UP Crime: शामली का समयदीन उर्फ सामा ऐसा खूंखार अपराधी था कि स्थानीय पुलिस को नाकों चने चबाए रखता था. पुलिस ने जब उस पर इनाम घोषित कर दिया तो वह तेलंगाना जा कर अपराध करने लगा, लेकिन एक बड़ी वारदात करने जब वह शामली आया तो पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया. आखिर एक फेरी वाले से इनामी हिस्ट्रीशीटर कैसे बना समयदीन? पढ़ें, उस के अपराध के किस्से.
शामली के थाना भवन के एसएचओ विजेंद्र सिंह रावत 8 दिसंबर, 2025 की रात 10 बजे के बाद थाने में अपने रोजमर्रा के जरूरी काम निपटा कर पुलिस टीम के साथ रात की गश्त के लिए जाने की तैयारी कर ही रहे थे कि तभी उन का मोबाइल बजने लगा. विजेंद्र रावत ने मोबाइल स्क्रीन पर नजर डाली तो उन के विश्वस्त मुखबिर दुर्जन सिंह (काल्पनिक नाम) का नंबर फ्लैश हो रहा था.
''हां भई दुर्जन सिंहजी, बहुत दिनों बाद याद आई? 2-3 महीनों से तो आप न जाने कहां गायब ही हो गए थे. बताओ, क्या खास खबर है?’’ विजेंद्र रावत ने पूछा.
''साहब, बहुत ही खास खबर है. कई महीनों से मैं इस गैंग के पीछे ही लगा हुआ था. इस खबर का इनाम ठीकठाक जरूर मिलेगा न!’’ दुर्जन ने कहा.
''दुर्जन सिंह, तुम अब इनाम की फिक्र बिलकुल मत करो. खबर सटीक होगी तो इनाम भी उतना अच्छा ही मिलेगा. तुम खबर जल्दी बताओ,’’ विजेंद्र रावत ने कहा.
उस के बाद मुखबिर दुर्जन सिंह ने बताया कि क्षेत्र के ही भैंसाली इसलामापुर गांव में काफी समय से बंद पड़े ईंट के एक भट्ठे पर नामीगिरामी हिस्ट्रीशीटर डकैतों का एक गैंग जमा है. यह गिरोह पास ही के किसी गांव में बड़ी डकैती डालने वाला है. सूचना बहुत खास और महत्त्वपूर्ण थी, इसलिए एसएचओ विजेंद्र रावत ने इस घटना की सूचना तुरंत अपने उच्च अधिकारियों को दे दी.






