Fake Baba Case. लोग आज भी ढोंगी और पाखंडी बाबाओं के जाल में केवल इसलिए फंस जाते हैं, क्योंकि वे मानसिक तनाव, जीवन के दुखों का समाधान और तार्किक सोच की कमी से जूझ रहे होते हैं. एक डौक्टर की लाडली बेटी और आईटी कंपनी में मैनेजर मधु भी एक ऐसी ही युवती थी, जो 17 सालों तक एक ढोंगी बाबा के यौन उत्पीडऩ का शिकार होती रही. आखिर ऐसी कौन सी वजह रही जो वह उस ढोंगी बाबा के चंगुल से आजाद नहीं हो पा रही थी?
उस दिन मंगलवार था और तारीख थी 16 जून, 2026. पुणे के पूर्वी हिस्से में मूला मुथा नदी के तट पर बसा खराडी आज पुणे का एक प्रमुख आईटी और व्यावसायिक केंद्र बन गया है. स्थानीय इतिहास के अनुसार ‘खराडी’ नाम इस क्षेत्र में पाई जाने वाली लालसर और खारयुक्त मिट्टी के कारण पड़ा.
रोजगार के नए अवसरों के कारण देश भर से कामकाजी पेशेवर यहां आ कर बसने लगे हैं. कभी यह महज 30 हजार की आबादी वाला एक गांव भर था, आज उस की आबादी तेजी से बढ़ कर 3 लाख से अधिक हो गई है.
विकास को गति देने के लिए इस खराडी क्षेत्र को पुणे नगर निगम के दायरे में लाया गया, जिस से यहां पर चमचमाती सड़कें, आधुनिक मौल, फाइव स्टार होटल और रिहायशी टावर बनने लगे. आज का खराडी अपनी पारंपरिक ग्रामीण जड़ों को पीछे छोड़ते हुए आधुनिक पुणे के सब से महंगे और विकसित इलाकों में से एक बन चुका है.
16 जून, 2026 की सुबह खराडी थाने के सीनियर इंसपेक्टर संजय चव्हाण अपने सहयोगियों से बातचीत कर उन्हें उचित दिशानिर्देश दे रहे थे, तभी गेट पर तैनात संतरी एक महिला को ले कर उन के औफिस में आ गया और सैल्यूट मार कर बोला, ”जय हिंद साहब, यह महिला काफी परेशानी में है और अपनी व्यथा आप से कहने के लिए गुहार लगा रही है.’’
”ठीक है संतोष, मैं इन से पूछताछ करता हूं.’’ कहते हुए संजय चव्हाण ने संतरी को जाने को कह दिया.
सालों हुआ शोषण
उस के बाद इंसपेक्टर चव्हाण ने महिला को अपने सामने वाली कुरसी पर बैठने को कहा. संजय चव्हाण ने जैसे ही उस महिला को औपचारिकता निभाते हुए पानी का गिलास औफर किया तो अगले ही पल उस ने एक ही सांस में पूरा गिलास गटक लिया. वह महिला लगभग 40 से 45 वर्ष के बीच की उम्र की लग रही थी. वह काफी घबराई हुई और डरीडरी सी थी. उस के चेहरे और हाथपैरों पर खरोंचों के काफी निशान दिखाई दे रहे थे.
”आप और पानी लेंगी?’’ संजय चव्हाण ने पूछा. ”जी, एक गिलास और मंगवा दीजिए,’’ महिला ने शालीनता से कहा.
संजय चव्हाण ने तुरंत पानी मंगवा कर महिला को दिया तो पानी पी कर जैसे उस महिला की जान में जान आई थी. अब वह अपने आप को रिलैक्स महसूस कर रही थी.
”मैम, आप बहुत परेशान दिखाई दे रही हैं. खुल कर कहिए, क्या बात है? हम आप की सहायता करने के लिए ही यहां पर बैठे हैं.’’ संजय चव्हाण ने कहा.
”इंसपेक्टर साहब, मेरा नाम मधु (परिवर्तित नाम) है. मैं पुणे की एक जानीमानी आईटी कंपनी में असोसिएट प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर काम करती हूं और मूलरूप से हरियाणा की रहने वाली हूं.
”सर, मेरा पिछले 17 सालों से पुणे के ही एक बाबा द्वारा शारीरिक और यौन शोषण किया जा रहा है. मुझे उन लोगों ने कैद कर रखा था और मेरे कमरे में और बाहर सीसीटीवी कैमरे लगा कर मेरी हर हरकत की निगरानी की जा रही थी. मैं किसी तरह हिम्मत जुटा कर सीसीटीवी कैमरे तोड़ कर यहां पर आई हूं.
”सर, आप से निवेदन है कि किसी महिला पुलिस अधिकारी से मेरी जल्दी मुलाकात करा दीजिए, ताकि मैं अपने ऊपर हुए जुल्मों की दास्तान उन को बता सकूं. मैं जिस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने आई हूं, वह कोई मामूली आदमी नहीं है. वह इंसान करोड़ों का मालिक है और समाज में उस की बहुत प्रतिष्ठा है.’’ महिला ने रोते हुए कहा.
