Corruption :  अलगअलग प्रदेशों में स्थित लोक सेवा आयोग प्रशासनिक पदों के अधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करता है. आयोग की इस चयन प्रक्रिया पर सभी को पूरा विश्वास रहता है, लेकिन छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी और अन्य लोगों ने करोड़ों रुपए ले कर अपने फेमिली वालों, रिश्तेदारों व अन्य लोगों को जिस तरह डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी आदि उच्च पदों पर बैठाया, उस की सीबीआई जांच में पोल खुल गई. आखिर कैसे हुआ यह पूरा घोटाला?

प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना देखने वाले नौजवान सालोंसाल पीएससी परीक्षा की तैयारी करते हैं, मगर अधिकांश के सपनों की उड़ान पूरी नहीं हो पाती, क्योंकि सरकारी तंत्र और भ्रष्ट अधिकारी अपने चहेतों को मनमाफिक पदों पर भरती कराने के लिए योग्य उम्मीदवारों के हकों पर कुठाराघात करते हैं. छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की भरती परीक्षा में भी हुई धांधली ने परीक्षा लेने वाले तंत्र की पोल खोल कर रख दी है.

वी. चंद्राकर की छोटी बहन भी सीजीपीएससी की तैयारी कर रही थी. उस ने  डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना देखा था. 2021-22 में परीक्षा में पास होने के लिए वह एड़ीचोटी का जोर लगा रही थी. एक दिन उस के फूफाजी ने फोन करते हुए कहा, ”बेटा, तुम्हारी पीएससी परीक्षा की तैयारी कैसी चल रही है?’’

”फूफाजी, तैयारी तो हर बार अच्छी करती हूं, मगर सिलेक्ट नहीं हो पा रही हूं.’’

”वैसे मैं ने तुम्हें पास कराने का जुगाड़ कर लिया है.’’

”क्या कह रहे हो फूफाजी, आप को मेरी बहुत फिक्र रहती है.’’

”हां बेटा, रायपुर में मेरे एक परिचित हैं, जिन की बड़े अधिकारियों और नेताओं तक पहुंच है. पापाजी से कहना कि वह मेरे साथ उन से मिलने रायपुर आ जाएं.’’

इस के बाद वी. चंद्राकर अपने बहनोई  के साथ उस शख्स से मिलने पहुंच गए. दोनों की उस शख्स से मुलाकात रायपुर के बोरिया कलां इलाके में उन के पेट्रोल पंप पर हुई.

उन परिचित के साथ उत्कर्ष चंद्राकर भी था. बातचीत के दौरान उत्कर्ष ने कहा, ”उस के मौसा के.के. चंद्रवंशी अभी सीएम के ओएसडी हैं. साथ में चेतन बोघरिया भी मंत्रालय में ओएसडी हैं. दोनों की पीएससी के चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी से खूब छनती है. ये लोग चाहें तो किसी को भी परीक्षा पास करा सकते हैं.’’

वी. चंद्राकर को मालूम था कि सोनवानी पहले सीएम हाउस में थे और वर्तमान में लोक सेवा आयोग के चेयरमैन हैं तो उन्हें उत्कर्ष की बातों पर यकीन हो गया. वी. चंद्राकर ने उत्कर्ष से पूछा, ”परीक्षा पास करवाने में कितना खर्च आएगा, यह तो बताइए?’’

”करीब 50 से 60 लाख रुपए का खर्च आएगा, बड़े अधिकारियों को सेट करना पड़ेगा.’’ उत्कर्ष बोला.

”मगर इतना खर्च करना हमारे वश में नहीं है.’’ दोटूक मना करते हुए वी. चंद्राकर ने कहा.

”खर्च कम करने का भी रास्ता निकल आएगा, अगर आप कुछ और आवेदकों को ले आओगे तो तुम्हारा काम फ्री में हो सकता है.’’

