TV Actress Suicide: ग्लैमर की दुनिया से जुड़ी प्रत्यूषा बनर्जी की आत्महत्या का मामला पहला नहीं है. टेलीविजन और फिल्मों से जुड़ी कई लड़कियां पहले भी आत्महत्या कर चुकी हैं. वजह होेती है, उन का जज्बाती होना. जबकि ग्लैमर की दुनिया में जज्बात  काम नहीं आते…

प्रत्यूषा यानी अलसभोर. रात ढलने और सूर्योदय से पहले अंधेरेउजाले का रेशमी समीकरण. 2013 में प्रत्यूषा बनर्जी जब कलर्स चैनल के धारावाहिक ‘बालिका वधू’ के माध्यम से छोटे परदे पर आई थी तो वाकई अलसभोर सी ही थी. सुंदर भी चंचल भी, फूलों सी कोमलांगी भी और झील के ठहरे हुए शांत जल सी गंभीर भी. भले ही बात अभिनय की थी, लेकिन वह हंसती थी तो फूल से झरते थे और उदास होती थी तो लगता था जैसे शाम ढल रही हो. उस के व्यक्तित्व में भी अनूठा आकर्षण था और अभिनय में भी. अभिनय की यही खूबियां कलाकार को लोकप्रिय बनाती हैं. उस के चित्ताकर्षक सौंदर्य और सीधे दिल में उतर जाने वाले अभिनय ने उसे भी लोकप्रिय बनाया.

यही वजह थी कि बीती 1 अप्रैल की शाम को जब उस की मौत का समाचार आया तो उस के परिचित ही नहीं, उसे छोटे परदे की आनंदी के रूप में जानने वाले लाखोंलाख लोग भी सन्न रह गए. लगा जैसे मौत के बादलों ने सूर्य की किरणों का मुंह देखने से पहले अलसभोर को अपने विकराल पंजों में दबोच लिया हो.

बालिका वधू की आनंदी बन कर रातोंरात लाखों दिलों की चहेती बन जाने वाली प्रत्यूषा के उत्थान और पतन की कहानी को रोचक तो नहीं कह सकते, लेकिन यह एक ऐसी लड़की के जीवन का थ्रिल जरूर था, जो न तो अपनी शोहरत को पचा पाई और न गमों को पी सकी. वह खिली तो उस फूल की तरह, जो सूरज की पहली किरण का स्पर्श पा कर खिलता है और सब का मन मोह लेता है, लेकिन बुझी तो शमा की उस लौ की तरह, जो हवा के एक तेज झोंके की ताब न ला कर क्षणभर में दम तोड़ देती है.

प्रत्यूषा के जीवन का प्रभात कलर्स चैनल के धारावाहिक ‘बालिका वधू’ से हुआ था और शाम भी तभी से ढलने लगी थी, जब उस ने ‘बालिका वधू’ छोड़ा. इसलिए शुरुआत भी वहीं से होनी चाहिए. कलर्स एंटरटेनमेंट चैनल के साथ ही जुलाई, 2008 में शुरू हुए इस के धारावाहिक ‘बालिका वधू’ ने ऐसी धूम मचाई कि इस की प्रस्तुति देख कर इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में तो बदलाव की लहर आई ही, जल्दी ही यह धारावाहिक घरघर में देखा जाने लगा. छोटे परदे पर ताजा हवा के झोंके की तरह आई ‘बालिका वधू’ की केंद्रीय पात्र आनंदी (अविका गौर) चंद दिनों में ही हरदिल अजीज बन गई. उस खूबसूरत बच्ची का अभिनय इतना नैसर्गिक था कि अभिनय लगता ही नहीं था. अभिनय में उस की चंचलता रही हो या मासूम चेहरे की उदासी, दर्शकों को वह हर रूप में पसंद आई.

‘बालिका वधू’ के किसी भावनात्मक दृश्य में जब आनंदी के चेहरे की उदासी उकेरने के लिए धारावाहिक का थीम सौंग बजता था, ‘छोटी सी उमर परनाई रे बाबो सा, करयो थारो कई मैं कसूर हो. इतना दिन्ना तो लाड लगाया, अब क्यूं करो मन्ने हिवड़े से दूर हो.’ तो कितनी ही आंखें डबडबा जाती थीं. इस धारावाहिक को बुलंदियों पर पहुंचाने में अविका गौर के अभिनय का तो हाथ था ही, इस राजस्थानी थीम सौंग ने भी बहुत बड़ी भूमिका अदा की.

