Romantic Story: खूबसूरत और जवान कोयल स्टेशन मास्टर की मिलीभगत से ड्रग्स सप्लाई का धंधा करती थी. एक दिन कोयल ने मल्टीनैशनल कंपनी में जौब करने वाले रवि को भी अपने जाल में फांसने की चाल चली, लेकिन उसी दौरान रवि ने ऐसा कदम उठाया कि…

रवि बड़ी ही बेचैनी से उस छोटे से रेलवे प्लेटफार्म पर टहल रहा था. रात के 10 बज रहे थे. चारों ओर एकदम सन्नाटा सा छाया हुआ था. इक्कादुक्का मुसाफिर प्लेटफार्म पर बनी बेंच पर चादर ओढ़े सो रहे थे. इस छोटे से गांव के रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का रात भर इंतजार करने को रवि विवश था.

रवि एक मल्टीनैशनल कंपनी में सीनियर एग्जीक्यूटिव था. वह अपने बेस्ट फ्रेंड और बचपन के साथी मोहित की शादी में शामिल होने उस के खास अनुरोध पर मोहित के गांव आया हुआ था. आते समय तो मोहित उसे लेने रेलवे स्टेशन पर आया था, पर अब नईनई शादी के बाद होने वाले संस्कारों की वजह से अभी उसे घर से बाहर नहीं आने दिया गया.

और मजे की बात तो यह कि रवि को नई दुलहन का चेहरा तक देखने को न मिला. इस गांव में घूंघट प्रथा का कुछ ज्यादा ही चलन था. और ऐसी मान्यता थी कि एक सप्ताह तक नवदंपति घर से बाहर नहीं निकल सकते, अन्यथा बुरी नजर लगने का डर रहता है और इसीलिए अब जाते समय रवि को अकेले ही गांव से स्टेशन जाना पड़ रहा था.

वैसे तो रवि ने टैक्सी बुलवाने की भी सोची, पर वह भी संभव न हो पाया क्योंकि इस गांव तक पहुंचने वाला रास्ता भारी बारिश की वजह से पुल टूटने के कारण बंद हो गया. अब रवि के लिए शहर पहुंचने का एकमात्र जरिया थी सिर्फ ट्रेन.

…और इसी ट्रेन के इंतजार में वह इस बरसात की रात में प्लेटफार्म पर टहल रहा था, जिस के आने में अब भी एक घंटा बाकी था.

तभी एनाउंसमेंट हुआ…बारिश की वजह से ट्रेन 3 घंटे देरी से आएगी.

‘ओह गौड!’ रवि चिढ़ते हुए बड़बड़ाया. अब 3 घंटे तक इस छोटे से प्लेटफार्म पर वह कैसे रहेगा? तेज बारिश हो रही थी. पूरे प्लेटफार्म पर सिर्फ 4 पीले बल्ब जल रहे थे, जो मद्धिम रोशनी फैला रहे थे. वहां से आनेजाने वाले मुसाफिरों की संख्या बहुत कम रहती थी, इसलिए सुविधाएं भी कम ही थीं.

रवि ने स्टेशन मास्टर के पास जा कर रिक्वेस्ट की, ”प्लीज सर, मेरा नाम रवि है और मैं पुणे जाने वाली एक्सप्रैस ट्रेन से जाने वाला हूं. पर अब वह 3 घंटे बाद आने वाली है. प्लीज 3 घंटे रुकने का मेरा कुछ इंतजाम कर दीजिए, आप की मेहरबानी होगी.’’

स्टेशन मास्टर कुछ देर मौन सोचता रहा. फिर बोला, ”ओके! आप प्लेटफार्म के कौर्नर पर बने वेटिंग रूम में ठहर सकते हैं. पर हां, वहां पंखे वगैरह नहीं हैं. वो क्या है न कि यहां कोई रुकता ही नहीं कभी तो जो फैन लगे भी थे, वो कब से खराब हो गए हैं. बस, एक बल्ब लगा हुआ है.’’

