Hindi crime story: तंत्रमंत्र की दुकानदारी करने वाले ठग तांत्रिकों को पता होता है कि इज्जत लुटा कर भी जल्दी कोई औरत विरोध में खड़ी नहीं होगी, क्योंकि उसे बदनामी का डर होता है. इसी का वे फायदा भी उठाते हैं.
परिवार में किसी एक पर मुसीबत आ जाए तो इसे सहज रूप में लिया जा सकता है, लेकिन अगर पूरा परिवार ही किसी न किसी परेशानी से ग्रस्त हो तो दिमाग बहुत दूर तक की सोचने लगता है. इंसानी फितरत है कि परेशानी में आदमी जो भी सोचता है, उलटा ही सोचता है.
वीना के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. परेशानी आने पर उस के दिमाग में भी उलटेसीधे विचार आने लगे थे. उसे लगने लगा था कि हो न हो, किसी ने ‘कुछ करा दिया है’. उस के दिमाग में यह बात गहरे तक बस गई थी. इस के बाद आसपड़ोस के लोगों से वह कहने लगी थी कि ‘किसी ऐसे तांत्रिक के बारे में बताओ, जो अपनी अलौकिक शक्तियों से उस के परिवार को परेशानियों से निजात दिला सके.’
कोई 7-8 साल पहले वीना की शादी महेश से हुई थी. 6 और 4 साल के उस के 2 बेटे थे. चंडीगढ़ के सब से बड़े कस्बे मनीमाजरा में किराए का मकान ले कर वह परिवार के साथ रहती थी. महेश का चावलों का कारोबार था. कुछ दिनों पहले तक इस परिवार में सब ठीकठाक था. वीना खुद भी सेहतमंद थी और उस के दोनों बच्चे तथा पति भी स्वस्थ थे. महेश का स्वास्थ्य ठीक था तो वह काम भी डट कर करता था. लिहाजा मेहनत के हिसाब से कमाई भी होती थी. परिवार में सब खुश थे.
लेकिन हालात ने करवट बदली तो सब बिगड़ता चला गया. वीना और उस के परिवार की खुशियों को जैसे किसी की नजर लग गई. बिना किसी बीमारी के ही महेश के स्वास्थ्य में गिरावट आने लगी. इस का सीधा असर उस के काम पर पड़ा, आमदनी घट गई. इसी के साथ दोनों बच्चे भी अकसर बीमार रहने लगे. वीना और महेश को तीसरे बच्चे की चाहत नहीं थी. उसी परिस्थिति में लाख एहतियात बरतने के बावजूद वीना गर्भवती हो गई. पांव भारी हुए तो उस का भी स्वास्थ्य गिरने लगा. गर्भपात कराने के लिए वह डाक्टर के पास गई तो उस के स्वास्थ्य को देख कर डाक्टर ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया. फलस्वरूप गर्भ 7 महीने का था.
इस सब से वीना के दिमाग में एक बात बैठ गई कि उन से जलने वाले किसी आदमी ने उस के परिवार पर ‘कुछ’ करवा दिया है. ऐसे में उठतेबैठते हर किसी से एक ही बात कहती थी कि अगर पहचान का कोई तांत्रिक हो तो बताओ. एक दिन वीना की पड़ोसन राधा ने उसे बताया, ‘‘हां, एक तांत्रिक है, जिसे सब बंगाली बाबा कहते हैं. वह मनीमाजरा के मढ़ीवाला टाउन में रहता है. भला और होशियार आदमी है. तुम एक बार उस के पास चली जाओ, समझो सारी मुसीबतों से छुटकारा मिल गया. उस का इलाज थोड़ा अजीबोगरीब जरूर है, मगर है पक्का. रूहानी ताकतों का मालिक है वह बंगाली बाबा.’’
वीना हैरानी से आंखें फाड़े राधा की बातें सुनती रही. दूसरी ओर राधा तांत्रिक का बखान करती जा रही थी, ‘‘यह हम लोगों के लिए संयोग की ही बात है कि उस जैसा पहुंचा हुआ तांत्रिक मनीमाजरा में रह रहा है. पैसे का भी उसे कोई लालच नहीं है. जो चाहो दे दो. न मन हो तो कोई बात नहीं. कुछ भी नहीं कहता.’’
