Ketan Agarwal Murder Case : कत्ल में फंसी केतन की मंगेतर

Ketan Agarwal Murder Case.  पेरेंट्स ने 20 वर्षीय सिया गोयल की शादी रियल एस्टेट कारोबारी विशाल अग्रवाल के 26 वर्षीय बेटे केतन अग्रवाल से तय जरूर कर दी थी, लेकिन सिया किसी भी कीमत पर अपने प्रेमी क्रिकेटर चेतन चौधरी को छोडऩा नहीं चाहती थी. एक तरफ बेटे की शादी को भव्य तरीके से करने के लिए विशाल अग्रवाल ने 17 करोड़ रुपए में जयपुर में एक महल भी बुक करा दिया था. इतना ही नहीं, उन्होंने मेहमानों के सफर के लिए 2 स्पैशल विमान भी बुक करा दिए थे. तो वहीं दूसरी तरफ सिया अपने मंगेतर केतन अग्रवाल को ठिकाने लगाने के लिए अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ ऐसी खौफनाक साजिश रच चुकी थी कि…

20 वर्षीय सिया गोयल और 22 वर्षीय चेतन चौधरी का प्यार अटूट था. दोनों ही जीवन भर साथ रहना चाहते थे, लेकिन दोनों के आर्थिक स्तर में जमीनआसमान का अंतर था. सिया के पेरेंट्स को बेटी के लव अफेयर के बारे में जानकारी हुई तो उन्होंने भागदौड़ कर सिया का रिश्ता एक धनाढ्य परिवार में तय कर दिया.

इस युवक का नाम केतन अग्रवाल था. सिया केतन अग्रवाल से शादी हरगिज नहीं करना चाहती थी. वह अपने पेरेंट्स से इस मंगनी का विरोध भी नहीं कर सकी. चूंकि सिया और चेतन एकदूसरे के साथ जीने और मरने की कसमें खा चुके थे, इसलिए दोनों ने मिल कर मंगेतर केतन से छुटकारा पाने के लिए चिंतन किया. एक दिन चेतन ने सिया से कहा, ”सिया, चलो हम कहीं दूर किसी दूसरे शहर में चल कर शादी रचा लेते हैं. बाद में जब स्थिति सामान्य हो जाएगी, तब वापस आ जाएंगे.’’

यह सुन कर सिया का मूड खराब हो गया. कहने लगी, ”कैसी बात करते हो तुम, जानते हो मेरी इतनी हाईप्रोफाइल फेमिली है. भाग कर शादी करने में मेरे परिवार की कितनी बदनामी होगी, इस का तुम्हें अंदाजा है?’’

”तो फिर तुम ही बताओ कि केतन से कैसे छुटकारा पाया जाए?’’ चेतन ने कहा.

”देखो, एक ही रास्ता है कि केतन को मौत के घाट उतार दिया जाए.’’ ”यह कैसे हो सकता है?’’

”जहर दे कर मार सकते हैं. उस की कार से एक्सीडेंट भी कराया जा सकता है और क्याक्या हो सकता है? यूट्यूब पर और क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज देख कर तुम भी चिंतन करो, मैं भी करती हूं. कोई भी ऐसा तरीका निकालो, जिस से केतन परलोक भी सिधर जाए और हम लोगों का नाम न आए और हम पर कोई शक भी न करे.’’ सिया गंभीर होते हुए बोली.

इतना तय कर के दोनों अपनेअपने घर चले गए और मिशन की तैयारी करने लगे.

जब से सिया गोयल की बुआ ने उस का रिश्ता 26 वर्षीय केतन अग्रवाल से तय करा दिया था. तभी से सिया एक गंभीर उलझन में फंस गई. उस समय उसे लगा कि अभी तो उस की उम्र कम है. हो सकता है अभी शादी में वक्त हो. पहले सगाई होगी. उस के 2-4 साल के बाद शादी होगी. तब तक केतन से शादी खत्म करने का कोई न कोई रास्ता भी निकल आएगा.

लेकिन सिया का यह अंदाजा गलत साबित हुआ. 11 फरवरी, 2026 को सिया गोयल और केतन अग्रवाल की सगाई हो गई. 25 नवंबर, 2026 का पंडित ने दोनों की शादी का मुहूर्त भी निकाल दिया.

मंगनी के बाद जब सिया अपने प्रेमी चेतन से मिलती है तो वह उसे उकसाते हुए कहता है कि तुम तो मुझ से शादी कर रही थी! तुम ने तो कसम खाई थी कि जिंदगी भर साथ रहेंगे, मरेंगे साथ, सब कुछ साथ करेंगे, लेकिन अब तो तुम पराई होने जा रही हो!

”देखो चेतन, मैं घर वालों को शादी के लिए मना नहीं कर पाई. अब तुम बताओ कि केतन को ठिकाने लगाने का कोई प्लान तैयार किया या नहीं? जो भी हो, प्लान जल्दी तैयार करो, फिर उसे अंजाम तक पहुंचाया जाएगा.’’

31 मई 2026 की बात है, केतन अपनी मंगेतर सिया को लोहागढ़ किला घुमाने ले गया. यह महाराष्ट्र के पुणे जिले में लोनावला हिल स्टेशन के पास स्थित एक प्रसिद्ध पहाड़ी दुर्ग है. इस का इतिहास लगभग 2,000 साल पुराना है.

31 मई की वह दोपहर लोहागढ़ की चढ़ाई के लिए बेहद गर्म थी, लेकिन हवाओं में एक अलग ही बेचैनी थी. केतन, जो अपनी मंगेतर सिया को ले कर बेहद उत्साहित था, उसे सब से ऊंची चोटी ‘विंचू काटा’ की ओर ले गया.

सूरज की किरणें लोहागढ़ के पत्थरों से टकरा कर और भी तेज हो रही थीं. केतन, जो अपनी फिटनैस और ट्रैकिंग के शौक के कारण आगेआगे चल रहा था, वह पूरी तरह से बेखबर था कि उस के पीछे चल रही सिया के कदमों में प्यार कम और एक भयानक कशमकश ज्यादा है.

जैसे ही वे किले के सब से ऊंची चोटी पर पहुंचे, जहां से नीचे की खाई एक अंतहीन अंधेरे की तरह दिखाई दे रही थी, केतन उत्साह से चिल्लाया, ”देखो सिया, यहां से पूरा नजारा कितना अद्ïभुत दिखता है. यहां बैठते हैं, थोड़ी देर सुकून से बातें करेंगे.’’

केतन एक चट्टान के किनारे पर जा कर बैठ गया. वह अपनी खुशी में मग्न था, नीचे फैली हरियाली को निहार रहा था और भविष्य के सपने देख रहा था. उसे लगा कि वह अपनी मंगेतर के साथ जीवन के सब से खूबसूरत पलों में से एक जी रहा है. ठीक उसी पल, सिया उस के पास अपनी बांहों से उसे घेरे बैठी थी.

उस के दिमाग में अचानक एक विचार कौंधा, ”अगर मैं अभी इसे थोड़ा सा धक्का दे दूं, तो? क्या कोई देख पाएगा? क्या यह एक हादसा नहीं लगेगा?’’

बनाया हत्या का ब्लूप्रिंट

उस ने अपनी सांसें थाम लीं. केतन अभी भी उसी तरह बैठा था, बेफिक्र हो कर प्यारमोहब्बत की बातें कर रहा था. सिया के शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ी. उस का हाथ केतन के कंधे पर था. उस ने केतन की ओर देखा, एक क्षण के लिए दुनिया थम गई. उस का मन उस खाई की गहराई को माप रहा था और मन का दूसरा हिस्सा शायद उस अपराध की कल्पना से कांप रहा था.

केतन ने मुड़ कर उसे देखा और मुसकराते हुए कहा, ”क्या हुआ? तुम डरी हुई लग रही हो?’’

सिया ने अपना हाथ पीछे खींच लिया. उस दिन उस ने धक्का नहीं दिया. शायद डर की वजह से वह इतना साहस जुटा नहीं पाई या शायद इसलिए क्योंकि उस पल वह अकेली थी. इस के लिए उसे चेतन का साथ भी चाहिए था.

फिर भी वह 31 मई का दिन सिया के दिमाग में एक ‘ब्लूप्रिंट’ छोड़ गया था. नीचे उतरते वक्त, केतन अपनी मंगेतर का हाथ थामे आ रहा था, केतन सिया के प्यार में पागल हो चुका था.

देखने में सिया की तरफ से कोई कमी नजर नहीं आ रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे दोनों तरफ बराबर आग लगी हुई है, जबकि सिया का मन अब उस चट्टान पर वापस जाने की साजिशें बुन रहा था.

वह दिन सिर्फ एक सैर का अंत नहीं था, बल्कि एक जान को खत्म करने की उस सुनियोजित योजना की पहली कड़ी थी. वहां सब से ऊंची चोटी पर केतन को खतरनाक जगह बैठा देख सिया के मन में पहली बार उसे धक्का दे कर मारने का आइडिया आया.

सिया लोहागढ़ की ऊंचाई से वापस आई तो चेतन के पास गई. वह बहुत गुस्से में था. उस ने चेतन का हाथ थामने की कोशिश की, लेकिन चेतन ने झटक दिया.

”नहीं, चेतन! ऐसा नहीं है जैसा तुम सोच रहे हो,’’ उस ने आगे कहा, ”वह मुझे बस घुमाने ले गया था. मेरा मन वहां बिलकुल नहीं था. मैं तो बस उस दिन का इंतजार कर रही हूं, जब मैं हमेशा के लिए तुम्हारी हो जाऊं. मुझे पता है कि वो क्या चाहता है, लेकिन मैं उसे सफल नहीं होने दूंगी. तुम चिंता मत करो सुहागरात जैसा दिन उस की जिंदगी में कभी नहीं आएगा.’’

सिया ने चेतन की आंखों में सीधे देखते हुए एक गहरी और डरावनी शांति के साथ कहा, ”मेरी बात सुनो. केतन का खेल खत्म हो जाएगा. मैं यहां यही बात करने आई हूं.’’

सिया की बात सुन कर चेतन का गुस्सा धीरेधीरे पिघल कर एक खतरनाक शांति में बदल गया. सिया ने बताया कि केतन को ऊंची पहाड़ी से धक्का दे कर उस की जीवनलीला समाप्त की जा सकती है. चेतन और प्रेमिका सिया में इस आइडिया को ले कर खूब चिंतन हुआ.

चेतन ने कहा कि यदि मैं साथ होता तो अपने दोनों के बीच का कांटा हमेशा के लिए निकल गया होता.

सिया ने कहा, ”अभी बिगड़ा क्या है? मैं उसे फिर उसी जगह पर ले कर जाऊंगी. आप साथ रहना. अपना क्रिकेट जैसा शानदार प्रदर्शन केतन को दुनिया से आउट करने के लिए हौसले और ताकत के साथ कर दिखाना.’’

इस तरह केतन को ऊंची पहाड़ी से धकेल कर उस की जीवन लीला समाप्त करने की योजना फाइनल हो गई.

यूं हुआ लव अफेयर

महाराष्ट्र के पुणे शहर का बिबवेवाड़ी इलाका आधुनिक रिहायशी कालोनियों और पुराने व्यावसायिक बाजारों का अनोखा संगम माना जाता है. यहां ड्राई फ्रूट्स, कपड़ों, इलेक्ट्रौनिक्स और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की सैकड़ों दुकानें हैं. बिबवेवाड़ी के इसी व्यस्त बाजार में चेतन चौधरी की दुकान है.

उसी के पास सिया गोयल के पापा प्रवीण गोयल का भी औफिस है. यहां से बिजनैस संचालित होता है. लेकिन वहां इन लोगों की मुलाकात पहले नहीं हुई थी.

सिया का एक भाई साहिल गोयल है. साहिल गोयल क्रिकेट का शौकीन है. अच्छा क्रिकेट खेलता है और पुणे में अलगअलग क्लबों के साथ मैच खेलता था. इत्तेफाक से उसी इलाके का चेतन भी क्रिकेट खेलता था.

2024 में एक बड़ा मैच था. साहिल ने अपनी बहन सिया से कहा कि क्रिकेट का आज एक खास मैच है तुम चलोगी?

भाईबहन में भी दोस्ती और प्यार था. उस ने कहा, ”चलूंगी.’’

पहली बार सिया साहिल के साथ मैच देखने के लिए गई. साहिल की टीम में चेतन चौधरी भी था. सिया ने पूरा मैच देखा. उस दिन पहली बार खुद साहिल ने सिया को चेतन से मिलवाया. साहिल ने उन दोनों का परिचय कराया.

किसी ने नहीं सोचा था कि यह औपचारिक परिचय आने वाले समय की एक बड़ी त्रासदी बन जाएगा. उस दिन की मुलाकात बस ‘हायहैलो’ तक सीमित रही, लेकिन चेतन की नजरों में सिया के प्रति एक खास आकर्षण की चमक साफ देखी जा सकती थी.

इस के बाद कई मुलाकातें हुईं. क्रिकेट मैचों में भी सिया और चेतन का एक साथ आनाजाना लगा रहा. पिछले साल दिवाली पर साहिल ने पार्टी रखी. उस ने अपने दोस्तों को बुलाया. चेतन भी उस दिवाली पार्टी में आया.

पार्टी में साहिल के तमाम दोस्त थे और सिया भी पार्टी में मौजूद रही. उस पार्टी में पहली बार सिया और चेतन दोनों में एक तरह से प्यार हुआ. मौका मिलते ही चेतन ने धीरे से मुसकराते हुए पूछा, ”मैच याद है?’’

सिया ने खिलखिला कर जवाब दिया, ”हांहां, याद है. आप ने जो छक्का मारा था, वह छोटा रह गया था और कैच होने की वजह से आप आउट हो गए थे.’’

चेतन भी चूकने वाला कब था, ”उस ने कहा दिवाली के मौके पर आप मुझे कैच कर लो.’’

”मैं कैच करूंगी तो आप आउट नहीं होगे बल्कि गपच लिए जाओगे, क्योंकि यहां आप का छक्का बाउंड्री लाइन से बाहर है.’’

सिया की यह बात सुन कर चेतन शरमा गया. कहने लगा, ”आप को क्रिकेट की बहुत जानकारी है.’’

इस तरह इन दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया और फिर बहुत देर तक चलता रहा. इस के बाद फोन नंबर एक्सचेंज हुए.

दोनों बातचीत करने लगे. चेतन की 22 साल की ऊर्जा और सिया की 20 साल की चंचलता के बीच एक गहरा जुड़ाव पैदा हो गया.

बाद में साहिल को इस बात का अहसास हो चुका था कि चेतन और उस की बहन सिया एकदूसरे से प्यार करते हैं. यहां तक कि उन की एक बुआ को भी इस बात की भनक लग गई थी. एक वक्त ऐसा आया, जब साहिल गोयल को यकीन हो गया कि चेतन और सिया रिलेशनशिप में हैं. उस ने उसे 1-2 बार सिया से कहा भी, लेकिन सिया ने टाल दिया कि दोस्त है, फ्रेंड है.

बताते हैं कि साहिल और उस के फेमिली वाले सिया की हरकतों से परेशान हो गए थे. सभी ने मिलकर चिंतन किया. सामूहिक निर्णय लिया गया कि किसी अच्छे घर में सिया की शादी कर दी जाए. साहिल की बुआ रेणू मित्तल और फूफा नरेंद्र मित्तल को इस की जिम्मेदारी सौंपी गई.

इसी बीच उन के एक रिश्तेदार के यहां शादी थी. उस शादी में केतन के पापा विशाल अग्रवाल की फेमिली और सिया गोयल के फेमिली वाले भी पहुंचे थे. दोनों परिवार वाले एकदूसरे को बहुत सालों से जानते थे. नरेंद्र मित्तल विशाल अग्रवाल के चचेरे मामा थे.

