Delhi News: तथाकथित तांत्रिक कमरुद्दीन भले ही 72 साल का हो गया था, लेकिन वह अपनी प्रभावशाली बातों से लोगों को बड़ी आसानी से बेवकूफ बना कर न सिर्फ लाखों रुपए ऐंठ लेता था, बल्कि मर्डर तक करने से नहीं हिचकता था. हाल ही में उस ने ‘धनवर्षा’ का लालच दे कर दिल्ली के 3 लोगों से न सिर्फ लाखों रुपए की ठगी की, बल्कि उन्हें इस तरह मौत की नींद सुलाया कि…

शाम को करीब 4 बजे आउटर दिल्ली के पीरागढ़ी फ्लाई ओवर के पास से एक राहगीर साइकिल द्वारा वहां से गुजर रहा था कि उस की नजर फ्लाईओवर के नीचे खड़ी एक सफेद रंग की कार पर पड़ गई. उसे गहरा आश्चर्य हुआ. वह दोपहर को यहां से साइकिल द्वारा सुलतानपुरी अपने रिश्तेदार से मिलने के लिए गया था, तब भी यह कार उस ने यहां खड़ी देखी थी, लौटने पर उसे वही कार वहां पर फिर खड़ी दिखाई दी तो उसे कौतूहल हुआ.

वह अपनी साइकिल खड़ी कर के कार की तरफ बढ़ते हुए बुदबुदाया, ‘यहां कोई पार्किंग नहीं है, ऐसी व्यस्त सड़क पर कौन बेवकूफ अपनी कार दोपहर से यहां खड़ी कर के चला गया है, कहीं वह इसी में पड़ा सो तो नहीं रहा है? देखता हूं माजरा क्या है?’

वह व्यक्ति कार के पास आ गया. उस ने जैसे ही कार के भीतर झांक कर देखा, उस के होश उड़ गए. कार में एक नहीं, 3 लोग सीटों पर आड़ेतिरछे पड़े हुए थे. इन में 2 पुरुष और एक महिला थी. तीनों के चेहरों पर मुंह से निकला झाग फैल कर सूख गया था. उन के शरीर में कोई हरकत नहीं थी. इसी से उस व्यक्ति ने अनुमान लगा लिया था कि इन तीनों के साथ जरूर कुछ हुआ है.

वह व्यक्ति घबरा कर जल्दी से कार से दूर हट गया. वह चाहता तो चुपचाप वहां से अपनी साइकिल उठा कर रफूचक्कर हो सकता था, लेकिन उस ने ऐसा नहीं किया. उस ने पुलिस कंट्रोल रूम के नंबर 112 पर कौल कर के सारी जानकारी दे दी. यह बात 8 फरवरी, 2026 की है.

फोन कर के वह कार से कुछ दूरी पर आ कर खड़ा हो गया. वह देखना चाहता था कि दिल्ली पुलिस ऐसे कौल पर कितनी तत्परता दिखाती है.

उस व्यक्ति को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ा. थोड़ी ही देर में पश्चिम विहार (ईस्ट) थाने की पुलिस वैन सायरन बजाते हुए वहां आ गई. उन्होंने कंट्रोल रूम से मिली इस सूचना को डीडी नंबर 55ए पर दर्ज किया था. आननफानन में पुलिस ने कार को घेर लिया. एसआई राजेश कुमार ने कार में झांक कर देखा. कार की ड्राइविंग सीट पर एक अधेड़ व्यक्ति स्टीयरिंग पर तिरछा पड़ा हुआ था.

