Best Short Story in Hindi : फिल्म लेखक और अभिनेत्री के इश्क़ की उड़ान

Best Short Story in Hindi : 26 दिसंबर, 2021 की सुबह का वक्त था. उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के थाना खागा के थानाप्रभारी  आनंद प्रकाश शुक्ला क्षेत्र के एक कुख्यात अपराधी की फाइल पलट रहे थे. तभी एक युवक ने उन के कक्ष में प्रवेश किया.

वह बेहद घबराया हुआ था. उन्होंने एक नजर उस पर डाली फिर पूछा, ‘‘सुबहसुबह कैसे आना हुआ? क्या कोई खास बात है? तुम इतने घबराए हुए क्यों हो?’’
‘‘सर, मेरा नाम इंद्रमोहन सिंह राजपूत है. मैं गुलरिहनपुर मजरे के कूरा गांव का रहने वाला हूं. बीती रात मेरी पत्नी योगमाया ने हंसिया से गला रेत कर आत्महत्या कर ली. उस की लाश घर के अंदर पड़ी है. रात में सूचना देने नहीं आ सका. इसलिए सुबह आया हूं.’’

थानाप्रभारी आनंद शुक्ला के सामने कई ऐसे सवाल थे, जिन के जवाब इंद्रमोहन सिंह दे सकता था. लेकिन पहली जरूरत मौके पर पहुंचने की थी. इसलिए उन्होंने सब से पहले एसपी (फतेहपुर) राजेश कुमार सिंह और डीएसपी ज्ञान दत्त मिश्रा को घटना की जानकारी दी. फिर वह पुलिस टीम ले कर मौके पर पहुंच गए. उस समय इंद्रमोहन सिंह के घर के बाहर लोगों की भीड़ थी. भीड़ को हटाते हुए थानाप्रभारी आनंद प्रकाश शुक्ला ने सहकर्मियों के साथ घर के अंदर प्रवेश किया और उस कमरे में पहुंचे, जहां मृतका की लाश पड़ी थी.

कमरे का दृश्य बड़ा ही वीभत्स था. कमरे के अंदर पड़े पलंग पर योगमाया नाम की युवती की लाश खून से तरबतर पड़ी थी. उस के गले पर 3 गहरे घाव थे, जिन से खून रिस रहा था. खून से बिस्तर तरबतर था. पलंग के पास ही खून सना हंसिया पड़ा था, जिसे श्री शुक्ला ने जांच हेतु सुरक्षित कर लिया. मृतका योगमाया का रंग गोरा, शरीर स्वस्थ और उम्र 25 वर्ष के आसपास थी. मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ. शव निरीक्षण के बाद थानाप्रभारी इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि यह मामला आत्महत्या का नहीं है,

बल्कि रणनीति के तहत हत्या का है. पुलिस को गुमराह करने के लिए आत्महत्या की सूचना दी गई है.
सच्चाई का पता लगाने के लिए वह वहां पर मौजूद मृतका के मायके वालों से जानकारी के लिए बड़े तभी एसपी राजेश कुमार सिंह तथा डीएसपी ज्ञान दत्त मिश्रा वहां आ गए.

पुलिस को दिखा हत्या का मामला

पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया फिर इंसपेक्टर आनंद प्रकाश शुक्ला से बातचीत की. इंसपेक्टर शुक्ला ने शक जाहिर किया कि मामला आत्महत्या का नहीं, बल्कि हत्या का है और इस का रहस्य मृतका के पति इंद्रमोहन सिंह के पेट में ही छिपा है. मौके पर मृतका का पति इंद्रमोहन सिंह मौजूद था. अत: एसपी राजेश कुमार सिंह ने उस से पूछताछ की. इंद्रमोहन सिंह ने बताया कि वह रंगकर्मी है. भोजपुरी फिल्मों में कहानी लेखन का काम करता है. इस के अलावा वह भोजपुरी गानों पर एलबम बनाता है.

कल सुबह वह पहले अपनी ससुराल गया, फिर वहां से लखनऊ चला गया था. घर पर उस की पत्नी योगमाया, एक वर्षीय बेटा अनमोल तथा भोजपुरी फिल्मों में काम करने वाली अभिनेत्री नेहा वर्मा थी. देर रात जब वह घर वापस आया तो नेहा वर्मा ने बताया कि योगमाया ने आत्महत्या कर ली. रात अधिक हो जाने के कारण वह थाने नहीं गया. सुबह सूचना देने गया. भोजपुरी फिल्म नायिका नेहा वर्मा डरीसहमी घर पर ही मौजूद थी. राजेश कुमार सिंह ने नेहा वर्मा से पूछताछ की तो उस ने बताया कि रात 8 बजे उस ने और योगमाया ने साथ बैठ कर खाना खाया था. उस के बाद योगमाया अपने बेटे के साथ कमरे में जा कर लेट गई और वह दूसरे कमरे में जा कर सो गई.

रात 10 बजे के लगभग उसे बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी तो वह कमरे में गई. वहां पलंग पर योगमाया मृत पड़ी थी. उस ने हंसिया से गला रेत कर आत्महत्या कर ली थी. कुछ देर बाद इंद्रमोहन सिंह आ गए. तब वह बच्चे को गोद में ले कर चीखते हुए बाहर निकले. उस के बाद इंद्रमोहन सिंह के मातापिता व भाई आ गए, जो पड़ोस में रहते हैं. नेहा वर्मा ने यह भी बताया कि वह 2 साल से इंद्रमोहन सिंह के संपर्क में है. वह भोजपुरी फिल्मों में साइड रोल करती है. अभी कुछ माह पहले ही उस की ‘पश्चाताप’ फिल्म बनी है, जो जल्द ही रिलीज होने वाली है. इस भोजपुरी फिल्म में उस का साइड रोल है.

फिल्म की कहानी इंद्रमोहन सिंह ने लिखी थी. उस ने बताया कि वह 4 दिन पहले ही अपने पिता के साथ गोरखपुर से कूरा गांव आई थी. पहले भी वह कई बार इंद्रमोहन सिंह के साथ गांव आई थी. पूछताछ के दौरान राजेश सिंह की नजर नेहा वर्मा के कपड़ों पर पड़ी. वह सलवार सूट पहने थी. सलवार खून से सनी थी और हाथों पर भी खून के दाग थे. गले पर खरोंच का निशान था. श्री सिंह ने वहां पर लगे खून के बाबत उस से पूछा, तो वह सकपका गई और कोई सही जवाब न दे सकी. वह कभी इंद्रमोहन सिंह की तरफ देखती तो कभी आंखें नीची कर लेती.

राजेश कुमार सिंह समझ गए कि नेहा वर्मा कुछ गहरा राज छिपा रही है. यह मामला आत्महत्या का नहीं है. हत्या के इस मामले में नेहा का हाथ हो सकता है. योगमाया के शव के पास उस की सास कृष्णा व ससुर चंद्रमोहन सुबक रहे थे. डीएसपी ज्ञान दत्त मिश्रा ने उन से पूछताछ की तो कृष्णा देवी ने बताया, ‘‘साहब, हमारी बहू योगमाया आत्महत्या नहीं कर सकती, उस की हत्या की गई है. नेहा और इंद्रमोहन के बीच नाजायज रिश्ता है, जिस का विरोध योगमाया करती थी. इसी विरोध के चलते नेहा ने उस को रास्ते से हटा दिया साहब, उस को तुरंत गिरफ्तार करो.’’

मृतका के भाई सत्यप्रकाश ने डीएसपी ज्ञान दत्त मिश्रा को बताया कि बहनोई इंद्रमोहन व नेहा वर्मा के बीच पिछले 2 सालों से अवैध संबंध है. इस नाजायज रिश्ते का बहन विरोध करती थी. इस पर इंद्रमोहन उसे प्रताडि़त करता था. कई बार उसे समझाने की कोशिश की गई लेकिन वह नहीं माना. इन्हीं नाजायज रिश्तों का विरोध करने पर इंद्रमोहन और नेहा वर्मा ने उस की हत्या कर दी और आत्महत्या करने की झूठी सूचना थाने जा कर दी. आसपड़ोस के लोगों ने भी नाजायज रिश्ता पनपने और हत्या का शक जताया. शक के आधार पर पुलिस अधिकारियों ने इंद्रमोहन सिंह राजपूत और उस की प्रेमिका नेहा वर्मा को हिरासत में ले लिया और मृतका योगमाया के शव को पोस्टमार्टम हेतु फतेहपुर के जिला अस्पताल भिजवा दिया.

इंद्रमोहन सिंह राजपूत और नेहा वर्मा को थाना खागा लाया गया. यहां पुलिस कप्तान राजेश कुमार सिंह व डीएसपी ज्ञान दत्त मिश्रा ने दोनों से सख्त रुख अपना कर पूछताछ की तो उन को सच्चाई उगलने में ज्यादा देर नहीं लगी. नेहा ने बताया कि वह इंद्रमोहन राजपूत से प्यार करने लगी थी. दोनों के बीच अवैध रिश्ता भी बन गया था. वह इंद्रमोहन से शादी रचाना चाहती थी. लेकिन उस की पत्नी योगमाया बाधक थी. इस बाधा को दूर करने के लिए उन दोनों ने साजिश रची और योगमाया की हत्या कर दी. वह अपना जुर्म कुबूल करती है.

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इंद्रमोहन सिंह राजपूत ने बताया कि वह खूबसूरत नेहा वर्मा के प्यार में अंधा हो गया था. वह उस से शादी कर खुशियां पाना चाहता था. नेहा के कहने पर उस ने पत्नी की मौत का षडयंत्र रचा और उसे मौत की नींद सुला दिया. चूंकि इंद्रमोहन और नेहा ने हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था और आलाकत्ल हंसिया भी बरामद हो गया था. अत: थानाप्रभारी आनंद प्रकाश शुक्ला ने मृतका के भाई सत्यप्रकाश को वादी बना कर धारा 302 आईपीसी के तहत इंद्रमोहन सिंह राजपूत तथा नेहा वर्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और दोनों को विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस जांच में इश्क में डूबी एक ऐसी नायिका की कहानी सामने आई, जो खुद ही नायिका से खलनायिका बन गई. उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद के थरियांव थाना अंतर्गत एक गांव है अब्दुल्लापुर घूरी. इसी गांव में विदित कुमार राजपूत अपने परिवार के साथ रहते थे. उस के परिवार में पत्नी आरती के अलावा एक बेटा सत्यप्रकाश तथा 2 बेटियां दिव्या व योगमाया थीं. विदित कुमार किसान थे. कृषि उपज से ही वह अपने परिवार का भरणपोषण करते थे. बड़ी बेटी दिव्या का विवाह वह कर
चुके थे.

ममेरी बहन से की थी लवमैरिज

दिव्या से छोटी योगमाया थी. वह छरहरी काया और तीखे नाकनक्श वाली लड़की थी. उस की मुसकान सामने वाले पर गहरा असर डालती थी. योगमाया जितनी खूबसूरत थी, पढ़ने में भी उतनी ही तेज थी. उस ने हाईस्कूल की परीक्षा सरस्वती बालिका इंटर कालेज से पास कर ली थी और आगे भी पढ़ना चाहती थी. लेकिन मांबाप ने उस की पढ़ाई बंद करा दी और घरेलू काम में लगा दिया.
योगमाया के घर इंद्रमोहन सिंह का आनाजाना लगा रहता था. वह फतेहपुर जिले के ही थाना खागा के गांव कूरा के रहने वाले चंद्रमोहन राजपूत का बेटा था. रिश्ते में दोनों सगे ममेरे भाईबहन थे. घर आतेजाते योगमाया की खूबसूरती और मुसकान इंद्रमोहन के दिल में बस गई थी.

एक दिन इंद्रमोहन ने उस से अपने मन की बात भी कह दी, ‘‘योगमाया, मैं तुम से प्यार करता हूं. यदि तुम मेरा प्यार कुबूल कर लोगी, तो मैं खुद को दुनिया का सब से खुशनसीब इंसान समझूंगा.’’

योगमाया उम्र के जिस पायदान पर थी, उस उम्र में लड़कियों को ऐसी बातें गुदगुदा देती हैं. योगमाया का दिलोदिमाग भी सनसनी से भर गया. उस ने इंद्रमोहन की आंखों में देखा. उन आंखों में प्यार का सागर ठाठें मार रहा था. उस की आंखों में देखते हुए कुछ देर तक वह सोच में डूबी रही, उस के बाद बोली, ‘‘अगर मैं तुम्हारा प्यार कुबूल कर लूं तो तुम्हारा अगला कदम क्या होगा?’’
‘‘शादी?’’ इंद्रमोहन ने तपाक से जवाब दिया.
‘‘लेकिन हमारातुम्हारा रिश्ता तो बहनभाई का है. हम दोनों के घर वाले राजी नहीं हुए तो…?’’ योगमाया ने पूछा.
‘‘…तो हम भाग कर प्रेम विवाह कर लेंगे.’’
योगमाया मुसकराई फिर नजरें झुका कर स्वीकृति में सिर हिला दिया.

इंद्रमोहन और योगमाया के घर वालों को दोनों के प्यार व शादी रचाने की बात पता चली तो उन के पैरों तले जमीन खिसक गई. घर वालों ने दोनों को बहुत समझाया, लेकिन जब वह नहीं माने तो विदित कुमार ने 20 वर्षीय बेटी योगमाया की शादी 12 फरवरी, 2015 को इंद्रमोहन राजपूत के साथ कर दी.

फिल्म कहानी लेखक बन गया इंद्रमोहन

शादी के बाद योगमाया इंद्रमोहन की दुलहन बन कर ससुराल आ गई. चूंकि इंद्रमोहन की मां कृष्णा इस शादी से नाराज थी, अत: वह पति चंद्रमोहन व छोटे बेटे जंगबहादुर के साथ अलग मकान में रहने लगी. वह इंद्रमोहन व योगमाया से बहुत कम बातचीत करती थी. इंद्रमोहन सिंह बीए पास था. उस का रुझान भोजपुरी फिल्मों की तरफ था. वह फिल्म लेखन में अपनी किस्मत आजमाना चाहता था. उस ने भोजपुरी फिल्म के लिए कई कहानियां लिखीं, कुछ कहानी भोजपुरी फिल्म निर्माताओं को पसंद आईं तो कुछ कूड़ेदान में चली गईं.

लेकिन इंद्रमोहन सिंह हताश नहीं हुआ और लेखन कार्य तथा निर्माताआें के संपर्क में बना रहा. इंद्रमोहन सिंह अपनी पत्नी योगमाया से खूब प्यार करता था और उसे किसी प्रकार की कमी महसूस नहीं होने देता था. योगमाया भी इंद्रमोहन की सेवा करती थी. आर्थिक संकट में भी वह पति का साथ देती थी. आर्थिक संकट के दौरान एक बार तो उस ने अपने आभूषण तक बेच दिए थे. इंद्रमोहन और योगमाया का जीवन सुखमय बीत ही रहा था कि इसी बीच नेहा वर्मा नाम की बला आ गई, जिस ने योगमाया की जिंदगी में जहर घोल दिया. उस ने योगमाया के जीवन की खुशियां तो छीनी ही फिर आखिर में जिंदगी भी छीन ली.

नेहा वर्मा मूलरूप से मुंडेरा कस्बे के महराजगंज की रहने वाली थी. उस के पिता काशीनाथ वर्मा गोरखपुर के सुभाष नगर मोहल्ले में रहते थे. वह प्राइवेट फर्म में नौकरी करते थे. काशीनाथ साधारण पढ़ेलिखे व्यक्ति थे. आमदनी भी सीमित थी. लेकिन वह सीमित आमदनी में भी खुश थे. मुंडेरा कस्बे में उन का आनाजाना लगा रहता था.