नरेंद्र मित्तल ने सिया गोयल के लिए केतन अग्रवाल से रिश्ता चलाने की बात कही थी. विशाल अग्रवाल से कहा था कि आप अपने बेटे के साथ मेरे बहनोई की बेटी सिया गोयल की शादी करा दो. दोनों की जोड़ी अच्छी जमेगी.

क्योंकि नरेंद्र मित्तल चचेरे मामा थे तो विशाल अग्रवाल मना नहीं कर पाए. रिश्ते को अंजाम तक पहुंचने से पहले दोनों से पूछा गया था. दोनों को एकदूसरे को समझने के लिए टाइम भी दिया गया था. दोनों उस वक्त बहुत खुश थे. तभी जा कर मंगनी हुई थी.

केतन के परिवार को सिया का गारंटी कार्ड नरेंद्र मित्तल और रेनू मित्तल ने दिया था कि लड़की की हमारी पूरी गारंटी है. लड़की बहुत सभ्य है.

केतन के पापा विशाल ने कहा कि सिया की उम्र अभी कम है. अभी 20 साल की भी नहीं हुई है. तो आप इतनी जल्दी इस की शादी क्यों शादी कर रहे हो?

तो उन्होंने कहा कि हमें शादी आज नहीं तो कल करनी ही है. इस के बाद दोनों की जल्द ही शादी करने की बात तय हो गई.

17 करोड़ का महल

केतन और सिया की शादी नवंबर, 2026 में राजस्थान के उदयपुर में शाही अंदाज में होने वाली थी. मेहमानों के ठहरने के लिए जयपुर में 17 करोड़ रुपए का एक आलीशान महल बुक किया गया था.

शादी समारोह की भव्यता को देखते हुए, मेहमानों के सफर के लिए 2 स्पैशल विमान भी कर लिए गए थे. ये तैयारियां अग्रवाल परिवार की आर्थिक मजबूती और सामाजिक रुतबे तथा केतन के प्रति परिवार के प्रेम और स्नेह को दिखाती हैं.

यही वह मोड़ था, जहां उन की कहानी का ‘मीठापन’ कड़वाहट में बदलने लगा. चेतन चौधरी के लिए, सिया को खोने का विचार ही असहनीय था और सिया, जो अपने परिवार के दबाव और चेतन चौधरी के प्रति अपने लगाव के बीच फंसी थी, मानसिक रूप से वह अस्थिर होने लगी.

उन के बीच की बातचीत अब भविष्य की उन योजनाओं के इर्दगिर्द घूमने लगी, जिन में केतन अग्रवाल का कोई स्थान नहीं था.

चेतन से फोन पर घंटों की बातचीत और चैटिंग से जो कभी प्यार भरी बातें हुआ करती थीं, अब षड्यंत्रों का आधार बन गईं.

एक दिन सिया ने अपने प्रेमी चेतन को बताया कि 6 जून, 2026 को केतन, उस की बहन संजना और मेरे लिए इंडोनेशिया के बाली जाने का प्रीवेडिंग ट्रिप बुक कर चुका है. सिया और चेतन बहुत अच्छी तरह जानते थे कि अगर केतन विदेश चला गया तो वहां उसे मारना बहुत मुश्किल होगा.

सिया ने चेतन से कहा, ”6 जून से पहले ही केतन का काम तमाम करना होगा.’’

यहीं से हत्या की साजिश का पहला चरण शुरू हुआ. सिया 5 जून को फिर लोहागढ़ की पहाड़ी पर जाने के लिए केतन से जिद करने लगी. केतन मना करने लगा है तो उस ने कहा, ”कोई नहीं, हम चलेंगे और 2-4 घंटे में आ जाएंगे.’’

यह बात केतन ने अपने फेमिली वालों से कही तो पेरेंट्स ने यह कहते हुए मना कर दिया कि कल तुम्हें इंडोनेशिया जाना है. अभी तुम पहाड़ी पर जाओगे तो थक जाओगे. वहां ऊंची चढ़ाई है, कोई जरूरत नहीं है जाने की.

यह बात सिया को पता चली तो उस के होश उड़ गए.

अब सिया का पहला मकसद केतन को भारत में ही रोकना था, जिस से कि जल्दी से जल्दी केतन को इस ऊंची पहाड़ी पर ले जा कर धक्का दे कर उस की जीवन लीला समाप्त की जा सके.

बाली टूर किया फेल

6 जून, 2026 को केतन, केतन की बहन संजना, सिया और सिया का भाई साहिल, ये चारों घर से फ्लाइट पकडऩे के लिए मुंबई एयरपोर्ट निकले. ये सभी लोग प्रीवेडिंग के लिए बाली इंडोनेशिया जा रहे थे.

बाली जाने के लिए सब लोग मुंबई एयरपोर्ट की तरफ रवाना हुए. रास्ते में चाय पीने के लिए रुकने को कहा. सभी लोग लोनावला के पास एक फूड पौइंट पर रुके थे. यहीं पर सिया ने अपनी चाल चली और किसी तरह केतन का पासपोर्ट छिपा लिया.

जब केतन का पासपोर्ट गायब हुआ, तब किसी को भी सिया पर जरा भी शक नहीं हुआ. उस समय किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि इस के पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी हो सकती है. उस दिन पुणे से मुंबई एयरपोर्ट जाने वाली गाड़ी के ड्राइवर वैभव जाधव ने बताया कि सुबह करीब 10 बजे वह पुणे पहुंचा.

सभी मुंबई पुणे एक्सप्रैसवे पर रवाना हुए, तो सिया ने अचानक चाय पीने के बहाने एक फूड मौल पर रुकने को कहा. करीब 10 मिनट बाद वह वापस आई और ड्राइवर वैभव जाधव से कार की डिक्की खोलने को कहा. सिया ने केतन के बैग से उस का पासपोर्ट निकाला और अपनी जेब में रख लिया था.

एयरपोर्ट पर छोडऩे के करीब 2 मिनट बाद फोन आया कि केतन का पासपोर्ट शायद कैब में रह गया है. ड्राइवर ने कहा कि उस ने पूरी कार देख ली थी. पासपोर्ट नहीं मिला. इस के बावजूद उस से वीडियो कौल करवा कर पूरी कैब दिखवाई गई. फिर उसे दोबारा एयरपोर्ट बुलाया गया. जहां केतन और साहिल ने खुद कार की तलाशी ली, लेकिन पासपोर्ट कहीं नहीं मिला. सिया ने बैग से केतन का पासपोर्ट निकालने के बाद वाशरूम में जा कर फाड़ कर फेंक चुकी थी.

जब वे लोग एयरपोर्ट पहुंचे, तब चैकिंग के दौरान पता चला कि केतन का पासपोर्ट तो गायब है. मजबूरी में सभी को ट्रिप कैंसिल करनी पड़ी. केतन निराश हो कर पुणे लौट आया. अब हत्या की साजिश का फेज 2 शुरू होता है.

सिया ने अपने सासससुर और मंगेतर केतन से कहा कि इंडोनेशिया का कार्यक्रम रद्द हो गया तो जल्दी दूसरा पासपोर्ट निकलवाओ और बाली चलते हैं, नहीं तो फिर सब से अच्छा टूर लोहागढ़ की पहाड़ी का ही रहेगा.

केतन को ट्रैकिंग का शौक है, वहां मुझे भी बहुत आनंद आया था. होने वाली दुलहन का दिल रखने के लिए न चाहते हुए भी केतन ने 14 जून, 2026 का कार्यक्रम लोहागढ़ के किले पर जाने का तय कर लिया.

सिया ने अपने प्रेमी चेतन से यह सब बात बताई और योजना को क्रियान्वयन करने के लिए कहा. शातिरदिमाग चेतन ने कहा कि यह काम तुम्हें अकेले ही करना है. तुम्हारी मदद के लिए मैं दूर रह कर ही निगरानी करता रहूंगा.

14 जून, 2026 की सुबह लोहागढ़ की फिजाओं में मानसून की पहली फुहारों की महक थी. बादलों ने आसमान को एक धुंधली चादर से ढंक रखा था. लोहागढ़ की सीढिय़ां चढ़ते हुए केतन बारबार पीछे मुड़ कर सिया का हाथ थाम लेता था.

वह उसे संभल कर चलने के लिए कहता, अपनी मंगेतर की सुरक्षा को ले कर वह बहुत ज्यादा सचेत था. उसे क्या पता था कि जिस हाथ को वह सहारा देने के लिए पकड़ रहा है, वही हाथ उसे खाई में धकेलने के लिए आतुर है.

आखिरकार, सिया ने पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में पहुंच कर केतन के पास खड़ी हो कर सेल्फी लेने को कहा. जैसे ही उस ने फोटो के लिए हाथ आगे बढ़ाया, बड़ी फुरती से सिया सामने आई और केतन को धक्का दे दिया.

केतन लडख़ड़ा कर नीचे गिरता, इस से पहले एक पेड़ से टकराया और उस ने पेड़ को मजबूती से पकड़ लिया. अपना मिशन फेल होते देख वह तुरंत मंगेतर केतन के पास गई और उस को हाथ पकड़ कर ऊपर ले आई.

शातिरदिमाग सिया ने तुरंत नाटक किया और मंगेतर से कहा कि सांप आ गया था. मैं ने आप को सांप के काटने से बचाने के लिए हलका सा धक्का दिया था.

केतन अपनी मंगेतर से प्यार करता था और उसे सिया पर पूरा भरोसा भी था. उस ने सिया की इस झूठी कहानी को सच मान लिया. उसे लगा कि सिया ने उस की जान बचाई है. उसे अपनी मौत की साजिश का जरा भी शक नहीं हुआ. उस ने घर आ कर भी अपने पेरेंट्स से यह बात बताई और सिया की तारीफ की.

यूएस में की थी पढ़ाई

रियल एस्टेट कारोबारी विशाल अग्रवाल अपनी फेमिली के साथ पुणे जिले के गहुंजे में रहते थे. केतन अग्रवाल उन का इकलौता बेटा था. हर मायने में वह एक आदर्श बेटा और करोड़ों रुपए के पारिवारिक कारोबार का उत्तराधिकारी था.

केतन अग्रवाल विदेश से पोस्ट ग्रैजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद हाल ही में भारत लौटा था और परिवार के बिजनैस की जिम्मेदारी संभाल चुका था. वह पारिवारिक स्वामित्व वाली रियल एस्टेट कंपनी ‘सक्सेस ग्रुप’ का निदेशक होने के साथसाथ मुख्य विपणन अधिकारी (सीएमओ) भी था.

उस ने यूएस के बैबसन एफडब्ल्यू ओलिन ग्रैजुएट स्कूल औफ बिजनैस से उद्यमिता में मास्टर औफ साइंस की डिग्री पूरी की. इस से पहले उस ने सिंबायोसिस यूनिवर्सिटी से बीबीए की डिग्री भी प्राप्त की थी.

26 साल की उम्र में केतन अग्रवाल उस मुकाम पर था, जहां ज्यादातर भारतीय परिवार अपने बेटे की जिंदगी का सब से खूबसूरत अध्याय शुरू होते देखना चाहते हैं.

सिया गोयल का परिवार पुणे के बिबवेवाड़ी (मार्केट यार्ड के निकट) स्थित ‘लीला कुंज’ नामक बंगले में रहता है.

सिया के पापा प्रवीण गोयल मुख्यरूप से ड्राईफ्रूट्स के थोक व्यापारी बताए गए हैं. जबकि मम्मी पूजा गोयल गृहिणी हैं.

चेतन चौधरी के फादर का नाम बाबूलाल चौधरी है. यह मारवाड़ी लोग जोधपुर के पलासनी गांव के रहने वाले हैं. बरसों पहले कारोबार के लिए यहां आए थे. पुणे में मार्केट यार्ड नाम के इलाके में चेतन के पापा बाबूलाल चौधरी की दुकान है.

इलाके में अधिकांश दुकानें मारवाड़-मेवाड़ के लोगों की हैं. जहां वे ड्राइफ्रूट्स और किराना का बिजनैस करते हैं. चेतन के फादर की दुकान के सामने ही सिया गोयल के फादर का औफिस भी है.

उक्त मामले में चेतन के एक चाचा, उदयराम चौधरी का भी नाम सामने आया है, उन्होंने भी बाबूलाल चौधरी की तर्ज पर मीडिया पर एकतरफा कहानी दिखाने का आरोप लगाया और चेतन को एक सीधासादा और अनुशासित युवक बताते हुए उस की बेगुनाही का दावा किया.

योजना को दिया अंजाम

19 जून को सिया का जन्मदिन था, जिस के लिए केतन ने महाबलेश्वर में एक लग्जरी रिसौर्ट बुक किया था. सिया के जन्मदिन को एक यादगार और आकर्षक बनाने की योजना बनाई गई थी.

18 जून को सिया ने प्रीवेडिंग शूट का बहाना बना कर उसे फिर लोहागढ़ चलने के लिए मजबूर किया.

लोहागढ़ किले में सिया मंगेतर केतन अग्रवाल के साथ थी. दोनों ट्रैकिंग का मजा ले रहे थे और किले पर तसवीरें खींच रहे थे.

उस दिन, जब केतन ने सिया का हाथ थामा और खाई की तरफ मुड़ा तो उसे अहसास भी नहीं था कि वह अपनी उस मंगेतर के साथ चल रहा है, जो उस की हत्या करने को आतुर है.

आसपास का माहौल बिलकुल शांत और सामान्य लग रहा था. उसी दौरान सिया ने अपने मंगेतर केतन अग्रवाल को धक्का दे कर करीब 400 फीट गहरी खाई में गिरा दिया. उस के गिरते ही अचानक पहाड़ों के सन्नाटे को चीरते हुए जोर की चीख गूंजी. पल भर में ही मंजर बदल गया.

केतन किले की पहाड़ी से गहरी खाई में जा गिरा. इतनी ऊंचाई से पत्थरों पर गिरने के बाद बचने की कोई गुंजाइश नहीं थी. सिया बहुत घबरा गई और रोतेबिलखते हुए पुलिस को मदद के लिए बुलाया.

घटना की जानकारी मिलने पर थोड़ी देर में थाना लोनावला पुलिसकर्मी मौके पर पहुंच गए. मामला पहाड़ से खाई में गिरने का होने के कारण वहां पहुंचे पुलिसकर्मियों ने थाने के इंसपेक्टर दिनेश तायडे को सूचना दी. इंसपेक्टर दिनेश तायडे पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे.

मामला गंभीर देख उन्होंने अपने उच्च अधिकारियों को घटना की सूचना दी. कुछ ही देर में डीवाईएसपी गजानन टोम्पे भी घटनास्थल पर पहुंच गए. सूचना पा कर एसपी संदीप सिंह गिल ने भी वहां पहुंच कर घटनास्थल का मुआयना किया. मौके पर पहुंची पुलिस को सिया ने बताया कि उस का मंगेतर केतन अग्रवाल पहाड़ी पर किनारे पर जा कर सेल्फी ले रहा था. हवा का एक तेज झोंका आया. उसी दौरान अचानक उस का पैर फिसल गया और वो खाई में जा गिरा. शुरुआत में पूरा मामला ट्रैकिंग हादसे जैसा ही लग रहा था.

पुलिस ने भी अपनी शुरुआती जांच के बाद इसे एक्सीडेंटल डेथ मान लिया. मौत की वजह एक्सीडेंट दर्ज कर ली गई और फाइल बंद होने वाली थी कि अचानक हालत ने एक नया मोड़ लिया.

सुबह के पौने 11 बजे सिया की मम्मी पूजा का फोन केतन की मम्मी राखी के पास आया कि केतन फोर्ट से गिर गया है. उन्हें लगा सीढिय़ां चढ़तेचढ़ते कहीं ठोकर लगने से गिर गया होगा. इस के बाद राखी ने सिया को बहुत कौल की.