सन 2008 से 2010 तक जब तक बालिका वधू आनंदी के रूप में अविका गौर रही, इस धारावाहिक ने नित नई ऊंचाइयों को छुआ. आनंदी के रूप में अविका गौर में किसी को अपनी बेटी नजर आती थी तो किसी को एक ऐसा पात्र, जिसे रीतिरिवाजों के नाम पर बाली उम्र में शादी कर के बड़ों के हाथों का खिलौना बना दिया गया था. बहरहाल अविका गौर ने बालिका वधू आनंदी के उतारचढ़ाव भरे जीवन के हर रंग को अपने स्वाभाविक अभिनय से इस तरह साकार किया था कि वह अभिनय कम और हकीकत ज्यादा लगता था.

लेकिन धारावाहिक को छोटी आनंदी के चरित्र के साथ एक लिमिट तक ही खींचा जा सकता था. कहानी की मांग के हिसाब से आनंदी को बड़ा दिखाना जरूरी था. अंतत: कलर्स चैनल और ‘बालिका वधू’ धारावाहिक की टीम ने सन 2010 में फैसला लिया कि अब लीप ले कर आनंदी को युवा रूप में लाया जाए. जाहिर है, इस के लिए किसी ऐसी लड़की की जरूरत थी, जो छोटी आनंदी (अविका गौर) के समकक्ष अभिनय भी कर सके और दर्शकों को ऐसा भी न लगे कि आनंदी का मूल चरित्र बदल गया है.

निस्संदेह यह आसान काम नहीं था, लेकिन करना तो था ही. फलस्वरूप आनंदी के युवा पात्र के लिए अभिनय की कसौटी पर खरी उतरने वाली लड़की की तलाश शुरू की गई. आनंदी की भूमिका के लिए कलर्स का विज्ञापन देख कर देश भर से लाखों लड़कियों ने अपना प्रोफाइल और आवेदन भेजे. प्रत्यूषा उस समय 17 साल की थी. उस ने जमशेदपुर में रहते कुछ नाटकों और एकदो फैशन शो में भाग लिया था, जिस के लिए प्रशंसा के साथसाथ उसे अवार्ड भी मिले थे. बचपन से ही उस की चाह टीवी सीरियल में जाने की थी. अपनी यह इच्छा उस ने अपने पिता शंकर बनर्जी और मां सोमा बनर्जी को भी बता रखी थी. अच्छा मौका मिल रहा था, प्रत्यूषा ने भी आवेदन के साथ अपना प्रोफाइल कलर्स चैनल को भेज दिया.

जल्दी ही कलर्स चैनल की ओर से बुलावा आ गया. चैनल ने उसे औडिशन के लिए मुंबई बुलाया. बड़ा मौका मिल रहा था, प्रत्यूषा अपने मातापिता के साथ मुंबई पहुंच गई. वहां सैकड़ों लड़कियां आई हुई थीं. औडिशन के आधार पर चैनल की ओर से फाइनलिस्ट के तौर पर जिन 3 लड़कियों को चुना गया, उन में प्रत्यूषा भी थी. इस चुनाव के बाद चैनल ने तीनों लड़कियों के फोटोग्राफ्स टीवी स्क्रीन पर दिखा कर दर्शकों से उस लड़की को चुनने को कहा, जिसे वे युवा आनंदी के रूप में देखना चाहते हों. इस से यह प्रतियोगिता और भी रोमांचक हो गई.

अंतत: दर्शकों के वोटों के आधार पर युवा आनंदी की भूमिका के लिए प्रत्यूषा को चुना गया. यह प्रत्यूषा के लिए बहुत बड़ी जीत भी थी और उस के लिए बहुत बड़ा अवसर भी. बालिका वधू की युवा आनंदी के लिए प्रत्यूषा को चुन तो लिया गया, लेकिन समस्या थी जमशेदपुर जैसे छोटे शहर से निकल कर मुंबई में रहने की. लेकिन यह समस्या भी हल हो गई. प्रत्यूषा के चाचाचाची मुंबई में रहते थे. शंकर बनर्जी और सोमा बनर्जी ने बेटी को साथ ले कर उन्हीं के यहां डेरा जमाया. चैनल ने इन लोगों को पूरा सहयोग दिया. थोड़ी सी ट्रेनिंग के बाद प्रत्यूषा ने ‘बालिका वधू’ में युवा आनंदी के रूप में काम करना शुरू कर दिया.

दर्शकों ने युवा आनंदी के रूप में प्रत्यूषा को अविका गौर की तरह ही पसंद किया. उस में वे सारे गुण थे, जो अविका में थे. अछूता सौंदर्य, मन मोह लेने वाला व्यक्तित्व और कमाल का अभिनय. यहां तक कि चेहरे की मासूमियत भी अविका गौर जैसी ही. धनदौलत हो, संपत्ति हो, अभिनय हो या कुछ और विरासत में मिल जाना अलग बात है और उसे पूरी जिम्मेदारी से संभालना अलग बात. प्रत्यूषा को आनंदी की भूमिका के लिए जो कुछ मिला था, वह अविका गौर की विरासत ही थी.