रवि खुशी से बोला, ”कोई बात नहीं सर, मुझे तो बस किसी तरह 3 घंटे काटने हैं. आप मुझे बस परमिशन दे दीजिए.’’

स्टेशन मास्टर ने टेबिल के ड्राअर से चाबी निकाली और रवि को देते हुए बोला, ”ये लीजिए, आप को खुद ही लौक खोलना पड़ेगा. यहां तो बस 2 कर्मचारी रहते हैं और वो भी आज बारिश की वजह से आ नहीं पाए.’’

”ओके! नो प्रौब्लम सर, मैं मैनेज कर लूंगा…’’ कहते हुए रवि चाबी लिए चल पड़ा वेटिंग रूम की ओर.

रवि ने जैसे ही दरवाजा खोला… बड़ी ही तेज गंध महसूस हुई.

रवि समझ गया कि महीनों से बंद पड़े रूम में सीलन की स्मैल भर गई है. उस ने खोज कर लाइट का स्विच औन किया. रूम में हलकी पीली रोशनी फैल गई. छोटे से रूम में 2 कुरसियां और कुछ टूटी हुई बेंचों के ढेर के सिवाय कुछ नहीं था.

रवि ने फौरन अपने बैग से डियोड्रेंट की बोटल निकाली और रूम में स्प्रे किया, ताकि सीलन की बदबू खत्म हो सके. फिर एक चेयर पर बैठ कर दूसरे चेयर पर पैर लंबे कर वह रेस्ट करने लगा.

मोबाइल का नेटवर्क तो यहां था ही नहीं. उस ने मोबाइल में प्रीडाउनलोडेड म्यूजिक औन किया और आंखें मूंद कर सोने की कोशिश करने लगा.

अचानक आहट सुन कर रवि ने अपनी आंखें खोलीं.

‘भला यहां कौन आया अब…’ सोचते हुए वह आगंतुक की ओर निहारने लगा.

…और जैसे ही उस ने ठीक से उस आने वाले को देखा तो बस देखता ही रह गया. ‘उफ!’ रवि की पलकें मानो झपकना ही भूल गईं.

रवि ने उन दोनों को देखते हुए कहा, “अरेअरे, इस तरह घबरा क्यों रहे हो ? तुम्हारा भांडा फूट गया इसलिए? पर सच कहूं बेबी तो तुम्हारी ओवर ऐक्टिंग ने ही तुम्हारा भांडा फोड़ दिया.”

वह आगंतुक एक युवती थी, जिस की खूबसूरती इस मामूली पीले बल्ब की रोशनी में भी बिजली की तरह चमक रही थी. उस का गोरा रंग लाल शिफोन की साड़ी में उबाल मार रहा था. उस के लंबे खुले बाल बारिश की वजह से चिपक रहे थे, जिन्हें वो झटक कर संवारने की कोशिश कर रही थी. उस के लाल सुर्ख भरेभरे होंठ तो मानो बस गुलाब की पंखुडिय़ां लग रहे थे.

रवि सुधबुध खो कर उसे निहारने में लगा था कि युवती अचानक उसे देखते हुए बोली, ”माफ कीजिए. क्या आप एक चेयर मुझे देंगे?’’

उस की मीठी जलतरंग सी आवाज सुन रवि चौंक कर शर्मिंदा सा होता हुआ बोला, ”सौरी! मुझे खयाल ही नहीं रहा कि इस रूम में 2 ही चेयर हैं.’’ और उस ने एक चेयर युवती की ओर बढ़ा दी.

युवती ने चेयर लेते हुए बड़ी अदा से थैंक्यू कहा. फिर बोली, ”वो बेंच बड़ी ही पुरानी और टूटी सी लग रही है, इसलिए आप से चेयर के लिए कहा.’’

रवि ने भी स्माइल करते हुए कहा, ”वैसे आप जा कहां रही हैं? आप की ट्रेन भी लेट हो गई लगता है? क्या अकेली ही सफर कर रहीं हैं आप?’’

