Crime Story Hindi: खूबसूरत महिलाओं के साथ रंगरेलियां मनाने के चक्कर में कई लोग हनीट्रैप में कुछ इस तरह फंस जाते हैं कि पुलिस के पास जाने की भी हिम्मत नहीं जुटा पाते. आशीष के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ लेकिन समय रहते ही उन की बुद्धि काम कर गई और वह एक बड़ी मुसीबत से बच गए.
आशीष अपनी दुकान पर बैठे थे, उसी समय उन के मोबाइल पर किसी अज्ञात नंबर से केवल हाय लिखा हुआ वाट्सऐप मैसेज आया. वह उसे कोई तवज्जो न दे कर अपने काम में लग गए. कुछ देर बाद उसी नंबर से वाट्सऐप पर 2-3 खूबसूरत लड़कियों के फोटो आए. सुंदर लड़कियों के फोटो देख कर उन की जिज्ञासा बढ़ी तो उन्होंने उस नंबर पर फोन किया, जिस नंबर से मैसेज और फोटो आए थे.
दूसरी ओर किसी लड़की ने फोन उठाया तो आशीष ने पूछा, ‘‘आप के नंबर से मेरे पास 2-3 लड़कियों के फोटो भेजे गए हैं. क्या मैं जान सकता हूं कि ये फोटो मुझे क्यों भेजे गए हैं?’’
‘‘सौरी सर, दरअसल ये फोटो मुझे किसी और को भेजने थे, गलती से आप के नंबर पर चले गए. वैसे सर, अगर आप अन्यथा न लें तो क्या मैं जान सकती हूं कि आप कौन और कहां से बोल रहे हैं?’’ लड़की ने कहा.
‘‘मेरा नाम आशीष है और रानीबाग इलाके में मेरी कार एसेसरीज की दुकान है.’’ आशीष ने उसे अपने बारे में बताया.
कुछ लोग आदतन लड़कियों के फोन को ज्यादा तवज्जो देते हैं. ऐसे लोगों के फोन पर अगर किसी लड़की का फोन आ जाए तो वे उस से ज्यादा से ज्यादा देर तक बात करने की कोशिश करते हैं. आशीष भी ऐसे ही लोगों में थे.
‘‘ओके सर.’’ आशीष की हकीकत जान कर लड़की ने कहा.
‘‘वैसे मैडम, क्या मैं जान सकता हूं कि आप कौन हैं और कहां से बोल रही हैं?’’ आशीष ने पूछा.
‘‘जी मेरा नाम प्रीति है और मैं भी दिल्ली में ही रहती हूं. दरअसल, आप के मोबाइल पर जिन लड़कियों के फोटो आए हैं, वे मुझे किसी और को भेजने थे. वैसे अगर आप भी शौकीन हों तो उन में से कोई लड़की पसंद कर सकते हैं.’’ प्रीति ने मीठे स्वर में कहा.
37 साल के आशीष इतने नासमझ नहीं थे कि प्रीति की बातों का मतलब न समझ पाते. वह चूंकि बीवीबच्चों वाले थे, इसलिए मन ललचाने के बावजूद उन्होंने जल्दबाजी में कोई कदम उठाना उचित नहीं समझा. उन्होंने प्रीति को टालने के लिए कहा, ‘‘मैडम, अभी मैं काम में बिजी हूं, जब भी जरूरत होगी, आप को बता दूंगा.’’
‘‘ठीक है सर, आप जब भी चाहें बेझिझक बता दें. एक बार हमारी सेवा लेने के बाद आप की तबीयत खुश हो जाएगी.’’ कह कर प्रीति ने फोन काट दिया.
इस के बाद प्रीति और आशीष के बीच दोस्ती हो गई. दोनों वाट्सऐप पर अकसर बातें करने लगे. 5-6 महीने तक उन के बीच इसी तरह बातें चलती रहीं. एक बार प्रीति ने एक पता दे कर उन्हें मिलने के लिए बुलाया, पर व्यस्तता की वजह से वह जा नहीं सके. 14 मार्च, 2016 को भी आशीष की वाट्सऐप पर प्रीति से बात हुई. प्रीति ने शिकायती लहजे में कहा, ‘‘आप आए नहीं?’’
