्बाती बयानबाजी की जरूरत नहीं है. हां या ना में जवाब दो.’’

उस ने जल्दी से कहा, ‘‘जी हां, वह शरई और कानूनी लिहाज से मेरी बीवी है, लेकिन प्रैक्टिकली कुछ भी नहीं है.’’

‘‘आप ने जवाब में लिखा है कि शादी के कुछ दिनों बाद वह अपने किसी यार के साथ भाग गई थी. क्या आप उस ‘यार’ का नाम बताएंगे?’’ मैं ने पूछा.

‘‘मैं नाम कैसे बता सकता हूं. ऐसे काम कोई बता कर थोड़े ही करता है.’’ अजीम झुंझलाया.

‘‘यानी आप को ‘यार’ का नाम नहीं मालूम,’’ मैं ने कहा, ‘‘यह तो बता ही सकते हो कि वह रहने वाला कहां का था?’’

‘‘मुझे उस के बारे में कुछ नहीं पता.’’

‘‘आप को उस के बारे में कुछ नहीं पता?’’

इस बार जवाब उस के बजाय वकील ने दिया, ‘‘मेरे मुवक्किल ने अपने बयान में अंदेशा जाहिर किया है कि वह अपने किसी दोस्त के साथ भाग गई थी.’’

‘‘शुक्रिया वकील साहब,’’ मैं ने कहा, ‘‘इस का मतलब भागने का अंदेशा है यानी इस का कोई सुबूत आप के पास नहीं है.’’

मैं ने अगला सवाल किया, ‘‘आप का कहना है कि आप ने बदनामी की वजह से रिपोर्ट नहीं की. इस का मतलब आप ने सोच रखा था कि वह आएगी तो आप उसे रख लेंगे?’’

‘‘जी नहीं, यह तो कोई बेशरम आदमी ही सोच सकता है.’’

‘‘यानी आप उसे तलाक देना चाहते हैं?’’

‘‘जाहिर है, ऐसे में आदमी तलाक ही देगा.’’

‘‘बुखारी साहब, इस हादसे को 9 महीने हो चुके हैं, फिर आप ने अभी तक तलाक नहीं दिया?’’

‘‘मैं ने उस का खयाल ही दिल से निकाल दिया था.’’

‘‘ताहिरा की ओर से आप को एक नोटिस भेजी गई थी, जिस का आप ने जवाब भी दिया था?’’

‘‘जी हां.’’

मैं ने उस की नोटिस जज के सामने रखते हुए कहा, ‘‘बुखारी साहब, आप ने अपने जवाब में लिखा है कि ताहिरा घर बसाने लायक नहीं है, क्योंकि उस ने पहली शादी की बात छिपाई थी. वह मनहूस भी थी, जिस की वजह से आप का काफी नुकसान हुआ.’’

‘‘वकील साहब, मैं इस मामले को तूल नहीं देना चाहता, पर यह सच है कि वह मनहूस है.’’

‘‘बुखारी साहब, आप की दादीदादा और नाना कब मरे थे?’’

‘‘9-10 साल तो हो ही गए होंगे.’’

‘‘क्या आप अदालत को बताएंगे कि आप के दादादादी और नाना की मौत किस मनहूस की वजह से हुई थी?’’

‘‘वे तो अपनी मौत मरे थे.’’

‘‘फिर तो 82 साल की बूढ़ी आप की नानी भी अपनी मौत ही मरी होंगी? इस में ताहिरा को क्यों जोड़ दिया?’’

‘‘वकील साहब, ये बातें आप नहीं समझेंगे.’’

अब मैं जज से मुखातिब हुआ, ‘‘सर, इन की बातों से यह बात सामने आती है कि अजीम बुखारी अंधविश्वासी और कान का कच्चा आदमी है. इस ने इसी बात को ढाल बना कर अच्छी और समझदार बीवी को घर से निकाल दिया है.’’

जज से इतना कह कर मैं बुखारी की ओर मुड़ा, ‘‘बुखारी साहब, आप ने अभी कहा था कि ताहिरा मनहूस थी, इसलिए उसे घर से निकाल दिया है. जबकि जवाब में आप ने लिखा है कि वह अपने यार के साथ भाग गई थी. अब इस में कौन सी बात सही है?’’

‘‘वह घर से भाग गई थी.’’

‘‘यानी आप स्वीकार कर रहे हैं कि आप ने झूठ बोला था. जो आदमी एक बार झूठ बोल सकता है, वह बारबार झूठ बोल सकता है.’’

‘‘आप जो भी समझें. मुझे जो कहना था मैं ने कह दिया.’’

‘‘बुखारी साहब, आप नौकरी के साथसाथ कारोबार भी करते हैं. आप को तनख्वाह तो मिलती ही है, कारोबार से भी ठीकठाक कमा लेते हैं. शादी के बाद आप ने अपने कारोबार में 1 लाख रुपए लगाए थे, जो आप के पास आप की बीवी के अमानत थे.’’

‘‘यह इल्जाम है. मैं किसी 1 लाख के बारे में नहीं जानता.’’

मैं ने बैंक स्लिप की फोटो कौपी दिखाते हुए कहा, ‘‘यह रकम मेरी मुवक्किल ने आप को दी थी, जिसे शादी के चौथे दिन आप ने अपने खाते में जमा कराया था.’’

‘‘वह मेरी अपनी रकम थी.’’

‘‘इतनी बड़ी रकम आप के हाथ कहां से लगी थी?’’ मैं ने पूछा.

बुखारी के वकील ने आगे बढ़ कर कहा, ‘‘सर, यह मेरे मुवक्किल का निजी मामला है. उसे रकम के बारे में बताने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता.’’

अदालत ने इस तरह के सवाल पूछने से मना कर दिया. इसी के साथ अदालत का वक्त खत्म हो गया. बुखारी का वकील काफी लंबी तारीख लेना चाहता था, लेकिन मैं ने कहा कि जिरह अभी मुकम्मल नहीं हुई है, इसलिए अगले दिन की तारीख दे दी जाए. अदालत ने अगले दिन की तारीख दे दी.

शाम को अजीम बुखारी अपनी नई बेगम यासमीन के साथ मेरे औफिस आया. यासमीन ने कहा, ‘‘वकील साहब, आप ने तो समझौता कराने का वादा किया था?’’

‘‘वादा तो किया था, लेकिन मेरी मुवक्किल समझौता के लिए राजी नहीं है.’’

‘‘आखिर वह चाहती क्या है?’’ अजीम बुखारी ने नफरत से पूछा.

‘‘उस की पहली ख्वाहिश है कि किसी तरह समझौता हो जाए. अगर समझौता नहीं होता तो वह अपना हक ले कर ही मामला खत्म करेगी. जिस के बारे में मैं आप को पहले ही बता चुका हूं.’’

‘‘वकील साहब, आप सीरियस हैं?’’ यासमीन ने कहा, ‘‘आप तो ऐसे कह रहे हैं, जैसे सभी चीजें अजीम के पास है.’’

‘‘जी हां, मैं सीरियस हूं. मैडम, आप अपने शौहर से पूछ सकती हैं. ताहिरा के गहने और रकम इन के पास है?’’

‘‘अजीम, तुम तो कह रहे थे कि यह सब झूठ है.’’

अजीम बुखारी नजरें चुराते हुए बोला, ‘‘मैं ने भी उस पर काफी पैसे खर्च किए हैं.’’

‘‘मि. बुखारी, जहां तक मुझे पता है, ताहिरा सिर्फ 21 दिन तुम्हारे घर में रही थी. इतने दिनों में तुम ने उस पर कौन सा कारू का खजाना लुटा दिया?’’

अजीम चुप रहा. यासमीन गुस्से से बोली, ‘‘बोलते क्यों नहीं, वकील साहब की बात का जवाब दो.’’

‘‘डियर, तुम भी किस बहस में उलझ गई. हम यहां लड़ने थोड़े ही आए हैं.’’ अजीम ने बात पलट दी.

क्या ताहिरा सच में मनहूस थी? जानने के लिए पढ़ें हिंदी इमोशनल कहानी का अंतिम भाग…

सूटकेस में बंद हुआ लिवइन रिलेशन – भाग 2

उस के बाद पुलिस हरकत में आई और नैना के घर से नीचे जाने वाली लिफ्ट से ही जांच की शुरुआत की.  सीसीटीवी कैमरे से पता चला कि 9 अगस्त, 2023 को एक अंजान व्यक्ति उस लिफ्ट में सवार हुआ था. पुलिस ने उस के बारे में नैना की बहन जया से पता किया तो उस ने बताया कि वह नैना का बौयफ्रेंड मनोहर शुक्ला है. उस के बाद पुलिस ने 9 से 14 अगस्त, 2023 की सीसीटीवी फुटेज निकाली तो उसी में अहम जानकारी मिल गई.

उसी फुटेज में मनोहर शुक्ला अपनी पत्नी व एक साल की बेटी के साथ नीला सूटकेस ले कर जाते हुए दिखाई दिया था. जबकि उस वक्त नैना उन दोनों के साथ नहीं थी. यह जानकारी मिलते ही डीजीपी रजनीश सेठ और पुलिस कमिश्नर मधुकर पांडे भी नैना के मकान पहुंचे.

लिफ्ट में मनोहर शुक्ला को एक सूटकेस के साथ जाते देख तुरंत ही नायगांव पुलिस ने वलसाड पुलिस से संपर्क किया. तब वलसाड पुलिस ने बताया कि 12 अगस्त, 2023 को एक नीले रंग के सूटकेस में युवती की लाश मिली थी, लेकिन काफी कोशिश के बाद भी जब मृतक की किसी ने भी शिनाख्त नहीं हो सकी थी, जिस के कारण पुलिस ने काररवाई करते हुए उस की लाश का दाह संस्कार करा दिया था.

