Web Series: इस वेब सीरीज में जैसे ही एक पुलिस स्टेशन को फारेस्ट विभाग के इंसपेक्शन बंगलो में शिफ्ट किया जाता है तो वहां पर रहस्यमयी घटनाएं और मौतें होने लगती हैं. उस के बाद पुलिस अधिकारी विष्णु एक रिसर्चर मैथिली के साथ मिल कर इन रहस्यमयी घटनाओं को सुलझाने की कोशिश करता है तो वह उलझता जाता है. बाद में इन हत्याओं की ऐसी चौंकाने वाली कहानी सामने आती है कि…

निर्माता: वीना नायर (ए. वीरा नायर प्रोडक्शन), निर्देशक: सैजू एस.एस., लेखक: सुनीश वरनाडु, ओटीटी: जी5, कलाकार: शबरीश वर्मा, आध्या प्रसाद, श्रीजीत रवि, सेंथिल कृष्णा, जयन चेरथला, साजू श्रीधर, बालाजी सरमा, मनेहरी जौय वेब सीरीज ‘इंसपेक्शन बंगलो’ केरल की एक पैरानौरमल इनवेस्टिगेटिव हौरर और कौमेडी सीरीज है. 7

एपिसोड की यह वेब सीरीज एक डरावने पुराने भुतहे बंगले के इर्दगिर्द घूमती है.

एपिसोड नंबर 1

एपिसोड की शुरुआत में हम रात को देर तक एक टायर में पंक्चर लगाने वाले को देखते हैं, जो काफी व्यस्त दिखाई दे रहा है. तभी उस की पत्नी उसे फोन कर के अब तक घर आने के बारे में पूछती है तो वह कहता है कि वह काम खत्म कर के जल्दी आ जाएगा. थोड़ी देर बाद वह अपना काम खत्म कर के साइकिल से घर लौट रहा होता है तो रास्ते में फारेस्ट विभाग का एक भुतहा बंगला होता है, जहां पर उसे एक बड़ा सा खिलौना गाड़ी जैसी तेज आवाज करता अपनी ओर आता दिखाई देता है, जिस से वह डर कर जमीन पर गिर जाता है. उस का सिर वहां पर एक बड़े पत्थर से टकरा जाता है और वह बेहोश हो जाता है.

उस के बाद इंसपेक्शन बंगलो का एक बोर्ड उस जगह पर दिखाई देता है और वह आवाज करने वाला खिलौना उस भुतहा बंगले के अंदर चला जाता है. अगली सुबह हम एक पुलिस स्टेशन देखते हैं, जो काफी जर्जर हालत में होता है. लगता है इस पुलिस स्टेशन की बिल्डिंग कभी भी भरभरा कर गिर सकती है. यहां के इंचार्ज सबइंसपेक्टर विष्णु (शबरीश वर्मा) हैं. अरवंगड गांव के इस पुलिस स्टेशन में हैडकांस्टेबल परेश, वर्गीस, शिहाब और 2 महिला कर्मचारी जेसी और मंजू हैं. इंसपेक्टर विष्णु काफी धार्मिक इंसान है. इन में हैडकांस्टेबल परमेश्वरन (साजू श्रीधर) जिसे सब परमेश कहते हैं, वह बिलकुल नास्तिक होता है.

सुबह का वक्त है, एसआई विष्णु पूजापाठ करने के बाद पुलिस स्टेशन के बाहर एक पत्थर पर जैसे ही नारियल फोड़ता है, वैसे ही पुलिस स्टेशन के अंदर एक जोर का धमाका होता है. विष्णु जब अंदर जा कर देखता है तो पुलिस स्टेशन में बंद एक चोर के ऊपर छत से बड़ी टायल गिर जाती है, जिस से वह चोर बुरी तरह से घायल हो जाता है. उस चोर को इलाज के लिए हौस्पिटल ले जाते हैं.

अब परमेश विष्णु से कहता है कि आप एक बार फिर यहां के विधायक शाजी माजी कंदबन से पुलिस स्टेशन को कहीं और शिफ्ट करने के बारे में रिक्वेस्ट कीजिए, नहीं तो कभी बिल्डिंग गिरी तो हम सब की जान जा सकती है, लेकिन विष्णु एक बार विधायक से बात कर चुका था, इसलिए वह दोबारा बात करने में हिचकिचा रहा था. एक चाय की दुकान में कुछ लोग उस पंक्चर वाले आदमी की बातें कर रहे होते हैं. एक आदमी वहां बताता है कि जो भी नया अधिकारी इस फारेस्ट बंगले में गया, उस की लाश अगली सुबह फंदे में लटकती मिली.

इस तरह पूरे 5 फारेस्ट अधिकारी यहां पर मृत पाए गए. जरूर यहां पर कोई भटकती आत्मा वास करती है, वह आदमी आगे बताता है कि पुलिस ने तो सुसाइड केस मान कर सभी केसों को बंद ही कर दिया. उधर वर्गीस पुलिस स्टेशन के बाहर 3-4 युवकों को पकड़ लेता है, जो नशा कर रहे थे. वह उन्हें पकड़ कर एसआई विष्णु के पास ले कर आता है. तभी वहां पर विधायक माजी कंदबन अपनी गाड़ी से पहुंच कर पुलिस वालों से कहता है कि औफिसर तुम ने मेरे लड़कों को क्यों पकड़ लिया, छोड़ दो इन्हें, अभी ये बच्चे हैं.

इस पर हैडकांस्टेबल कहता है कि इन के पास से 100 ग्राम गांजा भी मिला है. विधायक शाजी कहता है कि आप ने अभी इन सब के खिलाफ रिपोर्ट तो दर्ज नहीं की है न. परमेश कहता है जी नहीं. तब विधायक शाजी कहता है कि ठीक है, फिर मैं इन सब को अपने साथ ले जाता हूं. विधायक आगे कहता है कि मैं ने आप के पुलिस स्टेशन की जगह के लिए सरकार पर दबाब बनाया, लेकिन सरकार के पास फूटी कौड़ी तक नहीं है. लेकिन उस के बाद मैं ने एक दूसरा रास्ता निकाला है. मैं ने फारेस्ट मिनिस्टर से बात कर के यहां पर उन के इंसपेक्शन बंगलो में आप लोगों के पुलिस स्टेशन को शिफ्ट करने के लिए परमिशन ले ली है. बोलिए आप क्या कहते हैं?

