UP Crime: 4 बच्चों के पिता राजू गुप्ता ने पूजा से दूसरी शादी कर तो ली थी, लेकिन उस के नाजनखरे उठाना भारी पड़ रहा था. हद तो तब हो गई, जब वह उस की दिवंगत पत्नी के बच्चों से मिलने पर ही पाबंदी लगाने लगी और बारबार मोटी रकम की मांग करने लगी. फिर जो कुछ हुआ, उस में पूरा परिवार उलझ गया…

शाम होने को आई थी. राजू गुप्ता काफी निराश बैठा था. इस की वजह यह थी कि उस की दूसरी पत्नी पूजा उसे ब्लैकमेल कर रही थी. वह उसे अब ठिकाने लगाने का फैसला ले चुका था, लेकिन उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह इस काम को कैसे पूरा करे. राजू गुप्ता को उदास देख कर उस का सहयोगी अनीस पूछ बैठा, ”क्या बात है भाईजान, आज काफी उदास दिख रहे हो? दुकानदारी में घाटा हुआ है क्या?’’

राजू गुप्ता की लखनऊ की दुबग्गा सब्जीमंडी में दुकान थी.

”नहीं मेरे भाई, घाटावाटा कुछ नहीं… क्या बताऊं? बात ही कुछ ऐसी है, जो न कहते बनती है और न निगलते.’’

”मैं भी तो जानूं कि वह कौन सी बात है, जिसे ले कर परेशान दिख रहे हो…और मुझे नहीं बता सकते?’’

”बात ही ऐसी है कि मैं किसी से भी नहीं बताना चाहता. बस! समझो कि पानी सिर से ऊपर बहने की नौबत आ गई है.’’

”ऐं! यह क्या कह रहे हो मेरे भाई? इतना सब कुछ हो गया और मुझ से ही छिपा रहे हो? वह कौन सी बात है, जो तुम्हें भीतर ही भीतर खाए जा रही है?’’ अनीस ने पूछा.

”अरे, वही पूजा की डिमांड!’’ राजू निराश मन से बोला और सिर नीचे की ओर झुका लिया.

”उस के साथ फिर कोई बहस हुई क्या? अब क्या डिमांड है उस की?’’

”अरे क्या बताऊं तुम्हें, अभीअभी 10 लाख का प्लौट बेचा था, जो पूजा के नाम था…’’ राजू आगे कुछ बोल पाता कि अनीस उस का मुंह देखने लगा. थोड़ी देर चुप रहने के बाद पूछा, ”हां, तो क्या हुआ उस का? पैसे तो पूरे मिल गए न!’’

”अरे हां, पैसे तो मिल गए, किंतु उस पर पूजा नजर जमाए है. यह समझो कि वह पूरा पैसा हड़पना चाहती है.’’ राजू निराश मन से बोला.

”अब इस में मैं क्या कर सकता हंू, मैं ने तुम्हें पहले ही मना किया था, लेकिन तुम नहीं माने!’’ अनीस बोला.

”फिर भी तुम कुछ तो बताओ, मैं अब क्या करूं?’’ राजू ने हताशा के लहजे में पूछा.

वह मुसकराते हुए बोली, ”मैं पूजा के बारे में तुम्हारी बातें सुनतेसुनते थक चुका हंू. जब तुम ने उस से दूसरी शादी की है तो तुम ही उसे झेलो. तुम्हारा भी तो औरत के बगैर गुजारा नहीं हो रहा था. तुम जानते थे कि पूजा विवाहित है, फिर भी उस में तुम्हें न जाने क्या दिखा, जो तुम भी अपनी रातों की जरूरतों को पूरा करने के लिए उस की खूबसूरती पर फिदा हो गए. तुम ने उस के चालचलन की तनिक भी खोजबीन नहीं की.’’ अनीस राजू का जिगरी दोस्त था.

”तुम्हारे पास कोई उपाय है तो बताओ, लेकिन जले पर नमक मत छिड़को.’’ राजू रूखेपन के साथ बोला.

”अरे, चिंता क्यों करते हो? सब ठीक हो जाएगा. कुछ खानेपीने को मंगवाते हो तो मंगवाओ, वरना मैं चलता हूं.’’ अनीस बोला.

