UP Crime: इंजीनियर राम भवन ने अपनी पत्नी दुर्गावती के साथ मिल कर 33 मासूम बच्चों से ऐसी दरिंदगी की कि पोक्सो कोर्ट ने दोनों को मरते दम तक फांसी पर लटकाए जाने की सजा सुनाई. आखिर यह उच्चशिक्षित दंपति मासूमों को अपने जाल में किस तरह फांसता था और उन के साथ किसकिस तरह से शोषण किया जाता था, जिस से यह मामला इंटरनैशल लेवल तक चर्चित हुआ और उन्हें मिली सजा ए मौत?
उत्तर प्रदेश में बांदा जिले का विशेष पोक्सो कोर्ट 18 फरवरी, 2026 को खचाखच भरा हुआ था. बहुत ही खास केस की सुनवाई होनी थी, जो करीबकरीब अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी. केस की जांच सीबीआई के जिम्मे थी. मामला दरजनों मासूम बच्चों के साथ यौनाचार का था, जिन की उम्र 3 साल से 15 साल तक की थी. यह अनोखा मामला भले ही 6 साल से पोक्सो कोर्ट में आया था, लेकिन उत्तर प्रदेश में बच्चों के साथ यौनाचार और उन की अश्लील तसवीरें, वीडियो आदि इंटरनेट मीडिया के जरिए पूरी दुनिया में फैलाने और बेचने की चर्चा साल 2010 से ही बनी हुई थी.
पोक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा कुछ मिनटों में ही आने वाले थे. हौल की 2 कतारों में लगी बेंचों पर सीबीआई के वकील, यूपी पुलिस, आरोपी, गवाह और बचाव पक्ष के वकील आ चुके थे. यानी कि कोर्ट में साक्ष्यों, सीबीआई के अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष अपनीअपनी बातें रखने के लिए पूरी तैयारी में थे. उन की तत्परता और उत्सुकता देखते बन रही थी. इस बारे में मीडियाकर्मी भी जानने को उत्सुक थे, लेकिन उन्हें वहां से दूर रखा गया था. हौल में तमाम तरह के मोबाइल फोन और दूसरे डिजिटल डिवाइसेस प्रतिबंधित थे.
दरअसल, इस मामले के आरोपी पतिपत्नी थे. मुख्य आरोपी सिंचाई विभाग का पूर्व जूनियर इंजीनियर राम भवन था, जबकि उस का साथ देने वाली उस की पत्नी दुर्गावती पर भी गंभीर आरोप लगे थे. उन दोनों को भारी सुरक्षा के साथ जेल से कुछ समय पहले ही कोर्ट में लाया जा चुका था. कोर्ट के हौल में गहमागहमी का माहौल था. लोग अपने बगल बैठे साथी से फुसफुसा कर बातें कर रहे थे. उन के चेहरे पर यह जानने की उत्सुकता बनी हुई थी कि बच्चों के साथ यौनाचार के मामले में क्या फैसला सुनाया जाता है. वहां कुछ पीडि़तों के परिजन भी चेहरा ढंक कर गुमसुम बैठे थे.
जैसे ही न्यायाधीश महोदय प्रदीप कुमार मिश्रा हौल में आए, वहां अचानक सन्नाटा छा गया. उपस्थित सभी लोग खड़े हो गए. श्री मिश्रा अपनी सीट पर बैठ गए. उन के सामने कई फाइलें पहले से ही रख दी गई थीं. उन में से उन्होंने एक फाइल खोलने के बाद पहले पन्ने को पढऩा शुरू किया. उस पर मोटे अक्षरों में लिखा था— ‘सैक्सुअली असाल्टिंग केस औफ 33 मेल चिल्ड्रेन’. केस सीबीआई बनाम राम भवन और दुर्गावती का था.
इस मामले की सुनवाई 12 फरवरी, 2021 को ही शुरू हो चुकी थी. कई दौर की सुनवाई के दरम्यान जैसेजैसे इस मामले में आरोपी के खिलाफ गवाहों की फेहरिस्त बढ़ती चली गई थी, वैसेवैसे मामला और भी पेचीदा हो चुका था. आरोपियों के खिलाफ प्याज के छिलके की तरह तथ्यों और तर्कों की परतें उतरने लगी थीं. बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के वकीलों की दलीलों के साथसाथ मामले की फाइल मोटी हो गई थी. पुलिस की उलझी हुई जांच में कई खामियां थीं. तथ्य थे, मगर उस के सबूत नहीं थे. नतीजे पर पहुंचने में उलझनें कम होने का नाम ही नहीं ले रही थीं.
