Web Series: वेब सीरीज ‘तस्करी: द स्मगलर्स वेब’ की कहानी मुंबई के इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर होने वाली बड़ी तस्करी पर आधारित है. वैसे तो यह सब कस्टम औफिसर्स की मिलीभगत से होता है, लेकिन चुनाव नजदीक आने पर सरकार पर दबाव बढ़ा तो इस तस्करी पर नकेल कसने के लिए वित्तमंत्री के आदेश पर ईमानदार कस्टम औफिसर्स को एयरपोर्ट पर तैनात किया जाता है. इस के बाद कस्टम औफिसर्स और तस्करों के बीच चूहेबिल्ली का ऐसा खेल शुरू होता है कि…

कलाकार: इमरान हाशमी, शरद केलकर, अनुराग सिन्हा, अमृता खानविलकर, नंदीश सिंह संधू, जोया अफरोज, फ्रेडी दारूवाला, जमील खान, वीरेंद्र सक्सेना, कृष्ण टंडन, रजत भसीन डायरेक्टर: नीरज पांडेय, राघव एम. जैरथ, बी.ए. फिडा, प्रोड्यूसर: शीतल भाटिया, लेखक: नीरज पांडेय, विपुल के. रावल, एडिटर: प्रवीण काथीकुलोथ, ओटीटी: नेटफ्लिक्स

ओटीटी प्लेटफार्म पर जब किसी सीरीज के साथ लिखा जाता है, ‘सच्ची घटनाओं से प्रेरित’ तो यह महज एक टैगलाइन नहीं होती. यह दर्शक से एक मौन वादा होता है कि परदे पर जो दिखेगा, वह कल्पना से आगे जा कर उस सच को छूएगा, जिसे अकसर दबा दिया जाता है. ‘तस्करी: द स्मगलर्स वेब’ भी यही दावा करती है. लेकिन यह सीरीज सच को सामने नहीं लाती है.

सत्य पर आधारित वेब सीरीज की परंपरा रही है कि नाम न सही, संकेत तो साफ दिखाए जाते हैं. पर यह सीरीज तस्करी के संकेतों को भी धुंधला कर देती है. राजनीतिक संरक्षण, आर्थिक ताकत और संस्थागत भ्रष्टाचार, इन शब्दों से कहानी बचती हुई नजर आती है.

‘तस्करी: द स्मगलर्स वेब’ सच्चाई से टकराने की हिम्मत नहीं दिखाती. विपुल के. रावल और नीरज पांडे द्वारा इस सीरीज की कहानी को लिखा गया है. ये दोनों 2 एपिसोड के निर्देशक भी हैं, शेष 5 एपिसोड का निर्देशन नीरज पांडे और राघव एम. जैरथ ने मिल कर किया है. निर्माता नीरज पांडे हैं. 14 जनवरी, 2026 को यह वेब सीरीज रिलीज हुई है.

एपिसोड नंबर 1

वेब सीरीज की शुरुआत में एक लड़की पागलों की तरह 2 आदमियों के पीछे भाग रही है. देख कर ऐसा लग रहा है जैसे उन्होंने लड़की से कुछ छीना है या फिर इन की आपस में लड़ाई हुई है. उन में से एक के हाथ पर कोई जख्म है और दूसरा उसे खींच कर ले जा रहा है. लड़की हार मानने वाली नहीं है. वह गलियों में उन का पीछा करती रहती है.

भागती हुई लड़की सड़क किनारे एक ठेले से तरबूज उठा कर भाग रहे आदमी के सिर पर मारती है. आदमी धड़ाम से नीचे गिरता है. जबकि पीछा करने वाली लड़की रेलिंग में फंस जाती है. वे दोनों आदमी खुद को छुड़ा कर वहां से भागतेभागते नदी किनारे पहुंचते हैं और एक नाव पर सवार हो कर चल देते हैं, लड़की देखती रह जाती है और कुछ नहीं कर पाती.

हताश हो कर लड़की घाट के पास एक बेंच पर बैठ कर हांफने लगती है. ठीक उसी पल एक आदमी आता है. वह पानी की बोतल आगे बढ़ाते हुए लड़की स्वाति से पानी पीने को कहता है.

यह सुन कर स्वाति चौंकते हुए बोली, ”मीणा तुम?’’

यानी दोनों एकदूसरे को अच्छी तरह से जानते हैं. इस के बाद वह आदमी जबरदस्ती स्वाति को खींच कर ले जाता है. रास्ते में फोन कर के कहता है कि 50 लाख दो, लड़की मेरे पास है. स्वाति को वह अपनी गाड़ी में बिठा लेता है. उस आदमी का नाम है अर्जुन मीणा. कार में डर के मारे रोने की कलाकारी इस स्वाति से नहीं हो पाई. उसे दर्द का एहसास दिलाना था, जो वह नहीं कर पा रही थी.

अर्जुन जब स्वाति को अपने साथ ले कर जा रहा होता है तो दर्शकों को बताता है कि वह एक सस्पेंडेड औफिसर है. वह मुंबई के एयरपोर्ट पर चल रही तस्करी के बारे में बताता है. नजारा बदलता है. विदेश में अवैध रूप से सामान ला कर तस्करी करने वालों के सीन दिखाए जाते हैं.

मिलान शहर से शालिनी सिंह, अलदीरा से वरुण कटारिया, बैंकाक से हेमा कंघानी और आडिस अबाबा से स्वाति सालुंखे. यह सब अलगअलग तरीकों से सोना और डायमंड छिपा कर कस्टम्स पार करने की तैयारी कर रहे हैं. एक लड़की हेरोइन से भरे कैप्सूल निगल रही है ताकि वह उसे इंडिया में स्मगल कर सके. इस लड़की को कैप्सूल निगलने की अदाकारी करनी ही नहीं आई. ऐसा लग रहा था जैसे रसगुल्ले खा रही है.

एक लड़के को दिखाते हैं जो लैपटाप में सोना छिपा रहा था, यहां का सीन भी तस्करी के मानक के अनुसार नहीं है. वह लैपटाप का एक मिस्त्री प्रतीत हो रहा है, जैसे लैपटाप की मरम्मत कर रहा हो. वहीं एक बूढ़ी लेडी को भी दिखाते हैं, जो डायमंड स्मगल करने की तैयारी कर रही थी. यह सब दिखा कर फिर दर्शकों को बताया जाता है कि इसी तरह से आए दिन मुंबई के एयरपोर्ट के जरिए माल इंडिया में स्मगलिंग की जाती है. फिर बैंकाक के आदमी को दिखाते हैं, जो मुंबई के कस्टम औफिसर पवन से हमसाज है और एक बूढ़ी महिला की मुखबिरी करता है.

