Hindi Stories: इंसान की जिंदगी में यादों का खास महत्व होता है. जो यादें मन को सुकून देती हैं, उन्हें कोई भूलना नहीं चाहता. जबकि कड़वी यादों को इंसान भूल से भी याद नहीं करना चाहता. लेकिन यादों की डोर आदमी के अपने वश में नहीं होती. दिमाग के परदे पर गाहेबगाहे हर तरह की यादें दस्तक देती रहती हैं. तकलीफ तब होती है, जब कड़वी यादें वर्तमान को प्रभावित करने लगती हैं.

एक शाम ऐलिशिया कोजाकीविक्ज अपने कमरे में बैठी थी, अनायास ही पुरानी यादें उस के सुकून पर हावी हो गईं. उस ने उन से पीछा छुड़ाने की काफी कोशिश की, लेकिन वह उन बुरी यादों से पीछा नहीं छुड़ा सकी. जब मन परेशान  होने लगा तो उस ने उन यादों को मन के द्वार से निकाल कर आंखों की ऊपरी सतह पर लाने की सोची, ताकि डरावने दृश्य शब्द बन जाएं.

ऐलिशिया ने उन बुरी यादों की अखबारी कटिंग काट कर एक फाइल बना ली थी. उस फाइल में केवल बुरी यादों की ही खबरें नहीं थीं, बल्कि उस की तारीफ में छपी कुछ खबरें और रिपोर्ताज भी थे. वह उस फाइल को ले कर टेबल पर बैठ गई और एकएक खबर को उचटती नजरों से देखने लगी. सभी ऐसी खबरें थीं, जिन्हें उस ने सैकड़ों बार पढ़ा था, इसलिए जानीपहचानी थीं. मन की दिशा बदलने के लिए उस ने सतही तौर पर खबरें पढ़ीं तो, लेकिन बुरी यादों के किसी भी चित्र को आंखों के द्वार पर दस्तक नहीं देने दी. ऐलिशिया अभी उन खबरों की फाइल को उलटपुलट ही रही थी कि उस ने अपने कंधे पर हाथ का स्पर्श महसूस किया. उस ने पलट कर देखा, पीछे उस की मां मैरी खड़ी थीं.

ऐलिशिया के चेहरे पर नजर पड़ी तो वह उस की उदासी और परेशानी को भांप कर थोड़ी नाराजगी से बोलीं, ‘‘ऐलिशिया बेबी, तुम फिर उन्हीं बुरी यादों में डूबी हो न? इट इज नौट गुड बेबी. अब तुम उस सब से बहुत दूर आ चुकी हो. भूल कर भी तुम्हें उस सब के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए. इस के बजाय तुम्हें यह सोच कर खुश होना चाहिए कि लोग तुम्हें पसंद करते हैं. बच्चों के लिए तुम एक नेक काम कर रही हो.’’

‘‘सौरी मम्मा, बट…’’

मैरी ने उस की बात को बीच में ही काट कर समझाने वाले अंदाज में कहा, ‘‘कम औन ऐलिशिया, जो बीत गया सो बीत गया. तुम सिर्फ अपने फ्यूचर पर फोकस करो. हमें नाज है तुम पर. अब तुम्हें गुजरे जमाने की बातों को ले कर बिलकुल नहीं सोचना चाहिए. बुरी यादों से पीछा नहीं छुड़ाओगी तो वे तुम्हें परेशान करती रहेंगी. हम अपनी बेटी के चेहरे पर जरा सी भी उदासी नहीं देखना चाहते.’’

‘‘ओके मम्मा, अब ऐसा नहीं होगा.’’ ऐलिशिया ने मुसकरा कर कहा और खड़ी हो कर मां के गले लग गई.

ऐलिशिया कई साल पहले जिस भयानक हादसे से रूबरू हुई थी, वह उस के दिलोदिमाग पर गहरी छाप छोड़ गया था. उस हादसे में उस का दिल ही नहीं, आत्मा तक घायल हुई थी. ऐलिशिया के दिमाग में एक अंजाना सा डर घर कर गया था. परिवार की सहानुभूति, मनोचिकित्सकों के उपचार और खुशनुमा माहौल दे कर जैसेतैसे उस डर को ऐलिशिया के दिमाग से निकाला गया था.

