NEET Paper Leak. इसे सरकार में बैठे कुछ असरदार लोगों की शिक्षा माफिया से मिलीभगत ही कहेंगे, जिस की वजह से पिछले 10 सालों में 89 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और 45 परीक्षाएं रद्द की गईं. हर बार जांच हुई, लेकिन असली गुनहगारों को बचाया जाता रहा. कोचिंग सेंटरों का देश भर में 58 हजार करोड़ से अधिक का कारोबार है. इन संचालकों की एनटीए के पैनल में जुड़े प्रोफेसर्स से सांठगांठ रहती है. ये प्रोफेसर कोचिंग सेंटरों पर गेस्ट फैकल्टी बन कर जाते रहते हैं. जब तक इन पैनलिस्ट प्रोफेसरों की एनटीए के एग्जाम पेपरों तक पहुंच रहेगी, पेपर लीक का सिलसिला जारी रहेगा.
भारत में अपने बच्चे को डौक्टर बनाना हर दूसरे परिवार का सपना होता है. क्योंकि डौक्टरी का पेशा सब से सम्मानित और मानवता की सेवा के लिहाज से बेहद महत्त्वपूर्ण होता है. डौक्टरी पेशे से जुडऩे के बाद पैसा अर्जित करने की भी अपार संभावनाएं रहती हैं. इसलिए अपने बच्चे को डौक्टर बनाने का सपना देखने वाले इंटरमीडिएट की परीक्षा के साथ ही अपने बच्चों को फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलौजी की कोचिंग दिलाने लगते हैं.
दरअसल, भारत में डौक्टर के पेशे से जुडऩे के लिए एक एंट्रेस टेस्ट होता है. नीट के नाम से होने वाली यह प्रवेश परीक्षा इसलिए महत्त्वपूर्ण होती है, क्योंकि इस की रैंकिंग के आधार पर ही तय होता है कि नीट की परीक्षा पास करने वाले कैंडिडेट का प्रवेश निजी मैडिकल कालेज में होगा या सरकारी मैडिकल कालेज में.
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देश की सब से बड़ी नीट प्रवेश परीक्षा में हर साल करीब 20 से 22 लाख स्टूडेंटस शामिल होते हैं. पिछले साल की ही बात करें तो 22.76 लाख छात्रों ने नीट की परीक्षा दी थी, जबकि देश में एमबीबीएस की कुल सीटें करीब 1.29 लाख ही हैं. इस का मतलब साफ है कि एक सीट के लिए औसतन 17 से 18 छात्र दावेदार होते हैं.
देश में एमबीबीएस की कुल 1,28,875 सीटें उपलब्ध हैं, जिन में से सरकारी कालेजों में 65,193 सीटें और प्राइवेट/डीम्ड मैडिकल कालेजों में 63,682 सीटें हैं.
नीट परीक्षा पास करने वाले जिन छात्रों के अंक 90 फीसदी से ऊपर होते हैं, उन्हें सरकारी मैडिकल कालेज में प्रवेश मिलने की संभावना रहती है. सरकारी मैडिकल कालेज में काफी कम फीस होती है. लेकिन 60 से 90 फीसदी अंक पाने वाले छात्रों को डीम्ड और प्राइवेट कालेज पर निर्भर रहना पड़ता है. इन में एमबीबीएस की पूरी पढाई का खर्च 70 लाख से एक करोड़ के बीच आता है.
नीट की परीक्षा नैशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए आयोजित कराती है. जिन बच्चों को प्रवेश परीक्षा में कम अंकों के कारण एमबीबीएस की पढ़ाई करने का मौका नहीं मिलता, वे बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, बीयूएमएस, बीवीएससी एंड एएच, बीएनवाईएस और बीएससी नर्सिंग की डिग्री के लिए पढ़ाई करते हैं. इन के लिए भी मैडिकल संस्थानों में नीट के अंकों के आधार पर ही प्रवेश दिया जाता है.
इसी से समझा जा सकता है कि नीट यूजी की प्रवेश परीक्षा कितनी महत्त्वपूर्ण है. अब बात करते हैं मई 2026 में संपन्न हुई नीट यूजी की परीक्षा पर, जिस का पेपर लीक होने के कारण इस परीक्षा को रद्द कर दिया गया और नीट यूजी की परीक्षा दोबारा करानी पड़ी.