प्रत्यूषा ने उस विरासत को वाकई बहुत जिम्मेदारी से संभाला. नतीजा यह हुआ कि प्रत्यूषा ने चंद हफ्तों में ही अविका गौर की तरह दर्शकों के घरों की देहरी लांघ कर उन के दिलों में जगह बना ली. कालांतर में प्रत्यूषा को ऐसी प्रसिद्धि मिली कि उस की हैसियत टीवी के चुनिंदा स्टारों जैसी हो गई. इस बीच उस ने कांदीवली में किराए का फ्लैट ले कर मातापिता के साथ रहना शुरू कर दिया था. उस के पास गाड़ी सहित सुखसुविधा के सारे साधन आ गए थे. अब उसे पैसे की कोई कमी नहीं थी. पूरा देश उसे छोटे परदे की आनंदी के रूप में जानने लगा था. अभी तक वह जमशेदपुर जैसे शहर से आई प्रत्यूषा और ‘बालिका वधू’ की आनंदी ही बनी हुई थी.

सप्ताह में 5 दिन आने वाले धारावाहिकों के चुनिंदा कलाकार अपने अभिनय के बूते पर भले ही लोगों के दिलों पर राज करते हों, पर ऐश्वर्य से भरी उन की जिंदगी एकदम खोखली होती है. कई बार तो 20-25 मिनट के एपिसोड के लिए उन्हें 12-14 घंटे प्रतिदिन काम करना पड़ता है. चेहरे पर मेकअप थोपे, भारीभरकम पोशाक पहने. कभीकभी तो उन का यह समय कई महीनों तक एक ही छत के नीचे गुजर जाता है.

बोरियत भरे इस समय में रोजाना के उन के वही संगीसाथी होते हैं. वही एक जैसा माहौल. खाना भी वही पिज्जा, बर्गर, कौफी और कोल्डड्रिंक. उन्हें 10-12 घंटे का जो समय मिलता है, उसी में उन्हें शारीरिक फिटनेस के लिए जिम जाना, घर वालों, दोस्तों से मिलना और सोना होता है. उन के अपने लिए समय होता ही नहीं. शनिवार, रविवार को साप्ताहिक सीरियल नहीं आते, इसलिए इन कलाकारों को सप्ताह में 2 दिन का समय मिल जाना चाहिए. लेकिन ज्यादातर प्रोड्यूसर डायरेक्टर उन के इन 2 दिनों को भी अपने हक में इस्तेमाल कर लेते हैं.

फिल्में हों या सीरियल्स, जैसेजैसे कलाकार लोकप्रिय होता जाता है, उस का एटीट्यूड भी बदलने लगता है. वे प्रोड्यूसर डायरेक्टर पर हावी हो कर उन से मनमानी मांगें पूरी कराने लगते हैं. समय पर सेट पर न आना तो उन का अधिकार सा बन जाता है. वे यह भी भूल जाते हैं कि जिस सीरियल में वह काम कर रहे हैं, वही उन की लोकप्रियता का धरातल है. अगर उन के नीचे से जरा सी जमीन खिसकी तो वे कहीं के नहीं रहेंगे.

प्रत्यूषा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. जैसेजैसे उस की लोकप्रियता बढ़ती गई, उस का दिमाग घूमता गया. अब वह छोटे शहर की संस्कारी लड़की या बालिका वधू की सीधीसादी आनंदी नहीं रही थी, बल्कि महानगर मुंबई की मौडर्न और प्रैक्टिकल लड़की बन गई थी, हालांकि अंतरमन में समाए उस के संस्कारों पर कोई फर्क नहीं पड़ा था. 2 साल तक ‘बालिका वधू’ की आनंदी की भूमिका निभातेनिभाते प्रत्यूषा को लगने लगा था कि देश का सब से लोकप्रिय सीरियल सिर्फ उस की वजह से चल रहा है. अपनी इस लोकप्रियता से अभिभूत हो कर उस में एटीट्यूड आने लगा. कभी सेट पर समय से नहीं आना तो कभी बातबात में नखरे दिखाना. कभी तरहतरह की मांगें तो कभी दूसरों पर रौब झाड़ना.

जब प्रत्यूषा की ऐसी हरकतें बढ़ती गईं तो प्रोड्यूसरडायरेक्टर और उस के बीच टकराव बढ़ने लगा. प्रत्यूषा को इस मुकाम तक बालिका वधू के निर्माता निर्देशक ने पहुंचाया था, आखिर वे उस की ऐसी हरकतों को कब तक बरदाश्त करते. उन्होंने प्रत्यूषा को बाहर का रास्ता दिखाने का फैसला कर लिया. आखिर सन 2013 में प्रत्यूषा को बालिका वधू से निकाल दिया गया. उस की जगह आनंदी के किरदार के लिए लिया गया तोरल रसपुत्र को. हालांकि उस वक्त प्रत्यूषा ने यही कहा कि उस ने मां की बीमारी के चलते बालिका वधू छोड़ दिया है. यह खबर भी आई कि उसे विक्रम भट्ट ने अपनी फिल्म में काम करने का औफर दिया है, इसलिए सीरियल छोड़ रही है. इस बात में काफी कुछ सच्चाई भी थी. यह अलग बात है कि वह फिल्म कभी बन नहीं सकी.

