Raebareli Crime Story. शादी के पहले हुई गलती अगर गीता शादी के बाद न दोहराती तो आज उस के प्रेमी की हत्या के आरोप में पिता और पति जेल में न होते.

‘‘गीता, मैं तुम्हें कितना प्यार करता हूं, यह तुम समझ नहीं सकती. तुम ने शादी कर ली तो क्या हुआ, शादी के बाद भी मैं तुम्हें पहले की ही तरह प्यार करता रहूंगा. दुनिया की कोई भी ताकत तुम्हें मुझ से अलग नहीं कर सकती.’’ अवधेश उर्फ गुड्डू ने प्रेमिका गीता के कंधे पर हाथ रख कर कहा.

अवधेश उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के बरगदहा गांव में रहता था. गांव की ही रहने वाली गीता से उस के प्रेमसंबंध थे. गीता प्यार से उसे गुड्डू कहती थी.

‘‘गुड्डू, तुम क्या समझते हो कि मैं ने यह शादी आसानी से की है. मेरी मजबूरी थी. घर वालों के दबाव में मुझे इस शादी के लिए हां करनी पड़ी थी. मैं तो तुम से ही शादी करना चाहती थी.’’ गीता बोली.

गीता और गुड्डू आसपास ही रहते थे. गांव में साथसाथ रहतेखेलते दोनों के बीच पहले दोस्ती, फिर जवान होने पर उन की दोस्ती प्यार में कब बदल गई, पता ही नहीं चला. बाद में उन के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए.

कुछ दिनों तक उन का यह खेल चोरीछिपे चलता रहा. लेकिन अवैध संबंधों को कोई चाहे कितना भी छिपाने की कोशिश करे, एक न एक दिन उन की पोल खुल ही जाती है. गीता और गुड्डू के संबंधों की बात भी धीरेधीरे गांव में फैल गई. गीता के पिता रामनारायण के कानों में जब यह बात पहुंची तो उन्होंने बात पत्नी शांति को बताई.

शांति ने बेटी को समझाया. तब गीता ने सफाई देते हुए मां से कहा था कि गुड्डू के साथ उस का कोई चक्कर नहीं है. लोग बिना मतलब उसे बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं.

‘‘बेटी, ऐसी बातों से दूर रहना चाहिए, जिन से घरपरिवार की बदनामी हो. अब तू सयानी हो गई है, बाहरी लोगों से बातें करनी छोड़ दे. न तो तू किसी से मिलेगी और न ही इस तरह की कोई बात होगी. याद रख, घर की लाज घर की ही औरतों और लड़कियों के हाथ होती है.’’ शांति ने बेटी को समझाया.

जबकि उसे पता नहीं था कि उस की बेटी जो उस के सामने पाकसाफ होने की सफाई दे रही थी, उस के गुड्डू के साथ बने संबंध सारी मर्यादाओं को लांघ चुके हैं.

खैर, उस समय मां के समझाने के बाद गीता ने कुछ दिनों तक गुड्डू से बात नहीं की, लेकिन फोन से उन का संपर्क बना रहा. बाद में दोनों ने पहले की तरह ही मिलनामिलाना शुरू कर दिया. एक दिन किसी परिचित की सूचना पर गीता के पिता रामनारायण ने गांव के ही एक खंडहर में गुड्डू के साथ उसे रंगेहाथों पकड़ लिया.

गुड्डू तो भाग निकला, लेकिन गीता पकड़ी गई. रामनारायण ने गुस्से में बेटी को कई थप्पड़ जड़ दिए. डरीसहमी गीता घर आई तो रामनारायण ने उस की करतूत पत्नी शांति को बताई. तब शांति ने भी बेटी की पिटाई कर के उसे खूब खरीखोटी सुनाई. तब गीता ने मांबाप से अपनी गलती की क्षमा मांगते हुए आगे कोई गलती न करने की कसम खाई.

बेटी के गलत चालचलन की वजह से रामनारायण की मोहल्ले में बेइज्जती हो चुकी थी. उस ने गीता की शादी करने का फैसला कर लिया. उस ने सोचा था कि शादी के बाद वह सुधर जाएगी. वह उस के लिए लड़का देखने लगा.