ऐलिशिया ने खुद भी उस डर से उबरने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन इस सोच के साथ कि वह कुछ ऐसा करे कि जो उस के साथ हुआ, वह किसी दूसरे के साथ न हो. इसी सोच के चलते उस ने अपने साथ हुई भयानक घटना को एक उद्देश्य में बदल दिया. यह सब निस्संदेह आसान नहीं था. लेकिन ऐलिशिया ने मजबूत इरादों के साथ जो मुहिम चलाई, वह काफी हद तक कामयाब रही.

उस की यह मुहिम थी, आधुनिकता की चकाचौंध भरे इस साइबर युग में बच्चों को उन के सिर पर मंडराते खतरों से बचाने की. इस का परिणाम अच्छा ही निकला. जल्दी ही वह बच्चों को जागरूक करने वाली रोल मौडल बन गई. न केवल उस के काम को सराहना मिली, बल्कि सरकार ने उस के नाम पर बच्चों को सुरक्षा देने वाला एक कानून भी बना दिया. ऐलिशिया अब वाकई एक बड़ा नाम है.

ऐलिशिया कमउम्र में जिस घटना का शिकार हुई थी, वह वाकई खौफनाक थी. उस का गुनाह सिर्फ इतना था कि वह इंटरनेट चैटिंग की लत का शिकार थी. भावनाओं में बह कर वह अपनी सोचनेसमझने की क्षमता भी खो बैठी थी. इंटरनेट की सोशल साइट पर एक शख्स पर विश्वास करना उस के लिए बहुत खौफनाक साबित हुआ था.

गनीमत बस इतनी थी कि वह उस शख्स के चंगुल में फंसी होने के बाजवूद जिंदा थी और पुलिस ने वक्त पर पहुंच कर उसे छुड़ा लिया था. ऐलिशिया अमेरिका के पेंसिल्वेनिया राज्य के खूबसूरत शहर पीटर्सबर्ग की रहने वाली थी. उस के पिता चार्ल्स एक समृद्ध कारोबारी थे. परिवार में कुल जमा 4 लोग थे, ऐलिशिया, उस की मां मैरी और एक बड़ा भाई.

घटना के समय ऐलिशिया महज 13 साल की थी. पढ़ाई के दौरान कंप्यूटर इंटरनेट का इस्तेमाल उस की आदत में शुमार था. उस का भाई भी यह सब करता था. ऐलिशिया ने अपने हमउम्र दोस्तों और उन के संपर्क के लोगों से औनलाइन चैटिंग शुरू कर दी. पढ़ाई के बाद उस का ज्यादातर वक्त इसी में बीतता था. कह सकते हैं कि वह इस लत का शिकार हो गई थी. उस के कई दोस्त बने, जिन में एक नया दोस्त स्कौट भी था. स्कौट बातें बनाने में माहिर था. उस की बातों का अंदाज ऐलिशिया को गुदगुदाता था. चैटिंग का दायरा बढ़ा तो ऐलिशिया को अपने नए दोस्त के बारे में बहुत सी बातें पता चलीं. उसे भी वही चीजें पसंद थीं, जो ऐलिशिया को पसंद थीं.

कई बार बच्चों को पता नहीं चलता कि वह स्मार्ट और खूबसूरत हैं. उन्हें तब बहुत खुशी मिलती है, जब कोई दूसरा बताता है कि वे स्मार्ट हैं, सुंदर हैं. ऐलिशिया के साथ भी यही हुआ. स्कौट ने ऐसी बातें कर के कुछ ही दिनों में उस का विश्वास जीत लिया. ऐलिशिया दूसरों पर बहुत जल्द विश्वास करने वाली मासूम लड़की थी. उस का परिवार एकदूसरे के बहुत करीब था. पिता व्यस्त रहते थे, फिर भी परिवार की खुशियों के बीच वक्त जरूर निकाल लेते थे. मैरी दोनों बच्चों को बहुत प्यार करती थीं. बेटी को इंटरनेट पर उलझी देख कर वह उसे अंजान लोगों से सावधान रहने के लिए कहती रहती थीं.

