Lover Crime Story: आवारा प्रवृत्ति के हिमांशु के प्रेमिल संबंध ममता से हुए तो उस की ख्वाहिश पूरी करने के लिए उस ने तीन महीने के असद का अपहरण तो कर लिया, लेकिन इस के बाद उस ने जो किया खुद तो जेल गया ही प्रेमिका और उस का पति भी सलाखों के पीछे जा पहुंचा.
उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर के पुलिस कंट्रोल रूम को 2 मार्च, 2016 की शाम जो सूचना मिली थी, उस से विभाग अफरातफरी मच गई थी. इस की वजह यह थी कि महज 3 महीने के बच्चे का सरेआम अपहरण कर लिया गया था. वारदात में न मारपीट हुई थी, न खूनखराबा और न ही किसी हथियार का इस्तेमाल किया गया था. जिस तरह बच्चे का अपहरण हुआ था, वह हैरान करने वाला था.
सूचना पा कर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो वहां लोगों की भीड़ लगी थी. घटना को ले कर लोग काफी नाराज थे. जिस परिवार के बच्चे का अपहरण हुआ था, उस में कोहराम मचा हुआ था. अपहृत बच्चे का नाम असद था. वह थाना जनकपुरी के मोहल्ला खानआलपुरा के रहने वाले असलम का बेटा था. उस के परिवार में पत्नी शाहीन के अलावा अन्य सदस्य भी थे. शाहीन का रोरो कर बुरा हाल था. वह बारबार बेटे को ढूंढ़ कर लाने की गुहार लगा रही थी. थोड़ीथोड़ी देर में वह बेहोश भी हो जा रही थी. आसपड़ोस की महिलाएं किसी तरह उसे संभाल रही थीं. सूचना पा कर पहुंचे सीओ (द्वितीय) अमित नागर और थानाप्रभारी यशपाल सिंह ने घटना के बारे में पूछताछ की.
असद के घर वालों और आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि असलम का 10 साल का भतीजा जुनैद असद को गोद में लिए घर के बाहर गली में घूम रहा था. करीब पौने 6 बजे एक्टिवा सवार एक युवक आया और जुनैद की गोद से बच्चे को छीन कर भाग गया था. सब कुछ इतनी जल्दी में हुआ कि जुनैद को संभलने तक का मौका नहीं मिला. वह चिल्लाया कि कोई असद को ले कर भाग रहा है, उसे बचाओ. लोगों का ध्यान उस तरफ गया तो उन्होंने फुर्ती दिखाते हुए स्कूटी सवार का पीछा किया, लेकिन वह तेजी से घंटाघर की ओर भाग गया. उस के बाद पुलिस को सूचना दी गई.
जमा लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा था. सभी असद को जल्द से जल्द बरामद करने की मांग कर रहे थे. यही नहीं, उन्होंने मोहल्ले से बाहर आ कर देहरादून मार्ग पर जाम भी लगा दिया था. पुलिस ने युवक का हुलिया पूछ कर जिले में चैकिंग अभियान चलाया, लेकिन इस का कोई फायदा नहीं मिला. घटना काफी गंभीर थी. एसएसपी आर.पी. सिंह यादव को इस की सूचना मिली तो उन्होंने अधीनस्थों को हालात पर निमंत्रण पा कर जल्द से जल्द बच्चे की सकुशल बरामदगी के निर्देश दिए. जाम और लोगों की नाराजगी को देखते हुए अन्य थानों की पुलिस भी बुलवा ली गई. कोतवाली प्रभारी संजय पांडेय और थाना सदर के थानाप्रभारी एस.के. दुबे भी वहां आ पहुंचे.
पुलिस ने किसी तरह लोगों को समझाबुझा कर जाम खुलवाया. अबोध बच्चे के अपहरण के पीछे किसी का क्या मकसद हो सकता है, यह सवाल पुलिस के सामने था. असलम की माली हालत भी ऐसी नहीं थी कि फिरौती के लिए उस के बेटे का अपहरण किया जाता. मामला रंजिश का हो सकता था. पुलिस ने इस बारे में पूछताछ की तो उस ने किसी से भी रंजिश होने की बात से साफ इंकार कर दिया. लोगों ने आशंका जाहिर की कि असद को तंत्रमंत्र के लिए भी उठाया जा सकता है. पुलिस भी इस आशंका से इंकार नहीं कर रही थी, क्योंकि नरबलि आदि के मामलों में अंधविश्वासी लोग ऐसा ही करते हैं. पुलिस ने असलम की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया और तहकीकात में जुट गई.
