Fiction Story in Hindi. सना बेहद खूबसूरत युवती थी. वह अपनी आपा नुसरत से बहुत प्यार करती थी. नुसरत का देवर शहजाद सना की खूबसूरती पर फिदा था और उस से शादी करना चाहता था, लेकिन सना एक ऐसे अनजाने शख्स के प्यार में मुब्तला थी, जो बहुत मोटा और कुरूप था. क्या उस की फेमिली वाले इस रिश्ते के लिए राजी हुए?

मैंने आज जल्दी बिस्तर छोड़ दिया था. अम्मी ने रात को ही बता दिया था कि कल सुबह तेरी आपा नुसरत अपने शौहर के साथ घर आ रही है, उन के साथ नुसरत का देवर शहजाद भी आ रहा है. आपा नुसरत से मुझे बचपन से ही खासा लगाव रहा था. आपा और मेरी उमर में 2 साल का अंतर था. हम दोनों एक साथ खेलकूद कर बड़ी हुई थीं.

आपा ने ग्रैजुएशन कर लिया तो अब्बू उस के लिए रिश्ता तलाश करने लगे. अब्बू का कहना था, ''जवान लड़की को घर में बिठा कर रखना ठीक नहीं होता, जमाना बहुत खराब है.’’

अब्बू की लखनऊ के बाजार नाका हिंडोला में इलैक्ट्रौनिक्स की दुकान थी. अच्छी आमदनी थी, इसलिए घर में रईसी ठाठ थे. लखनऊ में अब्बू की खूब जानपहचान थी, इस वजह से आपा के लिए रामपुर से अरशद मियां का रिश्ता आ गया.

अरशद का रामपुर में साडिय़ों और जरी के सूटों का कारोबार था. वह अहमदाबाद और मुंबई से साडिय़ां सूट मंगवाते थे और रामपुर-बरेली के थोक व्यापारियों को सप्लाई देते थे. यह कारोबार अरशद के अब्बू अनवर हुसैन ने जमाया था.

उम्र बढऩे की वजह से उन की तबियत खराब रहने लगी तो उन्होंने अरशद को सारा कारोबार सौंप दिया था. अनवर हुसैन का छोटा बेटा शहजाद ला की पढ़ाई कर रहा था, पढ़ाई पूरी कर के वह रामपुर में ही वकालत करने वाला था.

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