Bihar News: माना कि प्यार अंधा होता है…किंतु इतना भी अंधापन ठीक नहीं कि रिश्तों की मर्यादा ही लांघ ली जाए. बिहार में औरंगाबाद की 25 वर्षीय नवविवाहिता गुंजा सिंह ने अपने 52 वर्षीय प्रेमी जीवन सिंह की खातिर अपनी 45 दिनों की शादी कुरबान कर दी. आखिर गुंजा रिश्ते के फूफा जीवन सिंह के प्यार में कैसे फंसी?

काफी भागदौड़ और छानबीन के बाद बिहार में औरंगाबाद के नबीनगर ब्लौक की रहने वाली 25 वर्षीया गुंजा सिंह के पेरेंट्स ने उस की शादी पिछले साल 10 मई, 2025 में हमउम्र युवक प्रियांशु कुमार सिंह उर्फ छोटू के साथ कर दी. गुंजा अपनी ससुराल चली गई. पति प्रियांशु एक मेहनती युवक था और अपने गांव में ही साधारण नौकरी से परिवार चलाता था. वह खूबसूरत पत्नी पा कर बेहद खुश था.

वह गुंजा को सिरआंखों पर बिठा कर रखता था. उस की हर इच्छा पूरी करने लगा. फिर भी उसे ऐसा महसूस होता था, जैसे गुंजा उसे पा कर खुश नहीं है. चंद दिनों में ही प्रियांशु गुंजा का दीवाना बन गया था, लेकिन गुंजा में अपने प्रति दीवानगी नहीं महसूस की थी. वह अकसर मायके जाने की बात करती थी.

शादी का हफ्ता भर ही बीता था कि एक रोज गुंजा का फूफा जीवन सिंह उस की ससुराल आया. अचानक अपने फूफा को देख कर पति के सामने ही गुंजा उस के गले से लिपट गई. आंसू बहाती हुई शिकायती लहजे में बोली, ”काहे फूफा! ससुराल भेज कर हम को एकदम से भूल ही गए!’’

”ऐसा हो सकता क्या? तुम सब की प्रिय हो…कोई तुम्हें कैसे भूल सकता है…’’ कहते हुए जीवन सिंह ने उसे खुद से अलग किया.

पास खड़ा प्रियांशु ठगा सा दोनों के भावपूर्ण मिलन को देखता रहा. उस की तंद्रा तब भंग हुई, जब जीवन सिंह ने कहा, ”कैसे हैं दामादजी! सब कुशलमंगल है न… कामधंधा कैसा चल रहा है?’’

”जी..जी, सब ठीक है.’’ प्रियांशु बोला.

लेकिन बीच में ही गुंजा टोकती हुई बोल पड़ी, ”क्या ठीक है? जल्दी बाजार से कुछ मिठाई और पनीर ले आइए…पहली बार फूफा आए हैं. फूफा को काला जामुन की मिठाई बहुत पसंद है…वही लाइएगा.’’

”अभी ले कर आता हूं…तुम तब तक चाय वगैरह बना दो.’’ प्रियांशु बोला और तुरंत बाजार की ओर निकल गया.

प्रियांशु के जाते ही गुंजा वहां से दूसरे कमरे में जाने लगी, लेकिन जीवन सिंह ने उस का हाथ पकड़ कर पास बिठा लिया. अपनी दोनों हथेलियों के बीच उस की हथेली को दबा कर सहलाता हुआ बोला, ”बड़ी जल्दी तू तो अपने पति की प्यारी बन गई… मुझे तो एकदम से भूल ही गई.’’ जीवन सिंह ने एक तरह से शिकायत की.

अपना हाथ छुड़ाती हुई गुंजा बोली, ”नहीं फूफा, तुम को भला कैसे भूल सकती हूं…तुम्हारे बिना तो मैं एक भी सांस नहीं ले सकती हूं!’’

”फूफा क्यों कहती हो?’’

”मैं ससुराल में हूं न! सब के सामने तो फूफा ही बोलना पड़ेगा…अकेले में जीतू…जानू और सब के सामने फूफाजी!’’ यह बोलने के साथसाथ एक झटके में खड़ी हो गई…मटकती हुई कमरे से बाहर निकल गई.

”एक गिलास पानी ले आना!’’ अगले पल जीवन सिंह ने आवाज लगाई.

”अभी ले कर आती हूं!’’ गुंजा किचन से बोली.

जब पानी का गिलास ले कर आई, तब जीवन सिंह प्यार से उस के गालों पर एक थपकी लगा कर बोला, ”तू एक हफ्ते में पहले से ज्यादा निखर गई है!’’

”यहां यह सब मत बोलो न! दीवारों के भी कान होते हैं…कोई सुन लेगा तो गजब हो जाएगा.’’

गुंजा सिंह – फूफा के प्यार में पति दुश्मन जैसा लगता था तो उस की करवा दी हत्या

”अरे कुछ नहीं होगा. इतना डरने की जरूरत नहीं है. आज नहीं तो कल तुम को यहां से निकाल ले जाऊंगा. तुम वैसा ही करो, जैसा मैं तुम से कहूंगा.’’ जीवन सिंह एक रौ में बोलता चला गया.