यहां कहानी के लेखक की एक चूक है. कोई भी अधिकारी अकेले किसी तस्कर को पकड़ कर उसे मोटी रकम ले कर छोड़ दे, ऐसा मुमकिन नहीं है. पवन नाम के कस्टम औफिसर को करप्ट दिखाने की कोशिश बेमानी है. सीन बदलता है. अर्जुन बताता है कि यह तस्करी तो काफी समय से चल रही है. लेकिन जब इलेक्शन करीब आई तो अपोजिशन वालों ने तस्करी को रोकने का मुद्ïदा उठाया. फाइनेंस मिनिस्टर ने कस्टम हेड को बुलाया. उन से कहा कि मुंबई एयरपोर्ट से तस्करी रोकनी है. यह सीन किसी तरह से भी दर्शकों पर कोई प्रभाव नहीं छोड़ सका.

मिनिस्टर की भूमिका में बात कर रहे कलाकार में मिनिस्टर जैसी कोई अदाकारी ही नहीं थी. इस से बुरी हालत कस्टम औफिसर की भूमिका निभाने वाले व्यक्ति की थी. वह कलाकार तो चेहरे पर किसी तरह का एक्सप्रेशन ही नहीं ला पाया, जिस से वह कस्टम हेड की भूमिका में दिख सके.

कहानी में बताया जाता है कि एयरपोर्ट पर किस तरह से यहां के औफिसर मिले हुए हैं, जो थोड़े पैसों के लालच में लोगों को छोड़ देते हैं. इसी तरह से स्मगलिंग चल रही थी. ये सब दृश्य भी बहुत ज्यादा आकर्षित करने वाले नहीं है. पवन कस्टम में एक महिला को चैक करते हुए दिखाया जाता है, लेकिन वह ड्रेस में नहीं है. बूढ़ी लेडी को पकड़ लेता है. हेमा उस परिवार के साथ आती है, जिस से उस ने दोस्ती की थी, लेकिन औफिसर उस परिवार को जाने देता है और सिर्फ हेमा को रोक लेता है.

हेमा शुरुआत में थोड़ा नाटक करती है. लेकिन अदाकारी सही से कर नहीं पाई. बैग स्कैन करता है तो उसे घड़ी के 3 बौक्स दिखाई देते हैं. हेमा घडिय़ों की रसीद भी दिखा देती है. औफिसर का जिस तरह मुंह उतरना चाहिए, उस की वह अदाकारी नहीं कर सका. हेमा मुसकराते हुए बाहर निकल आती है. फिर वह बूढ़ी लेडी यहां से एक होटल के रूम में जाती है. दिखाया गया है कि बच्ची महिला के पास आ कर बैठती है. तस्कर महिला से बच्ची निवेदन कर के हवाई जहाज में खिड़की की साइड में बैठ जाती है. बच्ची की मां भी फिर आ कर इस सीट पर बैठ जाती है.

यह तो इत्तफाक हुआ, इन में दोस्ती होती है. इसी को वह खिलौना देती है, जिस में तस्करी के हीरे भरे हुए हैं. इसी तरह से यह लेडी कई बार स्मगलिंग कर चुकी है. उसी लड़की को दिखाते हैं, जो हीरोइन स्मगल करने के लिए इंडिया में आ गई थी. कस्टम औफिसरों से बच कर वह बेदाग निकल आती है. उसे एयरपोर्ट के बाहर 2 लोग उठा लेते हैं और फिर वह किसी रमेश नाम के बिजनैसमैन को कौल करते हैं कि तेरी हीरोइन अब हमारे पास है, इसलिए मुझे 50 लाख चाहिए. रमेश कहता है कि मैं तुझे 25 लाख दूंगा और इन की डील हो जाती है. असल में यह माल कई करोड़ का है.

नए अधिकारी प्रकाश अपने सीनियर से कहता है कि मुझे यहां पर कुछ मेरे औफिसर चाहिए, ताकि हम स्मगलिंग रोक सकें. बिना किसी कारण औफिसर के ट्रांसफर को सीनियर मना कर देते हैं. कहानी में मनचाहे अधिकारियों की तैनाती के लिए जो प्लान  बनाया है, उस का सच से तो कोई वास्ता नहीं है. इस में कलाकार भी अपने आप को कहानी के अनुसार नहीं ढाल सके. प्रकाश की ईमानदारी और तस्कर की परख के लिए एक सीन दिखाया गया है.

प्रकाश और उन के बड़े अधिकारी को ड्यूटी पर दिखाया जाता है. दोनों बात कर रहे हैं, तभी प्रकाश एक लड़के का बैग चैक करता है. उस लड़के ने ही लैपटाप में सोना छिपाया था, इसलिए उसे पकड़ लिया जाता है. अगले दिन मिनिस्टर का दामाद मुंबई एयरपोर्ट पर उतरता है, पर उस के स्वागत के लिए कोई भी नहीं था. तभी प्रकाश सीसीटीवी के जरिए दामाद पर नजर रख रहा था और वह देखता है कि इस ने तो काफी महंगी वाच पहनी है.

यहां प्रकाश एक पुलिस वाले के कान में कहता है कि उस नीले कोट वाले ने स्मगलिंग की वाच पहनी है. तब वह कांस्टेबल पवन को जा कर यह बात बताता है. लालच में पवन बिना कुछ जाने दामाद को एक रूम में लाता है और पूछताछ के दौरान पवन उसे चांटा लगा देता है, क्योंकि घड़ी 5 करोड़ की थी. विदेश से कस्टम ड्यूटी बचा कर यानी तस्करी कर के लाई जा रही थी.

पवन रिश्वत की उम्मीद में कुछ भी सुनने को तैयार नहीं था. सिद्धार्थ उसे एक लाख की रिश्वत देने की कोशिश करता है. पर औफिसर नहीं मानता और उसे साइड वाले कमरे में ले जाता है. वहां वह सिद्धार्थ को थप्पड़ मार देता है. कहता है, करोड़ों की घड़ी और मुझे सिर्फ एक लाख रिश्वत. मैं तुझे भिखारी लगता हूं क्या? अब सिद्धार्थ अपने ससुर मंत्री को फोन करता है.

मिनिस्टर के दामाद को पीटा गया, यह बात जब मिनिस्टर को पता चली तो उस ने गुस्से में यहां के कुछ औफिसर्स का ट्रांसफर कर दिया. प्रकाश यही चाहता था. अर्जुन रमेश के आदमी को धमकी देता है, बौस से कह दे कि वह तस्करी न करें नहीं तो सभी माल पकड़ा जाएगा. पहला एपिसोड यहीं खत्म होता है.

