Work From Home Scam. दिल्ली की साइबर थाना पुलिस ने पिछले दिनों साइबर ठगों के ऐसे गैंग का भंडाफोड़ किया है, जो शिक्षित युवाओं को मल्टीनैशनल आईटी कंपनियों में मोटे पैकेज की नौकरी का झांसा दे कर लाखों रुपए की ठगी कर रहे थे. गैंग ने दिल्ली के एक होटल में अपना औफिस तक बना रखा था, जहां पर युवाओं को इंटरव्यू के लिए बुलाते थे. आखिर कैसे चल रहा था उन का यह लाखोंकरोड़ों की ठगी का धंधा?
कमरे में घुसते ही रवि ने जोरजोर से आवाज दे कर पुकारा. ”मम्मी… मम्मी, कहां हो तुम?’’
उस समय जानकी रसोई में थी. वह आटा गूंथ रही थी. बेटे की आवाज सुन कर वह आटा सने हाथों से ही कमरे में आ गई. बेटे के चेहरे पर खुशी के भाव देख कर उसे संतोष हुआ कि रवि आज अन्य दिनों की तरह निराश, उदास और रोनी सूरत ले कर घर नहीं लौटा है, अवश्य ही उसे कोई खुशी मिली है.
”क्या बात है बेटा? तू इतना उतावला हो कर मुझे किसलिए आवाज दे रहा है?’’ जानकी ने पूछा.
”मम्मी, मुझे एक कंपनी में नौकरी के लिए औफर आया है. कल सुबह 9 बजे कृष्णा नगर के एक होटल में मझे कंपनी वालों ने इंटरव्यू के लिए बुलाया है. तुम्हारा आशीर्वाद रहा तो मैं कल इंटरव्यू में पास अवश्य हो जाऊंगा.’’ रवि एक सांस में ही इतना सब कह गया.
”मेरा आशीर्वाद तो सदा तेरे साथ है, बेटा.’’ जानकी आश्चर्य से रवि की ओर देखते हुए बोली, ”कई दिनों से तू घर से नौकरी मिल जाने की उम्मीद के साथ निकलता था, भूखाप्यासा, यहांवहां धक्के खा कर शाम को जब निराश घर लौटता था तो मेरा दिल भीतर तक दर्द से तड़प उठता था. तेरे चेहरे की मायूसी और उदासी मेरी आंखें भिगो देती थीं. आज मुझे जमाने भर की खुशी मिल गई हैं.’’
”अभी एक कदम दूर है यह खुशी, मेरी भोली मम्मी, कल इंटरव्यू ठीकठाक हो जाने दो, फिर घर में घी के चिराग जलाना.’’
”इंटरव्यू ठीक ही होगा बेटा, मेरा दिल कह रहा है.’’ जानकी आत्मविश्वास से बोली, ”चल हाथमुंह धो ले, मैं खाना बना रही हूं.’’
रवि ने सिर हिलाया और टावेल उठा कर बाथरूम की तरफ चला गया.
दूसरे दिन रवि तैयार हो कर सुबह 8 बजे ही कृष्णा नगर में होटल गोल्डन पेटल के सामने पहुंच गया. उस के पास एक फाइल थी, जिस में उस के आवश्यक दस्तावेज और रिज्यूम था.
अभी वहां रवि को कोई ऐसा युवक या युवती नजर नहीं आ रहे थे, जो उसी कंपनी में इंटरव्यू देने के लिए आए हों, जिस कंपनी ने मैसेजिंग ऐप के द्वारा इंटरव्यू के लिए बुलाया था. उसे लगा कि या तो वह यहां जल्दी आ गया है या फिर इंटरव्यू के लिए वह अकेला व्यक्ति है.
9 बजने में जब 5 मिनट रह गए, वह होटल के कमरा नंबर 307 के सामने पहुंच गया. कमरे का दरवाजा बंद था.
ठीक 9 बजे कमरे का दरवाजा खुला और एक वरदीधारी गार्ड ने बाहर आ कर उस से पूछा, ”आप का नाम रवि कुमार है?’’
”जी हां,’’ रवि ने जल्दी से कहा.