उस के इस प्रश्न पर चौकी इंचार्ज विष्णु को न चाहते हुए भी हां करनी पड़ती है, क्योंकि यह पुलिस की इज्जत का सवाल जो था, विधायक उन सभी लड़कों को ले कर वहां से चला जाता है. उधर हौस्पिटल में सिर पर चोट लगने से घायल चोर को जब यह पता चलता है कि पुलिस स्टेशन अब फारेस्ट के भुतहा बंगले में शिफ्ट होने वाला है तो वह अपना चोरी का जुर्म कुबूल कर लेता है. उस का कहना था कि वह जेल चला जाएगा, लेकिन उस भुतहा बंगले में बिलकुल भी नहीं जा सकता.

इधर पुलिस स्टेशन से चौकी इंचार्ज विष्णु सब से कहता है कि अब हम क्या कह कर मना करेंगे, यह भी तो नहीं सकते हैं न कि हम पुलिस वालों को भूत से डर लगता है. मंजू कहती है कि मेरे घर में मेरे सिवा कोई नहीं है, मैं यहां पर रह कर मरना नहीं चाहती. वर्गीस कहता है कि यहां कौन मरना चाहता है. परमेश के सिवा सभी पुलिस वाले उस बंगले में शिफ्ट नहीं होना चाहते. अचानक से पुलिस स्टेशन की लाइट चली जाती है. वैसे लाइट तो पहले भी कई बार इसी तरह से चली जाती थी, लेकिन आज तो यहां पर भुतहा बंगले में शिफ्ट होने की बात हो रही थी, इसलिए सभी डर जाते हैं और यहीं पर पहला एपिसोड समाप्त हो जाता है.

पहले एपिसोड की बात करें तो एक चाबी के खिलौने से एक आदमी को डरता हुआ और उस की साइकिल को रुकता हुआ दिखाया गया है. फिर वह आदमी जमीन पर गिर भी जाता है. यह कल्पना एकदम बनावटी लगती है. इस के स्थान पर यदि किसी दूसरे डर का प्रयोग किया जाता तो सीन वास्तविक लग सकता था. पुलिस स्टेशन में एसआई विष्णु को जूते पहने हुए पूजा करते हुए दिखाया गया है, जोकि कहीं से भी उचित नहीं लगता.

एपिसोड नंबर 2

दूसरे एपिसोड का नाम ‘कठिन परीक्षा’ रखा गया है. दूसरे एपिसोड की शुरुआत फ्लैशबैक से शुरू होती है, जहां पर फारेस्ट अधिकारी कुरुविला उस अभिशप्त बंगले में रात को रोकता है. फिर अगले दिन सुबह उस की लाश एक कमरे में फंदे पर लटकी हुई पाई जाती है. इस तरह कुरुविला वह पांचवां और आखिरी विक्टिम था, उस के बाद से उस बंगले में ताला ही पड़ गया था. अब कहानी वर्तमान में आ जाती है, जहां पर बंगले की साफसफाई का काम गांव वाले कर रहे हैं. गांव वालों ने बंगले के अंदर रंगाईपुताई के काम के लिए मना कर दिया था, इसलिए बंगले के अंदर की रंगाई का काम बाहर के मजदूरों को दे दिया जाता है.

उधर दूसरी तरफ पुलिस स्टेशन में विष्णु अपने साथियों के साथ शिफ्टिंग करता है. उस के बाद विधायक शाजी माजी कंदबन रिबन काट कर फारेस्ट बंगले में नए पुलिस स्टेशन का उद्घाटन करता है. विधायक पुलिस वालों से कहता है कि आप लोग अब डट कर पूरी पब्लिक को यह साबित कर के दिखा दो कि यहां पर कोई भूतप्रेत जैसी कोई चीज नहीं है. विधायक खुद डर के मारे पुलिस स्टेशन के अंदर कदम भी नहीं रखता और कोई बहाना बना कर वहां से चला जाता है. अब विष्णु कहता है कि कल जिन गुंडों की रिपोर्ट दर्ज हुई थी, उन्हें पकड़ कर लाओ, पुलिस वाले उन गुंडों को पकड़ कर पुलिस स्टेशन ले आते हैं. विष्णु उन से पूछताछ करता है तो वे गुंडे कहते हैं कि पहले आप यहां डीएसपी राजन को बुलाइए, तभी हम उन को ही सब कुछ बताएंगे.

लेकिन वे गुंडे जैसे ही डीएसपी राजन का नाम पुलिस स्टेशन में लेते हैं, वैसे ही उस बंगले में तेज हवाएं चलने लगती हैं. फाइलें रैक्स से नीचे गिरने लगती हैं. कागज हवा में उडऩे लगते हैं और वहां का पूरा माहौल भूतिया हो जाता है और लाइट भी बुझ जाती हैं. सीन यहीं पर कट हो जाता है. अब अगले दिन सुबह हम देखते हैं कि पुलिस स्टेशन में सभी बेहोश पड़े हैं. सब से पहले शीजू और परमेश को होश आता है तो वे विष्णु को ढूंढते है जो उन्हें लौकअप रूम में मिलता है.

विष्णु सब से पहले अपने गले के ताबीज को देखता है तो वह देखता है कि वह टूट कर जमीन में पड़ा हुआ था. तभी बाहर से शोर होने लगता है. विष्णु के पूछने पर वर्गीस बताता है कि बाहर मीडिया और पब्लिक यह देखने के लिए आई है कि हम लोग जिंदा भी हैं या नहीं. विष्णु सब को समझाता है कि कल रात का वाकया किसी को कानोंकान खबर नहीं होना चाहिए. विष्णु सहित सभी पुलिस वाले नौरमल हो कर स्माइल के साथ जब मीडिया और पब्लिक से रूबरू होते हैं तो सभी लोग उन्हें इस दशा में देख कर जोरजोर से तालियां बजाने लगते हैं. क्योंकि उस शापित बंगले में रह कर कोई भी जिंदा नहीं बच पाया था.