उत्कर्ष की यह सलाह उन्हें ठीक लगी और उन्होंने पीएससी की तैयारी कर रहे रितेश चंद्राकर, लोकेश चंद्राकर, समीर चंद्राकर, माधुरी साहू, प्रवीण कुमार प्रसाद, सत्येंद्र सिंह ठाकुर, पुलकित साहू और भारती वर्मा को भी परीक्षा पास कराने के लिए रुपए देने के लिए राजी कर लिया. योजना के अनुसार सभी लोगों से पैसा जुटा कर उत्कर्ष को दे दिए. प्रीलिम्स परीक्षा से पहले फोन कर बताया गया कि सभी उम्मीदवारों को डीडी नगर स्थित सिद्धि विनायक पैलेस भेजना है. जब सभी उम्मीदवार वहां पहुंचे तो उत्कर्ष उन्हें एक हौल में ले गया.

पूरे मामले में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी 

प्रीलिम्स परीक्षा की प्रिंटेड कौपी अभ्यर्थियों को दे दी. उत्कर्ष पर भरोसा जताते हुए सभी ने उन प्रश्नों की तैयारी की और जब प्री का रिजल्ट आया तो सभी उस में पास हो गए. इसी तरह मेंस एग्जाम भी हो गया और  11 मई, 2023 को नतीजे भी घोषित हो गए. परीक्षा के नतीजे देखने के बाद जो नाम चयन सूची में सामने आए, उन में से ज्यादातर चयनित उम्मीदवार हाई प्रोफाइल परिवारों से ही संबंधित थे.

चयन प्रक्रिया में शामिल कई अभ्यर्थियों ने अंतिम मेरिट सूची में जगह बनाई, लेकिन रिजल्ट जारी होने के बाद परीक्षा में धांधली और पीएससी के चेयरमैन समेत कई पदाधिकारियों व नेताओं के रिश्तेदारों का चयन होने के बाद मामला विवादों के घेरे में आ गया.

सीबीआई जांच शुरू

कुल डेढ़ दरजन चयनित नामों को ले कर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. चयनित उम्मीदवारों में पीएससी चेयरमैन के अलावा उद्योगपति, कांग्रेस नेताओं के परिवारों से जुड़े लोग शामिल थे. छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री और भाजपा के सीनियर नेता ननकी राम कंवर ने भरती घोटाले को उजागर करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की, जिस में उन्होंने ऐसे अधिकारी और नेताओं के रिश्तेदारों की सूची सौंपी, जिस में उन के रिश्तेदारों का चयन कर उन्हें डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी सहित अन्य पद दिए गए.

हाईकोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान भरती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जांच के आदेश दिए. इस के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जांच कराई. फिर बाद में सीबीआई जांच की घोषणा की. सीबीआई जांच के चलते नियुक्ति आदेश रोक दिए गए. नियुक्ति रोके जाने का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर हुआ, जिन का चयन पूरी तरह योग्यता के आधार पर हुआ था, साथ ही उन के खिलाफ कोई काररवाई भी नहीं की गई. इस पर भरती से वंचित 60 से अधिक अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की.

उन का कहना था कि योग्यता के बलबूते  पर उन का चयन हुआ है, ऐसे में उन्हें नियुक्ति नहीं देना अन्याय और असंवैधानिक है. हाईकोर्ट के जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि कुछ अभ्यर्थियों के खिलाफ आरोप हैं, जबकि बाकी के खिलाफ ऐसा कोई आरोप नहीं है, ऐसे में पूरी चयन सूची को दूषित मान कर सभी की नियुक्ति रोकना न केवल असंवैधानिक है बल्कि अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन भी है.

जस्टिस ने कहा कि इस तरह से बेदाग व योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता. हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि नियुक्तियां सीबीआई जांच और हाईकोर्ट के फैसले के अधीन होंगी. अगर भविष्य में कोई विपरीत तथ्य सामने आता है तो सरकार सेवा समाप्त कर सकती है. राज्य सरकार ने कोर्ट में तर्क दिया कि चयन प्रक्रिया में व्यापक अनियमितता बरती गई है और अभी सीबीआई की जांच चल रही है, जिस में और भी गड़बड़ी सामने आने की आशंका है, इसलिए नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए जा सकते.