”देखिए मैम, अब आप अपने आप को पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर सकती हैं. मैं अभी अपने सीनियर अफसरों से बात करता हूं. आप पूरा इत्मीनान रखें, हम आप को पूरा यकीन दिलाते हैं कि आप को पूरा न्याय दिलाने की भरपूर कोशिश करेंगे. आप बिलकुल निश्चिंत रहें.’’ संजय चव्हाण ने महिला को तसल्ली देते हुए कहा.
महिला की बातचीत, उस के व्यवहार व उस के शरीर पर अनगिनत जख्मों को देख कर संजय चव्हाण समझ चुके थे कि यह केस काफी हाईप्रोफाइल है. महिला के व्यवहार से भी उन्हें मालूम हो चुका था कि यह महिला काफी पढ़ीलिखी, अच्छे परिवार से ताल्लुक रखने वाली और एक नामीगिरामी कंपनी में एक उच्च पद पर पदस्थ है.
संजय चव्हाण ने तुरंत पुणे पुलिस की तेजतर्रार पुलिस अधिकारी एडिशनल कमिश्नर (क्राइम) तेजस्वरी सतपुते को फोन पर इस वारदात की जानकारी दी. तेजस्वरी सतपुते ने संजय चव्हाण को महिला को अपने साथ लाने का आदेश दिया. फिर इंसपेक्टर संजय चव्हाण ने मधु को पुलिस जीप में बिठाया और सीधे तेजस्वरी सतपुते के कार्यालय पहुंच गए.
एडिशनल कमिश्नर तेजस्वरी सतपुते के सामने पहुंचते ही मधु फूटफूट कर रोने लगी. तेजस्वरी सतपुते ने उसे दिलासा देते हुए अपने ऊपर हुए जुल्मों की बात बेझिझक बताने को कहा.
पीडि़ता मधु ने बताया कि वह मूलरूप से हरियाणा की रहने वाली है. उस के फादर पेशे से एक डौक्टर हैं. कई साल पहले उस का परिवार बाबा राधामोहन मिश्रा उर्फ राधेश्याम मिश्रा के संपर्क में आया था, जिस के बाद वे सभी लोग पुणे आ कर वाघोली (खराडी) इलाके में स्थित बाबा राधामोहन के आश्रम में रहने लगे थे.
पीडि़ता ने बताया कि वह पुणे में ही एक कारपोरेट कंपनी में असोसिएट मैनेजर के पद पर कार्यरत है.
मधु ने आगे बताया कि मेरा पूरा परिवार बाबा राधामोहन मिश्रा के प्रभाव में था, इसलिए जैसा राधामोहन ने कहा, वैसा ही मेरे फादर करते रहे. बाबा ने मेरे फादर से करोड़ों रुपए ठग लिए और एक दिन मुझे छात्रावास में बुला कर अकेले कमरे में मेरे साथ गलत संबंध बना कर मेरा वीडियो भी बनवा लिया. उस के बाद वह काफी सालों तक वीडियो मेरे परिवार को दिखाने और वायरल करने की धमकी दे कर मेरा यौनशोषण करता रहा.
मधु ने आगे बताया कि यह ढोंगी बाबा उस की शादी कहीं भी नहीं होने देता था. वह लगभग 17 साल तक उस का यौन शोषण करता रहा.
उस ने आगे बताया कि उस के उत्पीडऩ से छुटकारा पाने के लिए वह मजबूरन अपने घर से भाग गई थी और उस ने एक मैरिज पोर्टल पर मिले एक व्यक्ति से शादी कर अपना घर भी बसा लिया, लेकिन राधामोहन मिश्रा ने अपने गुर्गों के जरिए मेरा पता लगवा लिया और वीडियो दिखा कर उस को वायरल करने की धमकी दे कर उसे अपने पति से तलाक लेने के लिए मजबूर कर दिया.
अपने घर में की चोरी
उस के बाद बाबा राधामोहन ने मुझ से मेरे ही घर में चोरी करवा कर सारे पैसे और गहने अपने पास रख लिए. उस के बाद मुझे एक फ्लैट में रहने के लिए मजबूर किया और वहां पर चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगवा कर मेरी दिनरात निगरानी करता था. इस बीच में वह मेरी नग्न तसवीरें और गंदे वीडियो लगातार बना कर मेरा यौन शोषण करता रहा.
मधु ने आगे बताया कि वर्षों तक शारीरिक, मानसिक और यौन उत्पीडऩ सहने के बाद उस ने हिम्मत जुटाई. उस ने अपने फ्लैट और कमरे के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खुद तोड़ डाला, ताकि बाबा और उस के गुर्गे उस की हरकत न देख सकें और उस के बाद इसी का फायदा उठा कर वह उस अधर्मी बाबा के बंगलेनुमा आश्रम से भागने में सफल रही और अपनी जान बचा कर सीधे पुलिस स्टेशन में आई.