”हांहां क्यों नहीं, अभी मंगवाता हंू. बैठो, आज कुछ जरूरी बात करनी है.’’ दुकान के नीचे सामने खड़े राजेश को पैसे देते हुए राजू बोला, ”ब्लैक हार्सपावर व्हिस्की की बोतल ले आओ… और सुनो प्याज की गरम पकौडिय़ां भी सामने की दुकान से ले आना.’’

राजेश कुछ देर में ही व्हिस्की की बोतल ले आया. राजू और अनीस दुकान के पीछे बने बैडरूम में चले. उन्होंने उस शाम छक कर शराब पी. मूड बनाने के बाद अनीस ने पूछा, ”अब बताओ, तुम्हारे दिल की क्या समस्या है? कैसा समाधान चाहते हो?’’

राजू ने राजेश को बुला कर बोतल की बची हुई व्हिस्की उसे दे कर बाहर आढ़त की दुकान पर बैठने को कहा. हिदायत भी दी कि जब तक वह वापस नहीं आए, किसी को अंदर नहीं आने दे.

राजेश जब चला गया, तब राजू लंबी सांस लेता हुआ अनीस से बोला, ”मेरी एक योजना है…तुम जरा ध्यान से सुनना और मुझे मदद करने के बारे में बताना.’’

”ठीक है भाई, जैसा कहोगे, वैसा मैं करूंगा, जितना हो सकेगा साथ दूंगा.’’ अनीस बोला.

”तो ठीक है, मेरी बात को ध्यान से सुनना, लेकिन इस से पहले मुझे वचन दो कि किसी को भी इस बारे में कभी नहीं बताओगे.’’ राजू बोला और वचन लेने के लिए अपनी हथेली अनीस की ओर बढ़ा दी. उस के बाद धीमी आवाज में अनीस से फुसफुसा कर बातें करने लगा.

जैसे ही राजू ने अपनी बात पूरी की, वैसे ही अनीस की आंखों में अजीब तरह की चमक दिखी. वह बोला, ”तू तो बहुत ही शातिर दिमाग रखता है यार, मैं ने तो कभी ऐसा सोचा ही नहीं था.’’

”तुम को मेरा साथ देना होगा.’’

”पक्का साथ दूंगा, लेकिन दूसरे सहयोगियों से भी तो बात कर लो.’’ अनीस बोला.

”पैसे के आगे वे भी साथ देंगे.’’

दरअसल, राजू ने एक योजना बनाई थी, जिस में अनीस के अलावा शकील, राजेश और सर्वेश नाम के युवकों को भी शामिल कर लिया था. सब की निगरानी की जिम्मेदारी अनीस को सौंप दी गई थी.

योजना के मुताबिक, राजू गुप्ता को सोनिया को ले कर किराए के मकान में रह रही उस की मम्मी पूजा के पास ले कर जाना था. सोनिया कोई और नहीं, बल्कि राजू की बेटी थी और पूजा उस की दूसरी पत्नी थी. सोनिया रामप्रकाश के हौस्टल में काम करती थी और वहीं रहती थी और पूजा अलग से किराए पर रहती थी. राजू 31 अक्तूबर, 2025 को दिन में 10 बजे सोनिया को ले कर नावल्टी सिनेमा के पास गया था. वहीं पूजा से मुलाकात के बाद सोनिया अपने हौस्टल लौट गई थी, जबकि राजू और पूजा अपनेअपने घरों की ओर जाने के लिए साथसाथ लौट आए.

कहने को दोनों पतिपत्नी थे, लेकिन उन के बीच अनबन सालों से बनी हुई थी. इस कारण पूजा अलग किराए के मकान में रहती थी. बात 3 नवंबर, 2025 की है. लखनऊ के थाना माल क्षेत्र के गांव बशहरी निवासी किसान राजपाल सुबहसुबह खेत में जुताई करने के लिए ट्रैक्टर ले कर गया था. वहां पर उसे झाडिय़ों के पास से तेज दुर्गंध आती हुई महसूस हुई. आशंका से घिरा राजपाल दुर्गंध आने वाली जगह पर गया. झाडिय़ों में एक महिला का नग्नावस्था में रक्तरजित शव देख कर चौंक पड़ा. वह तुरंत ट्रैक्टर ले कर सीधे थाना मौल गया.