कोर्ट ने यह तर्क अस्वीकार करते हुए कहा कि जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ कोई शिकायत या जांच नहीं है, उन के भविष्य से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता. पीएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि आयोग का कार्य केवल चयन सूची जारी करने तक सीमित है, जबकि नियुक्ति आदेश जारी करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है. हाईकोर्ट ने 2 मई, 2025 को सुनवाई पूरी होने के बाद इस केस में फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस में 29 जुलाई को फैसला देते हुए आदेश जारी किया गया.

बंजरग पवार ऐंड इस्पात के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल सहित 12 आरोपी जेल में बंद

लंबी जांच और जद्ïदोजहद के बीच आखिरकार जब 3 जनवरी, 2026 को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग भरती घोटाला मामले में करीब 400 पन्नों की फाइनल चार्जशीट दाखिल की तो एक बार फिर से पूरे छत्तीसगढ़ में इस मामले की गूंज सुनाई देनी लगी. 2021 की भरती परीक्षा के इस हाईप्रोफाइल मामले में सीबीआई ने कुल 29 लोगों को आरोपी बनाया.

तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करती विपक्षी राजनीतिक पार्टीयां

अपनी चार्जशीट में सीबीआई ने एक कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर को भी आरोपी बनाया है. इस कोचिंग संचालक ने महासमुंद जिले के बारनवापारा इलाके के एक होटल में परीक्षा में सम्मिलित होने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही तैयारी करवाई थी. खास बात यह है कि इस कोचिंग संचालक के पास पीएससी 2021 का प्रश्नपत्र पहले से ही पहुंच गया था, उसी के आधार पर अभ्यर्थियों को ‘टारगेटेड तैयारी’ कराई गई और बाद में यही अभ्यर्थी परीक्षा में चयनित भी हो गए.

जम कर हुई धांधली

इस से पहले जून, 2025 में भी सीबीआई ने 13 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था, जिस में से 12 आरोपी जेल में बंद हैं, जबकि उत्कर्ष चंद्राकर नाम का व्यक्ति फरार हो गया था, जिस की भूमिका परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी कराने की बताई गई है. इस समय पूरे मामले में तत्कालीन छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, बजरंग पावर ऐंड इस्पात के तत्कालीन निदेशक श्रवण कुमार गोयल, उन के बेटे शशांक गोयल (पीएससी चयनित), बहू भूमिका कटियार साहिल सोनवानी सहित अन्य लोग जेल में बंद हैं.

सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, उद्योगपति श्रवण गोयल के बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार को फरजी तरीके से डिप्टी कलेक्टर बनाया गया. प्रभावशाली कारोबारी प्रकाश गोयल के बेटे और बहू का भी चयन हुआ. सीबीआई ने इन सभी चयनित उम्मीदवारों को आरोपी बनाया है. सीबीआई की जांच में सामने आया कि छत्तीसगढ़ पीएससी 2021 के टौप-20 चयनित अभ्यर्थियों में से 13 से ज्यादा किसी न किसी अधिकारी, नेता या प्रभावशाली कारोबारी के बेटे, बहू या रिश्तेदार थे.

इसी आधार पर चयन सूची को चुनौती देते हुए कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिस के बाद सरकार ने पूरे मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा था. सीबीआई ने चार्जशीट में स्पष्ट किया है कि उस समय की परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक ने प्रश्नपत्र लीक कराने में बड़ी भूमिका निभाई थी.

पीएससी घोटाला

आरती वासनिक और टामन सिंह सोनवानी ने एकेडी प्रिंटर्स प्राइवेट लिमिटेड के संचालक अरुण कुमार द्विवेदी से मुलाकात कर पीएससी परीक्षा के पेपर प्रिंट कराने का करार किया और यहीं से पेपर के सेट ले कर लीक किए गए. सीबीआई को पेपर लीक से ले कर चयन प्रक्रिया तक आंतरिक मिलीभगत के जो सबूत मिले हैं, उन में आरती की भूमिका संदेहास्पद है. फाइनल चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद मामले में जल्द ही ट्रायल शुरू होने की संभावना है.