न्यायाधीश ने अचानक अपने सामने रखे लकड़ी के हथौड़े से 3 बार ठकठक की आवाज की. पूरा हौल एकदम से एक बार फिर शांत हो गया. श्री मिश्रा पोक्सो कोर्ट के सरकारी वकील की तरफ मुखातिब होते हुए बोले, ”हां, तो कमल सिंहजी! आगे की सुनवाई के लिए आप तैयार हैं?’’
”जी जनाब! पहले मैं इस केस के बारे में थोड़ा ब्यौरा देना चाहता हूं.’’ एडवोकेट कमल सिंह ने अनुमति मांगी.
”इजाजत है…संक्षेप में बताइएगा.’’ श्री मिश्रा बोले.
”जी हुजूर! चाइल्ड पोर्न के इस मामले का खुलासा सीबीआई ने किया है. उसे इंटरपोल से केस के बारे में जानकारी मिली थी. 3 मोबाइल नंबरों से बने आईडी के जरिए बच्चों के यौन शोषण के वीडियो औनलाइन अपलोड किए गए थे और यह मटीरियल लगभग 40-45 देशों में बेचा गया था.
”इस बारे में सीबीआई द्वारा बरामद पेन ड्राइव में 36 बच्चों के यौन शोषण के 679 फोटो और वीडियो थे. वे सारे आरोपी राम भवन और उस की पत्नी दुर्गावती के घर से मिले थे. इस की जांच पहले ही की जा चुकी है. 4 साल तक चले ट्रायल के दौरान 74 गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है.
”इस केस की मूल जड़ में राम भवन और उस की पत्नी है, जिन्होंने मासूम बच्चों को तरहतरह का लालच दिया. अपने घर पर बुलाया और उन के साथ यौनाचार किया.
”यही नहीं हुजूर, दोनों ने उन के साथ यौनाचार के वीडियो और तसवीरें भी बनाईं. उन का कामर्शियल यूज किया और इंटरनेट मीडिया के जरिए विदेशों में बेच दिया.’’
”औब्जेक्शन जज साहब!… पुरानी कहानी दोहरा कर बेवजह कोर्ट का समय बरबाद किया जा रहा है.’’ बचाव पक्ष के वकील बीच में बोल पड़े.
”उन्हें अपनी बात पूरी तरह से रखने दीजिए… आप को भी अपनी बात कहने का मौका दिया जाएगा…सिंह साहब, आगे बताइए.’’ न्यायाधीश महोदय हथौड़े से तख्ती को पीटते हुए बोले.
”राम भवन मूलरूप से बांदा जिले के नरैनी शहर के रहने वाले चुन्ना प्रसाद कुशवाहा का पुत्र है. उस ने अपनी पत्नी के साथ मिल कर जिस तरह के घिनौने अपराध किए हैं, उस की जितनी सख्त हो सके सजा दी जानी चाहिए.
”वह पड़ोस, रिश्तेदारों और आसपास के मासूम बच्चों को निशाना बनाते थे. बच्चों को पैसे, गिफ्ट्स और वीडियो गेम का लालच दे कर घर बुलाया जाता था. इस तरह पीडि़त बच्चों की कुल संख्या 33 थी. उन में नाबालिग लड़के थे.
”उन के साथ गंभीर यौन शोषण किया गया था. कई बच्चों को गंभीर चोटें आई थीं, कुछ को अस्पताल में भरती होना पड़ा था और कई मानसिक आघात के चलते शारीरिक समस्याओं की चपेट में आ चुके थे.
”राम भवन, दुर्गावती 10 साल तक बांदा और चित्रकूट घूमते रहते थे. वीडियो बनाने से पहले लड़कों को लुभाने के लिए तोहफों का इस्तेमाल किया था. हुजूर! एक दशक तक राम भवन ने अपना चाइल्ड पोर्न औपरेशन आराम से चलाया था.
