True Crime Story: प्रेमी समर खान के कहने पर साक्षी ने राहुल अग्रवाल से शादी तो कर ली, लेकिन ससुराल में उस का मन नहीं लगा. इसी बीच ऐसा क्या हुआ कि वह लुटेरी दुलहन बन कर प्रेमी समर के साथ जेल पहुंच गई.
उत्तर प्रदेश का एक जिला है संभल, जो अपने आप में अनेक गाथाओं को समेटे हुए है. इस के अलावा इस शहर में सींग के सामान बनाने का बहुत बड़ा उद्योग भी फैला हुआ है. जिस की वजह से इस की विश्व भर में पहचान है. इसी ऐतिहासिक शहर के गवां मोहल्ले के गिरीश चौक पर दीपक अग्रवाल अपने परिवार के साथ रहते थे. उन की गिनती पुराने रईसों में होती है. उन की रासायनिक खाद की दुकान है और गवां में एक पैट्रोल पंप भी है.
दुकान पर उन का बेटा राहुल बैठता था, जबकि वह खुद पैट्रोल पंप को देखते थे. दोनों ही सुबह घर से निकलने के बाद देर रात को ही घर लौटते थे. रोजाना की तरह 23 मई, 2015 को भी वे अपनेअपने काम पर निकल गए. उस के बाद घर पर राहुल की भतीजी प्रियंका और बीवी साक्षी थीं. दोपहर करीब 12 बजे किसी ने उन के घर का दरवाजा खटखटाया. साक्षी ने दरवाजा खोला तो सामने 4 युवक खड़े थे. इस से पहले कि साक्षी उन से कुछ पूछती, वे चारों अंदर घुस आए और अंटी से तमंचे निकाल कर साक्षी को चुप रहने की हिदायत दी. हथियार देख कर साक्षी डर गई. भतीजी प्रियंका उस समय कमरे में बैठी टीवी देख रही थी. बदमाशों ने प्रियंका को भी चुप रहने की धमकी दी और उस के हाथपैर बांध दिए.
इस के बाद बदमाशों ने साक्षी से अलमारियों की चाबी मांगी. साक्षी ने बताया कि चाबियां ऊपर के कमरे में हैं तो 2 बदमाश साक्षी को खींच कर ऊपर ले गए और 2 प्रियंका के पास ही खड़े रहे. डर की वजह से साक्षी ने चाबियां बदमाशों के हवाले कर दीं. चाबियां पाने के बाद उन्होंने साक्षी के भी हाथपैर बांध कर डबलबैड पर डाल दिया, साथ ही धमकी दी कि शोर मचाया तो गोली से उड़ा दिया जाएगा. चाबियां मिलते ही बदमाशों ने अलमारियों से नकदी, फोन, लैपटौप, ज्वैलरी आदि लूट ली. कुछ ही देर में लाखों रुपए का सामान समेट कर बदमाश वहां से चले गए. जाते समय वे प्रियंका का कमरा बाहर से बंद करते गए.
करीब एक घंटा बाद साक्षी ने किसी तरह खुद को खोला और डरते हुए नीचे आईं. नीचे के कमरे में बाहर से कुंडी लगी थी. कुंडी खोल कर साक्षी ने भतीजी प्रियंका को भी खोला. साक्षी ने लूट की सूचना सब से पहले अपने पति राहुल और ससुर दीपक अग्रवाल को फोन द्वारा दी. उस समय दीपक अग्रवाल अपने पैट्रोल पंप पर थे और राहुल अग्रवाल अपनी खाद की दुकान पर. घर पर लूट होने की सूचना मिलते ही दीपक अग्रवाल और राहुल के होश उड़ गए. दोनों तुरंत अपने घर की ओर चल दिए. पति और ससुर को खबर करने के बाद साक्षी प्रियंका को ले कर घर के बाहर आ गई और अपने यहां लूट होने का शोर मचा दिया. शोर सुन कर आसपड़ोस के लोग इकट्ठे हो गए.