परीक्षा प्रक्रियां में गड़बड़ी कराने का आरोपी उत्कर्ष चंद्राकार कानून की गिरफ्त में नहीं आया

भ्रष्टाचार का पूरा मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भरती प्रक्रियाओं से जुड़ा है. आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया. इस दौरान योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर अपने नजदीकी लोगों को पद दिलवाने का खेल हुआ. प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी. जांच एजेंसी ने छापेमारी में कई दस्तावेज और आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए थे.

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षा 2021 में 171 पदों के लिए भरती परीक्षा आयोजित की गई. प्री-एग्जाम 13 फरवरी, 2022 को कराया गया. इस में 2,565 अभ्यर्थी पास हुए थे. इस के बाद 26, 27, 28 और 29 मई 2022 को हुई मेंस परीक्षा में 509 अभ्यर्थी पास हुए. इंटरव्यू के बाद 11 मई, 2023 को 170 अभ्यर्थियों के सिलेक्शन की लिस्ट जारी हुई थी. सीबीआई की जांच में यह बात साबित हुई है कि पीएससी के चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी ने परीक्षा के परचे अपने घर पर साहिल, नीतेश, उस की पत्नी निशा कोसले और दीपा आडिल को उपलब्ध कराए थे.

श्रवण गोयल के शशांक गोयल और बहु भूमिका कटियार को जेल में जाना पड़ा, सीबाआई चार्जशीट के मुताबिक इन्हें फरजी तरीके से डिप्टी कलक्टर बनाया गया था 

इस में तत्कालीन चेयरमैन सोनवानी के 5 रिश्तेदार बेटे नीतेश और बहू निशा कोसले का डिप्टी कलेक्टर, भाई की बहू दीपा अगजले का जिला आबकारी अधिकारी, बहन की बेटी सुनीता जोशी का श्रम अधिकारी एवं बड़े भाई के बेटे साहिल सोनवानी का चयन डीएसपी के पद पर हुआ था. इस के बाद उपपरीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने लीक हुआ पेपर बजरंग पावर ऐंड इस्पात कंपनी के डायरेक्टर श्रवण गोयल को सौंपा. श्रवण गोयल के बेटे शशांक और बहू भूमिका ने इसी लीक पेपर से तैयारी की और दोनों डिप्टी कलेक्टर बन गए.

छत्तीसगढ़ पीएससी ने परीक्षा के प्रश्नपत्र छापने का काम कोलकाता की एक प्रिंटिंग कंपनी को दिया था. जनवरी 2021 में कंपनी का कर्मचारी महेश दास 7 सेट प्रश्नपत्र ले कर रायपुर आया. उस ने ये सभी परचे आरती वासनिक को सौंपे. आरती ये परचे अपने घर ले गई, जहां टामन सिंह और ललित के साथ मिल कर शील्ड खोल कर उन की कौपी की गई. इस के बाद पर्चों को दोबारा सील कर प्रिंटिंग के लिए वापस भेज दिया गया.

उत्कर्ष ने लिखी स्क्रिप्ट

2021-22 की परीक्षा में पास कराने के लिए उत्कर्ष चंद्राकर नाम के शख्स ने अपने मौसा (तत्कालीन ओएसडी) के.के. चंद्रवंशी और ओएसडी चेतन बोघरिया के रसूख का हवाला दे कर पीएससी परीक्षा के पेपर देने के नाम पर 50 से 60 लाख रुपए की मांग की थी.

13 फरवरी, 2022 को प्रीलिम्स एग्जाम होना था. डील पक्की होने के बाद एग्जाम से ठीक एक दिन पहले 12 फरवरी, 2022 को रायपुर के सिद्धिविनायक मैरिज पैलेस में रितेश चंद्राकर, लोकेश चंद्राकर, समीर चंद्राकर, माधुरी साहू, प्रवीण कुमार प्रसाद, सत्येंद्र सिंह ठाकुर, पुलकित साहू और भारती वर्मा को प्रिंटेड प्रश्नपत्र रटवाए गए, जिस के बाद इन सभी का चयन प्री एग्जाम में हो गया.

