UP Crime News : कैंची से कत्ल – दूसरे प्रेमी से करवाया पहले का मर्डर

UP Crime News : सोनू जानती थी कि अमीन के पद पर कार्यरत आशीष शुक्ला शादीशुदा ही नहीं बल्कि 2 बच्चों का पिता है. इस के बावजूद लालची सोनू ने उसे अपने प्यार के जाल में फांस लिया. इसी दौरान महत्त्वाकांक्षी सोनू ने ऐसी चाल चली कि…

नवंबर 2020 माह की 28 तारीख थी. जनपद अंबेडकरनगर के मालीपुर थाना क्षेत्र में मझुई नदी के नेमपुर घाट पर किसी अज्ञात व्यक्ति की लाश पड़ी हुई थी. सुबहसवेरे घाट पर पहुंचे लोगों ने लाश देखी तो कुछ देर में वहां देखने वालों का तांता लग गया. उसी दौरान किसी ने इस की सूचना मालीपुर थाने में फोन कर के दे दी. सूचना पा कर थानाप्रभारी विवेक वर्मा पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. लाश पौलिथिन में लिपटी हुई थी. मृतक की उम्र लगभग 43-44 साल थी. उस के गले पर किसी तेज धारदार हथियार से वार किए जाने के निशान मौजूद थे. आसपास का निरीक्षण करने पर कोई सुबूत हाथ नहीं लगा. अनुमान लगाया गया कि हत्या कहीं और कर के लाश वहां फेंकी गई है.

वहां मौजूद लोगों में से कोई भी लाश की शिनाख्त नहीं कर सका. मौके की काररवाई निपटाने के बाद थानाप्रभारी वर्मा ने लाश पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दी. यह बात 28 नवंबर, 2020 की है. थाने आ कर थानाप्रभारी विवेक वर्मा ने जिले के समस्त थानों में दर्ज गुमशुदगी के बारे में पता किया तो अकबरपुर थाने में 45 वर्षीय आशीष शुक्ला नाम के व्यक्ति की गुमशुदगी दर्ज होने की बात पता चली. गुमशुदगी आशीष के साथ लिवइन में रहने वाली सोनू नाम की युवती ने दर्ज कराई थी. सोनू को बुला कर लाश की शिनाख्त कराई गई तो उस ने उस की शिनाख्त आशीष के रूप में की. सोनू ने पूछताछ में बताया कि एक दिन पहले देर रात किसी का फोन आया था, जिस के बाद आशीष घर से चले गए थे. आज उन की लाश मिली.

पता चला कि आशीष लखीमपुर जिले की कोतवाली सदर अंतर्गत कनौजिया कालोनी में रहता था. आशीष अंबेडकरनगर में अमीन पद पर कार्यरत था और कोतवाली शहर के मुरादाबाद मोहल्ले में किराए के मकान में रहता था. उस के साथ उस की कथित पत्नी सोनू शुक्ला रहती थी. लखीमपुर में आशीष की पत्नी राखी और बच्चे रहते थे. राखी को पति की लाश मिलने की सूचना मिली तो वह तुरंत अंबेडकरनगर पहुंच गई. मालीपुर थाने में उस ने दी तहरीर में पति की हत्या का आरोप सोनू शुक्ला और उस के 3 साथियों विवेक, विकास पर लगाया. राखी की तहरीर के आधार पर थानाप्रभारी विवेक वर्मा ने सोनू और उस के साथियों के खिलाफ भादंवि की धारा 302/201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

30 नवंबर को थानाप्रभारी ने सोनू को हिरासत में ले कर पूछताछ की तो थोड़ी सख्ती करने पर वह टूट गई और आशीष की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. उस ने बताया कि आशीष की हत्या में उस के प्रेमी आनंद तिवारी, उस के साथी मूलसजीवन पांडेय और राजीव कुमार तिवारी उर्फ राजू ने साथ दिया था. पूछताछ के बाद पुलिस ने उसी दिन आनंद और मूल सजीवन को गिरफ्तार कर लिया गया.  उन सभी से पूछताछ के बाद आशीष की हत्या की जो कहानी सामने आई, इस प्रकार थी—

आशीष शुक्ला लखीमपुर खीरी क्षेत्र में एलआरपी रोड पर स्थित कनौजिया कालोनी में रहते थे. 18 वर्ष पहले उन का विवाह राखी से हुआ था. राखी काफी सरल स्वभाव की थी. उस ने आते ही आशीष की जिंदगी को महका दिया था. आशीष भी सरल स्वभाव की राखी को हमसफर के रूप में पा कर काफी खुश हुआ. कालांतर में राखी ने एक बेटे आयुष (17 वर्ष) और बेटी अर्चिता (12 वर्ष) को जन्म दे दिया. आयुष के जन्म के बाद 2006 में आशीष की नौकरी अमीन के पद पर लग गई. वह अंबेडकरनगर में ही कोतवाली शहर के मुरादाबाद मोहल्ले में किराए पर कमरा ले कर रह रहा था. जब सब कुछ अच्छा चल रहा होता है, कभीकभी तभी अचानक से जिंदगी में ऐसा खतरनाक मोड़ आ जाता है कि इंसान न संभले तो सब कुछ तहसनहस हो जाता है.

आशीष की जिंदगी में भी सब कुछ अच्छा चल रहा था कि जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया कि उस की जिंदगी दूसरे रास्ते पर चल पड़ी. वह रास्ता उस के और उस के परिवार के लिए कितना खतरनाक होने वाला था, आशीष को इस का बिलकुल आभास नहीं था. अंबेडकरनगर में काम के दौरान उस की मुलाकात सोनू नाम की युवती से हुई. 27 वर्षीय सोनू इब्राहिमपुर थाना क्षेत्र के बड़ा गांव की रहने वाली थी. उस के पिता विजय कुमार तिवारी की मृत्यु हो चुकी थी. सोनू 2 भाई व 3 बहनें थीं. सोनू काफी महत्त्वाकांक्षी थी. पिता के न रहने पर उस के विवाह होने में भी अड़चन आ रही थी. इसलिए उस ने अपने लिए खुद ही अच्छा हमसफर तलाश करने की ठान ली. इसी तलाश ने उसे आशीष शुक्ला तक पहुंचा दिया. आशीष एक तो सरकारी नौकरी करता था, साथ ही काफी स्मार्ट भी था.

सोनू ने उस की तरफ अपने कदम बढ़ाने शुरू कर दिए. सोनू ने आशीष के बारे में पूरी जानकारी जुटा ली. उसे यह भी पता था कि आशीष शादीशुदा है और 2 बच्चों का पिता है. लेकिन सोनू के लिए अच्छी बात यह थी कि उस की पत्नी और बच्चे लखीमपुर में रहते थे. आशीष को सोनू ने अपने रूपजाल में फांसना शुरू कर दिया. आशीष के साथ वह अधिक से अधिक समय बिताने लगी. उस के लिए खाना बना देती. घर में बना उस के हाथ का खाना खा कर आशीष को बड़ा अच्छा लगता था. वैसे आशीष कभी खुद खाना बना लेता था या होटल पर खा लेता था. सोनू अच्छी तरह जानती थी कि किसी भी मर्द के दिल तक पहुंचने का रास्ता उस के पेट से हो कर जाता है. भरपेट मनपसंद खाना मिलता तो आशीष सोनू की जम कर तारीफ करता. समय के साथ दोनों काफी नजदीक आने लगे.

आशीष अपनी पत्नी राखी को धोखा नहीं देना चाहता था, लेकिन सोनू का साथ पा कर वह दिल के हाथों ऐसा मजबूर हुआ कि वह अपने आप को रोक नहीं पाया और अपनी जिंदगी को दूसरे रास्ते पर ले गया. उस रास्ते पर सोनू बांहें फैलाए उस का इंतजार कर रही थी. अब सोनू हर दूसरेतीसरे दिन आशीष के कमरे पर ही रुकने लगी. रुकती तो खाना बनाने के साथ ही बाकी काम भी वह कर देती थी. सोनू उस के साथ ऐसा व्यवहार करती जैसे उस की पत्नी हो. आशीष को यह सब काफी अच्छा लगता. एक रात जब दोनों बैठे बातें कर रहे थे तो आशीष ने उस से कह दिया, ‘‘सोनू तुम मेरा बहुत खयाल रखती हो. इतना खयाल तो सिर्फ पत्नी ही रख सकती है. तुम मेरी पत्नी न होते हुए भी पत्नी जैसा खयाल रख रही हो.’’

‘‘तारीफ के लिए शुक्रिया जनाब. आप को इस बात का पता तो चला कि मैं आप का कितना खयाल रखती हूं. मैं तो अभी तक यही सोचती थी कि न जाने कब आप को पता चलेगा और कब मैं अपने दिल का हाल बयां कर पाऊंगी.’’ कह कर सोनू ने अपनी नजरें झुका लीं.

‘‘क्या मतलब…’’ आशीष ने उस के चेहरे पर नजरें गड़ा कर पूछा, ‘‘कहना क्या चाहती हो?’’

‘‘अब इतने भी अंजान नहीं हो तुम कि इस का क्या मतलब ही न जानते हो. जो मैं तुम्हारा हर समय हरदम खयाल रखती हूं, वह भी एक पत्नी की तरह, तो क्यों रखती हूं.’’

‘‘तो तुम ही खुल कर बता दो कि तुम्हें मेरा इतना खयाल क्यों है.’’ उस ने पूछा.

‘‘मैं तुम को पसंद करती हूं तुम से प्यार करती हूं, इसीलिए मुझे तुम्हारा इतना खयाल रहता है. मुझे तुम्हारा साथ पसंद है इसीलिए हमेशा तुम्हारे पास ही बनी रहती हूं, लेकिन तुम हो कि मेरे जज्बातों की फिक्र ही नहीं है.’’ सोनू ने यह कह कर एक बार फिर अपनी नजरें झुका लीं और मायूसी का लबादा ओढ़ लिया. आशीष उस की बात पर मंदमंद मुसकराते हुए बोला, ‘‘मैं जानता था लेकिन जानबूझ कर अंजान बना था. तुम्हारे इतना सब करने पर कोई मूर्ख व्यक्ति भी समझ जाएगा कि तुम्हारे दिल में क्या है तो मैं तो पढ़ालिखा हूं. तुम्हारी जुबां से सुनना चाहता था, इसलिए अंजान बनने का नाटक कर रहा था.’’

यह सुनते ही सोनू की खुशी का पारावार न रहा, ‘‘मतलब मुझे इतने दिनों से बना रहे थे कि कुछ नहीं जानते हो. मुझे बता तो देते मैं तो वैसे भी तुम पर वारी जा रही थी.’’ कह कर सोनू आशीष के सीने से लग गई. उस की आंखों में अपनी जीत की खुशी चमक रही थी.

‘‘तुम पत्नी जैसे सब काम कर रही थीं लेकिन एक काम छोड़ कर…’’ शरारती अंदाज में तिरछी नजरों से आशीष ने सोनू को देख कर कहा. सोनू ने एक पल के लिए दिमाग पर जोर दे कर सोचा, फिर अगले ही पल आशीष की बात का मतलब समझते ही वह शरमा गई और उस के सीने में अपना मुंह छिपा लिया. उस के बाद उन के बीच शारीरिक रिश्ता भी कायम हो गया. आशीष और सोनू के बीच उम्र में 18 साल का अंतर था. सोनू 27 साल की थी तो आशीष 45 वर्ष का. सोनू आशीष के साथ उस की पत्नी बन कर रहने लगी. अपने नाम के आगे शुक्ला लगाने लगी. जिस से भी मिलती, बातें करती तो अपने आप को आशीष की पत्नी ही बताती. समय के साथ ब्याहता राखी को पता चल गया कि उस का पति आशीष सोनू नाम की किसी महिला के साथ रह रहा है.

पति आशीष से राखी ने बात की तो उस ने कह दिया कि जैसा वह सोच रही है वैसा कुछ नहीं है. काम के सिलसिले में वह उस के पास रह रही है. आशीष के साथ रहते सोनू उसे अपने वश में करने की पूरी कोशिश करती थी. मसलन किसी भी कागज/दस्तावेज में पत्नी के नाम की जगह आशीष उस का ही नाम डाले. कोई संपत्ति खरीदे तो उस के नाम से ही खरीदे. इस के लिए वह आशीष पर दबाव बनाती थी. आशीष उस की बात को नजरअंदाज कर देता था. सोनू के कहने पर ऐसा वह कर भी नहीं सकता था. लेकिन आशीष को अपनी बात न मानते देख कर सोनू नाराज हो जाती थी. अब उन दोनों में अकसर विवाद होने लगा. सोनू अपने भविष्य को ले कर चिंतित रहने लगी. आशीष से उस ने जिस वजह से रिश्ता बनाया, वह वजह उसे पूरी होती नहीं दिख रही थी.

आशीष का एक दोस्त था 23 वर्षीय आनंद तिवारी. आनंद अकबरपुर थाना क्षेत्र के सिंहमई कारीरात गांव में रहता था. उस के पिता रमेश तिवारी किसान थे. 3 भाइयों में वह सब से बड़ा था और अविवाहित था. आनंद तिवारी आशीष से मिलने उस के कमरे पर आता रहता था. आनंद भी काफी स्मार्ट और जवान था. सोनू से 4 साल छोटा था. आशीष तो दोनों से उम्र में काफी बड़ा था. आनंद से कुछ छिपा नहीं था, वह जानता था कि सोनू आशीष की पत्नी नहीं है, उसे केवल अपने पास रखे हुए है. उस से अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहा है. ऐसे में वह भी सोनू के नजदीक आने की जुगत में लग गया.

सोनू आशीष के द्वारा बात न मानने पर तनाव में रहती थी. ऐसे में आनंद उस के पास आता, उस से बातें करता, बातों के दौरान ही हलकाफुलका मजाक भी कर देता तो सोनू का मन बहल जाता. कुछ समय के लिए वह अपना सारा तनाव भूल जाती थी. सोनू भी उस से घुलनेमिलने लगी. दोनों एकदूसरे की चाहत को अपने प्रति समझ रहे थे. चाहत दिल में पैदा हुई तो अधिक समय साथ बिताने लगे. एक दिन आनंद आया तो सोनू चाय बनाने लगी. आनंद को शरारत सूझी तो वह चुपके से सोनू के पीछे पहुंच गया और अचानक चिल्ला दिया. सोनू हड़बड़ा गई. हड़बड़ाहट में वह पीछे मुड़ी तो आनंद को खडे़ पाया, वह मुसकरा रहा था.

सोनू उस की शरारत समझ गई. वह उसे मारने दौड़ी तो वह वापस हुआ तो आगे पलंग था. वह उस से टकराने से बचने के लिए रुका तो पीछे भागी सोनू उस से टकरा गई. दोनों आपस में टकराए तो एक साथ पलंग पर गिर गए. दोनों की सांसें एकदूसरे के चेहरे से टकरा रही थी तो दिल भी आपस में मिल गए. उस समय दोनों के दिल की धड़कनें काफी तेज थीं. तन सटे होने के कारण एकदूसरे के दिल की तेज धड़कनों को दोनों ही महसूस कर रहे थे. दोनों जुबां से तो कुछ नहीं कह रहे थे लेकिन आंखें बहुत कुछ कह रही थीं. आनंद सोनू को इतने नजदीक पा कर खुशी से भर उठा और बेसाख्ता बोला, ‘‘आई लव यू…आई लव यू, सोनू.’’

आनंद के इन मीठे बोलों ने सोनू के कानों को सुखद अनुभूति कराई. उस ने आंखें बंद कीं तो होंठ थिरक उठे, ‘‘आई लव यू टू आनंद.’’

इस के बाद उन के बीच शारीरिक रिश्ता कायम हो गया. सोनू को आनंद के साथ आनंद का सुखद एहसास हुआ. उस दिन के बाद उन के बीच संबंधों का सिलसिला अनवरत चलने लगा. अब सोनू आनंद के साथ जिंदगी बिताने के सपने देखने लगी थी. क्योंकि आशीष से अब उसे किसी प्रकार की उम्मीद नहीं रह गई थी. लेकिन आशीष की सरकारी नौकरी और संपत्ति का लालच उसे जरूर था. आनंद के साथ जिंदगी बिताने के लिए उसे आशीष की नौकरी और संपत्ति की जरूरत थी. वैसे भी इन चीजों को पाने के लिए सोनू ने काफी प्रयास किया था और समय भी बर्बाद किया था. वह ऐसे आसानी से सब छोड़ नहीं छोड़ सकती थी.

इसलिए उस ने आनंद से बात की तो आनंद के मन में भी लालच पैदा हो गया. सरकारी नौकरी और संपत्ति तभी हाथ लग सकती थी, जब आशीष जिंदा न रहे. इसलिए दोनों ने आशीष की हत्या करने का फैसला कर लिया. आशीष की हत्या में साथ देने के लिए आनंद तिवारी ने अपने 2 साथियों मूलसजीवन पांडेय निवासी गांव गंगापुर भुलिया जिला सुलतानपुर और राजीव कुमार तिवारी उर्फ राजू निवासी गांव भारीडीहा अंबेडकरनगर को तैयार कर लिया. मूलसजीवन और राजू दोनों ही अकबरपुर के आरडी लौज में काम करते थे और इस समय वहीं रह रहे थे.  27 नवंबर की रात 11 बजे के करीब सोनू और आशीष का विवाद हुआ. विवाद के बाद आशीष सो गया. सोनू ने आनंद को उस के साथियों के साथ बुला लिया.

आनंद अपनी बजाज पल्सर बाइक से दोनों साथियों को ले कर आशीष के कमरे पर पहुंचा. उन लोगों को आया देख कर सोनू ने धीरे से दरवाजा खोल दिया. तीनों अंदर आ गए. सोते समय आशीष के गले पर तेज धारदार चाकू व कैंची से कई प्रहार किए गए. आशीष चीख भी न सका और उस की सांसों की डोर टूट गई. आशीष को मारने के बाद उन्होंने उस की लाश एक पौलिथिन में लपेट कर उस की ही हुंडई इयान इरा कार में डाल दी और उसे मालीपुर थाना क्षेत्र में मझुई नदी के नेमपुर घाट पर फेंक आए. आने के बाद कार सुलतानपुर के दोस्तपुर थाना क्षेत्र में लावारिस हालत में छोड़ दी. अगले दिन सोनू ने अकबरपुर थाने जा कर आशीष की गुमशुदगी लिखाई.

लेकिन चारों का गुनाह छिप न सका. गिरफ्तार तीनों अभियुक्तों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू, कैंची, 5 मोबाइल फोन, पल्सर बाइक और आशीष की इयान कार बरामद कर ली. कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद तीनों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक 23 दिसंबर को थानाप्रभारी विवेक वर्मा ने चौथे अभियुक्त राजीव तिवारी उर्फ राजू को भी गिरफ्तार कर लिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

MP Crime News : हत्यारे ने पहचान छिपाने के लिए शव के साथ कौन सी घिनौनी करतूत की

MP Crime News : ममता तोमर एक साथ 2 प्रेमियों सुरेश उइके और सईद के साथ प्यार की पींगें बढ़ा रही थी. बाद में उस ने सुरेश के साथ लवमैरिज कर ली. लेकिन शादी के बाद भी उस का सईद के साथ चक्कर चलता रहा. इस का नतीजा…

30 सितंबर, 2020 की सुबह का वक्त था. होशंगाबाद जिले के थाना पथरोड़ा की थानाप्रभारी सुश्री प्रज्ञा शर्मा पुराने मामलों की फाइल पलट रही थीं. तभी डंडे का सहारा ले कर लगभग 90 वर्षीय एक बुजुर्ग धीरेधीरे उन के औफिस में दाखिल हुए. थानाप्रभारी ने बुजुर्ग को कुरसी पर बैठने का इशारा किया. बुजुर्ग ने अपना नाम रामदास बताते हुए कहा कि वह डोव गांव में रहता है और उस का 40 साल का बेटा सुरेश उइके गांव नानपुरा पंडरी में पत्नी ममता और 2 बच्चों के साथ रहता है. सुरेश रेलवे में वेल्डर है. वह रोज सुबह नौकरी पर अपनी मोटरसाइकिल से भौरा स्टेशन आताजाता था. लेकिन कल रात में वह काम से वापस नहीं लौटा और उस का मोबाइल भी बंद था.

वह उसे खोजने के लिए जब भौरा जा रहा था तो जंगल के रास्ते में उसे अपने बेटे की मोटरसाइकिल पड़ी दिखाई दी. जिस के पास कुछ दूरी पर एक पेड़ के नीचे उस की लाश पड़ी है. रामदास ने बताया कि किसी ने उन के बेटे का सिर कुचल कर उस की हत्या कर दी है. थानाप्रभारी प्रज्ञा शर्मा के सामने कई ऐसे सवाल थे जिन के उत्तर रामदास दे सकता था. लेकिन पहली जरूरत मौके पर पहुंचने की थी. इसलिए उन्होंने सब से पहले एसपी होशंगाबाद संतोष सिंह गौर और एसडीपीओ महेंद्र मालवीय को घटना की जानकारी दी. फिर वह पुलिस टीम ले कर मौके पर पहुंच गई. भौरा मार्ग से कुछ हट कर जंगल के अंदर सागौन के पेड़ के नीचे सुरेश की सिर कुचली लाश पड़ी थी.

लाश के पास ही खून से सना भारी पत्थर पड़ा था, जिस से जाहिर था कि उसी पत्थर को सुरेश के सिर पर मारा गया था, जिस से उस का पूरा भेजा बाहर निकल कर चारों तरफ बिखर गया था. सड़क पर पड़ी मोटरसाइकिल के पास भी खून के निशान थे. इस से पुलिस ने अनुमान लगाया कि संभवत: मोटरसाइकिल से घर लौट रहे सुरेश को हमलावरों ने पहले चलती बाइक पर हमला कर रोका होगा और फिर बाद में अंदर जंगल में ले जा कर उस की हत्या कर दी होगी. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के साथ ही रामदास की रिपोर्ट पर हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी. दूसरी तरफ मामले की गंभीरता देखते हुए एसपी संतोष सिंह गौर ने एसडीपीओ महेंद्र मालवीय के निर्देशन और पथरोड़ा थानाप्रभारी प्रज्ञा शर्मा के नेतृत्व में एक टीम गठित कर दी.

टीम में एएसआई भोजरात बरबडे, हेडकांस्टेबल सुरेंद्र मालवीय, अनिल ठाकुर, कांस्टेबल हेमंत, टिल्लू, विनोद, संजय आदि को शामिल किया गया. इस टीम ने मृतक सुरेश के बारे में गहन छानबीन की, जिस में पता चला कि सुरेश ने करीब 13 साल पहले कांदई कलां की रहने वाली ममता तोमर से प्रेम विवाह किया था. जबकि ममता के बारे में जानकारी मिली कि वह अपने एक रिश्तेदार के घर ड्राइवर की नौकरी करने वाले सईद खां से प्यार करती थी. मृतक सुरेश के पिता रामदास आर्डिनैंस फैक्ट्री में गार्ड की नौकरी करते थे. शादी के कुछ समय बाद सुरेश को रेलवे में वेल्डर की नौकरी मिल गई, जिस के बाद वह अपनी पत्नी ममता के साथ नानपुरा पंडरी में मकान बना कर रहने लगा था.

सुरेश की ड्यूटी भौरा और कीरतगढ़ रेल सेक्शन के बीच रहती थी, इसलिए वह रोज मोटरसाइकिल से भौरा आ कर रात लगभग 8 बजे ड्यूटी खत्म कर के घर लौट जाता था. सुरेश के साथियों से भी पूछताछ की गई, लेकिन उन्होंने बताया कि सुरेश सीधासच्चा आदमी था और उस की किसी से कोई रंजिश भी नहीं थी. कहानी में मोड़ तब आया, जब पुलिस ने मृतक के पिता रामदास से पूछताछ की. उन्होंने उस की हत्या का शक अपने बेटे की पत्नी ममता पर जाहिर किया. ससुर अपनी ही बहू पर खुद उसी के पति की हत्या करने का आरोप लगा रहा था. इसलिए उन के आरोप को हलके में नहीं लिया जा सकता था. थानाप्रभारी प्रज्ञा शर्मा ने मृतक की पत्नी ममता को पूछताछ के लिए थाने बुलाने के बजाए खुद गांव जा कर उस के बयान दर्ज करने की सोची.

दरअसल इस के पीछे थानाप्रभारी का इरादा गांव में ममता के बारे में लोगों से और जानकारी हासिल करना था. इस के लिए जब वह ममता के घर पहुंचीं तो वहां पहुंचते ही यह देख कर चौंकी कि ममता के घर के मुख्य दरवाजे के अलावा घर में कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे थे. सुरेश रेलवे मे मामूली सी नौकरी करता था. उस के पास करोड़ों की पुश्तैनी संपत्ति भी नहीं थी और न ही उस की किसी से कोई रंजिश की बात सामने आई थी. तो उस ने घर में कई सीसीटीवी कैमरे क्यों लगवाए. उन्होंने सोचा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि सुरेश की हत्या का संबंध उस के घर में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों से जुड़ा हो.

उन का यह शक उस वक्त और भी गहरा गया, जब उन्हें पता चला कि सुरेश ने ये कैमरे 10-12 दिन पहले ही लगवाए थे. इसलिए ममता के बयान दर्ज करने के बाद थानाप्रभारी प्रज्ञा शर्मा ने टीम के कुछ सदस्यों को गांव में ममता के बारे में जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी दे दी. पता चला कि ममता के मायके में रहने वाला सईद अक्सर उस समय ममता के घर आता था, जब सुरेश घर पर नहीं होता था. पुलिस को यह जानकारी भी मिली कि सुरेश के घर में कैमरे लगने के बाद से सईद को गांव में नहीं देखा गया. दूसरी जो सब से बड़ी बात सुनने में आई, वह यह कि कोई 4 महीने पहले ममता अचानक घर से लापता हो गई थी. वह करीब एक महीने बाद घर लौटी थी, जिस के कुछ दिन बाद सुरेश ने अपने घर में कैमरे लगवाए थे.

सुनने में आया था कि लापता रहने के दौरान ममता सईद खान के साथ सिवनी मालवा में रही थी. इस जानकारी के बाद ममता के साथ सईद भी शक के घेरे में आ गया, जो ममता के मायके का रहने वाला था. पुलिस टीम ने कांदई कलां में सईद की तलाश की तो वह गांव से गायब मिला. जब सईद के मोबाइल की काल डिटेल्स निकाली गई तो पता चला कि मृतक सुरेश की पत्नी ममता के साथ उस की लगातार लंबी बातें होती थीं. जिस दिन सुरेश की हत्या हुई उस दिन भी उस ने कई बार ममता से बात की थी.

दूसरी सब से बड़ी बात जो उस की काल डिटेल्स में निकल कर सामने आई, वह यह कि जिस समय सुरेश का कत्ल हुआ उस समय तक सईद का मोबाइल उसी लोकेशन पर था, जहां सुरेश की लाश मिली थी. इस से थानाप्रभारी प्रज्ञा शर्मा के सामने पूरी कहानी साफ हो गई. सईद की काल डिटेल्स से यह भी पता चला कि घटना के पहले कुछ दिनों तक सईद ने लगातार नया बस स्टैंड नंदूबाड़ा रोड सिवनी मालवा निवासी आशू उर्फ हसरत और अरबाज के साथ न केवल कई बार फोन पर बात की थी, बल्कि घटना के समय इन दोनों के मोबाइल भी सईद के साथ घटनास्थल पर ही मौजूद थे. इसलिए एसडीपीओ महेंद्र मालवीय के निर्देश पर पुलिस टीम ने इन तीनों की तलाश शुरू कर दी.

आरोपी फंसे शिकंजे में जिस से जल्द ही सईद को बैतूल के चिचोली थाना इलाके के मउपानी से और अरबाज आशू को सिवनी मालवा से हिरासत में ले लिया. पुलिस ने इन तीनों से सख्ती से पूछताछ की. पूछताछ में तीनों ने न केवल सुरेश की हत्या की बात स्वीकार की बल्कि इस में उस की पत्नी ममता के भी शामिल होने की बात बताई. पुलिस ने उन की निशानदेही पर घटना के समय पहने तीनों के रक्तरंजित कपड़े तथा उपयोग में लाई गई कुदाल, गला घोंटने में प्रयुक्त तार आदि भी बरामद कर सुरेश की पत्नी ममता को भी उस के गांव से गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद प्रेमी और पति को एक साथ खुश रखने वाली ममता द्वारा सुरेश की हत्या करवा देने की कहानी इस प्रकार सामने आई—

कांदई कला में रहने वाली ममता बचपन से ही अपने चंचल स्वभाव के लिए जानी जाती थी. बताते हैं कि मिडिल में पढ़ते समय ही उस का रंगरूप कुछ ऐसा निखार आया था कि देखने वाले उसे देख रीझ जाते थे. ममता के साथ स्कूल में गांव का रहने वाला सईद भी पढ़ता था. सईद ममता का दीवाना था. वह उस से दोस्ती कर उसे पाने के सपने देखता था. फिर नादान उम्र में ही ममता सईद के साथ प्रेम और देह के पाठ पढ़ने लगी थी. स्कूली पढ़ाई के बाद ममता ने आगे की पढ़ाई बंद कर दी. वह घर पर ही रहने लगी. उसी दौरान सुरेश उइके से उस के प्रेम संबंध हो गए. यह जानकारी जब सईद को हुई तो उसे झटका लगा. ममता के पिता गांव के बडे़ किसान थे.

गांव में रहने वाले ममता के रिश्ते के एक भाई ने खेतीकिसानी के काम के लिए सईद को बतौर टै्रक्टर ड्राइवर नौकरी पर रख लिया था. इस से सईद को ममता के आसपास रहने का मौका मिलने लगा. सईद बहुत शातिर था. उस का मकसद नौकरी के बहाने ममता से नजदीकियां बढ़ाना था, क्योंकि ममता उन दिनों सुरेश उइके से प्रेम की पींगें बढ़ा रही थी. सईद ने तिकड़म से जल्द ही ममता के पूरे परिवार का दिल जीत लिया. जिस से उस का उस के घर में बेरोकटोक आनाजाना शुरू हो गया. जब ममता को पता चला कि सईद उस की दीवानगी के चलते ही ड्राइवर की नौकरी करने आया है तो उस ने सईद की दीवानगी को भी हवा देनी शुरू कर दी.

वह पहले से ही प्यार के मामले में काफी अनुभवी थी. उस ने सईद को पूरी तरह से अपना दीवाना बना लिया. ममता एक ही समय में 2 प्रेमियों सईद और सुरेश को अपनी बांहों में प्रेम का झूला झुलाने लगी. इतना ही नहीं, उस ने सईद के संग निकाह और सुरेश के संग शादी करने का वादा भी कर रखा था जबकि वह जानती थी कि ये दोनों काम एक साथ नहीं हो सकते. बहरहाल, सईद के साथ उस का निकाह होना सुरेश के साथ शादी होने से ज्यादा मुश्किल था. इसलिए उस ने सईद को छोड़ कर सुरेश के साथ लवमैरिज कर ली.

