Gangster Story: गैंगस्टरों की मौत की कबड्डी

Gangster Story: बंबीहा गैंग और लारेंस बिश्नोई गैंग के बीच बनी दुश्मनी अब चरम पर है. बंबीहा गैंग का आरोप है कि उस ने कबड्ïडी प्लेयर कंवर दिग्विजय सिंह की हत्या इसलिए कराई, क्योंकि वह लारेंस बिश्नोई गैंग के लिए पैसों की उगाही में मदद करता था. जबकि लारेंस गैंग इस के पीछे की सच्चाई कुछ और ही बता रहा है. अब देखना यह है कि क्या पंजाब पुलिस इन गैंगस्टरों पर लगाम कस पाएगी?

15 दिसंबर, 2025 सोमवार की शाम करीब 6 बजे का वक्त था. मोहाली के साहिबजादा अजीत सिंह नगर के सोहाना गांव के कबड्डी ग्रांउड में 3 दिवसीय कबड्डी टूर्नामेंट हो रहा था, जिस में अलगअलग शहरों से करीब 16 कबड्डी टीमें आई हुई थीं. कबड्डी टूर्नामेंट गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और वैदवान स्पोट्र्स क्लब की ओर से आयोजित किया गया था.

टूर्नामेंट की शुरुआत 13 दिसंबर, 2025 को हुई थी और 15 दिसंबर को अंतिम मुकाबले खेले गए थे. फाइनल मैच समाप्त हो चुका था. उस दिन शाम को मैदान में पहले कबड्डी का सेमीफाइनल मैच हुआ, फिर फाइनल खत्म होने के बाद पुरस्कार वितरण की तैयारी चल रही थी. राणा बलाचौरिया उर्फ कंवर दिग्विजय सिंह जो मशहूर कबड्डी खिलाड़ी रहे हैं और अब कबड्डी के प्रमोटर बन गए हैं, वे भी जालंधर से टूर्नामेंट में 2 टीमें ले कर आए थे.

कंवर दिग्विजय सिंह मैच की टाई डलवाने के बाद किसी काम से मैदान से बाहर की ओर जा रहे थे. तभी 2-3 युवक उन के पास आए और खुद को उन का फैन बता कर उन से सेल्फी लेने के लिए कहा. राणा उन के साथ फोटो खिंचवाने के लिए रुक गए. 3 युवक उन के समीप पहुंचे. फोटो तो नहीं खिंची, अलबत्ता उसी समय उन में से 2 युवकों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. 4-5 फायर हुए और कंवर दिग्विजय सिंह खून से लथपथ हो कर लहलहाते हुए जमीन पर गिर पड़े.

गोलियों की आवाज सुनने के बाद कबड्डी ग्राउंड में बैठे लोगों को पहले तो लगा कि शायद किसी ने पटाखे चलाए हैं, लेकिन कुछ ही क्षणों में लोगों को समझ आ गया कि ये आतिशबाजी की नहीं, बल्कि फायरिंग की आवाजें थीं. यह समझते ही पूरे मैदान में अफरातफरी मच गई और लोग इधरउधर भागने लगे. खून से लथपथ राणा को लोगों ने आननफानन में एक गाड़ी में डाला और समीप के ही फोर्टिस अस्पताल ले गए. राणा की हालत गंभीर थी. आईसीयू में ले जा कर उन का परीक्षण किया गया तो पता चला कि वहां पहुंचने से पहले ही उन की मौत हो चुकी थी. डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

30 साल के राणा को शाम लगभग 6 बजे अस्पताल लाया गया था, पर तब तक उन की मौत हो चुकी थी. इस की सूचना कबड्डी ग्राउंड से ले कर पुलिस विभाग को मिल चुकी थी. इसलिए पुलिस को अस्पताल से ले कर खेल के मैदान तक आने में ज्यादा समय नहीं लगा. दरअसल, इलाके के डीएसपी एच.एस. बल इस कबड्डी इवेंट के मुख्य अतिथि थे और उन के कार्यक्रम वाली जगह से जाने के कुछ ही देर बाद ये गोलीबारी हुई थी.

पंजाबी सिंगर मनकीरत औलख, जो टूर्नामेंट के मुख्य आयोजक भी थे, वे प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे. उन्हें रास्ते में ही इस घटना की जानकारी मिली तो सुरक्षा कारणों से वह रास्ते से ही कार्यक्रम रद्ïद कर के वापस लौट गए. कुल मिला कर एक तरह से ये वीआईपी इवेंट था, जिस कारण वहां सुरक्षा इंतजाम के लिए पहले से ही पुलिस की मौजदूगी थी. इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम से ले कर तमाम वरिष्ठ अधिकारियों को इस गोलीबारी की तत्काल सूचना मिल गई. घटनास्थल पर पुलिस का अमला जुटना शुरू हो गया.

जिस वक्त हमलावरों ने कंवर दिग्विजय सिंह उर्फ राणा बलाचौरिया पर फायरिंग की थी तो इस वारदात में रोपड़ का रहने वाला एक अन्य युवक जगप्रीत सिंह भी घायल हुआ. वह वारदात के समय गोली लगने से जमीन पर गिरे राणा को उठाने के लिए गया था और छर्रे लगने से वह भी घायल हो गया. उसे अस्पताल में भरती कराया गया है, जहां उस का इलाज चल रहा है. वह घटना का एक अहम चश्मदीद है.

उसी ने पुलिस को बताया कि हमलावरों की संख्या 3 थी. उस ने बताया कि तीनों हमलावर एक बाइक पर सवार हो कर आए थे. उन में से एक शायद राणा को जानता था, क्योंकि उसी के अनुरोध पर वह सेल्फी देने के लिए रुके थे. उस के साथ आए 2 अन्य लोगों ने खुद को उन का फैन बताया और सेल्फी के लिए समीप पहुंचे, फिर करीब से उन के सिर व चेहरे पर गोली दाग दी.

जांच में जुटीं 12 टीमें

अगले एक घंटे के भीतर मोहाली के एसएसपी हरमिंदर सिंह हंस भी घटनास्थल कबड्डी के मैदान व अस्पताल में पहुंच गए. उन्होंने खुद घटना के चश्मदीदों से बात की. उन्होंने हत्यारों का सुराग लगाने व उन्हें पकडऩे के लिए 12 पुलिस टीमों को गठन कर दिया. घटनास्थल पर पहुंची फोरैंसिक टीमों ने घटनास्थल की जांचपड़ताल का काम पूरा कर लिया तो फोर्टिस अस्पताल से कंवर दिग्विजय सिंह के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.

एसएसपी के निर्देश पर स्थानीय सोहना (अजीतगढ़) थाने की पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 101 में हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. जांच का काम एसएचओ अमनदीप सिंह ने अपने हाथ में ले लिया. एसएसपी द्वारा गठित सभी 12 पुलिस टीमें उन के अधीन जांच के काम में जुट गईं.

जांच का काम शुरू करते ही पुलिस टीमों ने आरोपियों की पहचान के लिए इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी. चश्मदीदों से पूछताछ की जाने लगी. कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन करने वालों से ले कर कबड्डी टीमों के खिलाडिय़ों से पूछताछ की जाने लगी.

गोलीबारी की घटना में घायल हुए जगबीर सिंह समेत राणा की हत्या के अन्य चश्मदीदों ने बताया कि यह घटना सेक्टर-82 के मैदान में हुई, जहां कबड्डी का मैच चल रहा था. यह हमला तब हुआ, जब टूर्नामेंट लगभग खत्म हो चुका था और यूट्यूब पर इस की लाइव स्ट्रीमिंग हो रही थी. राणा को 3 से 4 गोलियां लगने की आशंका थी. पुलिस को घटनास्थल से .32 बोर का एक खाली कारतूस मिला, जिस से अनुमान लगाना सहज था कि वारदात में .32 बोर के पिस्तौल का इस्तेमाल हुआ है.

पुलिस अधिकारियों ने अपनी काररवाई के बीच जालंधर में रहने वाले कंवर दिग्विजय सिंह राणा बलाचौरिया के फेमिली वालों को सूचना दे दी गई. अगली सुबह दिग्विजय के पापा राजीव सिंह राणा बलाचौरिया, चाचा राजीव सिंह, पत्नी प्रीति, भाई अजय सिंह तथा अन्य परिजन मोहाली के सोहना पहुंच कर पुलिस से मिले. दिलचस्प बात यह है कि राणा की बहन इटली में रहती है और वह इंडिया आई हुई थी. गोलीबारी की घटना वाली रात को ही उस की इटली की फ्लाइट थी. लेकिन फ्लाइट पर चढऩे से पहले ही उसे अपने भाई की हत्या की खबर मिली तो वह वापस अपने घर लौट गई और सुबह परिजनों के साथ घटनास्थ्ल पर जा पहुंची.

पुलिस ने जब परिजनों से दिग्विजय की किसी से दुश्मनी या रंजिश के बारे में पूछा तो फेमिली वाले ऐसी कोई जानकारी नहीं दे सके, जिस से किसी पर कंवर दिग्विजय सिंह की हत्या का शक किया जा सके.

लेकिन पूछताछ में यह जानकारी जरूर मिली कि कंवर दिग्विजय सिंह उर्फ राणा बलाचौरिया शाही परिवार से ताल्लुक रखते थे. उन का रिश्ता हिमाचल के शाही परिवार से था. कंवर दिग्विजय सिंह के परदादा ऊना के पास स्थित एक रियासत के राजा थे और उन का पूरा परिवार हिमाचल प्रदेश का ही रहने वाला था. हालांकि, अब काफी लंबे समय से वह पंजाब के शहीद भगत सिंह नगर के बलाचौर (नवांशहर) में रह रहे थे.

पूछताछ में पता चला कि कंवर दिग्विजय सिंह कुश्ती से करिअर की शुरुआत कर कबड्डी के प्रमोटर बने और बाद में उन्होंने अपनी टीम भी बनाई. कंवर दिग्विजय सिंह पहले पहलवानी करते थे और फिर बाद में कबड्डी खिलाड़ी बन गए. हाल ही में उन्होंने एक मौडलिंग प्रोजेक्ट में काम करने की योजना भी बनाई थी. वह आने वाले दिनों में कुछ गानों में काम करने की योजना भी बना रहे थे.

12 दिन पहले हुई शादी

कंवर दिग्विजय सिंह की शादी महज 12 दिन पहले 4 दिसंबर, 2025 को ही हुई थी. उन्होंने उत्तराखंड के देहरादून की रहने वाली प्रीति से शादी की थी, लेकिन 12 दिन बाद ही प्रीति पत्नी का सुहाग उजड़ गया. 6 दिसंबर को उन का रिसैप्शन हुआ था. दोस्तों ने पुलिस को बताया कि वह अपनी शादी को ले कर काफी एक्साइटेड थे. इस से पहले नवंबर में उन के 2 दोस्तों की भी शादियां हुई थीं. वह अपनी शादी के बाद से काफी खुश थे. उन का एक छोटा भाई अजय सिंह है, जबकि उन की बहन विदेश में रहती है.

कंवर दिग्विजय सिंह ने पढ़ाई के दौरान ही कुश्ती खेलनी भी शुरू कर दी थी. इस के बाद उन्होंने कबड्डी की ओर रुख कर लिया था. वह भले ही संपन्न परिवार से थे, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर ही  सब कुछ हासिल किया था. मोहाली आने के शुरुआती दिनों में वह बाइक से ही घूमते थे और मेहनत के बल पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया.

पूछताछ के बाद ही यह भी पता चला कि सिखों के 10वें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंहजी राणा के पूर्वजों के घर में रुके थे और घर में 100 साखियां भी लिखी थीं. पुलिस ये नहीं समझ पा रही थी कि जब कंवर दिग्विजय सिंह में कोई ऐब नहीं था और उन की किसी से कोई जानलेवा दुश्मनी या किसी तरह का विवाद भी नहीं था तो उन की हत्या किस ने की और हत्या का मकसद क्या था.

हालांकि शुरुआती जांच में ही पुलिस को इस बात की आशंका हो गई थी कि कंवर दिग्विजय सिंह की हत्या काफी योजनाबद्ध तरीके से की गई है. क्योंकि पुलिस को कुछ ही घंटों की तलाशी अभियान के बाद घटनास्थल से लगभग 12 किलोमीटर दूर वह बाइक लावारिस अवस्था में बरामद हो गई, जिस पर सवार हो कर हमलावर भागे थे. आसपास के लोगों से पूछताछ में पता चला कि इस बाइक पर सवार लोग बाइक को खड़ी कर के एक गाड़ी में बैठ कर कहीं चले गए थे. उन की संख्या 3 थी. इधर पुलिस जांचपड़ताल के काम में लगी थी कि इसी बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसी पोस्ट वायरल हुई, जिस ने जांच को एक अलग ही दिशा दे दी.

दरअसल, हत्या के कुछ घंटे बाद सोशल मीडिया पर विदेश में बैठे गैंगस्टर बंबीहा गैंग की ओर से एक पोस्ट सामने आई, जिस में राणा बलाचौरिया की हत्या की जिम्मेदारी ली गई. पोस्ट में दावा किया गया कि राणा ने सिद्धू मूसेवाला के कातिलों का साथ दिया था. हम ने उसी हत्या का बदला लिया है. उस ने मूसेवाला के हत्यारों को पनाह दी थी. राणा को मार कर हम ने अपने भाई मूसेवाला का बदला ले लिया है.

पोस्ट में दावा किया गया कि राणा लारेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया से जुड़ा था. दावा किया गया कि उन्हीं के लोगों ने दिग्विजय सिंह की हत्या की है. सोशल मीडिया पर किए गए इस दावे के बाद मोहाली पुलिस ने इस दावे की जांच शुरू कर दी और गैंग के नेटवर्क को ट्रेस करने की कोशिश करने लगी. साइबर सेल इंटरनेट पर डाली गई पोस्ट के जरिए आईपी एड्रेस ट्रेस करने के प्रयास में जुट गई.

बंबीहा गैंग की सोशल मीडिया पोस्ट के बाद पूरे मामले को ले कर राणा बलाचौरिया के परिवार ने भी पुलिस और मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा. दिग्विजय के पिता कुंवर राजीव सिंह और चाचा कुंवर संजीव सिंह ने कहा कि राणा बलाचौरिया न तो किसी गैंग से जुड़ा था और न ही उस ने कभी उन्हें ये बताया था कि उस को किसी गैंगस्टर से कोई धमकी मिल रही है. उन्होंने कहा कि राणा बलाचौरिया सिर्फ कबड्डी के खेल से जुड़ा था. उन्हें नहीं पता कि किस वजह से उन के बेटे की हत्या कर दी गई.

राणा के फेमिली वालों ने कहा कि उन के बेटे का सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड या उस से जुड़े किसी भी गैंग या गैंगस्टर से कोई लेनादेना नहीं है. उन्होंने कहा कि हमले के वक्त राणा बलाचौरिया के पास उस की लाइसेंसी गन, सोने के कुछ आभूषण और मोबाइल मौजूद था, जोकि घटना के बाद से गायब है. अगले दिन कंवर दिग्विजय सिंह राणा के शव का पोस्टमार्टम हो गया तो पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया. शव को परिजन नवांशहर में अपने गांव बलाचौर ले गए और गमगीन परिजनों ने भारी जनसमूह के बीच उस का अंतिम संस्कार कर दिया.

इधर पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि कंवर दिग्विजय सिंह को पौइंट ब्लैंक रेंज से .32 की गोली मारी गई, जो पीछे से सिर में लगी और मुंह के रास्ते बाहर निकल गई. इसी कारण उन की मौत हुई.

बंबीहा गैंग आया सामने

गैंगस्टरों की सोशल मीडिया पोस्ट व अब तक की जांच से एक बात साफ हो गई थी कि राणा बलाचौरिया की हत्या का भले ही सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड से कोई लेनादेना नहीं हो, लेकिन उन की हत्या पूरी तरह से टारगेट किलिंग थी और इस में गैंगस्टरों का हाथ होने की पूरी संभावना थी.  इसीलिए एसएसपी द्वारा गठित टीमों ने आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल से उठाए गए फोन के डंप डाटा और लोकल इंटैलीजेंस से इस बात का पता लगा लिया कि बलाचौरिया की हत्या के पीछे कुख्यात लक्की पटियाल गैंग का हाथ है, जिस का सीधा संबंध बंबीहा गैंग से है.

उन्होंने बताया कि इस हत्याकांड में मुख्यरूप से 2 शूटरों की पहचान हुई है. पहला नाम था आदित्य कपूर उर्फ मक्खन और दूसरा करण पाठक. जांच में सामने आया है कि आदित्य कपूर और करण पाठक दोनों के खिलाफ पहले से ही कई दरजन आपराधिक मामले दर्ज हैं. दोनों शूटर जेल जा चुके हैं और लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं. दोनों का सीधा संबंध बंबीहा गैंग से है, जो पंजाब में संगठित अपराध और वर्चस्व की लड़ाई के लिए कुख्यात है.

जांच में यह भी साफ हो गया है कि यह हत्याकांड किसी निजी रंजिश या सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड से जुड़ा नहीं है. खुद एसएसपी हरमनदीप सिंह हंस ने दावा किया कि राणा बलाचौरिया की हत्या का मकसद कबड्डी लीग्स और कबड्डी जगत पर गैंगस्टरों का दबदबा कायम करना था. राणा बलाचौरिया कबड्डी के बड़े प्रमोटर माने जाते थे और उन की बढ़ती लोकप्रियता व प्रभाव गैंगस्टरों को खटक रहा था. यह खुलासा कैसे हुआ, यह जानने से पहले 17 दिसंबर, 2025 बुधवार की सुबह डेराबस्सी के लेहली गांव में अंबाला लालडू हाइवे पर हुई मुठभेड़ के बारे में जानना जरूरी है, जहां डीएसपी बिक्रम बराड़ और एसएचओ सुमित मोर की अगुआई में पुलिस की एक टीम नाका लगाए बैठी थी.

इस टीम को युगराज से हुई पूछताछ के बाद मिड्ढी के वहां से गुजरने की सूचना मिली थी. इसी सूचना के बाद वहां पहुंची पुलिस ने मिड्ढी को घेर लिया. जब उसे आत्मसमर्पण के लिए कहा गया तो मिड्ढी ने तुर्की में बनी जिगाना पिस्टल से पुलिस पर 8 से 10 राउंड फायरिंग कर दी. इस दौरान हैडकांस्टेबल कुमार शर्मा के पैर में गोली लगी, जबकि हैडकांस्टेबल गुलाब सिंह की छाती की ओर चली गोली उन की बुलेटप्रूफ जैकेट में अटक गई.

शूटर मुठभेड़ में हुआ ढेर

हालांकि गोली के जोर से उन्हें भी चोट आई. मिड्ढी को पेट और पैरों में गोलियां लगीं. तीनों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान मिड्ढी ने दम तोड़ दिया. घायल पुलिसकर्मियों की जान किसी तरह बच गई. दरअसल, मिड्ढी ने न केवल शूटरों को लाजिस्टिक सपोर्ट दिया, बल्कि वारदात के बाद फरार होने की योजना में भी शामिल था. उसे ऐशदीप के साथ देश छोड़ कर भागना था, लेकिन पुलिस के शिकंजे से बच नहीं सका. ऐशदीप के तार कुख्यात गैंगस्टर डोनी बल और विदेशों में बैठे उस के साथियों से जुड़े हुए हैं. इन में इटली में मौजूद जोधा और अमेरिका से औपरेट कर रहा गुरलाल शामिल हैं.

डेराबस्सी में हत्या के आरोपी और पुलिस के बीच मुठभेड़ में मारा गया आरोपी हरपिंदर सिंह उर्फ मिड्ढी, तरनतारन का रहने वाला था. मिड्ढी ही वह शख्स था, जो 2 मुख्य शूटरों आदित्य कपूर उर्फ माखन और करण पाठक उर्फ डिफाल्टर करण के साथ कबड्डी टूर्नामेंट में मौजूद था. इन शूटरों ने राणा बलाचौरिया को सेल्फी लेने के बहाने पास बुलाया और फिर गोली मार कर हत्या कर दी थी. फिलहाल दोनों मुख्य शूटर अब भी फरार हैं.

हुआ यूं कि मिड्ढी को मुठभेड़ में मार गिराने से पहले पुलिस को सीसीटीवी की फुटेज, मोबाइल फोंस की ट्रैकिंग से पता चला कि कंवर दिग्विजय सिंह राणा की हत्या के मास्टरमाइंड ऐशदीप सिंह दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट से ओमान भागने की तैयारी कर रहा है. पुलिस टीम ने वहां पहुंच कर उसे गिरफ्तार कर लिया. ऐशदीप मस्कट (ओमान) भागने की फिराक में था, लेकिन पुलिस टीम ने उसे ऐन वक्त पर धर दबोचा.

साजिश का हुआ खुलासा

पूछताछ में ऐशदीप ने कई अहम जानकारियां उगलीं, उसी के आधार पर पुलिस मिड्ढी तक पहुंचने में सफल रही. मिड्ढी भी ऐशदीप के साथ विदेश भागने वाला था, लेकिन किसी कारण वह पंजाब में ही फंस गया. लेकिन वह उस के साथ लगातार फोन पर संपर्क में था. गिरफ्तार होते ही ऐशदीप ने मिड्ढी के ठौरठिकाने बता दिए. ऐशदीप तक पुलिस युगराज के मार्फत पहुंची. पुलिस ने हत्या के बाद फरार हुए हमलावरों द्वारा लावारिस छोड़ी गई बाइक की नंबर प्लेट व चेसिस नंबर की जांच की तो पता चला कि वह बाइक युगराज की है, जो अमृतसर का रहने वाला है.

मोहाली पुलिस ने अमृतसर पुलिस को तत्काल सारी जानकारी दे कर युगराज की गिरफ्तारी के आदेश दिए. इसी आधार पर अमृतसर (ग्रामीण) पुलिस ने युगराज के घर छापा मारा और उसे गिरफ्तार कर सारा राज उगलवा लिया.  उस ने बताया कि इस घटना का एक मास्टरमाइंड ऐशदीप मस्कट भागने वाला है. सर्विलांस के सहारे पीछा करते हुए पुलिस पहले ऐशदीप तक पहुंची, फिर उस से पूछताछ के बाद कडिय़ां जोड़ते हुए पुलिस ने डेराबस्सी में मिड्ढी को अपने चंगुल में फंसा लिया, जो भागने की कोशिश में मारा गया.

पुलिस अब 2 मुख्य शूटरों आदित्य कपूर उर्फ माखन और करण पाठक उर्फ डिफाल्टर करण की सरगरमी से तलाश कर रही है. गिरफ्तार किए गए ऐशदीप और युगराज से हुई पूछताछ में खुलासा हुआ कि राणा बलाचौरिया की हत्या कबड्डी के खेल को कंट्रोल करने के लिए की गई. मारे गए राणा बलाचौरिया की जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया से करीबी भी सामने आई है, जिस के बारे मेंजांच चल रही है.

जांच में पता चला कि ऐशदीप पहले एक अपराध के बाद रूस भाग चुका था और 25 नवंबर को भारत लौटने के बाद उस ने इस हत्याकांड की साजिश रची. बलाचौरिया की हत्या की साजिश कुख्यात लक्की पटियाल गैंग ने रची थी. हरपिंदर उर्फ मिड्ढी इस हत्याकांड का ग्राउंड लेवल पर मुख्य प्लानर और हैंडलर था. वह वारदात के समय मौके पर मौजूद था. पुलिस की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है कि राणा बलाचौरिया ने बंबीहा गैंग के गैंगस्टरों का फोन नहीं उठाया था, यह फोन आर्मेनिया में बैठे लक्की पटियाल या उस के साथी डोनी बल ने किया था, इस की पुलिस जांच कर रही है. इसी से गुस्साए गैंगस्टरों ने उस की हत्या की साजिश रच डाली.

पूछताछ में मर्डर से ले कर हाइडआउट यानी कत्ल के बाद सब के छिपने के लिए परफेक्ट प्लानिंग की गई थी. अगर मास्टरमाइंड न पकड़ा जाता तो पुलिस को कातिलों को पकडऩे में समय लग सकता था. हालांकि मोहाली पुलिस ने विदेश फरार हो रहे मास्टरमाइंड को दबोच लिया तो सारा मामला खुल कर सामने आ गया. पूछताछ के बाद पुलिस ने हत्या के बाद शूटरों के फरार होने का रूट भी ट्रेस कर लिया है.

वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मोहाली के सेक्टर-105 से होते हुए मोहाली के रायपुरकलां पहुंचे और वहां से चुन्नी गांव की ओर ग्रामीण इलाकों में भाग निकले. इस के बाद दोनों शूटर करण पाठक और आदित्य कपूर ऐशदीप से अलग हो गए थे. कथा लिखने तक पुलिस टीम मामले की तफ्तीश में जुटी थी.

गैंगस्टर डोनी बल का दावा: खिलाड़ी नहीं था राणा

राणा बलाचौरिया हत्याकांड को बंबीहा गैंग से जुड़े गैंगस्टर डोनी बल ने दावा किया है कि राणा न तो कोई कबड्डी खिलाड़ी था और न ही प्रमोटर, बल्कि वह लारेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया गैंग का गुर्गा था. डोनी के अनुसार, चंडीगढ़ के एक नामी क्लब से रंगदारी वसूली के लिए राणा ने लारेंस से फोन करवाया था और यही उस की हत्या की सब से बड़ी वजह बनी.

डोनी ने दावा किया कि पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या का बदला लिया जाएगा. 35 लोगों की एक सूची बनाई गई है और इन सभी को मौत के घाट उतारा जाएगा. यह बात उस ने कबड्डी खिलाड़ी कुंवर दिग्विजय सिंह उर्फ राणा बलाचौरिया की हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए कही. राणा की हत्या के बाद डोनी ने एक निजी यूट्यूब चैनल पर जारी वीडियो में कहा है कि करीब ढाई महीने पहले राणा ने चंडीगढ़ के एक क्लब संचालक से लारेंस बिश्नोई का संपर्क कराया. फोन पर लारेंस ने क्लब संचालक से कहा था कि उस का गुर्गा हर महीने पैसे लेने आएगा और उसे इस में हिस्सा देना होगा.

डोनी का आरोप है कि राणा उस के विरोधी गैंग को फाइनेंशियल तौर पर मजबूत कर रहा था. जो भी हमारे दुश्मनों को सपोर्ट करेगा या उन्हें आर्थिक मदद पहुंचाएगा, उस का अंजाम यही होगा. डोनी ने यह भी दावा किया कि हम ने किसी और खिलाड़ी को परेशान नहीं किया. राणा ही सब कुछ कर रहा था, इसलिए उसे रोका गया. उस ने यह कहा कि राणा को पहले चेतावनी दी गई थी कि वह खिलाडिय़ों पर दबाव न डाले, लेकिन उस ने बात नहीं मानी.

डोनी जिस क्लब का जिक्र कर रहा है, वह सेक्टर-26 स्थित एक बड़ा क्लब है, जो पहले भी गैंगस्टरों के निशाने पर रहा है. पुलिस रिकौर्ड के मुताबिक सेक्टर-26 क्लब एरिया लंबे समय से उगाही, धमकी भरे कौल और गैंगों की आपसी रंजिश का केंद्र बना हुआ है. डोनी ने इस हत्याकांड में शगुनप्रीत की भूमिका होने का भी दावा किया है. उस ने कहा कि वारदात के वक्त वह और शगुनप्रीत फोन पर संपर्क में थे और जिन नामों का जिक्र किया गया है, वही इस हत्या में शामिल हैं.