मनोहर के साथ लिवइन में रहती थी नैना

यह जानकारी मिलते ही पुलिस ने 12 अगस्त को मिले शव वाले सूटकेस से उस का मिलान किया तो दोनों एक ही पाए गए. इस से साफ हो गया था कि नैना का बौयफ्रेंड फ्लैट से जो सूटकेस ले कर निकला था, उसी में नैना की लाश थी और उस का कातिल भी कोई और नहीं, उसी का दोस्त मनोहर शुक्ला ही था.

इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने तुरंत ही मनोहर शुक्ला को पूछताछ के लिए अपनी हिरासत में लिया. शुरू में तो मनोहर शुक्ला आनाकानी करता रहा, लेकिन पुलिस के मनोवैज्ञानिक सवालों के आगे वह ज्यादा देर तक टिक नहीं सका. उस ने अपना अपराध कुबूल कर लिया.

मनोहर शुक्ला ने नैना महतो की हत्या की हैरतअंगेज कहानी पुलिस के सामने बयां की.

कास्ट्यूम डिजाइनर मनोहर शुक्ला और नैना महतो काफी समय से रिलेशनशिप में थे. दोनों एकदूसरे को दिलोजान से चाहते थे. फिर ऐसा क्या हुआ कि मनोहर शुक्ला को अपनी प्रमिका को मौत के घाट उतारने के बाद सूटकेस में भर कर मुंबई से 150 किलोमीटर दूर स्कूटर पर रख कर फेंकना पड़ा. इस सब के दौरान आरोपी मनोहर शुक्ला की पत्नी और उस की एक मासूम बच्ची भी उन के साथ ही रही. इस केस के खुलने के बाद इस मामले में जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार थी.

नेपाल की मूल निवासी 28 वर्षीय नैना महतो साल 2016 में अपने भाई व बहन जया के साथ काम की तलाश में मुंबई आई थी. यहां पर आते ही तीनों ने पूर्वी मुंबई के वसई क्षेत्र में स्थित सनटेक सिटी टाउनशिप में एक छोटा सा मकान किराए पर ले लिया और साथसाथ रहने लगे.

तीनों भाईबहन पढ़े लिखे होने के साथसाथ देखने भालने में भी सुंदर थे. उसी सुंदरता के कारण तीनों को मुंबई में जल्दी ही काम भी मिल गया था. नैना और जया दोनों ने ब्यूटीशियन का कोर्स कर रखा था, जिस की वजह से दोनों बहनों को मुंबई में ब्यूटीशियन के यहां पर काम मिल गया था.

मुंबई में काम करतेकरते दोनों बहनों ने काफी पैसा और शोहरत भी हासिल की. अलगअलग जगहों पर नौकरी करने की वजह से तीनों भाईबहन अलगअलग रह कर अपनाअपना काम संभालने लगे थे. उस समय तक दोनों बहनों ने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग ही पहचान भी बना ली थी. कुछ ही दिनों में जया ने अपनी नौकरी छोड़ कर अपना काम जमा लिया था. फिर नैना भी अपने घर पर रह कर ही संपर्क सूत्रों से अपना काम चलाने लगी थी.

धारावाहिक की शूटिंग पर हुई थी मनोहर से मुलाकात

वर्ष 2016 में नायगांव के एक टीवी धारावाहिक सेट पर नैना की मुलाकात मनोहर शुक्ला से हुई. महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित है वसई विरार. यह मुंबई का उपनगर कहलाता है. 43 वर्षीय मनोहर शुक्ला यहीं का मूल निवासी था. मनोहर शुक्ला कौस्ट्यूम डिजाइनर था, जिस के कारण उस की फिल्मों, संगीत थिएटर और अन्य शो पेश करने वालों में अच्छी जानपहचान थी.

मनोहर शुक्ला से जानपहचान होते ही नैना महतो के जैसे पंख लग गए थे. फिर मनोहर शुक्ला के सहारे उस का काम भी ठीकठाक चल निकला था. उसी सब के चलते कुछ ही दिनों में मनोहर शुक्ला से नैना की पक्की दोस्ती हो गई. धीरेधीरे वही दोस्ती फिर प्यार में बदल गई. उस के प्यार में डूब कर मनोहर शुक्ला नैना के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगा था.

समय के साथ सब कुछ बदला. नैना ने कुछ ही दिनों में अपना सब कुछ मनोहर शुक्ला को समर्पण कर दिया. दोनों के बीच प्यार की सीमा लांघ कर शारीरिक संबंध भी बन गए. नैना मनोहर शुक्ला को अपना पति मानने लगी थी. उस के बाद दोनों ही एक साथ घर से काम के लिए निकलते और साथसाथ ही घर लौटते थे.

उसी दौरान वर्ष 2019 में एक दिन मनोहर शुक्ला अपने स्कूटर से नैना को विरार में जीवनदानी मंदिर घुमाने ले गया. मंदिर में दर्शन करने के बाद मनोहर शुक्ला ने नैना को बताया कि बहुत ही जल्दी उस की किसी युवती के साथ शादी होने वाली है.

“अच्छा तो कब कर रहे हो शादी और वह कौन खुशनसीब है?” कहते ही नैना ने मनोहर शुक्ला की कमर में हाथ डालते हुए अपना सिर उस के कंधे पर टिका दिया था. मनोहर शुक्ला की बात सुनते ही नैना का रोमरोम खिल उठा था. तभी उस के मन में खयाल आया कि इसीलिए वह आज उसे मंदिर में घुमाने लाया है.

नैना को पूरी उम्मीद थी कि वह उसी के बारे में बात कर रहा है. तभी मनोहर शुक्ला ने कहा, “तुम्हें मेरी शादी की बात सुन कर तनिक भी दुख नहीं हुआ.”

“इस में दुख की क्या बात है. मैं इस दिन का कब से इंतजार कर रही हूं और आप दुख की बात कर रहे हो.”

“नैना तुम्हें मेरी शादी से दुख हो या न हो लेकिन मुझे तो बहुत दुख हो रहा है.”

“मैं आप का मतलब नहीं समझी,” मनोहर शुक्ला की बात सुनते ही नैना चौंकी.

तब मनोहर शुक्ला ने बताया, “मेरी शादी तुम्हारे साथ नहीं, बल्कि किसी और लडक़ी के साथ होने वाली है. मेरे परिवार वालों ने मेरे लिए एक लडक़ी ढूंढ ली है. मैं ने उन्हें बहुत समझाने की कोशिश की, लेकिन वे मेरी एक भी सुनने को तैयार नहीं. इतना ही नहीं, घर वालों ने उस लडक़ी के साथ मेरी सगाई भी कर दी.”

मनोहर शुक्ला ने नैना को सारी हकीकत बता दी थी. प्रेमी की यह बात सुनने के बाद भी नैना उस की बात पर विश्वास करने को तैयार न थी.

मनोहर शुक्ला की बात सुनते ही नैना को बहुत गहरा सदमा लगा. वह जैसेतैसे कर के मनोहर के साथ अपने घर पहुंची. घर पहुंचते ही दोनों के बीच झगड़ा शुरू हो गया. उस दिन उसी मनमुटाव के चलते दोनों के बीच बात इतनी बढ़ी कि मनोहर शुक्ला उस पर हाथ छोडऩे को तैयार हो गया था.

उस रात नैना ने न तो खाना बनाया और न ही कुछ खाया था. उस के कारण मनोहर शुक्ला को भी खाली पेट ही सोने पर मजबूर होना पड़ा. अगली सुबह होते ही मनोहर शुक्ला नैना को बिना कुछ बताए ही वहां से चला गया. घर से निकलते ही उस ने अपना मोबाइल भी स्विच औफ कर लिया था.

भाभी की सुपारी का राज – भाग 3

इस बारे में जांच की तो पता चला कि पुष्पेंद्र की मौत के बाद उस के घर वालों ने तय कर लिया था कि सुशीला की शादी पुष्पेंद्र के छोटे भाई मनोज से करा देंगे, मनोज गांव में रह कर खेती संभालता था.

मनोज को लगा कि इस से भाई की मौत पर मिलने वाले पैसे भी उस को मिल जाएंगे. अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति भी सुशीला को मिल जाएगी, लेकिन इधर जब सुधा चौधरी को पुष्पेंद्र की मौत पर रुपयों की एक किस्त मिल भी गई थी तो मनोज को लगा कि इस तरह उस के सारे मंसूबों पर पानी फिर जाएगा.

ऐसे में मनोज ने डेढ़ महीने पहले से सुधा के मर्डर की प्लानिंग शुरू कर दी थी. उस ने सोचा कि सुधा की हत्या के बाद रुपए सुशीला को मिल जाएंगे और प्रौपर्टी में भी बंटवारा नहीं हो सकेगा.

5 लाख रुपए में दी सुधा की हत्या की सुपारी

ऐसे विचार मन में आए तो मनोज अपनी भाभी सुधा का मर्डर करवाने के लिए शूटर की तलाश करने लगा. मगर उसे कोई शूटर नहीं मिला. मनोज तब अपनी दूसरी भाभी सुशीला के भाई माधव व सुशीला के चचेरे भाई शिशुपाल निवासी बैरू का नगला, जिला मथुरा, उत्तर प्रदेश से मिला.

मनोज ने सुशीला के दोनों भाइयों माधव और शिशुपाल से कहा, “सुधा का मर्डर करवा दो. हमारी संपत्ति को ले कर मामला चल रहा है. हम लोग बरबाद हो रहे हैं. सुधा की मौत के बाद सारी संपत्ति सुशीला और मेरी हो जाएगी.”

“मनोज, मर्डर तो हो जाएगा लेकिन पैसे खर्च करने पड़ेंगे. पैसों के लिए शूटर की लाइन लगा दूंगा.” माधव ने कहा.

“कितने रुपए लगेंगे सुधा के मर्डर के?” मनोज ने पूछा.

“5 लाख खर्च करने पड़ेंगे. मैं काम करवा दूंगा.” शिशुपाल बोला.