संयोग से शादी के ठीक बाद सुरेश को रेलवे में नौकरी मिल गई, जिस के बाद वह नानपुर पंडरी में मकान बना कर अपनी पत्नी के साथ रहने लगा. बाद में ममता 2 बेटियों की मां बनी. उस की घरगृहस्थी ठीकठाक चल रही थी. सुरेश की ड्यूटी भौंरा और कीरतगढ़ के बीच थी, इसलिए वह गांव से रोज सुबह मोटरसाइकिल से आ कर शाम को वापस घर लौट आता था. दिन भर ममता घर में अकेली रहती थी. उस ने अपने इस खाली समय का उपयोग पुराने प्रेमी सईद को खुश करने के लिए करना शुरू कर दिया. वह पति के काम पर चले जाने के बाद सईद को अपने घर बुलाने लगी, जहां दोनों दिन भर वासना का खेल खेलते.

शाम को सुरेश के आने से पहले सईद अपने घर चला जाता. इस दौरान सईद ममता से किसी न किसी बहाने पैसा भी लेता रहता था. ममता ने रची गहरी साजिश ममता को सईद का आना अच्छा लगता था, इसलिए सईद के आते ही वह घर का दरवाजा बंद कर उस के साथ कमरे में कैद हो जाती थी. जल्द ही इस बात की चर्चा गांव में होने से बात सुरेश तक भी पहुंच गई. सुरेश ने एकाध बार इशारे में ममता से  इस बारे में बात की, जिस से ममता समझ गई कि अब सईद को घर बुलाने में खतरा है. इसलिए जब उस ने इस बारे में सईद से बात की तो उस ने उसे साथ भाग चलने को कहा. ममता सईद के साथ भागने को तैयार हो गई.

फिर 8 अगस्त, 2020 के दिन ममता को ले कर सईद सिवनी मालवा आ गया, जहां उस के दोस्त और रिश्तेदार अरबाज तथा आशू ने दोनों के रहने की व्यवस्था पहले से ही कर दी थी. ममता के भाग जाने से सुरेश पागल सा हो गया. उसे जरा भी भरोसा नहीं था कि उस के साथ प्रेम विवाह करने वाली ममता उसे और बच्चों को इस तरह से धोखा देगी. इस से सुरेश का दिल टूट गया. इधर एक महीने तक ममता द्वारा घर से लाए गए पैसों पर ऐश करने के बाद सईद ने उसे वापस सुरेश के पास भेज दिया. एक महीने बाद घर लौटी पत्नी को सुरेश अपनाना तो नहीं चाहता था, लेकिन बच्चों की खातिर उस ने ममता को माफ कर दिया. आगे ऐसा न हो, इसलिए सुरेश ने घर में कई सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए. वह ड्यूटी पर रहते हुए मोबाइल के माध्यम से घर पर नजर रखने लगा.

इस से सईद और ममता समझ गए कि अब उन का वासना का खेल खत्म हो गया है. इसलिए उन्होंने फोन पर चर्चा कर सुरेश का ही खेल खत्म करने की योजना बना ली, जिस में सईद ने अपने दोनों दोस्त अरबाज और आशू को भी शामिल कर लिया. फिर तीनों ने मिल कर 30 सितंबर, 2020 की रात ड्यूटी से लौट रहे सुरेश को रोक लिया और साथ लाए तार से गला घोंट दिया. फिर भारी पत्थर से उस का सिर कुचल दिया. सईद और उस की प्रेमिका ममता का सोचना था कि मामला शांत हो जाने के बाद वे दोनों फिर पहले की तरह अय्याशी कर सकेंगे. लेकिन पथरोड़ा थानाप्रभारी प्रज्ञा शर्मा ने 4 दिन में ही सभी आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया.

Love Crime News : पहले कोर्ट मैरिज की फिर सोते हुए बॉयफ्रेंड ने गला दबा दिया

Love Crime News : प्यार शब्द में भले ही दुनिया जहान की खुशियां सिमटी हों, लेकिन जब प्रेमीप्रेमिका का प्यार हकीकत के धरातल से टकराता है तो उस का अस्तित्व डगमगाने लगता है. कभीकभी तो शहद सा मीठा यही प्यार जहर बन जाता है. यही सिमरन और आमिर के साथ भी हुआ. सिमरन ने जिस आमिर को अपना…

सिमरन की प्रेम कहानी की शुरुआत ढाई साल पहले हुई थी. दिल्ली के शाहदरा जिले में मंडोली रोड पर हर्ष विहार थाना क्षेत्र में एक कालोनी है बुध विहार. इसी कालोनी की गली नंबर 12 के मकान नंबर 438 में रहता है मोहम्मद शरीफ और शाबरी बेगम का परिवार. शरीफ का कबाड़ खरीदनेबेचने का काम है. काम कबाड़ी का जरूर था, लेकिन आमदनी अच्छी थी. घर में कोई कमी नहीं थी, परिवार दिल खोल कर पैसा खर्च करता था. शरीफ व शाबरी की 5 औलादें थीं, 2 बेटे व 3 बेटियां. तीनों बेटियां बड़ी थीं उन से छोटे 2 बेटे थे. 2 बड़ी बेटियों की दिल्ली में ही अच्छे परिवारों में शादी हो चुकी थी. सिमरन बेटियों में सब से छोटी थी. उस से छोटे 2 भाई थे बड़ा फिरोज, उस से छोटा अजहर.

12वीं तक पढ़ी सिमरन की ढाई साल पहले कालोनी में हो रहे एक निकाह के वलीमा में जब आमिर से पहली बार आंख लड़ी थी तो वह उम्र का 20वां बसंत पार कर चुकी थी. वैसे तो उम्र की ये ऐसी दहलीज होती है जिसे लांघ कर लड़की यौवनांगी बनती है,  इस पड़ाव पर पहुंचते ही उसे दुनिया की हर चीज खूबसूरत नजर आने लगती है. देखने का नजरिया बदल जाता है. निहायत खूबसूरती का खजाना लिए सिमरन की जवानी एक नई अंगडाई ले रही थी. वैसे तो कुदरत ने उसे खूबसूरती की नियामत दिल खोल कर बख्शी थी लेकिन जब वह सजसंवर कर निकलती थी तो उस के तीखे नाकनक्श उस की बेइंतहा खूबसूरती को और ज्यादा बढ़ा देते थे.

उस दिन भी सिमरन की खूबसूरती कुछ ऐसी ही बिजलियां गिरा रही थी. वलीमा की उस पार्टी में सिमरन की निगाहें डीजे के फ्लोर पर बेहद आकर्षक ढंग से डांस कर रहे उस युवक पर अटकी थी जो मानों उसी के लिए डांस कर रहा हो. पहले प्यार की पहली खुशबू हालांकि सिमरन ने इस से पहले किस्से कहानियों में ही देखा सुना था कि मोहब्बत नाम की कोई चीज होती है. आखिर मोहब्बत है ही ऐसी चीज, जिसे सभी करना चाहते हैं. सिमरन को उस दिन पहली बार मुहब्बत का अहसास आमिर से बात कर के हुआ था. उस वलीमा फंक्शन में मौका मिलते ही आमिर ने उसे एक कोने में रोक कर पूछा, ‘हैलो जी, कैसा लगा हमारा डांस?’

एक अंजान युवक से इस तरह बात करते हुए सिमरन का दिल पहली बार इतनी तेजी से धड़का. उस की अटकी हुई सांसों को आमिर ने एक ही नजर में पढ़ लिया.

‘‘आप ने बताया नहीं.’’ आमिर ने फिर से वही सवाल किया ‘‘जी बहुत अच्छा… एकदम रितिक रोशन की तरह डांस करते हो आप.’’

सिमरन ने किसी तरह जवाब दिया.

‘‘आप का नाम जान सकता हूं.’’ आमिर ने पूछा.

‘‘सिमरन…’’ ना जाने कैसे और क्यूं  सिमरन के मुंह से अपने आप निकल गया. अगले ही पल उसे अपनी भूल का अहसास हुआ.

‘‘मुझे आमिर कहते हैं, यहीं गली नंबर 9 में रहता हूं मदीना मस्जिद के पास.’’ आमिर जो सिमरन से बातचीत करने के लिए बेताब था ने सिमरन की घबराहट व हिचकिचाहट को देख कर खुद ही बातचीत का सिलसिला शुरू कर दिया. ‘‘आप को पहले इस इलाके में नहीं देखा, आप शायद अपनी रिश्तेदारी में आई हैं.’’

‘‘नहीं…नहीं मैं भी यहीं की रहने वाली हूं 12 नंबर गली में घर है हमारा, जिन के यहां ये वलीमा है, अब्बू के दोस्त हैं.’’

सिमरन को मानों अपने उपर नियंत्रण ही नहीं था. आमिर जो भी सवाल कर रहा था, उस के मुंह से जवाब खुद निकल रहे थे. थोड़ीबहुत बातचीत और हुई. अचानक आमिर नाम के उस युवक ने सिमरन के हाथ से उस का मोबाइल ले लिया और उस पर अपना नंबर लगा कर घंटी मार दी. आमिर के मोबाइल पर सिमरन के नंबर की काल आ चुकी थी. ‘‘थैंक यू सिमरन… तुम से मिल कर बहुत अच्छा लगा… पहली बार कोई इतनी प्यारी लड़की मिली है जिस से दोस्ती करने का मन हो रहा है हम लोग फोन पर बात करते रहेंगे.’’

आमिर हवा के तेज झोंके की तरह आया और अपनी बात कह कर सिमरन को हक्काबक्का छोड़ कर चला गया तो सिमरन मानो सोते से जागी. सिमरन को उस दिन पहली बार लगा कि कहीं ये मुहब्बत तो नहीं है. क्योंकि उस ने सुना था कि मुहब्बत एक भावना है, जिस का एहसास धीरेधीरे होता है, कभी कभी यह मोहब्बत किसी से पहली नजर में भी हो जाती है. सिमरन को उस दिन लगा कि ये शायद मुहब्बत का तीर था, जो उस के जिगर के पार हो गया था, इसीलिए वह आमिर की किसी बात का विरोध नहीं कर सकी थी. उस दिन रात को सिमरन ठीक से सो नहीं सकी. आंखे बंद करती तो बार बार आमिर का चेहरा उस की आंखों के आगे तैरने लगता.

उस के डांस का अंदाजे बयां याद कर के वह खुद ही मुसकराने लगती. उसे लगा कि वह प्यार की अंजानी सी डगर पर चल पड़ी है. लेकिन अभी तक वो ये नहीं जानती थी कि आमिर है कौन, क्या करता है, उस की हैसियत क्या है? अगले दिन ही आमिर ने वाटसएप पर सिमरन से बातचीत शुरू कर दी. प्रेम दीवानी सिमरन, प्यासा आमिर युवाओं के बीच प्यार की शुरूआत में जिस तरह की बातें होती हैं. उस दिन से दोनों के बीच वैसी बातचीत भी शुरू हो गई. दोनों ने एक दूसरे को अपने फोटो भेजने शुरू कर दिए. चंद रोज बाद दोनों के बीच घर से बाहर कहीं मिलने की बात भी तय हो गई. एक बार मिलना हुआ तो फिर दोनों को मिलनाजुलना आम बात हो गई.

कभी इलाके में गली के किसी नुक्कड़ पर तो कभी नजदीक के किसी पार्क में, कभी किसी चाईनीज फूड सेंटर पर तो कभी पिक्चर देखने के लिए दोनों साथ आने जाने लगे. जैसेजैसे समय बीत रहा था दोनों की मुहब्बत परवान चढ़ती जा रही थी. कभीकभी मौका मिलता तो आमिर सिमरन के अधरों पर अपने प्यार की मुहर भी लगा देता, जिस से सिमरन की तड़प ओर बढ़ जाती थी. एक तरह से सिमरन आमिर के प्यार में पूरी तरह दीवानी हो चुकी थी. करीब 6 महीने तक दोनों का प्यार इसी तरह चोरीछिपे परवान चढ़ता रहा. प्यार की हर कहानी एकदम सीधी नहीं होती. उस में कई बाधाएं होती हैं और सिमरन का प्यार तो वैसे भी पहली नजर का अंधा प्यार था, जिस में न तो भविष्य की भलाई देखी गई थी न ही भावी जिदंगी की कड़वी सच्चाई को परखा गया था.

सिमरन बहनों में सब से छोटी थी और मां बाप की लाड़ली भी. मां बाप चाहते थे कि जवानी की दहलीज पर खड़ी सिमरन की शादी भी किसी अच्छे परिवार में कर दी जाए. इसीलिए वे उस के लिए अच्छा वर तलाश रहे थे. सिमरन के प्यार से अंजान मां ने जब एक दिन सिमरन को रिश्ते के लिए एक लड़के की फोटो दिखाई तो सिमरन को ऐसा लगा जैसे किसी ने उसे हसीन सपना देखते हुए जगा दिया हो.

‘‘अम्मी अभी शादी की क्या जल्दी है.. मुझे घर से निकालना चाहती हो क्या?’’ सिमरन ने बेमन से लड़के की फोटो देखने के बाद कहा.

‘‘नहीं बेटा, लड़की मांबाप के लिए एक जिम्मेदारी होती है जितनी जल्दी ये जिम्मेदारी पूरी हो जाए मांबाप का मन हल्का हो जाता है. और तेरा निकाह हो जाएगा तो उस के बाद फिरोज के लिए भी तो दुल्हन लानी है घर में.’’

शाबरी बेगम ने सिमरन के शादी के ऐतराज को स्वभाविक रूप से लिया. लेकिन वे इस बात से कतई अंजान थी कि बेटी के मन में क्या चल रहा है. सिमरन जानती थी कि अगर उस ने अपनी अम्मी को अपनी पंसद के बारे में बताया तो वे आमिर से उस की शादी के लिए कतई तैयार नहीं होगी. क्योंकि आमिर का परिवार उस की दूसरी बहनों की ससुराल की तरह समृद्ध नहीं था. आमिर के पिता शाहिद मूलरूप से मेरठ के रहने वाले हैं. वे जवानी के दिनों में ही दिल्ली आ गए थे. आजादपुर मंडी में आढ़तियों को लेबर सप्लाई करने वाले शाहिद के परिवार में उन की बीवी आबिदा के अलावा 10 बच्चे थे, 3 बेटियां व 7 बेटे.

परिवार लंबाचौड़ा था और खर्चे अधिक. मंदे समय में उन्होेंने किसी तरह अपने परिवार के लिए मंडोली की गली नंबर 9 में मकान तो बना लिया था, लेकिन 3 बेटियों की शादी करने और 7 बेटों को पालपोस कर जवान करतेकरते वे उम्र से पहले ही बूढे हो कर बीमार रहने लगे थे. उन का कोई भी बच्चा 5वीं जमात से ज्यादा नहीं पढ़ सका था. मेरठ के सरूरपुर, जैनपुर में पनीर बनाने के कई प्लांट हैं. शाहिद के लगभग सभी बेटे इन्हीं फैक्ट्रियों में काम करते हैं. 2 बड़े बेटे अपने परिवार के साथ जैनपुर में ही किराए का मकान ले कर रहते थे. आमिर से छोटे भाई की भी शादी हो चुकी थी, लेकिन उस की पत्नी दिल्ली में शाहिद व उन की पत्नी आबिदा के पास ही रहती थी. 3 बेटों की अभी शादी नहीं हुई थी.

ढाई साल पहले जिन दिनों सिमरन और आमिर का प्यार परवान चढ़ रहा था उन दिनों आमिर पनीर बनाने का काम सीख रहा था. उस ने अभी नौकरी शुरू नहीं की थी. अलबत्ता 10 हजार रूपए में उस की नौकरी एक प्लांट में पक्की हो गई थी. इधर जब सिमरन ने आमिर को बताया कि उस के अम्मी अब्बू उस का जल्द से जल्द कहीं दूसरी जगह निकाह कराने की तैयारी कर रहे है तो आमिर सकते में आ गया. क्योंकि वो चाहता था कि सिमरन के साथ अभी एक साल उस के प्रेम संबध यूं ही चलते रहें. उस ने सोचा था कि नौकरी कर के पहले पैसा कमाएगा फिर सिमरन से शादी करेगा. लेकिन जब अचानक सिमरन ने बताया कि परिवार वाले उस का निकाह कराने की तैयारी कर रहे हैं तो उस के हाथपांव फूल गए.

उसे समझ नहीं आया कि वह क्या करें. सिमरन ने उसे ये भी बता दिया था कि उस के परिवार की हैसियत देख कर उस के परिवार वाले कभी दोनों की शादी के लिए तैयार नहीं होंगे. सिमरन दिल्ली में रहने वाली और 12वीं क्लास तक पढ़ी लड़की थी. उसे पता था कि अगर परिवार शादी की इजाजत ना दे तो बालिग प्रेमियों को शादी के लिए क्या करना चाहिए. सिमरन मिली भावी ससुराल वालों से इसलिए सिमरन ने आमिर से पूछा कि क्या उस के परिवार वाले उसे अपनाने के लिए तैयार हैं. सिमरन अच्छे संपन्न परिवार की पढ़ीलिखी सुंदर लड़की थी. जब आमिर ने उसे अपने परिवार वालों से मिलाया तो सब ने शादी के लिए हां कर दी.

अब सवाल यह था कि सिमरन के परिवार वाले दोनों का निकाह कराने के लिए तैयार नहीं होंगे. तय हुआ कि सिमरन व आमिर कोर्ट मैरिज कर लें. बाद में सिमरन का परिवार अपने आप मान जाएगा. सिमरन व आमिर ने शाहदरा मैरिज कोर्ट में शादी के लिए आवेदन कर दिया. चूंकि दोनों ही बालिग थे और परिवार के तौर पर दोनों की तरफ से आमिर के दोस्त गवाह थे, लिहाजा दोनों की कोर्ट मैरिज होने में कोई अड़चन नहीं आई. लेकिन जब कोई लड़की निकाह करती है तो भले ही परिवार से कुछ ना बताए लेकिन उस के रहनसहन और पहनावे में इतना परिवर्तन तो आ ही जाता है कि सवालों का पहाड़ अपने आप ही खड़ा हो जाए.

कोर्ट मैरिज के बाद सिमरन जब चूड़ा पहन कर अपने घर गई तो उस की अम्मी को शक हुआ, तो उन्होंने सवालों की बौछार कर दी. सिमरन जानती थी कि एक ना एक दिन सब को सच बताना ही पडे़गा. लिहाजा उस ने अपनी मां को बता दिया कि वह आमिर नाम के एक लड़के से प्यार करती है और उस ने कोर्ट मैरिज कर ली है. बेटी के लिए अच्छे घर का सपना देखने वाले मातापिता के लिए बेटी के प्रेम विवाह की खबर किसी वज्रपात से कम नहीं होती. उन्होंने जब लड़के व उस के परिवार के बारे में पूछा तो सिमरन ने सब कुछ सचसच बता दिया. जैसा कि सिमरन को आशंका थी वैसा ही हुआ. मां ने सिमरन को लानतमलानत दी और उस की पिटाई कर दी. अब्बू के घर आने के बाद तो जम कर हंगामा हुआ. पिता ने उसी दिन आमिर को अपने घर बुलाया और उसे धमकी देते हुए अपनी बेटी को भूल जाने के लिए कहा.

आमिर ने सिमरन से सच्ची मोहब्बत की थी. भूल जाने का तो सवाल ही नहीं उठता था. लिहाजा उस ने साफ कह दिया कि वह दुनिया में सब को छोड़ सकता है लेकिन सिमरन को छोड़ना उस के लिए मुमकिन नहीं. मोहम्मद शरीफ ने जब उसे अपनी हैसियत देखने के लिए कहा तो आमिर ने साफ कह दिया कि उस ने सिमरन की हैसियत से नहीं, बल्कि दिल से प्यार किया है. शरीफ ने आमिर को मारपीट कर घर से भगा दिया और उसे चेतावनी दे दी कि भूल कर भी सिमरन से मिलने का प्रयास न करें. आमिर जानता था कि अगर उस ने जरा सी भी देर कर दी तो सिमरन के घर वाले जल्दी ही कहीं उस का निकाह कर देंगे. लिहाजा उस ने अपनी जान पहचान के कुछ लोगों से बात की और हर्ष विहार थाने पहुंच गया.

आमिर ने पुलिस को बताया कि उस ने सिमरन से कोर्ट मैरिज की है लेकिन उस के ससुराल वाले इस शादी को नहीं मान रहे हैं. उन्होंने उस की बीवी को अपने घर में बंधक बना कर रखा हुआ है और उस के साथ नहीं भेज रहे. आमिर ने कोर्ट मैरिज का जो प्रमाण पत्र दिया था, उस की जांच की गई तो उस से आमिर का आरोप सच पाया गया. लिहाजा आमिर की शिकायत पर पुलिस मोहम्मद शरीफ, उन की बेगम व बेटी को थाने ले आई. थाने ला कर दोनों पक्षों में बहस हुई. मातापिता के बेटी के पक्ष में अपने तर्क थे, तो आमिर व सिमरन के अपनी मोहब्बत के तर्क. लेकिन पुलिस को तो कानून देखना था. पुलिस की नजर में आमिर व सिमरन दोनों बालिग थे, दोनों का धर्म भी एक था और कानूनन उन की शादी हुई थी.

लिहाजा पुलिस ने मोहम्मद शरीफ को चेतावनी दी कि वे आमिर व सिमरन के बीच में बाधा न डालें और उसे अपने पति के पास जाने दें. ऐसा ही हुआ भी शरीफ ने टूटे मन से बेटी को आमिर के हाथों में सौंप दिया. लेकिन उन का दिल बुरी तरह टूट गया था. उन्होंने बेटी को न जाने क्यों बद्दुआ दे दी कि मातापिता का दिल दुखा कर वो कभी खुश नहीं रह सकती. उन्होंने थाने से ही सिमरन को आमिर के साथ भेज दिया. लेकिन साथ ही कहा भी कि आमिर के साथ उन की बिना मरजी के उस ने जो शादी की है, उस के बाद उस का उन के साथ कोई रिश्ता नहीं रहा. मांबाप का दिल तोड़ कर खुश थी सिमरन माता पिता का दिल टूटने के दुख से ज्यादा सिमरन को इस बात की ज्यादा खुशी थी कि जिस के साथ उस ने जीवन जीने के सपने देखे थे, वह उस का हो गया.

सिमरन की शादी भले ही कोर्ट मैरिज के रूप में हुई थी लेकिन ससुराल में आने के बाद आमिर ने घर में एक बड़ी दावत रखी. शुरुआत के कुछ दिन आमिर के प्यार में कैसे गुजर गए पता ही नहीं चला. लेकिन एक दो महीने बाद ही सिमरन का सामना जिंदगी की हकीकत से शुरू होने लगा. पिता के घर में लाड़प्यार से पली सिमरन को कभी किसी जरूरत के लिए किसी का मोहताज नहीं होना पड़ा था. उस ने हमेशा खुले मन से पैसा खर्च किया था. चूंकि आमिर ने तब तक नौकरी शुरू नहीं की थी, सो वह खुद ही मांबाप व भाइयों के खर्चे पर पल रहा था. इसलिए शादी के 2 महीने बीतने के बाद सिमरन को छोटेछोटे खर्चो के लिए दूसरों का मोहताज होना पड़ा.

वह जब भी आमिर से खर्चे के लिए पैसे मांगती तो वह टका सा जवाब दे देता कि जब तक वह कमाएगा नहीं, तब तक वह उसे कुछ नहीं दे सकता. अगर वह चाहती है कि उस के पास पैसा हो और उस की जिंदगी किसी पर निर्भर ना रहे तो उस के साथ मेरठ चले. जहां वह नौकरी कर के उस की हर खुशी पूरी करेगा. सिमरन के लिए गुरबत में जीने से अच्छा यही था कि वह उस के साथ मेरठ चली जाए. लिहाजा शादी के 2 महीने बाद ही सिमरन आमिर के साथ सरूरपुर चली गई. वहां आमिर ने हर्रा कस्बे में एक सस्ता सा किराए का मकान ले लिया. पास के जैनपुर गांव में अपने भाइयों की तरह उस ने भी एक पनीर बनाने वाले प्लांट में 10 हजार रुपए की पगार पर नौकरी शुरू कर दी.

आमिर चूंकि गाड़ी चलाने से ले कर पनीर की मार्केटिंग और प्लांट के दूसरे काम भी देखता था. लिहाजा इन कामों से भी उसे 4-5 हजार रुपए की अतिरिक्त कमाई हो जाती थी. किसी तरह सिमरन के साथ धीरेधीरे घरगृहस्थी  चलने लगी. जिस तेजी के साथ समय गुजरने लगा, उसी तेजी के साथ सिमरन के उपर चढ़ा आमिर के प्यार का नशा भी उतरने लगा. क्योंकि शुरुआत में तो सिमरन ने सोचा था कि चलो जिदंगी का सफर शुरू करने के लिए तंगी में भी गुजर बसर की जा सकती है. लेकिन एक सवा साल बीतने के बाद उसे लगा कि गुरबत में जिंदगी गुजारना मानों उस की नियति बन गई है. क्योंकि ना तो आमिर उसे अच्छे कपडे़ दिलाता था और ना ही उस की कोई ऐसी फरमाइश पूरी करता था जिस से उसे खुशी मिलती.

आमिर अब ये और ताने देने लगा था कि उस की जिंदगी ऐसी ही थी और आगे भी ऐसी ही रहेगी. मैं ने तेरे बाप से कोई दहेज नहीं लिया कि तेरी फरमाइशें पूरी करने के लिए चोरीडकैती करूं. जब कभी आमिर इस तरह के ताने देता तो सिमरन का मातापिता की लड़के की हैसियत को ले कर कही जाने वाली बातें याद आने लगती थीं. अब उसे समझ आने लगा था कि मातापिता बेटी के सुखद भविष्य के लिए लड़के की हैसियत और उस के काम को तवज्जो क्यों देते हैं. लेकिन सिमरन प्यार में अंधी हो कर आमिर से शादी का जो कदम उठा चुकी थी उस का पश्चाताप तो यही था कि हर हाल में भी उसे आमिर के साथ खुश रहना था. लेकिन इस दौरान एक अच्छी बात ये हुई कि कोर्ट मैरिज के कारण शुरू हुई मातापिता की नाराजगी खत्म हो गई. मातापिता और भाई व बहनें अब उस से अक्सर मोबाइल फोन पर बातें करने लगे थे.

कुछ दिन सिमरन को लगा कि परिवार ने संबधों को सुधारने के लिए जो पहल की है उसे उस पहल को आगे बढ़ाना चाहिए. लिहाजा वह भी एक दिन आमिर को साथ ले कर अपने मायके चली गई. लंबे समय बाद मांबाप से मिलन हुआ. कुछ शिकवेशिकायतें हुईं और फिर मांबाप भी बेटी को अपने शौहर के साथ खुश देख कर सारे गिलेशिकवे भूल गए. इस तरह सिमरन का अपने मातापिता के घर आनाजाना शुरू हो गया. इधर, आमिर इस बात से खुश था कि चलो अब सिमरन के अपने मायके वालों के साथ संबध सुधर गए है तो उसे भी उन की बड़ी हैसियत का फायदा मिलेगा. बेटी को खुश रखने के लिए आखिर वे कुछ ना कुछ आर्थिक मदद तो करेंगे ही. लेकिन एकदो बार मायके जाने के बाद भी जब सिमरन खाली हाथ लौटी तो आमिर के ससुराल वालों से मदद मिलने के सपने चकनाचूर हो गए.

इधर मायके से संबध जरूर सुधर गए थे, लेकिन सिमरन कभी उन से अपनी गुरबत भरी जिंदगी का जिक्र नहीं करती थी. क्योंकि उस का मानना था कि उस ने अपनी इच्छा से आमिर से शादी की थी. इसीलिए वो जिस हाल में भी उसे रखेगा वह रहेगी लेकिन परिवार को अपने दुखों के बारे में नहीं बताएगी. आमिर की भी उम्मीदें अधूरी, सिमरन की भी इधर जब सिमरन अपनी जरूरतों के लिए आमिर से पैसा मांगती तो वह उसे टका सा जवाब दे देता कि मेरे साथ तो तुम को रूखी रोटी ही नसीब होगी. अगर ऐशोआराम के लिए पैसा चाहिए तो अपने बाप से मंगा लो. जब भी आमिर इस तरह का ताना देता तो सिमरन का उस से झगड़ा हो जाता और वह उसे सुना देती कि उस ने अपने मातापिता की इच्छा के खिलाफ लड़झगड़ कर उस से शादी की है इसलिए उस की हर इच्छा और जरूरतों को पूरा करना भी उसी का फर्ज है.

ऐसे ही रोजमर्रा के झगड़ों में समय तेजी से बीतने लगा. लेकिन कोरोना और बीच में कुछ समय तक रहे लौकडाउन के कारण आमिर की कमाई में कमी आ गई थी. घर की आम जरूरतें भी ठीक से पूरी नहीं हो पाती थीं. उस पर जब सिमरन उस से कोई फरमाइश कर देती तो इसी बात पर दोनों के बीच झगड़ा हो जाता था. आमिर को भी अब लगने लगा था कि एक बड़े घर की लड़की से शादी कर के उस ने बड़ी गलती कर दी है. उस ने तो सोचा था कि बडे़ घर में शादी कर के उसे ससुराल वालों का सहारा मिलेगा, लेकिन जब ऐसा कुछ नहीं हुआ तो उस की खींझ बढ़ने लगी. इस दौरान आमिर व सिमरन के बीच आर्थिंक तंगियों के कारण झगड़े ज्यादा होने लगे थे.

जब भी ऐसा होता तो आमिर नाराज हो कर जैनपुर में अपने सब से बडे़ भाई के पास चला जाता. पूरे परिवार को इस दौरान आर्थिक तंगी के कारण पतिपत्नी के बीच होने वाले झगड़ों की बात पता चल चुकी थी. आमिर अपने परिवार वालों के सामने सिमरन की गलत आदतों और ऊंची फरमाइशों की बात बता कर हमेशा उसे ही गलत ठहराता था. सब को यही लगता कि सिमरन बड़े घर की लड़की है, अपनी ऐश भरी फरमाइशें पूरी न होने के कारण आमिर से झगड़ा करती होगी. 29 नवंबर, 2020 को शाबरी बेगम अपने पति मोहम्मनद शरीफ व बेटे फिरोज को ले कर अचानक सरूरपुर थाने पहुंची. थानाप्रभारी अरविंद कुमार उस समय थाने पर ही अपने स्टाफ के साथ मीटिंग कर रहे थे.