डोनी ने सिद्धू मूसेवाला की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि मूसेवाला को फेम और पैसे के लिए मारा गया, जबकि उस का कोई कुसूर नहीं था. उस ने दावा किया कि मूसेवाला पंजाब की बोली और संस्कृति को आगे ले जा रहा था. क्लबों से रंगदारी और गैंगवार का यह खेल पहली बार सामने नहीं आया है. इस से पहले पहली दिसंबर, 2025 को चंडीगढ़ के सेक्टर-26 में इंद्रप्रीत सिंह उर्फ पैरी की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. इस हत्याकांड में भी क्लब और रंगदारी का कनेक्शन सामने आया था.

लारेंस गैंग के करीबी हैरी बौक्सर और आरजू बिश्नोई ने सोशल मीडिया पोस्ट डाल कर पैरी की हत्या की जिम्मेदारी ली थी. पोस्ट में पैरी को गद्ïदार बताते हुए लिखा गया था कि वह गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा का फोन करवा कर चंडीगढ़ के क्लबों से पैसा इकट्ठा कर रहा था. चंडीगढ़ के क्लब कारोबार को दहशत में रखने के लिए गैंगस्टरों ने बम धमाकों तक का सहारा लिया. नवंबर 2024 में एक जानेमाने क्लब पर बम धमाका किया गया था, जिस की जिम्मेदारी गोल्डी बराड़ ने ली थी.

पुलिस जांच में सामने आया था कि धमाके का मकसद क्लब संचालकों में डर पैदा करना और रंगदारी वसूली को मजबूती देना था. इस के बाद कई क्लब संचालकों को लगातार धमकी भरे फोन कौल आए, लेकिन इस के बावजूद गैंगस्टरों के नेटवर्क को पूरी तरह तोडऩे में पुलिस नाकाम रही.

सूत्रों के मुताबिक चंडीगढ़ के अधिकतर बड़े क्लबों से हर महीने लाखों की रंगदारी के रूप में वसूली जाती है. जो संचालक पैसे देने से इनकार करते हैं, उन्हें धमकियां, फायरिंग, हमले और बम धमाकों के जरिए डराया जाता है. इसी वसूली को ले कर अलगअलग गैंगों के बीच टकराव बढ़ता है और यही टकराव गैंगवार और हत्याओं का रूप ले रहा है.

राणा बलाचौरिया और इंद्रप्रीत उर्फ पैरी की हत्याएं इस बात का सब से बड़ा उदाहरण हैं कि क्लबों की कमाई अब सीधे खूनखराबे से जुड़ चुकी है. Gangster Story

 

Haryana News: आईपीएस सुसाइड केस खाकी में भी छिपा भेदभाव

Haryana News: अपनी सर्विस रिवौल्वर से खुद को गोली मारने वाले हरियाणा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडिशनल डीजीपी) वाई. पूरन कुमार की जेब से मिले 9 पन्नों के सुसाइड नोट में दरजन भर से अधिक आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के नाम मिले. फिर क्या था, प्रदेश के पुलिस महकमे से ले कर सरकार तक में हड़कंप मच गया. जैसेजैसे जांच आगे बढ़ी, वैसेवैसे भ्रष्टाचार, जातीय भेदभाव और प्रमोशन में गड़बडिय़ों की परतें ऐसे उधड़ती चली गईं कि…

हरियाणा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) वाई. पूरन कुमार 29 सितंबर, 2025 से तबादले के बाद से छुट्टी पर चल रहे थे. मन क्षुब्ध था. बीते कुछ दिनों से दिमाग में कई बातें चल रही थीं. कुछ विभागीय काम को ले कर दबाव का तनाव था, मन बोझिल हुए जा रहा था तो वह अकेलापन भी महसूस कर रहे थे. चंडीगढ़ के सेक्टर 11 में उन के आवास पर परिवार के अधिकतर सदस्य अपनेअपने काम में व्यस्त थे. यहां तक कि आईएएस पत्नी अमनीत की भी अपनी अलग व्यस्तता थी.

अमनीत पी. कुमार हरियाणा सरकार में विदेश सहयोग विभाग में आयुक्त और सचिव के पद पर तैनात हैं. वह मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ जापान दौरे पर गई हुई थीं. परिवार के सदस्यों में 2 बेटियां हैं. बड़ी बेटी पढ़ाई के सिलसिले में विदेश में थी, जबकि छोटी बेटी चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रही है. कहने को घर में शांति का माहौल था, लेकिन पूरन कुमार के दिलोदिमाग में खलबली मची हुई थी. ऐसा लगता था जैसे वह अपने मन में दबी बातें किसी को बताना चाहते हों, लेकिन बता नहीं पा रहे हों. वह भीतर ही भीतर घुटेघुटे से थे. उन की यह स्थिति तभी से बन गई थी, जब उन्हें 29 सितंबर, 2025 को पुलिस ट्रेनिंग कालेज सुनारिया, रोहतक में पोस्टिंग दी गई थी. वह वहां जौइन करने के बजाय अवकाश पर चले गए थे.

बात 7 अक्तूबर, 2025 की है. वाई. पूरन कुमार अपने घर के साउंडप्रूफ बेसमेंट में थे. दोपहर का समय था. कमरे में ही चहलकदमी करते हुए कभी सोफे पर बैठ जाते थे तो कभी आराम करने वाली कुरसी पर आ कर बगल की टेबल पर रखे पन्ने उठा कर पढऩे लगते थे. यह सब करते हुए वह स्टडी टेबल के साथ लगी कुरसी पर जा बैठे. वहीं उन का खुला लैपटाप स्लीप मोड में था. उन्होंने उस की एंटर की को दबा दिया. पलक झपकते ही स्क्रीन पर वही पेज उभर कर आ गया, जिसे वह कुछ समय पहले पढ़ रहे थे. उसे ध्यान से देखा… पढ़ा, फिर वहां कुछ टाइप करने लगे.

इसी बीच पास में ही साइलेंट मोड पर रखे मोबाइल की स्क्रीन चमक उठी. कुमार ने एक नजर उस पर डाली. उस पर पत्नी अमनीत की कौल थी. उन्होंने कौल रिसीव नहीं की और लैपटाप पर अपने काम में लगे रहे. कुछ मिनटों में अमनीत की कई कौल्स आईं, जो उन्होंने नजरंदाज कर दीं. वह लैपटाप को शटडाउन करने के बाद ही स्टडी टेबल के साथ लगी कुरसी से उठे. इस से पहले उन्होंने फोन उठा कर सभी मिस्ड कौल देखे, उस में कुछ वाट्सऐप कौल भी थे.

तब तक दोपहर का एक बज चुका था. उस के बाद उन्होंने अपने सुरक्षाकर्मी को बुलाया. उस का सर्विस रिवौल्वर मांग लिया और उसे वहां से चले जाने को कहा. उन के आदेश का पालन करते हुए सुरक्षाकर्मी चला गया. फिर वह कुछ समय के लिए घर के ऊपर वाले कमरे में गए, जहां वह परिवार के साथ रहते थे. उस वक्त घर में नौकरों के अलावा कोई नहीं था. उन से उन्होंने कुछ बातें कीं और दोबारा 2 कमरे वाले बेसमेंट में चले आए.

करीब आधे घंटे बाद डेढ़ बजे उन की छोटी बेटी बेसमेंट में आई. वह किसी काम से मार्केट गई हुई थी. उसे जापान से मम्मा का कौल आया था. आते ही वह ‘डैड…डैड…’ की आवाज लगाती हुई बेसमेंट के मेन कमरे में पहुंची थी कि सामने उस के डैडी वाई. पूरन कुमार आराम कुरसी पर एक ओर मुंह किए लेटे थे और उन के सिर से खून बह रहा था. यह देखते ही उस के मुंह से ‘डैडी…’ की आवाज के साथ चीख निकल पड़ी. उस ने तुरंत सुरक्षाकर्मी को बुलाया. फिर सेक्टर 11 थाने में कौल किया.

सूचना पाते ही मौके पर चंडीगढ़ पुलिस टीम के साथ पहुंच गई. टीम में फोरैंसिक टीम भी थी. जांच एसएसपी कंवरदीप कौर के नेतृत्व में शुरू हुई. मृतक की पहचान अहम पदों पर रहे हरियाणा कैडर के आईपीएस वाई. पूरन कुमार के रूप में हुई. घटना के दौरान एडीजीपी रैंक के अधिकारी पूरन कुमार की आईएएस पत्नी अमनीत पी. कुमार घर में नहीं थीं. वह हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल के साथ जापान गई हुई थीं.

लाश की हालत से स्पष्ट था कि मृतक ने अपनी सर्विस रिवौल्वर से कनपटी पर गोली दागी थी. रिवौल्वर उन की बेटी को बेसमेंट में मिली थी, जो उन्होंने अपने गनमैन से ली थी. कौर ने घर के सभी सदस्यों के साथसाथ सुरक्षाकर्मी और बाहर के प्लौट पर काम करने वालों से भी पूछताछ की. खासकर एसएसपी कौर जानना चाहती थीं कि गोली चलने की आवाज किसकिस ने कब सुनी?

जबकि सभी ने इस बात से इनकार कर दिया. यानी किसी को भी घर के भीतर या फिर बेसमेंट से गोली चलने की आवाज नहीं आई? सभी ने गोली की आवाज सुनने से इनकार कर दिया. जांच में इस का कारण बेसमेंट का साउंडप्रूफ होना पाया गया. संभवत: यही कारण था, जो गोली चलने की आवाज वहां से बाहर नहीं जा पाई. यहां तक कि घर के ठीक ऊपर की मंजिल पर भी नहीं सुनी गई.

जांच टीम के सामने कई सवाल थे. जिस में सब से बड़ा सवाल यह था कि हरियाणा के सीनियर आईपीएस औफीसर वाई. पूरन कुमार ने आत्महत्या क्यों की? इस के बाद  दूसरा अहम सवाल था कि उन्होंने आत्महत्या की या फिर किसी ने उन की हत्या कर डाली? किंतु इसी के साथ यह सवाल भी था कि उन की हत्या भला कोई क्यों करेगा? वह भी उन के घर में घुस कर! इन सवालों के जवाब तुरंत ही नहीं मिल सकते थे, लिहाजा घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने पूरन कुमार के ओहदे को ले कर अटकलें लगाते हुए उन की मौत का जवाब तलाशने की कोशिश करने लगे.

कुछ लोगों ने उन की सीनियरिटी को ले कर सवाल उठाया. उन का एडीजीपी रैंक था, लेकिन जब उन्हें आईजी रैंक दिया गया था, तब उन्होंने बीते साल ‘वन औफीसर वन हाउस पौलिसी’ के तहत शिकायत कर दी थी. इसी के साथ उन्होंने प्रदेश के कई अफसरों की भी शिकायत की थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि कई आईपीएस अफसरों ने एक से ज्यादा सरकारी आवास ले रखे हैं. इस के अलावा उन्होंने पूर्व डीजीपी और एडिशनल चीफ सेक्रेटरी पर भी जाति के आधार पर भेदभाव करने की शिकायत आयोग से की थी.

इस तरह उन के द्वारा सिस्टम को हमेशा चुनौती देने की बात भी सामने आई. क्योंकि यह बात हरियाणा के पुलिस महकमे में चर्चित थी कि वह समयसमय पर गृहमंत्री अनिल विज को भी पत्र लिखते थे. इन सब बातों को ले कर वह बीते डेढ़ साल से काफी सुर्खियों में रहे थे. साथ ही हरियाणा में टीचर हत्याकांड की जांच कर रहे थे. घटनास्थल पर सीएफएसएल (केंद्रीय फोरैंसिक विज्ञान प्रयोगशाला) की टीम जांच के साथसाथ पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर चंडीगढ़ की एसएसपी कंवरदीप कौर ने पाया कि घटना दोपहर करीब डेढ़ बजे हुई. घर में आराम कुरसी पर बैठेबैठे ही संभवत: उन्होंने खुद को गोली मार ली. उन की मौत हो चुकी थी.

आत्महत्या से पहले उन्होंने अपने सभी सुरक्षाकर्मियों को परिसर से बाहर जाने का निर्देश दिया था. पूरी जांच चंडीगढ़ के सेक्टर 11 थाने की पुलिस द्वारा की गई. वाई. पूरन कुमार ने इस वारदात से एक दिन पहले अपनी पत्नी पी. अमनीत कुमार के नाम एक वसीयत और 9 पन्नों का सुसाइड नोट भी तैयार किया था. उसे उन्होंने उसी दिन भेज दिया था. उस समय पत्नी जापान में थीं. वह मैसेज मिलने पर घबरा गईं और तुरंत कौल करने  लगीं. उन की कौल रिसीव नहीं हुई.

पूरन कुमार ने एक दिन पहले ही लिखी वसीयत

अगले रोज 7 अक्तूबर को भी उन्होंने करीब 15 बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. फिर उन्होंने अपनी छोटी बेटी को फोन किया, जो खरीदारी से घर लौटी और उस ने अपने डैडी को बेसमेंट में एक आराम कुरसी पर बेजान पड़ा पाया. वसीयत और सुसाइड नोट दोनों घटनास्थल से बरामद किए गए, जो उन की जेब में थे. पूरन कुमार ने 6 अक्तूबर, 2025 को वसीयत का मसौदा तैयार किया था, जिस में उन्होंने अपनी सारी संपत्ति अपनी पत्नी के नाम कर दी थी. वही वसीयत और सुसाइड नोट मैसेज के जरिए मिलने पर पत्नी उन्हें बेतहाशा फोन करने लगी थीं.

चंडीगढ़ पुलिस को जांच में पता चला कि 7 अक्तूबर की सुबह पूरन कुमार अपने घरेलू रसोइए प्रेम सिंह के साथ घर पर थे, जो पिछले 6 सालों से उन के परिवार के लिए काम कर रहा था. प्रेम सिंह ने बताया कि सुबह लगभग 10 बजे साहब (पूरन कुमार) ने कहा कि वह बेसमेंट में जा रहे हैं, जहां 2 कमरे हैं. जिन में एक साउंडप्रूफ होम थिएटर भी है.

उन्होंने रसोइए से कहा कि वह उन्हें डिस्टर्ब न करे. सिंह से उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने कुत्ते को टहलाने नहीं जाएंगे और फिर से सख्ती से हिदायत दी कि कोई भी नीचे न आए. लगभग 11 बजे पूरन कुमार कुछ देर के लिए ऊपर गए और सिंह से दोपहर के भोजन के लिए पूछा, फिर वापस बेसमेंट में चले गए. इस बीच उन की पत्नी लगातार उन्हें फोन करती रहीं.

शव को पोस्टमार्टम के लिए सेक्टर 16 स्थित अस्पताल में ले जाया गया. इसी बीच घटनास्थल पर एक सुसाइड नोट मिला. जिस में आत्महत्या के कारणों का विस्तार से जिक्र किया गया था. इस के लिए दरजन भर से अधिक प्रशासनिक अधिकारियों के नाम समेत प्रशासनिक व्यवस्था पर दोष लगाया गया था.

सुसाइड नोट से विभाग में मची हलचल

विशेष रूप से वाई. पूरन कुमार द्वारा छोड़े गए सुसाइट नोट, जिसे पुलिस ने ‘फाइनल नोट’ में जाति आधारित कई आरोप लगाए गए थे. उन्होंने लिखा कि उन्हें ‘लगातार स्पष्ट जाति आधारित भेदभाव’ झेलना पड़ा है. अंगरेजी में लिखे उन के नोट का शीर्षक था, ‘संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार घोर जाति आधारित भेदभाव, लक्षित मानसिक उत्पीडऩ, सार्वजनिक अपमान और अत्याचार.’

उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें उन के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मानसिक उत्पीडऩ, सार्वजनिक अपमान, असैन्य और अनुचित व्यवहार का सामना करना पड़ा और ये सब ‘जाति आधारित’ रूप में थे. इस का वर्णन किया कि उन से जुड़े अधिकार, जैसे कि आधिकारिक वाहन, अधिकारी आवास, प्रमोशन आदि उन्हें जाति के आधार पर रोके गए या अनियोजित तरीके से प्रभावित हुए. इस पर उन्होंने विस्तार से लिखा कि उन्हें ‘लगातार स्पष्ट जाति आधारित भेदभाव’ झेलना पड़ा. इस के तहत वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उन्हें निम्नलिखित तरह से निशाना बनाया गया था. जिस से वे मानसिक उत्पीडऩ से ग्रसित हो गए.

इसी तरह उन्हें ‘सार्वजनिक अपमान’ झेलना पड़ा. इस पर उन्होंने लिखा कि उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों के सामने ड्यूटी के दौरान सार्वजनिक जगहों पर उन से नीचे के पद वाले अधिकारियों के सामने नीचा दिखाया गया.  इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भेदभाव केवल एकदो घटनाओं तक ही नहीं था, बल्कि लंबे समय से चल रहा क्रम था. उन्होंने इस भेदभाव को व्यवस्थित बताया. उन का आरोप था कि ऐसा व्यवहार कोई एकदो व्यक्तियों द्वारा नहीं, बल्कि विधिविधान के तौर पर वरिष्ठ पदों से नीचे तक और सर्विस की व्यवस्थाओं में फैला हुआ है.

इन आरोपों के साथ उन्होंने जिन विशिष्ट वरिष्ठ अधिकारियों का नाम लिया, उन में शत्रुजीत सिंह कपूर (हरियाणा डीजीपी) तथा नरेंदर बिजारनिया (रोहतक एसपी) प्रमुख रूप से हैं. उन पर उन्होंने ‘मेरा नाम बदनाम करना’, ‘उलटा आदेश जारी करना’ और ‘मेरे खिलाफ योजनाबद्ध प्रेशर बनाए रखना’ जैसे आरोप लगाए.

उन के द्वारा नोट में डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर पर विशेष आरोप लगाए गए, जिन में उन्हें बकाया राशि मिलने पर आपत्ति भी शामिल थी, जिस से उन के बैच को आर्थिक नुकसान हुआ. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डीजीपी ने सरकारी आवास आवंटित करने में अतिरिक्त नियम लागू किए. उन के आवास के अनुरोध में बाधा डालने के लिए झूठा हलफनामा पेश किया और नवंबर 2023 में उन्हें परेशान करने के लिए उन का सरकारी वाहन वापस ले लिया.

इस तरह के व्यवहार को उन्होंने अपनी आत्महत्या के पीछे एक कारण के रूप में पेश करते हुए लिखा कि इस भेदभाव और उत्पीडऩ की वजह से उन्हें कोई और विकल्प नहीं बचा था. इन आरोपों के आधार पर ही उन की पत्नी अमनीत पी. कुमार (आईएएस) ने शिकायत दर्ज कराई कि इन के पति को एससी/एसटी (अत्याचार) अधिनियम के अंतर्गत भी मामला दर्ज होना चाहिए. कारण, यह भेदभाव उन के दलित समाज श्रेणी के कारण हुआ था.

इसी के साथ चंडीगढ़ पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए पुष्पेंद्र कुमार (आईजी) की अगुवाई में 6 सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की. लेकिन परिवार ने डीजीपी और रोहतक एसपी को छुट्टी पर भेजने की मांग की. एसआईटी का गठन चंडीगढ़ के डीजीपी सागरप्रीत हुड्ïडा के निर्देश पर किया गया है.

आईजीपी के नेतृत्व में गठित इस टीम में एसएसपी (यूटी) कंवरदीप कौर, एसपी (सिटी) के. एम. प्रियंका, डीएसपी (ट्रैफिक) चरणजीत सिंह विर्क, एसडीपीओ (दक्षिण) गुरजीत कौर और इंसपेक्टर जयवीर सिंह राणा (एसएचओ, थाना-11) को शामिल किया गया. डीजीपी ने टीम को त्वरित, निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं.

यह कदम हरियाणा भवन, नई दिल्ली में रेजीडेंट कमिश्नर डी. सुरेश के नेतृत्व में एससी/एसटी समुदाय के प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा पुलिस मुख्यालय में डीजीपी से मुलाकात के बाद उठाया गया. इस में सुरेश के अलावा पूरन कुमार के भाई विक्रम कुमार ने भी परिवार की मांगों से अवगत कराने के लिए डीजीपी हुड्ïडा से मुलाकात की थी.

इस बीच मृतक अधिकारी की पत्नी आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार ने एफआईआर में 2 आरोपी अधिकारियों हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर और रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारनिया के नाम शामिल कर उन के खिलाफ काररवाई करने की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य नामों को हटा दिया गया है और एससी/एसटी अधिनियम की धाराओं को कमजोर किया गया है. इसी के साथ परिवार तब तक शव का पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार करने से इनकार करता रहा, जब तक कि दोनों अधिकारियों (हरियाणा के डीजीपी और रोहतक के एसपी) को छुट्टी पर नहीं भेज दिया जाता. इस बारे में परिवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से आश्वासन मिला था.

इसी बीच राज्य मंत्री कृष्णलाल पंवार ने शोकसंतप्त परिवार से मुलाकात कर अंतिम संस्कार की अपील की थी, लेकिन परिवार ने दोहराया कि जब तक उन की मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वे आगे नहीं बढ़ेंगे. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने भी परिवार से मुलाकात की.

पोस्टमार्टम का किया विरोध

पोस्टमार्टम में इतनी जल्दबाजी क्यों? यह सवाल उठाते हुए आईपीएस अधिकारी की पत्नी ने चंडीगढ़ पुलिस पर शव के साथ ‘असम्मानजनक’ व्यवहार करने का आरोप लगाया तो सभी सकते में आ गए. अमनीत पी. कुमार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने परिवार के किसी सदस्य की अनुपस्थिति के बावजूद शव को पोस्टमार्टम की औपचारिकताओं के लिए अस्पताल से ले लिया. वह वाई. पूरन कुमार के पोस्टमार्टम में चंडीगढ़ पुलिस द्वारा की गई जल्दबाजी से व्यथित हो गई थीं. इसे ले कर उन्होंने पुलिस पर जम कर निशाना साधा और आरोप लगाया कि उन्होंने शव के साथ कोई सम्मान नहीं दिखाया.

उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ पुलिस ने मेरे दिवंगत पति के प्रति कोई सम्मान नहीं दिखाया. मैं पोस्टमार्टम के लिए सहमत थी, लेकिन मैं ने स्पष्ट रूप से कहा था कि शव को ले जाने से पहले बच्चे अपने पिता को अंतिम श्रद्धांजलि देंगे. हालांकि, पुलिस ने पूरी तरह से अवहेलना करते हुए परिवार के किसी भी सदस्य की अनुपस्थिति के बावजूद औपचारिकताओं के लिए शव को अस्पताल से ले लिया. उन्होंने गुस्से में यह भी कहा कि अगर परिवार की सहमति इतनी अप्रासंगिक है तो उन्हें शव के साथ जो करना है, करने दीजिए. मैं ने अब तक चुप रह कर गरिमा बनाए रखी है. हालांकि अब यह पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो रहा है. इतनी जल्दी क्या थी? चंडीगढ़ पुलिस को अपने आचरण पर स्पष्टीकरण देना चाहिए.

साथ ही उन्होंने पुलिस को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा, ‘सेक्टर 16 अस्पताल से शव को पीजीआई ले जाते समय, जहां पोस्टमार्टम होना है, महत्त्वपूर्ण सबूत नष्ट हो गए होंगे. किसी भी चूक के लिए चंडीगढ़ पुलिस जिम्मेदार होगी.’

आईजीपी पूरन कुमार का कथित तौर पर अनियमित पदोन्नति, जाति आधारित भेदभाव और प्रशासनिक उत्पीडऩ को ले कर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विवादों को ले कर चर्चा में बने रहने का इतिहास रहा है. पिछले कुछ सालों में उन्होंने गृह मंत्रालय के मानदंडों के उल्लंघन, अनुसूचित जाति के अधिकारियों के प्रति कथित पक्षपात और पोस्टिंग व आधिकारिक विशेषाधिकारों में चयनात्मक व्यवहार पर अंगुली उठाई थी. इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री और शीर्ष नौकरशाहों को कई पत्र लिखे थे.

कई आईएएस/आईपीएस पर आत्महत्या का असर

वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या का बड़ा असर होना निश्चित है. जैसेजैसे जांच में तेजी आएगी, वैसेवैसे आधा दरजन के करीब उन आईएएस और आईपीएस की मुश्किलें बढ़ जाएंगी, जिन के नाम सुसाइड नोट में दर्ज हैं. जापान से लौटने के बाद आईएएस अमनीत पी. कुमार ने जिस तरह अपनी बड़ी बेटी के विदेश से लौटने तक शव का पोस्टमार्टम नहीं होने दिया और सुसाइड नोट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध काररवाई की मांग की, उस से राज्य की अफसरशाही में खलबली मच गई. पी. कुमार के सुसाइड नोट को पुलिस भी फाइनल नोट कह कर जांच को जरूरी मान चुकी है. हालांकि वे कौनकौन हैं, यह अभी सार्वजनिक नहीं हो पाया था.

जबकि राजनीति से ले कर प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया कि कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के साथ राजनेता भी बेनकाब हो सकते हैं. जांच में 2 बातें सामने आई हैं. एक सुसाइड नोट में दर्ज नामों का ‘फाइनल नोट’ और उन के द्वारा लिखी गई वसीयत. हालांकि फाइनल नोटिस की परिभाषा क्या है, इस बारे में चंडीगढ़ पुलिस कुछ स्पष्ट नहीं कर पाई है, किंतु वाई. पूरन कुमार ने आत्महत्या से पहले जिस तरह वसीयत लिखी और सारी संपत्ति पत्नी अमनीत पी. कुमार के नाम की, उस से अनुमान लगाया गया कि वे पहले ही काफी कुछ मन बना चुके थे.

साथ ही समयसमय पर उन्होंने हरियाणा के मुख्य सचिवों, गृह सचिवों, पुलिस महानिदेशकों और मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक के विरुद्ध शिकायतें दर्ज कराई थीं. उन की विभिन्न याचिकाओं पर अभी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है. अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग ने भी उत्पीडऩ की शिकायत के आधार पर सरकार से जवाब मांगा है. इस के अनुसार उन की पत्नी अमनीत पी. कुमार यदि अपने पति के सुसाइड नोट के आधार पर दोषियों के खिलाफ काररवाई की मांग पर अड़ी रहीं तो कई अधिकारियों की परेशानी बढ़ सकती है.

आईपीएस सुसाइड केस का ट्विस्ट एएसआई संदीप लाठर की खुदकुशी

हरियाणा में आईपीएस वाई. पूरन कुमार के सुसाइड की वारदात के सातवें दिन सरकार ने डीजीपी को हटा तो दिया, लेकिन इस के बाद पूरन कुमार के गार्ड को अरेस्ट करने और उन के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच करने वाले एएसआई संदीप लाठर ने आत्महत्या कर ली. एएसआई ने अपने 3 पेज के सुसाइड नोट में लिखा है कि वाई. पूरन कुमार भ्रष्टाचारी अफसर थे. उन के खिलाफ बहुत से सबूत मौजूद हैं. जातिवाद का सहारा ले कर उन्होंने सिस्टम को हाईजैक कर लिया और ईमानदार अधिकारियों को प्रताडि़त किया जा रहा है. एएसआई ने लिखा कि वह अपनी शहादत दे कर इस भ्रष्टाचार की जांच की मांग कर रहा है, ताकि सच सामने आ सके.