इस के बाद मेंस परीक्षा के लिए भ्रष्टाचार का यह खेल बारनवापारा के एक रिसौर्ट में पहुंचा, जहां कड़े पहरे के बीच फरजी नाम दर्ज करवा कर छात्रों को ठहराया गया था. इस दल में रितेश, लोकेश, समीर, माधुरी, प्रवीण, सत्येंद्र, पुलकित, भारती के साथसाथ ऋचा कौर, ज्योति सूर्यवंशी, दिव्यानी तिवारी, योगेश देवांगन, कृति सिंह, मनीष, निकिता, प्रतीक, विनोद सिंह, निवेदिता राजपूत,

शाश्वत सोनी, कवीश सिन्हा, सुषमा अग्रवाल, अर्चना, पूजा, भवानी पैंकरा, शशांक मिश्रा, निधि, पे्रमेंद्र चंद्राकर, प्रकाश चंद्राकर  शामिल थे. पेपर हल करवाने के लिए कोचिंग सेंटर के धर्मेंद्र साहू और परितोष जैसे शिक्षकों को भी वहां बुलाया गया था. सीबीआई की चार्जशीट ने स्पष्ट किया है कि कैसे चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी ने अपने बेटे नितेश सोनवानी, भतीजे साहिल सोनवानी, भांजी सुनीता जोशी और बहुओं निशा कोसले व दीपा आदिल का चयन सुनिश्चित किया.

इसी तरह सचिव जीवन किशोर ध्रुव के बेटे सुमित धु्रव, राज्यपाल के सचिव के बच्चे नेहा व निखिल खलखो और कांग्रेस नेताओं के करीबी प्रज्ञा नायक, प्रखर नायक, अनन्या अग्रवाल, शशांक गोयल व भूमिका कटियार का चयन भी धांधली के घेरे में है.

कोर्ट में खोले राज

सीबीआई को जांच और पूछताछ में वी. चंद्राकर नाम के व्यक्ति ने अहम सबूत उपलब्ध कराए. इसी वजह से सीबीआई ने उसे सरकारी गवाह बना लिया. सरकारी गवाह वी. चंद्राकर ने अदालत में बयान देते हुए बताया कि उस की छोटी बहन भी सीजीपीएससी की तैयारी कर रही थी.

वर्ष 2021-22 में एक रिश्तेदार के माध्यम से रायपुर के बोरियाकला स्थित पेट्रोल पंप पर उस की मुलाकात उत्कर्ष चंद्राकर से हुई थी. उत्कर्ष ने खुद को प्रभावशाली अधिकारियों से जुड़ा बताते हुए परीक्षा पास कराने के लिए 50 से 60 लाख रुपए की मांग की. इस के बाद कई अभ्यर्थियों को जोड़ कर राशि जुटाई गई और उत्कर्ष को दी गई. प्री परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को डीडी नगर स्थित सिद्धि विनायक पैलेस ले जाया गया, जहां उन्हें प्री परीक्षा की प्रिंटेड कौपी दी गई थी. प्री का परिणाम आने पर सभी अभ्यर्थी सफल हो गए, जिस से भरोसा और बढ़ गया.

मेंस परीक्षा के लिए भी उत्कर्ष ने अतिरिक्त रकम की मांग की. नवापारा स्थित एक रिसौर्ट में ठहराने और बस की व्यवस्था कराई गई, लेकिन बाद में और पैसे नहीं देने पर सभी अभ्यर्थी मेंस परीक्षा में असफल हो गए. जांच में पहले यह बात भी सामने आई कि टामन सिंह सोनवानी की पत्नी ग्रामीण विकास समिति (जीवीएस) नाम का एनजीओ चलाती थी. पीएससी के सहायक परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर संस्था में कोषाध्यक्ष के रूप में जुड़े हुए थे.

