Love Story: 20 वर्षीय पूजा और 22 साल का सरफराज भले ही अलगअलग धर्मों के थे, लेकिन दोनों ही एकदूसरे को दिली मोहब्बत करते थे. तभी तो दोनों ने अपनी फेमिली वालों को बताए बिना लव मैरिज कर ली थी. हंसीखुशी से जिंदगी बिता रहे इस दंपति के बीच ‘वो’ के शक ने ऐसी एंट्री की कि…
सरफराज अपनी 20 वर्षीय बीवी पूजा की कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं था. उस का शक धीरेधीरे उस के दिमाग पर हावी हो चुका था. इस की वजह नरेश था. नरेश भी उसी चाल में रहता था. वह पूजा का पुराना परिचित था. काम के ही सिलसिले में दोनों में जानपहचान हुई थी. 22 वर्षीय सरफराज को शक था कि पूजा और नरेश के बीच जरूर कोई चक्कर चल रहा है. इसलिए पतिपत्नी के रिश्ते में ऐसी कड़वाहट घुल चुकी थी, जो बढ़ती ही जा रही थी.
नरेश भी कैटरिंग का काम करता था. कभीकभार कैटरिंग के काम में नरेश पूजा की मदद लेता था. इसलिए दोनों में अच्छी पटती थी. दोनों अकसर आमनेसामने तो बात करते ही थे, फोन पर भी बातें करते थे. पूजा नरेश को भाई मानती थी, इसलिए उस से हंसहंस कर बिना किसी संकोच के बातें करती थी. पूजा और नरेश के बीच कुछ भी गलत नहीं था, लेकिन सरफराज के लिए यह नाम खतरा बन गया था.
उसे लगता कि पूजा और नरेश के बीच कुछ चल रहा है, क्योंकि नरेश अकेला ही रहता था. अकेले आदमी पर हर कोई शक करता है. सरफराज नरेश पर भी शक करता था, इसलिए अब हर झगड़े में नरेश का नाम आने लगा. 17 मार्च, 2026 मंगलवार को सुबह से ही पूजा के घर का माहौल ठीक नहीं था. फोन पर होने वाली बातचीत को ले कर पूजा और सरफराज के बीच झगड़ा शुरू हुआ. धीरेधीरे आवाजें ऊंची होने लगीं. गुस्सा बढ़ता गया. उसी गुस्से में आखिरकार पूजा घर छोड़ कर चली गई. वह सीधे नरेश के कमरे पर चली गई. शायद शांति की तलाश में या खुद को बचाने के लिए, क्योंकि सरफराज बहुत गुस्से में था. लगता था कि वह कुछ भी कर बैठेगा.
लेकिन पूजा का घर छोड़ कर जाने का ही फैसला उस की जिंदगी का आखिरी फैसला बन गया. एक तो पूजा का घर छोड़ कर जाना, दूसरे नरेश के यहां जाना, उस के लिए खतरा बन गया. पूजा के ऐसा करने से सरफराज का गुस्सा अब बेकाबू हो गया था. उसे जब पता चला कि पूजा नरेश के घर गई है तो उस का शक यकीन में बदल गया. उस ने बिना सोचेसमझे चाकू उठाया और नरेश के घर की ओर चल पड़ा. उस समय उस के दिमाग में सिर्फ एक ही बात चल रही थी कि उस के साथ धोखा हो रहा है. वह पूजा की तलाश में नरेश के घर पहुंच गया.
दरवाजा खटखटाया तो दरवाजा खुला. घर के अंदर पूजा और नरेश थे. सरफराज ने जैसे ही दोनों को साथ देखा, उस का गुस्सा फट पड़ा. दोनों के बीच तेज बहस शुरू हो गई, तीखी और खतरनाक. सरफराज कुछ और ही सोच कर आया था. इसलिए पूजा के लाख समझाने की कोशिश करने पर भी सरफराज कुछ समझने को तैयार नही था. नरेश बीचबचाव कर रहा था, लेकिन सरफराज अब कुछ सुनने की स्थिति में नहीं था. गुस्से में अंधे हो चुके सरफराज ने चाकू निकाला और पूजा पर हमला बोल दिया. एक बार फिर दूसरा फिर तीसरा कमरे में पूजा की चीखें गूंजने लगीं. खून बहने लगा.