”चित्रकूट में एक किराए का कमरा, राज्य के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर की पोस्टिंग, एक आम जिंदगी जिस से कोई बाहरी संकेत नहीं मिलता था कि वह अपने आसपास के बच्चों के साथ क्या कर रहा है. सभी पीडि़त 18 साल से कम उम्र के लड़के थे, उन में 3 साल के भी थे.
”राम भवन और उस की पत्नी ने दरजनों पीडि़तों को शामिल करते हुए हैरान करने वाले 2 लाख वीडियो बनाए थे. वह बच्चों पर काम करने के अलगअलग तरीके अपनाता था, जिस में औनलाइन वीडियो गेम तक पहुंच और उन्हें लुभाने के लिए पैसे या गिफ्ट देना शामिल था. उन पर दया दिखा कर और लालच दे कर फंसाया जाता था, फिर उन के साथ गलत व्यवहार किया जाता था. उन्हें फिल्माया जाता था. वे उन्हें मोबाइल फोन, चौकलेट और घडिय़ां देने का भी वादा करते थे.’’
कोर्ट में स्पैशल पब्लिक प्रासिक्यूटर सौरभ सिंह ने भी इस केस में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि फोटो और वीडियो के जरिए राम भवन कई सालों तक बच्चों को धमकाता रहा. इस का पता लगाने में सीबीआई को ग्लोबल पुलिस ग्रुप इंटरपोल से मदद मिली. वहीं से डार्क वेब पर पोर्न की बिक्री से जुड़े 3 मोबाइल नंबर मिले.
सीबीआई की गवाही
दोनों ने पीडि़तों के 2 लाख से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो और तसवीरें इंटरनेट के जरिए लगभग 47 देशों में सर्कुलेट कीं. जांच के दौरान मिली एक पेन ड्राइव में 34 साफ वीडियो और 679 तसवीरें थीं. कपल ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म, वेबसाइट और डार्क वेब पर मटीरियल अपलोड करने, शेयर करने और बेचने के लिए कई मोबाइल नंबरों और ईमेल आईडी का इस्तेमाल किया था. इलेक्ट्रौनिक डिवाइस की फोरैंसिक जांच से एक साफ डिजिटल ट्रेल मिला.
सरकारी वकीलों के बाद न्यायाधीश श्री मिश्रा ने उन के कहने के आधार पर सीबीआई अधिकारी को भी कठघरे में आ कर अपनी बात कहने के लिए बुलाया.
”जनाब, आप ने अपनी जांच में क्याक्या पाया, उस बारे में जज साहब को बताएं.’’ सरकारी वकील बोले.
”जी साहब, जरूर. मैं सब कुछ इस मामले की जांच के आधार पर ही बताऊंगा. जांच के दौरान मैं ने पाया कि आरोपियों ने 33 लड़कों के साथ कई तरह के गलत काम किए थे, जिन में से कुछ की उम्र 3 साल के आसपास थी. इस बारे में 74 गवाहों में से कम से कम 25 ने गवाही दी. पीडि़तों से दरिंदगी का अंदाजा इस बात से लग जाता कि कुछ अभी भी हौस्पिटल में भरती हैं. कुछ पीडि़तों की आंखें टेढ़ी हो गई हैं. पीडि़त अभी भी दरिंदों की वजह से हुए साइकोलौजिकल ट्रामा से जूझ रहे हैं.
”राम भवन ने गलत तरीके से वीडियो रिकौर्ड किए. यह उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए नहीं किया गया था, बल्कि उन का कामर्शियल इस्तेमाल के लिए किया गया था. जांच में पाया गया कि राम भवन ने जो कुछ भी फिल्माया, उसे बेचने के लिए एक सिस्टमैटिक डिजिटल औपरेशन बनाया था. वे इस बात से बेखबर थे कि इन्वैस्टिगेटर्स इंटरनेट पर सर्कुलेट हो रहे बच्चों के यौन शोषण के मटीरियल पर नजर रख रहे थे. जब उन्हें कपल से जुड़ा कंटेंट मिला, तब वे इंटरपोल की निगाह में आ गए.’’