अब उन के जाने के बाद विष्णु और उस के साथी शिहाब को ढूंढने लगते हैं, क्योंकि वह गायब था. तभी उन्हें एक बंद कमरे से शिहाब की आवाजें सुनाई देती हैं. वह दरवाजा खोल कर उस से पूछते हैं कि वह यहां पर कैसे आ गया, किस ने उसे बंद किया था. शिहाब बताता है कि कल रात मैं ने एक साया देखा, जिस ने मुझे इस कमरे में बंद कर दिया. विष्णु कहता है कि यहां पर महेंद्र स्वामीजी को बुला कर अनुष्ठान कराना होगा, तभी यहां की शुद्धि हो पाएगी. अब तक जेसी और मंजू भी छुट्टी काट कर वापस आ जाते हैं. विष्णु स्वामीजी को बुलवा कर उन से वहां पर पूजापाठ करना शुरू करता है. वहां पर सभी पुलिस वाले भी पूजा करते हैं, केवल परमेश को छोड़ कर, क्योंकि उसे इन बातों पर विश्वास ही नहीं था.

परमेश पुलिस स्टेशन के बाहर खड़ा रहता है. अब स्वामीजी अनुष्ठान करने के बाद कपड़े की 4 गुडिय़ा बनाते हैं और पुलिस स्टेशन के चारों तरफ एकएक कोने में गाडऩे को कहते हैं. उन गुडिय़ा को वही आदमी गाड़ सकता था, जो एक विशेष तिथि और नक्षत्र में पैदा हुआ हो. वह व्यक्ति गुंडों में से एक मिल जाता है. अब स्वामीजी उस गुंडे को चारों गुडिय़ा दे देते हैं. गुंडे का एक साथी भी उस की मदद करने उस के साथ चला जाता है. वे दोनों 3 गुडिय़ा तो 3 कोनों में गाड़ देते हैं, लेकिन चौथी गुडिय़ा गाड़ते समय उन्हें भयानक और डरावनी आवाज सुनाई देती है. इसे दूसरा गुंडा तो डर कर तुरंत भाग जाता है.

एक गुडिय़ा वहां पर हवा में उडऩे लगती है. उस गुडिय़ा के वहां से गायब होते ही वहां पर सफेद कपड़ों में एक युवती भूत वेष में दिखाई देती है, लेकिन वह युवती कौन थी, भूत या और कुछ? इस का पता नहीं चल पाता, क्योंकि दूसरा एपिसोड यहां पर समाप्त हो जाता है. दूसरे एपिसोड की बात करें तो इस में भी अंधविश्वास और डर अधिक दिखाया गया है. विधायक शाजी एक ओर तो लोगों के मन से डर हटाना चाहता है, पर खुद ही डर के कारण पुलिस स्टेशन के अंदर नहीं जाना चाहता. दूसरा डीएसपी राजन का नाम जब गुंडे लेते हैं तो अचानक वहां पर आंधियां चलने लगती हैं. यह बात समझ से परे है. उस के बाद पुलिस वालों पर क्या आफत आई, यह भी उस रात को नहीं दिखाया गया है.

एपिसोड नंबर 3

तीसरे एपिसोड का नाम ‘मैथिली का आगमन’ रखा गया है, जिस की अवधि 18 मिनट की है. एपिसोड की शुरुआत फ्लैशबैक से होती है, जहां पर फारेस्ट अधिकारी बाला एक ट्रक को पकड़ता है, जिस में स्मगलिंग हो रही थी. ड्राइवर ट्रक से कूद कर जंगल में भाग जाता है तो फारेस्ट अधिकारी बाला (सैथिल कृष्णा) उसे पकड़ कर जीप में बिठा लेता है. तभी रास्ते में उन्हें एक ट्रक मिलता है. बाला ट्रक को हटाने के लिए ड्राइवर के साथ अपनी जीप से उतरता है, तभी वह ड्राइवर जीप से कूद कर जंगल में भाग जाता है.

बाला अपने साथियों के साथ उसे जंगल में ढूंढने लगता है, तभी गोली की आवाज सुनाई पड़ती है. मतलब कि किसी ने जंगल में उस ड्राइवर को शूट कर दिया था. अब सीन वर्तमान में आ जाता है, जो युक्ती दूसरे एपिसोड के अंत में भूत की तरह दिखाई दे रही थी. वही युवती अब बुलेट पर बैठ कर पुलिस स्टेशन में आ कर विष्णु से मिलती है. वह विष्णु से कहती है कि उस का नाम मैथिली (आध्या प्रसाद) है. आगे वह यह बताती है कि वह एक पैरानौरमल रिसर्चर है और भूतिया स्थानों की रिसर्च करती है.

दूसरी ओर परमेश अपनी स्कूटी से पुलिस स्टेशन आ रहा होता है तो वहां पर कुछ लोग उसे अपनी लिखित शिकायत देते हैं. परमेश उन से थाने आ कर रिपोर्ट दर्ज कराने को कहता है. तब वे लोग बताते हैं कि सर, हम यहां के नेटिव ट्राइबल लोग हैं. उस बंगले का भूत हम से व्यक्तिगत दुश्मनी रखता है.

तब परमेश उन से कहता है कि तुम लोगों की क्या समस्या है. उस के बाद परमेश के पास 2 औरतें आ कर बताती हैं कि सोमा उन दोनों का पति है. जब से आप लोगों ने इंसपेक्शन बंगलो में अपनी पुलिस चौकी शिफ्ट की है, उस दिन से सोमा को न जाने क्या हो गया है, दिनरात शराब पी कर हम दोनों की बुरी तरह से पिटाई करता है. हमें बहुत तंग करता है. परमेश कहता है कि ठीक है, मैं तुम्हारी रिपोर्ट थाने में दर्ज कर दूंगा. परमेश पुलिस स्टेशन में मैथिली को देखता है तो वह औफिस में जा कर उस के बारे में पूछता है तो विष्णु उसे बताता है कि यह मैथिली है, यह भूतप्रेतों से बात भी कर सकती है. स्वामीजी भी कह रहे थे कि यहां के भूतप्रेतों की असली जानकारी मिलने पर स्वामीजी प्रौपर तरीके से अनुष्ठान कर इस स्थान को प्रेतों से मुक्त कर सकते हैं.