नेहा वर्मा से हुई मुलाकात

20 वर्षीय नेहा वर्मा गोरीचिट्टी छरहरी काया की युवती थी. नैननक्श भी तीखे थे. सब से खूबसूरत थीं उस की आंखें. खुमार भरी गहरी आंखें. उस की आंखों में ऐसी कशिश थी कि जो उस में देखे, खो सा जाए. नेहा ने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर ली थी और आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहती थी. वह फैशनेबल थी. अकसर मौडर्न कपड़े पहनती थी और खुद को सजासंवरा बनाए रखती थी. सुंदर चेहरे वाली नेहा की आकर्षक देह पर मौडर्न कपड़े खूब फबते थे. जिस से देखने में वह फिल्मी हीरोइन सरीखी लगती थी. वह स्वभाव से चंचल और समय के हिसाब से काफी तेज थी. नेहा भोजपुरी फिल्में खूब देखती थी. उस का भी सपना था कि वह फिल्मों में काम करे.

वह फिल्म अभिनेत्री बनने का सपना संजोए बैठी थी. नेहा वर्मा और इंद्रमोहन सिंह की पहली मुलाकात 25 नवंबर, 2019 को मुंडेरा (महराजगंज) में एक पारिवारिक शादी समारोह में हुई. इस शादी समारोह में नेहा वर्मा अपने पिता काशीनाथ के साथ आई थी, जबकि इंद्रमोहन अपनी पत्नी योगमाया के साथ आया था. सजीसंवरी नेहा पर जब इंद्रमोहन की नजर पड़ी तो पहली ही नजर में वह उस के दिल में रचबस गई. मौका मिला तो दोनों में हायहैलो हुई और फिर परिचय हुआ.

इंद्रमोहन ने बताया कि वह फतेहपुर जिले के कूरा गांव का रहने वाला है और भोजपुरी फिल्मों में फिल्म की कहानी लेखन का कार्य करता है. नेहा वर्मा ने बताया कि वह गोरखपुर से पिता के साथ आई है. उसे भोजपुरी फिल्में पसंद है. वह भी फिल्मों में काम करना चाहती है. नेहा ने इंद्रमोहन का परिचय अपने पिता काशीनाथ से भी कराया. इंद्रमोहन ने भी अपनी पत्नी योगमाया का परिचय नेहा से कराया.

उस शादी समारोह में नेहा वर्मा और इंद्रमोहन ने एकदूसरे से खूब बातचीत की तथा एकदूसरे को अपने मोबाइल नंबर दे दिए. इस के बाद दोनोें के बीच मोबाइल फोन पर बातचीत होने लगी.
इंद्रमोहन नेहा से मिलने गोरखपुर भी जाने लगा. नेहा और इंद्रमोहन के बीच पहले दोस्ती हुई फिर प्यार पनपने लगा. इसी बीच इंद्रमोहन और नेहा भोजपुरी फिल्म के गाने पर एलबम भी बनाने लगे. इंद्रमोहन ने नेहा को कई भोजपुरी फिल्म निर्माताओं से भी मिलवाया और फिल्म में रोल देने का अनुरोध किया.

साथसाथ काम करते दोनों के बीच प्यार पनपा तो तन मिलन की भी इच्छा प्रबल हो उठी. एक दिन प्यार के क्षणों में दोनों के तन सटे तो दोनों ने एकदूसरे को बांहों में भर
लिया. फिर तो उन्हें एकाकार होने में ज्यादा देर नहीं लगी. अवैध संबंधों का सिलसिला अनवरत चलने लगा. नेहा इंद्रमोहन के प्यार में ऐसी पड़ी कि हमेशा के लिए उस के साथ रहने के बारे में सोचने लगी.

फिल्म में नेहा को दिलाया रोल

फरवरी, 2020 में इंद्रमोहन सिंह राजपूत ने फिल्म ‘पश्चाताप’ की कहानी लिखी. यह कहानी भोजपुरी फिल्म निर्मातानिर्देशक सन्नी प्रकाश को पसंद आ गई. सन्नी प्रकाश ने फिल्म के कलाकारों का चयन किया और इंसपायरर फिल्म ऐंड एंटरटेनमेंट प्रा.लि. के बैनर तले फिल्म बनाने का निर्णय लिया. इस फिल्म में नायकनायिका के रूप में राकेश गुप्ता तथा स्मिता सना का चयन हुआ. साथ ही सहनायिका के रूप में नेहा वर्मा का चयन हुआ. ग्रामीण परिवेश की इस ‘पश्चाताप’ फिल्म की शूटिंग 21 सितंबर, 2020 से फतेहपुर के आसपास के क्षेत्र से शुरू हुई. शूटिंग के लिए नेहा वर्मा गोरखपुर से फतेहपुर आती थी और इंद्रमोहन सिंह राजपूत के गांव कूरा में उसी के घर में रुकती थी.

इंद्रमोहन की पत्नी योगमाया पति पर आंखें मूंद कर विश्वास करती थी और उस के कहने पर नेहा की सेवा में लगी रहती थी. लेकिन उस के विश्वास को ठेस तब लगी, जब उस ने एक रात नेहा को पति के साथ रंगेहाथों पकड़ लिया. कोई भी औरत भूख और पति की प्रताड़ना तो सह सकती है, लेकिन पति का बंटवारा कभी नहीं. योगमाया को भी पति का बंटवारा मंजूर नहीं था. सो उस ने विरोध शुरू कर दिया. नेहा को ले कर वह पति से लड़नेझगड़ने लगी. नेहा वर्मा को योगमाया का विरोध खटकने लगा. वह इंद्रमोहन को योगमाया के खिलाफ भड़काने लगी.

इस का नतीजा यह हुआ कि इंद्रमोहन पत्नी को अधिक प्रताडि़त करने लगा. तब योगमाया ने पति और नेहा के बीच पनप रहे रिश्तों की जानकारी सास कृष्णा तथा अपने मायके वालों को दे दी. सब ने इंद्रमोहन को समझाया भी, लेकिन वह नहीं माना. फिल्म ‘पश्चाताप’ की शूटिंग 6 महीने तक चली. इस बीच नेहा वर्मा कई बार कूरा गांव आई. वह जब भी आती, घर में कलह होती. नेहा वर्मा इंद्रमोहन के प्यार में इतनी डूब गई थी कि वह उस के साथ शादी कर घर बसाने की सोचने लगी थी. लेकिन वह यह भी जानती थी कि योगमाया के रहते घर बसाना संभव नहीं है.

उस के प्यार में योगमाया बाधा बनी तो उस ने उसे मिटाने का निश्चय कर लिया. इंद्रमोहन पहले ही नेहा की खूबसूरती का कायल था, सो वह उस की जायजनाजायज बातों को मान लेता था. इंद्रमोहन अब तक एक बच्चे का बाप बन चुका था, लेकिन उसे बच्चे से ज्यादा लगाव न था. योगमाया से भी वह नफरत करने लगा था.

पे्रमिका नेहा के साथ किया पत्नी का कत्ल

21 दिसंबर, 2021 को नेहा वर्मा अपने पिता काशीनाथ वर्मा के साथ गोरखपुर से इंद्रमोहन के घर कूरा गांव आई. उसे पता चला था कि फिल्म ‘पश्चाताप’ जल्दी ही रिलीज होने वाली है. सिनेमाघरों में पोस्टर भी चस्पा हो गए थे. एक दिन रुक कर काशीनाथ वर्मा तो वापस चले गए लेकिन नेहा इंद्रमोहन के घर ठहर गई. 23 दिसंबर, 2021 की रात योगमाया ने नेहा और इंद्रमोहन को फिर से रंगेहाथों पकड़ लिया. इस पर उस ने जम कर हंगामा किया और पति तथा नेहा को खूब खरीखोटी सुनाई. अपमानित नेहा ने इंद्रमोहन को योगमाया  के खिलाफ भड़काया और रास्ते से हटाने को कहा.

इंद्रमोहन पहले तो राजी नहीं हुआ, लेकिन बाद में मान गया. इस के बाद नेहा और इंद्रमोहन ने योगमाया की हत्या का षडयंत्र रचा. 25 दिसंबर, 2021 को योजना के तहत इंद्रमोहन अपने भाई जंगबहादुर के साथ लखनऊ जाने की बात कह कर घर से निकला. लेकिन लखनऊ न जा कर वह अपनी ससुराल घुरू गया और अपने साले सत्यप्रकाश से मिला. उस ने साले को भी बताया कि वह किसी काम से लखनऊ जा रहा है. भाई जंगबहादुर को उस ने फतेहपुर भेज दिया. इधर घर में योगमाया, उस का एक वर्षीय बेटा अनमोल तथा नेहा वर्मा थी. रात 8 बजे योगमाया ने नेहा वर्मा के साथ खाना खाया फिर बच्चे के साथ कमरे में पड़े पलंग पर जा कर लेट गई. कुछ देर बाद योगमाया सो गई.

लेकिन नेहा वर्मा की आंखों से नींद कोसों दूर थी. योजना के तहत उसने इंद्रमोहन से मोबाइल फोन पर बात की और घर बुला लिया. रात 10 बजे नेहा वर्मा और इंद्रमोहन, योगमाया के कमरे में पहुंचे. नेहा के हाथ में हंसिया था. कमरे में योगमाया रजाई से मुंह ढंके सो रही थी. नेहा उस की छाती पर सवार हो गई और रजाई मुंह से हटा कर उस की गरदन पर हंसिया से वार कर दिया. योगमाया चीखी और उठने का प्रयास किया लेकिन उठ न सकी. बचाव में उस ने नेहा की गरदन पकड़ ली. इसी बीच नेहा ने हंसिया से वार पर वार योगमाया की गरदन पर किए. जिस से उस की गरदन पर 3 गहरे जख्म बने और खून की धार बहने लगी.

फिर भी उस ने उठने का प्रयास किया और पैर पटकने लगी. तभी इंद्रमोहन ने उस के पैर दबोच लिए और नेहा ने फिर गरदन पर हंसिया से वार किए. कुछ देर तड़पने के बाद योगमाया ने दम तोड़ दिया. इसी बीच मां की बगल में लेटा मासूम अनमोल तेज आवाज में रोने लगा तो इंद्रमोहन ने उसे गोद में उठा लिया. फिर वह चीखता हुआ घर के बाहर आया. उस की चीखने की आवाज सुन कर उस के मातापिता व पड़ोसी आ गए. उन सब को इंद्रमोहन ने बताया कि योगमाया ने आत्महत्या कर ली है. लेकिन मातापिता व पड़ोसियों ने उस की बात का यकीन नहीं किया.

नेहा वर्मा के हाथों में लगा खून तथा खून से सराबोर सलवार देख कर सब समझ गए कि मामला हत्या का है. रात अधिक हो जाने के कारण इंद्रमोहन थाने नहीं गया. सुबह 7 बजे वह थाना खागा पहुंचा और पत्नी योगमाया द्वारा आत्महत्या किए जाने की सूचना दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी आनंद प्रकाश शुक्ला पुलिस टीम के साथ इंद्रमोहन के घर पहुंचे. 27 दिसंबर, 2021 को थानाप्रभारी आनंद प्रकाश शुक्ला ने आरोपी इंद्रमोहन सिंह राजपूत तथा नेहा वर्मा से विस्तार से पूछताछ करने के बाद उन्हें फतेहपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को जिला जेल भेज दिया गया. Best Short Story in Hindi
—कथा पुलिस सूत्रोंं पर आधारित

करोड़ों कमाते है सितारों के बॉडीगार्ड

नब्बे के दशक के दौरान जब फिल्मों की आउटडोर शूटिंग का चलन बढ़ा तो एक नई दिक्कत फिल्मी सितारों की सुरक्षा की पेश आने लगी. ऐसा नहीं कि इस के पहले आउटडोर शूटिंग नहीं होती थी और फिल्म स्टार्स के चाहने वाले उन्हें देखने और छूने के लिए बेकाबू होने की हद तक बेताब नहीं रहते थे, बल्कि ऐसा पहले भी होता था. जहां भी फिल्मों की शूटिंग हो रही होती थी, वहां लोगों की अच्छीखासी भीड़ लग जाती थी.

प्रसिद्ध साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु के आंचलिक उपन्यास ‘मारे गए गुलफाम’ पर आधारित फिल्म ‘तीसरी कसम’ के कुछ दृश्यों की शूटिंग जब मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में हो रही थी, तब फिल्म के हीरो राज कपूर और हीरोइन वहीदा रहमान को देखने के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा था.

साल 1966 में प्रदर्शित इस फिल्म का बड़ा हिस्सा बिहार के अररिया जिले के गांव औराही हिंगना में भी फिल्माया गया था. वहां भी लोग राज कपूर और वहीदा रहमान को रूबरू देखने के लिए उमड़ पड़े थे. तब आज की तरह गैजेट्स नहीं थे कि आप अपने हाथ में दबे मोबाइल की स्क्रीन पर फोटो और वीडियो जब चाहे देख लें.

तब फिल्मी सितारे या तो थिएटर में दिखते थे या फिल्म के पोस्टरों में. लेकिन उन के फोटो काट कर दीवार पर चिपकाना हो या सीने से लगाना हो तो वो मैग्जींस खरीदनी पड़ती थीं, जिन में इन के फोटो छपते थे.

‘तीसरी कसम’ की यूनिट को बिहार और मध्य प्रदेश दोनों जगह दिक्कतें पेश आई थीं. दिक्कतें इस तरह की कि राज कपूर और वहीदा रहमान को देखने के लिए कई जगह कालेज के छात्रों ने हुड़दंग किया था.

शूटिंग देखने आए लोगों को काबू करने में स्थानीय पुलिस का रौब ही काफी होता था. लेकिन उस दौर के युवाओं पर भी पुलिसिया रौब नहीं चलता था.

शूटिंग के दौरान एक बार जब राज कपूर और वहीदा रहमान ललितपुर से मुंबई लौट रहे थे तो विदिशा रेलवे स्टेशन पर छात्रों ने ट्रेन ही रोक ली थी. तब अधिकतर ट्रेनों में एसी कोच नहीं हुआ करते थे फर्स्ट क्लास का डब्बा होता था, जो केबिनों में बंटा रहता था.

छात्रों का जमावड़ा और हुड़दंग देख राज कपूर घबरा उठे थे और विदिशा स्टेशन पर उतर कर उन्हें छात्रों के सामने हाथ जोड़ना पड़ा था. तब कहीं जा कर आधे घंटे बाद ट्रेन रवाना हो पाई थी.

आज अगर ऐसा हो तो क्या होगा, इस सवाल का जबाब यही निकलता है कि आज ऐसा नहीं हो सकता. क्योंकि तमाम बड़े और नामी फिल्म स्टार्स अपनी सिक्योरिटी की जिम्मेदारी खुद उठाते हैं और उस पर तगड़ी रकम भी खर्च करते हैं.

हाल तो यह है कि फिल्म स्टार्स के बौडीगार्ड की सालाना सैलरी ही करोड़ों तक में होती है और इन बौडीगार्ड्स की शोहरत और रुतबा भी किसी फिल्म स्टार से कम नहीं होता.

सलमान और शेरा से हुई शुरुआत

बात साल 1995 की है जब सलमान खान का सितारा बुलंद था. लिहाजा उन्हें एक तजुर्बेकार और भरोसेमंद बौडीगार्ड की सख्त जरूरत थी. ऐसे में चंडीगढ़ की एक पार्टी में उन की मुलाकात सिख समुदाय के शेरा, जिन का असली नाम गुरमीत सिंह है, से हुई.

सलमान खान के भाई अरबाज खान को शेरा उपयुक्त लगे तो उन्होंने शेरा को बुला भेजा. बात जम गई और पहली ही मीटिंग में शेरा सलमान खान के बौडीगार्ड बन गए. अब तो आलम यह है कि शेरा को सलमान की परछाई और मालिक तक कहा जाने लगा है.

26 साल के अरसे में फिल्म इंडस्ट्री में कई उतारचढ़ाव और बदलाव आए, लेकिन इन दोनों का साथ नहीं छूटा. यह एक रिकौर्ड है कि शेरा के रहते कोई सलमान को छू भी नहीं पाया.

हिफाजत करने के एवज में शेरा को सैलरी कितनी मिलती है, यह आंकड़ा सुन कर आप भी चौंक सकते हैं कि तकरीबन ढाई करोड़ रुपए सालाना यानी कम से कम 20 लाख रुपए महीना.

इतनी सैलरी तो बड़ीबड़ी कंपनियों के सीईओ की भी नहीं होती और कई फिल्म स्टार्स हाड़तोड़ मेहनत के बाद भी इतना नहीं कमा पाते, जितनी शेरा जैसे कई बौडीगार्ड की तनख्वाह है.