”ओह माय गौड! इतने सवाल…’’ वह युवती खिलखिला पड़ी. फिर बोली, ”जी, मेरी ट्रेन 3 घंटे लेट चल रही है. और मैं पुणे जा रही हूं. मेरा घर है वहां.’’

”ओह!’’ रवि खुश होता हुआ बोला, ”मुझे भी पुणे ही जाना है. मतलब आप भी मेरी ही ट्रेन में जाने वाली हैं.’’

”जी, यही समझ लीजिए.’’ वह युवती हंसती हुई बोली, ”वैसे सच कहूं तो मुझे बड़ा डर लग रहा था इस वेटिंग रूम में आते हुए कि पता नहीं कौन व्यक्ति होगा. आजकल जमाना बहुत खराब है, अकेली युवती को तो कितनी ही बातें सोचनी पड़ती हैं.’’

”ओह…’’ रवि बोला, ”मीन्स आप अकेली ही सफर कर रही हैं.’’

”जी…’’ युवती ने तुरंत कहा, ”वैसे तो आप भी अकेले ही सफर कर रहे हैं.’’

रवि हंस पड़ा. सच में सोचा नहीं था कि इस सुनसान छोटे से रेलवे स्टेशन के वेटिंग रूम में आप जैसी खूबसूरत साथी मिल जाएगी. वह युवती कुछ बोलने ही वाली थी कि अचानक ही तेज बिजली सी चमकी. बादलों की गडग़ड़ाहट से डर कर वह लपक कर रवि के पास आ गई.

वेटिंग रूम में जल रहा इकलौता बल्ब फ्यूज हो गया. ओह…युवती चिल्लाई, ”ये लाइट क्यों चली गई?’’

रवि बोला, ”डरिए मत! बल्ब फ्यूज हो गया है. मैं टौर्च औन कर देता हूं.’’ और वह बैग से टौर्च निकालने लगा.

बैग उठाने के चक्कर में रवि का हाथ अंधेरे में युवती के हाथ से टकरा गया. युवती घबरा कर चिल्लाने को हुई, पर रवि ने हलके से उस का हाथ दबा कर सांत्वना दी. तभी बाहर दरवाजे पर टौर्च की रोशनी चमकी. रवि ने हड़बड़ाते हुए दरवाजे पर देखा तो स्टेशन मास्टर टौर्च लिए खड़ा था. रवि को देखते ही बोला, ”मुझे लगा ही कि यहां का बल्ब फ्यूज हो गया होगा, इसलिए मैं टौर्च ले कर आया हूं. मेरे पास और एक टौर्च है, आप इस से काम चला लीजिए. और कोई प्रौब्लम तो नहीं है न आप को?’’

रवि बोला, ”नहीं..नहीं…अकेला होता तो शायद कोई प्रौब्लम होती, पर अब तो ये मैडम भी हैं साथ में तो समय आराम से कट जाएगा.’’

”मैडम?’’ स्टेशन मास्टर ने रवि को घूरते हुए पूछा, ”यहां कौन सी मैडम है भला?’’

रवि झुंझलाते हुए बोला, ”ये मेरी ही बगल में तो खड़ी हैं….इधर देखिए न जरा.’’

और जैसे ही रवि ने अपनी बगल की ओर देखा तो आंखें फैल गईं, वहां तो कोई भी नहीं था.

रवि की जुबां जैसे जम गई… ‘अभीअभी ही तो वो यहीं थी मेरे साथ!’

स्टेशन मास्टर ने गंभीरता से कहा, ”यहां वेटिंग रूम में तो क्या, पूरे प्लेटफार्म पर भी कोई युवती नहीं है इस वक्त. लगता है आप कोई सपना देख रहे थे.’’