ऐलिशिया का दोस्त स्कौट बहुत दिलचस्प था. उसे गुडमौर्निंग कहने से ले कर गुडनाइट कहने तक वह छोटीछोटी बातों तक का खयाल रखता था. वह कभी भी किसी भी बात पर ऐलिशिया से नाराज नहीं होता था. कभी ऐेलिशिया उस से नाराज हो जाती तो वह उसे मना लेता था. दोनों ही एकदूसरे में दिलचस्पी लेते थे और रोजाना घंटोंघंटों तक चैटिंग करते थे. महीनों तक चली चैटिंग ने दोनों को काफी करीब ला दिया था.

स्कौट के कहने पर ऐलिशिया ने उसे अपनी कई फोटो भेजी थीं. उस के हर फोटो की वह दिल खोल कर तारीफ करता था. इस सब से ऐलिशिया को बहुत खुशी मिलती थी. इस के बावजूद दोनों की कभी मुलाकात नहीं हुई थी. ऐलिशिया ने उसे अपने परिवार के बारे में सारी जानकारियां दे रखी थीं. स्कौट उसे समझाता था कि वह अपनी इस दोस्ती के बारे में किसी को न बताए.

दिसंबर, 2001 में स्कौट ने ऐलिशिया के सामने मिलने का प्रस्ताव रखा, लेकिन उस ने इनकार कर दिया. इस पर स्कौट ने उस से मीठीमीठी बातें कीं, कसमें दीं, अपनी कई महीनों की दोस्ती का वास्ता दिया. अंतत: किसी तरह वह ऐलिशिया को मनाने में कामयाब हो गया. दोनों ने तय कर लिया कि वे 31 दिसंबर की रात न्यू ईयर पर मिलेंगे. स्कौट ने उसे बताया था कि जिस ब्लौक में उस का घर है, वह वहां से कुछ दूर खड़ा मिल जाएगा. ऐलिशिया इस के लिए तैयार हो गई. उस ने सोशल साइट के उस दोस्त पर पूरा विश्वास कर लिया, जिस से वह पहले कभी नहीं मिली थी. चैटिंग से उपजी भावनाओं और विश्वास ने स्कौट को उस के सपनों का राजकुमार बना दिया था.

31 दिसंबर की रात को न्यू ईयर का जश्न पूरी दुनिया में मनाया जाता है. क्रिसमस के बाद आने वाली 31 दिसंबर की रात अमेरिकियों के लिए तो और भी खास होती है. ऐलिशिया के परिवार के लिए भी वह रात खास थी. लोग नए साल के जश्न की तैयारियों में डूबे थे. छोटीबड़ी इमारतें रोशनी से नहाई हुई थीं.

उस दिन शाम से ही मौसम बेहद सर्द था. रुकरुक कर बर्फ गिर रही थी. ऐलिशिया स्कौट से मिलने की कल्पनाओं में डूबी थी. उस के घर में भी सब खुश थे. सभी ने एकसाथ डिनर किया. 9 बजने वाले थे. ऐलिशिया को सब की नजरों से बच कर घर से निकलना था. उस ने अपनी मां मैरी से कहा, ‘‘मम्मा, आई एम गोईंग. मुझे नींद आ रही है.’’

‘‘ओके, हैप्पी न्यू ईयर बेबी.’’ मां ने प्यार से कहा.

इस के बाद नींद के बहाने ऐलिशिया उन लोगों से अलग हो कर अपने कमरे में चली गई. उम्र के बहाव ने उसे जरूरत से ज्याद चालाक बना दिया था. स्कौट को साढ़े 9, 10 बजे आना था. यह सब गलत था, पर दोस्ती की खातिर वह स्कौट से मिलने के लिए तैयार हो गई थी. साढ़े 9 बजने को आए तो उस ने चुपके से घर का जायजा लिया. घर के सभी लोग डाइनिंग हौल में बैठे टीवी देखने में मशगूल थे. ऐलिशिया चुपके से मुख्य दरवाजा खोल कर घर से बाहर निकल गई.