शोर सुन कर नरेश के घर लोग इकट्ठा होने लगे. लोगों को देख कर सरफराज घबराया. वार करने बंद कर दिए, लेकिन लोगों के आने तक वह इतने वार कर चुका था कि पूजा फर्श पर गिर चुकी थी. लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन अब तक बहुत देर हो चुकी थी. झटपट पूजा को उठाया और अस्पताल पहुंचाया. डौक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सरफराज ने पूजा के सीने पर इतने घातक वार किए थे कि काफी कोशिश के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका. कुछ ही देर में डौक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इस तरह एक जिंदगी खत्म हो चुकी थी, इसी के साथ प्यार और भरोसा भी. यह 18 मार्च, 2026 की सुबह की बात है.

पूजा कुमारी ने सरफराज से शादी की थी, लेकिन नरेश नाम के ‘वो’ ने उन की जिंदगी में जहर घोल दिया.
थाना रांदेर पुलिस को सूचना दी जा चुकी थी. सूचना पा कर थाना रांदेर पुलिस तुरंत मौके पर आ पहुंची. सरफराज वहीं खड़ा था हक्काबक्का, शांत, जैसे उसे खुद ही समझ में नहीं आ रहा था कि उस ने गुस्से में यह क्या कर दिया. पुलिस ने सरफराज को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में वह अपराध से इनकार कैसे कर सकता था. उस ने जो भी किया था, लोगों के सामने किया था. उस ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. पूछताछ के बाद पूजा की हत्या के पीछे की जो कहानी सामने आई, इस प्रकार निकली—
सूरत के हीरे की चमक और साडिय़ों की रंगीनियत दुनिया भर में मशहूर है. सूरत मेहनतकश लोगों के सपनों का शहर है. दिनभर भागते लोग, रात में जागती गलियां, क्योंकि औद्योगिक नगर होने की वजह से रातदिन कारखाने चलते रहते हैं. लेकिन ऐसे ही व्यस्त शहर की वह सुबह ऐसी थी, जिस ने हर चेहरे पर खामोशी की चादर डाल दी थी. जिस ने भी उस घटना के बारे में सुना, भागता हुआ घटनास्थल पर जा पहुंचा.
सूरत के थाना रांदेर इलाके में वह सुबह बाकी दिनों से पूरी तरह अलग थी. सवेरा होते ही लोगों की भीड़ एक छोटे से घर के बाहर जमा हो चुकी थी. कुछ लोग फुसफुसा रहे थे, तो लोग कुछ सहमे हुए खड़े थे तो कुछ लोग बस स्तब्ध खड़े थे. खोली के अंदर जमीन पर एक औरत खून से लथपथ पड़ी थी. जिस का नाम पूजा कुमारी था. वह खून से सराबोर थी, लेकिन सांसें चल रही थीं.
पति सरफराज खान ने ही उस पर चाकू से हमला किया था. उस ने पूरी ताकत से पूजा के सीने पर कई वार किए थे. वह भी चाकू लिए वहीं उस के पास खड़ा था. उस की आंखों में अभी भी गुस्सा और पछतावा साफ झलक रहा था. उस ने पूजा को जान से मारने की कोशिश की थी. लेकिन पूजा के शोर मचाने से आसपड़ोस के लोग आ गए थे और उसे पकड़ लिया था. सही बात तो यह थी कि यह सिर्फ एक हत्या की कोशिश नहीं थी, बल्कि यह एक रिश्ते के अंत की कोशिश थी. यह शक, गुस्सा और टूटते भरोसे की कहानी थी.