एएसआई संदीप एसपी कार्यालय स्थित साइबर सैल में तैनात थे. 14 अक्तूबर की दोपहर को एक सूचना के बाद संदीप का शव उन के मकान में चारपाई पर पाया गया था. उन्होंने सफेद रंग की शर्ट और नीले रंग की जींस पहन रखी थी. चारपाई के पास उन का सर्विस रिवौल्वर पड़ा था. डीएसपी गुलाब सिंह मौके पर पहुंची थीं.  एफएसएल एक्सपर्ट डा. सरोज दहिया को जांच के लिए बुलाया गया था. घटना के बाद पुलिस ने मौके से 3 पेज का सुसाइड नोट और एक वीडियो मैसेज बरामद किया.

संदीप ने सुसाइड नोट में यह भी दावा किया कि पूरन कुमार भ्रष्ट अधिकारी थे. उन के खिलाफ उस के पास कई सबूत मौजूद थे. उन्हें अपनी गिरफ्तारी का डर था, इसलिए उन्होंने यह खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया. नोट में लाठर ने लिखा था कि पूरन कुमार के परिवार को भी नहीं छोड़ा जाना चाहिए.

लाठर की आत्महत्या ने पूरन कुमार की खुदकुशी मामले में नया ट्विस्ट ला दिया. उन्होंने भी आत्महत्या करने से पहले कुमार की तरह ही सुसाइड नोट लिखा और वीडियो भी बनाया. वीडियो में संदीप लाठर ने पूरन कुमार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, जिस में उन्होंने लिखा कि पूरन कुमार ने राव इंद्रजीत को निकालने के लिए 50 करोड़ की डील की थी. साथ ही लाठर ने आत्महत्या से पहले रोहतक के पूर्व एसपी नरेंद्र बिजारणिया को ईमानदार पुलिस अफसर बताया. ऐसे में हरियाणा पुलिस के अंदर भ्रष्टाचार को ले कर चलने वाला मामला और भी पेचीदा हो गया. रोहतक के नए एसपी सुरेंद्र सिंह भोरिया ने संदीप लाठर को अच्छा मुलाजिम बताया.

2001 बैच के आईपीएस वाई. पूरन कुमार के सुसाइड कर लेने के बाद हरियाणा की आईपीएस और आईएएस लौबी समेत पूरी अफसरशाही में पहले से ही हड़कंप मचा हुआ था. उस में लाठर की आत्महत्या और उन के सुसाइड नोट में जिक्र हुए नामों से छौंक लग गई. संदीप लाठर के आरोपों से कई भ्रष्टाचारियों के नाम उजागर हो गए. इन में एक बड़ा नाम राव इंद्रजीत का आया, जिसे क्रिमिनल बताया गया. वह जेम्स म्यूजिक का मालिक है. पुलिस के डर से विदेश में बैठा है. उस के अमेरिका में होने की संभावना जताई गई है. मंजीत डीघल समेत कई मामलों का आरोपी है.

राव इंद्रजीत का नाम एल्विश यादव के घर पर फायरिंग के बाद भी सामने आया था. उसे एक कुख्यात गैंगस्टर बताया जाता है. हरियाणा से जुड़े राव इंद्रजीत हिमांशु भाऊ गैंग के लिए काम करता है. रोहतक में कुछ समय पहले एक फाइनेंसर की हत्या होने के बाद भी राव इंद्रजीत का नाम आया था. इसी के साथ उस का नाम हरियाणा के सिंगर फाजिलपुरिया पर भी हमले में आया था. एल्विश यादव के जानी दुश्मनों में नीरज फरीदपुरिया, हिमांशु भाऊ और राव इंद्रजीत यादव के नाम शामिल हैं.

पूरन कुमार की तरह ही संदीप लाठर ने भी सुसाइड नोट में संगीन आरोप लगाए हैं. इस के बाद यह मामला पेचीदा बन गया और हरियाणा के कार्यवाहक डीजीपी बने ओ.पी. सिंह के सामने एक साथ कई चुनौतियां आ गई थीं. उन के सामने पहली बड़ी चुनौती आईपीएस पूरन कुमार की पत्नी को पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार के लिए राजी करने की थी. दूसरी चुनौती एएसआई संदीप लाठर के भाई द्वारा पूरन के परिवार पर एफआईआर दर्ज करने की मांग का समाधान निकालने की थी. इस में पूरन कुमार की पत्नी अमनीत कुमार के खिलाफ भी ऐक्शन की मांग की गई थी.

संदीप लाठर ने वीडियो में कहा था कि वह भगत सिंह की तरह अपनी पहली आहुति दे रहे हैं. इस कारण नए डीजीपी के सामने फिर से खाकी पर लगे आरोपों के धुलने और दोनों परिवारों के इंसाफ दिलाने की चुनौती आ गई. संदीप कुमार लाठर हरियाणा के जींद जिले के गांव जुलाना के रहने वाले थे. वे हरियाणा पुलिस में सहायक उपनिरीक्षक पद पर तैनात थे और विशेष रूप से रोहतक जिले की साइबर सेल में कार्यरत थे. उन के परिवार में पत्नी संतोष, एक बेटा और 2 बेटियां हैं. उन की पारिवारिक पृष्ठभूमि पुलिस की रही है. पिता भी पुलिस में इंसपेक्टर थे.

15 अगस्त, 2025 को मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें सम्मान मिला था. उन के बेटे का कहना है कि ‘मैं अपने पिता का सपना पूरा करूंगा.’ उन के अंतिम संस्कार में भारी जुड़ाव और स्थानीय स्तर पर गहरी संवेदना देखने को मिली. Haryana News

 

 

Social Crime Story : बैंक के सिक्योरिटी गार्ड ने लूट लिए 4 करोड़ रुपए

Social Crime Story : सुनील एक्सिस बैंक की चेस्ट में सिक्योरिटी गार्ड था. इस चेस्ट से कई प्रदेशों के एटीएम सेंटरों पर पैसा भेजा जाता था. आर्थिक तंगी से जूझ रहे सुनील ने एक रात चेस्ट में रखा संदूक काट कर लगभग 4 करोड़ रुपए साफ कर दिए. इस के बाद जो हुआ वह…

हरियाणा और पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ के सेक्टर 34 में एक्सिस बैंक का करेंसी चेस्ट है. इस में हर समय करोड़ों रुपए रहते हैं. इस चेस्ट से बैंक की ट्राइसिटी के अलावा हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब व जम्मूकश्मीर की शाखाओं को पैसा भेजा जाता है और वहां से आता भी है. हर समय करोड़ों रुपए रखे होने के कारण यहां सुरक्षा के भी काफी बंदोबस्त हैं. बैंक ने अपने सिक्योरिटी गार्ड तो लगा ही रखे हैं. साथ ही पंजाब पुलिस के जवान भी वहां हर समय तैनात रहते हैं. इसी 11 अप्रैल की बात है. सुबह हो गई थी. कोई साढ़े 5-6 बजे के बीच का समय रहा होगा.

 

सूरज निकल आया था, लेकिन अभी चहलपहल शुरू नहीं हुई थी. चेस्ट पर तैनात पंजाब पुलिस के जवानों को वहां रात में उन के साथ तैनात रहने वाला बैंक का सिक्योरिटी गार्ड सुनील नजर नहीं आ रहा था. पुलिसकर्मियों ने एकदूसरे से पूछा, लेकिन किसी को भी सुनील के बारे में पता नहीं था. उन्हें बस इतना ध्यान था कि वह रात को ड्यूटी पर था. रात के 3-4 बजे के बाद से वह दिखाई नहीं दिया था. पुलिस के उन जवानों को चिंता हुई कि कहीं सुनील की तबीयत तो खराब नहीं हो गई? तबीयत खराब होने पर वह बैंक की चेस्ट में ही कहीं इधरउधर सो नहीं गया हो? यह बात सोच कर उन्होंने चेस्ट में चारों तरफ घूमफिर कर सुनील को तलाश किया, लेकिन न तो वह कहीं पर सोता मिला और न ही उस का कुछ पता चला.

सुनील की ड्यूटी रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक थी, लेकिन वह 2-3 घंटे से गायब था. वह किसी को कुछ बता कर भी नहीं गया था. एक पुलिस वाले ने उस के मोबाइल नंबर पर फोन किया, लेकिन उस का मोबाइल स्विच्ड औफ था. पुलिस वालों को पता था कि सुनील रोजाना अपनी पलसर बाइक से आता था. वह बैंक की चेस्ट के पीछे अपनी बाइक खड़ी करता था. उन्होंने उस जगह जा कर बाइक देखी, लेकिन वहां उस की बाइक भी नहीं थी. अब पुलिस वालों की चिंता बढ़ गई. चिंता का कारण वहां रखी करोड़ों रुपए की रकम थी. उन्होंने बैंक के अफसरों को फोन कर सारी बात बताई. कुछ देर में बैंक के अफसर आ गए. उन्होंने चेस्ट में रखे रुपयों से भरे लोहे के बक्सों की जांचपड़ताल की.

पहली नजर में नोटों के इन बक्सों में कोई हेराफेरी नजर नहीं आई. नोटों से भरे सभी बक्सों पर ताले लगे हुए थे. सरसरी तौर पर कोई गड़बड़ी नजर नहीं आ रही थी. दूसरी तरफ सुनील का पता नहीं चल रहा था. उस का मोबाइल बंद होना और बाइक बैंक के बाहर नहीं होने से संदेह पैदा हो रहा था कि कोई न कोई बात जरूर है. वरना सुनील ऐसे बिना बताए कैसे चला गया? काफी सोचविचार के बाद अफसरों के कहने पर नोटों से भरे बक्सों को हटा कर जांच की गई. एक बक्से को हटा कर चारों तरफ से देखा तो उस का ताला लगा हुआ था, लेकिन वह बक्सा पीछे से कटा हुआ था. बक्से को काट कर नोट निकाले गए थे. सवाल यह था कि कितने नोट निकाले गए हैं?

क्या ये नोट सुनील ने ही निकाले हैं? इस की जांचपड़ताल जरूरी थी. इसलिए बैंक अफसरों ने सेक्टर-34 थाना पुलिस को इस की सूचना दी. संदूक काट कर निकाले 4 करोड़ पुलिस ने आ कर जांचपड़ताल शुरू की. यह तो साफ हो गया कि बैंक की चेस्ट से बक्से को पीछे से काट कर नोट निकाले गए हैं. कितनी रकम निकाली गई है, इस सवाल पर बैंक वालों ने पुलिस के अफसरों से कहा कि सारे नोटों की गिनती करने के बाद ही इस का पता लग सकेगा. पुलिस ने बैंक वालों से सुनील के बारे में पूछताछ की. बैंक के रिकौर्ड में सुनील के 2 पते लिखे थे. एक पता पंचकूला में मोरनी के गांव बाबड़वाली भोज कुदाना का था और दूसरा पता मोहाली के पास सोहाना गांव का.

वह 3 साल से बैंक में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहा था. पुलिस अफसरों ने 2 टीमें सुनील के दोनों पतों पर भेज दीं. सुरक्षा के लिहाज से बैंक की चेस्ट में भीतरबाहर कैमरे लगे हुए थे. पुलिस ने कैमरों की फुटेज देखी. इन फुटेज में सामने आया कि सुनील रात को बारबार बैंक के अंदर और बाहर आजा रहा था. उस की चालढाल और हाथों के ऐक्शन से अंदाजा लगाया गया कि वह बैंक के अंदर से अपने कपड़ों के नीचे कोई चीज छिपा कर बारबार बाहर आ रहा था. कपड़ों के नीचे छिपे शायद नोटों के बंडल होंगे. बाहर वह इन नोटों के बंडलों को कहां रख रहा था, इस का पता नहीं चला. यह भी पता नहीं चला कि बैंक के बाहर उस का कोई साथी खड़ा था या नहीं. एक फुटेज में वह हाथ में एक बैग ले कर बाहर निकलता नजर आया.

सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद यह बात साफ हो गई थी कि सुनील ने योजनाबद्ध तरीके से बैंक की चेस्ट से रुपए चोरी किए थे. फुटेज में 10-11 अप्रैल की दरम्यान रात 3 बजे बाद वह नजर नहीं आया. इस का मतलब था कि रात करीब 3 बजे वह बैंक से रकम चोरी कर फरार हो गया था. बैंक वालों ने 5-6 घंटे तक सारी रकम की गिनती करने के बाद पुलिस अफसरों को बताया कि 4 करोड़ 4 लाख रुपए गायब हैं. यह सारी रकम 2-2 हजार रुपए के नोटों के रूप में थी. 4 पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में बैंक से 4 करोड़ रुपए से ज्यादा चोरी होने का पता चलने पर पुलिस भी हैरान रह गई.

शुरुआती जांच में यह अनुमान लगाया गया कि सुनील ने अपने किसी साथी के सहयोग से यह वारदात की है. अनुमान यह भी लगाया गया कि इतनी बड़ी रकम ले कर वह किसी चारपहिया वाहन से भागा होगा. फिर सवाल आया कि सुनील अगर चारपहिया वाहन से भागा था तो उस की बाइक बैंक के पीछे मिलनी चाहिए थी, लेकिन उस की बाइक वहां नहीं मिली थी. इस से यह बात स्पष्ट हो गई कि बाइक या तो वह खुद या उस का कोई साथी चला कर ले गया. पुलिस ने बैंक की चेस्ट में उस रात ड्यूटी पर मौजूद पंजाब पुलिस के चारों जवानों के बयान लिए. बैंक वालों के भी बयान लिए. बैंक वालों से सुनील के यारदोस्तों और उस के आनेजाने के ठिकानों के बारे में पूछताछ की गई.

तमाम कवायद के बाद भी पुलिस को ऐसी कोई बात पता नहीं चली, जिस से उस के बारे में कोई सुराग मिलता. तत्परता से जुटी पुलिस सुनील की बाइक का पता लगाने के लिए पुलिस ने खोजी कुत्ते की मदद ली. पुलिस का स्निफर डौग उस के बाइक खड़ी करने की जगह पर चक्कर लगाने के बाद कुछ दूर गया. इस के बाद लौट आया. इस से पुलिस को कुछ भी पता नहीं लग सका. पुलिस ने सुनील की बाइक का पता लगाने के लिए बसस्टैंड के आसपास और दूसरी जगहों की पार्किंग पर तलाश कराई, लेकिन पता नहीं चला. उस के मोबाइल की आखिरी लोकेशन भी बैंक की आई.

सुनील के गांव भेजी गई पुलिस की टीमें शाम को चंडीगढ़ लौट आईं. मोरनी के पास स्थित गांव बाबड़वाली भोज कुदाना में पता चला कि सुनील को गंदी आदतों के कारण उस के मांबाप ने कई साल पहले ही घर से बेदखल कर दिया था. इस के बाद सुनील ने भी गांव आनाजाना कम कर दिया था. पिता राममूर्ति ने पुलिस को बताया कि सुनील 2011-12 में पढ़ने के लिए कालेज जाता था. उसी दौरान वह एक लड़की को भगा ले गया था और बाद में उस से शादी कर ली थी. सुनील की इस हरकत के बाद ही मांबाप ने उसे घर से निकाल दिया था. बाद में पता चला कि सुनील ने पत्नी को तलाक दे दिया था. बैंक में चोरी की वारदात से करीब 3 महीने पहले वह किसी काम से गांव जरूर आया था.

पुलिस जांचपड़ताल में जुट गई. सुनील के दोस्तों और जानपहचान वालों की सूची बनाई गई. उन से पूछताछ की गई. पता चला कि वह मोहाली में एक दोस्त के साथ पेइंगगेस्ट के तौर पर पीजी में रहता था. पीजी पर जांच में सामने आया कि वह रात को बैंक में ड्यूटी करने के बाद कई बार सुबह पीजी पर नहीं आता था. वारदात के बाद भी वह कमरे पर नहीं आया था. सुनील का सुराग हासिल करने के लिए पुलिस ने वारदात वाली रात बैंक के आसपास चालू रहे मोबाइल नंबरों का डेटा जुटाया. इन नंबरों की जांच की गई, लेकिन इन में से किसी भी नंबर से सुनील के मोबाइल पर बात नहीं हुई थी.

इस से पहले पुलिस यह मान रही थी कि वारदात में अगर सुनील के साथ दूसरे लोग भी शामिल हैं तो उन की मोबाइल पर आपस में कोई न कोई बात जरूर हुई होगी. इसी का पता लगाने के लिए बैंक के आसपास के मोबाइल टावरों से उस रात जुड़े रहे मोबाइल नंबरों की जांच की गई थी, लेकिन पुलिस का यह तीर भी खाली निकल गया. पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज से ही क्लू हासिल करने के मकसद से कई बार फुटेज देखी, लेकिन इस से भी ऐसी कोई बात सामने नहीं आई, जिस से सुनील का पता लगता या जांच का नया सिरा मिलता. पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रख कर जांच में जुटी रही.

लुकआउट नोटिस किया जारी अधिकारी यह मान रहे थे कि सुनील ने इतनी बड़ी वारदात करने के लिए पूरी योजना जरूर बनाई होगी. ऐसा नहीं हो सकता कि अचानक ही उस रात उस ने चोरी की हो. इस नजरिए से पुलिस को यह संदेह भी हुआ कि अगर उस ने योजनाबद्ध तरीके से इतनी बड़ी वारदात की है, तो वह भारत से बाहर भी जा सकता है. इस शक की बुनियाद पर पुलिस ने सुनील का लुकआउट नोटिस जारी करवा कर एयरपोर्ट और बंदरगाहों को सतर्क कर दिया. इस के साथ ही पुलिस इस बात की जांचपड़ताल में भी जुट गई कि क्या सुनील ने कोई पासपोर्ट बनवाया है या उस के पास पहले से पासपोर्ट तो नहीं है.

2 दिन तक जांच में प्रारंभिक तौर पर यही पता चला कि सुनील के नाम का कोई पासपोर्ट नहीं है. जांचपड़ताल में जुटी पुलिस को 14 अप्रैल को पता चला कि सुनील को 2-3 दिन के दौरान पंचकूला के पास रायपुररानी में देखा गया है. पुलिस ने रायपुररानी पहुंच कर सूचनाएं जुटाईं. इस के बाद उसी दिन चंडीगढ़ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने चंडीगढ़ आते समय मनीमाजरा शास्त्रीनगर ब्रिज के पास सुनील को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली. बाद में पुलिस ने उस की निशानदेही पर 4 करोड़ 3 लाख 14 हजार रुपए बरामद कर लिए. पुलिस के लिए यह बड़ी सफलता थी. चोरी हुए 4 करोड़ 4 लाख रुपए में केवल 86 हजार रुपए ही कम थे.

पुलिस ने सुनील से पूछताछ की. पूछताछ में बैंक से इतनी बड़ी चोरी करने और उस के पकड़े जाने की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार है—

मोरनी इलाके के गांव बाबड़वाली भोज कुदाना का रहने वाला 32 साल का सुनील एक्सिस बैंक में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था. इस नौकरी से उस के शौक पूरे नहीं होते थे. घर वालों से उस के ज्यादा अच्छे संबंध नहीं थे. पत्नी से भी तलाक हो चुका था. वह शराब पीता था और महिलाओं से दोस्ती रखने के साथ दूसरे शौक भी करता था. उस के पास दूसरा कोई कामधंधा था नहीं, इसलिए पैसों के लिए हमेशा उस का हाथ तंग ही रहता था. उसे पता था कि एक्सिस बैंक की जिस चेस्ट में वह नौकरी करता है, वहां हर समय करोड़ों रुपए बक्सों में भरे रहते हैं. वह सोचता था कि इन बक्सों से 20-30 लाख रुपए निकाल ले, तो उस की लाइफ बदल जाएगी.

लेकिन बक्सों से नोट निकालना कोई आसान काम नहीं था. बैंक की चेस्ट में कड़ी सुरक्षा में नोटों के बक्से रहते थे. बक्सों पर ताले लगे होते थे. हर समय पुलिस का पहरा रहता था. चारों तरफ कैमरे लगे थे. वह यही सोचता रहता कि बक्सों से रुपए कैसे निकाले जाएं? सुरक्षा के इतने तामझाम देख कर वह अपना मन मसोस कर रह जाता था. उसे लगता था कि सारे सपने अधूरे ही रह जाएंगे. तरहतरह की बातें सोच कर भले ही वह डर जाता था, लेकिन उस ने उम्मीदें नहीं छोड़ी थीं. वह मौके की तलाश में लगा रहता था. वह रात को कई बार शराब पी कर ड्यूटी देता था. 10 अप्रैल की रात भी वह शराब पी कर बैंक में ड्यूटी करने पहुंचा. रोजाना की तरह पंजाब पुलिस के जवान भी ड्यूटी पर आ गए. इन जवानों की ड्यूटी चेस्ट के बाहर रहती थी जबकि सुनील की ड्यूटी चेस्ट के अंदर तक रहती थी.

शातिर तरीके से ले गया रकम सुनील ने उस रात बैंक की चेस्ट में आनेजाने के दौरान देखा कि एक बक्सा पीछे से कुछ टूटा हुआ था. उस में से नोटों के पैकेट दिख रहे थे. यह देख कर सुनील को अपना सपना साकार होता नजर आया. उस ने तैनात पुलिसकर्मियों की नजर बचा कर उस बक्से का टूटा हुआ हिस्सा इतना तोड़ दिया कि उस में से नोटों के पैकेट आसानी से निकल सकें. इस के बाद वह 2-3 बार बाहर तक आया और पुलिस वालों पर नजर डाली. उसे यह भरोसा हो गया कि ये पुलिस वाले उस पर किसी तरह का शक नहीं करेंगे. पूरी तरह यकीन हो जाने के बाद सुनील ने बक्से से नोटों के पैकेट निकाले और उन्हें अपने कपड़ों में छिपा कर बाहर आ गया. बाहर आ कर उस ने अपनी बाइक के पास वह नोटों के बंडल रख दिए.

करीब 20-30 मिनट के अंतराल में वह 5-6 चक्कर लगा कर 10-12 नोटों के बंडल बाहर ले आया. इस के बाद वह अपने पास रखे बैग में नोटों के बंडल रख कर बाहर ले आया. एक बंडल में 2-2 हजार के नोटों की 10 गड्डियां थीं. मतलब एक बंडल में 20 लाख रुपए थे. बैग में रख कर और कपड़ों में छिपा कर वह नोटों के 20 बंडल और 2 गड्डियां बाहर ला चुका था. ये सारे रुपए उस ने चेस्ट के बाहर छिपा दिए थे. तब तक रात के 3 बज चुके थे. अब वह जल्द से जल्द वहां से भाग जाना चाहता था. उस ने मौका देखा. चेस्ट के बाहर पंजाब पुलिस के जवान सुस्ताते हुए बैठे थे. वह उन्हें बिना कुछ बताए चेस्ट के पीछे गया और छिपाए नोटों के बंडल बैग में रख कर अपनी बाइक ले कर चल दिया.

कुछ दूर चलने के बाद उसने अपना मोबाइल तोड़ कर फेंक दिया ताकि पुलिस उस तक नहीं पहुंच सके. नोट दबा दिए जमीन में बाइक से वह हल्लोमाजरा गया. वहां जंगल में एक गड्ढा खोद कर उस ने एक प्लास्टिक की थैली में रख कर 4 करोड़ रुपए दबा दिए. बाकी के 4 लाख रुपए ले कर वह बाइक से पंचकूला के पास रायपुररानी पहुंचा. वहां एक होटल में जा कर रुक गया. होटल के कमरे में नरम बिस्तरों पर भी उसे नींद नहीं आई. वह बेचैनी से करवटें बदलता रहा. उसे 2 चिंताएं सता रही थीं. पहली अपने पकड़े जाने की और दूसरी जंगल में छिपाए 4 करोड़ रुपए की.

बेचैनी में वह होटल से निकल कर रायपुररानी के बसस्टैंड पर आ गया. उस ने पहले अपनी मनपसंद का नाश्ता किया. फिर 24 हजार रुपए का नया मोबाइल फोन खरीदा. उसे सब से ज्यादा चिंता 4 करोड़ रुपए की थी. इसलिए वह बाइक से वापस हल्लोमाजरा गया. वहां जंगल में जा कर उस ने वह जगह देखी, जहां रुपए छिपाए थे. रुपए सुरक्षित थे. वह बाइक से वापस रायपुररानी आ गया. बाजार में घूमफिर कर उस ने नए कपड़े खरीदे और नशा किया. सुनील अपनी पत्नी से तलाक ले चुका था. वह महिलाओं से दोस्ती रखता था और शादी की एक औनलाइन साइट पर ऐक्टिव रहता था. वह लगातार तलाकशुदा महिलाओं से बातचीत करता रहता था.

जांचपड़ताल के दौरान पुलिस को जब इन बातों का पता चला तो पुलिस ने उस के सोशल मीडिया अकाउंट को खंगाला. सोशल मीडिया अकाउंट से ही पुलिस को उस की लोकेशन का सुराग मिला और पता चला कि वह रायपुररानी में है. पुलिस ने उसे 14 अप्रैल, 2021 को गिरफ्तार कर उस के पास से 3 लाख 14 हजार रुपए बरामद किए. इस के बाद उस की निशानदेही पर हल्लोमाजरा के जंगल में गड्ढा खोद कर छिपाए गए 4 करोड़ रुपए बरामद कर लिए. पुलिस ने उसे अदालत से एक दिन के रिमांड पर लेने के बाद 16 अप्रैल को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया.

पूछताछ में सामने आया कि सुनील ने अकेले ही चोरी की वारदात की. पहले इस तरह के बड़े अपराध नहीं करने के कारण वारदात के बाद वह काफी डर गया. डर की वजह से वह न तो सो सका और न ही कहीं भाग सका. वह 4 करोड़ रुपयों की सुरक्षा की चिंता में चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के आसपास ही घूमता रहा. प्रोफेशनल अपराधी नहीं होने के कारण वह न तो चोरी के रुपयों को ठिकाने लगा पाया और न ही अपने बचाव के बारे में सोच सका. दरअसल, चोरी की वारदात में उसे अपनी उम्मीद से बहुत ज्यादा एक साथ 4 करोड़ रुपए मिलने पर वह इतना बेचैन हो गया कि अपने शौक भी पूरे नहीं कर सका. Social Crime Story

 

Love Crime : कांस्टबेल के इश्क में ट्रेनी एयर होस्टेस गई जान से

Love Crime : हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की रहने वाली निशा सोनी चंडीगढ़ में रह कर एयर होस्टेस का कोर्स कर रही थी, उसी दौरान पंजाब पुलिस के कांस्टेबल युवराज से उसे प्यार हो गया. युवराज का यही प्यार इतना खूंखार हो गया कि…

युवराज सिंह उस दिन घर पर आया तो उस ने एक रेस्टोरेंट से खाना पैक करा लिया और जब वह घर पर पहुंचा तो उस ने सब से पहले घर का दरवाजा भीतर से बंद कर लिया फिर तसल्ली से अपने साथ में लाई व्हिस्की की बोतल खोल ली. वह पैग पीता रहा साथ में स्नैक्स के रूप में मछली के पकोड़े खाता रहा. जब उस ने देखा कि बोतल की व्हिस्की लगभग खाली हो चुकी थी तो उस ने फिर खाना खाने का विचार भी छोड़ दिया. बाथरूम में जा कर उस ने अपने हाथपैर धोए और सीधे बिस्तर में घुस गया. उस ने रजाई अपने चारों ओर लपेट ली. उसे कब नींद आई, उसे पता ही नहीं चला.