शाबरी बेगम ने बताया कि उस की बेटी हर्रा कस्बे में अपने पति आमिर के साथ रहती है. लेकिन 26 नवंबर की सुबह से बेटी का फोन लगातार स्विच्ड औफ आ रहा है. वे लोग उस की खैरियत को ले कर परेशान हैं. इसलिए हकीकत जानने के लिए जब पति व बेटे के साथ उस के घर पहुंची तो वहां ताला लगा मिला. ना ही बेटी का फोन मिल रहा है, ना ही उस की कोई खबर मिल रही है. ‘हो सकता है अपने हसबैंड के साथ ही गई हो या फोन में कोई परेशानी आ गई हो.’

इंसपेक्टर अरविंद कुमार ने सारी बात जानने के लिए दूसरे पहलू को सोचते हुए अपनी राय दी तो शाबरी बेगम ने कहा सर मेरी चिंता इस बात को ले कर है कि मेरी बेटी को उस का पति पिछले कुछ महीनों से लगातार परेशान कर रहा था. दोनों ने कोर्ट मैरिज की थी. वो बेटी को इस बात के लिए परेशान कर रहा था कि उसे कोई दहेज नहीं मिला था. इस के अलावा पिछले कुछ दिनों से वो हमारी बेटी से छुटकारा पा कर दूसरी शादी करने की बात भी करता था. जब मेरी बेटी से आखिरी बात हुई थी, उस दिन भी दोनों में झगड़ा हुआ था और आमिर ने सिमरन की पिटाई कर दी थी.

चूंकि शाबरी बेगम ने आमिर के खिलाफ अपनी बेटी को दहेज के लिए प्रताडि़त करने व हत्या की नियत से उस के अपहरण की आशंका जाहिर की थी, लिहाजा एसएचओ अरविंद कुमार ने सारी बात एसएसपी मेरठ अजय साहनी को बताई. उन्होंने एसपी देहात अवीनाश पांडे व सीओ सरधना आरपी शाही को थाने पहुंचने के लिए कहा. दरअसल दहेज उत्पीड़न के साथ अपहरण जैसे गंभीर मामलों में उच्चाधिकारियों को विश्वास में लिए बिना कोई कार्रवाई करने से मामला बिगड़ सकता था. एसपी देहात व सीओ सरधना थाने पहुंचे तो उन से भी शाबरी बेगम ने बेटी सिमरन के प्रेम विवाह से ले कर पति की प्रताड़ना तक की पूरी कहानी सुना दी.

बात पहुंची पुलिस तक जिस तरह की शिकायत थी उस पर तत्काल काररवाई जरूरी थी. इसलिए  एसपी देहात के आदेश पर  इंसपेक्टपर अरविंद कुमार ने उसी दिन थाने पर धारा 498ए 364 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. चूंकि मामला दहेज उत्पीड़न का था लिहाजा जांच की जिम्मेदारी सीओ आरपी शाही को सौंपी गई. उन्होंने आगे की काररवाई के लिए इंसपेक्टर अरविंद कुमार के नेतृत्व में एसएसआई योगेंद्र सिंह, हेडकांस्टेबल सुरेश कुमार, कांस्टेबल आशु मलिक, सचिन सिरोही, महिला कांस्टेबल अनु और बबली की एक टीम गठित कर दी. पुलिस टीम ने जांच का काम हाथ में लेते ही सब से पहले आमिर के परिवार और मिलनेजुलने वाले लोगों की सूची तैयार कर उन से आमिर के बारे में पूछा.

लेकिन किसी को उस के बारे में कुछ पता नहीं था. वह 26 नवंबर से काम पर भी नहीं गया था. पुलिस ने आमिर के घर के पास लगे एक सीसीटीवी को चैक किया तो पता चला कि 25 व 26 नवंबर की रात में आमिर व 3 अन्य लोग काले रंग की एक बोलेरो गाड़ी में सिमरन को लाद कर कहीं ले गए थे. साफ था कि सिमरन के साथ कुछ गलत हो चुका था. सिमरन को क्या हुआ था इस की जानकारी आमिर के पकड़े जाने पर ही मिल सकती थी. लिहाजा पुलिस ने आमिर के फोन की सीडीआर निकलवाई, जिस से पता चला  कि वारदात के अगले दिन 27 नंवबर को उस की लोकेशन दिल्ली में थी. उस के बाद से उस की लोकेशन लगातार लखनऊ की आ रही थी. एसएसपी के आदेश पर उसी समय एक टीम को लखनऊ रवाना किया गया.

जहां से सर्विलांस टीम तथा स्थानीय पुलिस की मदद से पुलिस ने आमिर को 1 दिसंबर को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस टीम उसे सरूरपुर ले आई और पूछताछ का सिलसिला शुरू हुआ. पता चला कि उस ने सिमरन की हत्या कर दी थी. आमिर ने बताया कि उस की आय उतनी नहीं थी लेकिन सिमरन एक अच्छी जिंदगी जीने वाली लडकी थी और अपनी जरूरतों के लिए उस से कोई फरमाइश करती थी तो उसे गुस्सा आ जाता था. आमिर ने कई बार सिमरन से कहा था कि वह अपने परिवार से 2-4 लाख रुपए ले ले, जिस से कोई काम कर के उन की जिंदगी बदल सकती है.

लेकिन सिमरन ने साफ कह दिया था कि उस ने अपने परिवार से बागी हो कर शादी की थी. ऐसे में उसे कोई हक नहीं बनता कि वह अपने परिवार से पैसा मांग कर उन की नजर में अपने फैसले को गलत साबित करे. सिमरन खुद्दार लड़की थी लेकिन आमिर को इस से कोई मतलब नहीं था. जब सिमरन ने उस की बात नहीं मानी और उसकी फरमाइशें पूरी करने के चक्कर में आए दिन झगड़ा होने लगा तो आमिर का अपने बड़े भाई आदिल के घर आना जाना बढ़ गया. वहां भाई की जवान साली से उसका दिल लग गया. आदिल की साली सिमरन जैसी बहुत खूबसूरत तो नहीं थी लेकिन गरीब परिवार की होने के कारण खुद को हर तरह के हालात में ढाल सकती थी.

जैसेजैसे आमिर का आकर्षण भाई की साली की तरफ बढ़ता गया वैसेवैसे सिमरन से उस के झगडे़ बढ़ते चले गए. वैसे भी अब उसे अपनी ससुराल से किसी तरह की मदद की उम्मीद नहीं रह गई थी. इसलिए आमिर ने सोचा कि क्यों न जिंदगी भर होने वाली सिमरन की चिकचिक से छुटकारा पा कर भाई की साली से निकाह कर लिया जाए. इसीलिए जब भी लड़ाई होती तो आमिर सिमरन से कहता कि अगर उस के साथ नहीं रहना चाहती तो उस का पीछा छोड़ दे और अपने घर चली जाए, कम से कम वह दूसरा निकाह तो कर लेगा. 25 नंवबर को भी ऐसी ही बात पर झगड़ा हुआ था. दोनों के बीच मारपीट भी हुई थी. यह बात सिमरन ने फोन पर अपनी मां को भी बता दी थी.

उसी दिन आमिर ने मन बना लिया कि बस अब बहुत हुआ रोजरोज के झगड़ों से अच्छा है कि आज सिमरन को खत्म कर दिया जाए. उस रात जब वो शाम को घर पहुंचा तो पहले उस ने सुबह के झगड़े के लिए सिमरन से माफी मांगी, फिर दोनों ने साथ खाना खाया. बिस्तर पर पहुंचते ही आमिर ने सिमरन को इस तरह प्यार किया मानों आज के बाद वे फिर कभी दोबारा नहीं मिलेंगे. ऐसा ही हुआ भी. आधी रात को जब सिमरन गहरी नींद सो गई तो उस ने सोते समय सिमरन का गला दबा दिया. सिमरन एक क्षण को छटपटाई लेकिन आमिर की मजबूत पकड़ से निकल नहीं सकी और उस ने दम तोड़ दिया.

प्रेमी पति ने सिमरन को लगाया ठिकाने हत्या करने के बाद आमिर अपने पनीर के जैनपुर स्थित प्लांट पर पहुंचा. वहां से वह फैक्टरी की बोलेरो गाड़ी में प्लांट पर काम करने वाले तीन मजदूरों को यह कहकर अपने हर्रा स्थित घर बुला लाया कि उस की पत्नी की तबीयत खराब है उसे अस्पताल ले जाना है. वह उसे गाड़ी में डालने में मदद कर दें. जब मजदूर घर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि आमिर की पत्नी तो मृत पड़ी है. मजदूरों ने ऐतराज किया तो आमिर ने उन्हें  नौकरी से निकलवाने की धमकी दी जिस से वे चुप हो गए, उन्होंने सोचा कि चलो बौडी को गाड़ी में ही तो रखवाना है. इस के बाद उस ने उन की मदद से सिमरन के शव को गाड़ी में डाला और वापस जैनपुर स्थित प्लांट के पास पीछे ले जा कर तिरपाल डाल कर गाडी खड़ी कर दी.

रात में करीब ढाई बजे आमिर ने प्लांट के पास एक खेत में गड्ढा खोदा और एक मजदूर की मदद से सिमरन के शव को गड्ढे में दबा दिया. राज खुलने के डर से आमिर ने अगली सुबह अपना मोबाइल स्विच औफ कर दिया और दिल्ली पहुंच गया. लेकिन वहां उसे पकड़े जाने का डर सताने लगा तो सीधा लखनऊ निकल गया. इस दौरान आमिर ने परिवार में या किसी को सिमरन की हत्या की भनक नहीं लगने दी. पुलिस ने पूछताछ के बाद आमिर की निशानदेही पर जैनपुर के एक खेत में दबे सिमरन के शव को बरामद कर लिया. साथ में मौजूद सिमरन के परिजनों ने उस की शिनाख्त भी कर दी. जिस के बाद पुलिस ने सिमरन का शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

आमिर से पूछताछ के बाद पुलिस ने सिमरन का शव ठिकाने लगाने में उस की मदद करने वाले उस की फैक्टरी के मजूदरों के नाम पते भी मिल गए, जिन की पहचान आरिफ निवासी नूरपुर, जिला अलीगढ़, नसीम निवासी शिकरावा जिला नूह मेवात हरियाणा तथा बबलू निवासी विनोली जिला बागपत के रूप में हुई. पुलिस ने उन्हें भी मुकदमे में आरोपी बना कर मामलें में हत्या की धारा 302 व सबूत खत्म करने की धारा 201 जोड़ दी. आमिर को सक्षम न्याधयालय में पेश कर के जेल भेज दिया गया. पुलिस बाकी आरोपियों को गिरफ्तारी की कोशिश में लग गई.

कितनी हैरानी की बात है कि जिस युवक के लिए सिमरन ने अपने परिवार से बगावत की थी, उस का वहीं हम सफर जिंदगी भर साथ निभाना तो दूर उस की जिम्मेदारियां तक नहीं उठा सका और एक दूसरी औरत के आगोश में जाने के लिए उसे ही अपने रास्ते से हटा दिया. यह कहानी सिर्फ एक सिमरन की नहीं है. आज की पीढ़ी के नौजवान लड़केलड़कियां प्यार में अंधे हो कर साथ जीने मरने की कसमें खा कर परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी तो कर लेते हैं. लेकिन तजुर्बे की कमी के कारण ये भूल जाते है कि जिंदगी की कठिन राह में जिम्मेदारियों के बहुत से कांटे भी होते हैं, जो कदमकदम पर चुभते हैं.

इसीलिए मातापिता बेटियों की शादी से पहले दामाद का परिवार, उस की हैसियत और उस के नौकरी या कारोबार को परखते हैं. क्योंकि इन्हीं छोटी बातों को अनदेखा करने से एक दिन जिंदगी का बड़ा फसाना बन जाने की संभावना बनी रहती है.

Agra News Crime : टॉयलेट के बहाने जंगल में ले जाकर प्रेमी से कराया पति का कत्ल

Agra News Crime : 2 शादियां करने के बावजूद भी पूनम अपने मायके के प्रेमी संदीप को नहीं भुला सकी थी. पति शिवकुमार से छुटकारा पाने और प्रेमी के साथ जिंदगी बिताने की पूनम ने ऐसी खूनी साजिश रची कि…

16 दिसंबर, 2020 की सुबह करीब 9 बजे का वक्त था. उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेसवे से मथुरा के राया कस्बे में उतरने वाले रास्ते के किनारे लोगों ने झाडि़यों में खून से लथपथ एक युवक का शव पड़ा देखा. कुछ ही देर में वहां राहगीर भी जुटने लगे. उसी दौरान किसी व्यक्ति ने इस की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी. चूंकि यह क्षेत्र थाना राया के अंतर्गत आता है, इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम द्वारा वायरलैस मैसेज दे कर घटना से अवगत करा दिया. रातभर की ड्यूटी के बाद सुबह इतनी जल्दी उठना पुलिस के लिए थोड़ा मुश्किल जरूर होता है. लेकिन स्थानीय राया थाने के प्रभारी निरीक्षक सूरज प्रकाश शर्मा को जैसे ही उन के मुंशी ने आ कर हत्या के बारे में बताया तो उन का आलस्य काफूर हो गया.

थानाप्रभारी एस.पी. शर्मा तत्काल तैयार हुए. एसआई मोहनलाल यादव, राजकुमार, कांस्टेबल यशपाल, आशुतोष कुमार व प्रदीप कुमार को साथ ले कर वह उस स्थान पर पहुंच गए, जहां खून से लथपथ शव पड़े होने की सूचना मिली थी. लाश को देखते ही इंसपेक्टर शर्मा समझ गए कि यह दुर्घटना का नहीं बल्कि हत्या का मामला है. क्योंकि पास में ही एक बड़ा सा पत्थर पड़ा था, जिस पर लगा खून इस बात की गवाही दे रहा था कि उसी पत्थर से मृतक के सिर पर प्रहार कर के उस की हत्या की गई थी. इसी के कारण मृतक का सिर व चेहरा खून से सराबोर हो चुके थे. चेहरे पर बहते ताजा खून को देख कर वे समझ गए कि हत्या हुए ज्यादा वक्त नहीं बीता है. मृतक के चेहरे पर घनी दाढ़ी थी जो खून से सराबोर थी.

थानाप्रभारी ने एसएसपी डा. गौरव ग्रोवर तथा सीओ आरती सिंह को राया मोड़ पर मिले शव के बारे में सूचना दे दी. एसएसपी व सीओ सूचना मिलने के कुछ देर बाद ही घटनास्थल पर पहुंच गए. फोरैंसिक की टीम का दस्ता भी मौके पर पहुंच गया. घटनास्थल के मुआयने के बाद मृतक की कदकाठी व सूरत से अनुमान लगा कि उस की उम्र 26 साल के आसपास रही होगी. मृतक के शरीर पर जींस और जैकेट के साथ पैरों के जूतों से अनुमान लग रहा था कि वह कोई राहगीर था, जिस से या तो लूटपाट के लिए उस की हत्या की गई थी या किसी ने रंजिशन यहां ला कर मार दिया था.

मृतक के जेबों की तलाशी ली गई तो जेब से ऐसी कोई चीज बरामद नहीं हो सकी, जिस से उस की पहचान की जा सकती थी. इंसपेक्टर शर्मा शव का मुआयना कर रहे थे, तभी उन की नजर लाश से कुछ दूरी पर पड़े एक बैग पड़ी. लेकिन वह बैग पूरी तरह खाली था मगर तलाशी लेने पर उस में कागज का एक लिफाफा पड़ा मिला, जिस में एक फोटो थी. फोटो ताजमहल के सामने खिंचवाई गई थी. फोटो में मृतक के साथ एक महिला भी खड़ी थी. फोटो इस तरह खिंचवाई गई थी जिस तरह नवदंपति खिंचवाते हैं. इस फोटो से 2 बातें साफ हो रही थीं. एक तो यह कि जिस अंदाज में ये फोटो खिंचवाई गई थी आमतौर पर वैसे लोग अपनी पत्नी के साथ फोटो खिंचवाते हैं.

दूसरी ये बात भी साफ हो गई कि ये फोटो बहुत पुरानी नहीं थी, क्योंकि मृतक के शरीर पर जो कपड़े थे, फोटो में भी उस ने वही कपड़े पहने हुए थे. इस का मतलब साफ था कि मृतक ताजमहल घूम कर लौटा था. लेकिन सवाल यह था कि अगर फोटो में उस के साथ खड़ी महिला उस की पत्नी थी तो वह कहां है? अचानक इंसपेक्टर एस.पी. शर्मा के मन में सवाल कौंधा कि कहीं पत्नी ने ही तो उस का काम तमाम नहीं कर दिया. लेकिन ये तमाम सवाल तब तक कयास ही थे, जब तक मृतक की शिनाख्त नहीं हो जाती. ताजमहल देख कर राया के इस रास्ते पर उतरने से इस बात की भी संभावना थी कि मृतक आसपास के ही किसी गांव का रहने वाला हो सकता है.

इसी उम्मीद में इंसपेक्टर सूरज प्रकाश शर्मा ने उस इलाके में 5 किलोमीटर तक पड़ने वाले सभी गांवों में अपनी पुलिस टीम से कह कर ऐसे जिम्मेदार लोगों को मौके पर बुलवाया, जो अपने गांव के अधिकांश लोगों को जानते थे. कई घंटे मशक्कत की गई, लेकिन काफी लोगों को दिखाने के बाद भी मृतक की शिनाख्त नहीं हो सकी तो पुलिस ने मौके की काररवाई पूरी कर के लाश पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी. पुलिस अधिकारी घटनास्थल से थाने लौट आए. पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया. एसएसपी डा. गौरव ग्रोवर ने जांच की जिम्मेदारी राया थाने के प्रभारी निरीक्षक सूरज प्रकाश शर्मा को ही सौंप दी. साथ ही उन्होंने सीओ आरती सिंह के नेतृत्व में एक टीम गठित कर दी.

टीम में थानाप्रभारी के अलावा एसआई मोहनलाल यादव, राजकुमार, कांस्टेबल यशपाल, आशुतोष कुमार, प्रदीप तथा इंसपेक्टर (सर्विलांस) जसवीर सिंह तथा उन की टीम के कांस्टेबल राघवेंद्र सिंह, समुनेश, योगेश कुमार, गोपाल सिंह को भी शामिल किया गया. एसएसपी ने इस हत्याकांड का जल्द से जल्द खुलासा कर आरोपियों को पकड़ने के निर्देश टीम को दिए. पुलिस के पास मृतक की पहचान करने व वारदात का खुलासा करने के लिए केवल एक ही लीड थी और वह थी घटनास्थल से बरामद हुआ फोटो. थानाप्रभारी एस.पी. शर्मा खुद पुलिस टीम ले कर आगरा पहुंच गए. उन्होंने आगरा पहुंच कर वहां ताजमहल के आसपास फोटो खींचने वाले फोटोग्राफरों को मृतक के पास से मिले फोटो दिखा कर जानकारी हासिल करनी चाही. लेकिन इस प्रयास में उन्हें कोई सफलता नहीं मिली.

क्योंकि वहां सैकड़ों फोटोग्राफर थे और सभी से संपर्क होना बेहद मुश्किल था. अचानक उन्होंने उस साइट का निरीक्षण किया, जहां खड़े हो कर मृतक ने फोटो खिंचवाई थी. इस से एक बात स्पष्ट हो गई कि मृतक ने ताजमहल के भीतर जा कर फोटो खिंचवाई थी. इंसपेक्टर शर्मा ने ताजमहल प्रशासन की मदद से ताजमहल के भीतर प्रवेश करने वाले गेट की पिछले 2 दिनों की सीसीटीवी फुटेज देखी तो 15 दिसंबर को मृतक एक महिला के साथ ताजमहल में प्रवेश करते हुए दिखाई पड़ गया. इस से एक बात तो साफ हो गई कि मृतक आगरा से घूम कर ही मथुरा गया था, जहां उस की हत्या हो गई.

आगे का काम पुलिस के लिए बेहद आसान हो गया. पुलिस ने ताजमहल प्रशासन की मदद से 15 दिसंबर को ताजमहल देखने वालों के टिकट की छानबीन शुरू कर दी. दरअसल ताजमहल देखने के लिए जाने वालों को अपना नाम, पता और मोबाइल नंबर की जानकारी भरनी होती है. छानबीन करने के दौरान पुलिस टीम को आखिर एक ऐसा टिकट मिल गया, जो 2 लोगों के लिए बना था. उस में जो आईडी प्रूफ लगा था, वह हरियाणा के पलवल जिले के थाना होडल क्षेत्र के गांव सेवली में रहने वाले शिवकुमार का था. साथ में उस की पत्नी पूनम का नाम लिखा था.

पुलिस टीम ने ताजमहल प्रशासन की मदद से सीसीटीवी फुटेज और एंट्री टिकट का रिकौर्ड वहां से अपने कब्जे में ले लिया. इंसपेक्टर शर्मा अपनी टीम के साथ 16 दिसंबर की रात को ही मथुरा वापस लौट आए. इंसपेक्टर शर्मा ने एक सिपाही को पलवल के सेवली गांव भेजा. जहां से वह अगली सुबह शिवकुमार के चाचा लक्ष्मण सिंह व अन्य परिजनों को अपने साथ राया थाने लिवा लाया. सब से पहले लक्ष्मण व अन्य परिजनों को पोस्टमार्टम हाउस में प्रिजर्व कर के रखा गया शव दिखाया तो उन्होंने देखते ही उस की पहचान शिवकुमार के रूप में कर दी.

लक्ष्मण सिंह ने कपड़ों को देख कर भी साफ कर दिया कि उस ने जो कपड़े पहने थे, वह घर से पहन कर गया था. साथ ही उन्होंने मृतक शिवकुमार के शव के पास मिली फोटो को देख कर स्पष्ट कर दिया कि वह फोटो शिवकुमार तथ उस की पत्नी पूनम की है. पूछताछ करने पर लक्ष्मण ने बताया कि 14 दिसंबर को शिवकुमार अपनी पत्नी पूनम के साथ ताजमहल जाने की बात कह कर बस से गया था. दोपहर अपने मामा ओंकार सिंह से मुलाकात करने के लिए भरतपुर गेट मथुरा जाने की कह कर आया था. उन्होंने बताया कि शिवकुमार की शादी इसी साल 29 जून को अलीगढ़ जिले के गांव गोरोला निवासी पूनम से हुई थी. लक्ष्मण ने बताया कि उन के बेटे सूरज की शादी भी इसी गांव में हुई थी और उस के सुझाव पर उन के भाई भरत सिंह ने बेटे शिवकुमार का विवाह पूनम से किया था.

चूंकि शादी के बाद से कोरोना की महामारी के कारण शिवकुमार अपनी पत्नी को कहीं भी घूमने के लिए ले कर नहीं गया था, इसीलिए उस ने पहली बार पत्नी को घुमाने का प्लान बनाया था और ताजमहल घुमाने के लिए ले कर गया था. शिवकुमार की हत्या और उस की पत्नी पूनम के लापता होने की गुत्थी को लक्ष्मण सिंह भी नहीं समझ पा रहे थे. इंसपेक्टर शर्मा को लग रहा था कि हो न हो शिवकुमार की हत्या और उस की पत्नी के लापता होने में कोई राज जरूर है. शिवकुमार तथा उस की पत्नी पूनम के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई. शिवकुमार की काल डिटेल्स से तो पुलिस को कुछ खास मदद नहीं मिली. लेकिन पूनम की काल डिटेल्स खंगाली गई तो पता चला कि पिछले कुछ महीनों से पूनम की एक खास नंबर पर लंबीलंबी बातें दिन में कई बार होती थीं.

16 दिसंबर की सुबह जब पुलिस ने शिवकुमार का शव बरामद किया था, उस दिन तथा उस से पहले 3-4 दिन में उसी नंबर पर पूनम की कई बार लंबी बातचीत हुई थी. पुलिस ने जब उस नंबर की काल डिटेल्स निकाली तो पता चला कि वह पूनम के ही गांव गोरोला में रहने वाले किसी संदीप के नाम है. जांच जैसेजैसे आगे बढ़ रही थी, धीरेधीरे पूरा माजरा भी पुलिस की समझ में आ रहा था. क्योंकि जब पूनम व संदीप के फोन की लोकेशन ट्रेस की गई तो 15 दिसंबर की शाम से ले कर अभी तक दोनों के फोन की लोकेशन अलीगढ़ व मथुरा के बौर्डर एरिया में एक साथ मिल रही थी. साफ था कि पूनम व संदीप एक साथ हैं. पुलिस की एक टीम पूनम की तलाश में उस के मायके पहुंची, लेकिन वहां उस का कोई पता नहीं चल सका.

पुलिस ने लोकेशन के आधार पर कई टीमें बना कर अलीगढ़ में अलगअलग छापेमारी शुरू कर दी. आखिरकार पुलिस ने पूनम व संदीप को मथुरा व अलीगढ़ बौर्डर के गांव नगला गंजू से उस के एक दोस्त के घर से गिरफ्तार कर लिया. दोनों को राया थाने में ला कर पूछताछ शुरू की गई तो पुलिस को शिवकुमार की हत्या का राज खुलवाने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई. पूनम पति से बेवफाई और अपनी निजी जिंदगी का एकएक राज खोलती चली गई. 24 साल की पूनम ने जब से जवानी की दहलीज पर कदम रखा था, तब से संदीप को ही अपना सब कुछ माना था. दोनों एक ही बिरादरी के थे, इसलिए पूनम ने कभी सोचा ही नहीं था कि संदीप को पति के रूप में देखने का उस का सपना कभी पूरा नहीं होगा.

पलवल के सेवली गांव के रहने वाले चंद्रपाल सिंह के 4 बच्चों में पूनम सब से बड़ी थी. उस से छोटी एक बहन व 2 भाई थे. गांव में खेतीकिसानी करने वाले पिता को जब एक साल पहले पता चला कि बड़ी बेटी पूनम गांव में ही रहने वाले महावीर के छोटे बेटे संदीप से प्यार करती है तो उन का गुस्सा फूट पडा. दरअसल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आज भी एक ही गांव में रहने वाले युवकयुवतियों को आपस में भाईबहन मानने की प्रथा है. इसलिए चंद्रपाल सिंह ने पूनम से साफ कह दिया कि वे मर जाएंगे, लेकिन संदीप से उस की शादी नहीं करेंगे. पूनम ने पिता से साफ कहा कि वह संदीप से 3 सालों से प्यार करती है और उस के बिना जीने की उस ने कभी कल्पना भी नहीं की है. अगर उन्होंने उस की शादी कहीं कर भी दी तो वह खुश नहीं रह पाएगी. क्योंकि वह तन मन से संदीप को ही अपना पति मान चुकी है.

चंद्रपाल सिंह ने बेटी को ऊंचनीच और समाज का वास्ता दे कर उस वक्त शांत तो कर दिया लेकिन उन्हें लगा कि अगर जल्द ही बेटी के हाथ पीले नहीं किए तो वह समाज में उसे रुसवा कर सकती है. गांव में बिरादरी के ही एक दोस्त की बेटी की शादी पलवल के सूरज से हुई थी. सूरज के परिवार और खानदान के बारे में उन्हें पता था कि निहायत शरीफ और अच्छे परिवार का लड़का है. चंद्रपाल ने दोस्त से कह कर पूनम के लिए अपने घरपरिवार में कोई लड़का देखने की बात कही तो सूरज ने उसे बताया कि उस के चाचा का लड़का शिवकुमार भी शादी के लायक है.

शिवकुमार भाइयों में सब से बड़ा था. हालांकि घर में थोड़ीबहुत जमीन थी, जिस पर परिवार के लोग खेती करते थे. लेकिन इस के अलावा भी शिवकुमार पलवल में एक कारखाने में नौकरी करता था. जब खेती का काम ज्यादा होता तो नौकरी छोड़ देता था. कुल मिला कर जिंदगी की गुजरबसर ठीक तरह से हो रही थी. सूरज ने जब अपने चाचा और पिता को अपनी ससुराल में रहने वाले चंद्रपाल की लड़की पूनम का जिक्र किया तो परिवार को लगा कि अच्छा ही देखाभाला परिवार है दोनों भाइयों की ससुराल एक ही गांव में होगी तो अच्छा रहेगा. एक दिन सूरज ने शिवकुमार को अपनी ससुराल में ले जा कर चोरी से उसे पूनम को दिखा भी दिया. शिवकुमार को पूनम पहली ही नजर में भा गई.

गांव की सीधीसादी और मासूम सी पूनम को देख कर शिवकुमार ने घर वालों से पूनम से शादी करने की हां भर दी. इस के बाद दोनों परिवारों में बात हुई और कोरोना के कारण दोनों परिवारों ने सादगी के साथ शादी संपन्न करा दी. शादी के बाद पूनम शिवकुमार की दुलहन बन कर उस के गांव सेवली आ गई. दोनों का वक्त धीरेधीरे प्यार के बीच गुजरने लगा. लेकिन शादी के बाद एक भी दिन पूनम अपने दिल से संदीप का प्यार व उस की यादों को निकाल नहीं सकी थी. वक्त जैसेजैसे गुजर रहा था, संदीप के लिए उस की तड़प और ज्यादा बढ़ती जा रही थी. वह जब भी मायके जाती तो चोरीछिपे संदीप से जरूर मिलती और किसी तरह शिवकुमार से छुटकारा दिला कर अपनी बनाने का दबाव उस पर डालती.

संदीप भी पूनम के बिना खुद को अधूरा समझता था. उस ने पूनम को भरोसा दिलाया कि जल्द ही वह उस के लिए कुछ करेगा. 9 दिसंबर को पूनम के भाई की शादी हुई थी. इस में शिवकुमार अपनी पत्नी के साथ गया था. 3 दिन तक वह वहीं रहा. उसी दौरान पूनम को संदीप के साथ कई बार मिलने का मौका मिला. संदीप ने उस से कहा कि शिवकुमार से छुटकारा पाने का एक ही उपाय है कि उस की हत्या कर दी जाए. उस के बाद जब वह विधवा हो जाएगी तो परिवार वाले एक गांव का होने के बावजूद उन की शादी करने के लिए मजबूर हो जाएंगे.

बात पूनम की समझ में आ गई. उस ने शिवकुमार की हत्या करने के लिए हामी भर दी. लेकिन शिवकुमार को कैसे मारा जाए कि उन पर कोई अंगुली भी न उठे. इस के लिए 2-3 मुलाकातों में ही पूनम ने संदीप से मिल कर हत्या की पूरी साजिश तैयार कर ली. शादी के बाद पूनम पति शिवकुमार के साथ वापस आ गई. पूनम व संदीप के पास मोबाइल फोन थे, जिस के माध्यम से वे शादी के बाद से एकदूसरे से बातचीत किया करते थे और वाट्सऐप कालिंग करते रहते थे. लेकिन भाई की शादी से लौटने के बाद पूनम का संदीप से फोन पर बातचीत करने का सिलसिला ज्यादा बढ़ गया. क्योंकि उन्हें अपनी उस योजना को अंजाम देना था, जिस के साथ शिवकुमार को रास्ते से हटाना था.