लक्ष्मीः पति के इलाज के लिए तांत्रिक के पास गई थी लेकिन उस ने जान ही ले ली

कार के पीछे वाली सीट पर एक 40-45 साल का व्यक्ति और इसी उम्र की एक महिला पड़ी थी. तीनों के मुंह से झाग निकल कर सूख गया था. उन को तुरंत डौक्टरी सहायता उपलब्ध करवाने के इरादे से एसआई राजेश ने एंबुलेंस को कौल कर के घटनास्थल पर बुलवाया और किसी तरह कार का गेट खोल कर तीनों को बाहर निकाला फिर एंबुलेंस से नजदीक के संजय गांधी मेमोरियल हौस्पिटल में भेज दिया. साथ में हैडकांस्टेबल कुलदीप को भेजा गया था.

एसआई राजेश कुमार ने कार की जांच की. कार में उन्हें खाली गिलास, शराब की बोतल, कोल्ड ड्रिंक्स, 2 मोबाइल फोन, कुछ रुपए नकद, आधार कार्ड, हेलमेट और एक ड्राइविंग लाइसेंस मिला. इन सब को कब्जे में ले लिया गया.

ड्राइविंग लाइसेंस रणधीर नाम के व्यक्ति का था. इस में रणधीर कुमार के घर का एड्रैस था. रणधीर की उम्र ड्राइविंग लाइसेंस के अनुसार 76 साल थी.

कागजी काररवाई निपटाने के बाद राजेश कुमार ने एफएसएल टीम को घटनास्थल पर बुला लिया और सारी जानकारी एसएचओ राजपाल मीणा को दे दी. हैडकांस्टेबल सुमित को वहां छोड़ कर अभी वह थाने में पहुंचे ही थे कि संजय गांधी हौस्पिटल से उन्हें हैडकांस्टेबल कुलदीप ने फोन कर के बताया कि कार में से जिन 3 लोगों को निकाल कर हौस्पिटल भेजा गया था, वे तीनों ही मृत थे. डौक्टरों ने जांच कर के बता दिया है कि किसी जहरीली चीज के सेवन से तीनों की 4-5 घंटे पहले ही मौत हो गई है. सर, मेरे लिए क्या आदेश है?

”आप अभी वहीं रुकिए. इन में से एक व्यक्ति की पहचान हो गई है, 2 की पहचान होनी बाकी है. हम पहले रणधीर के घर पहुंच कर उस के फेमिली वालों से संपर्क करते हैं, शायद वहां से दूसरे व्यक्ति और महिला के बारे में कुछ जानकारी मिले. एसएचओ ने डीसीपी (बाहरी जिला) सचिन शर्मा को फोन कर के इस घटना की सूचना दे दी.

कार में मिले 3 लोगों में 76 साल के व्यक्ति रणधीर के घर पुलिस टीम दिल्ली के द्वारका जिले के गांव बापरोला पहुंची और बात बताई. बापरोला नजफगढ़ में है. यहां उन का चचेरा भाई सखर और भतीजा हरीश मिला. सखर ने बताया कि रणधीर के फादर मीर सिंह बहुत बड़े जमींदार थे. रणधीर भी खेती का काम संभाले हुए थे और प्रौपर्टी का काम करते थे. उन्हें 40-42 लाख रुपए मासिक किराया मिलता था.

कुछ क्षण वह खामोश रह कर उस ने कहा, ”भाई सुबह घर से निकल कर कहीं गए थे, उन के साथ शिवनरेश भी थे. वह भाई के साथ ही प्रौपर्टी का काम करते थे. रणधीर शराब को छू भी नहीं सकते. उन के साथ मृत मिले दूसरे व्यक्ति शिव नरेश हो सकते हैं. वह दिल्ली के नांगली डेयरी इलाके में अकेले रहते थे. उन का पैतृक घर एटा में है. उन के साथ महिला कौन है, मैं नहीं जानता.’’

एसआई राजेश सखर और हरीश को साथ ले कर संजय गांधी हौस्पिटल के लिए चल पड़े. संजय गांधी हौस्पिटल में सखर और हरीश ने रणधीर की ही पहचान नहीं की, बल्कि उन्होंने दूसरे मृतक की पहचान कर के बताया, ”यह शिव नरेश हैं यह मेरे भाई रणधीर के साथ प्रौपर्टी का काम करते थे. वह महिला कौन है, इसे दोनों नहीं जानते थे. लेकिन हरीश का कहना था कि एक बार मैं ने इसे शिव नरेश के साथ चाचा के औफिस में देखा था. शायद यह कोई प्लौट वगैरह खरीदने के लिए चाचा के औफिस में आई हो.’’

