Rajasthan News: राजस्थान के निलंबित डीएसपी रितेश पटेल ने अपनी नौकरी फिर से बहाल कराने के लिए कारोबारी दोस्त अनिंदो बनर्जी से मोटी रकम कर्ज के रूप में ली. इस के बाद वह इस रकम को न सिर्फ डकार गया, बल्कि दोस्त बनर्जी को फंसाने के लिए झूठी एफआईआर का पूरा जाल बुन दिया. फिर अपने ही बुने जाल में पुलिस औफिसर रितेश ऐसा फंसा कि उस के फरजीवाड़े की परतें उतरती चली गईं. आप भी पढ़ें उस की वरदी के रौब की पूरी कहानी.
रात के 11 बजने वाले थे. रियल एस्टेट कारोबारी अनिंदो बनर्जी सोने की तैयारी कर चुके थे. अपनी दिनचर्या के मुताबिक वह हमेशा अपना मोबाइल रात को चार्ज करने के लिए लगा दिया करते थे. वह अभी मोबाइल चार्जर को प्लग में लगा कर मुड़े ही थे कि फोन पर एक मैसेज आने की टोन सुनाई दी. अमूमन इस तरह के मैसेज को वह नजरंदाज कर दिया करते थे, किंतु उस वक्त उन के मन में न जाने क्या आया कि उन्होंने मोबाइल को हाथ में उठा लिया.
उन्होंने देखा कि स्क्रीन पर एक नया मैसेज झलक रहा है. उस के शुरुआती शब्दों ने उन्हें चौंका दिया. लिखा था एफआईआर…उस के बाद के शब्द अधूरे थे. बनर्जी को उसे पढऩे की जिज्ञासा हुई. अचानक मुंह से निकल पड़ा, ”एफआईआर! वाट्सऐप मैसेज!’’
उसे आगे पढऩे के लिए वह स्क्रीन को टच करने ही वाले थे कि मन में खयाल आया… ‘कहीं ये साइबर क्राइम का लिंक तो नहीं!’ इसी के साथ उन्होंने अंगुली हटा ली. सोच में पड़ गए…’जरूर किसी ने उन्हें डराने की कोशिश की है. वैसे यह मैसेज है, इस में लिंक नीचे होगा.’
यह सोचते हुए बनर्जी ने उस मैसेज पर टच कर दिया. अगले सेकेंड में स्क्रीन पर 5-6 लाइनों का मैसेज लिखा था. उस के साथ पीडीएफ फाइल अटैच थी. पीडीएफ डाउनलोड करने पर मैसेज की पूरी जानकारी मिलती. मामला पता चलता. हालांकि कुछ पंक्तियों में लिखे मैसेज से इतना तो पता चल गया था कि वह मैसेज थाने से भेजा गया है, जिस में उस का नाम लिखा था.
उन्होंने तुरंत पीडीएफ डाउनलोड कर ली. वह एफआईआर का पेज था, जो उन के खिलाफ था. उन्हें एक मामले में आरोपी बनाया गया था. वह समझ नहीं पा रहे थे कि उन के खिलाफ एफआईआर किस ने लिखवाई है? उस में लिखे नाम वाले को वह जानतेपहचानते तक नहीं. उन की किसी से दुश्मनी भी नहीं है. इस तरह की कई बातें उन के दिमाग में आने लगीं. वह बेचैन हो गए. आंखों से नींद जा चुकी थी.
काफी समय तक उस एफआईआर के बारे में सोचते रहे. मन उधड़ेबुन करता रहा…डर भी लग रहा था कि कल न जाने क्या होगा? वह बहुत कुछ समझ नहीं पा रहे थे, फिर मन को मजबूत किया. एक बात गांठ बांध ली कि जब उन्होंने कोई अपराध किया ही नहीं, तब डरना क्यों? बिस्तर पर जा कर उन्होंने सोने के लिए आंखें बंद कर लीं. अगले रोज जब नींद खुली, तब वह बहुत थकाथका महसूस कर रहे थे. सुबह की दिनचर्या में लग गए थे, लेकिन उन के दिमाग में एफआईआर ही घूम रही थी. वह इस बारे में किसी जानकार दोस्त या फिर वकील से बात करना चाहते थे.