लेकिन शेरा का काम या जिम्मेदारी सिर्फ अपने बौस के साथ या आगेपीछे बुत जैसे खड़े रहने की नहीं है, बल्कि यह बेहद चुनौतीपूर्ण काम है जिसे शेरा 26 साल से बखूबी अंजाम दे रहे हैं.

सलमान जहां भी जाते हैं, वहां शेरा एक दिन पहले पहुंच कर जायजा लेते हैं. इस के लिए उन्हें कई किलोमीटर पैदल भी चलना पड़ता है.

सलमान के आते ही वह उन्हें जौइन कर लेते हैं और फिर पलभर को भी नहीं छोड़ते. शेरा के रहते सलमान किसी बात की चिंता नहीं करते, क्योंकि शेरा उन के फैंस को भी बड़ी सूझबूझ से मैनेज करते हैं.

असल में सलमान का बौडीगार्ड बनने से पहले शेरा हौलीवुड स्टार्स को सिक्योरटी दिया करते थे और साल 1993 में उन्होंने अपनी खुद की सिक्योरटी कंपनी खोली थी, जिस का नाम ‘टाइगर सिक्योरिटी’ था. यह कंपनी फिल्म स्टार्स को सिक्योरिटी उपलब्ध कराती थी. उन के क्लाइंट्स में अमिताभ बच्चन का नाम भी शुमार होता है.

यह वह दौर था, जब देश भर में धड़ल्ले से सिक्योरिटी कंपनियां खुल रहीं थीं और हर सेक्टर में सिक्योरिटी गार्ड्स की मांग बढ़ रही थी. लेकिन बौडीगार्ड केवल खास किस्म के लोगों की ही डिमांड और जरूरत थे.

किसी हस्ती का बौडीगार्ड बनने की काबिलियत केवल तगड़ा शरीर ही नहीं, बल्कि अक्ल की भी जरूरत रहती है कि सिचुएशन देखते आप में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता कितनी और कैसी है.

शेरा इन मापदंडों पर लगातार खरे उतरते गए तो उन की चर्चा भी खूब होने लगी. जिस में शोहरत का तड़का सलमान खान अभिनीत फिल्म बौडीगार्ड से लगा.

बन जाते हैं फैमिली मेंबर

इस फिल्म के टाइटल ट्रैक में दोनों एक साथ डांस करते दिखे थे और इस से भी खास बात यह थी कि सलमान ने यह फिल्म शेरा को डेडिकेट की थी.

यह किसी नौकर को सम्मान देने की एक बेहतर मिसाल थी, जिस ने सलमान और शेरा को और नजदीक ला दिया. बाद में सलमान ने शेरा के बेटे टाइगर को सुलतान फिल्म का असिस्टेंट डायरेक्टर भी बनाया था.

अच्छेबुरे दिनों में साथ निभाने वाले शेरा अब सलमान के फैमिली मेंबर बन गए हैं तो यह कतई हैरानी की बात नहीं. ठीक यही

नामी ऐक्ट्रैस दीपिका पादुकोण के साथ भी हुआ, जो अपने बौडीगार्ड जलाल को भाई मानती हैं और रक्षाबंधन पर उन्हें राखी भी बांधती हैं.

नायकों से ज्यादा नायिकाओं को फैंस का खतरा रहता है क्योंकि वे ज्यादा जोश में उन के नजदीक पहुंच कर उन्हें छू लेना चाहते हैं.

अब वह दौर गया, जब 90 फीसदी फिल्मों की शूटिंग मुंबई के स्टूडियोज में हो जाया करती थी और सितारे बंद गाड़ी मैं बैठ कर सेट पर पहुंच जाया करते थे. जिस की किसी को भनक भी नहीं लगती थी सिवाय सितारों के सेक्रेट्रियों के, जिन की अहमियत बौडीगार्ड से कमतर नहीं थी.

फर्क इतना भर है कि सेक्रेट्री व्यावसायिक काम देखता है और बौडीगार्ड उन की हिफाजत का जिम्मा उठाता है. अब 90 फीसदी फिल्मों की शूटिंग देश के तमाम छोटेबड़े शहरों में होती है, इसलिए फिल्म स्टार्स को अपनी सुरक्षा की चिंता स्वाभाविक है.

साल 2018 में जब दीपिका पादुकोण ने रणवीर सिंह से इटली के लेक कोमो शहर में शादी की थी, तब लड़की वालों की तरफ से प्रमुखता से जलाल वहां मौजूद थे.

हालांकि जलाल की सैलरी शेरा से आधी ही है, लेकिन वह दीपिका जैसी स्टार की हिफाजत में इतने से ही खुश हैं. यह खुशी दरअसल समय के साथसाथ बांडिंग बढ़ते जाने की भी है, जो एक खास तरह का भावनात्मक संबंध भी बना देती है फिर पैसा खास माने नहीं रखता.

यही हाल शाहरुख खान और उन के बौडीगार्ड रवि सिंह का है, जो 10 साल से साथ हैं. शाहरुख खान की हर छोटीबड़ी खुशी और फंक्शन में दिखने वाले रवि को शेरा से भी ज्यादा सैलरी मिलती है तकरीबन 2.75 करोड़ रुपए सालाना, जो फिल्म इंडस्ट्री में सब से ज्यादा है.

लेकिन रवि शेरा की तरह लोकप्रिय नहीं हैं, शायद इसलिए भी कि वह सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय नहीं रहते. उलट इस के जलाल भी जब कभीकभार दीपिका की तसवीरें शेयर करते हैं तो उन की फैन फालोइंग बढ़ जाती है. आजकल के दौर में इस से बड़ा सुख और कोई है भी नहीं कि सोशल मीडिया पर आप के कितने ज्यादा फालोअर्स हैं.

हिफाजत की तगड़ी कीमत

सलमान, दीपिका और शाहरुख के अलावा तमाम बड़े फिल्म स्टार्स हिफाजत की कितनी कीमत अपने बौडीगार्ड्स को अदा करते हैं, इस पर नजर डालें तो आखें फटी रह जाती हैं. सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की एक झलक पाने को प्रशंसक बेताब रहते हैं, जो उन्हें नजदीक से एक बार देख और छू लेता है उस की तो मानो जिंदगी धन्य हो जाती है.

लेकिन लोग उन तक न पहुंचें और पहुंचें तो कैसे पहुंचें, यह तय करते हैं. उन के बौडीगार्ड जितेंद्र शिंदे जो अमिताभ को घेरे रखने के डेढ़ करोड़ रुपए सालाना लेते हैं और अमिताभ खुशीखुशी देते भी हैं.

आमिर खान के बौडीगार्ड युवराज घोरपडे की सैलरी 2 करोड़ रुपए सालाना है. युवराज पूरी मुस्तैदी से आमिर के इर्दगिर्द नजर आते हैं. कई बार आमिर गुपचुप यात्राएं करते हैं, जिन की खबर सिर्फ युवराज को ही रहती है.

इन दोनों का साथ भी सालों का है और आमिर खान की विदेश यात्राओं में भी युवराज उन के साथ रहते हैं. युवराज की यह खूबी है कि वह आमिर के बिना कहे काफी कुछ समझ जाते हैं और एक बड़े सेलिब्रेटी का पर्सनल बौडीगार्ड होने का सोशल मीडिया पर ज्यादा ढिंढोरा नहीं पीटते. आमिर खान के पास सिक्योरिटी की बड़ी टीम है, जिस के मुखिया युवराज हैं.

श्री के नाम से मशहूर श्रेयस ठेले अपने बौस अक्षय कुमार की तरह ही फिट और तेजतर्रार हैं और हमेशा उन के साथ दिखते हैं. अक्षय के बेटे आरव की हिफाजत की भी जिम्मेदारी श्रेयस निभाते हैं. इस के एवज में उन्हें कोई सवा करोड़ रुपए सालाना मिलते हैं.

आमिर की तरह अक्षय भी इस भरोसेमंद और वफादार बौडीगार्ड को विदेशों में भी साथ रखते हैं और उन का पूरा खयाल रखते हैं. क्योंकि श्रेयस के रहते 15 साल में उन्हें कभी दुश्वारी का सामना नहीं करना पड़ा.

इन दोनों की बांडिंग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अक्षय श्रेयस को राजू नाम से पुकारते हैं.

क्रिकेटर विराट कोहली की अभिनेत्री पत्नी अनुष्का शर्मा ने भी अपने बौडीगार्ड प्रकाश सिंह को सोनू नाम दे रखा है. अकसर ग्रे कलर का सूट पहने रहने वाले सोनू की यह अहम जिम्मेदारी है कि कोई अनुष्का को टच भी न कर ले.

अनुष्का और विराट दोनों सोनू को फैमिली मेंबर की तरह ही ट्रीट करते हैं. गौरतलब है कि विराट की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सोनू के कंधों पर है. कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सोनू अपनी मालकिन की सुरक्षा के लिए पीपीई किट पहने रहते थे. उन की सैलरी भी सवा करोड़ है.

इसी तरह श्रद्धा कपूर अपने बौडीगार्ड अतुल कांबले को 80 लाख रुपए सालाना देती हैं तो वहीं कैटरीना कैफ अपने बौडीगार्ड दीपक सिंह को साल भर में एक करोड़ रुपए पगार देती हैं. सनी लियोनी भी अपनी हिफाजत के लिए रखे यूसुफ इब्राहीम को डेढ़ करोड़ रुपए सालाना सैलरी के रूप में देती हैं.

इसलिए जरूरी हैं बौडीगार्ड

तमाम नामी फिल्म स्टार्स बौडीगार्ड रखते हैं क्योंकि उन्हें हिफाजत की गारंटी चाहिए रहती है. फिल्म इंडस्ट्री में अगर बेशुमार दौलत और शोहरत है तो खतरे भी कम नहीं हैं.

अकसर बड़ा खतरा ज्यादा नजदीक रहता है, इसलिए बौडीगार्ड्स को मुंहमांगी सैलरी दी जाती है. क्योंकि इन अंगरक्षकों को बौस से पहले जागना और बाद में सोना नसीब होता है. चौकन्नापन बौडीगार्ड्स की एक अतिरिक्त खूबी होती है. यानी जितना पैसा वे लेते हैं उतना सुखचैन उन्हें छोड़ना भी पड़ता है.

अभी तक अच्छी बात यह है कि तमाम फिल्मी बौडीगार्ड अपने मालिकों के प्रति वफादार रहे हैं और फिल्म स्टार्स ने भी तगड़ी पगार के अलावा उन्हें अपनापन और सम्मान दोनों बराबरी से दिए हैं. क्योंकि वे समझते हैं कि जो काम बौडीगार्ड्स करते हैं, उस में आराम कम काम ज्यादा है.

इन फिल्मी सितारों के लिए यह सोचना बेमानी है कि बौडीगार्ड रखना कोई स्टेटस सिंबल है बल्कि यह उन की खासी जरूरत है, जिसे पूरा करने के लिए वे अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा इन्हें देते हैं.

रियल लाइफ में बॉलीवुड एक्ट्रेस का तवायफ का किरदार

बौलीवुड की तमाम शीर्ष और सफल अभिनेत्रियां कभी न कभी तवायफ या वेश्या के किरदार में जरूर नजर आई हैं. यहां तक कि स्वस्थ पारिवारिक भूमिकाओं के लिए पहचानी जाने वाली जया बच्चन भी इस से अछूती नहीं रह पाईं.

साल 1972 में प्रदर्शित फिल्म ‘बंसी बिरजू’ में वह तवायफ के रोल में नजर आई थीं. इस फिल्म में उन के अपोजिट अमिताभ बच्चन थे, जो उस वक्त फिल्म इंडस्ट्री में जमने के लिए हाथपैर मार रहे थे. ‘बंसी बिरजू’ अच्छे विषय पर आधारित होने के बाद भी चली नहीं और इस के बाद जया बच्चन ने इस शेड को नहीं दोहराया.

तवायफ समाज का जरूरी और महत्त्वपूर्ण हिस्सा शुरू से ही रही है, जिसे फिल्मों में तरहतरह से दिखाया गया है. मीना कुमारी की ‘पाकीजा’ से ले कर रेखा की ‘उमराव जान’ तक फिल्मी तवायफों ने दर्शकों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है.

रेखा ने तो रिकौर्ड दरजन भर फिल्मों में तवायफ की भूमिका निभाई है. ‘मुकद्दर का सिकंदर’ की जोहरा बाई लोगों के जेहन में लंबे वक्त तक बसी रही थी और नीचे के दर्शकों की पहली पसंद थी. पूजा भट्ट ने ‘सड़क’ फिल्म से वाहवाही बटोरी थी तो अपने करियर के उठाव के दौरान रति अग्निहोत्री ने भी ‘तवायफ’ फिल्म से अपने अभिनय की तारीफ उस समय आम दर्शक से करवा ली थी.

इस सवाल का जबाब ढूंढना बड़ा मुश्किल काम है कि क्यों तवायफ की भूमिका लगभग हर किसी एक्ट्रैस ने निभाई और उस रोल में दर्शकों ने उसे पसंद भी किया. फिर वो विद्या बालन अभिनीत ‘बेगम जान’ हो या फिर शर्मीला टैगोर की ‘आराधना’ हो, जिस में एक तवायफ के अंदर की ममता को दर्शक कभी भूल नहीं पाए.

बात सिर्फ इन मानवीय और स्त्रियोचित संवेदनाओं की ही नहीं है, बल्कि तवायफों की भूमिका से जुड़ा एक दिलचस्प सच यह भी है कि इस में अभिनय प्रतिभा के प्रदर्शन की संभानाएं दूसरी किसी भूमिका से ज्यादा रहती हैं. यानी अभिनय की संपूर्णता इसी से है.

सच जो भी हो, पर हर फिल्म में यह भी दिखाया गया कि कोई भी औरत अपनी मरजी से तवायफ नहीं बनती, बल्कि मर्दों के दबदबे वाला समाज उसे किसी कोठे की जीनत बनने को मजबूर कर देता है या फिर वह सिर्फ पेट पालने या घर की जिम्मेदारियां निभाने के लिए इस घृणित और गंदे पेशे में आई.

यानी यह बात हवाहवाई और फिजूल की है कि हर औरत के अंदर एक वेश्या या तवायफ होती है. हां, यह जरूर हर कोई मानता है कि एक तवायफ के अंदर एक औरत का वजूद हमेशा रहता है. फिल्मों के मद्देनजर तवायफ और वेश्या में एक बड़ा मौलिक फर्क यह है कि जरूरी नहीं कि हर तवायफ जिस्मफरोशी करती ही हो.

जिस्मफरोशी के धंधे पर बनी पहली सार्थक फिल्म ‘मंडी’ थी, जिस में शबाना आजमी, स्मिता पाटिल और नीना गुप्ता जैसी सधी अभिनेत्रियां थीं. श्याम बेनेगल की इस फिल्म का भी अपना अलग फ्लेवर था, जो यह तो एहसास करा गया था कि सभ्य समाज और राजनीति भी देहव्यापार के कितने नजदीक हैं. और नजदीक भी क्या, दरअसल उस का ही तिरस्कृत हिस्सा है, शरीर का ऐसा अंग है जो काट कर फेंक दिए जाने के बाद भी जिंदा रहता है.

चेतना से आई क्रांति

‘मंडी’ से भी 13 साल पहले 1970 में बी.आर. इशारा निर्देशित फिल्म ‘चेतना’ प्रदर्शित हुई थी. रेहाना सुलताना और अनिल धवन अभिनीत इस फिल्म में एक वेश्या अपने प्रेमी के साथ घर बसाने का फैसला कर लेती है लेकिन सफल नहीं हो पाती.

रेहाना ने कालगर्ल के रोल में जान डाल दी थी. उस समय इस फिल्म के बोल्ड सीन काफी चर्चित हुए थे और लोगों को समझ आया था कि एक मौडल कैसे पैसा कमाने के लिए दूसरों की रातें रंगीन करती है और दिन में धर्मस्थलों में माथा टेकती रहती है.