शिव नरेश : लावारिस कार में मिला शव

2 शवों की पहचान हो गई थी. उन के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए. पोस्टमार्टम में उन के विसरे को सुरक्षित कर के लैब में जांच के लिए भेजने की हिदायत दे दी गई.

इस मामले को सुलझाने के लिए डीसीपी सचिन शर्मा ने एडिशनल डीसीपी नर्रा चैतन्या के सुपरविजन में एक टीम बनाई, जिस में एसीपी स्वागत राजकुमार पाटिल, एसीपी जयप्रकाश, इंसपेक्टर (स्पैशल स्टाफ) रोहित कुमार, इंसपेक्टर राजपाल मीणा, इंसपेक्टर (नारकोटिक्स) रितेश राज और एंटी स्नैचिंग सेल के इंचार्ज देवेंद्र को शामिल किया गया.

इस के अलावा इस टीम में एसआई विपिन कुमार, अंकित, विनीत प्रताप सिंह, राजेश कुमार, हरीश, एएसआई विकास, प्रदीप, दिलबाग सिंह, हैडकांस्टेबल अमित, शक्ति, मंजीत, राकेश कुमार, दिनेश कुमार, दीपक, कुलदीप, अमरजीत, संदीप, ओमवीर, अनुज, कांस्टेबल मंदीप, तरुण, रेणु और सोनिका को शामिल किया गया.

तांत्रिक कमरुद्दीन ने जहरीले लड्डू खिलाए तो कुछ ही देर में तीनों अचेत हो गए. वह 2 लाख रुपए ले कर लोनी भाग आया.

इस टीम ने अपनी जांच पीरागढ़ी फ्लाईओवर के नीचे खड़ी मिली सफेद रंग की कार से शुरू की. इस कार में मृतकों के अलावा क्या कोई और भी था, यह जानने के लिए टीम ने आसपास और सड़कों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकौर्डिंग देखनी शुरू की.

एक कैमरे में उन्हें कार की ड्राइविंग सीट के साथ वाली सीट पर एक बूढ़ा व्यक्ति बैठा दिखाई दिया, उस के सिर पर बाल नहीं थे, चेहरे की दाढीमूंछ से वह मुसलमान लग रहा था. उस की तसवीर ज्यादा साफ नहीं थी.

मृतक महिला का पता निकालने के लिए कार से मिले दोनों मोबाइल फोन को चैक किया गया. इन में जो नंबर थे, उन्हें मिला कर देखा गया तो टीम को महिला के नाम और एड्रैस की जानकारी मिल गई.

मोबाइल के एक नंबर को मिलाया गया तो उसे किसी सलीम ने उठाया था. उस ने जोशीले स्वर में कहा, ”मैं सलीम बोल रहा हूं लक्ष्मी, तुम कैसी हो?’’

स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर रोहित कुमार के पास मोबाइल था. उन्होंने तुरंत कहा, ”सलीम, मैं इंसपेक्टर रोहित कुमार स्पैशल स्टाफ बोल रहा हूं, मैं जिस फोन से बात कर रहा हूं क्या वह लक्ष्मी का है?’’

”हां साहब,’’ दूसरी ओर सलीम थोड़ा घबराए स्वर में बोला, ”यह फोन लक्ष्मी का ही है, बात क्या है साहब, आप मुझे फोन कर रहे हैं, सब अच्छा तो है न?’’