एपिसोड नंबर 2

इस एपिसोड की शुरुआत में मिताली नाम की एक लेडी उस की बेटी के साथ दिखती है. मिताली सब्जी वाले से लड़ रही थी, क्योंकि सब्जी वाले ने उसे ठगने की कोशिश की. यह एपिसोड एकदम बकवास है, उस में 3 कस्टम औफिसर को बहाल करते दिखाया गया है. यह नहीं बताया गया कि ये सस्पेंड कब और क्यों हुए थे. सब से बड़ी समस्या सीरीज के लेखन में है. कहानी तर्क के बजाय सुविधा के आधार पर आगे बढ़ती है. पात्र आवश्यकतानुसार कहानी में आतेजाते रहते हैं और महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम बिना उचित पृष्ठभूमि के घटित होते हैं.

मिताली भी कस्टम औफिसर है. वह तलाकशुदा महिला है, जो अपनी बेटी के साथ रहती है. इस के बाद हमें तीसरे औफिसर रविंद्र गुर्जर को दिखाते हैं. वह अपने एक जूनियर के पास उस समय जा कर खड़ा हो जाता है, जब वह अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रहा होता है. रविंद्र गुर्जर उस के पास खड़ा हो कर कहता है, कुलदीप डोरिया छत्तीसगढ़ से. वह पूछता है कौन हो तुम. रवि कहता है सांता क्लास. दिलचस्प बात है कि वह अपने अधिकारी को नहीं पहचानता और अधिकारी उसे जानता है.

जूनियर कस्टम औफिसर व्यक्ति से जा कर पूछताछ करता है. वह व्यक्ति अपनी जेब में रख कर छोटा खिलौने जैसा विदेशी जीवित बंदर ले कर आ रहा था. यह भारत में प्रतिबंधित है. रविंद्र गुर्जर के पिता सहित काफी रिश्तेदार सेंट्रल एक्साइज या इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में नौकरी करते है. सभी भ्रष्ट हैं और घूस लेले कर लग्जरी जिंदगी गुजार रहे हैं. रविंद्र गुर्जर को यह सब देख कर घूस लेने से नफरत हो गई.

रविंद्र गुर्जर भी कस्टम औफिसर है. उस ने कसम खाई कि वह कभी रिश्वत नहीं लेगा. रवि को ड्यूटी करते हुए 15 दिन हुए थे कि एयरपोर्ट पर काम करने वाली मीनाक्षी नाम की एक लड़की से प्यार हो गया. दोनों शादी करने वाले थे, लेकिन शादी वाले दिन लड़की कोर्ट नहीं पहुंची.

अर्जुन को वही 50 लाख रुपए वाला बैग हाथ में लिए दिखाया जाता है, जो उस ने फिरौती में तस्कर लड़की को रिहा कर के वसूला था. वह बैग जनसंपर्क अधिकारी को देता है. बताता भी है कि इस में 50 लाख रुपए हैं. यह रकम नौकरी जौइन करने के बाद दी गई है, यदि सस्पेंड रहता तो शायद यह रकम जमा नहीं करता. अब सीन प्रजेंट में आता है. ये तीनों दोस्त एक साथ नौकरी जौइन करते हैं.

फिर ये तीनों प्रकाश के पास आते हैं, जहां प्रकाश इन्हें बताता है कि मैं ने ही तुम तीनों को यहां बुलाया है, क्योंकि मुझे ईमानदार औफिसर चाहिए थे. अगर कहा जाए तो दूसरे एपिसोड का हीरो प्रकाश प्रतीत होता है. वह तस्करी की पूरी कहानी बताता है. कौन व्यक्ति तस्करों का मुखिया है, फिर मुखिया की पूरी फेमिली बैकग्राउंड भी इन तीनों के सामने पेश करता है. इतनी देर के वेब सीरीज में सीन बड़े उबाऊ हैं.

इस रैकेट का मास्टरमाइंड बड़ा चौधरी है. बड़ा चौधरी और छोटा चौधरी 2 भाई थे, जिस में से बड़ा चौधरी तो इंजीनियङ्क्षरग की पढ़ाई कर रहा था. छोटा चौधरी अवैध धंधे में घुस कर पैसा कमा रहा था. जैसे ही बड़ा चौधरी इंजीनियर बना तो उसी दौरान छोटे चौधरी को एक गैंग ने गोली मार दी. बड़े चौधरी को बहुत गुस्सा आया और उस ने अपनी इंजीनियर की डिग्री छोटे भाई की चिता के साथ जला दी. उस के बाद उस ने उस पूरे गैंग को खत्म कर के अपने भाई का बदला लिया. इस तरह वह भी गैरकानूनी दुनिया में घुस गया.

प्रकाश फिर बड़े चौधरी के गैंग के लोगों के बारे में बताता है. अन्ना नाम का एक आदमी मिडिल ईस्ट से माल इंडिया भेजता है. लंदन में चौधरी की साथी सैयदा है, जो वहां से धंधा चलाती है. यहां इंडिया में रमेश नाम का आदमी यह सब इंपोर्ट करता है. इसी तरह से इन का माल इंडिया में आता है. इधर हम देखते हैं कि अर्जुन ने एक नई टीम बनानी शुरू कर दी है, क्योंकि उसे सारी तस्करी रोकनी है और ये लोग जोरशोर से काम कर रहे थे, जिस में सारे ईमानदार औफिसर थे. अब एक दिन मिताली देखती है कि एक लड़की कुछ खिलौने इंडिया लाई है और पूछने पर वह कहती है कि यह तो बस खिलौने हैं. मिताली का जूनियर उसे खिलौने समझ कर छोडऩा चाहता है.

मिताली को उन टौयज की कीमत पता थी, जो करीब 50 लाख के थे. यह जान कर सब के होश उड़ जाते हैं. तब वह लड़की भी डर के मारे कस्टम ड्यूटी भरने के लिए मान जाती है. इधर अर्जुन को रवि बुला कर बताता है कि मैं ने एक लड़की प्रिया पर नजर रखी है. वह पिछले साल से कई बार अलदीरा और मुंबई ट्रैवल कर चुकी है और कई बार डोमेस्टिक फ्लाइट भी ले चुकी है. इसलिए मुझे उस पर शक है, क्योंकि वह तस्करी में शामिल हो सकती है.

तब अर्जुन बताता है कि यह तस्करी कर के सोना इंडिया में लाती है. फिर वह फ्लाइट के टौयलेट में सोना छिपा देती है. डोमेस्टिक फ्लाइट के जरिए प्रिया या दूसरा आदमी आ कर उस सोने को ले जाता है. यहां यह फिल्माने की कोशिश की गई है कि विदेश से आने के बाद वही हवाई जहाज फिर इंडिया में ही एक से दूसरे शहर जाता है, जिसे डोमेस्टिक फ्लाइट कहते हैं. इसी तरह से यह तस्करी चल रही है. जिस के बाद आज प्रिया जब दोबारा से अलदीरा से मुंबई आती है तो अर्जुन उसे पकड़ लेता है.