सुधा की मौत के लिए 5 लाख में सौदा तय हो गया. माधव जाट ने एक नाबालिग से संपर्क किया, जो उस की जानपहचान का था एवं भरतपुर का रहने वाला था. माधव ने उस से सुधा का मर्डर करवाने के लिए 5 लाख में सौदा तय कर लिया.

मनोज ने 4 हजार रुपए एडवांस में दे दिए. बाकी रकम काम हो जाने के बाद देने का वादा किया. सुधा के मर्डर से 2 दिन पहले माधव ने 22 जून, 2023 को नाबालिग को 2 कट्टे ला कर दे दिए. नाबालिग और माधव ने सुधा की पहचान कर ली. उन्हें पता था कि सुधा सुबह भरतपुर में स्थित अपने गैस प्लांट जाती है और शाम के समय में नदबई वापस लौटती है.

24 जून, 2023 को बाइक पर आगे माधव व पीछे नाबालिग नदबई बस स्टैंड पर निगाह जमाए दोपहर बाद से खड़े थे. शाम करीब 4 बजे जब सुधा बस से उतर कर बेटे अनुराग के साथ स्कूटी पर घर के लिए निकली तो ये दोनों उस का पीछा करने लगे. रास्ते में सुधा ने खरीदारी की.

इस के बाद जब स्कूटी पर मांबेटा रवाना हुए तो माधव ने बाइक स्कूटी के पीछे भगा दी. कासगंज रोड पर मौका मिलते ही माधव ने बाइक जब स्कूटी के बराबर की तो नाबालिग ने दोनों कट्टों को दोनों हाथों में लिया और सुधा पर गोलियां दाग दीं और फरार हो गए.

अनुराग ने माधव जाट को पहचान लिया था. हत्या वाले दिन 24 जून, 2023 को भी मनोज दोनों शूटरों के संपर्क में था. जब उसे खबर मिल गई कि सुधा की हत्या कर दी गई है तो मनोज भी जयपुर भाग गया था.

पुलिस के हत्थे चढ़े आरोपी

मनोज के द्वारा शूटर के बारे में दी जानकारी के बाद पुलिस टीमें उत्तर प्रदेश रवाना हो गईं. 26 जून, 2023 को नदबई थाने की पुलिस ने आरोपी मनोज को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. पुलिस ने आरोपी माधव, शिशुपाल व एक नाबालिग के फरार होने के बाद उन तीनों पर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया था.

एसएचओ श्रवण पाठक को 27 जून, 2023 को आरोपियों माधव जाट और शिशुपाल जाट की मोबाइल लोकेशन मथुरा की मिली थी. पुलिस टीम राजस्थान से उत्तर प्रदेश पहुंच कर तलाश कर रही थी.

पुलिस टीम को सूचना मिली थी कि माधव और शिशुपाल एक नाबालिग के साथ धनवाड़ा पूंठ की खदानों में छिपे हुए हैं. वे तीनों रात को कहीं बाहर जाने की फिराक में हैं. फिर क्या था, पुलिस टीम अंधेरा घिरते ही धनवाड़ा पूंठ की खदानों में आरोपियों की तलाश में जुट गए.

पुलिस टीम जब सर्च करते हुए एक बंद पड़ी खदान में पहुंची तो तीनों आरोपी वहां से भागने लगे, पुलिस टीम ने पीछा किया. हड़बड़ाहट में तीनों आरोपी खदान में दौड़ते समय गिर कर घायल हो गए. पुलिस टीम ने उन तीनों को हिरासत में लिया और तीनों को कुम्हेर अस्पताल ले गए. जहां से तीनों आरोपियों का प्राथमिक उपचार करा कर भरतपुर के सरकारी अस्पताल आरबीएम ले आई.

माधव, शिशुपाल और नाबालिग से पुलिस ने पूछताछ की तो उन्होंने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. सुधा चौधरी की हत्या का जुर्म कुबूल करने के बाद नाबालिग को बाल न्यायालय में पेश कर बाल सुधार गृह भेज दिया गया. वहीं आरोपियों माधव जाट और शिशुपाल जाट का आरबीएम सरकारी अस्पताल, भरतपुर में 28 जून, 2023 को इलाज कराया. उन के पैरों में चोट लगी थी, इस कारण प्लास्टर किया गया था.

चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सुधा चौधरी हत्याकांड का पूरी तरह खुलासा हो चुका था. एसपी मृदुल कच्छावा ने 28 जून, 2023 को प्रैसवार्ता कर सुधा चौधरी हत्याकांड का खुलासा कर दिया.

पुलिस ने सुशीला एवं अन्य से पूछताछ की. मगर उन की संलिप्तता सुधा मर्डर में कहीं नजर नहीं आई. कथा संकलन तक आरोपियों माधव और शिशुपाल जाट का अस्पताल में इलाज चल रहा था.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मोहब्बत वाली गली – भाग 3

सालों बाद जानीपहचानी गलियों से गुजरते हुए मुझे खुशी भी हो रही थी और अफरोज की याद भी आ रही थी. मैं सोच रहा था कि वह अपने अब्बू की एकलौती बेटी थी, इसलिए मलिक साहब का पुश्तैनी मकान उसी को मिला होगा. अगर उस ने और उस के पति ने मकान बेचा नहीं होगा तो संभवत: वह उसी मकान में रह रही होगी.

अगर ऐसा हुआ तो उस के दर्शन हो सकते थे. मैं उसे एक नजर देखना चाहता था, उस के पति को भी और शायद बच्चों को भी. लेकिन मेरे पास कोई बहाना नहीं था, उस मकान का दरवाजा खटखटाने का.

मैं सोच में डूबा आगे बढ़ रहा था. मोड़ से घूम कर जब मैं ने मकान नंबर 7 के सामने जा कर साइकिल की घंटी बजाई तो अंदर से अधेड़ उम्र की औरत ने चिक हटा कर बाहर झांका, तब तक मैं आगे बढ़ गया था. उस ने पीछे से आवाज दी, ‘‘ओ भैया डाकिए, कोई चिट्ठी है क्या मेरी?’’

मैं ने पीछे मुड़ कर देखा, खिचड़ी बालों और ढलती उम्र के बावजूद उसे पहचानने में मुझे जरा भी देर नहीं लगी. वह अफरोज ही थी, जो अपनी उम्र से 10-15 साल ज्यादा की लग रही थी. मैं लौट कर उस के पास आ गया. मेरे अंदर आंधियां सी चल रही थीं, दिल बैठा जा रहा था. मुझे जैसे अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था. मैं ने आह सी भरते हुए पूछा, ‘‘तुम अफरोज ही हो न?’’

‘‘हां, और तुम वही जो मेरे गुलाबी खत लाया करते थे?’’ उस ने आश्चर्य से पूछा, जैसे यकीन न हो रहा हो.

‘‘हां, वही हूं.’’ मैं ने डूबे से स्वर में कहा.

‘‘इतने दिन बाद मिले हो, चाय तो पीते जाओ. मुझे अच्छा लगेगा.’’ उस ने आग्रहपूर्वक कहा तो मैं साइकिल खड़ी कर के अंदर चला गया. मेरे मन में उस गुलाबी खत वाले को देखने की इच्छा थी, जो अफरोज का शौहर बना होगा और जिस की वजह से उस की यह हालत हुई होगी.

अंदर घर का हाल 19 साल पहले जैसा ही था. कहीं कोई बदलाव नहीं, अफरोज ने मुझे बैठने के लिए कुरसी दी. मैं ने इधरउधर देखा. घर में न कोई बच्चा था, न कोई और. वह चाय बनाने जाने लगी तो मैं ने पूछ लिया, ‘‘वह गुलाबी खत वाले साहब नजर नहीं आ रहे अफरोज?’’

अफरोज ने एक ठंडी सांस ली, फिर बोली, ‘‘वह खत तो मैं खुद ही लिखती थी, अपने खत अपने लिए.’’

‘‘लेकिन क्यों?’’

‘‘ताकि तुम खत पहुंचाने आओ और मैं एक नजर तुम्हें देख सकूं. मुझे प्यार हो गया था तुम से, मुझे पता नहीं था कि प्यार इतना खतरनाक होता है.’’

मुझे काटो तो खून नहीं, मैं बुत बना बैठा रहा. अपने शब्दों से मेरी चुप्पी का ताला उस ने ही खोला, ‘‘चाह कर भी कभी कह नहीं सकी, शायद अब्बा की वजह से. सोचती थी, किसी न किसी दिन कहूंगी जरूर. लेकिन तुम ने आना ही बंद कर दिया.’’

मुझ में कुछ कहने की हिम्मत नहीं थी, पर उस की बात सुनने के बाद सदमे से निकलने के लिए कुछ कहना तो था ही, सो बोला, ‘‘तुम्हारे अब्बा तुम्हें ले कर चिंतित रहते थे. मुझ से तुम्हारी शादी के बारे में जिक्र भी किया था उन्होंने. मेरे मन में उम्मीद भी जगी थी और मैं उन से बात भी करना चाहता था, लेकिन यह सोच कर चुप रह गया था कि तुम तो गुलाबी खत वाले से प्यार करती हो, रोजाना खत लिखता है वह तुम्हें.’’

‘‘नहीं, कोई नहीं था मेरी जिंदगी में तुम्हारे अलावा.’’ उस ने नजरें झुका कर दुखी स्वर में कहा तो मैं ने पूछा, ‘‘तुम ने शादी की या नहीं?’’

‘‘नहीं, यह सोच कर बरसों तक तुम्हारा इंतजार करती रही कि शायद तुम फिर लौट कर आओगे, पर तुम नहीं आए. फिर अब्बा नहीं रहे तो अकेली रह गई. धीरेधीरे यह सोच कर इंतजार करना भी छोड़ दिया कि तुम ने अपनी गृहस्थी बसा ली होगी. गुजरबसर तो करनी ही थी, सो बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगी. अब तो अपने आप को ही भूल गई हूं.’’

मेरी आंखों से आंसुओं का झरना फूटने को तैयार था और वह दरिया की तरह शांत थी. अचानक उस ने पूछा, ‘‘तुम्हारा नाम क्या है? देखा, प्यार तो कर लिया पर नाम कभी नहीं पूछा. मौका ही कहां मिला था.’’

