NRI Family Conflict. धर्मसिंह धालीवाल की 3 बेटियां कनाडा में रहती थीं. उन्होंने रिटायरमेंट पर मिला सारा पैसा लगा कर एकलौते बेटे जसकरण को भी कनाडा में ही स्थापित कर दिया. खुद भी वह बेटे के साथ रहने लगे. लेकिन जसकरण से प्रेम विवाह कर के घर में आई पवनदीप ने कुछ ऐसी चालें चलीं कि…

पंजाब की तहसील खरड़ का एक गांव है सवाड़ा. इस गांव के रहने वाले धर्मसिंह धालीवाल हरियाणा के इंडस्ट्रीज डिपार्टमैंट में असिस्टैंट डायरैक्टर थे. उन्होंने 1994 में अपनी इस सरकारी नौकरी से ऐच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी. रिटायरमैंट पर उन्हें काफी पैसा मिला था. अपने इस पैसे को ले कर वह कनाडा चले गए थे.

धर्मसिंह के परिवार में उन की पत्नी गुरबख्श कौर के अलावा 3 बेटियां और एक बेटा था. उच्च शिक्षा दिलवाने के बाद धर्मसिंह ने तीनों बेटियां कनाडा में ब्याह दी थीं. वे तीनों अपनेअपने परिवारों में खुश थीं. उन का एकलौता भाई जसकरण सिंह उन तीनों से छोटा था.

तीनों बहनें उसे बहुत प्यार करती थीं. 10वीं पास करने के बाद वह भी कनाडा चला गया था. वहां जा कर उस ने खुद को स्वतंत्र रूप से स्थापित करने का प्रयास किया. धर्मसिंह ने भी बेटे को स्थापित करने में हर तरह की मदद की.

सन 2001 में टोरंटो के एक स्टोर में खरीदारी करते वक्त जसकरण की मुलाकात पवनदीप कौर नाम की एक युवती से हुई. पवनदीप भी मूलरूप से पंजाब की रहने वाली थी. जब वह 6 साल की थी तभी अपने मातापिता के साथ कनाडा आ गई थी. उस की 6 बहनें और एक भाई था. उस की सभी बहनें और भाई कनाडा में अच्छी तरह पैर जमा चुके थे. पवनदीप को वहां सब पैम के नाम से जानते थे.

जसकरण सिंह से हुई नाटकीय मुलाकात के बाद पवनदीप उर्फ पैम को उस से प्रेम हो गया. घरवालों की सहमति से जल्दी ही दोनों ने शादी कर ली. शादी के एक साल बाद ही इन के यहां बेटा पैदा हुआ. लड़के के 4 साल बाद पवनदीप ने एक लड़की को जन्म दिया.

जसकरण और पवनदीप की शादी के कुछ समय बाद ही धर्मसिंह ने उन्हें टोरंटो में एक आलीशान घर खरीद कर दे दिया था. यह मकान जसकरण और पवनदीप के नाम पर संयुक्त रूप से रजिस्टर करवाया गया था.

पवनदीप और जसकरण ने अपनी मोहब्बत के चलते विवाह तो कर लिया था, लेकिन दोनों के आचरण जरा भी मेल नहीं खाते थे. साधारण शिक्षा प्राप्त जसकरण सीधे स्वभाव का शख्स था, जबकि पवनदीप उस के मुकाबले ज्यादा पढ़ीलिखी, आधुनिक विचारों वाली तेजतर्रार औरत थी. वह शादी से पहले से ही क्लबों वगैरह में जाती थी. 2 बच्चों की मां बन जाने के बाद भी उस के इस रूटीन में कोई खास फर्क नहीं आया था.

शुरू में तो जसकरण यह सब बरदाश्त करता रहा, लेकिन बाद में बच्चों के भविष्य की सोच कर यह बात उस की बरदाश्त से बाहर हो गई. फलस्वरूप उस ने पवनदीप की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाना शुरू कर दिया. इसे ले कर पतिपत्नी का आपस में झगड़ा होने लगा.