संदीप ने पूनम से कहा था कि अगले एकदो दिन में वह अपने पति को आगरा घूमने के लिए राजी कर ले और उसे अपने साथ आगरा ले आए. पूनम ने ऐसा ही किया. उस ने शिवकुमार से कहा कि शादी के बाद वह उसे कहीं घुमाने नहीं ले गया. कम से कम आगरा में प्यार की निशानी आगरा का ताजमहल तो दिखा दें. फरमाइश कोई ज्यादा बड़ी और नाजायज भी नहीं थी, लिहाजा शिवकुमार परिवार वालों से इजाजत ले कर 14 दिसंबर को पूनम को ताजमहल दिखाने के लिए बस से आगरा ले आया. 14 दिसंबर को पूनम और शिवकुमार आगरा ताजमहल घूमते रहे. रात को एक होटल में रुके. अगले दिन सुबह यानी 15 दिसंबर को उन्होंने ताजमहल देखा और शाम को वहीं रुके.

अगली सुबह 6 बजे आगरा से बस द्वारा घर के लिए निकल पड़े. हालांकि शिवकुमार का प्लान यह था कि पहले मथुरा जा कर कृष्ण जन्मभूमि व प्रेम मंदिर देखेंगे उस के बाद मथुरा में अपने मामा से मिलेगा और बाद में घर जाएगा. लेकिन बस में बैठते समय पूनम ने अनुरोध कर के उस का प्लान बदलवा दिया. दरअसल, पूनम ने कहा था कि राया के पास उस के रिश्ते के एक मौसा रहते हैं. उन्होंने कई बार उस से पति के साथ घर आने के लिए कहा है. थोड़ी देर के लिए उन से मिलने के बहाने वह शिवकुमार को ले कर राया के पास एक्सप्रेसवे के यमुना कट पर ही उतर गई. दरअसल, शिवकुमार पत्नी से इतना प्यार करता था और भले स्वभाव का था कि उसे पता ही नहीं था कि पूनम एक साजिश के तहत उसे राया लाई है. हकीकत यह थी कि वहां उस का कोई मौसा नहीं रहता था.

इस दौरान संदीप से लगातार उस की बात चल रही थी. उस वक्त सुबह के करीब 7 बजे थे. एक्सप्रेसवे पर बस से उतरने के बाद पूनम ने चाय पीने की इच्छा जताई तो उन्होंने एक स्टाल पर रुक कर चाय पी. इस के बाद पूनम ने साजिश के तहत शिवकुमार से टौयलेट जाने की बात कही तो वह असमंजस में पड़ गया. क्योंकि एक्सप्रेसवे पर सब जगह टायलेट तो होते नहीं हैं. लेकिन पत्नी को इमरजेंसी थी, लिहाजा सब से उचित जगह सड़क के नीचे दिख रहा जंगल ही था. लिहाजा शिवकुमार पूनम को ले कर नीचे जंगल की ओर उसे टौयलेट कराने के लिए ले गया. लेकिन उसे क्या पता था कि मौत पहले से वहां उस का इंतजार कर रही है. संदीप वहां पहले ही झाडि़यों में छिपा था.

जैसे ही शिवकुमार उस की तरफ पीठ कर के खड़ा हुआ, संदीप ने दबेपांव पीछे से जा कर शिवकुमार के सिर पर भारीभरकम पत्थर दे मारा. इस के बाद संदीप और पूनम ने शिवकुमार के सिर पर पत्थर से कई प्रहार किए. शिवकुमार वहीं निढाल हो कर गिर पड़ा. शिवकुमार के पास 2 बैग थे. एक बैग में पूनम के कपडे़ थे, दूसरे में शिवकुमार के कपड़े. शिवकुमार के बैग से पूनम ने सारा सामान निकाल कर अपने बैग में रख लिया ताकि बैग में ऐसी कोई चीज न मिले, जिस से शिवकुमार की पहचान हो सके. लेकिन गलती से शिवकुमार और पूनम का ताजमहल पर खिंचवाया गया फोटो वाला लिफाफा थैले में ही रह गया था. इसी आधार पर पुलिस ने मृतक की शिनाख्त की थी.

दरअसल, हत्या का ये पूरा प्लान संदीप ने ही तैयार किया था. शिवकुमार की हत्या करने के बाद वे दोनों वहां से टैंपो कर के मथुरा की ओर भाग आए थे. इस के बाद वे इधर से उधर भागते रहे. पूनम एक दिन बाद ससुराल जाने का मन बना रही थी. उस से पहले ही पुलिस ने उसे पकड़ लिया. पूनम की हालत ऐसी हो गई न तो सनम मिला ना ही विसाले सनम. एसएसपी डा. गौरव ग्रोवर ने हत्याकांड का खुलासा करने वाली टीम को 10 हजार रुपए पुरस्कार देने की घोषणा की है. पुलिस ने पूनम व संदीप से पूछताछ करने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर सक्षम न्यायालय में पेश कर दिया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस की जांच व आरोपियों तथा पीडि़त परिवार के बयान पर आधारित

 

Extramarital Affair : प्रेमिका के लिए पति ने 10 लाख की सुपारी देकर कराई पत्नी की हत्या

Extramarital Affair : रोनी लिशी ने तेची मीना से प्रेम विवाह किया था, दोनों की एक बेटी भी हुई. जब मीना दूसरी बार गर्भवती हुई तो रोनी की जिंदगी में चुमी ताया आ गई. बड़े बाप के बेटे और बिजनैसमेन ने चुमी से गुपचुप शादी कर ली और पत्नी मीना को रास्ते से हटाने के लिए ऐसी साजिश रची कि…

अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर 5 नवंबर के बाद से कई दिनों तक ‘हत्यारों को फांसी दो.. जस्टिस फौर मीना…’ के नारों से गूंजती रही. जिस के लिए जस्टिस मांगा जा रहा था, उस का नाम था तेची मीना लिशी, उम्र 28 वर्ष. तेची की हत्या हुई थी पर खुलासा कई दिन बाद हुआ. उस की हत्या का खुलासा होने के बाद से सामाजिक संगठनों में आक्रोश की आग सुलगने लगी थी. सामाजिक संगठन तेची मीना लिशी को न्याय दिलाने के लिए कभी कैंडिल मार्च तो कभी शांतिपूर्ण जुलूस निकाल कर इस हत्याकांड के आरोपियों को कठोर दंड देने की मांग कर रहे थे.

कोई मामूली शख्सियत नहीं थी. वह मिस अरुणाचल नाम की एक बड़ी संस्था में लेखा और वित्त विभाग की सचिव थी. वह प्रदेश के एक बड़े बिजनैसमैन रोनी लिशी की पत्नी थी. उस के ससुर लेगी लिशी कांग्रेस और भाजपा जैसी बड़ी पार्टियों में रहे थे. वह ईटानगर से 3 बार विधायक व एक बार मंत्री रह चुके थे. अरुणाचल प्रदेश पूर्वोत्तर के उन राज्यों में से है, जहां अपराध की वारदातें बहुत कम होती हैं और साजिश कर के हत्या की वारदात को अंजाम देने के मामले तो अपवाद ही होते हैं. लेकिन नौर्थ ईस्ट के इस छोटे से खूबसूरत राज्य की राजधानी ईटानगर में 5 नवंबर को एक ऐसी वारदात हुई, जिस के बाद पूरे ईटानगर के शांत माहौल को गर्म कर दिया.

क्योंकि इस वारदात को इस तरह की साजिश के तहत अंजाम दिया गया था कि पिछले 2 दशकों में इस राज्य के लोगों ने इस तरह के अपराध की कोई वारदात न देखी थी न सुनी थी. राजधानी ईटानगर के विधायक रहे लेगी लिशी के रसूख और शहर के सब से पौश इलाके नाहारलागुन के सेक्टर-1 में बने उन के आवास लेगी कौंप्लेक्स को शहर का हर बांशिदा जानता था. 5 नवंबर की दोपहर करीब साढ़े 12 बजे लेगी लिशी की बहू तेची मीना लिशी अपनी इनोवा एसयूवी कार में घर से निकली थी. मीना की गाड़ी को 2 दिन पहले ही नियुक्त हुआ ड्राइवर दाथांग सुयांग चला रहा था. गाड़ी ईटानगर से कारसिंगा की तरफ जा रही थी.

दरअसल, मीना को उस के पति रोनी लिशी ने सड़क बनाने के लिए अधिग्रहीत अपनी जमीन के मुआवजे के लिए कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने हेतु संबंधित सरकारी विभाग में जानकारी लेने भेजा था. चूंकि मीना 7 महीने की गर्भवती थी, इसलिए रोनी ने 2 दिन पहले ही पत्नी की गाड़ी चलाने के लिए एक ड्राइवर रखा था. हालांकि मीना पहले अपनी सैंट्रो कार खुद चला कर अपने दफ्तर जाती थी. लेकिन 7 महीने की गर्भवती होने के कारण मीना के पति लिशी लेगी ने मीना के लिए अपनी बहन के घर पर खड़ी अपनी इनोवा कार मंगवा ली थी और उस के लिए 2 दिन पहले ही एक एक ड्राइवर दाथांग सुयांग को नियुक्त कर दिया था.

दोपहर करीब साढ़े 12 बजे ड्राइवर दाथांग सुयांग इनोवा कार से मीना को ले कर कारसिंगा रोड पर शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर ही चला था कि उस की कार जब कूड़ा डंपिंग जोन के पास बने मंदिर के पास पहुंची तो दुर्घटनाग्रस्त हो कर खाईं में लुढ़क गई. मीना की मौत किसी तरह दाथांग सुयांग तो बाहर निकल आया, लेकिन उस ने देखा कि बीच की सीट पर पड़ी मीना मृतप्राय थी. हैरानी यह थी कि ड्राइवर दाथांग किसी तरह दरवाजा खोल कर गाड़ी से बाहर निकल आया था और पूरी तरह से कुछ लोगों ने देखा कि गाड़ी के भीतर एक महिला खून से लथपथ घायल अवस्था में पड़ी है तो उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम को दुर्घटना की सूचना दे दी. साथ ही मीना को पास के अस्पताल भिजवा दिया.

जिस स्थान पर ये दुर्घटना हुई थी, वह इलाका राजधानी ईटानगर के बांदरदेवा पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता था. जब पता चला कि एक्सीडेंट हुई कार में पूर्व विधायक लेगी लिशी की पुत्रवधू मीना सवार थी तो खुद थानाप्रभारी गोशम ताशा पुलिस टीम को ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. इंसपेक्टर गोशम यह देख कर हैरान थे कि गाड़ी का ड्राइवर दाथांग सुयांग एकदम सहीसलामत था. उसे खरोंच तक नहीं आई थी. सड़क से 3 मीटर नीचे खाई में लुढ़की गाड़ी भी एकदम सहीसलामत थी. उस के न तो शीशे टूटे थे, न ही गाड़ी कहीं से डैमेज हुई थी. वहां मौजूद लोगों ने बताया कि गाड़ी की बीच वाली सीट पर बैठी मीना बुरी तरह खून से लथपथ थी और उस के सिर, कंधों व गरदन पर काफी चोटें आई थीं.

पुलिस के आने से पहले ही लोगों ने मीना को पास के एक अस्पताल भिजवा दिया था. इंसपेक्टर गोशाम ने दुघर्टना को पूर्व विधायक लेगी लिशी की पुत्रवधू से जुड़ा होने के कारण नाहारलागुन के सीओ रिक कामसी के अलावा ईटानगर कैपिटल रीजन के एसपी जिमी चिराम को भी दुर्घटना की जानकारी दे दी थी, जो सूचना मिलने के कुछ देर बाद घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस ने यह सूचना पूर्व विधायक लेगी लिशी और उन की पति रोनी लिशी को दे दी थी. उन्हीं की सूचना से यह जानकारी पा कर कारसिंगा में रहने वाले मीना के मातापिता, भाईबहन व अन्य रिश्तेदार भी घटनास्थल पर पहुंच गए. एसपी जिमी चिराम ने जब घटनास्थल का निरीक्षण किया तो पहली ही नजर में उन्हें दुर्घटना संदिग्ध लगी.

इसलिए फोरैंसिकटीम ने गाड़ी व घटनास्थल का निरीक्षण कर ऐसे साक्ष्य एकत्र करने शुरू कर दिए, जिस से पता चल सके कि दुर्घटना किन कारणों से हुई. ड्राइवर दाथांग सुयांग घटनास्थल पर ही मौजूद था, इसीलिए पूछताछ की शुरुआत उसी से हुई. दाथांग ने बताया कि गाड़ी के ब्रेक फेल हो गए थे, जिस से गाड़ी संतुलन खो कर खाईं में लुढ़क गई और मालकिन मीना बुरी तरह जख्मी हो गईं. लेकिन पुलिस यह देख कर हैरान थी कि दाथांग एकदम सहीसलामत था, उसे खरोंच तक नहीं आई थी. मीना का बयान लेने के लिए पुलिस की एक टीम अस्पताल भेजी गई थी, लेकिन वहां पता चला कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उस की मौत हो गई थी. अस्पताल में मीना के परिजन, जिन में मायके व ससुराल के लोग भी शामिल थे, भी अस्पताल पहुंच चुके थे जिस से वहां का माहौल परिजनों के मार्मिक विलाप के कारण बेहद गमगीन हो गया था.

पुलिस टीम ने दुर्घटना में घायल हुई मीना के शरीर पर आई चोटों की फोटोग्राफी कराई. एसपी जिमी चिराम ने ये फोटो देखे तो पूरी तरह साफ हो गया कि दुर्घटना का यह मामला सिर्फ दिखाने के लिए था. मीना के मातापिता व रिश्तेदारों के साथ पूर्व विधायक लिशी लेगी भी अस्पताल से दुर्घटनास्थल पर पहुंच गए थे. गाड़ी और उस का ड्राइवर जिस तरह सहीसलामत थे और मीना की दुर्घटना में जो हालत हुई थी, उसे देख कर उन्होंने भी यहीं आशंका जताई कि ऐसा हो ही नहीं सकता कि मीना को दुर्घटना में इतनी गंभीर चोटें लगी हों. मीना के पिता तेची काक ने एसपी जिमी चिराम को एकांत में ले जा कर जो कुछ बताया, उस ने अचानक दुर्घटना के इस मामले को नया रंग दे दिया.

इस के बाद तो पुलिस की जांच करने का तरीका ही बदल गया. पुलिस ने उसी दिन मीना का शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. ड्राइवर ने बताया ब्रेक फेल होना ड्राइवर दाथांग ने चूंकि बताया था कि गाड़ी के ब्रेक फेल होने के कारण वह असंतुलित हो कर खाई में गिरी थी. इसीलिए पुलिस ने पुलिस लाइन से मोटर इंजीनियर एक्सपर्ट को मौके पर बुलवा लिया. उन्होंने जांचपड़ताल की तो यह देख कर दंग रह गए कि गाड़ी के ब्रेक एकदम सहीसलामत थे. इस के बाद 2 दिन पहले ही मीना की गाड़ी पर ड्राइवर की नौकरी करने आए दाथांग की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई. पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. साथ ही उस के मोबाइल को भी अपने कब्जे में ले लिया गया.

नाहरलगुन पुलिस स्टेशन में उसी दिन इंसपेक्टर गोशाम ने भादंसं की धारा 279/304 (ए) आईपीसी के तहत लापरवाही से गाड़ी चला कर दुर्घटना करने का मामला दर्ज करवा दिया और जांच का काम स्वयं शुरू किया. दाथांग सुयांग से कड़ी पूछताछ की जाने लगी. उस के मोबाइल की काल डिटेल्स निकाली गईं. पूछताछ में पता चला कि नया मोबाइल व नंबर उस के मालिक लिशी रोनी ने ही उसे खरीद कर दिया था. 3 दिन पहले एक्टिव हुए इस नंबर की काल डिटेल्स खंगालते हुए पुलिस ने उन लोगों को चैक करना शुरू कर दिया, जिन्होंने इस नंबर पर काल की थी या इस नंबर से उन के नंबर पर काल किए गए थे.

अगली सुबह मीना के शव को पोस्टमार्टम के बाद उन के घरवालों को सौंप दिया गया. पूरे ईटानगर में मीना की संदिग्ध मौत की खबर जंगल की आग की तरह फैल चुकी थी. मीना के ससुर लेगी लिशी एक बड़ी राजनीतिक हस्ती थे. खुद मीना भी सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी थी. इसलिए शवयात्रा में मीना के घर वालों के अलावा बड़ी संख्या में राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के लोग शामिल हुए. इधर पुलिस को मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि मीना की जांघ, हथेली, सिर और गरदन पर किसी भारी चीज से प्रहार हुआ था और वहां गहरे कट के निशान थे, बायां हाथ सूजा हुआ था. मैडिकल जांच करने वाले विशेषज्ञों और गाड़ी का मुआयना करने वाले एक्सपर्ट ने साफ कर दिया था कि दुर्घटना में इस तरह की चोट नहीं आ सकती.

दुर्घटना के बाद मीना के ससुर पूर्व विधायक लेगी लिशी ने भी दुर्घटना के संदिग्ध हालात के मामले की गहनता से सही जांच के लिए कहा था. पुलिस को इस मामले में शुरुआती जांच से ही जिस तरह से गहरी साजिश और इस में कई लोगों के शामिल होने के सबूत मिले थे. उसी के मद्देनजर आईजीपी (कानून एवं व्यवस्था) चुखू अपा ने ईटानगर कैपिटल रीजन के एसपी जिमी चिराम के नेतृत्व में इस मामले का खुलासा करने के लिए एक बड़ी टीम का गठन कर दिया. इस टीम में नाहारलागुन सर्किल के सीओ रिक कामसी व जांच अधिकारी इंसपेक्टर गोशाम के अलावा इंसपेक्टर मिनली गेई, खिकसी यांगफो व तिराप जिले के एसपी कारदक रिबा तथा खोंसा पुलिस थाने के इंसपेक्टर वांगोई कामुहा को शामिल किया गया. इस टीम को बंट कर काम करना था.

पुलिस की टीमों ने इस दौरान मीना के घर से ले कर घटनास्थल तक पहुंचने के तक जिन मार्गों से गाड़ी गुजरी थी, उन सभी रास्तों के सीसीटीवी फुटेज चैक करने शुरू कर दिए. इस के अलावा पुलिस ने घटनास्थल के एक किलोमीटर के दायरे में सड़क किनारे बनी दुकानों व रेहड़ी वालों से पूछताछ करनी शुरू कर दी. पुलिस ने छानबीन शुरू की तो उसे जल्द ही चश्मदीद के रूप में कुछ राहगीर व रेहड़ी वाले मिल गए, जिन्होंने कार के ब्रेक फेल होने की ड्राइवर दाथांग सुयांग की कहानी को झूठा साबित कर दिया. एक चश्मदीद ने कार नीचे गिरने के बाद 50 मीटर की दूरी से देखा था कि उस का ड्राइवर गाड़ी से बाहर निकला था और पिछली सीट पर पड़ी महिला को बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था.

जबकि कारसिंगा ब्लौक बिंदु पर सड़क किनारे सब्जी बेचने वाले एक रेहड़ी वाले ने बताया कि उस के सामने से कार सामान्य गति से गुजरी थी, इस से यह कहना गलत था कि उस के ब्रेक फेल हुए होंगे. तब तक पुलिस को ड्राइवर दाथांग की संदिग्ध गतिविधियों के कुछ दूसरे साक्ष्य भी मिल गए थे. इसीलिए 6 नंवबर की सुबह उसे आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर के कड़ी पूछताछ शुरू कर दी गई. मुंह खोलना पड़ा ड्राइवर दाथांग को ड्राइवर दाथांग ने शुरू में तो एक ही रट लगाए रखी कि गाड़ी के ब्रेक नहीं लगे थे. लेकिन जब पुलिस ने उस के खिलाफ एकत्र सारे सबूत एकएक कर के उस के सामने रखने शुरू किए तो वह जल्द ही टूट गया. उस ने अपना गुनाह कबूल कर लिया. दाथांग के मुंह खोलते ही साजिश के तहत मीना की हत्या की एक सनसनीखेज कहानी सामने आई.

पुलिस को एक बार अपराध का सिरा हाथ लग जाए तो उस के अंतिम छोर तक पहुंचने में ज्यादा देर नहीं लगती. पुलिस ने उसी दिन शाम तक ताबड़तोड़ छापेमारी करते हुए तिरप जिले से दाथांग सुयांग के साथ मीना की हत्या की साजिश में शामिल रहे 3 सहआरोपियों कपवांग लेटी लोवांग (40) के साथ ताने खोयांग (33) और दामित्र खोयांग (29) को गिरफ्तार कर लिया. कपवांग पूर्वोत्तर भारत के एक विद्रोही गुट एनएससीएन (यू) का सक्रिय कार्यकर्ता रह चुका था. उसी ने मीना की हत्या की सुपारी ली थी. हैरानी की बात यह थी कि मीना की हत्या की सुपारी उस के पति रोनी लिशी ने ही दी थी. कपवांग रोनी का पुराना जानकार था. उसी ने सुपारी लेने के बाद हत्यारों का इंतजाम किया था. बाद में पूरी योजना के तहत इस वारदात को इस तरह अंजाम दिया गया ताकि यह हत्या एक दुर्घटना लगे.

पुलिस ने पूछताछ के लिए आरोपियों को अदालत से रिमांड पर ले लिया. उस के बाद उन के बयानों की तस्दीक की जाने लगी. क्योंकि हत्या का आरोप मृतका के पति और एक प्रभावशाली पूर्व विधायक के बेटे पर था. इसलिए पुलिस आरोपों को प्रमाणित करने के लिए साक्ष्य एकत्र कर लेना चाहती थी. इस दौरान जब यह बात सार्वजनिक हो गई कि मीना की हत्या उस के पति रोनी ने ही भाड़े के हत्यारों से करवाई है तो राजनीतिक व सामाजिक संगठनों ने धरने, प्रदर्शन व कैंडिल मार्च के जरिए पुलिस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया. परिवार के लोग भी अब पूरी तरह रोनी के खिलाफ बोलने लगे. तब तक पुलिस ने कई साक्ष्य एकत्र कर लिए थे. जिस के बाद 10 नवंबर को रोनी लेशी को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

लेकिन पुलिस को इस हत्याकांड की जो थ्योरी अब तक पता चली थी, उस के मुताबिक उसे मामले में 2 अन्य लोगों की तलाश थी. उस के लिए साक्ष्य एकत्र करने का काम शुरू कर दिया गया. आखिरकार 18 नवंबर को पुलिस ने रोनी की प्रेमिका व दूसरी पत्नी चुमी ताया (26) व उस की कंपनी में काम करने वाले मैनेजर विजय बिस्वास (30) को भी हत्याकांड की साजिश में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. इन सभी की गिरफ्तारी के बाद जांच अधिकारी ने दुर्घटना के इस मामले को हत्या व साजिश की धाराएं लगा कर हत्या में परिवर्तित कर दिया. इस के बाद मीना हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, उस ने पूर्वोत्तर के खूबसूरत राज्य अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर शहर के लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया.

लोग सोच रहे थे कि एक इंसान केवल दूसरी लड़की से शादी करने के लिए अपनी पहली पत्नी की बेरहमी से हत्या करा सकता है, जिस से न सिर्फ उस ने प्रेम विवाह किया था बल्कि जिस के पेट में उस का बच्चा भी पल रहा था. रोनी लिशी एक संपन्न परिवार का युवक था. परिवार में 2 छोटे भाई व एक बहन थी. पिता लेगी लिशी प्रतिष्ठित राजनीतिक व्यक्ति होने के साथ अथाह संपत्ति के मालिक थे. उन्होंने सभी बच्चों के नाम पर संपत्तियां खरीदी हुई थीं. रोनी कोई अशिक्षित भी नहीं था. उस ने इंजीनियरिंग की थी. कालेज में पढ़ते हुए हुआ प्यार पिता लेगी लिशी ने रोनी को 2 कंपनियां खुलवा कर दी थीं. ईटानगर में उन की पहली कंपनी लिशी वन होम मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड थी, जिस की स्थापना उन्होंने 2012 में की थी.

जबकि 3 साल पहले रोनी ने अपनी बेटी के नाम पर यामिको ग्लोबल इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम से दूसरी कंपनी शुरू की थी. उस की प्रेमिका व दूसरी पत्नी चुमी ताया इसी कंपनी में काम करती थी. रोनी व मीना की दोस्ती 2008 में कालेज में पढ़ाई के दौरान हुई थी, जो बाद में प्यार में बदल गई. मीना कारसिंगा में रहने वाले एक मध्यमवर्गीय परिवार की बेहद खूबसूरत व घरेलू लड़की थी. मीना की इसी खूबसूरती पर रोनी मर मिटा था और उस से प्यार करने लगा था. बाद में दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया था. मीना चूंकि मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की थी, इसलिए पहले उस के घर वाले संकोच करते रहे कि रोनी एक संपन्न व बड़े परिवार का लड़का है. कहीं ऐसा न हो कि उस के परिवार वाले शादी के लिए राजी न हों.

क्योंकि उन की हैसियत रोनी के परिवार के सामने कुछ भी नहीं थी. ऐसा न हो कि दोनों की शादी बेमेल संबंध बन जाए और मीना को बाद में परेशानी उठानी पड़े. लेकिन मीना व रोनी के कई बार समझाने के बाद परिवार की झिझक दूर हुई और दोनों के मिलन का रास्ता साफ हो गया. लिहाजा सन 2012 में दोनों परिवारों की सहमति से रोनी और मीना ने शादी कर ली. शादी के 2 साल बाद 2014 में दोनों के प्यार की निशानी के रूप में एक बेटी हुई, जिस का नाम लेसी यामिको रखा गया. साल 2017 में अचानक मीना के परिजनों को पता चला कि रोनी ने मीना को तलाक देने के लिए अदालत में अरजी दी है. यह पता चला तो परिवार के लोग बेचैन हो गए.

क्योंकि जिस लड़की से विवाह करने के लिए रोनी उन के सामने मिन्नतें कर रहा था, वह उसी को तलाक क्यों देना चाह रहा था, यह उन की समझ से परे था. पूरा मामला जानने के लिए मीना के घर वाले रोनी के पास पहुंचे. मीना से पता चला कि रोनी कुछ दिनों से चुमी ताया नाम की एक लड़की के प्यार में पागल है. जब से वह रोनी की जिंदगी में आई है, तब से उन दोनों के प्यार में न सिर्फ दरार आ गई थी बल्कि रोनी अब छोटीछोटी बातों पर उस के साथ मारपीट भी करने लगा था और परेशान भी. परेशानी भी कोई बड़ी नहीं होती थी. कभी वह खाने में खराबी बता कर उस से मारपीट करता तो कभी घर में सफाई न होने को ले कर झगड़ा करता था.

मीना के घर वालों को जब यह बात पता चली तो उन्होंने रोनी के मातापिता व भाईबहनों के साथ मिलबैठ कर इस मसले को सुलझाना चाहा. रोनी के मातापिता को जब इस बात का पता चला कि उस की जिंदगी में किसी दूसरी महिला ने जगह बना ली है तो उन्होंने भी रोनी को बहुत समझाया. उन्होंने उसी साल 2017 में रोनी की मांग पर उसे एक नया घर ले कर दे दिया और उस से वायदा लिया कि वह मीना के साथ उस घर में प्यार से रहेगा. दोनों परिवारों को उम्मीद थी कि अलग रहने के बाद दोनों के बीच खोया हुआ प्यार शायद फिर से पनप जाए. लेकिन कुछ दिन सामान्य रहने के बाद रोनी फिर से अपनी नई गर्लफ्रैंड की बांहों में खो गया. वह कईकई दिनों तक घर से गायब रहता. मीना ऐतराज करती तो वह उस के साथ मारपीट करता और कहता कि अगर मेरे साथ नहीं रहना चाहती तो मुझे तलाक दे दो.

एक तरह से रोनी ने मन बना लिया था कि किसी भी तरह मीना उस की जिंदगी से चली जाए. सन 2018 में एक बार फिर बात मीना के घर वालों तक पहुंच गई. मीना के घर वाले उस के नए घर पहुंचे, जहां एक बार फिर से दोनों परिवारों के सभी लोगों की पंचायत हुई. मीना ने परिवार वालों को रोनी की जिन हरकतों के बारे में बताया था, उस के बाद परिवार वालों को भी लगा कि अगर रोनी के दिल से मीना के लिए प्यार ही खत्म हो गया है तो ऐसे में यातना सहने के लिए बेटी को उस घर में छोड़ने से क्या फायदा. इसीलिए उन्होंने मीना को अपने साथ ले जाने के लिए कहा. लेकिन रोनी के पिता ने मीना को भेजने से मना कर दिया और रोनी को पूरे परिवार के सामने बहुत डांटाफटकारा.

नतीजा यह निकला कि रोनी को अपनी हरकतों पर पछतावा हुआ और उस ने दोनों परिवारों के सामने अपने किए पर शर्मिंदगी जताते हुए स्वीकार किया कि मीना ही उस की असली और इकलौती मोहब्बत है तथा उस की बेटी की मां भी है. उस दिन रोनी ने दोनों परिवारों के बीच वादा किया कि भविष्य में मीना को उस की तरफ से किसी तरह की शिकायत करने का मौका नहीं मिलेगा. अगर पतिपत्नी के बीच कोई छोटीमोटी प्रौब्लम होगी भी तो वे उसे खुद बैठ कर सुलझाएंगे, परिवार के दूसरे लोगों को शिकायतें सुनने का मौका नहीं मिलेगा. दोनों के बदले हुए व्यवहार से दोनों परिवारों ने सोचा कि शायद सुबह का भूला शाम को घर आ गया है. बेटी का टूटता घर बचने की आस में मीना के घर वाले वापस लौट गए.

लगा सब ठीक हो गया इस के बाद वक्त तेजी से बीतने लगा. मीना के घर वाले उस की गृहस्थी के बारे में फोन कर के पूछते रहते थे. लेकिन मीना ने परिवार वालों से कभी भी ऐसी कोई जानकारी नहीं दी, जिस से उन्हें पता चलता कि रोनी उसे फिर से परेशान कर रहा है. वक्त बीता और साल 2020 शुरू हो गया. इसी बीच फरवरी में मीना के घर वाले यह जान कर खुशी से फूले नहीं समाए कि मीना फिर से गर्भवती है और रोनी के दूसरे बच्चे की मां बनने वाली है. इस के बाद उन्हें यकीन हो गया कि रोनी और मीना के बीच का प्यार मजबूत हो चुका है.