”सलीम, हमें पीरागढ़ी में एक महिला का शव मिला था, उस की उम्र 40 साल के आसपास है. शव को संजय गांधी हौस्पिटल की मोर्चरी में रखवाया गया है. हमारे पास उस की तसवीर है, तुम्हारे पास वाट्सऐप पर भेज रहा हूं. देख कर बताओ, क्या यही लक्ष्मी है?’’ इंसपेक्टर रोहित कुमार ने लक्ष्मी की फोटो एसआई राजेश कुमार के मोबाइल से ले कर सलीम के वाट्सऐप पर भेज दी.

सलीम ने तुरंत फोन कर के बताया, ”साहब, यही लक्ष्मी है.’’

”यह कहां रहती है?’’

”जहांगीरपुरी में रहती है साहब. आप आ जाइए, मैं भी जहांगीरपुरी में ही रहता हूं.’’

सलीम ने लक्ष्मी का पूरा एड्रैस समझा दिया. इंसपेक्टर रोहित ने कहा, ”हम आधा घंटे में आ रहे हैं सलीम.’’

फोन काटने के बाद यह टीम जहांगीरपुरी के लिए निकल गई. लक्ष्मी के घर से कुछ विशेष जानकारी मिल सकती थी. इसी उम्मीद से जांच टीम जहांगीरपुरी पहुंच गई.

जहांगीरपुरी में जांच टीम लक्ष्मी के घर पहुंची तो घर में उस का बीमार पति जयप्रकाश मिला. उस ने बताया कि उस की पत्नी लक्ष्मी उस की बीमारी से परेशान रहती है. वह मंदिरों और दरगाह के चक्कर काटती है, ताकि मैं ठीक हो सकूं. एक साल से वह एक तांत्रिक से मिलने लोनी गाजियाबाद जा रही है. बाबा तांत्रिक ने उसे विश्वास दिलाया है कि वह मुझे एकदम भला चंगा कर देगा.

”उस तांत्रिक का नाम जानते हो तुम, जहां तुम्हारी पत्नी लक्ष्मी जाती थी?’’ इंसपेक्टर राजपाल मीणा ने पूछा.

”उस का नाम कमरुद्ïदीन है, सर.’’ जयप्रकाश ने कहा, ”लक्ष्मी को आ जाने दीजिए, वह आप लोगों को उस तांत्रिक के ठिकाने पर ले जाएगी. लक्ष्मी कल सुबह की गई हुई है, बस आती ही होगी.’’

”वह अब कभी नहीं आएगी.’’ इंसपेक्टर मीणा ने गंभीर स्वर में कहा, ”हमें पीरागढ़ी में तुम्हारी पत्नी लक्ष्मी का शव मिला है. उस का शव संजय गांधी हौस्पिटल में है. तुम वहां जा कर कागजी काररवाई पूरी करो ताकि पोस्टमार्टम के बाद बौडी तुम्हें मिल सके.’’

पुलिस हिरासत में कमरुद्दीनः जब पुलिस उसे पकड़ने लोनी पहुंची तो उस ने बहुत हंगामा किया.

जयप्रकाश फटीफटी आंखों से उन लोगों को देखता रहा, फिर दहाड़े मार कर रोने लगा. उस का दुख हलका होने तक यह जांच टीम वहां रुकी रही. फिर उस की मदद के लिए हैडकांस्टेबल अमित को छोड़ कर यह जांच टीम तांत्रिक कमरुद्ïदीन की खोज में लोनी की तरफ बढ़ गई.

लोनी एक प्रकार से तांत्रिक बाबाओं का गढ़ बना हुआ है. लोनी में बाबा कमरुद्ïदीन को तलाश करना बहुत ज्यादा मुश्किल नहीं था. जांच दल ने इस के लिए अपने मुखबिर छोड़ दिए. शीघ्र ही मुखबिर तांत्रिक कमरुद्दीन का सही ठिकाना तलाश करने में कामयाब हो गए.