मूलरूप से गुजरात के रहने वाले अनिंदो बनर्जी सालों पहले जयपुर आ कर बस गए थे. वह जयपुर की रियल एस्टेट में कारोबार करते थे. वह करोड़पति थे. इस कारण उन की जानपहचान कारोबारियों के अलावा पुलिस के अधिकारियों से भी थी. उन्हीं में एक राजस्थान पुलिस के डीएसपी रितेश पटेल भी थे, जो उन दिनों निलंबित चल रहे थे. उन का निलंबन साल 2024 में बजरी माफिया से सांठगांठ के चलते हुआ था.
दरअसल, रितेश पटेल ने ही अपने प्रिय दोस्त अनिंदो बनर्जी को यह एफआईआर भेजी थी, पिछले कुछ महीने से उन की बनर्जी से अनबन चल रही थी. मामला पैसे के लेनदेन का था. रितेश पटेल भलीभांति जानता था कि अनिंदो बनर्जी करोड़पति हैं. उन के पास पैसे की कमी नहीं है और लाखों रुपए का आनाजाना होता रहता है. रितेश पटेल निलंबित चल रहा था, लेकिन वरदी का रौब नहीं गया था. वह चाहता था कि उस की बहाली फिर से हो जाए. इस के लिए उस ने रिश्वत के तौर पर पैसा खर्च करने की योजना बनाई थी, जिस में लाखोंकरोड़ों रुपए खर्च हो सकते थे.
कर्ज दे कर फंसे अनिंदो
तभी उस को अपने करोड़पति दोस्त अनिंदो बनर्जी का ध्यान आया. उस से कहा, ”बनर्जी, मेरा पद बहाल हो सकता है. इस के लिए मुझे एक करोड़ रुपए चाहिए. यह रकम बड़े पुलिस अधिकारियों को देने पर मैं वापस डीएसपी पद पर बहाल हो जाऊंगा. इस के कुछ दिनों बाद मैं तुम्हें तुम्हारे पैसे वापस दे दूंगा.’’

पुलिस की दीक्षांत परेड में रितेश पटेल
दोस्त ही दोस्त के काम आता है. यह सोच कर अनिंदो बनर्जी ने रितेश को पैसे देने का वादा कर दिया. अनिंदो को पता था कि उन के कारोबार में अकसर पुलिस के सहयोग की जरूरत होती है. हालांकि बनर्जी ने पटेल को एक करोड़ रुपए तो नहीं दिए, लेकिन उसे एकमुश्त 49 लाख रुपए जरूर दे दिए.
वे पैसे बनर्जी ने उसे अलगअलग रूप में दिए. एक खाते में आरटीजीएस कर 24 लाख रुपए, जबकि बाकी के 25 लाख रुपए नकद रितेश को उस के फ्लैट पर जा कर दे दिए. रितेश ने 24 लाख रुपए अपनी साली के खाते में लिए थे. अनिंदो बनर्जी लंबे समय से रितेश को जानते थे. उस पर भरोसा करते थे. रितेश भी उसे जबतब मदद करने के लिए सब से पहले आगे आने वालों में से एक था. इसी आपसी विश्वास का फायदा उठाते हुए रितेश ने खुद के निलंबन को हटवाने और दोबारा सेवा में बहाली के लिए एक करोड़ रुपए की जरूरत बताई थी. साथ ही रकम लौटाने का भरोसा दिलाया था.
रितेश को एक करोड़ नहीं मिलने पर वह मायूस हो गया. उस ने दोबारा बाकी के पैसे मांगे. इस पर बनर्जी ने हाथ खड़े करते हुए कहा, ”मैं एक करोड़ का इंतजाम नहीं कर सकता, मेरे पास जितने थे, वह मैं ने दे दिए हैं.’’