दरअसल, 52 वर्षीय जीवन सिंह और गुंजा का जितना गहरा और पवित्र संबंध फूफा और भतीजी का था, उस के उलट उन के दिलों में अनैतिक प्रेम संबंध भी उतना ही गहरा था. जीवन सिंह के दिल में गुंजा तब से बसी हुई थी, जब वह किशोरावस्था में थी. उस के बड़ी होने के साथसाथ कच्ची उम्र का प्यार और परवान चढ़ता चला गया.

बेमेल और रिश्तों की पवित्रता को लांघते हुए पनपे प्यार को हवा दने में जीवन सिंह ने कोई कोरकसर नहीं छोड़ी थी. वह उस पर पैसे लुटाता था. उस की हर जरूरतें पूरी करता था.

वह घरसमाज का एक रसूखदार व्यक्ति था. उस की कई बसें चलती थीं. उस का अपना रुतबा था. गुंजा उस की धनसंपत्ति, रइसों जैसी लाइफस्टाइल और खर्चीले स्वभाव से काफी आकर्षित थी.

उन का वश चलता तो वे कब का मैरिज कर लिए होते, लेकिन दोनों पारिवारिक रिश्ते और सामाजिक कायदेकानून की मर्यादा में बंधे हुए थे. फिर भी उन के बीच लोगों की नजरों से छिपा हुआ प्रेमसंबंध दिन प्रतिदिन गहराता चला गया था. जब गुंजा की शादी की बात चलने लगी थी, तब जीवन सिंह ने मीनमेख निकाल कर कई रिश्ते तोड़ डाले थे. बड़ी मुश्किल से गुंजा की शादी प्रियांशु से हो पाई थी.

उस के ससुराल में आ जाने के बाद भी जीवन सिंह का दिल उस के लिए धड़कता रहता था, जबकि वह 2 बच्चों का पिता और खूबसूरत युवती का पति भी था. जीवन सिंह गुंजा का इस कदर दीवाना था कि वह उस की ससुराल तक पहुंच गया था. जीवन सिंह कमरे में बैठा सिगरेट के कश लेता हुआ गुंजा के बारे में कई बातें सोच रहा था. वह चाय ले कर आ गई थी. प्रियांशु भी बाजार से सामान के साथ लौट आया था. गुंजा रसोई में खानेपीने का इंतजाम करने चली गई थी. जीवन और प्रियांशु आपस में काफी समय तक बातें करते रहे थे.

इसी सिलसिले में जीवन सिंह ने प्रियांशु के स्वभाव, मनमिजाज, सामाजिक स्थिति, दोस्ती, लोगों से जानपहचान आदि का भी अंदाजा लगा लिया था. प्रियांशु की स्थिति को देख कर जीवन सिंह समझ गया था कि वह उस का पासंग भर भी नहीं है. वह जैसे चाहे, उसे अपने कब्जे में कर सकता है. उस पर हावी हो सकता है. वैसे जीवन सिंह ने गुंजा के साथ अपनी हवस की इच्छा पूरी नहीं की थी. वह उसे सिर्फ भावनात्मक रूप से ही अपने वश किए हुए था.

उस रोज जीवन सिंह गुंजा और उस के पति के साथ कुछ समय गुजार कर चला गया. जातेजाते गुंजा को एक मोबाइल गिफ्ट करता गया. बोला, ”शादी में मेरी तरफ से यह रह गया था.’’

इस तरह मोबाइल फोन गुंजा और जीवन सिंह के बीच प्रेमसंबंध को तरोताजा बनाए रखने का माध्यम बन गया. फोन में गुंजा ने जीवन सिंह का नंबर कोडवर्ड से सेव कर लिया था. गुंजा और जीवन के बीच फोन पर ही अकसर बातें होने लगीं. एक तरफ भावनात्मक प्यास थी तो दूसरी तरफ वासनात्मक भूख और प्यास दोनों थी. गुंजा अगर जीवन सिंह के रुतबे, रुपएपैसे और दबंग व्यक्तित्त्व के आकर्षण में बंधी थी, जबकि जीवन सिंह के लिए गुंजा की सुंदरता और यौवन को जितनी जल्द हो सके, हासिल करने की जिद थी. दोनों के दिलोदिमाग में अपनाअपना स्वार्थ बसा हुआ था.

गुंजा का फूफा जीवन सिंह – भतीजी को हासिल करने के लिए उस के पति को ठिकाने लगा दिया

घरपरिवार और समाज की निगाह में गुंजा और प्रियांशु शादी के बाद खुशहाल जीवन गुजारने लगे थे. प्रियांशु गुंजा को प्यार से रखता था, लेकिन गुंजा का मन कहीं और था. शादी के कुछ दिनों बाद ही गुंजा ने जीवन सिंह से संपर्क बढ़ाया. दोनों की मुलाकातें छिपछिप कर होने लगीं. एक रोज जीवन सिंह ने गुंजा को उकसा दिया कि प्रियांशु उन के प्यार में बाधा है. उस ने साफसाफ कह दिया कि अगर वह नहीं रहेगा, तभी हम हमेशा के लिए एक हो सकते हैं.