‘‘आ कर क्या करें, कोई बढि़या चीज तो आप के पास है नहीं. अगर कोई बढि़या माल हो तो बताइए?’’ आशीष ने कहा.
‘‘हमारे पास बढि़या माल भी है, अभी फोटो भेजती हूं.’’ प्रीति ने कहा.
कुछ देर बाद आशीष के वाट्सऐप पर एक लड़की की फोटो आई. वह लाल रंग का स्लीवलैस टौप पहने थी और वाकई खूबसूरत लग रही थी. फोटो देखते ही आशीष उस पर फिदा हो गए. उन्होंने उसी वक्त प्रीति को फोन कर के कहा, ‘‘मैडम, यह लड़की मुझे पसंद है.’’
‘‘आशीष साहब, इस की एक बार की कीमत 3 हजार रुपए है.’’ प्रीति ने कहा.
कीमत सुन कर आशीष चौंक गए क्योंकि इतने कम पैसों में इतनी सुंदर कालगर्ल नहीं मिल सकती. आशीष ने तुरंत कहा, ‘‘कोई बात नहीं मैडम, जब चीज पसंद आ जाए तो हम कीमत नहीं देखते. आप इसे हमारे पास रानीबाग भेज दीजिए.’’
‘‘सौरी सर, लड़की वहां नहीं जा सकती. दरअसल वह कालेज स्टूडेंट है. अपने घर वालों से कोई बहाना कर थोड़ीबहुत देर के लिए घर से निकल सकती है. ऐसा कीजिए, आप 3 बजे तक रोहिणी सेक्टर-15 में बंसल भवन के पास पहुंच जाइए. तब तक लड़की को मैं अपने फ्लैट में बुला लूंगी. आप को हम पिक कर लेंगे.’’
आशीष ने बात करते हुए दुकान में लगी दीवार घड़ी की तरफ देख कर कहा, ‘‘मैडम, 3 तो बजने वाले हैं. मैं इतनी जल्दी रोहिणी कैसे पहुंच पाऊंगा?’’
‘‘कोई बात नहीं सर, सवा 3-साढ़े 3 तक पहुंच जाइए. हम आप को वहीं मिलेंगे.’’ प्रीति बोली.
आशीष की दुकान पर मौजूद लड़के एक कार में एसेसरीज लगाने में जुटे थे. आशीष को सैक्टर-15 पहुंचने की जल्दी थी. उन्होंने लड़कों से कहा कि वह किसी से मिलने जा रहे हैं, थोड़ी देर में लौट आएंगे. इस के बाद वह अपनी कार से रोहिणी सेक्टर-15 के लिए रवाना हो गए. करीब आधे घंटे बाद वह बंसल भवन के नजदीक पहुंचे तो वहां 2 लड़कियां खड़ी मिलीं. उन में से एक तो वही थी, जिस की फोटो प्रीति ने उन्हें भेजी थी. प्रीति को उन्होंने देखा नहीं था. उस से केवल फोन पर ही बातें हुई थीं. इसलिए वह समझ गए कि दूसरी लड़की प्रीति ही होगी.
फिर भी संतुष्टि के लिए उन्होंने कार से उतर कर प्रीति का नंबर मिलाया और उन दोनों लड़कियों की ओर देखने लगे. नंबर मिलाते ही उन दोनों में से एक ने काल रिसीव करते हुए फोन कान से लगाया तो आशीष ने अपना एक हाथ उठा कर इशारा किया तो दोनों लड़कियां उन की कार के नजदीक आ गईं. उन में से एक लड़की ने अपना परिचय प्रीति और दूसरी का परिचय शिखा के रूप में दिया.
कार को वहीं पार्किंग में लगवा कर प्रीति आशीष को रोहिणी सेक्टर-15 के ही एक फ्लैट में ले जा कर बोली, ‘‘यहां कोई समस्या खड़ी हो सकती है, इसलिए यहां से कहीं और चलना होगा.’’