इसी एनजीओ के माध्यम से बजरंग पावर से 50 लाख रुपए की वसूली की गई थी. अब जांच में कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है. सीबीआई और सरकारी गवाह के बयान के अनुसार, प्री परीक्षा पास कराने के बाद मेंस परीक्षा के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर उत्कर्ष ने प्रत्येक अभ्यर्थी से 5 से 10 लाख रुपए की मांग की थी. पूरक आरोपपत्र में उल्लेख है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 16 फरवरी, 2024 और 10 अप्रैल, 2024 की अधिसूचनाओं के माध्यम से राज्य सेवा परीक्षा 2021 की भरती प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं की जांच सीबीआई को सौंपी थी.

जांच के दौरान यह आरोप भी सामने आए कि पीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सोनवानी और तत्कालीन सचिव जीवन किशोर धु्रव ने वर्ष 2020 से 2022 के बीच अपने पदों का दुरुपयोग किया और अपने बेटों, बेटियों तथा रिश्तेदारों का चयन सुनिश्चित कराया.

एनजीओ से खेला बड़ा खेल

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी की पत्नी के एनजीओ के जरिए भरती परीक्षा में जम कर खेल हुआ. रायपुर के जीजामगांव में ग्रामीण विकास समिति (जीवीएस) नाम का जो एनजीओ संचालित है, उस की चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी की पत्नी डा. पद्मिनी सिंह सोनवानी है. वहीं, वाइस प्रेसीडेंट मोतीलाल शर्मा, सचिव अनिल कुमार सोनवानी, संयुक्त सचिव अखिलेश बारिक, कोषाध्यक्ष ललित गणवीर और सदस्यों में मनीष कुर्रे और नितेश सोनवानी शामिल हैं.

ये हैं टामन सिंह सोनवानी की पत्नी डा. पद्मिनी सिंह सोनवानी जिन के एनजीओ को मिले 45 लाख

पीएससी 2021 में इसी नितेश का चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ था. वह सोनवानी की पत्नी के एनजीओ में सदस्य के रूप में भी काम कर रहा था. इस के साथ ही ललित गणवीर भी कोषाध्यक्ष की भूमिका में रहा है. सीबीआई के मुताबिक, इस एनजीओ के बैंक खाते में उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल ने अपने बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार को डिप्टी कलेक्टर बनाने के लिए 45 लाख रुपए भुगतान किया था. गोयल ने 2 किस्तों में 20 लाख और 25 लाख रुपए जमा किए थे.

इन्हीं पैसों की बदौलत सोनवानी ने अपने पैतृक गांव जीजामगांव में शिक्षण संस्थान बनवाया है. ग्रामीण विकास समिति, 15 नवंबर, 2002 को पंजीकृत हुई थी, जिस का पंजीकरण नंबर पी-1643 सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1973 के तहत था. सीबीआई जांच में पता चला कि टामन के भाई अनिल सोनवानी एनजीओ के सचिव की भूमिका में रहे. उन्होंने उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल से मुलाकात की थी और ललित गणवीर द्वारा प्रदान किए गए अपने हस्ताक्षर के तहत 8 नवंबर, 2021 को रुपए के अनुदान के अनुरोध के साथ एक आवेदन प्रस्तुत किया था.

उद्योगपति गोयल ने ग्रामीण विकास समिति जीजामगांव द्वारा संचालित कला महाविद्यालय के निर्माण व विस्तार के लिए कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) योजना के तहत 50 लाख रुपए स्वीकृत कर दिए. इस के लिए टामन और श्रवण गोयल के बीच पहले ही बात तय हो गई थी.