परमेश फिर विष्णु को सोमा की दोनों पत्नियों की शिकायत के बारे में बताता है. विष्णु कहता है कि सोमा को पकड़ कर थाने लाओ, कहीं उस का इस भूतिया बंगले में कोई हाथ तो नहीं है. मैथिली अपना लैपटौप निकाल कर वहां भूतों के बारे में खोज करने लगती है तो उस का कनेक्शन भूतों से मिल जाता है. मैथिली सिग्नल के माध्यम से उन से संपर्क कर कहती है कि मैं आप की मदद करने के लिए यहां पर आई हूं. क्या आप मेरे सामने आ सकते हैं? तभी एक भूत उस के सामने आ जाता है.

उधर पुलिस वाले सोमा को गांव से पकड़ कर ले आते हैं. सोमा पुलिस वालों से रिक्वेस्ट करता है कि सर मुझे आप पुलिस स्टेशन के अंदर मत ले जाइए, मुझे बहुत डर लग रहा है. दरअसल, सोमा एक पेशेवर चोर था, जो पहले भी कई बार थाने लाया जा चुका था. पुलिस वाले जबरदस्ती पकड़ कर थाने के भीतर ले कर आ जाते हैं. उस के बाद सोमा को मैथिली के कमरे में ले जाया जाता है. मैथिली के पूछने पर सोमा बताता है कि फारेस्ट औफिसर बाला की जीप में एक दिन सोमा ने जानबूझ कर हाथी के दांत छिपा दिए थे.

बाला अपनी पत्नी और बच्चों के साथ जीप में घूमने निकला तो चेकिंग के दौरान डीएसपी राजन ने बाला को गिरफ्तार कर लिया था. मैथिली सोमा से जब यह पूछती है कि बाला की जीप में हाथी के दांत रखने के लिए तुम से किस ने कहा था तो सोमा कोई जवाब नहीं देता. उस के बाद मैथिली एक बड़ा सा लौकेट निकाल कर कुछ अजीब सा मंत्र पढ़ती है, जिस के स्वर को वहां पर एक आत्मा पकड़ लेती है. मैथिली उस संपर्क में आने वाली आत्मा से पूछती है कि इस के आगे क्या हुआ, इस के बारे में अब तुम ही बता दो. वह आत्मा काफी गुस्से में होती है. वह कहती है कि अब मैं क्या बताऊं, उस से पूछो जिस ने ये सब कुछ किया है, उस कातिल को पकड़ो, जिस ने ये कत्ल किया था.

इस के बाद सोमा बहुत जोरजोर से चीखनेचिल्लाने लगता है और आखिर में बेहोश हो कर जमीन पर गिर जाता है. उस के बाद पुलिस सोमा को हौस्पिटल ले जाती है. मैथिली कहती है कि मैं यह नहीं जानती कि वह किस की आत्मा थी, लेकिन वह एक पुरुष की आत्मा थी, लेकिन वह किसी कत्ल के बारे में बता रहा था. मैथिली फिर पूछती है कि वह फारेस्ट औफिसर बाला और उस की फैमिली ने सुसाइड ही किया था न?

तीसरे एपिसोड की बात करें तो इस में काफी कमजोरियां नजर आ रही हैं. जैसे जब बाला उस ट्रक ड्राइवर को पकड़ता है तो उसे ठीक से हथकड़ी नहीं पहनाई जाती, जिस के कारण वह जंगल में भाग जाता है. फिर गोली की आवाज सुनाई पड़ती है, उस के बाद उस ड्राइवर के साथ क्या घटित हुआ, इस के बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं चल पाता है.

एपिसोड नंबर 4

इस एपिसोड का नाम ‘महत्त्वपूर्ण खोज’ रखा गया है, जिस की अवधि 16 मिनट की है. एपिसोड की शुरुआत फ्लैशबैक से होती है, जहां फारेस्ट औफिसर बाला को एक नहीं बल्कि 2 केस में फंसाया गया था. पहला केस उस की गाड़ी में हाथी दांत का पाया जाना और दूसरा जो स्मगलिंग ट्रक का ड्राइवर जंगल में भागा था, उस के मर्डर का आरोप भी बाला पर ही लगा दिया गया था. इन कारणों से बाला डिप्रेशन में आ कर अपनी बेटी और पत्नी को जहर दे कर मार डालता है और फिर फारेस्ट बंगलो में फंदा लगा कर आत्महत्या कर लेता है.

अब सीन वर्तमान में आ जाता है, जहां तीसरे एपिसोड के अंत में हवा के झोंके से जो फाइल गिर गई थी, वह असल में संतू की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की फाइल थी. विष्णु उसे पढ़ कर बताता है कि जो गोली संतू की बौडी से मिली थी… विष्णु के आगे बताने से पहले ही मैथिली बीच में बोल देती है कि यह गोली फारेस्ट औफिसर बाला की सर्विस रिवौल्वर से ही चली थी. विष्णु उस से पूछता है कि ये सब तुम्हें कैसे पता चला? तब मैथिली कहती है कि जब आप यह फाइल पढ़ रहे थे तो मैं आप का चेहरा रीड कर रही थी. इस से विष्णु मैथिली से प्रभावित हो जाता है.

उस के बाद मैथिली विष्णु को अपनी बुलेट बाइक पर बिठा कर हौस्पिटल ले जाती है, जहां पर फारेस्ट औफिसर प्रताप एडमिट था. उसी के हाथों से संतू उस दिन भाग कर जंगल में भागा था. यहां पर प्रताप बड़ी शौकिंग स्टोरी बताता है कि उस ने ही संतू की हथकड़ी खोल कर उस की भागने में मदद की थी और प्रताप ने ही बाला की सर्विस रिवौल्वर भी चुराई थी. यह सब प्रताप ने डीएसपी राजन के कहने पर किया था. तब विष्णु प्रताप से कहता है कि क्या डीएसपी राजन ने बाला की सर्विस रिवौल्वर से संतू की शूट किया था?