झगड़ा इतना बढ़ा कि एक दिन जसकरण ने पवनदीप की पिटाई कर दी. इस से नाराज हो कर पवनदीप ने पति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करवा दिया और पुलिस से सुरक्षा की मांग की. उस ने पुलिस को इस आशय की लिखित शिकायत भी दी, जिस में उस ने लिखा कि उसे अपने पति जसकरण से जान का खतरा है.

टोरंटो पुलिस ने इस मामले की छानबीन के बाद जसकरण को निर्देश दिया कि वह उस घर में न घुसे जहां पवनदीप रहती है. साथ ही उसे चेतावनी भी दी कि अगर वह घर के बाहर 500 मीटर के दायरे में टहलते भी पाया गया तो उसे गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया जाएगा. जसकरण के लिए यह बहुत बड़ी सजा थी. उसे बीवी से तो दूर कर ही दिया गया था, वह अपने बच्चों से भी दूर हो गया था.

इस से उसे अपनी जिंदगी बेमानी लगने लगी, वह बुरी तरह परेशान रहने लगा था. आखिर थकहार कर वह वापस पंजाब स्थित अपने गांव लौट आया. उस समय तक उस का बेटा 14 साल का हो चुका था और बेटी 10 बरस की. उस के पिता धर्मसिंह भी कनाडा का मोह छोड़ लौट कर अपने गांव आ गए थे.

जसकरण को गांव पहुंचे अभी कुछ ही अरसा गुजरा था कि एक दिन उसे पवनदीप की तरफ से भिजवाया हुआ वकील का नोटिस मिला. पवनदीप उस से तलाक चाहती थी. इस के लिए तलाक से संबंधित वे पेपर भी भेजे गए थे, जिन पर उसे दस्तखत करने थे.

रजिस्टर्ड डाक से आए कागजात तो जसकरण ने ले कर रख लिए, लेकिन उन पर दस्तखत कर के उन्हें वापस नहीं भेजा. इस के बजाय उस ने कनाडा फोन कर के पवनदीप से कहा, यह बात तुम हमेशा के लिए दिमाग से निकाल दो पैम कि मैं तुम्हें तलाक दूंगा. ऐसा कभी नहीं हो सकेगा, भूल से भी नहीं.

तो फिर क्या करोगे, दीवारों से सिर फोड़ोगे? देखो मिस्टर, अब मेरे और तुम्हारे बीच हर रिश्ता खत्म हो चुका है. मुझे दोबारा पाने की सोचना भी मत. अगर तुम्हारे मन में ऐसी कोई उम्मीद है तो उस से कोई फायदा नहीं होने वाला. अब मैं तुम से तलाक ले कर किसी अच्छे इंसान से शादी करूंगी.

‘जिस से चाहो शादी करो, मुझे तुम्हारी कोई परवाह नहीं है. बस, मेरे बच्चे मुझे वापस कर दो. वापस कर दूं? क्या बोल रहे हो तुम? क्या मैं ने इन्हें तुम से छीन रखा है, जो वापस मांग रहे हो? मेरी बात ध्यान से सुनो, ये मेरे बच्चे हैं, मैं ने इन्हें जन्म दिया है. यह क्यों भूल रही हो कि मैं भी इन का बाप हूं. ओ हैलो, तुम इन के कुछ नहीं लगते. तुम्हारे हवाले कर के मुझे इन की जिंदगी खराब करनी है क्या? तुम जैसे नालायक आदमी से तो मेरे बच्चे दूर ही भले.

ऐसा है तो लटकी रहो बीच में. मैं तुम्हारे भेजे तलाक के कागजों पर कभी दस्तखत नहीं करूंगा. नहीं करोगे तो पछताओगे. मेरी बात को हल्के में मत लेना. तुम्हारी भलाई इसी में है कि चुपचाप तलाक के कागजों पर दस्तखत कर के मुझे भेज दो और बच्चों को भूल जाओ.

जिस वक्त पवनदीप और जसकरण के बीच फोन पर ये तल्ख बातें हो रही थीं, धर्मसिंह व उन की पत्नी गुरुबख्श कौर भी वहीं बैठे थे. उन्हें पहले ही इस फसाद की पूरी जानकारी थी. अब फोन पर होने वाली दोनों की बातचीत से उन्हें और भी कई बातें पता चल गई थीं.