फिर वह चैकिंग करने के बहाने प्रिया के कान में कहता है कि तुम्हारा राज खुल गया है, इसलिए ध्यान से रहना और मैं तुम से होटल में आ कर मिलता हूं. यानी प्रिया के साथ अर्जुन भी मिला हुआ है और ये दोनों मिल कर तस्करी कर रहे होंगे. इस क्लाइमेक्स के साथ दूसरा एपिसोड खत्म होता है. दूसरे एपिसोड की सब से बड़ी कमी इस की बिखरी हुई पटकथा है. एक तरफ कस्टम अधिकारियों की जांच, दूसरी तरफ तस्करों का नेटवर्क और तीसरी तरफ राजनीतिक संरक्षण की झलक, इस से कथा प्रभाव नहीं छोड़ पाती.

एपिसोड नंबर 3

तीसरे एपिसोड से वेब सीरीज फिल्मी डगर पर चल पड़ती है. एक फ्लाइट अटेंडेंट प्रिया खूबचंदानी (जोया अफरोज) को मुंबई एयरपोर्ट पर गोल्ड स्मगलिंग के दौरान पकड़ लिया जाता है. अर्जुन उसे गिरफ्तार करने के बजाय एक डील औफर करता है. प्रिया को उन के लिए अंडरकवर काम करना होगा. प्रिया शुरू में डरती और हिचकिचाती रही, लेकिन सीधे उस ने अर्जुन का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, जैसा कि कहानी में होना ही था.

अर्जुन और प्रिया की बातचीत में पता चलता है कि प्रिया एयर होस्टेस है और वह कैप्टन शुभम कपूर से प्यार करती है. कैप्टन प्रिया के जरिए ही सोना इंडिया में स्मगल करता है. इस तरह कुछ रकम एकत्र होने पर दोनों शादी कर लेंगे, धंधा छोड़ देंगे. तब अर्जुन बताता है कि कैप्टन शादीशुदा है. उस की पत्नी रोहिणी कपूर है. बच्चे भी हैं. वह तुम्हें धोखा दे रहा है. यह जान कर तो प्रिया के होश उड़ जाते हैं और वह रोने लगती है. प्रिया के रोने की अदाकारी कोई खास नहीं है. प्रिया मुखबिरी का काम अर्जुन के लिए करने लगती है. एक सीन आता है कि प्रिया को वह कैप्टन शुभम कपूर और भी सोना स्मगलिंग के लिए देने आता है.

इस बार प्रिया वह गोल्ड कैप्टन के बैग में ही रख देती है, जिस के कारण चैकिंग के समय पर कैप्टन शुभम कपूर पकड़ा जाता है. उस के बाद अर्जुन प्रिया से एक बार फिर मिलता है और उसे कहता है कि तुम लड़की काम की हो, मेरे एक मिशन में सहयोगी बनोगी क्या? तब प्रिया कहती है कि इस के अलावा अब कोई रास्ता भी नहीं है. जिस के बाद अर्जुन ने प्रिया को अन्ना के भतीजे राहुल को अपने प्रेम के झांसे में फंसाने के लिए कहा और तब एयर होस्टेस बन कर ही प्रिया ने राहुल को अपने जाल में फंसाना शुरू कर दिया.

अब क्योंकि राहुल अकसर स्मगलिंग के सिलसिले में सफर करता था तो प्रिया का उसे जाल में फंसाना आसान हो गया. ये दोनों अकसर मिलने लगे. एक धोखा खाने के बाद भी प्रिया को मजबूरी में प्यार करने की ऐक्टिंग करनी पड़ रही है, यह जानते हुए भी कि यदि राहुल इसे सच्चा प्रेम समझेगा तो उस का क्या होगा. इस तरह प्रिया यहां नायिका की भूमिका में नहीं खलनायिका दिखाई गई है. सीरीज में प्रिया की एक मुसकराहट पर ही प्रेम का पूरा अध्याय लिख दिया गया है. एक दिन प्रिया ने रोते हुए कहा कि मेरी कंपनी मुझे जौब से निकालने वाली है. राहुल प्रिया की इस ऐक्टिंग को सच समझ बैठा, क्योंकि कहानी में यही होना था.

राहुल कहता है कि कोई बात नहीं तुम यह जौब छोड़ दो, मैं तुम्हें दूसरा काम दिला दूंगा. जिस के बाद राहुल प्रिया को अपने चाचा अन्ना और उस के साथी सुरेश के पास लाता है. इस तरह से प्रिया अन्ना के गैंग में मिल जाती है. ये लोग स्मगलिंग का काम साथ में करते हैं. अब सीन वर्तमान में आता है और प्रिया चुपचाप जा कर अर्जुन से मिलती है. यहां दोनों की प्रेम कहानी शुरू होने का संकेत मिलता है.

यहां प्रिया अर्जुन को कस्टम औफिसर की लिस्ट देती है, जो चौधरी के लिए काम करते हैं. उस में एक नाम देख कर वह भी चौंक जाता है. स्पेन का सीन दिखाया जाता है, जहां चौधरी की साथी सैयद स्मगलिंग का काम करवा रही थी. चौधरी को एक आदमी को मारते दिखाते हैं. उस ने चोरी करने की कोशिश की थी. यहां कहानी में सस्पेंस बनाने की कोशिश की गई है, लेकिन डायरेक्टर को सफलता नहीं मिली. प्रकाश कहता है कि यही तो ट्रिक है. तुम्हें वल्र्ड कस्टम्स कौन्फ्रेंस में जाना है. यह सूचना बड़े चौधरी के गैंग में हमारे भ्रष्ट अधिकारी द्वारा पहुंच जाएगी. जैसे ही चौधरी का माल इंडिया में आएगा, तुम यहां आ कर उसे पकड़ लेना.

इस के बाद अर्जुन वहां से सीधा पटेल नाम के औफिसर के पास आता है, जो चौधरी के लिए ही काम करता है. प्रिया द्वारा दी गई लिस्ट में उस का नाम था. वह उसे बता देता है कि हमारी ड्यूटी तो समिट के लिए लग गई है. यानी तब तक एयरपोर्ट पर पुराने औफिसर ही काम करेंगे. अब यह सुन कर पटेल चौधरी को कौल कर के बता देता है कि 2 दिन आप अपना माल मुंबई में आराम से भेज पाओगे, क्योंकि सारे पुराने औफिसर ड्यूटी पर आ रहे हैं. यह बात चौधरी अन्ना को बताता है और अन्ना सुरेश और प्रिया के साथ मिल कर स्मगलिंग की प्लानिंग करने लगता है. वहीं सैयद ने भी स्मगलिंग के लिए लोगों को काम देना शुरू कर दिया.