कई कौल बाद उस ने फोन उठाया तो केतन के पापा विशाल अग्रवाल ने पूछा, ”बेटा, केतन कहां से गिरा है?’’

सिया ने बताया, ”हम ऊपर पूरा फोर्ट चढ़ गए थे, सेल्फी लेते समय उन का पैर फिसल गया था. ऊपर से गिरे हैं.’’

सिया की बात सुनते ही विशाल अग्रवाल के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक गई.

उन के हाथ से फोन फिसलतेफिसलते बचा और उन के गले से एक चीख तक नहीं निकली. बस, आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा.

विशाल अग्रवाल की आवाज में जो सख्ती थी, वह पल भर में ही करुण विलाप में बदल गई. उन्हें लगा जैसे किसी ने उन के सीने पर वज्रपात कर दिया हो. वह पल उन के लिए पूरी जिंदगी का सब से लंबा और डरावना क्षण बन गया था.

उन का सारा संसार बिखर गया था. एक पल में ही घर की खुशियां मातम में बदल गईं और दिल की हर धड़कन सिर्फ केतन की सलामती की दुआ कर रही थी. घर का माहौल पलभर में बदल गया. विशाल ने बिना एक पल गंवाए पुणे से लोहागढ़ के लिए निकलने की तैयारी शुरू कर दी.

उन्हें उम्मीद थी कि शायद कहीं कोई गलतफहमी हो. उस सफर का हर किलोमीटर उन के लिए एक ऐसी आशंका से भरा था, जिसे कोई भी पेरेंट्स अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखना चाहते.

बीच रास्ते में ही सिया ने किसी पुलिस वाले से उन की बात कराई. विशाल अग्रवाल ने बताया हम वहां पहुंचे तो देखा कि सिया का कोई खास दुखी होने वाला अंदाज नहीं था. केतन का शव रेस्क्यू करने वाले सुनील गायकवाड़ ने बताया कि केतन के सिर पर गंभीर चोट थी.

खोपड़ी कुचली हुई थी और हाथ पैरों पर भी कई जगह चोट के निशान थे. अन्य लोग रो रहे थे और मदद के लिए चिल्ला रहे थे, लेकिन सिया गोयल शांत खड़ी थी. सुनील ने कहा कि शव को जंगल के रास्ते बाहर लाया गया.

सिया पर हुआ शक

पुलिस को 18 जून, 2026 की सुबह करीब साढ़े 10 बजे इस पूरी घटना की सूचना मिली थी. बचाव अभियान दोपहर साढ़े 12 बजे चलाया गया और करीब डेढ़ बजे शव एंबुलेंस में पहुंचाया गया था.

पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने डैडबौडी विशाल अग्रवाल को सौंप दी. पुलिस को इस मामले में दुर्घटना पर संदेह हो ही रहा था.

सिया सोशल मीडिया पर दुख व्यक्त करने के लिए फोटो के साथ कुछ मार्मिक लाइनें डाल रही थी. केतन की मौत के बाद, सिया ने जिस तरह का अभिनय किया, वह किसी भी थ्रिलर फिल्म को मात देने वाला था.

21 जून को केतन के फादर, रिश्तेदार और उन के दोस्त नवदीप जिंदल व तरुण मित्तल के साथ उस पहाड़ी पर गए, जहां से केतन गिरा था. वहां के हालात देख कर परिवार को समझ आ गया कि कोई इंसान वहां से गलती से नहीं फिसल सकता. तब उन्हें पहली बार शक हुआ था कि इस जगह को केतन की हत्या करने के लिए जानबूझ कर चुना गया.

3 दिन बाद जब सिया घर आई तो केतन की बहन ने घटना के बारे में उस से जानकारी करनी चाही, सिया से पूछा था कि वह कहां बैठी थी? केतन कैसे गिरा और किले के उस किनारे तक कैसे पहुंचा?

सिया ने किसी भी सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दिया था. उस का रोना भी परिवार को बनावटी लगा था.

अगले दिन भी जब वह उन के घर आई, तब भी फेमिली वालों ने पूछा कि केतन का कौन सा पैर फिसला था, लेकिन वह चुप रही. सवालजवाब के दौरान शादी तय कराने वाली बुआ भी थी. वह सिया को वहां से धकियाती व खींचती हुई ले गई.

तब से वह पूरी तरह शक के घेरे में आ गई. परिवार में सलाहमशविरे के बाद विशाल अग्रवाल ने एसपी (देहात) संदीप सिंह गिल से जा कर अपनी बात कही.

पुलिस को पहले से ही यह वारदात संदिग्ध लग रही थी, क्योंकि केतन नियमित रूप से ट्रैकिंग करता था और उसे पहाड़ी इलाकों का अच्छा अनुभव था.

पुलिस इंतजार कर रही थी कि फेमिली वाले आ कर कोई तहरीर दें तो इस की जांच कराई जाए. विशाल अग्रवाल ने एसपी (देहात) संदीप सिंह गिल को तहरीर सौंप दी, जिस के बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी.

पुलिस ने सिया के कौल रिकौर्ड खंगाले. एक मोबाइल नंबर पर पुलिस की नजर जम गई. उस पर जनवरी से केतन की हत्या वाले दिन सुबह 7 बजे तक सिया ने 2004 कौल्स में करीब 338 घंटे बातचीत की थी. यह नंबर पुणे के ही एक और व्यापारी परिवार के युवक चेतन चौधरी का था.

जांच में यह भी पता चला कि पहाड़ी से केतन अग्रवाल के नीचे गिरने से 34 मिनट पहले सिया ने चेतन चौधरी से ‘सीक्रेट कौल’ पर बात की थी.

जांच के दौरान पुलिस ने किले के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. फुटेज में एक संदिग्ध युवक दिखाई दिया, जिस ने भीषण गरमी में हुडी पहन रखी थी और हेडफोन के जरिए अपना चेहरा छिपाने की कोशिश किए हुए था.

पुलिस का माथा वहीं ठनक गया. ध्यान से देखने पर पता चला कि हुडी वाला युवक लगातार सिया और केतन का पीछा कर रहा था. इसी संदिग्ध गतिविधि ने पुलिस का ध्यान आकर्षित किया. पुलिस ने युवक की पहचान की. वह चेतन चौधरी था.

जांच आगे बढ़ाई तो कथित तौर पर सिया गोयल और उस के प्रेमी चेतन चौधरी की साजिश का परदाफाश हो गया. पुणे पुलिस द्वारा की जा रही जांच एक सुनियोजित साजिश की परतों को खोलती जा रही है.

इस के बाद पुलिस ने 23 जून को सिया गोयल और चेतन चौधरी को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने उन्हें 2 बार पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है. दोनों ने केतन अग्रवाल की सुनियोजित तरीके से हत्या करने का अपराध स्वीकार कर लिया. दोनों आरोपियों ने यह भी सोचा था कि केतन जिंदा बच भी जाएगा तो दिव्यांग तो जरूर हो जाएगा. तब सिया के पास उस से शादी नहीं करने का बहाना होगा.

जांच के दौरान कई पहलू सामने आए. इन में प्रेम संबंध, पैसों का लेनदेन और पहले से रची गई साजिश शामिल थी.

गिरफ्तारी के बाद उन्हें वडगांव मावल अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें आगे की जांच जारी रखने के लिए 29 जून तक 7 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा गया.

29 जून को उन की कस्टडी समाप्त होने वाली थी, लेकिन एसपी संदीप सिंह गिल ने बताया कि पुलिस ने अदालत से कहा था कि मामले की जांच अभी अधूरी है और कई महत्त्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल बाकी है. इस के लिए इन का पुलिस रिमांड जरूरी है. तब कोर्ट ने आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस कस्टडी 3 जुलाई 2026 तक बढ़ा दी.

लगाए गंभीर आरोप

केतन अग्रवाल हत्याकांड के मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी को पुलिस रिमांड समाप्त होने के बाद 3 जुलाई 2026 शुक्रवार को एक बार फिर न्यायिक मजिस्ट्रैट प्रथम श्रेणी ए.एम. विभूति की अदालत में पेश किया गया. सुनवाई के दौरान अदालत परिसर और उसके आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. सुनवाई के दौरान पुलिस ने दोनों की 3 दिन की अतिरिक्त पुलिस रिमांड मांगी थी.

दोनों पक्षों के वकीलों की बात सुनने के बाद अदालत ने पुलिस की रिमांड अरजी खारिज करते हुए दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया.

इस से पहले महाराष्ट्र प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने मुलाकात कर न्याय मांगा.

फडणवीस ने कहा कि सरकार दोषियों को कड़ी सजा दिलाने में, कोई कसर नहीं छोड़ेगी. महाराष्ट्र सरकार ने त्वरित अदालत की स्थापना को मंजूरी दी और वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सदस्य उज्ज्वल निकम को इस मामले में विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया.

उज्ज्वल निकम 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मुख्य आरोपी कसाब को फांसी तक पहुंचाने और देश के कई हाईप्रोफाइल मामलों में सरकार का पक्ष रख चुके हैं.

27 जून को पुणे के गहूंजे स्थित बेलमंडो सोसाइटी में केतन को न्याय दिलाने के लिए एक विशाल कैंडल लाइट मार्च निकाला गया था. इस मार्च में केतन के दादा देवीचंद अग्रवाल भी अपनी कमजोर सेहत के बावजूद शामिल हुए थे.

पूरे पुणे और देश भर के लोगों में इस विश्वासघात को ले कर भारी आक्रोश और गुस्सा था. लोग लगातार सोशल मीडिया और सड़कों पर आरोपियों के लिए फांसी की सजा की मांग कर रहे थे.

विशाल अग्रवाल ने सिया के परिवार पर भी गंभीर आरोप लगाए. उन का कहना था कि सिया को शराब पीने सहित कई बुरी आदतें थी और उस का परिवार भी उस के व्यवहार से परेशान था.

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पुलिस जब रिमांड की तिथि से एक दिन पूर्व यानी 2 जुलाई, 2026 को सिया गोयल को लोनावला स्थित उस के आलीशान आवास पर जांच के लिए ले गई थी तो वापसी में वहां एक बेहद शर्मनाक नजारा देखने को मिला.

खुद को चारों तरफ से मीडिया के कैमरों और भारी भीड़ से घिरा देख सिया गोयल अचानक अपना मानसिक संतुलन खो बैठी. उस ने बिना किसी पछतावे या डर के खुलेआम मीडियाकर्मियों और वहां मौजूद आम जनता की तरफ बेहद अश्लील इशारा करते हुए अपनी बीच वाली अंगुली (मिडिल फिंगर) दिखा दी.

सिया की यह बदतमीजी और हेकड़ी वहां मौजूद कैमरों में लाइव कैद हो गई.

सिया गोयल का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. वीडियो में हाथों में बीयर जैसी बोतल लिए एक नाइट क्लब में किसी से फोन पर बातचीत करते दिख रही है.

इस दौरान उसे गालीगलौज करते और यह कहते सुना गया है कि पहले वह धोखा देता है फिर मुझे फोन करता है. मीडिया रिपोट्र्स में दावा किया गया कि यह वीडियो दिसंबर 2025 में रिकौर्ड किया गया था. सिया के इस व्यवहार को ले कर सोशल मीडिया में तरहतरह की चर्चाएं शुरू हो गईं.

सिया ने पुलिस को बताया था कि केतन गंजा होने के कारण विग लगाता था और साथ में हकलाता भी था, इसलिए वह उस से शादी नहीं करना चाहती थी.

विशाल अग्रवाल ने कहा कि उन का बेटा विग का केवल एक छोटा सा पैच लगाता था और इस की जानकारी सगाई से पहले सिया और उस के फेमिली वालों को दे दी गई थी. उन्होंने कहा कि सिया को इस बात से कोई आपत्ति थी तो वह शादी से इनकार कर सकती थी. बेटे की जान लेने की क्या जरूरत थी?

घटना से ठीक 1 दिन पहले यानी 17 जून को सिया गोयल घर से झूठ बोल कर बाहर निकली और पुणे के कोडवा इलाके के थर्ड वेव कौफी कैफे में अपने बौयफ्रेंड चेतन चौधरी से मिली. कैफे में लगे सीसीटीवी कैमरों में दोनों कैद हो गए.

पुलिस का कहना है कि यहां इन्होंने बैठ कर 18 तारीख को केतन की हत्या करने की पूरी साजिश रची थी. इस में यह भी शामिल था कि किले से धक्का देते समय सिया केतन की पहुंच से दूर रहे.

चेतन और सिया के बीच कथित तौर पर यह तय हुआ था कि केतन की हत्या के बाद, शक से बचने के लिए वह 3 साल तक शादी नहीं करेगी.

बताया जाता है कि इस के क्रियान्वयन के लिए शादी के कपड़ों की खरीदारी करने के बहाने करीब एक करोड़ रुपए अपने मंगेतर केतन से ले कर प्रेमी चेतन को दे चुकी थी.

रिमांड के दौरान ही पुलिस ने सिया को उस के घर ले कर गई. सिया के घर में तलाशी कर के वारदात वाले दिन उस के द्वारा पहने गए कपड़े भी बरामद कर लिए, जिन्हें अहम सबूत माना जा रहा है.

सिया और चेतन के बयानों में लगातार आ रहे भारी विरोधाभास और झूठ के पुलिंदे को देखते हुए पुणे पुलिस ने अदालत में सिया का पौलीग्राफ टेस्ट कराने की अरजी दे दी थी, क्योंकि सिया का आरोप था कि चेतन ने धक्का दिया है जबकि चेतन का कहना था कि सिया ने धक्का दिया है.

लेकिन आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी ने अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह टेस्ट कराने से साफ इंकार कर दिया.

क्राइम का रीक्रिएशन

रिमांड के दौरान पुलिस सिया को लोहागढ़ फोर्ट ले कर गई थी. किस्मत का खेल देखिए. 10 दिन बाद एक बार फिर सिया उसी जगह पर जा कर खड़ी थी. यहां से चेतन को धक्का दिया गया था. आज वह उस की डमी को धक्का दे रही थी. सोचो, उस के दिमाग में क्या चल रहा होगा.

पुलिस डीवाईएसपी गजानन टोम्पे ने बताया कि घटनास्थल का पुनर्निर्माण करने के लिए पुलिस ने केतन अग्रवाल के बराबर वजन वाला एक डमी भी तैयार की थी. वारदात वाली जगह पर उस डमी को नीचे गिरा कर क्राइम सीन को रीक्रिएट किया गया था.

उस के बाद पुलिस उस के प्रेमी चेतन चौधरी को भी उस की उसी पोशाक में लोहागढ़ किले में ले कर गई. जहां से उस ने केतन को धक्का दिया था. पुलिस ने चेतन के सामने भी क्राइम सीन को रीक्रिएट किया.

पुलिस की जांच के अनुसार चेतन पुणे से करीब 90 किलोमीटर दूर लोहागढ़ किले तक स्कूटी से पहुंचा था. उस ने कार का इस्तेमाल नहीं किया, ताकि टोल प्लाजा पर कार का रिकौर्ड न बने. पुलिस ने वह स्कूटी जब्त कर ली है.

शातिरदिमाग चेतन ने किले में प्रवेश करने का टिकट भी नहीं लिया था यह कह कर अंदर चला गया था कि वह यहां कसरत करने आया है. इस के अलावा घटना वाले दिन पहनी गई उस की हुडी और हैडफोन भी बरामद किए गए हैं.

जांच में जुटी पुणे ग्रामीण पुलिस ने आरोपी चेतन चौधरी के एक कालेज के सहपाठी को अपनी हिरासत में लिया. आरोपीयों द्वारा सब से अधिक बात करने वालों में यह मोबाइल नंबर भी शामिल था. पुलिस को पुख्ता अंदेशा है कि इस व्यक्ति को केतन अग्रवाल की हत्या की खौफनाक साजिश के बारे में सब कुछ पहले से मालूम था.