तांत्रिक कमरुद्दीन लोनी की 7-8 साल पहले बसी नई कालोनी अमन विहार के फेज-2 में एक दोमंजिला मकान में रहता था. पुलिस जांच दल ने उस मकान पर पहुंच कर मकान को घेरा तो कमरुद्ïदीन घर से बाहर आ गया.

कमरुद्दीन 70-72 वर्ष का मरियल कदकाठी वाला बूढ़ा व्यक्ति था. सिर बीच से गंजा, कनपटी पर थोड़े से खिचड़ी बाल, मूंछें हल्की, ठोढ़ी पर बकरे जैसी सफेद दाढ़ी. उस ने सफेद कुरता और टखने तक का मुसलमानी पायजामा पहना हुआ था. गले में लाल रंग का चारखाने वाला गमछा लपेटे हुए वह बहुत गुस्से में भुनभुनाता हुआ बाहर निकला था.

”क्या बदतमीजी है आप लोगों की, इस तरह मेरे घर को क्यों घेर लिया है आप ने?’’ वह फुंफकारते हुए बोला.

”तुम्हीं कमरुद्ïदीन हो?’’ इंसपेक्टर रोहित ने उसे घूरते हुए पूछा.

”हां, मेरा ही नाम कमरुद्ïदीन है, कोई शक है?’’ गुर्राते हुए कमरुद्ïदीन बोला.

”हम तुम्हारी ही तलाश में आए हैं कमरुद्ïदीन, तुम पर 3 हत्याएं करने का संदेह है हमें.’’

”मैं यहां लोगों का दुखदर्द ठीक करने बैठा हूं इंसपेक्टर, हत्याएं करने नहीं.’’ कमरुद्ïदीन ने कंधे झटके, ”जाओ, मेरे दुखी और मजबूर भाईबहनों के आने का वक्त हो गया है.’’

”तुम कल पीरागढ़ी में थे कमरुद्ïदीन, हमारे पास सीसीटीवी कैमरे की रिकौर्डिंग है. हमारे साथ चुपचाप चलो नहीं तो उठा कर ले जाना पड़ेगा.’’ इंसपेक्टर राजपाल मीणा गुर्राए.

”मैं एक महीने से घर से नहीं निकला हूं. पीरागढ़ी तो मैं ने आज तक देखा नहीं है.’’ कमरुद्ïदीन ने फिर कंधे झटके.

इस बार इंसपेक्टर रोहित और इंसपेक्टर राजपाल मीणा ने आंखों ही आंखों में बात की. फिर राजपाल मीणा ने अपने साथ आए हैडकांस्टेबल्स और कांस्टेबल्स को आदेश दिया, ”उठा कर गाड़ी में लाद लो इसे. थाने में यह जुबानखोरी नहीं करेगा.’’

लेडी कांस्टेबल रेणु

पलक झपकते ही पुलिस टीम ने कमरुद्ïदीन को उठा लिया. कमरुद्ïदीन चीखा, ”यहां से मुझे ले जाना भारी पड़ेगा. पब्लिक तुम्हें रौंद डालेगी.’’

”कोई इस की मदद नहीं करेगा.’’ वहां खड़ी एक मुसलिम महिला गुस्से से चीखी, ”यह ढोंगी लुटेरा है, धन दोगुना करने का झांसा दे कर लोगों को ठगता है, मेरा लाखों रुपया खा गया.’’

”मेरा 3 लाख रुपया हड़प गया यह शैतान.’’ दूसरी महिला भी चीखी, ”ले जाइए इस नासूर को इस बस्ती से.’’

जांच दल को भांपते देर नहीं लगी कि कमरुद्ïदीन ने यहां लोगों को मूर्ख बना कर काफी लूटा है. कोई इस की मदद नहीं करेगा. जांच दल ने उसे वैन में डाल लिया. कमरुद्ïदीन चीखताचिल्लाता रहा, लेकिन कोई आगे नहीं आया. जांच टीम उसे ले कर पश्चिम विहार (ईस्ट) थाने के लिए रवाना हो गई.