तब तक दीपक अग्रवाल बेटे राहुल के साथ घर पहुंच गए. दोनों ने सब से पहले यह देखा कि बदमाश घर व अलमारियों से क्याक्या सामान ले गए हैं? जांच करने पर पता चला कि घर से सोनाचांदी की ज्वैलरी, नकदी, चांदी के सिक्के, फोन, लैपटौप आदि गायब थे. उन के यहां से बदमाश करीब 30 लाख रुपए का सामान ले गए थे. दिनदहाड़े लाखों रुपए की लूट होने की बात सुन कर हर कोई हैरान था. उसी दौरान किसी ने इस लूट की खबर फोन द्वारा थाना रजपुरा को दे दी. थाना वहां से ज्यादा दूर नहीं था, इसलिए कुछ ही देर में थानाप्रभारी योगेंद्र कृष्ण यादव मय फोर्स के दीपक अग्रवाल के घर पहुंच गए. उन्होंने कमरों का निरीक्षण किया तो अलमारियां खुली हुई थीं और उन का सामान आदि फैला हुआ था.
थानाप्रभारी ने इस की सूचना अपने उच्च अधिकारियों को भी दे दी. सूचना मिलते ही एसपी अतुल सक्सेना, एएसपी कमलेश दीक्षित भी वहां पहुंच गए. उधर शहर के व्यवसाइयों को जब पता चला कि दीपक अग्रवाल के यहां दिनदहाड़े लूट हो गई है तो तमाम व्यवसाई भी उन के घर पहुंचने लगे. व्यापारियों का जमावड़ा होने से एसपी अतुल सक्सेना को चिंता होने लगी कि कोई हंगामा न खड़ा हो जाए, इसलिए उन्होंने बहजोई, धनारी, हयातनगर थानों की फोर्स के अलावा क्राइम ब्रांच को भी बुला लिया. दीपक अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि बदमाश नकदी सहित करीब 30 लाख रुपए का सामान ले गए हैं. देखा जाए तो यह बहुत बड़ी लूट थी.
पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ डराधमका कर लूट करने की रिपोर्ट दर्ज कर ली और बदमाशों की तलाश के लिए पुलिस अधीक्षक के आदेश पर शहर के मुख्य मार्गों पर बैरिकेड्स लगा कर चैकिंग शुरू कर दी. लेकिन पुलिस को सफलता नहीं मिली. लूट के इस मामले को सुलझाने के लिए एसपी अतुल सक्सेना ने थाना रजपुरा के थानाप्रभारी योगेंद्र कृष्ण यादव, धनारी के थानाप्रभारी जितेंद्र सिंह यादव के अलावा क्राइम ब्रांच और साइबर सेल की टीम को भी लगा दिया. टीम में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों ने गहनता के साथ केस की छानबीन शुरू कर दी.
दीपक अग्रवाल का घर गली के अंतिम छोर पर था. ऐसी सुरक्षित जगह पर कोई अनजान आदमी आसानी से नहीं पहुंच सकता था. विचारविमर्श के बाद पुलिस टीम इस नतीजे पर पहुंची कि इस वारदात को किसी जानकार ने ही अंजाम दिया होगा. दीपक अग्रवाल के पैट्रोल पंप और खाद की दुकान पर काम करने वाले सभी लोगों और नौकरों से पुलिस ने पूछताछ की. उन के घर पर काम करने वाली आया से भी पूछताछ की गई, परंतु पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला.
उधर संभल शहर के अलावा सीमावर्ती कस्बे बहजोई के व्यापारियों के मन में पुलिस के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा था. व्यापारियों के एक प्रतिनिधि मंडल ने एसपी से मुलाकात कर चेतावनी दी कि जल्द केस न खुला तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे. एसपी अतुल सक्सेना ने उन्हें भरोसा दिलाया कि जिले के तेजतर्रार पुलिस अधिकारी केस को सुलझाने में लगे हैं और जल्द ही केस खुलने की संभावना है. व्यापारियों को आश्वासन दे कर उन्होंने उन्हें संतुष्ट तो कर दिया, लेकिन उन के ऊपर भी केस जल्द खुलने का दबाव बढ़ गया. उन्होंने टीम में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों की मीटिंग बुलाई और कुछ दिशानिर्देश देते हुए केस को जल्द से जल्द खोलने को कहा.