राधा की बातों से वीना काफी प्रभावित हुई. उस समय वीना मात्र 26 साल की थी. अभी तो पूरी जिंदगी उस के सामने पड़ी थी. परेशानियों में घिरी जिंदगी वैसे ही बेमजा हो जाती है. यह सोच कर उस ने राहत महसूस की कि अब तांत्रिक बंगाली बाबा की बदौलत उस की सारी मुसीबतें दूर हो जाएंगी. शाम को महेश घर आया तो वीना ने उसे तांत्रिक के बारे में बता कर उस के डेरे पर चलने को कहा. लेकिन महेश ने मना करते हुए कहा, ‘‘ऐसे लोगों के पीछे समय और पैसा मत बरबाद करना. ये लोग ठग होते हैं. बिना मतलब तुम्हें किसी चक्कर में डाल देंगे.’’
वीना को पहले से ही पता था कि उस का पति नास्तिक है. तंत्रमंत्र, पूजापाठ, साधुसंतों पर उसे जरा भी विश्वास नहीं है. वह था भी अडि़यल स्वभाव का. दूसरे की बात जल्दी नहीं मानता था. इसलिए वीना ने इस बारे में उस से और ज्यादा बात करना ठीक नहीं समझा. अगले दिन शाम को वह राधा के घर पहुंची और उस से अपने साथ तांत्रिक के पास चलने को कहा. राधा उस समय घरेलू कामों में व्यस्त थी. इसलिए उस ने वीना को समझाते हुए कहा, ‘‘तुम अकेली ही चली जाओ. तांत्रिक बुजुर्ग आदमी है, फालतू बातें नहीं करता. तुम जरा भी मत घबराओ, कहीं कोई परेशानी नहीं होगी. फिर ऐसी पाक जगहों पर कोई सिफारिश थोड़े ही चलती है. आज तुम अकेली ही चली जाओ, अगली बार मैं तुम्हारे साथ चलूंगी.’’
उस समय शाम के 5 बज रहे थे. राधा के मना करने पर निराश हो कर वीना पहले अपने घर गई. वहां से दोनों बच्चों को साथ ले कर 6 बजे तांत्रिक बंगाली बाबा के यहां जा पहुंची. तांत्रिक बुजुर्ग आदमी था. शक्लसूरत से भी शरीफ लग रहा था. दाढ़ी के पीछे उस का गंभीर चेहरा उस के रूहानियत से जुड़ा होने का आभास दिला रहा था.
तांत्रिक का व्यक्तित्व देख कर वीना को लगा कि निश्चित उस के परिवार पर आई मुसीबतें दूर हो जाएंगी. तांत्रिक के दरबार में उस समय 5-6 लोग बैठे थे. उन के सामने वह तांत्रिक आसन पर बैठा था. वह आए लोगों को बारीबारी से बुलाता, उन की समस्याएं सुनता और झाड़फूंक करने के बाद इलायची का प्रसाद दे कर कहता, ‘‘फिर कोई परेशानी आए तो सीधे मेरे पास आ जाना. वैसे तुम्हें आने की जरूरत नहीं पड़ेगी, इतने में ही ठीक हो जाएगा.’’
इस के बाद वह उसे विदा कर देता. वीना दोनों बच्चों के साथ बैठ कर अपनी बारी का इंतजार करने लगी. उस ने बच्चों को पहले ही सहेज दिया था, इसलिए वे खामोश बैठे थे. एक बार भी नजर उठा कर तांत्रिक ने उस की ओर नहीं देखा था. जो आदमी नंबर आने पर उस के पास पहुंचता था, वह उस से भी नजरें मिला कर बात नहीं करता था. कुछ बोलता भी तो बस नीचे देखते हुए बुदबुदाने के स्वर में बोलता था.
नंबर आने पर वीना तांत्रिक के सामने जा कर बैठ गई. दोनों बच्चे उस के अगलबगल बैठ गए. तांत्रिक ने नजरें झुकाए हुए ही वीना के पैरों की ओर देखा, फिर धीरेधीरे नजरें ऊपर करते हुए उस के चेहरे पर गड़ा दीं. वीना काफी खूबसूरत थी, लेकिन उसे एक बार भी यह नहीं लगा कि तांत्रिक उस की खूबसूरती को निहार रहा है. उस ने इस सब को एकदम सहज रूप से लिया. वीना ने अपनी समस्या बताने के लिए जैसे ही मुंह खोला, तांत्रिक ने हाथ के इशारे से उसे कुछ कहने से रोक दिया. उस के चेहरे पर अपनी नजरें जमाए हुए ही उस ने कहा, ‘‘मेरी बच्ची, तुम्हें कुछ बताने की जरूरत नहीं है.