‘‘कहां?’’ आशीष ने पूछा.
‘‘यहीं रोहिणी के सेक्टर-2 में हमारा फ्लैट है, वहीं चलते हैं.’’ प्रीति बोली.
आशीष ने कार से चलने का प्रस्ताव रखा तो प्रीति बोली, ‘‘साथ चलना ठीक नहीं है, आप अपनी कार से सेक्टर-2 स्थित अवंतिका हौस्पिटल के पास पहुंचिए, हम वहीं मिलेंगे.’’
आशीष कार से सेक्टर-2 की तरफ चल दिए. सेक्टर-2 के अवंतिका हौस्पिटल से कहां जाना है, यह उन्हें पता नहीं था. इसलिए निश्चित जगह पर पहुंच कर उन्होंने प्रीति को फोन लगाया. इस पर प्रीति ने उन्हें सेक्टर-2 के ब्लौक-ए स्थित एक फ्लैट पर आने को कहा. कार खड़ी कर के आशीष ए-ब्लौक में प्रीति द्वारा बताई गई जगह पहुंच गए. वहां प्रीति उन्हें मिल गई. वह उन्हें साथ ले कर एक फ्लैट में पहुंची. उस फ्लैट में 2 कमरे थे. प्रीति ने आशीष से 3 हजार रुपए ले कर उन्हें शिखा के साथ दूसरे कमरे में भेज दिया. आशीष के लिए खुद पर काबू रखना मुश्किल हो रहा था. उन्होंने फटाफट दरवाजा बंद किया और शिखा को अपनी बांहों में समेट लिया.
‘‘इतनी भी क्या जल्दी है जनाब, थोड़ा सब्र रखिए.’’ कहते हुए शिखा ने आशीष की शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए.
‘‘नहीं शिखा, मैं अब और बरदाश्त नहीं कर सकता,’’ कह कर आशीष ने खुद ही अपने कपड़े उतार दिए. शिखा भी प्राकृतिक अवस्था में आ गई. आखिर आशीष ने अपनी हसरत पूरी कर ली.
इस के बाद शिखा फटाफट कपड़े पहन कर कमरे से बाहर निकल गई. उस के बाहर जाते ही 5 लोग उस कमरे में घुस आए. उन में से एक दिल्ली पुलिस की वर्दी पहने था, जिस की नेमप्लेट पर सुभाषचंद लिखा था. उन में से 2 लोग अपनेअपने मोबाइलों से आशीष की अर्द्धनग्नावस्था की वीडियो बनाने लगे. अचानक आए उन लोगों को देख आशीष के होश उड़ गए. आशीष समझ गए कि ये पुलिस के लोग हैं और वह बुरी तरह फंस गए हैं. पुलिस की वर्दी वाला एएसआई सुभाषचंद था. उस ने कहा, ‘‘रेड में तुम रंगेहाथों पकड़े गए हो.’’
‘‘सर, मुझ से क्या गलती हो गई?’’ आशीष ने डरते हुए पूछा.
‘‘जब तुम रेप के आरोप में जेल जाओगे तो गलती का खुद ही पता चल जाएगा.’’ पुलिस वाले ने धमकाते हुए कहा.
‘‘सर, मैं ने किसी के साथ रेप नहीं किया. वह लड़की तो खुद मुझे यहां ले कर आई थी.’’ आशीष ने सफाई दी.
‘‘चुप रह. उस लड़की का बयान और हमारी बनाई वीडियो फिल्म तुझे सजा दिलाने के लिए काफी है. अब तू खुद सोच ले कि तेरी इस करतूत की वजह से तेरी कितनी बदनामी होगी.’’ पुलिस वाले ने आशीष को हड़काया.
आशीष बुरी तरह डरे हुए थे. वह उन लोगों के सामने हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाने लगे. यह देख कर एएसआई सुभाषचंद ने कहा, ‘‘देख भई, तेरे खिलाफ बड़ा पक्का मामला बन रहा है. इस से बचने का एक ही तरीका है. लेकिन उस के लिए तुझे 15 लाख खर्च करने पड़ेंगे. क्योंकि जिस लड़की के साथ तूने रेप किया है, उसे काफी पैसे देने होंगे, वरना वह नहीं मानेगी.’’