बौक्स औफिस पर पैसा बरसाने बाली ‘चेतना’ फिल्म की दूसरी खूबी यह थी कि इस ने देहव्यापार के धंधे के नए तौरतरीके उधेड़ कर रख दिए थे. 1970 के दशक में कोठे उजड़ने लगे थे और शहर के बदनाम इलाके आबाद होने लगे थे. इसी दौर में कालगर्ल्स की खेप आनी शुरू हो गई थी, जो मौडर्न और स्टाइलिश होती हैं. वे अपनी मरजी से धंधा करती हैं और अपनी फीस से कोई समझौता नहीं करतीं.

यह कालगर्ल पढ़ीलिखी थोड़ी दार्शनिक और थोड़ीथोड़ी बुद्धिजीवी भी होती थीं, जो ग्राहक के साथ मांग पर सैरसपाटे के लिए भी चली जाती थीं. खूबी यह भी थी और है भी कि कालगर्ल इसे एक बेहतर वैकल्पिक प्रोफेशन मानती है और किसी तरह का अपराधबोध नहीं रखती. वह भावनात्मक के साथसाथ पुरुष के सैक्स स्वभाव और जरूरत को भी समझती है, जो इस पेशे की एक जरूरी और अच्छी बात भी है.

रेहाना सुलताना का फिल्मी सफर बहुत लंबा नहीं चला. ‘चेतना’ के बाद वह कम ही फिल्मों में दिखीं. लेकिन जातेजाते युवतियों के लिए यह मैसेज दे गईं कि मौडलिंग और फिल्मी दुनिया में जिस्म को दांव पर लगा कर भी जगह बनाई जा सकती है. जरूरत है बस थोड़े से टैलेंट, खूबसूरती और बड़े जोखिम उठाने की हिम्मत की.

70 के दशक में देश भर से एक्ट्रैस बनने के लिए लड़कियां मुंबई की ट्रेन पकड़ने लगी थीं. इन में से कुछ जगह बना पाने में कामयाब हुईं और कई गुमनामी और कमाठीपुरा जैसे बदनाम रेड लाइट इलाके की गलियों की खिड़की से झांकते ग्राहकों को इशारे करती नजर आईं.

मुंबई की चकाचौंध और दौलत व शोहरत की कशिश कभी किसी सबूत की मोहताज नहीं रही. हीरोइन बनने के लालच में आई अनेक युवतियां कोई भी समझौता करने लगीं. लेकिन मिलने के नाम पर अधिकांश को सी ग्रेड या एक्स्ट्रा के रोल मिले, इस के एवज में भी उन्हें निर्मातानिर्देशकों और दलालों का बिस्तर गर्म करना पड़ा.

स्याह पहलू श्वेता का

ऐसी ही एक एक्ट्रैस है श्वेता बसु प्रसाद, जिस ने इसी साल जनवरी में जिंदगी के 30 साल पूरे किए हैं. श्वेता हालांकि कोई बड़ा या जानामाना नाम नहीं है लेकिन प्रतिभा उस में है, जिसे उस ने साबित भी किया. महत्त्वाकांक्षी श्वेता ने पत्रकारिता का भी कोर्स किया है और कुछ दिन एक मशहूर अखबार में लेखन भी किया.

जमशेदपुर के मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती इस खूबसूरत लड़की ने पहली बार बाल कलाकार के रूप में ‘मकड़ी’ फिल्म में काम किया था. साल 2002 में प्रदर्शित हुई इस फिल्म के निर्मातानिर्देशक विशाल भारद्वाज थे. भूतप्रेत वाली इस फिल्म में श्वेता चुन्नी और मुन्नी नाम की जुड़वां बहनों के रोल में खासी सराही गई थी.

उसे सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था. इस के बाद उस ने कुछ तमिल, तेलुगू और बंगाली फिल्मों में भी काम किया, लेकिन उम्मीद के मुताबिक उसे नाम और दाम नहीं मिला. कुछ टीवी धारावाहिकों में भी वह नजर आई लेकिन इस से भी उस के डगमगाते करियर को सहारा नहीं मिला.

देह व्यापार में क्यों आई श्वेता

छोटेमोटे रोल करती श्वेता को लोग भूल ही चले थे कि साल 2014 में हैदराबाद से एक सनसनीखेज खबर आई कि मशहूर एक्ट्रैस श्वेता प्रसाद बंजारा हिल इलाके के एक बड़े होटल से देहव्यापार करती हुई पकड़ी गई.

बात सच थी गिरफ्तारी के बाद उसे सुधारगृह भेज दिया गया, जहां वह बच्चों को संगीत और कला का प्रशिक्षण देती रही. मीडिया और बौलीवुड में वह उत्सुकता और आकर्षण का विषय बन गई. हर कोई जानना चाह रहा था कि वह इस घृणित पेशे में क्यों आई.

इन्हीं दिनों में श्वेता का एक बयान खूब वायरल हुआ था, जिस में वह यह कहती नजर आ रही थी कि मैं अपने ही कुछ गलत फैसलों के चलते कंगाल हो गई थी. मुझे अपने परिवार को भी संभालना था और कुछ अच्छे काम भी करने थे. लेकिन मेरे लिए सारे दरवाजे बंद थे, इसलिए कुछ लोगों ने मुझे वेश्यावृत्ति का रास्ता दिखाया. मैं कुछ नहीं कर सकती थी और न ही मेरे पास कोई और चारा था, इसलिए मैं ने यह काम किया.

सुधारगृह से छूटने के बाद वह इस बयान से मुकर गई और नएनए बयान देती रही, जिन के कोई खास मायने नहीं थे. लेकिन दाद देनी होगी श्वेता की हिम्मत और आत्मविश्वास को, जो वह देहव्यापार के आरोप में पकड़े जाने के बाद भी टूटी नहीं और उसे जो भी रोल मिला, वह उस ने स्वीकार लिया.

साल 2018 में उस ने फिल्मकार रोहित मित्तल से शादी की, लेकिन एक साल बाद ही वह टूट गई. ‘चेतना’ फिल्म की सीमा और श्वेता की असल जिंदगी में काफी समानताएं दिखती हैं, पर फिल्म के और जिंदगी के दुखांत में जमीन आसमान का अंतर होता है, जो दिख भी रहा है.

वेश्या होने का दाग आसानी से नहीं धुलने वाला पर श्वेता अभी भी जिस लगन से काम कर रही है. उस के लिए वह शुभकामनाओं की हकदार तो है कि कड़वा अतीत भूल कर मकड़ी जैसा कारनामा एक बार फिर कर दिखाए.

कड़वी मिष्ठी

श्वेता को तो हैदराबाद सेशन कोर्ट ने देह व्यापार के आरोप से बाइज्जत बरी कर दिया था, लेकिन सन 2014 में ही एक और एक्ट्रैस मय पुख्ता सबूतों के देहव्यापार के आरोप में रंगेहाथों धरी गई थी, जिस का नाम था मिष्ठी मुखर्जी. भरेपूरे गुदाज बदन की मालकिन मिष्ठी थी तो बंगाली फिल्मों की सी ग्रेड की अभिनेत्री, लेकिन 2012 में राकेश मेहता निर्देशित एक हिंदी फिल्म ‘लाइफ की तो लग गई’ में वह नजर आई थी और मुंबई में ही बस गई थी.

हैरानी की बात यह है कि इस फिल्म की समीक्षाओं में कहीं उस का जिक्र नहीं हुआ. मिष्ठी की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं. मुंबई के पौश मीरा टावर के सी विंग में फ्लैट नंबर 502 में वह परिवार सहित रह रही थी. इस फ्लैट का किराया ही 80 हजार रुपए महीना था.

मिष्ठी आलीशान जिंदगी जी रही थी. मीरा टावर में लगभग 75 फ्लैट्स आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के हैं. इस अपार्टमेंट में हंगामा 9 जनवरी, 2014 को तब मचा था, जब एक छापामार काररवाई में ओशिवरा पुलिस ने मिष्ठी को अपने बौयफ्रैंड दिल्ली के फैशन डिजाइनर राकेश कटारिया के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा था.

इस छापे में पुलिस ने कोई ढाई लाख ब्लू फिल्मों की सीडी बरामद की थीं. पुलिस के मुताबिक ये सीडी दक्षिण भारत से ला कर मुंबई और ठाणे में बेची जाती थीं. देह व्यापार में सहयोग देने के आरोप में पुलिस ने मिष्ठी, उस की मां सहित पिता चंद्रकांत मुखर्जी और भाई समरत को भी गिरफ्तार किया था. पुलिस के मुताबिक इस फ्लैट का इस्तेमाल ब्लू फिल्में बनाने में भी किया जाता था.

बाद में मिष्ठी और उस के परिवारजनों ने सफाई दी थी, लेकिन तब तक एक और एक्ट्रैस के दामन में जिस्मफरोशी का दाग लग चुका था. इस मुकदमे का फैसला हो पाता, इस के पहले ही महज 27 साल की उम्र में मिष्ठी किडनी फेल हो जाने से 4 अक्तूबर, 2020 को इस दुनिया से चल बसी.

लोगों को इस कांड के अलावा यह भर याद रहा कि उस ने कुछ क्षेत्रीय फिल्मों सहित हिंदी फिल्म ‘मैं कृष्णा हूं’ में एक गाना गाया था.

बाद में अंदाजा भर लगाया गया, जो सच के काफी करीब है कि अगर वह ब्लू फिल्मों का कारोबार कर रही थी या सैक्स रैकेट चला रही थी तो अपने परिवार के खर्चे पूरे करने के लिए इस गैरकानूनी रास्ते पर चल पड़ी थी.

ऐश के ऐश

ऐसा ही रास्ता दक्षिण भारत की उभरती एक्ट्रैस ऐश अंसारी ने भी चुना था, जो साल 2013 में जोधपुर के तख्त विलास होटल में रंगेहाथों जिस्मफरोशी करते पकड़ी गई थी. इस छापे में 9 लोग पकड़े गए थे. यह भी एक हाइटेक मामला था और औनलाइन चलता था.

पुलिस के मुताबिक, ऐश अपने ग्राहकों को खुश करने गई थी और इस गिरोह का हिस्सा थी. सैक्सी ऐश ने बचाव में शाहरुख खान के साथ अपनी कुछ तसवीरें पुलिस को दिखाई थीं, जो जाहिर है एक बचकानी और फिजूल की बात थी.

दरअसल, वह शाहरुख खान के साथ  ‘ओम शांति ओम’ और ‘चलते चलते’ जैसी फिल्मों में काम कर चुकी थी. इस के अलावा उस ने साउथ की भी कुछ फिल्मों में काम किया है. ‘बूम बूम’ नाम के म्यूजिक वीडियो से भी उस ने धूम मचाई थी.

ऐश ने यह रास्ता परिवार के लिए नहीं, बल्कि जल्द अमीर बनने के चक्कर में चुना था. लेकिन पकडे़ जाने के बाद वह ऐसी गायब हुई कि फिर फिल्मों में नजर नहीं आई. मुमकिन है उस का जमीर उसे कचोटने लगा हो.

ऐश में एक खास बात सैक्सी फिगर के साथसाथ उस के असामान्य उभार हैं जो किसी को भी पागल और मदहोश कर देने के लिए काफी हैं. देह के शौकीनों में उस की डिमांड ज्यादा थी और इस की कीमत वह वसूल भी रही थी.

घर को ही बनाया अड्डा

पर्यटन स्थलों के रिसोर्ट और भव्य होटलों के अलावा कुछ अभिनेत्रियों ने घर से देह व्यापार करना ज्यादा सुरक्षित समझा. इन में एक उल्लेखनीय नाम साउथ की ही भुवनेश्वरी का है, जो अब से 20 साल पहले तक एक उभरता नाम हुआ करता था. अक्तूबर, 2009 में एक छापे में उसे चेन्नई में गिरफ्तार किया गया था.

बोल्ड सीन देने के लिए पहचानी जाने वाली इस खूबसूरत बला और बाला के गिरोह में कई और सी ग्रेड की एक्ट्रैस भी शामिल थीं. भुवनेश्वरी ने टीवी धारावाहिकों से भी नाम कमाया था.  रियल लाइफ में देहव्यापार करने वाली इस एक्ट्रैस ने रील लाइफ में भी वेश्या का किरदार तमिल फिल्म ‘लड़के’ में निभाया था.

अब 46 की हो चुकी भुवनेश्वरी भी गायब है, जिस ने फिल्मों से ज्यादा नाम और दाम वेश्यावृत्ति से कमाया और इसे बेहद सहजता से उस ने लिया और जिया.

दक्षिण भारतीय फिल्मों की वैंप के खिताब से नवाजी गई इस एक्ट्रैस ने कभी दुनिया जहान का लिहाज नहीं किया. उस पर भी कभी देहव्यापार के आरोप अदालत में साबित नहीं हो पाए, लेकिन बदनामी से वह खुद को बचा नहीं पाई.

28 साल की होने जा रही तमिल और तेलुगू फिल्मों की अभिनेत्री श्री दिव्या भी घर से ही सैक्स रैकेट चलाते पकड़ी गई थी.  ‘बीटेक बाबू’ उस के करियर की चर्चित फिल्म थी. महज 3 साल की उम्र से परदे पर पांव रख चुकी इस हौट एक्ट्रैस ने कोई डेढ़ दरजन फिल्मों में काम किया, जिन में से कुछ में उस ने अपने अभिनय की छाप भी छोड़ी.

साल 2014 में पड़े गुंटूर के चर्चित छापे में पकड़ी गई दिव्या को कुदरत ने अजीम खूबसूरती से नवाजा भी है. लेकिन ज्यादा  पैसों के लालच से वह भी नहीं बच सकी.

पतली कमर वाली दिव्या भी गिरोहबद्ध तरीके से जिस्मफरोशी के कारोबार में गले तक डूब चुकी थी. छापे में कई दूसरी मौडल और एक्ट्रैस मय ग्राहकों के पकड़ी गई थीं.

शर्म से दूर शर्लिन चोपड़ा

हैदराबादी गर्ल के नाम से मशहूर हुई शर्लिन चोपड़ा फिल्मों से कम, गरमागरम फोटो सेशन और हर कभी वायरल होते अपने कामुक वीडियोज के चलते ज्यादा जानीपहचानी जाती है. विवादों में रहना उस का खास शगल है. प्लेबौय मैगजीन के लिए नग्न फोटो देने वाली 37 वर्षीया इस एक्ट्रैस ने फिल्मों से ज्यादा गौसिप से अपनी पहचान बनाई.

रूपेश पाल की थ्री डी फिल्म ‘कामसूत्र’ में उस ने उन्मुक्त दृश्य दिए हैं. रियल्टी शो बिग बौस सीजन-3 की प्रतिभागी भी वह रह चुकी है. उस के नाम छोटे बजट की 3 फिल्में ‘टाइम पास’, ‘रेड स्वास्तिक’ और ‘गेम’ ही हैं जो न के बराबर चलीं.

मौडलिंग से अपने करियर की शुरुआत करने वाली शर्लिन कभी देह व्यापार के किसी छापे में तो नहीं पकड़ी गई, बल्कि उस ने खुद ही उजागर किया था कि वह देह व्यापार करती है और पैसों के लिए कई मर्दों के साथ उस ने सैक्स किया है. सुर्खियों में बने रहने को ऐसे कई विवादों से उस ने खुद को जोड़े रखा.

फिल्मकार साजिद खान पर आरोप लगाते हुए उस ने अप्रैल 2015 में कहा था कि एक मुलाकात में साजिद ने पेंट से अपना प्राइवेट पार्ट निकाल कर उसे छूने के लिए कहा था. तब उस ने बिना घबराए साजिद को कहा था कि मैं जानती हूं कि प्राइवेट पार्ट कैसा होता है और उन से मिलने का उस का ऐसा कोई मकसद या इरादा नहीं है.

इस बयान से फिल्म इंडस्ट्री में तहलका मच गया था, जो सच और झूठ की बाउंड्री लाइन पर खड़ा था. यानी फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा होना न तो नामुमकिन है और न ही ऐसा होने पर कोई मौडल एक्ट्रैस ऐसी आपबीती इतने खुले लफ्जों में बयां कर सकती है.

नैतिकता तो लोगों की निगाह में यह है कि ऐसा किसी लड़की के साथ हो भी तो उसे खामोश रहना चाहिए. शर्लिन ने दो टूक कहा तो इसे पब्लिसिटी स्टंट कह कर हवा में उड़ा दिया गया.