सिया और चेतन ने मोबाइलों के चैट और मैसेज डिलीट किए थे, पुलिस लैब में उन्हें रिकवर करा रही है. इस में ऐसे संकेत भी मिले हैं कि चेतन और सिया ने गुपचुप तरीके से विवाह भी कर लिया था.

दरअसल, सिया को चेतन पर शक हो रहा था कि कहीं केतन की हत्या होने के बाद चेतन ने उसे धोखा दिया तो वह कहीं की नहीं रहेगी. सिया ने चेतन से कहा कि पहले विवाह की रस्म अदा करो. उस के बाद केतन को पहाड़ी से नीचे धकेला जाएगा.

यह विचार सिया के दिमाग में इसलिए आया कि चेतन केतन को पहाड़ी से धकेलने की योजना में सिया को आगे कर रहा था. खुद परदे के पीछे रहना चाहता था.

पुलिस को संकेत मिले हैं कि विवाह पंजीकरण कार्यालय में अपना विवाह रजिस्टर्ड भी कराया था. विवाह कब और कहां तथा कैसे हुआ या नहीं हुआ, पुलिस इस की भी जांच कर रही है. पुलिस अधिक से अधिक सबूत जुटाने में लगी है.

इस हत्याकांड को ले कर महाराष्ट्र विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ. पीठासीन अधिकारी राजू खरे ने सरकार को इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया था.

एनसीपी विधायक सुनील शेल्के ने सदन में मुद्ïदा उठाते हुए मांग की कि सिया के परिवार को भी इस हत्याकांड में आरोपी बनाया जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि लड़की के परिवार ने उस के प्रेम संबंधों की बात केतन के परिजनों से छिपाई थी. चेतन और सिया दोनों जेल में थे.

यह अपराध की दुनिया का वह ‘शौर्टकट’ था, जिस ने केतन अग्रवाल की जान ले ली. सिया ने उस ‘परफेक्ट मर्डर’ की योजना बनाई, जिसे दुनिया एक ट्रैकिंग हादसा समझ ले.

उस ने और चेतन ने मिल कर हफ्तों तक इस खौफनाक साजिश को बुना. लोहागढ़ का किला, जो कभी शिवाजी महाराज की वीरता का प्रतीक था, सिया की नफरत और जुनून का गवाह बन गया.

पोते के सदमे में चल बसे दादा

केतन अग्रवाल की मौत के बाद दादा देवीचंद अग्रवाल लगातार गहरे सदमे में थे. उन की तबीयत बिगड़ती चली

गई. उन्हें पुणे के जुपिटर हौस्पिटल में भरती कराया गया, जहां डौक्टर उन्हें बचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन शायद उन का मन पहले ही टूट चुका था.

पेशेवर की तरह की प्लानिंग

14 जून की नाकामी के बाद 14 से 18 के बीच में सिया और चेतन एक बार दोनों इसी किले पर रेकी के लिए आए थे. दोनों ऊंची पहाड़ी पर जा कर खड़े हुए. दोनों ने बात

की कि किस पोजीशन में केतन को खड़ा करना है. कैसे उसे बातों में उलझाना है और फिर किस तरीके से अचानक धक्का देना है कि उसे संभलने का मौका ही न मिले.

यूट्यूब पर इस संबंध बहुत कुछ सर्च किया गया था. इतना ही नहीं क्राइम थ्रिलर फिल्म और वेब सीरीज भी देखी गई थीं. साथसाथ इन दोनों को एक डर भी था और वो यह कि कितनी भी हम एहतियात बरतें हो सकता है कि पुलिस को हम पर शक हो. हमारे रिश्तों पर शक हो. फिर हम से पूछताछ हो सकती है. ऐसे में उन दोनों को क्या जवाब देना है? बाकायदा सिया और चेतन ने पुलिस के प्रश्न और उन के उत्तर की भी तैयारी की.

प्लानिंग के तहत 18 जून को चेतन अपना मोबाइल अपनी शौप पर छोड़ कर आया, जिस से उस की लोकेशन अपनी दुकान की दिखाई दे. भीषण गरमी होने के बावजूद उस ने हुडी पहनी ताकि उसे कोई पहचान नहीं पाए.

फोर्ट में कितने सीसीटीवी कैमरे हैं. इन दोनों ने खुद अपनी आंखों से एकएक कैमरे को टटोलने की कोशिश की और अनजान बन कर लोगों से पूछा तो पता चला कि इस किले में कुल 3 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. एक मेन एंट्री पौइंट जहां पर यह हुडी में कैद हुआ था.

दूसरा बिलकुल सेंटर पौइंट पर जब स्केलेस से एंट्री से आधे रास्ते पर पहुंचते हैं. वहां एक प्लेटफार्म है. लोग थक जाते हैं, थोड़ी देर के लिए रुकते हैं.

तीसरा, जहां इस किले को जाने वाली सीढिय़ां खत्म हो जाती हैं. वहां भी एक प्लेटफार्म है, जो एक सेल्फी पौइंट है. चेतन ने क्या चालाकी की? उसे पता है कि एंट्री गेट पर सीसीटीवी कैमरा और उस में वो कैद होगा. तो 18 जून की सुबह जब वह गया तो उस कैमरे से अपना चेहरा छिपाने के लिए उस ने हुडी पहन ली. पीछे पिट्ठू बैग भी लटका लिया था.

जहां से धक्का दिया था, उस से ठीक पहले एक सुनसान जगह पर चेतन ने अपना हुडी उतार कर बैग में रख लिया. बैग से एक टीशर्ट निकाल कर पहन ली. इस के बाद जब फाइनली काम हो गया. चेतन ने थोड़ी दूर सन्नाटे में जा कर टीशर्ट उतारी और बैग में रख ली.

फिर से उस ने हुडी पहनी और फिर नीचे आया, क्योंकि ऊपर जाते वक्त वो हुडी में कैमरे में कैद हो चुका है. तो इसलिए वापसी में भी उसे हुडी में उस कैमरे में कैद होना था. और टीशर्ट इसलिए बदली कि अगर किसी ने गलती से उसे देख लिया या पता चल गया तो लोगों की नजरों में एक हुडी वाला शख्स और एक टीशर्ट वाला 2 अलगअलग शख्स हो जाएंगे.

इन दोनों की इतनी गहरी प्लानिंग थी, जैसे पेशेवर क्रिमिनल सोचते हैं. इन दोनों ने गूगल और यूट्यूब पर भी जा कर यह सर्च किया कि मौत के तरीके क्याक्या हैं? जिन में हम बच सके. पुलिस को शक न हो.

4 जुलाई, 2026 शनिवार रात करीब पौने 10 बजे डौक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. परिवार का कहना है कि पोते के वियोग का दर्द वह सहन नहीं कर पाए.

यह वही दादा थे, जो कुछ दिन पहले अपने पोते को न्याय दिलाने के लिए निकाले गए कैंडल मार्च में शामिल हुए थे. कांपते कदमों से भी वह न्याय की उम्मीद ले कर चले थे, लेकिन शायद उन के भीतर उम्मीद से ज्यादा दर्द था.

आज अग्रवाल परिवार दोहरी पीड़ा से गुजर रहा है. एक ओर केतन की कथित हत्या का न्याय मिलने का इंतजार, दूसरी ओर उस बुजुर्ग की कमी, जिस ने अपने पोते के गम में दुनिया को अलविदा कह दिया.

केतन के दादाजी, देवीचंद अग्रवाल, जिन्होंने शून्य से एक विशाल व्यापारिक साम्राज्य खड़ा किया था, अपने पोते में अपना अक्स देखते थे. केतन उन के लिए सिर्फ एक वारिस नहीं, बल्कि उन के बुढ़ापे की लाठी और उस विरासत का भविष्य था, जिसे उन्होंने खूनपसीने से सींचा था. यह सिर्फ एक बीमारी नहीं बल्कि पोते के वियोग की वह आग थी, जो उन्हें धीरेधीरे कर के लील गई.

आखिर जिम्मेदार कौन

जांच में जब सिया से पूछताछ हुई तो उस की बातों में एक अजीब सी ठंडी सच्चाई थी. उस ने पुलिस के सामने कुबूल किया कि शादी तोडऩा मेरे लिए

एक विकल्प नहीं था. अगर मैं रिश्ता तोड़ती तो पूरा समाज मेरे पेरेंट्स की तरफ अंगुलियां उठाता. मेरे परिवार की प्रतिष्ठा के सामने मेरा अपना वजूद कुछ भी नहीं था. मेरे परिवार की गरिमा, मर्यादा, प्रतिष्ठा या सम्मान तुलनात्मक दृष्टि से केतन के परिवार से कम नहीं था.

कहते हैं कि अपने पेरेंट्स के आत्मसम्मान और गौरव के महत्त्व को समझने की भावना बेटियों में ज्यादा होती है. सिया के अंदर भी सामाजिक परंपराओं और परिवार से मिले संस्कार थे, जिस के कारण वह अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहती थी.

सिया के मन का यह ‘गणितÓ बहुत ही घातक था. उसे लगा कि यदि वह सगाई तोड़ती है तो वह एक ‘विद्रोहीÓ कहलाएगी, लेकिन अगर केतन ‘हादसेÓ का शिकार हो जाए तो वह एक ‘दुखी मंगेतरÓ बन कर सहानुभूति की हकदार होगी.

उस के लिए केतन का मरना, एक तय शादी के टूटने से कहीं अधिक आसान और सुरक्षित रास्ता था.

केतन अग्रवाल का मामला केवल इसलिए चर्चा में नहीं आया कि एक युवा की असामान्य परिस्थितियों में मृत्यु हुई, बल्कि इस ने समाज की कई धारणाओं को भी झकझोर दिया.

लोगों ने फिर से यह सवाल पूछना शुरू किया कि क्या धनदौलत किसी परिवार को दुख से बचा सकती है? क्या भव्य शादी की तैयारियां अपने आप में भरोसे और मजबूत रिश्ते की गारंटी होती हैं? या फिर चमकती रोशनी और मुसकराती तसवीरों के पीछे भी ऐसी अनकही कहानियां छिपी हो सकती हैं, जिन का अंदाजा किसी को नहीं होता? समाज अब किस दिशा में जा रहा है? इस का जिम्मेदार कौन है?  Ketan Agarwal Murder Case

Chhattisgarh Crime: प्रेमी को केवल – जिस्मानी प्यार तो नहीं

Chhattisgarh Crime: प्यार में अंधी हुई उर्मिला निषाद शादीशुदा विजय बांधे से प्यार कर बैठी. प्रेमी उस के जिस्म से खेलता रहा, लेकिन जैसे ही उर्मिला ने उस पर शादी का दबाव बनाने की भूल की तो विजय एक दिन इतना खूंखार बन गया कि…

अपनी प्रेमिका उर्मिला निषाद को ठिकाने लगाने के लिए विजय बांधे मौके की तलाश कर रहा था. योजना के मुताबिक उस ने पहले हार्डवेयर दुकान से सब्जी काटने वाला चाकू खरीदा और 7 दिसंबर 2025 रविवार की शाम उस ने उर्मिला को फोन लगाया तो उर्मिला ने उस से कहा, ”हां विजय, बोलो क्या बात है?’’

विजय एक कैटरर था, इसलिए उस ने उर्मिला को बताया, ”उर्मिला, बात दरअसल यह है कि आज रात एक प्रोग्राम में खाना बनाने के लिए और्डर बुक हुआ है, हमें वहां चलना पड़ेगा.’’ विजय ने बताया.

”लेकिन पहले तो तुम ने बताया नहीं कि आज का कोई कैटरिंग का और्डर है.’’ उर्मिला ने आशंका जताते हुए कहा.

”असल में क्या है उर्मिला, यह और्डर अर्जेंट में आज ही बुक हुआ है, इसलिए पहले से तुम्हें मैं कैसे बताता.’’ विजय ने सफाई देते हुए कहा.

”ठीक है, मैं तैयार होती हूं, मगर जाना कहां है, यह तो तुम ने बताया नहीं.’’ उर्मिला बोली.

”तुम्हें आम खाने हैं या पेड़ गिनने हैं, जल्दी से तैयार हो जाओ, मैं तुम्हें लेने आ रहा हूं.’’ उर्मिला पर अधिकार जमाते हुए विजय ने फोन काट दिया.

शाम का अंधेरा होते ही विजय ने अपनी बाइक निकाली और उर्मिला के घर की तरफ चल दिया. उर्मिला घर से निकलने को तैयार थी. जैसे ही विजय ने उस के घर के सामने बाइक रोक कर हार्न बजाया, उर्मिला अपने छोटे से बैग के साथ घर से बाहर निकल आई और झट से विजय की बाइक पर बैठ गई.

विजय ने रास्ते में एक रेस्टोरेंट के सामने बाइक रोकी तो उर्मिला ने सवाल किया, ”अब क्यों बाइक रोक दी?’’

इस पर विनोद बोला, ”खाना बनाते देर हो जाएगी, मोमोज और पकौड़ा पैक करवा लेता हूं, रास्ते में कहीं बैठ कर खा लेंगे.’’

मोमोज और पकौड़े पैक करवाने के बाद दोनों उतई गांव की तरफ निकल पड़े. रास्ते में नहर के पास खेल मैदान पर विनोद ने बाइक खड़ी करते हुए उर्मिला से कहा, ”शाम के समय यहां कोई नहीं है और लोगों का आनाजाना भी कम होता होगा, यहीं बैठ कर कुछ खा लेते हैं.’’

दोनों बीच मैदान खाने के लिए बैठ गए. पहले तो दोनों के बीच पहले से चल रहे विवादों पर बात शुरू हुई और थोड़ी ही देर में बहस गर्म हो गई. इसी बीच विजय ने बैग में रखे धारदार चाकू से अचानक उर्मिला पर वार कर दिए. पहले गले पर, फिर शरीर पर कई बार हमले किए. उर्मिला वहीं गिर गई. इस के बाद जिस साजिश की तैयारी विनोद ने पहले से की  थी, उसे अंजाम देने का वक्त आ गया था. विजय बोतल में अपने साथ पेट्रोल भी लाया था.

उस ने बाइक की डिक्की में रखी पेट्रोल की बोतल निकाली और उर्मिला के शरीर पर पेट्रोल उड़ेल दिया. इस के बाद उस ने जेब से माचिस निकाली और आग लगा दी. पास में रखी धान की पराली भी उस ने उसी आग में फेंक दी, ताकि शव पूरी तरह जल कर नष्ट हो जाए और कोई उसे पहचान न पाए. इस के बाद विजय सीधे अपने गांव करगाडीह लौट गया और ऐसे व्यवहार करने लगा, जैसे कुछ हुआ ही न हो. मगर पुलिस की नजरों से उस का कांड छिप नहीं सका और 24 घंटों के अंदर ही पुलिस ने अधजली लाश की गुत्थी सुलझाने में सफलता हासिल कर ली.

उतई पुलिस ने विजय बांधे को उर्मिला के कत्ल के जुर्म में उसे दुर्ग जिले की अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के उतई थाना क्षेत्र में 8 दिसंबर की सुबह करगाडीह पऊवारा नहर किनारे बने खेल मैदान में गांव के कुछ लोग एक्सरसाइज करने पहुंचे तो वहां का नजारा देख कर उन की आंखें खुली की खुली रह गईं. खेल मैदान के एक कोने में पड़े धान के पुआल के ढेर में एक महिला का अधजला शव पड़ा हुआ था. यह खबर पूरे इलाके में जंगल की आग की तरह फैल गई.

