Crime Story Hindi: प्रौपर्टी डीलर महेंद्र सिंह को बुलाया तो था मकान देखने के लिए, लेकिन उन के फ्लैट पर पहुंचते ही उन्हें कैद कर लिया गया और बदले में उन से 40 लाख रुपए तो वसूले ही गए, मुंह बंद रखने के लिए उन की एक महिला के साथ ब्लू फिल्म भी बना ली गई.

प्रौपर्टी डीलिंग का काम करने वाले महेंद्र सिंह यादव पश्चिमी दिल्ली के नांगलोई इलाके के कमरुद्दीन नगर में रहते थे. वहीं पर उन का औफिस भी था. कमीशन और ज्यादा कमाई के चक्कर में वह दूसरे शहरों की भी प्रौपर्टी की खरीदफरोख्त करा देते थे. 8 दिसंबर, 2015 को वह अपने औफिस में बैठे थे, तभी उन के मोबाइल पर किसी महिला का फोन आया. उस ने कहा, ‘‘यादवजी, मैं विकासनगर, उत्तम नगर में रहती हूं. मैं अपना मकान बेचना चाहती हूं.’’

पार्टी की ओर से फोन आने पर महेंद्र सिंह खुश हुए. उन्होंने महिला से मकान के बारे में पूरी जानकारी ले ली. महिला ने उसी समय उन से मकान देखने को कहा, लेकिन उस समय उन्हें कहीं और जाना था, इसलिए उन्होंने महिला से कहा कि आज नहीं, फिर कभी आ कर वह मकान देख लेंगे.

अगले दिन यानी 9 दिसंबर को उन के मोबाइल पर महिला का फोन फिर आया. महिला ने कहा, ‘‘यादवजी, दरअसल मुझे पैसों की सख्त जरूरत है, जिस की वजह से मुझे मकान बेचना पड़ रहा है. इसीलिए मैं कह रही हूं कि आप मेरा मकान देख कर जल्द से जल्द बिकवा दें.’’

‘‘मैडम, आप चाह रही हैं कि मकान जल्दी बिक जाए, ऐसा संभव नहीं है, क्योंकि आजकल प्रौपर्टी के रेट काफी गिर गए हैं. खरीदार जल्दी मिलते नहीं हैं. जैसे ही मुझे टाइम मिलेगा, मैं आप के यहां पहुंच जाऊंगा.’’ महेंद्र सिंह ने कहा.

उसी दिन उस महिला का एक बार फिर फोन आया, लेकिन काम की व्यस्तता की वजह से वह उस का मकान देखने नहीं जा सके. 10 दिसंबर को शाम 5 बजे महिला ने फोन कर के कहा, ‘‘यादवजी, मैं इस समय रणहोला बसस्टाप पर खड़ी हूं. अगर आप अभी आ जाते तो मैं आप के साथ चल कर मकान दिखा देती, मकान देख कर आप चले जाना.’’

महिला के बारबार फोन करने से महेंद्र सिंह को लगा कि शायद उसे पैसों की सख्त जरूरत है, तभी वह मकान बेचने में इतनी जल्दी कर रही है. फिर मकान देखने में हर्ज ही क्या है. जब कोई ग्राहक मिलेगा, उसे मकान का सौदा करा देंगे. यही सोच कर वह अपनी मोटरसाइकिल से रणहौला बसस्टाप की तरफ चल दिए. बसस्टाप पर जो लोग खड़े थे, उन में कई महिलाएं थीं. महेंद्र सिंह महिला को पहचानते नहीं थे, इसलिए उस की पहचान के लिए उन्होंने अपने मोबाइल से उस का नंबर मिलाया तो सामने खड़ी 24-25 साल की एक महिला ने फोन रिसीव कर लिया. वह समझ गए कि यही वह महिला है, जिस ने फोन कर के उन्हें बुलाया है. वह कुछ कहते, महिला खुद ही उन की मोटरसाइकिल के पास आ गई. वह जींस की पैंट और कोट पहने थी.