बाहर बहुत ठंड थी. एकदम सन्नाटा पसरा था. सड़कों पर बर्फ की सफेद चादर बिछी थी. मौसम से लड़ती स्ट्रीट लाइट्स की रोशनी भी धुंधलाई हुई थी. ऐलिशिया ने ठंड से बचने के लिए जींस, टौप, जैकेट और स्टालर पहन रखा था. ठंड से बचने की कोशिश करते हुए वह सड़क पर चलने लगी. सन्नाटे में उसे केवल अपने पैरों के नीचे बर्फ के कुचलने की आवाज सुनाई पड़ रही थी.

मन ही मन वह डर भी रही थी. डरावनी खामोशी के साए में वह अपने ब्लौक को पार कर के कोने पर पहुंची. तभी उस के दिल ने कहा कि वह गलत कर रही है, उसे वापस चले जाना चाहिए. अपने इस खयाल पर अमल करने के लिए वह मुड़ी, लेकिन तभी उस के कानों में आवाज पड़ी, ‘‘हाय ऐलिशिया, प्लीज कम.’’

ऐलिशिया ने आवाज की दिशा में पलट कर देखा. आवाज सड़क किनारे खड़ी एक कार से आई थी. ड्राइविंग सीट पर एक शख्स बैठा नजर आ रहा था. उस ने सोचा कि वह स्कौट ही होगा, जो सर्द मौसम में कार लिए उस का इंतजार कर रहा है. वह कार की ओर लपकते हुए ड्राइविंग सीट के बगल वाले दरवाजे के नजदीक पहुंची. कार में ड्राइविंग सीट पर बैठे व्यक्ति ने उस के वहां पहुंचते ही दरवाजा खोल दिया. ऐलिशिया ने झुक कर देखा तो बुरी तरह चौंकी. कार में बैठा शख्स अधेड़ उम्र का व्यक्ति था. निस्संदेह वह उस का दोस्त स्कौट कतई नहीं था. क्योंकि उस की फोटो उस ने इंटरनेट पर मंगा कर कितनी ही बार देखी थी.

ऐलिशिया कुछ सोचसमझ पाती, इस के पहले ही उस व्यक्ति ने उस का बाजू पकड़ कर खींचा और कार की सीट पर बैठा दिया. ऐलिशिया बुरी तरह डर गई. दिमाग जैसे शून्य हो गया. इसी दरम्यान उस व्यक्ति ने फुरती दिखाते हुए एक रस्सी से उस के हाथ बांध दिए. साथ ही गुर्राया भी, ‘‘शोर मत मचाना वरना मार कर पीछे कार की डिक्की में डाल दूंगा.’’

डरीसहमी ऐलिशिया को जान का खतरा सताने लगा. वह समझ गई कि वह बड़े खतरे में फंस गई है. उस व्यक्ति ने तेजी से कार चलानी शुरू कर दी. सड़क पर पड़ी बर्फ को कुचलती हुई कार पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रही थी. कार से ऐलिशिया सड़कों पर लगे साइनबोर्ड्स ही देख पा रही थी. वे उस के रोज के जानेपहचाने थे. उस सड़क पर आगे टोलबूथ पड़ने वाला था. ऐलिशिया को वहां बचने की उम्मीद नजर आई, क्योंकि बूथ के अंदर बैठे कर्मचारी बच्चों को बहुत प्यार करते थे. वे उन का हालचाल पूछते थे और कभीकभी टाफियां भी देते थे. ऐलिशिया जब मातापिता के साथ जाती थी तो भी ऐसा ही होता था. वह सोच रही थी कि जब बूथकर्मी उसे सीट पर रोते हुए देखेंगे तो पूछेंगे कि क्या हुआ?