मधु से आपबीती सुनने के बाद एडिशनल कमिश्नर ने यह जानकारी पुलिस कमिश्नर (पुणे) अमितेश कुमार को दी. मामला बहुत गंभीर था, इसलिए उन्होंने यह केस जौइंट कमिश्नर के हवाले करते हुए उन के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन कर दिया.
इस टीम में एडिशनल कमिश्नर (ईस्ट रीजन) मनोज पाटिल, एडिशनल कमिश्नर (क्राइम) तेजस्वरी सतपुते, डीसीपी (क्राइम) गौहर हसन, डीसीपी (जोन-7) प्रशांत, एसीपी (खराडी डिवीजन) नूतन विश्वनाथ पवार, एसीपी (क्राइम-2) राजेंद्र मलिक, सीनियर इंसपेक्टर संजय चव्हाण, एपीआई रविंद्र गोडसे, कांस्टेबल नवनाथ वालके, श्रीकांत वालके, नानेकर, श्रीकांत शेंडे, सुरेंद्र सावले और श्रीकांत कोद्रे को शामिल किया गया.
विशेष पुलिस टीम ने इस घटना की तह तक पहुंचने के लिए अपने विश्वस्त मुखबिरों को भी काम पर लगा दिया था.
पुख्ता जानकारी मिलने के बाद टीम ने 18 जून, 2026 को पुणे के वाघोली स्थित बाबा राधामोहन मिश्रा उर्फ राधेश्याम मिश्रा के आधुनिक गुरुकुल आश्रम में दबिश डाली. दबिश के दौरान पुलिस को भारी संख्या में डिजिटल उपकरण, हथियार, कारतूस, नकदी, जेवर और एक गुप्त भूमिगत सुरंग भी मिली.
पुलिस को जांच के दौरान आश्रम में एक भूमिगत कमरा और एक निर्माणाधीन गुप्त सुरंग भी मिली. पता चला कि इस गुप्त स्थान का इस्तेमाल संदिग्ध गतिविधियों को संचालित करने के लिए किया जाता था. छापेमारी के दौरान पुलिस को 12 लैपटाप, एक टैबलेट, 19 हार्डडिस्क, 11 मोबाइल फोन, 23 पेन ड्राइव और काफी संख्या में सीडी और डीवीडी बरामद हुईं.
इस के अतिरिक्त पुलिस ने आश्रम से साढ़े 6 लाख रुपए कैश, करीब 15 लाख रुपए के आभूषण, भारी मात्रा में संदिग्ध दवाएं, नशीली गोलियां बरामद कीं.
पुलिस ने इस दौरान आश्रम के भीतर सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी में बंधक बना कर रखी गई महिलाओं को मुक्त कराया और उन के बयान दर्ज किए.
8 आरोपी हुए अरेस्ट
छापेमारी के दौरान पुलिस ने कुल 8 लोगों को आश्रम से गिरफ्तार किया, जिन में मुख्य आरोपी राधामोहन मिश्रा उर्फ राधेश्याम मिश्रा (59 वर्ष), सहयोगी और उस का दाहिना हाथ कहा जाने वाला स्वामी कमल नयन (58 वर्ष), महिला सहयोगी कनिका हंसराज आहूजा (34 वर्ष), कीर्ति हंसराज आहूजा (38 वर्ष), खुशबू गजेंद्र हुडिय़ा (37 वर्ष), श्वेता अवध बिहारी मिश्रा (37 वर्ष), श्वेता संजय पांडे (28 वर्ष) और अमृता अवध बिहारी मिश्रा (32 वर्ष) शामिल थीं.
छापेमारी के दौरान बरामद उपकरणों के बारे में पुलिस ने बताया कि इन में पीडि़तों को ब्लैकमेल करने के लिए रिकौर्ड किए गए उन महिलाओं के निजी और अश्लील वीडियो भी हो सकते हैं. इसलिए न्यायालय के आदेश पर इन सभी उपकरणों की फोरैंसिक जांच कराई जा रही है.
छापेमारी के बाद पुलिस ने इस पूरे परिसर को सील कर दिया और राधामोहन मिश्रा उर्फ राधेश्याम मिश्रा और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2), 64(2)(एम), 68, 74, 75, 77, 123, 115(2), 351(2), 3(5), महाराष्ट्र मानव बलि, अन्य अमानवीय बुराई, अघोरी प्रथाओं, काला जादू अधिनियम की रोकथाम और उन्मूलन की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया.
पुणे के कथित अधर्मी बाबा राधामोहन मिश्रा पर आरोप लगाने वाली 41 वर्षीय मधु हरियाणा की निवासी है. उन दिनों हरियाणा का ही निवासी कमल नयन जिस ने अपने आप को स्वामी के रूप में प्रचारित किया हुआ था, उस का मधु के परिवार में कुछ समय पहले आनाजाना शुरू हुआ था. वह मधु के पेरेंट्स से धर्मकर्म के बारे में बातचीत कर उन्हें प्रभावित करता रहता था. डौक्टर के परिवार में पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य, पारिवारिक और आर्थिक परेशानियां चल रही थीं.
