Encounter Investigation. 17 जून, 2026 की सुबह बिहार का बिलौटी गांव वैसा ही था, जैसा वह हमेशा होता था. अचानक पुलिस की गाडिय़ां गांव के सड़क से आईं और उसी पारंपरिक सुबह को एक ऐसी रात में बदल दिया, जिसे बिलौटी भूल नहीं पाएगा.
पुलिस के आने की खबर किसी ने सब से पहले चौपाल पर बताई. एक के बाद एक कई वाहन, दलबल के साथ आए. वे भरत भूषण तिवारी की तलाश कर रहे थे. भरत लोगों की जुबानी, एक ऐसा नाम था जो गांव में खटकता हुआ दिखता था. मुखर, विवादित, पर कई बार स्थानीय समस्याओं के लिए आवाज उठाने वाला.
कुछ ने बताया कि वह कटावग्रस्त किनारों पर लोगों के साथ खड़ा रहता था. बाढ़ प्रभावितों की मदद करवाने में सक्रिय दिखाई देता था. वहीं पुलिस की रिपोर्ट में वह किसी मामूली सामाजिक कार्यकर्ता से कहीं ज्यादा था. उस पर कई आपराधिक मामले दर्ज थे और वह हथियार ले कर घूमता था.
पुलिस ने गांव की कुछ गलियों की घेराबंदी की. कुछ गलीमुहाने रास्तों पर जवान खड़े थे, पुलिस वालों की सख्त निगाहें चारों ओर लगी थीं.
घटना के गवाह बताते हैं कि भरत का घर गांव के बीचोबीच था. वह तेजतर्रार किस्म का इंसान था. अकसर लोगों से खुल कर बात करता, जरूरतमंदों के लिए कुछ न कुछ करता रहता. इसलिए उस के पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर सुनते ही आधी आबादी चौकन्नी हो उठी.
कुछ ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने देखा कि भरत ने कुछ देर इंतजार किया, फिर बाहर निकला. कुछ का कहना था कि उस ने आत्मसमर्पण जैसा इशारा किया. दोनों हाथ ऊपर कर दिए. उसी वक्त वहां मौजूद पुलिस का कहना था कि भरत ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी और पुलिस ने अपना बचाव करते हुए इस का जवाब दिया.