‘‘अशरफ.’’

हिम्मत नहीं थी, जरूरत भी नहीं. फिर भी मैं ने सवाल किया, ‘‘अब भी प्यार करती हो मुझ से?’’

‘‘नहीं, न तुम से न अपने आप से. अब मैं सिर्फ उन बच्चों से प्यार करती हूं, जो मेरे पास पढ़ने आते हैं. किसी के प्यार की निशानी हैं.’’

मैं बुझे दिल से उठा और साइकिल उठा कर निकल आया मोहब्बत वाली उस गली से.

कर्नल का इश्क बना रिस्क – भाग 2

दरअसल, पुलिस ने जब शव की जांच की तो देखा कि मृत युवती के शरीर पर जो ड्रेस है वह जुडियो कंपनी की ड्रेस है और काफी महंगे ब्रांड की है. इसी से लगा कि महिला कोई सामान्य परिवार की नहीं हो सकती. क्योंकि इतने महंगे ब्रांड की ड्रेस कोई साधारण परिवार की लड़की नहीं पहन सकती. जब जानकारी एकत्र की गई तो पता चला कि इस ब्रांड की ड्रेस बेचने वाले शहर में 2 ही शोरूम हैं. अगर वहां से इसे खरीदा गया होगा तो अवश्य ही कोई जानकारी मिलेगी.

पुलिस की चौथी टीम को मृतका की शिनाख्त का काम सौंपा गया.

240 वाहनों में से 18 पाए गए संदिग्ध

इधर जब पुलिस की तीसरी टीम ने जुडियो ब्रांड के शोरूम जाखन व किशन नगर से जानकारी हासिल की तो पाया गया कि उक्त  दोनों शोरूम से बिलकुल उसी तरह की 8 ड्रेस बिकी हैं. पुलिस ने उन सभी ड्रेस के खरीदारों के बिल, फोन नंबर और नामपते हासिल कर लिए तथा एकएक कर उन से जानकारी एकत्र करनी शुरू कर दी.

पुलिस की पहली टीम तो घटनास्थल के आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही थी, उसे लगभग 300 मीटर की दूरी पर बने एक ग्रामीण के घर में पूछताछ करने पर पता चला कि घटना 9 और 10 सितंबर की रात में हुई है. उस घर में रहने वाले पंकज पटवाल ने बताया कि रात करीब 11 बजे के लगभग जब वह अपनी गाड़ी से उस रास्ते से हो कर अंदर आया था, तब तक वहां कोई लाश नहीं थी. इस का मतलब साफ था कि वारदात रात 11 बजे के बाद ही हुई है.

raipur police inspect at murder spot

लिहाजा पुलिस की दूसरी टीम ने रात 11 बजे से अलसुबह 4  बजे तक महाराणा प्रताप चौक से थानो रोड की ओर जाने वाले व थानो रोड से महाराणा प्रताप चौक की ओर आने वाले सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चैक करनी शुरू कर दी.

पुलिस की टीमों ने उसी दिन करीब 100 सीसीटीवी कैमरे खंगाले और थानो रोड से महाराणा प्रताप चौक की ओर रात 11 बजे से सुबह 4 बजे तक आनेजाने वाले करीब 240 वाहनों की एक लिस्ट बनाई, जो इस दौरान इस रास्ते से गुजरे. पुलिस टीम द्वारा लगातार चेक किए गए वाहनों के आनेजाने के समय का आंकलन शुरू किया तो 18 वाहन ऐसे पाए गए, जिन के समय में संदिग्धता पाई गई.

पुलिस टीम ने कड़ी मेहनत के बाद इन सभी चौपहिया वाहनों के नंबर और वाहन मालिकों के पते हासिल किए तथा उन के पते तस्दीक किए गए. वाहनों के मालिकों से एकएक कर जानकारी लेनी शुरू कर दी.

इसी जांच के दौरान पुलिस टीम को एक किया कार जिस का नंबर  यूके-07 डीएक्स 5881 था और उस का ओनर  रामेंदु उपाध्याय, निवासी प्रेमनगर पंडितवाड़ी, जनपद देहरादून था. वह पुलिस की नजरों में संदिग्ध हो गई.

दरअसल, जब पूछताछ और छानबीन की जा रही थी तो पता चला कि जिस वक्त की ये घटना है उस दौरान वाहन मालिक रामेंदु उपाध्याय का मोबाइल फोन स्विच्ड औफ था. घटना के दौरान महाराणा प्रताप चौक से थानो चौक तक पहुंचने में जितना समय लगता है, उस की गाड़ी करीब 42 मिनट का अतिरिक्त समय लगा कर थानो चौक के आखिरी सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई थी. जबकि वहां पहुंचने के लिए काफी कम समय लगता था.

रामेंदु उपाध्याय अचानक पुलिस की जांच टीम के रडार पर आ गया. टीम ने उस की निगरानी शुरू कर दी. एक टीम उस के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकाल कर उस की कुंडली खंगालने लगी. मोबाइल फोन में कुछ ऐसी जानकारी थी कि पुलिस का शक यकीन में बदलने लगा कि हो न हो, मृतक महिला की मौत में कहीं न कहीं रामेंदु उपाध्याय का हाथ है.

लेकिन उस ने मृतका को क्यों मारा और मरने वाली कौन थी, इस बारे में अभी तक पुलिस के हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लगा था सिवाय इस बात के कि मृतका के शरीर पर जुडियो ब्रांड की जो मिडी मिली थी, ठीक वैसे ही रंग और साइज की एक मिडी रामेंदु उपाध्याय ने 3 सितंबर को जुडियो के किशन नगर शोरूम से खरीदी थी और उस दिन मृतक युवती भी उस के साथ थी.

दरअसल, शोरूम के स्टाफ ने मृत महिला की फोटो उस के शरीर पर मौजूद ड्रेस और रामेंदु उपाध्याय की फोटो दिखा कर इस बात की तस्दीक कर ली थी. पुलिस के पास रामेंदु उपाध्याय के खिलाफ इतने साक्ष्य तो थे ही कि उसे हिरासत में ले कर पूछताछ की जा सके.

लेफ्टिनेंट कर्नल को किया गिरफ्तार

पुलिस टीम ने उच्चाधिकारियों के आदेश पर 11 सितंबर, 2023 की सुबह लेफ्टिनेंट कर्नल रामेंदु उपाध्याय को उस के घर प्रेमनगर पंडितवाड़ी से हिरासत में ले लिया और उस का मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिया. थाने में पुलिस ने उस से पूछताछ शुरू कर दी.

शुरू में तो रामेंदु उपाध्याय इधरउधर की कहानी सुनाता रहा. उस ने पुलिस को बताया कि उस का मृतक महिला से कोई लेनादेना ही नहीं है.  लेकिन तब तक पुलिस उस के मोबाइल को खंगालने के बाद मृतका के साथ रामेंदु उपाध्याय की फोटो और मृतक के फोन की लिस्ट में एक मोबाइल नंबर जो श्रेया के नाम से दर्ज था, उस पर काल की लंबीचौड़ी लिस्ट और वाट्सऐप चैट को खंगाल चुकी थी.

जब रामेंदु उपाध्याय ने देखा कि उस की पोल खुल चुकी है तो उस ने कुबूल कर लिया कि जिस महिला की लाश पुलिस को मिली है, वह उस की प्रेमिका श्रेया थी और उस की  हत्या उसी ने की थी. एसपी (सिटी) सरिता डोभाल और सीओ अभिनव चौधरी के समक्ष एसएचओ कुंदन राम और जांच अधिकारी नवीन जोशी ने पूछताछ की तो सेना के एक अधिकारी की कामकुंठा की ऐसी कहानी सामने आई, जिस में उस ने अपनी प्रेमिका को मौत की नींद सुला दिया.

जिस युवती की हत्या हुई थी, उस की पहचान श्रेया शर्मा उर्फ सुमित्रा निवासी शिवबहादुर चौक चिसापानी, जिला तनहु, नेपाल के रूप में हुई.  जबकि रामेंदु उपाध्याय मूलरूप से उत्तराखंड के जिला देहरादून के प्रेमनगर पंडितवाड़ी का रहने वाला है.  रामेंदु साल 1999 में बतौर जवान सेना में भरती हुआ था. बाद में डिपार्टमेंटल कमीशन पा कर 2010 में वह लेफ्टिनेंट कर्नल बन गया. 2019 में उस की शादी हो गई. उस की एक बेटी है. उस की पत्नी देहरादून के पंडितवाड़ी में एक पीजी चलाती है.

मनहूस कदम : खाली न गयी मजलूम की आह – भाग 3

लगभग डेढ़ महीने बाद ताहिरा ने आ कर बताया, ‘‘वकील साहब, अजीम ने चोरी से शादी कर ली है. अब वह जल्दी ही अमेरिका जाने वाला है.’’

मुझे इसी बात का इंतजार था. मैं ने पूछा, ‘‘शादी कब हुई?’’

‘‘एक हफ्ते पहले,’’ ताहिरा ने कहा, ‘‘अब वह जल्दी ही अमेरिका चला जाएगा.’’

‘‘तुम इस की चिंता मत करो, मैं अभी पता किए लेता हूं.’’ कह कर मैं ने मकबूल के घर का नंबर मिला कर बड़ी होशियारी से लड़की से ही पता कर लिया कि वह अमेरिका कब जा रही है. उस ने बताया था कि वह तो जल्दी ही चली जाएगी, लेकिन अजीम बुखारी बाद में आएगा, क्योंकि उसे कागजात तैयार कराने होंगे.

अगले दिन मैं ने अदालत में मुकदमा दाखिल कर दिया. अदालत ने सम्मन भिजवा कर सुनवाई के लिए 15 दिन बाद की तारीख दे दी. मैं ने अजीम बुखारी का पता उस के घर के बजाय मकबूल हुसैन के घर का दिया था. मेरा मकसद था कि मकबूल हुसैन और यासमीन, दोनों को अजीम बुखारी की पहली शादी का पता चल जाए.