तभी अचानक रात को लगभग एक बजे युवराज की नींद टूट गई, उस ने एक बड़ा ही अजीब सपना देखा था, जिस से वह पसीनापसीना हो गया था. उस ने सपने में देखा था कि उस का घर पूरी तरह से टूट कर विखर चुका था. उस की पत्नी रेखा उसे बुरी तरह से गालियां दे रही थी और सभी लोगों के सामने उसे जलील कर रही थी.

सपने में युवराज ने साफसाफ देखा था कि इन सब का कारण उस की प्रेमिका निशा सोनी थी, जिस ने उस की पत्नी रेखा को सारा सच बता दिया था. उस ने रेखा को यह बता दिया था कि युवराज ने उस से प्रेम संबंध बनाए. अपने को अविवाहित बता कर उस का यौनशोषण करने के साथसाथ उसे ब्लैकमेकिंग की धमकी भी दी. यह सपना देखने के बाद युवराज का व्हिस्की का सारा नशा काफूर हो चुका था. वह सोचने लगा कि यदि मेरा यह सपना सच हो गया तो बीवी तो मुझे लात मारेगी ही, जब उस के पुलिस महकमे में यह बात फैलेगी तो वह अपनी नौकरी से तो हाथ धोएगा, साथ ही साथ किसी को भी मुंह दिखाने लायक भी नहीं रहेगा.

पंजाब पुलिस के कांस्टेबल युवराज सिंह का दिमाग अब एक नई प्लानिंग बनाने लगा था. वह कई दिनों से अपनी प्रेमिका निशा सोनी को फोन लगा रहा था, मगर वह उस का फोन रिसीव ही नहीं कर रही थी. युवराज ने अब अपनी प्रेमिका निशा सोनी को अपने रास्ते से हटाने की प्लानिंग बना ली थी. बस वह केवल निशा द्वारा उस की काल रिसीव करने के इंतजार में था कि वह कब उस का फोन उठाए और फिर वह उस को कैसे अपने राह में आए कांटे की तरह निकाल फेंके.

युवराज सिंह की तैनाती उस समय मोहाली की काउंटर इंटेलीजेंस (सीआई विंग) में थी. वह रोज शाम के समय अपनी ड्यूटी खत्म करने के बाद अपने गांव मानपुर फतेहगढ़ साहिब में अपनी क्रेटा कार से चला जाया करता था और सुबह वहां से अपनी कार से ही नियत समय पर अपनी ड्यूटी पहुंच जाता था.

उस दिन सोमवार था और तारीख थी 20 जनवरी, 2025. उस दिन 7 बजे शाम को युवराज मोहाली से अपनी ड्यूटी खत्म कर के वापस अपनी कार नंबर पीबी-23जेड 0086 में बैठ कर अपने घर फतेहगढ़ साहिब की ओर जा रहा था. कुछ दूर गाड़ी चलाने के बाद उस ने अपनी प्रेमिका निशा को फोन किया तो उस ने फोन रिसीव कर लिया. वह उस से बोला, ”क्या बात है जानेमन, आजकल तो तुम ने मेरा फोन उठाना ही बंद कर दिया है? क्या गलती हो गई हम से?’’

”देखो युवराज, अब मैं तुम से न तो कभी मिलना चाहती हूं और न ही अब बात करना चाहती हूं, क्योंकि तुम बड़े धोखेबाज हो.’’ निशा ने गुस्से से कहा.

”देखो निशा, मैं तुम से बस एक बार यानी कि आखिरी बार मिलना चाहता हूं. तुम अभी कहां पर हो?’’ युवराज ने पूछा.

”मैं अपनी बहन के साथ अपने घर जोगिंदर नगर से अपने पीजी जा रही हूं. अभी मैं रास्ते में हूं. वैसे मैं अब कभी नहीं मिलना चाहती, तुम फोन रखो,’’ निशा ने साफसाफ कह दिया.

”यह बात अच्छी तरह से समझ लो निशा सोनी कि तुम्हारी वह सीडी मैं ने अभी तक संभाल कर रखी हुई है. यदि तुम मुझ से नहीं मिली तो मैं सीडी तो वायरल करूंगा ही, तुम को भी जान से मार दूंगा.’’ युवराज ने पुलिस वाली धमकी देते हुए कहा.

युवराज का यह पैंतरा तुरंत काम कर गया था. निशा तुरंत बोली, ”ठीक है युवराज, मैं तुम से जरूर मिलूंगी और वह भी आखिरी बार तुम आ जाना.’’

”ठीक है, तुम घर पहुंचो, मैं भी अभी तुम्हारे घर पर आ रहा हूं.’’ कहते हुए युवराज ने काल डिसकनेक्ट कर दी. निशा अपनी बड़ी बहन रितु सोनी के साथ शाम को लगभग साढ़े 7 बजे अपने घर खरड़ पहुंच गई. घर पहुंचते ही दोनों बहनें घर के लाए हुए सामान को व्यवस्थित करने में जुट गईं. तभी रात को लगभग साढ़े 8 बजे युवराज ने एक बार फिर निशा को फोन कर दिया. काल रिसीव करते ही निशा बोली, ”हां बोलो, अब क्या काम है? मैं ने कहा था न कि एक बार तुम से मिल लूंगी. अब इस समय क्यों फोन किया तुम ने?’’

”जानेमन, तुम्हारे ही घर के नीचे खड़ा तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं. बस, अब नीचे आ जाओ. आखिरी बार तुम से बात करनी है.’’ युवराज ने कहा.

”दीदी, मैं जरा बाहर जा रही हूं, नीचे युवराज आया है. बस आधे घंटे में वापस आ जाऊंगी.’’ निशा ने अपनी बड़ी बहन रितू से कहा और अपना मोबाइल ले कर घर से निकल गई.

निशा जब अपने फ्लैट से बाहर आई तो युवराज अपनी सफेद रंग की क्रेटा कार में उस का ही इंतजार कर रहा था. निशा गाड़ी में बैठ गई तो युवराज गाड़ी को काफी दूर रोपड़ के पास पथरेड़ी जट्टा गांव के पास तक ले आया. तब तक काफी समय भी हो चुका था. सड़क के किनारे भाखड़ा नहर भी बह रही थी. यह युवराज सिंह का अपनी ओर से पहले से ही सोचासमझा एक प्लान था. लेकिन इतनी रात की इतनी दूर युवराज गाड़ी को क्यों ले कर आया है, यह बात निशा की समझ में नहीं आ पा रही थी.

”युवराज, तुम मुझ से आखिरी बार मिलना चाहते थे. मैं ने तुम्हारी ये ख्वाहिश भी पूरी कर दी. लेकिन इतनी दूर सुनसान जगह पर मुझे ले कर आने का मकसद मैं समझ नहीं पा रही हूं.’’ निशा ने आखिरकार पूछ ही डाला.

”माई स्वीट हार्ट, अब आज का आखिरी मिलन तो हमारा ग्रैंड होना चाहिए न!’’ युवराज ने गाड़ी रोक दी और निशा को अपने गले से लगा लिया था.

”छोड़ोछोड़ो मुझे तुम. मुझे तुम से अब बहुत नफरत हो चुकी थी. तुम ने एक बार मिलने को कहा तो मैं आ गई. अब मुझे मेरा वीडियो जो तुम्हारे पास है, वह दे दो. आज के बाद मैं अब तुम्हारी सूरत भी नहीं देखना चाहती,’’ निशा ने अपने आप को युवराज की बांहों से छुड़ाते हुए नफरत भरे स्वर में कहा.

”अच्छा तो अब तुम इतनी बदतमीजी पर भी उतर आई हो. कभी तो मुझ से इतना प्यार करती थी, अब इतनी नफरत क्यों?’’ युवराज बोला.

”युवराज, अपने गिरेबान में झांक कर देखो तुम पहले, फिर मुझ पर इलजाम लगाओ. तुम पहले से ही शादीशुदा थे, तुम्हारी उम्र 33 साल है. तुम ने मुझ से खुद को कुंवारा बताया था और अपनी उम्र 27 साल बताई थी. कुछ तो शरम करो, तुम एक बच्चे के पिता भी हो. अब जल्दी से मुझे मेरी वीडियो दे दो और मुझे मेरे घर पर छोड़ दो, वरना इस का अंजाम काफी बुरा होगा.’’ निशा ने बिफरते हुए कहा.

”अच्छा, एक बात बताओ, अगर मैं तुम्हें वीडियो नहीं दूंगा तो तुम मेरा क्या बिगाड़ लोगी? जाओ, मैं नहीं देता तुम्हें वीडियो.’’ युवराज बोला.

”युवराज, अब मैं क्या करूंगी, यह तुम अच्छी तरह से सुन लो. फरवरी में तुम्हारी बीवी रेखा तुम्हारे बेटे के साथ आस्ट्रेलिया से वापस इंडिया आ रही है न! मैं उस के पास जाऊंगी और उस को तुम्हारी सारी करतूत बताऊंगी कि कैसे तुम ने मुझे फंसाया था, यह कह कर कि मैं कुंवारा हूं, 27 साल का हूं. मैं तुम से जल्द शादी कर के तुम्हें अपनी दुलहन बनाऊंगा. फिर हम दोनों सुखचैन की जिंदगी बिताएंगे. तुम्हारी एकएक करतूत तुम्हारी बीवी को बताऊंगी. तुम ने मेरी जिंदगी बरबाद की है. अब तुम्हारी जिंदगी को नरक न बना दूं तो कहना.’’ निशा ने बिफरते हुए कहा.

यह सुनते ही युवराज सिंह के तनबदन में जैसे आग लग गई थी. उस ने पहले तो कई मुक्के सीधे उस के चेहरे पर जड़ दिए. उस के बाद लातघूंसों से उस की बेदर्दी से पिटाई करने लगा. निशा अपनी जान की भीख मांगती रह गई. रोती रही, गिड़गिड़ाती रही, परंतु फिर भी युवराज का दिल नहीं पसीजा. वह उस को लगातार घूसों और लातों से मारता रहा.

कानून का रखवाला ही कर बैठा क्राइम

थोड़ी देर के बाद जब निशा ने कोई हरकत नहीं की तो युवराज ने उस की नाक के आगे हाथ लगाया तो उस की सांस बंद थी. धड़कन भी बंद हो चुकी थी. युवराज के चेहरे पर अब विजयी मुसकान थी. उस की योजना कामयाब हो चुकी थी. उस ने निशा के गहने और उस का मोबाइल फोन निकाल लिया. तब तक चारों तरफ अंधेरा घिर आया था. उस सुनसान इलाके में दूरदूर तक पङ्क्षरदा भी नजर नहीं आ रहा था. उस ने निशा की डैडबौडी को अपने दोनों हाथों से उठाया और वह भाखड़ा नहर में फेंक दी. उस के बाद उस ने अपने मोबाइल फोन से पुलिस कंट्रोल रूम के 112 नंबर पर फोन कर दिया.

दूसरी ओर पुलिस के एक हैडकांस्टेबल ने फोन उठाया तो युवराज ने उसे बताया, ”मेरा नाम युवराज सिंह है. मैं पंजाब पुलिस में कांस्टेबल हूं और मोहाली की काउंटर इंटेलीजेंस की टीम में तैनात हूं. मैं अपनी ड्यूटी खत्म करने के बाद अपने घर फतेहगढ़ साहिब अपनी कार से जा रहा था तो मैं ने एक युवती को नहर में छलांग लगाते देखा.

”मैं ने उसे रोकने और बचाने की बहुत कोशिश की, लेकिन मैं अकेला होने के कारण उसे बचा नहीं पा रहा हूं. आप तुरंत पुलिस टीम को भेज कर उस युवती की जान बचा लीजिए. मैं अभी यहां मौके पर ही हूं.’’

कुछ देर में ही पुलिस की टीम वहां पहुंच गई. पुलिस टीम ने गोताखोर की टीम को भी घटनास्थल पर बुलवा लिया.

पुलिस के बुलावे पर थोड़ी देर में भोले शंकर डाइवर्स क्लब (गोताखोरों) की टीम भी वहां पर पहुंच गई. गोताखोरों ने कड़ी मशक्कत के बाद नेहा की लाश को भाखड़ा नहर से बाहर निकाला.  कांस्टेबल अपनी योजना में कामयाब हो कर चुपचाप अपनी गाड़ी स्टार्ट कर वहां से फतेहगढ़ साहिब की ओर निकल चुका था. सिंह भगवंतपुर पुलिस स्टेशन के एसएचओ इंसपेक्टर सुनील ने लाश का पंचनामा बनाया और मृतका की डैडबौडी पटियाला के राजिंद्र अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. पुलिस ने आसपास में लाश की फोटो से मृतका की शिनाख्त कराई, लेकिन उस की शिनाख्त नहीं हो पाई.

तब पुलिस ने लाश की फोटो आसपास के जिलों के थानों में पहचान के लिए भिजवा दी. इस वीभत्स खबर को सुन कर रोपड़ जिले के सभी पुलिस अधिकारी सजग व सचेत हो उठे थे. सभी पुलिस अधिकारियों को यह मामला हत्या का दिखाई दे रहा था. युवराज सिंह और निशा सोनी की मुलाकात केवल 5 महीने पहले ही शुरू हुई थी. उस रोज युवराज सुबहसुबह अपनी ड्यूटी पर जाने के लिए अपने घर फतेहगढ़ साहिब अपनी कार से निकला था. वह जब चंडीगढ़ के पास पहुंचा, तभी उस ने देखा कि सड़क के किनारे एक सुंदर सी युवती उसे कार रोकने के लिए हाथ से इशारा कर रही थी.

युवराज कार रोकना तो नहीं चाहता था, लेकिन वह उस की सुंदरता से पहली ही नजर में प्रभावित हो गया था, इसलिए उस ने उस के इशारे पर अपनी कार रोक दी थी, ”जी कहिए मैडमजी, क्या काम है?’’ युवराज ने कार का शीशा खोलते हुए पूछा.

”जी, मुझे सेक्टर- 34 चंडीगढ़ में अर्जेंट जाना था. आज मुझे यहां पर आने में थोड़ी देर गई, जिस से मेरी बस छूट गई. वैसे वहां तक पहुंचाने के कितने रुपए लेंगे आप?’’ युवती ने पूछा.

”अच्छा तो मैं आप को कोई प्राइवेट टैक्सी वाला दिखाई दे रहा हूं क्या? कम से कम गाड़ी की नंबर प्लेट देख कर तो बात कीजिए.’’ युवराज ने गुस्सा होते हुए कहा.

”अरे सर, आप तो लगता है कि बुरा मान गए. वैसे मेरा इरादा आप का दिल दुखाना बिलकुल भी नहीं था. मैं ने तो जल्दबाजी में गाड़ी का नंबर भी नहीं देखा और आप को टैक्सीवाला समझने की भूल कर दी. अपनी इस खता के लिए मैं आप से सौरी कहती हूं.’’ युवती ने अपने दोनों हाथ जोड़ते हुए कहा.

”देखिए मैडमजी, आप जो भी हैं, मैं न तो आप का नामपता और न ही मैं आप के बारे में जानता हूं, मुझे आप का यूं हाथ जोडऩा बिलकुल भी ठीक नहीं लग रहा है. अब आप बेफिक्र हो कर मेरी गाड़ी में बैठ सकती हैं.’’ युवराज ने गाड़ी से बाहर निकलते हुए कहा.

”जी, आप की दरियादिली के लिए बहुतबहुत शुक्रिया. लेकिन सर, आजकल किसी पर भी इतनी जल्दी विश्वास कर लेना ठीक नहीं होता. आप मुझे अपना समझ कर जब जबरदस्ती कर ही रहे हैं तो आप यदि मुझे अपना परिचय बता दें तो मैं भी निश्चिंत हो कर आप की गाड़ी में बैठ सकती हूं. देखिए, आप इस बात का तो बिलकुल भी बुरा न मानिएगा.’’ युवती ने सहज भाव से कहा.

”आप की यह बात मुझे सच में बहुत अच्छी लगी है. आजकल के जमाने में ऐसा होना भी चाहिए. किसी भी अजनबी पर एकदम से विश्वास कर लेना ठीक नहीं होता. वैसे मैं आप को बता दूं कि मैं पंजाब पुलिस में नौकरी करता हूं, मेरा घर फतेहगढ़ साहिब में है और मैं आजकल मोहाली में पोस्टेड हूं. यदि आप को फिर भी मुझ पर विश्वास नहीं हो पा रहा है तो मैं अपना आइडेंटिटी कार्ड भी दिखा सकता हूं.’’ युवराज ने अपनी जेब से अपना आडेंटिटी कार्ड निकालते हुए कहा.

”अरे सर, आप ये कैसी बात कर रहे हैं. आप ने कहा और मुझे पक्का यहीन भी हो गया.’’ युवती ने कार का गेट खोलते हुए कहा.

”अरे मैडम, गाड़ी में आप और मैं 2 ही तो लोग हैं. आप आइए मेरे साथ बैठिए, बातचीत भी होती रहेगी.’’ युवराज ने गाड़ी का आगे का गेट खोलते हुए कहा. गाड़ी आगे बढ़ी तो दोनों में परिचय की शुरुआत होने लगी थी. युवराज ने कहा, ”मैं ने तो आप को अपना परिचय दे दिया, लेकिन आप ने मुझे अपने बारे में नहीं बताया. क्या मैं आप के बारे में जान सकता हूं?’’

”जी, क्यों नहीं! आप पूछें और मैं न बताऊं. मेरा नाम निशा सोनी है. मैं तहसील जोगिंदर नगर जिला मंडी हिमाचल की रहने वाली हूं. मैं ने चंडीगढ़ के एसडी कालेज से बीएससी की पढ़ाई की है और अभी मैं चंडीगढ़ सेक्टर 34 में फ्रैंकफिन इंस्टीट्यूट से एयर होस्टेस का कोर्स कर रही हूं,’’ निशा ने अपना परिचय देते हुए कहा.

”बहुत दिलचस्प बातें करती हैं आप. आप का करिअर भी बहुत उज्जवल दिखाई दे रहा है. आप के परिवार में और कौनकौन हैं? युवराज ने पूछा.

”सर, मेरे घर में हम 3 बहनें हैं. 2 बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है. मैं घर में सब से छोटी हूं. मेरी उम्र अभी 22 वर्ष है.’’ निशा ने कहा.

”निशाजी, पहले तो आप मुझे सर कहना छोड़ दीजिए, आप मुझे युवराज कह सकती हैं. शादी के बारे में आप की क्या सोच है? फेमिली वाले तो अब आप की शादी के लिए लड़का भी ढूंढ रहे होंगे.’’ युवराज ने कहा.

”जी, कोई केअर करने वाला मिल गया तो सोचेंगे. वैसे मैं ने अपने फेमिली वालों से कह दिया है कि मेरी शादी के बारे में अभी से चिंता करने की जरूरत नहीं है. पहले एयर होस्टेस बनना है, बाद में शादी के बारे में सोचेंगे. युवराजजी, आप भी बताइए अपने बारे में, आप की शादी हुई या नहीं ?’’ निशा ने पूछा.

”अरे निशाजी, अपनी तकदीर में तो अभी तक कोई अच्छी लड़की मिली ही नहीं. वैसे मेरी उम्र 27 साल हो चुकी है और फेमिली वाले और मैं बेसब्री से तलाश में लगे हैं.’’ युवराज ने कहा.

”युवराजजी, आप की बातें भी आप की तरह जिंदादिल लगती हैं,’’ निशा उस की तारीफ करते हुए बोली.

तभी युवराज ने कार में ब्रेक लगाया तो वह झटके में रुक गई, ”निशाजी, देखिए आप की मंजिल आ गई.’’ युवराज बोला.

”युवराजजी, इतनी जल्दी फ्रैंकफिन इंस्टीट्यूट आ भी गया. आप की बातें तो इतनी दिलचस्प थीं कि इतने लंबे रास्ते का पता ही नहीं चला.’’ निशा कार से उतरते हुए बोली.

”निशाजी, आप भी मुझे अच्छी लगीं, अच्छा अब कम से कम अपना मोबाइल नंबर तो दे दीजिए.’’ युवराज ने कहा तो निशा ने युवराज का फोन नंबर पूछ कर उसे मिसकाल कर दी. दोनों ने एकदूसरे का मोबाइल नंबर सेव कर लिया. उस के बाद युवराज वहां से अपनी ड्यूटी पर चला गया.

उस समय युवराज वहां से चला तो गया पर निशा का रूपयौवन उस पर काफी प्रभाव जमा चुका था. दूसरी तरफ निशा भी युवराज से एक ही मुलाकात में काफी प्रभावित हो चुकी थी. उस के बाद दोनों के बीच बातचीत होने लगी. वाट्सऐप पर भी वे दोनों एकदूसरे से अपने दिल की बातें साझा करने लगे.

एक दिन युवराज उसे घुमाने एक गार्डन में ले गया और उस दिन युवराज ने उस से कह ही दिया, ”निशा, मैं तुम्हें दिलोजान से चाहने लगा हूं. देखो, हमारी मुलाकात हुए पूरे 10 दिन हो चुके हैं. इन 10 रातों में मैं ने केवल करवटें बदलेते हुए अपनी रातें गुजारी हैं. इस से पहले कि मैं तुम्हारी याद में, चाह में घुटघुट कर अपनी जान दे डालूं, इस से पहले तुम मेरा प्रणय निवेदन स्वीकार कर लो न प्लीज.’’ युवराज ने घुटने के बल झुकते हुए निशा से अपने प्रेम का इजहार कर डाला.

”युवराजजी, मेरे दिल में भी उसी तरह से आप के लिए प्यार उमड़ रहा है. मेरी भी यही फीलिंग है. मैं भी अब तुम्हारे बिना अधूरी हूं.’’ यह कहते हुए निशा ने युवराज का हाथ पकड़ कर ऊपर उठाया और उस की छाती से लग गई.

प्रेमिका को किस बात से लगा शौक

उस के बाद उन दोनों का प्रेम परवान चढ़ता चला गया. कब वे दोनों एकदूसरे के जिस्म में भी समाते चल गए, उन्हें पता ही नहीं चला. इस बीच अपने और निशा के अंतरंग क्षणों के वीडियो भी युवराज ने अपने मोबाइल फोन में कैद कर लिए थे. एक बार युवराज ने 2 दिनों की छुट्टी ली और निशा के साथ एक पिकनिक स्पौट पर चला गया. वहां पर वे दोनों एक होटल में रुके, रात भर युवराज निशा के साथ मौजमस्ती करता रहा. सुबह निशा नहाधो कर तैयार हो कर कमरे में आ गई तो युवराज नहाने के लिए चल दिया. तभी युवराज का मोबाइल बजने लगा.

”आप कौन बोल रहे हैं?’’ निशा ने युवराज का फोन उठाते हुए पूछा.

”मैं आस्ट्रेलिया से रेखा बोल रही हूं. आप मोहाली थाने से बोल रही हैं न. प्लीज मेरी युवराज से बात करा दीजिए,’’ दूसरी ओर से एक युवती ने कहा.

”जी, आप युवराजजी की कोई रिश्तेदार हैं क्या?’’ निशा ने पूछा.

”अरे मैडम, आप पुलिस वाले भी वहुत जांचपड़ताल करते हैं. मैं तो हफ्ते में 2-3 बार युवराज से बात कर लेती हूं. इस बार ज्यादा व्यस्त हो गई तो 10 दिनों बाद फोन कर रही हूं. वैसे मैं युवराज सिंह की पत्नी रेखा बोल रही हूं. आप युवराज से जल्दी बात करा दीजिए.’’ रेखा ने कहा तो निशा के तो होश ही उड़ गए थे.

”जी रेखाजी, युवराजजी तो एकाएक एक विशेष ड्यूटी में यहां एकदम बाहर निकल गए. एक गोपनीय औपरेशन था. अपना फोन शायद वह जल्दबाजी में यहां पर भूल गए थे. जब फोन बजा तो मैं ने फोन उठा लिया. वैसे रेखाजी, आप के कितने बच्चे हैं?’’ निशा ने पूछा.

”जी, हमारा एक बेटा है. मैं यहां आस्ट्रेलिया में जौब करती हूं. मगर अब मैं यहां से इस्तीफा दे कर अपने बेटे के साथ हमेशा के लिए इंडिया आ रही हूं. वहां पर आ कर अपना कोई बिजनैस करूंगी. देखिए, मैं अभी अपने औफिस में हूं. मेरे पति युवराज आएं तो उन को जरूर बता दीजिएगा कि मेरा फोन आया था, वह मुझ से जरूर बात कर लें. अच्छा, अब मैं फोन रखती हूं.’’ यह कहते हुए रेखा ने काल डिसकनेक्ट कर दी.

यह सुन कर तो निशा के तनबदन में आग सी ही लग गई थी और उस ने तुरंत अपना सामान समेटा और जब युवराज बाथरूम से बाहर आया तो निशा उस पर बुरी तरह से भड़क गई थी.

”युवराज, मुझे तुम से ऐसी उम्मीद बिलकुल भी नहीं थी. तुम 33 साल के हो, तुम्हारी बीवी है, एक बेटा भी है. यह बात मुझ से छिपा कर तुम ने मुझे धोखा दिया. मेरे जज्बातों से खेला. मुझ से अब मिलने व बात करने की तुम कोशिश भी मत करना. मैं जा रही हूं.’’ यह कहते हुए निशा कमरे से निकल गई थी. उस के बाद से निशा ने युवराज से बात करना भी छोड़ दिया था.

निशा की बड़ी बहन रितु ने पुलिस में दर्ज कराई रिपोर्ट

उधर जब 20 जनवरी की रात तक निशा सोनी घर नहीं लौटी तो उस की बड़ी बहन रितु परेशान हो कर रात भर अपने पति हितेश हंस के साथ उसे तलाश करती रही, परंतु निशा का फोन स्विच्ड औफ आ रहा था. उस के बाद सुबह 21 जनवरी को रितु ने अपने पति के साथ रोपड़ जिले के सिंह भगवंतपुर थाने पहुंच कर निशा सोनी की गुमशुदगी की सूचना दर्ज करा दी. निशा ने पुलिस को बताया कि वह अपने बौयफ्रेंड युवराज सिंह के साथ उस की कार में बैठ कर गई थी. उस के बाद वह नहीं लौटी. अब भी निशा का फोन स्विच्ड औफ आ रहा था. थाना सिंह भगवंतपुर पुलिस ने 20 जनवरी, 2025 को एक अज्ञात युवती की लाश भाखड़ा नहर से बरामद की थी.

उन्होंने उस लाश के फोटो रितु को दिखाए तो फोटो देखते ही वह चीख पड़ी और रोते हुए बोली, ”सर, यह लाश तो मेरी बहन निशा की है. उस की यह हालत किस ने की है?’’

लाश की शिनाख्त हो जाने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली. फिर अगले दिन 22 जनवरी, 2025 की सुबह निशा सोनी के फेमिली वालों ने पटियाला के राजिंद्रा अस्पताल में जा कर शव की पहचान कर ली.