औपचारिक बातचीत के बाद महिला उन की मोटरसाइकिल पर पीछे बैठ कर विकासनगर की ओर चलने को कहा. उसे ले कर महेंद्र सिंह दोढाई किलोमीटर गए होंगे कि एक मोटरसाइकिल आ कर उन के बराबर में चलने लगी. उस मोटरसाइकिल पर सवार आदमी की ओर इशारा कर के महिला ने कहा, ‘‘यादवजी, यह मेरे पति आ गए. आप मुझे उतार दीजिए, अब मैं इन के साथ चलूंगी. आप हमारी मोटरसाइकिल के पीछेपीछे आ जाइए.’’

महेंद्र सिंह ने मोटरसाइकिल रोकी तो बराबर में चल रहे युवक ने भी मोटरसाइकिल रोक दी. महिला जा कर युवक की मोटरसाइकिल पर बैठ गई. इस के बाद महेंद्र सिंह उस युवक की मोटरसाइकिल के पीछेपीछे अपनी मोटरसाइकिल से चलने लगे. कई गलियों से निकल कर वह युवक विकासनगर में एक आयुर्वेदिक दवा स्टोर के पास जा कर रुक गया. महेंद्र सिंह भी उसे देख कर वहीं रुक गए. वहीं सड़क किनारे महिला ने उन की मोटरसाइकिल खड़ी करा दी. इस के बाद वह महेंद्र सिंह को एक बिल्डिंग की चौथी मंजिल पर ले गई.

दरवाजे का ताला खोल कर महिला महेंद्र को फ्लैट में ले गई. उस महिला के साथ जो युवक था, वह भी फ्लैट में आ गया था. सोफा पर बैठने के बाद महिला ने महेंद्र सिंह को पानी दिया. वह पानी पी रहे थे कि तभी 3 युवक फ्लैट में आ पहुंचे. आते ही उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया. वे मंकी कैप पहने थे और काले चश्मे लगाए थे. उन युवकों ने महेंद्र सिंह से कपड़े उतारने को कहा. इस पर महेंद्र सिंह चौंके कि वे यह क्या कह रहे हैं? उन्हें तो मकान दिखाने के लिए बुलाया गया था. वह महिला की तरफ देखने लगे. लेकिन वह कुछ नहीं बोली.

महेंद्र सिंह ने डरते हुए उन युवकों से पूछा कि वह उन से कपड़े उतारने को क्यों कह रहे हैं? एक युवक ने कहा, ‘‘हमें तेरे मर्डर की 25 लाख की सुपारी मिली है.’’

‘‘सुपारी..किस ने दी है सुपारी?’’ महेंद्र सिंह ने चौंक कर पूछा.

‘‘तुझे इन बातों से क्या मतलब. तुझ से जितना कहा जा रहा है, उतना कर.’’ कह कर युवकों ने उन की पिटाई शुरू कर दी.

डर की वजह से महेंद्र सिंह ने अपने कपड़े उतार दिए. उन्हें लगा कि किसी साजिश के तहत उन्हें यहां बुलाया गया है. कपड़े उतारने के बाद युवकों ने महेंद्र सिंह के हाथ पीछे कर के बांध दिए. इस के बाद वे उन की लातघूंसों से पिटाई करने लगे. महेंद्र सिंह उन से अपनी जान बख्शने के लिए गिड़गिड़ा रहे थे.

‘‘हम तेरी जान बख्श देंगे, लेकिन उस के बदले हमें 50 लाख रुपए चाहिए.’’ एक युवक ने कहा.

‘‘यह तो बहुत ज्यादा हैं, इतने पैसे मेरे पास नहीं है.’’ महेंद्र सिंह ने कहा.