सम्मन ले जाने वाले चपरासी को मैं ने कुछ रुपए दे कर ताकीद कर दी थी कि वह यासमीन या मकबूल हुसैन के सामने ही सम्मन तामील कराएगा. अगर अजीम घर में न हो तो घर वालों को सम्मन के बारे में बता देगा.

दोपहर बाद चपरासी ने लौट कर बताया कि सम्मन तामील हो गया है. अजीम घर पर ही था. दरवाजा उस की बीवी यासमीन ने खोला था. तब उस ने जोर से पुकार कर कहा था, ‘‘अजीम साहब, आप की पहली बीवी ताहिरा ने आप के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. यह उसी का सम्मन है.’’

उस की बात पर यासमीन बुरी तरह से चौंकी. चपरासी के हाथ से कागज ले कर उसे पढ़ा. फिर अजीम को खा जाने वाली नजरों से घूरते हुए बोली, ‘‘अजीम, यह तो तुम्हारे नाम है. तुम्हारे फादर का भी नाम लिखा है. इस का मतलब तुम ने मेरे साथ फ्रौड किया है.’’

‘‘प्लीज, अभी शांत रहो. मैं तुम्हें सारी बात समझा दूंगा.’’ कह कर उस ने रसीद पर दस्तखत किए और चपरासी को थमा दिया.

3 बजे मैं ने मकबूल हुसैन के घर फोन किया तो फोन यासमीन ने उठा कर तेज लहजे में ‘हैलो’ कहा. वह गुस्से में लग रही थी. शायद अजीम से जम कर लड़ाई हुई थी.

मैं ने बड़ी नरमी से कहा, ‘‘मैं ताहिरा का वकील अमजद बेग बोल रहा हूं.’’

‘‘मुझे न आप से कोई मतलब है न अजीम से.’’ उस ने कहा.

‘‘चपरासी ने बताया था कि अजीम आप के ही यहां है. अजीम चाहे तो मैं अपनी मुवक्विल से उस का समझौता करा सकता हूं,’’ मैं ने ताहिरा के बारे में विस्तार से बता कर कहा, ‘‘वह बहुत नेक औरत है. इतना सब होने के बाद भी वह समझौते के लिए तैयार है.’’

मैं ने अजीम बुखारी और यासमीन के निकाहनामे की नकल निकलवा ली. उसी दिन शाम के वक्त एक दुबलीपतली औरत मेरे औफिस में आई. उस की उम्र 30 साल के आसपास थी, बाल कटे हुए थे, गाल अंदर धंसे हुए थे, रंग गोरा था. आते ही उस ने पूछा, ‘‘आप ही मिर्जा अमजद बेग एडवोकेट हैं?’’

‘‘जी हां.’’ मैं ने कहा.

‘‘मैं यासमीन बुखारी, आप से अजीम बुखारी वाले मामले में बातचीत करने आई हूं.’’

मैं ने उसे बैठने का इशारा करते हुए कहा, ‘‘कहिए, आप क्या कहना चाहती हैं?’’

‘‘मुझे अजीम ने उस औरत के बारे में सब बता दिया है. मैं इस मामले को खत्म करना चाहती हूं,’’ उस ने बेरुखी से कहा, ‘‘आप कुछ रकम दिलवा कर उस से मेरे शौहर का पीछा छुड़वा दीजिए.’’

‘‘उस की कुल अदायगी 1 लाख 42 हजार की है, गहने अलग से.’’

‘‘1 लाख 42 हजार,’’ वह चौंकी, ‘‘गरीब लोग इसी तरह फैलते हैं.’’

‘‘गरीबों में यही तो खराबी है.’’ मैं ने कहा, ‘‘मिसेज यासमीन, आप तो कुछ दिनों में चली जाएंगी, फिर यह समझौता कैसे होगा? आप केस खत्म हुए बगैर पैसे देंगी नहीं? मुझे अपनी मुवक्किल से भी बात करनी होगी कि वह राजी है या नहीं?’’

‘‘मैं अभी नहीं जा रही हूं वकील साहब. उम्मीद है कि 40-50 हजार में मामला निपट जाएगा. अगर बात बन जाती है तो मुझे फोन कर दीजिएगा.’’

‘‘कोशिश करूंगा. आप के शौहर ने तो वकील कर ही लिया होगा? आप अपने शौहर से जवाब दाखिल करा दीजिए. इस से हमारी पोजीशन साउंड हो जाएगी.’’ मैं ने सलाह दी.

‘‘उस ने किसी वकील से बात तो की है. मैं आप का यह संदेश उसे दे दूंगी.’’ कह कर वह बाहर निकल गई.

अजीम बुखारी ने अपने वकील से जवाब दाखिल करा दिया था. मेरे सामने पड़ने पर बोला, ‘‘बेग साहब, आप तो बड़े छिपे रुस्तम निकले. लेकिन आप ने जो चाल चली, वह मेरे लिए फायदेमंद रही. शादी की बात एक न एक दिन यासमीन को मालूम होनी ही थी, आप के जरिए मालूम होने से मेरे सिर से बोझ उतर गया.’’

मैं ने हंस कर कहा, ‘‘मैं हमेशा दूसरों का ही भला चाहता हूं.’’

‘‘लेकिन मेरी बेगम से आप ने मामला सुलटाने का जो वायदा किया था, उस का क्या हुआ?’’

‘‘अभी मेरी मुवक्किल से बात नहीं हुई है. लेकिन आप ने रकम काफी कम रखी है. इतने में बात बनना मुश्किल है.’’ मैं ने कहा.

अजीम मुझे एक किनारे ले जा कर बोला, ‘‘वकील साहब, आप बात कर लें. मैं 10-20 हजार रुपए और बढ़ा सकता हूं. लेकिन यह बात मेरी बेगम को मालूम नहीं होनी चाहिए. आप किसी तरह यह मामला जल्दी निपटवा दें. अगर मुझे अमेरिका जाने की जल्दी न होती तो मैं ताहिरा को एक पैसा न देता. केस भले ही बरसों चलता.’’

अजीम के जाने के बाद मैं ने उस के वकील से कहा, ‘‘आप का मुवक्किल मामला जल्द खत्म करवाना चाहता है. इसलिए आप एक हफ्ते की तारीख ले लें.’’

आगे की कहानी जानने के लिए पढ़ें Hindi Emotional Kahani का चौथा भाग…

सूटकेस में बंद हुआ लिवइन रिलेशन – भाग 1

मनोहर शुक्ला के घर पहुंचते ही नैना और उस के बीच काफी कहासुनी हुई. नैना ने मनोहर शुक्ला को साफ चेतावनी दी कि अगर तुम ने मुझे फ्लैट खरीद कर नहीं दिया तो मैं एसिड पी कर आत्महत्या कर लूंगी. उस के बाद तुम सारी जिंदगी मेरी हत्या के आरोप में जेल में सड़ोगे.

नैना की यह धमकी सुन कर मनोहर शुक्ला के तनबदन में आग लग गई. उसी गुस्से के आवेग में मनोहर शुक्ला ने पीछे से नैना के बाल पकड़ लिए और कहा, “ठीक है जब तुम्हें मरने का ही शौक है तो इस में मैं ही तुम्हारी मदद करता हूं.”

कह कर मनोहर शुक्ला उस को खींच कर बाथरूम में ले गया. वहां पर पहले से ही पानी का एक बड़ा टब भरा हुआ था. बाथरूम में ले जाते ही उस ने उस के मुंह को कई बार टब में भरे पानी में डुबोया और तब तक डुबोता रहा, जब तक उस की मौत नहीं हो गई.

नैना का मर्डर करने के बाद उस की लाश को उस ने बिस्तर पर लिटा दिया. फिर उस का मोबाइल और घर की चाबी ले कर वह अपने काम पर चला गया था.

नेपाल की मूल निवासी 28 वर्षीय नैना महतो अपने भाईबहन के साथ रोजगार की तलाश में मुंबई पहुंची. मुंबई में जाते ही तीनों भाई बहनों ने वसई के नायगांव में एक किराए का मकान लिया और उसी में रहने लगे. वहीं से तीनों के काम की शुरुआत हुई. सब से पहले नैना की बहन जया को एक ब्यूटीशियन के यहां काम मिला. फिर उस के सहारे से ही नैना भी काम पर लग गई. उस के भाई ने भी वहीं पर अपना काम लगा लिया था.

उसी काम करने के दौरान एक दिन नैना की मुलाकात कास्ट्यूम डिजाइनर मनोहर शुक्ला से हुई. जानपहचान दोस्ती तक जा पहुंची और फिर प्यार हुआ. उस के बाद नैना ने अपने भाईबहन से अलग किराए का मकान ले लिया, जहां पर नैना और मनोहर शुक्ला लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगे.

फिर एक दिन ऐसा भी आया कि नैना ने मनोहर शुक्ला के साथ सारी जिंदगी गुजारने का वचन ले लिया. लेकिन मनोहर शुक्ला ने उस के साथ शादी करने से साफ मना कर दिया था. उसी दौरान एक दिन नैना के सामने मनोहर शुक्ला की हकीकत सामने आई. पता चला कि वह शादी करने से पहले ही पूर्णिमा नामक युवती के साथ शादी कर चुका था.

यह जानकारी मिलने के बाद मनोहर शुक्ला और नैना के बीच आपसी संबधों को ले कर मनमुटाव पैदा हो गया. फिर नैना ने मनोहर शुक्ला की हरकतों से परेशान हो कर उस पर बलात्कार का केस दर्ज करा दिया, जिस में मनोहर शुक्ला को एक महीने जेल में रहना पड़ा. जेल से जमानत मिलने के बाद वह फिर से नैना के संपर्क में आ गया. दोनों फिर से पहले की तरह मिलने लगे.