इस से उन्हें थोड़ी चिंता तो हुई, लेकिन उन्होंने बेटे को समझाते हुए कहा, देखो जसकरण, जो भी होता है बुरे वक्त की वजह से होता है. जब अच्छा वक्त आएगा तो सब ठीक हो जाएगा. वक्त बदलते देर नहीं लगती, तुम कोई टैंशन न लो, बस शांत रह कर अपने काम की तरफ ध्यान दो.

गांव वापस लौटने के बाद जसकरण ने फिर कभी भी विदेश न जाने का फैसला कर लिया था. उस के मातापिता भी यही चाहते थे कि वह उन की आंखों के सामने ही रहे. आखिर वह उन का एकलौता बेटा था. जीवन को गति देने के लिए कुछ समय पहले जसकरण ने संपत्ति की खरीदफरोख्त का काम शुरू कर दिया था. उस ने अपने औफिस का नाम रखा था ‘एकम प्रौपर्टीज’. उस का औफिस गांव की सीमा पर था.

पवनदीप और जसकरण के बीच हुई इस बातचीत के कुछ दिन बाद पवनदीप अकेली ही गांव चली आई. इस से पहले भी वह गांव आती रही थी, लेकिन केवल बहू की तरह. इस बार उस का व्यवहार एकदम बदला हुआ था.

धर्मसिंह और उन की पत्नी गुरुबख्श कौर से वह ऐसे पेश आई, जैसे उस के और जसकरण के बीच झगड़े जैसी कोई बात न हो. उल्टे जसकरण की शिकायत करते हुए उस ने उन्हें समझाना शुरू किया कि जसकरण अपनी अकड़ में उसे नीचा दिखाता है और उस पर अत्याचार करता है.

पलभर रुक कर वह आगे बोली, गनीमत यही रही कि मकान की रजिस्ट्री में जसकरण के साथ मेरा नाम भी दर्ज करवा दिया गया था, वरना वह तो मुझे और मेरे बच्चों को वहां से कभी का भगा चुका होता. दरअसल, उस का मुझ से मन भर गया है. वह मेरे साथ मारपीट भी करता रहा है. इसीलिए मुझे मजबूरन उस के खिलाफ पुलिस में शिकायत करनी पड़ी.

धर्मसिंह और उन की पत्नी की समझ में नहीं आ रहा था कि गलत उन का बेटा था या बहू. दिल से वे यही चाहते थे कि चाहे जैसे भी हो यह झगड़ा खत्म हो जाए और उन का बेटा और बहू फिर से एक साथ रहने लगें. क्योंकि इस झगड़े का असर बच्चों के भविष्य पर भी पड़ रहा था. जसकरण व पवनदीप अपनी गलती न मान कर एकदूसरे पर संगीन आरोप तो लगा रहे थे, लेकिन धर्मसिंह के सामने एकसाथ बैठ भी नहीं रहे थे.

पवनदीप के बच्चों को साथ न लाने की वजह से यह कह पाना भी मुश्किल था कि दोनों में किस का कुसूर ज्यादा था. बच्चे अब इतने छोटे न रहे थे कि इस सब की बाबत उन्हें पता न हो.

खैर, पवनदीप भले ही पति से दूर भागती रही थी, लेकिन इस बार उस ने अपने सासससुर की खूब सेवा की. फलस्वरूप वह उन का दिल जीतने में कामयाब रही. वे लोग उस के इस व्यवहार से प्रभावित हो कर बातचीत में थोड़ाबहुत उस का पक्ष लेने लगे.

एक रोज पवनदीप ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए धर्मसिंह के सामने हाथ जोड़ कर कहा, पापाजी, मेरे और जसकरण के बीच जो झगड़ा चल रहा है, वो आप चाहें तो खत्म करा सकते हैं. कैसे पुत्तर? धर्मसिंह ने पूछा. आप कनाडा वाला मकान पूरा का पूरा मेरे नाम करवा दो. मैं कनाडा में जसकरण के खिलाफ किए गए केस वापस ले लूंगी. ऐसा करने से जसकरण पर लगा बैन भी हट जाएगा और वह कनाडा आ कर इत्मीनान से मेरे साथ रह भी सकेगा. मैं तो चाहती हूं कि आप भी वहीं चलें, सब पहले की तरह मिलजुल कर रहेंगे. बच्चों को भी आप लोगों का सहारा मिल जाएगा.