जब उस के परिवार में इस तरह की आकस्मिक समस्याओं की शुरुआत हुई तो इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए स्वामी कमल नयन ने मधु के परिवार को विश्वास दिलाया कि उस के गुरु बाबा राधामोहन मिश्रा उर्फ राधेश्याम मिश्रा के पास अत्यंत दिव्य शक्तियां हैं और वह एक दिव्य अवतारी पुरुष हैं.
स्वामी कमल नयन ने डौक्टर परिवार को पूरापूरा भरोसा दिलाया कि दिव्य शक्तियों के मालिक बाबा राधामोहन मिश्रा अपनी अलौकिक शक्तियों से उन के परिवार के सभी दुखों, कष्टों, परेशानियों और बीमारियों को पूरी तरह से ठीक कर देंगे और कुछ ही समय के बाद तुम्हारा पूरा परिवार निरोगी और धनसंपत्ति से संपन्न हो जाएगा.
अधर्मी बाबा राधामोहन मिश्रा का नेटवर्क और इस वीभत्स अपराध की शुरुआत इस तरह 2001 में हरियाणा से ही शुरू हुई थी.
अंधविश्वास का जाल
इसी अंधविश्वास के जाल में फंसा कर स्वामी कमल नयन ने मधु के परिवार को बाबा राधामोहन मिश्रा से मिलवाया था. बाबा राधामोहन मिश्रा ने मधु के फादर को अपनी दैवीय और शक्तिशाली चमत्कारी शक्तियों के झांसे में ले लिया. बाबा राधेश्याम मिश्रा ने डौक्टर को ऐसे अनेक लोगों के नाम बताए, जो उस के संपर्क में आ कर थोड़े समय में ही मालामाल बन गए थे.
पीडि़ता के डौक्टर पिता अब धीरेधीरे बाबा राधेश्याम मिश्रा और स्वामी कमल नयन के प्रभाव में आ गए थे. वर्ष 2003 में पीडि़ता के पिता डौक्टर ने बाबा राधेश्याम मिश्रा को कुरुक्षेत्र में एक छात्रावास शुरू करने के लिए लाखों रुपए की आर्थिक सहायता भी दी थी.
उस के बाद मधु के पापा ने कुरुक्षेत्र में एक घर बनवाया था और फिर उन का पूरा परिवार नए घर में शिफ्ट हो गया था. उसी साल पीडि़ता का छोटा भाई प्रवीण (परिवर्तित नाम) घर की दूसरी मंजिल से गिर गया, जिसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया और इलाज के बाद वह ठीक भी हो गया था.
इस घटना के बाद बाबा राधामोहन मिश्रा ने डौक्टर परिवार के सामने यह दावा किया कि उसे उन के बेटे के एक्सीडेंट की सूचना पहले ही हो चुकी थी, जिस का उस ने पहले ही अनुष्ठान कर लिया था. तुम्हारा बेटा प्रवीण मेरे अनुष्ठान, चमत्कारिक शक्तियों के कारण ही जिंदा बच पाया है.
राधेश्याम मिश्रा के इस दावे ने डौक्टर व उस के परिवार के सभी सदस्यों के मन में उस के प्रति अंधभक्ति को और गहरा कर दिया था. वे सब बाबा के आगे नतमस्तक हो गए थे.
लगभग उन्हीं दिनों मधु ने हरियाणा के एक डेंटल कालेज में दाखिला ले लिया. तभी एक दिन बाबा राधामोहन मिश्रा ने मधु को कुरुक्षेत्र के छात्रावास में मिलने के लिए बुलाया. उस के बाद मधु को बाबा राधामोहन मिश्रा एक अंधेरे कमरे में ले कर गया. वहां पर पीडि़ता को लैपटाप में कुछ अश्लील वीडियो दिखाए गए.
उस के बाद बाबा राधामोहन मिश्रा ने मधु के साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए. उस के बाद पीडि़ता को डराने के लिए बाबा राधामोहन ने अपनी एक सेविका को पीडि़ता को नग्न हालत में लकड़ी के डंडे से बारबार पीटने को कहा, ताकि यह देखा जा सके कि वह दर्द सहन कर सकती या नहीं.
फिर कुछ दिनों तक पीडि़ता को अकेले कमरे में कैद कर के रखा गया. कमरे में बाबा ने एक दिन उसे प्रसव होते हुए एक महिला का वीडियो दिखाया और पूछा कि क्या तुम इस प्रसव पीड़ा को सहन कर सकती हो? जब मधु ने हां कहा तो उस ने उस की लकड़ी के एक मोटे डंडे से खूब पिटाई करनी शुरू कर दी.
पीडि़ता जब दर्द के मारे जोरजोर से चिल्लाने लगी तो बाबा राधामोहन ने उसे चिल्लाते हुए कहा कि यदि तुम मेरी हलकी मार तक सहन नहीं कर सकती तो शादी के बाद तुम क्या करोगी? प्रसव पीड़ा कैसे सह पाओगी?
