MP News: 21 वर्षीय इकलौती बेटी निधि धानुक की शादी उस के पेरेंट्स ने देबू धानुक से कर जरूर दी थी, लेकिन वह अपने पुराने प्रेमी और रिश्ते के चाचा सूरज के प्यार को भुला नहीं पा रही थी. लिहाजा शादी के एक महीने बाद ही वह सूरज के साथ ससुराल से भाग गई. नवविवाहिता के इस कदम के बाद ऐसा खूनी खेल खेला गया कि…
14 जनवरी, 2026 की बात है. सुबह कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद कुछ लोग रोजाना की तरह उठ कर अपने मवेशियों को जगंल में चराने के लिए घर से निकले, तभी रास्ते में उन्होंने सरसों के खेत में एक युवती की रक्तरंजित लाश पड़ी देखी. जब उन्होंने लाश को करीब से जा कर देखा तो लाश देख कर उन सभी की घिग्गी बंध गई. उन्होंने हिम्मत कर के उस युवती के चेहरे पर नजर डाली तो उन्हें उसे पहचानने में देर नहीं लगी. वह लाश गांव के ही मुनेश धानुक की नवविवाहिता बेटी निधि की थी.
यह बात उन्होंने गांव के लोगों को बताई. पुलिस के आने तक गांव में यह खबर आग की तरह फैल गई कि मुनेश धानुक की नवविवाहित बेटी निधि को किसी ने सरसों के खेत में गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया है. इस घटना ने सर्द मौसम के बावजूद गांव के माहौल में गरमाहट पैदा कर दी थी. थोड़ी ही देर में घटनास्थल पर ग्रामीणों की अच्छीखासी भीड़ लग गई. सब एकदूसरे के कान में खुसुरफुसुर कर रहे थे. उन में इस घटना को ले कर काफी गुस्सा था. वे निधि के हत्यारे को जल्द से जल्द पकडऩे की मांग कर रहे थे. इसी दौरान किसी ग्रामीण ने भिंड जिले के मेहगांव थाने में फोन कर के इस हत्या की सूचना दे दी.
पुलिस के पहुंचने से पहले ही मृतका की पहचान निधि धानुक के रूप में हो चुकी थी. उधर सूचना मिलते ही एसएचओ महेश शर्मा कुछ सिपाहियों को साथ ले कर मौके पर पहुंच गए. उन्होंने लाश का बारीकी से निरीक्षण किया तो पाया कि उस की हत्या सीने में गोली मार कर की गई है. पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर ग्रामीणों ने मृतका की शिनाख्त मुनेश धानुक की नवविवाहित बेटी निधि के रूप में कर दी थी.
पुलिस के सामने सब से बड़ा सवाल यह था कि निधि की हत्या किन परिस्थितियों में किस ने और क्यों की? एसएचओ ने लाश को पोस्टमार्टम के निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और थाने आ कर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर पुलिस टीम को मृतका के पापा मुनेश की तलाश में लगा दिया था. काफी खोजबीन के बाद भी जब पुलिस को मुनेश का कुछ पता नहीं चला. संयोग से उसी दिन एक व्यक्ति बदहवास हालत में हड़बड़ाता हुआ थाने आया. वह बुरी तरह से हांफ रहा था. उस के कपड़ों पर खून भी लगा था. थाने में मौजूद एसएचओ ने उस के भागते हुए आने का कारण पूछा.

तब उस व्यक्ति ने बताया, ”साहब, आप मुझे हत्या के जुर्म में गिरफ्तार कर लीजिए. मैं ने अपनी शादीशुदा बेटी की रात को गोली मार कर हत्या कर दी है.’’
उस की बात सुन कर एसएचओ चौंकते हुए उस की ओर देखते हुए पूछा, ”लाश कहां है?’’
”साहब, सरसों के खेत में.’’
”तुम्हारा नाम क्या है और कहां के रहने वाले हो?’’
”साहब, मेरा नाम मुनेश धानुक है और में खिरिया थापक गांव का रहने वाला हूं.’’
उस ने यह भी बताया कि बेटी को मारने के बाद उस ने खुदकुशी करने का प्रयास किया था, लेकिन कामयाब नहीं हो पाया तो हत्या करने के 8 घंटे तक फरार रहने के बाद वह थाने में अपने आप को कानून के हवाले करने चला आया.
उस की बात सुन कर एसएचओ समझ गए कि यह वही मुनेश धानुक है, जिस की उन्हें तलाश थी. उन्होंने थाने में सिर झुका कर खड़े मुनेश धानुक को गिरफ्तार करने का आदेश दिया. इस के तुरंत बाद उसे हिरासत में ले लिया गया. इस सनसनीखेज हत्या का खुलासा होने के बाद जांच की जिम्मेदारी एसएचओ महेश शर्मा ने स्वयं संभाली, साथ ही मुनेश को घटनास्थल पर ले जा कर पूरा क्राइम सीन रीक्रिएट कर साक्ष्य जुटाए.