इस मामले की जांच अक्तूबर, 2020 में सीबीआई को सौंप दी गई. यह वह दौर था, जब पूरा देश कोविड 19 की चपेट में था. लौकडाउन का माहौल था. चौतरफा तरहतरह की सख्ती का आलम था.
हालांकि यह मामला साल 2010 से ही चल रहा था, जिस बारे में कई तरह के घिनौने खेल की बातें मीडिया में आती रहती थीं. मुख्य आरोपी रामभवन चित्रकूट में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात था. वह बाहर से सामान्य दिखता था और किराए के घर में रहता था. उस के घर के अंदर एक भयानक खेल चल रहा था, इस बात से आसपास के लोग अनभिज्ञ थे, जबकि इस में जेई की पत्नी दुर्गावती भी पूरी तरह शामिल थी. बताते हैं कि 2010 से 2020 तक लगभग 10 सालों तक यह सिलसिला चल रहा था.
देश के कई हिस्सों में चाइल्ड पोर्न को ले कर सीबीआई कई सालों से सक्रिय थी. इसी सिलसिले में सीबीआई द्वारा सितंबर 2020 में अनपरा निवासी इंजीनियर नीरज यादव गिरफ्तार किया गया. दरअसल, अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल ने सीबीआई को सूचना दी थी कि बच्चों के यौन शोषण और अश्लील सामग्री से जुड़ा डिजिटल डेटा मिला है, जो डार्क वेब पर साझा किया जा रहा है और वहां से उसे बेचा जा रहा है. इस के बाद ही सीबीआई ने 30-31 अक्तूबर, 2020 को एफआईआर दर्ज की थी.
उस के बाद आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई. नीरज दिल्ली में रह कर औनलाइन संदिग्ध लिंक साझा करता था. इसी दौरान एक औनलाइन लिंक के आधार पर विशेष औनलाइन चाइल्ड सैक्सुअल एब्यूज एंड एक्सप्लाइटेशन (ह्रष्टस््रश्व) यूनिट की जांच में राम भवन का नाम सामने आया. सीबीआई ने लगभग डेढ़ महीने तक जाल बिछा कर 17 नवंबर, 2020 को कर्वी की एसडीएम कालोनी स्थित किराए के मकान से राम भवन और उस की पत्नी दुगार्वती को गिरफ्तार किया.
इस के लिए सीबीआई ने विदेशी एजेंसियों के साथ जानकारी शेयर की, जिन्होंने मटीरियल के खरीदारों और पाने वालों की भी पहचान की थी, जिस से यह केस और पक्का हो गया. इस की शिकायत मिलने पर 31 अक्तूबर, 2020 को सीबीआई ने राम भवन के खिलाफ केस दर्ज किया. उस के द्वारा बच्चों के अश्लील वीडियो/फोटो बना कर डार्क वेब के जरिए अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क तक पहुंचाने का आरोप लगाया गया. इस के बाद 17 नवंबर, 2020 को सीबीआई ने राम भवन और उस की पत्नी दुर्गावती को गिरफ्तार कर लिया था.
दाखिल हुई चार्जशीट
गिरफ्तारी के 88 दिन बाद 12 फरवरी, 2021 को बांदा कोर्ट में 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. चार्जशीट में मैडिकल रिपोर्ट और बच्चों के बयानों को आधार बनाया गया. इस दौरान सीबीआई की टीम ने 4 से 42 साल तक की उम्र के लोगों के बयान दर्ज किए. सभी का मैडिकल परीक्षण कराने के साथ डिजिटल सबूत को कनेक्ट किया गया था.
इस के बाद बच्चों से जुड़ा मामला होने के चलते सीबीआई ने पोक्सो कोर्ट में ट्रायल की शुरुआत जून, 2023 से करवाई. इस सिलसिले में सीबीआई ने 74 गवाह पेश किए. सरकारी वकील ने मांग करते हुए कहा कि डीएम को एक पत्र लिखा जाए, जिस में पीडि़त बच्चों को 10-10 लाख रुपए की राशि देने का काम किया जाए. बांदा के पोक्सो कोर्ट में 18 फरवरी, 2026 की सुनवाई करीबकरीब पूरी हो गई. दोनों आरोपियों राम भवन और दुर्गावती को दोषी ठहराया गया. उन के खिलाफ फैसला 20 फरवरी, 2026 को सुनाया गया, जो भारतीय कानून के इतिहास में काफी बड़ा था.