”आप इंटरव्यू के लिए अंदर जाइए.’’ गार्ड ने आदर के साथ कहा.
रवि अंदर की तरफ बढ़ा तो उस का दिल जोरजोर से धड़कने लगा. उस ने लंबी सांस ले कर सांसों को नियंत्रित किया और कमरे में पहुंच गया. कमरे में बड़ा परदा पड़ा हुआ था.
”मिस्टर रवि कुमार. आप अंदर आ जाइए.’’ परदे के पीछे से भारी स्वर उभरा.
रवि परदा हटा कर उस केबिन जैसे रूम में आ गया. सामने लंबी टेबल लगी थी, जिस पर सफेद कपड़ा बिछा था. टेबल पर गुलाब के ताजा फूलों का गुलदस्ता रखा था. कुछ फाइल्स और पास में पैन स्टैंड रखा था, टेबल के पीछे 2 व्यक्ति बैठे थे, जिन के शरीर पर कीमती सफारी सूट थे. दोनों ऊंचे कद के रौबदार चेहरे वाले व्यक्ति थे. एक व्यक्ति ने काला चश्मा पहन रखा था.
”बैठ जाइए रवि कुमारजी,’’ चश्मा पहने व्यक्ति ने कहा.
रवि उन्हें अभिवादन कर के सामने रखी कुरसी पर बैठ गया.
”रिज्यूम लाए हैं आप?’’ उसी व्यक्ति ने पूछा.
रवि ने फाइल खोल कर अपना रिज्यूम निकाला और उस व्यक्ति के सामने रख दिया. चश्मे वाले व्यक्ति ने उस के रिज्यूमे को बड़ी बारीकी से देखा. फिर खुश होता हुआ बोला, ”आप तो इस नौकरी के लिए बहुत फिट बैठ रहे हैं. क्या आप को मालूम है कि कौन सी कंपनी आप को जिंदगी संवारने का चांस दे रही है?’’
”मैं अभी नहीं जानता सर.’’ रवि धीरे से बोला.
”चीन की नंबर वन कंपनी है यह टेनसेट होल्डिंग. यह सौफ्टवेयर, वीडियो गेम्स जैसे आइटम बनाती है और सेल करती है. इस में तुम्हें सेल ऐंड परचेंज की नौकरी मिल रही है.’’
”लेकिन सर, मुझे इतनी दूर चीन में जाना होगा… यह संभव नहीं होगा. मेरी मम्मी की देखभाल मैं ही करता हूं.’’ रवि घबरा कर बोला.
इतना सुन कर उस का इंटरव्यू लेने वाले दोनों व्यक्ति खुल कर हंसने लगे. रवि उन का मुंह आश्चर्य से देखने लगा.
हंसी रुकने पर चश्मे वाला व्यक्ति मुसकराते हुए बोला, ”मिस्टर रवि कुमार… आप को चीन कौन भेज रहा है. आप को वर्क फ्रौम होम ही करना है. आप की सैलरी 90 हजार रुपए के करीब होगी. पीएफ वगैरह कट कर बता रहा हूं मैं.’’
”90 हजार!’’ रवि का मुंह हैरानी से खुल गया. वह जल्दी से बोला, ”मैं इस कंपनी में काम करने को तैयार हूं सर. मैं कब से जौइन करूं?’’
”आप को अभी कंपनी की कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी मिस्टर रवि कुमार.’’
”जी, वह शर्तें क्या होंगी?’’ रवि ने धड़कते दिल से पूछा.
”आप को कंपनी में प्रवेश करने के लिए सिक्योरिटी चार्ज, पेपर चार्ज, हैल्थ चार्ज और कंपनी आप को जो लैपटौप आदि देगी, उन का गारंटी चार्ज जमा करवाना होगा. सब से पहले रजिस्ट्रेशन के लिए आप कल 10 बजे 20 हजार रुपए जमा करवा दीजिए. ये रुपए आप को 3 महीने बाद लौटा दिए जाएंगे.’’
