Family Love Crime. बरेली का रहने वाला भारत यादव सेना में नौकरी करता था. वह 2 बच्चों का बाप जरूर बन गया था, लेकिन पत्नी गीता यादव को बासी दाल समझता था. इसी बीच बदायूं की रहने वाली 24 वर्षीय सुरभि यादव से उसे फेसबुक द्वारा प्यार हो गया. दोनों होटल में अपनी हसरतें पूरी करते रहे. यह जानकारी गीता को हुई तो घर में महाभारत शुरू हो गई. फिर एक दिन पति के अफेयर में गीता ऐसी पिसी कि

”गीता…गीता…गीता. अरे इस नाम को सुन कर अब नफरत होने लगी है मुझे अपने आप से.’’ सुरभि ने भारत को अपने से हटाते हुए लगभग धकेलते हुए गुस्से में कहा.

”अरे मेरी जान, नाराज क्यों हो रही हो?’’ भारत ने सुरभि का गुस्सा भांपते हुए बात को संभालने की कोशिश की, ”मैं तुम से पहले ही कह चुका हूं बेबी कि तुम्हें जल्द ही गीता नाम की इस नागिन से छुटकारा दिला दूंगा.’’

”जुबान बंद रखो अपनी और लंबीलंबी हांकना बंद करो… पिछले 3 महीने से तुम्हारी ये जुमलेबाजी सुन रही हूं कि जल्द ही मुझे मेरी सौतन से छुटकारा दिला दोगे. लेकिन हर बार आते हो और अपने जिस्म की गरमी उतार कर चले जाते हो और फिर भूल जाते हो कि हम ने क्या तय किया था.’’ सुरभि उस दिन जिस तरह भड़क रही थी उस से भारत को लगा कि आज शायद वह किसी फैसले के मूड में है.

‘सुनो..सुनो जान, थोड़ा सब्र करो… मैं ने सब कुछ प्लान कर लिया है. इस बार मैं तुम्हें यही बताने आया हूं कि अब गीता का अंत नजदीक आ गया है. उस दिन 18 अप्रैल 2026 की मध्यरात्रि थी, जब भारत सिंह यादव अपनी प्रेयसी के अंकपाश में सिमटा अपनी ही पत्नी की हत्या की योजना बना रहा था.

उत्तर प्रदेश के बरेली शहर के थाना सुभाषनगर में दोपहर करीब एक बजे फोन से सूचना मिली कि सुभाष नगर में वैष्णो धाम कालोनी में रहने वाले एक फौजी की पत्नी की किसी ने हत्या कर दी है. फोन समीप के एक अस्पताल से मरने वाली महिला के भतीजे ने किया था.

सूचना मिलते ही सुभाषनगर थाने के एसएचओ सतीश कुमार नैन, एसआई राजेंद्र सिंह, कांस्टेबल लख्मीचंद, महिला कांस्टेबल राखी को साथ ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. उन से पहले ही इलाके की पीसीआर गाड़ी से गश्ती पुलिस दल वहां पहुंच गया था. जिस घर में वारदात हुई थी, वहां भीड़ का मेला जैसा लग गया था.

Family Love Crime

पूछताछ करने पर पता चला कि जिस महिला की हत्या हुई, उस का नाम गीता यादव (32) था. पुलिस को सूचना उस के भतीजे सचिन ने दी थी, जो अपनी बहन शीतल के साथ वहां मौजूद था.

इंसपेक्टर सतीश नैन ने पूछताछ की. शुरुआत उसी से की तो पता चला गीता यादव के पति का नाम भारत यादव है और वह सेना में नौकरी करता है. वर्तमान में उस की पोस्टिंग पंजाब के फिरोजपुर में है. गीता के साथ उस के 2 बेटे 14 वर्षीय दृश्य और 12 वर्षीय हर्ष के अलावा उन के भतीजे सचिन के छोटे भाई का 6 साल का बेटा यशवर्धन रहता है.

दरअसल, सचिन और शीतल बरेली में रह कर पढ़ रहे हैं, इसलिए अपनी बुआ की कालोनी में ही किराए का एक कमरा ले कर साथ रहते हैं, जबकि भाई के बेटे यशोवर्घन को बुआ ने पालने के लिए अपने पास ही रख लिया था. मंगलवार को तीनों बच्चे स्कूल गए थे. सुबह करीब 11 बजकर 16 मिनट पर गीता ने अपनी भतीजी शीतल को फोन किया था कि कुछ काम है, इसलिए कुछ देर में घर पर आ जाए.

कुछ देर बाद जब शीतल बुआ के घर पहुंची तो दरवाजा अंदर से बंद था. अंदर से उसे लौक किया गया था. काफी आवाज देने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला, अंदर से कूलर चलने की आवाज आ रही थी. इस पर शीतल को लगा कि हो सकता है बुआ सो गई हों. इसी बीच यशोवर्धन के स्कूल से फोन आ गया तो शीतल उसे लेने चली गई.

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दोपहर करीब एक बजे जब स्कूल से लौट कर आई तो लोहे के मुख्य  दरवाजे का लौक तो खुला था, लेकिन अंदर से दरवाजे की कुंडी नीचे से लगी हुई थी. संदिग्ध परिस्थिति महसूस होने पर शीतल ने अपने भाई सचिन को फोन किया. सचिन ने आने के बाद दरवाजा नीचे से खोला तो अंदर गीता जमीन पर बेजान लाश की तरह पड़ी थी.

सचिन और शीतल ने अपनी बुआ को हिलाडुला कर देखा, लेकिन शरीर में किसी तरह की कोई हरकत होती न देख वे उसे उठा कर पास के निजी अस्पताल दया हौस्पिटल ले गए, जहां डौक्टरों ने जब उपचार शुरू किया तो पता चला कि उस की मौत तो वहां लाने से पहले ही हो चुकी है. डौक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

इस के बाद सचिन ने मामले की सूचना पुलिस को दी. इंसपेक्टर सुभाष नैन ने पूरे घर का बारीकी से निरीक्षण किया. एसपी (सिटी) मनीष पारेख और एसएसपी अनुराग आर्य भी घटना की जानकारी मिलने के बाद घटनास्थल का निरीक्षण करने के लिए पहुंच गए. घर के एक कमरे में फर्श पर चूडिय़ां भी टूटी पड़ी थीं, जिस से लगा कि शायद मरने से पहले गीता यादव का कातिल के साथ संघर्ष हुआ था.

ये वही जगह थी, जहां सचिन को गीता फर्श पर बेहोशी की हालत में मिली थी. एसएसपी अनुराग आर्य को शुरुआती जांच में ही शक हो गया कि हो न हो किसी ने बड़ी सफाई से गीता का कत्ल किया है. चूंकि घर से कोई कीमती वस्तु गायब नहीं पाई गई और घर का सामान भी यथास्थिति में मिला. इस से साफ था कि कातिल का मकसद गीता की हत्या करना ही होगा.

घटनास्थल की फोरैंसिक जांच के बाद इंसपेक्टर सतीश नैन और अन्य अधिकारी दया अस्पताल पहुंचे और गीता यादव के शव का निरीक्षण किया तथा डौक्टरों से बातचीत की. शव के निरीक्षण से ही साफ हो गया कि गीता की हत्या गला दबा कर की गई है. क्योंकि गले के चारों तरफ किसी चीज से गला दबाने के लाल निशान साफतौर पर दिखाई दे रहे थे.

पुलिस ने गीता के शव को पंचनामा भर कर वहीं से उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. इस के बाद इंसपेक्टर सतीश नैन अधिकारियों से आवश्यक दिशानिर्देश ले कर वापस घटनास्थल वैष्णो धाम कालोनी पहुंच गए. तब तक उन के मातहत परिवार के दूसरे लोगों से पूछताछ कर काम की कई जानकारियां हासिल कर चुके थे.

दरअसल, एसआई राजेंद्र सिंह ने इंसपेक्टर सतीश नैन के जाने के बाद सचिन और सतीश से पूछा कि क्या उन्हें किसी पर अपनी बुआ की हत्या का शक है तो उन्होंने साफ बताया कि उन की बुआ बेहद मिलनसार और सरल स्वभाव की थीं, इसलिए उन की किसी से ऐसी जानलेवा दुश्मनी होगी, इस की कल्पना करना ही कठिन है.

लेकिन जब गीता घर में अकेली थी तो बाहर से घर के भीतर वही इंसान दाखिल हुआ होगा, जो गीता का इतना अच्छा परिचित होगा कि उस के लिए गीता ने सहज ढंग से दरवाजा खोल दिया. अचानक एसआई राजेंद्र सिंह को खयाल आया कि ये काफी संपन्न लोगों की कालोनी है. अगर कोई भी इंसान घर में आया गया होगा तो वह कालोनी के किसी सीसीटीवी कैमरे में जरूर कैद हुआ होगा.

यही सोच कर उन्होंने मोहल्ले में लगे सीसीटीवी के बारे में जानकारी एकत्र की तो कालोनी में एक के बाद एक कई सीसीटीवी लगे होने की जानकारी मिली. लेकिन पता चला कि कम से एक एक सीसीटीवी ऐसा था, जिस से गीता यादव के घर की एंट्री और एग्जिट पूरी तरह कवर होते थे. संयोग से सीसीटीवी काम कर रहा था.

लिहाजा एसआई राजेंद्र सिंह ने सीसीटीवी कैमरे की फुटेज अपने कब्जे में ले ली और उन की टीम ने उस दिन सुबह से सीसीटीवी की फुटेज देखने का काम शुरू कर दिया.

जिस सफलता को हासिल करने के लिए पुलिस टीम सीसीटीवी फुटेज देखने की मशक्कत कर रही थी, आखिरकार उस में सफलता मिल गई. सुबह करीब 10 बजे छाता ओढ़े और मुंह को गमछे से ढंके एक व्यक्ति ने गीता यादव के घर का दरवाजा खटखटाया. खुद गीता यादव ने दरवाजा खोला.

गीता यादव आगंतुक से एकदम सहज ढंग से बात कर रही थी, मानो वह उसे जानती हो. उस के बाद आगंतुक घर के भीतर चला गया और दरवाजा बंद हो गया. करीब एक घंटे बाद घर का मेन गेट खुला और उस से वही आदमी छाता ओढ़े तथा मुंह पर गमछा लपेटे बाहर निकलता दिखा.

दबे पांव घर के मुख्यद्वार से निकल कर छाता लगाए वह गमछाधारी नकाबपोश इधरउधर देखता हुआ तेजी से गली के बाहर की तरफ चला गया. सीसीटीवी की ये फुटेज साफ इशारा कर रही थी कि वह आगंतुक जो भी था, उसी ने गीता यादव की हत्या को अंजाम दिया होगा. क्योंकि संदेहास्पद तरीके से उस का घर में आना और फिर खिड़की के रास्ते से बाहर आ कर चोरीछिपे चले जाना साफ इशारा कर रहा था कि उस की नीयत साफ नहीं थी.

घर में प्रवेश से ले कर बाहर निकलते वक्त तक आगंतुक के हाथ में छाते के अलावा कोई सामान नहीं था, जिस से साफ पता चलता था कि वह घर से कोई सामान नहीं ले गया है. आते व जाते समय उस के कंधे पर एक बैग था, जैसे उस में कुछ थोड़ा सामान रखा हो.

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लेकिन सब से बड़ा सवाल राजेंद्र सिंह के मन में ये कुलबुला रहा था कि वह संदिग्ध कातिल आखिर कौन था, जिस के दरवाजा खटखटाने पर गीता यादव ने न सिर्फ दरवाजा खोल दिया, बल्कि उसे अंदर भी आने दिया. यह बात तो साफ थी कि वह इंसान गीता यादव का कोई परिचित रहा होगा.

इसीलिए एसआई राजेंद्र सिंह ने उस सीसीटीवी फुटेज की कौपी अपने कब्जे में ले ली और उसे गीता यादव के घर में ला कर गीता के भतीजे सचिन कुमार, उस की बहन शीतल व 2 बच्चों राहुल व प्रीति को दिखाया, क्योंकि ये तो परिवार के लोग ही बता सकते हैं कि वो परिचित इंसान कौन रहा होगा.

सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद तो सभी के होश उड़ गए. दोनों बच्चों ने सीसीटीवी फुटेज में चेहरा साफ दिखाई न देने के बावजूद देखते ही बता दिया कि ये उन के पापा की वीडियो है. सचिन और शीतल ने भी साफ कर दिया कि घर में आने वाला संदिग्ध आगंतुक कोई और नहीं बल्कि उन के फूफा भारत सिंह यादव हैं.

सीसीटीवी की फुटेज से हत्याकांड की तसवीर पूरी तरह साफ हो गई थी. कातिल का पता चल चुका था, बस कत्ल की वजह साफ होना बाकी थी. इंसपेक्टर सतीश नैन को जब एसआई राजेंद्र सिंह से जांच की. इस प्रगति के बारे में पता चला तो उन की बांछें खिल गईं. क्योंकि केस का खुलासा लगभग हो चुका था.

इंसपेक्टर नैन ने जांच की इस प्रगति रिपोर्ट से एसपी (सिटी) मनीष पारेख और एसएसपी अनुराग आर्य को भी अवगत करा दिया. उन्होंने कुछ खास दिशानिर्देश दिए, ताकि कातिल को जल्द पकड़ा जा सके और उस के खिलाफ ठोस साक्ष्य एकत्र किए जा सकें.

आगे की काररवाई से पहले पुलिस ने वादी सचिन कुमार निवासी प्रगति नगर की तहरीर पर सुभाष नगर कोतवाली में बीएनएस की धारा 103 (1) 61 (2) में मुकदमा पंजीकृत कर लिया. एसपी (सिटी) के आदेश पर जांच का दायित्व इंसपेक्टर सतीश कुमार नैन ने अपने ही पास रखा.  इस दौरान गीता यादव के बहुत सारे रिश्तेदार भी हत्या की सूचना मिलने के बाद उन के घर पहुंच गए. देर शाम तक पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया.

परिवार वालों से पता चला कि वर्तमान में भारत सिंह की पोस्टिंग पंजाब के फिरोजपुर में है. लिहाजा पुलिस ने परिवार के लोगों से भारत यादव के कार्यालय समेत उन के निजी फोन नंबर हासिल कर लिए.

इंसपेक्टर नैन ने जब भारत के नंबर पर फोन किया तो वह बंद पाया गया. लिहाजा उन्होंने भारत की बटालियन के कमांड औफिस में फोन कर के उस की पत्नी की हत्या की सूचना दी और उस से बात कराने के लिए कहा.

लेकिन सेना के कमांड औफिस से बताया गया कि भारत यादव तो 17 अप्रैल को ही पत्नी की बीमारी की बात बता कर एक सप्ताह की छुट्टी ले कर अपने घर गया था. यह बात जानने के बाद तो भारत पर शक न करने की कोई गुंजाइश ही नहीं बची.

अगले दिन परिवार के लोगों ने मृतका गीता यादव का अंतिम संस्कार कर दिया. इस दौरान परिवार के लोगों से कुरेद कर की गई पूछताछ में पुलिस को कुछ अहम जानकारी मिली थी, जिस के आधार पर पुलिस ने अगले दिन सब से पहले भारत यादव के मोबाइल की कौल डिटेल्स निकलवाई.

भारत यादव का मोबाइल फोन तो बंद आ रहा था. लेकिन कौल डिटेल्स को खंगालने के बाद पता चला कि  एक ऐसा नंबर था, जिस पर भारत दिन में कई बार लंबीलंबी बातें किया करता था. इतना ही नहीं, जिस दिन गीता यादव की हत्या हुई उस दिन भी करीब साढ़े 12 बजे उस ने उस नंबर पर लंबी बात की थी. उस से पहले भी वह उस नंबर पर लगातार बातचीत करता रहा था.

पुलिस ने उस नंबर की डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि यह नंबर सुरभि यादव (24 वर्ष) का था जो परवेज नगर, थाना बिसौली, जनपद बदायंू पंजीकृत था. जंाच में यह भी पता चला कि जिस समय 11 से 12 बजे के बीच गीता यादव की हत्या हुई, भारत यादव के मोबाइल की लोकेशन उस के घर के आसपास ही थी. अब पुलिस को सुरभि यादव का पता लगाना था, जिस से भारत यादव संदिग्ध रूप से बात कर रहा था. वैसे ये वही सुरभि यादव थी, जिस के बारे में परिवार के लोगों ने पुलिस को अहम जानकारी दी थी.

उच्चाधिकारियों से निर्देश ले कर पुलिस की एक टीम तत्काल बदायूं पहुंची. संयोग से सुरभि यादव अपने कमरे पर ही मिल गई. पुलिस उसे हिरासत में ले कर बरेली आ गई और महिला पुलिस उस से पूछताछ करने लगी.

पहले तो सुरभि यादव पुलिस को इधरउधर की कहानियां सुना कर बरगलाती रही और कहती रही कि उस का गीता यादव की हत्या से कोई वास्ता नहीं है. लेकिन जब पुलिस ने उस से पूछा कि गीता यादव की हत्या के बाद भारत ने उसे किसलिए फोन किया था तो वह कोई सही कारण नहीं बता सकी. आखिरकार पुलिस की थका देने वाली पूछताछ में उस ने स्वीकार कर लिया कि उसी के उकसावे पर भारत यादव ने अपनी पत्नी की हत्या को अंजाम दिया था.

पुलिस ने गहनता से पूछताछ के बाद गीता यादव की हत्या के आरोप में सहआरोपी बना कर सुरभि यादव को सक्षम अदालत में पेश कर दिया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. अगले दिन पुलिस को खबर मिली कि गीता के फौजी पति भारत सिंह यादव ने स्थानीय न्यायालय में समर्पण कर दिया है तो पुलिस ने उस के कस्टडी रिमांड के लिए अदालत से अनुरोध किया. अदालत ने उसे 2 दिन की पुलिस अभिरक्षा में सौंप दिया.

जो भारत यादव अदालत में बोल रहा था कि पुलिस उसे उस की पत्नी की हत्या के झूठे आरोप में फंसा रही है. वही भारत यादव पुलिस कस्टडी में आने के बाद थोड़ी सख्ती बरतने पर ही तोते की तरह बोलने लगा. उस ने पुलिस को बताया कि गीता यादव की हत्या उस ने क्यों, कैसे और किस के साथ मिल कर अंजाम दी थी.

पुलिस ने पूछताछ के बाद भारत यादव की निशानदेही पर उस गमछे व छतरी को बरामद कर लिया, जिस से गला दबा कर उस ने गीता यादव की हत्या को अंजाम दिया था. आवश्यक पूछताछ व साक्ष्य एकत्र करने के बाद पुलिस ने भारत यादव को अदालत में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया.

भारत यादव व सुरभि से पूछताछ में गीता हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह एक एक फौजी इंसान के चारित्रिक पतन की चौंकाने वाली कहानी है, जिस ने अपनी हवस की खातिर अपने हंसतेखेलते आशियाने में खुद ही आग लगा ली.

मूलरूप से इटावा के रहने वाले भारत सिंह यादव की शादी कम उम्र में ही हो गई थी. कम उम्र में ही इंटर की पढ़ाई के बाद उस की सेना में नौकरी लग गई. चूंकि उस के व उस की पत्नी गीता के ज्यादातर परिजन बरेली जिले में रहते थे, इसलिए कुछ सालों बाद भारत ने भी बरेली की वैष्णोधाम कालोनी में मकान बना लिया. कम उम्र में शादी होने के कारण जल्द ही दोनों एक बेटे व बेटी के मातापिता बन गए.

जिंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक 5 साल पहले उस की जिंदगी में आई सुरभि यादव ने उथलपुथल मचा दी. जो लोग घर से बाहर नौकरी या किसी दूसरे बहाने परिवार से दूर रहते हैं, वे अकसर सोशल मीडिया पर अपना मनोरंजन या दोस्त तलाशते हैं. जब से देश में डाटा सस्ता हुआ है तब से तो यह ट्रेंड कुछ ज्यादा ही प्रचलित हुआ है. भारत यादव पत्नी व बच्चों से दूर रहता था, लिहाजा वह भी दूसरे लोगों की तरह सेाशल मीडिया में व्यस्त रह कर अपना समय व्यतीत करता और फेसबुक आदि में रील या दूसरे माध्यमों से अपना मनोरंजन करता.

चूंकि फौजी लोग अपने परिवार से दूर रहते हैं और पत्नी के सान्निध्य को तरस जाते हैं, इसलिए फेसबुक पर महिला मित्रों से दोस्ती और बातचीत करना उन के बीच सब से सहज माध्यम है. भारत यादव की शादी चूंकि कम उम्र में हो गई थी और वह भी उस की अपनी नहीं बल्कि परिवार की मरजी से, इसलिए उसे कभी पता नहीं चला कि रोमांस क्या होता है.

वह भी चाहता था कि अपनी पसंद की किसी लड़की से प्रेम भरी बातें करे. उस से चोरीछिपे मिले और प्रेम की ऐसी गाथा लिखे, जो इश्क व जवानी की दहलीज पर कदम रखते समय नहीं कर पाया. उस की अमर प्रेम की कहानी बन जाए.

यह महज संयोग ही था कि 5 साल पहले उस की मुलाकात फेसबुक के जरिए यूपी के बदायूं जिले के परवेज नगर की रहने वाली सुरभि यादव से हुई थी. सहज ढंग से उस ने फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी और सुरभि ने उसे स्वीकार कर फ्रेंड्स की लिस्ट में जोड़ भी लिया.

संयोग से सुरभि ने अन्य लड़कियों की तरह फेसबुक के बायो में कोई झूठी जानकारी नहीं दी थी. शुरुआत में बातचीत सिर्फ चैट के जरिए हुई, फिर यह दोस्ती धीरेधीरे जब प्रगाढ़ होने लगी तो सजातीय होने के कारण मैसेंजर के जरिए उन की बात भी होने लगी. दोनों का एकदूसरे पर भरोसा बढ़ा तो फोन नंबरों का आदानप्रदान हो गया. अब बातचीत टेलीफोन पर भी होने लगी. कुछ ही समय में दोनों ने एकदूसरे के बारे में सब कुछ जान लिया.

न सुरभि ने अपने बारे में कुछ छिपाया न ही भारत ने. भारत ने बता दिया कि कम उम्र में ही परिवार वालों ने उस की शादी करा दी थी और वह 2 बच्चों का बाप है. लेकिन सुरभि कहीं उस से दोस्ती न तोड़ ले, इसलिए यह भी कह दिया कि उसे अपनी पत्नी से कोई लगाव नहीं है. वह तो सुरभि जैसी पत्नी चाहता था.

इधर सुरभि ने भी स्पष्ट कर दिया कि वह बदायूं के एक गांव में रहने वाले गरीब परिवार की लड़की है. 4 भाईबहनों में वह सब से बड़ी है. परिवार गांव में मेहनतमजदूरी कर के गुजरबसर करता है. वह किसी तरह इंटरमीडिएट पास करने के बाद नौकरी करने के लिए शहर आ गई और यहां किराए का कमरा ले कर रहने लगी. उस के ऊपर खुद का परिवार बसाने से ले कर अपने मातापिता व भाईबहनों को किसी मुकाम तक पहुंचाने और उन्हें पालने की जिम्मेदारी है.

भारत व सुरभि दोनों को ही एकदूसरे की यह ईमानदारी बेहद पसंद आई कि उन्होंने अपने बारे में कुछ नहीं छिपाया. कहते हैं रिश्तों में जब भरोसा बढ़ता है तो साथ में बढ़ता है सर्मपण.  कुछ ही महीनों में दोनों का एकदूसरे पर भरोसा इतना अटूट हो गया कि अब एकदूसरे से दूर रहना उन के लिए मुश्किल हो गया.

एक साल बाद भारत और सुरभि यादव पहली बार बदायंू के होटल में मिले. पहली बार दोनों एकदूसरे से मिले तो तनमन से पूरी तरह एक हो गए. दोनों के रिश्ते की अहम बात यह थी कि दोनों ही एक जाति के थे.

समय के साथ यह रिश्ता इतना गहरा हो गया कि भारत सिंह अपने परिवार से दूरी बनाने लगा. वह चोरीछिपे सुरभि से मिलने भी जाता था और छुट्टियों के दौरान उस के साथ समय बिताने लगा. उस ने सुरभि से वादा किया कि वह उस के साथ शादी कर के उसे अपनी बना लेगा. लेकिन तुम्हारी बीवी… वो मानेगी?  सुरभि ने अपनी शंका दूर करने के लिए पूछा. भारत ने जो जवाब दिया, उस ने सुरभि के दिल को बेहद सुकून दिया.

भारत ने कहा कि उस की बीवी गीता से कभी उसे प्यार नहीं था. वह तो बस पत्नी बन गई, इसलिए रिश्ता बनाना पड़ा. इसीलिए बच्चे भी हो गए. असली परिवार तो वह सुरभि के साथ बनाना चाहता है. वह अपनी प्रेमिका को हर महीने करीब 15 हजार रुपए भी देता था, ताकि अपने परिवार के प्रति उस की जिम्मेदारियों का कुछ बोझ कम हो सके. इस दौरान भारत अपने परिवार से लगातार दूर होता जा रहा था.

लेकिन हर झूठ की कलई एक न एक दिन खुलती ही है. एक बार जब भारत कुछ दिन की छुट्टियां ले कर अपने घर की बजाय सुरभि के पास समय बिताने पहुंचा तो अचानक उस के छोटे बेटे की तबीयत ज्यादा खराब हो गई.

पत्नी गीता ने पति भारत को फोन लगाया. लेकिन भारत ने अपना फोन सुरभि के पास आने के बाद बंद कर दिया था. जब भारत का फोन नहीं लगा तो गीता ने उस के कमांड औफिस में फोन कर भारत यादव से बात कराने के लिए कहा. लेकिन तब यह जान कर गीता हैरान रह गई कि भारत तो परिवार से मिलने का कारण बता कर एक हफ्ते की छुट्टी पर बरेली ही आया हुआ है.

कमाल की बात यह थी कि 3 दिन पहले अपने औफिस से परिवार से मिलने के लिए चला भारत यादव अपने ही घर नहीं पहुंचा था. करीब 5 दिन बीत जाने के बाद भारत एक दिन के लिए अपने परिवार से मिलने के लिए घर आया तो उसे पता चला कि पत्नी गीता ने उस की रेजीमेंट के कमांड में औफिस में फोन किया था.

पोल खुलने के डर से भारत ने बहाना बना दिया कि वह पंजाब में कुछ पैसा लगा कर एक दोस्त के साथ कोई काम शुरू करना चाहता है. उसी काम के लिए उस ने औफिस से झूठ बोल कर छुट्टी ली थी.

भारत ने झूठ तो बोल दिया, लेकिन गीता को उस की बातें हजम नहीं हुई. इस के बाद उस ने भारत की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी. कुछ ही महीनों में भारत की हरकतों से गीता को लगने लगा कि वह किसी पराई औरत के चंगुल में है, इसीलिए वह लगातार अपने परिवार से दूरी बना रहा है.

इसी बीच जब भारत एक बार बरेली अपने परिवार के पास आया हुआ था तो गलती से भारत के फोन पर आई सुरभि की कौल गीता ने अटैंड कर ली तो सुरभि से भारत के इश्क का भांडा फूट गया.

भारत के एक महिला से अवैध संबंध की जानकारी अब पूरे परिवार के सामने जगजाहिर हो चुकी थी. कोई भी पत्नी अपने पति को किसी दूसरी औरत के साथ नहीं देख सकती. जाहिर है गीता को जब यह पता चला कि उस का पति किसी गैर औरत के पहलू को गर्म करता है तो घर में विवाद होना ही था. आए दिन ये विवाद बढ़ते ही गए. पतिपत्नी के बीच तनाव बढ़ता गया और स्थिति इतनी बिगड़ गई कि रिश्तों की डोर पूरी तरह टूटने लगी.

अब जबकि भारत और सुरभि के रिश्ते का सच परिवार पर जाहिर हो चुका था तो सुरभि ने भी भारत पर अपनी पत्नी को छोड़ कर उस के साथ रहने का दबाव बनाना शुरू कर दिया.

एक दिन भारत ने गीता से यह बात कह भी दी कि वह उसे तलाक दे दे. लेकिन गीता पुराने विचारों की घरेलू महिला थी जो ये विचार रखती है कि और की डोली मायके से उठेगी तो अर्थी पति के घर से. पति को त्यागना या उस के जीवित रहते उस से अलग होना तो कल्पना से परे है. इस बात पर भी गीता और भारत के बीच खूब विवाद हुआ.

बात जब यहां तक पहुंच चुकी थी तो सुरभि यादव ने भारत सिंह पर अपनी पत्नी को रास्ते से हटाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया. कुछ दिन तक तो भारत सिंह टालता रहा, लेकिन अब 2 नावों पर सवारी करना उसे भी आसान नहीं था. कम उम्र में ही शादी के कारण जवान पत्नी गीता भारत सिंह को अधेड़ उम्र की गंवार औरत लगने लगी थी, जबकि सुरभि एक पढ़ीलिखी युवा और हसीन लड़की थी.

सुरभि का हुस्न दिल जीतने के मामले में गीता की उम्र पर भारी पड़ा और भारत सिंह ने मन ही मन ठान लिया कि वह गीता को अपनी खुशियों के रास्ते से हटा देगा. इसी के चलते 18 अप्रैल, 2026 को भारत परिवार से मिलने का बहाना कर के अपनी रेजीमेंट से एक हफ्ते की छुट्टी ले कर बरेली आया. लेकिन वह बरेली नहीं गया, बल्कि सीधे सुरभि के पास पहुंचा. इसी दौरान दोनों ने मिल कर हत्या की साजिश रची.

भारत ने बताया कि वह किस तरह गीता की हत्या करेगा. भारत जानता था कि उस के दोनों बच्चे व सचिन का बेटा हमेशा की तरह सुबह स्कूल चले जाते हैं.

योजना के अनुसार भारत सिंह 21 अप्रैल की सुबह करीब 4 बजे घर से एक छाता तथा मुंह ढंकने वाले अंगौछे के साथ बदायंू में सुरभि के कमरे से निकला और सुबह करीब 9 बजे बरेली पहुंच गया. वहां से वह सुभाष नगर स्थित वैष्णोधाम कालोनी अपने घर पहुंचा. कोई पहचान न ले, इसलिए उस ने सिर को छाते से ढंक लिया और चेहरे को अंगौछे से लपेट लिया.

करीब 10 बजे उस ने घर का दरवाजा खटखटाया. संयोग से उस वक्त पूर्वानुमान के मुताबिक गीता अकेली थी. सामने पति को खड़ा देख उस ने अचानक वहां होने की बात पूछी और उस के बाद दरवाजा खोल कर उस के अंदर आने के बाद दरवाजा बंद कर लिया. तब तक उसे पति के इरादों का पता नहीं था.

लेकिन अंदर आते ही जब भारत ने उस से कहना शुरू किया कि वह उस का पीछा क्यों नहीं छोड़ रही है तो गीता को अहसास हुआ कि शायद भारत उस दिन गलत इरादे से घर में आया है. गीता को भले ही अहसास हो गया था, लेकिन वह थी तो कमजोर औरत ही. एक फौजी पुरुष के सामने वह टिक नहीं सकी. भारत ने उसी समय अंगौछे से गला घोंट कर गीता की हत्या कर दी.

इस हाथापाई में उस के हाथ की कुछ चूडिय़ां टूट कर फर्श पर फैल गईं. गीता की हत्या के बाद उस की मौत का इत्मीनान कर भारत सिंह खिड़की के रास्ते बाहर निकला और बाहर के मुख्यद्वार की कुंडी अंदर से गिरा कर बाहर निकल गया.

उस ने कुछ दूर जाने के बाद सुरभि को फोन कर के बता दिया कि उस ने गीता नाम के रास्ते के कांटे को अपनी जिंदगी से निकाल दिया है. बस भारत से चूक यह हो गई कि घर में आने और जाने की उस की फुटेज पड़ोसी के सीसीटीवी कैमरे में रिकौर्ड हो गई.

बाद में पहले भतीजी शीतल और फिर भतीजा सचिन घर पहुंचे तो उन्होंने गीता को घर में मृत पाया.  वह उन्हें अस्पताल ले कर दौड़ा, लेकिन डौक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.

पुलिस ने जब गीता के घर के पास लगे सीसीटीवी कैमरे चैक किए तो उस में 11:20 बजे के आसपास एक व्यक्ति घर में घुसता हुआ दिखाई दे रहा है. उस ने पूरे मुंह को सफेद रंग के अंगौछे से ढंका हुआ है, चेहरा छिपाने के लिए काले रंग का छाता भी लगाया है.

करीब एक घंटे बाद साढ़े 12 के आसपास वही व्यक्ति घर से निकलता हुआ दिखाई दिया. उस ने आते समय बैग आगे टांगा हुआ था, जाते समय बैग पीछे टांगा था. इसी बीच में जब शीतल घर पहुंची थी तो दरवाजा अंदर से बंद था.

इस से साफ हो गया कि उस वक्त भारत सिंह घर के भीतर ही था. गीता के भतीजे सचिन के आने से पहले भारत गीता को ठिकाने लगा कर बाहर जा चुका था. पुलिस को भारत सिंह के हत्यारोपी होने का शक उसी समय हो गया था, जब परिवार के लोगों ने सीसीटीवी फुटेज में उस के होने की पुष्टि की थी.

शक यकीन में तब बदल गया, जब जांच में सामने आया कि भारत सिंह कई दिनों से बरेली में ही छिप कर रह रहा था. जबकि परिवार से झूठ बोल रहा था कि वह पंजाब के फिरोजपुर में ड्यूटी पर तैनात है.

इस के अलावा गीता के रिश्तेदार के मुताबिक भारत सिंह ने फोन पर बताया था कि वह जम्मू में है. वहां से निकल रहा है. हालांकि जब उस की यूनिट के अधिकारी घर पहुंचे तो उन्होंने बताया कि भारत सिंह 17 मार्च, 2026 से ही छुट्टी पर था. उस ने शादी का कार्ड दिखा कर छुट्टी ली थी.

सब से हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि वारदात से एक दिन पहले ही उस ने अपने बेटे को फोन कर के कहा था कि कल तुम दोनों भाई स्कूल जरूर जाना. यानी साफतौर पर उस ने पहले से ही पूरी साजिश रच रखी थी, ताकि घर में उन की पत्नी अकेली रह जाए.

जब बच्चे स्कूल गए, उसी दौरान भारत सिंह घर पहुंचा. पहचान छिपाने के लिए छाता और कपड़े से चेहरा ढका और मौका पा कर पत्नी गीता की गला घोंट कर हत्या कर दी.Family Love Crime

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