यह कहते हुए बनर्जी ने रितेश से माफी मांग ली. किंतु उस की माफी का असर रितेश पर कुछ नहीं हुआ. उलटे वह उसे धमकाने लगा. पुलिस का रौब दिखाते हुए बोला, ”बनर्जी, देखो कोई बहाना नहीं चलेगा, तुम्हें तो एक करोड़ रुपए देने ही पड़ेंगे. नहीं तो ठीक नहीं होगा.’’
इस धमकी से बनर्जी चौंक गए. हैरानी हुई कि उधार रकम मांगने वाला उन्हें ही धमकी दे रहा है. ऊपर से दोस्ती निभाने की बातें करता है. बनर्जी उस की धमकी और तेवर से समझ गए कि उन्होंने गलत आदमी को पैसे दे दिए हैं. हालांकि बनर्जी रितेश की धमकियों से डरे नहीं, बल्कि उन्होंने भी रितेश को खरीखरी सुना दी. कहीं और से इंतजाम करने को कह दिया. इसी के साथ उन्होंने उस से अपने 49 लाख रुपए भी वापस मांग लिए.
बनर्जी द्वारा रुपए वापस मांगने पर रितेश बौखला गया. वह गुस्से में बोला, ”मैं तुम्हारे पैसे नहीं लौटाने वाला हूं…तुम्हें जो कुछ करना है करो!’’
यानी रितेश ने रकम वापस लौटाने से साफ इनकार कर दिया. रितेश ने न केवल उधार के पैसे वापस करने से मना कर दिया, बल्कि अपने दोस्त बनर्जी को किसी झूठे मुकदमे में फंसाने की योजना बना डाली. इस योजना का अंजाम था बनर्जी के वाट्सऐप पर भेजी गई एफआईआर. बनर्जी उस एफआईआर से थोड़ा विचलित जरूर हुए, किंतु अपनी ईमानदारी पर भरोसा बनाए रखा. दूसरी तरफ रितेश ने बाकी पैसे नहीं देने की स्थिति में उन्हें जेल भिजवाने की धमकी दे डाली. वह रितेश बनर्जी के नौकर जितेंद्र सिंह गुर्जर को भी फोन कर कहने लगा कि वह उस के मालिक को जेल भिजवा कर ही दम लेगा. नौकर ने इस धमकी की बात बनर्जी को बताई, जिस से वह मानसिक परेशानी में आ गए.
उन्होंने अपनी पीड़ा नौकर से बताई, ”जितेंद्र, मैं रितेश को रुपए दे कर फंस गया. पहले पता होता कि यह इतना घटिया आदमी है तो पैसे उधार देने की बात टाल देता. अब क्या करूं, कुछ भी समझ में नहीं आ रहा. मेरा तो दिन का चैन और रातों की नींद उड़ गई है.’’
बनर्जी की परेशानी दिनप्रतिदिन बढ़ती ही जा रही थी. उधर सस्पेंड डीएसपी रितेश की धौंस बढ़ती ही जा रही थी. दिन में 2-3 बार उस के फोन आने लगे थे. हर कौल में एक ही सवाल, ”कब दे रहा है पैसे? मैं आऊं या तू मिलेगा?’’
रितेश ऐसी दबंगई से बातें करने लगा था, जैसे उस ने बनर्जी को उधार दिया हो. बनर्जी उस की धमकी के लहजे से समझ गया था कि रितेश किसी भी हद तक जा सकता है. इस के बावजूद बनर्जी ने 49 लाख रुपए देने के बाद एक रुपया भी नहीं दिया. अनिंदो बनर्जी को एफआईआर भेजने के बाद रितेश उसे धमकाता हुआ बोला, ”बाकी की रकम दे दो, अब भी मामला सुलझ सकता है, अगर बाकी की रकम दे दो. नहीं तो जेल की हवा खाने को तैयार रहो. पैसे दोगे तो मैं मामला रफादफा कर दूंगा.’’