प्रताप कहता है कि मुझे ये सब पता नहीं, राजन ने संतू की हथकड़ी खोलने और बाला की रिवौल्वर चुराने के लिए उस से कहा था. प्रताप आगे बताता है कि अब वह पश्चाताप करना चाहता है, क्योंकि उस के इस गलत काम करने के कारण उस का बेटा आखिरी दिन गिन रहा है. प्रताप विष्णु से मैथिली के बारे में पूछता है कि मैथिली भी पुलिस डिपार्टमेंट में हैं तो विष्णु कहता है कि ऐसा ही समझ लो. उस के बाद विष्णु के पीछे मैथिली भी हौस्पिटल से जाने लगती है. इधर विष्णु आगे निकल जाता है तो मैथिली प्रताप की आंखों में आंखें डाल कर उसे घूरती है तो प्रताप की हालत खराब हो जाती है. वह कुछ बोल नहीं पाता और उस का मुंह भी टेढ़ा हो जाता है. यह सब देख कर मैथिली मन ही मन बहुत खुश होती है.

मैथिली अब विष्णु को बाइक पर बिठा कर ले जाती है तो तभी विष्णु की मां का वीडियो कौल आ जाता है. वह वीडियो में मैथली को देख कर खुश हो कर कहती है कि यह लड़की तेरे लिए ठीक है. अब मैथिली और विष्णु भी एकदूसरे को पसंद करने लगते हैं. दूसरी ओर परमेश उस पंक्चर वाले से मिलता है. वह बताता है कि वह भी पहले शाजी माजी कंदबन विधायक के कहने पर स्मगलिंग का काम करता था, जब वह विधायक नहीं था. संतू की मौत के बाद डर कर उस ने पंक्चर की दुकान खोल ली थी.

परमेश ये सब बातें विष्णु को बताता है तो विष्णु उसे डीएसपी राजन के बारे में जानकारी देता है. अब विष्णु और परमेश के पास 2 नाम थे कि संतू पर गोली किस ने चलाई थी डीएसपी राजन ने या फिर विधायक शाजी ने. दूसरी तरफ एक शौकिंग न्यूज फ्लैश होती दिखाई दे रही थी. न्यूज में मैथिली की फोटो दिखाई जा रही थी, उस का नाम रोजबेरा दिखाया जा रहा था, जो कई दिनों से गायब थी. एक न्यूज चैनल में इस लड़की को मार कर गाडऩे की बात भी सामने आ रही थी. रोजबेरा के मम्मीपापा को यह शक है कि वह उन की बेटी रोजबेरा की ही लाश है.

वह उस मृत लड़की का डीएनए टेस्ट कराने की मांग कर रहे थे, लेकिन जब उस गड्ïढे के अंदर खुदाई की गई तो वहां पर लाश ही गायब हो गई थी. पुलिस का तो यह कहना भी था कि लाश रोजबेरा के कातिलों ने ही गायब कर दी है. इस के साथ ही चौथा एपिसोड समाप्त हो जाता है.

चौथे एपिसोड की बात करें तो अधिकतर स्थानों पर भ्रामक स्थितियां पैदा की गई हैं, जो सोच से भी परे हैं. मसलन फारेस्ट औफिसर पर जब 2 इलजाम लगाए जाते हैं तो वह डिप्रेशन में आ कर अपनी पत्नी और बेटी को मार कर आत्महत्या कर लेता है. फारेस्ट औफिसर बाला एक पढ़ालिखा इंसान है. वह अपनी बेगुनाही साबित कर सकता था, किसी को अपना दुख बता सकता है या कम से कम एक सुसाइड नोट छोड़ कर तो अवश्य ही जा सकता था.

एक जगह पर जब विष्णु पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ रहा होता है तो उस से आगे की बातें मैथिली फेस रीडिंग की बात कह कर बता देती है. यह भी एक कोरी कल्पना मात्र ही लगता है. मैथिली को यह बात कैसे पता चलती है कि फारेस्ट औफिसर प्रताप हौस्पिटल में एडमिट है.

एपिसोड नंबर 5

पांचवें एपिसोड का नाम ‘अतीत की परछाइयां’ रखा गया है, इस की अवधि 17 मिनट की है. एपिसोड की शुरुआत में महिला कांस्टेबल जेसी अपनी स्कूटी पर बैठ कर जब पुलिस स्टेशन आती है तो वह पुलिस स्टेशन के बाहर मैथिली को टूथब्रश करते हुए देखती है तो नाराज हो कर मैथिली से कहती है कि हम ने तुम्हें अपने पुलिस स्टेशन में जगह क्या दी, तुम ने तो इसे अपना ससुराल समझ लिया. मैथिली जेसी से मुसकरा कर कहती है कोई बात नहीं, अब मैं तुम्हारे विष्णु सर से शादी कर के यहीं पर आने वाली हूं.

एक फाइल ले कर परमेश वहां आ जाता है तो मैथिली विष्णु से कहती है कि आप मां के द्वारा भेजा गया यह ताबीज परमेश सर से बंधवा लो. इस पर विष्णु कहता है कि परमेश तो बचपन से ही नास्तिक है. विष्णु आगे कहता है कि चलो, कोई बात नहीं, मैं ताबीज शीजू से ही बंधवा लूंगा और फिर वह अपने ताबीज को अच्छी तरह से पैक कर लेता है. इस के बाद विष्णु और उस की पुलिस टीम हौस्पिटल में सोमा से मिलने जाते हैं. सोमा वही व्यक्ति था, जिस ने फारेस्ट औफिसर बाला की जीप में हाथी दांत रख कर उसे फंसाया था. लेकिन उस के बाद तीसरे एपिसोड में पूछताछ के दौरान सोमा बेहोश हो जाता है, अब वह होश में आ चुका था.

जब विष्णु उस से पूछता है तो सोमा डर कर यह बता देता है कि उस ने हाथी दांत विधायक शाजी के कहने पर ही बाला की गाड़ी में रखे थे. उस के बाद वह विष्णु को यह भी बता देता है कि यह सब काम शाजी ही उस से करवाया करता था, क्योंकि विधायक शाजी चंदन की लकड़ी, हाथी दांत की तसकरी और गांजे की खेती भी करता था. इस पर विष्णु कहता है कि ये विधायक शाजी तो अपने टाइम का वीरप्पन निकला. विष्णु अब सोमा से पूछता है कि विधायक शाजी ये सब स्मगलिंग किसे सप्लाई करता था, तब सोमा आईजैक का नाम बताता है.