पूजा बिहार के एक छोटे से गांव की रहने वाली थी. उस का परिवार भले साधारण था, लेकिन वह सपने बड़े देखने वाली थी. इस की वजह यह थी कि वह मेहनती थी. वह अपने सपने पूरे करने के लिए कोई भी काम करने को तैयार रहती थी. वह आत्मनिर्भर बनना चाहती थी. यही सपना उसे सूरत ले आया था. वह अपने एक परिचित के साथ सूरत आ गई थी, क्योंकि उस ने देख लिया था कि गांव में रह कर उस के सपने कभी पूरे नहीं हो सकते.
सूरत आ कर उस ने कैटरिंग का काम शुरू किया. शादीब्याह, छोटेमोटे कार्यक्रम, जन्मदिन, मैरिज एनीवर्सरी आदि मौकों पर लोगों के यहां खाना बनाने जाने लगी. वह हर जगह और हर अवसर पर काम करने जाती थी. फिर वह खाना भी अच्छा और साफसुथरा बनाती थी. इसलिए उस के पास काम की कमी नहीं होती थी. दिन भर की भागदौड़ और काम की थकान होने के बावजूद वह हमेशा मुसकराती रहती थी और अपनी मेहनत से ग्राहक को खुश रखती थी.
पूजा जगहजगह काम करने जाती रहती थी. ऐसे में ही उस की मुलाकात सरफराज खान से हुई. सरफराज भी बिहार का ही रहने वाला था. वह भी अपने सपने पूरे करने सूरत आया था. सूरत में वह भी मजदूरी करता था. कभी किसी फैक्ट्री में काम करता तो कभी किसी निर्माण स्थल पर. कोई परमानेंट नौकरी नहीं थी. घाटघाट का पानी पीने से जिंदगी ने उसे सख्त बना दिया था, लेकिन दिल से वह भी एक कोमल और अकेला था.

पुलिस हिरासत में हत्यारोपी सरफराज
अपने गांवदेश से दूर रहते हुए जब कोई अपने क्षेत्र का मिलता है तो वह अपना सा ही लगता है. बिहार से हजारों किलोमीटर दूर जब अपनी ही भाषा बोलने वाला सरफराज मिला तो पूजा ने पूछा, ”कहां के रहने वाले हो?’’
”बिहार का.’’ सरफराज ने कहा.
”बिहार में कहां से यानी आप का जिला कौन सा है?’’ पूजा ने सवाल किया.
सरफराज ने जब अपना जिला और गांव बताया तो पूजा भी उसी जिले की ही नहीं, उसी के बगल के गांव की रहने वाली थी. इस तरह दोनों में जानपहचान हो गई. दोनों रहते भी एक ही चाल में थे, जिस से दोनों की अकसर मुलाकात होने लगी. दोनों की जानपहचान हो ही गई थी. लगातार मिलने और आसपास के गांव के होने की वजह से दोस्ती भी हो गई. दोस्ती होने के बाद दोनों का एकदूसरे के घर आनाजाना शुरू हो गया. यही नहीं, कभीकभार साथसाथ खाना भी हो जाता. जिस की वजह से धीरेधीरे उन की यह दोस्ती प्यार में बदल गई. क्योंकि दोनों ही अकेले थे.
पूजा और सरफराज को जब प्यार हुआ तो घरपरिवार की परवाह किए बिना दोनों ने शादी कर ली. उन के लिए यह एक नई शुरुआत थी. जब कि दोनों अलगअलग धर्मों से थे, लेकिन इस की परवाह न पूजा ने की और न सरफराज ने. शुरुआत में सब कुछ अच्छा चल रहा था. एक छोटा सा कमरा, सीमित कमाई, लेकिन साथ था और प्यार भी. यही उन के लिए सब से बड़ी खुशी थी. दोनों खुश थे. पूजा सुबह काम पर निकलती. उस के जाने के बाद सरफराज भी अपने काम पर चला जाता. शाम को दोनों लौटते और जो भी रूखासूखा बनता, साथ बैठ कर खाते तो उन्हें लगता कि दुनिया में इस से बड़ा सुख दूसरा नहीं है. खाते हुए हंसते, बातें करते और दिन भर की कहानियां यानी आपबीती सुनाते हुए अपनी थकान उतारते.