ऐसे पकड़ा गया कांस्टेबल युवराज सिंह

सिंह भगवंतपुर पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद मृतका निशा सोनी का शव उस के फेमिली वालों को सौंप दिया. फेमिली वालों ने जोगिंदर नगर श्मशान घाट में निशा का अंतिम संस्कार कर दिया. अब पुलिस का अगला काम हत्यारे तक पहुंचना था. पुलिस ने जब 20 जनवरी, 2025 की सीसीटीवी फुटेज खंगाली तो उस में निशा युवराज के साथ जाते हुए दिखाई दी. पुलिस ने तेजी से काररवाई करते हुए आरोपी युवराज सिंह को 22 फरवरी, 2025 को बीएनएस की धारा 103बी के तहत गिरफ्तार कर सख्ती से पूछताछ की तो उस ने निशा सोनी की हत्या की पूरी कहानी बयां कर दी.

मृतका निशा सोनी के पिता हंसराज सोनी ने मीडिया और पुलिस को बताया कि उन की बेटी निशा के दांत भी अंदर की ओर पिचके हुए थे. आरोपी कांस्टेबल युवराज सिंह ने उस के सभी गहने और मोबाइल फोन भी निकाल लिया था और मेरी बेटी की नृशंस हत्या करने के बाद उसे नहर में फेंक दिया. हंसराज सोनी ने हत्या आरोपी कांस्टेबल युवराज सिंह के खिलाफ फांसी की मांग की.

उस के बाद मृतका के परिजनों ने जोगिंदर नगर पहुंच कर प्रदेश सरकार और एसपी (मंडी), हिमाचल प्रदेश से बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग भी उठाई तो यह मर्डर केस सिंह भगवंतपुर थाने से हिमाचल प्रदेश के जोगिंदरनगर थाने में ट्रांसफर कर दिया गया.  22 वर्षीय ट्रेनी एयर होस्टेस निशा सोनी की हत्या की यह घटना अत्यंत दुखद व समाज को झकझोरने वाली है. इस घटना ने समाज में महिलाओं की सुरक्षा और रिश्तों में विश्वास पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

यह मामला सिर्फ एक इंसान की जान के नुकसान का नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि हमारे समाज में अब किस प्रकार की मानसिकता पनपती जा रही है, जो प्रेम और विश्वास का गला घोंट कर हिंसा और अपराध को जन्म देती जा रही है. इस मामले में सब से चिंताजनक बात यह है कि आरोपी एक पुलिसकर्मी था, जिस का फर्ज लोगों और समाज की सुरक्षा करना है. लेकिन उसी ने अपने पद व वरदी का गलत इस्तेमाल करते हुए इस जघन्य वारदात को अंजाम दे डाला. इस से यह भी स्पष्ट होता है कि महिलाओं के प्रति हिंसा सिर्फ किसी विशेष वर्ग या समुदाय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक समस्या बनती जा रही है.

यह घटना केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में महिलाओं की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था और पुलिस की जिम्मेदारी पर बड़े सवाल पैदा करती है. निशा सोनी एक महत्त्वाकांक्षी युवती थी. मात्र 10 दिनों के बाद ही एयर होस्टेस बनने का सपना देख रही थी. उस मासूम युवती की इस तरह से संदिग्ध परिस्थितियों में मौत न केवल उस के परिवार को गहरे दुख में डालती है, बल्कि हमारे पूरे समाज को भी आत्ममंथन के लिए मजबूर करती है.

(कथा में रेखा परिवर्तित नाम है)

 

 

इंस्पेक्टर ने Bitcoin डीलर को छोड़ने के लिए मांगे 32 करोड़

जापान के सतोषी नाकामोतो सन 2010 में जब ब्लौकचेन पर आधारित वर्चुअल करेंसी बिटकौइन ले कर आए थे, तब इस की कीमत मात्र .003 डालर (करीब 18 पैसे) थी. लेकिन आज इस की कीमत लगभग 5 लाख रुपए है. तेजी से बढ़ती कीमत की वजह से एक आईपीएस अधिकारी भी ऐसा जुर्म कर बैठे कि…

वर्चुअल करेंसी की बात करें तो आजकल देश में सब से ज्यादा चर्चा बिटकौइन की होती है. केवल भारत में ही नहीं, बल्कि इस के चरचे दुनिया के कई देशों में हैं. बिटकौइन न तो कोई सोने का सिक्का है और न कागजी रकम. यह डिजिटल करेंसी है. आप इसे आभासी मुद्रा भी कह सकते हैं, जो क्रिप्टो करेंसी की श्रेणी में आती है. बिटकौइन की खरीदफरोख्त औनलाइन होती है. हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक ने इसी साल 6 अप्रैल को एक अधिसूचना जारी कर के क्रिप्टो करेंसी के लेनदेन पर रोक लगा दी थी, लेकिन अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है.

देश की सर्वोच्च अदालत में दायर कुछ याचिकाओं में बिटकौइन जैसी क्रिप्टो करेंसी के रेगुलेशन के लिए दिशानिर्देश बनाने का आग्रह किया गया है, जबकि कुछ याचिकाओं में सरकार से इस क्रिप्टो करेंसी की खरीदफरोख्त को रोकने का आग्रह किया गया है. इसी साल 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली जस्टिस ए.एम. खानविलकर और जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की बैंच ने इन याचिकाओं की सुनवाई की. इस में रिजर्व बैंक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि बिटकौइन जैसी क्रिप्टो करेंसी में सौदों की अनुमति देने से गैरकानूनी लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा. यह सरकारी नियंत्रण से बाहर की डिजिटल मुद्रा है.

खैर, सुप्रीम कोर्ट का फैसला जब आएगा, तब आएगा. अभी तो हाल यह है कि लोगों को बिटकौइन की डिजिटल मुद्रा में सोने नहीं हीरे जैसी चमक नजर आ रही है. देश भर में रोजाना अरबों रुपए के बिटकौइन की औनलाइन खरीदफरोख्त हो रही है. बिटकौइन के चक्कर में तमाम लोग ठगे भी जा रहे हैं. कई नामीगिरामी हस्तियां बिटकौइन के मामले में फंस चुकी हैं. ऐसे मामलों में फिल्म अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा भी शामिल हैं. बिटकौइन के चक्कर में खाकी वरदी भी दागदार हुई है. गुजरात की राजधानी अहमदाबाद के बहुचर्चित बिटकौइन मामले में एक एसपी सहित करीब 10 पुलिसकर्मी गिरफ्तार हुए हैं. एक पूर्व विधायक को तो अदालत ने भगोड़ा घोषित कर रखा है. कई बड़े अफसर और नेता भी इस मामले में फंसे हुए हैं.

पिछले दिनों राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक महिला थानेदार ने बिटकौइन केस में फंसाने की धमकी दे कर एक औनलाइन फर्म के संचालकों से 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी. यह महिला थानेदार रिश्वत की पहली किस्त में 5 लाख रुपए लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार हुई, साथ में उस का वकील पति भी पकड़ा गया था. उस दिन तारीख थी 7 अगस्त. जयपुर के मानसरोवर इलाके के थाना शिप्रापथ में महिला एसआई बबीता चौधरी किसी मुकदमे से संबंधित फाइल देख रही थीं. इसी बीच उन के मोबाइल पर कोई काल आई तो वह अपनी कुरसी से उठ कर थाने के बरामदे में टहलते हुए बात करने लगीं.

बबीता जब मोबाइल पर बात कर रही थीं, तभी उन्होंने एक अच्छी कदकाठी के युवक को थाने के अंदर आते देखा. उस युवक के पास एक बैग था. बबीता युवक को जानती थीं. उस का नाम मोहित (बदला हुआ) था. मोहित ने बबीता को देख लिया था. वह बबीता से ही मिलने आया था. बबीता ने उसे 7 अगस्त को बुलाया था. मोहित को देख कर बबीता ने मोबाइल पर हो रही बात जल्दी खत्म की और मोहित को इशारा कर के अपने पास बुलाया. मोहित ने बबीता के पास पहुंच कर कहा, ‘‘मैडम, मैं अपने वादे का पक्का हूं. आप से जो वादा किया था, उसे पूरा करने आया हूं.’’

‘‘ठीक है.’’ एसआई बबीता ने एक तिरछी नजर डाल कर मोहित के बैग का जायजा लिया. फिर उस से कहा, ‘‘चलो सामने रेस्टोरेंट में बैठ कर चाय पीते हैं, वहीं पर गपशप कर लेंगे.’’

‘‘मैडम, काफी गरमी है, चाय पीने की इच्छा नहीं है, फिर भी आप कह रही हैं तो चाय पी लेते हैं.’’ मोहित ने कहा.

‘‘मोहित, ज्यादा भाव मत खाओ, पुलिस वाले दूसरों से चाय पीते हैं, मैं तो तुम्हें अपने पैसों से चाय पिला रही हूं’’ बबीता ने मोहित को आंखें दिखाईं.

‘‘नहीं मैडम, मैं तो मजाक कर रहा था.’’ मोहित ने एसआई बबीता के नाराजगी वाले हावभाव देख कर कहा.

इसी के साथ बबीता थाने से निकल कर सामने वाले रेस्टोरेंट में चली गईं. मोहित भी उन के पीछेपीछे था. रेस्टोरेंट में उस समय ज्यादा भीड़भाड़ नहीं थी. बबीता ने कोने की टेबल की तरफ इशारा करते हुए मोहित से कहा, ‘‘चलो उस टेबल पर बैठते हैं.’’

टेबल के एक तरफ कुरसी पर बबीता बैठ गई और सामने वाली कुरसी पर मोहित. उन के बैठते ही वेटर टेबल पर आ गया. उस ने 2 गिलास ठंडा पानी रख कर और्डर पूछा. बबीता ने वेटर से 2 कप चाय और कुछ नमकीन लाने को कहा.

वेटर चला गया तो बबीता ने मोहित से पूछा, ‘‘तुम कौन सा वादा पूरा करने की बात कह रहे थे?’’

‘‘मैडम, आप ने जो कहा था, मैं ले आया हूं.’’ मोहित बोला.

बबीता ने पूछा, ‘‘कितने हैं?’’

मोहित ने अपने हाथ की पांचों अंगुलियां दिखाते हुए कहा, ‘‘इस बैग में हैं.’’

‘‘ठीक है.’’ कहते हुए बबीता ने टेबल पर रखा अपना मोबाइल उठा कर एक नंबर मिलाया. 2-3 घंटियां बजने पर दूसरी ओर काल रिसीव कर ली गई. काल रिसीव होने पर बबीता ने कहा, ‘‘डियर, मैं थाने के सामने रेस्टोरेंट पर बैठी हूं, छोटा सा काम है, इधर आ जाओ.’’

‘‘हां, मैं अभी आता हूं.’’ दूसरी ओर से आवाज आई. इतनी देर में वेटर ने चाय के कप ला कर टेबल पर रख दिए. एक प्लेट में नमकीन भी थी. बबीता ने मोहित से कहा, ‘‘लो चाय पीयो.’’

दोनों चाय पीने लगे. इस बीच, बबीता के मोबाइल पर फिर काल आ गई तो वह बात करने लगीं. करीब 10 मिनट बाद जब बात खत्म हुई तब तक बबीता की चाय ठंडी हो चुकी थी. मोहित ने कहा भी कि मैडम आप के लिए दूसरी चाय मंगा लेते हैं. इस पर बबीता बोलीं, ‘‘नहीं रहने दो, आज कई चाय पी चुकी हूं.’’ मोहित चुप हो गया. बबीता प्लेट में रखी नमकीन खाने लगीं. नमकीन खातेखाते बबीता ने मोहित से उस की फर्म और काम धंधे के बारे में पूछा. मोहित ने नपेतुले शब्दों में बबीता की बातों का जवाब दे दिया.

जब दोनों बात कर रहे थे तभी एक आदमी रेस्टोरेंट में आया. उस ने रेस्टोरेंट में इधरउधर झांक कर देखा तो बबीता कोने की टेबल पर नजर आ गईं. उस आदमी को देख कर बबीता ने आवाज दी, ‘‘अमर यहां आ जाओ.’’

वह आदमी बबीता की टेबल पर चला गया. मोहित उसे पहले से जानता था. वह एसआई बबीता का पति अमरदीप चौधरी था. अमरदीप ने वहां खाली पड़ी एक कुरसी पर बैठते हुए मोहित से हाथ मिलाया. फिर बिना किसी औपचारिकता के बबीता से कहा, ‘‘कैसे बुलाया?’’

‘‘अमर, ये मोहित जी का बैग है, इसे ले जाओ. इस में कुछ खास सामान है, संभाल कर रखना.’’ बबीता के कहते ही मोहित ने अमर को बैग दे दिया. अमरदीप बैग ले कर रेस्टोरेंट से बाहर निकला. उस के साथ बबीता और मोहित भी बाहर आ गए. ये लोग जैसे ही रेस्टोरेंट से बाहर आए वैसे ही 4-5 लोगों ने बबीता और अमरदीप को घेर कर पकड़ लिया. बबीता उस समय वरदी में थी. बबीता ने उन लोगों को हड़काया तो उन्होंने कहा कि वे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी से हैं.

एसीबी का नाम सुनते ही बबीता और अमरदीप के चेहरे काले पड़ गए. एसीबी अधिकारियों ने उन की तलाशी ली. तलाशी में 5 लाख रुपए मिले. यह रकम बबीता ने मोहित से रिश्वत के रूप में ली थी. एसीबी अधिकारियों ने 5 लाख रुपए जब्त कर के आवश्यक काररवाई की. इस के बाद बबीता व अमरदीप के घर की तलाशी ली गई. इन लोगों का घर जयपुर के वैशाली नगर में गांधीपथ स्थित गुरु जंभेश्वर नगर में था, तलाशी की काररवाई दूसरे दिन 8 अगस्त को भी चली.

इन के मकान की तलाशी में 5 लाख 81 हजार रुपए नकद मिले. इस के अलावा 19 मकान, दुकान और जमीनों के दस्तावेज भी मिले. इन में 7 मकान, दुकान और जमीनें बबीता और उस के पति के नाम थीं और बाकी दस्तावेज दूसरे लोगों के नाम पर थे. बबीता और उस के पति के नाम की अचल संपत्तियां जयपुर के कालबाड़ रोड, सीकर रोड, निवारू रोड, जगतपुरा, टोंक व देवली आदि में थीं. इतनी अचल संपत्ति होने के बावजूद बबीता अपने परिवार के साथ किराए के मकान में रहती थीं. बबीता के घर से एक लक्जरी गाड़ी, करीब 100 ग्राम सोने के जेवर और ज्वैलरी शोरूम के बिल मिले. इन बिलों के हिसाब से करीब 10 लाख रुपए की ज्वैलरी खरीदी गई थी.

एसीबी अधिकारियों के अनुसार, परिवादी मोहित (बदला हुआ नाम) की ओर से की गई शिकायत और आरोपियों से पूछताछ में जो कहानी उभर कर सामने आई. वह इस तरह थी. दो युवक जयपुर के महारानी फार्म में स्थित किराए की बिल्डिंग में साइबर नेटिक्स सौल्यूशन नाम की फर्म चलाते थे. उसी औफिस में संचालकों की एक अन्य फर्म भी थी. इस फर्म का काम औनलाइन मार्केटिंग और विज्ञापन डिजाइनिंग का था. फर्म के मैनेजर मोहित ने एसीबी में शिकायत की थी कि उन की फर्म में काम करने वाले सोनू नाम के एक एजेंट ने करीब 3 घंटे फर्म के फोन की रिकौडिंग की थी. इस के अलावा लेनदेन का डेटा भी चुरा लिया था.

सोनू ने यह रिकौर्डिंग और लेनदेन का डेटा एक पेन ड्राइव में एसआई बबीता के पति अमरदीप चौधरी को दे दिया था. अमरदीप वकील भी है. रिकौर्डिंग में अमेरिका सहित कई अन्य देशों से आने वाली काल और बिटकौइन की खरीदफरोख्त का जिक्र था. आरोप है कि अमरदीप इस रिकौर्डिंग के नाम पर बिटकौइन की खरीदफरोख्त करने के मामले में बबीता के मार्फत फर्म के संचालकों को आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करने की धमकी दे रहा था. अमरदीप करीब 10 दिन पहले फर्म संचालकों से मिला भी था.

अमरदीप और बबीता ने फर्म संचालकों को मुकदमा दर्ज करने से बचाने के लिए 50 लाख रुपए मांगे. दबाव बनाने के लिए एसआई बबीता ने 3 दिन में 15 से ज्यादा बार फोन कर के फर्म संचालकों को थाने बुलाया था. फर्म संचालकों ने पुलिस के पचड़े से बचने के लिए बातचीत शुरू की. उन्होंने नया बिजनेस होने और 50 लाख रुपए देने में असमर्थता जताई तो बबीता ने 45 लाख रुपए किस्तों में देने की बात कही. इस पर फर्म संचालक राजी हो गए. इसी के तहत पहली किस्त के रूप में 5 लाख रुपए 7 अगस्त को देने की बात तय हुई थी.

इस मामले की शिकायत मिलने पर एसीबी के आईजी सचिन मित्तल ने एडिशनल एसपी नरोत्तम लाल वर्मा को जांच सौंपी. एसीबी अधिकारियों ने शिकायत की पुष्टि कराई और पुष्टि होने पर बबीता और अमर को रंगे हाथों पकड़ने के लिए जाल बिछाया. इसी योजना के तहत फर्म के मैनेजर मोहित को एसआई बबीता को 5 लाख रुपए देने के लिए भेजा गया था. आखिर बबीता और उन के पति अमरदीप एसीबी अधिकारियों की पकड़ में आ गए. एसीबी की जांच में यह बात भी सामने आ गई कि फर्म के संचालकों ने डेढ़ साल में बिटकौइन के नाम पर करोड़ों रुपए कमाए थे.

इस फर्म के मैनेजर और संचालक दिल्ली और चंडीगढ़ के रहने वाले थे. इन लोगों ने डेढ़ साल पहले जयपुर आ कर महारानी फार्म के पास डेढ़ लाख रुपए महीना किराए पर बिल्डिंग ले कर साइबरनेटिक्स वेब सौल्यूशन नाम की फर्म शुरू की थी. इस फर्म का दूसरा औफिस जयपुर में शिप्रापथ विजयपथ तिराहे के पास था. फर्म संचालकों ने अपने औफिस में कई युवकयुवतियों को नौकरी पर रखा था. ज्यादातर काम रात को होता था. एसीबी अब इस बात की भी जांच कर रही है कि बबीता और अमरदीप के पास ऐसे कौन से सबूत थे जिन के आधार पर वे फर्म संचालकों को ब्लैकमेल कर रहे थे. एसीबी को जांच में कुछ तथ्य मिले तो इस फर्म के संचालक भी गिरफ्तार हो सकते हैं.

बबीता चौधरी 2010 बैच की पुलिस सबइंपेक्टर थीं. नौकरी में आने के बाद 2 साल के प्रोवेशन पीरियड के बाद उन्हें जयपुर के प्रतापनगर थाने में नियुक्ति मिली थी. उस दौरान बबीता पर रेप का एक केस दर्ज नहीं करने और आरोपियों का पक्ष लेने के आरोप लगे थे. तत्कालीन डीसीपी (ईस्ट) कुंवर राष्ट्रदीप ने इस मामले में बबीता को सस्पेंड कर के एसीपी से जांच कराई थी. जांच में बबीता को दोषमुक्त कर दिया गया. इस पर उन्हें वापस प्रतापनगर थाने में लगा दिया था. बाद में उन्हें पुलिस लाइन भेज दिया गया. करीब 5 महीने पहले ही बबीता को जयपुर कमिशनरेट पुलिस लाइन से शिप्रापथ थाने में लगाया गया था. एसीबी की काररवाई के बाद बबीता को फिर सस्पेंड कर दिया गया.

मजेदार बात यह है कि बबीता के मोबाइल पर उन के पति एडवोेकेट अमरदीप चौधरी का मोबाइल नंबर ट्रूकौलर पर एसीपी क्राइम ब्रांच के नाम से प्रदर्शित होता था. एसीबी ने 8 अगस्त को बबीता और उन के पति अमरदीप को अदालत में पेश कर के न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था. सूरत का रहने वाला बिल्डर और कारोबारी शैलेश भट्ट और उस का पार्टनर किरीट पालडिया डिजिटल करेंसी बिटकौइन की डील करते थे. शैलेश भट्ट नवंबर 2016 में नोटबंदी के दौरान सूरत के व्यापारी किरीट पालडि़या के संपर्क में आया था. किरीट ने ही भट्ट को बिटकौइन में पैसा निवेश करने की सलाह दी. बाद में भट्ट और किरीट पार्टनरशिप में बिटकौइन की डील करने लगे थे. कुछ समय बाद दोनों की पार्टनरशिप टूट गई थी.

इसी साल फरवरी के महीने में पुलिस इंसपेक्टर अनंत पटेल ने अपनी पुलिस टीम के साथ अहमदाबाद और गांधीनगर के बीच एक पैट्रोल पंप से भट्ट और उस के 2 साथियों को उठा कर बंधक बना लिया था. इन लोगों को एक फार्महाउस में रखा गया. इस दौरान पुलिस इंसपेक्टर अनंत पटेल ने एनकाउंटर की धमकी दे कर शैलेश के वौलेट से 200 बिटकौइन अपने मोबाइल के जरिए किरीट पालडि़या के खाते में ट्रांसफर करवा लिए. इन बिटकौइन की कीमत करीब 12 करोड़ रुपए बताई गई. इस के बाद पुलिस इंसपेक्टर ने इन लोगों को छोड़ने के एवज में भट्ट से 32 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी.

बिल्डर भट्ट ने फिरौती की रकम पहुंचाने का आश्वासन दिया. इस के बाद पुलिस ने भट्ट और उस के साथियों को छोड़ दिया. बाद में बिल्डर शैलेश भट्ट ने इस मामले की शिकायत गुजरात सरकार और सीआईडी क्राइम ब्रांच में कर दी. भट्ट ने आरोप लगाया कि इस मामले में उस के पुराने पार्टनर किरीट पालडि़या और गुजरात के पूर्व विधायक नलिन कोटडि़या के अलावा स्टेट सीबीआई के एक अधिकारी का भी हाथ है. करीब एक महीने की जांचपड़ताल के बाद गुजरात के अमरेली जिले के पुलिस इंसपेक्टर अनंत पटेल सहित 8 पुलिसकर्मियों और सूरत के एक वकील और जमीनों के दलाल केतन पटेल के खिलाफ  केस दर्ज किया गया. बाद में इस केस में अमरेली के एसपी जगदीश पटेल और अन्य लोगों के नाम भी जोडे़ गए.

गुजरात पुलिस की सीआईडी क्राइम ब्रांच ने इस मामले में सब से पहले 8 अप्रैल को अमरेली जिला पुलिस की लोकल क्राइम ब्रांच के हैडकांस्टेबल बाबूभाई डेर और कांस्टेबल विजय वाढेर व सूरत के वकील केतन पटेल को गिरफ्तार किया. बाद में 19 अप्रैल को पुलिस इंसपेक्टर अनंत पटेल को भी गिरफ्तार कर लिया गया. इस मामले में तब महत्त्वपूर्ण मोड़ आ गया जब गिरफ्तार पुलिस इंसपेक्टर अनंत पटेल ने यह खुलासा किया कि बिटकौइन हड़पने का षडयंत्र एसपी जगदीश पटेल के निर्देश पर रचा गया था. इस खुलासे के बाद सीआईडी क्राइम ब्रांच ने एसपी को पूछताछ के लिए बुलाया, लेकिन वह नहीं आए.

इस के बाद सीआईडी क्राइम ब्रांच की टीम अमरेली में उन के आवास पहुंची और पूछताछ के लिए मुख्यालय ले गई. करीब 18 घंटे लंबी पूछताछ के बाद अमरेली के एसपी जगदीश पटेल को 23 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया गया. इस दौरान क्राइम ब्रांच के मुखिया आशीष भाटिया ने दावा किया कि इस मामले का मुख्य सूत्रधार एसपी जगदीश पटेल ही था. जांच एजेंसी के पास इस के सबूत हैं. गुजरात के बहुचर्चित सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले के बाद पहली बार किसी आईपीएस औफिसर की गिरफ्तारी हुई थी. जांच में सामने आया कि एसपी जगदीश पटेल ने शैलेश भट्ट के पास बिटकौइन होने की जानकारी मिलने पर इंसपेक्टर अनंत पटेल को उसे उठाने को कहा था. एसपी के निर्देश पर इंसपेक्टर अनंत अमरेली से गांधीनगर आया था.

बिटकौइन और पैसों के लेनदेन के मामले में एसपी ने वकील केतन पटेल और अनंत पटेल से मोबाइल पर बातचीत की थी. पैसे लेने के लिए अमरेली के 6 पुलिसकर्मी मुंबई गए थे. वहां से ये लोग इनोवा कार से भरूच गए थे. पुलिसकर्मियों को भरूच से लाने के लिए एसपी जगदीश पटेल के आदेश पर अमरेली पुलिस की एक गाड़ी भरूच भेजी गई थी. सीआईडी क्राइम ब्रांच ने इस मामले में अप्रैल में ही पूर्व विधायक नलिन कोटडि़या के भतीजे संजय कोटडि़या से भी पूछताछ की थी. इस से पूर्व विधायक कोटडि़या पर दबाव बढ़ने लगा तो कोटडि़या ने दावा किया कि शैलेश भट्ट ने सूरत के पीयूष सावलिया और धवल मवाणी का अपहरण कर के 240 करोड़ रुपए के 2300 बिटकौइन हड़प लिए थे.

बाद में पीयूष सावलिया ने सीआईडी क्राइम ब्रांच व सरकार को हलफनामा भेज कर पूर्व विधायक के दावे को झुठला दिया. इस से पूर्व विधायक नलिन कोटडि़या को करारा झटका लगा. इस बीच, मई के पहले सप्ताह में सीआईडी क्राइम ब्रांच ने किरीट पालडि़या को भी गिरफ्तार कर लिया. इस के अलावा पूर्व विधायक कोटडि़या के करीबी समझे जाने वाले राजकोट निवासी ननकूभाई आहिर को गिरफ्तार करने पर 25 लाख रुपए की नकदी बरामद हुई. यह रकम किरीट पालडि़या ने पूर्व विधायक को दी जाने वाली 66 लाख रुपए की राशि के हिस्से के तौर पर ननकूभाई के पास भेजी थी. मई के दूसरे सप्ताह में सीआईडी क्राइम ब्रांच ने शैलेश भट्ट को धमकी दे कर ट्रांसफर करवाए गए बिटकौइन में से 119 बिटकौइन किरीट पालडि़या के वौलेट से जब्त कर लिए.

सीआईडी क्राइम ब्रांच ने पूर्व विधायक नलिन कोटडि़या को पूछताछ के लिए बुलाने के लिए सम्मन भी भेजे, लेकिन वह हाजिर नहीं हुए. ननकूभाई से 25 लाख रुपए जब्त किए जाने के बाद कोटडि़या ने सोशल मीडिया के माध्यम से बयान दे कर खुद के एनकाउंटर की आशंका जताई. उन्होंने कहा कि बिटकौइन  मामले में सबूत मिटाने के लिए उन का एनकाउंटर किया जा सकता है. अहमदाबाद स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की विशेष अदालत ने बिटकौइन मामले में 18 जून को पूर्व विधायक नलिन कोटडि़या को भगोड़ा घोषित कर दिया. इसी मामले में 27 जुलाई को अमरेली के 7 अन्य पुलिसकर्मियों को भी गिरफ्तार किया गया.