इस के बाद उस अंजान खतरनाक शख्स का भेद खुल जाएगा. वह पुलिस बुला कर उसे आजाद करा लेंगे. कार बूथ पर पहुंची. लेकिन उसे किसी ने नहीं देखा. ठंडे मौसम की वजह से कर्मचारी एक छोटी खिड़की के जरिए ही टोलटैक्स का लेनदेन कर रहा था. कार आगे बढ़ गई. इस के साथ ही ऐलिशिया की उम्मीद भी टूट गई. ऐलिशिया बुरी तरह डरी हुई थी. उसे लग रहा था कि वह शख्स अब कहीं कार रोकेगा, उसे मारेगा और सड़क किनारे फेंक देगा. रास्ते में टेलीफोन बूथ भी था. वह सोच रही थी कि काश वह अपने घर एक फोन कर पाती तो उसे खतरे से आजादी मिल जाती. वह कसमसाती तो वह व्यक्ति गुर्रा कर उसे जान से मारने की धमकियां दोहराता.

करीब 4 घंटे के सफर के बाद कार एक घर के पोर्च में जा कर रुकी. वह व्यक्ति नीचे उतरा. उतरने से पहले वह फिर गुर्राया, ‘‘चुप रहना, वरना अच्छा नहीं होगा.’’

उस ने ताला खोल कर घर का दरवाजा खोला. इस के बाद उस ने ऐलिशिया को खींच कर नीचे उतारा और उसे धकेलते हुए घर में बने बेसमेंट में ले गया. वहां एक ताला लगा दरवाजा था. वह बोला, ‘‘तुम्हारे साथ इतना बुरा होने जा रहा है, जिस के बारे में तुम ने सोचा भी नहीं होगा. अब तुम जितना चीखना चाहो, चीखो.’’

‘‘प्लीज मुझे छोड़ दो.’’ ऐलिशिया गिड़गिड़ाई.

लेकिन तब तक उस ने दरवाजा खोल कर उसे अंदर खींच लिया. वह हैवान उस के साथ क्रूर ढंग से पेश आ रहा था. उस ने ऐलिशिया के कपड़े उतार कर उस के गले में कुत्ते का पट्टा डाल कर उसे जमीन पर खींचा और फिर खींचते हुए ही बिस्तर पर गिरा दिया. इस के बाद उस ने ऐलिशिया के साथ जबरदस्ती की. ऐलिशिया डर, दहशत और दर्द से बेहाल रोती और तड़पती रही. उस की बातों, उस के गिड़गिड़ाने या रोने का उस पर कोई असर नहीं पड़ा. अगले 3 दिनों तक वह उसे मारतापीटता और उस के साथ जबरदस्ती करता रहा. वह उसे खानेपीने के लिए भी बहुत कम देता था. ऐलिशिया के आंसू खत्म हो चुके थे. उसे विश्वास हो गया था कि जब उस हैवान का मन भर जाएगा तो वह उसे मार ही देगा.

ऐलिशिया भावनाओं में किए गए विश्वास पर पछता रही थी. उसे अपने परिवार की याद भी सता रही थी. वह सोच रही थी कि घर वाले उसे जिंदा रहते या मरने के बाद ढूंढ़ ही लेंगे. चौथे दिन शाम को उस हैवान ने कहा, ‘‘मैं तुम्हें मारने वाला था, लेकिन मैं तुम्हें पसंद करने लगा हूं, इसलिए जिंदा रखूंगा. तुम अब सब कुछ भूल कर मेरे साथ रहने की आदत डाल लो.’’

उस आदमी की आंखों में हैवानियत, बातों में कठोरता और चेहरे पर क्रूरता थी. यकीनन वह बेहद खतरनाक किस्म का आदमी था. शाम ढले वह खाना लाने की बात कह कर ऐलिशिया को कमरे में बंद कर के चला गया. प्यार जताने की कोशिश में उस ने ऐलिशिया को पूरी तरह नहीं बांधा था. उस ने बिस्तर पर उसे खुला छोड़ कर बैडरूम के बाहर का ताला लगा दिया था. अलबत्ता जाने से पहले वह उस के हाथ बांधना नहीं भूला था. ऐलिशिया के ऊपरी हिस्से को उस ने बेपर्दा ही रहने दिया था. वह टेलीफोन पर अपने दोस्तों से कहा करता था कि वह जिंदगी के मजे ले रहा है और उन्हें भी मजे करा सकता है. ऐलिशिया को यह डर भी सता रहा था कि वह अपने दोस्तों के सामने उसे शिकार की तरह डाल सकता है.