दरअसल, प्रत्यूषा को यह गलतफहमी थी कि वह इतनी लोकप्रिय है कि उसे काम की कोई कमी नहीं रहेगी. लेकिन ‘बालिका वधू’ से निकलने के बाद उसे जल्दी ही अहसास हो गया कि भले ही कितना भी जानापहचाना लोकप्रिय चेहरा क्यों न हो, ‘बालिका वधू’ के स्तर का काम मिलना आसान नहीं होगा. वैसे एक सच यह भी है कि प्रत्यूषा के जाने के बाद ‘बालिका वधू’ की टीआरपी भी लगातार गिरती गई. यहां तक कि ज्यादातर लोगों ने यह सीरियल ही देखना बंद कर दिया. इस की एक वजह सीरियल की कहानी को बेवजह लंबा खींचा जाना और कई पुराने पात्रों का सीरियल से अलग हो जाना भी हो सकता है.

बहरहाल, ‘बालिका वधू’ छोड़ने के कुछ समय बाद ही सन 2013 के ‘बिग बौस सीजन-7’ में प्रत्यूषा को प्रतिभागी के रूप में एंट्री मिल गई. ‘बिग बौस’ के घर का हाल बिलकुल उन कैदियों जैसा है, जो भले ही छोटेमोटे अपराध की सजा काटने जेल आए हों, पर वहां से कुख्यात बन कर निकलते हैं. प्रत्यूषा भले ही 63 दिन ‘बिग बौस’ के घर में रही. पर जब वह बाहर आई तो बिलकुल बदल चुकी थी. हालांकि ‘बिग बौस’ से भी उसे काफी फायदा हुआ. आर्थिक रूप से भी और जानेपहचाने चेहरे के रूप में भी.

जब प्रत्यूषा के पास काम नहीं था और लंबे समय तक उस का ‘बिग बौस’ में जाना तय हो गया था तो उस के मातापिता जमशेदपुर स्थित अपने घर चले गए थे. ‘बिग बौस’ से बाहर आने के बाद प्रत्यूषा ने अपने लिए काम ढूंढना शुरू किया. 2014 में उसे सोनी एंटरटेनमेंट चैनल के सीरियल ‘हम हैं न’ में काम मिला भी, लेकिन यह ऐसा सीरियल नहीं था कि ‘बालिका वधू’ की तरह प्रत्यूषा की शोहरत में इजाफा कर पाता. अंतत: कुछ ही दिन में यह सीरियल बंद हो गया.

इस बीच प्रत्यूषा को मुंबई की हवा लग गई थी. अब वह जमशेदपुर की संस्कारी लड़की नहीं, बल्कि मुंबई की मौडर्न गर्ल बन गई थी. दोस्तों की पार्टियों में जाना, शराब सिगरेट पीना उस के लिए आम बात थी. हालांकि भावनात्मक स्तर पर वह अब भी पहले जैसी ही थी. इसी बीच प्रत्यूषा की मुलाकात युवा बिजनैसमेन मकरंद मल्होत्रा से हुई.

दोनों मानसिक स्तर पर जुड़े तो प्रत्यूषा मकरंद में अपना भावी जीवनसाथी खोजने लगी. संभवत: प्रत्यूषा शादी कर के अपने जीवन को एक नई ही दिशा देने की सोच रही थी, लेकिन उस का यह सपना अधूरा ही रह गया. कुछ महीनों के बाद प्रत्यूषा को लगा कि मकरंद वैसा नहीं है, जैसा जीवनसाथी उसे चाहिए. फलस्वरूप दोनों का बे्रकअप हो गया. ब्रेकअप के बाद प्रत्यूषा ने पुलिस में मकरंद के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी.

सन 2015 में ही प्रत्यूषा को सोनी एंटरटेनमेंट चैनल का एक और सीरियल मिला ‘इतना करो ना मुझे प्यार’. साथ ही स्टार प्लस का ‘गुलमोहर ग्रैंड’ भी. लेकिन ये दोनों सीरियल भी प्रत्यूषा को वह मुकाम न दे सके जो उसे चाहिए था. इन सीरियलों की अवधि भी सीमित ही रही. इसी बीच खबर आई कि प्रत्यूषा का अफेयर प्रोड्यूसर विकास गुप्ता से चल रहा है. लेकिन यह बात भी अफवाह ही साबित हुई. इस के बाद प्रत्यूषा की जिंदगी में आया जमशेदपुर का रहने वाला राहुलराज सिंह. राहुल ने अपने एक्टिंग कैरियर की शुरुआत सहारा एंटरटेनमेंट चैनल के सीरियल ‘माता की चौकी’ से की थी. सीरियल ‘अंबरधरा’ में उस ने काम किया था.