रियल और रील में फर्क

दरजनों और ऐसी फिल्म एक्ट्रैस हैं, जो देहव्यापार करते पकड़ी गई हैं. दिलचस्प बात यह है कि ये सभी सी ग्रेड की असफल और महत्त्वाकांक्षी युवतियां हैं. लगभग सभी ने रियल लाइफ में यह किरदार निभाया तो इस की वजह साफ है कि पैसा कमाने का इस से बेहतर शार्टकट और कोई है भी नहीं.

लग्जरी जिंदगी जीने की आदी इन नायिकाओं के पास अपने खर्च पूरे करने का कोई दूसरा जरिया होता भी नहीं. परदे पर इन्हें देख चुके शौकीन पैसे वाले भी मुंहमांगे दाम इन्हें देने को तैयार रहते हैं. इन तवायफों को एक रात का अपने नाम, हैसियत और शोहरत के मुताबिक एक से 5 लाख रुपया तक मिलता भी है.

अब तो बी ग्रेड के शहरों में भी इन की मांग बढ़ने लगी है और ये वहां जाती भी हैं. आनेजाने, हवाई जहाज और फाइवस्टार होटलों में ठहरने का खर्च या तो ग्राहक उठाता है या फिर वह दलाल, जो इन के और ग्राहक के बीच कड़ी का काम करता है. ठीक वैसे ही जैसे ‘चेतना’ फिल्म में रेहाना सुलताना के लिए एक दलाल करता था.

श्रीराम लागू: एक युग का अंत

भारत भूषण श्रीवास्तव 

1980  में प्रदर्शित बी.आर. चोपड़ा निर्देशित फिल्म ‘इंसाफ का तराजू’ में सब से चुनौतीपूर्ण भूमिका डाक्टर श्रीराम लागू के हिस्से में आई थी. इस फिल्म में वे जीनत अमान और पद्मिनी कोल्हापुरे के बलात्कार के आरोपी राज बब्बर के वकील थे.

‘इंसाफ का तराजू’ 80 के दशक की सर्वाधिक चर्चित और हिट फिल्मों में से एक थी, क्योंकि बलात्कार पर इस से पहले कोई ऐसी फिल्म नहीं बनी थी, जो समाज में हलचल मचा कर उसे इस संवेदनशील मुद्दे पर नए सिरे और तरीके से सोचने मजबूर कर दे.

कारोबारी राज बब्बर 2 बहनों का बलात्कार करता है और उसे बचाने का जिम्मा लेते हैं क्रिमिनल लायर मिस्टर चंद्रा यानी श्रीराम लागू. इस फिल्म के अदालती दृश्य काफी वास्तविक और प्रभावी बन पड़े थे. जिरह में बचाव पक्ष का वकील कैसेकैसे घटिया और बेहूदे सवाल पीडि़ता से पूछता है, यह श्रीराम लागू ने परदे पर जितने प्रभावी ढंग से उकेरा था, वह शायद ही कोई दूसरा कलाकार कर पाता.

कटघरे में खड़ी जीनत अमान से यह पूछना कि बलात्कार के वक्त आरोपी के हाथ कहां थे, कंधों पर या जांघों पर और आप ने अपने बचाव में क्याक्या किया, जैसे दरजनों सवाल अदालतों का वीभत्स और कड़वा सच तब भी थे, आज भी हैं.

बचाव पक्ष के वकील अपने मुवक्किल को बचाने की हरमुमकिन कोशिश करते हैं. बलात्कार के मामलों में वकील की हरमुमकिन कोशिश होती है कि किसी भी तरह अदालत में यह साबित कर दें कि जो हुआ वह बलात्कार नहीं बल्कि सहमति से किया गया सहवास था. इस के बाद उस के नामी मुवक्किल को बदनाम और ब्लैकमेल करने की गरज से पीडि़ता हाय हाय करती अदालत आ पहुंची है.

फिल्म ‘इंसाफ का तराजू’ में जीनत अमान की दयनीयता पर श्रीराम लागू की क्रूरता भारी पड़ी थी. अलावा इस के इस फिल्म का यह डायलौग भी खूब चर्चित हुआ था कि अगर कोई चश्मदीद गवाह होता तो बलात्कार होता ही क्यों.

खैर, यह हिंदी फिल्म थी, इसलिए अंत सुखद ही हुआ. लेकिन श्रीराम लागू ने अपने किरदार को जिस तरह से अंजाम दिया, वही उन की वह खूबी थी जिस के लिए वे आज तक याद किए जाते हैं और अब पुणे में निधन के बाद तो खासतौर से किए जा रहे हैं.

80 से भी ज्यादा हिंदी फिल्मों में विभिन्न शेड्स में अभिनय करने बाले श्रीराम लागू पेशे से ईएनटी सर्जन थे और मराठी थिएटर का जानामाना नाम थे. मामूली शक्लसूरत वाले श्रीराम लागू की एक्टिंग की अपनी एक अलग स्टाइल थी, जिसे बदलने की कोशिश उन्होंने कभी नहीं की, ठीक वैसे ही जैसे उन सरीखे दूसरे कई चरित्र अभिनेताओं ने नहीं की. इन में खास नाम इफ्तिखार, जगदीश राज, ओम प्रकाश, असित सेन, केष्टो मुखर्जी, उत्पल दत्त और ए.के. हंगल के हैं. ये तमाम कलाकार चार दशकों तक एक से ही नजर आए और हर भूमिका में दर्शकों ने उन्हें हाथोंहाथ लिया भी.

सतारा से मुंबई

महाराष्ट्र के सतारा में जन्मे 92 वर्षीय श्रीराम लागू ने पढ़ाई पुणे और मुंबई से की. ईएनटी सर्जन बनने के बाद प्रैक्टिस करने लगे. कालेज के दिनों में उन्होंने स्टेज पर एक्टिंग की, जो सराही भी गई. थिएटर तो उन की सांस में था. कुछ साल बतौर डाक्टर वे दक्षिण अफ्रीका में भी रहे लेकिन जब भारत वापस आए तो बचपन से मन में दबीकुचली इस ख्वाहिश को और ज्यादा नहीं टरका पाए कि फिल्मों में काम किया जाए, जिस पर उन के मातापिता कभी राजी नहीं हुए थे.

उस वक्त श्रीराम लागू की उम्र 42 साल थी. जाहिर है इस अधेड़ावस्था में उन्हें कोई हीरो वाले रोल तो मिलते नहीं, लिहाजा वे खामोशी से चरित्र अभिनेता बन गए. गंभीरता और परिपक्वता उन के चेहरे पर हमेशा पसरी रहती थी, जिस के चलते वे दूसरे कलाकारों से अलग हट कर दिखते थे. शायद डाक्टरी के पेशे ने उन्हें ऐसा बना दिया था.

हालांकि फिल्मों में काम हासिल करने के लिए उन्हें कोई स्ट्रगल नहीं करना पड़ा, लेकिन बतौर चरित्र अभिनेता उन  की पहचान सन 1977 में प्रदर्शित फिल्म ‘घरौंदा’ से मिली. गुलजार की लिखी इस कहानी में बढ़ते शहरीकरण के साइड इफेक्ट और बिल्डर्स की ठगी और बेइमानियां दर्शाई गईं थीं.

अमोल पालेकर और जरीना वहाब प्यार करते हैं लेकिन मुंबई में उन के पास घर नहीं है. फिल्म ‘घरौंदा’ में उन की इस कशमकश को बेहद खूबसूरत तरीके से दिखाया था. एक घर हासिल करने के लिए जरीना वहाब अमोल पालेकर के कहने पर अपने बूढ़े लेकिन रईस बौस मिस्टर मोदी यानी श्रीराम लागू से शादी कर लेती है. लेकिन शादी के बाद उस के भारतीय संस्कार उसे पति को धोखा देने से रोकते हैं और वह उस से ही प्यार करने लगती है.

अमोल पालेकर बेचारा हाथ मलता रह जाता है. फिल्म का गाना,  ‘दो दीवाने शहर में रात में और दोपहर में आशियाना ढूंढते हैं…’ खूब बजा था और आज भी शिद्दत से सुना और गुनगुनाया जाता है.

इस फिल्म के आखिरी दृश्य में श्रीराम लागू को हार्ट अटैक आता है, जिसे उन्होंने इतने जीवंत तरीके से जिया था कि हाल में बैठे दर्शकों को वे सचमुच में मरते से लगे थे. फिल्म समीक्षकों ने इस दृश्य को जबरदस्त करार दिया था. मिस्टर मोदी के किरदार के बाबत श्रीराम लागू को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला था.

घरौंदा की जबरदस्त कामयाबी के बाद भी उन्हें उल्लेखनीय रोल नहीं मिले, लेकिन कई भूमिकाओं को उन्होंने अपने अभिनय के दम पर उल्लेखनीय बना दिया.

इन में से एक है प्रकाश मेहरा निर्देशित और अमिताभ बच्चन अभिनीत 1981 में प्रदर्शित फिल्म ‘लावारिस’, जिस ने बौक्स औफिस पर हाहाकार मचा दिया था. लावारिस फिल्म में श्रीराम लागू की भूमिका दूसरे कलाकारों के मुकाबले काफी छोटी थी. वे लावारिस हीरो के पिता बने थे, जो दिनरात शराब के नशे में धुत अपने सौतेले बेटे को गलियां देता रहता है.

यादगार किरदार

गंगू गनपत का यह किरदार अनूठा था जिस में में वह बारबार एक खास अंदाज में हरामी, कुत्ता और नाली के कीड़े जैसी गालियां बकता है. तब अमिताभ बच्चन का कैरियर और शोहरत दोनों अपने चरम पर थे पर श्रीराम लागू गंगू गनपत को जीते उन के सामने बिलकुल नहीं लड़खड़ाए थे.

इस फिल्म के डायलौग कादर खान ने लिखे थे, जिन्होंने पहली बार नाजायज औलाद की जगह नाजायज बाप शब्द का प्रयोग किया था. इस छोटी सी भूमिका में श्रीराम लागू ने जान डाल दी थी और हैरत की बात यह है कि व्यक्तिगत जीवन में वे शराब और सिगरेट जैसे नशे से परहेज करते थे.

फिर 2 साल बाद आई निर्देशक सावन कुमार टांक की फिल्म ‘सौतन’ जिस के संवाद जानेमाने साहित्यकार कमलेश्वर ने लिखे थे. राजेश खन्ना, टीना मुनीम, पद्मिनी कोल्हापुरे, प्रेम चोपड़ा और प्राण सरीखे नामी सितारों के सामने श्रीराम लागू के पास करने को कुछ खास नहीं दिख रहा था. लेकिन फिल्म के प्रदर्शन के बाद दर्शकों और फिल्मी पंडितों ने एक सुर में माना था कि श्रीराम लागू ने गोपाल के किरदार में अपनी प्रतिभा से जान डाल दी है.

इस फिल्म में वे पद्मिनी कोल्हापुरे के पिता बने थे. दरअसल, यह भूमिका ऐसे अधेड़ गरीब दलित की थी, जिस की परित्यक्ता बेटी पर रईसों ने चारित्रिक लांछन लगा रखा है. एक दयनीय दलित पिता के इस रोल को दर्शकों ने खूब सराहा था तो इसलिए कि यह पात्र और श्रीराम लागू का अभिनय दोनों वास्तविकता के काफी नजदीक थे.

दूसरी कई फिल्मों में वे छोटीमोटी भूमिकाओं में दिखे, लेकिन अधिकांश में उन्हें अभिनय प्रतिभा दिखाने का मौका नहीं मिला और इस का अफसोस भी उन्हें कभी नहीं रहा. 1982 में सुभाष घई की फिल्म ‘विधाता’ में वे खलनायक बने थे, पर दर्शकों ने उन्हें इस रूप में ज्यादा पसंद नहीं किया.

हालांकि हास्य को छोड़ कर उन्होंने बेहद सहज तरीके से तमाम भूमिकाएं निभाईं इसीलिए वे फिल्म इंडस्ट्री में एक सहज कलाकार माने जाते थे जो आमतौर पर पब्लिसिटी से दूर रहता था. 90 के दशक में वे हिंदी फिल्मों में न के बराबर दिखे और जिन में दिखे, वे सब की सब सी ग्रेड की फिल्में थीं.

हिंदी फिल्मों से ज्यादा पहचान उन्हें मराठी थिएटर और सिनेमा से मिली ‘पिंजरा’, ‘सिंहासन’ और ‘सामना’ उन की यादगार मराठी फिल्में हैं. नट सम्राट वह पहला नाटक है, जिस की भूमिका के लिए वे हमेशा याद किए जाते रहेंगे. इस के लेखक विष्णु वामन शिरवाडकर को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था.

इस नाटक में श्रीराम लागू ने गणपत बेलवलकर की भूमिका निभाई, जिसे मराठी थिएटर में मील का पत्थर माना जाता है. इस नाटक से ताल्लुक रखती दिलचस्प बात यह किंवदंती है कि गणपत बेलवलकर का रोल इतना कठिन है कि जिस किसी  कलाकार ने भी इसे निभाना चाहा, वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गया.

इस रोल को करने के बाद खुद श्रीराम लागू भी हार्ट अटैक की गिरफ्त में आ गए थे. शायद इसीलिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए नट सम्राट ही कहा.

लगता ऐसा है कि व्यावसायिक सिनेमा के फेर में पड़ कर वे थिएटर से दूर होते चले गए, हालांकि इस बात को उन्होंने एक इंटरव्यू में बेमन से नकारा था, लेकिन अपनी आत्मकथा ‘लमन’, जिस का मतलब माल ढोने वाला होता है, में उन का यह दर्द झलका था.

समाजसेवी अन्ना हजारे से वे खासे प्रभावित थे. उन की पत्नी दीपा भी नामी कलाकार रही हैं. हिंदी फिल्मों से श्रीराम लागू को नाम और पैसा तो खूब मिला, लेकिन वह पहचान नहीं मिल पाई, जिस के वह हकदार थे और जिंदगी भर उस के लिए बैचेन भी रहे. शायद ऐसे ही मौकों के लिए मशहूर शायर निदा फाजली ने यह गजल गढ़ी होगी, ‘कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता…’

सौजन्य: मनोहर कहानियां, जनवरी 2020

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आमिर खान : दूसरे तलाक के बाद

तलाक अगर इतनी आसानी से हो जाए जितना कि अभिनेता आमिर खान और उन की दूसरी पत्नी किरण राव के बीच हुआ तो तलाक प्रक्रिया पर सवाल उठाने के कोई माने नहीं. क्योंकि यह परिपक्व पतिपत्नी का आपसी सहमति से लिया गया फैसला है, जिस के अपने अलग माने हैं.

15 साल का अरसा एकदूसरे को समझने और एकदूसरे में ढल जाने के लिए मुकम्मल होता है, लेकिन इस तलाक को जिस का मसौदा दोनों ने संयुक्त रूप से जाहिर सूचना की तरह पेश किया, कई नहीं तो कुछ सवाल तो खड़े करता ही है.

लोग एक बार फिर पूछ रहे हैं क्यों… और दिलचस्प बात यह कि जवाब भी खुद ही दे रहे हैं जो महज मीडियाई खबरों और अटकलों पर आधारित हैं.

कुछ अपवादों को छोड़ दें तो फिल्म इंडस्ट्री में शादी और तलाक हमेशा से चर्चाओं और सुर्खियों में रहे हैं. खासतौर से उस वक्त जब पतिपत्नी दूसरे धर्म के हों.

अपने दौर के मशहूर अभिनेता सुनील दत्त और अभिनेत्री नरगिस की शादी सहज ढंग से नहीं ली गई थी. तब भी खूब होहल्ला देश भर में कट्टरपंथियों ने मचाया था. लेकिन अच्छी बात उस का बेअसर हो जाना रहा था.

फिर हिंदू हीरो की मुसलिम हीरोइन से और मुसलिम हीरो की हिंदू हीरोइन से शादी कोई अजूबा नहीं रह गई.

यह फिल्म इंडस्ट्री ही थी, जिस ने धर्म और जातपात की बेडि़यों को काटना शुरू किया और हर दौर में युवाओं को अपनी मरजी से शादी करने की प्रेरणा दी. पर पिछले कुछ दिनों से उलटा हो रहा है.