लेकिन यह खुशी ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाई. धीरेधीरे सरफराज का स्वभाव बदलने लगा. पूजा खूबसूरत थी और चुलबुली भी. वह हर किसी से मिलजुल कर रहने वाली थी और हंस कर बातें करने वाली भी. हर किसी के सुखदुख में खड़ी रहती थी. यही वजह थी कि सरफराज पूजा पर शक करने लगा. छोटीछोटी बातों पर सवाल उठाने लगा कि आज देर क्यों हुई? किस से बातें कर रही थी? फोन किस का था?
शुरुआत में पूजा ने इन बातों को नजरअंदाज किया. उसे लगा कि यह प्यार है. चाहने वाले को अपने प्यार की थोड़ी चिंता होती ही है, लेकिन धीरेधीरे यह चिंता बढ़ती ही गई और पूजा पर प्रतिबंध लगाए जाने लगे कि जल्दी समय पर घर आओ. फलां से बात मत करो. वह आदमी ठीक नहीं है. उस के घर मत जाओ. इस के बाद न वह सवाल रहे और न प्रतिबंध. पूजा पर आरोप लगाए जाने लगे थे. वह तुम्हारा कौन है? उस से बातें क्यों करती हो? उस से बात मत करो. आरोपों और प्रतिबंध की वजह से उन के घर में हंसी की जगह बहस ने ले ली थी. सरफराज रोकताटोकता तो पूजा सवाल करने लगती कि ऐसा क्यों? वह सरफराज के हर सवाल का, हर प्रतिबंध का जवाब चाहती.

नरेश के घर के बाहर जमा भीड़
सरफराज जो जवाब देता, उसी पर बहस हो जाती, क्योंकि पूजा वैसी थी नहीं. इसलिए रोजाना दोनों के बीच किसी न किसी बात को ले कर विवाद होने लगा. कभी काम को ले कर, तो कभी पैसों को ले कर और मुख्य विवाद तो शक को ले कर था. पूजा सरफराज को बारबार समझाने की कोशिश करती कि वह जैसा कहता और सोचता है, वैसा कुछ भी नहीं है. वह बेवजह उस पर शक करता है और उल्टासीधा सोचता है. फिर एक दिन उस ने चाकू से वार कर पूजा की हत्या कर दी.
पुलिस ने वह चाकू बरामद कर लिया, जिस से पूजा की हत्या हुई थी. यह सिर्फ एक तरह का अपराध नहीं था, बल्कि यह उस मानसिकता की कहानी थी, जहां भरोसे की जगह शक ले लेता है. जहां प्यार की जगह अधिकार और नियंत्रण आ जाता है. जहां संवाद खत्म हो जाता है और हिंसा शुरू हो जाती है. पूजा अब इस दुनिया में नहीं रही. उस के सपने, उस की मेहनत, उस की जिंदगी सब खत्म हो चुकी है. अब वह सिर्फ एक समाचार या कहानी बन कर रह गई है, लेकिन उस के पीछे रह गईं कई अनकही बातें कि क्या वह सच में दोषी थी या फिर वह सिर्फ गलतफहमी का शिकार हो गई?

डीसीपी एस. एस. झाला
पूछताछ के बाद पुलिस ने सरफराज को अदालत में पेश कर दिया था, जहां से उसे जेल भेज दिया गया था. अब वह जेल में है. उस का गुस्सा ठंडा हो चुका है. अब उस के पास सिर्फ पछतावा बचा है. जिसे वह अपना समझता था, उसी को उस ने खो दिया, अपने ही हाथों. सवाल यह है कि क्या शक का इलाज सिर्फ हिंसा है? क्या रिश्तों में संवाद खत्म हो गया है? क्या हम अपने गुस्से पर काबू नहीं पा सकते? लगता है, जहां प्यार है, भरोसा नहीं. साथ तो है, लेकिन समझ नहीं. क्योंकि जब भरोसा टूटता है तो सिर्फ रिश्ता नहीं टूटता, बल्कि जिंदगी टूट जाती है. Love Story