इस के साथ ही राहुल की एक तथाकथित प्रोडक्शन कंपनी ‘युवा टाइगर एंटरटेनमेंट ऐंड मैग्नम औप्स फिल्म्स’ भी थी. उस की इस कंपनी के बैनर तले कोई प्रोडक्शन हुआ भी या नहीं, कोई नहीं जानता. प्रत्यूषा को राहुलराज सिंह इसलिए भी भाया, क्योंकि एक तो वह उस की जन्मभूमि जमशेदपुर का रहने वाला था, दूसरे वह जानीमानी कवयित्री प्रभा ठाकुर का बेटा था. प्रत्यूषा का वह संघर्ष का समय था. उसे किसी भावनात्मक सहारे की जरूरत थी. राहुलराज सिंह से पटरी बैठी तो वह अपने कांदीवली वाले फ्लैट में राहुलराज सिंह के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगी. उस का इरादा राहुलराज सिंह के साथ घर बसाने का था. राहुल भी इस के लिए तैयार था. यहां तक कि वह प्रत्यूषा को अपने मातापिता से मिलाने जमशेदपुर भी ले गया.

इस बीच प्रत्यूषा को लाइफ ओके चैनल के कौमेडी शो ‘कौमेडी क्लासेज’, कलर्स चैनल के सीरियल ‘ससुराल सिमर का’, जी टीवी के सीरियल ‘कुमकुम भाग्य’, सोनी चैनल के ‘आहट’ में छोटेछोटे रोल मिले, जिसे उस ने अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए मजबूरी में किया. इसी बीच सोनी चैनल के रियलिटी शो ‘पावर कपल’ में प्रत्यूषा और राहुलराज सिंह को बतौर कंटेस्टेंट साथसाथ काम करने का मौका मिला. शो तो यह जोड़ी नहीं जीत सकी, लेकिन लंबे समय तक प्रतिभागी रहने के लिए दोनों को काफी मोटी रकम मिली. प्रत्यूषा से जुड़े रहे लोगों का कहना है कि यह रकम प्रत्यूषा के खाते में गई जरूर, पर इस का उपयोग राहुलराज सिंह ने किया.

प्रत्यूषा के बारे में यह भी सुनने में आया है कि जब उस का कैरियर पीक पर था तो उस ने फ्लैट खरीदने के लिए बैंक से 50 लाख रुपए का लोन लिया था, जिसे वह कैरियर डगमगाने की वजह से चुका नहीं पाई थी. यह भी पता चला है कि जनवरी में जब बैंक अफसर पुलिस को ले कर उस पर पैसा लौटाने के लिए दबाव बनाने के लिए उस के घर आए थे तो प्रत्यूषा ने उन की वीडियो फिल्म बना ली थी और बाद में उसी के बूते पर कांदीवली थाने में उन लोगों के खिलाफ बदसलूकी और छेड़छाड़ करने का मामला दर्ज करा दिया था.

इस के बाद प्रत्यूषा ने कांदीवली का फ्लैट छोड़ दिया था और बांगुरनगर लिंक रोड स्थित हार्मोनी रेजीडेंट सोसायटी के फ्लैट नंबर 703 में किराए पर रहने लगी थी. राहुल राज सिंह भी उस के साथ इसी फ्लैट में रहता था. प्रत्यूषा राहुलराज सिंह से शादी का मन बना चुकी थी. राहुलराज सिंह भी इस के लिए तैयार था. दोनों ने 14 अप्रैल को सगाई और जून में शादी करने का फैसला किया था. खबर है कि राहुल के पिता राजवर्द्धन और मां प्रभा ठाकुर भी अपनी स्वीकृति दे चुके थे. लेकिन इसी बीच राहुल की कुछ ऐसी हरकतें प्रत्यूषा के सामने आईं, जो बरदाश्त के काबिल नहीं थीं. मसलन राहुल के कई लड़कियों से संबंध, पैसों की चीटिंग और थोक के भाव बोले गए झूठ.