युवकों ने तमंचे निकाल कर उन के सामने उन में गोलियां भरीं. इस के बाद दाईं और बाईं ओर पेट पर सटा दिया, एक अन्य युवक ने चाकू निकाल कर पेट के बीचोबीच लगा दिया. इस से महेंद्र और घबरा गए. उन के मुंह से एक शब्द भी नहीं निकल रहा था. उन लोगों ने महेंद्र सिंह का मोबाइल, जो उन्होंने अपने कब्जे में ले रखा था, उन्हें देते हुए कहा, ‘‘अब तुम अपने घर वालों को फोन कर के कहो कि तुम एक प्लौट देखने हरिद्वार जा रहे हो, वहां से 2 दिन बाद लौटोगे.’’

डर की वजह से महेंद्र सिंह ने पत्नी को फोन कर के वैसा ही कह दिया, जैसा वे लोग कहलवाना चाहते थे. इस के बाद उन्होंने उन के पैर बांध कर फर्श पर नंगा छोड़ दिया. कड़ाके की सर्दी में महेंद्र सिंह फर्श पर पड़े थे. जब वह ठंड से कांपने लगे तो महिला ने उन के ऊपर कंबल डाल दिया. अगले दिन उन लोगों ने कहा, ‘‘अब तू यह बता कि तुझे पैसे कौन दे सकता है? जो लोग तुझे 50 लाख रुपए दे सकते हों, उन्हें अभी फोन करो.’’

महेंद्र सिंह परेशान थे कि वह पैसों के लिए किस से बात करें. घर पर भी इतने पैसे नहीं थे. पत्नी इतनी बड़ी रकम का इंतजाम नहीं कर सकती थी. लिहाजा उन्होंने अपने दोस्त तिलक को फोन किया. लेकिन तिलक ने उन का फोन रिसीव ही नहीं किया. उन की घबराहट बढ़ गई. इस के बाद उन्होंने अपने साले रमेश को फोन किया. उन्होंने रमेश से कहा, ‘‘मैं ने हरिद्वार में 50 लाख रुपए में 600 वर्गगज के प्लौट का सौदा किया है. तुम इतने पैसों का इंतजाम कर लो. मैं इस समय घर नहीं आ सकता. जैसे ही पैसों का इंतजाम हो जाए, बता देना. मैं किसी से मंगा लूंगा.’’

रमेश ने सोचा कि कोई अच्छा प्लौट होगा, तभी तो उन्होंने जल्दी से उस का सौदा कर लिया है. उन के पास भी इतने पैसे नहीं थे. इसलिए इधरउधर से इंतजाम कर के उन्होंने 40 लाख रुपए जुटा लिए. दोपहर एकडेढ़ बजे के करीब उन्होंने महेंद्र सिंह को फोन कर के कहा, ‘‘जीजाजी, 40 लाख रुपए का इंतजाम हो गया है. बताओ हरिद्वार में पैसे ले कर कहां आना है.’’

‘‘नहीं, पैसे ले कर तुम मत आओ. ऐसा करो, ये पैसे मेरे दोस्त राजेश के पास पहुंचा दो. वह मेरे पास पहुंचा देगा.’’ महेंद्र ने कहा.

रमेश निलोठी मोड़, नांगलोई के रहने वाले राजेश को जानते थे, इसलिए एक सफेद रंग के बैग में पैसे रख कर राजेश के पास पहुंचा दिए. उधर महेंद्र ने राजेश को फोन कर के पहले ही कह दिया था कि उस का साला उसे कुछ पैसे देने आएगा. उन पैसों को वह अपने पास रख लेंगे. किसी को भेज कर वह उस से पैसे मंगा लेगा. रमेश ने राजेश को जैसे ही पैसे दिए, राजेश ने महेंद्र को फोन कर दिया. उन लोगों के कहने पर महेंद्र ने राजेश को फोन किया, ‘‘राजेश, मैं एक लड़के को पैसे लेने के लिए भेज रहा हूं. तुम उसे कुंवर सिंह नगर में पुलिस बूथ के पास मिलना. वह युवक मेरी मोटरसाइकिल ले कर आएगा. उसे पैसे दे देना.’’