अब हम आईजैक को देखते हैं, जिस की अभी भी विधायक शाजी से दोस्ती बरकरार थी. अभी वह लंदन में था और फोन पर विधायक शाजी से कह रहा था कि वह 24 तारीख को इंडिया आ रहा है, उसे ग्रांड पार्टी चाहिए. पांचवें एपिसोड की बात करें तो यहां पर पुलिस स्टेशन के इंचार्ज एसआई विष्णु को अपने ताबीज की पूजा कर के दिखाया जाना उस के अंधविश्वास को साफसाफ दर्शा रहा है. यह प्रयोग ठीक नहीं है, उस के बाद मैथिली उस का ताबीज बांधने से मना कर देती है. इस में भी सस्पेंस डालने की कोशिश की गई है, जो हजम ही नहीं होती.

एपिसोड नंबर 6

छठवें एपिसोड का नाम ‘खुलासे ‘ रखा गया है, जिस की अवधि 19 मिनट की है. एपिसोड की शुरुआत में फ्लैशबैक में बिलकुल स्टार्ट से दिखाया गया है. जब यहां पर बाला नयानया फारेस्ट औफिसर बन कर आता है और यहां पर चल रही स्मगलिंग को खत्म कर डालता है. अब आईजैक बाला को घूस की पेशकश करता है तो बाला इंकार कर देता है. फिर आईजैक उसे हाथीदांत और संतू के मर्डर में फंसा देता है. जंगल में संतू की आईजैक ने ही गोली से मारा था. उस के बाद आईजैक ने बाला की पत्नी, दोनों बच्चों और बाला को खुद ही मार कर केस को ऐसे दिखा दिया था. जैसे बाला ने पहले बीवीबच्चों को मारा, बाद में डिप्रेशन में आत्महत्या कर ली.

अब सीन वर्तमान में आता है, जहां विष्णु और उस की पुलिस टीम सीसीटीवी चैक कर रहे होते हैं तो उन्हें मैथिली नहीं दिखाई देती, बल्कि उस के स्थान पर एक काले धुएं जैसी कोई आकृति दिखाई देती है. अब विष्णु तुरंत स्वामी जी को फोन कर मैथिली के भूत की बात बता देता है. स्वामीजी ने बताया कि जैसे तुम ने मैथिली के बारे में बताया है कि वह भूत नहीं हो सकती, क्योंकि तुम ने एक दिन बताया था कि कुरुविला ने अपनी देह दान कर दी थी, इसलिए उस का अंतिम संस्कार नहीं हुआ. अब जो मैथिली के अंदर आत्मा है, वह कुरुविला की ही है.

अब यह कहानी सामने आई कि कुरुविला का मर्डर हुआ था और वह मैथिली के शरीर में प्रवेश कर अपने खूनी से बदला लेना चाहता है. इसलिए मैथिली का शरीर तो असल में रोजबेरा का था, जिस की लाश को कुरुविला ने ही गायब कर दिया था. स्वामी विष्णु से कहता है कि अब तुम जल्दी कुरुविला का केस रिइनवेस्टीगेट करो. अब विष्णु कुरुविला की केस फाइल की स्टडी करता है और कहता है कि कुरुविला माइनिंग और जियोलौजिकल डिपार्टमेंट का सरकारी अधिकारी था. फिर यह इस बंगले में रुकने कैसे आ गया.

तब कांस्टेबल शियाज बताता है कि सर इस बंगले में एक केयरटेकर था, जो यहां पर रुकने वालों के लिए खानेपीने की व्यवस्था करता था. शायद उस से मिल कर कुछ इनफारमेशन मिल सकती है. अब विष्णु शियाज को ले कर केयरटेकर के गांव निकल जाते हैं. पुलिस स्टेशन में अब तक सभी पुलिस वालों को यह बात पता चल चुकी थी कि मैथिली के शरीर के अंदर कुरुविला ही घूम रहा है.

विष्णु और रियाज केयरटेकर के गांव पहुंचते हैं तो वहां पता चलता है कि केयरटेकर को मरे तो पूरे 5 साल बीत चुके हैं, लेकिन वहां उस की पत्नी बताती है कि केयरटेकर आईजैक के लिए ही काम करता था. विष्णु जब उस से पूछता है कि बंगलो में कुरुविला नामक कोई अधिकारी तो नहीं आता था, तब वह बताती है कि सर इस के बारे में मुझे कुछ पता नहीं है. लेकिन यहां पर विष्णु को यह बात पता चल जाती है कि बाला और कुरुविला का केस आपस में जरूर कनेक्टेड तो है. जब विष्णु पुलिस स्टेशन वापस आता है तो वहां बोर्ड पर एक डायग्राम बना होता है.

विष्णु पूछता है कि यह डायग्राम किस ने बनाया है, तभी पीछे से मैथिली आ कर बताती है कि यह डायग्राम उस ने ही तैयार किया है. फिर वह अपना और अपनी देह में कुरुविला की आत्मा का खुलासा भी करती है. वह बताती है कि उस ने कुरुविला के भूत से बात की है. वह आगे बताती है कि असल में कुरुविला एक भ्रष्ट अधिकारी था, जो आईजैक के लिए स्मगलिंग करता था, लेकिन धीरेधीरे कुरुविला काफी लालची हो गया और वह आईजैक से अधिक पैसों की डिमांड करने लगा था. इस के बाद आईजैक ने कुरुविला का मर्डर कर उसे फांसी के फंदे पर लटका दिया.

पुलिस ने इसे सुसाइड केस बना कर बंद कर दिया और गांव के लोगों को इसे भूत का काम बताया, क्योंकि इस से पहले यहां पर 4 फारेस्ट अधिकारी फांसी लगा कर मर चुके थे, जिन्हें असल में भूत ने नहीं, बल्कि आईजैक ने मारा था. आइजैक उन को मारता था, जो उस के मन मुताबिक काम नहीं करते थे, क्योंकि कुरुविला कम्युनिस्ट होने के कारण अपनी बौडी इसलिए दान कर चुका था, क्योंकि वह भगवान को नहीं मानता था. लेकिन मर्डर होने के बाद और अंतिम संस्कार न होने के कारण वह भूत बन चुका था. इसीलिए अपने व बाला के परिवार के मर्डर को इंसाफ दिलाना चाहता था.