इस धमकी का असर बनर्जी पर नहीं हुआ. उलटे उन्होंने साफ लहजे में कह दिया, ”अब मैं फूटी कौड़ी भी नहीं दूंगा. जब मैं ने कोई क्राइम किया ही नहीं तो मैं क्यों डरूं. जो होगा, मैं देख लूंगा.’’
झूठी थी एफआईआर
इसी के साथ वह थाने गए. एसएचओ को एफआईआर के बारे में बताया. उस की प्रति दिखाई. एफआईआर देखने के बाद एसएचओ चौंक गए. उन्होंने कहा यह फरजी एफआईआर की प्रति है. तुम्हारे नाम कोई एफआईआर दर्ज ही नहीं है. बनर्जी ने रितेश पटेल के बारे में पूरी बात बताई. उन्होंने एसएचओ से विचारविमर्श किया कि उन्हें क्या करना चाहिए? उन्होंने कानूनी सलाह मांगी. वकील से भी कानूनी राय ली. इस के बाद बनर्जी जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल से मिले.

पुलिस ने आरोपी सस्पेंड डीएसपी रितेश कुमार के बैंक खातों सहित उस के रिश्तेदारों के बैंक खातों की भी डिटेल खंगाली, आरोपी की साली के खाते में पीड़ित द्वारा 24 लाख रुपए आरटीजीएस करवाने के सबूत मिल गए.
कमिश्नर ने बनर्जी द्वारा वाट्सऐप पर भेजी गई एफआईआर की कौपी देखी तो वह भी चकित रह गए. उन्हें पूरी बात बताते हुए रितेश पटेल पर काररवाई करने की मांग की. कमिश्नर मित्तल ने बनर्जी की शिकायत पर आगे की काररवाई करते हुए जयपुर (दक्षिण) जिला डीसीपी राजर्षि राज वर्मा को आवश्यक निर्देश दिया. फरजी एफआईआर के जरिए धोखाधड़ी और धमकी मामले में निलंबित आरपीएस अधिकारी रितेश कुमार पटेल के खिलाफ जांच करने को कहा.
इस तरह निलंबित डीएसपी रितेश पटेल के खिलाफ नए सिरे से जांच शुरू हो गई. अनिंदो बनर्जी ने डीसीपी (दक्षिण) राजर्षि राज वर्मा से भी मुलाकात कर उन्हें भी सबूत दिए. डीसीपी वर्मा के कहने पर अनिंदो बनर्जी ने पुलिस थाना महेशनगर, जयपुर जा कर मामला दर्ज करवा दिया. इस तरह से एसएचओ सुरेश कुमार यादव ने 25 अक्तूबर, 2025 को अनिंदो बनर्जी, निवासी स्वेज फार्म, सोडाला, महेशनगर, जयपुर की तरफ से निलंबित डीएसपी रितेश कुमार पटेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली.

आरोपी इरफान खान जिस से रितेश पटेल की फरजी एफआईआर तैयार करने में मदद की थी
मुख्य आरोपी रितेश पटेल को बनाया गया, जो मूलत: बिलाड़ा, जिला जोधपुर का रहने वाला है, लेकिन मौजूदा समय में केसर चौराहा, मुहाना रोड, जयपुर में रह रहा था. रिपोर्ट में रितेश के खिलाफ धोखाधड़ी, जान से मारने की धमकी एवं फरजी एफआईआर भेज कर ब्लैकमेल करने संबंधी बीएनएस की धाराएं लगाई गईं. मामला गंभीर था. आरोप निलंबित पुलिस अधिकारी पर लगा था. इसे देखते हुए राजर्षि राज वर्मा ने एडिशनल डीसीपी ललित शर्मा के सुपरविजन में एसआईटी का गठन किया. टीम में एसीपी सुनील शर्मा, इंसपेक्टर सुरेश कुमार एवं इंसपेक्टर बिशंभर शामिल किए गए. अलगअलग एंगल पर जांच शुरू हुई.