रामनारायण को पता चला कि उस के गांव के पास के गांव बिंदागंज में एक लड़का था जयचंद्र. उस के पिता बिंदादीन की मौत हो चुकी थी. जयचंद्र मकानों में संगमरमर आदि लगवाने का ठेकेदार था. इस काम से उसे ठीकठाक आमदनी हो रही थी. किसी परिचित के मार्फत रामनारायण ने बेटी की शादी की बात जयचंद्र से चलाई.

जयचंद्र ने गीता को देखा. गीता सुंदर तो थी ही, जयचंद्र को पसंद आ गई. गीता इस शादी से खुश नहीं थी. क्योंकि यह शादी उस की मरजी के खिलाफ हो रही थी. पिता से शादी का विरोध करने की उस की हिम्मत नहीं हुई, इसलिए उस ने पिता की बात मानने में ही अपनी भलाई समझी.

कुछ दिनों बाद ही सामाजिक रीतिरिवाज से गीता और जयचंद्र की धूमधाम से शादी हो गई. गीता की शादी जयचंद्र से जरूर हो गई थी, लेकिन वह अवधेश को दिल से निकाल नहीं पा रही थी. उधर प्रेमिका की शादी किसी और से हो जाने से अवधेश को भी बड़ा दुख था.

शादी के बाद गीता पहली बार मायके आई तो अचानक एक दिन रास्ते में उसे अवधेश मिल गया. चूंकि अवधेश को उस से अपने दिल की बात कहनी थी, इसलिए उस ने किसी भी तरह अकेले में मिलने के लिए कहा. जिस तरह आननफानन में गीता की शादी हुई थी, इस बात को वह अवधेश से बता नहीं पाई थी.

योजना बना कर दोनों एक रात मिलने में सफल हो गए. गिलेशिकवे दूर करने के बाद गीता बोली, ‘‘देखो, पहले हमारे बीच जो हो रहा था, वह अलग बात थी. अब मैं शादीशुदा हूं. अब तुम से मिलने का मतलब है पति को धोखा देना.’’

‘‘गीता, तुम भी क्या बात करती हो, यह सब पुरानी बातें हैं. हम दोनों ऐसे ही चुपकेचुपके मिलते रहेंगे तो किसी को कैसे पता चलेगा? सही बात तो यह है कि अब कोई नहीं सोचेगा कि हमारे बीच अब भी कुछ है.’’ अवधेश ने गीता को समझाया तो वह उस की चिकनीचुपड़ी बातों में आ गई. इस तरह वह फिर पहले की ही तरह मिलने लगे.

इस के बाद गीता जब भी मायके बरगदहा आती, अपने प्रेमी अवधेश से जरूर मिलती. क्योंकि उसे अवधेश के साथ संबंधों की लत जो लग चुकी थी. गीता को पति के  बजाय प्रेमी के साथ संबंध बनाना ज्यादा अच्छा लगता था.

अब गीता शादीशुदा थी, इसलिए गांव के लोगों ने भी दोनों के संबंधों पर गौर नहीं किया. गीता की शादी हुए 4 साल बीत चुके थे. वह एक बेटी की मां भी बन चुकी थी. जयचंद्र घरों में मारबल आदि लगाने का ठेका लेता था. काम की वजह से वह कई बार रातरात घर से बाहर रहता था.

मां बनने के बाद गीता का मायके जाना कम ही हो पाता था. जब उस का मन करता, वह फोन पर अवधेश से बातें कर लेती थी. लंबी जुदाई पर एक बार अवधेश ने कहा, ‘‘तुम बहुत दिनों से इधर नहीं आई हो, ऐसे में हमारी मुलाकात कैसे होगी?’’

‘‘कोई बात नहीं, तुम्हीं मेरी ससुराल चले आओ. काम की वजह से कई बार पति रात को भी घर से बाहर रहते हैं. मैं घर पर अकेली रहती हूं. तब मैं तुम्हें फोन कर दिया करूंगी, तुम यहां चले आना.’’

अवधेश को तो जेसे मनमांगी मुराद मिल गई थी. वह खुश हो कर बोला, ‘‘वाह! यह तो बड़ी अच्छी खबर है. अब यह मौका कब मिलेगा?’’