लोगों ने इस की सूचना सब से पहले गांव कोटवार को दी. गांव कोटवार केवल दास मानिकपुरी ने शव देख कर तुरंत पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंची पुलिस टीम को जांच में शव के पास से आधा जला चप्पल और धारदार हथियार मिला, जिस से हत्या की आशंका गहरी हो गई. फोरैंसिक एक्सपर्ट को घटनास्थल पर मौजूद बड़े पत्थरों पर खून के निशान दिखे, जिस से यह संभावना और मजबूत होती गई कि हत्या के बाद शव को पत्थरों से भी कुचला गया है. शुरुआती जांच में यह अंदेशा व्यक्त किया गया है कि युवती की पहले धारदार हथियार से हत्या की गई, फिर सबूत मिटाने के लिए उस पर पराली या किसी ज्वलनशील पदार्थ का इस्तेमाल कर शव को जला दिया गया हो.

फोरैंसिक टीम ने मिट्टी के नमूने, खून के धब्बे, जले हुए अवशेष और हथियार समेत कई महत्त्वपूर्ण साक्ष्य वहां से जुटाए. पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने शुरू कर दिए, ताकि हत्या के समय क्षेत्र में आनेजाने वालों की गतिविधियों का पता लगाया जा सके. उतई पुलिस ने आसपास के गांवों में ग्रामीणों से भी पूछताछ की, जिस से लाश की पहचान हो सके.

शुरुआती जांच में न तो मृतका की पहचान हो पाई, न ही कोई गवाह मिला. मौके पर पहुंची पुलिस टीम और फोरैंसिक एक्सपर्ट को पराली के बीच अधजला शव पड़ा मिला था, इसलिए यह साफ था कि हत्या कहीं और नहीं, इसी जगह की गई थी और पहचान छिपाने के इरादे से लाश जलाने की कोशिश भी की गई. एफएसएल टीम और डौग स्क्वायड मौके पर पहुंचे, लेकिन महिला की पहचान स्पष्ट नहीं थी, पुलिस ने इसे ‘ब्लाइंड मर्डर’ मानते हुए कई टीमें गठित कीं. एसएसपी विजय अग्रवाल के निर्देश पर 6 विशेष टीमें रात भर जांच में लगी रहीं.

घटनास्थल से मिले मोमोज के टुकड़ों और मोजों के आधार पर पुलिस ने 5 किलोमीटर के दायरे में दुकानदारों से पूछताछ की और पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज खंगाले. 8 दिसंबर, 2025 की सुबह विजय बांधे सुपेला थाने पहुंचा. एसएचओ को अपना परिचय देते हुए उस ने कहा कि मेरे साथ काम करने वाली उर्मिला निषाद कल रात से घर नहीं पहुंची है.

”तुम उस से आखिरी बार कब मिले थे?’’ एसएचओ ने पूछा.

”सर, कल दिन में मेरी उस से फोन पर बात हुई थी, मगर रात से ही उस का फोन बंद आ रहा है. सुबह मैं ने उस के घर जा कर पता किया तो मालूम हुआ कि वह शाम को कहीं गई थी, मगर रात अपने घर नहीं लौटी.’’

बात महिला के लापता होने की थी, इसलिए उन्होंने उर्मिला निषाद की गुमशुदगी तुरंत दर्ज करा दी. एसएचओ ने इस की इत्तला एसएसपी विजय अग्रवाल को भी दे दी. एसएसपी के निर्देश पर पुलिस टीम ने जिले के सभी थाना क्षेत्रों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्टों की पड़ताल करनी शुरू कर दी. इस के अलावा गठित टीम ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले तो दूसरी टीम ने मोबाइल लोकेशन देखी. जांच की इसी कड़ी में एक पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज में एक बाइक सवार युवक को पुलिस ने संदिग्ध मान कर जांच शुरू की.

दरअसल, उस युवक के पीछे बाइक पर एक महिला बैठी हुई थी और युवक ने बाइक में पेट्रोल डलवाने के बजाय बोतल में पेट्रोल लिया था. एक रेस्टोरेंट में लगे सीसीटीवी फुटेज में यही युवक मोमोज और चाइनीज पकौड़े पैक करवा रहा था. अंत में शक की सुई विजय बांधे नाम के उस व्यक्ति की ओर घूमी, जिस ने खुद को पीडि़त का परिचित बता कर सुपेला थाने में उस की गुमशुदगी दर्ज कराई थी. पुलिस ने जब विजय बांधे को पूछताछ के लिए बुलाया तो उस की बातें शुरू से ही बेमेल लगीं. वह बारबार अपने बयान बदल रहा था और घटनाक्रम बताने में हिचक भी दिखाई दे रही थी.

तकनीकी टीम ने जब विजय का मोबाइल लोकेशन व मूवमेंट खंगाला तो पता चला कि घटना वाली शाम उस के मोबाइल की लोकेशन पुरई गांव की उसी नहर की थी, जहां पर अधजली लाश मिली थी. देर रात पूछताछ के दौरान जब विजय पर पुलिस के सवालों का दबाव और सख्ती बढ़ी तो आखिरकार वह टूट गया और उस ने पूरे मामले की कहानी पुलिस को साफसाफ बता दी. विजय की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उस के घर और आसपास तलाशी ली. उस के कपड़ों पर खून के निशान मिले, जिन्हें उस ने छिपाने की कोशिश की थी. घटना में इस्तेमाल किया गया चापर भी बरामद हुआ. पेट्रोल डालने वाली बोतल और अन्य सामग्रियां भी पुलिस ने जब्त कीं.

फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल से मिले अवशेषों और आरोपी के कपड़ों का मिलान किया, जिस से पूरे घटनाक्रम की पुष्टि हो गई. पुलिस पूछताछ में विजय ने स्वीकार किया कि नहर के पास मिली अधजली लाश सुपेला की रहने वाली उर्मिला निषाद की थी, जिस का कई वर्षों से उस के साथ प्रेम प्रसंग था. उर्मिला उस के ऊपर शादी के लिए दबाव बना रही थी, जिस से परेशान हो कर उस ने हत्या की योजना बनाई.

24 साल का विजय बांधे छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के करगाडीह गांव का रहने वाला था और कैटरिंग का काम करता था. 30 साल की उर्मिला निषाद भी पिछले कुछ सालों से उस के साथ काम कर रही थी. कैटरिंग के काम में अकसर रातरात भर दूसरे गांव कस्बों में जाना पड़ता था. साथ काम करतेकरते दोनों करीब आ गए और उन का रिश्ता भावनात्मक होतेहोते प्रेम संबंधों तक पहुंच गया. विजय शादीशुदा था और उस की पत्नी गर्भवती थी. इस के बावजूद उर्मिला उस पर विवाह का प्रेशर बना रही थी. इसी मुद्ïदे पर दोनों के बीच कई बार लड़ाईझगड़े हो चुके थे.

”विजय, आखिर तुम कब तक मेरी भावनाओं से खेलते रहोगे, मैं इस तरह अपनी जिंदगी बरबाद नहीं होने दूंगी.’’ एक दिन उर्मिला ने उलाहना देते हुए कहा.

”देखो उर्मिला, तुम समझती क्यों नहीं. तुम्हें तो पहले ही मैं ने बता दिया था कि मैं शादीशुदा हूं, फिर भी तुम जिद कर रही हो.’’ विजय ने सफाई दी.

”तो क्या मैं जीवन भर तुम्हारी रखैल बन कर रहूंगी, तुम्हें मुझ से शादी करनी ही होगी.’’ उर्मिला गुस्से में तमतमा कर बोली.

”उर्मिला मैं ने तुम्हें धोखे में नहीं रखा, पत्नी के रहते तुम से मैं कैसे शादी कर सकता हूं. और मैं तुम्हारी जरूरतों का तो ध्यान रख रहा हूं.’’ विजय ने सहानुभूति दिखाते हुए कहा.

”तुम्हें तो मेरे जिस्म से ही मतलब है, अगर तुम मुझे दिल से चाहते तो ऐसी बात कभी नहीं करते.’’ उर्मिला ने आंसू बहाते हुए कहा.

”देखो उर्मिला, मेरी बीवी अभी प्रैग्नेंट है और मैं उसे किसी भी सूरत में छोड़ नहीं सकता. मुझे सोचने के लिए कुछ वक्त दो.’’ विजय ने मामले को शांत करने के लिहाज से कहा.

कैटरिंग के पैसों को ले कर भी विवाद खड़ा हो गया था. इसलिए धीरेधीरे उन के बीच का रिश्ता एकतरफा दबाव और आपसी मनमुटाव की भेंट चढऩे लगा था. कुछ समय से उर्मिला उसे सार्वजनिक रूप से लगातार अपमानित कर रही थी. इस बात को ले कर विजय के मन में इतना तनाव बढ़ गया था कि उस की स्थिति सांपछछूंदर जैसी हो गई थी. उर्मिला द्वारा की जा रही बारबार की बेइज्जती, गुस्से और शादी करने के दबाव से परेशान हो कर ही विजय के द्वारा उर्मिला को रास्ते से हटाने की साजिश रची जा रही थी. विजय को अपनी गलती का अहसास भी हो रहा था कि शादीशुदा होने के बावजूद उसे उर्मिला की बातों में नहीं आना था.

उर्मिला सुपेला गांव की रहने वाली थी. उस का विवाह करीब 10 साल पहले हो चुका था, पहले पति से उस का 8 साल का एक बेटा भी है. पति शराबी था, शराब पी कर उर्मिला के साथ मारपीट करता था. जब बेटा 3 साल का था, तभी उस ने पति को छोड़ दिया और अपनी सास और बेटे के साथ अलग रहने लगी. उर्मिला ने इस के बाद दूसरी शादी कर ली, लेकिन दूसरे पति के साथ भी वह ज्यादा दिनों तक रिश्ता नहीं निभा सकी. इस के बाद वह कैटरिंग का काम करने वाले विजय बांधे के संपर्क में आ गई.

उर्मिला ने शादी तो 2 बार कर ली, मगर उस के दिल पर राज करने वाला उसे कोई नहीं मिला. उस के दोनों पति न तो उस की जिस्मानी जरूरतों को पूरा कर सके और न ही उस के सपनों को साकार कर सके. यही वजह रही कि उर्मिला अपने से कम उम्र के विजय पर फिदा हो गई. विजय ने उर्मिला की कमजोरी का फायदा उठाते हुए उस से नजदीकियां बढ़ाईं और उस के साथ शारीरिक संबंध बनाने लगा. विजय उतई थान के अंतर्गत करगाडीह गांव का रहने वाला था. करगाडीह और सुपेला गांव के बीच की दूरी 15 किलोमीटर थी. कैटरिंग के काम के दौरान दोनों के बीच जिस ढंग से नजदीकियां बढ़ रही थीं, दोनों के बीच प्रेम की डोर मजबूत हो रही थी.

अकसर ही विजय उर्मिला को घुमाने ले जाता था और उस से कई बार शारीरिक संबंध भी बना चुका था. उर्मिला विजय पर दबाव बना रही थी कि वह भी सुपेला में उस के साथ रहे, मगर विजय शादीशुदा था और अपनी प्रैग्नेंट पत्नी की वजह से उर्मिला के साथ रहने को तैयार नहीं था. इसी बात पर दोनों के बीच मनमुटाव बढऩे लगा था और विवाद की स्थिति बनने लगी थी. उर्मिला निषाद की हत्या की घटना युवतियों को सचेत करती है कि प्रेम संबंध बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि कोई पुरुष उन से केवल जिस्मानी संबंध बनाने के लिए तो प्रेम का नाटक नहीं कर रहा.

किसी शादीशुदा पुरुष से प्रेम करने की भूल से उन्हें जीवन भर का पछतावा ही मिल सकता है. यदि किसी मजबूरी के चलते ऐसे पुरुषों से प्रेम संबंध कायम भी हो जाएं तो इस बात का खयाल रखें कि उन पर शादी करने का दबाव कदापि न बनाएं, अन्यथा उन का हश्र भी उर्मिला निषाद की तरह होगा. Chhattisgarh Crime

 

 

प्रेमिका बनी ब्लैकमेलर

बरखास्त सिपाही बना एटीएम बाबा

इस बार होली का त्यौहार खत्म होते ही बिहार में पंचायत चुनाव की गहमागहमी तेज हो चुकी थी. छपरा के रहने वाले सुधीर मिश्रा की 30 वर्षीया पत्नी रेखा मिश्रा पर भी चुनाव लडऩे की सनक सवार थी. वह छपरा में मोहब्बत परसा गांव से मुखिया के लिए चुनाव लडऩे पर अड़ी हुई थी. वह पूरे गांव के लोगों को अपनी तरफ करने के लिए हर तरह की जोरआजमाइश कर रही थी.

उस के समर्थक चाहते थे कि उस की तरफ से गांव के लोगों को ‘भोजभात’ करवाया जाए. रेखा के देवर नीरज और भाई भास्कर ओझा समेत गांव के कुछ लोग भी इस के पक्ष में थे. उन का मानना था कि बहुमत वाली जाति से अधिक जरूरी छोटीछोटी जातियों के समर्थन का था. महादलित के वोट से उन की जीत को कोई नहीं रोक सकता था. इसलिए वह उन के सभी टोले के लोगों के लिए मीटचावल का भोजभात करवाना चाहती थी.

चुनाव जीतने की बनाई प्लानिंग

रेखा ने अपने लोगों के साथ बैठ कर इस के लिए मीटिंग की. सभी ने एकजुट में कहा कि उन्हें एक नहीं 2 भोजभात करवाने होंगे. एक ऊंची जाति के लोगों के लिए और दूसरा सभी अनुसूचित जाति के लोगों के लिए होना चाहिए. महादलित औरतों को साड़ी भी बंटवानी होगी. साड़ी तो सवर्ण जाति की महिलाओं को भी देनी होगी. रेखा चाहती थी कि गांव के पोखर की भी साफसफाई अभी ही करवा दे, ताकि छठ आने तक उस में बारिश का साफ पानी जमा हो सके.

“इन सब पर कितना खर्चा आ जाएगा?” रेखा ने सवाल किया.

“भाभी, खर्चा तो लाखों में आएगा, लेकिन वोट भी तो हजारों में मिलेंगे.” रेखा का देवर नीरज बोला.

“तो फिर भाई को बोलो न,” रेखा ताना मारते हुए बोली.

उसी वक्त सुधीर मिश्रा वहां आ पहुंचा. उस ने भी अपनी नेताइन पत्नी रेखा का व्यंग्य सुना.

उसी के लहजे में वह बोला, “पैसे की बात आती है तब सुधीर मिश्रा. मुझे एटीएम समझ रखा है क्या?”

“अरे हां, तुम हमारे एटीएम नहीं तो और क्या हो? सिर्फ तुम्हारी जेब में हाथ डालनी होती है.” रेखा का यह कहना था कि वहां मौजूद सभी खिलखिला कर हंस पड़े.

“अरे जीजाजी, तभी तो लोग आप को ‘एटीएम बाबा’ कहते हैं,” सुधीर का साला भास्कर बोला.

“एटीएम मेरी जेब में लगा है क्या?” सुधीर व्यंग्य से बोला.

“जेब में नहीं लगा है, लेकिन कहीं और तो लगा है न…” भास्कर बोला.

“क्या मतलब है तुम्हारा?” सुधीर नाराजगी के साथ बोला.

“मैं नहीं जानती, एटीएम कहां लगा है कहां नहीं. मुझे तो भोजभात के खर्च का इंतजाम चाहिए. अब तुम जहां से करवा दो.” रेखा बोली.

“भैया, लखनऊ में तो आप के बहुत जानपहचान वाले हैं, क्यों नहीं उन से बात करते हैं. आप को मदद करने में वे कभी पीछे नहीं हटेंगे.” नीरज बोला.

“कहता तो ठीक है, मेवात वाले से भी बात करता हूं.” अब तक सुधीर गंभीर हो गया था, “अब बीवी ने चुनाव जीतने की सौगंध खा ली है तो मेरा भी तो उस का साथ देने का फर्ज बनता है.”