सारी तैयारी होने के बाद अर्जुन प्रिया को कौल कर के कहता है कि अब तुम वहां से निकल लो वरना जान का खतरा होगा. जैसे ही प्रिया अपनी पैकिंग करने लगती है, तभी वहां राहुल आ जाता है. वह प्रिया को अपने साथ चलने को कहता है. तब राहुल को शक न हो, इसलिए प्रिया भी उस के साथ चल देती है. रास्ते में राहुल कहता है कि चाचा ने कहा है कि जब तक माल मुंबई में लैंड नहीं हो जाता, तब तक तुम मेरे साथ रहोगी. यानी अन्ना को प्रिया पर शक था. खैर, थोड़ी देर में राहुल की कार को पुलिस वाले घेर लेते हैं और ये लोग राहुल को ड्रग्स ले जाने के जुर्म में अरेस्ट कर लेते हैं.

यहां डायरेक्टर ने जबरन दोनों के पास ड्रग्स बरामद करा दी, जबकि दोनों का ड्रग्स ले जाने का कोई कार्यक्रम ही नहीं था. वहां की पुलिस दोनों को अलगअलग कार में बैठा कर ले जाती है. तीसरा एपिसोड यहीं खत्म होता है.

एपिसोड नंबर 4

चौथे एपिसोड में अर्जुन मीणा (इमरान हाशमी) और उस के बौस प्रकाश कुमार (अनुराग सिन्हा) टीम को एक इंटरनैशनल कौंफ्रेंस में भेज देते हैं. इस से बड़ा चौधरी सिंडिकेट (शरद केलकर) को लगता है कि मुंबई एयरपोर्ट एक पूरा दिन ‘ईमानदार’ अधिकारियों से खाली रहेगा.

एपिसोड की शुरुआत में दिखाते हैं कि यह सब अर्जुन की ही चाल थी. वह जानता था कि प्रिया की जान को खतरा होगा, इसलिए उस ने अपने साथी गोविंद जो अलराह में अच्छी पोस्ट पर है, उसे फोन कर के राहुल को फंसाने के लिए कहा था, ताकि प्रिया को निकाला जा सके. गोविंद प्रिया को उस का पासपोर्ट दे कर इंडिया भेज देता है. गोविंद की टीम ने राहुल को कहीं रेगिस्तान के बीचोंबीच छोड़ दिया था, ताकि राहुल अन्ना से संपर्क न कर पाए.

उधर चौधरी के सारे साथियों ने अपनेअपने एसेट मुंबई में भेजने शुरू कर दिए हैं, जिन के पास करोड़ों का माल था. यहां जैसे ही प्लेन लैंड करने वाला था, उस से पहले अर्जुन समिट से एयरपोर्ट आता है और सारे औफिसर्स को बुला कर मीटिंग करता है. तब यहां अर्जुन को देख कर पटेल के होश उड़ गए. अर्जुन कहता है कि यहां कई करोड़ का माल लैंड होने वाला है, इसलिए आप सब अपनेअपने फोन जमा कर दीजिए और आज हमें उन्हें रंगेहाथों पकडऩा है.

जिन पैसेंजर को सब से पहले जाने दिया था, उसे पकडऩे की जिम्मेदारी पटेल की थी, इसलिए वह उन पैसेंजर के पीछे भागता है. पर वे निकल गए थे. तब पटेल एक कार से उन का पीछा करता है. वहीं यहां एयरपोर्ट पर जैसे ही बाकी तस्करी वाले लोग लैंड करते हैं. अर्जुन की टीम सब को पकडऩे लगती है और इन लोगों ने कई सौ करोड़ का माल देखते ही देखते पकड़ लिया था. वहीं पटेल जब उन लोगों का पीछा कर रहा था, तभी उसे रमेश के लोग पकड़ लेते हैं. इधर राहुल अभी भी रेगिस्तान में भटक रहा है. यहीं पर चौथा एपिसोड खत्म होता है.

एपिसोड नंबर 5

पांचवें एपिसोड की शुरुआत में प्रिया इंडिया सहीसलामत लौट आई. अर्जुन से प्रिया की मुलाकात दिखाई जाती है. अर्जुन एक क्रिकेटर के बारे में बताता है, जो विदेश में 15 करोड़ की शौपिंग कर चुका है और वह किसी तरह टैक्स बचाने की कोशिश कर रहा है. फिर अर्जुन कहता है कि जैसे इंडिया के पास भारतीय खुफिया एजेंसी रा ( रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) है वैसे ही कस्टम औफिसर के पास कौइन (सीमा शुल्क विदेशी खुफिया नेटवर्क) नाम की एजेंसी है, जो विदेश से औपरेट करती है.

कोई भी इंडियन विदेश में ज्यादा पैसा उड़ाता है, उस के बारे में कौइन कस्टम वालों को बता देते हैं. वह गोविंद भी कौइन एजेंसी के अंडर ही काम करता है. अगले सीन में अन्ना को राहुल मिल गया है. फोन करते हुए तो सही हालत में दिखाते हैं, मगर वापिस आने पर गंभीर हालत में बैड पर दिखाया जाता है. वहीं इतना सारा माल पकड़े जाने की खबर चौधरी को मिलती है तो उसे जिस तरह आगबबूला होना चाहिए था, यहां वैसी अदाकारी देखने को नहीं मिली.

पता चलता है कि सक्सेना भी पहले कस्टम औफिसर था, जो काफी ईमानदार था. इसलिए अर्जुन उसे बहुत मानता है. कहानी में  इस की कोई जरूरत नहीं थी. इधर आज प्रकाश को उस के सीनियर मिलने के लिए बुलाते हैं और कहते हैं कि तुम ने काफी अच्छा काम किया है. अब बैंकाक में एक समिट है. मैं तो बिजी हूं, इसलिए तुम्हें जाना पड़ेगा. जिस पर प्रकाश मान जाता है. उधर प्रिया को जब अर्जुन सुरक्षित स्थान पर ले जा रहा था, तभी वहां चौधरी के लोग आ जाते हैं. तब यहां पता चलता है कि यह तो मिताली है.

यह जादू कैसे हुआ, पूरी सीरीज में पता ही नहीं चल सका. अर्जुन जब बुरके में खड़ी महिला को बुलाता है तो प्रिया के नाम से बुलाता है, जबकि उस स्थान पर ऐसा कोई नहीं था, जो सुन रहा हो कि अर्जुन ने महिला को किस नाम से बुलाया है. अर्जुन ने मिताली को उस के नाम से क्यों नहीं पुकारा, यह रहस्य बना रहा. सीन बहुत जल्दीजल्दी बदल रहे हैं स्टोरी की रफ्तार बहुत धीमी हो गई है. बड़ा चौधरी और प्रकाश के बीच वार्ता में जान नहीं है न तो बड़ा चौधरी तस्करों का हैड लग रहा है और न ही प्रकाश एक सच्चा और ईमानदार अधिकारी. फिर चौधरी प्रकाश को ब्लैंक चैक देता है ताकि वह उस का माल न रोके. पर प्रकाश उस के मुंह पर मना कर के चला जाता है.