‘‘आज ही आ जाओ. आज भी घर पर कोई नहीं है.’’ गीता ने कहा.

रात होते ही अवधेश गीता की ससुराल बिंदागंज पहुंच गया. घर में गीता अकेली थी. एकांत का दोनों ने भरपूर फायदा उठाया. गीता ने भावुकता में फंस कर अवधेश के साथ ससुराल में संबंध बनाने की शुरुआत तो कर दी, लेकिन उस ने इस पर ध्यान नहीं दिया कि वह एक बड़ी मुसीबत अपने गले में डाल रही है.

एक बार शुरू हुआ यह सिलसिला आगे भी जारी रहा. जब भी गीता का पति घर पर नहीं होता, वह अवधेश को बुला लेती. अवधेश को प्रेमिका से मिलना अब पहले से भी सुरक्षित लगने लगा.

20 मई, 2014 को बरगदहा गांव में मकसूद पाल के बेटे का तिलक था. इस में शामिल होने के लिए गीता के पिता रामनारायण और प्रेमी अवधेश भी आए थे. तिलक के बाद जब सभी लोग अपने घर चले गए तो गीता ने अवधेश को फोन कर के कहा, ‘‘गुड्डू, मैं घर में अकेली हूं, तुम अभी आ जाओ.’’

गीता के बुलाने पर अवधेश उस के घर पहुंच गया. उस रात जयचंद्र अपने फुफेरे भाई गुड्डू के साथ कहीं पत्थर लगाने गया था. संयोग से वहां पत्थर आए ही नहीं तो गुड्डू ने कहा, ‘‘जय भाई, यहां रात भर जागने से अच्छा है कि हम घर चल कर आराम करें. कल आ कर पत्थर लगाएंगे.’’

जयचंद्र को उस की बात ठीक लगी. वह गुड्डू के साथ अपने घर आ गया. जिस समय उस ने दरवाजा खटखटाया, उस समय गीता प्रेमी के आगोश में समाई थी. दरवाजा खटखटाने की आवाज सुन कर वह चौंकी.

इतनी रात को पता नहीं कौन आ गया. उस ने फटाफट कपड़े पहने और अवधेश को घर में रखे बड़े संदूक की आड़ में छिपा कर दरवाजा खोला. बाहर पति और गुड्डू को देख कर वह घबरा गई.

जयचंद्र कमरे में आया तो संयोग से उस की नजर संदूक की आड़ में छिपे अवधेश पर पड़ गई. जयचंद्र ने उसे बाहर निकाल कर उस के बारे में पूछा तो गीता ने बताया कि यह अवधेश है और उस के मायके का रहने वाला है.

इस के बाद जयचंद्र को समझते देर नहीं लगी कि बंद कमरे में उस की पत्नी अवधेश के साथ क्या कर रही थी. जयचंद्र ने गुड्डू के साथ मिल कर अवधेश को दबोच लिया.

इस के बाद उस ने अपने ससुर को फोन किया, ‘‘गीता की तबीयत ठीक नहीं है. आप जितना जल्दी हो सके, यहां आ जाइए.’’

बेटी की तबीयत खराब होने की बात सुन कर रामनारायण और उस की पत्नी घबरा गए कि पता नहीं बेटी को क्या हो गया? रामनारायण रात में ही बेटी की ससुराल पहुंच गया. जब उसे सच्चाई का पता चला तो वहीं पर उस ने बेटी की जम कर पिटाई की. उस के बाद दुखी मन से बोला, ‘‘मेरे लिए आज से यह मर गई. मैं इन्हें बहुत समझा चुका हूं, अब इन दोनों को ही जान से खत्म कर दो. केवल यही रास्ता बचा है. ना रहेगा बांस, ना बजेगी बांसुरी.’’

‘‘बात तो ठीक है, लेकिन हम ऐसा करते हैं तो मेरी डेढ़ साल की बेटी को कौन संभालेगा. उस की परवरिश कैसे हो पाएगी.’’ जयचंद्र ने कहा.

इस के बाद रामनारायण, जयचंद्र और गुड्डू ने बैठ कर आपस में सोचाविचारा. फिर तीनों ने तय किया कि डराधमका कर अवधेश को भगा दिया जाए. उस से कहा जाए कि अब वह दोबारा कभी यहां न आए. इस के बाद गीता को कुछ दिनों के लिए मायके भेज दिया जाए.