निधि के पोस्टमार्टम के बाद पुलिस उस के ससुराल वालों के आने का इंतजार करती रही, लेकिन जब काफी इंतजार के बावजूद वे लोग नहीं आए तो निधि के कुछ रिश्तेदारों को एक कांस्टेबल के साथ अस्पताल की मोर्चरी भेज दिया, जहां निधि की लाश रखी थी. औपचारिक काररवाई के बाद निधि की लाश उस के करीबी रिश्तेदारों को सौंप दी गई. उसी दिन कुछ रिश्तेदारों की मदद से निधि का अंतिम संस्कार कर दिया. निधि की हत्या का जुर्म मुनेश कुबूल कर चुका था. पुलिस ने निधि की मम्मी पूजा धानुक को वादी बना कर एक तहरीर लिखवा ली.
पुलिस ने हिरासत में लिए गए मुनेश से निधि की हत्या का कारण जानने के लिए पूछताछ की तो मुनेश धानुक ने बिना कुछ छिपाए बेटी की हत्या के पीछे की जो खौफनाक कहानी बताई, वह हैरान कर देने वाली निकली. मध्य प्रदेश के जिला भिंड के मेहगांव थाने के अंतर्गत एक गांव है खिरिया थापक. इसी गांव में मुनेश धानुक अपनी पत्नी पूजा और बेटी निधि के साथ रहता था. मुनेश खेतीबाड़ी कर के गुजारा करता था. बेटी के शादी लायक होने पर उस ने उस की शादी 11 दिसंबर, 2025 को ग्वालियर के गुड़ागुड़ी का नाका निवासी देबू धानुक से कर दी थी.
निधि ने फेमिली वालों के दबाव में देबू से शादी तो कर ली थी, लेकिन वह प्यार तो सूरज से ही करती थी, निधि के देबू के साथ सात फेरों के बंधन में बंधने के बावजूद आशिकी का जनून धीरेधीरे खतरनाक मोड पर पहुंच रहा था. 28 दिसंबर, 2025 की शाम निधि अपने पति के साथ महाराज बाड़े पर शौपिंग करने गई थी. वहां छोलेभटूरे खाने के बाद उस ने योजनाबद्ध ढंग से अपने पति को पानी की बोतल लाने के लिए भेज दिया.