न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा, ”सीबीआई की विशेष जांच के बाद सिंचाई विभाग के पूर्व जूनियर इंजीनियर राम भवन और उस की पत्नी दुर्गावती को 33 बच्चों के यौन शोषण और उन के वीडियो बना कर डार्क वेब पर बेचने का दोषी पाया गया है. यह मामला ‘रेयरेस्ट औफ रेयर’ श्रेणी में रखा गया है.’’
उन्होंने कहा कि उन का अपराध इतना भयावह और योजनाबद्ध था कि सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बची. दोनों दोषियों को मरते दम तक फंदे पर लटकाए रखने का आदेश दिया जाता है. उन्हें ‘मृत्यु होने तक फांसी पर लटकाया जाए!’
फांसी की सजा के साथसाथ कोर्ट ने राम भवन पर 6.45 लाख रुपए और दुर्गावती पर 5.40 लाख रुपए का जुरमाना भी लगाया. साथ ही न्यायालय ने पीडि़त बच्चों के पुनर्वास के लिए महत्त्वपूर्ण आदेश दिए.
कानून और पीनल कोड
दंपति को इंडियन पीनल कोड और पोक्सो ऐक्ट के तहत गंभीर पेनेट्रेटिव सैक्सुअल असाल्ट, पोर्नोग्राफिक मकसद के लिए बच्चों का इस्तेमाल, बच्चों से जुड़े पोर्नोग्राफिक मटीरियल का स्टोरेज, उकसाना और क्रिमिनल कांसपिरेसी जैसे अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था. इस के 163 पेज के फैसले में, एडिशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज प्रदीप कुमार मिश्रा की कोर्ट ने ‘रेयरेस्ट औफ रेयर’ सिद्धांत लागू किया.
कोर्ट ने कहा कि कई जिलों में इस तरह के उत्पीडऩ का बड़ा पैमाना, दोषियों की बहुत ज्यादा नैतिक गिरावट के साथ मिल कर, इसे इतना असाधारण और घिनौना अपराध बनाता है कि इस में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है, जिस से न्याय के मकसद को पूरा करने के लिए आखिरी न्यायिक रोकथाम की जरूरत है. इस फैसले में उत्तर प्रदेश सरकार को 33 पीडि़तों में से हर एक को 10 लाख रुपए का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया गया. साथ ही दंपति के घर से जब्त किया गया कैश 8 लाख रुपया भी पीडि़तों में बराबर बांटने के लिए कहा गया.
आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत दोषी हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं. वहां से राहत नहीं मिलने की स्थिति में वे सुप्रीम कोर्ट और उस के बाद राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर कर सकते हैं. इस बारे में जानकार वकील का कहना है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए दंपति को उच्च अदालतों से राहत की संभावना कम है. भारतीय न्याय व्यवस्था में मृत्युदंड के मामलों की स्वचालित पुष्टि उच्च न्यायालय द्वारा की जाती है, जिस के बाद ही सजा अंतिम रूप लेती है.
यह भी बताया जाता है कि जेई राम भवन अपनी अवैध कमाई को जमीन खरीद में निवेश करने की योजना बना चुका था, किंतु वह इस में सफल नहीं हो पाया. सीबीआई जांच में पता चला कि उस ने वर्ष 2018 में 21 बीघा जमीन खरीदने की कोशिश की थी. राम भवन ने शोभा सिंह का पुरवा स्थित एसडीएम कालोनी के पास यह जमीन खरीदने की योजना बनाई थी. इस सौदे के लिए उस ने 2 अन्य इंजीनियरों को भी अपने साथ शामिल कर लिया था. जमीन की शुरुआती मांग 18 करोड़ रुपए थी, जिस पर राम भवन ने लगभग 8 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी.