“फर्ज की बात करते हो, सरकारी ठेका आएगा तो सब से पहले तुम्हीं हाथ पसारे आओगे.” रेखा बोली.

“भाभी, वह तो बाद की बात है. अगर भैया को ठेका मिलेगा तो घी कहां गिरेगा दाल में ही न!” नीरज बोला.

“हां दीदी, हमें मत भूलना.” भास्कर बोला.

“चलो मीटिंग खत्म करो, तुम लोग अभी से ही खयाली पुलाव पकाने लगे. पहले सब मिल कर पैसे का इंतजाम करो, बाकी आगे मैं सब कुछ संभाल लूंगी.” रेखा बोली और मीटिंग से जाने के लिए अपनी कुरसी से उठ कर खड़ी हो गई.

उस के साथ सहयोगी महिला रजिस्टर संभालती हुई बोली, “हमें पंडिताइन के दालान में भी मीटिंग में जाना है. वहां 150 से अधिक महिलाएं पहुंच चुकी हैं. फोन आया था.”

“अरे हां, मैं तो भूल ही गई थी. ठीक है, चलो, चलो जल्दी करो.”

एटीएम काट कर निकाले 40 लाख रुपए

बात 3 अप्रैल, 2023 की है. लखनऊ के सुशांत लोक थाने में सुबह करीब 10 बजे किसी ने फोन कर बताया कि उन के इलाके का एसबीआई एटीएम टूटा पड़ा है. लगता है उसे काट कर पैसे निकाल लिए गए हैं. इस सूचना पर एसएचओ शैलेंद्र गिरि तुरंत अपने कुछ सहयोगियों के साथ घटनास्थल पर जा पहुंचे.

एटीटीएम थाने से 2 किलोमीटर दूर खुरदही बाजार में था. शैलेंद्र गिरि के साथ हैडकांस्टेबल अमरनाथ और 3 सिपाहियों में रामायण भारती, चंद्रप्रकाश सिंह और धर्मेंद्र भी थे. घटनास्थल पर टूटे एटीएम को देख कर अनुमान लगाया गया कि इसे रात में गैस कटर से गया है. उस में से निकाले गए पैसों की जानकारी उस में दर्ज रिकौर्ड से हुई, जो 39.58 लाख थे.

एसएचओ ने वारदात का खाका खींचने के बाद वहां लगे सीसीटीवी कैमरे पर नजर दौड़ाई, जिसे खोल लिया गया था. उस की आसपास खोज की गई. एटीएम बूथ और उस के आसपास काफी छानबीन के बाद कैमरे एक दुकान के चबूतरे के नीचे मिले.

इस घटना की जांच को ले कर थाने में पुलिस अधिकारियों की गहन बैठक हुई. कई कोणों से इस तरह की बढ़ती घटना की तह में जाने के लिए जौइंट कमिश्नर निलाब्ज चौधरी के निर्देश पर 5 टीमें बनाई गईं. उन को सर्विलांस से ले कर अपराधियों की गिरफ्तारी और पैसे की बरामदगी तक की जिम्मेदारी सौंपी गई. एक टीम ने सीसीटीवी कैमरो में मिली लोकेशन का अध्ययन किया. जिस से मालूम हुआ कि लुटेरे नीले रंग की कार से आए थे और घटना को अंजाम देने के बाद वे उसी से वापस चले गए थे.

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सर्विलांस टीम (दक्षिणी) के सदस्यों में एसआई सुमित बालियान, हैडकांस्टेबल मंजीत सिंह, बद्री विशाल तिवारी, सौरभ दीक्षित, सिपाही गिरीश चौधरी और रविंद्र सिंह को एसएचओ ने शहर के चारों दिशाओं में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, आगरा एक्सप्रैसवे, सीतापुर लखनऊ राजमार्ग, सुलतानपुर अयोध्या राजमार्ग, बुंदेलखंड एक्सप्रैसवे के बौर्डर पर लगा दिया. वे टोल प्लाज केंद्रों पर तैनात कर दिए गए थे.

वहां लगे हुए सीसीटीवी कैमरों को खंगाला गया. पूर्वांचल एक्सप्रैसवे पर एक नीले रंग की कार जाती दिख गई. साथ ही टोल प्लाजा पर फास्टटैग चुकाते समय उस की लोकेशन भी मिल गई. टोल प्लाजा से मिला सुराग जांच की कड़ी को जोडऩे के लिए महत्त्वपूर्ण साबित हुआ. उस से गाड़ी का नंबर मिल गया और लुटेरों तक पहुंचने की कुछ उम्मीद जाग गई.

लेकिन इस जांच मेंं जल्द ही निराशा भी हाथ लगी. पूर्वांचल एक्सप्रैसवे पर ही गोसाईगंज, लखनऊ में टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी में उसी गाड़ी का नंबर दूसरा था. इस का मतलब साफ था कि वारदात करने वालों ने गोसाईगंज टोल प्लाजा पर पहुंचने से पहले गाड़ी की नंबर प्लेट बदल दी थी. किंतु वहां से वह मारुति बलेनो कार पूर्वांचल एक्सप्रैसवे की सीमा से लगे हैदरगंज बाराबंकी की ओर जाती हुई दिखाई दी.

सीसीटीवी कैमरों के सहारे आगे बढ़ी जांच

उस के बाद हैदरगंज बाराबंकी में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई तो वहां कार का नंबर बदला हुआ पाया गया. उस नंबर से कार बिहार की थी. उस नंबर की जांच में पाया गया कि कार छपरा (बिहार) निवासी वितेश कुमार के नाम दर्ज है. इस छोटे से सुराग के सहारे दक्षिण जोन के डीसीपी विनीत जायसवाल ने जौइंट पुलिस कमिश्नर क्राइम (उत्तर प्रदेश) के निर्देश पर एडिशनल डीसीपी, एसीपी (गोसाईंगंज) सुश्री स्वाति चौधरी तथा डीसीपी (दक्षिणी जोन) के सर्विलांस की 2 अलगअलग टीमों का गठन किया गया.

दोनों टीमें सुशांत गोल्फ सिटी के एसएचओ शैलेंद्र गिरि के नेतृत्व में बनाई गई थीं, जिन्हें बिहार भेज दिया गया. छपरा में यूपी पुलिस की मेहनत रंग लाई. उन्होंने बलेनो कार के मालिक वितेश कुमार को ढूंढ निकाला. उस ने बताया कि 3 अपै्रल, 2023 को सुधीर मिश्रा उस के घर आया था. उसे लोग बुलबुल मिश्रा के नाम से भी जानते हैं, लेकिन एटीएम बाबा के रूप में वह लोकप्रिय है. सुधीर मिश्रा के बारे में तहकीकात से पता चला कि वह बिहार पुलिस का एक बरखास्त सिपाही है.

वितेश ने उत्तर प्रदेश पुलिस को बताया कि 3 अप्रैल को सुधीर उस के पास आ कर बोला कि उस की पत्नी की तबियत काफी बिगड़ गई है, उसे अस्पताल ले जाना है, इसलिए उस की बलेनो कार की जरूरत है. शैलेंद्र गिरि के लिए इस जानकारी में चौंकाने वाली एक बात उस का चर्चित नाम ‘एटीएम बाबा’भी था.

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वह सोच में पड़ गए कि उसे लोग आखिर इस नाम से क्यों पुकारते होंगे? क्या वह एटीएम इस्तेमाल के बारे में जानकारी रखता था? इस के इस्तेमाल के तरीके के बारे में लोगों को गाइड करता था? या फिर उस की सुरक्षा में लगा हुआ था? इन्हीं सवालों में एक और सवाल मन में आया कि कहीं वह किसी एटीएम लुटेरों के गैंग से तो नहीं जुड़ा था?

एसएचओ ने इन सवालों का जवाब पाने के लिए उन्होंने सर्विलांस टीम को सुधीर मिश्रा के बारे में पूरी जानकारी मालूम करने के लिए लगा दिया. इस जांच में पता चला कि सुधीर एटीएम लुटेरों के गैंग में शामिल था, जिस का खास सदस्य विजय पांडेय और देवेश पांडेय हैं. दोनों इंजीनियर हैं और संत कबीरनगर में रहते हैं.

दोनों एटीएम में कैश लोड करने का काम करते थे और एटीएम के एक्सपर्ट थे. दोनों गोमती विहार के सरयू अपार्टमेंट में किराए के फ्लैट में रहते थे. उन्हें पुलिस गिरफ्तार तो नहीं कर पाई, पर इतना जरूर पता चला कि वे सुधीर मिश्रा के छोटे भाई नीरज मिश्रा के संपर्क में थे.

पुलिस को नीरज मिश्रा तक पहुंचने में ज्यादा मुश्किल नहीं हुई. वह छपरा में दबोच लिया गया. उस की गिरफ्तारी होते ही सुधीर मिश्रा समेत पंकज, राज, भीम के अलावा 4 मेवात के लुटेरे भी पकड़ लिए गए. उन से पूछताछ करने पर मालूम हुआ कि एटीएम लूट को उन्होंने ही सुधीर मिश्रा के इशारे पर अंजाम दिया था. इस की साजिश सुधीर मिश्रा ने ही रची थी. जिस एटीएम को निशाना बनाया गया, उस की रेकी देवेश व विजय ने ही करवाई थी.

बड़ी आसानी से काट लिया एटीएम

पूछताछ में वारदात के सरगना सुधीर मिश्रा ने बताया कि एटीएम के भीतर घुसते ही उन्होंने पहले सीसीटीवी पर काली स्याही डाल दी थी. इस से वे कैमरे में कैद नहीं हो पाए थे. बाहर के फुटेज और गाड़ी नंबर के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की थी. घटनास्थल पर 3 मोबाइल नंबर सक्रिय मिले थे. इन की मदद से गिरोह तक पुलिस पहुंच पाई थी.

जांच में पता चला कि सरगना सुधीर मिश्रा व उस के गिरोह के सदस्यों पर दरजनों केस दर्ज हैं. कुछ लोगों पर हत्या व लूट के केस भी हैं. सुधीर पर एटीएम काटने संबंधी 12 केस हैं. वह पहले भी जेल जा चुका है, इसलिए वह एटीएम बाबा के नाम से मशहूर है. वह खुद बिहार में बैठ कर अलगअलग राज्यों में मेवातियों की मदद से वारदात को अंजाम देता रहा है.

एटीएम में चोरी करने की रिपोर्ट हितांक्षी पेमेंट सर्विसेज (सीएमएस) प्राइवेट लिमिटेड के लीगल एडवाइजर एडवोकेट मोहम्मद सलमान ने 3 अप्रैल, 2023 को भादंवि की धारा 457/380 के अंतर्गत दर्ज करवा दी. उन के बारे में पूरी कहानी 8 मई, 2023 को विजय पांडेय उर्फ सर्वेश की गिरफ्तारी के बाद सामने आई. इस में सुधीर की पत्नी रेखा मिश्रा का नाम सामने आया तो वह फरार हो गई थी. पकड़े गए सभी अभियुक्तों से 14 लाख 63 हजार रुपए रकम बरामद हुई.

गिरफ्तार किए गए सभी 11 आरोपियों की अपनीअपनी क्राइम हिस्ट्री थी, जिन का सरगना बरखास्त सिपाही सुधीर मिश्रा ही था. लखनऊ के नए स्थापित थाना गोल्फ सिटी से करीब 25 किलोमीटर दूर सुलतानपुर रोड पर खरदही बाजार है. यह शहर के बाहरी इलाके में है. यहां अंसल ग्रुप द्वारा सुशांत गोल्फ सिटी कई दूसरी नई कालोनियां विकसित की गई हैं. यहीं पराग दूध डेरी (फैक्ट्री), पुलिस विभाग का डीजीपी कार्यालय और पुलिस विभाग का हेल्पलाइन मुख्यालय भी बनाए गए हैं.

दूसरी तरफ सुधीर मिश्रा की पत्नी रेखा मिश्रा एक समाजसेवी महिला होने के कारण लोकल राजनीति में सक्रिय थी. उसे नेतागिरी का जबरदस्त चस्का लगा हुआ था. उसे पति सुधीर मिश्रा समेत परिवार के दूसरे सदस्यों की शह मिली थी. सभी उस की महत्त्वाकांक्षा को हवा देने में उस से चार कदम आगे रहते थे. वे उस की बदौलत भविष्य में सरकारी ठेका हासिल करने का मंसूबा रखते थे.

रेखा देख रही थी विधायक बनने का सपना

आजादखयालों वाली रेखा का सपना एक दिन विधायक बनने का भी था. वह बीते 2 सालों से 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव के लिए जमीन तैयार करने में जुटी हुई थी. गांव के हर सामाजिक आयोजनों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती थी. किसी के घर में शादीब्याह होने पर उपहार के साथ वरवधू को आशीर्वाद देने पहुंच जाती थी. किसी का निधन होने पर बगैर बुलाए वहां जा कर उस के दुख में शामिल हो जाती थी. अपनी महत्त्वाकांक्षाओं की संतुष्टि के लिए ही उस ने पति सुधीर मिश्रा से चुनाव लडऩे की पेशकश की थी.

कहने को तो सुधीर मिश्रा बिहार पुलिस में सिपाही था, लेकिन उस के संबंध अपराधी तत्त्वों से भी बने हुए थे. उन की संगति में ही वह कई वैसे गिरोहों के संपर्क में था, जो चोरी और एटीएम लूट आदि का काम करते थे. इस की न केवल पुलिस के बड़े अधिकारियों को भनक लगी, बल्कि एक एटीएम लूट में उस का नाम भी आ गया तो उसे बरखास्त कर दिया गया.

वह पंचायत चुनाव लडऩे के लिए पत्नी के दबाव में धन जुटाने की तैयारी में लग गया था. सब से पहले उस ने अपने भाई नीरज मिश्रा को साथ ले कर योजना बनाई. उस ने ही कुछ अन्य साथियों के साथ विजय पांडेय से संपर्क किया. वह हितांक्षी पेमेंट सर्विस (सीएमएस) प्राइवेट लिमिटेड द्वारा एटीएम को सप्लाई करने वाली नकद करेंसी का काम करता था.

हालांकि वह अपनी संदिग्ध गतिविधियों के चलते कंपनी से निष्कासित हो चुका था. नीरज के कहने पर वह उस के गैंग में शामिल हो गया था. उस के साथ राज तिवारी, पंकज कुमार पांडेय, कुमार भास्कर ओझा और सुधीर मिश्रा भी थे. सुधीर मिश्रा पहले भी कुछ आपराधिक गतिविधियों के चलते जेल जा चुका था, जहां राजस्थान के मेवाती गैंग के संपर्क में आ गया था और अपने भाई नीरज के साथ मिल कर नया गैंग बना लिया था.

नीरज मिश्रा ने लखनऊ के खुरदही बाजार में एटीएम की पलसर बाइक से रेकी कर मालूम कर लिया कि 3 अप्रैल की रात ही उस में 39 लाख रुपए की रकम डाली गई है. उस ने तुरंत अपने साथी गैंग के सभी सदस्यों को अलर्ट कर उन्हें एटीएम के पास बुला लिया. राज तिवारी, पंकज कुमार पांडेय, कुमार भास्कर ओझा गैस कटर ले कर आ गए. उन्होंने फटाफट एटीएम काटी और रकम निकाल कर नीले रंग की बलेनो कार से रात के डेढ़ बजे लखनऊ आ गए.

बाद में पुलिस ने बरखास्त सिपाही सुधीर मिश्रा की पत्नी रेखा मिश्रा को भी गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में लुटेरों ने बताया कि पहले वे बगैर सिक्योरिटी गार्ड वाले एटीएम को टारगेट बनाया करते थे. गार्ड नहीं होने की वजह से उस का शटर गिरा कर टेक्निकल सदस्य बन कर काम करते थे. इस दौरान सुधीर खुद बाहर रखवाली किया करता था. वे बाहर से सीसीटीवी कैमरों पर ब्लैक पेंट कर दिया करते थे.