लीक किया उजागर
एक प्रचलित कहावत है घर का भेदी लंका ढाए यानी अगर सिस्टम के भीतर का आदमी गद्दारी न करे तो ऐसी परीक्षा का पेपर लीक होना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होता है.
लेकिन नीट (यूजी) की परीक्षा है ही इतनी महत्त्वपूर्ण कि मैडिकल एजुकेशन के सिस्टम से जुड़े लोग यहां तक कि छात्र तथा अभिभावक तक हमेशा इस कोशिश में रहते हैं कि उन्हें किसी तरह नीट परीक्षा में आने वाले पेपर के सवालों की जानकारी हासिल हो जाए.
हम इस कहानी में सिलसिलेवार बताएंगे कि नीट यूजी पेपर लीक कराने वाले विभीषण कौन थे और सीबीआई ने उन्हें कैसे पकड़ा? लेकिन उस से पहले यह जानना जरूरी है कि 22 लाख स्टूडेंटस के साथ धोखा हुआ है और उन का पेपर होने से पहले ही लीक हो चुका था. इस की भनक सब से पहले किस को लगी.
नीट यूजी 2026 परीक्षा का पेपर लीक विवाद के बीच राजस्थान के प्रमुख एजुकेशन हब ‘सीकर’ से एक नाम सब से ज्यादा चर्चा में बना हुआ है शशिकांत सुथार. शशिकांत वही जांबाज व्हिसलब्लोअर हैं, जिन्होंने एनटीए और जांच एजेंसियों के सामने सब से पहले इस गड़बड़ी का कच्चा चिट्ठा खोला और पुख्ता सबूत पेश किए.
3 मई, 2026 की शाम करीब 5 बजे नीट नीट यूजी 2026 की परीक्षा खत्म होने के बाद सीकर के केमिस्ट्री टीचर शशिकांत सुथार प्रश्नपत्र का विश्लेषण और आंसर-की तैयार करने का काम पूरा कर चुके थे.
दिनभर के इस काम के बाद वे बेहद थके हुए थे और सोने की तैयारी में थे. इसी दौरान उन के मकान मालिक ने उन्हें मोबाइल पर वायरल हो रही एक पीडीएफ फाइल दिखाई और जांचने को कहा कि क्या इस में से कोई प्रश्न आज की परीक्षा में आया है.
शशिकांत सुथार ने जब उस वायरल पीडीएफ के केमिस्ट्री वाले हिस्से की जांच की तो वह हैरान रह गए. परीक्षा में आए सभी 45 प्रश्न उस पीडीएफ में हूबहू मौजूद थे. इस के बाद उन्होंने मकान मालिक से अन्य फाइलों के बारे में पूछा तो उन्होंने बायोलौजी की पीडीएफ भी दिखाई.
लीक की पुष्टि होते ही शशिकांत ने अपने एक साथी शिक्षक की मदद ली और दोनों ने रात में ही बायोलौजी पीडीएफ की सामग्री को दस्तावेज के रूप में संजोना शुरू कर दिया. पूरी रात असली क्वेश्चन पेपर और लीक पीडीएफ का लाइन-बाय-लाइन मिलान करने के बाद उन्होंने उसी रात देर से इस मामले की औपचारिक शिकायत प्रशासन से की.
4 मई की सुबहसुबह शशिकांत सबूत ले कर सीकर में पुलिस स्टेशन पहुंचे, जहां पुलिस ने उन से पहले पुख्ता सबूत लाने को कहा. उन्होंने वापस आ कर सारे दस्तावेजों को खंगाला और ठोस सबूतों की फाइल तैयार की.
उन्होंने 6 मई, 2026 को नैशनल टेस्टिंग एजेंसी, शिक्षा मंत्रालय और देश की सब से बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई को इस महा-लीक के पुख्ता डिजिटल सबूतों के साथ ईमेल भेजे, जिस का नतीजा यह निकला कि 7 मई को केंद्रीय एजेंसियां हरकत में आईं. एनटीए का जवाब आया और गृह मंत्रालय के कई बड़े अधिकारियों ने सीधे शशिकांत सुथार से संपर्क साधा. इस सतर्कता और सटीक सबूतों का नतीजा यह हुआ कि 12 मई को एनटीए को घुटने टेकने पड़े और उस ने प्राथमिक तौर पर मान लिया कि गड़बडिय़ां हुई हैं, लिहाजा एनटीए ने नीट यूजी 2026 की परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर दिया.