लेकिन 5 नंवबर को अचानक परिवार के लोगों को सूचना मिली कि मीना कारसिंगा में एक दुर्घटना में बुरी तरह घायल हुई है और उसे अस्पताल में भरती कराया गया है. जब तक परिवार वहां पहुंचा, तब तक उस की मौत हो चुकी थी. इधर चुमी ताया (26) मूलरूप से कामले जिले की रहने वाली खूबसूरत और महत्त्वाकांक्षी युवती थी. वह पिछले 3 साल से रोनी की कंपनी में काम करती थी. यहीं पर रोनी उस की तरफ आकर्षित हुआ. दोनों के बीच प्यार हुआ और बाद में दोनों लिवइन में रहने लगे. चुमी को पता था कि कि रोनी शादीशुदा है और एक बच्ची का पिता भी. इस के बावजूद कुछ समय पहले रोनी के साथ उस ने गुपचुप तरीके से शादी भी कर ली. चुमी ताया धीरेधीरे रोनी पर दबाव बनाने लगी कि वह मीना को तलाक दे कर उसे सामाजिक रूप से अपनी पत्नी घोषित करे.

हालांकि रोनी जब से चुमी ताया के प्यार में डूबा था तभी से मीना के साथ उस के रिश्तों में कड़वाहट भर गई थी. लेकिन चुमी से शादी के बाद यह कड़वाहट एक जहरीले रिश्ते के रूप में बदल गई. रोनी लगातार मीना पर दबाव बनाने लगा कि वह एक मकान और कुछ पैसा ले ले लेकिन उसे तलाक दे दे. लेकिन मीना इस के लिए तैयार नहीं थी. इसीलिए रोनी ने मीना को अपनी जिंदगी से हटाने के लिए भाड़े के हत्यारों का सहारा ले कर उस की हत्या कराने की साजिश तैयार की. कारसिंगा में ही रोनी का एक फार्महाउस था, जहां वह अकसर अपनी दूसरी पत्नी चुमी ताया के साथ रहता था. रोनी ने हत्याकांड को इस तरह से अंजाम दिलाने की साजिश रची थी कि लोग इसे दुर्घटना समझ लें. मीना की हत्या के लिए उस ने अपने एक पुराने दोस्त कपवांग लेटी से संपर्क किया.

क्योंकि उसे पता था कि कपवांग विद्रोही संगठन एनएससीएन (यू) का पुराना कार्यकर्ता है और उस के पास पैसा ले कर किसी की हत्या करने वाले लोगों की कोई कमी नहीं होगी. रोनी ने जब उस से कौन्ट्रैक्ट किलर की व्यवस्था करने के लिए कहा तो कापवांग ने कहा कि वह काम तो करा देगा, लेकिन इस के लिए 10 लाख रुपए लगेंगे. रोनी तैयार हो गया, लेकिन उस ने शर्त रख दी कि काम इस तरह होना चाहिए कि किसी को मीना की हत्या का पता न लगे बल्कि लोग इसे दुर्घटना समझें. कपवांग ने आश्वासन दिया कि ऐसा ही होगा. इस के बाद साजिश तैयार होने लगी. 27 अक्तूबर की शाम कपवांग लेटी लोवांग अपने साथ दाथांग सुयांग और ताने खोयांग को ले कर खोंसा जिले से राजधानी ईटागनर पहुंचा और वे तीनों होटल सू पिंसा में रुके.

28 अक्तूबर को रोनी उन से मिलने होटल पहुंचा और अपनी पत्नी को कपवांग के साथ मारने की योजना को अंतिम रूप दिया. बनाई गई योजना के अनुसार दाथांग सुयांग को इस हत्या को अंजाम दे कर दुर्घटना का रूप देना था. रोनी ने तय किया था कि इस काम के लिए वह 5 लाख रुपए एडवांस देगा. लिहाजा उसी दिन रोनी ने 5 लाख रुपए का नकद भुगतान कर दिया. बाकी की रकम काम होने पर 15 दिनों में 3 लाख और 2 लाख रुपए की 2 किस्तों में देना तय हुआ था. कपवांग और ताने खोयांग 30 अक्तूबर को खोंसा वापस चला गए. जबकि दाथांग अगले ही दिन वापस आ गया. रोनी ने जो साजिश तैयार की थी, उस के मुताबिक दाथांग को वारदात को अंजाम देने के लिए रोनी की पत्नी मीना का ड्राइवर बन कर रहना था.

साजिश का पहला कदम एक दिन मीना के ड्राइवर के रूप में काम करने के बाद उसे लगा कि काम को वह जितना आसान समझ रहा था उतना आसान नहीं है. इसीलिए 2 नवंबर को दाथांग ने रोनी से एक साथी की व्यवस्था करने का अनुरोध किया. क्योंकि उसे लगा कि वह खुद मीना की हत्या करने में समर्थ नहीं होगा. रोनी ने फिर से कापवांग से फोन पर संपर्क कर के दाथांग की तरफ से एक और साथी उपलब्ध कराने की बात बताई तो विचारविमर्श के बाद कपवांग ने अपने दूसरे सहयोगी दामित्र खोयांग को इस साजिश को अंजाम देने के लिए ईटानगर के लिए रवाना कर दिया.

दामित्र खोयांग उस वक्त दोइमुख में किसी के यहां ड्राइवर के रूप में काम कर रहा था. आदेश मिलते ही वह राजधानी ईटानगर पहुंच गया और रोनी से मिला. खोयांग के आ जाने पर 4 नवंबर की सुबह रोनी और दाथांग ने एक बार फिर उस रूट का जायजा लिया, जो कारसिंगा में ब्लौक पौइंट के पास था. यहीं पर उस ने मीना की हत्या कराने की योजना को अंजाम देने का प्लान तैयार किया था. उसी दिन रोनी ने एक बार फिर से पूरी योजना को अंजाम देने वाली हर बात को अंतिम रूप दिया और तय हुआ कि अगले दिन यानी 5 नवंबर, 2020 को मीना को ठिकाने लगाने की योजना को अंजाम दिया जाएगा.

जैसी योजना बनी थी, उसी के मुताबिक काम शुरू कर दिया गया. 5 नवंबर की सुबह रोनी जब अपने फार्महाउस में था, उस ने वहीं से मीना को फोन कर के कहा कि कारसिंगा में जो भूमि सरकार ने अधिग्रहित की है, उस के मुआवजे के मामले पर सरकारी विभाग में मीटिंग है. इसलिए वह ड्राइवर को साथ ले कर उस के पास आ जाए, जिस के बाद दोनों साथ चलेंगे. सुबह करीब 12 बजे बेटी को नौकरानी के पास छोड़ कर मीना इनोवा कार में ड्राइवर दाथांग के साथ कारसिंगा के लिए निकल पड़ी. जैसी कि योजना बनाई गई थी रास्ते में दाथांग ने बांगे तीनाली में पहले से इंतजार कर रहे अपने साथी दामित्र को साथ ले लिया. मीना के पूछने पर दाथांग ने बताया कि वह उस का दोस्त है और उसे भी कारसिंगा तहसील दफ्तर जाना है.

मीना दाथांग के साथ ड्राइवर के पीछे वाली सीट पर बैठी थी जबकि दामित्र सब से पीछे की सीट पर बैठ गया था. जैसे ही उन की गाड़ी ने मंदिर (कूड़ा डंपिंग जोन) पार किया, दामित्र ने अपने साथ छिपा कर लाए हथौड़े से मीना पर पीछे से पहले सिर पर वार किया, उस के बाद ताबड़तोड़ उस के कंधों, कनपटी और गरदन के पीछे वार किए. इस काम में मुश्किल से 3 से 4 मिनट का समय लगा. लहूलुहान और अपने ही खून से कार की सीट पर सराबोर हुई मीना ने अगले चंद मिनटों में ही दम तोड़़ दिया. दामित्र को जब यकीन हो गया कि मीना मर चुकी है तो उस ने दाथांग से कह कर ब्लौक पौइंट के पास गाड़ी रुकवाई और जैसे गाड़ी में सवार हुआ था, वैसे ही चुपचाप उतर गया.

दाथांग ने गाड़ी को थोड़ा आगे बढ़ाया और उसे मोड़ के पास सड़क के बाएं किनारे तिरछा खड़ा कर के चाभी लगी छोड़ नीचे उतर गया. इस के बाद उस ने न्यूट्रल में खड़ी गाड़ी को जोर लगा कर धक्का दे दिया. गाड़ी खाई में लगभग 2 से 3 मीटर नीचे चली गई. लेकिन 3 मीटर नीचे जा कर टायर के नीचे एक बड़ा पत्थर आने से गाड़ी ज्यादा आगे नहीं जा सकी. इसलिए दुर्घटना साबित करने की थ्योरी कमजोर पड़ गई. पुलिस ने जब जांच की तो पाया कि न तो कार के कहीं से शीशे टूटे थे और न ही कहीं से गाड़ी में टूटफूट हुई थी. फिर भी गाड़ी में बीच की सीट पर बैठी मीना की मौत हो गई थी. निरीक्षण के दौरान पता चला कि कार में कहीं भी कोई अंदरूनी क्षति नहीं पहुंची थी.

पुलिस ने ड्राइवर दाथांग से जब पूछताछ की तो उस ने बताया था कि ब्रेक फेल होने के कारण गाड़ी खाई में लुढ़की थी. लेकिन पुलिस ने अपने मोटर एक्सपर्ट को बुला कर गाड़ी की जांच करवाई तो गाडी के ब्रेक सही पाए गए. पत्नी के चक्कर में बच्चा भी गया इसी के बाद पुलिस को दाथांग पर शक होने लगा और उसे हिरासत में ले लिया गया. बाद में दाथांग के मोबाइल की काल डिटेल्स निकाली गई तो उस में कपवांग से ले कर दामित्र तक से बातचीत के रिकौर्ड मिले. हैरानी की बात यह थी कि दाथांग ने पुलिस पूछताछ में यह बात छिपा ली थी कि उन के साथ दामित्र भी था. पुलिस को दामित्र के मोबाइल फोन की जांच में मौके पर उस की मौजूदगी का सबूत मिल गया था. दोनों के फोन की काल डिटेल्स से पुलिस को कपवांग लेटी लोवांग और ताने खोयांग के इस साजिश से जुड़े होने के सबूत मिल गए.

मोबाइल फोन के जरिए इन सभी की कडि़यां जब रोनी लिशी से जुड़ी पाई गईं तो एकएक कर पुलिस उन्हें गिरफ्तार करती गई. जांच आगे बढ़ी तो पाया गया कि विजय बिस्वास जो मूलरूप से असम के नागांव का रहने वाला था, रोनी की इंफ्रा कंपनी में काम करता था. उसे इस हत्याकांड की साजिश की पूरी जानकारी थी. मीना की हत्या को जिस अनोखी साजिश से अंजाम दिया गया था, उस का खुलासा शायद ही होता, अगर मीना के परिजनों के खुल कर सामने आने और ईटानगर में लोगों ने ‘जस्टिस फौर मीना’ की मुहिम शुरू न की होती. इसीलिए पुलिस ने दबाव में आ कर गहन छानबीन करनी शुरू की. कडि़यों से कडि़यां जोड़ते हुए पुलिस इस साजिश के सूत्रधार और मीना के पति रोनी तक पहुंच गई और उसे गिरफ्तार कर लिया.

बाद में पुलिस ने चुमी ताया को भी गिरफ्तार कर लिया, क्योंकि जांच में पाया गया कि उसे पूरी वारदात की जानकारी थी, भले ही वह इस वारदात में सक्रिय रूप से शामिल नहीं थी. लेकिन उसी के उकसावे के कारण रोनी ने हत्या का कठोर फैसला लिया था. चुमी ताया के अलावा पुलिस ने इस हत्याकांड में विजय बिस्वास नाम के आरोपी को भी गिरफ्तार किया. विजय रोनी की कंपनी में काम करते हुए रोनी का सब से वफादार और भरोसेमंद आदमी बन गया था. वह उस के निजी कामों को संभालता था. रोनी के कहने पर विजय ने ही 3 मोबाइल खरीद कर वारदात में शामिल दोनों हत्यारों दाथांग सुयांग, दामित्री खोयांग और हत्याकांड की सुपारी लेने वाले कपवांग लेटी लोवांग तक पहुंचाए थे.

पुलिस ने इन तीनों मोबाइल फोनों के साथ एक नहर में फेंके गए उस हथौडे़ को भी बरामद कर लिया, जिस से मीना की हत्या की गई थी. रोनी ने साजिश तो रची थी दूसरी पत्नी के लिए पहली पत्नी को रास्ते से हटाने की, लेकिन एक कत्ल के चक्कर में वह दूसरी हत्या के रूप में अपने अजन्मे बच्चे की हत्या का पाप भी करा बैठा.

—कहानी पुलिस की जांच व परिजनों के कथन पर आधारित

 

Love Crime : प्रेमिका का गला तब तक दबाया जब तक उसकी सासें थम नहीं जाएं

Love Crime : घरपरिवार से अलग स्वच्छंद जीवन जीने की इच्छुक लड़कियों का कमोबेश रश्मि जैसा ही हाल होता है. चिराग पटेल ने भले ही हत्या का अपराध किया, लेकिन उस की हत्या की भूमिका तभी बननी शुरू हो गई थी जब रश्मि ने जानबूझ कर शादीशुदा चिराग के साथ रिलेशनशिप में रहना शुरू किया था. काश! रश्मि ने अपने पिता परिवार…

60 वर्षीय जयंतीभाई वनमाली कटारिया अपनी दोनों बेटियों तनु और रश्मि के साथ गुजरात के सूरत जिले के बारदोली कस्बे के रोहितफालिया इलाके में रहते थे. वह गांव के प्रतिष्ठित काश्तकार थे. परिवार संपन्न और इज्जतदार था. किसी चीज की कोई कमी नहीं थी. उन की ख्वाहिश थी कि वह अपनी दोनों बेटियों को उच्चशिक्षा दिलाएं ताकि वे पढ़लिख कर समाज और बिरादरी में अपना एक अलग स्थान बनाएं. अपनी दोनों बेटियों के साथ वह बेटों जैसा व्यवहार करते थे. उन्होंने उन्हें अपनी तरफ से पूरी आजादी दे रखी थी. लेकिन जयंती भाई को यह पता नहीं था कि उन की आजादी एक दिन उन्हें बहुत भारी पड़ेगी. उन की बड़ी बेटी तो सरल स्वभाव की थी, लेकिन छोटी बेटी रश्मि काफी तेज और चंचल थी.

23 वर्षीय रश्मि कटारिया आधुनिक और ब्रौड माइंडेड युवती थी. वह जितनी शोख चंचल थी, उतनी ही सुंदर और स्मार्ट भी थी. फैशनपरस्त होने के साथसाथ वह पुराने दकियानूसी रस्मोरिवाजों को नहीं मानती थी. उस का कहना था कि जब तक खूबसूरती और जवानी है, एंजौय करो. शादीविवाह तो बंधन है, जिस की समय के साथ जरूरत पड़ती है. इसी वजह से रश्मि चिराग पटेल नाम के युवक के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहती थी. 15 नवंबर, 2020 दीपावली का दूसरा दिन था. लोग खुशियां मना रहे थे. अपने जानपहचान वालों, नातेरिश्तेदारों को दीपावली की बधाइयों केसाथ गिफ्ट दे रहे थे. कटारिया परिवार भी इस सब में पीछे नहीं था.

उन्होंने भी अपनी बेटी रश्मि को गिफ्ट देने के लिए फोन कर के घर बुलाया. फोन रश्मि के साथ लिवइन में रहने वाले चिराग पटेल ने रिसीव किया और कहा, ‘‘अंकल रश्मि तो नहाने के लिए बाथरूम गई है.’’

‘‘ठीक है बेटा, नहाने के बाद तुम लोग घर आ जाना.’’ रश्मि के पिता जयंतीभाई कटारिया ने अनुरोध किया. दूसरी तरफ से संतोषजनक जवाब पाने के बाद जयंतीभाई कटारिया ने फोन रख दिया और उन के आने का इंतजार करने लगे. लेकिन पूरा दिन निकल जाने के बाद भी न तो बेटी रश्मि आई और न ही उस का कोई फोन आया. इस से उन्हें रश्मि की चिंता हुई. उन्होंने रश्मि और चिराग को कई बार फोन लगाया लेकिन कोई रिस्पौंस नहीं मिला. हर बार दोनों का फोन स्विच्ड औफ मिला. फिर आउट औफ कवरेज एरिया बताने लगा. बेटी की चिंता में जयंतीभाई कटारिया की रात जैसेतैसे बीत गई. पर सुबह होते ही उन्होंने रश्मि और चिराग के फोन फिर ट्राई किए. लेकिन नतीजा वैसा ही रहा. ऐसे

में कटारिया और उन के परिवार का धैर्य टूट गया. ऐसा कभी नहीं हुआ था कि रश्मि के मांबाप, बहन फोन करें और उस का उन्हें जवाब न मिले. दिन में एक 2 बार तो रश्मि का उन के साथ संपर्क हो ही जाता था. लंबी बातें भी हुआ करती थीं. भले ही उन की बेटी लंबे समय से एक गैरजाति वाले चिराग के साथ लिवइन रिलेशन में रह रही थी, लेकिन परिवार के लोगों को उस के प्रति किसी प्रकार की नाराजगी नहीं थी. 17 नवंबर, 2020 को जब रश्मि की चिंता हद से गुजर गई तो जयंतीभाई कटारिया अपने भतीजे हीरेन कटारिया के साथ सुबहसुबह रश्मि के फ्लैट पर पहुंच गए. वहां उन्हें न तो रश्मि मिली और न ही चिराग पटेल मिला.

वहां सिर्फ उस की नौकरानी और रश्मि का 3 साल का बेटा मिला. पूछताछ में नौकरानी ने उन्हें बताया कि रश्मि और चिरागभाई कहीं बाहर घूमने गए हैं. नौकरानी से बातचीत करने केबाद जयंतीभाई कटारिया अपने नाती को साथ ले कर घर आ गए. नौकरानी और  पड़ोसियों ने जो बताया उसे ले कर उन का मन अशांत था. कुछ सवाल थे जो बारबार खटक रहे थे. उन का मानना था कि अगर रश्मि और चिराग बाहर घूमने गए थे तो बेटे को क्यों नहीं ले गए. इतने छोटे बच्चे को छोड़ कर मां कभी बाहर नहीं जाती. दूसरी बात यह थी कि उन दोनों के मोबाइल क्यों बंद थे. यह सब सोच कर उन का माथा ठनका तो उन्होंने अपनी जानपहचान और नातेरिश्तेदारों के यहां उन की तलाश शुरू कर दी.

जल्दी ही इस का नतीजा भी सामने आ गया. चिराग कहीं नहीं गया था, वह अपने रिश्तेदारों के यहां था. अगर कोई गया था तो वह थी रश्मि, उन की बेटी. उन्होंने इस बारे में जब चिराग से पूछा तो उस का कहना था कि रश्मि कहां गई, उसे नहीं पता. संदेह का सूत्र इस पर जयंतीभाई कटारिया परिवार का संदेह बढ़ गया. उन्होंने बिना किसी विलंब के 20 नवंबर को थाना बारदोली के थानाप्रभारी से मिल कर बेटी रश्मि की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाते हुए डीवाईएसपी रूपल सोलंकी को सारी बात बताई. साथ ही बेटी की तलाश करने का अनुरोध किया. जयंतीभाई कटारिया के अनुरोध पर डीवाईएसपी रूपल सोलंकी ने मामले को गंभीरता से लिया और बारदोली थानाप्रभारी को जांच के निर्देश दे दिए.

मामला एक बड़े किसान परिवार से जुड़ा और काफी जटिल था, जिसे सुलझाने के लिए सावधानी की जरूरत थी. इस के लिए थानाप्रभारी ने अपने सहायकों के साथ विचारविमर्श कर संदिग्ध चिराग को थाने बुला कर फौरी तौर पर पूछताछ की. चिराग ने जिस तरह रश्मि की गुमशुदगी में अनभिज्ञता जाहिर की, वह थानाप्रभारी और उन के सहायकों के गले नहीं उतरी. उन्हें दाल में कुछ काला नजर आ रहा था. इस के लिए थानाप्रभारी ने अपने सहायकों के साथ चिराग के जानपहचान और उस के परिवार की कुंडली खंगाली तो चिराग रडार पर आ गया. पुलिस ने चिराग को जब दूसरी बार पूछताछ के लिए थाने बुलाया तो वह घबरा गया और सच बोलने के सिवा उस के पास और कोई चारा नहीं बचा. उसे रश्मि की गुमशुदगी के रहस्य से परदा उठाना ही पड़ा.

चिराग के बयान और पुलिस जांच के अनुसार रश्मि की गुमशुदगी और लिवइन रिलेशनशिप की जो कहानी सामने आई, उस की पृष्ठभूमि काफी सनसनीखेज थी, जिसे जान कर लोगों का कलेजा मुंह को आ गया. 32 वर्षीय चिराग पटेल उसी तालुका बारदोली का रहने वाला था, जहां की रश्मि रहने वाली थी. उस के पिता का नाम सुरेशभाई पटेल था. सुरेशभाई की गिनती वहां के धनी और संपन्न किसानों में की जाती थी. उन की अच्छी उपजाऊ जमीन थी, जिस पर वह आधुनिक तरीके से खेती करवाते थे. तैयार होने पर उन की फसल सीधे शहर की बड़ी मंडियों में जाती थी.

स्वस्थ, सुंदर और महत्त्वाकांक्षी चिराग पटेल उन का एकलौता बेटा था, जिसे परिवार से खूब लाड़प्यार मिला था. पिता की तरह उसे भी खेतीबाड़ी से प्यार था. इसी के चलते उस ने अपनी पढ़ाई कृषि विज्ञान से पूरी की और घर आ कर पूरी तरह काश्तकारी संभाल ली. चिराग को अपने पैरों पर खड़ा देख परिवार वालों को उस की शादी की चिंता हुई तो उन्होंने उस के लिए लड़की की तलाश शुरू कर दी. उन्होंने अपनी जानपहचान और नातेरिश्तेदारों में उस की शादी की बात चलाई. फलस्वरूप उन्हें अपने ही रिश्तेदारी के बालोद गांव की रहने वाली सुंदर, सुशिक्षित, सुशील लड़की पसंद आ गई. उसी के साथ उन्होंने चिराग पटेल की शादी पूरे रस्मोरिवाज के साथ धूमधाम से कर दी.

चिराग अपनी शादी से बहुत खुश था. जल्दी ही वह एक बच्चे का पिता भी बन गया. पिता बन गया चिराग समय अपनी गति से चल रहा था. चिराग अपने परिवार में खुश था कि अचानक उस की जिंदगी में उस की पुरानी क्लासमेट रश्मि कटारिया दाखिल हो गई. खेती के कामों से शहर आतेजाते जब चिराग की नजर रश्मि से टकराई तो आधुनिक पोशाक में स्मार्ट और मौडर्न रश्मि को देख कर उस के दिल की धड़कनें बढ़ गईं. यही हाल रश्मि का भी था. वह भी स्मार्ट और सुंदर चिराग को अचानक देख कर स्तब्ध रह गई. थोड़ी सी औपचारिकता के बाद दोनों खुल गए. उन्होंने अपने जीवन और दिल की बातें शेयर की और एकदूसरे के सामने जिंदगी की पूरी किताब खोल कर रख दी.

अपनी शादी और जीवनसाथी के बारे में रश्मि ने बताया कि उस ने अभी इस बारे में सोचा ही नहीं है. वैसे भी यह एक बेकार का काम है, क्योंकि उस के नजरिए से जीवन मौजमजे का नाम है. रश्मि की बेबाक बातें सुन कर चिराग उस की तरफ आकर्षित हो गया. उसे एक ऐसी ही सुंदर पार्टनर की जरूरत थी, जिस के साथ वह मौजमजा कर सके. यह सोच कर चिराग ने जब रश्मि की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया तो रश्मि ने भी देरी नहीं की. पहले दोनों में दोस्ती हुई और फिर उन की दोस्ती प्यार में बदल गई. अब चिराग जबजब शहर जाता, अपने साथ रश्मि को भी ले कर जाता. दोनों शहर के होटलों में मौजमस्ती करते. मौलों में शौपिंग करते, घूमतेफिरते.

यह बात जानते हुए भी कि चिराग शादीशुदा और एक बच्चे का बाप है, रश्मि कटारिया चिराग के प्यार में आकंठ डूब गई. वह उस के साथ आजादी से घूमतीफिरती. चिराग का रहनसहन और वैभव देख कर उसे अहसास हो रहा था कि उस के साथ उस का भविष्य और सपने दोनों सुरक्षित रहेंगे. इसी वजह से परिवार वालों के रोकने और समझाने का उस पर कोई असर नहीं हुआ. रिलेशनशिप की शुरुआत चिराग के परिवार वालों को उस का रश्मि के साथ मिलनाजुलना पसंद नहीं था. इस के पहले कि वे चिराग को समझा कर रश्मि से अलग कर पाते, रश्मि लिवइन रिलेशन में रहने के लिए उन के बंगले पर आ गई और घरपरिवार वालों से कहा कि चिराग को वह अपना पति मानती है, उस से शादी करेगी.

इस बात को चिराग ने भी स्वीकार किया. उस का भी यही कहना था कि वह रश्मि को बहुत प्यार करता है, उस के बिना नहीं रह सकता. परिवार वालों को चिराग और रश्मि से यह उम्मीद नहीं थी. इस बात का परिवार और गांव वालों ने कड़ा विरोध किया. उन्होंने चिराग और रश्मि को कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि अगर उन दोनों ने एकदूसरे का साथ नहीं छोड़ा तो उन्हें गांव में नहीं रहने दिया जाएगा. वह किसी दूसरे गांव में जा कर रहें. आखिरकार पत्नी, मां और गांव परिवार के विरोध के चलते चिराग और रश्मि को गांव छोड़ना पड़ा और वे वागेन तालुका सूरत आ कर वहां के एक लग्जरी अपार्टमेंट में किराए का फ्लैट लेकर रहने लगे. लिवइन रिलेशनशिप के इस सफर को 5 साल कैसे बीत गए उन्हें पता ही नहीं चला.

इस बीच रश्मि एक स्वस्थ सुंदर बच्चे की मां बन चुकी थी. बीतते वक्त के साथ धीरेधीरे दोनों का पारिस्पारिक आकर्षण खत्म होने लगा. 5 सालों में चिराग के इश्क का भूत उतर चुका था. अब रश्मि उसे बोझ लगने लगी थी. वह उस से छुटकारा पाना चाहता था. ऐसे में रश्मि जब दोबारा गर्भवती हुई तो वह चिड़चिड़ा हो गया. जब यह बात चिराग की पत्नी और मां तक पहुंची तो वे आगबबूला हो गईं. दोनों ने रश्मि के फ्लैट पर पहुंच कर उन्हें आड़े हाथों लिया. खरीखोटी सुनाते हुए रश्मि के साथ मारपीट की, जिस से वह बुरी तरह डर गई थी. इस घटना से रश्मि को अपने और अपने बच्चे के भविष्य की चिंता सताने लगी.

उस का और बच्चे का भविष्य सुरक्षित हो, इस के लिए रश्मि चिराग पर शादी का दबाव बनाने लगी, जो उसे मान्य नहीं था. दूसरी ओर रश्मि शादी को ले कर अड़ गई थी.  इस से दोनों के बीच कहासुनी होने लगी. कभीकभी स्थिति मारपीट तक भी पहुंच जाती थी. दीपावली की रात लक्ष्मी पूजन के बाद जब रश्मि ने शादी की बात उठाई तो दोनों के बीच तकरार बढ़ गई और चिराग आपा खो बैठा. गुस्से में वह रश्मि का गला पकड़ कर तब तक दबाता रहा जब कि उस के प्राण नहीं निकल गए. इस तरह उसे रश्मि से छुटकारा तो मिल गया, लेकिन अब वह उस के शव का क्या करे, यह उस की समझ में नहीं आ रहा था.

मिल ही गई कब्र की जगह काफी सोचविचार के बाद चिराग को अपनी ससुराल के गांव बालोद की याद आई, जहां सरकारी पाइप डालने का काम चल रहा था और गहरे गड्ढे खोदे गए थे. वहां पाइपलाइन किसानों के खेतों से जा रही थी. यह खयाल आते ही चिराग ने रश्मि का शव बैडशीट में लपेट कर अपनी कार  में डाला और बालोद गांव पहुंच गया. वहां उस ने एक जेसीबी मशीन के ड्राइवर से बात कर के रश्मि के शव को दफन करवा दिया और अपने रिश्तेदारों के यहां चला गया. चिराग से पूछताछ के बाद बारदोली पुलिस ने मामले की जानकारी बालोद पुलिस अधीक्षक और एसडीएम को दी. घटनास्थल पर पहुंच कर अधिकारियों ने एफएसएल की मौजूदगी में जेसीबी मशीन की सहायता से रश्मि कटारिया का शव बाहर निकलवाया.

शव को बाहर निकलवा कर उस का बारीकी से निरीक्षण किया और पोस्टमार्टम के लिए स्थानीय अस्पताल भेज कर चिराग पटेल और जेसीबी के ड्राइवर को हिरासत में ले कर जेल भेज दिया. पोसटमार्टम रिपोर्ट में रश्मि 4 महीने की गर्भवती पाई गई. पुलिस के अनुसार भले ही चिराग ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, लेकिन पुलिस उस के बयानों से संतुष्ट नहीं थी. उन का मानना था कि इस हत्याकांड में वह अकेला नहीं रहा होगा. परदे के पीछे और लोग भी हो सकते हैं. वे लोग कौन हैं, यह जांच का विषय है. चूंकि रश्मि कटारिया अनुसूचित जाति की थी, इसलिए आगे की जांच अनुसूचित जाति/जनजाति सेल के डीवाईएसपी भार्गव पंडया को सौंप दी गई.

UP News : परेशान प्रेमिका ने प्रेमी के सिर पर सिलेंडर मारकर की हत्या

UP News : सीमा की शादी हो जाने के बाद नीरज को उस से दूरी बना लेनी चाहिए थी. लेकिन उस ने ऐसा नहीं किया बल्कि वह उस की ससुराल तक जाने लगा. एक दिन उस ने सीमा के साथ जोरजबरदस्ती करने की कोशिश की तो सीमा भी विकराल हो गई. इस के बाद…

नीरज बनसंवर कर घर से जाने लगा, तो उस के भाई धीरज ने उसे टोका, ‘‘नीरज इतनी रात को तुम कहां जा रहे हो? क्या कोई जरूरी काम है या फिर किसी की शादी में जा रहे हो?’’

‘‘भैया, मेरे दोस्त के घर भगवती जागरण है. मैं वहीं जा रहा हूं.’’ नीरज बोला.