रात हो चुकी थी. तभी ऐलिशिया ने दरवाजे पर एक साथ कई कदमों की आहट सुनी. वह बुरी तरह डर गई. उस ने सोचा कि वह अपने साथ दोस्तों को लाया होगा. ऐलिशिया बिस्तर से उतर कर बैड के नीचे छिप गई. दरवाजा खुला, उसे बैड के नीचे से कई बूट दिखाई दिए. एक व्यक्ति ने उसे बैड के नीचे से ढूंढ़ निकाला. उस ने कहा, ‘‘बाहर निकल आओ, हम तुम्हें बचाने के लिए आए हैं.’’

डरीसहमी ऐलिशिया बाहर निकली. उस के अर्द्धनग्न बदन पर नजर पड़ते ही सशस्त्र लोगों ने पीठ घुमा ली. उन के हाथों में पिस्तौलें और वर्दी देख कर वह समझ गई कि ये पुलिस वाले हैं. उन में एक महिला पुलिसकर्मी भी थी. उस ने ऐलिशिया के हाथ खोले और सोफे पर पड़ी उस की जैकेट उसे पहनने को दी. उन लोगों के कब्जे में वह हैवान आदमी भी था. उस के हाथों को पीछे कर के हथकडि़यां लगा दी गई थीं, वह कसमसा रहा था.

पुलिस ऐलिशिया को गाड़ी से थाने ले गई. उसे सब से ज्यादा खुशी तब मिली जब उस के मातापिता ने दौड़ कर उसे गले लगा लिया. ऐलिशिया के लिए एक तरह से यह दूसरी जिंदगी थी. नरक से निकल कर मां की बांहों में वह खुद को सुरक्षित महसूस कर रही थी. पुलिस ने उस आदमी से पूछताछ की तो पता चला कि वह एक हैवान की घिनौनी मानसिकता का शिकार हुईर् थी.

पुलिस ने जिस व्यक्ति को पकड़ा था, उस का नाम टैरी था. 38 वर्षीय टैरी वर्जीनिया का रहने वाला था. किशोर उम्र की लड़कियों को ले कर वह विकृत मानसिकता का शिकार था. वह अकेला रहता था और उस में कई बुरी आदतें थीं. इंटरनेट चैटिंग से वह लड़कियों को अपने जाल में उलझाता था और उन के साथ गंदी बातें किया करता था. टैरी ने कई नामों से अपनी आईडी बनाई हुई थी. उस का ज्यादातर वक्त चैटिंग में ही बीतता था. ऐलिशिया को भी उस ने अपने जाल में उलझा लिया था. अपनी उम्र व पहचान छिपा कर वह खुद को उस का हमउम्र लड़का बन कर चैटिंग करता था. उस ने इंटरनेट से एक किशोर के कई फोटो चुरा लिए थे, जिन्हें वह ऐलिशिया को भेजता था.

ऐलिशिया किशोर थी. उस में बहुत ज्यादा समझ नहीं है, यह बात टैरी चंद रोज की चैटिंग में ही समझ गया था. उसे वह आसान शिकार लगी. उस की भावात्मक बातों से वह उस पर विश्वास करने लगी थी. ऐलिशिया जब पूरी तरह भावात्मक रूप से उस के साथ जुड़ गई तो टैरी ने उसे मिलने के लिए तैयार कर लिया. जब वह उस के कब्जे में आ गई तो वह हैवान बन गया. उधर ऐलिशिया का परिवार उस के रहस्यमय तरीके से गायब होने से बुरी तरह परेशान था. किसी की कुछ समझ में नहीं आ रहा था. अपने स्तर से उन्होंने उस की बहुत खोजबीन की.