रवि अपने हाथों को विस्फारित नेत्रों से देख रहा था… जहां अभी तक उस अजनबी हसीना का स्पर्श ताजा था. स्टेशन मास्टर ने हैरान से खड़े रवि के हाथ में टौर्च पकड़ाई और वहां से चलता बना. रवि अभी मूर्ति बना खड़ा ही था कि उस के कंधे पर किसी ने स्पर्श किया. रवि एकदम डरते हुए पलटा तो देखा…. वही लाल साड़ी वाली युवती खड़ी थी उस के करीब. रवि की आंखें डर से फैल गईं. होंठ जैसे सिल गए. उस की यह दशा देख कर वो युवती बोली, ”ओह! आप इस कदर सहम क्यों रहे हैं? हुआ क्या है?’’

रवि किसी तरह अटकते हुए बोला, ”अभी तो आप यहां नहीं थीं, फिर अचानक ही कहां से आ गईं वापिस?’’

रवि की बात सुनते ही वह युवती खिलखिला कर हंस पड़ी. उस की घुंघरू जैसी हंसी की खनक से वह छोटा सा वेटिंग रूम गूंज उठा. फिर वह किसी तरह हंसी रोकती हुई बोली, ”ओह! अब समझी मैं, आप मुझे कोई चुड़ैल या आत्मा समझ रहे हैं. है न! बिलकुल वो कौन थी टाइप की आत्मा.’’ और वह फिर खिलखिला पड़ी. रवि ने किसी तरह अपने भय से कांपते शरीर को काबू में करते हुए पूछा, ”लेकिन अभी जब स्टेशन मास्टर यहां आया था, तब तो आप यहां नहीं दिखी थी उसे और न ही मुझे. कहां गायब हो गई थी यूं? और स्टेशन मास्टर ने ही बताया कि यहां प्लेटफार्म पर तो कोई युवती नहीं है. तो तुम हो कौन?’’

अब युवती के चेहरे पर गंभीरता पसर गई. वह धीमे स्वर में बोली, ”सौरी! एक्चुअली मैं अपने घर से भाग कर कहीं दूर जा रही हूं. चोरीछिपे भाग कर यहां तक पहुंची हूं, इसीलिए तो मेरे पास सामान के नाम पर बस यही एक मेरा हैंडबैग है. आप प्लीज किसी से मेरे बारे में कहिएगा मत, मैं किसी भी तरह बस पुणे पहुंचना चाहती हूं. स्टेशन मास्टर के आते ही मैं लपक कर पुरानी टूटी पड़ी बेंचों के पीछे जा छिपी थी.’’

रवि ने गहरी नजरों से युवती को देखा, मानो उस के बोलने पर यकीन करने की कोशिश कर रहा हो. फिर कुछ सोचते हुए बोला, ”ओके! तो जरा अपना परिचय देंगी? आप हैं कौन और कहां जाना चाहती हो?’’

युवती ने धीरे से कहा, ”मैं कोयल हूं. पुणे में जौब करती हूं. मेरे मम्मीपापा नहीं हैं. पिछले महीने जब मैं अपने दादादादी के पास मिलने गांव आई तो उन्होंने जबरदस्ती मेरी शादी तय कर दी. कल ही मेरी शादी एक गांव में रहने वाले युवक से हुई है. दरअसल, ये शादी मेरी मरजी के खिलाफ हुई थी, इसलिए मैं घर छोड़ कर भाग रही हूं.’’

रवि की आंखें फैल गईं. वह सोच में गुम हो गया, ‘कहीं ये मोहित की बीवी तो नहीं?’

रवि को यूं गुमसुम देख कोयल बोली, ”प्लीज, आप मेरी मदद कीजिए. मुझे अपने साथ पुणे ले चलिए किसी तरह. मैं वहां पहुंच कर अपनी जौब करते हुए नई लाइफ स्टार्ट करूंगी.’’

रवि सोचने लगा कि इस वक्त मोहित के घर पर इस की कितनी खोजबीन चल रही होगी. लोग तरहतरह की बातें कर रहे होंगे. क्या वह मोहित को कौल कर के बता दे कि उस की बीवी यहां है. कोयल ने उस के मन की बात ताड़ ली थी. वह रिक्वेस्ट करती हुई बोली, ”प्लीज, आप किसी को भी खबर न कीजिए मेरे बारे में. वैसे भी यहां नेटवर्क नहीं है.’’