”जी, मैं कल 10 बजे आ जाऊंगा.’’ रवि ने थूक गटकते हुए कहा. वह अच्छी तरह जानता था के घर में हजारपांच सौ रुपए से ज्यादा नहीं है. 20 हजार का इंतजाम मम्मी कैसे करेंगी. मम्मी ही इस विषय में बता सकती थी. 90 हजार रुपए की सैलरी वाली नौकरी थी, जो एक सरकारी कर्मचारी के बराबर थी. इसे रवि किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता था.
”आप को यहां आने की जरूरत नहीं है मिस्टर रवि कुमार. आप को मैं अपना एक नंबर दे रहा हूं, उसी नंबर पर औनलाइन कर देना.’’ दूसरे व्यक्ति ने कह कर एक नंबर कागज पर लिख कर रवि को दे दिया.
रवि ने कागज को जेब के हवाले किया. वे दोनों व्यक्ति उठ खड़े हुए तो रवि उन को नमस्ते कर के केबिन से बाहर आ गया है.
पूरे रास्ते वह इसी उधेड़बुन में लगा रहा कि पैसों का इंतजाम कैसे होगा? वह घर आतेआते काफी नरवस हो गया था.
रजनी ने उस का उतरा हुआ चेहरा देखा तो उस का दिल धक से रह गया. रवि जूते उतार कर थका सा कुरसी पर बैठ गया तो रजनी उस के लिए पानी ले कर आ गई.
”क्या फिर निराशा हाथ लगी है, बेटा?’’ रजनी ने गिलास बेटे की तरफ बढ़ाते हुए पूछा.
”इंटरव्यू तो ठीक रहा है मम्मी. मुझे चीन की एक कंपनी में 90 हजार रुपए की नौकरी भी दे दी गई है, लेकिन…’’
”90 हजार वाली नौकरी!’’ रजनी खुशी से रवि के गले से लिपटती हुई बोली, ”यह तनख्वाह तो हमारे भाग्य बदल देगी बेटा, इतनी अच्छी नौकरी है फिर भी तू मुंह लटकाए घर में घुसा है.’’
”मम्मी, मुझे इस नौकरी के लिए काफी खर्च करना पड़ेगा.’’ रवि गंभीर हो गया, ”कल रजिस्ट्रेशन के लिए 20 हजार रुपए देना है. फिर सिक्योरिटी, हेल्थ, गारंटी और पेपर चार्ज के लिए कितना मांगा जाएगा, मैं कह नहीं सकता. मैं इतने रुपए कहां से जमा कर पाऊंगा. मैं ने सोच लिया है कि मैं यह नौकरी नहीं करूंगा. कहीं और ट्राई करूंगा.’’
”पागल है तू. कई दिनों से धक्के खा कर यह अच्छा मौका हाथ आया है तेरे. सरकारी नौकरों जैसी तनख्वाह मिल रही है, इसे ठोकर मारना चाहता है.’’ रजनी नाराज होते हुए बोली.
”मम्मी, इस नौकरी के लिए लाखों रुपए खर्च करना पड़ेगा, कहां से लाऊंगा मैं यह रुपए… कोई बेरोजगार को 10 रुपए देने में भी दस बार सोचता है, यहां तो बात लाखों रुपए की है. मैं…’’
रजनी किसी सोच में डूब गई थी, उस ने रवि की बात काट दी, ”रवि, तू रुपयों की टेंशन मत ले. मेरे पास तेरी दादी के दिए हुए जो गहने रखे हैं, मैं उन्हें गिरवी रख देती हूं, तेरी तनख्वाह जब आनी शुरू होगी, बचा कर गहने छुड़वा लेंगे.’’
”लेकिन मम्मी, वह आप की शादी के गहने हैं.’’
”अरे, तो क्या हुआ. मैं उन्हें बेच थोड़ी रही हूं, गिरवी रख रही हूं.’’ रजनी हंस कर बोली, ”जा, हाथमुंह धो कर खाना खा ले. मैं सुनार के पास जाऊंगी.’’
रवि गहरी सांस भरता हुआ बाथरूम की तरफ चला गया.