फिर नीरज ने कलाई पर बंधी घड़ी पर नजर डाली और बोला, ‘‘भैया, अभी रात के साढ़े 9 बजे हैं. मैं 12 बजे तक लौट आऊंगा.’’ कहते हुए नीरज घर से बाहर चला गया. नीरज उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर शहर की सुरेखापुरम कालोनी में रहता था. धीरज और उस की पत्नी नीरज के इंतजार में रात 12 बजे तक जागते रहे. जब वह घर नहीं आया तो उन्हें चिंता हुई. वे दोनों घर के अंदरबाहर कुछ देर चहलकदमी करते रहे, फिर धीरज ने अपने मोबाइल फोन से नीरज को फोन किया. पर उस का फोन बंद था. धीरज ने कई बार फोन मिलाया, लेकिन हर बार फोन बंद ही मिला. रात 2 बजे तक वह नीरज के इंतजार में जागता रहा. उस के बाद उस की आंख लग गई.

अभी सुबह का उजाला ठीक से फैला भी नहीं था कि धीरज का दरवाजा किसी ने जोरजोर से पीटना शुरू किया. अलसाई आंखों से धीरज ने दरवाजा खोला तो सामने एक अनजान व्यक्ति खड़ा था. धीरज ने उस से पूछा, ‘‘आप कौन हैं और दरवाजा क्यों पीट रहे हैं?’’

उस अनजान व्यक्ति ने अपना परिचय तो नहीं दिया. लेकिन यह जरूर बताया कि उस का भाई नीरज डंगहर मोहल्ले में मीना किन्नर के घर के पास गंभीर हालत में पड़ा है. उस ने घर का पता बताया था और खबर देने का अनुरोध किया था, सो वह चला आया. भाई के घायल होने की जानकारी पा कर धीरज घबरा गया. उस ने अड़ोसपड़ोस के लोगों को जानकारी दी और फिर उन को साथ ले कर डंगहर मोहल्ले में मीना किन्नर के घर के पास पहुंच गया. उस समय वहां भीड़ जुटी थी. धीरज ने अपने भाई नीरज को मरणासन्न स्थिति में देखा तो वह घबरा गया. उस का सिर फटा हुआ था, जिस से वह लहूलुहान था. लग रहा था जैसे उस के सिर पर किसी ने भारी चीज से हमला किया था.

उस ने थाना कटरा पुलिस को इस की जानकारी दी फिर सहयोगियों के साथ नीरज को इलाज के लिए निजी डाक्टर के पास ले गया. लेकिन डाक्टर ने हाथ खड़े कर लिए और पुलिस केस बता कर सदर अस्पताल ले जाने की सलाह दी. यह बात 28 नवंबर, 2020 की सुबह 8 बजे की है. जीवित होने की आस में धीरज अपने भाई नीरज को सदर अस्पताल मिर्जापुर ले गया. डाक्टरों ने नीरज को देखते ही मृत घोषित कर दिया. भाई की मृत्यु की बात सुन कर धीरज फफक कर रोने लगा. चूंकि यह पुलिस केस था, इसलिए अस्पताल प्रशासन ने सूचना थाना कटरा पुलिस को दी. सूचना पाते ही प्रभारी निरीक्षक रमेश यादव पुलिस बल के साथ सदर अस्पताल आ गए. उन्होंने धीरज को धैर्य बंधाया और घटना के संबंध में पूछताछ की.

धीरज ने बताया कि वह सुरेखापुरम कालोनी में रहता है. उस का भाई नीरज बीती रात साढ़े 9 बजे यह कह कर घर से निकला था कि वह दोस्त के घर जागरण में जा रहा है. लेकिन सुबह उसे उस के घायल होने की जानकारी मिली. तब उस ने उसे सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

‘‘क्या तुम्हें पता है कि तुम्हारे भाई पर कातिलाना हमला किस ने किया है?’’ श्री यादव ने पूछा.

‘‘सर, मुझे कुछ भी पता नहीं है.’’ धीरज ने जवाब दिया.

पूछताछ के बाद श्री यादव ने नीरज के शव का बारीकी से निरीक्षण किया. नीरज की उम्र 32 वर्ष के आसपास थी. उस के सिर पर किसी ठोस वस्तु से प्रहार किया गया था, जिस से उस का सिर फट गया था. संभवत: सिर में गहरी चोट लगने के कारण ही उस की मौत हो गई थी. शरीर के अन्य भागों पर भी चोट के निशान थे. निरीक्षण के बाद उन्होंने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. इधर नीरज की हत्या की खबर सुरेखापुरम कालोनी पहुंची तो कालोनी में सनसनी फैल गई. धीरज के घर लोगों की भीड़ जमा हो गई. लोगों में जवान नीरज की हत्या को ले कर गुस्सा था. गुस्साई भीड़ ने मिर्जापुर नगर के बथुआ के पास मिर्जापुर-रीवा मार्ग जाम कर दिया तथा पुलिस विरोधी नारे लगाने शुरू कर दिए.

सड़क जाम की सूचना कटरा कोतवाल रमेश यादव को हुई तो वह पुलिस बल के साथ वहां पहुंचे. उन्होंने भीड़ को समझाने का प्रयास किया तो भीड़ और उत्तेजित हो गई. लोगों की शर्त थी कि जब तक पुलिस अधिकारी नहीं आएंगे, तब तक वह सड़क पर बैठे रहेंगे. इस पर श्री यादव ने जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी. उन्होंने अधिकारियों को यह भी बताया कि भीड़ बढ़ती जा रही है तथा स्थिति बिगड़ती जा रही है. हत्या के विरोध में सड़क जाम की सूचना पा कर एसपी अजय कुमार सिंह, एडीशनल एसपी (सिटी) संजय कुमार तथा सीओ अजय राय मौके पर पहुंचे. उन्होंने मृतक के घर वालों एवं उत्तेजित लोगों को समझाया तथा आश्वासन दिया कि नीरज के कातिलों को जल्द ही पकड़ा जाएगा. पुलिस अधिकारियों के इस आश्वासन पर भीड़ ने सड़क खाली कर दी.

एसपी अजय कुमार सिंह ने नीरज की हत्या को चुनौती के रूप में लिया. अत: हत्या का खुलासा करने के लिए उन्होंने एक विशेष टीम का गठन एएसपी (सिटी) संजय कुमार व सीओ अजय राय की देख रेख में गठित कर दी. इस टीम में प्रभारी निरीक्षक रमेश चंद्र यादव, चौकी इंचार्ज अजय कुमार श्रीवास्तव, हैडकांस्टेबल भोलानाथ, दारा सिंह, अरविंद सिंह, महिला कांस्टेबल रिचा तथा पूजा मौर्या को शामिल किया गया. पुलिस टीम ने सब से पहले घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन किया. उस के बाद मृतक नीरज के भाई धीरज का बयान दर्ज किया. पुलिस टीम ने अपनी जांच किन्नर मीना के घर के आसपास से शुरू की और दरजनों लोगों से पूछताछ की.

इस का परिणाम भी सार्थक निकला. पूछताछ से पता चला कि मृतक का आनाजाना डंगहर मोहल्ला निवासी विशाल यादव के घर था. विशाल की पत्नी सीमा (परिवर्तित नाम) और मृतक नीरज के बीच दोस्ती थी. लेकिन विशाल को नीरज का घर आना पसंद नहीं था. पुलिस टीम ने अपनी जांच आगे बढ़ाई और विशाल यादव के पड़ोसियों से पूछताछ की तो पता चला कि बीती रात 12 बजे के आसपास विशाल यादव के घर झगड़ा हो रहा था. मारपीट और चीखनेचिल्लाने की आवाजें आ रही थीं. फिर कुछ देर बाद खामोशी छा गई थी. पर झगड़ा किस से और क्यों हो रहा था, यह बात पता नहीं है.

विशाल यादव और उस की पत्नी सीमा पुलिस टीम की रडार पर आए तो टीम ने दोनों को हिरासत में ले कर पूछताछ करने की योजना बनाई. योजना के तहत पुलिस टीम रात 10 बजे विशाल यादव के घर पहुंची और विशाल को हिरासत में ले लिया. महिला कांस्टेबल रिचा और पूजा मौर्या ने विशाल की पत्नी सीमा को अपनी कस्टडी में ले लिया. दोनों को थाना कटरा लाया गया. थाने पर जब उन से नीरज की हत्या के संबंध में पूछताछ की गई तो विशाल व उस की पत्नी सीमा ने सहज ही अपना जुर्म कबूल कर लिया. विशाल यादव ने बताया कि वह मंजू रिटेलर टायर बरौंधा में काम करता है. उस की ड्यूटी रात में लगती है. बीती रात साढ़े 11 बजे नीरज उस के घर में घुस आया था और उस की पत्नी सीमा के साथ शारीरिक छेड़छाड़ करने लगा था. उस ने जब सीमा के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की तो उस ने इस का विरोध किया.

इसी बात को ले कर सीमा और नीरज में विवाद होने लगा. उस की पत्नी सीमा ने अपने बचाव में घर में रखे एक छोटे सिलेंडर से नीरज के सिर पर प्रहार कर दिया. जिस से उस के सिर में गंभीर चोट आ गई. इसी बीच विशाल भी घर आ गया, सच्चाई पता चली तो उसे भी गुस्सा आ गया, उस ने भी नीरज को मारापीटा और घर से भगा दिया. शायद गंभीर चोट लगने से उस की मौत हो गई. जुर्म कबूलने के बाद विशाल यादव ने आलाकत्ल छोटा सिलेंडर तथा ईंट अपने घर से पुलिस टीम को बरामद करा दी. पुलिस टीम ने नीरज हत्याकांड का परदाफाश करने तथा आलाकत्ल सहित उस के कातिलों को पकड़ने की जानकारी एसपी अजय कुमार सिंह को दी तो उन्होंने पुलिस सभागार में प्रैसवार्ता की और आरोपियों को मीडिया के समक्ष पेश कर नीरज हत्याकांड का खुलासा किया.

यही नहीं उन्होंने हत्याकांड का परदाफाश करने वाली पुलिस टीम को 10 हजार रुपए पुरस्कार देने की भी घोषणा की. चूंकि हत्यारोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था और आलाकत्ल भी बरामद करा दिया था, अत: थानाप्रभारी रमेश यादव ने मृतक के भाई धीरज की तरफ से धारा 304 आईपीसी के तहत विशाल यादव व उस की पत्नी सीमा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और उन्हें विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस जांच में एक औरत और उस के जुर्म की सनसनीखेज घटना प्रकाश में आई. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर शहर के सुरेखापुरम कालोनी में 2 भाई धीरज व नीरज श्रीवास्तव रहते थे. यह कालोनी थाना कटरा के अंतर्गत आती है. धीरज की शादी हो चुकी थी जबकि नीरज अविवाहित था.

उन के पिता रमेशचंद्र श्रीवास्तव की मौत हो चुकी थी. धीरज की बथुआ में मोबाइल फोन और एसेसरीज की दुकान थी, जबकि उस का छोटा भाई नीरज मोबाइल पार्ट्स की सप्लाई करता था. दोनों भाई खूब कमाते थे और मिलजुल कर रहते थे. एक रोज नीरज सुरेखापुरम कालोनी स्थित एक मोबाइल की दुकान पर कुछ मोबाइल पार्ट्स देने पहुंचा तो वहां उस की मुलाकात एक खूबसूरत युवती से हुई. उस समय वह वहां अपना मोबाइल फोन ठीक कराने आई थी. युवती और नीरज की आंखें एकदूसरे से मिलीं तो पहली ही नजर में दोनों एकदूसरे को भा गए. दोनों में बातचीत शुरू हुई तो युवती ने अपना नाम सीमा बताया. वह भी सुरेखापुरम कालोनी में ही रहती थी. बातचीत के दौरान ही दोनों ने एकदूसरे का मोबाइल नंबर ले लिया. फिर दोनों में अकसर मोबाइल फोन पर बातें होने लगीं. बातों का दायरा बढ़ता गया. फिर वे प्यारमोहब्बत की बातें करने लगे.

दरअसल सीमा विवाहित थी. उस के पिता ने उस की शादी एक सजातीय युवक के साथ की थी. सीमा दुलहन बन कर ससुराल तो गई लेकिन उसे वहां का वातावरण बिलकुल रास नहीं आया. ऊंचे ख्वाब सजाने वाली स्वच्छंद युवती को ससुराल की मानमर्यादा की सीमाओं में बंध कर रहना भला कैसे भाता. सुहागरात में तो उस के सारे अरमान धूल धूसरित हो कर रह गए. उस का पति उस की इच्छापूर्ति की कसौटी पर खरा नहीं उतर पाया. सीमा को ससुराल बंद पिंजरे की तरह लगने लगी थी, जहां वह किसी परिंदे की तरह फड़फड़ाने लगी थी. स्वच्छंदता पर सामाजिक मानमर्यादा की बंदिशें लग चुकी थीं. मन की तरंगे घूंघट के भीतर कैद हो कर रह गई थीं. ससुराल में उस का एकएक दिन मुश्किल में बीतने लगा.

सीमा ने एक दिन निश्चय कर लिया कि एक बार यहां से निकलने के बाद वह कभी अपनी ससुराल नहीं आएगी. आखिर एक दिन उस के घर वाले उसे बुलाने आ गए तो वह अपनी ससुराल को हमेशा के लिए अलविदा कह कर अपने मायके आ गई. मायके आ कर सीमा सजसंवर कर स्वच्छंद हो कर घूमने लगी. एक रोज उस का फोन खराब हो गया तो वह उसे ठीक कराने के लिए पास के ही एक मोबाइल शौप पर गई तो वहां उस की मुलाकात एक सजीले युवक नीरज से हुई. उस के बाद दोनों अकसर मिलने लगे. बाद में सीमा नीरज के साथ घूमने भी जाने लगी. कुछ ही दिनों में दोनों इतने नजदीक आ गए कि उन के बीच अंतरंग संबंध बन गए. अवैध रिश्तों का सिलसिला एक बार शुरू हुआ तो फिर रुकने का नाम नहीं लिया. जब भी दोनों को मौका मिलता, एकदूसरे की बांहों में समा जाते.

लेकिन ऐसी बातें समाज की नजरों से ज्यादा दिनों तक छिपती कहां हैं. धीरेधीरे पूरे मोहल्ले में नीरज और सीमा के नाजायज रिश्ते की चर्चा होने लगी. जवान बेटी ससुराल छोड़ कर बाप की छाती पर मूंग दले, इस से बड़ा कष्ट बाप के लिए और क्या हो सकता है. ऊपर से जब उस के नाजायज रिश्तों की बात पता चले तो उस के लिए चुल्लू भर पानी में डूब मरने वाली बात होती है. सीमा के बाप का धैर्य टूटा तो उस ने उस पर लगाम कसनी शुरू की और उस के योग्य कोई लड़का खोजना शुरू कर दिया. इस बीच प्रतिबंध लग जाने से सीमा और नीरज का मिलना कुछ कम हो गया. काफी दौड़धूप के बाद घर वालों ने सीमा का दूसरा विवाह विशाल यादव के साथ वर्ष 2019 में कर दिया. विशाल यादव के पिता कल्लू यादव की मृत्यु हो चुकी थी. विशाल मिर्जापुर शहर के कटरा थाना अंतर्गत डंगहर मोहल्ले में रहता था और मंजू रिटेलर टायर बरौंधा कचार में काम करता था.

विशाल यादव से विवाह करने के बाद सीमा हंसीखुशी से ससुराल में रहने लगी. यहां उसे कोई बंधन न था. न घर में सास थी न ससुर. पति भी सीधासादा था. वह पति से जिस भी चीज की मांग करती, वह उसे पूरा कर देता था. क्योंकि पत्नी की खुशी में ही अपनी खुशी समझता था. उस की मांग पर उस ने उसे नया मोबाइल फोन भी ला कर दे दिया था. होना यह चाहिए था कि जब सीमा ने दूसरी शादी कर ली तो नीरज को उस की ससुराल नहीं जाना चाहिए था. लेकिन नीरज नहीं माना. वह शारीरिक सुख पाने के लिए सीमा के घर जाने लगा. सीमा कभी तो उसे लिफ्ट दे देती, तो कभी उसे दुत्कार भी देती. सीमा नाराज हो जाती तो नीरज उसे उपहार दे कर या फिर आर्थिक मदद कर उस की नाराजगी दूर करता.

सीमा के पति विशाल की ड्यूटी रात में रहती थी. उस के जाने के बाद ही नीरज सीमा से मिलने आता था. फिर घंटा, 2 घंटा उस के साथ बिताने के बाद वापस चला जाता था. पड़ोसियों ने पहले तो गौर नहीं किया, लेकिन जब नीरज अकसर वहां आने लगा तो उन के कान खड़े हो गए. उन्होंने विशाल को हकीकत बताई तो उस के मन में शंका का बीज उपज आया. विशाल ने इस बाबत सीमा से जवाब तलब किया तो वह उसे बरगलाने की कोशिश करने लगी. विशाल ने सख्ती की तो सीमा ने सच्चाई बयां कर दी और यह कहते हुए माफी मांग ली कि आज के बाद वह नीरज से कोई वास्ता नहीं रखेगी.

विशाल ने घर टूटने के खौफ से सीमा को माफ कर दिया. इस के बाद सीमा ने सख्त रुख अख्तियार करना शुरू कर दिया. अब नीरज जब भी उस के घर आता, सीमा उसे दुत्कार कर भगा देती, लेकिन नीरज दुत्कारने के बावजूद सीमा से मिलने पहुंच जाता. वह सीमा को मनाने की भी कोशिश करता. 27 नवंबर, 2020 की रात साढ़े 9 बजे नीरज बनसंवर कर घर से निकला. उस ने अपने भाई धीरज से झूठ बोला कि वह दोस्त के घर जागरण में जा रहा है. घर से निकल कर वह कुछ देर इधरउधर घूमता रहा फिर रात साढ़े 11 बजे वह डंगहर स्थित सीमा के घर जा पहुंचा. सीमा ने उसे दुत्कारा और घर से निकल जाने को कहा.

लेकिन नीरज नहीं माना. उस ने सीमा को धकेल कर दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और सीमा से जोरजबरदस्ती करने लगा. सीमा ने विरोध किया तो वह जबरदस्ती उसे अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश करने लगा. सीमा बचाव में हाथपैर चलाने लगी. इसी बीच उस की निगाह छोटे गैस सिलेंडर पर पड़ी. उस ने लपक कर सिलेंडर उठाया और नीरज के सिर पर दे मारा. नीरज का सिर फट गया और वह जमीन पर गिर पड़ा. इसी समय किसी ने दरवाजा खटखटाया. सीमा ने दरवाजा खोला तो सामने उस का पति विशाल था. वह पति के सीने से लिपट गई और बोली, ‘‘नीरज जबरदस्ती घर में घुस आया था और उसे अपनी हवस का शिकार बनाना चाहता था.’’

सीमा की बात सुन कर विशाल का गुस्सा बढ़ गया. उस ने ईंट से उसे पीटना शुरू कर दिया. नीरज तब चीखनेचिल्लाने लगा और माफी भी मांगने लगा. बुरी तरह पीटने के बाद विशाल ने नीरज को घर के बाहर धकेल दिया. नीरज घायल अवस्था में कुछ दूर तक गया फिर मीना किन्नर के घर के सामने गिर पड़ा. रात भर ठंड में वह वहीं पड़ा रहा. सुबह कुछ लोग घर से टहलने निकले तो उन्होंने नीरज को गंभीर हालत में देखा. उधर से गुजरने वाले एक व्यक्ति को अपने घर का पता देते हुए खबर देने का अनुरोध किया. जब उस व्यक्ति ने नीरज के घर खबर की तो उस का भाई धीरज आया. धीरज ने उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

विशाल यादव और सीमा से पूछताछ के बाद पुलिस ने 29 नवंबर, 2020 को दोनों अभियुक्तों को मिर्जापुर की जिला अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में सीमा नाम परिवर्तित है.

 

UP Crime News : मम्मी और भाई पर टूटा प्यार का कहर

UP Crime News : रागिनी पड़ोस में ही रहने वाले सत्यजीत दिवाकर को दिल दे बैठी थी. फेमिली वालों की लाख पाबंदियों के बावजूद प्रेमी युगल अपने मिलने का मौका निकाल ही लेते थे. इन का प्यार एक दिन ऐसा कहर बन कर टूटा कि सत्यजीत के भाई सर्वजीत और मम्मी संगीता देवी की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई. किस ने की इन दोनों की हत्या? पढ़ें, लव क्राइम की यह स्टोरी.

10 मार्च, 2025 को रागिनी अपने घर पर अकेली थी. तभी उस ने अपने प्रेमी सत्यजीत को फोन लगा दिया. रागिनी ने फोन लगाते ही उसे इशारा कर दिया था कि वह इस वक्त घर पर अकेली है. अगर तुम्हें आना है तो आसपास देख कर ही आना. आते वक्त तुम पर किसी की नजर न पड़े. उस वक्त सत्यजीत अपने घर पर ही मौजूद था. रागिनी का फोन आते ही वह घर से निकला और चारों और देखते हुए वह रागिनी के घर में घुस गया.

सत्यजीत को घर आया देख रागिनी को डर तो लग रहा था, लेकिन वह उस के प्यार में वह इस कदर पागल थी कि सत्यजीत के आते ही उस की बांहों में समा गई, ”यार, तुम्हारे बिना तो रहा नहीं जाता. एकएक पल तुम्हारी याद में कांटों सा अहसास कराते हैं.’’

सत्यजीत का भी यही हाल था. वह भी उस की चाहत में अपना सब कामधंधा छोड़ कर पागल सा हुआ जा रहा था. उस दिन एकांत के क्षणों में वह रागिनी के पास पहुंचा तो उस ने पल भर में अपना सारा प्यार उस पर उड़ेल दिया. वह दुनियादारी को भूल कर रागिनी को अपनी बांहों मे समेटे पागलों की तरह खड़ा रहा. उसी समय रागिनी की निगाह घर के दरवाजे पर पड़ी. उस की मम्मी शांति अचानक घर की ओर आती दिखाई दी. अपनी मम्मी को सामने से आते देख रागिनी का सारा प्यार काफूर हो गया. वह सत्यजीत की बांहों से निकल कर कमरे में जा पहुंची. लेकिन वह समझ नहीं पा रही थी कि वह सत्यजीत के आने का क्या बहाना बनाएगी.

यही सोचतेसोचते रागिनी के दिमाग के तार झनझनाने लगे थे. मौका पाते ही सत्यजीत वहां से खिसक लिया था, लेकिन हड़बड़ाहट में वह अपनी चप्पलें नहीं पहन पाया था, जो रागिनी के कमरे के सामने ही रह गई थीं. सत्यजीत उन चप्पलों को ले कर परेशान था. शांति देवी आई और उस ने उन चप्पलों पर कोई ध्यान नहीं दिया, लेकिन जैसे ही रागिनी की नजर उन चप्पलों पर पड़ी तो वह उन्हें छिपाने की फिराक में लग गई. वह उन को अभी छिपा भी नहीं पाई थी, तभी उस का भाई श्रवण घर आ गया. उस की जैसे ही नजर चप्पलों पर पड़ी तो वह देखते ही उन को पहचान गया. उस ने कई बार सत्यजीत को इसे पहने देखा था.

उस की चप्पलें अपने घर पर देखते ही उस का दिमाग घूम गया. उस के बाद उस ने उन चप्पलोंं के बारे में अपनी बहन रागिनी और मम्मी शांति से पूछा तो दोनों ने कह दिया कि वह चप्पलें किस की हैं, उन्हें कोई पता नहीं. श्रवण को पता था कि जब वह घर से बाहर गया था, तब वह चप्पलें वहां पर नहीं थीं, लेकिन उस के घर से जाते ही वह चप्पलें वहां पर कैसे आईं. तभी उस की मम्मी ने भी बताया कि वह भी काफी समय से खेतों पर गई हुई थी.

यह सब जानकारी लेने के बाद श्रवण ने वह चप्पलें उठा कर रख दीं. फिर वह गांव में निकल गया. तभी उसे सामने से सत्यजीत आता दिखाई दिया. उस ने उस के पैरों की तरफ देखा तो उस वक्त उस ने दूसरी चप्पलें पहन रखी थीं. उसे दूसरी चप्पलें पहने देख उस के दिमाग में पूरा शक पैदा हो गया कि उस की गैरमौजूदगी में वह जरूर उस के घर पर गया था. इस से पहले भी कई बार उसे सत्यजीत पर शक पैदा हुआ था कि उस के और उस की बहन रागिनी के बीच जरूर कुछ चक्कर चल रहा है. यह सोचते ही उस ने वह बात अपने दिल में ही रख ली थी.

अगली सुबह सत्यजीत अपने बड़े भाई सरबजीत को साथ ले कर अपनी चप्पलें लेने रागिनी के घर पहुंचा. उस वक्त घर पर रागिनी और उस की मम्मी शांति ही थी. सत्यजीत ने अपनी चप्पलें मांगीं तो उस ने देने से मना कर दिया. तभी घर पर श्रवण भी आ गया. श्रवण के घर आते ही बात बिगड़ गई. श्रवण ने सत्यजीत से वहां पर चप्पलें आने का कारण पूछा तो उस ने कोई जबाव नहीं दिया. उस के बाद दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई. बातों ही बातों में बात इतनी बढ़ गई कि दोनों में मारपीट की नौबत आ गई.

उस वक्त सत्यजीत और सरबजीत के सामने श्रवण की एक न चली. आपस में लड़ाईझगड़ा होने के बाद यह बात पुलिस तक जा पहुंची. लेकिन पुलिस ने इस बात को हलके में लिया. फिर दोनों पक्षों को समझाबुझा कर वापस भेज दिया. श्रवण और उस की मम्मी पुलिस की इस काररवाई से संतुष्ट नहीं थे. यह बात शांति देवी ने फोन पर अपने बड़े बेटे सनी को भी बता दी थी. सनी ने तभी मन में ठान लिया था कि वह किसी भी हाल में सत्यजीत को सबक सिखा कर ही रहेगा.

उस के मन में एक आत्मग्लानि पैदा हो गई थी. गांव में उस की बहन के बारे में तरहतरह की चर्चाएं हो रही थीं, जिसे वह बरदाश्त नहीं कर पा रहा था. उस के मन में बदले की भावना बलवती हुई तो वह घर से कुल्हाड़ी ले कर निकल पड़ा. 10 मार्च, 2025 को रात के कोई 9 बजे का वक्त था. गांव के अधिकांश लोग अपनेअपने घरों में थे. सनी कुल्हाड़ी ले कर सीधा सत्यजीत के घर पहुंचा. वह सत्यजीत को भद्ïदीभद्ïदी गालियां देते हुए उस के घर का दरवाजा पीटने लगा. सनी को घर से निकलते देख उस की मम्मी शांति और उस का छोटा भाई श्रवण कुमार भी गंडासा ले कर उस के पीछे ही सत्यजीत के घर पर पहुंच गए.

जैसे ही सत्यजीत के भाई सरबजीत ने दरवाजा खोला, तीनों ने उस पर हमला बोल दिया. सरबजीत की मम्मी संगीता देवी उस के बचाव में आईं तो तीनों ने उन पर भी हमला बोल दिया. जिस के कारण दोनों बुरी तरह से घायल हो गए. दोनों को लहूलुहान करने के बाद तीनों सत्यजीत को तलाशने लगे, लेकिन तभी बाहर से गांव वालों का दबाव बना तो तीनों वहां से भाग गए. इस घटना की सूचना ग्राम प्रधान समीर को दी गई. ग्राम प्रधान समीर ने इस मामले की जानकारी थाना चरवा पुलिस को दी. सूचना पाते ही एसएचओ जगदीश सिंह पुलिस बल के साथ गांव काजू पहुंचे.

मौके पर पहुंचते ही पुलिस ने घायल सरबजीत उस की मम्मी संगीता को तत्काल एंबुलेंस से जिला अस्पताल में पहुंचाया. जहां पर सरबजीत को देखते ही डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था. जबकि उस की मम्मी संगीता देवी ने उपचार के दौरान 2 घंटे बाद दम तोड़ दिया था. मृतका संगीता के पति संगम लाल दिवाकर मुंबई में रह कर टैक्सी चलाते थे. इस घटना की सूचना मिलने पर वह मंगलवार की सुबह फ्लाइट से प्रयागराज पहुंचे. अपने घर में एक साथ 2 मौतें होते देख वह फफकफफक कर रोने लगे. घर पर महिलाएं भी बिलखबिलख कर रो रही थीं.

डाक्टरों द्वारा दोनों को मृत घोषित करते ही पुलिस ने अपनी काररवाई करते हुए दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. इस मामले में पुलिस ने काजू गांव पहुंचते ही विस्तार से जानकारी हासिल की. इस मामले में मृतका संगीता के छोटे बेटे सत्यजीत की तरफ से थाना चरवा में बीएनएस की धारा 3(5), 333, 352, 109, 103(1) के तहत केस दर्ज कराया गया था. इस घटना की जानकारी मिलते ही एएसपी राजेश कुमार सिंह व एसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव भी गांव काजू पहुंचे.

जहां पर पहुंचते ही पुलिस अधिकारियों ने पीडि़त परिवार से घटनाक्रम की जानकारी ली. फिर गांव की स्थिति को देखते हुए गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया था. इस मामले में आरोपियों की धरपकड़ के लिए एएसपी बृजेश कुमार सिंह ने सीओ राजेश कुमार के नेतृत्व में 4 पुलिस टीमों का गठन किया था. इस मामले में पुलिस की तरफ से काफी लापरवाही सामने आई थी. पीडि़त परिवार की शिकायत पर एएसपी बृजेश कुमार सिंह ने लापरवाही बरतने के आरोप में एसएचओ जगदीश कुमार, चौकी प्रभारी व बीट के एक सिपाही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था.

इस मामले में इस हत्याकांड के एक आरोपी श्रवण कुमार को पुलिस ने रात में ही अपनी हिरासत में ले लिया था, जिस से कड़ी पूछताछ की गई. इस हत्याकांड का मुख्य अभियुक्त सनी घटना को अंजाम देने के बाद ही फरार हो गया था. पुलिस को शक था कि वह ट्रेन से कहीं बाहर भी भाग सकता है. उसी को देखते हुए पुलिस ने प्रयागराज से पटना तक रास्ते में पडऩे वाले 13 रेलवे स्टेशनों पर उस की फोटो भिजवाई थी, ताकि वह आसानी से पकड़ में आ सके. सनी भी इतना शातिर था कि उस ने पुलिस को चकमा देने के लिए सफर के दौरान 3 ट्रेनें बदलीं. फिर भी वह पुलिस की नजरों से बच नहीं पाया.

पुलिस ने उस के मोबाइल को सर्विलांस पर लगा रखा था. तभी उस की लोकेशन वाराणसी देवरिया के भटनी रेलवे स्टेशन की मिली. वहां मौजूद आरपीएफ इंसपेक्टर प्रदीप पांडेय, व जीआरपी (भटनी) के एसएचओ दिनेश सिंह ने उस के फोटो के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया. सनी को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उस से पूछताछ की. पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी सनी ने बताया कि उस ने कुल्हाड़ी से मांबेटों पर हमला किया था. दोनों को कुल्हाड़ी से घायल कर उस ने वह कुल्हाड़ी काजू गांव के एक खंडहर में छिपा दी थी. इस जानकारी के मिलते ही पुलिस कुल्हाड़ी बरामद करने के लिए उसे उस के गांव काजू लाई.