गुंजा तो जीवन सिंह के प्यार में पूरी तरह से अंधी हो चुकी थी, वह तुरंत पति को रास्ते से हटाने वाली जीवन सिंह की बात से सहमत हो गई. उसी समय उस के दिमाग में मेघालय के सोनम रघुवंशी हनीमून मर्डर की याद ताजा हो गई. फिर क्या था, प्रेम के इस जुनून ने एक खतरनाक साजिश का रूप ले लिया. गुंजा और जीवन सिंह ने मिल कर प्रियांशु की हत्या की योजना बना डाली. जीवन सिंह ने अपने जानकार 2 शूटरों जयशंकर और मुकेश शर्मा को सुपारी दी.

24 जून, 2025 की रात को प्रियांशु चंदौली में रहने वाली अपनी चचेरी बहन से मिल कर घर लौट रहा था. वह औरंगाबाद के नबीनगर रेलवे स्टेशन के पास लेंबोखाप मोड़ पर पहुंचा, जहां गुंजा ने फोन पर उस की लोकेशन शूटरों को बताई. जैसे ही प्रियांशु वहां पहुंचा, शूटरों ने उस पर गोलियां दाग दीं. प्रियांशु की मौके पर ही मौत हो गई. हत्यारों ने उस की जेब से कुछ सामान निकाल कर इसे लूटपाट का रूप देने की कोशिश की, लेकिन यह साजिश ज्यादा देर टिक नहीं सकी.

शुरुआत में परिवार और ग्रामीणों को लगा कि यह कोई पुरानी रंजिश का नतीजा है. प्रियांशु का शव सड़क किनारे पड़ा मिला. इस की सूचना पुलिस को दी गई. औरंगाबाद पुलिस की टीम ने एसपी अंबरीश राहुल के नेतृत्व में जांच शुरू की. उन्होंने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कौल डिटेल्स और गवाहों के बयानों का विश्लेषण किया. जांच में पता चला कि गुंजा और जीवन सिंह के बीच महीनों से लगातार बातचीत हो रही थी. यहां तक कि शादी के समय भी गुंजा ने जीवन से कई बार फोन पर बात की थी. फोन से ही शूटरों को लोकेशन भेजने के सबूत मिले.

जब पुलिस ने गुंजा से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गई और सारा सच उगल दिया. उस ने कुबूल किया कि जीवन सिंह के साथ उस के प्रेम संबंध थे और प्रियांशु को रास्ते से हटाने के लिए यह साजिश रची गई थी. बचपन में कई सालों तक फूफा के घर में रहने के दौरान अपने से दुगनी उम्र के फूफा से प्रेम में पड़ी गुंजा ने पहले तो शादी की, फिर शादी के 45 दिन बाद प्रेमी फूफा के चक्कर में अपने ही पति के साथ कुछ ऐसा किया, जिसे सोनम की तरह हरकत कर डाली. काफी समय तक वह अपनी बुआ और फेमिली के दूसरे सदस्यों की नजरों से अपने प्रेम संबंध को छिपाए रही.

पुलिस द्वारा पूछताछ में गुंजा ने बताया कि फूफा जीवन सिंह जब तक उस से बात नहीं करता था, वह बेचैन रहती थी. यही हाल जीवन सिंह का भी था. शादी के 45 दिन बाद 24 जून की शाम में हत्या की योजना बनाने के पहले फूफा से गुंजा की कई बार मोबाइल पर बात हुई थी. हत्या की योजना बन जाने के बाद प्रियांशु को गुंजा ने ही चंदौली (यूपी) चचेरी बहन के घर जाने को कहा था. चंदौली से घर लौटने के दौरान ही उस की हत्या कराने को ले कर गुंजा की फूफा जीवन सिंह से कई बार बात हुई. योजना के तहत डाल्टनगंज से पहुंचे 2 शूटरों ने नवीनगर रेलवे स्टेशन से घर लौटने के दौरान गोली मार कर हत्या कर दी.

रंगीनमिजाज जीवन सिंह के व्यक्तिगत जीवन में उलझनें भी थीं. उस के बेटे का हैदराबाद में किडनी का इलाज चल रहा है. पत्नी, बहू समेत अन्य रिश्तेदारों का हैदराबाद आनाजाना लगातार होता रहता था. फिर भी जीवन सिंह ने अपने ही साले की बेटी गुंजा को प्रेम में फांस कर उस के पति की हत्या करवा दी. पुलिस ने गुंजा सिंह, जयशंकर और मुकेश शर्मा को गिरफ्तार कर लिया, जबकि जीवन सिंह फरार हो गया था.

कथा लिखे जाने तक पुलिस उस की तलाश में जुटी हुई थी. गुंजा ने पुलिस को बताया कि जीवन सिंह ने उसे बारबार आश्वासन दिया था कि हत्या के बाद वे दोनों एक नया जीवन शुरू करेंगे. लेकिन अब गुंजा सलाखों के पीछे है. Bihar News

 

 

 

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