दिल्ली. देश की राजधानी. इस महानगर की काली रातें अनेक होटलों, क्लबों में रंगीन हो सकती हैं, लेकिन इन्हीं स्याह रातों में कई रहस्य भी छिपे होते हैं. अवैध धंधा करने वाले लोग ऐसी काली रातों की आड़ में अपने पौबारह कर डालते हैं. कोठों पर जबरन लाई गई लड़की की नथनी उतारने के लिए इन्हीं काली रातों में लाखों रुपए की बोलियां लग जाती हैं.
हवस की आग में जल रहे कामुक दङ्क्षरदे किसी अबला की जबरन इज्जत तारतार करते हैं, कहीं लूटपाट के लिए रिवौल्वर या चाकू की वारदातें हो जाती हैं.
ऐसी ही 25 अप्रैल, 2026 की काली रात में नोटों के लोभी शाहदरा क्षेत्र के कृष्णानगर इलाके में स्थित शान से खड़े होटल गोल्डन पेटल के रूम नंबर 307 में एकत्र हुए अपने साइबर ठगी के धंधे पर वार्तालाप कर रहे थे.
इस कमरे में 6 युवक बैठे लैपटाप और मोबाइल पर अंगुलियां चला रहे थे. कमरे में सिगरेट का धुआं उड़ कर जल रही नीली रोशनी में दीवारों पर रहस्यमयी आकृतियां उकेर रहा था. कमरे में एसी की ठंडी हवा चल रही थी, लेकिन उन 6 लोगों की जलती हुई लालच की आग किसी भट्ठी से कम दिखाई नहीं दे रही थी.
उन के सामने एक लंबी मेज थी, जिस पर अनेक मोबाइल फोन रखे हुए वाइब्रेट कर रहे थे. शायद उन में से कुछ बंद थे और कुछ बाइब्रेशन पर सेट कर के रखे गए थे.
”कोई नया शिकार मिला क्या?’’ एक युवक ने सिगरेट का लंबा कश ले कर धुआं ऊपर की ओर छोड़ते हुए पूछा.
सामने हलकी दाढ़ी वाला लंबा सा युवक बैठा हुआ लैपटाप देख रहा था. वह शातिराना अंदाज में हंसा, ”शिकार क्यों नहीं मिलेगा भाई. हम खेल ही ऐसा खेल रहे हैं, हमारी चौपड़ पर जो पांसा फेंका जाता है, उस में तुरंत एक शिकार आ फंसता है. कोई भोपाल का लड़का है. इंजीनियर है, लेकिन बेचारा बेरोजगार है. मैं उसे टेस्ला कंपनी में इंजीनियर की जौब का औफर दे कर रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर 50 हजार रुपए ढीले करवा लिए हैं.’’
”कितनी देर में जमा किए उस ने 50 हजार रुपए?’’ पहले वाले युवक ने उतावलेपन से पूछा’
”2 घंटे लगे होंगे भाई.’’
लंबे युवक की आंखों में तीखी चमक उभरी, ”मोटी मुरगी है. याद रखना, यह टेस्ला कंपनी अमेरिका में जौब पाने जा रहा है, सैलरी 3 लाख बताना इसे, ज्यादा अंडे देगा. कम से कम 50 लाख रुपए वसूलने हैं, इस इंजीनियर साहब से.’’ धुएं का छल्ला बना कर हवा में उड़ाते हुए वह युवक मुसकराते हुए बोला.
”इतने अंडे दे देगा भाई, बेचारे को घर बेचना पड़ जाएगा.’’ दाढ़ी वाला कुछ सोचते हुए बोला.
”संदीप, तू कुछ ज्यादा कमजोर दिल का लगता है. इस धंधे में कोई रहम, कोई सहानुभूति नहीं चलती है. इमोशनल होने वाले किसी की जेब नहीं काट सकते, अपनी कटवा कर घर लौटते हैं. तू इस इंजीनियर को पहले 50 लाख का ताज पहना, फिर 10 लाख और मांग कर साले को सीधा हलाल कर के डकार जा.’’
”ठीक है जी.’’ संदीप अपनी हल्की दाढ़ी में हाथ घुमाते हुए बोला और अपने लैपटाप पर झुक गया.