12 अगस्त, 2023 की बात है. महाराष्ट्र के नायगांव से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर गुजरात के वलसाड में एक खाड़ी के पास पड़े एक बैग को देख कर लोग हैरत में पड़ गए, लेकिन उस बैग के पास जाने की कोई भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था. लोगों को डर इस बात का था कि अगर उस बैग में कोई बम हुआ तो उस से कोई बड़ा हादसा हो सकता है. यही सोच कर वहां पर मौजूद लोगों ने तुरंत इस की सूचना वलसाड पुलिस को दी.

सूटकेस में निकली लाश

खाड़ी के पास लावारिस पड़े बैग की सूचना पाते ही पुलिस आननफानन सूचना में बताए गए पते पर पहुंची. बैग की जगह पहुंचते ही पुलिस ने सब से पहले बैग के आसपास की छानबीन की, वहां पर पुलिस को किसी वाहन के आनेजाने के कोई प्रमाण नहीं मिले.

उस के बाद पुलिस ने उस बैग को खुलवाया तो उस में जो निकला, उसे देखते ही तहलका मच गया. उस बैग में एक युवती का सड़ागला शव था, जिस से तेज दुर्गंध आ रही थी. शव की हालत बेहद खराब थी. उस का चेहरा तक पहचानने में नहीं आ रहा था.

पुलिस ने जैसेतैसे कर उस युवती के शरीर का बारीकी से निरीक्षण कराया तो उस युवती के शरीर पर त्रिशूल का एक टैटू बना हुआ था. साथ ही उस के गले में ओम पेंडेंट वाली एक चेन भी थी, जिस से साबित हो गया था कि मृतका कोई हिंदू युवती ही थी.

सूटकेस में मिली लाश के पुलिस ने हर ऐंगल से फोटोग्राफ्स कराने के बाद अपनी काररवाई पूरी करते हुए लाश का पंचनामा भरने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. लेकिन पोस्टमार्टम की जो रिपोर्ट आई, उस से उस युवती की मौत का जो कारण सामने आया, वह काफी चौंका देने वाला था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया कि युवती की मौत पानी में डूबने से हुई थी. रिपोर्ट पढ़ कर पुलिस भी हैरान हुई कि जब युवती की मौत पानी में डूबते से हुई तो उस का शव बैग में इस तरह से पैक कर के क्यों डाला गया था? यह पुलिस के लिए एक हैरान करने वाली बात थी. इस मामलेे में पुलिस ने एडीआर (आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट) दर्ज की थी.

मामले को एडीआर में दर्ज करने के बाद पुलिस ने हर तरह से मृतका की शिनाख्त कराने की पूरी कोशिश की. सोशल मीडिया से ले कर न्यूजपेपर व न्यूज चैनलों पर उस की सूचना प्रसारित कराई, लेकिन कोई लाभ नहीं मिला. फिर भी पुलिस ने उस युवती के शरीर से डीएनए कराने के लिए कुछ सैंपल भी सुरक्षित करा लिए थे. युवती के शव की बिगड़ी हालत को देखते हुए पुलिस ने उस का अंतिम संस्कार करा दिया था.

जया को मिली नैना के गायब होने की खबर

जया मुंबई की टीवी इंडस्ट्री में मेकअप आर्टिस्ट थी. अगस्त के महीने में जया किसी शूटिंग के सिलसिले में पुणे जिले में स्थित लोनावला में गई हुई थी. उसी दौरान मुंबई निवासी उस के दोस्त मेकअपमैन प्रमोद शाह ने उस के नंबर पर बात की.

प्रमोद शाह ने पूछा, “आजकल नैना कहां पर है. न तो उस का फोन ही मिल रहा है और न ही वह अपने फ्लैट पर मौजूद है. उस के फ्लैट के बाहर से ताला लगा हुआ है.”

यह जानकारी मिलते ही जया ने भी कई बार उसे फोन लगाने की कोशिश की, लेकिन उस का फोन स्विच्ड औफ आ रहा था. यह जान कर जया हैरत में पड़ गई कि नैना अचानक बिना बताए कहां चली गई. वह अपना काम बीच में छोड़ कर मुंबई स्थित नैना के फ्लैट पर पहुंची. लेकिन उस वक्त भी उस के फ्लैट पर ताला लटका हुआ था.

जब जया की समझ में कुछ नहीं आया तो उस ने तुरंत ही पूर्वी मुंबई के नायगांव थाने में उस की मिसिंग की सूचना दर्ज करा दी. चूंकि नैना टीवी इंडस्ट्री से जुड़ी हुई थी, ऐसे में उसे काम के सिलसिले में कई बार बाहर भी जाना पड़ता था. इसी कारण पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया.

उस के बाद भी जया नैना के साथ हुई किसी अनहोनी का शक करते हुए बारबार पुलिस पर उसे ढूंढने का अनुरोध करती रही. तब जया के अनुरोध पर पुलिस ने नैना के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकाली, जिस से पता चला कि नैना का मोबाइल 9 अगस्त, 2023 से बंद है.

यह जानकारी मिलते ही नायगांव एसएचओ रमेश पंढरीनाथ भामे ने इस मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत ही नैना की खोज में लग गए.

भाभी की सुपारी का राज – भाग 2

पुलिस टीमों ने मनोज के संभावित जगहों पर होने की परिजनों से जानकारी ली. इस के बाद मनोज को उसी रात जयपुर से धर दबोचा और उसे पुलिस टीम थाने ले आई.

25 जून, 2023 को थाने में उस से सख्ती से पूछताछ की तो सुधा चौधरी हत्याकांड पर से परदा उठ गया. पुलिस ने 24 घंटे में ही मर्डर मिस्ट्री सौल्व कर ली. हत्या का आरोपी कोई और नहीं बल्कि सुधा का देवर मनोज ही निकला. उस ने ही 5 लाख रुपए में अपनी भाभी सुधा चौधरी की हत्या कराई थी. उस से पूछताछ के बाद सुधा चौधरी की हत्या की जो सनसनीखेज कहानी सामने आई, वह इस प्रकार है—

राजस्थान के भरतपुर जिले के अंतर्गत एक गांव बुढ़वारी खुर्द आता है. इसी गांव में पुष्पेंद्र सिंह चौधरी अपने परिवार रहता था. बचपन से ही मेहनती पुष्पेंद्र पढ़ाई के साथ खेलकूद में भी अव्वल था. सुबह जल्दी उठ कर दौड़भाग करने वाला पुष्पेंद्र सीआरपीएफ में भरती हो गया था.

घर परिवार में खुशियां मनाई गईं. पुष्पेंद्र की जब सरकारी नौकरी लगी तो आज से 18 साल पहले उस के योग्य लडक़ी की खोजबीन शुरू हुई. एक रिश्तेदार ने हाथरस (उत्तर प्रदेश) के सालाबाद निवासी बदनसिंह की बेटी सुधा के बारे में बता कर हिम्मत सिंह चौधरी से कहा, “चौधरी साहब, मेरी मानो तो पुष्पेंद्र के लिए सुधा जैसी गोरी और बला की खूबसूरत बीवी ले आओ. सुधा पढ़ीलिखी और सर्वगुण संपन्न है.”

“एक दिन आप साथ चल कर बता दें तो फिर देख कर रिश्ता पक्का करें.” हिम्मत सिंह ने कहा.

“शुभ काम में देरी नहीं करनी चाहिए. कल ही चलते हैं तैयार हो जाओ.”

“चलो ठीक है, कल चलते हैं.”

इस तरह सालाबाद (हाथरस) आ कर सुधा को देखा. गोरे रंग की तीखे नयननक्श वाली सुधा को पहली नजर में ही पुष्पेंद्र के लिए पसंद कर लिया गया. रिश्ता पक्का कर दिया गया. थोड़े दिन बाद शादी का मुहूर्त निकला. आज से 18 वर्ष पूर्व पुष्पेंद्र की सुधा से शादी हो गई.

एक साल बाद सुधा को बेटा हुआ, उस का नाम अनुराग रखा गया. अनुराग के जन्म के बाद सुधा उसे पालने पोसने में लग गई. पति ज्यादातर ड्यूटी पर रहते थे. बेटे की देखरेख में घर का काम समय पर नहीं होता तो सास उस से लडऩे लगती थी.

सुधा लाख सफाई देती कि वह अनुराग को नहलाधुला रही थी. मगर सास उस की एक भी न सुनती और कहती, “हम ने भी तो बच्चे पैदा किए थे, उन्हें संभालते हुए घर का सारा कामकाज करते थे. खेती का काम भी करती थी और पशु भी पालते थे.”

वगैरह वगैरह तमाम बातें बता कर यह जताती थी कि तुम कामचोर हो.

मां के बहकावे में उजाड़ी गृहस्थी

सासबहू की रोज किचकिच होने लगी. पुष्पेंद्र छुट्टी पर घर आता तो मां उस के कान भरती. पुष्पेंद्र मां का पक्ष लेता तो सुधा उस से लड़ पड़ती. पुष्पेंद्र भी लड़ पड़ता. अनुराग मात्र 2 साल का था तब यानी आज से 15 साल पहले रोजरोज के झगड़ों से आजिज आ कर सुधा अपने मायके जा बैठी.

पुष्पेंद्र को मां इस कदर भडक़ाती कि पुष्पेंद्र को सुधा फूटी आंख नहीं सुहाती थी. एक बार पतिपत्नी का रिश्ता खराब हुआ तो वह वक्त के साथ टूटता ही गया. सुधा काफी समय मायके में रही. फिर वह नदबई आ कर रहने लगी. उस ने भरतपुर में औक्सीजन गैस प्लांट पार्टनरशिप में लगा लिया. इस प्लांट से उसे अच्छी आय होती थी.

सुधा कासगंज रोड नदबई में अपने बेटे अनुराग के साथ रहती थी. वह सुबह भरतपुर गैस प्लांट जाती और शाम तक नदबई वापस लौट आती. सुधा एक तरह से अपने बेटे अनुराग के लिए जी रही थी. सुधा और पुष्पेंद्र ने तलाक नहीं लिया था. मगर वे अलगअलग पिछले 15 सालों से रह रहे थे.