खबरों के अनुसार, प्रत्यूषा और राहुलराज सिंह के बीच तब तनाव और बढ़ा, जब राहुल अपनी गर्लफ्रैंड्स को प्रत्यूषा के फ्लैट नंबर 703 पर लाने लगा. वह अपनी फ्रैंड्स को न केवल लाता, बल्कि प्रत्यूषा के साथ बैठ कर उसे शराब भी पिलाता था. बताते चलें कि इस बीच प्रत्यूषा भी शराब पीने लगी थी. आरोप यह भी है कि राहुल और उस की गर्लफ्रैंड सलोनी शर्मा प्रत्यूषा के साथ मारपीट भी करते थे. प्रत्यूषा की मृत्यु के बाद सलोनी शर्मा ने पुलिस को दिए अपने बयान में यह बात स्वीकार भी की है कि उस के और प्रत्यूषा के बीच मारपीट हुई थी. सलोनी ने राहुलराज पर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह प्रत्यूषा से पहले उस का बौयफ्रैंड था और उस ने राहुलराज की इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में 30 लाख रुपए लगाए थे, जो उस ने नहीं लौटाए. इसी बीच प्रत्यूषा उस की जिंदगी में आ गई थी और राहुल उस से दूर हो गया था.

सलोनी के अनुसार, जब वह राहुलराज से पैसा मांगने जाती थी तो प्रत्यूषा बीच में आ जाती थी, जिस की वजह से दोनों में मारपीट हो जाती थी. इस सिलसिले में उस ने राहुल के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी. लेकिन उस ने अपनी शिकायत इसलिए वापस ले ली थी, क्योंकि राहुल के जेल जाने से उस के पैसे डूब जाने का खतरा था. लेकिन प्रत्यूषा के दोस्त और करीबी सलोनी की इस बात को सही नहीं मानते.

बहरहाल, प्रत्यूषा के कुछ दोस्तों और हार्मोनी रेजीडेंट सोसायटी के कुछ लोगों ने इस बात को सच बताया है कि राहुलराज प्रत्यूषा के साथ मारपीट करता था और इस से वह बहुत दुखी थी. यहां तक राहुल ने प्रत्यूषा को मानसिक रूप से छल कर एक तरह से बंधक बना लिया था, वह उसे उस के मांबाप से भी दूर रखता था. प्रत्यूषा के मौत को गले लगाने से 15 दिन पहले से राहुलराज सिंह ने प्रत्यूषा का साथ छोड़ कर कहीं और रहना शुरू कर दिया था. अलबत्ता वह उस के पास आताजाता रहता था.

जो भी हो, 1 अप्रैल 2016 को शाम 4 बजे प्रत्यूषा ने अपनी चुन्नी गले में बांधी और पंखे से लटक कर अपनी जीवनलीला खत्म कर ली. जाहिर है, ऐसा इंसान तभी करता है जब वह बहुत ज्यादा दबाव में हो और उस के जीने का कोई मकसद ही न बचा हो. प्रत्यूषा की पंखे में लटकी लाश सब से पहले देखी भी राहुल ने ही. उस ने कुछ लोगों की मदद से प्रत्यूषा की लाश उतारी और कोकिलाबेन अस्पताल ले गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

बांगुरनगर थाने की पुलिस को प्रत्यूषा की मौत की खबर भी कोकिलाबेन अस्पताल ने ही दी. क्योंकि राहुल लाश को छोड़ कर कहीं चला गया था, संदेह का एक आधार यह भी था कि राहुलराज प्रत्यूषा की लाश को कोकिलाबेन अस्पताल क्यों ले गया, जबकि वह उसे इलाके के किसी निकटवर्ती अस्पताल में भी ले जा सकता था. बहरहाल, बांगुरनगर पुलिस ने प्राथमिक काररवाई के बाद प्रत्यूषा की लाश को सिद्धार्थ हौस्पिटल भेज दिया, जहां उस का पोस्टमार्टम होना था. इस बीच प्रत्यूषा के मातापिता को उस की मौत की सूचना दे दी गई थी. राहुलराज न केवल गायब था, बल्कि उस का फोन भी स्विच्ड औफ था.

काफी देर बाद वह पुलिस के सामने आया तो बांगुरनगर पुलिस ने उस का बयान लिया. खुद को निर्दोष कह कर उस ने जो कुछ बताया, उस के आधार पर उसे निर्दोष नहीं माना जा सकता था. फिर भी पुलिस ने उसे हिरासत में नहीं लिया, क्योंकि उस के खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं थी. प्रत्यूषा भले ही समय के साथ बदल गई थी या कहिए मुंबई की चकाचौंध ने उसे अपने रंग में रंग लिया था. लेकिन अपने चाहने वालों के लिए वह आज भी आनंदी ही थी. भोलीभाली, मासूम चेहरे वाली अपने ही घर की लड़की जैसी, अपने दोस्तों के लिए भी वह एक अच्छी लड़की थी. एक ऐसी लड़की जो ग्लैमर इंडस्ट्री में रह कर भी दिमाग से नहीं दिल से सोचती थी.