उस ने इंसपेक्टर नवाब अहमद को लाश और उस से निकलने वाली दुर्गंध के बारे में बताया. उस ने महिला का हुलिया भी बताया, जो गोरी, मांसल देह वाली थी. उस की मांग में सिंदूर, पैरों में पाजेब और बिछुवा थे. इंसपेक्टर ने राजपाल की बात गौर से सुनने के बाद सामने बैठे एसएसआई मोहम्मद रोशन के साथ घटनास्थल पर चलने की तैयारी करने के लिए कहा. उन्होंने कांस्टेबल अर्जुन सिंह और संजय पाल को भी साथ ले लिया. बशहरी गांव के क्षेत्र से संबंधित पुलिस चौकी सैदापुर के बीट प्रभारी अभय कुमार बाजपेयी को भी वहां पहुंचने की सूचना दे दी गई. उन्हें भी घटनास्थल पर शीघ्र ही पहुंचने को कहा.

इंसपेक्टर राजपाल ने इस की सूचना मलीहाबाद के एसीपी सुजीत कुमार दुबे, एडिशनल डीसीपी और डीसीपी गोपालकृष्ण चौधरी को भी भेज दी गई. घटनास्थाल पर सर्विलांस की पूरी टीम पहुंच गई थी. टीम ने पहले घटनास्थल के चारों तरफ लोगों की भीड़ को हटा कर नाकेबंदी करा दी. टीम में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं. शव को एक कपड़े से ढंक दिया गया. इस से पहले महिला कांस्टेबल सपना ने शव की गहनता के साथ छानबीन की. उस ने एसएचओ को बताया कि मृतका की हत्या धारदार हथियार से की गई है. उस के साथ दुष्कर्म के निशान नहीं पाए गए हैं. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.

लाश की पहचान के लिए ग्रामीणों से पूछताछ की गई. जल्द ही पता चला कि वह महिला दुबग्गा सब्जीमंडी में अकसर देखी गई थी. वह वहां सब्जी का काम करती थी. कुछ लोगों ने बताया कि वह सब्जी मंडी में आढ़ती राजू गुप्ता के संपर्क में थी. पुलिस राजू गुप्ता के पास गई और उसे शव की फोटो दिखा कर उस के बारे में पूछा. उस वक्त पूजा की बेटी सोनिया भी साथ थी. उस ने शव को देखते ही पहचान लिया. सैंडिल, बिछुआ और चेहरे को देखते ही वह बोली कि यह उस की मम्मी पूजा है.

सोनिया ने पुलिस को बताया कि राजू गुप्ता उस का सौतेला पिता है. उस ने मम्मी की मौत का जिम्मेदार राजू गुप्ता को ठहराया और उस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने को कहा. इस संबंध में उस ने लिखित तहरीर दी. उस ने लिखा कि वह अपनी मम्मी से अलग रह कर गल्र्स हौस्टल में रहती है. वहां का काम करती है. कभीकभी उस की मम्मी उस से मिलने आया करती थी. वह सीता विहार कालोनी के एक किराए के मकान में रहती थी.

सोनिया ने बताया कि उस की मम्मी पूजा सीतापुर जनपद के असुवामऊ गांव की मूल निवासी थी. उन की पहली शादी सुरेश के साथ हुई थी. उस के असली पिता सुरेश ही हैं, लेकिन मम्मी की पापा से अनबन होने के बाद वह लखनऊ आ कर दुबग्गा सब्जी मंडी में आढ़त पर काम करने लगी थी. वहीं उस का संपर्क राजू गुप्ता से हुआ था. राजू गुप्ता की भी सब्जी की आढ़त थी. उन के संपर्क में आने के बाद वह दुबग्गा के ही निकट बालाजी के मंदिर में एक किराए के मकान पर आ कर रहने लगी थी. सोनिया ने बताया कि मम्मी ने राजू गुप्ता के साथ दूसरी शादी कर ली थी.

सोनिया की तहरीर, दिए गए बयानों और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने राजू गुप्ता के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया. पूछताछ के लिए 5 नवंबर, 2025 को उसे थाने बुलाया गया. पूछताछ में वह पूजा की हत्या के बारे में ठोस जानकारी नहीं दे पाया. किंतु उस ने पूजा के साथ जब बिगड़े संबंधों के बारे में बताया, तब पुलिस सख्ती के साथ उस से पूछताछ करने लगी. जल्द ही वह टूट गया और उस ने पूजा की हत्या के बारे में पूरी बात बता दी. राजू गुप्ता ने यह भी बताया कि उस के अलावा मोहम्मद शकील (54), सर्वेश ( 40), राजेश कुमार (27) और अनीस (65) भी पूजा की हत्या में शामिल थे.