उस के बाद मैथिली के रूप में कुरुविला विष्णु को बताता है कि आने वाली 24 तारीख को आईजैक लंदन से इंडिया आ कर एक बड़ी पार्टी आर्गनाइज करने वाला है, जहां पर डीएसपी राजन और विधायक शाजी भी सम्मिलित हो रहे हैं. अब आप खुद प्लानिंग बनाइए. इस के बाद यहां पर छठां एपिसोड समाप्त हो जाता है. छठें एपिसोड में तो हर कदम पर खामियां ही खामियां नजर आ रही हैं. आईजैक की बंदूक से संतू का मर्डर हो जाता है, जबकि पुलिस रिपोर्ट में यह गोली बाला की सर्विस रिवौल्वर से चलाई गई थी.

एक जगह पर मैथिली जो कुरुविला की आत्मा में है. वह कह रही है कि मैं ने कुरुविला की आत्मा से बात कर के सारी बातें पता लगाई हैं. मर्डर पर मर्डर हो रहे हैं. पुलिस सुसाइड केस बना कर केस क्लोज कर देती है, इस का भी विस्तृत विवरण कहीं पर नहीं किया है. यानी कि लेखक और निर्देशक द्वारा हर कदम पर गलतियों पर गलतियां की जा रही हैं.

एपिसोड नंबर 7

सातवें एपिसोड का नाम ‘मामला बंद करना’ रखा गया है, जिस की अवधि 27 मिनट की है. एपिसोड की शुरुआत में हम देखते हैं कि आज 24 तारीख है यानी कि अमावस्था की रात जब स्वामीजी पुलिस स्टेशन में एक बड़ी पूजा करने वाले हैं. जबकि आज ही आईजैक भी लंदन से आया हुआ है, जो एक बहुत ग्रांड पार्टी दे रहा है, लेकिन पुलिस का पूरा फोकस स्वामीजी के पूजा अनुष्ठान में लगा हुआ है. आईजैक ने अपनी पार्टी में काफी बड़ेबड़े लोगों को बुलाने के साथसाथ डीएसपी राजन और विधायक शाजी के साथ सोमा को भी बुला रखा है, जबकि सोमा अब पुलिस टीम के साथ उन की मदद कर रहा था यानी कि आईजैक की पार्टी में भी वह पुलिस के लिए काम कर रहा है.

पुलिस स्टेशन में कदम रखते ही स्वामीजी को पता चल जाता है कि यहां पर कई आत्माएं एक्टिव हैं. उधर दूसरी ओर आईजैक की पार्टी चल रही है. तभी आईजैक सोमा से भूतिया गेम दिखाने को कहता है तो सोमा एक बड़ा सा लौकेट निकाल कर भूतों का आह्वान करता है तो वहां पर मैथिली का भूत प्रकट हो जाता है. उसे देख कर वहां पर सभी लोग डर जाते हैं, लेकिन आईजैक नहीं डरता. वह मैथिली को चेतावनी देता हुआ सोमा से कहता है, यार सोमा इतनी सुंदर भूत को देख कर तो दिल खुश हो गया. एक काम कर ऐसे ही सुंदरसुंदर 2-4 भूत और बुला दें. आईजैक कहता है, चलो, अब केक काटते हैं.

दूसरी तरफ स्वामीजी ने पुलिस स्टेशन में अनुष्ठान शुरू कर दिया था. उधर आईजैक की पार्टी में केक लाया जाता है. केक को काटते ही उस में से खून निकलने लगता है. तभी वहां पर मैथिली शक्ति प्रदर्शन करने लगती है. सारी कुरसियां अपने आप हिलने लगती हैं. तभी आईजैक, विधायक शाजी और डीएसपी की नजर अपने पीछे पड़ती है तो उन्हें कुरुविला का भूत दिखाई देता है.

वे तीनों वहां से भागने लगते हैं, लेकिन वे तीनों जहां भी भाग कर जा रहे थे. जब वे तीनों कमरे में घुसते हैं तो वहां पर बाला, उस की पत्नी और दोनों बच्चों के भूत उन्हें डराने लगते हैं. एक खिलौने वाली कार जिसे दोनों बच्चे कंट्रोल कर के चलाया करते थे, वही कार बच्चों के भूत डीएसपी राजन के ऊपर छोड़ देते हैं. राजन इधरउधर भागने लगता है, तभी बाला का भूत रौड से डीएसपी राजन को मार डालता है.

इधर अनुष्ठान करते समय स्वामीजी को पता लग चुका था कि इस बंगले में बाला और उस के परिवार के भूत भी हैं, जिन्हें मुक्ति नहीं मिली है. इसलिए स्वामीजी उन सब के लिए भी गुडिय़ा बनाना शुरू कर देते हैं. इस के बाद जब अनुष्ठान पूरा हो जाता है तो सभी भूत शांत हो जाते हैं. मगर तब तक बाला का भूत आइजैक को मार चुका होता है. इस के बाद विधायक शाजी यह स्वीकार करता है कि मैं ने ही डीएसपी राजन और आईजैक के साथ मिल कर कौनकौन से व कितने जुर्म किए थे. वह बताता है कि बाला निर्दोष था.

इधर विष्णु न्यूज देख रहा था, जिस में बताया जा रहा था कि आईजैक और डीएसपी राजन की कार का एक्सीडेंट हो गया था. दोनों की लाशें जंगल में मिली हैं. न्यूज में यह भी बताया जाता है कि रोजबेरा, जो कई दिनों से लापता था, वह एक जगह पर घायल अवस्था में पड़ी मिली है. असल में कुरुविला की बौडी जिस हौस्पिटल में दान की गई थी, वहीं पर रोजबेरा मैडिकल की स्टूडेंट थी. कुरुविला वहीं पर आत्मा के जरिए रोजबेरा के शरीर में प्रविष्ट हुआ था और उस ने आखिरकार डीएसपी राजन और आईजैक से बदला ले लिया था यानी कि एक भूत पुलिस से मिल कर सबूत इकट्ठा कर रहा था, ताकि अपना बदला ले सके और बाला को निर्दोष साबित करा सके.