लंबे कद का, सिगरेट का धुआं उड़ाने वाला वह व्यक्ति इस पूरे साइबर सिंडिकेट का भारत में बैठा शातिर दिमाग वाला संचालक था प्रदीप उर्फ अल्फा. उस ने मोबाइल निकाला. उस के मोबाइल पर टेलीग्राम खुला था, स्क्रीन पर विदेशी नंबरों से लगातार मैसेज आ रहे थे.
एकाएक ‘अल्फा’ खरखराती आवाज में बोला, ”किंग औनलाइन हैं?’’
दूसरे कमरे से जवाब आया, ”हां भाई, पाकिस्तान वाले हैंडलर भी जुड़ रहे हैं.’’
अल्फा के चेहरे पर खतरनाक मुसकान तैर गई, ”मजा आएगा, आज बड़ा खेल होने वाला है. जुट जाओ अपनेअपने काम पर.’’
कमरे में बैठे युवकों की अंगुलियां तेजी से मोबाइल स्क्रीन पर चलने लगीं.
”एक और मुरगा कटने जा रहा है भाई.’’ एक युवक मुसकराते हुए बोला.
बिहार के सीवान जिले में रहने वाला अभय चौबे अभी 24 वर्ष की उम्र में पहुंचा था. पढऩे में तेज था, उस ने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल कर ली थी, लेकिन बेचारा बेरोजगार था. परिवार में पिता, मां और एक बहन थी, वह भी जवानी की डगर पर आ खड़ी हुई थी.
पिता बीमार रहते थे. खर्चे का सारा बोझ अभय के कंधों पर आ गया था. ख्वाब ऊंचे थे. इंजीनियरिंग की थी कि अच्छा वेतन मिलेगा, जिस से बहन की धूमधाम से शादी कर देगा. पिता का अच्छा प्राइवेट हौस्पिटल में इलाज करवाएगा, लेकिन लाखों लोगों की तरह उसे भी डिग्री बगल में दबा कर कंपनियों में अच्छी नौकरी के लिए भटकना पड़ रहा था.
नौकरी मिल नहीं रही थी, इसलिए अभय का मन बहुत उदास और बेचैन रहने लगा था. रोज जौब पोर्टल खोल कर नौकरी तलाशता रहता था. लेकिन आंखें थक जाती थीं, कोई ढंग की मोटी सैलरी वाली जौब मिलती ही नहीं थी.
अभी भी अभय घर के बाहर चारपाई पर अपने मोबाइल में जौब पोर्टल पर कोई नौकरी तलाश रहा था कि एकाएक उस के मोबाइल स्क्रीन पर एक मैसेज चमका ‘वर्क फ्रौम होम जौब. प्रतिदिन 5 हजार से 15 हजार कमाएं.’
अभय चौबे की आंखें चमकीं. वह बुदबुदाया, ”एक दिन में 5 हजार से 15 हजार रुपए. वाह! यदि 5 हजार रुपए प्रतिदिन भी मिले तो डेढ़ लाख रुपया बन जाएगा. देखता हूं कौन दे रहा है यह सुनहरा मौका.’’
अभय चौबे ने तुरंत वह लिंक खोल लिया. कुछ मिनट की खामोशी के बाद एक मीठी आवाज अभय के कानों में पड़ी, ”हैलो सर, मैं प्रिया बोल रही हूं. हमारी इंटरनैशनल कंपनी औनलाइन प्रमोशन का काम करती है. आप कहीं जौब भी कर रहे हों तो कोई दिक्कत नहीं. आप हमारी कंपनी से फिर भी जुड़ सकते हैं.’’
अभय लड़की की मीठी कोयल सी कूकती आवाज सुन कर मंत्रमुग्ध सा हो गया. उसे जरा भी संदेह नहीं हुआ कि वह किसी के द्वारा ठगी का शिकार बनने जा रहा है.
उस ने दिल को मजबूत कर के मुसकराते हुए कहा, ”यस प्रिया मैम, मैं फिलहाल काम की तलाश में हूं. आप बताइए कि मुझे क्या करना होगा जिस से कि मुझे कम से कम 5 हजार रुपए प्रतिदिन मिल जाएं.’’