इस के बाद सभी पुलिस अधिकारी अलगअलग दृष्टिकोण से मामले की जांच करने लगे. क्राइमब्रांच के इंसपेक्टर रूप सिंह बघेल, साइबर सेल के प्रभारी संतोष कुमार त्यागी ने परिवार के सभी सदस्यों के मोबाइल फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाईं. उन्होंने काल डिटेल्स का अध्ययन किया तो दीपक अग्रवाल की बहू साक्षी के फोन से एक नंबर पर ज्यादा बातचीत करने की बात सामने आई. जिस नंबर पर साक्षी अकसर बात करती थी, वह नंबर बरेली के कस्बा आंवला के रहने वाले समर खान का निकला.
पुलिस ने दीपक अग्रवाल से पूछा कि आंवला में क्या उन के कोई रिश्तेदार वगैरह रहते हैं?
‘‘हां, आंवला में हमारे बेटे राहुल की ससुराल है. लेकिन आप यह क्यों पूछ रहे हैं? इस घटना से उन का क्या मतलब?’’ दीपक अग्रवाल बोले.
थानाप्रभारी योगेंद्र कृष्ण यादव ने एक फोन नंबर उन्हें देते हुए कहा, ‘‘आप की बहू साक्षी की इस फोन नंबर पर वक्तबेवक्त बहुत बातें होती थीं. हम यह जानना चाहते हैं कि यह नंबर किस का है.’’
दीपक अग्रवाल और उन के बेटे के पास साक्षी के मायके के सभी लोगों के नंबर उन के फोन में सेव थे. थानाप्रभारी ने जो नंबर उन्हें दिया था, उस के बारे में वह अनजान थे. इसलिए राहुल ने साक्षी को बुला कर उस फोन नंबर के बारे में पूछा तो वह बोली, ‘‘यह नंबर आंवला के ही हमारे पापा के जानकार समर खान का है. यह हमारे घर के सदस्य की तरह हैं. मैं ने लूट की खबर देने के लिए इन्हें फोन किया था.’’
यह बात मान भी ली जाए कि घटना वाले दिन साक्षी ने उसे घटना की जानकारी देने के लिए फोन किया होगा, लेकिन इस से पहले वक्तबेवक्त यह उस से क्या बातें करती थी. यह बात थानाप्रभारी की समझ में नहीं आ रही थी. उस समय उन्होंने दीपक अग्रवाल और उन की बहू साक्षी से और ज्यादा पूछताछ करना जरूरी नहीं समझा, बल्कि उन्होंने उसी शख्स की जांच करना जरूरी समझा, जिस से साक्षी ज्यादा बातें करती थी.
आंवला के किला मोहल्ला के जिस समर खान से साक्षी बात करती थी, सादा वेश में पुलिस टीम वहां पहुंच गई. 2 पुलिस वाले किला मोहल्ले के लोगों से समर खान के बारे में जानकारी जुटाने लग गए तो टीम के बाकी सदस्य समर खान के घर चले गए. साक्षी ने जिस तरह समर को अपने पिता का जानकार बताया था, उस से पुलिस यही समझ रही थी कि समर खान अधेड़ उम्र का होगा. लेकिन वह तो 25-26 साल का युवक निकला. स्थानीय लोगों से उन दोनों पुलिसकर्मियों को चौंकाने वाली बात पता चली. लोगों ने बताया कि समर खान एक शातिर इंसान है, उस का आंवला की ही साक्षी नाम की एक लड़की से कई सालों से चक्कर चल रहा है. दोनों शादी करने वाले थे.