एमएलए शाजी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और उस पर कानूनी काररवाई चल रही है. विष्णु अपने औफिस में बैठा है तो रोजबेरा उस से मिलने आती है. वह कहती है, हैलो सर! मैं हूं रोजबेरा. विष्णु उसे कहता है मैं हूं एसआई विष्णु माधव और उन की अब एक नई लव स्टोरी शुरू हो जाती है और फिर यहां पर सातवां और अंतिम एपिसोड के साथसाथ वेब सीरीज ‘इंसपेक्शन बंगलो’ समाप्त हो जाती है. सातवें एपिसोड में भी कहानी हवा में उड़ती और बिखराव भरी दिखाई दे रही है. जब पुलिस को मुजरिम आइजैक के लंदन से भारत आने का पता चल जाता है तो वे उस की पार्टी में जाने के बजाय स्वामीजी के अनुष्ठान में बिजी हैं, यह बात समझ से परे है.

आईजैक और डीएसपी राजन को भूतों द्वारा मारते दिखाया गया है. उधर, दूसरी ओर न्यूज में उन की कार का एक्सीडेंट होना और दोनों की लाश जंगल में मिलना काफी विरोधाभासी दिखाई दे रहा है. अंधविश्वास की तो पराकाष्ठा ही हो गई लगती है. यदि पूरी वेब सीरीज की बात करें तो इस वेब सीरीज में हौरर कौमेडी में एक नया आयाम जोडऩे की क्षमता थी, लेकिन यह सिमट ही गई. हौरर वाले हिस्से जो सस्पेंस को मजबूत करने वाले होने चाहिए थे, निराशाजनक रूप से अप्रभावी लग रहे हैं. तनाव या भय का कोई एहसास तक होता नहीं दिखाई दे रहा है.

शबरीश वर्मा

शबरीश वर्मा का जन्म 23 अगस्त, 1985 को उत्तरी परवूर, कोच्चि, केरल में हुआ था. शबरीश वर्मा के पापा का नाम पी.के. नंदना वर्मा है, जो एक प्रसिद्ध लेखक हैं. शबरीश की मम्मी का राम सुलेखा वर्मा है, जो एक गृहिणी हैं. शबरीश वर्मा विवाहित है और उस की पत्नी का नाम अश्विनी काले है. शबरीश वर्मा ने वर्ष 2013 में आई फिल्म ‘नेरम’ के गीतकार के रूप में मलयालम फिल्म उद्योग में कदम रखा था. इस बेहतरीन फिल्म में उन्होंने सुपरहिट गीत ‘विस्ता सुमाकिराया’ के लिए गीत लिखे, जो काफी प्रसिद्ध हुए थे. उस के बाद फिल्म ‘प्रेम’ में गायक अभिनेता के रूप में उस के दमदार अभिनय ने उसे मलयालम फिल्म प्रेमियों के बीच में लोकप्रिय बना दिया.

शबरीश वर्मा ने अलुवा के एमईएस कालेज से स्नातक और चेन्नई के एसएई संस्थान से औडियो इंजीनियरिंग और संगीत निर्माण में डिग्री हासिल की. उस के बाद शबरीश ने 2 लघु फिल्मों ‘क्लिंग क्लिंग’ और ‘नेरम’ (लघु) में मुख्य भूमिका निभाई. अभिनेता और गीतकार के रूप में उस की प्रमुख फिल्में ‘नेरम’ (2013) रही थी. यह उस की पहली फीचर फिल्म थी, जिस में उस ने अभिनय किया और ‘पिस्ता’ जैसे गाने के लिए लोकप्रियता हासिल की. उस के बाद उस की प्रमुख फिल्म ‘प्रेमम’ (2015) रही थी. इस ब्लौकबस्टर फिल्म के गानों ने उसे मलयालम सिनेमा में एक विशिष्ट पहचान दिलाई.

इस के साथ ही शबरीश ने इस फिल्म में बेहतरीन अभिनय भी किया. वर्ष 2015 में उस की ‘डबल बैरल’ फिल्म आई, जोकि एक कौमेडी थ्रिलर फिल्म थी. उस के बाद ‘नाम’ (2018) एक संगीतमय कौमेडी फिल्म थी, जिस में शबरीश ने अभिनय के साथसाथ गीत लेखन भी किया था. वर्ष 2018 में ही उस ने ‘लाडू’ फिल्म के लिए गीत लिखने के साथसाथ इस में उत्कृष्ट अभिनय भी किया. वर्ष 2018 में शबरीश वर्मा ने फिल्म ‘प्रेमम’ की सहायक कला निर्देशक अश्विनी काले से विवाह भी कर लिया.

आध्या प्रसाद

आध्या का जन्म पहली जनवरी, 1992 को चेन्नई में हुआ था. आध्या ने सेंट मैरी हाईस्कूल, कायमकुलम से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की. बाद में उस ने कायमकुलम, अलाप्पुझा, केरल से अपनी स्नातक की शिक्षा पूर्ण की. आध्या प्रसाद एक छोटे परिवार में पलीबढ़ी और फिर उस ने वीएफएक्स फिल्म निर्माण में भी स्नातक की डिग्री हासिल की.

आध्या प्रतिभाशाली अभिनेत्री के रूप में एक जाना= पहचाना नाम है, जो मलयालम और तमिल सिनेमा में एक उत्कृष्ट अभिनेत्री के रूप में जानी जाती है. आध्या ने तमिल फिल्म ‘कधल कान कट्टुधे’ (2017) से अपने फिल्मी करिअर की शुरुआत की और अपनी प्रतिभाशाली अभिनय क्षमता और दमदार उपस्थिति से जल्दी ही फिल्म उद्योग में प्रसिद्धि हासिल कर ली.

उस की प्रमुख मलयालम फिल्में ‘निझल’ (2021), ‘अनंतरा’ (2022), ‘कर्णन नेपोलियन भगत सिंह’ (2022), ‘ग्रहमंत्री’ (2022), ‘कबीरनिते दिवसंगल’ (2023), ‘अन्वेशिपिन कंडेथुम’ (2024), ‘नाग भूमि’ (2024) और ‘अंथा नाल’ (2024) रही हैं, जिन में उस ने अपने अभिनय की अमिट छाप छोड़ी है.

उस का मौडलिंग के प्रति विशेष जुनून है. उस ने कई प्रतिष्ठित और प्रसिद्ध ब्रांडों के साथ काम किया है. इस के अतिरिक्त आध्या मलयालम फिल्म ‘बन बटर जैम’ (2025) में मधु के रूप में भी जल्द ही दर्शकों के सामने आ रही है. आध्या अभी अविवाहित है. Web Series

 

 

 

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