मैं तुम्हारी आंखों में ही सब कुछ देख रहा हूं. अभी यह जान लेना थोड़ा मुश्किल है कि इसे किस ने भेजा है, मगर हकीकत पूरी तरह मेरे सामने है. उस ने भीतर से तुम्हें पूरी तरह से अपने काबू में कर लिया है. यह शैतानी ताकत तुम्हारे जरिए तुम्हारे परिवार को बरबाद करना चाहती है.’’
वीना ने तो पहले ही से यह बात अपने मन में बैठा रखी थी. इसलिए हैरान होते हुए वह बोली, ‘‘यह बात एकदम सही है. मेरे परिवार में एकएक कर के सभी धीरेधीरे परेशानियों में घिरते जा रहे हैं. आप के पास मैं आई ही अपनी इसी परेशानी के लिए हूं.’’
‘‘मुझे तुम्हारी इस बरबादी का जिम्मेदार तुम्हारे भीतर बैठा दिखाई दे रहा है.’’
‘‘लेकिन बंगाली बाबा, किस ने यह सब किया या करवाया है? वह कौन सी ताकत है, जिस ने मुझे अपने काबू में कर रखा है?’’ वीना ने भयभीत होते हुए पूछा.
‘‘मैं पहले ही तुम से कह चुका हूं, मेरी बच्ची कि करने या करवाने वाले की बाबत अभी नहीं बताया जा सकता. वक्त आने पर इस बात का खुलासा भी कर दूंगा.’’ तांत्रिक ने कहा.
इस के बाद अपनी दोनों आंखें बंद कर के दोनों हाथ ऊपर उठा कर मंत्र पढ़ने के अंदाज में बुदबुदाने लगा. कुछ देर यही क्रम चलता रहा. उस के बाद आंखें खोल कर बोला, ‘‘जिस ने तुम्हें काबू में कर रखा है, वह एक बदजात जिन्न है. उस के बारे में तुम्हें बाद में खुल कर बताऊंगा. बहरहाल इस सब की तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है. मैं तुम्हारे शरीर के अंदर ही इस जिन्न को मसलमसल कर मार दूंगा. उस का वजूद मिटते ही तुम्हारी सारी मुसीबतें खत्म हो जाएंगी. यह सब करने से पहले तुम्हें एक बात बता देना चाहता हूं.’’
‘‘जी बंगाली बाबा, बताइए. मैं आप की हर बात मानूंगी. बस आप मेरे परिवार पर आई. मुसीबतों को हमेशा के लिए खत्म कर दीजिए.’’
‘‘उन्हें तो खत्म समझो. देखो, अब मैं जो तुम्हें बताने जा रहा हूं, उसे गौर से सुनना.’’ तांत्रिक ने कहा.
‘‘जी बाबा.’’
‘‘मैं अपने काम की किसी से कोई फीस तो लेता नहीं. रोटी कमाने के मेरे पास दूसरे तमाम काम हैं. हां, तुम्हारा यह जो काम मैं करने जा रहा हूं, इस की फीस जरूर लेता हूं.’’
‘‘जी बाबा.’’
‘‘दरअसल, यह जो काम मैं करने जा रहा हूं, इस के लिए मुझे कई बार वह सब भी करना पड़ता है, जो करने को मेरा मन गवाही नहीं देता. लेकिन न करूं तो मेरी पनाह में आया आदमी ठीक नहीं होगा. इसलिए करने से पहले मैं अपने किए की खुदा से माफी मांग लेता हूं और अपनी पनाह में आए आदमी से उम्मीद करता हूं कि पूरी तरह ठीक हो जाने पर वह अपनी हैसियत के मुताबिक 11, 21 या फिर 31 गरीबों को भरपेट खाना खिलाए. इस काम की मैं तुम से भी यही फीस चाहता हूं मेरी बच्ची.’’
‘‘बिलकुल बंगाली बाबा. बस एक बार सब ठीक काम हो जाए. मैं वैसा ही करूंगी, जैसा आप कहेंगे.’’ वीना ने कहा.