एक साल तक चली जमीन की सौदेबाजी के दौरान वर्ष 2019 में भूस्वामी ने 14 करोड़ रुपए की कीमत तय की थी, किंतु जेई राम भवन 10 करोड़ रुपए से अधिक देने को तैयार नहीं हुआ, जिस के कारण यह सौदा नहीं हो सका. इसी बीच रामभवन की अवैध गतिविधि से धन कमाने का पता चला, जिसे जमीन में निवेश कर वैध बनाना चाहता था. सीबीआई ने उस की गिरफ्तारी के बाद जमीन के सौदे से जुड़े लोगों से गहन पूछताछ की थी. जांच एजेंसी ने उस की संभावित अवैध आय के स्रोतों की भी पड़ताल की.
स्थानीय लोगों के अनुसार, तीनों साझेदार इस जमीन पर अपने लिए अलगअलग आवास भी बनवाना चाहते थे. सौदेबाजी के दौरान कीमत को ले कर भूस्वामी और जेई के बीच मतभेद बना रहा. अंतत: 10 करोड़ रुपए से अधिक न देने की जिद के कारण सौदा रद्द हो गया. सिंचाई विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी ने बताया कि पुराने अफसरों ने कई बार राम भवन के काम में लापरवाही की शिकायत की, लेकिन उस पर कोई काररवाई नहीं हुई, क्योंकि राम भवन की सत्ता के गलियारों के साथ ही विभाग में तगड़ी पैठ थी. कभीकभी तो वह सप्ताहसप्ताह भर दफ्तर से गायब रहता था.
उस की पैठ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी के 16 दिन बाद 18 नवंबर, 2020 को उसे निलंबित किया गया. उस का निलंबन उस समय के जिलाधिकारी शेषमणि त्रिपाठी व सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. निरंजन के आदेश पर हुआ था. यह मामला डिजिटल प्लेटफार्म के दुरुपयोग और डार्क वेब के जरिए संचालित अपराधों की गंभीरता को उजागर करता है. जांच एजेंसियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े ऐसे मामलों में तकनीकी निगरानी और अंतरराज्यीय समन्वय बेहद महत्त्वपूर्ण है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बाल यौन शोषण और औनलाइन आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ कड़ा संदेश है. अदालत ने न केवल दोषियों को कठोर सजा दी, बल्कि पीडि़त बच्चों के पुनर्वास और क्षतिपूर्ति पर भी विशेष ध्यान दिया.
दिल्ली का इंजीनियर भी बेचता था पोर्न वीडियो
जेई समेत उस की पत्नी को यौनाचार और पोर्न वीडियो बेचने के जुर्म में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद सीबीआई इस तरह के मामले की तहकीकात काफी सक्रियता से करने लगी है. इस सिलसिले में दिल्ली के इंजीनियर मोहम्मद आकिब भी निशाने पर आ चुका है. आकिब पर भी बच्चों के यौन शोषण के वीडियो विदेशों में बेचने का आरोप है. इस संबंध में सीबीआई ने गूगल के अधिकारियों समेत 8 लोगों के बयान दर्ज करने की तैयारी की है. जल्द ही आकिब भी सीबीआई के शिकंजे में कसा जा सकता है.
दरअसल, मासूम लड़कों के साथ यौन शोषण और वीडियो बना कर बेचने के मामले में जेई राम भवन और उस की पत्नी दुर्गावती के साथ तीसरा आरोपी आकिब ही है. वह दंपति से वीडियो मंगवाता था और फिर उन्हें विदेशों को भेज कर मोटी कमाई करता था. इस से होने वाली कमाई का कुछ हिस्सा राम भवन को भी देता था. सीबीआई के लोक अभियोजक दारा सिंह मीणा के अनुसार सालों से चल रहे इस अपराध में आकिब भी पोर्न बाजार का एक शातिर खिलाड़ी है.
उस का दोष गूगल के अधिकारियों समेत एयरटेल कंपनी व एम्स के डाक्टरों से चिकित्सीय परीक्षण की रिपोर्ट समेज कुल 8 लोगों से पूछताछ के बाद ही तय हो पाएगा. मोहम्मद आकिब दिल्ली का रहने वाला पेशे से इंजीनियर है. उस के खिलाफ की गई जांच में पाया गया है कि वह जेई और उस की पत्नी से ईमेल के जरिए अश्लील सामग्री मंगवाता था. उस के बाद विभिन्न देशों में इसे भेज कर मोटी कमाई करता था. UP Crime