मृतका के पास से मिले मोबाइल की काल डिटेल्स से भी उस की राजू से बातचीत का विवरण मिल गया था. इन साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. उस के बाद पूजा, उस का पहला पति और राजू के साथ के उलझे हुए संबंधों की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

पूजा मूलरूप से उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद के गांव सदना की मूल निवासी थी. उस के पापा पुतान ने सामाजिक रीतिरिवाज के अनुसार 15 साल पहले सीतापुर जनपद के गांव असुवामऊ निवासी सुरेश के साथ उस का विवाह कर दिया था. सुरेश के साथ विवाह होने के बाद पूजा को पता चला कि वह शराब पीने का बुरी तरह आदी था. जो कुछ भी कमाता था, वह परिवार के पालनपोषण में खर्च न कर आवारागर्दी और दारू के शौक में बरबाद कर दिया करता था.

शादी के 2 साल तक पूजा ने अपने दांपत्य जीवन का जैसेतैसे निभाया. गांव में ही खेती बंटाई पर किसानी की फसल से मेहनतमजदूरी कर अपना जीवनयापन करती रही. पति के साथ आए दिन कलह के कारण उस ने गांव में ही अलग रह कर अपना जीवनयापन शुरू कर दिया. उन्हीं दिनों पूजा ने बेटी को जन्म दिया. उस का नाम रखा सोनिया. एक साल बाद सुरेश टीबी से ग्रसित हो गया. इलाज कराने में उसे दिक्कतों का सामना करना पड़ा. पति के इलाज में कोई कमी नहीं आने दी. वह स्वस्थ हो गया. कुछ दिन तक तो ठीक रहा, उस के बाद वह फिर पहले जैसा ही करने लगा. पति की प्रताडऩा से तंग आ कर वह दिनरात दुखी रहने लगी.

सुरेश रोजाना पूजा से दारू के लिए पैसे मांगने लगा. पैसे नहीं देने पर मारनेपीटने लगा. धीरेधीरे उस का मन सुरेश के प्रति खिन्न होता चला गया. पूजा का सुरेश ने जीना हराम कर रखा था. पूजा मानसिक प्रताडऩा से बुरी तरह त्रस्त हो गई थी. तंग आ कर उस ने सीतापुर के कमलापुर नामक कस्बे में एक फार्महाउस पर जा कर नौकरी करने का मन बना लिया था. वह अपनी ससुराल से अपने मायके सदना आ कर रहने लगी. वहीं से वह डेयरी फार्म पर काम के लिए जाने लगी. उस ने दिनरात मेहनत कर अपने काम में स्वयं को व्यस्त कर लिया था. एक दिन सुरेश ने उसे ढूंढ निकाला.

सर्दी की रात थी. पूजा उन दिनों अपने मायके सदना में थी. सुरेश पूजा से मिलने सदना पहुंच गया. उसे आया देख कर पूजा आगबबूला हो उठी. किसी तरह सुरेश ने उसे शांत किया. पूजा ने रात को त्रियाचरित्र का खेल खेला. जब सुरेश उस के साथ एक रात बिस्तर पर गहरी नींद में सो रहा था, तभी पूजा ने उस के गले में कपड़ा कस कर हत्या कर दी. उस की मौत हो जाने के बाद वह सोनिया को साथ ले कर दिन निकलने से पहले कमलापुर वापस चली आई.

सुबह सदना थाने की पुलिस ने उसे तलाश कर पति की हत्या के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया. सीतापुर जिले के थाना सदना में उस के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. उस के बाद उसे जेल भेज दिया गया. लंबे समय तक पूजा जेल में रही. जेल से छूटने पर वह फिर से कमलापुर स्थित डेयरी मालिक के यहां रहने के लिए गई, लेकिन पूजा पर हत्या का आरोप लगने के बाद डेयरी मालिक के मातापिता ने उसे आश्रय देने से मना कर दिया.