यह तय कर के रामनारायण, जयचंद्र और गुड्डू रात में ही अवधेश को ले कर गांव के बाहर चले गए.

रास्ते में रामनारायण ने अवधेश को समझाते हुए कहा, ‘‘तुम्हारी भलाई इसी में है कि तुम यहां से सीधे अहमदाबाद चले जाओ. अब अगर दोबारा कभी गीता से मिलने की कोशिश की तो जिंदा नहीं बचोगे.’’

अवधेश समय को समझ नहीं पाया. उस ने कहा, ‘‘तुम अभी 3 लोग हो, जो चाहो कर लो. लेकिन कहे देता हूं कि इस का बदला मैं जरूर लूंगा.’’

अवधेश ने जो धमकी दी थी, उस से किसी को भी गुस्सा आ सकता था. जयचंद्र, उस के ससुर और गुड्डू को भी गुस्सा आ गया. उन्हें लगा कि एक तो यह गलती कर रहा है, ऊपर से आंखें तरेर रहा है. यह एक तरह से चोरी और सीनाजोरी वाली बात थी.

उन्होंने उसे सबक सिखाने की ठान ली. वे उसे ले कर शारदा नहर के किनारेकिनारे थाना जगतपुर की ओर चल पड़े. एक सुनसान जगह पर अंगौछे से उस का गला घोंट कर लाश को नहर के किनारे घासफूस वाली जगह पर फेंक कर बरगदहा चले गए.

मकसूद पाल के बेटे के तिलक के बाद अवधेश घर नहीं पहुंचा तो उस के घर वाले परेशान हो गए. उन्होंने रात में ही उसे इधरउधर ढूंढा, लेकिन वह मिला नहीं तो अगली सुबह 21 मई, 2014 को अवधेश के भाई रमेश ने थाना ऊंचाहार में उस के गायब होने की सूचना दर्ज करा दी.

रमेश ने पूछताछ में शक जाहिर किया था कि अवधेश को गांव के ही रहने वाले रामनारायण ने कहीं गायब कर दिया है. थाना ऊंचाहार के थानाप्रभारी परशुराम त्रिपाठी ने इस बात की सूचना पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार पांडेय को दी.

थानाप्रभारी परशुराम त्रिपाठी ने रामनारायण को थाने बुलवा कर उस से सख्ती से पूछताछ की. थानाप्रभारी के तेवर देख कर वह जल्दी ही टूट गया और अवधेश की हत्या की पूरी कहानी सुना दी.

चूंकि घटनास्थल थाना जगतपुर के अंतर्गत आता था, इसलिए रमेश को थाना जगतपुर भेज कर रामनारायण को थाना जगतपुर पुलिस के हवाले कर दिया गया.

रमेश की ओर से जगतपुर में अवधेश की हत्या का मुकदमा रामनारायण प्रजापति, जयचंद्र और गुड्डू के खिलाफ दर्ज कर लिया गया. थाना जगतपुर के थानाप्रभारी जी.डी. शुक्ला ने रामनारायण की निशानदेही पर अवधेश की लाश बरामद कर ली.

इस के बाद जगतपुर पुलिस ने रामनारायण के दामाद जयचंद्र प्रजापति को भी गिरफ्तार कर लिया. दोनों से पूछताछ के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. तीसरा अभियुक्त गुड्डू कथा लिखने तक गिरफ्तार नहीं हो सका था.

गीता अगर पिता की बात मान लेती और अवधेश से संबंध तोड़ कर पति के साथ ईमानदारी से रह रही होती तो आज यह हालत न होती. गीता और अवधेश की नासमझी में अवधेश को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा.

पति और पिता को जेल जाना पड़ा. सच है, अवैध संबंध किसी भी तरह नहीं छिपते और खुलासा होने पर परिणाम बुरा ही होता है. गीता की कहानी से अन्य लोगों को सीख लेनी चाहिए कि अवैध संबंध बरबादी ही लाते हैं.  Raebareli Crime Story

— इसके बाद अदालती कार्रवाई में क्या हुआ यह ज्ञात नहीं है.

— मनोहर कहानियां, 2014 में प्रकाशित

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...