दूसरी ओर से वही सुरीली मीठी आवाज उभरी, ”बस, आप को कुछ टास्क पूरे करने होंगे. पहले टास्क पर आप को 5 सौ रुपए मिलेंगे.’’
अभय खुश होते हुए बोला, ”मैं तैयार हूं जी टास्क पूरे करने के लिए.’’ यह अभय की ओर से स्वीकृति थी.
कमरे में बैठे अन्य युवक मुसकराने लगे. संदीप आंखें नचा कर बोला, ”फंस गया.’’
अलफा पास में बैठा था. उस ने तुरंत अभय की प्रोफाइल खोली, ”गरीब घर का लड़का है. जल्दी लालच में आ जाएगा, खेलो.’’
अलफा ने कहा तो संदीप ने पहला दांव चला. छोटा सा टास्क था, जिसे अभय ने पूरा कर दिया. उस की आंखें चमकने लगीं.
उस के अकाउंट में 5 सौ रुपए आ गए थे. उसे लगा किस्मत ने देर से ही सही अब उस के दरवाजे पर दस्तक दी है. वह नहीं जानता था यह जाल का पहला धागा है. इस के बाद अभय से छोटेछोटे टास्क करवाए गए. हर बार 5 सौ रुपए उस के अकाउंट में आते गए.
उस का विश्वास जम गया तो दूसरे दिन प्रिया ने उसे टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ दिया.
इस ग्रुप का नाम था ‘ग्लोबल डिजिटल अरनिंग.’ इस में सैकड़ों नकली प्रोफाइल थीं, जो लाखों रुपए कमाने के शार्ट स्क्रीन दिखा रही थीं.
प्रिया की मधुर आवाज उभरी, ”सर, अगर आप वीआईपी टास्क लेंगे तो एक दिन में 2 लाख रुपए आप को मिल जाएंगे.’’
अभय लालच के भंवर जाल में उलझने लगा, उस ने पूछा, ”मुझे कितना निवेश करना होगा?’’
”आप सिर्फ 50 हजार रुपए सिक्योरिटी जमा कर दीजिए.’’ प्रिया की ओर से कोमल स्वर में कहा गया.
लालच में फंसे अभय ने अपने जमींदार ताऊ से गिड़गिड़ा कर 50 हजार रुपए लिए बताए गए नंबर पर भेज दिए.
कमरे में खुशी की लहर दौड़ गई. अल्फा हंसा, ‘एक और मुरगा हलाल हो गया. पैसा पहले म्यूल एकाउंट में डालो! फिर 3 लेयर में घुमाओ और क्रिप्टो में बदल दो.’
मोबाइल स्क्रीन पर तेजी से बैंक खातों की डिटेल बदलने लगी. यह कोई साधारण ठगी नहीं थी. यह पूरा नेटवर्क था. देशभर के गरीब लोगों के बैंक खाते किराए पर लिए जाते. किसी को 10 हजार दे कर उस का अकाउंट खरीद लिया जाता. इन्हीं में ठगी के पैसों को घुमाया जाता, फिर क्रिप्टो करेंसी में बदल लिया जाता था.
हैदराबाद में बैठे सैयद आदिल और सैयद जीशान के खातों में एक ही महीने में डेढड़ेढ़ करोड़ रुपया आया था, लेकिन असली खेल ज्यादा खतरनाक था.
गैवी उर्फ गावी नाम का युवक उसी समय दिल्ली के इस होटल में पहुंचा, जब सीवान के अभय चौहान को 50 हजार का चूना लगा कर उस की प्रोफाइल बंद कर दी गई. गैवी के बैग में कई मोबाइल फोन थे. हर फोन में एक खास ऐप इंस्टाल था, जिस का नाम था DingSMS. यह ऐप बैंक ओटीपी चोरी करने के लिए इस्तेमाल होता था.
गैवी ने मोबाइल अल्फा को सौंपते हुए कहा, ”भाई, चीन वालों ने नया अपडेट भेजा है, अब हमें पुलिस भी नहीं पकड़ पाएगी.’’