सीएसआर योजना के तहत राशि स्वीकृत करने के लिए सीएसआर समिति की बैठक पहली जनवरी, 2022 को वर्चुअली आयोजित की गई. सीएसआर समिति के सदस्य श्रवण कुमार गोयल अच्छी तरह जानते थे कि कला महाविद्यालय के भवन के निर्माण या विस्तार के लिए सीएसआर फंड मंजूर नहीं किया जा सकता है, फिर भी नियमकानून की अनदेखी कर रुपए की स्वीकृति जारी कर दी. छत्तीसगढ़ पीएससी की मुख्य परीक्षा 26 से 29 जुलाई, 2022 के बीच तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में आयोजित की गई. आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सोनवानी ने कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर के साथ मिल कर 35 चयनित अभ्यर्थियों को बारनवापारा के एक रिसौर्ट में ठहराया.

मीडियाकर्मीयों से बात करते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता ननकी राम कंवर

यहां न केवल विशेष कोचिंग दी गई, बल्कि प्रश्नपत्र लीक करने और अंतिम चयन सूची तैयार करने की योजना भी बनाई गई. चार्जशीट में दावा किया गया है कि 11 से 24 मई, 2022 के बीच 35 अभ्यर्थियों को पर्यटक बता कर रिसौर्ट में ठहराया गया था. ये सभी अभ्यर्थी कारोबारी, नेताओं और प्रभावशाली परिवारों से जुड़े बताए गए हैं. इन की बुकिंग राहुल हरपाल के माध्यम से कराई गई थी.

सीबीआई जांच में सामने आया है कि अभ्यर्थियों को राज्य सेवा परीक्षा का असली प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया और उन्हें अपनेअपने कमरों में ही प्रश्न हल करने की व्यवस्था की गई. इस के बाद चयन सूची को मनचाहे ढंग से तैयार किया गया. चार्जशीट में उल्लेख है कि परीक्षा में चयन के लिए अलगअलग पदों के लिए भारी रकम तय थी. जांच के अनुसार, डिप्टी कलेक्टर पद के लिए एक करोड़ रुपए तक की डील की गई थी. विकास और उत्कर्ष चंद्राकर द्वारा पीएससी मेंस परीक्षा का प्रश्नपत्र साल्वर को देने की पुष्टि चार्जशीट में की गई है.

योग्य उम्मीदवार अटके

लोकसेवकों को परीक्षा और इंटरव्यू के माध्यम से चयनित करने वाली संस्थाओं में राजनैतिक हस्तक्षेप इस कदर बढा है कि ये संस्थाएं भ्रष्टाचार का अखाड़ा बन कर रह गई हैं. छत्तीसगढ़ पीएससी 2021 की परीक्षा घोटालों के कारण विवादों में रही, लेकिन इस में चयनित योग्य और बेदाग अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट ने भले ही बड़ी राहत दी हो, मगर उन की नियुक्तियां अभी तक अटकी पड़ी हैं. हाईकोर्ट ने कहा है कि सीबीआई जांच में अब तक जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ चार्जशीट पेश नहीं की है, उन्हें 60 दिनों के भीतर नियुक्ति दी जाए.

दरअसल, परीक्षा में चयन के बाद भरती से वंचित 60 से अधिक अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, इस पर कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि सभी उम्मीदवारों की जौइनिंग सीबीआई जांच और हाईकोर्ट के फैसले के अधीन रहेगी. छत्तीसगढ़ पीएससी ने 26 नवंबर, 2021 को 171 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था, जिस में डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी, लेखाधिकारी, जेल अधीक्षक, नायब तहसीलदार समेत 20 सेवाओं में सीधी भरती होनी थी. 11 मई, 2023 को नतीजे घोषित किए गए.

चयन प्रक्रिया में शामिल कई अभ्यर्थियों ने अंतिम मेरिट सूची में जगह बनाई. लेकिन रिजल्ट जारी होने के बाद परीक्षा में धांधली और पीएससी के अध्यक्ष समेत कई पदाधिकारियों व नेताओं के रिश्तेदारों के चयन होने के बाद मामला विवादों में आ गया. Social Story

कथा लिखे जाने तक कोचिंग सेंटर का संचालक उत्कर्ष चंद्राकर सीबीआई की गिरफ्त से बाहर था.

 

 

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