साक्षी के घर वालों को इस प्रेमप्रसंग का जब पता चला तो उन्होंने संभल के राहुल अग्रवाल के साथ आननफानन में उस की शादी कर दी. उधर पुलिस टीम को समर खान घर पर नहीं मिला. लेकिन उस के बारे में पुलिस को जो जानकारी मिली थी, वह बहुत महत्त्वपूर्ण थी. समर खान के न मिलने पर पुलिस टीम वापस संभल लौट आई. उस का फोन नंबर पुलिस के पास था ही. उस फोन नंबर को सर्विलांस पर लगाने पर उस की लोकेशन अनूप शहर रोड की आ रही थी. पुलिस टीम फटाफट अनूप शहर रोड पर पहुंच कर नाकेबंदी लगा कर वाहनों की चैकिंग करने लगी. उसी समय एक होंडा सिटी कार आती दिखी. पुलिस को देखते ही ड्राइवर ने कार की गति बढ़ा दी. कुछ दूर पीछा करने के बाद पुलिस ने उस कार को रोक लिया.
उस कार में ड्राइवर के अलावा एक आदमी और बैठा था. पूछताछ करने में उन दोनों ने अपने नाम क्रमश: समर खान और विकास नारंग उर्फ विक्की बताए. समर खान नाम सुनते ही पुलिस समझ गई कि यह वही है, जिस की उन्हें तलाश थी, लिहाजा उन दोनों को पूछताछ के लिए पुलिस बहजोई थाने ले आई. समर खान ने अपना जो मोबाइल नंबर बताया था, वह वही निकला, जिस पर साक्षी की बातें होती थीं. पुलिस टीम ने समर खान को हिरासत में लेने वाली बात एसपी अतुल सक्सेना और एएसपी कमलेश दीक्षित को बताई तो दोनों पुलिस अधिकारी थाना बहजोई पहुंच गए. उन की मौजूदगी में समर खान से पूछताछ की गई तो उस ने व्यवसाई दीपक अग्रवाल के घर लूट करने की बात स्वीकार ली.
इस के अलावा उस ने चौंकाने वाली बात यह बताई कि यह वारदात उस ने अपनी प्रेमिका साक्षी के कहने पर की थी. लूट की साजिश में व्यवसाई दीपक अग्रवाल की बहू साक्षी का नाम सामने आने पर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए, क्योंकि संभ्रांत परिवार में इस तरह की यह पहली वारदात थी. पुलिस ने दीपक अग्रवाल, उन के बेटे राहुल और बहू साक्षी को भी थाने बुला लिया. थाने में समर खान को देख कर साक्षी घबरा गई. सब के सामने पुलिस ने समर खान से पूछताछ की तो समर खान ने वारदात को अंजाम देने के पीछे की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—
साक्षी उत्तर प्रदेश के जिला बरेली के कस्बा आंवला में पक्का कटरा मोहल्ले के रहने वाले प्रदीप कुमार की बेटी थी. पेशे से वह भी बिजनेसमैन थे. बात करीब 6 साल पुरानी है. उस समय 13 साल की साक्षी आंवला के ही एक स्कूल में पढ़ रही थी. उसी स्कूल में पढ़ने वाली रुकैया नाम की एक लड़की से उस की गहरी दोस्ती थी. रुकैया भी पक्का कटरा मोहल्ले में रहती थी.
रुकैया का एक दोस्त था समर खान, जो आंवला के ही किला मोहल्ले में रहता था. एक दिन रुकैया ने साक्षी की मुलाकात समर से कराई तो साक्षी भी उस की दोस्त बन गई. समर खान कक्षा 8 में पढ़ता था. साक्षी को देख कर वह बहुत प्रभावित हुआ. उस पर अपना प्रभाव जमाने के लिए शातिर दिमाग समर ने खुद को एक बड़े घर का बताया. वह बताता था कि उस के पिता का हार्डवेयर का बहुत बड़ा बिजनैस है. उस ने साक्षी को अपनी बातों के जाल में फांस कर अपना दोस्त बना लिया था.