पुष्पेंद्र ने एक तरह से सुधा को शादी के 2 साल बाद ही छोड़ दिया था. दोनों के बीच तलाक नहीं हुआ था. इस के बावजूद पुष्पेंद्र ने 3 साल पहले बेरू का नंगला, मथुरा (उत्तर प्रदेश) निवासी सुशीला के साथ दूसरी शादी कर ली. हालांकि कोर्ट से तलाक हुए बिना यह शादी गैरकानूनी थी.

सुशीला से भी एक बेटा लाव्यांश हो गया था. सुधा को जब पुष्पेंद्र की सुशीला से दूसरी शादी एवं उस के बाद बेटा होने का पता चला तो वह जलभुन गई थी. सुधा चौधरी नदबई नगरपालिका के दिसंबर 2021 में हुए चुनावों में कांग्रेस के टिकट से वार्ड नंबर 21 की प्रत्याशी थी. मगर वह चुनाव हार गई थी.

चुनाव के बाद सुधा चर्चा में आ गई थी. सुधा चौधरी जाट महासभा की यूथ विंग की अध्यक्ष भी थी. वह राजनीतिक पार्टियों में पूरी तरह से एक्टिव रहती थी. उस के और पुष्पेंद्र के बीच कोर्ट में तलाक का मुकदमा चल रहा था, लेकिन तलाक हुआ नहीं था. पति से अलग होने के बाद से सुधा अपने मातापिता को हाथरस से नदबई ले आई थी. वह मातापिता और बेटे अनुराग के साथ नदबई में रहती थी.

पुलिस को जांच में पता चला था कि परिवार में विवाद है. 2 पत्नियों के बीच विवाद के 4 कारण थे. पुष्पेंद्र सिंह सीआरपीएफ में थे. उन की दुर्घटना में 27 जुलाई, 2022 को मृत्यु हो गई थी. इस के बाद फैमिली क्राइम के तानेबाने बुनने शुरू हो गए.

पुष्पेंद्र की मौत के बाद भिड़ गईं दोनों पत्नियां

पुष्पेंद्र सिंह की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति के नियम के तहत बेटे को नौकरी दी जानी थी. ऐसे में सुधा चौधरी और सुशीला दोनों ही अपनेअपने बेटों को नौकरी दिलाना चाहती थीं. इस के अलावा दूसरा कारण पति की पेंशन भी थी.

पुष्पेंद्र की मौत के बाद सरकार की ओर से लाखों रुपए दिए जाने थे. इन पैसों के लिए भी सुधा और सुशीला के बीच में लड़ाई शुरू हो चुकी थी. साथ ही पुष्पेंद्र के नाम पर गांव में खेती की काफी जमीन है. इस को लेकर भी दोनों में विवाद था.

जांच में पुलिस को पता चला कि सुशीला ने आधार कार्ड से ले कर अपने सारे डाक्यूमेंट्स में नाम चेंज करवा लिया था. उस के खिलाफ नदबई थाने में सुधा चौधरी ने रिपोर्ट भी दर्ज करवा दी थी. सुशीला के बेटे लाब्यांश के पिता के नाम को ले कर भी मथुरा गेट थाने में सुधा ने रिपोर्ट दर्ज करवा दी थी.

मामले में सब से बड़ा सवाल यह था कि जब पुष्पेंद्र की दोनों पत्नियों के बीच विवाद था तो देवर मनोज ने भाई पुष्पेंद्र की पहली पत्नी सुधा की हत्या की सुपारी क्यों दी?

कहानी के अगले अंक में पढ़िए, मनोज ने क्यों अपनी ही भाभी की हत्या करवा दी?

मोहब्बत वाली गली – भाग 2

लगातार कई महीने तक खत आने से लिफाफे पर लिखा रहने वाला साफसुथरा पता मेरी आंखों में बस गया था. मैं मन ही मन सोचता था कि खत लिखने वाला भी अफरोज की तरह ही सुंदर होगा. फिर एक दिन अचानक एक अजीब घटना घटी.

उस दिन सुबह से ही बादल छाए थे. मैं डाक ले कर निकला तो फुहारें पड़ रही थीं. लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं लग रहा था कि तेज बारिश होने लगेगी. मैं जल्दी से घर वापस लौटने का इरादा कर के उस्मानाबाद पहुंच गया. तब तक तेज बरसात होने लगी थी. पूरी तरह भीग जाने के बावजूद मैं सीधा उस के दरवाजे पर जा कर रुका.

डाक में उस दिन भी उस के नाम का लिफाफा था. मैं ने सोचा, मुझे भीगता देख कर वह अंदर आने के लिए कहेगी और अगर मौका मिला तो मैं उस के सामने अपना हालेदिल बयां कर दूंगा. मैं उस से कहूंगा कि मेरे जैसा प्यार करने वाला उसे कहीं नहीं मिलेगा. लेकिन जैसे ही मेरी साइकिल की घंटी बजने पर दरवाजे की चिक उठी, मेरे सारे अरमानों पर ओस पड़ गई.

चिक हटाने वाला एक बूढ़ा आदमी था. वह अफरोज का पिता भी हो सकता था, इसलिए मैं गुलाबी रंग का लिफाफा हाथ में दबाए सोच रहा था कि वह उसे दूं या न दूं. तभी उस के पिता के कंधों के ऊपर मुझे उस की काली आंखें दिखाई दीं, जिन्हें देख कर ऐसा लगा जैसे वह लिफाफा न देने की विनती कर रही हो. एक क्षण के लिए मेरी समझ में नहीं आया कि मैं क्या करूं, लेकिन मैं तुरंत ही संभल कर बोला, ‘‘चचा मियां, बारिश का बड़ा जोर है. क्या आप..?’’

‘‘हां..हां आओ, आओ बेटा.’’ बुजुर्ग ने मेरी बात पूरी होने से पहले ही बड़े प्यार से कहा और पीछे हट गया. वह बुजुर्ग अफरोज के पिता ही थे, मलिक साहब.

मैं अंदर चला गया. अंदर छोटा सा कमरा था, जिस में एक ओर चारपाई पर सफेद बिस्तर बिछा था और दूसरी ओर एक मेज के पास 2 कुर्सियां पड़ी थीं. मलिक साहब ने एक कुरसी मेरी ओर खिसका दी और दूसरी पर खुद बैठ गए.

‘‘बेटा अफरोज, अंगीठी जला कर ले आओ.’’ उन्होंने जोर से पुकारा. फिर मेरी ओर प्यार से देख कर बोले, ‘‘इस मौसम का भी कोई भरोसा नहीं, सुबह जब मैं दुकान पर गया था तो मौसम साफ था. फिर हलकीहलकी बूंदाबांदी होने लगी, लेकिन इस तरह अचानक तेज बारिश की उम्मीद नहीं थी.’’

इस के बाद वह इधरउधर की बातें करते रहे. इसी बीच अफरोज अंगीठी ले आई. बातोंबातों में जब उन्होंने कहा कि आजकल अच्छे लड़कों की कमी है तो मैं ने कहना चाहा कि मैं अच्छा लड़का हूं और आप का बोझ हलका करना चाहता हूं. लेकिन चाह कर भी मैं कुछ नहीं कह सका.

मलिक साहब बाप की हैसियत से अफरोज की बात कर रहे थे. उन्होंने बताया कि एक बेटी के अलावा उन की कोई औलाद नहीं है. कुछ समय पहले पत्नी की मौत हो गई थी. जमाना खराब है और बेटी अकेली, इसलिए उसे घर में ही रखते हैं. बाहर आनेजाने पर भी पाबंदी लगा रखी है.

मैं यह सोच कर दिल ही दिल में हंस रहा था कि वह अपनी बेटी के इश्क के बारे में कुछ नहीं जानते. साथ ही मन को तसल्ली भी दे रहा था कि उन की बेटी ने जिस का चुनाव किया होगा, वह मुझ से अच्छा ही होगा. मेरे मन ने चाहा कि मैं उन से कहूं कि चचा मियां, आप चिंता न करें. अफरोज ने आप का बोझ खुद ही हलका कर दिया है.

एक पल के लिए मन में खयाल भी आया कि मलिक साहब के सामने खुद को पेश कर दूं. लेकिन मैं ऐसा न कर सका. क्योंकि ऐसा करना एक तरह से जबरदस्ती होती. वह भी एक ऐसी लड़की के साथ, जो किसी से प्यार करती थी.

‘‘बेटा अफरोज, चाय बना ला.’’ मलिक साहब ने कहा तो वह किचन में चली  गई.

कुछ देर बाद वह चाय बना लाई. तभी मलिक साहब को खांसी उठी और वह थूकने के लिए बाहर चले गए. उसी वक्त मैं ने चुपके से गुलाबी लिफाफा उस के हाथ पर रख दिया. लिफाफा ले कर वह मेरी ओर देख कर मुसकराई और अंदर चली गई.

अधिकतर डाकियों की कईकई साल तक एक ही जगह ड्यूटी रहती थी, लेकिन शायद मैं नौकरी में नया था या अफरोज से रोज मिलना मेरे भाग्य में नहीं था. जो भी हो, जल्दी ही मेरी ड्यूटी उस्मानाबाद से बदल कर जौहराबाद में लगा दी गई.

अब साधारण डाक के अलावा मुझे रजिस्ट्री और मनीआर्डर बांटने का काम भी दे दिया गया था. वक्त के साथ सालों बीत गए. इस बीच मेरी शादी हो चुकी थी. जबतब ड्यूटी भी बदलती रहती थी. लेकिन मैं अफरोज को कभी नहीं भूल सका.