भले ही वह मौडर्न बन गई थी, लेकिन ‘बालिका वधू’ की भोली आनंदी अब भी उस के अंदर कहीं छिपी थी. यही वजह थी कि जिस ने भी सुना कि प्रत्यूषा बनर्जी ने पंखे से लटक कर आत्महत्या कर ली है, सन्न रह गया. सुन कर सभी को धक्का सा लगा. खबर पा कर दूसरे दिन प्रत्यूषा के मातापिता, चाचाचाची और परिवार के अन्य सदस्य मुंबई पहुंच गए. तब तक प्रत्यूषा की लाश का पोस्टमार्टम हो चुका था. लाश उस के परिजनों को सौंप दी गई.  2 अप्रैल को उसे दुलहन के जोड़े में सजाया गया. जीवन के अंतिम सफर में उसे वही लहंगा पहनाया गया, जो उस ने फैशन डिजाइनर रोहित वर्मा से अपनी शादी के लिए बनवाया था.

उसी शाम पुलिस की मौजूदगी में ओशिवारा श्मशान घाट में उस का अंतिम संस्कार कर दिया गया. इस मौके पर एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के तमाम लोगों के साथसाथ प्रत्यूषा के सारे दोस्त भी मौजूद थे. अगले दिन प्रत्यूषा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई, जिस में उस की मृत्यु का कारण दम घुटना बताया गया था. उस के गले पर जो निशान मिले, वे संभवत: उस के उस दुपट्टे के थे, जिस से लटक कर उस ने आत्महत्या की थी. पोस्टमार्टम के समय ही प्रत्यूषा का विसरा रख लिया गया था, ताकि उस की मौत की गहनता से जांच हो सके. साथ ही इस संदेह की पुष्टि के लिए कि प्रत्यूषा गर्भवती तो नहीं थी, उस की यूटरस के स्राव के कुछ नमूने जेजे अस्पताल भेज दिए गए थे.

जेजे अस्पताल ने स्राव की जांच के बाद बताया है कि प्रत्यूषा ने मृत्यु को गले लगाने से 1-2 दिन पहले गर्भपात कराया था. अस्पताल में प्रत्यूषा के यूटरस का हिस्टोपैथोलौजिकल एग्जामिनेशन किया गया था. उसी के बाद उस के प्रैग्नेंट होने की पुष्टि हुई. मृत्यु से काफी दिनों पहले से प्रत्यूषा गहरे अवसाद से गुजर रही थी. यह अवसाद संभवत: राहुल को ले कर ही था. इसीलिए उस ने मृत्यु से पहले भी शराब पी थी. इस की पुष्टि पुलिस ने भी की है.

बांगुरनगर पुलिस ने प्रत्यूषा की मृत्यु के मामले में किसी पर आरोप न लगा कर आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज किया था. इस के बावजूद राहुलराज सिंह को क्लीन चिट नहीं दी गई थी. इस की एक वजह यह भी थी कि मौके से पुलिस को प्रत्यूषा का कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था, साथ ही वह कोकिलाबेन अस्पताल में प्रत्यूषा की लाश को छोड़ कर गायब भी हो गया था. यहां तक कि उस का मोबाइल भी बंद था. संभावना थी कि उस ने अपने मोबाइल से कुछ चीजें डिलीट करने के लिए ऐसा किया होगा.

प्रत्यूषा बनर्जी की असामयिक मौत को ले कर कई सवाल उठ रहे थे. मसलन प्रत्यूषा ने खुदकुशी क्यों की? उस की ऐसी क्या मजबूरी थी कि उसे आत्महत्या करनी पड़ी? क्या उसे आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया? आखिर सुसाइड से पहले कुछ लोगों ने उसे रोते हुए क्यों देखा था? उस के पड़ोसियों ने भी उस के रोने की बात बताई थी. 2 अप्रैल शनिवार की शाम पुलिस ने राहुलराज सिंह का बयान दर्ज किया. उस ने यही बताया कि 1 अप्रैल शुक्रवार को शाम 4 बजे जब वह फ्लैट पर गया तो प्रत्यूषा पंखे से लटकी हुई थी. पड़ोसियों की मदद से उतार कर वह उसे कोकिलाबेन अस्पताल ले गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया.

पुलिस ने उसी दिन प्रत्यूषा के पिता शंकर बनर्जी और मां सोमा बनर्जी ने अपने बयान में कहा कि वे लोग प्रत्यूषा को राहुलराज सिंह से बच कर रहने को कहते थे, लेकिन वह नहीं मानी. उन्होंने संदेह जाहिर किया है कि प्रत्यूषा की मौत का जिम्मेदार राहुल ही है. प्रत्यूषा के दोस्त एजाज खान, काम्या पंजाबी और लीना डायस का भी यही कहना था. उन्होंने बताया कि प्रत्यूषा की मौत की वजह बनी राहुलराज की गर्लफ्रैंड सलोनी शर्मा. दोनों के बीच उसी की वजह से दूरियां बढ़ी थीं. कई बार वह प्रत्यूषा के फ्लैट पर आ कर राहुल के सामने ही उस के साथ मारपीट करती थी.