जैसेजैसे समर खान और साक्षी की उम्र बढ़ती गई, उन की सोच में बदलाव आता गया. धीरेधीरे उन की दोस्ती प्यार में बदल गई. दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए थे. इतना ही नहीं, दोनों ने शादी करने का फैसला भी कर लिया. इसी बीच साक्षी के घर वालों को बेटी के संबंधों की जानकारी हो गई. उन्हें बदनामी का डर सताने लगा. बीएससी करने के बाद साक्षी उस समय एयरहोस्टेस का कोर्स कर रही थी. उन्हें उस की शादी की इतनी जल्दी होने लगी कि उन्होंने उस का एयरहोस्टेस का कोर्स पूरा होना जरूरी नहीं समझा. वह उस के लिए लड़का तलाशने लगे. किसी ने उन्हें संभल के गवां मोहल्ले में रहने वाले बिजनेसमैन दीपक अग्रवाल के बेटे राहुल अग्रवाल के बारे में बताया.
दीपक अग्रवाल का गवां में एक पैट्रोल पंप था. जबकि राहुल रासायनिक खाद की दुकान संभालता था. प्रदीप अग्रवाल ने राहुल के बारे में छानबीन की तो वह उन्हें पसंद आ गया. इस बारे में उन्होंने दीपक अग्रवाल से बात की. दोनों तरफ से बातचीत होने के बाद 17 अप्रैल, 2015 को साक्षी और राहुल की शादी होने का दिन भी मुकर्रर कर दिया गया. आननफानन में तय हुई शादी के बात साक्षी को पता लगी तो वह परेशान हो गई. वह तो समर से शादी करना चाहती थी. उस ने समर खान को यह जानकारी दे कर जल्द से जल्द कोर्टमैरिज करने के लिए कहा.
लेकिन समर खान ने पैसों का हवाला देते हुए कहा, ‘‘साक्षी इस समय मैं मजबूर हूं. व्यापार में काफी घाटा हो गया है, इसलिए पैसे न होने की वजह से मैं कोर्टमैरिज नहीं कर सकता. ऐसा करो फिलहाल जिस लड़के से तुम्हारी शादी हो रही है, कर लो. जैसे ही पैसों का इंतजाम हो जाएगा, तुम्हें मुंबई ले कर चला जाऊंगा.’’
न चाहते हुए भी साक्षी ने समर खान की बात मान ली. निर्धारित 17 अप्रैल, 2015 को धूमधाम के साथ साक्षी की राहुल के साथ शादी हो गई. इस तरह बेमन से वह पिया के घर चली गई. लेकिन पति राहुल अग्रवाल ने प्यार के बूते साक्षी का दिल जीत लिया था. कुछ दिनों तक तो वह राहुल के साथ खुश रही, लेकिन बाद उसे ससुराल में बोरियत महसूस होने लगी. राहुल सुबह 11 बजे खाना खा कर अपनी दुकान पर चला जाता था और रात 8-9 बजे घर लौटता था. साक्षी का अकेले मन नहीं लगता था. वह खुले विचारों वाली युवती थी. घूमनाफिरना, बड़ेबड़े होटलों में खाना खाना, उस की आदत थी.
शादी से पहले उस के मातापिता आंवला के बजाय शौपिंग कराने के लिए उसे बरेली ले जाते थे. तब उसे अच्छे होटल में खाना भी खिलाते थे. जबकि राहुल उसे बाहर घुमाने तक नहीं ले जाता था. वह घर में खाली पड़ी बोर होती रहती थी. उधर साक्षी की शादी के बाद समर खान पैसे कमाने के लिए मुंबई चला गया था. वह साक्षी को भूला नहीं था. इस बीच उस की अपनी प्रेमिका से फोन पर बात होती रहती थी. वह साक्षी को सुनहरे सपने दिखाता था. एक महीने बाद ही वह मुंबई से आंवला आ गया. साक्षी अपने पति राहुल से नाराज थी. वह उस से कहीं घूमनेफिरने को कहती तो वह दुकान पर बिजी होने की बात कह कर उस की बात को टाल देता था.