चौधरी को यहां जिस तरह से गुस्से का इजहार करना चाहिए, कर नहीं सका है. उधर कस्टडी में असलम मुकीम पर गुस्सा होता है. मुकीम कहता है कि उस ने जो जानकारी दी है, वह अदालत में उस से पलट जाएगा. तभी असलम अपनी पत्नी से फोन पर बात करता है और उस के बाद अचानक मुकीम का सिर दीवार पर दे मारता है. मुकीम की वहीं पर मौत हो जाती है. असलम अन्ना या बड़े चौधरी से बात कर के किसी योजना के तहत हत्या करता तो बात समझ में आती.

इधर अर्जुन की टीम रमेश के घर पहुंचती है. तलाशी में उन्हें कुछ नहीं मिलता, लेकिन जूनियर औफिसर को मंदिर के पास एक गुप्त बटन मिलता है. उसे दबाते ही एक तहखाना खुलता है, जहां रमेश छिपा था. अचानक गोली चलने की आवाज आती है और रमेश मर जाता है. एक तरफ मुकीम की मौत और दूसरी तरफ रमेश का एनकाउंटर. सब कुछ उलझ गया है. प्रकाश बैंकाक से मुंबई लौटता है और अपनी टीम पर बुरी तरह भड़क पड़ता है. वह कहता है तुम लोग क्या कर रहे हो? एक ही दिन में कस्टडी में मौत.

आखिर डायरेक्टर दिखाना क्या चाहता है. उधर अर्जुन जल्दी से वहां आता है तो देखता है कि रमेश मरा पड़ा है और कुलवीर रो रहा है. वहीं कस्टडी में उस आदमी ने अपने साथी को मार दिया था और वह इस का इलजाम अर्जुन की टीम पर लगा रहा था कि तुम लोगों ने इसे मार डाला, जिस से सीनियर भी हैरान थे. यहीं पर पांचवां एपिसोड खत्म होता है.

एपिसोड नंबर 6

छठे एपिसोड की शुरुआत में प्रकाश अपनी टीम के पास आता है और अर्जुन पर भड़कने लगता है कि यह सब कैसे हो गया. तब कुलवीर बताता है कि मैं तो बस रमेश भाई को ढूंढने गया था. पर उन्होंने मुझ पर बंदूक तान दी और हाथापाई में उन पर गोली चल गई. यह सब सुनने के बाद प्रकाश अपने सीनियर से आ कर मिलता है. जिस पर सीनियर कह रहे थे कि इन सारे औफिसर को सस्पेंड किया जाएगा. घटनाएं इतनी गंभीर होने के बाद भी सरकार और उस के मंत्री की भूमिका कहीं नहीं दिखाई जा रही. निलंबित करने को प्रकाश मना कर देता है. धमकी देता है कि मैं सब को बता दूंगा कि आप चौधरी से मिले हुए हो.

अगले सीन में लोग रवि पर नकली गोली चलाते हैं. चेतावनी देते हैं कि गोली अगली बार असली होगी. जिस के बाद सारे औफिसर इकट्ठा होते हैं और कहते हैं कि चौधरी हम सब को मारने की कोशिश कर रहा है. तब प्रकाश कहता है कि डरो मत ऐसा करो कुछ दिन चौधरी का माल मत पकड़ो, वरना वह कुछ भी कर सकता है. कस्टम अधिकारियों की टीम तस्कर माफियाओं से डरती हुई दिखाई गई है. जबकि काररवाई करने का आदेश सरकार के मंत्री ने दिया है. उन का खौफ दूर करने के लिए कुछ भी नहीं दिखाया गया.

अगले दिन चौधरी का माल 2 लड़के ले कर जा रहे होते हैं. अर्जुन सहित कई अधिकारी उन पर नजर रखे हुए हैं. तब अर्जुन उन लड़कों को पकड़ कर जेल में डाल देता है और उन के बैग से सोना मिलता है, उसे जब्त कर लिया जाता है. यह न्यूज जब चौधरी देखता है तो उसे बहुत गुस्सा आता है कि यह लोग नहीं सुधरने वाले. यह सवाल उठता है कि इस फिल्मी अंदाज में हुई फाइटिंग मारपीट की पूरी घटना की वीडियो किस ने बनाई. यदि सीसीटीवी में कैद हुई तो वायरल कब और किस ने की, जो चौधरी तक पहुंच गई.

तभी चौधरी के पास शेख का फोन आता है जो कहता है कि तुम से बौस मिलना चाहते हैं, क्योंकि तुम्हारे कारण बहुत नुकसान हो गया, इसलिए जल्दी से अलदीरा आ जाओ.  चौधरी भी मान जाता है. यहां रवि से मिलने उस की गर्लफ्रेंड मीनाक्षी आती है जो शादी के समय इसलिए भाग गई थी कि रवि एक ईमानदार अधिकारी है, वेतन मात्र में जिंदगी कैसे गुजरेगी. वह कहती है कि मुझे लगा था कि ईमानदारी बेकार होती है, पर तुम्हारी आज बहादुरी देख कर मुझे समझ आ गया कि तुम कितने अच्छे लड़ाके हो.

जब अर्जुन अपने घर आता है, तभी उस के मोबाइल पर चौधरी का फोन आता है जो कहता है कि तेरा दोस्त तो मरने वाला है. यह सुन कर अर्जुन तुरंत रवि के घर की ओर भागता है. उस से पहले बदमाशों और रवि के बीच फाइटिंग दिखाई जाती है. फाइटिंग में कोई नयापन नहीं है, वही घिसापिटा फार्मूला फिल्मों जैसा है. अर्जुन वहां आता है तो देखता है कि यहां रवि की लाश पड़ी है. यह देख कर अर्जुन को खूब रोता हुआ डायरेक्टर दिखाना चाहता था, लेकिन एक मंझे हुए कलाकार से भी यह सीन प्रभावी नहीं हो सका. जिस के बाद वहां पुलिस जांच के लिए आती है और इन्हें तलाशी के समय  रुपए का एक बैग मिलता है. उस बैग में 50 लाख रुपए हैं, यह बात बिना गिने ही पता चल जाती है.

इस बैग में भी वजन 50 लाख रुपए के वजन के बराबर प्रतीत नहीं होता. अर्जुन समझ जाता है कि चौधरी रवि का नाम बदनाम करना चाहता है. वहीं अर्जुन की नजर कुलवीर पर पड़ती है जो किसी से फोन पर हंसते हुए बात कर रहा था. इसलिए अर्जुन कुलवीर धुरिया को बहाना बना कर अपने साथ थाने ले कर आता है और वहां आते ही कुलवीर को पीटने लगता है कि सच बता तू किस से मिला है. कुलवीर डर के मारे बता देता है. अर्जुन कुलवीर को अरेस्ट करवा देता है. तभी अर्जुन को चौधरी का फोन आता है जो कहता है कि अब बारी प्रिया की है. उसे बचा सकता है तो बचा ले. यह सुन कर अर्जुन की जो दशा होनी चाहिए, इतना मंझा हुआ कलाकार भी सही से नहीं कर सका. यहीं पर छठां एपिसोड खत्म होता है.