अंतरधर्मीय शादियों में कम से कम 2 मामले बेहद चर्चित रहे, इन में से पहला था बंगला फिल्मों की जानीमानी और टीएमसी सांसद नुसरत जहां और निखिल जैन का, जिन की गिनती कोलकाता के बड़े कारोबारियों में शुमार होती है. उस तलाक के बारे में पाठक मनोहर कहानियां के पिछले अंक में विस्तार से पढ़ ही चुके हैं.

साल 1973 में प्रदर्शित नासिर हुसैन की फिल्म ‘यादों की बारात’ ने बौक्स औफिस पर कामयाबी के झंडे गाड़ दिए थे, जिस की बड़ी वजह नायक धर्मेंद्र की एक्टिंग और 3 भाइयों के बिछुड़ने और एक गाने के जरिए मिलने की कहानी थी, जो लीक से हट कर थी. इस फिल्म का गीतसंगीत भी खूब पसंद किया गया था.

आमिर खान इस फिल्म में एक बाल कलाकार की भूमिका में थे. गौरतलब है कि नासिर हुसैन आमिर के पिता ताहिर हुसैन के भाई हैं, जिन्होंने इस फिल्म के जरिए दरअसल में तारिक को ब्रेक देने की कोशिश की थी. लेकिन तारिक खूबसूरत और चौकलेटी होने के बाद भी चले नहीं.

लेकिन ठीक तारिक सरीखे चिकने चेहरेमोहरे वाले उन के चचेरे भाई आमिर साल 1988 में प्रदर्शित फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ के जरिए ऐसे चले कि फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा.  इस फिल्म के निर्माता भी नासिर हुसैन थे.

उन के बेटे मंसूर खान द्वारा निर्देशित इस फिल्म में आमिर की एंट्री ठीक वैसे ही दिखाई गई थी, जैसे ‘यादों की बारात’ में तारिक की दिखाई गई थी.

यानी माथे पर स्कार्फ हाथ और गले में लटका गिटार युवाओं की महफिल और एक बेहतरीन जज्बाती गाना, जो उस दौर के युवाओं के लबों पर मानों ठहर सा गया था. गाने के बोल थे—पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा बेटा हमारा ऐसा काम करेगा…

इस फिल्म में नायिका जूही चावला ने भी कयामत ढाई थी जो तब बड़ा नाम नहीं था. ठाकुरों की आपसी दुश्मनी पर बनी इस फिल्म में दर्शकों ने आमिर और जूही को हाथोंहाथ लिया था और दोनों को रातोंरात स्टार बना कर सिर पर बैठा लिया था. फिर एक के बाद एक आमिर की कई फिल्में हिट हुईं, जिन में ‘दिल’, ‘जो जीता वही सिकंदर’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘अंदाज अपनाअपना’ से ले कर ‘लगान’, ‘थ्री इडियट्स’, ‘राजा हिंदुस्तानी’, ‘इश्क’, ‘सरफरोश’, ‘रंग दे बसंती’ और ‘मंगल पांडे’ सहित ‘तारे जमीं पर’ उल्लेखनीय हैं.

लेकिन ‘कयामत से कयामत तक’ की बात और थी जिस के गाने ‘पापा कहते हैं…’ में थोड़ी देर के लिए एक्स्ट्रा के रूप में रीना दत्ता भी दिखाई दी थीं.

यूं पड़ोसी होने के नाते रीना दिखाई तो उन्हें रोज देतीं थीं और आमिर उन से बचपन से ही प्यार करते थे, जोकि शुद्ध एकतरफा था. यह फिल्म फ्लोर पर थी इस के काफी पहले से ही वह रीना पर लट्टू थे. लेकिन प्यार का इजहार नहीं कर पा रहे थे, क्योंकि रीना उन्हें घास नहीं डालती थीं.

वह एक परंपरावादी हिंदू परिवार से थीं. आमिर ने हिम्मत नहीं हारी और उम्र के मुताबिक सड़कछाप मजनुओं की तरह उन के पीछे पड़े रहे.

रीना दत्ता को खून से लिखा था प्रेम पत्र

यह आमिर की दीवानगी की हद ही कही जाएगी कि अस्सी के दशक के प्यार के तौरतरीकों और चलन के मुताबिक उन्होंने रीना को अपने खून से लिखा लव लेटर भेज दिया.

अब रीना भी कोई पत्थर की बनी तो थी नहीं, जो इस अदा पर फिदा न हो जातीं. एक सामान्य भारतीय लड़की की तरह उन्होंने आमिर का प्यार कुबूल कर लिया.

लेकिन धर्म की दीवार इतनी मजबूत थी कि दोनों ने चोरीछिपे 18 अप्रैल, 1986 में कोर्ट में शादी करने की हिम्मत तो कर ली पर मारे डर के अपनेअपने घरों में नहीं बता पाए.

शादी करने के लिए आमिर ने खुद के 21 साल का होने का इंतजार पूरी सब्र से किया था. आमिर की साल 1984 में रिलीज हुई केतन मेहता की पहली फिल्म ‘होली’ चूंकि फ्लौप हो चुकी थी, इसलिए भी वह कोई जोखिम नहीं उठाना चाह रहे थे.

जब शादी की बात रीना की छोटी बहन को पता चली तो वह सीधे आमिर के घर जा धमकी और शादी की बात उजागर कर दी. इस पर आमिर के पिता ताहिर हुसैन ने समझदारी और मौके की नजाकत देखते हुए कोई ऐतराज नहीं जताया और पूरे सम्मान के साथ बहैसियत बहू रीना को घर ले आए.

लेकिन रीना के पिता को यह सदमा बरदाश्त नहीं हुआ और वह इतने बीमार पड़ गए कि उन्हें अस्पताल में भरती करना पड़ा.

इस दौरान आमिर ने उन का खूब खयाल रखा और बेटे की तरह देखभाल की तो उन का दिल भी फिल्मी स्टाइल में पसीज गया. फिर आमिर के सामने कोई दिक्कत नहीं रह गई.

रीना उन के लिए लकी साबित हुई. क्योंकि ‘कयामत से कयामत तक’ ने आमिर को युवा दिलों का राजा बना दिया था. स्कूलकालेजों और होस्टल्स तक में इस फिल्म की चर्चा थी.  प्रेमीप्रेमिका खुद में राज और रश्मि को देखने और महसूसने लगे थे जो इस फिल्म में आमिर और जूही के नाम थे.

आमिर ने इस फिल्म में बहुत अच्छी एक्टिंग इसलिए भी कर डाली थी या यूं कह लें कि अनजाने में उन से हो गई थी क्योंकि शूटिंग के दिनों में वह खुद नईनवेली पत्नी रीना की जुदाई भुगत रहे थे और रोज उन्हें खत लिखा करते थे.

इस के बाद के दिन आमिर की जिंदगी के सुनहरे दिन थे. कामयाबी दौलत और शोहरत सब एक साथ उन के कदम चूम रहे थे. जितने अच्छे आशिक थे, उतने ही अच्छे पति भी वह साबित हुए.

इसी दौरान उन्होंने अपने नाम से ही अपनी प्रोडक्शन कंपनी भी बना ली थी, जिस के बैनर तले 2001 में ऐतिहासिक फिल्म ‘लगान’ रिलीज हुई थी. इस फिल्म को कई पुरस्कार मिले थे. यह फिल्म औस्कर के लिए भी नौमिनेट हुई थी.

रीना एक सफल और समर्पित पत्नी साबित हुईं, जो आमिर की दूसरी कई फिल्मों की यूनिट के सदस्य रहते ‘लगान’ की असिस्टेंट डायरेक्टर भी थीं. अब तक दोनों की फैमिली परफेक्ट हो चुकी थी. बेटी का नाम इरा खान और बेटे का नाम जुनैद खान रखा.

लगान से बिगड़ी बात

अब तक आमिर इंडस्ट्री में अपने अभिनय के साथसाथ व्यावसायिक प्रतिभा का भी लोहा मनवा चुके थे. उन की लगभग हर फिल्म हिट होती थी. यह आमिर की खूबी ही है कि उन्होंने औसतन एक साल में एक ही फिल्म की लेकिन पूरे डूब कर की. ‘लगान’ के बाद ‘पीके’ फिल्म इस बात की गवाह भी हैं.

इसी ‘लगान’ फिल्म की शूटिंग के दौरान उन का परिचय एक साधारण सी दिखने वाली दक्षिण भारतीय युवती किरण राव से हुआ’ किरण इस फिल्म की प्रोडक्शन यूनिट का हिस्सा थी. उसे देखते ही आमिर के दिल में वही कुछकुछ हुआ, जो किशोर उम्र में रीना को देख कर होता था.

फिर जो हुआ, उस की उम्मीद किसी को भी नहीं थी. आमिर ने रीना को तलाक देने का फैसला कर लिया, जो उतना ही चौंकाने वाला था, जितना 15 साल पहले उन से ड्रामाई तरीके से शादी कर लेने का था.

शादी गुपचुप हुई थी लेकिन आमिर और रीना का तलाक एक मुकम्मल हंगामे के बीच 2005 में इस सवाल के साथ हुआ कि आखिर क्यों…

इस सवाल का जबाब अगर कोई दे सकता था तो वे ये दोनों ही थे, जो रहस्यमय खामोशी ओढ़े रहे. 15 साल एक छत के नीचे एक शानदार जिंदगी जीने के बाद दोनों साल 2002 में अलग हो गए.

शर्तों और समझौते के मुताबिक इरा और जुनैद को रीना अपने साथ ले गईं. बतौर गुजारा भत्ता कह लें या मेहर की रकम कह लें या फिर तलाक के लिए राजी होने की राशि कह लें, आमिर ने रीना को 50 करोड़ रुपए अदा किए थे.

फिल्म इंडस्ट्री का यह पहला बड़ा तलाक था, जिस में पतिपत्नी ने एकदूसरे के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाये थे. बस दोनों ने चाहा और तलाक हो गया. हालांकि कहा यह भी गया कि तलाक रीना की जिद के चलते हुआ. ‘लगान’ सुपरडुपर हिट हुई, लेकिन आमिर की जिंदगी से रीना चली गई.

इस के बजाय यह कहना ज्यादा बेहतर होगा कि यह फिल्म रीना की जिंदगी से आमिर को छीन ले गई. कुछ दिन मीडिया ने शोर मचाया लेकिन फिर भूल गए.

फिल्म इंडस्ट्री में रोज नई खबरें पैदा होती और मरती हैं. यह तलाक इस रिवाज का अपवाद साबित नहीं हुआ.

फिर 2005 में एक सनसनाती खबर आई कि तलाकशुदा अधेड़ उम्र के आमिर ने किरण राव से शादी कर ली. फिल्म इंडस्ट्री के लिहाज से यह कोई हैरान कर देने वाली बात नहीं थी और जानने वालों के लिए अपेक्षित भी थी. फिर हल्ला मचा और फिर शांत हो गया.

सुनीसुनी सी दास्तां…

‘समरथ को नहीं दोष गुसाईं’ की तर्ज पर लोगों ने कुछ चटखारे लेने के बाद इस असहज शादी को सहज ढंग से ले लिया. क्योंकि आमिर एक के बाद एक हिट फिल्में दिए जा रहे थे. तभी प्रदर्शित हुई ‘अंदाज अपनाअपना’ उन में से एक थी. एक आम असहज बात यह भी थी कि किरण आमिर से उम्र में 15 साल छोटी थीं.

उम्र के इस फर्क ने इन के वैवाहिक जीवन पर कोई खास फर्क नहीं डाला. किरण के लिए सब कुछ नया था, लेकिन आमिर की स्थिति ‘निकाह’ फिल्म की सलमा आगा सरीखी थी जो दूसरे पति राज बब्बर के साथ भी उसी शहर में उसी होटल में उसी कमरे में हनीमून मनाने जाती है, जिस में कभी पहले पति दीपक पाराशर के साथ आई थी.

आमिर के लिए हुआ इतना भर था कि रीना की जगह किरण ने ले ली थी, जो तेलंगाना के एक प्रतिष्ठित और संपन्न परिवार से ताल्लुक रखती थीं.

वक्त गुजरता गया और एक बार फिर आमिर खान खुद को एक ईमानदार पति साबित करने में जुट गए. इस का उदाहरण किरण की एक शारीरिक कमजोरी के वक्त देखने में आया था जब वह सामान्य ढंग से गर्भधारण नहीं कर पा रही थीं. चिकित्सकीय भाषा में कहें तो कंसीव नहीं कर पा रही थीं.

तब इन दोनों ने कृत्रिम तरीके का सहारा लिया, जिस से बेटा आकाश पैदा हुआ. किरण और आमिर उतने ही खुश थे जितने कभी रीना और आमिर हुआ करते थे. किरण भी फिल्ममेकिंग में आ गईं, जिस से आमिर को काफी सहूलियत रही.

बेटी का वीडियो हुआ वायरल

अब लोग रीना और उन के बच्चों को भूल चले थे, लेकिन कुछ दिनों पहले जवान हो चुकी 24 वर्षीय इरा के एक वायरल हुए वीडियो ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा था, जिस में इरा खुद को डिप्रेशन का शिकार बता रही थी. लेकिन मम्मीपापा के तलाक को इस का जिम्मेदार नहीं ठहरा रही थी.

कुछ और वायरल हुई तसवीरों में वह अपने बौयफ्रैंड नूपुर शिकरे के साथ वैसे ही लिपटी नजर आई थी, जैसे कोई बेल पेड़ के तने से लिपटी रहती है.

कुछ ही दिनों में रीना और किरण में अच्छी दोस्ती भी हो गई और एकदो पार्टियों में वे काफी अंतरंगता से मिलीं भी. देखने वालों ने इस से ज्यादा कुछ नहीं सोचा कि आमिर खान का अतीत और वर्तमान एक साथ दिख रहा है.

वैसे भी फिल्म इंडस्ट्री में पुराने जीवनसाथी अकसर ऐसे ही औपचारिक और कारोबारी अंदाज में मिला करते हैं, जज्बात उन में होते हैं, ऐसा कहने की कोई वजह नहीं.

लेकिन इकलौती याद रखने वाली बात यह है कि फिल्मी सितारे सिर्फ मनोरंजन ही नहीं करते बल्कि उन की जिंदगी की घटनाओं का फर्क जो आमतौर पर सीधे दिखता और महसूस नहीं होता, पर आम लोगों और समाज पर पड़ता जरूर है.

एक तलाक और सही

सब कुछ ठीकठाक चल रहा था कि बीती 3 जुलाई को आमिर और किरण के तलाक की खबर बेहद साधारण तरीके से आई. एक संयुक्त पत्र में दोनों ने एकदूसरे के प्रति प्रतिबद्धता जताते कुछ दार्शनिक किस्म की बातें भी कहीं (देखें बौक्स) जो जिंदगी और दुनिया से ज्यादा किताबों में अच्छी लगती हैं, मगर यह सब हकीकत में बहुत बेढंगी और कड़वी होती हैं.

प्रिंट और इलैक्ट्रौनिक मीडिया ने तो आमिर के इस आग्रह को मान लिया कि तलाक का मसला चूंकि व्यक्तिगत है, इसलिए बात का बतंगड़ न बनाया जाए. लेकिन सोशल मीडिया ने आमिर पर कोई रहम नहीं दिखाया.

किसी ने यह कहा कि यह आदमी हिंदू लड़कियों से शादी कर उन्हें तलाक दे देता है तो किसी ने उन के इस बयान पर ताना मारा कि अब हिंदुस्तान में डर नहीं लगता क्या. किसी ने इसे लव जिहाद बताया और किसी ने ट्वीट किया कि इन का सही है शादी

करो 2-3 बच्चे पैदा करो और फिर बीवी को छोड़ दो.

इन बातों और भड़ास के कोई तात्कालिक या दीर्घकालिक माने तो नहीं हैं लेकिन आमिर की शादियों और तलाकों में कई समानताएं काफी कुछ सोचने को मजबूर करती हैं.  मसलन हिंदू लड़की से ही प्यार होना, उन के साथ लगभग 15-15 साल गुजारना, दोनों बीवियों को बेइंतहा चाहना और फिर तलाक के साथसाथ मोटी रकम दे देना.

