बुझ गई रोशनी : वहम बना अपराध
भ्रामक बातें कई बार इंसान को इस स्थिति तक पहुंचा देती हैं कि वह उन बातों को सही मान कर कदम उठा लेता है. जिसका अंजाम उसे खुद नहीं पता होता.
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