पहले आरोपी रितेश कुमार पटेल के बारे में तहकीकात की गई, जिस से उस के चाल और चरित्र की परतें उतरती चली गईं. पुलिस ने आरोपी के बैंक खातों सहित उस के रिश्तेदारों के बैंक खातों की भी डिटेल खंगाली. आरोपी की साली के खाते में पीडि़त द्वारा 24 लाख रुपए आरटीजीएस करवाने के सबूत मिल गए. फरजी एफआईआर की भी पुष्टि हो गई. आरोपी के मोबाइल डेटा भी खंगाले गए, जिस में रितेश पटेल के पुराने कारनामों का परदाफाश हो गया.
उस के अश्लील मैसेज, फोटो और वीडियो मिले, जो महिलाओं को भेजे गए थे. शायद इन का इस्तेमाल रितेश ने ब्लैकमेल के लिए किया होगा. जांच में पता चला कि इस संबंध में जयपुर के गांधीनगर, जोधपुर के बिलाड़ा व पाली के सोजत थाने में मामले दर्ज हो चुके हैं. जांच में यह भी पता चला कि रितेश की मादक पदार्थ तसकरों और बजरी माफियाओं से मिलीभगत थी. इसी के चलते वर्ष 2024 में गंगापुर, जिला भीलवाड़ा से उस पर काररवाई हुई थी.
पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी रितेश पटेल पर महिला टीचर से दुष्कर्म एवं ब्लैकमेलिंग का भी आरोप लगा था. दुष्कर्म का मामला भी बिलाड़ा थाने में दर्ज था, मगर काररवाई नहीं हुई थी.
शुरू हुई केस की जांच
इस जांच के क्रम में ही रितेश कुमार पटेल को 30 दिसंबर, 2025 को एसआईटी द्वारा पूछताछ के लिए बुलाया गया. गहन पूछताछ हुई. उस के द्वारा फरजी एफआईआर से अनिंदो बनर्जी से 49 लाख रुपए ऐंठने एवं ब्लैकमेल के बारे में पूछताछ की गई. काफी जद्ïदोजहद के बाद उस ने पैसा वसूलने और जेल भिजवाने की धमकी देने का आरोप स्वीकार कर लिया. उसी दिन उस के बयान दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया. अगले रोज 31 दिसंबर, 2025 को महेशनगर थाना पुलिस ने आरोपी रितेश कुमार पटेल को जयपुर कोर्ट में पेश किया. वहां से उसे 3 दिन के रिमांड पर ले लिया गया.

पुलिस विभाग में उस की गिरफ्तारी से हड़कंप मचा था. निलंबित डीएसपी की करतूत से लोग सन्न थे. कानून के रखवाले ने ही कानून को हाथ में लेने की कोशिश की थी. पूछताछ में रितेश ने बताया कि उस ने एसओजी में पहले से दर्ज एक एफआईआर की कौपी के आधार पर फरजी एफआईआर तैयार की थी, जिसे इरफान खान की मदद से एडिट कर शब्दों का मिलान किया था. फरजी एफआईआर को असली दिखाने के लिए एसओजी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के हस्ताक्षर भी कौपी कर एफआईआर पर पेस्ट कर दिए गए थे.
खुली रितेश की हिस्ट्री
इस पर इरफान खान की ब्यावर से 3 जनवरी, 2026 को गिरफ्तारी हो गई. उस ने फरजी एफआईआर बनाने में सहयोग करने का जुर्म कुबूल कर लिया. इसी के साथ पुलिस ने आरोपी रितेश पटेल के कंप्यूटर, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रौनिक उपकरणों को जब्त कर गहन जांच शुरू की. इस के साथ ही सहआरोपी इरफान खान का कंप्यूटर, प्रिंटर एवं मोबाइल जब्त कर जांच की. जांच में पता चला कि रितेश पटेल खुद को आईपीएस अधिकारी बताने के लिए नकली पहचान पत्र रखता था और उस ने कई लोगों को ऐसे जाली कार्ड भी बांटे थे.