‘‘सर, यह रकम तो बहुत ज्यादा हैं. इतने पैसे मैं कहां से लाऊंगा?’’ आशीष ने कहा.
‘‘यह बात तो तुझे उस के साथ कमरे में जाने से पहले सोचनी चाहिए थी.’’ एएसआई ने कहा.
‘‘सर, यह ऐसे नहीं मानेगा, इसे थाने ले चलो. वहां पर इस के घर वालों और रिश्तेदारों को बुला कर इस की करतूत बताई जाएगी तो यह समझेगा.’’ साथ में खड़े उस के साथी ने कहा.
‘‘नहीं सर, ऐसा मत करिए. मैं बरबाद हो जाऊंगा. आप यहीं मामला निपटा लीजिए.’’ आशीष ने हाथ जोड़ कर कहा.
‘‘तो चल, 10 लाख दे दे. मामला रफादफा कर देंगे.’’ सुभाषचंद ने कहा.
आशीष पुलिस के लफड़े से बचना चाहते थे, इसलिए उन्होंने 10 लाख रुपए देने की हामी भर ली. उन लोगों ने आशीष से कहा कि 3 लाख रुपए अभी दे दे, बाकी कल ले लेंगे. लेकिन उस समय आशीष के पास इतने पैसे नहीं थे. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि वह 3 लाख रुपए का इंतजाम कहां से करें. मुसीबत के उस समय में उन्हें अपना दोस्त वैभव याद आया. उस की दिल्ली के मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया में फैक्ट्री थी. वह अपनी फैक्ट्री में है या नहीं, यह जानने के लिए उन्होंने उसे फोन किया. वैभव उस समय फैक्ट्री में ही था.
वे पांचों लोग आशीष के साथ मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया में पहुंच गए. आशीष ने अपनी कार दोस्त की फैक्ट्री के बाहर खड़ी कर दी. एएसआई सुभाषचंद और उस के साथी उस की कार में बैठे रहे. जबकि वह अपने दोस्त के पास चले गए. उन्होंने अपने दोस्त वैभव को खुद के फंसने की पूरी कहानी बता दी. वैभव समझ गया कि आशीष मुसीबत में फंस गया है लेकिन उस समय उस के पास भी 3 लाख रुपए नहीं थे. उस ने किसी तरह एक लाख रुपए का इंतजाम कर के उसे दे दिए. आशीष ने एक लाख रुपए कार में बैठे एएसआई सुभाषचंद को देते हुए कहा कि बड़ी मुश्किल से एक लाख का इंतजाम हो पाया है. इस के लिए भी मुझे अपनी कार गिरवी रखनी पड़ी है.
‘‘इतने से काम नहीं चलेगा. बात 3 लाख की हुई है. पूरी रकम का इंतजाम आज ही करना होगा.’’ उन में से एक शख्स ने कहा.
‘‘मैं ने काफी कोशिश की, लेकिन 3 लाख का इंतजाम नहीं हो पाया. आप मुझे कल तक का टाइम दो. मैं कल तक 2 लाख रुपए का जुगाड़ कर दूंगा.’’ आशीष ने अनुरोध किया.
‘‘2 लाख नहीं, बाकी के सारे पैसे भी कल ही देने होंगे. पैसे कहां पहुंचाने हैं, यह बात हम तुझे फोन कर के बता देंगे. और हां, ज्यादा स्याणा बनने की कोशिश मत करना, वरना तेरी वीडियो फिल्म हमारे मोबाइल में है.’’ उन के एक साथी ने कहा.