कांग्रेस ने नोटबंदी के बाद गुजरात में बिटकौइन के जरिए 5 हजार करोड़ से ज्यादा के घोटाले और इस में भाजपा के नेताओं के शामिल होने का आरोप लगाते हुए इस की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की. इस पूरे मामले की जांच के दौरान शैलेश भट्ट के भी बडे़ पैमाने पर बिटकौइन धोखाधड़ी में शामिल होने की बातें सामने आईं. इसलिए जांच एजेंसी भट्ट के खिलाफ भी शिकंजा कस सकती है. गिरफ्तार वकील केतन पटेल के छोटे भाई जतिन पटेल इस मामले में फरार हैं. अदालत ने उस की गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया है.

बहरहाल, सीआईडी इस मामले की करीब 6 महीने से जांच कर रही है. अब तक एक दरजन से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. 3 मुकदमे दर्ज किए गए हैं. इन में एक मुकदमे में शैलेश भट्ट भी आरोपी है. आईपीएस औफिसर, पूर्व विधायक और बड़े कारोबारियों के अलावा पुलिसकर्मियों के लिप्त होने से यह मामला अब हाईप्रोफाइल बन चुका है. इस से बिटकौइन की चकाचौंध कम होने के बजाए बढ़ी है. भारत में बिटकौइन की चमक अभी कायम रहेगी या घटेगी, यह सुप्रीम कोर्ट में 11 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में तय हो सकता है.

 

एकतरफा प्रेमी ने प्रेमिका के पति को छत से फेंका

सतनाम सिंह प्रतिभा से एकतरफा प्यार करता था. उस का यह सिरफिरापन प्रतिभा की शादी के बाद भी खत्म नहीं हुआ. जिस के चलते प्रतिभा के पति उदयवीर की हत्या हो गई और सतनाम को उम्रकैद. बेचारी प्रतिभा…   

त्ल का मुकदमा चल रहा हो तो उस का फैसला जानने के लिए काफी लोग उत्सुक रहते हैं. 12 मार्च, 2018 को चंडीगढ़ के सेशन जज बलबीर सिंह की अदालत के भीतरबाहर तमाम लोग एकत्र थे. वजह यह थी कि उन की अदालत में चल रहा कत्ल का एक मुकदमा अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंचा था. लोग इस केस का फैसला सुनने को बेकरार थे. इस केस की शुरुआत कुछ यूं हुई थी. उस दिन किसी केस की छानबीन के सिलसिले में चंडीगढ़ के थाना सेक्टर-31 की महिला एसएचओ जसविंदर कौर अपने औफिस में मौजूद थीं. रात में ही करीब 45 वर्षीय शख्स ने कर उन से कहा, ‘‘मैडम, मेरा नाम दुर्गपाल है और मैं रामदरबार इलाके के फेज-2 के मकान नंबर 2133 में रहता हूं.’’

‘‘जी बताइए, थाने में कैसे आना हुआ, वह भी इस वक्त?’’ इंसपेक्टर जसविंदर कौर ने उस व्यक्ति को गौर से देखते हुए पूछा.

‘‘ऐसा है मैडमजी,’’ खुद को दुर्गपाल कहने वाले शख्स ने बताना शुरू किया, ‘‘हम 4 भाई हैं और मैं सब से बड़ा हूं. मेरी मां शारदा देवी मेरे से छोटे भाई राजबीर के साथ ग्राउंड फ्लोर पर रहती हैं. फर्स्ट फ्लोर पर मेरा सब से छोटा भाई विजय रहता है. मैं और तीसरे नंबर का भाई उदयवीर अपनीअपनी फैमिली के साथ टौप फ्लोर पर रहते हैं.’’

‘‘ठीक है, आप समस्या बताइए.’’

‘‘मैडम, हमारे घर के टौप फ्लोर पर 4 कमरे हैं. वहां सीढि़यों की तरफ वाले 2 कमरे मेरे पास हैं और उस के आगे वाले 2 कमरे मेरे भाई उदयवीर के पास.’’

‘‘आप के मकान और कमरों की बात तो हो गई, वह बताइए जिस के लिए आप को थाने आना पड़ा?’’ थानाप्रभारी जसविंदर कौर ने अपना लहजा थोड़ा बदला. लेकिन उस शख्स ने जैसे कुछ सुना ही नहीं.

उस ने अपनी बात बेझिझक जारी रखी, ‘‘मेरा भाई उदयबीर अपनी पत्नी प्रतिभा के साथ रहता था. दोनों की शादी को अभी कुल डेढ़ साल हुआ है. 10 जून, 2017 को मेरे पिता जंडियाल सिंह की मौत हो गई थी. कल मैं और मेरे तीनों भाई कुछ रिश्तेदारों के साथ हरिद्वार में पिताजी की अस्थियों का विसर्जन कर के रात करीब साढ़े 8 बजे घर लौटे थे.’’

‘‘आगे बताइए,’’ अब इंसपेक्टर जसविंदर कौर ने दुर्गपाल की बात में रुचि लेते हुए कहा.

‘‘हम लोग थकेहारे थे. घर कर खाना खाने के बाद सो गए थे. मैं घर के टौप फ्लोर पर बने कमरों के आगे गैलरी में सो रहा था. रात के एक बजे जब मैं गहरी नींद में था, तभी शोरशराबा सुन कर अचानक मेरी आंखें खुल…’’ दुर्गपाल की बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि इंसपेक्टर जसविंदर कौर ने हाथ के इशारे से उसे रोक दिया. दरअसल, थानाप्रभारी के लिए कंट्रोलरूम से फोन आया था. इंसपेक्टर जसविंदर ने काल रिसीव की तो दूसरी तरफ से पीसीआर कांस्टेबल ओमप्रकाश था.

उस ने कहना शुरू किया, ‘‘मैडम, रामदरबार इलाके से किसी के छत से गिराने की काल आई है. मौके पर पहुंच कर पता चला कि छत से गिरने वाले को अस्पताल ले जाया चुका था, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. उसे गिराने वाला फरार है. शुरुआती छानबीन में ही मामला कत्ल का लग रहा है, जिस के पीछे की वजह इश्क हो सकती है. केस आप के ही इलाके का है.’’

‘‘मरने वाले और मारने वाले के नाम वगैरह के बारे में पता चला?’’ इंसपेक्टर जसविंदर ने पूछा.

‘‘जी मैडम, सब पता कर लिया है. मरने वाले का नाम उदयवीर है और उसे छत से गिरा कर मारा है उस की पत्नी के कथित प्रेमी सतनाम ने.’’

‘‘ओके, तुम लोग अभी वहीं रुको, मैं पहुंचती हूं वहां.’’ कहते हुए इंसपेक्टर जसविंदर ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया. उन्होंने सामने बैठे दुर्गपाल की ओर देख कर पूछा, ‘‘आप के भाई उदयवीर को सतनाम नामक शख्स ने छत से नीचे गिरा कर मार दिया और आप…’’

‘‘जी मैडम.’’ इंसपेक्टर जसविंदर की बात पूरी होने से पहले ही दुर्गपाल ने कहा.

‘‘तुम वहां रुकने के बजाय थाने चले आए?’’

‘‘मैडम, मैं ने तुरंत 100 नंबर पर फोन कर के घटना के बारे में बता दिया था. साथ ही आटोरिक्शा से भाई को सेक्टर-32 के सरकारी अस्पताल में पहुंचा भी दिया था. फिर यह सोच कर कि इस तरीके से पुलिस पता नहीं कब पहुंचेगी, मैं अपने दूसरे भाइयों को वहीं रुके रहने को बोल कर थाने चला आया.’’

‘‘कोई बात नहीं, पुलिस ने वहां पहुंच कर अपनी काररवाई शुरू कर दी है. तुम भी चलो हमारे साथ.’’

इस के बाद इंसपेक्टर जसविंदर कौर सबइंसपेक्टर राजवीर सिंह और सिपाही प्रमोद नवीन के अलावा दुर्गपाल सिंह को साथ ले कर सरकारी गाड़ी से रामदरबार की ओर रवाना हो गईं. घटनास्थल पर काफी भीड़ एकत्र थी. पीसीआर वाले भी वहीं थे. उन से जरूरी जानकारी लेने के बाद उन्हें वहां से रुखसत कर दिया गया. साथ ही सिपाही नवीन को वहां तैनात कर के इंसपेक्टर जसविंदर कौर अन्य लोगों के साथ सेक्टर-32 के सिविल अस्पताल चली गईं. वहां उदयवीर को पहले ही मृत घोषित किया जा चुका था. थाना पुलिस ने अपनी आगे की काररवाई शुरू कर दी. एसआई राजबीर सिंह शव का पंचनामा बनाने लगे और जसविंदर कौर ने दुर्गपाल से उस की तहरीर ले कर एफआईआर दर्ज करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी.

दुर्गपाल ने अपनी तहरीर के शुरुआती हिस्से में वही सब दोहराया, जो वह पहले ही थाने में थानाप्रभारी जसविंदर कौर को बता चुका था. आगे उस ने जो कुछ बताया, वह कुछ इस तरह था

शोरशराबा सुन कर जब मेरी आंखें खुलीं तो मैं ने देखा कि बहलाना में रहने वाला एक लड़का सतनाम सिंह अपने हाथ में बेसबाल बैट पकड़े मेरे भाई उदयवीर से लड़ता हुआ छत पर जा पहुंचा थावह उदयवीर से मारपीट करते हुए उसे घसीट कर छत पर ले गया था. बीचबीच में उदयवीर भी उस का मुकाबला करने का प्रयास करते हुए उस पर हाथपैर से वार कर रहा था. यह सब देख मैं भी तेजी से उन के पीछे छत पर चला गया. तब तक वे दोनों लड़ते हुए कौर्नर के मकानों की छत पर जा पहुंचे थे. ऐसा इसलिए था कि हमारी लाइन के मकानों बैकसाइड वाले मकानों की छतें आपस में मिली हुई हैं

जिस वक्त वे दोनों लड़ते हुए मकान नंबर 2088 की छत पर पहुंचे तो मैं भी उन्हें छुड़ाने के लिए वहां जा पहुंचा. अभी मैं उन से थोड़े फासले पर था, जब मेरे कानों में सतनाम की आवाज पड़ी. वह मेरे भाई से कह रहा था कि प्रतिभा हमेशा से उस की प्रेमिका रही है, उसे मजबूरी में उस से शादी करनी पड़ी थी. अब वह उसे आजाद कर दे, वरना वह उस की (मेरे भाई उदयवीर की) जान ले लेगा. इस से पहले कि मैं भाई की मदद के लिए उस के पास पहुंच पाता, वह दीवार के एक कोने की तरफ हुआ और तभी सतनाम ने मौका देख कर उसे धक्का दे कर नीचे गिरा दिया. सतनाम सिंह ने मेरे भाई की पत्नी प्रतिभा के साथ लव अफेयर के चलते मेरे भाई को रास्ते से हटाने के लिए जान से मार दिया. उस के खिलाफ मामला दर्ज कर के सख्त काररवाई की जाए.

उसी रोज यह प्रकरण थाना सेक्टर-31 में भादंवि की धाराओं 302 एवं 456 के तहत दर्ज हो गया. यह 14 जून, 2017 की बात है. मौके की अन्य काररवाइयां पूरी कर के थाने लौटने के बाद पुलिस ने सतनाम सिंह को काबू करने की योजनाएं बनानी शुरू कीं. वारदात को अंजाम देने के बाद वह मौके से फरार होने में सफल हो गया था. लेकिन अपराध कर के भागने के 8 घंटे के भीतर ही पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया. अगले दिन अदालत से उस का कस्टडी रिमांड हासिल कर के उस से विस्तार से पूछताछ की गई. इस पूछताछ में उस ने बताया कि वह चंडीगढ़ के गांव बहलाना के मकान नंबर 74 का रहने वाला था. यहीं की रहने वाली लड़की प्रतिभा से उसे प्यार हो गया था. मगर यह एकतरफा प्यार था, जिस में प्रतिभा ने कभी कोई रुचि नहीं दिखाई थी.

सतनाम सिंह ने उसे अपनी प्रेमिका घोषित करते हुए उस का पीछा नहीं छोड़ा था. इस से प्रतिभा खुद तो परेशान थी ही, उस के घर वाले भी फिक्रमंद होने लगे थे. उन के मन में यह भय समा गया था कि कहीं सतनाम उन की बेटी को उठा ले जाए. इस की वजह यह भी थी कि सतनाम अपराधी किस्म का लड़का था. आखिर प्रतिभा के घर वालों ने रामदरबार के रहने वाले उदयवीर से उस की शादी कर दी. सतनाम के बताए अनुसार प्रतिभा के घर वालों का डर एकदम सही निकला. वह वाकई उन की लड़की को अपहृत करने के प्रयास में था. यह अलग बात है कि अभी तक उसे सफलता नहीं मिल पाई थी. प्रतिभा की शादी के बाद तो उस के लिए यह काम और भी मुश्किल हो गया था.

देखतेदेखते इस शादी को डेढ़ साल गुजर गया. लेकिन सतनाम इस बीच प्रतिभा को भूल नहीं पाया. इस बीच उस ने एक दुस्साहस भरा काम यह भी किया कि उदयवीर से मिल कर उस से सीधे ही कह दिया, ‘‘प्रतिभा मेरी प्रेमिका थी और हमेशा रहेगी. तुम ने उस की मजबूरी का फायदा उठा कर उस की इच्छा के विरुद्ध शादी की है. तुम्हारी भलाई इसी में है कि उस से तलाक ले कर उसे मेरे हवाले कर दो, वरना मुझे तुम्हारा खून करना पड़ेगा.’’

उदयवीर ने इस बारे में अपने भाइयों को भी बताया और प्रतिभा से भी बात की. प्रतिभा ने पति को समझाया कि उस का सतनाम से प्रेमप्यार जैसा कभी कोई रिश्ता नहीं था. वह उस के पीछे पड़ कर नाहक उसे परेशान करता था. इस पर उदयवीर ने सतनाम को फोन कर के उसे लताड़ दिया. बकौल सतनाम उस ने भी तय कर लिया कि आगे उसे कुछ भी करना पड़े, वह प्रतिभा को उठा ले जाएगा. बस, मौका मिलने भर की देर थी. यह मौका भी उसे जल्दी ही मिल गया. उदयवीर के पिता का देहांत हो गया और उन की अस्थियों को गंगा में विसर्जित करने उसे अपने भाइयों परिजनों के साथ हरिद्वार जाना पड़ा.

सतनाम ने पुलिस को बताया कि उसे 13 जून, 2017 की रात में प्रतिभा के घर पर अकेली होने की जानकारी मिली. आधी रात के बाद वह घर के पिछवाड़े से उस के पास जा पहुंचा. वहां जा कर देखा तो उस का पति भी उस की बगल में लेटा था. लेकिन सतनाम ने परवाह नहीं की और प्रतिभा के मुंह पर हाथ रख कर उसे कंधे पर लाद लिया. जब वह प्रतिभा को ले जाने लगा तो उदयवीर की आंखें खुल गईं. वह सतनाम पर झपटा तो प्रतिभा उस की पकड़ से छूट गई. इस के बाद सतनाम और उदयवीर गुत्थमगुत्था हो गए. संभव था कि उदयवीर सतनाम पर हावी हो जाता और इस बीच उस के परिजन भी उस की मदद को जाते. लेकिन पता नहीं कैसे वहां पड़ा बेसबाल बैट सतनाम के हाथ लग गया और वह उसी से उदयवीर को पीटते हुए छत पर ले गया. वहां से सतनाम ने उसे नीचे गिरा दिया. वह मुंह के बल कर गिरा था.

सेक्टर-32 के सिविल अस्पताल के डा. मंडर रामचंद सने डा. गौरव कुमार ने उदयवीर के शव का पोस्टमार्टम किया. उन्होंने उस के जिस्म पर छोटीबड़ी 10 चोटों का उल्लेख करते हुए मौत का कारण मानसिक आघात और फेफड़ों का बायां हिस्सा नष्ट होना बताया. खैर, कस्टडी रिमांड की अवधि समाप्त होने पर पुलिस ने सतनाम को फिर से अदालत में पेश कर के न्यायिक हिरासत में बुड़ैल जेल भेज दिया गया. इस के बाद समयावधि के भीतर उस के विरुद्ध आरोपपत्र तैयार कर 8 गवाहों की सूची के साथ प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी गीतांजलि गोयल की अदालत में पेश कर दिया. इस के बाद यह केस सेशन कमिट हो कर चंडीगढ़ के जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलवीर सिंह की अदालत में विधिवत रूप से चला.

विद्वान न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को गौर से सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों की गहराई से जांच करने के बाद बचावपक्ष के वकील पब्लिक प्रौसीक्यूटर के बीच हुई बहस के मुद्दों पर भी पूरा ध्यान दिया. बहस के दौरान पब्लिक प्रौसीक्यूटर राजेंद्र सिंह ने दूसरे की औरत को अपना बनाने की एवज में उस के पति का कत्ल करने को ले कर जहां इसे अमानवीय एवं घिनौना अपराध बताया, वहीं बचावपक्ष के वकील यादविंदर सिंह संधू ने अपनी दलील से अभियोजन पक्ष का रुख पलटने का प्रयास किया. वकील संधू का कहना था कि मृतक के पिता की मौत के बाद संपत्ति विवाद को ले कर उस का अपने भाइयों से झगड़ा हो गया था. उन्होंने ही उसे छत से गिरा कर मौत के घाट उतारा है. सतनाम सिंह को इस केस में नाहक फंसा दिया है.

लेकिन एक अलग बात यह भी रही कि जहां अभियोजन पक्ष की ओर से 8 गवाह अदालत में पेश हुए, वहीं बचावपक्ष एक गवाह भी पेश नहीं कर पाया. बहरहाल, माननीय न्यायाधीश बलवीर सिंह ने 12 मार्च, 2018 को अभियुक्त सतनाम सिंह को भादंवि की धाराओं 302 एवं 456 का दोषी करार देते हुए अपना फैसला सुना दिया. इस केस में दी जाने वाली सजा की घोषणा 14 मार्च, 2018 को की गई. 14 मार्च को दोषी को सजा सुनाए जाने से पहले सजा के मुद्दे को सुना गया. दोषी ने बताया कि उस की मां की मौत हो चुकी है और अपने वृद्ध पिता हरबंस सिंह का वही अकेला सहारा है. वैसे भी वह अपनी बीए की पढ़ाई कर रहा था, जो पूरी कर के उसे नौकरी की तलाश करनी थी. इसलिए उसे कम से कम सजा सुनाई जाए.

जज साहब ने यह सब शांति से सुना, मगर उसी दिन दोपहर बाद अपना 27 पृष्ठ का फैसला सुनाते हुए दोषी सतनाम सिंह को धारा 302 के तहत उम्रकैद 5 हजार रुपए जुरमाने और धारा 456 के अंतर्गत एक साल कैद की सजा सुनाई. दोषी ने जुरमाना भरने में अपने को असमर्थ बताया तो उस की कैद की सजा में 6 महीने की बढ़ोत्तरी कर दी गई. जिस दिन सतनाम सिंह को न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेजा गया था, तब से वह चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में ही बंद था. उस की जमानत नहीं हो पाई थी. अब उसे अदालत के फैसले के बाद फिर से उसी जेल में भेज दिया गया.

कथा पुलिस सूत्रों एवं अदालत के फैसले पर आधारित

 

वकील ने खून से लिखा केस

एडवोकेट मनमोहन कुमार की पंचकूला अदालत में अच्छी प्रैक्टिस चलती थी. परिवार में उस की पत्नी रजनी के अलावा 2 बेटे,  9 वर्षीय निखिल और 7 वर्षीय तन्मय थे. मनमोहन कुमार पंचकूला के सेक्टर-19 में रहता था, उस के मातापिता भी साथ ही रहते थे.

सब कुछ ठीक चल रहा था. घर में किसी चीज की कमी नहीं थी. उस की किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं थी. लेकिन उस दिन एक अलग सी चिंता वाली बात हो गई.

16 जनवरी, 2018 की सुबह मनमोहन रोजाना की तरह तैयार हो कर घर से अदालत के लिए निकला. रजनी घर पर ही थी, उस ने अपने दोनों बच्चों को तैयार कर के स्कूल भेज दिया. बड़े बेटे ने कहा था कि आज वह पनीर की सब्जी खाएगा तो रजनी ने भी पलट कर कह दिया था कि वह उस की मनपसंद सब्जी बना कर रखेगी.

लेकिन दोपहर बाद पौने 3 बजे जब बच्चे स्कूल से घर लौटे तो उन की मां घर पर नहीं थी. बच्चों के दादा ने उन से कहा कि रजनी बाजार गई होगी, थोड़ी देर में लौट आएगी. इसी बीच बड़े बेटे निखिल ने पिता को फोन कर के इस बारे में बताया. मनमोहन ने भी सहज भाव से कह दिया कि किसी काम से गई होगी, लौट आएगी.

एक घंटे बाद मनमोहन ने घर पर फोन कर के पत्नी के बारे में पूछा. पता चला कि रजनी अभी तक वापस नहीं लौटी थी. यह जानने के बाद वह अपना काम छोड़ कर लौट आया. उस ने इस बारे में पहले पिता से बात की, फिर कई जगह फोन करने के अलावा यहांवहां पत्नी की तलाश की. लेकिन रजनी के बारे में कहीं कोई जानकारी नहीं मिली.

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अंतत: मनमोहन ने रात में थाना सेक्टर-20 जा कर अपनी पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी. वह बहुत ज्यादा परेशान नजर आ रहा था. बातबात पर उस की आंखें भर आती थीं.

शिकायत एक वकील की ओर से की गई थी. पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर गुमशुदा की फोटो फ्लैश कर के काररवाई शुरू कर दी. रजनी की तलाश में तमाम संभावित जगहों पर पुलिस पार्टियां भेज दी गई थीं.

पुलिस ने भागदौड़ में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. लेकिन पुलिस भी रजनी का कोई सुराग हासिल करने में कामयाब नहीं हुई.

देखतेदेखते रजनी को गायब हुए 4 दिन गुजर गए. पुलिस को उसे ढूंढने में कोई कामयाबी नहीं मिली. मनमोहन भी पत्नी को तलाशता रहा, लेकिन उस की भागदौड़ किसी काम नहीं आ रही थी. इस से वह हताशा का शिकार होने लगा था. बात करते हुए लगता था, जैसे अभी रो देगा.

20 जनवरी को पुलिस को आंशिक सफलता तब मिली, जब पंचकूला के सेक्टर-25 स्थित डंपिंग ग्राउंड के पास से रजनी की एक जूती बरामद हुई. मनमोहन को बुलवा कर जूती की शिनाख्त करवाई गई तो यह संदेह पुख्ता होने लगा कि संभवत: रजनी की हत्या कर के उस के शव को डंपिंग ग्राउंड में दफना दिया गया है.

आननफानन में पंचकूला पुलिस की एक टीम और फोरैंसिक टीम ने वहां संभावित जगह की खुदाई करवानी शुरू कर दी. यह खुदाई शिकायतकर्ता मनमोहन के सामने ही शुरू की गई. अपने कुछ कनिष्ठ अधिकारियों के साथ पंचकूला के डीसीपी मनवीर सिंह भी मौके पर मौजूद रहे.

खुदाई के लिए जेसीबी मशीन लाई गई थी. 3 फुट गहरी खुदाई होने पर कपड़े में लपेट कर दबाया गया एक शव दिखाई दिया. सब को लगा कि वह शव वकील मनमोहन की गुमशुदा बीवी रजनी का होगा. इस से अजीब किस्म की सनसनी सी फैलने लगी. मनमोहन ने शव देखने से पहले ही फफकफफक कर रोना शुरू कर दिया.

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मृतका रजनी

लेकिन कुछ देर बाद इस रहस्य पर से परदा उठ गया. रहस्य यह था कि वह शव किसी महिला का न हो कर एक कुत्ते का था. इस बात से वहां सनसनी में और इजाफा हो गया. इस की वजह यह थी कि कुत्ते के शव को जिस कपड़े में लपेट कर दफनाया गया था, वह रजनी का दुपट्टा था.

मनमोहन परेशान तो पहले से ही था, यह सब सामने आने पर वह बदहवास सा हो गया. पहले तो वह फूटफूट कर रोया. फिर चीखचीख कर कहने लगा कि किसी ने षडयंत्र रच कर उस की रजनी को गायब कर दिया है.

पुलिस ने अपनी कारवाई के लिए कुत्ते का शव कब्जे में ले कर खोदी गई जगह पर मिट्टी भरवा दी. दूसरी ओर पुलिस रजनी के मोबाइल नंबर से जुड़ी काल डिटेल्स खंगालने का प्रयास कर रही थी. इस प्रयास में पुलिस के सामने यह बात आई कि उस के नंबर पर जिस नंबर से ज्यादा काल्स आई थीं, वह मोनिका के नाम से सेव था. मनमोहन ने इस बारे में बताया कि मोनिका उस की पत्नी रजनी की सहेली है और अलीगढ़ की रहने वाली है. दोनों अकसर एकदूसरे से फोन पर बातें करती रहती थीं.

पुलिस ने इस नंबर पर फोन कर के मोनिका से बात की. उस ने बताया कि वह मूलरूप से अलीगढ़ की रहने वाली है लेकिन इन दिनों चंडीगढ़ के कस्बे मनीमाजरा में रह कर अपना ब्यूटीपार्लर चला रही है. उस ने बेझिझक पुलिस को अपना पता भी दे दिया. पुलिस ने उस के ब्यूटीपार्लर पर पहुंच कर उस से मनोवैज्ञानिक ढंग से पूछताछ की.

पूछताछ में मोनिका जरा भी नहीं घबराई. उस ने पूरे आत्मविश्वास से पुलिस को बताया, ‘‘मेरी बहन की अपने पति संदीप के साथ बिलकुल नहीं बनती थी, जबकि संदीप निहायत भला आदमी है. आखिर मेरी बहन और जीजा के बीच तलाक लेने की नौबत आ गई. मेरे जीजा ने अपना केस लड़ने के लिए वकील मनमोहन कुमार को नियुक्त किया था.

‘‘मनमोहनजी बहुत भले और मिलनसार व्यक्ति ही नहीं निकले, बल्कि उन की पत्नी इस सब में उन से भी बढ़ कर थीं. अपने जीजा के साथ मैं भी उन के यहां चली जाती थी. इस वजह से मेरी उन से पहचान हुई और फिर रजनी दीदी से पक्की दोस्ती हो गई.

‘‘हम दोनों एकदूसरे से फोन पर बातें करती रहती थीं. अब दीदी के गायब होने का पता चला है. मैं तो खुद नहीं समझ पा रही हूं कि इस तरह अचानक वह कहां चली गईं. इन लोगों की तो किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं है. दोनों खूब हंसमुख हैं. पतिपत्नी के बीच कभी कोई मनमुटाव हुआ हो, ऐसी भी कोई बात सामने नहीं आई. दोनों का अपने बच्चों से भी बहुत लगाव है.’’ मोनिका ने पुलिस को बताया.

यह बताने के बावजूद मोनिका खुद पुलिस के संदेह के दायरे में आ गई. वजह यह कि उस से इतना कुछ पूछा नहीं गया था, जितना वह बता गई थी.

लेकिन एक बात उस के हक में जा रही थी. रजनी के गायब होने से पहले उस के मोबाइल नंबर पर जो अंतिम काल आई थी, वह मोनिका की नहीं थी. यह काल किसी अज्ञात नंबर से आई थी. रजनी ने यह नंबर सेव नहीं कर रखा था. पुलिस ने उस नंबर का पता लगा लिया.