अपनी लंबी दाढ़ी पर हाथ फेर कर तांत्रिक ने कहा, ‘‘दूसरी बात यह कि तांत्रिक क्रियाएं बहुत नाजुक होती हैं. जैसा मैं कहूं, तुम्हें वैसा ही करना होगा. अगर तुम इस क्रिया को आज ही शुरू करवाना चाहती हो तो अपने बच्चों को घर छोड़ कर अकेली आ जाओ. बच्चों की मौजूदगी में वे तांत्रिक क्रियाएं नहीं की जा सकतीं, जिन्हें इस मामले में अमल में लाना है.’’
तांत्रिक की हर बात पर वीना हां में हां करती जा रही थी. इस के बाद उस के कहे अनुसार वह बच्चों को अपनी एक परिचिता के यहां छोड़ आई. उस के लौट कर आने के बाद तांत्रिक ने बेझिझक कहा, ‘‘अंदर वाले कमरे में पलंग बिछा है, जा कर उस पर एकदम सीधी लेट जाओ.’’
वीना पूरी तरह तांत्रिक के कहे में आ चुकी थी. शक की कोई गुंजाइश उसे नजर नहीं आ रही थी. इसलिए बिना किसी झिझक के वह अंदर जा कर पलंग पर लेट गई. तांत्रिक बाहर बैठा क्या कर रहा है, उसे पता नहीं था. करीब आधे घंटे तक वह उसी तरह लेटी रही.
इस के बाद तांत्रिक आया तो वह कुछ बुदबुदा रहा था. उस के हाथ में नीले रंग के धागों में बंधी ताबीजें थीं. उस में से एक ताबीज उस ने वीना के गले में डाल दी. बाकी ताबीजें उस के हवाले करते हुए बोला, ‘‘इन्हें अपने पति और बच्चों को पहना देना.’’
‘‘जी बंगाली बाबा.’’ कह कर वीना ने ताबीज ले कर माथे से लगा लिए.
इस के बाद, ‘‘ये प्रसाद खा लो.’’ कह कर तांत्रिक ने एक छोटी इलायची वीना के मुंह में डाल दी और बाहर चला गया.
इलायची चबाते ही वीना पर नशा सा छाने लगा. उसे लगने लगा, वह मदहोश होती जा रही है. तभी तांत्रिक अंदर आया और गौर से वीना को देखने लगा. इस बार भी वह पहले की ही तरह कुछ बुदबुदा रहा था. फिर वह उस की बगल में लेट गया. नशे जैसी स्थिति में होने की वजह से चाह कर भी वीना उस की किसी हरकत का विरोध नहीं कर सकी. वीना को सब दिखाई दे रहा था, उस के साथ क्या किया जा रहा है, इस का भी उसे आभास हो रहा था, लेकिन वह किसी भी तरह का विरोध करने की स्थिति में नहीं थी. इलायची में कोई नशीली चीज खिला कर तांत्रिक ने उसे बेबस कर दिया था. अंत में उस ने अपनी मनमरजी कर डाली.
मुंह काला करने के बाद तांत्रिक ने कहा, ‘‘इसी तरह तुम्हें लगातार 3 दिनों तक अकेली आना होगा. 4 दिनों की क्रिया के बाद जिन्न खुदबखुद खत्म हो जाएगा. जिन्न मर गया तो समझो तुम्हारी सारी मुसीबतें खत्म हो गईं.’’
वीना ने उठ कर कपड़े पहने और धीमेधीमे कदमों से अपनी परिचिता के यहां से बच्चों को ले कर घर आ गई. जो कुछ उस के साथ हुआ था, उसे सब याद था. इस सब से अब उसे आत्मग्लानि होने लगी थी, साथ ही तांत्रिक पर गुस्सा आ रहा था. सोचने लगी, ‘यह इंसान है या पिशाच, जिस ने 7 महीने की गर्भवती का भी लिहाज नहीं किया.’