उच्चाधिकारियों के समक्ष जब थाने में कमरुद्ïदीन की पुलिसिया ढंग से खातिरदारी की गई तो वह तोते की तरह बोलने लगा, ”साहब, मैं ने ही उन तीनों को जहरीले लड्ïडू खिला कर मार डाला है.’’

”तुम ने उन की हत्याएं क्यों की?’’ डीसीपी सचिन शर्मा ने गंभीर स्वर में पूछा.

”मैं लक्ष्मी को अपने चमत्कार के जाल में फांस चुका था. लक्ष्मी को मेरे पास सलीम ले कर आया था. सलीम मेरी सेवा में है, वह उन लोगों को मेरे लिए फांसता है जो किसी बीमारी, ऊपरी चक्कर, धन हानि या प्रेमीप्रेमिका जैसी परेशानी से त्रस्त होते हैं. मेरे पास सलीम उन्हें लाता है तो मैं उन्हें अपने तरीके से ठगता हूं.

”लक्ष्मी का पति बीमार रहता था. सलीम ने उसे झांसा दिया कि मैं उसे ठीक कर सकता हूं. लक्ष्मी मेरे पास आई तो मैं अपने घर के पास बनी मजार पर उसे ले गया. झाडफ़ूंक मैं वहीं करता हूं. झाडफ़ूंक कर के लक्ष्मी को राख दी कि पति को एक महीना खिलाएगी तो वह चारपाई छोड़ देगा.

”लक्ष्मी से मैं ने मजार पर 11 सौ रुपए चढ़वाए. वह राख ले गई, एक महीने बाद वह परेशान हो कर लौटी. बोली पति को कोई फायदा नहीं हुआ. मैं ने पूजा के नाम पर उस से काला मुर्गा, शराब, नींबू आदि मंगवाए और 5 हजार का चढ़ावा चढ़वाया. पूजा का ढोंग कर के मैं ने उसे ताबीज बना कर दिया. पति को क्या ठीक होना था, लक्ष्मी पति के इलाज के लिए बारबार मेरे पास आने लगी तो मैं ने दूसरा चक्कर चलाया. मैं ने उसे अपनी शाल में से रुपए बना कर दिखाए और कहा कि मैं धनवर्षा करता हूं. तुम किसी मोटी आसामी को लाओ, तुम्हें भी मैं मालामाल कर दूंगा.’’

”लक्ष्मी रणधीर और शिव नरेश को तुम्हारे पास ले कर आई होगी?’’ इंसपेक्टर मीणा ने पूछा.

”हां साहब. लक्ष्मी शिव नरेश को जानती थी, वह रणधीर के साथ प्रौपर्टी का काम करता था. रणधीर काफी पैसे वाला व्यक्ति था. वह अपने आप से दुखी था, उस की 4 बेटियां और एक बेटा है, उस की 3 बेटियां असमय मर गईं. लक्ष्मी के कहने पर वह मेरे से शेष बची बेटी के जीवन की भीख मांगने आया था. शिवनरेश भी साथ आया था. मैं ने रणधीर से मोटी रकम पूजा करने के नाम पर ठगी. मैं कभी राख कभी ताबीज बना कर रणधीर को देता रहा.

”वे तीनों एक साल से मेरे पास आ रहे थे. मैं ने लक्ष्मी से कहा कि रणधीर को कहो कि वह 2 लाख रुपया ले कर आए, मैं उस का 3 करोड़ बना दूंगा. लक्ष्मी ने यह बात रणधीर से कही तो वह लालच में आ गया. 8 फरवरी, 2026 को वे तीनों दोपहर में मेरे पास 2 लाख रुपए ले कर आए. हम अमन विहार से रणधीर के बापरौला वाले घर पूजा करने के लिए निकले.