वो सब तो ठीक है पैम बेटे, मगर वो मकान तुम दोनों के नाम है. जसकरण और तुम उस में बराबर के हिस्सेदार हो, मैं इस में कुछ कर ही नहीं सकता. ऐसा है पापाजी, तो आप जसकरण को समझाएं. वह मेरे कैरेक्टर पर जो दोष लगाने की कोशिश कर रहा है, सब बकवास है. सारे फसाद की जड़ वह मकान ही है. जसकरण के दिमाग में आप यह बात डालें कि मैं कोई कुड़ीचिड़ी नहीं हूं जो उसे छोड़ कर किसी और के साथ भाग जाऊंगी. बड़े हो चुके 2 बच्चों की मां हूं मैं.

मगर तलाक के कागज तो तुम्हीं ने भिजवाए हैं. साथ ही उसे यह धमकी भी तुम्हीं ने ही दी है कि उस से तलाक ले कर तुम किसी और से शादी करोगी.

पापाजी, जब दिमाग में गुस्सा भरा हो न, तब इंसान कुछ भी उलटासीधा बोल जाता है. मैं भी गुस्से में वकील के पास जा पहुंची थी, जिस ने अपनी फीस ले कर तलाक के कागजात तैयार कर के मुझ से उन पर जसकरण से दस्तखत करवाने को कह दिया.

वकील ने बोला और तुम ने कर दिखाया. वाकई बहुत समझदार हो तुम. यह मेरी बहुत बड़ी गलती थी पापाजी, जो मैं वकील की बातों में आ कर बिना सोचेसमझे ऐसा कदम उठा बैठी. इस के लिए मैं बहुत शर्मिंदा हूं और आप सब से बारबार माफी मांगती हूं. मेरी और जसकरण की लव मैरिज हुई थी. वह तो आज भी हर पल मेरी मन और आत्मा में बसा हुआ है. आप वो तलाक के कागज लाइए, मैं अभी आप के सामने फाड़ कर फेंक देती हूं.

रात में जसकरण के काम से वापस आने पर धर्मसिंह ने उस से इस बारे में बात की. जसकरण ने पिता की पूरी बात तवज्जो दे कर सुनी. फिर प्यार से उन्हें समझाते हुए बोला, पापा, तलाक वगैरह की बात एक अलग मुद्दा है. इस औरत के कितने लोगों से संबंध हैं, यह मुझ से पूछो. बिना तलाक के भी मैं इस के लिए पराया हूं. लेकिन असल मुद्दा मकान का है. यह मेरे वाला हिस्सा हथियाना चाहती है. मैं ने एक बार अपना हिस्सा इस के नाम करवा दिया तो यह हमें पूछेगी भी नहीं. मकान की मिल्कियत जैसी है, वैसी ही रहेगी.

साथ के कमरे में बैठी पवनदीप यह सब सुन रही थी. जसकरण का फैसला सुनने के बाद उस ने वहां आ कर आंखों में पानी भरते हुए कहा, मैं तो समझौते की आस से यहां आई थी. वहां मेरे बच्चे मेरे लिए परेशान होंगे, उन की पढ़ाई का नुकसान अलग से हो रहा है. जब मेरी यहां कोई कदर ही नहीं तो मैं यहां खड़ी क्यों हूं. मैं जल्दी ही वापस चली जाऊंगी और फिर मैं और मेरे बच्चे कभी यहां नहीं आएंगे. बहरहाल, बात यहीं पर खत्म हो गई.

इस के 2 दिन बाद यानी 16 मार्च, 2016 को जसकरण की तबीयत थोड़ी नासाज थी, जिस की वजह से वह खाना खा कर दोपहर बाद 2 बजे घर से औफिस जाने के लिए अपनी स्विफ्ट डिजायर कार नं. पीबी 65 वाई 1701 पर सवार हो कर निकला.