आरोपियों से पूछतछ के बाद उन की निशानदेही पर 14.63 लाख रुपए नकद के अलावा, 2 फरजी नंबर प्लेट, मारुति बलेनो कार, पलसर बाइक, 6 आरी, गैस पाइप, सिलेंडर, रेग्युलेटर, पेचकस, प्लास आदि सामान बरामद हुआ.

सभी आरोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया.

प्रेमिका बनी ब्लैकमेलर – भाग 3

यह सब जानकारी मिलने के बाद उसे पहली बार पता चला कि वह बुरी तरह से फंस चुका है. शनीफ ने कई बार प्यार से सिमरन को समझाने की कोशिश की, लेकिन उस ने उस की एक न सुनी. उस का साफ कहना था कि अगर उस ने उसे पैसा नहीं दिया तो वह उसे बुरी तरह से बदनाम कर देगी.

बदनामी के डर से वह बारबार उस की मांग पूरी करता रहा. लेकिन उस की मांग खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी. जिस से शनीफ बुरी तरह से तंग आ चुका था. उसी दौरान शनीफ का रिश्ता महाराष्ट्र की एक युवती के साथ पक्का हो गया. हालांकि उस ने रिश्ते वाली बात पूरी तरह से उस से छिपा कर रखी थी. लेकिन पता नहीं उसे किस तरह से शनीफ के रिश्ते की बात पता चल गई. उस के बाद उस ने फिर से उसे ब्लैकमेल करना चालू कर दिया.

शनीफ ने उसे इस बार पैसा देने से साफ मना किया तो उस ने उस से कहा कि यह आखिरी बार है. तुम्हारा निकाह हो जाने के बाद तुम्हें मेरी जरूर तो होगी नहीं. उस के बाद वह उस से कोई पैसा नही मांगेगी.

सिमरन की बात सुनते ही शनीफ को लगा कि इस बार पैसा देने से उस से हमेशाहमेशा के लिए पीछा छूट जाएगा. यही सोच कर उस ने फिर से उसे मोटी रकम दे दी, लेकिन उस के बावजूद भी वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आई. उस ने कुछ ही दिनों में फिर से उस से पैसों की मांग शुरू कर दी थी. परेशान हो कर शनीफ ने उस का फोन तक अटैंड करना बंद कर दिया था.

सिमरन नहीं मानी तो रेत डाला गला

शनीफ ने पुलिस को बताया कि 3 मई, 2023 को सिमरन उस की दुकान पर आ धमकी. उस वक्त दुकान पर काफी ग्राहक खड़े थे. दुकान के सामने आते ही उस ने अपनी स्कूटी रोकी और फिर उसे इशारे से पास बुलाने लगी. उस ने उसे अनदेखा करते हुए अपने ग्राहकों को निपटाया.

उस ने उस के बुलाने पर नहीं गया तो उस ने शनीफ को मोबाइल दिखा कर इशारा किया. उस के इशारे को शनीफ भलीभांति समझता था. उस वक्त दुकान बंद करने का भी समय हो चुका था. आसपास की अधिकांश दुकानें बंद हो चुकी थीं. फिर भी वह अनचाहे मन से उस के पास पहुंचा.

शनीफ ने उस से काफी मिन्नतें की कि वह उसे माफ कर दे. इस वक्त उस के पास उसे देने के लिए कुछ भी नहीं है, लेकिन उस के बाद भी सिमरन अपनी जिद पर अड़ी रही. उस वक्त उस के पड़ोसी उसे शक की निगाहों से देख रहे थे. बारबार उस की धमकी सुन कर शनीफ बुरी तरह पक चुका था.

सिमरन ने फिर से जैसे ही उसे मोबाइल दिखाने की तो शनीफ उस के हाथ से मोबाइल छीन लिया. उस के बाद उसे सडक़ पर दे मारा. फिर वह जल्दी से दुकान की तरफ लपका. जब तक सिमरन ने अपना मोबाइल समेटा, वह दुकान से मीट काटने का छुरा ले कर उस के पास पहुंच गया. जैसे ही सिमरन ने उस के हाथ में छुरा देखा, उस ने वहां से भागने की कोशिश की. लेकिन उस की स्कूटी स्टार्ट नहीं हुई. मौका पाते ही शनीफ ने छुरे से उस का गला रेत दिया.

उस वक्त कई दुकानदार उसे देख रहे थे. लेकिन उस पर खून का भूत सवार होते देख किसी ने भी बोलने की हिम्मत नहीं की. रात के साढ़े 9 बजे के बाजार में सैंकड़ों की मौजूद भीड़ के बीच एक जवान युवती की जघन्य रूप से हत्या किए जाने से बाजार में अफरातफरी मच गई. उस की हत्या को देख कर खरीदार तो इधरउधर हुए ही, साथ ही दुकानदार भी अपनी दुकानें फटाफट बंद कर वहां से निकल लिए थे.

सिमरन को मौत की नींद सुलाने के बाद शनीफ मलिक ने वह छुरा दुकान में रख दिया और फिर वह भी वहां से फरार हो गया. फिर शनीफ ने अपना मोबाइल भी बंद कर लिया था. उस के बाद वह घर पहुंचा, अपने कपड़े चेंज किए और घर वालों को कुछ भी बताए बगैर फरार हो गया.

इस केस के खुलते ही पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में फातिमा, राशिद परिवर्तित नाम हैं

प्रेमिका बनी ब्लैकमेलर – भाग 2

समय के साथसाथ जैसे सिमरन बड़ी होती गई, उस की सुंदरता में और भी निखार आता गया. जवान होतेहोते वह रूप की रानी बन गई. होश संभालते ही उस ने भी मोबाइल चलाना सीख लिया था. उसी दौरान उसने फेसबुक, वाट्सऐप व इंस्टाग्राम चलाना सीख लिया था. उस के बाद वह अपनी सुंदर फोटो खींच कर सोशल मीडिया पर अपलोड करने लगी. जिस की अदाएं देख कर फेसबुक पर उस के हजारों दोस्त बन गए.

हजारों लोगों के फालोअर बनते ही उस ने अपने रखरखाव पर और अधिक ध्यान देना शुरू कर दिया था, जिस के कारण दिनबदिन उस के फालोअर्स की संख्या में बढ़ोत्तरी होती गई. उसी दौरान उस की फूफी फातिमा का इंतकाल हो गया. फूफी के इंतकाल के बाद उस ने उस घर को छोड़ दिया और किराए का कमरा ले कर अकेली ही रहने लगी. उसे पहले से ही अपनी खूबसूरती पर नाज था. उसी खूबसूरती के कारण ही उस के आसपास में कई चाहने वाले भी बन गए थे.

उन्हीं चाहने वालों में था उस का एक पड़ोसी राशिद, जिस की शनीफ से अच्छी पटती थी. कई बार राशिद ने शनीफ के सामने सिमरन की सुंदरता की तारीफ की थी. लेकिन वह उस से कभी भी रूबरू नहीं हो पाया था. सिमरन की तारीफ सुन कर कई बार उस का उस से मिलने का मन भी करता, लेकिन समय अभाव के कारण वह मिल नहीं पाया था.

शनीफ मलिक से हुआ प्यार

अब से लगभग डेढ़ साल पहले की बात है. हर रोज की तरह उस दिन भी शनीफ अकेला ही दुकान पर बैठा हुआ था, तभी उस की दुकान के सामने एक स्कूटी आ कर रुकी. उस स्कूटी पर सवार युवती निहायत ही खूबसूरत थी. शनीफ की जैसे ही उस युवती पर नजर पड़ी तो वह उसे देखता ही रह गया. उस ने सोचा भी न था कि वह उस की दुकान से अंडे लेने आई है. लेकिन जैसे ही वह युवती उस की दुकान की ओर बढ़ी, उस के दिल की धडक़न दोगुनी हो चली थी. जैसे ही वह पास आ कर खड़ी हुई, वह उसे देखता ही रह गया.

युवती ने दुकान पर पहुंचते ही अंडे देने को कहा. तभी उस के दिमाग में आया कि कहीं यही तो सिमरन नहीं है. उस ने अंडे गिनतेगिनते कुछ हिम्मत जुटाई, “आप का नाम सिमरन तो नहीं?”

“जी हां, मैं ही सिमरन हूं. पर आप मेरा नाम कैसे जानते हो?”

“यूं ही आप के बारे मे मेरे दोस्त चर्चा करते रहते हैं.”

“कौन है, आप का दोस्त?”

“वही राशिद जो आप के पड़ोस में रहता है.”

“ओहो! तो वह आवारा यहां तक घूमता है. वैसे मैं आप का नाम जान सकती हूं.”

“हां, क्यों नहीं. मुझे शनीफ मलिक कहते है.”

“बहुत अच्छा नाम है आप का. ओके चलती हूं.”

“ठीक है, फिर आगे भी हमारी दुकान की शोभा बढ़ाने के लिए आते रहना.”

“जी जरूर, लेकिन आप के बैठने का समय क्या है? क्योंकि मैं इस से पहले भी कई बार यहां से अंडे खरीद कर ले जा चुकी हूं. लेकिन उस वक्त तो शायद आप के वालिद ही मिलते थे.”

“जी हां, दोपहर तक दुकान वही संभालते हैं. मेरी ड्यूटी शाम को शुरू होती है. आप ये मेरा नंबर रख लीजिए, जब आप को अंडे चाहिए, मुझे फोन पर ही बता देना. मैं तुम्हारे आने से पहले ही ताजे अंडे छांट कर रख लिया करूंगा.”

“तो फिर आप ने जो मुझे अंडे दिए हैं, वो बासी हैं क्या?” युवती ने मजाक के लहजे में प्रश्न किया.

“नहींनहीं, फिर भी जब आप मुझे बता कर आओगी तो मुझे सहूलियत होगी.” कह कर शनीफ ने उसे एक विजिटिंग कार्ड थमा दिया. उस के बाद सिमरन हंसती हुई वहां से चली गई.

पहली मुलाकात में ही शनीफ उस की खूबसूरती का दीवाना हो गया था. उस दिन के बाद वह जल्दी ही मोबाइल पर उस की फेसबुक और इंस्टाग्राम को खंगालने में लग गया और जल्दी ही सिमरन के साथ फेसबुक और दूसरे मीडिया प्लेटफार्म पर जुड़ गया. फिर कुछ ही दिनों में दोनों के बीच दोस्ती गहराने लगी.

शनीफ देखनेभालने में हैंडसम था. धीरेधीरे दोनों में दोस्ती इस कदर पक्की हो गई कि उन्हें एकदूसरे से मिले बिना चैन नहीं पड़ता था. दोनों के बीच प्रेम प्रसंग चालू हुआ तो दोनों ही साथ जीनेमरने की कसमें भी खाने लगे थे. उन्हीं एकांत मुलाकातों में सिमरन ने पूरी तरह से अपना शरीर उसे समर्पित कर दिया. सिमरन को पा कर शनीफ अपने आप को बहुत ही भाग्यशाली समझने लगा था. उसे घमंड इस बात का था कि एक खूबसूरत और मौडर्न लडक़ी उस के इतने करीब थी कि उस ने कभी सोचा भी नहीं था.

सिमरन का खर्च उठाने लगा शनीफ

सिमरन शेख से गहरी दोस्ती हो जाने के बाद शनीफ मलिक उसे खर्च के लिए कुछ पैसे भी देने लगा था. वह पूरी तरह से सिमरन को अपनी मानने लगा था. यही कारण रहा कि उस ने कभी भी उसे पैसे देने से मना नहीं किया. समयसमय पर वह उस के छोटेमोटे खर्च खुद ही वहन करने लगा था.

उसी दौरान कई बार दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बने. उन्हीं अवैध संबंधों के दौरान सिमरन अकसर दोनों की वीडियो यह कह कर बना लेती थी कि यह उस का शौक है. उस के बाद वह उन वीडियो को अन्य फोन में भी सेव कर लेती थी. लेकिन शनीफ उसे इस कदर चाहने लगा था कि उस ने कभी भी किसी भी प्रतिक्रिया पर शक नहीं किया था.

उसी दौरान शनीफ के घर वालों ने उस के निकाह करने की सोची. फिर जल्दी ही शनीफ के घर वाले उस के निकाह की चर्चा करते हुए एक लडक़ी की तलाश में जुट गए. यह बात शनीफ ने सिमरन के सामने रखी. उस ने सिमरन से साफ शब्दों में कहा कि इस से पहले मेरे घर वाले मेरा निकाह किसी और लडक़ी से करें, हम दोनों कोर्ट मैरिज कर लेते हैं.

शनीफ जानता था कि अगर उस ने अपने घर वालों के सामने उस का जिक्र किया तो वह उस के साथ निकाह करने के लिए किसी भी हाल में राजी होने वाले नहीं. लेकिन सिमरन ने उस के साथ निकाह करने से साफ मना कर दिया. सिमरन का कहना था कि अभी निकाह करने की क्या जल्दी है. वह इतनी जल्दी निकाह के बंधन में बंधना नहीं चाहती.

सिमरन की बात सुनते ही शनीफ को बहुत बड़ा झटका लगा. वह उसे किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता था. उस के लिए उसे चाहे कितनी भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े.

प्रेमिका बन गई ब्लैकमेलर

उस के बाद सिमरन ने नएनए खर्च बता कर शनीफ से मोटी रकम ऐंठनी शुरू कर दी थी. उस ने कई बार उस की मांग पूरी कर भी दी, लेकिन उस की मांग पहले से ज्यादा बढऩे लगी थी. शनीफ ने उस के सामने अपनी मजबूरी बताते हुए पैसे देने से मना किया तो उस ने उसे उस के साथ बनाई गई अश्लील वीडियो दिखा कर धमकाने की कोशिश की.

उस ने साफ शब्दों में कहा कि अगर उस ने उस की मांग पूरी न की तो वह उस की सारी वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर देगी, जिस के बाद वह सारी जिंदगी कुंवारा ही बैठा रहेगा. सिमरन ने उस के कई फोन काल भी रिकौर्ड कर रखे थे.

प्रेमिका बनी ब्लैकमेलर – भाग 1

3 मई, 2023 को रात के कोई साढ़े 9 बजे का वक्त रहा होगा. उसी दौरान पुलिस हैडक्र्वाटर से पुलिस को सूचना मिली कि मुलताई कस्बे के गांधी वार्ड के नागपुर चौक पर एक युवती की गला रेत कर हत्या कर दी गई है. युवती की लाश सडक़ पर पड़ी हुई है. मुलताई कस्बा मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के अंतर्गत आता है.

हत्या की सूचना मिलते ही मुलताई थाने की टीआई प्रज्ञा शर्मा पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गई. घटनास्थल पर पहुंचते ही टीआई प्रज्ञा शर्मा ने सब से पहले घटनास्थल का मुआयना किया. युवती की गला रेत कर बड़ी ही बेरहमी से हत्या की गई थी. घटनास्थल पर सडक़ के बीचोंबीच युवती का शव पेट के बल पड़ा हुआ था. उस के पास ही एक स्कूटी और उस का अन्य सामान भी बिखरा पड़ा था.

घटनास्थल का मुआयना करने के बाद प्रज्ञा शर्मा ने इस सब की जानकारी एसडीओपी नम्रता सोंधिया तथा बैतूल एसपी प्रतीक चौधरी को भी दे दी थी. सरेआम भीड़भाड़ वाले इलाके में बीच सडक़ पर युवती की हत्या कर दिए जाने का मामला बेहद ही गंभीर था. यही कारण था कि युवती की हत्या की सूचना पाते ही सारे पुलिस उच्चाधिकारी मौके पर पहुंच गए थे.