उस के बाद बाबा ने उसे एक नई डायरी दी और चिल्लाते हुए आदेश दिया कि तुम इस में अपने मन की बात लिखो, मुझ से कुछ भी मत छिपाना, यदि कुछ भी छिपाया तो तुम पापिन हो जाओगी और नरक में जाओगी. मैं फिर तुम्हारे द्वारा लिखी गई मन की बात का विश्लेषण करूंगा.
इस बीच बाबा राधामोहन मिश्रा पीडि़ता के पेरेंट्स को यह बताता रहा कि तुम्हारी बेटी के ऊपर बहुत ही बुरी आत्मा का साया है, जो इस के दिमाग से हमेशा खेलता रहता है. इसे मैं जल्द ही ठीक कर दूंगा, तुम बिलकुल भी चिंता मत करो.
इस बीच पीडि़ता ने कई बार अपने पेरेंट्स को बाबा की सच्चाई बताने की कोशिश भी की, लेकिन वे सब तो बाबा के प्रभाव में थे. उन्होंने अपनी बेटी मधु की बातों पर विश्वास ही नहीं किया. यह वर्ष 2009 को बात है.
पीडि़ता मधु बाबा राधामोहन के शोषण से तंग आ कर शादी करना चाहती थी, लेकिन उस की इस बात पर बाबा राधामोहन मिश्रा ने एकदम से इंकार कर दिया. उस ने एक दिन मधु को उस के पेरेंट्स के सामने ही बुरी तरह पीटा और कहा कि यह लड़की चरित्रहीन है. इस के अपने कालेज के कई सहपाठियों से अवैध संबंध रहे हैं. मैं अंतर्यामी सब बातें जानता हूं.
इस के बावजूद किसी तरह मधु अपनी पढ़ाई करती रही. वर्ष 2010 में बाबा ने एक बार फिर मधु को अकेले में मिलने के लिए बुलवाया और अपनी सेविका खुशबू हूडिया के कमरे में ले गया. वहां पर मधु को खुशबू हूडिया ने चाय पिलाई, जिस में नशीली गोलियां मिली हुई थीं.
खुशबू हूडिया के कमरे से जाने के बाद बाबा राधामोहन मिश्रा ने मधु को उस के पूरे परिवार को मारने की धमकी दे कर उस से जबरन कई बार बलात्कार किया. उस ने यह बात किसी को न बताने की धमकी दी.
2010 में बाबा राधामोहन मिश्रा ने पीडि़ता और उस के पूरे परिवार को कुरुक्षेत्र से पुणे पलायन के लिए मजबूर किया. इस के लिए उस ने परिवार से पैसे मांगे तो उन्होंने दे भी दिए, क्योंकि पूरा परिवार उस के प्रभाव में था. पुणे में वे सब पहले वडगांव शेरी में रहे, वहां पर भी बाबा राधामोहन मिश्रा ने पीडि़ता का कई बार यौन शोषण किया.
वर्ष 2013 में बाबा राधामोहन मिश्रा अपने चेलों और पीडि़ता के परिवार को ले कर उबाले नगर के मौली सदन में रहने को आ गया. वह एक दोमंजिला बिल्डिंग थी, जहां उस के पेरेंट्स भूतल पर रहते थे, जबकि मधु बाबा राधामोहन मिश्रा और उस के चेलेचपाटे ऊपरी मंजिल पर रहते थे.
होता रहा उत्पीडऩ
2013 से 2016 के बीच बाबा राधामोहन मिश्रा ने कई बार मधु का यौन शोषण किया. बाबा ने मधु के नग्न वीडियो बनाए. मधु का मुंह बंद रखने के लिए और शारीरिक और मानसिक रूप से तोडऩे के लिए बाबा राधा मोहन मिश्रा और उस के सहयोगी टेजर गन से उसे इलेक्ट्रिक शौक देते थे.
पीडि़ता जब कभी बाबा राधामोहन की गलत हरकतों या यौन शोषण का विरोध करती थी तो बाबा राधामोहन उसे प्रताडि़त करने के लिए जबरन अपना मूत्र पीने के लिए विवश करता था. इस अमानवीय कृत्य में आश्रम की कुछ महिला सहयोगी भी शामिल रहती थीं.
जब पीडि़ता दर्द से चिल्लाती या वहां से भागने की कोशिश करती थी तो ये महिलाएं पीडि़ता को कस कर पकड़ कर रखती थीं, ताकि बाबा राधामोहन मिश्रा उस के साथ अपनी मनमानी कर सके.
2016 में पीडि़ता ने बाबा के अत्याचारों के बारे में अपने पेरेंट्स को बताने की कोशिश भी की थी, लेकिन उस समय बाबा ने पीडि़ता के चरित्र पर ही कई सारे सवाल खड़े कर दिए और उसे चरित्रहीन सिद्ध कर दिया.
