Family Crime Delhi. शक की वजह से तमाम परिवार आए दिन उजड़ते रहते हैं. इस के बावजूद भी लोग सीख नहीं लेते. काश प्रदीप ने कुछ सीख ली होती तो उसे पत्नी मोनिका की हत्या के आरोप में जेल न जाना पड़ता.

रविंद्र शौकीन ड्राइवर था, लेकिन एक्सीडेंट के बाद उस ने ड्राइवरी छोड़ दी थी. उस का पश्चिमी दिल्ली के निहाल विहार में एक दोमंजिला मकान था. दोनों मंजिलों पर उस ने किराएदार रख रखे थे. उन से किराए के रूप में जो पैसे आते थे, उन्हीं से उस के घर का गुजारा हो रहा था. वह खुद नांगलोई स्थित अपने दूसरे घर में रहता था.

30 मई, 2016 की दोहपर 2 बजे के करीब वह अपने घर पर ही था, तभी निहाल विहार वाले मकान में रहने वाले एक किराएदार ने उसे फोन कर के बताया कि उस के कमरे के सामने वाले कमरे में जो किराएदार पत्नी के साथ रहता था. उस ने और उस की पत्नी ने रात में शराब पी कर आपस में मारपीट की और जम कर हंगामा किया.

इस समय उन के कमरे का दरवाजा खुला हुआ था. फोल्डिंग पलंग पर उस की पत्नी अर्द्धनग्नावस्था में लेटी थी. कई बार उसे आवाज भी दी, मगर वह न तो कुछ बोली और न ही बैड से उठी. कुछ गड़बड़ लग रहा है, इसलिए आप फौरन आ जाएं.

खबर पा कर रविंद्र शौकीन तुरंत अपने घर से निहाल विहार के लिए निकल पड़ा. इस मकान में दूसरी मंजिल पर 5 कमरे बने थे. 3 कमरों में किराएदार रहते थे, जबकि 2 कमरे खाली पड़े थे. जिस कमरे के किराएदार के बारे में रविंद्र को खबर मिली थी, वह किराएदार 3 महीने पहले ही वहां किराए पर आया था. उस का नाम प्रदीप था. उस के साथ केवल उस की 23 वर्षीया पत्नी मोनिका रहती थी. लग रहा था कि दोनों की शादी शायद कुछ दिनों पहले ही हुई थी.

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