”रास्ते में मैं ने पूजा करने के बहाने से शराब, कोल्ड ड्रिंक, पानी के गिलास और नींबू खरीदे. कार जब पीरागढ़ी के पास पहुंची तो मैं ने कार में ही पूजा शुरू करने का नाम ले कर अपने थैले में से बेसन के लड्डू निकाल कर तीनों को दिए. इन लड्डुओं को मैं ऐसे ही मौकों के लिए पहले ही बना लेता था. इन में नींद की गोलियां और सल्फास मिलाने से खाने वाला थोड़ी देर में ही मर जाता था.

”मैं ने तीनों को जहरीले लड्डू खाने को दिए तो तीनों ने खा लिए. मैं ने ड्राइवर की सीट पर बैठे रणधीर को कार साइड में लगाने को कहा, तब हम पीरागढ़ी फ्लाईओवर के नीचे थे. रणधीर ने कार को साइड में लगाया तो कुछ ही देर में तीनों अचेत हो गए. मैं 2 लाख रुपए ले कर कार से उतर कर लोनी भाग आया था.’’

सभी पुलिस अधिकारी उस की बात सुन कर हैरान रह गए. अदना सा दिखने वाला यह 72 साल का बूढ़ा इतनी खौफनाक साजिश रच सकता है, कल्पना भी नहीं कर सकता कोई, लेकिन यही सच्चाई थी.

”तुम ने इस तरीके से और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है कमरुद्ïदीन?’’ एसीपी (औपरेशन) जयप्रकाश ने पूछा.

”जी, मैं ने राजस्थान के धौलपुर में फरवरी 2014 में राजाखेड़ा इलाके के रामनारायण की पत्नी अनीता की लड्डू खिला कर हत्या की थी. पतिपत्नी शादी के बाद से बेऔलाद थे. मेरे संपर्क में आए तो मैं ने इन्हें पूजा के नाम पर खूब लूटा. फिर 27 फरवरी, 2014 को अनीता की हत्या कर दी. मैं इस सिलसिले में पकड़ा गया. मेरे खिलाफ रामनारायण ने एफआईआर दर्ज करवाई थी. मैं कुछ दिन जेल में रहा, फिर सबूतों के अभाव में मैं बरी हो गया.

”सर, मैं ने इसी तरह मई 2025 में यूपी के फिरोजाबाद में 2 लोगों की हत्या की थी. मैं ने मक्खनपुरा के रामनाथ और उस के रिश्तेदार पूरन को तंत्रमंत्र के जाल में फंसा कर मोटी रकम ले ली, फिर जहरीले लड्डू खिला कर उन की हत्या कर दी. मेरे खिलाफ रामनाथ के भाई रामसिंह ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी. मैं पकड़ा गया. 3 महीने बाद चार्जशीट दाखिल हुई थी, तब तक मुझे हाईकोर्ट से जमानत मिल गई और मैं लोनी में आ गया.’’

”तुम कहां के रहने वाले हो?’’ डीसीपी सचिन शर्मा ने पूछा.

”साहब, मैं मूलरूप से फिरोजाबाद (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला हूं. मेरे परिवार में बीवी, 5 बेटे और 2 बेटियां हैं. फिरोजाबाद में भी मैं तंत्रमंत्र की दुकान चलाता था. मेरे 3 बेटे फिरोजाबाद में मेरी बीवी के साथ रहते हैं. 2 हत्याएं होने के बाद मैं लोनी के अमन विहार फेज-2 में रहने लगा. मेरे 2 बेटे यहां किराना की दुकान और होटल चलाते हैं.’’

चूंकि कमरुद्ïदीन ने अपना ट्रिपल मर्डर का जुर्म कुबूल कर लिया था, इसलिए उस के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) के तहत 11 फरवरी, 2026 को मामला दर्ज कर उसे सक्षम न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

इस के बाद तांत्रिक कमरुद्ïदीन के खिलाफ जांच तेज कर दी गई. सब से पहले फिरोजाबाद से उस के बेटों को तथा अमन विहार से दोनों बेटों को हिरासत में ले लिया गया. पुलिस को संदेह था कि ये लोग भी पिता की तरह तंत्रमंत्र क्रिया कर के कहीं लोगों को ठग तो नहीं रहे.