रीना की तरह कहा जा रहा है कि किरण को भी आमिर तगड़ी रकम देंगे या दे चुके हैं. अब आमिर का नाम ‘दंगल’ फिल्म में उन की बेटी गीता फोगाट का रोल कर चुकी फातिमा सना शेख के साथ जुड़ रहा है, जो ‘ठग्स औफ हिंदुस्तान’ फिल्म में भी थी.

अब अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे अब तीसरी शादी उस के साथ करेंगे. यानी पहला तलाक दूसरी और दूसरा तीसरी शादी की मंशा से दिया गया माना जाएगा.

क्या आमिर दोषी हैं?

मुमकिन है ऐसा हो क्योंकि फिल्म इंडस्ट्री में कुछ भी मुमकिन है. फातिमा रीना और किरण की तरह गुमनाम सी नहीं है लेकिन आधी हिंदू है, क्योंकि उस के पिता विपिन शर्मा कश्मीरी ब्राह्मण हैं, जबकि मां तबस्सुम मुसलमान हैं.

बिलाशक तलाक एक व्यक्तिगत मामला है, लेकिन आमिर के मामलों के इत्तफाक एकदम नजरंदाज नहीं किए जा सकते. दोनों ही मामलों में तलाक सहमति के आधार पर हुए, जोकि आमतौर पर नहीं होता है.

यदि किरण से उन की पटरी नहीं बैठ रही थी तो दोनों बिना तलाक के भी रह सकते थे, यह बात इस चर्चा को पुख्ता करती है कि आमिर फातिमा से या किसी और से शादी करेंगे, इसलिए तो तलाक की जरूरत पड़ी. 55 की उम्र में 2 तलाक और हुई तो तीसरी शादी एक अस्वाभाविक बात है और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान जैसी है.

देश का कट्टर होता माहौल नुसरत जहां और आमिर खान के तलाक की वजह नहीं ठहराया जा सकता. क्योंकि इन के दांपत्य पर किसी ने पत्थर नहीं फेंका था.

आमिर के बारे में कहा जा सकता है कि कुछ गड़बड़ जरूर है और किरण से भी तलाक भारतीय समाज में औरतों की बदहाली को ही उजागर करता है. क्योंकि दोनों ही तलाकों में पत्नी का कोई दोष या कोई ठोस वजह तलाक की सामने नहीं आई.

भारतीय पत्नी कैसी भी हो, उसे आसानी से प्यार से बहलायाफुसलाया जा सकता है, इमोशनली ब्लैकमेल किया जा सकता है और अलग होने के लिए तगड़ी रकम भी दी जा सकती है. एक छत के नीचे रहते पति उसे उपेक्षित कर के भी सभ्य तरीके से प्रताडि़त कर सकता है.

‘हम पतिपत्नी में  वैचारिक मतभेद हैं और अब हम साथ नहीं रह सकते’, शपथपूर्वक यह कह देने भर से हिंदू मैरिज ऐक्ट की धारा 13 (बी) के तहत तलाक तो तुरंत मिल जाता है, जो एक अच्छी बात है. पर देखा अब यह भी जाना चाहिए कि कहीं इस धारा का भी तो दुरुपयोग नहीं होने लगा.

कहीं आमिर खान जैसे लोग अगली शादी के लिए इसे हथियार की तरह इस्तेमाल तो नहीं करने लगे. चिंता और बहस केवल इसी बात पर होनी चाहिए.

बदहाली तलाक के बाद की

आमिर खान की पहली पत्नी रीना दत्ता की हालत देख कर उन पर हर किसी को भी तरस आता है . वह आधी बूढ़ी लगने लगी हैं. तलाक के बाद मानो उन की सामाजिक जिंदगी ठहर सी गई थी और वक्त काटने वे ट्रेवल एजेंसी में नौकरी भी करते दोनों बच्चों की परवरिश करती रहीं.

इस के उलट आमिर हर स्तर पर सक्रिय रहे और 3 साल बाद ही किरण से शादी कर ली. तलाक के कुछ दिनों बाद तक आमिर रीना की जुदाई का दुखड़ा अपने साक्षात्कारों में ऐसे रोते रहे थे, मानो अब जिंदगी में कोई रंगीनी ही नहीं रही. आखिरकर किरण से शादी कर उन्होंने रंगीनियां फिर आबाद कर लीं.

लेकिन रीना के हिस्से में आई तनहाई की  भरपाई करोड़ों तो क्या, दुनिया की सारी दौलत से भी नहीं हो सकती. यानी तलाक के बाद का दर्द और दुश्वारियां पत्नी के हिस्से में ज्यादा आते हैं फिर चाहे वह किसी सेलिब्रिटी की पत्नी हो आम आदमी की, इस से कोई फर्क नहीं पड़ता.

एक चालाक मर्द की तरह आमिर रीना की जुदाई का रोना रोते मीडिया और प्रशंसकों को यह एहसास कराते रहे कि तलाक रीना की जिद के चलते हुआ और रीना इतने डिप्रेशन में रहीं कि उन्होंने वर्तमान समाज यानी सोशल मीडिया से भी किनारा कर लिया. खुद के प्रति लापरवाह हो चलीं रीना काफी मोटी भी हो गई हैं.

यह कोई नई बात नहीं है फिल्मी और गैरफिल्मी पति भी यही साबित करने की कोशिश करते हैं कि गलत मैं नहीं पत्नी थी.  पत्नियों पर क्या गुजरती है, इस से फिर कोई वास्ता नहीं रखता क्योंकि उसे हर कोई गुनहगार मान चुका होता है.

सैफ अली खान की पहली पत्नी अमृता सिंह तो पूरी टूटीबिखरी और बूढ़ी दिखने लगी हैं. जैसे कभी आमिर रीना पर जान छिड़का करते थे, यही हालत सैफ की थी. जबकि अमृता उम्र में उन से 13 साल बड़ी थीं. कुछ साल ठीकठाक गुजरे, फिर दोनों में अनबन रहने लगी. नतीजतन सैफ ने वही किया जो आमतौर पर मर्द करते हैं. पहली को तलाक दिया और दूसरी से शादी कर ली. उन की दूसरी पत्नी करीना कपूर फिल्म इंडस्ट्री की सब से खूबसूरत अभिनेत्रियों में शुमार होती हैं जो उम्र में एक दशक से भी ज्यादा बड़े पति सैफ के साथ खुश हैं. लेकिन अमृता को अपनी गलती या कमी आज तक समझ नहीं

आ रही.

भारीभरकम एलीमनी से जिंदगी जितने दिन शान से कट सकती थी, कट चुकी. अब हाल यह है कि वे रोजमर्रा की जरूरतों का सामान भी फुटपाथ की दुकानों से खरीदते दिखती हैं.

‘भाग मिल्खा भाग’ से एक्टिंग का लोहा मनवा देने वाले जावेद अख्तर के बेटे फरहान अख्तर ने भी अपनी पत्नी अधुना भामानी को शादी के 17 साल बाद 2017 में तलाक दे दिया था. 4 साल में ही हालत यह हो गई है कि अधुना को कोई भी आसानी से नहीं पहचान पाता कि यह वही सजनेसंवरने की शौकीन महिला है, जिस पर 17 साल पहले नजर ठहर जाए तो हटाए नहीं हटती थी.

उन की आखों के नीचे पड़ रहे काले निशान और गड्ढे उन की तनहाई की दास्तां बयां करते हैं. पेशे से हेयरस्टाइलिस्ट रही संपन्न इंग्लैंड में जन्मी बंगाली परिवार की अनुधा काफी प्रतिभाशाली रही हैं. उन्होंने कई दिग्गज फिल्मी हस्तियों के बाल संवारे हैं, पर अपनी जिंदगी नहीं संवार पाईं. अब मुमकिन है वह अपने बौयफ्रैंड निकोल मोरे से शादी कर लें.

3 शादियां करने वाले संजय दत्त का नाम फिल्म इंडस्ट्री में किसी पहचान का मोहताज नहीं, जिन की दूसरी पत्नी रिया पिल्लई इन दिनों फांके से करती जिंदगी गुजार रही हैं. 1988 में जब इन दोनों की शादी हुई थी, तब संजय के फैंस को लगा था कि अब उन की जिंदगी में स्थिरता आ जाएगी. लेकिन जल्द ही दोनों की अनबन सामने आने लगी.

रिया लग्जरी जिंदगी जीने में यकीन करती थीं. उन के शौक भी महंगे हुआ करते थे, जिन से जिंदगी भर हैरानपरेशान रहे संजय इतनी आजिज आ गए थे कि उन्होंने भारीभरकम रकम दे कर उन से छुटकारा पाने में ही अपनी भलाई समझी. अब अकेली पड़ चुकी रिया के पास कोई झांकने भी नहीं जाता. उन का सारा बैंक बैलेंस खत्म हो चुका है. रिया का तगड़ा अफेयर मशहूर टेनिस खिलाडी लिएंडर पेस से रहा, जिन के साथ लिवइन में रहते उन्होंने पेस को घरेलू हिंसा में फंसाते अदालत के भी चक्कर कटवाए थे.

कभी स्लिमट्रिम दिखने वाली कोमल रेशमिया का है जो काफी मोटी हो गई हैं. उन की शादी मशहूर गायक हिमेश रेशमिया से साल 1995 में हुई थी. तब कोमल महज 21 साल की थीं. तलाक के बाद कोमल ऐसी टूटीं कि उम्र से बहुत ज्यादा बड़ी दिखने लगी हैं. 2017 में तलाक के बाद हिमेश ने अपनी गर्लफ्रैंड टीवी एक्ट्रेस सोनिया कपूर से शादी कर ली, लेकिन कोमल ने ऐसी कोई कोशिश नहीं की और न ही कभी सोनिया को तलाक का जिम्मेदार ठहराया.

यह तलाक भी परस्पर सहमति से हुआ था. जबकि हकीकत में स्टायलिश और रंगीनमिजाज हिमेश कोमल से ऊब चले थे और तलाक के पहले ही सोनिया का उन के घर आनाजाना हर कभी की बात थी. कहते हैं सौत तो पुतले की भी नहीं सुहाती, फिर यहां तो साक्षात थी. लिहाजा खुद पहल करते कोमल ने अदालत में तलाक की अरजी दायर कर दी और हिमेश और सोनिया को कोई दोष नहीं दिया.

ये कुछ और ऐसे कई मामले बताते हैं कि पुरुष प्रधान समाज में तलाक का दंश झेलना अधिकतर पत्नी को ही पड़ता है और बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी भी वही निभाती हैं. गलती किस की कितनी है, यह बात ज्यादा माने नहीं रखती.

इन मामलों में शादी हुए इतना अरसा तो हो गया था कि आपसी समझ और तालमेल कोई बहुत बड़ी परेशानी नहीं कही जा सकती पर बात कुछ और थी जिसे कम से कम शब्दों में समझा जाए तो निचोड़ यही निकलता है कि पति को कहीं और शादी करनी थी.

करोड़ों के तलाक

तलाक के बाद पत्नियों के हिस्से में बतौर परेशानी अकेलापन आता है तो पतियों

को इसका खामियाजा बड़ी रकम की शक्ल में भी उठाना पड़ता है. पत्नी कोई भी हो तलाक के बाद पति से मुआवजे की कानूनन हकदार होती है. जिस की राशि आमतौर पर अदालत तय करती है लेकिन सेलिब्रिटीज के तलाक अकसर परस्पर सहमति पर आधारित होते हैं, जिन में पति पत्नी को भारीभरकम एकमुश्त पैसा देता है. इस राशि को एलिमनी भी कहा जाता है.

आमिर खान ने किरण राव को कितनी एलिमनी दी यह आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है, क्योंकि मामला अभी ताजाताजा है लेकिन यह अंदाजा जरुर हर कोई लगा रहा है कि यह राशि सौ करोड़ से कम नहीं होगी क्योंकि आमिर ने आज से 18 साल पहले रीना दत्त को 50 करोड़ रुपए दिए थे. अब आज रुपए की कीमत के हिसाब से तो इस का दोगुना होना लाजिमी है. वैसे भी आमिर खान का नाम बड़ा है उन की हैसियत भी किसी सबूत की मोहताज नहीं इसलिए इतना तो वे ‘अफोर्ड’ कर ही सकते हैं और किरण इतना ‘डिजर्व’ भी करती हैं .

फिल्म इंडस्ट्री के चर्चित तलाकों में से एक सैफअली खान और अमृता सिंह का भी है. जो अमृता इन दिनों फुटपाथ से शापिंग करती नजर आती हैं उन्हें बतौर एलिमनी नगदी 5 करोड़ रुपए और खासी जायदाद मिली थी जिस की सैफ के पास कमी नहीं. नबाबी खानदान से ताल्लुक रखने वाले इस छोटे नवाब की पुश्तैनी जायदाद हरियाणा के पाटोदी में भी हैं और भोपाल व मुंबई में भी हैं सैफ बच्चों की देखभाल के लिए भी एक लाख रुपए महीना देते हैं.

सब से महंगे तलाकों में सब से उपर नाम ऋतिक रोशन और सुजैन खान का आता है. सुजैन ने ऋतिक से रिकौर्ड 400 करोड़ रुपए मांगे थे लेकिन मामूली मोल भाव के बाद सौदा 380 करोड़ में तय हुआ था. गौरतलब है कि सुजैन अपने दौर के कामयाब हीरो संजय खान की बेटी और मौजूदा दौर के एक्टर फरदीन खान की बहिन हैं. ऋतिक के पिता राकेश रोशन भी 70-80 के दशक के चर्चित नायक रहे हैं. ये दोनों ही फिल्मी पारिवारिक पृष्ठभूमि से हैं. एलिमनी की तगड़ी राशि से बचने के लिए कह लें या गृहस्थी को बनाये रखने की कोशिश इसे कह लें कि ऋतिक ने सुजैन से सुलह की कोशिश भी की थी लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाए.

आइटम गर्ल मलाईका अरोड़ा ने अपने पति अरबाज खान से 15 करोड़ रुपए लिए थे अरबाज की कमाई के हिसाब से यह राशि ठीकठाक भी लगती है और मलाईका की हैसियत के हिसाब से भी सटीक है. कपूर खानदान की चौथी पीढ़ी की करिश्मा कपूर की फिल्मों से खुद की कमाई ही अरबों में थी लेकिन तलाक के एवज में उन्होंने अपने बिजनेसमेन पति संजय कपूर से 7 करोड़ रुपए वसूल ही लिए थे. दर्जनों सुपरडुपर हिट फिल्में देने वाली करिश्मा ने संजय से साल 2003 में शादी की थी और तलाक 2016 में लिया था. करिश्मा के हिस्से में संजय का पुश्तैनी घर भी आया था. अलावा इस के संजय ने बच्चों के लिए जो 14 करोड़ रुपए के बांड खरीदे थे वे भी उन के हाथ से चले गए.

एलिमनी के मामले सब से फायदे में रीहा पिल्लई रहीं जिन्होंने संजय दत्त से तो भारीभरकम एलिमनी 8 करोड़ रुपए ली ही लेकिन जाते जाते एक मंहगी कार भी ले गईं थीं. संजय दत्त से तलाक के बाद रीहा का लंबा अफेयर टेनिस खिलाडी लिएंडर पेस से चला दोनों कुछ सालों तक लिव इन में रहे भी और एक बेटी के अभिभावक भी बने. इन दोनों की पटरी भी ज्यादा नहीं बैठी और मामला अदालत की चौखट तक जा पहुंचा.  दोनों ने ही एक दूसरे पर धोखा देने का आरोप लगाया था, लेकिन गुजारा भत्ते की राशि इस से अप्रभावित रही थी. टेनिस में दुनियाभर में देश का नाम ऊंचा करने बाले लिएंडर उस समय भौंचक्क रह गए थे जब रीहा ने खुद के गुजारे के लिए हर महीने 4 लाख और बेटी की पढ़ाई के लिए 90 हजार रुपए हर महीने की मांग रख दी थी.