सबूत मिलते ही 12 मई को केंद्रीय एजेंसियां ऐक्शन में आ गईं. सब से पहले शशिकांत सुथार ने बताया कि जैसे ही उन्होंने ये जानकारियां नैशनल टेस्टिंग एजेंसी के अधिकारियों के साथ साझा कीं, तमाम एजेंसियों के गलियारों में हड़कंप मच गया.
चूंकि जांच शुरू हुई तो पेपर लीक के तार सीधे तौर पर सीकर से जुड़े दिख रहे थे, लिहाजा सीकर पुलिस ने शशिकांत सुथार की शिकायत के आधार पर शुरुआती जांच शुरू कर दी और साइबर टीम ने उन टेलीग्राम व वाट्सऐप मैसेज को खंगालना शुरू कर दिया, जिन में लीक पेपर की पीडीएफ शेयर की गई थी.
इन के अलावा दूसरे राज्यों में भी एसओजी और एसटीएफ की टीमें मामले की जांच में जुट गईं. यह सब चल ही रहा था कि 12 मई को ही केंद्र सरकार ने यह फैसला किया कि नीट यूजी पेपर लीक की जांच सीबीआई से करानी चाहिए. लिहाजा इस बाबत सरकार ने आदेश जारी कर दिया.
सीबीआई ने 12 मई, 2026 की रात शिक्षा मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग के डायरेक्टर वरुण भारद्वाज की लिखित शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
जांच एजेंसी की पड़ताल में सामने आया कि मंगीलाल बिवाल और दिनेश सगे भाई हैं. विकास बिवाल दिनेश बिवाल का बेटा है, जो नीट परीक्षा की तैयारी कर रहा है और सीकर में रहता है. उन्हीं के जरिए सीकर में नीट का लीक पेपर प्रसारित हुआ. दिनेश बिवाल ने 26-27 अप्रैल को करीब 15 लाख रुपए में प्रश्नपत्र खरीदा था.
यह प्रश्नपत्र उन के बेटे विकास के लिए खरीदा गया था, जो नीट की तैयारी कर रहा था. इस के बाद उसी प्रश्नपत्र की सौफ्ट कौपी परिवार के अन्य सदस्यों के साथ सीकर में अन्य छात्रों को भी बेच दी. जांच में यह भी सामने आया है कि पिछले कुछ वर्षों में इस परिवार के 4 सदस्य नीट परीक्षा में चयनित हो चुके हैं.
जांच में सामने आया कि पुणे के शुभम खैरनार को ये ‘गेस पेपर’ प्राप्त हुआ था, उस ने गुरुग्राम निवासी यश यादव को नीट पेपर की पीडीएफ भेजी थी.
सीबीआई ने टेलीग्राम गु्रप की जांच और इलैक्ट्रानिक साक्ष्यों के आधार पर सब से पहले पुणे से शुभम खैरनार को पकड़ा था. वह पिछले 4 से 5 महीनों से अपने कुछ साथियों के साथ इंदिरा नगर स्थित ‘सुधा अपार्टमेंट’ की तीसरी मंजिल पर रह रहा था. उस ने अपनी पहचान छिपाने के लिए खुद को डौक्टर और कभी वकील बता कर पड़ोसियों को भ्रमित कर रखा था.
हालांकि शुभम ने कभी मैडिकल कालेज की पढ़ाई पूरी नहीं की, लेकिन वह लाखों रुपए में नीट का पेपर बेचने वाले नेटवर्क का अहम हिस्सा बन गया.
जांच में सब से चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि शुभम ने 2021 में मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित श्री सत्यसाईं यूनिवर्सिटी में बीएएमएस यानी बैचलर औफ आयुर्वेदिक मैडिसिन एंड सर्जरी कोर्स में एडमिशन लिया था. लेकिन यूनिवर्सिटी रिकौर्ड के मुताबिक वह कभी क्लास में नहीं गया, किसी परीक्षा में शामिल नहीं हुआ और न ही किसी शैक्षणिक गतिविधि में हिस्सा लिया. सीबीआई ने शुभम के भाई भावेश खैरनार को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है.
सीकर से पकड़े गए बिवाल बंधुओं ने सीबीआई को बताया कि उन्हें लगभग एक महीने पहले ही इस बात की जानकारी मिल गई थी कि परीक्षा का पेपर लीक हो कर उपलब्ध कराया जाएगा, जिस के आधार पर उन्होंने पहले से तैयारी कर ली थी.
सीबीआई ने पकड़े गए आरोपियों की डिवाइसों की जांच के बाद ही छापेमारी का काम शुरू किया था, जिस में जयपुर से 3 लोगों दिनेश बिवाल, मांगीलाल बिवाल और विकास बिवाल को, यश यादव गुरुग्राम से और शुभम खैरनार को नासिक से गिरफ्तार कर इन सभी को स्थानीय अदालत में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया और यहां सीबीआई अदालत में पेश कर उन्हें रिमांड पर लिया गया.
उन से बरामद की गई इलैक्ट्रानिक डिवाइस और पूछताछ में सीबीआई को आगे की जांच से क्लू मिलते चले गए और फिर पूछताछ में सारी कहानी भी खुलती चली गई.
अब तक की पूछताछ में बिवाल भाइयों ने सीबीआई को बता दिया कि अप्रैल में शुभम खैरनार ने यश यादव को बताया था कि मांगीलाल ने उस से संपर्क किया, ताकि वह छोटे बेटे के लिए लीक पेपर का इंतजाम कर सके. इस के लिए बेटे ने 12 लाख रुपए खर्च किए थे. 29 अप्रैल को शुभम ने पैसों के बदले लीक पेपर देने का प्रस्ताव दिया.
शुभम ने यश यादव से 10वीं और 12वीं के डौक्यूमेंट, नीट का रोल नंबर और सिक्योरिटी डिपौजिट के तौर पर एक चैक जमा करने के लिए कहा था. यादव ने आगे अपने दोस्त यश कक्कड़ से कहा कि वह मांगीलाल से ये डौक्यूमेंट ले ले.
29 अप्रैल को ही शुभम ने यश यादव को बताया कि वह फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलौजी के लीक पेपर दिलाएगा. पेपर में 500-600 सवाल होंगे. इन की मदद से अच्छे नंबर मिल सकते हैं और किसी अच्छे मैडिकल कालेज में एडमिशन मिल सकता है.
उन्होंने हूबहू वही सवाल नहीं दिए, बल्कि सभी विषयों से सैकड़ों या उस से ज्यादा सवालों को मिला कर एक सेट तैयार किया. इस से स्टूडेंट्स का एडमिशन हो जाता और किसी को इस बात की भनक भी नहीं लगती.

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एजेंसी को यश यादव की शुभम और मांगीलाल के बीच हुई वाट्सऐप चैट भी मिली है. मांगीलाल को 29 अप्रैल को टेलीग्राम पर यश यादव से लीक हुआ पेपर मिला था. यह सौदा 10 लाख रुपए में तय हुआ था. इस शर्त पर कि 150 सवाल असली पेपर से मेल खाएंगे.
केमिस्ट्री प्रोफेसर गिरफ्तार
मांगीलाल ने सवालों की प्रिंटेड कौपियां बेटे अमन, विकास, चचेरे भाई ऋषि और गुंजन को दीं. ये सभी नीट का पेपर देने वाले थे. यही कौपियां बेटे विकास बिवाल के दोस्त और परिचित टीचर सत्य नारायण को भी दीं. ये सवाल सही जवाबों के साथ शेयर किए गए थे.
यश यादव ने अपने आईफोन से अहम सबूत मिटा दिए थे. पहली खेप में पकड़े गए पांचों आरोपियों से सीबीआई को इतने सुराग मिल गए थे कि वह पेपर लीक के असली सूत्रधारों तक पहुंच सके. फिर क्या था, इस के बाद शुरू हुआ धड़ाधड़ गिरफ्तारियों और पूरी साजिश के खुलासे का सिलसिला.
सीबीआई ने छठें आरोपी के तौर पर पुणे से केमिस्ट्री प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार कर लिया. दरअसल, पी.वी. कुलकर्णी नीट-यूजी 2026 परीक्षा पेपर लीक कांड का मुख्य मास्टरमाइंड (सरगना) है. वह महाराष्ट्र के लातूर का रहने वाला और केमिस्ट्री का एक रिटायर्ड प्रोफेसर है.
कुलकर्णी महाराष्ट्र के लातूर के दयानंद कालेज में 28 सालों तक केमिस्ट्री का प्रोफेसर रहा और बाद में प्रिंसिपल के पद पर रहा. करीब 4 साल पहले वह रिटायर हुआ था. रिटायरमेंट के बाद भी वह नैशनल टेस्टिंग एजेंसी की परीक्षा प्रक्रिया (परीक्षा समिति) से जुड़ा हुआ था.
वह उन प्रोफेसरों में शामिल था, जिन्होंने नीट 2026 का केमिस्ट्री पेपर तैयार किया था. एनटीए से जुड़े होने के कारण उसे गोपनीय प्रश्नपत्रों तक सीधी पहुंच प्राप्त थी. उस ने अप्रैल 2026 के आखिरी हफ्ते में मनीषा वाघमारे नामक एक अन्य सहयोगी की मदद से पुणे स्थित ‘राज कोचिंग क्लासेस’ के नाम से एक औनलाइन क्लास ली थी.
इस स्पैशल क्लास में उस ने छात्रों को वही प्रश्न, उन के विकल्प और सही जवाब रटवाए थे, जो बाद में 3 मई को असली नीट परीक्षा में हूबहू पूछे गए थे.
चूंकि वह कई सालों से नीट पेपर तैयार करने वाले पैनल का हिस्सा भी रहा है, इसलिए कुलकर्णी की नीट पेपर तक सीधी पहुंच थी. अब इस बात की भी जांच की जा रही है कि कुलकर्णी और उस के नेटवर्क ने क्या इस से पहले भी नीट (यूजी) के पेपर लीक किए थे.
पूछताछ में साफ हो चुका था कि नीट 2026 का पेपर पहली मई, 2026 को ही लीक कर दिया गया था. प्राइवेट माफिया नाम के एक टेलीग्राम ग्रुप पर पहली मई की रात पेपर की पीडीएफ फाइल डाल दी गई थी. उस का पासवर्ड अंगरेजी में लीक माफियाञ्च 9466 था. जांच में पता चला कि प्राइवेट माफिया नाम के टेलीग्राम ग्रुप में कुल 402 मेंबर हैं. इसे 2024 में ही पेपर लीक के लिए बनाया गया था.
इस के बाद दूसरा मैसेज लिखा गया, जो पेपर हम ने भेजा है. उसे सौल्व कर लो. 99.99 प्रतिशत चांस है कि यही पेपर परीक्षा में आएगा.
अब तक की जांच में सीबीआई को इस बात की पूरी जानकारी मिल चुकी थी कि यह लीक हुआ पेपर राजस्थान, हरियाणा, बिहार, केरल और जम्मू-कश्मीर समेत देश के 6 राज्यों में बेचा गया था. इस घोटाले के तार राजस्थान के सीकर के रहने वाले एक एमबीबीएस छात्र से भी जुड़े हैं, जो वर्तमान में केरल में पढ़ाई कर रहा है.
जांच एजेंसी उस तक पहुंचने का प्रयास कर रही है. सीबीआई ने भले ही केमिस्ट्री प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन उसे संदेह था कि पेपर लीक का असली सोर्स एनटीए के अंदर ही कहीं छिपा है. एजेंसी की अब तक की जांच में परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े हो चुके थे.
सीबीआई ने कोर्ट को भी यह बता दिया कि आरोपी शुभम खैरनार ने नीट यूजी का पेपर प्रो. पी.वी. कुलकर्णी से खरीदा था, जिस का सीधा संपर्क ‘एनटीए सोर्स’ से था. इसीलिए एग्जाम से पहले ही पेपर सिस्टम के अंदर से बाहर आ गया था. एनटीए के अंदर ऐसे कितने बिकाऊ सोर्स थे, एजेंसी गंभीरता से इस का पता लगाने में जुटी है.
सीबीआई का प्रयास अब यही था कि वो जल्द से जल्द पेपर लीक के हर मास्टरमाइंड का अपनी गिरफ्त में ले. इसी क्रम में पुलिस ने प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी की एक सहयोगी मनीषा वाघमारे की तलाश शुरू कर दी.
कुलकर्णी की गिरफ्तारी के अगले ही दिन उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया. वह पुणे के बिबवेवाड़ी इलाके की गंगा ओसियन सोसाइटी के ए विंग में रहती थी और पेशे से ब्यूटीशियन थी. मनीषा वाघमारे पहले ब्यूटी पार्लर चलाती थी. उस का पिछले 3 साल से आरोपियों के साथ संपर्क था.
मनीषा वाघमारे कुलकर्णी और शुभम खैरनार के संपर्क में थी, इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने उस की भूमिका की जांच शुरू की और उस से लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया.