जब निधि का पति पानी की बोतल खरीद कर वापस लौटा तो निधि छोलेभटूरे की दुकान से बिना बताए नदारद थी. वह अपने प्रेमी सूरज के साथ फरार हो चुकी थी. उस ने अपना फोन भी बंद कर दिया था. अपनी पत्नी को वहां न पा कर देबू का माथा ठनका. बुरी तरह घबराए देबू ने अपने नातेरिश्तेदारों और जानपहचान वालों के यहां निधि को तलाशने के बाद उस के बारे में कुछ भी पता न चलने पर देर रात हुजरात कोतवाली में जा कर उस की गुमशुदगी की सूचना दर्ज करा दी थी.
अपने प्रेमी के साथ इंदौर भाग जाने के दौरान निधि ने कभी भी नहीं जानना चाहा कि उस के इस कदम से उस के पेरेंट्स का क्या हाल हुआ, किस तरह से वह अपनी तारतार हुई इज्जत के साथ जी रहे होंगे. गुमशुदगी की शिकायत दर्ज होने के एक पखवाड़े बाद इत्तफाक से जैसे ही निधि ने अपने फोन में जैसे ही नई सिम एक्टिव की तो साइबर सेल को तुरंत उस की लोकेशन मिल गई. पुलिस ने निधि से फोन द्वारा संपर्क किया तो पुलिस के कहने पर 7 जनवरी, 2026 को वह स्वयं अपने प्रेमी सूरज के साथ हुजरात कोतवाली में पहुंच गई.
उस ने हुजरात कोतवाली के कोतवाल द्वारा पूछताछ के दौरान बताया कि वह अपनी मरजी से अपने प्रेमी सूरज के साथ इंदौर चली गई थी. वह बालिग है, अत: अपना अच्छाबुरा समझती है, अब वह अपने प्रेमी सूरज के साथ ही रहना चाहती है. उधर निधि के कोतवाली में पहुंचने की भनक लगते ही निधि के पापा और नातेरिश्तेदारों ने कोतवाली पहुंच कर निधि को अपनी ससुराल वापस जाने के काफी समझाया-बुझाया, लेकिन वह इस जिद पर अड़ी रही कि वह किसी भी सूरत में अपनी ससुराल लौट कर नहीं जाएगी.
निधि के इस रुख से उस के पापा मुनेश का खून खौल गया बेटी की इस जिद से मुनेश की सामाजिक प्रतिष्ठा को काफी ठेस लगी थी. बेटी की जिद मुनेश को काफी नागवार गुजरी. बेटी की यह जिद मुनेश के बरदाश्त के बाहर थी. इस के बाद ही उस ने खतरनाक फैसला ले लिया था. ग्वालियर के हुजरात कोतवाली थाना परिसर में ही मुनेश ने सोच लिया था कि न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी. निधि के अपने प्रेमी सूरज के साथ जाने के बाद से ही मुनेश उस से सतत संपर्क बनाए हुए था. अपने मकसद को पूरा करने के लिए 14 जनवरी, 2026 को मकर संक्रांति का त्यौहार मनाने के बहाने उस ने उसे 10 जनवरी को इंदौर से अपने गांव खिरिया थापक बुला लिया.
इस के बाद योजना को अंजाम देने के लिए मुनेश बेटी निधि को 13 तारीख की रात खाना खाने के बाद टहलने के बहाने सरसों के खेत में ले गया, जहां वह एकटक उसे निहारने लगा. निधि ने इस तरह अपने पापा को निहारते देखा तो बोली, ”पापा, आप आज मुझे इस तरह क्यों देख रहे हैं. आप के दिल में जो भी बात हो बिना किसी हिचकिचाहट के कह दो.’’
मुनेश को लगा कि यह उचित मौका है, बेटी से अपने दिल की बात कहने का. मुनेश ने निधि को समझाते हुए प्यार से कहा, ”बेटी, घर की इज्जत का ध्यान रखते हुए मकर संक्रांति का त्यौहार मनाने के बाद तुम चुपचाप मायके से अपनी ससुराल चली जाना, इसी में तुम्हारी भलाई है.’’
निधि मुंहफट थी. पापा की बात का विरोध करते हुए उस ने दो टूक शब्दों में कहा, ”पापा, मैं किसी भी सूरत में अपनी ससुराल नहीं जाऊंगी, आप मुझ पर ज्यादा दबाव डालेंगे तो मैं बिना मकर संक्रांति का त्यौहार मनाए अभी रात में ही अपने सूरज के पास इंदौर जाने के लिए घर से निकल लूंगी.’’

बेटी के मुंह से ऐसा सुनते ही मुनेश का माथा ठनक गया. इस से पहले कि निधि कुछ समझ पाती, मुनेश ने अपनी कमर में खोंसा देशी कट्टा निकाल कर निधि के सीने में गोली मार दी. गोली लगते ही निधि कटे पेड़ की तरह खेत में गिर पड़ी और मौके पर ही उस ने दम तोड़ दिया, इस के बाद पूरे इत्मीनान के साथ मुनेश बेटी की लाश को खेत में लावरिस पड़ी छोड़ कर फरार हो गया.
विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने मुनेश धानुक को अदालत में पेश किया, जहां कोर्ट के आदेश पर उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया. इस से पूर्व एसडीओपी रविंद्र वास्कले ने निधि की हत्या और हत्यारे की गिरफ्तारी से संबंधित जानकारी मीडिया के लोगों से साझा की. निधि की हत्या से संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन दुखद बात यह रही की जिस बेटी को ब्याह कर उस के जीवन को संवारने का सपना पेरेंट्स ने पाल रखा था, वह निधि की नासमझी या यूं कहिए कि उस की शर्मनाक करतूत की वजह से चकनाचूर हुआ ही, उस की खुशहाल गृहस्थी भी उजड़ गई. इस के अलावा उस के पापा मुनेश धानुक बेटी की हत्या के जुर्म में जेल चले जाने से मम्मी का भविष्य भी चौपट हो गया.

हालांकि बेटी की हत्या के आरोप में मुनेश के जेल जाने से उस के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, बल्कि उस के चेहरे पर इस बात का संतोष साफ झलक रहा था कि बदनामी का दाग लगाने वाली बेटी को उस ने अच्छा सबक सिखाया. MP News