आरोपी रितेश पटेल ने एटीएस और एसओजी टीमों के साथ मेघालय जाने के फरजी आदेश भी तैयार किए, ताकि विभाग में अपनी पहुंच और प्रभाव का प्रदर्शन कर सके. आरोपी ने गृह राज्यमंत्री के जाली हस्ताक्षर कर 29 डीएसपी के तबादलों की अनुशंसा सूची भी तैयार कर रखी थी. इस सूची का उपयोग विभागीय अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए किया जाता था. पूछताछ में फरजी खनन पट्टों के आदेश तैयार करने के भी सुराग मिले.
बताया जाता है कि आरोपी पटेल का लंबे समय से विवादों से नाता रहा है. उस के खिलाफ पहले से 6 एफआईआर अलगअलग थानों में दर्ज पाई गईं, किंतु उस की गिरफ्तारी सातवीं एफआईआर में हुई. राजस्थान के जोधपुर जिले के बिलाड़ा का रहने वाला रितेश कुमार पटेल पढ़ाईलिखाई में कुछ खास नहीं था. भाइयों में दूसरे नंबर के रितेश पटेल ने साल 2012 में बीकाम मात्र 49 प्रतिशत अंक ला कर पास किया था.
कम नंबर आने पर टीचर पापा रमेश पटेल नाराज हो गए, किंतु उस का मनोबल कमजोर नहीं होने दिया. इस के बाद उस ने इकोनौमिक्स में एमए थर्ड ग्रेड से पास किया. एमए में मात्र 45 प्रतिशत आए. इस के बाद रितेश प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुट गया. वह पढ़ाई के साथ बिलाड़ा में पटेल कोचिंग पौइंट सेंटर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करवाता था. कई बच्चे कोचिंग करने आते थे. इन में लड़कियां भी थी. बिलाड़ा की सपना (बदला नाम) भी रितेश के पटेल कोचिंग पौइंट सेंटर में साल 2014 में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए आती थी.
सपना के पापा का निधन हो चुका था. वह अपनी मम्मी के साथ रहती थी. रितेश को इस की जानकारी थी. रितेश ने सपना को देखा तो वह उस पर फिदा हो गया. कोचिंग के दौरान रितेश ने सपना का मोबाइल नंबर ले लिया. स्टडी संबंधी मैसेज करने के बहाने वह उस से संपर्क बढ़ाने लगा. रितेश ने सपना को इमोशनल ब्लैकमेल किया कि वह ज्यादा दिन तक जिंदा नहीं रहेगा, क्योंकि उसे लाइलाज बीमारी है. इसी आड़ में घर बुला कर उस ने सपना के साथ दुष्कर्म किया. सपना ने जब विरोध किया तो कहा कि किसी को बताया तो वह आत्महत्या कर लेगा.
इस के बाद सपना की टीचर पद पर सरकारी नौकरी लग गई. सितंबर 2018 में सपना की सगाई हो गई. तब भी रितेश ने दबाव बना कर उसे जोधपुर बुलाया और सपना के साथ दुष्कर्म किया. रितेश पटेल ने 2016 में आरएएस का एग्जाम दिया. 17 अक्तूबर, 2017 को रिजल्ट आया. रितेश ने एग्जाम क्लियर कर लिया. साल 2019 में रितेश पटेल का आरपीएस में चयन हो गया. वह आरपीएस ट्रेनिंग के लिए किशनगढ़, अजमेर चला गया.
ट्रेनिंग के दौरान भी सपना को ब्लैकमेल कर ज्यादती का प्रयास किया. सपना की शादी हो जाने पर उस के पति को अश्लील मैसेज भेजे. पीडि़ता सपना के पति के नाम से अश्लील बातचीत वायरल कर के भी रितेश ने बदनाम करने का प्रयास किया था. सपना ने बिलाड़ा थाने में रितेश पटेल के खिलाफ दुष्कर्म व ब्लैकमेल करने का मुकदमा दर्ज कराया तो उस ने सपना और उस के पति के मोबाइल नंबर दर्शाते हुए बनावटी वाट्सऐप चैट तैयार कर वायरल कर दिया.