तांत्रिक के बारे में सोचसोच कर वीना की कनपटियां सुलगने लगीं. पति काम से लौटा तो तबीयत खराब होने का बहाना कर के चुपचाप लेटी रही. पति से इस बारे में बात करना उसे ठीक नहीं लगा. मर्दों का क्या भरोसा, बात का बतंगड़ बना दें. गलती खुद उसी की थी, जो कथित रूहानी ताकतों से इलाज कराने अपनी मरजी से तांत्रिक के पास चली गई. पति ने उसे इस सब के लिए पहले ही मना किया था. जैसेतैसे वीना ने वह रात गुजारी. रात भर में वह जितना अपनेआप को कोस सकती थी, कोसती रही. इस के साथ मन ही मन वह निर्णय भी लेती रही कि ढोंगी तांत्रिक बंगाली बाबा को उस के किए की सजा जरूर दिलाएगी.
अगले दिन जब महेश काम पर चला गया तो वीना फिर तांत्रिक के बारे में सोचने लगी. उस ने सोचा कि अगर वह चुप रहती है तो तांत्रिक आगे भी इसी तरह अन्य औरतों को खराब करता रहेगा. मैला तन ले कर वीना अपने पति को धोखा नहीं देना चाहती थी. काफी कशमकश के बाद उस ने सोच लिया कि अंतत: जो होगा, देखा जाएगा. पहली जरूरत तांत्रिक को सजा दिलाने की है. उस ने तांत्रिक के खिलाफ पुलिस में शिकायत करने के लिए सोचा, मगर अकेली थाने जाने की हिम्मत नहीं हुई. लिहाजा इस बारे में रायमशविरा करने वह अपनी जेठानी के घर चली गई.
जेठानी चंडीगढ़ के सेक्टर 20 में रहती थी. देवरानी के मुंह से तांत्रिक की घिनौनी करतूत सुन कर वह हैरान रह गई. वह उसे तत्काल समाजसेवी परमजीत कौर और भजन कौर के पास ले गई. दोनों ने सारी बातें सुन कर सुझाव दिया कि आज शाम वीना फिर तांत्रिक के पास जाएगी. वे तांत्रिक को रंगेहाथों पकड़ कर पुलिस के हवाले करना चाहती थीं. वे तांत्रिक बंगाली बाबा की घिनौनी करतूत की चश्मदीद गवाह भी बनना चाहती थीं. फिर ऐसा ही किया गया. उसी रात 8 बजे वीना को बंगाली बाबा के ‘दरबार’ में भेजा गया. परमजीत कौर और भजन कौर कुछ अन्य लोगों के साथ बाहर चौकन्नी हो कर खड़ी थीं.
पहले दिन वाली प्रक्रियाएं करने के बाद बंगाली बाबा ने वीना के मुंह में इलायची डाली. वीना ने उस की आंख बचा कर झट से इलायची उगल दी. इस के बाद बंगाली बाबा तंत्रमंत्र की नौटंकी करते हुए जैसे ही उस की बगल में लेटा, उस ने शोर मचा दिया. बस फिर क्या था, महिलाओं ने तेजी से भीतर घुस कर तांत्रिक को रंगेहाथों पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया. वीना के बयान के आधार पर भादंवि की धाराओं 356 व 341 के तहत थाना मनीमाजरा में तांत्रिक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया.
जब इस बात की जानकारी डीएसपी (ईस्ट) विजयपाल सिंह को मिली तो वह भी थाने पहुंच गए. उन्होंने इस मामले की जांच इंसपेक्टर धनराज शर्मा को सौंपी गई. तांत्रिक को रात भर हवालात में रखा गया. अगले दिन उसे अदालत में पेश कर के उसे पुलिस रिमांड पर ले लिया गया. अभी तक पूछताछ में तांत्रिक यही कह रहा था कि वह काले इल्म का जबरदस्त जानकार है. इस इल्म के तहत जिन्नों को इसी तरह भगाया जाता है. चूंकि प्रक्रिया में विघ्न पड़ गया है, इसलिए वीना के अलावा वे लोग भी बरबाद हो जाएंगे, जिन्होंने उस का अमल तोड़ने की जुर्रत की है. काले इल्म से उस ने कुछ पुलिसकर्मियोंको भी बरबाद करने की धमकी दी. लेकिन जब पुलिस ने उस पर सख्ती की तो वह सारी हेकड़ी भूल कर असलियत बताने को तैयार हो गया.