आश्रय के लिए उस की काफी मिन्नतों के बाद डेयरी के मालिक ने लखनऊ स्थित दुबग्गा की सब्जी मंडी में काम दिलवा दिया. उस के पास ही वह बालाजी के मंदिर में एक कमरा किराए पर ले कर अपनी बेटी सोनिया के साथ रहने लगी. तब तक बेटी भी किशोरावस्था में पहुंच चुकी थी. सब्जी मंडी में धीरेधीरे काम करते उसे 2 साल बीत गए. इसी दौरान वह विशाल नामक आढ़ती के माध्यम से वहां के पुराने आढ़ती राजू गुप्ता के संपर्क में आ गई. पूजा के मंदिर में रहने के कारण आनेजाने वाले लोगों को सहानुभूति हो गई.

एक व्यक्ति ने बेटी सोनिया को कपूरथला स्थित राम प्रकाश के गल्र्स हौस्टल में उसे नौकरी पर लगवा दिया. सोनिया दिन भर हौस्टल में काम किया करती. उसे वहां रहने की जगह मिलने के कारण वह स्थाई रूप से हौस्टल में ही रहने लगी. छुट्टी के दिनों में वह अपनी मम्मी पूजा से बालाजी मंदिर परिसर में स्थित मकान पर मिल लेती थी. फिर वापस लौट जाती थी. एक दिन उस ने अपनी मम्मी पूजा से मजाकमजाक में कह दिया, ”मम्मी, तुम्हारी अभी उम्र ही क्या है? मेरी 2 बहनें और भी हैं, उन का भी भरणपोषण और शादी होनी है. तुम दूसरी शादी कर लो.’’

यह बात पूजा के दिमाग में घर कर गई. एक दिन शाम को पूजा राजू गुप्ता के घर पहुंची तो पाया कि वह अकेला बैठा शराब के पैग बना रहा था. पूजा को अकेली आया देख कर उस ने फुरती से उठ कर कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. राजू के द्वारा दरवाजा बंद करने के कारण पूजा तुरंत ही भांप गई कि राजू के मन में क्या है. उस दिन पूजा ने भी नाजुक स्थिति को भांपते हुए राजू के आग्रह पर दारू का पैग गले के नीचे उतार लिया. उस रात पूजा और राजू एक साथ बिस्तर पर सो गए. दोनों ने अपनी जिस्मानी भूख शांत की.

पूजा सुबह राजू के यहां नहाधो कर खाना पकाया, वहीं साथ खाया और हर दिन की तरह आढ़त पर काम करने चली गई. उस के बाद पूजा राजू के बुलाने पर उस के घर आनेजाने लगी. कुछ दिनों बाद उस ने विशाल के कहने पर राजू के साथ लखनऊ के आर्यसमाज मंदिर में विवाह कर लिया. पूजा के पहले पति से 3 बच्चे थे, जिन में बेटी सोनिया 15 साल की थी. पूजा अपने बच्चों के साथ सीता विहार में अलग रहने लगी थी. यह बात सोनिया को ठीक नहीं लगी. उस ने राजू गुप्ता के यहां ही बच्चों के साथ रहने के लिए दबाव डाला. किंतु राजू इस पर राजी नहीं हुआ. उस ने पूजा के पहले पति के बच्चों को अपने घर पर नहीं रख कर अलग कमरे पर रहने की सलाह दी.

विवश हो कर पूजा के दोनों बच्चे सोनिया के पास रहने लगे और खुद बालाजी का मंदिर (मंगल) पर किराए के मकान में एक कमरा ले कर राजू के पास रहने लगी. धीरेधीरे दोनों के दांपत्य जीवन के 3 साल बीत गए. राजू ने इसी दौरान 3 प्लौट पूजा के नाम खरीदे. बीते वर्ष राजू ने एक प्लौट पूजा की सहमति से 10 लाख रुपए में बेच दिया. यही उन के बीच विवाद का कारण बन गया. पूजा ने बेचे गए प्लौट की आधी रकम 5 लाख रुपए की मांग की. इस पर राजू आगबबूला हो उठा.