यह बातचीत हो जाने के बाद उन लोगों में से एक महेंद्र सिंह की मोटरसाइकिल ले कर कुंवर सिंह नगर में पुलिस बूथ के पास पहुंच गया. महेंद्र की मोटरसाइकिल पहचान कर राजेश उस युवक के पास पहुंच गए. बातचीत में उस युवक ने बता दिया कि उसे महेंद्र सिंह ने पैसे लेने के लिए भेजा है. इतनी मोटी रकम एक अनजान युवक को देने की राजेश की हिम्मत नहीं हो रही थी.  पुष्टि के लिए राजेश ने उसी समय महेंद्र को फोन किया. महेंद्र के हां कहने के बाद राजेश ने 40 लाख रुपए से भरा बैग उस युवक को दे दिया. पैसे ले कर वह युवक विकास नगर के उसी फ्लैट में लौट आया.

दूसरे कमरे में जा कर सब से पहले उन युवकों ने पैसे गिने. वे पूरे 40 लाख ही निकले. महेंद्र सिंह को उम्मीद थी कि पैसे लेने के बाद वे लोग उन्हें छोड़ देंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. मकान दिखाने के बहाने जो महिला उन्हें बुला कर लाई थी, उस ने उन के सामने अपने सारे कपड़े उतार दिए. महेंद्र सिंह ने अपनी नजरें झुका लीं. वह समझ नहीं पा रहे थे कि महिला ऐसा क्यों कर रही है. महेंद्र सिंह भी नग्नावस्था में थे.

इस के बाद एक युवक ने महेंद्र से कहा, ‘‘अब तुम इस के साथ वैसा ही करो, जैसा पत्नी के साथ करते हो.’’

45 साल के महेंद्र यह सुन कर हैरान रह गए. उन्होंने कहा, ‘‘आप लोगों को पैसे तो मिल ही गए हैं, फिर यह सब क्यों करा रहे हो?’’

इतना कहते ही एक युवक उन की पिटाई करने लगा. डर की वजह से महेंद्र को वह सब करना पड़ा, जो उन लोगों ने चाहा. उन युवकों ने अपनेअपने मोबाइल फोन से इस सब की उन की फिल्म बना ली थी. फिल्म बनाने के बाद उन्होंने महेंद्र सिंह को धमकी दी कि अगर उन्होंने यह बात पुलिस को बताई तो वे यह ब्लू फिल्म उन के सारे रिश्तेदारों को भेज देंगे, तब वह किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि पुलिस तो दूर, अपने घर में भी वह किसी को कुछ नहीं बताएगा.

रात करीब 8-9 बजे 2 युवक महेंद्र सिंह को उन की मोटरसाइकिल पर बिठा कर गलियों में होते हुए विकासपुरी के गंदे नाले के पास ले गए. उन्होंने महेंद्र सिंह को वहीं उतार दिया और कहा कि थोड़ी दूर आगे उन की मोटरसाइकिल सड़क किनारे खड़ी मिल जाएगी, वहां से उसे ले कर वह घर चले जाएंगे. पिटाई की वजह से महेंद्र सिंह के शरीर में दर्द हो रहा था, इस के बावजूद वह पैदल चल दिए. करीब 500 मीटर दूर चलने पर उन्हें सड़क किनारे मोटरसाइकिल खड़ी मिल गई तो वह उसे ले कर अपने घर पहुंचे.

हरिद्वार में प्लौट खरीद कर पति को खुश होना चाहिए था, लेकिन वह उस समय ऐसे दुखी थे, जैसे उन्हें कोई भारी नुकसान हुआ हो. पत्नी ने महेंद्र से दुखी होने की वजह जाननी चाही, पर उन्होंने पत्नी को कुछ नहीं बताया. उन बदमाशों ने उन्हें इतना डरा दिया था कि वह पत्नी को भी अपने साथ हुए हादसे के बारे में बताने से डर रहे थे. 12 दिसंबर की रात दर्द की वजह से उन का सारा शरीर दुख रहा था. जब उन से नहीं रहा गया तो उन्होंने पत्नी को सारी बात बता दी. पति के साथ इतनी बड़ी घटना घट गई और 40 लाख रुपए भी चले गए, भला पत्नी इस बात को कैसे छिपा सकती थी. उस ने तुरंत अपने भाई रमेश को यह खबर दे दी.