मैं अपनी पत्नी और 2 बच्चों के साथ रहते हुए कभीकभी सोचता था कि अगर अफरोज ने मुझ से प्यार किया होता तो हम दोनों कितने खुश होते. अब तो वह न जाने किस घर में बैठी राज कर रही होगी. पता नहीं कौन था वह, जिसे वह चाहती थी. मुझे उस की किस्मत से ईर्ष्या होती थी. क्योंकि वह न होता तो मैं अपने सपनों की उस रानी को जरूर पा लेता जो आज भी मेरे दिल में बसी हुई थी.

19 साल बाद की बात है. एक दिन उस्मानाबाद का पोस्टमैन बीमार हो गया तो अपने इलाके के अलावा मुझे उस्मानाबाद की डाक भी बांटने के लिए दे दी गई. उस्मानाबाद के नाम पर मुझे अफरोज की याद आ गई. मन उस से मिलने, उसे देखने को मचल उठा. इसलिए सब से पहले मैं ने उस्मानाबाद की डाक में गली नंबर 2 के 7वें मकान की डाक ढूंढने की कोशिश की, लेकिन मुझे उस पते का कोई खत नहीं मिला.

मुझे यह सोच कर खुद पर हंसी आ गई कि 19 साल बीत गए, पता नहीं अफरोज कहां होगी. कितने बच्चों की मां होगी और मैं आज भी उसे देखने, उस से मिलने की सोच रहा हूं. बहरहाल, पता नहीं क्याक्या सोचते हुए मैं उस्मानाबाद पहुंच गया.

कर्नल का इश्क बना रिस्क – भाग 1

“क्या कर्नल साहब, इतना पसंद करते हो हमें तो बता क्यों नहीं  दिया. “बगल में लेटी 21 वर्षीय श्रेया ने रामेंदु के सीने के बालों को अपने हाथों से सहलाते हुए कहा.

“हां, यह तो है. आप को बहुत चाहता हूं मैं. क्योंकि आप इतनी खूबसूरत हैं कि आप से मिलने की चाहत मुझे रोज आप के पास खींच लाती है.” रामेंदु ने भी अपने मन की बात  कह दी.

“चाहत थी तो एक बार इजहार कर देते. हमें भी तो आप जैसे दोस्त की चाहत है.”   कहते हुए श्रेया ने अपने अधर उस के होंठों पर रख दिए. फिर क्या था, थोड़ी ही देर में दोनों जिस्म एक हो गए.

उस रात रामेंदु को श्रेया ने वो चरमसुख दिया, जो रामेंदु को कभी अपनी नईनवेली पत्नी से नहीं मिला था. उस रात श्रेया और रामेंदु के बीच जो रिलेशन बने, उस के बाद तो दोनों के रिश्ते ऐसे परवान चढ़े कि पहले कुछ दिन वे एक प्रेमीप्रेमिका की तरह मिलते रहे और एकदूसरे को प्यार करते रहे, लेकिन कुछ ही महीनों में दोनों सिलीगुड़ी में एक निजी मकान ले कर पतिपत्नी की तरह रहने लगे.

श्रेया ने अब डांस बार में काम करना छोड़ दिया था. वक्त तेजी से गुजरने लगा.

10 सितंबर, 2023 की सुबह के करीब 7 बजे का वक्त था. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में लोग ठीक से नींद से जगे भी नहीं थे. पुलिस तो वैसे भी रात भर जाग कर लोगों की सुरक्षा करने और अपराधियों को जुर्म करने से रोकने का काम करती है. लिहाजा उस की दिनचर्या तो वैसे भी थोड़ा देर से ही शुरू  होती है.  ऐसे में अगर सुबह के 7 बजे पुलिस स्टेशन में जा कर कोई किसी बड़े अपराध की सूचना दे तो पुलिस वालों के मुंह का स्वाद कसैला होना लाजिमी है.

देहरादून के रायपुर थाने में पहुंच कर सोडा सरोली गांव के प्रधान प्रवेश कुमेड़ी ने भी जब ये सूचना दी कि माल देवता रोड पर सिरवालगढ़ में एक युवती का शव संदिग्ध अवस्था में पड़ा है तो थाने के कार्यालय इंचार्ज और हैड मुंशी को ऐसा लगा कि किसी ने सुबह के वक्त उन्हें करेले का जूस पिला दिया है.

लेकिन वक्त चाहे कोई भी हो और सूचना कैसी भी हो, पुलिस को तो अपना काम हर हाल में करना ही होता है. सूचना ऐसी थी कि पुलिस जैसे महकमे में होने के कारण हैड मुंशी को अपनी जिम्मेदारी का अहसास हुआ. उन्होंने थाना परिसर में बने क्वार्टर में एसएचओ कुंदन राम को जब ये जानकारी दी तो तड़के तक गश्त करने के बाद गहरी नींद से जागे एसएचओ कुंदन राम की नींद काफूर हो गई.

आननफानन में वरदी पहन कर वह अपने कार्यालय में पहुंचे और उन्होंने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को तत्काल एकत्र होने का संदेश भिजवाया. अगले 10 मिनट में थाने का सारा स्टाफ वहां मौजूद था.  एक दरोगा और 2-3 कांस्टेबलों को साथ ले कर वह सिरवाल गढ़ की तरफ रवाना हो गए. इसी बीच उन्होंने उच्चाधिकारियों को भी इस खबर से अवगत करा दिया था.

जिस वक्त एसएचओ घटनास्थल पर पहुंचे, मौके पर इलाके के लोगों की काफी भीड़ जमा हो चुकी थी. वहां एक युवती की लहूलुहान लाश पड़ी थी. एसएचओ ने आगे की काररवाई करने से पहले फोरैंसिक व क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम स्टाफ को भी मौके पर बुलवा लिया. कुछ ही देर में ये टीमें घटनास्थल पर पहुंच कर सबूत जुटाने में लग गईं.

कुछ ही देर में देहरादून के डीआईजी/एसएसपी दलीप सिंह कुंवर, एसपी (नगर) सरिता डोभाल और सीओ (डोईवाला) अभिनय चौधरी भी मौके पर पहुंच गए. सभी ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया.  जिस युवती की लाश मिली थी, उस के चेहरे और शरीर की बनावट से लग रहा था कि उस की उम्र मुश्किल से 20-22 साल के करीब रही होगी. महिला के माथे व सिर पर किसी वजनी या नुकीली चीज से किए गए वार के कारण चोटों के निशान थे. शरीर पर किसी ब्रांडेड कंपनी की मिडी थी, जिस का ऊपरी हिस्सा खून से लथपथ हो चुका था. लाश के पास में ही एक टायलेट क्लीनर (तेजाब) की बोतल पड़ी हुई थी.

मृत युवती के हाथ में एक सोने व एक चांदी की मौजूद अंगूठियां इस बात की तरफ साफ इशारा कर रही थीं कि उस की हत्या कम से कम लूटपाट के लिए तो नहीं की गई है. जिस जगह युवती की लाश मिली थी, वह सड़क किनारे बनी एक कच्ची नाली की  ऐसी जगह थी, जहां आसपास कोई सीसीटीवी कैमरा भी नहीं था. पुलिस ने आसपास के इलाकों से लोगों को बुला कर उस की पहचान कराने की कोशिश की, लेकिन 2 घंटे की मशक्कत के बाद भी इस में कोई सफलता नहीं मिली.

लाश के पास से भी कोई चीज नहीं मिली, जिस से तत्काल उस की शिनाख्त हो सके. इसलिए घटनास्थल से साक्ष्यों के संकलन और पंचनामे की काररवाई के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए दून अस्तपाल भिजवा दिया गया. एसएसपी देहरादून के निर्देश पर पुलिस ने लाश की फोटो खिंचवा कर उसे मीडिया व सोशल मीडिया पर प्रसारित करवा दिया ताकि मृतका की शिनाख्त हो सके.

चूंकि यह बात साफ थी कि महिला की हत्या कहीं और करने के बाद उस की लाश वहां ला कर फेंकी गई थी. मालदेवता चौकीप्रभारी एसआई राजीव धारीवाल की शिकायत पर रायपुर थाने में अज्ञात के खिलाफ भादंवि की धारा 302 और साक्ष्य मिटाने की धारा 201 के तहत मुकदमा दर्ज करने के बाद उच्चाधिकारियों के आदेश पर विवेचना एसएसआई नवीन जोशी को सौंप दी गई.

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिले के एसएसपी दलीप सिंह कुंवर ने एसपी (सिटी) सरिता डोभाल और सीओ (डोईवाला) अभिनय चौधरी की निगरानी में हत्याकांड का खुलासा करने के लिए एसएचओ कुंदन राम के नेतृत्व में 4 टीमें गठित कर दी गईं.

पुलिस की चारों टीमें जुटीं जांच में

जांच अधिकारी एसएसआई नवीन जोशी के साथ मालदेवता चौकी प्रभारी एसआई राजीव धारीवाल, बालावाला चौकी प्रभारी एसआई सुनील नेगी, एसआई रमन बिष्ट, महिला एसआई तनुजा शर्मा, हैडकांस्टेबल संतोष कुमार, दीपप्रकाश, प्रदीप सिंह, कांस्टेबल सौरभ वालिया, किशनपाल,  शाहिद जमाल, अजय कुमार, पंकज ढौंडियाल, महिला कांस्टेबल मीतू शाह आदि को शामिल किया गया.  उन के साथ फोरैंसिक टीम के कांस्टेबल अरविंद और प्रभात जुगरान, एसओजी की हैडकांस्टेबल किरन को भी इस विशेष टीम का हिस्सा बनाया गया.

police inspect at murder spot

पहली टीम ने घटनास्थल के आसपास रहने वाले व्यक्तियों से गहनता से पूछताछ शुरू कर दी. दूसरी टीम ने घटनास्थल की तरफ आनेजाने वाले मार्गों पर लगे तमाम सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को चैक करना शुरू  कर दिया.

तीसरी टीम ने मृतका द्वारा पहनी जुडियो ब्रांड की नई दिख रही ड्रेस की जानकारी लेने के लिए जुडियो ब्रांड के शोरूम जाखन व किशन नगर चौक में जा कर जानकारी जुटानी शुरू कर दी कि वह किस ने खरीदा था.