पूजा अपनी मौत से 3 माह पहले रोजाना राजू से आधी रकम की मांग कर रही थी. जबकि राजू उसे फूटी कौड़ी तक नहीं देना चाहता था, जिस के चलते हर दिन घर में कलह का वातावरण बन गया था. राजू मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था. पूजा के द्वारा रकम मांगने पर पूजा के प्रति उस का रवैया ही बदल गया. राजू का कहना था कि वह उस रकम से उधारी की रकम चुकता करने के बाद बची रकम देने के बारे में सोचेगा.

बारबार पूजा द्वारा पैसे मांगने पर राजू ने एक दिन खतरनाक फैसला ले लिया. 30 अक्तूबर, 2025 को अपनी आढ़त पर अपने सब से करीबी दोस्त अनीस को बुला कर पूजा की हरकतों के बारे में बता कर उसे रास्ते से हटाने के लिए अपनी योजना बताई. साथ देने के लिए उस ने अनीस को एक लाख रुपए की सुपारी दे कर अन्य व्यक्तियों शकील, राजेश और सर्वेश को शामिल करने को कहा. राजू ने अनीस को 31 अक्तूबर की रात सीतापुर रोड से चंद्रिका देवी के मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर योजना को अंजाम देने के लिए सभी तरह का इंतजाम कर लिया.

शाम के वक्त जब राजू अपने घर पर आया तब पूजा भी वहीं थी. वह खाना बनाने में व्यस्त थी. राजू को देखते ही पूछ बैठी, ”आज काफी देर कर दी?’’

उस ने राजू को नशे में धुत्त देखा. नशे में ही राजू बोला, ”कल 31 अक्तूबर को वह सोनिया के यहां सीता विहार कालोनी मिलने जाएगा. सोनिया से मिलने के बाद चंद्रिका देवी मंदिर को बशहरी मड़वाना माल के रास्ते से दर्शन करने जाएगा. मंदिर से वापस आने के बाद वह दोनों बच्चों को सीता विहार के मकान से अपने यहां ले कर वापस आ जाएगा. कल तुम्हें आढ़त मंडी नहीं जाना है.’’

राजू की बात सुन कर पूजा मुसकरा दी. उस रात राजू ने दारू के नशे मेंं शारीरिक संबंध बनाए. सुबह 31 अक्तूबर, 2025 को राजू ने जैसा कहा था वैसा ही किया. ठीक 10 बजे पूजा राजू के साथ सोनिया के यहां मिलने सीता विहार कालोनी गई. वहां कुछ देर बैठने के बाद पूजा को साथ ले कर चंद्रिका देवी के सिद्धपीठ मंदिर दर्शन के लिए निकल गया. रवाना होने से पहले पूजा ने राजू से छिप कर सोनिया को बता दिया कि राजू की नीयत ठीक नहीं है. कई बार वह उस का गला दबा कर उसे जान से मारने का प्रयास कर चुका है. उस का जीवन खतरे में है.

राजू अपनी बनाई योजना के अनुसार, पूजा के साथ जब बशहरी मड़वाना गांव के रास्ते घनी बागायत के निकट पहुंचा, तब वहां अनीस का मैसेज आ गया. उस के बाद राजू लघुशंका करने के बहाने सड़क के किनारे घनी झाडिय़ों के पीछे चला गया. वहीं दूसरी तरफ पहले से छिपे शकील, अनीस, राजेश और सर्वेश ने मिल कर पूजा की गला दबा कर हत्या कर दी. उस के कपड़े को बुरी तरह फाड़ कर अलग कर दिए. वे उस हत्या का कारण दुष्कर्म की घटना से जोडऩा चाहते थे. किंतु डौक्टर की रिपोर्ट में पूजा के साथ कोई भी दुष्कर्म करने की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन उस के 5 माह के गर्भ का पता चला.

राजू गुप्ता पूजा द्वारा दी जाने वाली मानसिक प्रताडऩा से तंग आ चुका था. वह अपनी कमाई की पूंजी से पूजा के पहले पति से पैदा हुए बच्चों को कुछ भी नहीं देना चाहता था. राजू अपनी पहली पत्नी से पैदा हुए 4 बच्चों को पैसा देना चाहता था, जो अलग मकान में रह रहे थे. पुलिस इस हत्याकांड में शामिल सभी आरोपियों राजू गुप्ता, मोहम्मद शकील, सर्वेश, राजेश और अनीस को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी. UP Crime

—कथा में सोनिया परिवर्तित नाम है

 

 

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