परिवार पर नए साल की खुशियों पर गम और परेशानी की धुंध जम गई थी. पूरी रात की परेशानी और उलझन के बाद चार्ल्स ने ऐलिशिया का फोटो दे कर पुलिस में उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी थी. पुलिस सक्रिय हो गई और ऐलिशिया के फोटो व पहचानशुदा इश्तहार जारी कर दिए. कोई नहीं जानता था कि ऐलिशिया कहां चली गई. 2 दिनों बाद एक व्यक्ति ने पुलिस को गुप्त सूचना दी कि उस ने इंटरनेट पर औनलाइन एक व्यक्ति को एक बच्ची का यौनशोषण करते देखा है. वह मुसीबत में थी और बचने के लिए छटपटा रही थी. ऐलिशिया लापता थी, पुलिस उसे खोज रही थी. इस बात से उसे लगा कि वह ऐलिशिया भी हो सकती है. ऐलिशिया न भी होती तो भी यह एक बच्ची के शोषण का गंभीर मामला था.

पुलिस ने उस व्यक्ति से पूछताछ कर के पता किया तो उस ने वह इंटरनेट आईडी लिंक पुलिस को दे दी, जिस पर उस ने लाइव वीडियो देखा था. पुलिस सुरागरसी में जुट गई. पुलिस ने उस आईडी का आईपी ऐड्रेस निकलवाया तो वह टैरी का निकला. पुलिस ने टैरी की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की तो वे पूरी तरह संदिग्ध पाई गईं. एक शाम पुलिस टीम उस के घर तक पहुंच गई. इत्तफाक से टैरी तभी खाना पैक करा कर वापस आया था. उसे कब्जे में ले कर ऐलिशिया को बरामद कर लिया गया. ऐलिशिया को उस के परिवार के सपुर्द कर के टैरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया.

इस घटना के बाद ऐलिशिया को लगने लगा था कि उस के लिए दुनिया में कुछ नहीं बचा है. वह डर का शिकार हो गई थी. दिलोदिमाग पर सिर्फ डर छाया था. बेटी को दर्द से निकालने के लिए उस के मातापिता ने मनोचिकित्सकों का सहारा लिया. खुद भी वह उस का बड़ा सहारा बने. अमूमन ऐसे मामलों में लोग बच्चों को भी दोषी मान लेते हैं, लेकिन चार्ल्स और मैरी ने ऐसा कतई नहीं किया. उन्होंने उसे प्यार से संभाला. लंबे समय के बाद वह स्कूल गई. समय अपनी गति से चलता रहा. ऐलिशिया की कड़वी यादों ने साथ नहीं छोड़ा था. उधर एक साल बाद सन 2003 में अदालत ने टैरी को दोषी पा कर उसे 20 साल कैद की सजा सुनाई.

ऐलिशिया ने पढ़ाई में मन लगाया. अब वह काफी समझदार हो गई थी. वह चाहती थी कि वह बच्चों के लिए ऐसा कुछ करे कि जो उस के साथ हुआ, वह किसी और के साथ न हो. इस के लिए उस ने झिझक छोड़ कर बिना यह सोचे कि लोग क्या कहेंगे, बच्चों को जागरूक करना शुरू किया. उस ने इंटरनेट के खतरों पर सार्वजनिक रूप से बोलना शुरू किया. वह स्कूलों में जाती और अपनी आपबीती बता कर बच्चों को आगाह करती. अभिभावकों, शिक्षकों को भी आगाह करती. वह जानती थी कि इंटरनेट को ले कर ऐसी कोई शिक्षा नहीं दी जाती कि बच्चे इंटरनेट के खतरों से सतर्क रह सकें. अगर उसे भी उदाहरणों के साथ ऐसी शिक्षा दी गई होती, तो शायद वह इस खतरे से बच जाती.