चूंकि 40 लाख रुपए रमेश के हाथ से गए थे, इसलिए उन्हें भी विश्वास हो गया कि उस के बहनोई को साजिश के तहत फांस कर यह खेल खेला गया है. रमेश ने महेंद्र को समझाया कि वह इस की शिकायत पुलिस से करें, वरना वे बदमाश उस ब्लू फिल्म के जरिए उन्हें आगे भी ब्लैकमेल करते रहेंगे. इस के बाद महेंद्र सिंह 16 दिसंबर, 2015 को शाम के समय थाना उत्तमनगर पहुंचे और थानाप्रभारी को अपने साथ हुए हादसे से अवगत करा दिया. महेंद्र सिंह यादव की शिकायत पर थानाप्रभारी ने अज्ञात लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 342/384/506/323/34 के तहत मामला दर्ज कर जांच सबइंसपेक्टर प्रताप सिंह को सौंप दी.

प्रताप सिंह ने इस मामले की जांच शुरू कर दी. वह विकासनगर में उस फ्लैट पर गए, जहां महेंद्र सिंह को रखा गया था. मकान मालिक ने बताया कि यह फ्लैट उस ने एक दंपति को किराए पर दिया था. वे इसे खाली कर के कहां चले गए, इस का उसे पता नहीं. इतनी बड़ी दिल्ली में बिना नाम व फोटो के उन्हें तलाश करना आसान नहीं था. फिर भी जांच अधिकारी ने उन बदमाशों की अपने स्तर से पता लगाने की कोशिश की, पर उन का पता नहीं चला. अंत में वह चुप मार कर बैठ गए. 2 महीने बीत जाने के बाद भी महेंद्र सिंह को अपने केस में काररवाई होती नहीं नजर आई तो उन्होंने जांच अधिकारी प्रताप सिंह से मुलाकात की. इस के बाद भी नतीजा कुछ नहीं निकला. जांच में कोई उन्नति नहीं हुई.

महेंद्र सिंह के एक दोस्त की दिल्ली पुलिस की स्पैशल सेल के डीसीपी संजीव कुमार यादव से जानपहचान थी. उन्होंने महेंद्र सिंह की मुलाकात डीसीपी से करा कर उन के साथ घटी घटना के बारे में बताया. घटना के बारे में सुन कर डीसीपी को लगा कि यह काम किसी गैंग का है. उन्होंने एसीपी निशांत गुप्ता के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित की, जिस में इंसपेक्टर अतर सिंह, एसआई रमेश डबास, राकेश कुमार, संदीप कुमार, एएसआई संजय, हैडकांस्टेबल संजीव, कांस्टेबल परवेज आलम, विकास, संदीप आदि को शामिल किया.

टीम ने सब से पहले डोजियर सेल और अन्य माध्यमों से यह पता लगाना शुरू किया कि पहले इस तरह की दिल्ली में जो घटनाएं घटी हैं, उन में कौन लोग शामिल रहे थे और इस समय वे जेल में हैं या जेल से बाहर हैं. इस जांच में यह जानकारी मिली कि संदीप, अजय, रमेश तिवारी और 2 लड़कियों ने झज्जर (हरियाणा) निवासी प्रौपर्टी डीलर महा सिंह को इसी तरह प्रौपर्टी दिखाने के बहाने दिल्ली बुलाया और उन्हें अपने जाल में फांस कर उन से 9 लाख रुपए ऐंठ लिए थे. इस मामले की रिपोर्ट कंझावला थाने में दर्ज हुई थी.