मनीषा वाघमारे से पूछताछ और उस की कौल डिटेल्स का एनालिसिस करने के बाद सीबीआई ने उस के एक परिचित धनंजय लोखंडे को भी अहिल्या नगर से पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया है. सीबीआई धनंजय के भाई अजय लोखंडे से भी पूछताछ कर रही है.
धनंजय लोखंडे ने कर्नाटक के मंगलुरु से बीएएमएस की पढ़ाई पूरी की. वह पिछले 2 साल से पुणे के वाघोली इलाके के एक निजी अस्पताल में प्रैक्टिस कर रहा था.
इन सभी आरोपियों तक पहुंचने का जरिया मनीषा वाघमारे ही बनी. दरअसल, जांच में सामने आया कि मनीषा वाघमारे के 21 बैंक खाते है. इन में करीब 10 लाख रुपए जमा किए गए थे और यह रकम नीट परीक्षा के दौरान ट्रांसफर हुई थी. अब सीबीआई इस पूरे लेनदेन यानी मनी ट्रेल की गहराई से जांच कर रही है. एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह पैसा किन लोगों ने भेजा और इस का इस्तेमाल किस काम के लिए किया गया.
मनीषा वाघमारे और धनंजय लोखंडे की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने पेपर लीक कांड की एक दूसरी मास्टरमाइंड मनीषा गुरुनाथ मंधारे को भी गिरफ्तार कर लिया, जो उसी सोसाइटी के बी विंग में रहती थी, जहां मनीषा वाघमारे रहती थी. जिस तरह प्रो. कुलकर्णी एनटीए के पैनल से जुड़ा था, उसी तरह मनीषा गुरुनाथ भी एनटीए से जुड़ी थी.
जांच में सामने आया कि मनीषा गुरुनाथ को नैशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने नीट यूजी 2026 परीक्षा प्रक्रिया में एक्सपर्ट के तौर पर नियुक्त किया था. उसे बौटनी और जूलौजी के प्रश्नपत्रों तक पूरी पहुंच रखने का अधिकार था.
सीबीआई के मुताबिक, अप्रैल 2026 में मनीषा गुरुनाथ ने पुणे की मनीषा वाघमारे के जरिए नीट के छात्रों को एकत्र किया और अपने पुणे स्थित घर पर विशेष कोचिंग क्लास चलाई.
इन कक्षाओं में उस ने बौटनी और जूलौजी के कई सवाल छात्रों को बताए, नोट्स लिखवाए और किताबों में मार्क करवाए. यहां भी जांच में पाया गया कि इन में से ज्यादातर सवाल 3 मई, 2026 को हुई नीट परीक्षा के असली प्रश्नपत्र से मेल खाते थे.
धनंजय के भाई डा. अजय लोखंडे से भी पूछताछ की. इस के बाद धनंजय को राहुरी से उठाया गया. इस पूरे विवाद के बीच कोचिंग का हब कहे जाने वाले सीकर के कोचिंग सेंटरों पर भी सवाल उठ रहे हैं.
सीबीआई अब प्रो. कुलकर्णी, मनीषा वाघमारे और मनीषा गुरुनाथ के पुराने रिकौर्ड को भी खंगाल रही है. जांच एजेंसी को अंदेशा है कि इस सिंडिकेट का हाथ नीट 2024 के पेपर लीक और अन्य बड़ी राष्ट्रीय परीक्षाओं में हुई गड़बडिय़ों से भी जुड़ा हो सकता है.
शिक्षकों की भूमिका
इधर सीबीआई को शक था कि इस पेपर लीक में एनटीए के नेटवर्क में पैनल से जुड़े शिक्षकों की भूमिका संदिग्ध है. इसलिए पैनल में शामिल ऐसे शिक्षकों की सूची बना कर उन की पड़ताल की जा रही थी और उन की कौल व इलैक्ट्रौनिक डिवाइसेज खंगाली जा रही थी. इसी कड़ी में मनीषा संजय हवलदार का नाम एक और संदिग्ध के रूप में सामने आया.
मनीषा हवलदार महाराष्ट्र के पुणे स्थित सेठ हीरालाल सर्राफ प्रशाला में कार्यरत है. वह नीट यूजी 2026 की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी थी और प्रो. कुलकर्णी और मनीषा गुरुनाथ की तरह वह भी एनटीए द्वारा विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त की गई थी, जिस के कारण उसे फिजिक्स के प्रश्नपत्रों तक पूरी पहुंच प्राप्त थी.
मनीषा हवलदार ने परीक्षा के फिजिक्स अनुभाग के प्रश्नपत्र को लीक करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. लिहाजा सीबीआई ने उसे गिरफ्तार कर लिया.
सीबीआई को पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े ज्यादातर आरोपियों की गिरफ्तारी में नीट की परीक्षा देने वाले छात्रों व कोचिंग सेंटर्स में इस की तैयारी कर रहे बच्चों से पूछताछ करने के बाद ही तमाम सफलताएं मिल रही थीं. लेकिन मनी ट्रेल और लेनदेन के सबूत नहीं मिल रहे थे, इसलिए किसी छात्र या उस के अभिभावक को गिरफ्तार नहीं किया गया.
हालांकि कानूनन देखें तो गैरकानूनी चीज को बेचने वाला जितना दोषी होता है, उसे खरीदने वाला भी उतना ही दोषी होता है. पेपर लीक की जांच में भी ऐसा ही हो रहा था, जिस के चलते 20 मई को सीबीआई ने महाराष्ट्र के लातूर से एक डौक्टर मनोज शिरुरे को गिरफ्तार कर लिया, जिस ने अपने बेटे के लिए आरसीसी कोचिंग के संचालक शिवराज मोटेगांवकर उर्फ ‘एम सर’ से वही गेस पेपर खरीदे थे, जो लीक प्रश्नपत्र का हिस्सा थे.
एजेंसी ने कोचिंग संचालक शिवराज मोटेगांवकर और छात्र के अभिभावक डा. मनोज शिरुरे को गिरफ्तार कर लिया. इस मामले में किसी पेरेंट्स की यह पहली गिरफ्तारी थी.
जांच में पता चला कि लातूर के बाल रोग विशेषज्ञ डा. मनोज शिरुरे ने लीक हुए पेपर को 4 अस्पतालों में वितरित किया था. हालांकि सीबीआई अब उन्हें इस मामले में मुख्य सरकारी गवाह बनाने जा रही है. डा. मनोज के बयान और सबूतों के आधार पर, लातूर, नांदेड़ और संभाजीनगर के 5 अन्य डौक्टरों से पूछताछ की जा रही है. इन में से 2 बाल रोग विशेषज्ञ, 2 स्त्री रोग विशेषज्ञ और एक सरकारी अस्पताल में कार्यरत हैं.
सीबीआई का कहना है कि डा. मनोज ने अपने बेटे के लिए लीक हुआ पेपर लगभग 12 लाख में खरीदा था. इस के बाद, खर्च की भरपाई के लिए, उसी पेपर की पीडीएफ की प्रतियां टेलीग्राम के माध्यम से अन्य लोगों को भेजी गईं.
जांच में पता चला है कि डा. मनोज को लीक पेपर बेचने वाला शिवराज मोटेगांवकर लातूर में 8 एकड़ जमीन पर स्कूल-कालेज खोलने की तैयारी में था.
बताते हैं कि शिवराज मोटेगांवकर का महाराष्ट्र के कोचिंग जगत में ‘एम सर’ के नाम से नीट और जेईई की तैयारी कराने वाली इंडस्ट्री का एक जानामाना नाम है.
उन्होंने अपने कोचिंग का विस्तार किया. जो परीक्षाओं में टौपर्स देने के लिए महाराष्ट्र में मशहूर हो गया.
केमिस्ट्री में एमएससी (गोल्ड मेडलिस्ट) मोटेगांवकर को एक दूरदर्शी शिक्षक माना जाता है. हालांकि, अब उस के खिलाफ जांच चल रही है, क्योंकि उस पर केमिस्ट्री के रिटायर्ड प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी से कथित तौर पर जुड़े होने का आरोप है.
एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र किन लोगों तक पहुंचाया गया, इस के बदले कितनी रकम ली गई और इस नेटवर्क में और कौनकौन शामिल था?
नीट पेपर लीक मामले की जांच जैसेजैसे आगे बढ़ रही है, इस में हर रोज नए खुलासे, नई गिरफ्तारियां हो रही हैं. लेकिन जांच पूरी होने के बाद भी ऐसे ढेरों सवाल हैं, जिन का जवाब न तो शिक्षा मंत्रालय के पास है और न ही परीक्षा का आयोजन करने वाली एजेंसी एनटीए के पास. NEET Paper Leak