वह नंबर एक रिक्शाचालक का था. पूछताछ करने पर उस ने पुलिस को बताया कि 16 जनवरी को दिन के 10 से साढ़े 10 बजे वह अपना रिक्शा ले कर कहीं जा रहा था. तभी उसे रास्ते में रोक कर एक युवती ने उस से पूछा था कि क्या उस के पास मोबाइल है. उस के हां कहने पर युवती ने कहा कि वह अपना मोबाइल घर भूल आई है.

फिर उस ने पैसों का लालच दे कर उस के फोन से एक काल कर लेने को कहा. उस ने अपना मोबाइल युवती को दे दिया. वह नहीं जानता कि उस युवती ने उस के फोन पर किस से क्या बात की थी.

रिक्शाचालक को ले जा कर जब मोनिका के सामने खड़ा किया गया तो उस ने उसे पहचानते हुए बोल दिया, ‘‘जी हां, यही मेमसाहब थीं, जिन्होंने मेरे फोन से बात की थी.’’

इस पर पुलिस मोनिका को संदिग्ध मानते हुए थाने ले आई. वहीं उस के मोबाइल पर उस के जीजा संदीप का फोन आ गया. उस वक्त वह सेक्टर-20 पुलिस स्टेशन के प्रभारी विकास कुमार के औफिस में बैठी थी. उस से मनोवैज्ञानिक पूछताछ का सिलसिला शुरू होने ही जा रहा था कि उस के जीजा का फोन आ गया तो मोनिका के जरिए संदीप की लोकेशन मालूम कर ली गई.

उस वक्त वह पंचकूला में ही था. एक पुलिस पार्टी जा कर उसे भी राउंडअप कर लाई. थाने में दोनों से पूछताछ शुरू ही हुई थी कि दोनों ने रजनी का कत्ल करने की बात मानते हुए सीधेसीधे कह दिया कि भले ही रजनी को मौत के घाट उन दोनों ने उतारा था, लेकिन उस की लाश को अंतिम रूप से ठिकाने लगाने का काम खुद रजनी के पति एडवोकेट मनमोहन कुमार ने ही किया था. यहां तक कि इस खूनी साजिश को रचा भी मनमोहन ने ही था.

27 जनवरी, 2016 की बात है. मोनिका और संदीप की थाने में विधिवत गिरफ्तारी दिखाने के बाद उसी दिन पंचकूला के सूरज थिएटर के पास से वकील मनमोहन को भी पकड़ लिया गया. तीनों को एक सप्ताह के कस्टडी रिमांड में ले कर गहन पूछताछ की गई.

इस पूछताछ में इन लोगों ने पुलिस को जो कुछ बताया, उस से रजनी के गायब होने से ले कर उस के कत्ल तक की सिलसिलेवार गाथा कुछ इस तरह सामने आई—

मोनिका का जीजा पेशे से ट्रक ड्राइवर था. पत्नी की अपेक्षा वह अपनी साली को ज्यादा पसंद करता था. इसी वजह से पतिपत्नी के रिश्तों में खटास आ गई थी और मामला तलाक तक जा पहुंचा था. इसी सिलसिले में संदीप की मुलाकात पंचकूला के वकील मनमोहन कुमार से हुई थी.

चूंकि संदीप पंचकूला में रहता था और मोनिका मनीमाजरा में, इसलिए दोनों की अकसर मुलाकात होती रहती थी. वैसे भी पंचकूला और चंडीगढ़ का कस्बा मनीमाजरा एकदूसरे से सटे हुए हैं. संदीप मोनिका को बहुत सुलझी हुई और समझदार मानता था. इसी वजह से वह वकील मनमोहन के पास जाते वक्त अकसर उसे भी साथ ले जाया करता था. मोनिका भी उन की बातों में दिलचस्पी लेते हुए कभीकभार अपनी राय दे देती थी, जिस से वकील मनमोहन अकसर सहमत हो जाता था.

एक रोज मोनिका और मनमोहन की कुछ इस अंदाज में आंखें चार हुईं कि दोनों एकदूसरे को अपना दिल दे बैठे. मेल मुलाकातें होने लगीं. आखिर एक ऐसी स्टेज आ गई जब यह तय हो गया कि मनमोहन अपनी पत्नी को तलाक दे कर मोनिका से शादी कर लेगा. मोनिका पहले ही कुंवारी थी.

रजनी किसी पतिव्रता नारी से कम नहीं थी. उसे कितना भी परेशान कर लिया जाता, वह तलाक के लिए कभी राजी न होती. इस सिलसिले में मनमोहन ने हर तरह के हथकंडे अपना लिए थे, मगर बात बनती नजर नहीं आई.

आखिर रजनी को रास्ते से हटाने के लिए उसे मौत के घाट उतारने की योजना बनाई गई. मोनिका और मनमोहन तो इस योजना का हिस्सा थे ही, संदीप को भी डेढ़ लाख रुपयों का लालच दे कर योजना में शामिल कर लिया गया.

योजना के तहत मोनिका किसी न किसी काम के बहाने मनमोहन के घर जाने लगी, जहां उस की मुलाकात रजनी से हो गई. उस ने रजनी से घनिष्ठता बढ़ाने में देर नहीं लगाई. जल्दी ही दोनों पक्की सहेलियां बन गईं. दोनों फोन पर भी आपस में खूब बतियाने लगी थीं.

कई बार एक साथ शौपिंग करने भी चली जाती थीं. मोनिका रजनी की खूब खातिरदारी भी करती थी. वह उसे अच्छेअच्छे रेस्टोरेंट्स में ले जा कर ऐसीऐसी चीजें खिलाया करती थी, जिन से रजनी की तबीयत खुश हो जाए. फलस्वरूप उसे मोनिका बहुत अच्छी और अपनी हितैषी लगने लगी थी.

एक बार रजनी ने बताया कि उस के पास एक साड़ी है, जिस से मैच करता पेटीकोट ब्लाउज नहीं मिल पा रहा है. उस की बात सुन मोनिका ने छूटते ही कहा, ‘‘इतनी सी बात के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है. मैं तुम्हें ऐसी दुकान पर ले जाऊंगी, जहां सब कुछ आसानी से मिल जाएगा. जब भी उस तरफ जाना हुआ, मैं तुम्हें साथ ले चलूंगी.’’

योजना के तहत जिस मौके का मोनिका को इंतजार था, वह उस के सामने था. उस ने इस बारे में संदीप और मनमोहन से बात की. मनमोहन शुरू से ही उन्हें कहता आया था कि उस की बनाई योजना के चलते रजनी को मौत के घाट उतार देने पर भी वे कभी नहीं फंसेंगे.

और अगर बुरी किस्मत के चलते फंस भी गए तो भूल कर भी पुलिस के सामने मेरा नाम नहीं लेना. आखिर तुम लोगों को बचाना तो मुझे ही है. वैसे तुम लोगों को यह भी बता दूं कि अगर तुम अपने काम में सफल हो गए तो मैं रजनी की लाश को वहां पहुंचा दूंगा, जहां उसे कभी कोई ढूंढ ही नहीं पाएगा.

                                                           अभियुक्त संदीप

संदीप और मोनिका तो पहले ही से वकील मनमोहन से प्रभावित थे. उन की नजर में उस जैसा चतुर दूसरा कोई नहीं हो सकता था. योजना को अंतिम रूप देते हुए 16 जनवरी को दिन के साढ़े 10 बजे मोनिका ने एक रिक्शाचालक से उस का फोन ले कर रजनी को काल कर के सेक्टर-21६ में एक जगह बुलवाया.

बनाई गई योजना के तहत मोनिका अपना मोबाइल फोन पहले ही चंडीगढ़ में किसी के पास छोड़ आई थी. ऐसा उस ने इसलिए किया था ताकि अगर पुलिस उस पर शक करने भी लगे तो घटना के वक्त के उस की फोन लोकेशन चंडीगढ़ की आए.

खैर, करीब घंटे डेढ़ घंटे बाद रजनी उस जगह पहुंच गई, जहां पहुंचने के लिए मोनिका ने कहा था.

मोनिका उस वक्त अपनी कार में थी, जिसे संदीप चला रहा था. रजनी के आने पर मोनिका ने उसे कार की पिछली सीट पर बिठाया और खुद भी अगली सीट से उठ कर पीछे उस की बगल में बैठ गई.

बैठते ही रजनी ने साथ लाए लिफाफे में से साड़ी निकाल कर मोनिका को दिखानी शुरू कर दी, जिस ने उसे उलटपलट कर देखते ही कहा, ‘‘इस साड़ी से मैच करता पेटीकोट ब्लाउज तो उस दुकान से बड़े आराम से मिल जाएगा.’’

इस के बाद दोनों इधरउधर की बातों में मशगूल हो गईं, जबकि संदीप कार को एक वीराने में ले गया. वहां पहुंच कर मोनिका ने रजनी की नजर बचाते हुए पहले तो उस का सेलफोन उठा कर स्विच औफ कर दिया. फिर कार के शीशे से बाहर की ओर देखते हुए चिल्ला कर कहा, ‘‘वो देखो कितना खूबसूरत बंदरों का जोड़ा.’’

उस वक्त रजनी का चेहरा सामने की तरफ था. मोनिका की बात सुन कर उत्सुकतावश वह भी अपना चेहरा घुमा कर खिड़की से बाहर देखने लगी. तभी मोनिका ने बड़ी तेजी से अपने साथ लाई नायलौन की रस्सी रजनी के गले में लपेटते हुए कस दी.

रजनी छटपटाने लगी तो संदीप ने कार रोक कर वहीं से पीछे घूम कर उस के घुटने दबा दिए.

कुछ देर छटपटाने के बाद रजनी शांत हो गई, उस के प्राणपखेरू उड़ चुके थे. वहीं पास में डंपिंग ग्राउंड था, जहां उन्होंने शव को गिरा कर उस पर कचरा डाल दिया.

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अभियुक्त वकील मनमोहन कुमार

इस के बाद इन्होंने इस बारे में मनमोहन को बताया, जिस ने 2 लाख में सौदा कर के मध्य प्रदेश से 2 बदमाश बुलाए जो रजनी का शव निकाल कर अपने साथ ले गए. उस की जगह उन्होंने एक कुत्ता मार कर रजनी के दुपट्टे में लपेटा और वहां थोड़ी ज्यादा गहराई में दफना दिया. वहीं पास ही में रजनी की एक जूती गिरा दी गई.

एक जबरदस्त योजना के तहत इस अपराध को पूरी सफाई से अंजाम दिया गया था. तीनों को अपने पकड़े जाने का अंदेशा नहीं था. मगर तीनों पुलिस के हत्थे चढ़ गए और पूछताछ के वक्त की गई सख्ती के आगे सच्चाई को छिपा नहीं पाए.

कथा तैयार करने तक तीनों अभियुक्त न्यायिक हिरासत में अंबाला की सेंट्रल जेल में बंद थे. रजनी का शव बरामद करना तो दूर, पुलिस शव को पंचकूला के डंपिंग ग्राउंड से निकाल कर ले जाने वाले बदमाशों तक का पता लगाने में असफल रही.

पंचकूला पुलिस के इतिहास का यह पहला केस माना जा रहा है, जिस में कत्ल हुआ, कातिल भी पकड़े गए और पुलिस के सामने उन्होंने अपराध भी स्वीकार कर लिया. लेकिन मकतूल की लाश बरामद नहीं की जा सकी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

लाश को मिला नाम

पंचकूला के थाना मनसादेवी के पास सेक्टर-5 के निकट मजदूरों और कामगारों ने अपने रहने के लिए कच्चे  झोपड़ीनुमा मकान बना रखे हैं. 27 अप्रैल, 2019 की सुबह 6 बजे इन्हीं झुग्गियों की कुछ महिलाएं जंगल की तरफ गईं तो उन्होंने झाडि़यों के बीच एक लाश से धुआं उठते देखा.

यह देखते ही महिलाएं उलटे पांव भागती हुई बस्ती में लौट आईं. उन्होंने शोर मचा कर यह बात सब को बताई. लाश के जलने की बात सुन कर बस्ती के लोग महिलाओं द्वारा बताई जगह पर पहुंच गए. उन्होंने भी वहां एक लाश से धुआं उठते देखा. लाश बुरी तरह झुलस चुकी थी.

इसी दौरान किसी ने पुलिस कंट्रोलरूम को फोन किया. चंडीगढ़ पुलिस कंट्रोलरूम ने घटना की सूचना संबंधित थाना मनीमाजरा को भेज दी. थोड़ी देर बाद थाना मनीमाजरा पुलिस मौके पर पहुंची तो उस ने बताया कि जिस जगह लाश पड़ी है, वह क्षेत्र के पंचकूला इलाके में आता है.

मनीमाजरा पुलिस ने यह खबर पंचकूला के थाना मनसादेवी को भेज दी. सूचना मिलने पर थाना मनसादेवी के एसएचओ विजय कुमार अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंच गए. साथ ही उन्होंने घटना की सूचना अपने उच्चाधिकारियों और क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम को भी दी.

कुछ ही देर में डीसीपी कमलदीप गोयल, एसीपी (क्राइम) नुपूर बिश्नोई, पंचकूला क्राइम इनवैस्टीगेशन एजेंसी के प्रभारी अमन कुमार फोरैंसिक टीम सहित मौके पर पहुंच गए. जिस लाश के बारे में सूचना दी गई थी, वह मनसादेवी कौंप्लेक्स, विश्वकर्मा मंदिर की बैक साइड पर थाना मनसादेवी से मात्र 500 मीटर की दूरी पर झाडि़यों में पड़ी थी.

पुलिस जब वहां पहुंची, तब भी शव से धुआं उठ रहा था. इस से पुलिस को लगा कि कुछ देर पहले ही शव में आग लगाई गई थी. वह लाश किसी युवती की थी. पुलिस ने मौके पर देखा कि उस के गले में फंदा लगा हुआ था. युवती की जीभ भी बाहर निकली हुई थी और टांगें पूरी तरह फैली हुई थीं. यह सब देख कर दुष्कर्म की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता था.

मौके पर पहुंची फोरैंसिक टीम ने भी वहां से कुछ सबूत जुटाए. झाडि़यों पर पड़ी बोरी भी कब्जे में ले ली गई. पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया कि युवती की किसी अन्य जगह पर गला घोंट कर हत्या करने के बाद शव को यहां ठिकाने लगाने की कोशिश की गई थी.

शिनाख्त जरूरी थी

झाडि़यों के पास कच्चे रास्ते पर किसी दोपहिया वाहन के टायरों के निशान भी मिले. ऐसा लगता था, युवती का शव किसी वाहन से वहां तक लाया गया होगा. पुलिस को लगा, जब हत्यारे शव लाए होंगे तो कहीं न कहीं किसी सीसीटीवी कैमरे में कैद जरूर हुए होंगे. युवती के शरीर पर घाव के कई निशान भी मिले.

बहरहाल, मनसादेवी थाना पुलिस ने घटनास्थल पर सब से पहले पहुंचे पीसीआर में तैनात हैडकांस्टेबल सतीश की सूचना पर हत्या और लाश को ठिकाने लगाने की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई. शव को सेक्टर-6 जनरल अस्पताल की मोर्चरी में 72 घंटों के लिए सुरक्षित रखवा दिया गया.

लाश इतनी बुरी तरीके से जल चुकी थी कि उस की शिनाख्त करनी बहुत मुश्किल थी. पुलिस के सामने पहला अहम काम था शव की शिनाख्त कराना. उस के बाद ही हत्यारों तक पहुंचा जा सकता था.

पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को चैक किया. चंडीगढ़ पुलिस से भी घटनास्थल के रास्ते की तरफ आने वाले क्षेत्र के सीसीटीवी कैमरों को चैक करने की सहायता मांगी गई. इस काम में सीआईए, सेक्टर-19, क्राइम ब्रांच और कई थानों की टीमें लगी थीं.

मृतका के फोटो भी सभी थानों में भिजवा दिए गए थे और पिछले माह लापता हुई 20 से 30 साल की युवतियों के रिकौर्ड भी खंगाले गए. इस के अलावा अधजले शव की पहचान के लिए डीसीपी कमलदीप गोयल के आदेश पर पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर की पुलिस को भी सूचना भेज दी गई.

सीआईए इंसपेक्टर अमन कुमार ने सीसीटीवी कैमरे में दिखने वाली एक कार के चालक को हिरासत में ले लिया था, लेकिन लंबी पूछताछ के बाद जब उस से हत्या के संबंध में कोई क्लू नहीं मिला तो उसे छोड़ दिया गया. वहीं मनसादेवी थाना पुलिस ने भी इस मामले में कई संदिग्ध लोगों को हिरासत में ले कर उन से पूछताछ की, पर कोई नतीजा नहीं निकला. पुलिस इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही थी.

कार चालक को सीआईए ने भले ही छोड़ दिया था, लेकिन उसे क्लीन चिट नहीं दी थी क्योंकि उस की काले रंग की अल्टो कार की लोकेशन आईटी पार्क से मनसादेवी कौंप्लेक्स के बीच रात एक से 3 बजे के बीच ट्रेस की गई थी.

पुलिस ने मृतका की शिनाख्त के लिए गली गली में उस के पोस्टर लगवा दिए थे, इस के अलावा विभिन्न अखबारों, लोकल टीवी चैनलों पर भी उस की फोटो दिखाई गई थी. इस का नतीजा यह निकला कि लाश मिलने के 2 दिन बाद अखबार से खबर पढ़ कर इंदिरा कालोनी निवासी लल्लन प्रसाद थाना मनसादेवी पहुंच गया.

उस ने एसएचओ से कहा, ‘‘साहब, अखबार में जो अधजली लाश बरामद होने की खबर छपी है, वह लाश मेरी बेटी गुरप्रीत की है.’’

लल्लन की बात सुन कर एसएचओ ने उस से पूछा, ‘‘आप को किसी पर शक है?’’

‘‘हां साहब, मुझे शक नहीं विश्वास है कि यह काम मेरी बेटी के प्रेमी ने किया होगा.’’ लल्लन ने फूटफूट कर रोते हुए यह बात पुलिस को बताई.

लल्लन ने बताया कि उस की बेटी गुरप्रीत नौवीं कक्षा में पढ़ती थी. उस का प्रेम प्रसंग इंदिरा कालोनी के ही रहने वाले एक लड़के से चल रहा था. वह लड़का दूसरी बिरादरी का था, इसलिए हम ने अपनी बेटी को समझाया और जब वह नहीं मानी तो हम ने 2 महीने पहले उस की मंगनी अपनी रिश्तेदारी के एक लड़के के साथ तय कर दी थी.

वह 23 मार्च, 2019 को सुबह 8 बजे स्कूल जाने के लिए घर से निकली थी. लेकिन शाम तक नहीं लौटी. हम ने भी इस पर अधिक ध्यान नहीं दिया, क्योंकि गुरप्रीत इस से पहले भी अपने प्रेमी के साथ घर से चोरीछिपे कई बार जा चुकी थी. लेकिन 1-2 दिन बाद वह अपने आप ही घर लौट आती थी. उन्हें उम्मीद थी कि इस बार भी वह 1-2 दिन में लौट आएगी. पर इस बार ऐसा नहीं हुआ.

जब 2 दिन तक वह घर नहीं लौटी तो हम ने पहले तो रिश्तेदारी में बेटी की तलाश की, लेकिन जब उस का कहीं कुछ पता नहीं चला तो चंडीगढ़ के मनीमाजरा थाने में उस की गुमशुदगी की सूचना दर्ज करवा दी. वह तो नहीं मिली लेकिन इस बार उस की मौत की खबर जरूर मिल गई.

हालांकि पहले तो पुलिस ने उस की बातों पर विश्वास नहीं किया, लेकिन जब युवती की फोटो सीआईए प्रभारी के पास पहुंची तो वह भी दंग रह गए.

पहचान ली गई लाश

उन्होंने तुरंत वह फोटो मनसादेवी थानाप्रभारी को भेजी और दावा करने वाले व्यक्ति को एसएचओ विजय कुमार के पास भेज दिया. विजय कुमार ने उसे मोर्चरी में रखी झुलसी हुई लाश को पहचानने के लिए अस्पताल चलने को कहा. इस पर लल्लन अपनी पत्नी प्रभा के साथ अस्पताल पहुंच गया.

दोनों को मोर्चरी में रखी लाश दिखाई दी तो लल्लन प्रसाद और उस की पत्नी प्रभा ने लाश को पहचान कर उस की शिनाख्त अपनी बेटी गुरप्रीत के रूप में की. अखबारों से मिली जानकारी के बाद उसी दिन अधजले शव की पहचान के लिए अस्पताल में 60 से अधिक लोग पहुंचे थे, जिस में ट्राइसिटी के अलावा पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मूकश्मीर आदि जगहों के लोग भी शामिल थे, जिन की बेटियां, पत्नियां पिछले कुछ महीनों से लापता थीं. लेकिन शव की शिनाख्त उन में से किसी ने भी नहीं की थी.

30 अप्रैल, 2019 को डाक्टरों के पैनल ने लाश का पोस्टमार्टम किया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया कि मृतका की हत्या गला घोंट कर की गई थी और उस के पेट में चाकू से 3 वार भी किए गए थे. महिला 5 माह की गर्भवती थी. अंत में कागजी काररवाई करने के बाद उस की लाश लल्लन के हवाले कर दी गई थी. उसी दिन उस का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया था.

लाश की शिनाख्त हो जाने के बाद पुलिस को अब लल्लन की बेटी के हत्यारों और हत्या के कारण का पता लगाना था. इस के पहले कि इस मामले में पुलिस आगे कुछ कर पाती, अगले दिन दिनांक 30 अप्रैल को कहानी में एक नया मोड़ आ गया.

कहानी में आया नया मोड़

इस ट्विस्ट से पंचकूला पुलिस भी आश्चर्यचकित रह गई. लल्लन अपनी जिस बेटी गुरप्रीत का अंतिम संस्कार कर चुका था, वही गुरप्रीत अपने गायब होने के करीब 38 दिनों बाद 30 अप्रैल को रात करीब 9 बजे आईटी थाने में अचानक पहुंच गई.

उस ने पुलिस को बताया कि मैं जिंदा हूं, मेरे प्रेमी को बेवजह मेरी हत्या के आरोप में फंसाया जा रहा है. इस में मेरे पिता की कोई चाल हो सकती है. गुरप्रीत ने बताया कि वह जहां भी गई थी, अपनी मरजी से गई थी. जब उस ने समाचारपत्रों में अपनी हत्या की खबर पढ़ी तो वह हैरान रह गई. इसलिए सच्चाई बताने के लिए वह सीधे थाने चली आई.

आईटी थानाप्रभारी लखबीर सिंह ने इस बात की सूचना एसएचओ मनसादेवी को देने के बाद देर रात तक गुरप्रीत से पूछताछ की. अगले दिन यानी पहली मई को उस का मैडिकल करवाने के बाद उसे सिटी मजिस्ट्रैट के सामने पेश कर उस का इकबालिया बयान दर्ज करवाया.

एसएचओ मनसादेवी विजय कुमार ने जब लल्लन और उस की पत्नी प्रभा को थाने बुला कर इस बारे में पूछा तो वह गिड़गिड़ा कर कहने लगा, ‘‘साहब, आप ने लाश और उस के जो फोटो हमें दिखाए थे, उस के नाक और कान मेरी बेटी से बिलकुल मिलते थे. इसीलिए हम ने उसे अपनी बेटी की लाश समझा.’’

लल्लन तो इतनी बात कह कर बच निकला पर पंचकूला पुलिस को इस मामले से बचना इतना आसान नहीं था. उस की खिल्ली उड़ रही थी. बहरहाल, गुरप्रीत के लौट आने से लल्लन और चंडीगढ़ पुलिस ने तो चैन की सांस ली पर पंचकूला पुलिस की मुश्किलें बढ़ गई थीं.

लल्लन के गलत शिनाख्त करने के बाद पुलिस ने मृतका को गुरप्रीत मान कर उस का अंतिम संस्कार करवा दिया था और आस लगाए बैठी थी कि लाश की शिनाख्त हो गई है तो उस के हत्यारे भी जल्द पकड़े जाएंगे, पर नए हालात में पुलिस के हाथ खाली थे.

पुलिस एक ऐसी अंधेरी खाई में घुस चुकी थी, जहां से जल्दी निकलना संभव नहीं था. न तो पुलिस के पास मृतका के बारे में कोई जानकारी थी और न हत्यारों का कोई सुराग. कुल मिला कर पुलिस को इस ब्लाइंड केस को सुलझाने के लिए नए सिरे से तहकीकात करनी थी. क्योंकि मृतका गर्भवती थी, इसलिए पुलिस अब इसे औनर किलिंग के एंगल से भी देख रही थी.

दूसरी ओर लल्लन की बेटी के वापस आने से उस के तथाकथित प्रेमी की मां ताज ने अपने रिश्तेदारों और मोहल्ले वालों के साथ थाने जा कर हंगामा खड़ा कर दिया और थाने में बैठे लल्लन और उस की पत्नी प्रभा को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ‘‘मैं कहती थी न कि मेरा बेटा ऐसा कभी नहीं कर सकता, वह गुरप्रीत से सच्ची मोहब्बत करता है, उस की हत्या नहीं कर सकता. लल्लन और उस के परिवार ने पुरानी रंजिश निकालने के  लिए मेरे बेटे को फंसाने की कोशिश की है.’’

आखिर लाश की हो गई शिनाख्त

अब थाना मनसादेवी पुलिस इस की जांच करने में जुट गई कि आखिर वह युवती कौन थी, जिस का अंतिम संस्कार लल्लन ने अपनी बेटी गुरप्रीत जान कर किया. थोड़ी कोशिश के बाद मनसादेवी पुलिस को मृतका के बारे में एक छोटी सी जानकारी मिली.

पता चला कि वह लाश सूरजपुर की रहने वाली किसी युवती की थी. पुलिस जब सूरजपुर पहुंची तो वहां मृतका का पिता ऋषिपाल मिला. मनसादेवी पुलिस ने ऋषिपाल से बात की तो उस ने बताया कि उस की बेटी आरती 26 अप्रैल की रात से लापता है. उस ने पुलिस में गुमशुदगी दर्ज करा दी है.

इस बार पुलिस कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी. पुलिस ने युवती की झुलसी हुई लाश के जो सैंपल सुरक्षित रखे हुए थे, उन से ऋषिपाल का डीएनए मैच करवा कर देखा तो वह मिल गया. इस से यह बात भी साबित हो गई कि मृतका ऋषिपाल की ही बेटी थी. अब इस बात की पुष्टि हो गई कि वह अधजला शव ऋषिपाल की 28 वर्षीय बेटी सुनीता उर्फ आरती का था.

सुनीता शादीशुदा महिला थी. उस की 11 साल की एक बेटी भी है. सुनीता की शादी लगभग 12 साल पहले हुई थी. पिछले 3-4 सालों से उस की अपने पति से अनबन चल रही थी, जिस कारण वह अपने मातापिता और भाई भाभी के साथ सूरजपुर में ही रह रही थी.

पुलिस ने मृतका के परिजनों से उस का मोबाइल नंबर ले कर उस के नंबर की काल डिटेल्स निकलवा कर जांच की. उस में एक ऐसा नंबर हाथ लगा, जिस से मृतका की घंटों तक बातें हुआ करती थीं. वह नंबर चेक टाउन के रहने वाले 26 वर्षीय आनंद नाम के युवक का था.