एपिसोड नंबर 7

सातवें एपिसोड में कहींकहीं घालमेल इतना ज्यादा हो जाता है कि कहानी थोड़ी बनावटी लगने लगती है. कुछ किरदारों का अचानक पलटना और रिश्तों का उलझ जाना दर्शकों को चौंकाता जरूर है, पर पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाता. मुखबिर कौन? अधिकारी कौन? तस्कर कौन? सब एक ही थाली के चट्टेबट्टे दिखा दिए गए. शुरुआत में बड़े चौधरी के डर से अर्जुन प्रिया को कहीं सुरक्षित स्थान पर ले जाने को कहता है. प्रिया के चेहरे से कोई दहशत नजर नहीं आती.

श्रीकांत सक्सेना की भूमिका अनावश्यक है. श्रीकांत सक्सेना को उसी तरह एक तस्कर को मुखबिर बनाते हुए दिखाया है, जिस तरह तस्करी में पकड़ी गई प्रिया को अर्जुन ने मुखबिर बनाया था. अर्जुन तुरंत श्रीकांत सक्सेना से मिलने उन के आवास पर पहुंचता है. चौधरी और शर्मा वापस अलदीरा पहुंचते हैं. वहां का डौन ओमर पैसों के लिए उन पर प्रेशर बनाता है. इसी बीच चौधरी को किसी का फोन आता है. वह फोन उठा कर बाहर चला जाता है. बड़े डौन के सामने छोटा डौन को ऐसे ही उठ कर चला जाना सीन की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न लगता है.

फोन करने वाला आदमी चौधरी को सावधान करता है. प्रिया को सिर्फ सोने और ड्रग्स की खबर थी. उसे घडिय़ों के बारे में कुछ नहीं पता था. इस का मतलब आप के गैंग में कोई और है जो कस्टम को खबर दे रहा है. उसे ढूंढिए वरना हमारा बहुत नुकसान होगा. तभी कैमरे पर उस फोन करने वाले का चेहरा दिखता है और यहां कहानी का सब से बड़ा ट्विस्ट सामने आता है.

वह आदमी कोई और नहीं, बल्कि प्रकाश है. जी हां, प्रकाश एक ईमानदार औफिसर का मुखौटा पहन कर असल में चौधरी का साथ दे रहा था. फ्लैशबैक में दिखाया जाता है कि प्रकाश ने 20 फीसदी मुनाफे के बदले चौधरी का माल सुरक्षित निकलवाने का सौदा किया है. यहां तक कि कुलवीर को पैसे का लालच दे कर रमेश का खून करवाने का आइडिया भी प्रकाश का ही था.

वापस अलदीरा में बड़ा चौधरी ओमर को भरोसा दिलाता है कि अगले हफ्ते तक सारे पैसे चुका देगा. वह बदले में 2 टन माल मतलब सोना मांगता है और कहता है इस बार माल पकडऩे की हिम्मत कोई नहीं करेगा. मुझ पर भरोसा रखिए. ओमर भी इस बात के लिए मान जाता है. इस के बाद बड़ा चौधरी और शर्मा होटल जाते हैं. जहां सुरेश, अन्ना और राहुल पहले से मौजूद थे. वे सब मिल कर इस बार 2 टन सोना इंडिया भेजने का प्लान बनाते हैं. सुरेश एक बहुत ही खतरनाक आइडिया देता है. वह कहता है कि अभी हाल ही में एक इंडियन टूरिस्ट बस का एक्सीडेंट हुआ है, जिस में कई लोग मारे गए हैं. वह इन लाशों के कौफिन के अंदर सोना छिपा कर इंडिया भेजेंगे.

बड़ा चौधरी को यह आइडिया पसंद आता है और वह तैयारी शुरू करते हैं. दूसरी तरफ अर्जुन औफिसर श्रीकांत के घर पहुंचता है. श्रीकांत उसे देखते ही पहचान लेते हैं. श्रीकांत बताते हैं कि आज से 12 साल पहले जब मुझ पर झूठा इल्जाम लगा कर नौकरी से निकाला गया था. तब अलदीरा सिंडिकेट में मेरा एक खबरी जो आज भी वहां ऐक्टिव है. उसी ने मुझे घडिय़ों की जानकारी दी थी और मैं ने वह बात गुर्जर को बताई थी. गुर्जर ने मुझ से कहा था कि अगर उसे कुछ हो जाए तो मैं यह जानकारी तुम्हें दे दूं.

तभी श्रीकांत को एक फोन आता है. वह अर्जुन से कहता है कि बिल्कुल सही वक्त पर कौल आया है. फोन करने वाला आदमी कोई और नहीं बल्कि सुरेश था. सुरेश का असली नाम जुबैर है. वह सुरेश बन कर बड़े चौधरी के गैंग में काम करता है. वह श्रीकांत का खबरी है. सुरेश खबर देता है कि 40 ताबूतों में 2 टन सोना भर कर इंडिया भेजा जा रहा है. यहां कहानी 2012 के फ्लैशबैक में जाती है. उस वक्त श्रीकांत ड्यूटी पर थे और उन्होंने सुरेश को तस्करी करते हुए रंगेहाथों पकड़ा था. सुरेश ने रोते हुए बताया था कि उस की पत्नी बहुत बीमार है और उसे पैसों की सख्त जरूरत है.

तब श्रीकांत ने उसे एक शर्त पर छोड़ा था कि वह बड़े चौधरी के गैंग में रह कर उन के लिए जासूसी करेगा. तब से सुरेश उन का खबरी बना हुआ है. वह बात करने के लिए जैसे ही एक तरफ हटता है, राहुल पीछे से आ कर उस के सिर पर वार कर देता है और उसे बेहोश कर देता है. इस के बाद बड़ा चौधरी सारा सोना कारगो के जरिए इंडिया रवाना कर देता है. अर्जुन अपनी पूरी टीम और फोर्स ले कर एयरपोर्ट पहुंच चुका है. कारगो से जब ताबूत आते हैं तो अर्जुन ने उन की तुरंत जांच शुरू कर दी.

लेकिन टीम को उन में कोई सोना नहीं मिलता, जिसे देख कर सब हैरान रह गए. फ्लैशबैक में दिखाया जाता है कि बड़ा चौधरी को पहले से ही शक हो गया था कि सुरेश ही गद्ïदार है. इसीलिए जब सुरेश ने ताबूतों में सोना भेजने का आइडिया दिया तो चौधरी ने उसे मानने का नाटक किया था. लेकिन जैसे ही सुरेश ने श्रीकांत को फोन किया तो राहुल ने उसे पकड़ लिया. असली प्लान यह था कि सोना ताबूतों में नहीं, बल्कि डिप्लोमेटिक कारगो के जरिए फरनीचर में छिपा कर दूसरी फ्लाइट से भेजा जाएगा.