उस की उम्र 50 साल के आसपास थी. उस का नाम था शाहिद तौफीक. वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के कस्बा मलिहाबाद का रहने वाला था. उस के परिवार में बीवी मल्लिका खातून के अलावा 4 बेटे थे. कामधंधे की तलाश में वह 20 साल पहले अकेला ही चंडीगढ़ आया था. काम जम जाने के बाद वह अपने परिवार को भी साथ ले आया था. धीरेधीरे उस ने अपनी बीवी और चारों लड़कों को भी काम से लगा दिया था. इस से उस की अच्छीखासी कमाई होने लगी थी. सब कुछ बहुत बढि़या चल रहा था कि अचानक शाहिद तौफीक तांत्रिक बन गया. इस के बाद वह अकेला ही रहने लगा. पहले वह मियांजी के नाम से, फिर बंगाली बाबा के नाम से मशहूर हो गया.
शाहिद को पहले तंत्रमंत्र की कोई जानकारी नहीं थी. करीब 5 साल पहले वह कुछ दिनों के लिए एक धार्मिक डेरे पर पहुंच गया, जहां तंत्रक्रियाएं की जाती थीं. वहीं वह थोड़ा तंत्रमंत्र सीख गया. वहां से लौट कर उस ने खुद को तांत्रिक घोषित कर तंत्र विद्या से समस्याओं के समाधान की अपनी ढोंग की दुकान खोल ली. शाहिद खर्च भर का कमा लेता था. ज्यादा पैसे कमाने की उसे कोई जरूरत भी नहीं थी. इसीलिए उस ने इस विद्या को लोकसेवा घोषित कर के बिना फीस के कथित रूहानी इलाज करना शुरू कर दिया. इस से उस का अच्छाखासा प्रचार हुआ और दूरदूर से लोग उस के पास आने लगे.
कथित तंत्रक्रियाओं के दौरान शाहिद ने 2 बातें देखीं, एक तो इस में तीरतुक्के ज्यादा चलते थे. अपनी परेशानियों के कारण उस के पास आने वाले लोग दरअसल मानसिक तनाव से ग्रस्त होते थे. तंत्रक्रियाओं के नाटक के चलते पीडि़त व्यक्ति स्वयं को हलका महसूस करने लगता था. मानसिक तनाव में कमी आती थी तो वह अपने काम में तवज्जो देने लगता, इस से उस का काम संवरने लगता. दूसरी बात उस ने यह देखी कि तंत्र के नाम पर किसी भी औरत को भैरवी बना कर उस से आराम से मनमानी की जा सकती थी. यही सब वह करता भी था. तंत्रमंत्र की आड़ में उस ने न जाने कितनी औरतों को खराब किया, इस का हिसाब खुद उस के पास नहीं था.
इज्जत लुटा कर भी कभी कोई औरत उस के विरोध में खड़ी नहीं होती थी. उस के पकड़े जाने पर भी कोई पीडि़ता उस के खिलाफ बयान देने थाने नहीं आई. भला हो वीना का, जिस ने उस पाखंडी तांत्रिक के चेहरे से शराफत का मुखौटा नोच फेंका था, वरना तंत्रमंत्र में आस्था रखने वाली न जाने कितनी औरतें अपनी इज्जत लुटवाती रहतीं. Fपुलिस ने तांत्रिक के खिलाफ आरोपपत्र तैयार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे 7 साल की बामशक्कत कैद की सजा हुई. ऊपरी अदालतों में अपील करने से भी उसे कोई लाभ नहीं मिला. अपनी सजा भुगत कर कुछ साल पहले वह जेल से बाहर आया. इस बीच उस का परिवार मनीमाजरा छोड़ कर उत्तर प्रदेश चला गया था. शाहिद भी शायद वहीं चला गया है.
वीना और उस के घर वालों के बारे में यही सुखद समाचार है कि अपनी मेहनत से महेश ने जहां अपना अच्छाखासा धंधा जमा लिया है, वहीं वीना खुद भी बेकरी का कारोबार करती है. महेश ने उस की महाभूल को गलती की संज्ञा दी, जो उस के लिए सबक बन कर काम आई. आज उन के 2 नहीं, 3 बेटे हैं और तीनों शहर के बेहतरीन एवं नामचीन स्कूलों में पढ़ रहे हैं. तीनों की गिनती मेधावी छात्रों में होती है. Hindi crime story
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कुछ पात्रों के नाम बदले हुए हैं.