उसी दौरान सनी ने वहां पर भी पुलिस को चकमा दे कर भागने की कोशिश की. सनी ने एक खंडहर में छिपाए झोले से कुल्हाड़ी निकालने के बहाने तमंचा निकाल कर पुलिस पर गोली चला दी. उस के बाद पुलिस ने जवाबी काररवाई करते हुए गोली चलाई, जो उस के बाएं पैर में लग गई. जिस से उस के पैर में काफी घाव हो गया. फिर पुलिस उसे इलाज के लिए मैडिकल कालेज ले गई, जहां पर उस का इलाज चल रहा था.  आरोपी सनी, श्रवण व संगमलाल के फेमिली वालों से मिली जानकारी के बाद इस घटना की जो सत्यता उभर कर सामने आई, उस के पीछे अवैध संबंधों से जुड़ी एक कहानी थी.

उत्तर प्रदेश के जिला कौशांबी थाना चायल के अंतर्गत एक गांव पड़ता है काजू. इसी गांव में संगम लाल दिवाकर का परिवार रहता था. संगम लाल का छोटा परिवार था. संगम लाल मुंबई में टैक्सी ड्राइवर थे. उन का सब से बड़ा बेटा सरबजीत उर्फ कल्लू अपने पापा के साथ मुंबई में ही रह कर फरनीचर का काम करता था. उन की पत्नी संगीता दिवाकर अपने 2 बच्चों 16 वर्षीय आशीष उर्फ सत्यजीत और 10 साल की बेटी के साथ गांव में रहती थी. संगम लाल का गांव में आनाजाना बहुत ही कम हो पाता था. जबकि सरबजीत दिवाकर महीने 2 महीने में गांव का चक्कर लगाता रहता था.

सत्यजीत गांव में ही रह कर मेहनत- मजदूरी करता था. सरबजीत ने कई बार उसे अपने साथ मुंबई ले जाने का प्लान बनाया, लेकिन गांव में बहन और मम्मी के रहते वह उसे अपने साथ नहीं ले जाना चाहता था. सत्यजीत दिवाकर गांव में यूं ही खाली घूमता रहता था. संगम लाल के घर के पास ही था संतोष सरोज का घर. संतोष सरोज के पास गांव में थोड़ी जुतासे की जमीन थी. उन का परिवार भी छोटा ही था. उन का बड़ा बेटा सनी सरोज उन के साथ ही पटना में रह कर काम करता था. जबकि छोटा बेटा श्रवण सरोज गांव में ही अपनी मम्मी और बहन रागिनी के साथ रहता था.

श्रवण सुबह ही अपना खाना ले कर अपने काम पर चला जाता था. उस के बाद उस की मम्मी शांति देवी अपने खेतों पर काम करने चली जाती थी. तब रागिनी ही घर पर अकेली रह जाती थी. एक दिन की बात है, सत्यजीत किसी काम से संतोष सरोज के घर के सामने से निकल रहा था. उस वक्त रागिनी अपने घर के दरवाजे पर ही खड़ी थी. उसी वक्त सत्यजीत की नजर उस पर पड़ी. रागिनी को देखते ही उसे लगा कि वह काफी देर से उसे कनखियों से ताक रही थी. उस के देखने का अंदाज कुछ ऐसा था कि सत्यजीत उस के बारे में सोचने पर मजबूर हो गया.

उस के बाद अपना काम करने के बाद वह अपने घर भी पहुंच गया. लेकिन उस के दिमाग में बारबार एक ही बात चल रही थी कि रागिनी उसे इस तरह से क्यों ताक रही थी. सत्यजीत इतना भोला भी नहीं था कि वह लड़कियों की नजरों को पहचानने में बिलकुल ही अनाड़ी हो. उस की चाहत भरी नजरें देख सत्यजीत उसी शाम फिर से उस के घर के सामने से निकला तो वह उसे दिखाई नहीं दी. लेकिन वापस लौटते समय घर से निकला, रागिनी अपने घर के बाहर आ खड़ी हुई थी.

उसे घर से बाहर आते देख वह समझ गया कि उस के दिल में उस के प्रति जरूर कुछ चल रहा है. उस के बाद तो सत्यजीत उस के घर के सामने से निकलने का कोई न कोई बहाना देखने लगा था. उसी दौरान एक दिन दोनों की नजरें आमनेसामने मिलीं तो सत्यजीत दिवाकर को देखते ही रागिनी के चेहरे पर मुसकराहट उभर आई. उसे देखते ही सत्यजीत के दिल में उस के प्रति चाहत जाग उठी. फिर वह उसे पाने के लिए बेचैन हो उठा.

दोनों के दिलों में प्यार की चिंगारी भड़कते ही दोनों एकदूसरे के दीवाने हो चुके थे. दोनों ही जानते थे कि जिस राह पर वह चलना चाह रहे हैं, वह उन की मंजिल नहीं हो सकती. फिर भी दोनों ने एकदूसरे की बांह थाम लीं. दोनों के बीच जल्दी ही प्रेम प्रसंग की शुरुआत हो गई. इस के बाद दोनों अपने फेमिली वालों से चोरीछिपे मिलनेजुलने लगे थे. समय गुजरता गया और दोनों के बीच प्यार गहराता गया. शुरूशुरू में दोनों ने काफी कोशिश की कि उन के प्यार की भनक किसी को न लगे. लेकिन एक दिन ऐसा आया कि उन के प्यार की खबर उन के फेमिली वालों से पहले गांव वालों के सामने उजागर हो गई. फिर गांव में उन के प्यार के चर्चे होने लगे तो उन के फेमिली वालों को भी उन के प्यार की भनक लगने में देरी नहीं हुई.

गांव में यह बात सब से पहले रागिनी की मम्मी शांति देवी के सामने आई. इस बात की जानकारी होते ही उस ने रागिनी को प्यार से समझाया. मम्मी की बात सुनते ही रागिनी ने पूरी तरह से चुप्पी साध ली. उस ने अपनी मम्मी के सामने सफाई देते हुए बताया कि गांव में लोग उसे नाहक बदनाम करने में लगे हुए हैं. सत्यजीत और उस के बीच ऐसा कुछ भी नहीं चल रहा. यह बात सत्यजीत के सामने भी आई तो उस ने कुछ दिन के लिए उस के घर के सामने से निकलना ही बंद कर दिया. उस वक्त बात रफादफा हो गई. लेकिन कुछ ही दिनों बाद सत्यजीत फिर से उस की गलियों के चक्कर काटने लगा था.

रागिनी के बड़े भाई सनी सरोज का पटना से गांव आना बहुत ही कम होता था. कुछ समय पहले सनी अपने गांव आया तो उसे पता चला कि गांव में उस की बहन और सत्यजीत को ले कर काफी चर्चाएं हो रही हैं. इस बात को सुन कर सनी का दिमाग ही फिर गया था. उस ने कई बार सत्यजीत को प्यार से समझाया, ”सत्यजीत, यह बात ठीक नहीं है. तेरी वजह से हम लोगों को गांव में काफी जलालत झेलनी पड़ रही है. घर में जैसी मेरी बहन है, वैसे ही तेरे घर में भी तेरी बहन है. कल को तेरी बहन के साथ भी ऐसे ही होने लगे तो तुझे कैसा लगेगा. इसीलिए तेरी भलाई इसी में है कि मेरी बहन की तरफ आंख उठा कर भी मत देखना.’’

सनी के धमकी भरे शब्द सुन सत्यजीत उस वक्त तो वहां से चुपचाप खिसक लिया. उस के बाद वह कई दिनों तक घर से बाहर भी नहीं निकला. फिर सनी ने अपनी बहन को भी काफी डांटाफटकारा.  कुछ दिन गांव में रहने के बाद सनी फिर से पटना चला गया था. उस के जाते ही फिर से दोनों का मिलनाजुलना शुरू हो गया था. रागिनी ने तय कर लिया था कि वह किसी भी सूरत में प्रेमी सत्यजीत को नहीं छोड़ेगी. हालांकि रागिनी अपने बड़े भाई सनी को ठीक प्रकार से जानती थी कि वह एक दबंग प्रवृत्ति का है. वह पहले ही एक मर्डर कर चुका था.

साल 2023 की बात है. प्रयागराज एयरपोर्ट कोतवाली अंतर्गत कादिलपुर निवासी सुरजन यादव प्राइवेट लाइनमैन था. सुरजन यादव एक प्राइवेट गेस्टहाउस में लाइट सही करने गया हुआ था. उसी दौरान सुरजन वहां से अचानक गायब हो गया था. उस के बाद सुरजन के चचेरे भाई राजभान यादव ने 24 फरवरी, 2023 को पिपरी कोतवाली में सुरजन की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. 18 मार्च, 2023 को चरवा कोतवाली के हौसी गांव स्थित एक कुएं में सुरजन का शव मिला था.

उस केस में जांचपड़ताल के दौरान पता चला था कि सनी ने ही सुरजन के भतीजे अजय यादव के साथ मिल कर उस की हत्या की थी. सुरजन की हत्या के आरोप में सनी को जेल जाना पड़ा था. उस के बाद 7 महीने बाद वह जमानत जेल से बाहर आया. फिर वह अपने पिता संतोष सरोज के साथ काम करने चला गया था. इस घटना से लगभग एक महीने पहले सरबजीत कुंभ स्नान करने के लिए घर आया था. सत्यजीत दिवाकर के प्रेम प्रसंग वाली बात उस के सामने भी आई थी. इस बात की जानकारी मिलने के बाद सरबजीत ने सत्यजीत को भी समझाया था.

लेकिन 10 मार्च को जैसे ही सत्यजीत के मोबाइल पर रागिनी का फोन आया तो वह अपने आप को रोक नहीं सका. रागिनी के कहने पर वह उस के घर उस से मिलने चला गया था. तभी सनी की मम्मी घर वापस आ गई, जिस के कारण वह हड़बड़ाहट में अपनी चप्पलें वहीं पर छोड़ आया था. उन्हीं चप्पलों से उपजा विवाद इतना बढ़ गया कि मामला पंचायत तक पहुंच गया था. तब ग्राम प्रधान ने दोनों पक्षों को समझाबुझा कर घर भेज दिया था, लेकिन शांति देवी ग्राम प्रधान के फैसले से नाखुश थी. उस के बाद शांति देवी ने थाने में सत्यजीत के खिलाफ रागिनी के साथ छेड़छाड़ करने की लिखित तहरीर दे दी थी. इतना ही नहीं, शांति देवी ने बड़े बेटे सनी सरोज को फोन पर जारी जानकारी दे दी थी, जिसे सुन कर सनी गुस्से में पटना से रात में ही चल दिया था.

देर रात वह अपने घर पहुंचा. घर पहुंचते ही सनी ने जैसे ही सारी कहानी सुनी तो वह आगबबूला हो गया. इस के बाद उस ने अपने भाई श्रवण और मम्मी शांति के साथ संगम लाल के घर धावा बोल दिया था. पुलिस ने इस केस के आरोपी श्रवण और सनी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. जबकि सनी की मम्मी शांति देवी कथा लिखने तक फरार थी. पुलिस उस की तलाश में जुटी थी. इस कहानी का दुखद अंत यह रहा कि सत्यजीत के प्रेम प्रसंग का खामियाजा उसे नहीं, बल्कि उस की मम्मी व भाई को भुगतना पड़ा.

सत्यजीत के प्यार की खातिर ही संगम लाल दिवाकर का परिवार टूट गया. उस के घर में एक साथ 2 मौतें होने के कारण दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था.

—कथा में रागिनी काल्पनिक नाम है

 

 

Crime News : प्रिंसिपल की डर्टी फिल्म

Crime News : पूर्व प्रिंसिपल श्यामलाल राठौर के 2 बेटियां थीं. वंश चलाने के लिए वह बेटा चाहते थे, लेकिन पत्नी की मौत हो चुकी थी. इस के लिए उन्होंने गीता नाम की महिला से संबंध बना लिए, लेकिन शातिर गीता ने अपने पति हिमांशु चौधरी के साथ मिल कर प्रिंसिपल साहब की ऐसी डर्टी फिल्म बनाई कि…

हिमांशु चौधरी देहरादून के एक प्रतिष्ठित मैडिकल कालेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था. पढ़ाई के दौरान ही उसे विवाहिता गीता से प्यार हो गया. फिर बाद में पिछले साल 2024 के मई महीने में उस ने उस के साथ मंदिर में लव मैरिज कर ली थी. उस की एक प्यारी सी बेटी भी थी. गीता पहले पति से 3 साल पहले ही संबंध तोड़ चुकी थी. वह बेटी और हिमांशु के साथ देहरादून के किशननगर क्षेत्र के सिरमौर मार्ग पर रहने लगी थी. जल्द ही हिमांशु को यह भी जानकारी मिल गई कि गीता के किसी और से भी अवैध संबंध हैं. इस का उस ने विरोध जताने के बजाय अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने की योजना बना ली.

दरअसल, हिमांशु मैडिकल की अपनी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा पा रहा था. वह कई बार पेपरों में फेल भी हो चुका था. दूसरी तरफ उस ने गीता से शादी रचा कर अपना खर्च और बढ़ा लिया था. उसे अब भी पढ़ाई के लिए फीस देनी थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह ऐसा नहीं कर पा रहा था. इसी बीच उस ने पाया कि गीता से मिलने के लिए एक बुजुर्ग श्यामलाल अकसर आते हैं. जल्द ही उसे यह भी मालूम हो गया कि गीता और उस बुजुर्ग के संबंध काफी पुराने और गहरे हैं. उन के बीच लंबे समय से नाजायज रिश्ता बना हुआ है. संभवत: गीता के पूर्व पति से संबंध खत्म होने के यही कारण रहे होंगे.

गीता के बुजुर्ग के साथ अवैध संबंध को नजरंदाज करते हुए हिमांशु चौधरी के दिमाग में एक योजना कौंध गई. उस ने श्यामलाल राठौर को ब्लैकमेल कर उन से पैसे ऐंठने का प्लान बना डाला. इस बारे में उस ने गीता से बात की. वह भी इस के लिए सहमत हो गई. योजना के अनुसार, गीता ने 2 फरवरी, 2025 को श्यामलाल को फोन किया, ”हैलो डार्लिंग, तुम कहां हो? कई दिनों से मिले नहीं.’’

”अरे वाह! क्या बात है? मैं भी तुम्हें ही याद कर रहा था. सोच रहा था कि इस वैलेंटाइन डे पर तुम्हारी पसंद का कोई गिफ्ट दूं.’’ श्यामलाल की आवाज सुन कर गीता भी खुश हो गई.

वह चहकती हुई सैक्सी अंदाज में बोली, ”तो फिर आज ही मिलो न! अपनी पसंद भी बता दूंगी और तुम्हारी चाहत भी पूरी कर दूंगी.’’

”चलो, आता हूं, लेकिन वादे से मुकर मत जाना.’’ श्यामलाल बोले.

”अरे, आओ तो सही डार्लिंग. आज की पूरी रात तुम्हारे नाम है. पति को हौस्टल भेज दिया है. तुम से मालिश करवाने की इच्छा हो रही है.’’ गीता रामांटिक अंदाज में बोली

”ठीक है, कहो तो कुछ खानेपीने के लिए ले कर आऊं.’’ श्यामलाल की आवाज में रूमानीपन आ गया था.

”जो तुम्हारा दिल करे. तुम्हें तो मेरी पसंद का ब्रांड मालूम है. बाकी नानवेज यहीं पका लूंगी.’’ गीता बोली.

इस तरह से 2 प्रेमी युगल के बीच कुछ देर तक रोमांटिक बातें होती रहीं. जबकि दोनों की उम्र में काफी अंतर था. गीता एक खिली हुई गुलाब थी, जबकि श्यामलाल उम्र की ढलान पर दिमाग में यौवन का जोश भरे हुए थी. उन्होंने पाया कि काफी समय बाद गीता ने फोन पर ऐसी सैक्सी बातें की थीं. इसीलिए उन के दिमाग में मधुर घंटियां बज उठी थीं. देह में सिहरन पैदा हो गई थी. दैहिक मिलन का खुला निमंत्रण जो मिल चुका था. गीता ने अपने 12 साल पुराने आशिक श्यामलाल राठौर को सिरमौर मार्ग स्थित अपने घर बुलाया. वह एक रिटायर प्रिंसिपल थे. इलाके में लोग उन्हें गुरुजी कह कर बुलाते थे.

वहां पहले से ही हिमांशु चौधरी मौजूद था. उन की योजना थी कि गीता और श्यामलाल की अश्लील वीडियो हिमांशु रिकौर्ड कर लेगा. फिर उस वीडियो द्वारा उन्हें ब्लैकमेल कर मोटी रकम ऐंठ लेंगे. गीता और श्यामलाल जैसे ही एक साथ आए. हमबिस्तर होते ही किसी तरह श्यामलाल को अहसास हो गया कि कोई कमरे में छिपा हुआ है. खुद के पकड़े जाने की आशंका को भांप कर वह चिल्लाने लगे. तभी गीता और कमरे में छिपे हिमांशु चौधरी ने श्यामलाल का मुंह दबा दिया. दोनों ने हाथपांव पकड़ कर श्यामलाल को किसी तरह काबू में किया. गीता और हिमांशु भीतर से घबरा गए कि कहीं श्यामलाल उन दोनों के बारे में लोगों को बता न दें, इसलिए उन्होंने गला दबा कर उन की हत्या कर दी. इस के बाद शव को वहीं बैड के नीचे डाल कर छिपा दिया.

हिमांशु चौधरी एमबीबीएस की चतुर्थ वर्ष की पढ़ाई कर रहा था. उस ने गीता से कहा था कि वह काफी समय तक सर्जरी विभाग में रहा है. ऐसे में उसे पता है कि यदि 24 घंटे बाद शव को काटा जाए तो खून नहीं निकलेगा. लिहाजा दोनों ने इंतजार किया और शव को अगले दिन काटने की योजना बनाई. इस तरह से 3 फरवरी, 2025 की रात को हिमांशु ने रसोईघर के चाकू से ही शव को जोड़ के हिस्सों से काट डाला. पहले शव के कंधों से हाथ काटे गए. इस के बाद दोनों पैर अलग किए गए. बाद में सिर को काट कर प्लास्टिक के बोरे में बांध दिया. आगे की योजना के तहत गीता हिमांशु को शव ठिकाने लगाने के लिए कह चुकी थी.

दूसरी तरफ श्यामलाल की बेटी निधि राठौर 5 दिनों से परेशान हो रही थी. उसे रात को नींद नहीं आ रही थी. अपने पापा के अचानक लापता होने से निधि बेहद चिंता में थी. वह 7 फरवरी, 2025 को देर तक सोई हुई थी. सुबह के 9 बज चुके थे. बिस्तर से उठी थी. उस वक्त उस के सिर में दर्द हो रहा था. वह उस समय चाय बना कर पीने के मूड में थी, लेकिन मूड खराब था. उस के मन में बारबार एक ही विचार आ रहा था कि अब क्या करे? पापा को कहां ढूंढे?

देहरादून के पटेल नगर की रहने वाली निधि राठौर के पापा पूर्व प्रिंसिपल श्यामलाल उर्फ गुरुजी को लापता हुए 5 दिन गुजर चुके थे. उन्हें ढूंढने के लिए निधि समेत उन के कई रिश्तेदार लगे हुए थे. मगर उन के बारे में किसी को भी कुछ पता नहीं चल पाया था कि वे आखिर गए तो कहां गए?

अंत में निधि राठौर ने अपने रिश्तेदारों के साथ मिल कर उन की गुमशुदगी देहरादून की पटेल नगर कोतवाली में दर्ज करा दी. कोतवाली पटेल नगर के एसएचओ प्रदीप सिंह राणा ने तत्काल बुजुर्ग श्यामलाल की गुमशुदगी दर्ज कर उन की तलाश करने के निर्देश जारी कर दिए थे. बेटी निधि ने रिपोर्ट में लिखवाया कि उस के पापा श्यामलाल 2 फरवरी को किसी काम की बात बोल कर घर से अपनी स्पलेंडर बाइक से निकले थे. पुलिस ने मामले में जांच शुरू की. जांच की शुरुआत उन के फोन की अंतिम लोकेशन से शुरू की. यह लोकेशन सिरमौर मार्ग की निकली. उन के फोन में गीता नाम की महिला से कई बार बातचीत की जानकारी मिली, जो सिरमौर में रहती थी.

श्यामलाल की गुमशुदगी की जांच का काम कोतवाली के एसएसआई योगेश दत्त के जिम्मे थी, जिन्होंने इस गुमशुदगी के बारे में सीओ अंकित कंडारी और एसपी (सिटी) प्रमोद कुमार से जांच का आदेश हासिल कर लिया था. फिर लापता श्यामलाल राठौर के बारे में जानकारी करने के लिए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चैक किए गए थे. सीसीटीवी फुटेज में श्यामलाल अपनी स्पलेंडर बाइक यूके07डी टी1685 से कृष्णा नगर चौक होते हुए सिरमौर रोड पर स्थित किशन नगर में स्थित एक मकान में जाते दिखाई दिए थे. पुलिस ने जब उस मकान के बारे में छानबीन की, तब पता चला कि वह मकान गीता नामक महिला का है. जांच टीम को सीसीटीवी फुटेज में श्यामलाल को गीता के घर से लौटने की एक भी तसवीर नहीं मिली.

पुलिस ने श्यामलाल के बारे में और अधिक जानकारी जुटाई. पता चला कि उन के 2 बेटियां हैं. उन्हें लोगों ने गीता से हमेशा मिलतेजुलते देखा है. वह गीता के घर मिलने के लिए जाते रहते थे. गीता का मायका जिला सहारनपुर के कस्बा देवबंद में है. पुलिस ने जब गीता और हिमांशु के मोबाइल नबरों की काल डिटेल्स निकलवाई तो उन के द्वारा 2 मोबाइल नंबरों पर बहुत देर तक बातें करना रिकौर्ड हुआ था. वे मोबाइल नंबर जांच में गीता के भाई अजय और हिमांशु के बहनोई धनराज निवासी कैलाश कालोनी, देवबंद के थे.

पुलिस टीम ने इन दोनों से पूछताछ करने का फैसला लिया. एसएसपी अजय सिंह ने इस जांच के लिए कोतवाल प्रदीप सिंह राणा, एसएसआई योगेश दत्त, प्रभारी विनोद गोसाईं, थानेदार विनोद राणा व कांस्टेबल आशीष शर्मा, विपिन व महिला कांस्टेबल मोनिका को भी इस टीम में शामिल कर लिया. इस के बाद पुलिस की टीम अजय और धनराज की तलाश के सिलसिले में देवबंद के लिए निकल गई. देवबंद पहुंच कर पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना पर अजय और धनराज को गिरफ्तार कर लिया.

दोनों को पटेलनगर कोतवाली ला कर सख्ती से पूछताछ की गई. अजय कुमार ने पुलिस को बताया कि 2 फरवरी को उस के पास उस की बहन गीता ने फोन कर बताया कि उन्होंने किसी की हत्या कर दी है. अब उस की लाश ठिकाने लगाने में मदद चाहिए. यह सुनने के बाद उस ने अपने जीता धनराज चावला को बुलाया. फिर दोनों गीता के घर पहुंच गए. वहां लाश के टुकड़े बोरे में बंद थे. उन्होंने वह बोरा उठाया और उसे 4 फरवरी को मिनी ट्रक से देवबंद लाया गया. देवबंद के गांव साखन की नहर में रात के अंधेरे में शव को फेंक दिया गया था.

इस के बाद देवबंद की साखन नहर से श्यामलाल के शव की तलाशी अभियान शुरू किया गया, लेकिन गोताखोरों को वहां शव के टुकड़े नहीं मिले. तब पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. सहारनपुर पुलिस को 20 फरवरी, 2025 को किसी इंसान की लाश के टुकड़े मिले. यह जानकारी मीडिया के द्वारा देहरादून पुलिस को मिली तो कोतवाल श्यामलाल के फेमिली वालों को ले कर सहारनपुर पहुंचे तो निधि ने उन की पहचान अपने पापा श्यामलाल के रूप में की. बरामद लाश के टुकड़ों का पंचनामा भर कर पुलिस ने उन्हें पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया.

हिमांशु और गीता तब तक पुलिस की पकड़ में नहीं आए थे. पुलिस के साइबर विभाग ने उन के मोबाइलों के लोकेशन के आधार पर बताया कि वे मुंबई में हैं. पुलिस जब मुंबई पहुंची, तब तक वे वहां से भी फरार हो चुके थे. इस के बाद पुलिस को इन दोनों की लोकेशन जयपुर की मिलने लगी. पुलिस जब वहां पहुंची, तब उन की लोकेशन प्रयागराज के महाकुंभ की मिलने लगी. वहां 4 दिनों तक दोनों की लोकेशन मिली, लेकिन उस भीड़ में उन्हें ढूंढा नहीं जा सका.

इस चूहेबिल्ली के खेल में गीता और हिमांशु पलिस की पकड़ में नहीं आ पा रहे थे. उन पर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया गया. उन की लोकेशन 24 फरवरी को अमृतसर, पंजाब की मिली. इस लोकेशन के मुताबिक उन्होंने ट्रेन से यात्राएं की थीं. बाद में उन की लोकेशन गोल्डन टेंपल के पास आ कर ठहर गई थी. आखिरकार 26 फरवरी, 2025 की रात में पुलिस टीम को सफलता मिल गई. गीता और हिमांशु चौधरी को अमृतसर से गिरफ्तार कर लिया गया. दोनों को देहरादून लाया गया. उन के सारे कारनामों की जानकारी पहले गिरफ्तार किए गए अजय कुमार और धनराज से मालूम हो चुकी थी. फिर तो गीता ने भी पुलिस के सामने सारे राज खोल दिए. उस के बाद जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

पत्नी की मौत के बाद 2 बेटियों के पिता श्यामलाल को सब से बड़ी चिंता यह थी कि उन के बाद वंश आगे नहीं बढ़ पाएगा. इसी कारण वह गीता के साथ अपने संबंधों से एक बेटा पैदा करना चाहते थे. पुलिस के मुताबिक श्यामलाल ने इस काम के लिए गीता को 20 लाख रुपए तक देने का वादा किया था. इस औफर के बाद ही गीता और हिमांशु ने अनुमान लगाया कि श्यामलाल के पास काफी रुपया है. गीता भी एकमुश्त रकम ऐंठ कर श्यामलाल से पीछा छुड़ाने की फिराक में थी. ऐसे में गीता और हिमांशु ने श्यामलाल की अश्लील वीडियो बना कर ब्लैकमेल करने और रुपए ऐंठने का प्लान बनाया था. गीता ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उस के श्यामलाल के साथ पिछले 12 सालों से अनैतिक संबंध थे.

श्यामलाल उसे हर माह 50 हजार से एक लाख रुपए खर्चा दे रहे थे. बुजुर्ग श्यामलाल की एक संस्था थी. वहीं दोनों की मुलाकात हुई थी. श्यामलाल की पत्नी का लगभग 20 साल पहले निधन हो गया था. उन की 2 बेटियों में से एक की शादी हो चुकी है, जबकि दूसरी अविवाहित थी. ऐसे में श्यामलाल अपने वंश को ले कर चिंतित रहते थे. 7 महीने पहले गीता की मुलाकात हिमांशु चौधरी से हुई, जो एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था. वे दोनों करीब आ गए और शादी कर ली. इस के बाद श्यामलाल से गीता का मिलनाजुलना कम हो गया, जिस से श्यामलाल परेशान हो गए. जबकि वह अकसर गीता पर मिलने का दबाव डाल रहे थे.

उन्होंने बेटा देने के बदले गीता को 20 लाख रुपए देने की पेशकश कर दी थी. यही एक वजह श्यामलाल की मौत का कारण भी बन गई. किंतु जब हत्या के बाद श्यामलाल के मोबाइल फोन से खाते की डिटेल खंगाली तो उन के बैंक खाते खाली मिले. इस हत्याकांड में पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई कि जरूरत पूरी करने की चाहत में ही श्यामलाल, गीता और हिमांशु एकदूसरे के करीब आए थे. श्यामलाल को बेटा पैदा करने की चाहत थी तो गीता श्यामलाल से रुपए ऐंठना चाहती थी. वहीं हिमांशु भी गीता के जरिए अपनी आर्थिक तंगी दूर करना चाहता था.

गीता पहले ब्यूटीपार्लर चलाती थी, लेकिन एक बेटी की मां बनने के बाद उस ने काम बंद कर दिया था. रुपए की जरूरत वह श्यामलाल से पूरी करती रही. वैसे गीता जानती थी कि रुपए की जरूरत तो श्यामलाल ही पूरी कर सकते थे. इस मामले की जांच के समय गीता 5 महीने की गर्भवती पाई गई. उस के गर्भ में पल रही संतान हिमांशु की है या श्यामलाल की, इस संबंध में पुलिस ने मैडिकल जांच कराने की तैयारी कर ली थी. पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गीता अब तक श्यामलाल से करीब 10 लाख रुपए से अधिक धनराशि ले चुकी थी. मृतक के नाम पर दून में करोड़ों की जमीन भी है.

श्यामलाल की हत्या के बाद जब रुपए भी नहीं मिले तो गीता और हिमांशु को अपने अपराध का बोध हुआ. इसी अपराध का पश्चाताप करने के लिए दोनों प्रयागराज गए थे. उन्होंने महाकुंभ में संगम में डुबकी लगाई. 4 दिनों तक साधुसंतों की शरण में रहे. वहीं खाना खाया और रातें गुजारीं. इस बीच दोनों दिल्ली पहुंचे और वहां से कुरुक्षेत्र होते हुए अमृतसर चले गए. उन के पास से तब तक बहुत सारे पैसे खर्च हो गए थे. रुपए न होने के चलते 200 रुपए में किराए का कमरा ले कर रहने लगे. कथा लिखे जाने तक एसएसआई योगेश दत्त द्वारा मामले की जांच जारी थी. योगेश दत्त द्वारा गीता व हिमांशु के खिलाफ सबूत एकत्र कर के अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी गई.