अपहर्ता युवक तक पहुंचने को पुलिस के पास कोई सुराग नहीं था. हुलिए के आधार पर पुलिस उस की तलाश में लग गई. बेटे की जुदाई और बुरे खयालों ने पूरी रात असलम के घर वालों को सोने नहीं दिया. पुलिस किसी नतीजे पर पहुंचती, अगली सुबह बुरी खबर सुनाई दी. मानकमऊ क्षेत्र स्थित नहर में शमशाद नामक युवक ने एक अबोध का शव देख कर पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने बच्चे की लाश को कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. असलम को इस की सूचना दी गई. पोस्टमार्टम हाउस पहुंच कर उस ने लाश देखी तो वह बिलख पड़ा. वह उसी के बेटे की लाश थी. उस की हत्या की खबर पूरे परिवार पर बिजली बन कर गिरी.
मोहल्ले में आक्रोश फैल गया और लोग जाम लगाने की कोशिश करने लगे, लेकिन वहां पहुंचे एसपी (सिटी) महेंद्र यादव, सिटी मजिस्ट्रेट आर.के. गुप्ता और सीओ अमित नागर ने लोगों को समझाया और हत्यारे को गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया. कोई बुरी घटना न घटे, इस के लिए पीएसी की टुकड़ी तैनात कर दी गई. पुलिस के लिए अबोध बच्चे की हत्या चुनौती बन गई. हत्यारा जो भी था, बेहद क्रूर था. उसे मासूम पर जरा भी दया नहीं आई थी. शाम तक असद की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई, जिस में मौत की वजह दम घुटना बताया गया था. हत्यारे ने मुंह दबा कर उस की सांसों की डोर काट दी थी.
पुलिस को हत्या की 2 वजहें नजर आ रही थीं, पहली रंजिश और दूसरी तांत्रिक क्रिया. लेकिन दोनों के ही कोई सबूत नहीं मिले थे. पुलिस ने असद के घर वालों से एक बार फिर पूछताछ की. पुलिस ने असलम और उस की पत्नी का मोबाइल नंबर ले लिया. हत्यारे तक पहुंचने के लिए पुलिस टीम ने मुख्य मार्ग पर जहांजहां सीसीटीवी कैमरे लगे थे, उन की रिकौर्डिंग चैक की तो उस में असद को उठाने वाला युवक नजर आ गया. उस ने दाएं हाथ से बच्चे को पकड़ा हुआ था. लेकिन रिकौर्डिंग में उस का चेहरा स्पष्ट नजर नहीं आ रहा था. उस की स्कूटी के रंग का जरूर पता चल गया था. वह ग्रे रंग की एक्टिवा थी.
एसएसपी आर.पी. सिंह ने अबोध की हत्या की गुत्थी को सुलझाने के लिए कई पुलिस टीमों को लगा दिया था. पुलिस ने आरटीओ औफिस से ग्रे कलर की सैंकड़ों एक्टिवा की डिटेल हासिल कर के उन की जांच शुरू की. पुलिस रंजिश को भी ध्यान में रख कर चल रही थी. पुलिस का मानना था कि किसी ने खुंदक में बच्चे की जान ले ली है. पुलिस ने घंटाघर और आसपास के इलाके में मुखबिरों का जाल बिछा दिया. पुलिस सीसीटीवी फुटेज के जरिए हत्यारे तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी. आखिर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि वीडियो फुटेज से मिलतेजुलते हुलिए का एक युवक मोहल्ला पिलखनतला में रहता है. पुलिस ने उस के बारे में पता किया तो पता चला कि उस का नाम हिमांशु है.
पुलिस ने उस का मोबाइल नंबर हासिल किया और उस की लोकेशन और काल डिटेल्स निकलवा कर जांच की. उस की लोकेशन घटनास्थल पर पाई गई. इस से स्पष्ट हो गया कि घटना में उसी का हाथ है. 8 मार्च को पुलिस ने हिमांशु को हिरासत में ले लिया और थाने ले आई. उस से पूछताछ की गई तो उस ने वारदात में अपना हाथ होने से साफ मना कर दिया, लेकिन पुलिस के पास सबूत थे, इसलिए जब सबूतों के आधार पर पूछताछ की गई तो उस ने जो बताया, उसे सुन कर पुलिस हैरान रह गई. उस ने प्रेमिका की ख्वाहिश पूरी करने के लिए इतना बड़ा गुनाह कर डाला था. विस्तृत पूछताछ में जो कहानी निकल कर सामने आई, वह हैरान कर देने वाली थी.