इस के बाद वे पांचों वहां से चले गए. आशीष ने राहत की सांस ली. तब तक शाम हो चुकी थी, इसलिए उन्होंने फोन कर के अपनी दुकान पर काम करने वाले लड़के से कह दिया कि दुकान बंद कर के चाबी अपने साथ ले जाए और सुबह जल्दी आ कर दुकान खोल ले. इस के बाद वह भी वेस्ट पटेलनगर के पास शादी खामपुर गांव स्थित अपने घर चले गए. अन्य दिनों की अपेक्षा उस दिन उन का चेहरा मुरझाया हुआ था. पत्नी ने इस की वजह जाननी चाही तो उन्होंने झूठ बोल दिया कि काम की वजह से थकान हो गई है.
खाना खाने के बाद आशीष जब बिस्तर पर लेटे तो उन की आंखों से नींद गायब थी. उन्हें बस यही चिंता सता रही थी कि कल उन लोगों को पैसे कहां से ला कर देंगे. अगर पैसों का इंतजाम नहीं हुआ तो उन्हें रेप के इलजाम में जेल जाना पड़ेगा. रात भर उन के दिमाग में इसी तरह के विचार घूमते रहे. सुबह को वह रानीबाग स्थित अपनी दुकान पर चले गए. आशीष दुकान पर पहुंचे ही थे कि एक अनजान नंबर से उन के मोबाइल पर फोन आया. उन्होंने काल रिसीव की तो दूसरी ओर से एएसआई सुभाषचंद की आवाज आई, ‘‘पैसों का इंतजाम हुआ या नहीं?’’
यह सुन कर आशीष घबरा कर बोले, ‘‘सर, अभी नहीं हुआ है. मैं उसी के इंतजाम में लगा हूं.’’
‘‘जल्दी इंतजाम कर ले. पैसे ले कर तुझे आज ही शाम 7 बजे मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया के अनुकंपा बैंक्वेट हौल के पास आना है.’’ कह कर एएसआई सुभाषचंद ने फोन काट दिया.
आशीष को शाम 7 बजे से पहलेपहले पैसों का जुगाड़ करना था. उन्होंने मार्केट में अपने जानने वालों से बात की, पर पैसों का इंतजाम नहीं हो पाया. ज्योंज्यों समय बीतता जा रहा था, आशीष की चिंता बढ़ती जा रही थी. तमाम कोशिशों के बाद भी पैसों का इंतजाम नहीं हो सका. फिर भी वह शाम 7 बजे से पहले ही निर्धारित जगह पर पहुंच गए. तभी पहले वाले नंबर से उन के मोबाइल पर फोन आया. आशीष ने कह दिया कि वह अनुकंपा बैंक्वेट हौल के सामने खड़े हैं. कुछ देर बाद 20-22 साल का एक युवक उन के पास आया. वह उसे देखते ही पहचान गए. वह युवक कल सुभाषचंद के साथ था. उस युवक ने अपना नाम अमित बताते हुए आशीष से पैसे मांगे.
आशीष ने उस के सामने गिड़गिड़ाते हुए कहा, ‘‘मैं ने बहुत कोशिश की, तमाम लोगों के पास गया और कई से फोन पर भी बात की, लेकिन कहीं भी बात नहीं बनी. आप मुझे थोड़ा वक्त और दे दो.’’
‘‘नहीं, अब तुझे कोई टाइम नहीं मिलेगा. क्या करेगा, कहां से पैसे लाएगा, हमें नहीं पता. जैसे भी हो, पैसे ले कर आज रात साढ़े 9 बजे बाहरी रिंग रोड स्थित काली माता मंदिर पर पहुंच जाना. यह तुझे आखिरी मौका मिल रहा है.’’
यह सुन कर आशीष मानसिक तनाव में आ गए. उन के पास ढाई घंटे का समय बचा था. इन ढाई घंटों में वह इतनी मोटी रकम कहां से लाएं, यह बात उन की समझ में नहीं आ रही थी. अपना दुखड़ा रोने के लिए वह फिर से अपने दोस्त वैभव की फैक्ट्री में चले गए. वैभव को आशीष की हालत पर तरस आ रहा था, पर उस के पास इतनी मोटी रकम नहीं थी. आखिर उस ने आशीष को पुलिस के पास जाने की सलाह दी. आशीष के पास पुलिस में शिकायत ले कर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था. काफी सोचनेसमझने के बाद वह दोस्त को साथ ले कर बाहरी जिले के थाना रोहिणी (दक्षिणी) चले गए.