उस वक्त तक मार्केट की ज्यादातर दुकानें बंद हो चुकी थीं. बाकी दुकानदार पुलिस को देख कर अपने शटर गिरा कर चलते बने थे. पुलिस ने आसपास खुल रही दुकान वालों से उस युवती की हत्या के बाबत जानकारी लेनी चाही तो किसी ने अपना मुंह तक नहीं खोला, लेकिन उस की शिनाख्त जल्दी ही हो गई. युवती मुलताई के नेहरू नगर के इलाके में रहने वाली अफजल शेख की बेटी सिमरन शेख थी. जानकारी मिलते ही पुलिस ने उस की हत्या की जानकारी उस के घर वालों को देते हुए तुरंत घटनास्थल पर पहुंचने को कहा.

कैमरे में रिकौर्ड नहीं हो पाई वारदात

युवती की हत्या किस ने और क्यों की? यह बात न तो उस के घर वालों को पता था और न ही पुलिस को पता लग पा रहा था. उस वक्त तक मार्केट पूरी तरह से बंद हो चुकी थी. तब पुलिस ने अपनी अपनी काररवाई पूरी कर उस की लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी.

इस के बाद पुलिस इस केस की जांच में जुट गई. पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे चैक किए. लेकिन पुलिस को इस से भी कोई सफलता नहीं मिली, क्योंकि सीसीटीवी कैमरे के सामने एक बड़ी गाड़ी खड़ी थी. जिस के कारण वह वारदात कैमरे में रिकौर्ड नहीं हो पाई थी. उस के बाद पुलिस ने देखा कि घटनास्थल के ठीक सामने हनीफ मियां की अंडों की दुकान थी, जो हर रोज देर रात 10 बजे तक खुली रहती थी.

पुलिस को लगा कि घटना के वक्त हनीफ मियां की दुकान जरूर खुल रही होगी. शायद उन्हीं से इस मामले में कुछ जानकारी हासिल हो सके. यह सोचते ही पुलिस ने दुकान पर लिखे मोबाइल नंबर को डायल किया तो किसी ने फोन नहीं उठाया. पुलिस ने 1-2 बार नहीं कई बार उसी नंबर को रिडायल किया. लेकिन वह फोन नहीं उठा.

फोन न उठने के कारण पुलिस को उसी दुकानदार पर कुछ शक हुआ. पुलिस हनीफ मियां का पता पूछतेपूछते उस के घर पर पहुंच गई. वह घर पर ही मिल गए. पुलिस ने हनीफ मियां से उस घटना को ले कर जानकारी जुटानी चाही तो उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया कि उन की दुकान बहुत पहले ही बंद हो गई थी. उस के बाद वहां पर कब, क्या हुआ, उन्हें कोई जानकारी नहीं.

शक के घेरे में आया शनीफ

उसी पुलिस पूछताछ के दौरान पुलिस को गुप्तरूप से जानकारी मिली कि शाम के वक्त ज्यादातर उन का बेटा शनीफ दुकान पर बैठता था. पुलिस ने हनीफ मियां से शनीफ के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वह दुकान से आने के बाद अकसर अपने दोस्तों के पास चला जाता है. हो सकता है कि वह अपने दोस्तों के पास ही होगा. पुलिस ने हनीफ मियां से उस का मोबाइल नंबर ले कर डायल किया तो वह बंद मिला.

शनीफ का मोबाइल बंद पा कर पुलिस को पूरा शक हो गया कि इस हत्या के बारे में उसे जरूर जानकारी रही होगी. तभी उस ने अपना मोबाइल बंद कर लिया है. उसी शक के आधार पर पुलिस उस की तलाश में जुट गई, लेकिन उस का कहीं भी पता नहीं चला. उस के बाद पुलिस ने उस की गिरफ्तारी के लिए मुखबिर लगा दिए. मुखबिर की सूचना पर शनीफ जल्दी ही पकड़ में आ गया. पुलिस पकड़ में आते ही वह बुरी तरह से घबरा गया था. पुलिस उसे गिरफ्तार कर थाने ले आई.

चूंकि शनीफ ने सरेआम घटना को अंजाम दिया था, जिस को वहां मौजूद काफी लोग देख रहे थे. वह जानता था कि पुलिस के आगे उस की एक नहीं चलने वाली. यही सोच कर उस ने जल्दी ही सब कुछ साफसाफ उगल दिया. शनीफ ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि सिमरन शेख उसे ब्लैकमेल कर उसे बरबाद करने पर तुली थी. जिस के कारण ही उसे यह कदम उठाना पड़ा.

हत्या का अपराध स्वीकारते ही पुलिस ने उस की निशानदेही से हत्या में प्रयुक्त मीट काटने वाला छुरा भी बरामद कर लिया. साथ ही उस के द्वारा घटना के वक्त पहने कपड़े भी पुलिस ने बरामद कर लिए.

कौन थी सिमरन शेख? और उस की जानपहचान शनीफ से कैसे हुई? जानने के लिए हमें इस दिलचस्प कहानी के अतीत में जाना होगा.

सोशल मीडिया की दीवानी हुई सिमरन शेख

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में पड़ता है एक कस्बा मुलताई. सिमरन इसी कस्बे के नेहरू नगर में रहने वाले अफजल शेख की बेटी थी. सिमरन शेख बचपन से ही चंचल थी. उस के नैननक्श उस की सुंदरता का स्वयं ही बखान करते थे. यही कारण था कि वह अपनी सुंदरता और चंचलता के कारण सभी की चहेती बन गई थी.

अफजल शेख की एक बहन थी फातिमा. फातिमा के कोई बच्चा नहीं था. सिमरन से वह बहुत ही प्रभावित थी. जब से सिमरन ने जन्म लिया था, उस की निगाहें उसी पर गड़ी रहती थीं. एक दिन मौका मिलने पर उस ने अपने भाई अफजल से उस प्यारी सी गुडिय़ा को लेने की चाहत जाहिर की. अफजल अपनी बहन की इस मांग को मना नहीं कर सके और उन्होंने सिमरन को उस के हवाले कर दिया. सिमरन की बुआ उसे ले कर अपने घर चली आई और प्यार से उस का पालनपोषण करने लगी.

चाची का इश्किया भतीजा

नई नवेली दीपा ने सौतेले बेटे संग रची साजिश

चाची का इश्किया भतीजा – भाग 3

डीएसपी केसर सिंह ने भी लाश का निरीक्षण किया. क्राइम टीम ने भी अपना काम कर लिया तो इंसपेक्टर जसविंदर सिंह ने लाश को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. इस के बाद थाने लौट कर उन्होंने हत्या के इस मामले को दर्ज कर के स्वयं ही जांच शुरू कर दी. क्योंकि मामला एक व्यापारी की हत्या का था, इसलिए व्यापारी होहल्ला कर सकते थे. जबकि वह नहीं चाहते थे कि किसी तरह का होहल्ला हो.

हत्यारों तक जल्द से जल्द पहुंचने के लिए सबइंसपेक्टर वासुदेव सिंह के नेतृत्व में उन्होंने एक टीम बनाई, जिस में एएसआई बलकार सिंह, इंद्रपाल, हेडकांस्टेबल कुलदीप सिंह, कुलवंत सिंह, अजायब सिंह और महिला सिपाही जसविंदर कौर को शामिल किया.

पूछताछ में जसमीत कौर ने बताया था कि वह अपने पति परमजीत सिंह उर्फ सिंपल और 2 बेटों, 18 वर्षीय गुरतीरथ सिंह एवं 10 वर्षीय जसदीप सिंह के साथ कटड़ा साहिब सिंह के मकान नंबर 197/8 में रहती थी. उस के पति का अरनाबरना चौक पर कोयले का डिपो था.

कल यानी 22 मार्च की शाम 5 बजे के करीब वह किसी पार्टी के पास जाने की बात कह कर घर से निकले थे. रात 10 बजे के करीब उन्होंने फोन कर के बताया था कि वह किसी दोस्त के यहां बैठे हैं, इसलिए आने में थोड़ी देर हो जाएगी. जब काफी रात हो गई और वह नहीं आए तो जसमीत बेटों और पड़ोसियों के साथ उन्हें ढूंढने निकल पड़ी. काफी कोशिश के बाद भी उन का कुछ पता नहीं चला. आज सुबह उस के पति के भतीजे प्रीत महेंद्र सिंह ने फोन द्वारा सूचना दी कि सनौली अड्डे के पास उन की लाश पड़ी है.

पुलिस ने जब दुश्मनी वगैरह के बारे में पूछा तो जसमीत कौर ने बताया कि वह सीधेसादे शरीफ इंसान थे. काफी पूछताछ के बाद भी जसमीत कौर से ऐसी कोई बात पता नहीं चली, जिस से तफ्तीश आगे बढ़ाने में पुलिस को मदद मिलती. इंसपेक्टर जसविंदर सिंह ने परमजीत के आसपड़ोस वालों से पूछताछ की तो कुछ लोगों ने चाचीभतीजे के अवैध संबंधों की बात बता दी.

इंसपेक्टर जसविंदर सिंह को परमजीत की कोठी में सीसीटीवी कैमरे लगे दिखई दिए थे. उन्होंने हेडकांस्टेबल कुलदीप सिंह से उन कैमरों की फुटेज निकलवाने को कहा. फुटेज निकलवा कर वहीं जसमीत और प्रीत महेंद्र सिंह के सामने देखा गया. फुटेज के अनुसार हत्या वाले दिन प्रीत महेंद्र सिंह जसमीत के पास आया और कुछ बातें कीं. इस के बाद उस ने अपना पिस्टल निकाल कर चेक किया. चैंबर में एक गोली कम थी तो जेब से एक गोली निकाल चैंबर फुल किया और उसे कमर में खोंस कर चला गया.

फुटेज के ये दृश्य देख कर इंसपेक्टर जसविंदर सिंह टिवाणा पूरी कहानी समझ गए. उन्होंने प्रीत महेंद्र से पूछा, ‘‘तुम यह पिस्टल खोंस कर कहां गए थे, यह पिस्टल किस का है?’’

‘‘जी यह पिस्टल मेरा है. मेरे पास इस का लाइसैंस भी है.’’

‘‘लेकिन चुनाव की वजह से सभी को अपनेअपने हथियार जमा कराने को कहा गया है. तुम ने अपना पिस्टल क्यों नहीं जमा कराया?’’

‘‘मैं शहर से बाहर था, इसलिए जमा नहीं करा सका. कल ही जमा करा दूंगा.’’ प्रीत महेंद्र ने कहा.

परमजीत सिंह की हत्या की पूरी कहानी इंसपेक्टर जसविंदर सिंह टिवाणा की समझ में आ गई थी. लेकिन वह आगे का काम पूरे सुबूतों के साथ करना चाहते थे. उन्होंने प्रीत महेंद्र से अगले दिन अपना पिस्टल ले कर थाने आने को कहा. अगले दिन वह थाने तो गया, लेकिन अपना पिस्टल नहीं ले गया. पूछने पर उस ने कहा कि वह जल्दी में साथ लाना भूल गया.

इंसपेक्टर जसविंदर सिंह टिवाणा को लगा कि अब देर करना ठीक नहीं है, इसलिए उन्होंने एएसआई बलकार सिंह को आदेश दिया कि वह महिला सिपाही को ले कर जाएं और जसमीत कौर को थाने ले आएं.

जसमीत कौर भी थाने आ गई तो इंसपेक्टर जसविंदर सिंह टिवाणा ने दोनों को सामने बैठा कर सुबूतों के साथ मनोवैज्ञानिक ढंग से पूछताछ की तो जल्दी ही दोनों ने परमजीत सिंह की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

दरअसल, परमजीत सिंह ने हत्या से 2 दिनों पहले यानी 20 मार्च को जसमीत और प्रीत महेंद्र को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया था. हुआ यह था कि परमजीत सिंह दवा खाना भूल गया था, इसलिए घर वापस आ गया था.

संयोग से जसमीत कौर घर का दरवाजा बंद करना भूल गई थी. इसलिए परमजीत सीधे अंदर आ गया और चाचीभतीजे को उस स्थिति में देख कर हक्काबक्का रह गया. सीधासरल परमजीत पत्नी और भतीजे को कुछ कहने के बजाय रोने लगा. रोते हुए ही उस ने कहा, ‘‘तुम लोगों ने मेरे साथ ठीक नहीं किया. इसलिए वाहेगुरु तुम लोगों के साथ ठीक नहीं करेगा.’’

परमजीत बेबस था. रोधो कर चुपचाप डिपो पर चला गया. वह तो चला गया, लेकिन उस के आंसुओं से उन पापियों की आत्मा कांप उठी. दोनों डर गए. जसमीत ने प्रीत महेंद्र का कंधा पकड़ कर झकझोरते हुए कहा, ‘‘अब इस का जिंदा रहना ठीक नहीं है, क्योंकि इस के रहते मैं इस घर में नहीं रह सकती. इस के रहते मुझे हमेशा डर लगा रहेगा कि न जाने कब क्या हो जाए.’’

प्रीत महेंद्र भी डर गया था. इसलिए परमजीत के चुपचाप चले जाने के बाद ही दोनों ने उसी समय उस की हत्या की योजना बना डाली. प्रीत और उस के पिता हरदर्शन का प्रौपर्टी और फाइनैंस का काम था. वे लोगों को ब्याज पर पैसा देते थे. प्रीत का एक छोटा भाई गगनदीप सिंह है, जो बड़े भाई और पिता के इस धंधे को पसंद नहीं करता था, इसलिए वह इन से अलग उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर में रहता था.

प्रीत महेंद्र सिंह ने योजनानुसार परमजीत को सनौली अड्डे पर यह कह कर बुलाया कि एक पार्टी मात्र एक प्रतिशत ब्याज पर अपना पैसा देना चाहती है. प्रीत महेंद्र को पता था कि उस के चाचा परमजीत को रुपयों की सख्त जरूरत है. इसलिए उस ने उस से यह बात कही थी. यही वजह थी कि उस की बात सुन कर परमजीत सिंह उस की बताई जगह पर शाम साढे 5 बजे के आसपास पहुंच गए थे. प्रीत वहीं उन्हें मिल गया.

प्रीत ने परमजीत का स्कूटर वहीं स्टैंड पर खड़ा करा दिया और उसे अपनी वैगन आर कार में बैठा कर काफी देर तक इधरउधर सड़कों पर घुमाता रहा. जब रात के लगभग 10 बज गए तो वह सीआईए रोड पर आया और बिना कोई बात किए अपने चाचा परमजीत को कार से उतार कर 4 गोलियां मार दीं. उस ने गोलियां ऐसी जगहों पर मारीं कि परमजीत तुरंत मर गया.

इस के बाद लाश वहीं छोड़ कर प्रीत अपने घर चला गया. रास्ते से उस ने परमजीत की हत्या की सूचना जसमीत कौर को दे दी थी. इसी के बाद जसमीत कौर पड़ोसियों और बेटों को साथ ले कर परमजीत को ढूंढने का नाटक करने लगी थी.

प्रीत महेंद्र और जसमीत से पूछताछ के बाद इंसपेक्टर जसविंदर सिंह टिवाणा ने 26 मार्च को दोनों को सीजेएम सिमित ढींगरा की अदालत में पेश कर के 29 मार्च तक के लिए पुलिस रिमांड पर ले लिया.

रिमांड के दौरान पुलिस ने प्रीत महेंद्र की निशानदेही पर परमजीत का स्कूटर, वह वैगन आर कार, जिस में परमजीत को ले जाया गया था, एक पिस्टल, राइफल, 16 जिंदा कारतूस और खून सने कपड़े बरामद कर लिए थे.

रिमांड समाप्त होने पर 29 मार्च को जसमीत कौर और प्रीत महेंद्र सिंह को पुन: अदालत में पेश किया गया, जहां से दोनों को जिला जेल भेज दिया गया. जसमीत से प्यार करते समय प्रीत महेंद्र ने जो कहा था कि वह अंतिम सांस तक अपने प्यार को निभाएगा, सचमुच पूरा किया था.