इसी तरह दिल्ली के मुंडका निवासी बिजनेसमैन प्रकाश को कुछ लोगों ने 25 लाख की फिरौती के लिए अपहरण कर लिया था. बाद में 3 लाख फिरौती वसूल कर के उन्हें छोड़ दिया गया था. इस में भी उन्हीं लोगों के नाम सामने आए थे. इसी घटना की तरह झज्जर के ही दूसरे प्रौपर्टी डीलर रविंद्र सिंह को भी गिरोह ने अपने जाल में फांस कर उन से 7 लाख रुपए ऐंठे थे. इस घटना में भी संदीप दलाल, रमेश तिवारी के अलावा एक लड़की का नाम सामने आया था. इस केस में भी बदमाशों ने लड़की के साथ रविंद्र सिंह के अश्लील फोटो खींचे थे. इस की रिपोर्ट दिल्ली के रोहिणी (दक्षिण) थाने में 20 जनवरी, 2014 को दर्ज हुई थी.

महेंद्र सिंह के साथ जो घटना घटी थी, वह इन घटनाओं से पूरी तरह से मेल खा रही थी. जांच टीम ने जब इन घटनाओं में शामिल रहे लोगों के बारे में पता लगाया तो जानकारी मिली कि ये लोग जेल से जमानत पर छूटे हुए हैं. ये सभी नांगलोई इलाके के ही रहने वाले थे. पुलिस ने इन के घरों पर छापे मारे तो ये सभी अपनेअपने घरों से फरार मिले. पुलिस ने फरार बदमाशों के फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवा कर जांच की तो एक नंबर ऐसा मिला, जो रमेश तिवारी, अजय और संदीप के संपर्क में था. वह नंबर अरविन का था और वह नांगलोई के कुंवर सिंह नगर में रहता था.

पुलिस ने 6 मार्च, 2016 को अरविन के यहां छापा मार कर उसे हिरासत में ले लिया. औफिस में ला कर जब उस से पूछताछ की गई तो उस ने स्वीकार कर लिया कि महेंद्र सिंह के साथ जो वारदात हुई थी, उस में वह शामिल था. उस ने बताया कि इस वारदात का मास्टरमाइंड संदीप दलाल था. इस के अलावा नकाबपोश लोग कौन थे, इस की उसे जानकारी नहीं थी, क्योंकि उन की व्यवस्था खुद संदीप दलाल ने की थी. अरविन ने बताया था कि नांगलोई में उस की स्पेयर पार्ट्स बनाने की फैक्ट्री थी, जो किसी वजह से घाटा होने पर बंद करनी पड़ी थी. वह पैसेपैसे के लिए मोहताज था. कुछ दिनों पहले उस की मुलाकात नांगलोई के ही रहने वाले संदीप दलाल से हुई तो पैसों के लालच में वह उस के साथ ब्लैकमेलिंग के धंधे में शामिल हो गया.

इस धंधे में हुई कमाई से उस ने एक मारुति स्विफ्ट डिजायर कार खरीदी थी. पुलिस ने उस की निशानदेही पर उस की मरुति स्विफ्ट डिजायर कार बरामद कर ली थी. पुलिस को जानकारी मिली है कि महेंद्र के साथ हुई वारदात में संदीप दलाल, आकाश उर्फ सन्नी, रमेश तिवारी आदि भी शामिल थे. अरविन को गिरफ्तार करने की सूचना स्पैशल सेल औफिस से थाना उत्तमनगर पुलिस को मिल गई थी. 7 मार्च को स्पैशल सेल के एसआई संदीप कुमार ने अरविन को न्यायालय में पेश किया तो वहां मौजूद उत्तमनगर पुलिस ने अरविन को पूछताछ के लिए 2 दिनों की पुलिस रिमांड पर ले लिया. रिमांड अवधि में पूछताछ करने के बाद उसे फिर से न्यायालय में पेश कर के जेल भेज दिया गया था.

कथा लिखे जाने तक अन्य अभियुक्त पुलिस की पकड़ में नहीं आ सके थे. इन के गिरफ्तार होने के बाद ही पता चल सकेगा कि इन लोगों ने कितने लोगों को हनीट्रैप में फांसा और उन से कितने रुपए ऐंठे. Crime Story Hindi

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...