अमन विहार में कमरुद्ïदीन के आसपड़ोस में जांच करने पर उस के खिलाफ पड़ोस में रहने वाली नजराना ने बताया कि कमरुद्ïदीन से वह अपने बेटे का इलाज करवा रही थी. उस के बेटे के दिल में छेद है. कमरुद्ïदीन कैंसर तक ठीक करने का दावा करता है.

उस से मैं ने बेटे का इलाज करवाना शुरू किया तो वह मुझ से कभी 20, कभी 50 हजार मांगता रहा. अब तक वह मुझ से 7 लाख 75 हजार रुपए ऐंठ चुका है. मैं ने जब उस से पैसे लौटाने को कहा तो उस ने मुझे 10 फरवरी, 2026 को घर आने को कहा. मैं उस दिन उस के घर आई तो उसे पुलिस गिरफ्तार कर के ले जा रही थी. मैं ने तब चीखचीख कर कमरुद्ïदीन को बद्ïदुआ दी थी. उस ने मुझे खूब लूटा है. मैं कमरुद्ïदीन के खिलाफ बयान दूंगी.

इसी प्रकार वहां रहने वाली साजिदा बताती है कि उस की बेटी बीमार रहती है. लोगों के कहने पर वह बेटी को कमरुद्ïदीन के पास ले गई. कमरुद्ïदीन ने मुझ से लड्डू और अंडे मंगवाए. एक बार ढाई किलो गोश्त मंगवाया. उस के पास बेटी का इलाज करवाते साल हो गया. बेटी को कोई लाभ नहीं हुआ.

मुझ से धीरेधीरे कर के कमरुद्ïदीन ने डेढ़ लाख रुपया लूट लिया है. कमरुद्ïदीन ढोंगी है. वह यहां लोगों को खूब लूटता है. उस ने काफी प्रौपर्टी बना ली है. वह एक मसजिद भी बनवा रहा है. उस के बेटे होटल चलाते हैं, किराने की दुकान भी है. उस ने पास में दरगाह बना रखी है. इलाज के वक्त वह पैरों में चाकू दबा कर मंत्र पढ़ता है यानी भय दिल में बिठाता है. वह सभी पर हावी होता जा रहा है. कमरुद्ïदीन के जादूटोना, तंत्रमंत्र से परेशान हो कर अब्दुल यह इलाका छोड़ कर यहां से चले गए हैं. वह कहते हैं यहां सुकून नहीं है.

पुलिस ने फिरोजाबाद और धौलपुर के उन थानों से संपर्क कर के कमरुद्ïदीन के केसों के बारे में मालूम किया. कमरुद्ïदीन के खिलाफ राजस्थान के धौलपुर के राजाखेड़ा थाने में एफआईआर नंबर 31/2014, धारा 143/363/302 थाना राजाखेड़ा, धौलपुर, राजस्थान में दर्ज है. वहीं फिरोजाबाद के मक्खनपुरा थाने में उस के खिलाफ एफआईआर नंबर 105/2025 बीएनएस की धारा 103(1), 123 के अंतर्गत दर्ज है.

पुलिस ने आरोपी तथाकथित तांत्रिक कमरुद्दीन से विस्तार से पूछताछ करने के बाद कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

थाना पश्चिम विहार (ईस्ट) की पुलिस कमरुद्ïदीन के खिलाफ उस के पिछले जुर्म को खंगाल कर ऐसी चार्जशीट तैयार करना चाहती है कि उसे आजीवन कारावास नहीं फांसी की सजा ही मिले, ताकि फिर कोई भूल से भी ऐसे ढोंगी तांत्रिक के जाल में फंस कर अपना धन और जान न गंवाए. Delhi News

 

 

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