Story in Hindi. चांदनी राठौर और आलोक चतुर्वेदी एकदूसरे को दिलोजान से चाहते थे, लेकिन जाति और आर्थिक स्थिति में अंतर होने की वजह से आलोक के फादर ने उन की शादी नहीं होने दी. समय बदलता गया और आलोक पुलिस विभाग में डीवाईएसपी हो गया और उस की मुलाकात एक शराब बार में चांदनी से हुई. एकदूसरे को देख कर उन का प्यार जीवित हो गया. फिर इस के बाद जो हुआ...

आगंतुक ने रुपए काउंटर पर फेंके और रौब से आदेश दिया, ''ऐ चांदनी, एक बोतल ब्लैक लेबल और एक पैकेट डनहिल का दे.’’

चांदनी काउंटर के पीछे से बाहर आई और आगंतुक के गाल पर 2 जोरदार थप्पड़ जड़ दिए. आगंतुक की आंखों के आगे अंधेरा छा गया.

इस के बाद चांदनी बोली, ''साले, सूअर की औलाद. यह चांदनी का अड्डा है, तेरे बाप का घर नहीं. चांदनी राठौर से तमीज से बात करनी चाहिए, समझा? घर में बीवी के सामने कुछ चलती नहीं होगी, इसलिए चांदनी पर रौब झाडऩे आया है?’’

https://youtube.com/shorts/Ef-BgJBIMQ8?si=biKAp8N8LJlzORZD

आगंतुक सकपका गया. फिर भी गाल सहलाते हुए धमकी देने लगा, ''मेरी पुलिस वालों से अच्छी जानपहचान है. एक शिकायत करूंगा नहीं कि तेरा यह अड्डा बंद हो जाएगा.’’

चांदनी ने कहा, ''देखते हैं, तेरी पहचान काम करती है या मेरा हफ्ता. तुझे पता नहीं है, बड़ेबड़े पुलिस अफसर इस चांदनी के ग्राहक हैं. अरे, कितने ही राजनेता, अदालत के वकील और जज, व्यापारी, उद्योगपति, बिल्डर, डौक्टर, नामी गुंडे और न जाने कितने बड़ेबड़े लोग मेरे ग्राहक हैं. तू मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता. चुपचाप अपना सामान उठा और निकल जा. लगता है, पहली बार यहां आया है. कभी दोबारा आना हो तो जरा तमीज से पेश आना, नहीं तो इस से भी बुरा हाल कर दूंगी.’’

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