अल्फा की आंखें चमक उठीं, ”वाह! लालच में फंसे किसी भी व्यक्ति को हम टास्क खेलने के लिए यह ऐप भेजेंगे. वह हमारे द्वारा भेजे ऐप APK की फाइल जैसे ही डाउनलोड करेगा, उस के अकाउंट में झाड़ू लग जाएगी. वाह! चीन के इंजीनियरों ने तो कमाल का ऐप तैयार किया है. हमें लाखों रुपयों का फायदा पहुंचेगा.’’
वहां जश्न मनाया जाने लगा. शराब और तंदूरी चिकन मंगवाया गया. आज की कलेक्शन 40 लाख हुई थी. उस की खुशी और चीनी आका द्वारा भेजे गए नए ऐप की खुशी में पार्टी होनी ही थी.
कमरे में शराब के जाम छलकने लगे.
उधर दिल्ली के शाहदरा में स्थित साइबर थाने को 25 अप्रैल, 2026 की शाम को एक गुप्त सूचना मिली कि गीता कालोनी स्थित होटल गोल्डन पेटल के कमरों में संदिग्ध व्यक्ति ठहरे हुए हैं. इन की गतिविधियों से लग रहा है कि ये किसी बड़े अपराध को अंजाम देने वाले हैं.
यह जानकारी मिलने के बाद साइबर सेल ने इस सूचना की पुष्टि कराई. फिर गुप्तरूप से होटल गोल्डन पेटल से सूचना एकत्र कर के वहां रेड डालने का प्लान तैयार किया.
साइबर सेल की इंसपेक्टर श्वेता शर्मा ने पूरी रात आंखों में काटी. कमरे में बड़ी स्क्रीन लगा कर होटल गोल्डन पेटल की गतिविधियों पर वह अपनी नजरें जमाए रहीं. श्वेता को तीसरी मंजिल पर सब से ज्यादा एक्टिविटी दिखाई दे रही थी.
कमरा नंबर 307, 309 और 311 में विदेशी सर्वर एक्टिव थे. तकनीकी टीम के लोग बड़ी बारीकी से इन संदिग्ध लोगों को साइबर सेल में बैठेबैठे वाच कर रहे थे.
डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा भी यहां उपस्थित हो कर सारा मजारा देख रहे थे. वह बहुत गंभीर नजर आ रहे थे.
”यह कोई बड़ा गैंग लग रहा है, इन के तार सीमा पार से जुड़े दिखाई दे रहे हैं. शायद ये साइबर ठग हैं, इन के पास करोडों का डेटा है. रेडिंग पार्टी को सभी को मय सबूत के पकडऩा है. एक भी बच कर भागने न पाए, न डाटा डिलीट कर पाएं.’’ कहते हुए डीसीपी ने उन्होंने छापा डालने के लिए एक टीम का गठन कर दिया है.
इस टीम में इंसपेक्टर श्वेता शर्मा, एसआई श्याम बिहारी, विवेक, एएसआई राजदीप, हैडकांस्टेबल जावेद, दीपक, नरेंद्र, कपिल, सचिन आदि को आदि शामिल किया गया. टीम का नेतृत्व इंसपेक्टर विजय कुमार तथा निर्देशन एसीपी (औपरेशन) महेंद्र सिंह को सौंपा गया.
सुबह के 4 बजे इस टीम ने बड़ी सावधानी से होटल गोल्डन पेटल को घेर लिया. उन्होंने अपनी गाडिय़ां दूर अंधेरे में खड़ी कर दी थी.
साइबर ठगों को इस की जानकारी नहीं होती, लेकिन गिरोह का सरगना अलफा बहुत तेज दिमाग था. जश्न खत्म होतेहोते उसे लगा था कि कुछ न कुछ होने वाला है. वह बेचैन था और कमरा नंबर 307 में चहलकदमी कर रहा था.
तभी एक मैसेज ने उस की शंका को बल दे दिया, विदेशी नंबर से मैसेज भेजा गया था ‘पुलिस की मूवमेंट तेज है. अपने डिवाइस तोड़ डालो, यदि पुलिस के हाथ कुछ लगा तो सब तबाह हो जाएगा.’
अल्फा घबरा कर एक ओर भागा. उस ने तुरंते किंग उर्फ तेजी को वीडियो कौल किया, ”लगता है कुछ गड़बड़ होने वाली है.’’