रवि अब चेयर पर बैठते हुए बोला, ”तो…तो आप चाहती क्या हैं कि मैं एक घर से भागी हुई दुलहन की भागने में मदद करूं?’’

कोयल ने पास आ कर रवि का हाथ पकड़ते हुए कहा, ”क्या आप को लगता है कि मैं कोई गलत काम कर रही हूं? उलटे मेरे साथ धोखा हुआ है.’’

रवि ने शांत स्वर में पूछा, ”माना कि आप के साथ धोखा हुआ, पर क्या आप शादी से पहले ही पुणे नहीं आ सकती थीं? और अब आप मुझ से क्यों मदद चाह रही हैं? मैं तो आप को ठीक से जानता तक नहीं.’’

कोयल ने अब पलकें झपकाते हुए मधुर स्वर में कहा, ”मैं क्या आप को अजनबी लगती हूं? मुझे तो आप को पहली बार देखते ही ऐसा लगा, मानो आप को बरसों से जानती हूं मैं.’’ और उस ने अपना सिर रवि के कंधे पर टिका दिया. रवि की तो सिट्टीपिट्टी ही गुम हो गई. वह हतप्रभ सोचने लगा, ‘यह किस दुविधा में फंस गया हूं मैं. कहीं ये मोहित की बीवी निकली तो मेरा दोस्त मुझे जीवन भर माफ नहीं करेगा.’

पर कोयल के जुल्फों से उठती महक और रेशमी हुस्न के जादू ने रवि को मजबूर कर दिया उस की बात मानने पर.

रवि ने अपना हाथ बड़े प्यार से कोयल के कंधे पर रखते हुए कहा, ”मैं तुम्हारी हर तरह की मदद करने के लिए तैयार हूं. बोलो,क्या कर सकता हूं मैं तुम्हारे लिए?’’

कोयल ने रवि की ओर एक फ्लाइंग किस उछाली और मुसकरा कर बोली, ”थैंक्स रवि! मैं जानती थी कि तुम जरूर मेरी हेल्प करोगे.’’ फिर उस ने अपना हैंडबैग रवि को देते हुए कहा, ”यह बैग तुम अपने ही बैग के अंदर रख दो, मैं पुणे जा कर ले लूंगी तुम से.’’

रवि ने एक क्षण कोयल को ताका, फिर बोला, ”पर तुम भला अपना हैंडबैग क्यों मुझे रखने के लिए दे रही हो? इसे मेरे बैग के अंदर रखने का क्या मतलब?’’

कोयल तुनक कर बोली, ”ओफ्फोह! रवि, तुम भी न कितने सवाल करते हो. अरे इस हैंडबैग में मेरी ज्वैलरी है, कहीं किसी चोर ने ट्रेन के सफर में चुरा ली तो? अब प्लीज, ये सवाल करना बंद करो और इस बैग को जल्दी से रख लो अपने बैग में.’’

रवि ने फिर बिना कोई सवाल किए तुरंत ही कोयल का बैग ले कर अपने ट्रैवल बैग में रख लिया.

फिर कोयल की ओर देख मुसकरा कर बोला, ”अब तो तुम्हें देख कर मुझे भी अजीब सा अहसास हो रहा है. क्या मैं अपनी बाकी की जिंदगी के लिए भी तुम्हें हमसफर मान सकता हूं?’’

कोयल ने तुरंत ही पलकें झपकीं, ”ओह रवि, सच! मैं बहुत लकी हूं, जो मुझे तुम जैसा हमसफर मिल गया.’’

रवि ने बड़ी स्टाइल से सिर झुकाते हुए कहा, ”रियली, मैं बहुत ही तकदीर वाला हूं, जो ऐसी ब्यूटी क्वीन मुझे मिल गई.’’

फिर रवि ने थोड़ा गंभीर स्वर में कहा, ”ओके बेबी, मैं बस अभी ट्रेन का टाइम पता कर के आता हूं.’’