तब उस के अपने पेरेंट्स ने भी ढोंगी बाबा की मनगढ़ंत बातों पर विश्वास कर लिया. इस बीच पीडि़ता ने एक नौकरी ढूंढ ली और नौकरी करने जाने लगी थी.
इसी बीच बाबा राधेश्याम मिश्रा ने अपना पुराना आश्रम बेच कर एक नया आश्रम पुणे के वाघोली में खरीद लिया था. एक उम्र पर आने के बाद पीडि़ता ने शादी करने की कोशिशें करनी शुरू कर दीं. जब बाबा राधामोहन मिश्रा को इस बात की भनक लगी तो उस ने ही एक वेबसाइट के माध्यम से उस की शादी तय करवाई, लेकिन इस के लिए उस ने मधु के सामने अपनी एक शर्त रखी.
उस ने पीडि़ता को पहले के पुराने वीडियो वायरल करने की धमकी दे कर कहा कि मैं केवल इसी शर्त पर तुम्हारी शादी करवा सकता हूं कि जब तुम अपने पेरेंट्स के पास से गहने और रुपए ले कर कुछ दिनों के लिए भाग जाओ. मैं उसी अवधि में तुम्हारी शादी उसी आदमी से करवा दूंगा, जिस से तुम्हारा रिश्ता तय करवाया गया है मगर तुम्हें सारे गहने और रुपए मुझे सौंपने होंगे.
इस के पीछे बाबा राधामोहन मिश्रा की मंशा यह थी कि अपने घर में चोरी करने के कारण मधु अपने पेरेंट्स की नजरों में हमेशा के लिए गिर जाएगी और उस की रहीसही इज्जत भी धूल में मिल जाएगी.
अब एक तरफ मधु को बाबा के शोषण और ब्लैकमेलिंग का डर था तो दूसरी तरफ उस के लिए विवाह कर गृहस्थी बसाने का और बाबा के चंगुल से छूटने का अच्छा मौका था, इसलिए उस ने अपने घर से गहने और पैसे चुराए और भाग गई.
बाबा राधामोहन मिश्रा ने मधु से सारे रुपए और गहने ले लिए और उस का विवाह उसी व्यक्ति से करवा दिया.
इधर मधु के घर से पैसे और गहने ले कर भागने से उस के पेरेंट्स एकदम से टूट गए और इस के लिए उन्होंने अपनी बेटी मधु को हो दोषी माना. उस के बाद मधु के पेरेंट्स ने दुखी हो कर पुणे शहर ही छोड़ दिया और फिर से वे कुरुक्षेत्र में रहने लगे.
इतना सब कुछ यानी कि अपने ही घर से चोरी करने के बाद जब पीडि़ता मधु ने शादी कर ली तो उसे पूरा विश्वास था कि अब वह आगे की अपनी जिंदगी चैन से गुजार पाएगी.
लेकिन उस का यह विश्वास तब धूमिल हो गया, जब बाबा राधामोहन मिश्रा ने उसे चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तुम अपने और अपने पति के शारीरिक संबंधों की वीडियो मुझे नहीं भेजोगी तो मैं तुम्हारे पति को तुम्हारे पुराने सारे अश्लील वीडियो दिखा दूंगा, जो मेरे पास हैं.
अब मधु मरती क्या न करती, उस ने सोचा कि ये ठरकी बाबा शायद अश्लील वीडियो देखने का आदी हो चुका है. इसे यदि मैं अपने और अपने पति के अंतरंग वीडियो भेज दूंगी तो यह शायद खुश हो कर मेरा पल्ला हमेशा के लिए छोड़ देगा.
ठरकी बाबा की चाल
बाबा राधामोहन मिश्रा ने मधु को यह भी कहा था कि जब तुम अपने पति के साथ ये रिश्ता बनाओगी तो वीडियो छिप कर बनाना, इस का पता तुम्हारे पति को बिलकुल भी नहीं लगना चाहिए.
बाबा के शोषण से त्रस्त मधु ने अपने और अपने पति के बीच अंतरंग अवस्था में शूट किए वीडियो बाबा राधामोहन मिश्रा को भेज दिए.
इन सब के पीछे बाबा राधामोहन मिश्रा की एक कुत्सित चाल थी. बाबा ने इन वीडियो को मधु के पति को भेज दिया. इस के साथसाथ उस में अपने चेहरे को छिपाए हुए कुछ और वीडियो भी मधु के पति को भेज कर कहा कि देखो, तुम्हारी पत्नी कितनी चरित्रहीन है.
मधु के पति को भी लगा कि उस की पत्नी और उस की अश्लील वीडियो बनाने वाली उस की खुद की ही पत्नी है और साथ ही मधु के अन्य अश्लील फोटो और वीडियो जब उस ने अपनी आंखों से देखे तो उस का अपनी पत्नी के प्रति भरोसा एकदम चकनाचूर हो गया. उस ने मधु से तुरंत तलाक ले लिया.