थाने में मौजूद थानाप्रभारी संजय शर्मा को आशीष ने पूरी बात बता दी. थानाप्रभारी को जब यह पता चला कि उस गैंग में दिल्ली पुलिस का एक एएसआई भी शामिल है तो उन्हें आश्चर्य हुआ. वह एएसआई असली है या फरजी, यह जांच के बाद ही पता चल सकता था. उन्होंने पूरे मामले से बाहरी जिले के डीसीपी विक्रमजीत सिंह को अवगत करा दिया.
चूंकि उन लोगों ने आशीष को पैसे ले कर उसी रात साढ़े 9 बजे काली माता मंदिर पर बुलाया था, इसलिए उन्हें रंगेहाथों पकड़ने का अच्छा मौका था. डीसीपी विक्रमजीत सिंह ने एसीपी उमेश सिंह के नेतृत्व में एक टीम बनाई. इस टीम में थानाप्रभारी संजय शर्मा, सबइंसपेक्टर रजनीश, हैडकांस्टेबल राजकुमार और कांस्टेबल कुलवीर को शामिल किया गया.
एएसआई सुभाषचंद द्वारा जिस नंबर से आशीष को फोन किया गया था, पुलिस के कहने पर आशीष ने उसी नंबर पर फोन किया, ‘‘हैलो सर, मैं आशीष बोल रहा हूं.’’
तभी दूसरी ओर से आवाज आई, ‘‘हां भई, बोल. पैसों का इंतजाम हो गया क्या?’’
‘‘जी, 9 लाख तो नहीं हो पाए, पर मैं बड़ी मुश्किल से 4 लाख का इंतजाम कर पाया हूं.’’ आशीष ने पुलिस के निर्देशानुसार कहा.
‘‘ठीक है, तू पैसे ले कर वहीं काली माता मंदिर पर पहुंच, हम वहीं मिलेंगे.’’ दूसरी तरफ से आवाज आई.
बात हो जाने के बाद पुलिस टीम सादा कपड़ों में काली मंदिर पर पहुंच गई. इस के कुछ देर बाद ही आशीष भी अपनी कार से वहां पहुंच गए. अपने हाथ में बैग थामे जैसे ही वह कार से उतरे, एएसआई सुभाषचंद और अमित उन के पास पहुंच गए. उस समय सुभाषचंद पुलिस वर्दी में नहीं था. आशीष ने जैसे ही सुभाष के हाथ में बैग दिया, थाना रोहिणी (दक्षिणी) की पुलिस टीम ने दोनों को हिरासत में ले लिया.
पुलिस दोनों को थाने ले आई. अन्य अभियुक्त फरार न हो जाएं, इसलिए एसीपी उमेश सिंह ने इस पुलिस टीम में मंगोलपुरी थाने के सबइंसपेक्टर रोबिन त्यागी, हैडकांस्टेबल दिनेश, सुभाष और कांस्टेबल वीरेंद्र को शामिल कर उसी दिन नांगलोई, कंझावला में दबिशें दे कर कंझावला से टिंकू उर्फ साहिल, नांगलोई से ललित सिंह और आजम खान को गिरफ्तार कर लिया. रैकेट में शामिल युवतियों शिखा और प्रीति के घरों पर भी दबिश डाली गई, लेकिन वे फरार हो चुकी थीं. पुलिस ने पांचों अभियुक्तों से पूछताछ की तो पता चला कि इन का सरगना सुभाषचंद ही था. वह फरजी पुलिस वाला नहीं, बल्कि दिल्ली पुलिस के कम्युनिकेशन विभाग का एएसआई था. उस की पोस्टिंग बाहरी जिला के थाना मंगोलपुरी में थी.
मूलरूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला सुभाषचंद करीब 26 साल पहले दिल्ली पुलिस में भरती हुआ था. बाद में उस ने सुल्तानपुरी में अपना मकान बना लिया था और परिवार के साथ दिल्ली में ही रहने लगा था. उस की मुलाकात जेजे कालोनी सावदा, नांगलोई के रहने वाले टिंकू से हुई. टिंकू साप्ताहिक बाजारों में दुकान लगाता था. टिंकू की दोस्ती कृष्णा पार्क देवली, खानपुर के रहने वाले अमित से थी. टिंकू के 2 दोस्त और थे आजम खान और अमित. आजम एक निजी अस्पताल में डायलिसिस मशीन का टेक्नीशियन था और अमित बाल बियरिंग मैकेनिक था.
ये सभी जल्द से जल्द पैसे कमाने की सोचते रहते थे. 6 महीने पहले ही अमित की प्रीति उर्फ मनीषा से शादी हुई. इसलिए उस का भी खर्च बढ़ गया था. वह आए दिन अखबारों में हनीटै्रप द्वारा लोगों को ठगने की खबरें पढ़ता रहता था. मोटी रकम कमाने के लिए उसे यह काम सही लगा. क्योंकि इस तरह एक ही झटके में मोटी रकम ऐंठी जा सकती थी. यह बात उस ने अपने दोस्तों को बताई. फिर उन लोगों ने इस बारे में मंगोलपुरी थाने में तैनात एएसआई सुभाषचंद से बात की. पैसों के लालच में वह भी उन का साथ देने को तैयार हो गया. असली पुलिस वाले के शामिल होने पर सभी की हिम्मत बढ़ गई.
योजना तो बन गई, लेकिन समस्या यह थी कि किसे फांसा जाए. इस के लिए इन लोगों ने कुछ कालगर्ल्स से संपर्क कर के किसी तरह उन लोगों के फोन नंबर हासिल कर लिए, जो उन के पास मौजमस्ती के लिए आते थे. ग्राहकों को फंसाने की जिम्मेदारी अमित की पत्नी प्रीति उर्फ मनीषा ने संभाली. शिकार फंसाने के लिए वह पहले लोगों से वाट्सऐप पर दोस्ती करती थी. दोस्ती के जरिए वह फंसने वाले से अनौपचारिक बातें भी करने लगती थी. फिर उस के पास कुछ लड़कियों के फोटो भेज कर उन्हें पसंद करने के लिए कहती थी. फंसा हुआ ग्राहक जब किसी लड़की के साथ जाने को तैयार हो जाता था तो उसी दौरान वे लोग उस के आपत्तिजनक फोटो खींच लेते थे. उसी को मुद्दा बना कर ये लोग उस से मोटी रकम ऐंठते थे.
इसी तरह उन्होंने वेस्ट पटेलनगर के शादी खामपुर गांव के रहने वाले आशीष को फांसा था. उस से उन्होंने 15 लाख रुपए मांगे. मामला 10 लाख रुपए में तय हो गया. इस से पहले कि उन की मंशा पूरी हो पाती, 5 अभियुक्त पुलिस के शिकंजे में फंस गए. गिरफ्तार हुए अभियुक्तों की निशानदेही पर पुलिस ने 30 हजार रुपए नकद, 4 मोबाइल फोन, एक डिजिटल कैमरा बरामद किया. पुलिस ने 16 मार्च, 2016 को अभियुक्त सुभाषचंद, ललित सिंह, टिंकू, अमित और आजम को गिरफ्तार कर महानगर दंडाधिकारी रविंद्र सिंह के समक्ष पेश किया. पुलिस ने अमित, ललित और सुभाषचंद को 2 दिनों के रिमांड पर लिया. जबकि आजम व टिंकू को जेल भेज दिया गया.
रिमांड अवधि में पुलिस ने तीनों अभियुक्तों से विस्तार से पूछताछ कर के उन्हें 18 मार्च, 2016 को पुन: कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. कथा लिखने तक प्रीति और शिखा पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सकी थीं. Crime Story Hindi
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. आशीष और वैभव परिवर्तित नाम हैं.