शाम के 4 बजे पुलिस को जसकरण का कत्ल हो जाने की सूचना मिली. उस की लाश गांव शेह के सरकारी मिडल स्कूल के पिछली तरफ एक गड्ढे में पड़ी थी, जिस पर तेजधार हथियार के दरजन भर घाव थे. निस्संदेह उस की हत्या बड़ी बेरहमी से की गई थी.

सूचना पा कर सब से पहले मजात चौकी के इंचार्ज इंसपेक्टर निक्का राम पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. कुछ ही देर में सदर थाना खरड़ के एसएचओ इंसपेक्टर मंजीत सिंह और सीआईए इंसपेक्टर गुरचरण सिंह के अलावा मोहाली के एसएसपी गुरप्रीत सिंह भुल्लर भी वहां आ गए.

किसी से जानकारी हासिल होने पर धर्मसिंह धालीवाल भी रोतेपीटते वहां पहुंच गए थे. उन की तहरीर पर खरड़ के सदर थाने में भादंवि की धाराओं 302/379 और 34 के तहत अज्ञात अपराधियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने अपनी काररवाई शुरू कर दी.

एसएसपी भुल्लर ने इंसपेक्टर गुरचरण सिंह, इंसपेक्टर मंजीत सिंह, सबइंसपेक्टर निक्काराम सहित कई पुलिस अफसरों को शामिल कर के एक विशेष जांच टीम का गठन कर दिया ताकि जसकरण की हत्या का मामला जल्दी सुलझ जाए.

जसकरण के कत्ल से पवनदीप बहुत गमगीन थी. लेकिन जसकरण के संस्कार की रस्में खत्म होते ही वह बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की बात कह कर कनाडा चली गई. इस से वह संदेह के दायरे में आ गई. पुलिस पहले ही उस के सवाड़ा गांव में चलने वाले मोबाइल फोन का डंप डाटा निकलवा चुकी थी. इस से यह बात सामने आई कि पवनदीप के फोन से एक मोबाइल नंबर पर काफी ज्यादा काल की गई थीं. वहीं उस नंबर से पवनदीप के फोन पर भी काफी काल हुई थीं. इन नंबर पर बातें भी खूब लंबीलंबी हुईं थीं.

पुलिस ने उस नंबर के धारक का पता लगवाया. वह था 25 वर्षीय गुरप्रीत सिंह उर्फ सोनी जो गांव सैदपुर, थाना सोहाना जिला मोहाली का रहने वाला था. गुरप्रीत पंजाब रोडवेज में कंडक्टर की नौकरी करता था. उस का एक ही भाई था जो पटियाला की एक फर्म में काम करता था.

अपने अन्य प्रयासों के अलावा पुलिस ने इस केस को हल करने के लिए कुछ मुखबिर भी लगा रखे थे. एक मुखबिर ने पुलिस को बताया कि पवनदीप के गुरप्रीत सिंह के साथ अवैध संबंध थे. संदेह के आधार पर गुरप्रीत को उस के घर से सीआईए केंद्र ला कर पूछताछ शुरू की गई.

उस ने अपना अपराध स्वीकारते हुए उन 4 लोगों के नाम भी बता दिए, जिन का हाथ जसकरण सिंह को मारने अथवा मरवाने में था. ये थे लखवीर सिंह उर्फ राणा उर्फ गोलू उर्फ लक्खी, निवासी गांव सनावा, थाना सदर खरड़, भवनप्रीत सिंह उर्फ भंगू उर्फ प्रीत निवासी गांव हुसैनपुर, जिला रोपड़, देविंदर सिंह उर्फ प्रिंस निवासी गांव भागोवाल थाना सिंह भगवंतपुर, जिला रोपड़ और पवनदीप कौर उर्फ पैम निवासी 12 बौक्सहिल रोड, मरक्कमसिटी, टोरंटो, कनाडा. पूरी जानकारी मिलने पर पुलिस ने उसी रोज देवेंद्र को गांव भागोवाल से, भवनप्रीत भंगू और लखवीर सिंह को गांव सैंतपुर से गिरफ्तार कर लिया.

ये गिरफ्तारियां 18 मई, 2016 को संभव हुईं. पवनदीप उर्फ पैम पहले ही कनाडा जा चुकी थी. 19 मई को गुरप्रीत, देविंदर, भवनप्रीत व लखवीर को पुलिस ने खरड़ की एसडीजेएम एकता उप्पल की अदालत पर पेश कर के पूछताछ और असलहा बरामदगी के लिए 3 दिनों के कस्टडी रिमांड पर ले लिया गया.