उसे बदनाम करने के लिए यह चैट रितेश ने सपना के पति के विभाग व सपना के विभाग के अधिकारियों तक भी भेजा. इस जिल्लत भरी जिंदगी से परेशान हो कर सपना ने रितेश पटेल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था. सपना की एफआईआर पर जांच अधिकारी ने भी जुर्म प्रमाणित माना. पीडि़ता ने डीजीपी से ले कर मुख्यमंत्री तक इस बारे में शिकायत की, लेकिन काररवाई नहीं हुई. जबकि पीडि़ता 7 साल तक ज्यादती झेलती रही. उस ने मामला दर्ज कराया, उस के बाद तो उस का जीना ही मुश्किल हो गया.
सपना के अलावा एक दूसरी पीडि़ता अंजलि (बदला नाम) को भी उस ने अश्लील वीडियो भेजे. रितेश ने यह गलती शपथपत्र दे कर मान ली. फिर भी उस के खिलाफ कोई ऐक्शन नहीं हुआ. अंजलि जब बिलाड़ा में शिक्षिका थी. उस समय मोबाइल नंबर से अश्लील मैसेज व वीडियो क्लिप भेज कर उसे परेशान किया गया. देर रात फोन कर अश्लील बातें करता और विरोध करने पर धमकियां देता था. ईमेल अकाउंट को हैक भी किया गया.
दुष्कर्म का केस दर्ज
अंजलि ने थाने में मुकदमा दर्ज कराया. पुलिस ने जांच की. आरोपी रितेश पटेल था. केस में खुद को फंसता देख रितेश ने अंजलि के परिजनों को शपथ पत्र दिया कि वही उसे 2016 से अश्लील मैसेज व वीडियो क्लिप भेज रहा था. भविष्य में वह ऐसा नहीं करेगा. पुलिस ने रितेश पटेल को जांच में दोषी माना. इस की जांच भी लंबित है.
जून 2017 (एफआईआर नंबर 243/2017) में पीडि़ता टीचर अंजलि द्वारा बिलाड़ा थाने में मोबाइल पर अश्लील मैसेज करने का मुकदमा दर्ज करवाया, जबकि फरवरी 2021 में बिलाड़ा थाने में टीचर सपना द्वारा रितेश पटेल के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज कराया गया था. इसी के साथ सितंबर 2021 में सोजत थाने में सपना ने अश्लील वीडियो भेजने और ब्लैकमेल का मुकदमा भी दर्ज कराया.
साल 2019 में एफआईआर नंबर 836/2019 जयपुर के गांधीनगर थाने में रितेश के बैचमेट्स द्वारा दर्ज कराई. उस के नाम से दूसरों को धमकाने का आरोप लगा. जांच में राजस्थान पुलिस मुख्यालय द्वारा रितेश पटेल को निलंबित करने और 16 सीसी चार्जशीट देने के लिए राज्य सरकार को लिखा गया, किंतु तत्कालीन सरकार की मेहरबानी से रितेश पटेल बच निकला था.
उस के खिलाफ दर्ज कई मामले होने के बावजूद वह ट्रेनिंग करता रहा. उस पर किसी भी तरह की काररवाई नहीं होने से वह बेखौफ रहा. परिवादी सहाड़ा गांव निवासी तनवीर पठान ने आरोप लगाया कि 3 मार्च, 2024 को रात में घर से उठा कर थाने ले जा कर मारपीट की गई. उस से एक लाख रुपए की मांग की गई. तनवीर ने दोस्त बालू को बुला कर एक लाख रुपए दिए. इस के बावजूद मुकदमा दर्ज कर लिया गया.
जांच में मारपीट की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन सामने आया कि डीएसपी रितेश पटेल ने रात में वाट्सऐप कौल कर अपने निवास पर बुलाया और पैसे लिए. इसी तरह परिवादी सहाड़ा गांव के प्रकाश जाट ने आरोप लगाया कि उस की जमीन पर बालूराम द्वारा जबरन निर्माण करवाने से विवाद चल रहा था. बालूराम ने झूठी रिपोर्ट दे कर केस दर्ज करवाया था. मामले को निपटाने और समझौता करवाने के नाम पर रितेश पटेल ने 60 हजार रुपए लिए.