फिल्म निदेशक आदित्य चोपड़ा और उन की बचपन की दोस्त पायल खन्ना में भी शादी के बाद ज्यादा नहीं बनी शादी के महज 8 साल बाद दोनों ने तलाक ले लिया. आदित्य ने पायल को बतौर एलिमनी कितना पैसा दिया इस का खुलासा तो नहीं हुआ लेलिन फिल्मी पंडितों की नजर में यह भी करोड़ों में था. रमलथ के नाम से आप शायद वाकिफ न हों लेकिन प्रभुदेवा का नाम सुनते ही समझ जाएंगे कि यहां उन की पत्नी का जिक्र किया जा रहा है. साउथ के सुपर स्टार्स में शुमार प्रभुदेवा ने रमलथ को कोई 25 करोड़ की जायदाद दी थी इस के आलावा बतौर एलिमनी एक लाख रुपए और 2 महंगी कारें भी उन्हें तलाक के लिए देना पड़ी थीं.

 

रियल लाइफ में तवायफ का किरदार – भाग 3

पुलिस के मुताबिक, ऐश अपने ग्राहकों को खुश करने गई थी और इस गिरोह का हिस्सा थी. सैक्सी ऐश ने बचाव में शाहरुख खान के साथ अपनी कुछ तसवीरें पुलिस को दिखाई थीं, जो जाहिर है एक बचकानी और फिजूल की बात थी.

दरअसल, वह शाहरुख खान के साथ  ‘ओम शांति ओम’ और ‘चलते चलते’ जैसी फिल्मों में काम कर चुकी थी. इस के अलावा उस ने साउथ की भी कुछ फिल्मों में काम किया है. ‘बूम बूम’ नाम के म्यूजिक वीडियो से भी उस ने धूम मचाई थी.

ऐश ने यह रास्ता परिवार के लिए नहीं, बल्कि जल्द अमीर बनने के चक्कर में चुना था. लेकिन पकडे़ जाने के बाद वह ऐसी गायब हुई कि फिर फिल्मों में नजर नहीं आई. मुमकिन है उस का जमीर उसे कचोटने लगा हो.

ऐश में एक खास बात सैक्सी फिगर के साथसाथ उस के असामान्य उभार हैं जो किसी को भी पागल और मदहोश कर देने के लिए काफी हैं. देह के शौकीनों में उस की डिमांड ज्यादा थी और इस की कीमत वह वसूल भी रही थी.

घर को ही बनाया अड्डा

पर्यटन स्थलों के रिसोर्ट और भव्य होटलों के अलावा कुछ अभिनेत्रियों ने घर से देह व्यापार करना ज्यादा सुरक्षित समझा. इन में एक उल्लेखनीय नाम साउथ की ही भुवनेश्वरी का है, जो अब से 20 साल पहले तक एक उभरता नाम हुआ करता था. अक्तूबर, 2009 में एक छापे में उसे चेन्नई में गिरफ्तार किया गया था.

बोल्ड सीन देने के लिए पहचानी जाने वाली इस खूबसूरत बला और बाला के गिरोह में कई और सी ग्रेड की एक्ट्रैस भी शामिल थीं. भुवनेश्वरी ने टीवी धारावाहिकों से भी नाम कमाया था.  रियल लाइफ में देहव्यापार करने वाली इस एक्ट्रैस ने रील लाइफ में भी वेश्या का किरदार तमिल फिल्म ‘लड़के’ में निभाया था.

अब 46 की हो चुकी भुवनेश्वरी भी गायब है, जिस ने फिल्मों से ज्यादा नाम और दाम वेश्यावृत्ति से कमाया और इसे बेहद सहजता से उस ने लिया और जिया.

दक्षिण भारतीय फिल्मों की वैंप के खिताब से नवाजी गई इस एक्ट्रैस ने कभी दुनिया जहान का लिहाज नहीं किया. उस पर भी कभी देहव्यापार के आरोप अदालत में साबित नहीं हो पाए, लेकिन बदनामी से वह खुद को बचा नहीं पाई.

28 साल की होने जा रही तमिल और तेलुगू फिल्मों की अभिनेत्री श्री दिव्या भी घर से ही सैक्स रैकेट चलाते पकड़ी गई थी.  ‘बीटेक बाबू’ उस के करियर की चर्चित फिल्म थी. महज 3 साल की उम्र से परदे पर पांव रख चुकी इस हौट एक्ट्रैस ने कोई डेढ़ दरजन फिल्मों में काम किया, जिन में से कुछ में उस ने अपने अभिनय की छाप भी छोड़ी.

साल 2014 में पड़े गुंटूर के चर्चित छापे में पकड़ी गई दिव्या को कुदरत ने अजीम खूबसूरती से नवाजा भी है. लेकिन ज्यादा  पैसों के लालच से वह भी नहीं बच सकी.

पतली कमर वाली दिव्या भी गिरोहबद्ध तरीके से जिस्मफरोशी के कारोबार में गले तक डूब चुकी थी. छापे में कई दूसरी मौडल और एक्ट्रैस मय ग्राहकों के पकड़ी गई थीं.

शर्म से दूर शर्लिन चोपड़ा

हैदराबादी गर्ल के नाम से मशहूर हुई शर्लिन चोपड़ा फिल्मों से कम, गरमागरम फोटो सेशन और हर कभी वायरल होते अपने कामुक वीडियोज के चलते ज्यादा जानीपहचानी जाती है. विवादों में रहना उस का खास शगल है. प्लेबौय मैगजीन के लिए नग्न फोटो देने वाली 37 वर्षीया इस एक्ट्रैस ने फिल्मों से ज्यादा गौसिप से अपनी पहचान बनाई.

रूपेश पाल की थ्री डी फिल्म ‘कामसूत्र’ में उस ने उन्मुक्त दृश्य दिए हैं. रियल्टी शो बिग बौस सीजन-3 की प्रतिभागी भी वह रह चुकी है. उस के नाम छोटे बजट की 3 फिल्में ‘टाइम पास’, ‘रेड स्वास्तिक’ और ‘गेम’ ही हैं जो न के बराबर चलीं.

मौडलिंग से अपने करियर की शुरुआत करने वाली शर्लिन कभी देह व्यापार के किसी छापे में तो नहीं पकड़ी गई, बल्कि उस ने खुद ही उजागर किया था कि वह देह व्यापार करती है और पैसों के लिए कई मर्दों के साथ उस ने सैक्स किया है. सुर्खियों में बने रहने को ऐसे कई विवादों से उस ने खुद को जोड़े रखा.

फिल्मकार साजिद खान पर आरोप लगाते हुए उस ने अप्रैल 2015 में कहा था कि एक मुलाकात में साजिद ने पेंट से अपना प्राइवेट पार्ट निकाल कर उसे छूने के लिए कहा था. तब उस ने बिना घबराए साजिद को कहा था कि मैं जानती हूं कि प्राइवेट पार्ट कैसा होता है और उन से मिलने का उस का ऐसा कोई मकसद या इरादा नहीं है.

इस बयान से फिल्म इंडस्ट्री में तहलका मच गया था, जो सच और झूठ की बाउंड्री लाइन पर खड़ा था. यानी फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा होना न तो नामुमकिन है और न ही ऐसा होने पर कोई मौडल एक्ट्रैस ऐसी आपबीती इतने खुले लफ्जों में बयां कर सकती है.

नैतिकता तो लोगों की निगाह में यह है कि ऐसा किसी लड़की के साथ हो भी तो उसे खामोश रहना चाहिए. शर्लिन ने दो टूक कहा तो इसे पब्लिसिटी स्टंट कह कर हवा में उड़ा दिया गया.

रियल और रील में फर्क

दरजनों और ऐसी फिल्म एक्ट्रैस हैं, जो देहव्यापार करते पकड़ी गई हैं. दिलचस्प बात यह है कि ये सभी सी ग्रेड की असफल और महत्त्वाकांक्षी युवतियां हैं. लगभग सभी ने रियल लाइफ में यह किरदार निभाया तो इस की वजह साफ है कि पैसा कमाने का इस से बेहतर शार्टकट और कोई है भी नहीं.

लग्जरी जिंदगी जीने की आदी इन नायिकाओं के पास अपने खर्च पूरे करने का कोई दूसरा जरिया होता भी नहीं. परदे पर इन्हें देख चुके शौकीन पैसे वाले भी मुंहमांगे दाम इन्हें देने को तैयार रहते हैं. इन तवायफों को एक रात का अपने नाम, हैसियत और शोहरत के मुताबिक एक से 5 लाख रुपया तक मिलता भी है.

अब तो बी ग्रेड के शहरों में भी इन की मांग बढ़ने लगी है और ये वहां जाती भी हैं. आनेजाने, हवाई जहाज और फाइवस्टार होटलों में ठहरने का खर्च या तो ग्राहक उठाता है या फिर वह दलाल, जो इन के और ग्राहक के बीच कड़ी का काम करता है. ठीक वैसे ही जैसे ‘चेतना’ फिल्म में रेहाना सुलताना के लिए एक दलाल करता था.

रियल लाइफ में तवायफ का किरदार – भाग 2

स्याह पहलू श्वेता का

ऐसी ही एक एक्ट्रैस है श्वेता बसु प्रसाद, जिस ने इसी साल जनवरी में जिंदगी के 30 साल पूरे किए हैं. श्वेता हालांकि कोई बड़ा या जानामाना नाम नहीं है लेकिन प्रतिभा उस में है, जिसे उस ने साबित भी किया. महत्त्वाकांक्षी श्वेता ने पत्रकारिता का भी कोर्स किया है और कुछ दिन एक मशहूर अखबार में लेखन भी किया.

जमशेदपुर के मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती इस खूबसूरत लड़की ने पहली बार बाल कलाकार के रूप में ‘मकड़ी’ फिल्म में काम किया था. साल 2002 में प्रदर्शित हुई इस फिल्म के निर्मातानिर्देशक विशाल भारद्वाज थे. भूतप्रेत वाली इस फिल्म में श्वेता चुन्नी और मुन्नी नाम की जुड़वां बहनों के रोल में खासी सराही गई थी.

उसे सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था. इस के बाद उस ने कुछ तमिल, तेलुगू और बंगाली फिल्मों में भी काम किया, लेकिन उम्मीद के मुताबिक उसे नाम और दाम नहीं मिला. कुछ टीवी धारावाहिकों में भी वह नजर आई लेकिन इस से भी उस के डगमगाते करियर को सहारा नहीं मिला.

देह व्यापार में क्यों आई श्वेता

छोटेमोटे रोल करती श्वेता को लोग भूल ही चले थे कि साल 2014 में हैदराबाद से एक सनसनीखेज खबर आई कि मशहूर एक्ट्रैस श्वेता प्रसाद बंजारा हिल इलाके के एक बड़े होटल से देहव्यापार करती हुई पकड़ी गई.

बात सच थी गिरफ्तारी के बाद उसे सुधारगृह भेज दिया गया, जहां वह बच्चों को संगीत और कला का प्रशिक्षण देती रही. मीडिया और बौलीवुड में वह उत्सुकता और आकर्षण का विषय बन गई. हर कोई जानना चाह रहा था कि वह इस घृणित पेशे में क्यों आई.

इन्हीं दिनों में श्वेता का एक बयान खूब वायरल हुआ था, जिस में वह यह कहती नजर आ रही थी कि मैं अपने ही कुछ गलत फैसलों के चलते कंगाल हो गई थी. मुझे अपने परिवार को भी संभालना था और कुछ अच्छे काम भी करने थे. लेकिन मेरे लिए सारे दरवाजे बंद थे, इसलिए कुछ लोगों ने मुझे वेश्यावृत्ति का रास्ता दिखाया. मैं कुछ नहीं कर सकती थी और न ही मेरे पास कोई और चारा था, इसलिए मैं ने यह काम किया.

सुधारगृह से छूटने के बाद वह इस बयान से मुकर गई और नएनए बयान देती रही, जिन के कोई खास मायने नहीं थे. लेकिन दाद देनी होगी श्वेता की हिम्मत और आत्मविश्वास को, जो वह देहव्यापार के आरोप में पकड़े जाने के बाद भी टूटी नहीं और उसे जो भी रोल मिला, वह उस ने स्वीकार लिया.

साल 2018 में उस ने फिल्मकार रोहित मित्तल से शादी की, लेकिन एक साल बाद ही वह टूट गई. ‘चेतना’ फिल्म की सीमा और श्वेता की असल जिंदगी में काफी समानताएं दिखती हैं, पर फिल्म के और जिंदगी के दुखांत में जमीन आसमान का अंतर होता है, जो दिख भी रहा है.

वेश्या होने का दाग आसानी से नहीं धुलने वाला पर श्वेता अभी भी जिस लगन से काम कर रही है. उस के लिए वह शुभकामनाओं की हकदार तो है कि कड़वा अतीत भूल कर मकड़ी जैसा कारनामा एक बार फिर कर दिखाए.

कड़वी मिष्ठी

श्वेता को तो हैदराबाद सेशन कोर्ट ने देह व्यापार के आरोप से बाइज्जत बरी कर दिया था, लेकिन सन 2014 में ही एक और एक्ट्रैस मय पुख्ता सबूतों के देहव्यापार के आरोप में रंगेहाथों धरी गई थी, जिस का नाम था मिष्ठी मुखर्जी. भरेपूरे गुदाज बदन की मालकिन मिष्ठी थी तो बंगाली फिल्मों की सी ग्रेड की अभिनेत्री, लेकिन 2012 में राकेश मेहता निर्देशित एक हिंदी फिल्म ‘लाइफ की तो लग गई’ में वह नजर आई थी और मुंबई में ही बस गई थी.

हैरानी की बात यह है कि इस फिल्म की समीक्षाओं में कहीं उस का जिक्र नहीं हुआ. मिष्ठी की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं. मुंबई के पौश मीरा टावर के सी विंग में फ्लैट नंबर 502 में वह परिवार सहित रह रही थी. इस फ्लैट का किराया ही 80 हजार रुपए महीना था.

मिष्ठी आलीशान जिंदगी जी रही थी. मीरा टावर में लगभग 75 फ्लैट्स आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के हैं. इस अपार्टमेंट में हंगामा 9 जनवरी, 2014 को तब मचा था, जब एक छापामार काररवाई में ओशिवरा पुलिस ने मिष्ठी को अपने बौयफ्रैंड दिल्ली के फैशन डिजाइनर राकेश कटारिया के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा था.

इस छापे में पुलिस ने कोई ढाई लाख ब्लू फिल्मों की सीडी बरामद की थीं. पुलिस के मुताबिक ये सीडी दक्षिण भारत से ला कर मुंबई और ठाणे में बेची जाती थीं. देह व्यापार में सहयोग देने के आरोप में पुलिस ने मिष्ठी, उस की मां सहित पिता चंद्रकांत मुखर्जी और भाई समरत को भी गिरफ्तार किया था. पुलिस के मुताबिक इस फ्लैट का इस्तेमाल ब्लू फिल्में बनाने में भी किया जाता था.

बाद में मिष्ठी और उस के परिवारजनों ने सफाई दी थी, लेकिन तब तक एक और एक्ट्रैस के दामन में जिस्मफरोशी का दाग लग चुका था. इस मुकदमे का फैसला हो पाता, इस के पहले ही महज 27 साल की उम्र में मिष्ठी किडनी फेल हो जाने से 4 अक्तूबर, 2020 को इस दुनिया से चल बसी.

लोगों को इस कांड के अलावा यह भर याद रहा कि उस ने कुछ क्षेत्रीय फिल्मों सहित हिंदी फिल्म ‘मैं कृष्णा हूं’ में एक गाना गाया था.

बाद में अंदाजा भर लगाया गया, जो सच के काफी करीब है कि अगर वह ब्लू फिल्मों का कारोबार कर रही थी या सैक्स रैकेट चला रही थी तो अपने परिवार के खर्चे पूरे करने के लिए इस गैरकानूनी रास्ते पर चल पड़ी थी.

ऐश के ऐश

ऐसा ही रास्ता दक्षिण भारत की उभरती एक्ट्रैस ऐश अंसारी ने भी चुना था, जो साल 2013 में जोधपुर के तख्त विलास होटल में रंगेहाथों जिस्मफरोशी करते पकड़ी गई थी. इस छापे में 9 लोग पकड़े गए थे. यह भी एक हाइटेक मामला था और औनलाइन चलता था.