श्रीकांत तुरंत अर्जुन को फोन कर के बताता है कि मेरा खबरी पकड़ा गया. उस की जान खतरे में है. उसे कैसे भी अलदीरा से निकालो. उधर एयरपोर्ट पर सारा सोना फरनीचर के अंदर इंडिया पहुंच चुका था और अर्जुन को इस की भनक भी नहीं थी. उस फरनीचर को चैक करने के लिए खुद प्रकाश वहां पहुंच जाता है ताकि वह उसे सुरक्षित बाहर निकाल सके. अलदीरा में राहुल अब प्रिया को चौधरी के पास ले आता है. प्रिया राहुल के पास कैसे और क्यों आई और वह उसे चौधरी के पास ले कर क्यों गया, सीरीज में स्पष्ट नहीं हो सका.

उधर अलदीरा में इस से पहले कि चौधरी सुरेश का मुंह खुलवा पाता, वहां की आर्मी ने चौधरी के होटल को चारों तरफ से घेर लिया और उस के गुंडों को सरेंडर करने के लिए कहा. गोविंद वहां पहुंच कर प्रिया को सुरक्षित बाहर निकालता है. सुरेश अपनी जीत देख कर चौधरी पर हंसने लगता है. आखिरकार आर्मी बड़ा चौधरी और उस के पूरे गैंग को गिरफ्तार कर लेती है. इस तरह अर्जुन के भेजे हुए जवानों ने चौधरी का पूरा सिंडिकेट और बिजनैस बरबाद कर दिया.

 

इस के बाद प्रकाश को गिरफ्तार कर लिया जाता है. अर्जुन सारा सोना जब्त कर के कस्टम औफिस ले जाता है. आखिरकार अर्जुन ने अपनी बहादुरी और दिमाग से इस मिशन को पूरा किया और चौधरी की स्मगलिंग को जड़ से खत्म कर दिया. औफिस के सभी कर्मचारी खड़े हो कर तालियों के साथ अर्जुन का स्वागत करते हैं और उसे सम्मान देते हैं और यहीं पर यह कहानी खत्म होती है.

अमृता खानविलकर

अमृता खानविलकर मुख्यरूप से मराठी और हिंदी फिल्मों तथा वेब सीरीज में अपने काम के लिए जानी जाती है. उन का जन्म 23 नवंबर, 1984 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था. वह मराठी सिनेमा की सब से अधिक पारिश्रमिक वाली अभिनेत्रियों में से एक है. उस ने महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार, जी चित्र गौरव पुरस्कार तथा 3 महाराष्ट्रचा फेवरिट कोन पुरस्कार जैसे सम्मान प्राप्त किए हैं. उस के पापा अजित खानविलकर और मम्मी गौरी खानविलकर हैं. उस की एक छोटी बहन अदिति है, जो एयर होस्टेस है. 1993 के मुंबई दंगों के बाद उस का परिवार 1994 में पुणे चला गया.

अमृता ने मुंबई में महिला संघ स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, उस के बाद पुणे के कर्नाटक हाईस्कूल और मराठवाड़ा मित्र मंडल कालेज औफ कौमर्स से आगे की पढ़ाई पूरी की. अमृता ने अपने करिअर की शुरुआत 2004 में रियलिटी शो ‘इंडियाज बेस्ट सिनेस्टार्स की खोज’ से की, जहां वह एक प्रतियोगी के रूप में शामिल हुई. उसी वर्ष उस ने शौर्ट फिल्म ‘सांझ’ में काम किया, जो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुकी है. उस की पहली मराठी फिल्म ‘गोलमाल’ थी, जबकि हिंदी डेब्यू ‘मुंबई सालसा’ से हुआ.

रियलिटी शोज में उस ने ‘नच बलिए 7’ जीता और ‘फीयर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी 10’ में भाग लिया. ओटीटी प्लेटफार्म पर डेब्यू ‘डैमेज्ड’ से हुआ, जहां नकारात्मक भूमिका के लिए पुरस्कार मिले. अमृता खानविलकर और हिमांशु मल्होत्रा की प्रेम कहानी फिल्मी दुनिया की उन कहानियों में से है, जो दोस्ती से शुरू हो कर शादी तक पहुंची. दोनों की मुलाकात साल 2004 में एक टैलेंट हंट शो के दौरान हुई थी. उस समय दोनों ही अभिनय की दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे.

यह दोस्ती एक मजबूत रिश्ते में बदल गई. करीब 10 साल तक दोनों ने एकदूसरे को समझा, साथ समय बिताया और अपने करिअर पर ध्यान देते हुए रिश्ते को मजबूत बनाया. 24 जनवरी, 2015 को उन्होंने परिवार और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में शादी कर ली.

अनुराग सिन्हा

अभिनेता अनुराग सिन्हा का जन्म पटना, बिहार के एक प्रतिष्ठित और शिक्षित परिवार में हुआ था. उस के जीवन का सब से महत्त्वपूर्ण हिस्सा उस की पत्नी मिताक्षरा कुमार हैं. अनुराग और मिताक्षरा का विवाह 19 नवंबर, 2009 को हुआ था. दोनों की मुलाकात भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान में हुई. उन्होंने ग्वालियर के मशहूर द सिंधिया स्कूल से पढ़ाई की. दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कालेज से ग्रैजुएशन किया. बचपन से ही उसे अभिनय और कला के क्षेत्र में रुचि थी. स्कूल और कालेज के समय से ही वह नाटक और मंचीय प्रस्तुतियों में सक्रिय रहा. उस की अभिनय प्रतिभा को देखते हुए शिक्षकों और साथियों ने उसे आगे इस क्षेत्र में करिअर बनाने के लिए प्रेरित किया.

पढ़ाई पूरी करने के बाद अनुराग ने अभिनय की बारीकियों को समझने के लिए रंगमंच और अभिनय प्रशिक्षण से खुद को जोड़ा. थिएटर ने उस के अभिनय को निखारने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई.

‘ब्लैक एंड व्हाइट’ उस की पहली फिल्म थी. इस में उस ने नुमैर काजी नामक एक आत्मघाती हमलावर की मुख्य भूमिका निभाई थी. ‘सनम तेरी कसम’ फिल्म में उस ने अभिमन्यु का किरदार निभाया था.

‘शैडो असैसिन्स’ फिल्म में उस के अभिनय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया और इस के लिए उसे टोरंटो अल्टरनेटिव फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार भी मिला. ‘तस्करी’ वेब सीरीज में असिस्टेंट कमिश्नर प्रकाश कुमार की भूमिका अनुराग ने ही निभाई है. Web Series

 

 

 

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