शादियों में स्टौल लगाने का काम करने वाला हिमांशु आवारा प्रवृत्ति का युवक था. आवारगी के चक्कर में ही उस की दोस्ती मोहल्ला गौशाला निवासी संजय सैनी से हो गई थी. संजय भी उस का हमपेशा था. संजय के परिवार में पत्नी ममता और एक बेटी थी. दोस्ती हुई तो हिमांशु उस के घर भी आनेजाने लगा. इसी आनेजाने में हिमांशु संजय की पत्नी को दिल दे बैठा. चंद दिनों में ममता को भी अहसास हो गया कि हिमांशु के दिल में उस के लिए कुछ है. वह उस से खूब हंसीमजाक करता था. ममता उस के मजाक का बुरा मानने के बजाय खुल कर साथ देती थी. दोनों के बीच रिश्ता देवरभाभी का था. संजय भी उन के हंसीमजाक को गंभीरता से नहीं लेता था.
बाद में हिमांशु अक्सर ऐसे मौके पर आने लगा, जब संजय घर पर नहीं होता था. ममता कोई नादान नहीं थी. उस की लच्छेदार बातों और मजाक का मतलब वह अच्छी तरह समझ रही थी. वक्त के साथ रिश्ते गहराए तो हिमांशु ने अपने दिल की बात उस से कह दी. ममता ने भी खुशीखुशी उस के इजहार पर अपनी स्वीकृति की मोहर लगा दी. दोनों के रिश्ते मर्यादा तोड़ चुके थे. वक्त अपनी गति से चल रहा था. ममता को बेटी थी. उसे बेटे की चाहत थी, लेकिन किसी शारीरिक समस्या के चलते वह आगे बच्चा पैदा नहीं कर सकती थी. एक दिन बातोंबातों में उस ने अपना यह दर्द हिमांशु से कहा तो प्रेमिका के इस दुख ने उसे परेशान कर दिया. कई दिनों तक वह इस समस्या से निजात के बारे में सोचता रहा.
संजय भी इस बात से परेशान रहता था. करीब 6 महीने पहले की बात है. एक दिन संजय और ममता बैठे थे, तभी हिमांशु आ गया. वह काफी खुश नजर आ रहा था. उसे देख कर संजय ने पूछा, ‘‘क्या बात है, आज तुम बहुत खुश नजर आ रहे हो?’’
‘‘खुशी की ही बात है, मैं ने तुम्हारे घर बेटा लाने का रास्ता खोज लिया है.’’ हिमांशु ने कहा.
उस की बात सुन कर ममता के चेहरे पर जैसे खोई रौनक लौट आई, ‘‘सच?’’
‘‘हां भाभी, अब तुम्हें फिक्र करने की जरूरत नहीं है.’’
‘‘ऐसा क्या करोगे तुम?’’
‘‘मैं तुम्हारे लिए नवजात बेटे का इंतजाम कर दूंगा.’’
‘‘कैसे, क्या वह दुकान पर मिलेगा?’’
‘‘नहीं, अस्पताल में.’’
‘‘मतलब?’’ ममता ने जिज्ञासा से पूछा.
‘‘मैं बच्चा चोरी कर के ला दूंगा. आप उसे पाल लेना.’’
हिमांशु की बात हैरान करने वाली थी, लेकिन ममता और संजय भी कुछ देर की बहस के बाद इस के लिए तैयार हो गए. बच्चा पैदा होने की बात सही लगे, इस के लिए ममता ने अपने पेट पर कपड़ा बांध कर आसपड़ोस में कहना शुरू कर दिया कि वह गर्भवती है. सभी ने उस की बात पर सहज विश्वास भी कर लिया. जैसेजैसे समय बढ़ता गया, वैसेवैसे ममता खुद को गर्भवती दिखाने के लिए पेट पर कपड़ों की परतें बढ़ाती गई.