अब वह बच्चों को जागरूक कर के खुद उदाहरण बनना चाहती थी. अपने साथ घटी इस भयानक घटना को उस ने उद्देश्य में बदल दिया. लेकिन पहली बार जब उस ने एक स्कूल में बोलना चाहा तो अपने साथ घटी घटना को पूरी तरह बयान नहीं कर पाई. बस माइक पर खड़ी रोती रही. इस के बावजूद ऐलिशिया ने बच्चों को इंटरनेट के उस जाल से बचाना ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया, जिस में वह खुद फंस गई थी. वह चाइल्ड वैलफेयर एक्टीविस्ट बन गई. ऐलिशिया खुद जिस हादसे का शिकार हुई थी, उस में पहचान छिपाने की जरूरत थी. लेकिन ऐलिशिया का मनाना था कि अगर वह ऐसा करेगी तो वे बच्चे खतरे में पड़ जाएंगे, जिन्हें जागरूक कर के वह बचा सकती है.

इस चिंता को उस ने अपने पास नहीं फटकने दिया. मीडिया में ऐलिशिया सुर्खिया बनने लगी. उस के काम की सराहना होती थी. बच्चों के अधिकारों के लिए वह आगे बढ़ कर सरकार तक उन की बात पहुंचाती थी. अब वह अलग किस्म की लड़की बन चुकी थी. ऐलिशिया ने पौइंट पार्क यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया तो उस ने ग्रेजुएशन के लिए फौरेंसिक मनोविज्ञान विषय का चुनाव किया. इस की 2 वजहें थीं. एक तो इस विषय की गहराई में जा कर वह खुद की बुरी यादों को धुंधला कर सकती थी, दूसरे बच्चों को भी वह मनोवैज्ञानिक ढंग से अपनी बात समझा सकती थी. ऐलिशिया के इंटरनेट सिक्योरिटी और बच्चों के मानवाधिकार संरक्षण की पैरोकारी व लापता बच्चों के लिए किए जा रहे उस के काम को बहुत ख्याति मिली.

धीरेधीरे ऐलिशिया एक बड़ा नाम बन गई. सन 2007 में उस ने नेशनल एसोसिएशन प्रोजेक्ट टू चिल्ड्रेन संस्था के साथ मिल कर सरकार के सामने बच्चों को इंटरनेट के खतरों से बचाने, उन्हें शिकार बनाने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाने तथा बच्चों की तस्करी रोकने का मुद्दा उठा कर पुख्ता कानून बनाने की जरूरत के साथ प्रोजैक्ट रखा. अमेरिकी सरकार ने उस पर गंभीरता से विचार कर के ‘इंटरनेट क्राइम्स अगेंस्ट चाइल्ड टास्क फोर्स’ (आईसीएसी) का गठन किया. उस के साथ घटी घटना को उदाहरण बना कर सरकार ने सन 2008 में ‘ऐलिशियाज लौ’ नाम से बच्चों के संरक्षण देने वाला एक कानून भी बना दिया.

इस कानून को वर्जीनिया, टेक्सास, कैलीफोर्निया, टैनिसी व आईदाहो आदि कई राज्यों में लागू कर दिया गया. ऐलिशिया शेष राज्यों में कानून लागू कराने के लिए प्रयासरत है. ऐलिशिया के प्रयासों से न सिर्फ अब तक अनेक बच्चे खतरों से बचे हैं, बल्कि उस की सक्रियता की बदौलत पुलिस भी कई लापता लड़कियों को खोजने में कामयाब रही है.

ऐलिशिया को शहर, राज्य व राष्ट्रीय स्तर के सेमिनारों और सरकार के बड़े आयोजनों में बुलाया जाता है. वह सब जगह अपनी बात रखती है. उस के काम को हर जगह सराहा जाता है. वह जबतब ‘ऐलिशिया प्रोजैक्ट’ नाम से इंटरनेट सिक्योरिटी और जागरूक करने वाला प्रोग्राम करती रहती है. ‘रेडी चिल्ड्रेन’, ‘सेफ कौंफ्रेंस’ नाम से भी ऐलिशिया समयसमय पर प्रोग्राम करती है. इस समय वह फौरेंसिक मनोविज्ञान विषय से मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रही है. ऐलिशिया का कहना है कि वह जिंदगी भर कोशिश करती रहेगी कि कोई भी किशोर उम्र लड़की उस की तरह धोखे और शोषण का शिकार न हो. Hindi Stories

—कथा पात्र से बातचीत पर आधारित

 

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...