बहरहाल, पुलिस ने अपनी जांच जारी रखी. एजाज खान ने तो इसे साजिश के तहत मौत का मामला बताया. पुलिस ने अगले दिन रविवार को भी राहुलराज सिंह से पूछताछ जारी रखी. इसी बीच प्रत्यूषा के फ्लैट की तलाशी ली गई तो वहां से 2 मोबाइल फोन, शराब की बातलें और गांजे के 2 पैकेट मिले. प्रत्यूषा के मोबाइल को देखा गया तो उस के व्हाट्सऐप में एक मैसेज था, ‘मर के भी मुंह न तुझ से मोड़ना’. यह मैसेज राहुल के लिए ही था. इस के बाद प्रत्यूषा औफलाइन हो गई थी.

उधर पूछताछ के दौरान ही राहुलराज को सीने में दर्द और लो ब्लडप्रेशर की शिकायत हुई. राहुल को पुलिस कांदीवली के श्रीसाईं अस्पताल ले गई, जहां उसे आईसीयू में भरती कर लिया गया. राहुल को गिरफ्तारी का डर था, इसलिए उस के मातापिता की ओर से आवेदन दे कर उच्च न्यायालय में उस की अग्रिम जमानत की मांग की गई. न्यायालय ने 25 अप्रैल तक उस की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी, लेकिन अग्रिम जमानत नहीं दी.

इस बीच खबर आई कि राहुलराज सिंह शादीशुदा था. 9 साल पहले उस ने एक एयरहोस्टेस से शादी की थी और बाद में उसे तलाक दे दिया था. प्रत्यूषा के कुछ दोस्तों और राहुलराज सिंह द्वारा प्रताडि़त कुछ लड़कियों के माध्यम से यह खबर भी आई कि राहुल ‘सीरियल चीटर’ था. उस ने दा्रेस्ती के नाम पर कई लड़कियों से दोस्ती की, शादी का वादा किया और अपनी कंपनी में उन से मोटी रकमें लगवाईं. एक टीवी एक्ट्रेस हीर पटेल का कहना था कि राहुल कई लड़कियों को धोखा दे चुका है. उस ने उन से भी 25 लाख रुपए लिए थे, जिन में से एक पैसा भी वापस नहीं किया. वह उन्हें किडनैपिंग केस में फंसाने की धमकी देता था. फिलहाल हीर पटेल और राहुल के बीच केस चल रहा है.

ऐसी ही एक पीडि़ता शीतल मालवीय ने राहुल को अपना भाई मान कर उस की कंपनी में 10 लाख रुपए लगा दिए थे. लेकिन राहुल ने एक पैसा नहीं लौटाया. एक अन्य लड़की मिस्टी मुखर्जी से राहुल ने शादी का झांसा दे कर रिलेशनशिप बनाई और उस से अपनी कंपनी में 10 लाख रुपए लगवा लिए. उस ने मिस्टी को एक पैसा नहीं लौटाया. इसी बीच उसे शीतल मालवीय से पता चला कि राहुल की शादी एक एयरहोस्टेस से हो चुकी है. यह जानने के बाद मिस्टी ने उस से रिश्ता तोड़ दिया.

सलोनी शर्मा से भी राहुल ने रिलेशनशिप बना कर मोटी रकम ली थी. सलोनी ने पुलिस में अपना बयान भी दर्ज करा दिया है. बहरहाल एक बात यह भी सामने आई है कि घटना वाले दिन दोपहर में राहुलराज और प्रत्यूषा मलाड के कार्निवाल मौल गए थे. जहां दोनों के बीच झगड़ा हुआ था. राहुल ने वहां अपना आपा खो कर प्रत्यूषा को थप्पड़ मार दिया था, जिस से वह गिर पड़ी थी. राहुल ने उसे उठाने की भी जरूरत नहीं समझी. उस के बाद प्रत्यूषा घर लौटी और उस ने आत्महत्या कर ली.

बहरहाल, सच्चाई तो जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इस में कोई दोराय नहीं कि प्रत्यूषा की मौत के लिए किसी न किसी रूप में राहुलराज सिंह ही जिम्मेदार है. इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रत्यूषा की आत्महत्या के मामले की जांच क्राइम ब्रांच से कराने का ऐलान कर दिया है. जो भी हो, सच्चाई यही है कि प्रत्यूषा अपनी जिंदगी को मौत के आंचल से ढांप कर दूर चली गई, कभी वापस न आने के लिए. लेकिन उस की मौत का सच तो सामने आना ही चाहिए, ताकि ऐसी प्रतिभावान किसी और लड़की को जज्बाती बन कर ऐसा कदम न उठाना पड़े. TV Actress Suicide

 

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