जांच में पाया गया कि बाहरी मजदूर से एससी/एसटी ऐक्ट का झूठा मामला दर्ज करवा कर परिवादी को गिरफ्तार कर डीएसपी औफिस ले गए. वहां तलाशी के दौरान मिले 17 हजार रुपए और चांदी का कड़ा वापस नहीं किया गया. इन शिकायतों पर एएसपी की जांच में रितेश पटेल और उस की टीम द्वारा प्रकाश को थाने पर बिठाना, प्रताडि़त करना, सामान को नियमानुसार नहीं दर्शाने का प्रमाण मिला.
परिवादी गांव थला निवासी मदनलाल ने आरोप लगाया कि उस का पारसमल कुमावत से पैसों का विवाद था. इस का मामला रायपुर थाने में चल रहा था. इस में विपक्षी से सांठगांठ कर डीएसपी रितेश पटेल द्वारा परिवाद दर्ज होने से एक दिन पहले ही गिरफ्तारी के लिए सिपाही भेज दिए गए. बाद में थाने और डीएसपी औफिस में बिठा कर पारसमल से रुपए लेने की बात भूल जाने को कहा.
24 मई, 2024 को राय थलियास बांध की पाल के पास 3 क्विंटल 40 किलोग्राम डोडा चूरा से भरी पिकअप और एस्कार्ट वाहन को रुकवाने के मामले की जांच में पाया कि रितेश पटेल के निर्देश पर काररवाई की गई, लेकिन थाने को समय पर सूचना नहीं दी गई. यह भी सामने आया कि मोबाइल बंद कर इंटरनेट कौल के माध्यम से एनडीपीएस तसकरों से संपर्क रखा और अवैध लाभ ले कर तसकरों को मौके से भगा दिया.
इस मामले में 4 कांस्टेबलों के नाम आने के बाद एसपी भीलवाड़ा ने चारों कांस्टेबलों को लाइन हाजिर कर दिया था. इन में से 2 कांस्टेबल डीएसपी रितेश कुमार पटेल के गनमैन और ड्राइवर थे. इसी तरह बजरी के मामले में रितेश पटेल पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा. बजरी से भरे ये 2 ट्रैक्टर ट्रौली पकडऩे की सूचना डीएसपी रितेश पटेल को मिली थी, जिसे छोडऩे का काफी दबाव बनाया था. उसे सीआई फूलचंद ने आशाहोली गांव के पास अवैध बजरी भर कर ले जा रहे इन ट्रैक्टरों को पकड़ा था. दोनों ट्रैक्टरों को पकड़ कर सीआई ने गंगापुर थाने में ला कर खड़ा करवाया था. उन का रजिस्ट्रैशन नहीं था.

पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल, डीसीपी राजश्री राज वर्मा, एसएचओ सुरेश कुमार यादव
डीएसपी पटेल ने थाने पहुंच कर ट्रैक्टर छुड़वाने के लिए सीआई पर दबाव डाला था, जिस ने तूल पकड़ लिया. मामला उच्चाधिकारीयों तक चला गया. पटेल के खिलाफ जांच की गई. जांच में दोषी पाया गया. उस के बाद उसे एपीओ कर दिया गया. तब से रितेश पटेल निलंबित चल रहा था. पद से हटाए जाने के बाद भी रितेश पटेल ने अपनी पुलिसिया पावर का दुरुपयोग जारी रखा. उस ने पद की बहाली के लिए अनिंदो बनर्जी से एक करोड़ रुपए उधार मांगे और पद बहाली के बाद पैसे वापस लौटाने का वादा किया. इस मामले में वह बुरी तरह फंस गया और 7 जनवरी, 2026 को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. Rajasthan News
कथा लिखे जाने तक दोनों आरोपियों की जमानत नहीं हुई थी.