 

 

Love Affair : इश्क में पति की आहुति

Love Affair : मीना के संजय कुशवाहा से अवैध संबंध बने तो उसे अपना पति कांटे की तरह चुभने लगा. संजय के हाथों पति की हत्या कराने के बाद मीना और उस के प्रेमी ने यही सोचा था कि वे कभी पकड़े नहीं जाएंगे, लेकिन पुलिस ने ऐसी युक्ति अपनाई कि वह हत्यारों तक पहुंच गई…

मीना ने अपने प्रेमी संजय कुशवाहा के साथ पति चरण सिंह को मौत के घाट उतारने की योजना बना ली थी. इस के बाद चरण सिंह की हत्या करने का दिन और स्थान भी तय कर लिया गया, लेकिन चरण सिंह इस बात से पूरी तरह बेखबर था. वह तो अपनी पत्नी का मोबाइल तोड़ कर निश्चिंत था कि मीना अब अपने प्रेमी संजय कुशवाहा से बात नहीं कर पाएगी, लेकिन चरण सिंह नहीं जानता था कि घायल शेरनी कितनी खूंखार और खतरनाक होती है.

 

प्लान के अनुसार, मीना अपने व्यवहार में बदलाव ला कर पति का भरोसा जीतने का प्रयास कर रही थी. इस से चरण सिंह को लगा कि सब कुछ ठीक हो गया है. जबकि हकीकत में मामला और बिगड़ गया था. मीना अपने पति को प्रेमी संजय के हाथों मरवाने के बाद निश्चिंत हो कर उसी के साथ मौजमस्ती करना चाहती थी. 20 दिसंबर, 2024 को चरण सिंह के इकलौते बेटे का जन्मदिन था. अत: वह अपने गांव जारह से 19 दिसंबर की सुबह जन्मदिन के लिए जरूरी सामान लेने मुरैना आया था. योजनाबद्ध ढंग से मुरैना में बस स्टैंड पर उसे संजय खड़ा मिल गया.

संजय ने उस से कहा, ”चरण सिंह, तुम बेटे के जन्मदिन का सामान बाद में खरीद लेना, आज मौसम बहुत ही बेहतरीन है. चलो, पहले बाइक से पगारा डैम पर चलते हैं. वहीं बैठ कर तसल्ली के साथ 2-2 पैग लगा लेते हैं.’’

आने वाली आफत से बेखबर चरण सिंह संजय के कहने पर बसस्टैंड से संजय की बाइक पर बैठ कर पगारा डैम चला आया. पगारा डैम पर दोनों ने बैठ कर शराब पी. इस दौरान संजय ने चरण सिंह से उधार लिए डेढ़ लाख रुपए लौटाने को कहा. पैसे मांगने की बात पर उन के बीच झगड़ा हो गया. दोनों में जम कर मारपीट हुई. चरण सिंह समझ गया कि उस के साथ धोखा हुआ है. उस ने वहां से भागने की कोशिश की, लेकिन नशा चढऩे के कारण वह भाग नहीं सका, वहीं मारपीट में सिर में चोट लगाने से चरण सिंह बेहोश हो गया तो संजय ने अपने मकसद को पूरा करने के लिए उसे उठा कर पगारा डैम में फेंक दिया और अपने घर लौट आया.

चरण सिंह की मौत के बाद संजय और मीना ने राहत की सांस ली, लेकिन जेल जाने और सजा पाने का डर दोनों की आंखों में साफ नजर आ रहा था. उन के इश्क की दीवानगी का सुरूर उतर चुका था. इधर 4 दिन गुजर जाने के बावजूद भी जब चरण सिंह मुरैना से लौट कर घर नहीं आया तो फेमिली वाले चिंतित हो गए. उस का मोबाइल फोन भी स्विच औफ आ रहा था. यह देख कर कर फेमिली वालों का माथा ठनका तो चरण सिंह का छोटा भाई रामचंद्र थाना सराय छौला में उस की गुमशुदगी की सूचना लिखाने चला गया. रामचंद्र ने अपने भाई की गुमशुदगी की सूचना लिखाते हुए शक अपनी भाभी मीना और उस के प्रेमी संजय कुशवाहा पर जताया.

एसएचओ के.के. सिंह ने रामचंद्र को भरोसा दिया कि वह जल्दी ही चरण सिंह का पता लगाने का प्रयास करेंगे. इस के बाद रामचंद्र ने अपनी रिश्तेदारियों में भी फोन किए, लेकिन चरण सिंह का कुछ पता नहीं चला. 26 दिसंबर, 2024 को जिला मुरैना के गांव लख्खा का पुरा निवासी श्याम सुंदर ने जौरा थाने के एसएचओ उदयभान सिंह यादव को फोन कर के सूचना दी कि गुमशुदा चरण सिंह की लाश पगारा डैम में पड़ी हुई है. यह सूचना मिलते ही उदयभान सिंह यादव तुरंत मौके पर पहुंच गए. उन्होंने ग्रामीणों की मदद से पगारा डैम से चरण सिंह की लाश को डैम से निकलवाने के बाद रिपोर्ट दर्ज कर ली.

इस के बाद जौरा थाने के एसएचओ उदयभान सिंह यादव द्वारा वायरलैस से चरण सिंह की लाश पगारा डैम में पड़ी मिलने की सूचना प्रसारित करवाई. इस सूचना को सुन कर सराय छौला के एसएचओ के.के. सिंह ने चरण सिंह के भाई रामचंद्र को थाने बुलाया, क्योंकि रामचंद्र ने सराय छौला थाने में चरण सिंह की गुमशुदगी दर्ज करा रखी थी. इस के बाद वह रामचंद्र को ले कर जौरा के पगारा डैम पहुंच गए. रामचंद्र ने जैसे ही वह लाश देखी तो वह दहाड़ें मार कर रोने लगा. रामचंद्र ने पगारा डैम से बरामद हुई लाश की शिनाख्त अपने बड़े भाई चरण सिंह के रूप में की. इस के बाद एसएचओ ने लाश को अपने कब्जे में ले कर धारा 103 (1) बीएनएस के तहत रिपोर्ट तरमीम कर दी.

जैसे ही पगारा डैम से चरण सिंह की लाश मिलने की खबर इलाके के लोगों को हुई तो वे हैरान रह गए. सराय छौला पुलिस को अब कातिलों की तलाश थी. चरण सिंह के भाई ने अपनी भाभी  मीना और उस के प्रेमी संजय पर अपना शक जताया था, लिहाजा पुलिस उन दोनों के पीछे लग गई. काफी कोशिश के बाद पुलिस के लंबे हाथ आखिर संजय कुशवाहा तक पहुंच गए. 27 दिसंबर, 2024 को मुखबिर की सूचना पर संजय कुशवाहा को जौरा में नए अस्पताल के पास से पुलिस ने दबोच लिया. पुलिस उसे थाने ले आई. सख्ती से पूछताछ करने पर संजय ने स्वीकार कर लिया कि चरण सिंह की हत्या उस ने ही की थी. हत्या की साजिश में मृतक की पत्नी और उस की प्रेमिका मीना भी शामिल थी.

संजय से मिली जानकारी के बाद पुलिस ने मृतक चरण सिंह की पत्नी मीना को गांव जारह से गिरफ्तार कर लिया. उस ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया. दोनों से पूछताछ के बाद चरण सिंह की हत्या की चौंकाने वाली कहानी सामने आई—

मध्य प्रदेश के जिला मुरैना के थाना सराय छौला के अंतर्गत आने वाले गांव जारह का रहने वाला चरण सिंह जब मेहनतमजदूरी कर के ठीकठाक पैसे कमाने लगा तो उस के विवाह के लिए समाज के लोग आने लगे. तमाम लड़कियां देखने के बाद फेमिली वालों ने उस के लिए जौरा के नयापुरा इलाके की रहने वाली मीना नाम की युवती को पसंद किया. फिर उस के साथ चरण सिंह की शादी कर दी. शादी के बाद मीना ससुराल आई तो जल्द ही उस ने घर की सारी जिम्मेदारी संभाल ली. जिस से घरपरिवार में उस की गिनती अच्छी बहू के रूप में होने लगी. धीरेधीरे चरण सिंह का परिवार बढऩे लगा. चरण सिंह और मीना 3 बच्चों के मातापिता बन गए, जिन में 2 बेटियां और एक बेटा था. सब कुछ अच्छा चल रहा था, लेकिन वक्त कब बदल जाए, कहा नहीं जा सकता.

एक सप्ताह पहले चरण सिंह ने एक प्लौट का बयाना दे कर सौदा कर लिया था. शेष डेढ़ लाख रुपए उसे एक पखवाड़े के भीतर चुकाने थे, लेकिन काफी भागदौड़ के बाद जब चरण सिंह पैसों का इंतजाम करने में नाकाम रहा तो उस की पत्नी मीना ने अपने पुराने परिचित संजय कुशवाहा को फोन कर कहा कि मेरे पति ने एक प्लौट का सौदा कर लिया है, अत: उन्हें डेढ़ लाख रुपए की जरूरत है. यदि तुम कुछ समय के लिए डेढ़ लाख रुपए उधार दे दोगे तो मेहरबानी होगी. संजय कुशवाहा ने कुछ सोचविचार कर कहा, ”देखो मीना, इस तरह की बातें मोबाइल फोन पर नहीं हो सकतीं, ऐसा करता हूं कि मैं तुम्हारे घर पर आ जाता हूं. वहीं बैठ कर आराम से इस बारे में बात करेंगे.’’

मीना को लगा कि संजय उस के पति को पैसे उधार देना चाहता है, इसीलिए वह घर पर आना चाहता है. अगले दिन संजय चरण सिंह के घर पहुंच गया. इत्तफाक से जिस वक्त संजय आया, चरण सिंह घर पर नहीं था. मीना ने संजय से पूछा, ”तुम ने कुछ सोचा?’’

”किस बारे में?’’ संजय बोला.

”अरे, पैसे उधार देने के बारे में. मैं ने तुम से डेढ़ लाख रुपए उधार देने के लिए कहा था न…’’

”अच्छा, वह तो मैं तुम्हारे पति को दे दूंगा, लेकिन जो पैसे मैं उधार दूंगा, वह जल्द से जल्द लौटाने की कोशिश करना.’’ संजय कुशवाहा ने कहा.

”संजय, इस बात से तुम बेफिक्र रहो, मैं पूरापूरा प्रयास करूंगी कि जितनी जल्दी हो सके, तुम्हारा पैसा अदा करवा दूं.’’

अगले दिन संजय ने लिखापढ़ी करके चरण सिंह को डेढ़ लाख रुपए दे दिए. चरण सिंह को संजय से डेढ़ लाख रुपए उधार मिल गए तो वह खुश हो गया और खुशीखुशी प्लौट वाले को वायदे के मुताबिक डेढ़ लाख रुपए दे दिए. चरण सिंह को रुपए उधार देने के कारण संजय कुशवाहा का चरण सिंह के यहां आनाजाना शुरू हो गया. चरण सिंह तो सुबह होते ही नाश्तापानी करने के बाद टिफिन ले कर मजदूरी करने निकल पड़ता था और अकसर देर रात को ही घर लौटता था. इस बीच घरगृहस्थी के काम मीना को देखने पड़ते थे, लेकिन जब से संजय उस के घर आनेजाने लगा था, जरूरत पडऩे पर वह मीना की मदद कर देता था. इस के बदले में मीना उसे चायनाश्ता करा देती थी. यदि खाने का समय होता तो खाना भी खिला देती.

ऐसे में ही एक दिन संजय ने कहा, ”मीना, तुम सारे दिन कितना काम करती हो. इस के बाबजूद चरण सिंह तुम्हारी जरा भी फिक्र नहीं करता.’’

मीना ने उसे तिरछी नजरों से देखते हुए कहा, ”यह तुम कैसे कह सकते हो कि वह हमारी फिक्र नहीं करते. मेरे और बच्चों के लिए सुबह से शाम तक मेहनतमजदूरी करते हैं. जब तुम्हारी शादी हो जाएगी

तो तुम्हें भी अपने बालबच्चों के लालनपालन के लिए इसी तरह भागदौड़ करनी पड़ेगी.’’

दरअसल, चरण सिंह के घर आतेजाते संजय कुशवाहा का दिल मीना पर आ गया था, इसलिए वह उसे अपने प्रेम जाल में फंसाने के लिए चारा डालने लगा था. मीना की इस बात से वह निराश तो हुआ, लेकिन उस ने हिम्मत नहीं हारी. संयोग से एक दिन मीना को घर की जरूरत का सामान खरीदने के लिए बाजार जाना था. वह तैयारी कर ही रही थी कि तभी संजय आ गया. मीना को तैयार होते देख उस ने पूछा, ”कहीं जा रही हो मीना?’’

”गृहस्थी का सामान खरीदना है, इसलिए बाजार जा रही हूं. उन के पास तो इस काम के लिए वक्त है नहीं, इसलिए मुझे ही जाना पड़ रहा है.’’ मीना ने कहा.

” तुम अकेली मत जाओ, मैं तुम्हारे साथ चलता हूं.’’ संजय बोला.

मीना को भला क्यों ऐतराज होता. वह संजय के साथ बाइक से बाजार पहुंच गई. सामान खरीदने के बाद थैला संजय ने उठाया तो मीना हंसते हुए बोली, ”मेरी शादी को 10 साल हो गए, लेकिन वो कभी मेरे साथ बाजार तक नहीं आए.’’ मीना बोली.

”मीना, एक बात बताऊं, यदि तुम्हारे साथ चरण सिंह की शादी नहीं हुई होती तो उसे घर में रोटी भी नसीब नहीं होती. तुम ही हो जो पूरा घर चला रही हो.’’

इस पर मीना कुछ नहीं बोली, लेकिन मुसकरा पड़ी. संजय मीना को ले कर घर पहुंचा तो मीना ने कहा, ”मैं खाना बना रही हूं, अब तुम खाना खा कर जाना.’’

संजय कुशवाहा दालान में पड़े तख्त पर जा कर लेट गया. मीना ने उसे पहले चाय बना कर पिलाई. उस के बाद खाना बना कर खिलाया. संजय मन ही मन सोचने लगा कि मीना के दिल में जरूर ही उस के लिए कोई नरम कोना है, तभी तो वह उस का इतना खयाल रखती है. अब सवाल यह था कि वह उस के दिल की बात जाने कैसे?

उसी दौरान संजय हरियाणा के सूरजकुंड में लगे हस्तशिल्प मेले में गया. वहां हाथ से बनी चीजों की प्रदर्शनी लगी थी. वह प्रदर्शनी देखने गया तो वहां उसे एक दुकान पर एक जोड़ी झुमके पसंद आ गए तो संजय ने वह खरीद लिए. अगले दिन दोपहर को वह चरण सिंह के घर पहुंचा तो मीना घर पर अकेली मिल गई. मीना ने संजय को बैठाया, चायनाश्ता कराया. इस के बाद उस ने झुमके की डब्बी मीना के हाथ में थमा दी. मीना ने डब्बी खोली तो झुमके देख कर बोली, ”झुमके तो बहुत ही शानदार हैं. किस के लिए लाए हो?’’

”मीना, तुम भी कमाल करती हो. जब तुम्हारे हाथ में दिए हैं तो तुम्हारे लिए ही होंगे. कौन मेरी घरवाली बैठी है, जिस के लिए लाऊंगा.’’

”संजय, मेरे लिए तुम इतने महंगे झुमके क्यों खरीद कर लाए हो?’’ मीना ने कहा.

”मुझे अच्छे लगे, इसलिए खरीद लाया. अब जरा पहन कर तो दिखाओ.’’

मीना मुसकराते हुए भीतर कमरे में गई और थोड़ी देर में झुमके पहन कर बाहर दालान में आई तो संजय बोला, ”अरे मीना, झुमके पहन कर तुम बहुत ही खूबसूरत लग रही हो.’’

”क्यों झूठी तारीफ करते हो.’’ शरमाते हुए मीना ने कहा.

”तुम्हारी कसम मीना, सच कह रहा हूं, रात को घर लौटने पर जब चरण सिंह देखेगा तो वह भी यही बात कहेगा.’’

मीना ने आह भरते हुए कहा, ”उन के पास इतना टाइम कहां है कि वह मुझे झुमके पहने हुए देख कर मेरी तारीफ करें. काम से लौट कर उन्हें तो दारू पीने से फुरसत ही कहां मिलती है.’’

संजय मुसकराया, क्योंकि मीना की कमजोर नस अब उस के हाथ में आ गई थी. उस की समझ में आ गया कि पतिपत्नी के बीच पतली सी दरार है, जिसे वह प्रयास कर चौड़ी कर सकता है. इस के बाद संजय कुशवाहा मीना के करीब आने की कोशिश करने लगा. मीना को भी उस का आनाजाना और उस से बातचीत करना अच्छा लगने लगा था, लेकिन संजय को अपनी मंजिल नहीं मिल रही थी. उसी बीच संजय ने चरण सिंह से अपने डेढ़ लाख रुपए वापस लौटाने को कहा. चरण सिंह इस बात से काफी परेशान हो गया, क्योंकि उस के पास लौटाने के लिए रुपए नहीं थे.

कड़वा सच तो यह था कि अब उस की नीयत खराब हो गई थी. वह संजय से उधार लिया रुपया लौटाना नहीं चाहता था. एक दिन दोपहर को संजय चरण सिंह के घर पहुंचा तो मीना ने कहा, ”क्या इधरउधर मारेमारे फिरते हो, शादी क्यों नहीं कर लेते?’’

”शादी..? अभी कुछ महीने पहले ही तो मैं ने तुम्हारे कहने पर चरण सिंह को डेढ़ लाख रुपए बैंक से निकाल कर बिना ब्याज के उधार दिया था, लेकिन कई बार तकादा करने के बावजूद भी तुम्हारा पति मेरे पैसे लौटा नहीं रहा है. वह मेरा रुपया लौटाए, तब मैं शादी करने के बारे में सोचूं. क्योंकि वह मेरी अब तक की कुल कमाई का हिस्सा है.

”मेरे कहने पर जो डेढ़ लाख रुपए तुम ने मेरे पति को उधार दिया है, उस की बिलकुल भी चिंता मत करो.’’ मीना ने तिरछी नजरों से संजय को देखते हुए कहा, ”संजय, तुम मुझे बहुत डरपोक लगते हो. जो तुम्हारे मन में है, वह भी नहीं कह पा रहे.’’

”मीना, मैं ने तुम्हारी बात का मतलब नहीं समझा.’’ संजय अनभिज्ञ बनते हुए बोला.

”तुम ऐसा करो कि आज रात को आना, चरण सिंह आज रिश्तेदारी में शादी में जाएगा. मैं घर पर अकेली ही रहूंगी, तब अच्छे से समझा दूंगी.’’ मीना ने मुसकराते हुए कहा.

इतना सुनते ही संजय कुशवाहा का दिल एकदम से धड़क उठा. वह भाग कर घर गया और नहाधो कर रात होने का इंतजार करने लगा, लेकिन सूरज था कि अस्त होने का नाम ही नहीं ले रहा था. किसी तरह शाम हुई तो वह अपने गांव नयापुरा से जारह के लिए चल दिया. जारह पहुंचतेपहुंचते अधेरा हो चुका था. चरण सिंह के घर पहुंच कर संजय ने धीरे से दरवाजा खटखटाया. मीना ने जैसे ही दरवाजा खोला, वह फुरती से घर के भीतर घुस गया कि कोई उसे देख न ले.

घर में सन्नाटा पसरा हुआ था. बच्चे सो चुके थे. मीना संजय का हाथ पकड़ कर अपने कमरे में ले गई. वासना से वशीभूत मीना भूल गई कि वह अपने पति से बेवफाई करने जा रही है. संजय को अंदाजा लग गया था कि मीना ने अपने पति की गैरमौजूदगी में उसे क्यों बुलाया है. वह बिना किसी हिचकिचाहट के पलंग पर बैठ गया तो उस से सट कर बैठते हुए मीना ने कहा, ”संजय, मुझे तुम से इश्क हो गया है संजय.’’

”यदि तुम्हारे पति को यह सब पता चल गया तो…?’’

”किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. तुम भी तो मुझ से इश्क फरमाना चाहते हो, बोलो?’’

संजय ने कुछ कहने के बजाय मीना को अपनी बाहों में समेट लिया तो वह उस से लिपट गई. इस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. उन्होंने वह गुनाह कर डाला, जिस का अंजाम आगे चल कर बुरा ही होता है. रात दोनों की अपनी थी. क्योंकि मीना का पति घर पर नहीं था, इसलिए दोनों को किसी तरह का कोई डर नहीं था. लेकिन वे जिस दलदल में उतर गए थे, उस से वे चाह कर भी बाहर नहीं आ सकते थे. भोर होने से पहले ही संजय अपने गांव लौट गया. दोपहर को जब चरण सिंह घर लौट कर आया, मीना बिस्तर पर औंधे मुंह लेटी हुई थी. उसे समझते देर नहीं लगी कि पत्नी की तबियत ठीक नहीं है. उसे क्या पता था कि वह रात की थकावट उतार रही है.

हौलेहौले मीना और संजय का प्यार परवान चढऩे लगा. अवसरों की कोई कमी नहीं थी. चरण सिंह मजदूरी करने गांव से बाहर निकल जाता था. उसी बीच मीना संजय को अपने घर पर बुला कर रंगरलियां मना लिया करती थी. चरण सिंह को भले ही उन दोनों की कारगुजारियों की भनक अभी तक नहीं लग सकी थी, लेकिन पड़ोसी तो देख ही रहे थे. पड़ोसियों को समझते देर नहीं लगी कि चरण सिंह की गैरमौजूदगी में संजय के आने का मतलब क्या हो सकता है. आखिर एक दिन एक बुजुर्ग ने चरण सिंह को रोक कर कह ही दिया, ”चरण सिंह, मेहनतमजदूरी में इतना ज्यादा व्यस्त रहते हो, अपनी घरवाली का भी खयाल रखा करो.’’

”दादाजी मैं समझा नहीं, आप कहना क्या चाहते हैं?’’ चरण सिंह ने पूछा.

”मेरा मतलब संजय से है, आजकल वह तुम्हारी गैरमौजूदगी में तुम्हारे घर कुछ ज्यादा ही आ रहा है.’’

पड़ोसी बुजुर्ग की बात सुन कर चरण सिंह सन्न रह गया. वह सब काम छोड़ कर अपने घर पहुंचा और अपनी पत्नी से पूछा, ”मेरी गैरमौजूदगी में संजय यहां क्यों आता है?’’

”नहीं तो, किस ने कहा?’’ मीना ने लापरवाही से कहा.

”आगे से अब मेरी गैरमौजूदगी में संजय यहां आए तो उसे साफ मना कर देना, क्योंकि आसपड़ोस में उसे ले कर तरहतरह की चर्चा हो रही है. मैं नहीं चाहता कि बिना मतलब के हमारी बदनामी हो.’’

मीना ने कोई उत्तर नहीं दिया. चरण सिंह इस बात को ले कर काफी परेशान था. वह खुद भी महसूस कर रहा था कि पिछले कुछ दिनों से मीना का व्यवहार उस के प्रति लापरवाह सा रहने लगा है. कहीं वह गुमराह तो नहीं हो गई, लेकिन उस ने अपनी आंखों से अभी तक दोनों को कोई गलत हरकत करते हुए नहीं देखा था, इसलिए कोई निर्णय कैसे ले सकता था. उधर मीना ने भी फोन कर के संजय कुशवाहा को सचेत कर दिया कि वह कुछ दिनों तक उस के पति की गैरमौजूदगी में मिलने न आए, क्योंकि चरण सिंह और पड़ोसियों  को शक हो गया है. इस के बाद 2 हफ्ते तक संजय ने चरण सिंह के घर की तरफ रुख नहीं किया.

जब मीना ने देखा कि इस मामले में उस का पति लापरवाह हो गया है तो उस ने एक दिन संजय को फोन कर के घर पर बुला लिया, क्योंकि उस दिन चरण सिंह मथुरा जाने को कह कर गया हुआ था. लेकिन जैसे ही वह टिकट लेने के लिए कतार में खड़ा हुआ, तभी उस के पड़ोसी का उस के मोबाइल पर फोन आ गया. वह बोला, ”तुम कहां पर हो? तुम्हारी पत्नी तुम्हारी गैरमौजूदगी में संजय के साथ गुलछर्रे उड़ा रही है. संजय घर पर आया हुआ है.’’

पत्नी को रंगेहाथों पकडऩे के लिए चरण सिंह मथुरा जाने का इरादा त्याग कर घर लौट आया और पड़ोस की छत से घर के भीतर पहुंचा तो मीना को संजय की बाहों में पाया. चरण सिंह ने संजय को पकडऩा चाहा, लेकिन वह उसे धक्का दे कर भाग गया. इस के बाद चरण सिंह ने मीना की जम कर ठुकाई कर दी. जब कुछ गुस्सा शांत हुआ तो वह इस सोच में लग गया कि वह इस चरित्रहीन पत्नी का क्या करे. यदि वह उसे तलाक दे देता है तो उस के तीनों बच्चों का क्या होगा, अपनी मेहनतमजदूरी छोड़ कर वह उन की देखभाल भी नहीं कर सकता था.

मीना ने स्वयं को संभाला और सोचने लगी कि उसे क्या करना चाहिए? पति के द्वारा आपत्तिजनक हालत में रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद वह संजय को किसी भी कीमत पर छोडऩा नहीं चाहती थी और चरण सिंह का घर भी नहीं छोडऩा चाहती थी. क्योंकि जो सुखसुविधा चरण सिंह के घर में थी, वह संजय नहीं दे सकता था. फिर कुछ सोच कर उस ने पति के पैरों में सिर रख कर माफी मांगते हुए कहा, ”मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई, अब मैं कसम खाती हूं कि आगे से ऐसी गलती कभी नहीं होगी.’’

चरण सिंह के पास पत्नी को माफ करने के अलावा कोई दूसरा उपाय नहीं था, इसलिए उस ने पत्नी को माफ कर दिया. दूसरी ओर संजय की अब मीना से मिलने के लिए उस के पास जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी, लेकिन मीना ने उस से कहा कि वह उस के बिना जीने की कल्पना भी नहीं कर सकती. उस के बिना उस का जीवन नीरस हो जाएगा. दोनों ने अब घर के बाहर मेलमिलाप का कार्यक्रम तय किया. बहाना बना कर मीना अपने मायके नयापुरा चली जाती थी, जहां उस से मिलने के लिए संजय आ जाता था.

लेकिन वहां भी वे कई लोगों की निगाहों में आ गए. जिस से चरण सिंह को इस मेलमिलाप के बारे में पता चल गया. उस का भरोसा अपनी पत्नी से उठ गया था, वह शराब पी कर उस के साथ आए दिन मारपीट करने लगा. चरण सिंह से एक दिन बाजार में अचानक मुलाकात होने पर संजय ने उस से अपने डेढ़ लाख रुपए लौटाने को कहा. जबकि चरण सिंह अब उस के रुपए लौटाने के मूड में नहीं था. एक दिन मीना और संजय मिले तो मीना ने कहा, ”संजय, चलो हम कहीं दूर जा कर अपनी दुनिया बसा लेते हैं.’’

”देखो, हम अपनी दुनिया तो बसा लेंगे, लेकिन खाएंगेपहनेंगे क्या? मीना, इस के लिए हमें कुछ और सोचना होगा.’’ संजय बोला.

चरण सिंह की गृहस्थी में ग्रहण लग चुका था. आसपड़ोस के लोग उस की पत्नी की चुगली करते रहते थे, लेकिन चरण सिंह की समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी बेहया पत्नी का क्या करे. उसे अपने बच्चों का भविष्य बरबाद होता दिखाई दे रहा था. पतिपत्नी के बीच आए दिन होने वाले झगड़ों का असर बच्चों पर भी पड़ रहा था. जबकि मीना पति से छुटकारा पाना चाहती थी. उसी बीच एक रात चरण सिंह ने मीना को मोबाइल फोन पर बातें करते हुए देखा तो उस के हाथ से मोबाइल फोन छीन कर नंबर चैक किया तो वह नंबर संजय का निकला. चरण सिंह ने कहा, ”इतना सब होने के बावजूद तुम अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही हो?’’

 

जब मीना ने कोई उत्तर नहीं दिया तो चरण सिंह को गुस्सा आ गया. उस ने मीना के गाल पर थप्पड़ जड़ते हुए कहा, ”चरित्रहीन औरत, अब तू बिलकुल भी भरोसे लायक नहीं रही.’’

इस के बाद उस ने मोबाइल छीन कर तोड़ दिया.

इस पर मीना ने कहा, ”यह तुम ने अच्छा नहीं किया.’’ पति के द्वारा मोबाइल फोन तोड़ देने से तिलमिलाई मीना ने तय कर लिया कि अब वह अपने पति को जिंदा नहीं छोड़ेगी. अगले दिन उस ने अपनी सहेली के मोबाइल से संजय को फोन किया और पूछा, ”अब तुम्हारा क्या इरादा है, मुझे आज साफसाफ बताओ?’’

”मेरी माली स्थिति के बारे में तुम सब कुछ जानती हो. अब मीना तुम्हीं बताओ कि मैं क्या करूं? मैं तुम्हारे पति को उधार दिए डेढ़ लाख रुपए लौटाने के लिए अनेक बार कह चुका, लेकिन वह देने का नाम नहीं ले रहा है. मेरी समझ में नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं?’’

”देखो संजय, मैं तुम्हारी वजह से रोजरोज तो पिट नहीं सकती, इसलिए अब फैसला लेने का वक्त आ गया है. या तो तुम मुझे छोड़ दो या फिर कुछ ऐसा करो कि हम दोनों सुकून से जी सकें.’’

”अब तुम ही बताओ मीना कि मुझे क्या करना चाहिए?’’

”तुम कुछ ऐसा करो कि मुझे हमेशाहमेशा के लिए चरण सिंह से छुटकारा मिल जाए. उस के बाद हम दोनों सुकून की जिंदगी गुजार सकेंगे.’’

”लेकिन यह सब कैसे होगा?’’

”सब आराम से हो जाएगा, क्योंकि यह हमारे बीच दीवार की तरह है. यह अब मुझे सहन नहीं हो रहा है.’’

”चरण सिंह को ठिकाने लगाने के लिए पैसों की जरूरत होगी, जो मेरे पास हैं नहीं.’’

”पैसे में दे दूंगी. पति का डेढ़ लाख रुपया मेरे पास सुरक्षित रखा हुआ है.’’

सौदा कहीं से भी घाटे का नहीं था. संजय मन ही मन खुश हो गया. उधार दिए डेढ़ लाख रुपए भी वापस मिल जाएंगे और प्रेमिका मीना के साथ उस की संपत्ति भी मिल जाएगी. वह मौज करेगा. लेकिन ऐसा नहीं जो सका. उन का गुनाह छिप न सका और दोनों ही पुलिस की पकड़ में आ गए. हत्या के बाद हर कातिल कानून से बचना चाहता है. इश्क में अंधी मीना पति की हत्या के बाद अधूरी खुशियों को पूरा करना चाहती थी, लेकिन उस के यह अरमान धरे के धरे रह गए. उसे क्या पता था कि वह मौज करने के बजाय प्रेमी संजय कुशवाहाा के साथ जेल चली जाएगी. पुलिस ने दोनों आरोपियों को चरण सिंह की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया.