Chhattisgarh Murder Mystery. एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स अब कोई नई बात नहीं है. अकसर महिलाएं पुरुषों के बहकावे में आ कर ऐसे अफेयर के चक्कर में पड़ जाती हैं और प्रेमी से पति जैसी अपेक्षाएं करने लगती हैं. जीवन की नीरसता को दूर करने और मौजमस्ती के लिए तो यह संबंध कुछ दिनों तक ठीक चलता है, लेकिन भावनाओं में बह कर प्रेमी से जीवन भर के लिए रिश्ते में बंध कर रहने के लिए शादी का दबाव बनाना भारी पड़ सकता है. काश! 28 वर्षीय पूर्णिमा पहले ही देख लेती कि प्रेमी शादीशुदा है तो शायद

पिछले कुछ महीनों से चंपा इस बात को ले कर बहुत परेशान थी कि उस के पति मुरली शंकर का पूर्णिमा पीछा नहीं छोड़ रही थी. पूर्णिमा ने उस की हंसतीमुसकराती जिंदगी में जैसे जहर घोल दिया था. वह अपने आप को कोसती कि आखिर उस में क्या कमी थी, जो पति पूर्णिमा के प्यार में पड़ गया.

मुरलीशंकर चौहान और पूर्णिमा एक आयुर्वेदिक दवा कंपनी में साथसाथ काम करते थे. तीखे नैननक्श वाली 28 साल की पूर्णिमा से मुरली शंकर को पहली नजर में ही प्यार हो गया था.

पूर्णिमा को पता था कि मुरली शंकर पहले से विवाहित था. इस के वावजूद वह मुरली शंकर को अपना दिल दे बैठी. मुरली की पत्नी चंपा चौहान को दोनों के संबंधों की भनक जब लगी तो पतिपत्नी के बीच विवाद होने लगा.

चंपा ने कई बार दोनों को समझाने का प्रयास किया. घर में कलह बढ़ते देख मुरली शंकर ने पूर्णिमा से दूरी बना ली, लेकिन पूर्णिमा लगातार मुरली पर शादी करने का दबाव बना रही थी.

जब पानी सिर से ऊपर होने लगा तो चंपा ने कहा, ”वो चुड़ैल पूर्णिमा तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ रही तो मैं कोई उपाय करूं?’’

”चंपा मेरा भरोसा करो, मैं भी अब उस की जिद से परेशान हो गया हूं, लेकिन समझ नहीं आ रहा कि क्या करूं?’’ मायूस हो कर मुरलीशंकर बोला.

”तुम पर आंख बंद कर भरोसा किया, इसी का परिणाम तो मुझे मिला है. मेरी सौतन बन कर उस ने मेरा सुखचैन छीन रखा है. अब मैं उसे हमेशा के लिए रास्ते से हटा दूंगी.’’ पत्नी चंपा ने अपना रुख साफ करते हुए कहा.

”मगर कैसे, क्या यह इतना आसान है. पकड़े गए तो बची हुई जिंदगी जेल में ही बीत जाएगी. हमारे बच्चों का क्या होगा.’’ मुरली ने बेरुखी से पूछा.

”बच्चों की इतनी ही चिंता होती तो किसी पराई औरत से इश्क न लड़ाते.’’ चंपा ने ताना मारते हुए बोली.

”तुम तो हमेशा एक ही राग अलापती रहती हो. माना कि मुझ से गलती हो गई. सब कुछ भूल कर तुम यह बताओ कि कैसे इस मुसीबत से निपटा जाए?’’ मुरली ने हथियार डालते हुए कहा.

”किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश करो, जो रुपए ले कर उसे ठिकाने लगा दे. उस चुड़ैल की सुपारी दे दो.’’ चंपा ने गुस्से से कहा.

”ऐसा कोई मिल भी गया तो रुपए बहुत मांगेगा, कहां से इंतजाम करेंगे.’’

”2-4 लाख भले ही खर्च हो जाएं, तुम शूटर की तलाश करो, मैं पोस्ट औफिस में अपनी एफडी तोड़ कर रुपयों का इंतजाम करती हूं.’’ चंपा बोली.

बस फिर क्या था मुरली शंकर अपराधी किस्म के व्यक्ति की तलाश में जुट गया. कुछ दिनों पहले मुरली ने बंजारा गांव के राजेंद्र महंत के बारे में सुना था कि वह जेल से छूट कर आया है और आए दिन पैसों के लिए छोटीबड़ी वारदात करता रहता है.

मुरली ने चंपा को राजेंद्र के बारे में बताया तो इस के बाद चंपा और मुरली शंकर ने छत्तीसगढ़ के बंजारा के रहने वाले राजेंद्र महंत से संपर्क किया.

मुरली को पता था कि राजेंद्र एक शूटर है, जो झारखंड में हुए एक गोलीकांड में जेल की हवा खाने के बाद फिलहाल जमानत पर चल रहा था. चंपा और मुरली ने राजेंद्र महंत से संपर्क करते हुए अपनी परेशानी बताई.

राजेंद्र ने पूर्णिमा को रास्ते से हटाने के लिए 4 लाख रुपए की मांग की. चंपा और मुरली ने 4 लाख रुपए में पूर्णिमा की हत्या की सुपारी दे दी.

बंजारा का रहने वाला राजेंद्र महंत झारखंड में 2 मामले में जेल जा चुका है. एक बार हत्या का प्रयास और आम्र्स ऐक्ट में जेल में बंद था. फिलहाल वह बेल पर आया था. उस ने अपने दोस्त गौरीशंकर के साथ मिल कर प्लान बनाया. राजेंद्र महंत के पास पिस्टल थी. पहले राजेंद्र ने एक पंजाबी मूवी शूटर देखी, उसे देख कर उस ने पूर्णिमा को शूट करने का प्लान बनाया.

राजेंद्र का आसपास के इलाके में बड़ा खौफ था, वह गांव वालों को धौंस जमा कर कहता था कि वह लारेंस बिश्नोई के गैंग में काम करता है.

हत्या की योजना में राजेंद्र महंत ने गौरीशंकर सिदार के अलावा सुनील महंत, राकेश महंत, वेदप्रकाश महंत उर्फ सोनू, सुमित गबेल और चंद्रशेखर महंत को भी शामिल किया.

इन सभी ने मिल कर 26 जून, 2026 को वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई और सुपारी की राशि आपस में बांटने का फैसला किया.

सुपारी की रकम जुटाने के लिए चंपा चौहान ने अपना पोस्ट औफिस की एफडी तुड़वाई और वहां से रकम निकाल कर राजेंद्र महंत को 2 लाख रुपए एडवांस के तौर पर दे दिए. हत्या के बाद शेष रकम देने की बात तय हुई थी.

गांव के जिस इलाके में पूर्णिमा का मकान था, वहां बाहर खड़े लोगों से 2 बाइक सवार युवकों ने पूछा, ”पूर्णिमा चौहान का घर कौन सा है?’’

बाहर खड़े एक शख्स ने उन युवकों से सवाल करते हुए कहा, ”क्या काम है?’’

”दवाइयां लेनी है पूर्णिमाजी से.’’ बाइक पर बैठेबैठे ही एक युवक ने जवाब दिया.

आसपास के लोगों को मालूम था कि पूर्णिमा आयुर्वेदिक दवाइयां अपने घर से भी लोगों को उपलब्ध कराती थी, यही सोच कर उन्होंने पूर्णिमा के घर का पता बता दिया.

26 जून, 2026 की सुबह करीब 11 बजे का वक्त था. जोंगरा गांव के अपने पैतृक घर में पूर्णिमा अपने औफिस जाने के लिए तैयार हो रही थी. तभी घर के बाहर एक बिना नंबर की बाइक आ कर रुकी. चेहरे को सफेद गमछे से ढंके हुए 2 नवयुवक बाइक से नीचे उतरे. उन में से एक युवक ने घर के भीतर घुस कर आवाज लगा कर पूछा, ”पूर्णिमाजी हैं क्या? मुझे दवाइयां लेनी हैं.’’

उस की आवाज सुन कर पूर्णिमा कमरे से बाहर निकल कर सामने आ गई. पूर्णिमा को सामने देखते ही उस युवक ने पिस्तौल से उस पर ताबड़तोड़ 3 गोलियां दाग दीं और तेजी से बाहर निकल कर उसी बाइक से भाग निकले.

गोलियों की आवाज सुन कर पूर्णिमा की मम्मी और भाई बाहर निकल कर आए तो देखा पूर्णिमा खून से लथपथ पड़ी हुई थी. गोलियां उस के सिर सहित शरीर के अन्य हिस्सों में लगी थीं. इतना सब कुछ ही पलों में हो गया.

इसी दौरान किसी ने पुलिस कंट्रोल रूम के डायल 112 को सूचना दे दी कि 2 नकाबपोश एक घर में घुस कर गोली चला कर फरार हो गए. जिस को गोली लगी, वो घायल अवस्था में है.

आननफानन में घर के लोग उसे अस्पताल ले जाने के लिए निकल ही रहे थे, तभी सक्ती पुलिस थाने के टीआई लखन लाल पटेल अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और पूर्णिमा को सरकारी अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उस की मौत हो गई.

एक छोटे से गांव में दिनदहाड़े हत्या की घटना से गांव में दहशत फैल गई. पुलिस के आला अधिकारियों के साथ फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल पर पहुंच कर साक्ष्य जुटाए.

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आईजी (बिलासपुर रेंज) रामगोपाल गर्ग के दिशानिर्देश और सक्ती जिले के एसपी प्रफुल्ल ठाकुर के मार्गदर्शन में एडिशनल एसपी पंकज पटेल एवं एसडीओपी डा. भुवनेश्वरी पैंकरा के पर्यवेक्षण में तत्काल एक पुलिस टीम का गठन किया गया.

टीआई लखनलाल पटेल के नेतृत्व में इंसपेक्टर कमल किशोर महतो, अमित सिंह, एसआई सी.पी. कंवर, भूपेंद्र चंद्रा, अनवर अली, जी.एस. राजपूत, एएसआई जे.के. वर्मा, नीलमणि कुसुम, चित्रांगद चंद्रा, सुरेश पाठक हैडकांस्टेबल शब्बीर मेमन, प्रेेम सिदार, तेज कुमार गबेल, कांस्टेबल फारुख खान, गोपाल साहू, एलेक्सियूस मिंज कमलेश लहरे, पवन सांडे, कमलकिशोर सिदार, दीपक साहू, जितेंद्र कंवर, भागवत श्रीवास, यादराम चंद्रा, प्रमोद खाखा, बृजमोहन नेताम, दीपक बंजारे श्याम गबेल, महासिंह सिदार, लेडी कांस्टेबल अनिता कंवर, सुलेखा कश्यप, सुमित्रा बंजारे, धरमिन सिदार को टीम में शामिल किया गया.

धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ का सक्ती जिला 33वां जिला है, जिसे जांजगीर-चांपा जिले से अलग कर के बनाया गया है. इस नए जिले की घोषणा 15 अगस्त, 2021 को हुई थी और 9 सितंबर, 2022 को इस का आधिकारिक उद्ïघाटन किया गया था.

यह जिला बिलासपुर संभाग के अंतर्गत आता है और इस का मुख्यालय सक्ती शहर है. मुंबई हावड़ा रेल मार्ग का एक छोटा सा रेलवे स्टेशन सक्ती नैशनल हाइवे 49 से जुड़ा हुआ है. छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले का जोंगरा गांव जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर पक्की सड़क से जुडा हुआ है. सक्ती उन 14 रियासतों में से एक थी, जिन पर गोंड राजाओं का शासन था.

इस रियासत के संस्थापक हरि और गुर्जर थे. जिले में डोलोमाइट के प्रचुर भंडार हैं, इसलिए इसे भारत का डोलोमाइट हब कहा जाता है. यहां बड़े पैमाने पर कृषि उपकरण भी बनाए जाते हैं.

पुलिस टीम लगातार 4 दिनों तक अज्ञात आरोपियों की पतासाजी में जुटी रही. पतासाजी के दौरान पूर्णिमा के फेमिली वालों और अनेक संदेहियों से पूछताछ की गई. आरोपियों की तलाश के लिए तकनीकी साधनों का उपयोग करते हुए मोबाइल टावर डंप डेटा एवं कौल डिटेल्स का गहनता से विश्लेषण किया गया तथा सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए.

विवेचना के दौरान पता चला कि 25 साल की पूर्णिमा चौहान उर्फ पूनम जोंगरा गांव की रहने वाली थी और पिछले 4 सालों से पंजाब की एक कंपनी स्वामिनी प्राइवेट लिमिटेड में सेल्स और मार्केटिंग का काम कर रही थी. यह कंपनी आयुर्वेदिक दवा बनाती है.

उस की शादी राजगढ़ जिले में हुई थी, लेकिन रिश्ता टूट जाने पर वह पिछले 2 साल से अपने पेरेंट्स के साथ जोंगरा गांव में ही रहती थी.

मर्द की नीयत खूबसूरत लड़की को देख कर किस तरह बदल जाती है, इस का अंदाजा रायगढ़ जिले के थाना पूंजीपथरा पुलिस थाना इलाके के गांव देल्लारी निवासी 43 साल के मुरली शंकर से लगाया जा सकता है.

घर में 40 साल की पत्नी चंपा के होते हुए वह पूर्णिमा पर डोरे डालने लगा. आयुर्वेदिक दवाओं की मार्केटिंग के लिए अकसर वे दोनों साथसाथ ही अलगअलग शहरों में आतेजाते थे. पूर्णिमा का अपने पति से रिश्ता खत्म हो चुका था, ऐसे में अपनी जिस्मानी जरूरत को पूरा करने के लिए वह भी मुरली पर फिदा हो गई.

पूर्णिमा के मुरलीशंकर चौहान के साथ प्रेम संबंध थे और इस बात को ले कर गौरीशंकर और पत्नी चंपा चौहान के बीच लगातार अनबन एवं लड़ाईझगड़ा चल रहा था.

संदेह के आधार पर जब पुलिस ने चंपा चौहान से पूछताछ की तो पहले तो वह बारबार अपना बयान बदल कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रही थी. जब पुलिस ने उस से सख्ती से पूछताछ की तो सारी कहानी सामने आ गई.

पूछताछ में चंपा चौहान ने कुबूल किया कि उस ने अपने पति के साथ मिल कर पूर्णिमा को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी. इस के लिए झारखंड में हत्या और हत्या के प्रयास के मामले में जमानत पर बाहर आए राजेंद्र महंत को 4 लाख रुपए की सुपारी दी गई थी. सौदे के तहत पहली किस्त के रूप में 2 लाख रुपए दिए गए थे.

चंपा चौहान को उस के पति और पूर्णिमा चौहान के प्रेम संबंध होने की जानकारी होने पर अपने पति मुरलीशंकर और पूर्णिमा को बारबार समझाया.

चंपा चौहान के समझाने पर उस का पति मुरलीशंकर मान गया और पूर्णिमा चौहान से दूरी बना ली थी, किंतु पूर्णिमा नहीं मान रही थी और मुरलीशंकर पर लगातार शादी करने का दबाव बना रही थी, जिस से परेशान हो कर मुरलीशंकर चौहान और चंपा चौहान ने पूर्णिमा चौहान को जान से मार कर रास्ते से हटाने की योजना बनाई.

मुख्य शूटर राजेंद्र महंत ने अपने साथियों गौरीशंकर सिदार, सुनील महंत, राकेश महंत, वेदप्रकाश महंत उर्फ सोनू, सुमित गबेल और चंद्रशेखर महंत के साथ मिल कर हत्या की योजना बनाई.

तय योजना के अनुसार 26 जून, 2026 को गौरीशंकर सिदार और सुनील महंत बाइक से जोंगरा पहुंचे, जहां गौरीशंकर ने पिस्तौल से पूर्णिमा पर गोली चला दी.

घटना के बाद दोनों आरोपी सुमित गबेल द्वारा पहले से उपलब्ध कराई गई बाइक से फरार हो गए. हत्या के बाद आरोपी अलगअलग राज्यों में छिप गए.

फरारी के दौरान राकेश महंत ने दोनों को दूसरे राज्यों में भागने में मदद की. बाद में चंपा चौहान से सुपारी की रकम ले कर राजेंद्र महंत, वेदप्रकाश महंत और चंद्रशेखर महंत ने उसे आपस में बांट लिया.

तकनीकी जांच के दौरान राजेंद्र महंत की लोकेशन झारखंड के जमशेदपुर, गौरीशंकर सिदार और सुनील महंत की लोकेशन महाराष्ट्र के पुणे में मिली. इस के बाद पुलिस की विशेष टीमें दोनों राज्यों में रवाना हुईं और घेराबंदी कर तीनों को हिरासत में लिया.

लोकेशन के आधार पर पुलिस ने राजेंद्र महंत को झारखंड के जमशेदपुर से तथा गौरीशंकर सिदार और सुनील महंत को महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार किया. पूछताछ में उन्होंने हत्या की पूरी साजिश का खुलासा कर दिया.

पुलिस ने काररवाई के दौरान हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल, 4 जिंदा कारतूस, 2 बाइक, 7 मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और 71,500 रुपए नकद बरामद किए हैं. घटनास्थल से पिस्तौल के 3 खाली खोखे भी जब्त किए गए.

जब्त सामग्री में राजेंद्र महंत से पिस्तौल, 4 जिंदा कारतूस और 52 हजार रुपए नकद, गौरीशंकर सिदार से मोबाइल और 6 हजार रुपए, चंपा चौहान से बैंक पासबुक और मोबाइल, मुरलीशंकर चौहान से मोबाइल, सुमित गबेल से टीवीएस बाइक, मोबाइल और 2 हजार रुपए, वेदप्रकाश महंत उर्फ सोनू से बाइक, मोबाइल और 4 हजार रुपए, सुनील महंत से 4 हजार रुपए, चंद्रशेखर महंत से मोबाइल और 3, 500 रुपए और राकेश महंत से मोबाइल बरामद किया गया है.

सक्ती जिले के एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने पहली जुलाई, 2026 को प्रैस कौन्फ्रेंस कर मामले का खुलासा किया. पुलिस ने इस मामले में कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इन में रायगढ़ जिले के देल्लारी निवासी चंपा चौहान और उस का पति मुरलीशंकर चौहान, मालखरौदा निवासी सुनील महंत, खरसिया के बकेली निवासी गौरीशंकर सिदार, मालखरौदा के बंजारी निवासी राकेश महंत, वेदप्रकाश महंत उर्फ सोनू, राजेंद्र महंत और चंद्रशेखर महंत और रायगढ़ जिले के बकेली निवासी सुमित गबेल शामिल है.

मुरलीशंकर और चंपा को छोड़ कर घटना को अंजाम देने वाले सभी आरोपी 19 से 25 साल के युवक हैं. इन युवकों को महंगे मोबाइल फोन रखने का शौक है, जो कामकाज करने के बजाय दिन भर मोबाइल में रील देखने में व्यस्त रहते हैं. पैसों के लालच में इन्होंने राजेंद्र महंत के कहने पर वारदात को अंजाम दिया. सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. Chhattisgarh Murder Mystery

 

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