पुलिस ने आनंद के नंबर की जांच की तो 27 अप्रैल, 2019 को उस के फोन की लोकेशन भी उसी जगह की मिली, जहां सुनीता उर्फ आरती की झुलसी हुई लाश मिली थी. सारे सबूत मिल जाने के बाद 3 मई, 2019 को सीआईए इंचार्ज इंसपेक्टर अमन कुमार ने अपनी टीम के साथ मनीमाजरा, पीपली से आनंद और उस के छोटे भाई आजाद को गिरफ्तार कर लिया.

पूछताछ के दौरान आनंद ने बिना कोई नौटंकी किए अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उस ने ही सुनीता उर्फ आरती की हत्या की थी, क्योंकि वह उसे शादी करने के लिए ब्लैकमेल कर रही थी.

हालांकि बाद में ब्लैकमेल वाली बात झूठी साबित हुई थी. बहरहाल, उसी दिन डीएसपी कमल गोयल ने प्रैसवार्ता कर इस हत्याकांड का खुलासा कर दिया था. अगले दिन आनंद और आजाद को अदालत में पेश कर 2 दिन के पुलिस रिमांड पर ले लिया गया. रिमांड के दौरान की गई विस्तृत पूछताछ में इस हत्याकांड की कहानी कुछ इस प्रकार सामने आई.

जिस प्रकार मृतका सुनीता उर्फ आरती का अपने पति से विवाद चल रहा था और वह अपनी बेटी के साथ अपने भाई के घर अकेली रह रही थी, ठीक उसी तरह से आनंद भी अपनी पत्नी के साथ विवाद के चलते अकेला अपने मांबाप के साथ रह रहा था.

आज से लगभग 9 महीने पहले सुनीता अपनी भाभी के साथ किसी शादी में जाने के लिए लहंगा खरीदने सेक्टर-19 की मार्केट स्थित एक शोरूम में गई थी. आनंद भी उसी शोरूम पर काम करता था. यहीं दोनों की पहली मुलाकात हुई थी और पहली नजर में ही दोनों एकदूसरे को अपना दिल दे बैठे थे. दोनों ने अपने अपने फोन नंबर एकदूसरे को दे दिए थे और अकसर रात को फोन पर घंटों बातें किया करते थे.

अकेले रहने के कारण दोनों देहसुख पाने के लिए तड़प रहे थे. सो इस के बाद दोनों के बीच संबंध बन गए थे. पहले तो दोनों बाहर कहीं होटल आदि में मिल कर अपनी प्यास बुझा लिया करते थे, लेकिन बाद में मृतका आनंद के घर पीपली टाउन जाने लगी थी.

वैसे इन दोनों के संबंधों का दोनों के घर वालों को पता था. उन दोनों के बीच सब ठीकठाक ही चल रहा था. दोनों खुश भी थे और आपस में शादी कर लेना चाहते थे.

एक दिन अचानक सुनीता को पता चला कि वह गर्भवती हो गई है तो उस ने यह बात आनंद को बताते हुए कहा कि वह उस के बच्चे की मां बनने वाली है और अब हमें शादी कर लेनी चाहिए. आनंद को यह बात अच्छी नहीं लगी. उस ने बात टालते हुए कहा, ‘‘इस बारे में बाद में बात करेंगे.’’

सुनीता को उस का यह रूखा व्यवहार अच्छा नहीं लगा. कहां तो उस ने सोचा था कि बच्चे वाली बात सुन कर आनंद खुश हो जाएगा, लेकिन यहां तो बात उलटी ही निकली. बच्चे की बात को ले कर दोनों के बीच तनाव पैदा हो गया था. आरती जब भी आनंद से शादी की बात करती तो वह टाल देता था. इसी तरह तनाव भरे माहौल में समय बीतता गया और आरती के पेट में पल रहा बच्चा 5 माह का हो गया था.

अब तो आरती के शरीर में भी परिवर्तन आ गया था. दूसरी ओर आनंद शादी से साफ इनकार करने लगा था. दरअसल आनंद शुरू से ही शादी वादी के लिए तैयार नहीं था. वह बस मुफ्त में मजे लेने के पक्ष में था. उस का कहना था कि हम दोनों केवल अपने अपने शरीर की जरूरतें पूरी करते हैं. जबकि सुनीता इस मामले में गंभीर थी.

छली गई थी सुनीता

आनंद हर समय सुनीता पर इस बात का दबाव डालता था कि वह अबार्शन करवा कर इस मुसीबत से छुटकारा पा ले. एक दिन तो शादी को ले कर हो रही बहस के दौरान उस ने आरती से यहां तक कह दिया, ‘‘मैं कैसे मान लूं कि यह बच्चा मेरा ही है. क्या पता मेरे अलावा तुम्हारे संबंध न जाने किनकिन लोगों के साथ होंगे.’’

यह बात आरती को बहुत बुरी लगी. इस बात को ले कर दोनों में काफी नोकझोंक हुई. आनंद सुनीता से अपना पीछा छुड़ाने की पहले से ही योजना बना चुका था. अब उसे अपनी योजना को अमली जामा पहनाना था. 26 अप्रैल को दोनों की फोन पर शादी वाली बात को ले कर काफी बहस हुई. अंत में आनंद ने उसे रात 8 बजे घर पर मिलने के लिए बुलाया.

जब सुनीता वहां पहुंची तो आनंद के साथ उस का छोटा भाई आजाद भी था. आनंद ने फिर से उसे गर्भपात कराने के लिए कहा, जबकि सुनीता किसी भी कीमत पर गर्भपात कराने के लिए तैयार नहीं थी. वह अपनी बात पर अड़ी थी. इसे ले कर आनंद और सुनीता के बीच झगड़ा हो गया.

आनंद ने सुनीता पर अबार्शन का दबाव बनाने के लिए गुस्से में आ कर कई थप्पड़ मारे. इस पर सुनीता ने गुस्से में आ कर अपना गला अपनी चुन्नी से दबा लिया, जिस से वह बेहोश हो कर जमीन पर पड़ी थी. तभी दोनों भाइयों ने वह चुन्नी और खींच दी, जिस से उस का गला घुटने से मौत हो गई और उस की जीभ भी बाहर निकल आई. इस के बाद आनंद ने चाकू से पेट और आसपास के हिस्से में 3 वार किए.

हत्या करने के बाद दोनों भाइयों ने सुनीता के शव को जूट की बोरी में डाला और लाश को सुनीता की ही एक्टिवा पर अगले हिस्से में रख लिया. मनीमाजरा से चल कर दोनों भाई मनसादेवी थाने के क्षेत्र में पहुंचे, जहां उन्होंने सुनीता का शव झाडि़यों में डाल दिया. वहां घुप्प अंधेरा था और जगह भी एकदम सुनसान थी.

लाश को ठिकाने लगाने के लिए उन्हें यह जगह ठीक लगी. इस के बाद दोनों भाई मनीमाजरा स्थित पैट्रोल पंप पर पहुंचे, जहां उन्होंने एक्टिवा की टंकी फुल करवाई और वापस लाश के पास पहुंच गए.

एक्टिवा की टंकी से पैट्रोल निकाल कर उन्होंने लाश पर छिड़का और आग लगा कर वहां से अपने घर चले आए. यह बात 26-27 अप्रैल की रात की है. हालांकि आरोपियों ने अपनी तरफ से हत्या का कोई सबूत नहीं छोड़ा था, फिर भी पुलिस मोबाइल डिटेल्स के सहारे दोनों हत्यारोपियों तक पहुंच ही गई.

दोनों भाइयों से पूछताछ करने के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें 2 दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया.

रिमांड अवधि के दौरान सीआईए पुलिस ने मृतका की एक्टिवा और हत्या में प्रयुक्त चाकू भी बरामद कर लिया. मामले की तफ्तीश चल रही है. पुलिस महिला की हत्या के आरोपी आनंद और आजाद को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है.

पुलिस को संदेह है कि इस हत्याकांड में कोई और भी शामिल हो सकता है. पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है. इस के अलावा पुलिस यह भी जांच कर रही है कि 38 दिनों तक गुरप्रीत आखिर कहां और किस के साथ रही थी.

बलात्कारियों को मिली अंतिम सांस तक उम्रकैद

31अगस्त, 2018 को चंडीगढ़ के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश पूनम आर. जोशी की अदालत में कुछ ज्यादा ही गहमागहमी थी. अदालत की काररवाई शुरू होने से पहले ही वकील, कई सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, पत्रकार वगैरह कोर्टरूम में पहुंच चुके थे.

इस फास्टट्रैक कोर्ट में उस दिन एक ऐसे केस का फैसला सुनाया जाना था, जिस की चर्चा पंजाब में ही नहीं बल्कि पूरे देश में हुई थी. मामले के मीडिया में चर्चित बने रहने की वजह से केस की सुनवाई फास्टट्रैक कोर्ट में हुई थी. मात्र 122 दिनों में कोर्ट ने पूरी सुनवाई पूरी कर आरोपियों को 27 अगस्त को दोषी ठहरा कर 31 अगस्त को फैसला सुनाने का दिन मुकर्रर कर दिया था.

माननीय न्यायाधीश पूनम आर. जोशी निर्धारित समय पर कोर्ट में पहुंचीं. उन्होंने सब से पहले केस की फाइल पर नजर डाली. फिर सामने कटघरे की तरफ देखा. तीनों दोषी मोहम्मद इरफान, किस्मत अली और मोहम्मद गरीब कटघरे में मुंह लटकाए खड़े थे. उन्हें शायद इस बात का अंदेशा हो गया था कि अदालत उन्हें सख्त सजा ही सुनाएगी, इसलिए उन के चेहरों पर हवाइयां उड़ी हुई थीं.

अदालत का फैसला जानने से पहले उस मामले के बारे में जान लिया जाए तो बेहतर होगा, जिसे सौल्व करने के लिए पंजाब पुलिस ने रातदिन एक कर दिया था. चंडीगढ़ के विभिन्न थानों के तेजतर्रार पुलिस अधिकारियों के अलावा इस मामले के इनवैस्टीगेशन में क्राइम ब्रांच और साइबर सेल का भी सहयोग लिया गया था.

बात 17 नवंबर, 2017 की है. देहरादून निवासी 21 वर्षीय रमा शाम के करीब 7 बजे चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित कोचिंग सेंटर से अपनी कोचिंग क्लास खत्म कर के जैसे ही बाहर निकली, उस के घर वालों का देहरादून से फोन आ गया. वह फोन पर बातें करते हुए औटो पकड़ने के लिए मेनरोड पर स्थित बसस्टाप पर पहुंच गई.

फोन पर बात करते करते ही उस ने औटो रुकवाया. उस के बाद वह औटो में बैठ गई. औटो में पहले से ही 2 सवारियां बैठी हुई थीं, जिन की ओर रमा ने ध्यान नहीं दिया था. वह फोन पर बातें करने में व्यस्त थी.

रमा चंडीगढ़ की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करती थी. नौकरी के अलावा उस ने सेक्टर-37 के एक कोचिंग सेंटर में कोचिंग लेनी भी शुरू की थी. उस का कोचिंग में वह तीसरा दिन था. कुछ दूर आगे चलने के बाद औटो ड्राइवर ने पैट्रोल भरवाने की बात कहते हुए औटो सेक्टर-42 की ओर मोड़ दिया.

रमा ने वहीं उतारने की बात कही तो औटो ड्राइवर ने अपनी बेटी की बीमारी की बात कह कर उसे औटो से न उतरने को कहा. फलस्वरूप वह औटो में ही बैठी रही. इस दौरान औटो ड्राइवर उसे बच्ची बच्ची कह कर अपनी बेटी और उस की बीमारी की कहानी सुना कर सांत्वना जुटाता रहा.

बाद में सेक्टर-42 स्थित पैट्रोल पंप के पास आ कर औटो रुक गया. औटो ड्राइवर और दोनों सवारियां औटो को धक्का मार कर अंदर ले गए थे, क्योंकि औटो में पैट्रोल खत्म हो गया था.

औटो में पैट्रोल भरवा कर ड्राइवर ने सेक्टर-43 से यू टर्न लिया. सेक्टर-53 पहुंच कर ड्राइवर ने औटो को स्लिप रोड पर ले लिया. कुछ दूर आगे जा कर ड्राइवर ने औटो खराब होने का नाटक करते हुए औटो रोक लिया.

ड्राइवर ने औटो खराब होने की बात कही, तो रमा औटो से उतर गई और ड्राइवर को पैसे देने लगी. वह कोई दूसरा औटो पकड़ कर जल्द जाना चाहती थी, क्योंकि पैट्रोल वगैरह के चक्कर में उस का काफी समय बरबाद हो चुका था और उसे घर जाने की जल्दी थी.

रमा औटो ड्राइवर को किराए के पैसे देने ही वाली थी कि पीछे बैठे दोनों युवकों ने उसे औटो के अंदर खींच लिया. यह देख ड्राइवर ने औटो दौड़ा दिया और एक सुनसान जगह पर ले गया. रमा ने विरोध करते हुए शोर मचाना चाहा तो युवकों ने उस का मुंह बंद कर दिया, जिस से वह शोर नहीं मचा सकी.

सुनसान जगह पर पहुंचने के बाद तीनों रमा को औटो से निकाल कर पास के जंगली एरिया में ले गए. वहां तीनों ने मिल कर उस के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. दुष्कर्म के बाद उन्होंने रमा को चाकू दिखाते हुए चुप रहने की धमकी दी. इस से वह बुरी तरह डर गई.

वारदात को अंजाम देने के बाद वे तीनों रमा को छोड़ कर वहां से भाग निकले थे. साथ ही वे रमा का मोबाइल भी ले गए थे. रमा लड़खड़ाते कदमों से किसी तरह मेन रोड पर पहुंची और उस ने एक बाइक सवार को रोक कर अपनी आपबीती सुनाई. उस बाइक सवार की मदद से उस ने फोन द्वारा अपने साथ घटी घटना की सूचना पुलिस को दी.

सूचना मिलते ही सेक्टर-36 के एसएचओ इंसपेक्टर नसीब सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. वह रमा को सेक्टर-16 के सरकारी अस्पताल ले गए. रमा गहरे सदमे में थी.

पुलिस हुई सक्रिय

मामला एक छात्रा से संबंधित था, इसलिए खबर मिलते ही डीएसपी (साउथ) और एसएसपी नीलांबरी विजय जगदले तुरंत अस्पताल पहुंच गईं.

डाक्टरों ने बताया कि रमा सदमे में तो है लेकिन उस की हालत खतरे से बाहर है. रमा के बयानों के आधार पर पुलिस ने 3 अज्ञात लोगों के खिलाफ सामूहिक दुराचार का मामला भादंवि की धारा 376(डी), 376(2) जी और 506 के अंतर्गत दर्ज कर लिया. देहरादून में मौजूद रमा के घर वालों को भी फोन से इस मामले की सूचना दे दी गई थी.

रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने तुरंत पूरे शहर में अलर्ट जारी कर दिया और चंडीगढ़ से बाहर जाने वाली हरियाणा-पंजाब और हिमाचल की सीमाओं को सील कर दिया गया. उसी रात रमा की निशानदेही पर उस पैट्रोल पंप की सीसीटीवी फुटेज निकाल कर चैक की गई और रमा को साथ ले कर पूरा क्राइम सीन रीक्रिएट किया गया.

दरअसल, रमा चंडीगढ़ में नई थी. उसे रास्तों की पूरी जानकारी भी नहीं थी, इसीलिए औटो ड्राइवर उसे बहका कर गलत रास्ते पर ले गया था. सीसीटीवी फुटेज से पुलिस को कुछ खास हाथ नहीं लगा. ऐसा लगता था जैसे अपराधियों ने इस घटना को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया था.

औटो की आगेपीछे की नंबर प्लेट को 2 युवकों ने अपने हाथों से ढक रखा था. केवल एक युवक का ही अस्पष्ट चेहरा दिखाई दे रहा था. पुलिस ने उसी अस्पष्ट चेहरे को ले कर अपनी जांच आगे बढ़ानी शुरू कर दी.

अगले दिन इस घटना को ले कर पूरे शहर में हंगामा खड़ा हो गया. इस मामले को दिल्ली के निर्भया कांड से जोड़ कर देखा जाने लगा. स्कूलों कालेजों के छात्रछात्राएं, समाजसेवी संस्थाएं और राजनीतिक दल सड़कों पर उतर आए. आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर सजा देने की मांग उठने लगी.

विधानसभा में भी पुलिस की नाकामी और इस घटना की निंदा की गई. विपक्ष ने जम कर हंगामा किया. उसी दिन यानी 18 नवंबर को सीआरपीसी की धारा 164 के तहत पीडि़ता रमा के अदालत में मजिस्ट्रैट के समक्ष बयान दर्ज करवाए गए.

रमा ने मजिस्ट्रैट को पूरा घटनाक्रम विस्तार से बता दिया. उस ने यह भी दरख्वास्त की कि मीडियाकर्मियों को उस से दूर रखा जाए. रमा की अपील पर मजिस्ट्रैट ने पुलिस को आदेश दिया कि इस मामले से जुड़ा कोई भी दस्तावेज लीक नहीं होना चाहिए.

एसएसपी नीलांबरी विजय जगदले ने आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने के लिए क्राइम ब्रांच, स्पैशल सेल और साइबर क्राइम सेल को अलर्ट करने के साथ सभी थानों के एसएचओ और पूरी फोर्स को इस काम पर लगा दिया.

चंडीगढ़ पुलिस का पूरा अमला लगा आरोपियों को ढूंढने में

उन्होंने यह भी आदेश दिया कि सभी अफसर अपने अपने एंगल से इस केस पर काम करते हुए आरोपियों तक पहुंचें. साथ ही उन्होंने थाना सेक्टर-36 के एसएचओ इंसपेक्टर नसीब सिंह व अन्य थानों के तेजतर्रार इंसपेक्टर रामरतन, इंसपेक्टर रंजीत सिंह, इंसपेक्टर बलदेव, इंसपेक्टर आर.आर. शर्मा के नेतृत्व में कई टीमें बना कर आरोपियों की तलाश शुरू करवा दी.

इस के अलावा कई डीएसपी और इंसपेक्टरों को भी इस केस पर लगाया गया. पुलिस हर एंगल से जांच कर रही थी. पुलिस ने सीसीटीवी में कैद एक आरोपी के चेहरे को लोकल टीवी, सोशल मीडिया पर दिखा कर उसे पकड़वाने में सहयोग की अपील की. साथ ही गली गली में उस के पोस्टर भी चिपकवा दिए गए, पर इतना कुछ करने के बावजूद घटना के 24 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली ही रहे.

पुलिस इस एंगल पर भी काम कर रही थी कि कहीं यह औटो ड्राइवरों का कोई गैंग तो नहीं जो मौका देख अकेली युवतियों को पकड़ कर उन से बलात्कार करता है. क्योंकि 12 सितंबर, 2016 को भी एक ऐसी ही वारदात हुई थी.

इस मामले में कालसेंटर में काम करने वाली युवती ने सेक्टर-34 से अपने घर जाने के लिए औटो लिया था. औटो में 2 लोग पहले से ही सवार थे. ड्राइवर सहित 3 लोगों ने उस युवती के साथ सामूहिक दुराचार किया था. इस केस में 6 दिन बाद औटो ड्राइवर तो पकड़ा गया था पर बाकी के 2 लोग अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर थे.

अगस्त, 2016 को ही मिस्र की रहने वाली एक युवती से औटो में दुष्कर्म का प्रयास हुआ था, जिस का आरोपी पकड़ा गया था. इसी तरह 24 मार्च, 2017 को एक युवती के साथ चलते औटो में दुष्कर्म का प्रयास किया गया था. उस युवती ने किसी तरह औटो से कूद कर अपनी जान और इज्जत बचाई थी. इस केस का दोषी भी अभी तक नहीं पकड़ा गया था. इन सब मामलों को देखते हुए पुलिस इस एंगल पर भी काम कर रही थी. सैकड़ों औटो ड्राइवरों से पूछताछ की गई.

इस के अलावा आसपास के हिस्ट्रीशीटरों से भी पूछताछ की गई पर नतीजा शून्य ही रहा. इस घटना के 4 दिन बीत जाने पर भी जब पुलिस के हाथ कोई सुराग नहीं लगा तो चंडीगढ़ पुलिस ने 21 नवंबर को ईनाम के पोस्टर छपवा कर गली गली में चिपकवा दिए. पुलिस ने आरोपी औटो ड्राइवर के बारे में या इस केस से संबंधित कोई भी जानकारी देने वाले को एक लाख रुपए का ईनाम देने की घोषणा की थी.

देर से ही सही, मिल गई सफलता

दिनरात की भागदौड़ के बाद आखिर 7 दिन बाद पुलिस को इस मामले में सफलता मिली. सेक्टर-49 की थाना पुलिस ने जीरकपुर निवासी मोहम्मद इरफान को चंडीगढ़ से ही गिरफ्तार कर लिया. यह वही औटो ड्राइवर था, जिस के औटो में रमा बैठी थी.

इस के बाद पुलिस ने उस की निशानदेही पर 28 नवंबर, 2017 को अन्य दोनों अभियुक्तों मोहम्मद गरीब और किस्मत अली उर्फ पोपू को उत्तर प्रदेश स्थित उन के पैतृक घर अमेठी और फैजाबाद से गिरफ्तार किया. पुलिस उन के घर में इंश्योरेंस एजेंट बन कर पहुंची थी और उन की पहचान होने पर उन्हें उन के घर से ही धर दबोचा था.

25 नवंबर को पीडि़ता रमा ने मजिस्ट्रैट के सामने मुख्य अभियुक्त औटो ड्राइवर मोहम्मद इरफान की पहचान कर ली थी. पहचान हो जाने के बाद पुलिस इरफान को अदालत में पेश कर उसे रिमांड पर लेना चाहती थी. लेकिन उसी समय उस ने खिड़की का कांच तोड़ कर अपने पेट पर 3-4 वार कर आत्महत्या करने का प्रयास किया. नतीजतन उसे अस्पताल में भरती करवाया गया.

पुलिस ने मोहम्मद गरीब और किस्मत अली की भी शिनाख्त मजिस्ट्रैट के सामने करवाई. पीडि़ता ने उन्हें भी पहचान लिया. इस मामले में पुलिस ने अभियुक्तों की पहचान से ले कर डीएनए टेस्ट तक कराने के बाद अपनी सारी काररवाई पूरी कर तीनों अभियुक्तों को अदालत पर पेश कर जेल भेज दिया था. अभियुक्तों को जेल भेजने के बाद 21 फरवरी, 2018 को पुलिस ने तीनों अभियुक्तों के खिलाफ अदालत में चालान भी दाखिल कर दिया.

13 मार्च, 2018 को पुलिस ने रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में मोहम्मद इरफान के अपराध स्वीकार करने के बाद दिसंबर 2016 को काल सेंटर में काम करने वाली एक युवती से गैंगरेप मामले में भी उसे आरोपी बनाया. 23 अप्रैल, 2018 को औटो गैंगरेप के तीनों दोषियों पर अदालत में आरोप तय किए गए और 2 मई, 2018 को इस केस का ट्रायल फास्टट्रैक कोर्ट में शुरू हुआ.

8 मई, 2018 को पीडि़ता रमा ने अदालत में अपना बयान दर्ज करवाया और तीनों अभियुक्तों के खिलाफ गवाही भी दी. 23 मई, 2018 को तीनों आरोपियों के डीएनए टेस्ट की सीएफएसएल रिपोर्ट अदालत में सौंपी गई. रिपोर्ट पौजिटिव थी. फिर पहली अगस्त, 2018 को तीनों दोषियों के सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज हुए.

फास्टट्रैक कोर्ट ने 122 दिनों में दिया फैसला

कोर्ट ने आरोपियों को अपनी बात रखने का मौका दिया. अदालत की काररवाई तेज गति से चल रही थी. 21 अगस्त, 2018 को इस केस की अंतिम बहस के बाद केस का ट्रायल पूरा हो गया था. अतिरिक्त जिला न्यायाधीश पूनम आर. जोशी ने 27 अगस्त, 2018 को तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया और बताया कि इस केस का फैसला 31 अगस्त को सुनाया जाएगा.

फैसला जानने के लिए शहर के तमाम लोग 31 अगस्त, 2018 को अदालती काररवाई शुरू होने से पहले ही विशेष अदालत में पहुंच गए थे. जैसे ही माननीय जज एडीजे पूनम आर. जोशी अपनी सीट पर आ कर बैठीं तो कोर्टरूम में सन्नाटा छा गया. सभी की निगाहें माननीय जज पर ही लगी थीं. उन्होंने कहा कि दोषियों ने ऐसा अपराध किया है जिस की सजा इन्हें अवश्य मिलनी चाहिए.

तमाम गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर अदालत ने मोहम्मद इरफान, किस्मत अली और मोहम्मद गरीब को भादंवि की धारा 376(डी) सामूहिक दुराचार और 506 आपराधिक धमकी के तहत दोषी करार देते हुए अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

विशेष अदालत ने 122 दिनों में ट्रायल समाप्त करते हुए सजा के अलावा तीनों मुजरिमों पर अलगअलग 2 लाख 5 हजार रुपए का जुरमाना भी लगाया. जुरमाना राशि में से 2-2 लाख यानी 6 लाख रुपए पीडि़ता को बतौर मुआवजा देने के आदेश दिए.

पुलिस ने मोहम्मद इरफान, मोहम्मद गरीब और किस्मत अली उर्फ पोपू के खिलाफ आईपीसी की धारा 376(डी), 376(2)जी और 506 के तहत केस दर्ज किया था. हालांकि बाद में पुलिस ने तीनों के खिलाफ चार्जशीट आईपीसी की धारा 376(डी) सामूहिक दुराचार और 506 आपराधिक धमकी देने के तहत दायर की थी. इन्हीं दोनों धाराओं में अदालत में ट्रायल चला था. इस केस में पुलिस की ओर से कुल 19 सरकारी गवाह पेश किए गए, जिन्होंने अदालत में अभियुक्तों के खिलाफ गवाही दी थी.

इस केस का ट्रायल फास्टट्रैक कोर्ट में 122 दिनों तक चला. शुक्र है कि यह फास्टट्रैक कोर्ट थी, जिस में इतनी जल्दी न्याय पाना आसान हुआ. अगर साधारण कोर्ट होती तो 122 दिनों की जगह 122 महीने या फिर साल भी लग सकते थे. आए दिन बच्चियों से ले कर वरिष्ठ महिला नागरिकों तक, हर उम्र हर तबके की औरतों का बलात्कार ब्रेकिंग न्यूज बनता है. मीडिया में आक्रोश बढ़ता है तब कहीं जा कर एकाध केस में फास्टट्रैक कोर्ट की घोषणा की जाती है.

जब हम अपने देश में बुलेट ट्रेन का संकल्प कर रहे हैं तो न्याय की बुलेट ट्रेन क्यों नहीं चल सकती. न्याय में देरी अपने आप में अन्याय है. इस घातक विलंब में कई मूल मसले कुचल दिए जाते हैं. अगर अपराधियों के खिलाफ त्वरित कानूनी काररवाई अमल में लाई जाए तो निश्चित ही अपराधियों में कानून का डर बैठेगा.

—मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पीडि़ता का नाम बदला गया है.

धोखे में लिपटी मौत ए मोहब्बत