और फिर रवि बाहर चल दिया.

कुछ देर बाद जब वह आया तो कोयल बोली, ”बड़ी देर कर दी आने में रवि, ट्रेन कितने बजे आएगी?’’

रवि ने गहरी नजर कोयल पर डाली और गंभीरता से कहा, ”कोयल, जरा बताओगी कि तुम्हें मेरा नाम कैसे पता चल गया? मैं ने तो तुम्हें बताया ही नहीं था अपना नाम.’’

कोयल एकदम हड़बड़ा उठी. वह अटकते हुए बोली, ”वो…वो तुम ने बताया तो था न मुझे! याद नहीं तुम्हें?’’

रवि ने ताली बजाते हुए कहा, ”वाव एक्सीलेंट! क्या ऐक्टिंग है तुम्हारी! पर बेबी, मुझे अच्छी तरह याद है कि मैं ने कभी भी अपना नाम तुम्हें नहीं बताया था.’’

कोयल अब बड़ी अदा से लहराती हुई बोली, ”ओफ्फोह! छोड़ो न यह सब! यह बताओ, ट्रेन कब आ रही है हमारी?’’

रवि ने वेटिंग रूम के दरवाजे की ओर इशारा करते हुए कहा, ”लो आ गई तुम्हें ले जाने के लिए सवारी.’’

कोयल ने देखा कि वेटिंग रूम के दरवाजे से रेलवे पुलिस के जवान अंदर आ रहे थे और उन के साथ था स्टेशन मास्टर.

रवि ने स्टेशन मास्टर से कहा, ”लीजिए, अब तो आप को दिख रही है न ये युवती?’’

स्टेशन मास्टर ने सिर झुका लिया तो रवि ने उन जवानों से कहा, ”अरेस्ट कर लो इन दोनों को. ये दोनों ही इस छोटे से गांव के वेटिंग रूम में आने वाले युवकों को फंसा कर उन के जरिए लाखों का ड्रग्स मुंबई और पुणे भेजते थे.’’

फिर रवि ने उन दोनों को देखते हुए कहा, ”अरेअरे, इस तरह घबरा क्यों रहे हो? तुम्हारा भांडा फूट गया इसलिए? पर सच कहूं बेबी तो तुम्हारी ओवर ऐक्टिंग ने ही तुम्हारा भांडा फोड़ दिया. मैं तो तुम्हें अपने दोस्त मोहित की बीवी ही समझ बैठा था, पर जैसे ही तुम ने मुझे रवि कह कर पुकारा तो मेरा माथा ठनका, क्योंकि अपना नाम तो मैं ने तुम्हें बताया ही नहीं था.

”तभी मुझे ध्यान आया कि मोहित बता रहा था कि उन के गांव से बड़े पैमाने पर ड्रग्स महानगरों को भेजी जाती है. बस, मैं समझ गया कि स्टेशन मास्टर और तुम दोनों मिल कर ही यह सब जाल बिछाते हो, जिस में भोलेभाले युवक फंस जाते हैं. क्यों स्टेशन मास्टर साहब, आप ने ही बताया था न मेरा नाम इसे?’’

स्टेशन मास्टर गुस्से से कोयल को घूरने लगा.

रवि बोला, ”मैं ने स्टेशन के बाहर बाइक लिए एक युवक को कह कर इन पुलिस जवानों को बुलवाया है. अब आप दोनों जाओ अपने असली ठिकाने यानी जेल. और मैं चला अपने घर, पुणे. वो देखो आ रही है मेरी ट्रेन.’’

और रवि ने अपने बैग से निकाल कर कोयल का हैंडबैग और अपना मोबाइल नंबर पुलिस को दिया और चल पड़ा अपना बैग थामे ट्रेन की ओर.पीछे छूट गए स्टेशन मास्टर और कोयल… जो पुलिस की गिरफ्त में कसमसाते हुए चल दिए लौकअप की ओर. दूर कहीं गाना बज रहा था…’एक अजनबी हसीना से… Romantic Story

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