अपनी कोख में बच्चा होने का वह तमाशा भर कर रही थी. उस ने और संजय ने तय कर रखा था कि हिमांशु जब उन्हें तुरंत का पैदा बच्चा ला कर देगा तो वे उसे ले कर कुछ दिनों के लिए बाहर चले जाएंगे और आ कर बताएंगे कि उन्हें बेटा पैदा हुआ है. इस पर उन पर किसी को शक भी नहीं होगा. ममता और संजय की सारी उम्मीदें हिमांशु पर ही टिकी थीं. वे उसे अक्सर टोकते भी रहते थे. वह भी प्रेमिका की ख्वाहिश हर सूरत में पूरी करना चाहता था. उस ने सोच लिया था कि वह किसी भी तरह अस्पताल से बच्चा चोरी कर के लाएगा. वह इस की प्लानिंग भी करता रहता था.
2 मार्च को उस ने अपनी योजना को पूरा करने का फैसला कर लिया. वह बच्चा चोरी करने के इरादे से महिला जिला अस्पताल पहुंचा. वहां एकदो बच्चे थे, लेकिन उन के पास चूंकि घर वाले तो थे ही, अस्पताल का स्टाफ भी था, इसलिए पकड़े जाने के डर से वह बच्चा चुराने की हिम्मत नहीं कर सका. कुछ देर इधरउधर घूम कर वह लौट आया. वह हताश हो कर घूम रहा था कि उस की नजर असद पर पड़ गई. उसे लगा कि इस बच्चे को हासिल कर के वह प्रेमिका की ख्वाहिश पूरी कर सकता है. असद चूंकि छोटे बच्चे की गोद में था, इसलिए उसे हासिल करना उसे आसान लगा. उस ने मौका देख कर स्कूटी एकदम नजदीक जा कर रोकी और असद को बच्चे की गोद से छीन कर भाग गया.
उसे ले कर वह सीधे संजय के घर पहुंचा. उस ने सोचा था कि बच्चे को देख कर ममता खुशी से चहक उठेगी, लेकिन उस की उम्मीदों को तब झटका लगा, जब बच्चे को देख कर ममता के तेवर बदल गए. उस ने कहा, ‘‘यह किसे ले आए तुम?’’
‘‘लड़का है, जो तुम्हें चाहिए था.’’
‘‘लेकिन मुझे तुरंत का जन्मा बच्चा चाहिए, इतना बड़ा नहीं. इसे देख कर कोई भरोसा नहीं करेगा कि मैं ने जन्म दिया है.’’
‘‘तुम्हारी गोद भर रही है. तुम्हें और क्या चाहिए?’’ हिमांशु ने उसे समझाते हुए कहा.
‘‘नहीं, मुझे यह लड़का नहीं चाहिए. इसे ढूंढ़ा गया तो कोई भी इसे आसानी से पहचान लेगा.’’
संजय ने भी उसे लेने से मना कर दिया. हिमांशु आसमान से जमीन पर आ गिरा. उसी बीच असद ने रोना शुरू कर दिया तो तीनों घबरा गए. हिमांशु को लगा कि बच्चा ज्यादा रोया तो वह पकड़ा जाएगा. प्रेमिका के मना करने और बच्चे के रोने से वह हैवान बन गया. उस ने मासूम का मुंह दबा कर उस की हत्या कर दी.
तब तक रात हो चुकी थी. वह असद को मानकमऊ ले गया और नहर किनारे फेंक कर अपने घर चला गया. हिमांशु ने सोचा था कि उस के गुनाह का किसी को पता नहीं चलेगा, लेकिन उस की यह गलतफहमी पुलिस द्वारा पकड़े जाते ही दूर हो गई. उस के अपराध स्वीकार करने के बाद पुलिस ने ममता और उस के पति संजय को भी गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर उन से भी पूछताछ की गई. पुलिस ने वह स्कूटी भी बरामद कर ली, जिस से हिमांशु ने असद का अपहरण किया था.
एसएसपी आर.पी. सिंह ने प्रेसवार्ता कर के असद के अपहरा के मामले का खुलासा किया. उस समय असद के घर वाले भी वहां मौजूद थे, जो आरोपियों को फांसी देने की मांग कर रहे थे. सभी कागजी औपचारिकताएं पूरी कर के पुलिस ने तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.
कथा लिखे जाने तक उन की जमानतें नहीं हुई थीं.
प्रेमिका की ख्वाहिश पूरी करने के फेर में हिमांशु एक बड़ा गुनाह कर के खुद तो हत्यारा बना ही, प्रेमिका और उस के पति का भी भविष्य चौपट कर दिया. असद के मातापिता बेटे के खोने का यह दुख अब इस जन्म में तो नहीं ही भुला पाएंगे. Lover Crime Story
— कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित






