Meerut Triple Murder. रिया ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को काबू में रख कर साधारण जिंदगी जी होती और गुप्ता दंपति ने भी उस के गलत काम में उस का साथ न दिया होता तो जो हुआ, शायद इस की नौबत नहीं आती.

उत्तर प्रदेश के शहर मेरठ में तरहतरह की वारदातों का होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन 18 जून, 2016 की शाम एक ऐसी वारदात हुई, जिस ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी. वह वारदात थी नौचंदी थानाक्षेत्र के पौश इलाके शास्त्रीनगर में बेरहमी से हुए 3 कत्ल. कत्ल इतनी क्रूरता से किए गए थे कि शहरवासी दहशत में आ गए. खबर मिलने पर मकान के बाहर सैकड़ों लोग एकत्र हो गए.

जिस मकान में वारदात हुई थी, वह चंद्रशेखर गुप्ता का था. वह नैशनल इंश्योरेंस कंपनी में ब्रांच मैनेजर थे और उन की तैनाती सहारनपुर जिले में थी. शनिवार व रविवार को छोड़ कर वह प्रतिदिन रेल से अपने औफिस जातेआते थे. उन के परिवार में पत्नी पूनम गुप्ता के अलावा एक बेटी और एक बेटा था. बेटी बड़ी थी, जिस का वह विवाह कर चुके थे. वह डाक्टर थी. बेटा नोएडा में एक कंपनी में बतौर सौफ्टवेयर इंजीनियर नौकरी करता था.

गुप्ता परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह समृद्ध था. घर में चंद्रशेखर ही पत्नी के साथ रहते थे. 3-3 हत्याओं की वारदात का पता तब चला था, जब पड़ोसी युवक अमित वहां पहुंचा था. उसी के शोर मचाने पर वहां भीड़ उमड़ पड़ी थी. भीड़ में से किसी व्यक्ति ने पुलिस को इस वारदात की सूचना दे दी थी.

वारदात बड़ी थी, लिहाजा मौके पर थाना पुलिस के अलावा आईजी सुजीत पांडेय, डीआईजी लक्ष्मी सिंह, एसएसपी जे. रविंदर गौड़, एसपी (सिटी) ओमप्रकाश, सीओ बी.एस. वीरकुमार और थानाप्रभारी हरशरण शर्मा समेत अन्य अधिकारी व कई थानों की पुलिस वहां पहुंच गई थी.

पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तो वहां की स्थिति देख कर रौंगटे खड़े हो गए. घर के बैडरूम में बिस्तर पर करीब 27-28 साल की एक युवती का शव बिलकुल नग्न अवस्था में पड़ा था. बैड के नीचे करीब 50 साल की पूनम पड़ी थीं. उन्होंने मैक्सी पहनी हुई थी, जबकि ड्राइंगरूम में 55 साल के चंद्रशेखर का शव फर्श पर उलटा पड़ा था.

सभी के शरीर व गरदन पर चाकुओं से अनगिनत वार किए गए थे. सब से ज्यादा बेरहमी से नग्नावस्था में पड़ी युवती को गोदा गया था. उस की गरदन, सीने, कोख व चेहरे पर तमाम घावों के निशान थे. देख कर लगता था, हत्यारे उस से हद दर्जे की नफरत करते थे.

एक कमरे में टेबल पर चाय के 3 कप रखे थे. बैड पर ब्लैक रंग की जींस, टौप और अंडरगारमेंट्स रखे थे. वहीं पर एक पर्स भी रखा था. उस में लिपस्टिक, मोबाइल फोन आदि चीजें थीं. शायद वह पर्स उसी मृतका युवती का था. घर की सेफ पर खून के निशान थे, लेकिन उसे खोला नहीं गया था.

इस के अलावा रसोई में भी खून के निशान थे. डौग स्क्वायड व फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट की टीमें भी मौके पर आ गई थीं. डौग स्क्वायड घर में लाशों को सूंघने के बाद बाहर तक आ कर रुक गया था. उस से पुलिस को कोई खास मदद नहीं मिल सकी थी.

फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट टीम ने चाय के कप समेत कई जगहों से फिंगर व फुट प्रिंट उठाए. पुलिस को वहां से कोई ऐसा मजबूत साक्ष्य नहीं मिल सका, जिस से हत्यारों तक पहुंचने में तत्काल कोई मदद मिल सकती.

पुलिस के पहुंचने तक गुप्ता दंपति के कई रिश्तेदार व परिचित वहां पहुंच चुके थे. पुलिस ने उन से युवती की शिनाख्त करानी चाही, लेकिन वे उसे पहचान नहीं सके. बहुत जल्द यह साफ हो गया कि युवती न तो उन की रिश्तेदार थी और न ही नौकरानी. खबर पा कर गुप्ता दंपति के बेटाबेटी भी आ गए थे.

पुलिस को उम्मीद थी कि वे युवती को पहचान लेंगे, लेकिन उन्होंने भी युवती को पहचानने से साफ मना कर दिया. युवती की शिनाख्त न होने से स्थिति रहस्यमयी हो गई. बात बिलकुल अजीब थी कि युवती बैडरूम में बगैर कपड़ों के पाई गई थी. जाहिर है कि उस परिवार से उस का कोई न कोई गहरा रिश्ता जरूर रहा होगा.

शुरुआती जांच में एक बात पूरी तरह स्पष्ट थी कि कातिल जो कोई भी थे, वे गुप्ता दंपत्ति और युवती को अच्छी तरह से जानते थे. चाय के 3 खाली कप मिलने से अंदाजा लगाया गया था कि कातिलों की संख्या शायद 3 रही होगी और उन का मसकद लूटपाट करना नहीं, बल्कि हत्याएं करना था. क्योंकि यदि हत्यारों को लूटपाट करनी होती तो वे बिना लूटपाट किए नहीं जाते.

गुनाह की इस पहेली से पूरा इलाका सन्न रह गया था. वारदात को ले कर लोगों में गहरा रोष था. जिस के चलते कालोनी में सीआरपीएफ की टुकड़ी व भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था. क्षेत्र के सांसद, विधायक समेत कई छोटेबड़े नेता भी वहां आ पहुंचे थे.

भीड़ गुस्से में हिंसक न हो जाए, इस के लिए पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाबुझा कर शांत किया. लोगों को जब घटनास्थल की वास्तविकता मसलन बगैर कपड़ों के लड़की  व आपत्तिजनक चीजें मिलने की बात पता चली तो उन्होंने किनारा कर लिया.

वारदात संगीन होने के साथसाथ बेहद सनसनीखेज थी. मौके की जरूरी काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने तीनों के शव का पंचनामा भर कर पोस्टमार्टम के लिए मैडिकल कालेज भिजवा दिया. इस के बाद अज्ञात हत्यारों के खिलाफ मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी.

लेडीज पर्स में मिले मोबाइल फोन की मदद से उस युवती की शिनाख्त रिया उर्फ रेनू के रूप में हुई. वह तकरीबन डेढ़ किलोमीटर दूर शेरगढ़ी की रहने वाली थी. उस के परिवार में मां के अलावा 2 बहनें व एक भाई था.

उस की मां की एक छोटी सी परचून की दुकान थी. शनिवार की दोपहर करीब 3 बजे रिया अपनी स्कूटी नंबर यूपी बीवाई 1305 से घर से निकली थी. इस के बाद क्या हुआ, किसी को कुछ नहीं पता था.

जांचपड़ताल से पता चला कि रिया अपनी मां के पास कम ही आतीजाती थी. करीब एक साल से वह अपने प्रेमी पुष्पेंद्र के साथ लिव इन रिलेशन में शहर की ही प्रवेश विहार कालोनी में रह रही थी. रिया ने बीएड किया था. वह शास्त्रीनगर के ही एक ब्यूटीपार्लर में काम करती थी.

इस केस के खुलासे में थानाप्रभारी हरशरण शर्मा के साथ जोनल क्राइम ब्रांच के प्रभारी राजकुमार शर्मा, शहर क्राइम ब्रांच के प्रभारी संजीव यादव, एसआई आजाद सिंह व सर्विलांस टीम को भी लगा दिया गया था. अगले दिन पुलिस ने रिया, चंद्रशेखर व उन की पत्नी के मोबाइल फोनों की काल डिटेल्स निकलवाईं.

काल डिटेल्स से पता चला कि रिया पूनम व उन के पति चंद्रशेखर के लगातार संपर्क में रहती थी. उस की उन से दिन में कई बार बातें होती थीं. रिया का उन लोगों से आखिर क्या रिश्ता था. इस राज को कोई नहीं जानता था. इस बीच पुलिस ने रिया के प्रेमी पुष्पेंद्र को हिरासत में ले लिया था.

पुलिस ने उस से गहराई से पूछताछ की, लेकिन उस ने हत्या में अपना हाथ होने से इंकार कर दिया. जांच में पता चला कि रिया अन्य कई लोगों और कई लड़कियों के संपर्क में थी. अब पुलिस की सुई सैक्स रैकेट की तरफ घूम गई. इस के बाद पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में ले कर पूछताछ की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.

पुलिस की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर संभ्रांत समझे जाने वाले गुप्ता परिवार से रिया का क्या संबंध था. यह मामला पुलिस के लिए चुनौती बनता जा रहा था. 2 दिन बीत गए, लेकिन पुलिस कातिलों का सुराग नहीं लगा सकी थी. इतना तो तय था कि घटना के तार रिया से ही जुड़े थे.

एसपी ओमप्रकाश यादव, एसपी (क्राइम) अजय सहदेव, सीओ बी.एस. वीरकुमार व सीओ (क्राइम) ज्ञानवती तिवारी के दिशानिर्देशन में पुलिस टीमें अलगअलग ऐंगल से केस की जांच कर रही थीं. जांच में पता चला था कि घटना वाले दिन रिया के मोबाइल नंबर पर 10-12 फोन किए गए थे.

जिस नंबर से फोन किए गए थे, वह नंबर जांच में फरजी आईडी प्रूफ पर लिया गया पाया गया था. वह नंबर घटना से कुछ दिनों पहले ही लिया गया था और घटना वाली शाम उस की लोकेशन घटनास्थल के आसपास थी. उस दिन के बाद वह नंबर बंद कर दिया गया था.

पुलिस इसी दिशा में आगे बढ़ी. आईएमईआई नंबर के जरिए पता चल गया कि उस मोबाइल में अब दूसरा नंबर इस्तेमाल किया जा रहा था. वह नया नंबर मेरठ के ही मोहल्ला ठठेरवाड़ा निवासी विकास उर्फ विक्की का निकला. पुलिस जब उस के घर पहुंची तो पता चला कि विकास घर पर नहीं है. पुलिस ने उस के परिजनों पर शिकंजा कस दिया.

सर्विलांस से उस के फोन की लोकेशन नोएडा व हरिद्वार की मिली. पुलिस टीमें उस के पीछे लगी थीं. आखिर 24 जून को पुलिस ने विकास को सोहराब गेट बसस्टैंड के पास से उस के 2 साथियों सचिन और उदयवीर के साथ गिरफ्तार कर लिया. उस के दोनों साथी क्रमश: माधवपुरम और बरेली के रहने वाले थे.

थाने ला कर उन से पूछताछ की गई तो हत्याकांड के रहस्य से जो परदा उठा, जान कर पुलिस भी हैरान रह गई. पुलिस की पूछताछ और जांचपड़ताल में ट्रिपल मर्डर के पीछे प्यार, सैक्स, धोखा और इंतकाम की बेहद चौंकाने वाली कहानी निकल कर सामने आई.

दरअसल, रिया ने बचपन से गरीबी देखी थी, लेकिन जवानी की दहलीज पर कदम रखने के साथ ही उसे गरीबी से नफरत हो चली थी. उस की महत्त्वाकांक्षाएं ऊंची थीं. उस की ख्वाहिश थी कि एक दिन वह दौलत में खेले. पढ़ाई के मामले में वह तेज थी. बीएड करने के बाद उस ने ब्यूटीपार्लर का कोर्स किया.

वह जानती थी कि अगर उसे कोई नौकरी मिल भी गई तो उस से उस के अरमान पूरे नहीं होंगे. उस की महत्वाकांक्षाएं बेलगाम होने लगीं तो उस ने पैसे कमाने का शौर्टकट ढूंढ लिया. कई रईसजादों को अपने जाल में फांस कर वह नोट कमाने लगी. इस के बाद रिया के रंगढंग और बातचीत में बदलाव नजर आने लगा.

उस के पिता की कई सालों पहले मौत हो चुकी थी. मां और बहनों को शक हुआ तो उन्होंने उसे संभालने की कोशिश की. जब वह नहीं मानी तो घर वालों ने उसे उस के हाल पर छोड़ दिया. रिया को पंख लग चुके थे. अब वह ख्वाहिशों के साथ खुल कर जीना चाहती थी और अपनी हसरतों को पूरा कर के दौलत में खेलना चाहती थी. इसी ललक में वह ऐसी दलदल में फंस गई, जहां से निकलना आसान नहीं था.

रिया को दौलत कमाने का ऐसा चस्का लग चुका था कि उस के लिए वह सभी हदें पार कर चुकी थी. वह ब्रांडेड कपड़े पहनती थी और शाही जिंदगी जीती थी. उसी बीच उस की मुलाकात पुष्पेंद्र उर्फ पिंटू से हुई. पुष्पेंद्र मेरठ का ही रहने वाला था. उस ने बीटेक किया था.

दोनों में प्यार हो गया तो रिया उस के साथ लिव इन रिलेशन में रहने लगी. रिया के क्रियाकलाप पुष्पेंद्र से भी छिपे नहीं थे. उस ने जो पैसा कमाया था, उसी से उस ने कार व स्कूटी खरीदी. लाखों रुपए की एफडी कराईं और प्रवेश विहार में करीब 30 लाख रुपए का एक दोमंजिला मकान भी बना लिया. उसी मकान में वह पुष्पेंद्र के साथ रहती थी.

रिया अपने घर वालों के संपर्क में भी रहती थी. यह सब करने के बावजूद भी उस ने ब्यूटीपार्लर का काम नहीं छोड़ा था. ब्यूटीपार्लर में ही एक दिन उस की मुलाकात पूनम से हुई. जानपहचान हुई तो बातचीत में रिया को पता चला कि पूनम घर पर अकसर अकेली ही होती हैं और उन का घर भी खाली है.

रिया ने उन से अपने घर में कमरा किराए पर देने को कहा. पूनम इस के लिए तैयार नहीं हुईं तो उस ने कहा कि उसे कुछ घंटों के हिसाब से ही एक कमरा दे दें. जितने घंटे वह वहां रुकेगी, उतना पैसा वह दे देगी.

पूनम को इस में कोई बुराई नजर नहीं आई. रिया ने अपनी बातों से उन का दिल जीत लिया था. इस के बाद वह उन के घर आनेजाने लगी. रिया के साथ हर बार एक नया आदमी होता था. रिया हर बार पूनम को 500 रुपए देती थी. रिया क्या करती है, यह पूनम से छिपा नहीं था. पैसों के लालच में संभ्रांत परिवार से ताल्लुक रखने वाली पूनम अनैतिक काम के लिए उसे अपना बैडरूम उपलब्ध कराने लगी थी.

पूनम ही नहीं, चंद्रशेखर गुप्ता भी इस दलदल में गिर गए थे. वह भी अपने बड़े क्लाइंट को खुश करने के लिए रिया का इस्तेमाल करने लगे थे. जनरल इंश्योरेंस की बड़ी पौलिसी कराने में वह उस का इस्तेमाल करते थे. रिया के ग्राहकों में अनेक रईसजादे भी थे. इन में अधेड़ उम्र के लोग ज्यादा थे.

वह मैसेज के जरिए कोड में बात करते थे. 16 से 20 साल की लड़की को ‘प्लौट’, 20 से 30 साल की महिला को ‘फ्लैट’, इस से ऊपर की उम्र वाली महिला को ‘मकान’ कहा जाता था. सुंदर युवती के बारे में कहा जाता था कि प्लौट की लोकेशन बहुत अच्छी है. ग्राहक रईस हो तो उस के लिए कहा जाता था कि नक्शा अच्छा पास कराओ.

इस के बाद गुप्ता परिवार का घर एक तरह से सैक्स रैकेट का अड्डा बन गया था. रिया इस तरह की सेफ जगह पा कर बेहद खुश थी, क्योंकि वह पुलिस के खतरे से आजाद थी. दूसरी तरफ गुप्ता दंपति ज्यादा कमाई के चक्कर में इस हद तक गिर चुका था कि वे रिया को खुद कई जगह भेजने लगे थे. जबकि उन के पास पैसों की कोई कमी नहीं थी.

उन की डाक्टर बेटी और इंजीनियर बेटे को यह पता नहीं लग सका था कि उन के मांबाप घर पर क्या धंधा कर रहे हैं? उन की करतूत से आसपड़ोस के लोग भी अंजान थे. रिया के ग्राहकों की लंबी कतार थी. उन्हीं में एक था विकास उर्फ विक्की. एक साल पहले उस की मुलाकात रिया से हुई थी. वह कई बार चंद्रशेखर के घर रिया से मिला था.

वह रिया के हुस्नजाल में उलझ गया था. रिया ने भी उस के साथ प्यार पर नाटक किया था, क्योंकि विकास उस के लिए कमाई का जरिया था, जबकि विकास के मन में रिया के लिए बहुत कुछ था. वह रिया पर अपना हक समझने लगा था. उस ने एक दिन रिया से अपने दिल की बात कही भी, ‘‘रिया, मैं चाहता हूं कि तुम यह गलत काम छोड़ दो, क्योंकि मैं तुम से शादी करना चाहता हूं.’’

‘‘सौरी विकास, मैं शादी जैसे चक्कर में नहीं पड़ना चाहती.’’ रिया ने बात स्पष्ट कह दी.

विकास को रिया की यह बात बहुत बुरी लगी. दोनों के बीच तकरार हो गई. रिया की वजह से ही वह आर्थिक परेशानियों में आ गया था. दरअसल विकास का फूल बेचने का कारोबार था. उसे अपने इस काम से अच्छी कमाई थी. मौजमस्ती के चक्कर में उस ने रिया पर खूब पैसा लुटाया.

ऐसा भला कब तक चलता. इसलिए वह आर्थिक तंगी में आ गया. तब उस ने अवैध शराब बेचनी शुरू कर दी. लेकिन उस का यह धंधा भी नहीं चला. लिहाजा वह आमदनी को ले कर परेशान रहने लगा. विकास रिया के साथ घर बसा कर अच्छी जिंदगी की शुरुआत करना चाहता था, लेकिन रिया ने एक ही झटके में उसे आईना दिखा दिया था.

विकास को उस से ऐसी उम्मीद कतई नहीं थी. उसे गुस्सा तो बहुत आया था, लेकिन उस ने अपने गुस्से को जब्त कर लिया. इस के बाद उस ने कई बार रिया को मनाने की कोशिश की, लेकिन रिया ने न केवल उसे झिड़क दिया, बल्कि वह उस से किनारा भी करने लगी. एक दौर ऐसा भी आया, जब रिया ने उस के फोन तक रिसीव करने बंद कर दिए. वह उस के मैसेज का भी जवाब नहीं देती थी.

इस से विकास को बहुत गुस्सा आता था पर वह खून का घूंट पी कर रह जाता था. अपनी बर्बादी के लिए वह रिया को ही जिम्मेदार मान रहा था. वह समझ रहा था कि यदि उस की आर्थिक स्थिति अच्छी होती तो वह उसे नहीं छोड़ती. उस ने रिया से प्रतिशोध लेने की ठान ली. उस का एक दोस्त था सचिन, जो मूलरूप से बरेली का रहने वाला था. वह विवाह के मंडपों में सजावट का काम करता था.

वह सट्टा भी खेलता था. सट्टे की लत में वह लाखों के कर्ज में आ गया था. उसे पैसों की जरूरत थी. उस की परेशानी विकास से छिपी नहीं थी. विकास ने मौके का फायदा उठाते हुए उस से रिया की हत्या करने की बात की.

सचिन को पैसों की सख्त जरूरत थी, इसलिए वह यह अपराध करने को तैयार हो गया, लेकिन यह काम अकेले सचिन के वश का नहीं था. उस ने अपने एक दोस्त उदयवीर से बात की तो वह भी पैसों के लालच में उस का साथ देने को तैयार हो गया. इस के बाद तीनों ने योजना बना डाली. योजना के अनुसार, विकास ने फरजी पते पर एक सिम खरीद कर 2 चाकुओं का भी इंतजाम कर दिया.

योजना के तहत उदयवीर भी मेरठ पहुंच गया था. विकास ने सचिन और उदयवीर को अपने मोबाइल में रिया का फोटो दिखा कर उस की अच्छे से पहचान करा दी. अगले दिन विकास ने अपने मोबाइल में नया सिम डाल कर सचिन को रिया से बात करने को कहा. उस ने कई बार फोन किया, लेकिन रिया ने बात नहीं की.

उस ने रिया के एक पुराने ग्राहक का परिचय दे कर पहले मैसेज भेजा, उस के बाद फोन किया. इस बार उस की बात सचिन से हो गई. उस ने बताया कि वे 2 लोग हैं तो रिया ने उसे चंद्रशेखर गुप्ता के घर का पता दे कर वहां साढ़े 4 बजे पहुंचने को कहा. उन के बीच यह भी तय हुआ कि पहचान के लिए सचिन अपने सिर पर कैप लगा कर आएगा.

सचिन ने ऐसा ही किया. वह अपने साथ उदयवीर को ले कर चंद्रशेखर गुप्ता के घर पहुंचा तो वहां चंद्रशेखर और उन की पत्नी मौजूद थे. पूनम ने चाय बनाई तो रिया, सचिन और उदयवीर ने चाय पी. इस बीच सचिन ने चंद्रशेखर को 100 रुपए दे कर कंडोम लाने के लिए भेज दिया. रिया दोनों को बैडरूम में ले गई. रिया ने कपड़े उतार दिए. उसी बीच सचिन चाकू निकाल कर उस के शरीर पर वार करने लगा.

वह चीखी तो पूनम वहां दौड़ कर आई. उन्होंने शोर मचाने की कोशिश की तो दोनों युवकों ने दबोच कर उन पर भी वार कर दिए. वह नीचे गिर पड़ीं. कुछ ही देर में दोनों ने दम तोड़ दिए. इस के बाद उन्होंने घर में लूट के लिए सेफ तोड़ने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे. वे बहुत घबरा गए थे. उन्होंने भागने की कोशिश की तो उन्हें मुख्य दरवाजा बाहर से बंद मिला.

चंद्रशेखर दरवाजे को बाहर से बंद कर गए थे. दोनों ड्राइंगरूम में बैठ कर उन के आने का इंतजार करने लगे. इस बीच उन्होंने बैड पर पड़ा रिया का मोबाइल ले लिया. चंद्रशेखर दरवाजा खोल कर जैसे ही अंदर आए, उन्होंने चाकुओं से गोद कर उन की भी हत्या कर दी. इस के बाद रसोई में जा कर उन्होंने हाथ धोए.

सचिन के कपड़ों पर खून के निशान थे. उन निशानों को छिपाने के लिए उन्होंने घर की दीवार पर टंगी एलसीडी उतार ली. रिया की स्कूटी ले कर एलसीडी बीच में रख कर कपड़ों के दाग छिपा लिए. रास्ते में कबाड़ी बाजार के नाले पर उन्होंने स्कूटी को लावारिस छोड़ दिया और विकास के घर चले गए.

रिया की हत्या की बात सुन कर विकास बहुत खुश हुआ. कपड़े बदल कर तीनों नोएडा गए. 3 कत्ल हो गए थे, हाथ धेला नहीं आया था, इस से सचिन परेशान था. विकास ने उसे समझा कर शांत कर दिया. एक दिन नोएडा में रुक कर वे हरिद्वार जा कर रुक गए. वहां से वे मेरठ आए तो पुलिस के शिकंजे में आ गए. पुलिस ने उन की निशानदेही पर एलसीडी टीवी, रिया का मोबाइल फोन, स्कूटी व हत्या में प्रयुक्त चाकू बरामद कर लिया है.

आईजी सुजीत पांडेय व अन्य अधिकारियों ने प्रैसवार्ता कर इस सनसनीखेज मामले से परदा उठाया. अगले दिन पुलिस ने तीनों अभियुक्तों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक आरोपी जेल में थे.

रिया ने अपनी महत्वाकांक्षाओं को काबू रख कर साधारण जिंदगी से ही नाता रखा होता तो शायद ऐसी नौबत कभी न आती. अभियुक्तों ने भी प्रतिशोध व लालच में अपना भविष्य बर्बाद कर लिया. दूसरी तरफ सब कुछ होते हुए गुप्ता दंपति इस गलीच धंधे में न पड़ा होता तो आज जिंदा होता. गुप्ता परिवार की शर्मसार करती हकीकत खुलने से हर कोई हैरान था.

रिया की लाखों की प्रौपर्टी पर हक जताने को ले कर उस के परिवार और प्रेमी पुष्पेंद्र के बीच झगड़ा शुरू हो गया है. पुष्पेंद्र रिया से कोर्टमैरिज का दावा कर रहा था. कथा लिखे जाने तक किसी भी आरोपी की जमानत नहीं हुई थी और पुलिस साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र तैयार कर रही थी. आईजी सुजीत कुमार पांडेय ने केस का खुलासा करने वाली टीमों को 20 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की है.  Meerut Triple Murder

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