तेजी ने ठहाका लगाया, ”शराब का नशा सिर पर हावी हो गया है, सिर झटक और सो ले थोड़ी देर, पुलिस हम तक कभी नहीं…’’
तेजी का वाक्य अधूरा रह गया. गैलरी में तेजी से दौडऩे की आवाजें आने लगी थीं. उस ने दरवाजा थोड़ा सा खोला. सामने सादी वर्दी में कई हट्टेकट्टे व्यक्ति उन्हीं को कवर करते हुए दौड़ कर आ रहे थे. तेजी ने तुरंत दरवाजा बंद करना चाहा, लेकिन एक एसआई ने दरवाजे पर ठोकर जमा दी. तेजी औंधे मुंह अंदर जा गिरा.
टीम के लोगों ने तुरंत उसे और कमरे में नशे में धुत औंधे, आड़ेतिरछे पड़े हुए सभी लोगों को काबू कर लिया. यह कमरा नंबर 307 था.
कमरा नंबर 309 और 311 में भी गिरोह के लोगों को पकड़ लिया गया. इन में अलफा, संदीप गैवी और किंग उर्फ तेजी प्रमुख थे.
तीनों कमरों से लैपटाप, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, चैकबुक, स्टांप आदि सामान कब्जे में ले लिया गया. सुबह दिन निकलने तक यह टीम सभी को शाहदरा साइबर थाने में ले कर आ गई.
यह लोग निम्नलिखित थे—
प्रदीप सिंह उर्फ अल्फा (35 वर्ष), संदीप सिंह (33 वर्ष), हरसिमरन पाल सिंह (33 साल), गैवी (20 वर्ष) क्रम संख्या 10 और क्रम संख्या 14 निवासी लुधियाना, पंजाब.
विशाल कुमार (25 वर्ष), अजीत कुमार पांडे (38 वर्ष) निवासी सीवान, बिहार. अजीत कुमार पांडे (38 वर्ष) निवासी लखनऊ, उत्तर प्रदेश साहिल (23 वर्ष), सैयद जीशान अली (24 वर्ष), सैयद आदिल हुसैन (24 वर्ष) निवासी हैदराबाद, तेलंगाना परमिंदर सिंह (39 वर्ष), स्वराज कुमार गुप्ता (24 वर्ष) निवासी जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल. राजू कोनवर (24 वर्ष) निवासी धीमाजी, असम, अनिल कुमार अहिरवार (36 वर्ष) निवासी जबलपुर, मध्य प्रदेश, गुरदीप सिंह (30 वर्ष) निवासी लुधियाना पंजाब
इन सभी से कड़ी पूछताछ में उजागर हुआ कि यह संगठित तरीके से देश के भोलेभाले बेरोजगार युवकों, युवतियों को ठगते थे. इन्हें नौकरी का सपना दिखाते, मोटे वेतन का जाल बुनते और पैसे जमा करा कर इन से संपर्क खत्म कर देते थे.
इस संबंध में धारा 317(2), 318(4), 112(2), 61(2), 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया.
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आए कि गिरोह म्यूल बैंक खाते और इन खातों से जुड़े सिम कार्ड यूज करते थे. इस के साथ ही ये धोखाधड़ी के दौरान ओटीपी इंटरसेप्शन हेतु डिंग एसएमएस जैसी मोबाइल एप्लिकेशन को यूज करते थे.
ये विभिन्न राज्यों से आए थे और अपने सहयोगियों प्रदीप उर्फ अल्फा एवं किंग उर्फ तेजपाल सिंह उर्फ तेजी के निर्देशानुसार टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से संगठित तरीके से काम कर रहे थे.
पुलिस द्वारा बैंक खातों की जांच में पाया गया कि एक खाते में लगभग डेढ़ करोड़ रुपए से जुड़ी 40 शिकायतें पाई गईं.
अब तक जांच में करीब 8 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की शिकायतें पुलिस के सामने आई हैं. सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है.
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि ये लोग देश की कोई गोपनीय सूचना बाहरी देशों तक तो नहीं पहुंचा रहे थे. Work From Home Scam