ऐसे में साक्षी को प्रेमी समर खान की याद आती. वह समर से कहती थी कि तुम मुझे इस नरक से निकालो. मेरे पिता ने मुझे गांव में डाल दिया है. मैं गाय के खूंटे की तरह बंध कर नहीं रहना चाहती. समर बारबार पैसे न होने की बात कहता. तब एक दिन साक्षी ने उस की समस्या का समाधान करते हुए कहा, ‘‘समर, मेरी ससुराल में बहुत माल है. मेरी ससुराल के लोग अपनेअपने कारोबार में व्यस्त हैं. सुबह निकल जाते हैं और देर शाम को ही वापस आते हैं. अलमारियों की सारी चाबियां मेरे पास ही रहती हैं. तुम किसी दिन पूर्वांह्न 11 बजे के बाद यहां आ कर सारा माल ले जाओ. मैं कह दूंगी लुटेरे ले गए हैं.’’
साक्षी की यह योजना समर को पसंद आ गई. समर जानता था कि साक्षी की शादी एक खातेपीते परिवार में हुई है. उस के यहां माल भी काफी होगा. उस के यहां लूट की वारदात को अंजाम देना उस के अकेले के बस का नहीं था. उस ने इस बारे में अपने अपराधी किस्म के दोस्तों विकास उर्फ विक्की, सोनू और नीरज से बात की. पैसे के लालच में वे सब उस का साथ देने के लिए तैयार हो गए. फिर योजना के मुताबिक 15 मई, 2015 को समर खान और उस के दोस्तों ने राहुल के घर की रेकी की.
योजना को अंजाम देने के लिए एक हफ्ते बाद 23 मई, 2015 को दिन के 12 बजे के करीब वे चारों राहुल के घर पहुंच गए. दरवाजे पर दस्तक देने पर साक्षी ने दरवाजा खोला. उन्होंने दिखावे के लिए उसे तमंचे से डरा दिया. राहुल की भतीजी प्रियंका उस समय टीवी देख रही थी. साक्षी ने इशारे से बता दिया था कि वह अंदर है. तब उन चारों लोगों ने प्रियंका को पकड़ कर उस के हाथपैर बांध कर बैड पर डाल दिया. 2 लोग उस के पास ही खड़े रहे.
मारनेपीटने का नाटक कर 2 बजे साक्षी को ऊपर के कमरे में ले गए. तभी साक्षी ने अलमारियों की चाबियां समर को दे दीं. अलमारियों से उन्होंने ज्वैलरी, चांदी के सिक्कों के अलावा नकदी भी निकाल ली. एक अलमारी का ताला उन से नहीं खुल रहा था तो साक्षी ने अपने हाथों से वह ताला खोल कर सोनेचांदी के जेवर निकाल कर उन्हें दे दिए थे. दिखावे के लिए समर ने साक्षी के हाथपैर बांध कर बैड पर डाल दिया था. कुछ ही देर में वे ज्वैलरी, नकदी, लैपटौप, मोबाइल आदि सहित करीब 30 लाख रुपए का माल ले गए.
कुछ देर बाद साक्षी ने अपने पति राहुल, ससुर आदि को घटना की जानकारी दी व मोहल्ले में शोर मचा दिया कि बदमाश लूटपाट कर के सारा सामान ले गए. दीपक अग्रवाल और राहुल को इस बात का विश्वास ही नहीं हो रहा था कि साक्षी अपने ही घर में ऐसा कर सकती है. लेकिन अभियुक्त समर खान के स्वीकारने के बाद वे कुछ कर भी नहीं सकते थे. पुलिस ने समर की निशानदेही पर उस की होंडा सिटी कार से दीपक के यहां से लूटा गया लैपटौप, 38 चांदी के सिक्के, 80 हजार रुपए नकद, मोबाइल फोन, 2 तमंचे और कारतूस बरामद किए. पुलिस ने वह होंडा सिटी कार भी बरामद कर ली. साक्षी को भी उन्होंने उसी समय गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस ने दिनांक 3 जून, 2015 को तीनों अभियुक्तों समर खान, साक्षी व विकास नारंग उर्फ विक्की को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. अन्य आरोपी सोनू और नीरज कथा लिखे जाने तक गिरफ्तार नहीं हो सके थे. True Crime Story
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित, रुकैया परिवर्तित नाम है