अब बाबा राधामोहन ने मधु को ब्लैकमेल कर अपने साथ रहने के लिए मजबूर किया और अपने मौडर्न गुरुकुल आश्रम के भूमिगत एक कमरे में रख दिया गया, जहां पर उस परिसर को सीसीटीवी कैमरों से चारों तरफ से कवर कर के लगातार उस के हर पल की निगरानी की जा रही थी.
यह अकसर कहा भी जाता है कि कोई भी इंसान एक निश्चित सीमा तक ही दर्द सह सकता है. जब बात जीवन, आत्मसम्मान और मानसिक शांति पर बन आती है तो सब से कमजोर व्यक्ति में भी लडऩे की एक विलक्षण ताकत आ जाती है.
इस पीडि़त महिला ने भी सालों तक अंधविश्वास और एक अनजाने डर के साए में प्रताडऩा झेली, लेकिन जब जुल्म की सारी हदें पार हो गईं तो उस का यही टूटा हुआ धैर्य एक बड़े साहस के रूप में बदल गया.
एक दिन जब आश्रम के सेवादारों की नजरें थोड़ी चूकीं तो मधु ने कमरे के भीतर और बाहर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों को तोड़ डाला और उन की निगरानी लाइनों को ठप कर दिया.
सीसीटीवी कैमरे टूटने से आश्रम के कंट्रोल रूम में उस का लाइव फीड दिखना बंद हो गई, जिस से मधु को वहां से भागने का कुछ समय मिल गया.
वहां से भागने के बाद मधु ने सीधे अपने परिवार से संपर्क किया. इस बार बेटी की बदहाल स्थिति और उस के पूरे शरीर पर चोट व बिजली के झटकों के निशान देख कर फेमिली वालों की आखें खुलीं और उन का अंधविश्वास व श्रद्धा अधर्मी बाबा के प्रति चकनाचूर हो गई.
उस के बाद परिवार की प्रेरणा से वह सीधे पुणे के खराडी पुलिस स्टेशन पहुंची और पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई, जिस के बाद पुणे के पुलिस कमिश्नर ने तत्परता दिखाते हुए पुलिस टीम का गठन कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.
कौन है अधर्मी बाबा?
एक युवती से 17 साल तक दुष्कर्म करने वाले अधर्मी बाबा राधामोहन मिश्रा उर्फ राधेश्याम मिश्रा का अतीत काफी रहस्यमय रहा है. बाबा राधामोहन मिश्रा मूलरूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला एक बहुत शातिर दिमाग इंसान है.
उस ने अपना घर 40 साल पहले छोड़ दिया था और तभी से उस का अपने परिवार से कोई संपर्क नहीं रहा है. सब से पहले वह उत्तर प्रदेश से हरियाणा आया और अपने आप को जगहजगह सिद्ध स्वामी प्रचारित करने लगा.
शुरुआत में उस ने स्वामी कमल नयन की मदद और सहयोग से हरियाणा के पंचकूला में गुरुदेव साधना ट्रस्ट नाम से एक आश्रम खोला. उस के बाद उस ने हरियाणा के एक डौक्टर परिवार को अपने वश में कर लिया. फिर डौक्टर की बेटी मधु को अपने जाल में फंसा कर उस के डौक्टर फादर से पैसे ले कर हरियाणा में मौडर्न गुरुकुल नाम से 2 आश्रम शुरू किए.
इन दोनों आश्रमों को बंद करने के बाद वह पुणे आ गया. उस ने मधु के फादर से पैसे ले कर खराडी के उबाले नगर इलाके में अपने नए आश्रम को स्थापित करने के लिए जमीन खरीदी.
सौंपी ‘मन की रिपोर्ट’
पुलिस को जांच के दौरान यह जानकारी भी मिली कि शिकायतकर्ता महिला के पापा की इस आश्रम में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी भी है. वर्तमान में शिकायतकर्ता महिला के भाई और पिता का बाबा राधामोहन मिश्रा के साथ दीवानी अदालतों में विवाद भी चल रहा है.
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि अधर्मी बाबा अपने प्रत्येक भक्त और उन के बच्चों से एक विशेष मन की रिपोर्ट एक डायरी में लिखवाता था. इस में उन्हें अपने जीवन से जुड़ी निजी बातें, रहस्य, गलतियां, रिश्तों और व्यक्तिगत अनुभवों की जानकारी दर्ज करने को कहा जाता था.
बाहर अंकल, अंदर…
आरोपी बाबा राधामोहन मिश्रा अपने भक्तों को यह कह कर डराता था कि यदि उन्होंने अपनी लिखी रिपोर्ट में कोई भी बात छिपाई या कुछ भी झूठ लिखा तो उन्हें नरक जा कर यातनाएं भुगतनी पडेंग़ी. इसी डर के कारण कई श्रद्धालुओं ने अपने जीवन की अत्यंत निजी और गोपनीय जानकारियां लिख कर बाबा को सौंप दी थीं.