रिमांड की इस अवधि में इंसपेक्टर गुरचरण सिंह व इंसपेक्टर मंजीत सिंह के अलावा एसएसपी गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने भी चारों अभियुक्तों से व्यापक पूछताछ की. इस पूछताछ से जसकरण सिंह को कत्ल कर दिए जाने की सनसनीखेज दास्तान कुछ इस तरह से सामने आई—

जसकरण सिंह के बचपन का दोस्त था गुरप्रीत सिंह. शादी के बाद जितनी बार भी जसकरण अपनी पत्नी पवनदीप के साथ गांव आया, गुरप्रीत ने उन की खूब आवभगत की. भाभीभाभी कहते हुए वह पवनदीप के तो आगेपीछे लगा रहता था. गुरप्रीत द्वारा पुलिस को बताए अनुसार, पवनदीप आधुनिक विचारों वाली ऐसी औरत थी, जो एक मर्द से बंधी रह कर दूसरे मर्दों से भी ताल्लुकात बनाए रखने को गलत नहीं मानती थी. इस कड़ी में गुरप्रीत से उस का दैहिक रिश्ता बन गया था.

तब तक गुरप्रीत की शादी नहीं हुई थी. 2013 में उस की शादी तय हुई तो इस शादी में शामिल होने पवनदीप भी आई.

गुरप्रीत का एक दोस्त भवनप्रीत भंगू भी इस शादी में आया हुआ था. उस के परिवार का खेतीबाड़ी का अच्छाखासा काम था. परिवार का अकेला लड़का था. एक उस की बड़ी बहन थी, जिस की शादी हो चुकी थी. गुरप्रीत ने उस का परिचय पवनदीप से करवाया तो उस ने इस 23 वर्षीय नौजवान से भी जिस्मानी ताल्लुकात बना लिए.

कुछ अरसा पहले पवनदीप ने कनाडा से गुरप्रीत को फोन कर के कहा कि वह अपने पति जसकरण सिंह से बहुत परेशान है और किसी भी कीमत पर उसे मरवाना चाहती है. इस काम के लिए उस ने करोड़डेढ़ करोड़ रुपया खर्च करने की बात कही.

गुरप्रीत को लगा कि यह काम उस के बस का नहीं है. उस ने इस बारे में भवनप्रीत से बात की. उसे भी यह काम मुश्किल लगा तो उस ने इस बारे में अपने दोस्त देविंदर सिंह उर्फ प्रिंस को बताया. प्रिंस मोहाली के जिला ट्रांसपोर्ट औफिस में काम करता था. वह थोड़ा दिलेर किस्म का था. लेकिन आदमी को कत्ल करने, वह भी एनआरआई को उस की हिम्मत न हुई. वह गुरप्रीत और भवनप्रीत एक ही कालेज में पढ़े थे. तीनों ने एक साथ बीसीए (बैचलर औफ कंप्यूटर एप्लीकेशंस) किया था.

सब का आपस में प्यार भी खूब था. तीनों एकदूसरे पर जान न्यौछावर करने को तैयार रहते थे. लिहाजा इन्होंने तय कर लिया कि भले ही खुद न कर सकें, जसकरण सिंह को मौत की नींद सुलाने का इंतजाम जरूर करेंगे. क्योंकि मोटी रकम का लालच था.

कोशिश करने पर इन लोगों को एक ऐसे शख्स के बारे में मालूम पड़ा जो यह काम कर सकता था. यह शख्स था लखवीर सिंह. 32 वर्षीय लखवीर को कुराली में हुए एक डबल मर्डर केस में उम्रकैद की सजा हुई थी. 2012 में वह एक दफा पैरोल पर जेल से बाहर क्या आया, वापस लौटा ही नहीं.

लखवीर छिटपुट अपराधों के सहारे अपनी गुजरबसर करता रहा. देविंद्र से उस का थोड़ाबहुत परिचय था. देविंद्र ने उस से बात करने के बाद उसे भवनप्रीत से मिलवाया. भवनप्रीत ने फोन पर उस की बात पवनदीप से करवाई. पवनदीप ने इस काम के लिए डेढ़ करोड़ रुपए देने की बात कहते हुए करीब 3 लाख रुपए एडवांस भेज दिए.

यह सारा सिलसिला 2015 के अंतिम दिनों में चला था. काम न होते देख पवनदीप ने पहले तलाक के कागजात भेज कर जसकरण को हड़काने का प्रयास किया, फिर वह आगे की तिकड़म भिड़ाने पंजाब आ गई.

फिर भी बात न बनी तो उस ने अपने साथियों को जसकरण का काम तमाम करने का फरमान सुना दिया. इन सब ने योजना बना कर उस की रैकी की. पवनदीप भी इन्हें फोन कर के जसकरण के बारे में बताती रही.

योजना के अनुसार 16 मार्च, 2016 को दोपहर बाद लखवीर अकेला पैदल चल कर जसकरण के औफिस में गया. जसकरण को औफिस में आए अभी कुछ ही मिनट हुए थे. लखवीर ने वहां जा कर उस से कुछ जमीन खरीदने की बात कही. जसकरण उसे जमीन दिखाने के लिए उस के साथ चला गया.

तेजधार वाला चाकू लखवीर के पास पहले ही था. जमीन दिखाते वक्त एक जगह मौका देख कर उस ने जसकरण को काबू में कर के उस पर चाकू के वारों की बौछार सी कर दी. जसकरण के जिस्म का शायद ही कोई ऐसा हिस्सा बचा होगा जहां जसवीर ने चाकू का वार न किया हो.

जसकण को मौत के घाट उतार कर लखवीर ने उस की लाश एक गड्ढे में फेंक दी और उस की गाड़ी ले कर दिल्ली चला गया. उस की कार को कनाट प्लेस की एक पार्किंग में पार्क करने के बाद वह वापस अपने घर लौट आया.

जिस डबल मर्डर केस में उसे सजा हुई थी, उस में उस के खिलाफ गवाही देने की वजह से वह कुराली के एक आदमी से बहुत खफा था और उस से बदला लेना चाहता था. 27 अप्रैल, 2015 को उस ने कुराली के एक बाजार में दिनदहाड़े परमिंदर सिंह नाम के उस आदमी की हत्या कर दी थी.

जसकरण वाले केस में अब तक धाराओं 303/473 व 120बी का भी समावेश हो गया था. इसी के तहत इन चारों अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया था. लखवीर जाली रजिस्ट्रेशन नंबर की प्लेटें तैयार करवा कर जसकरण की गाड़ी दिल्ली से ले आया था. उसे उस ने जीरकपुर की प्रीत कालोनी में छिपा कर पार्क कर रखा था, जिसे पुलिस ने उस की निशानदेही पर बरामद कर लिया. कार की असल आरसी भी उस के डैशबोर्ड में पड़ी मिल गई.

उन दिनों लखवीर जीरकपुर की प्रीत कालोनी में किराए का एक मकान ले कर रह रहा था. यहीं से वह चाकू भी बरामद हो गया, जिस से उस ने जसकरण की हत्या की थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जसकरण के जिस्म पर तेजधार हथियार के 10 घावों का उल्लेख था, जिन से हुआ तेज रक्तप्रवाह उस की मौत का कारण बना.

कस्टडी रिमांड की समाप्ति पर पुलिस ने चारों अभियुक्तों को फिर से अदालत पर पेश कर के न्यायिक हिरासत में जेल भिजवा दिया. अब मोहाली पुलिस कनाडा से पवनदीप उर्फ पैम को इंडिया लाने को प्रयासरत थी. इस संबंध में 4 जून, 2016 को खरड़ की एक अदालत ने उस के खिलाफ वारंट भी जारी कर दिए थे.

75 वर्षीय धर्मसिंह धालीवाल को इस उम्र में एकलौते बेटे का विछोह सहन करना पड़ रहा है. उन का बेटा तो अब कभी वापस नहीं आ सकता, लेकिन उस की निशानी यानी अपने पोतापोती को वह कनाडा से अपने पास लाने की कोशिश में हैं. NRI Family Conflict

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

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