इन जानकारियों को प्राप्त कर लेने के बाद बाबा राधामोहन मिश्रा इन रिपोर्टों का इस्तेमाल भक्तों को ब्लैकमेल करने के लिए करता था.
लोगों की कमजोरियों और निजी व गोपनीय जानकारियों का फायदा उठा कर वह फिर उन के ऊपर मानसिक दबाव बनाता था. इसी कारण कई भक्त लंबे समय तक उस के प्रभाव में बने रहे और उस के खिलाफ आवाज उठाने का साहस नहीं कर सके.
पुलिस जांच के दौरान महिलाओं द्वारा दी गई जानकारियां बेहद चौंकाने वाली हैं. आरोपी बाबा राधामोहन मिश्रा ने अपने अनुयायियों विशेषकर युवतियों को सख्त हिदायत दे रखी थी कि वे बाहरी दुनिया में बाबा के साथ सामान्य लोगों की तरह ही व्यवहार करें, सार्वजनिक स्थानों पर संदेह से बचने के लिए इसीलिए उन के अनुयायी बाबा को ‘अंकलजी’ कह कर पुकारते थे.
हालांकि, आश्रम के निजी कमरे में प्रवेश करते ही अधर्मी बाबा का रूप एकदम से बदल जाता था. वहां उस की महिला अनुयायी उस के चरणों में गिर कर उस के पैरों को धोती थीं और फिर चरणामृत ग्रहण करने और अधर्मी बाबा के हर अघोरी आदेश का पालन करने को विवश हो जाती थीं.
इस अधर्मी बाबा के कई वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल भी हो रहे हैं. इन वीडियो में अंधश्रद्धा के जाल में ऐसी महिलाएं और पुरुष इस फरजी बाबा की आरती उतारते और पानी व दूध से उसे धो कर उसे पीते नजर आ रहे हैं.
पुणे के वाघोली (उबले नगर) स्थित आश्रम में कथित तौर पर ‘आधुनिक गुरुकुल’ चलाने वाले अधर्मी बाबा राधामोहन मिश्रा उर्फ राधेश्याम मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद आश्रम के आसपास के लोगों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. उन का कहना है कि आश्रम की गतिविधियां शुरू से ही काफी रहस्यमयी और संदिग्ध थीं.
आश्रम के चारों ओर कड़ा पहरा रहता था और आश्रम के लोग स्थानीय निवासियों से पूरी तरह से दूरी बना कर रखते थे. वे किसी से भी बात तक नहीं करते थे.
पड़ोसी और स्थानीय कांग्रेस पार्टी की नेता सीमा गट्टे ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि आश्रम के आसपास रहने वाले पड़ोसियों को अपने ही घरों की बालकनी में खड़े होने तक की अनुमति नहीं दी
जाती थी.
सीमा गट्टे ने आगे बताया कि सप्ताह में हर गुरुवार को आश्रम के बाहर बड़ी संख्या में लग्जरी कारें आ कर रुकती थीं. देश के अलगअलग राज्यों से लोग बाबा से मिलने आते रहते थे.
पुलिस अब इस बात की भी सघन जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह ने आरोपी के ‘आधुनिक गुरुकुल’ के नाम पर अन्य राज्य की महिलाओं और भक्तों का भी यौन शोषण या आर्थिक शोषण तो नहीं किया है.
आश्रम में मिली गुप्त और भूमिगत सुरंगों के वास्तविक उपयोग का पता भी लगाया जा रहा है. पुणे पुलिस के कमिश्नर अमितेश कुमार के अनुसार आरोपी बाबा के खिलाफ सभी वैज्ञानिक और डिजिटल सबूत जुटाए जा रहे हैं ताकि अदालत में उसे सख्त से सख्त सजा दिलवाई जा सके.
एक ओर जब कोई व्यक्ति सरकारी धन का गबन करता है तो उसे एक अपराधी घोषित कर दिया जाता है, जबकि दूसरी तरफ ये अलगअलग धर्मों के बाबा और तथाकथित धर्मगुरु, जो देश के लोगों से करोड़ों रुपए की संपत्ति आस्था के नाम पर ठग रहे हैं, उन के खिलाफ कठोर काररवाई क्यों नहीं होती?
आज यत्रतत्र सर्वत्र कुकुरमुत्ते की भांति उग आए ये तथाकथित बाबा कभी लाल, कभी काले कपड़ों में समस्याओं का निदान बताते हैं तो कभी गले में ताबीज या अंगुली में विशेष नग की अंगूठी या विभिन्न रंग के वस्त्र पहनने को समस्या का निदान बताते हैं.
हमारे देश और समाज की सब से बड़ी विडंबना यह है कि आज इन फरजी बाबाओं के दरबार में लोगों की संख्या कम होने के बजाय दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है. यहां तक कि कि कई बाबाओं के तार सियासी दलों से भी जुड़े हुए हैं, जिन का भरपूर इस्तेमाल आज अपनी राजनीति चमकाने के लिए नेता कर रहे हैं. Fake Baba Case






