Gujarat Singer Controversy: लोकगायिका किंजल, प्यार पर रार क्यों

Gujarat Singer Controversy. गुजरात की लोक गायिका किंजल रबारी घर वालों की मरजी के खिलाफ अपने बौयफ्रेंड अशोक चौधरी से शादी कर अलग रहने लगी. बाद में उस के फेमिली वाले किंजल को अपने पास ले आए और उस से तलाक का केस दाखिल करा दिया. एक किंजल ही नहीं, गुजरात की कई सिंगर्स ने अपनी मनमरजी से शादी की तो उन की फेमिली वालों ने न सिर्फ उन का विरोध किया बल्कि…

6 सितंबर, 2026 की शाम अहमदाबाद के चांदखेड़ा इलाके में स्थित सीबीडी मौल में रोज की तरह उस समय काफी भीड़भाड़ थी. इस की वजह यह थी कि उस समय लोग फिल्म देख कर बाहर निकल रहे थे. कुछ लोग मौल में शापिंग के लिए रुक जा रहे थे तो कुछ लोग अपने वाहनों की ओर जा रहे थे. उसी बीच पुलिस के पास सूचना पहुंची कि गुजरात की चर्चित लोकगायिका किंजल रबारी का अपहरण कर लिया गया है.

शिकायत करने वाला कोई और नहीं, उस का कथित पति नरसिंह उर्फ मुकेश देसाई था. उस के अनुसार, वह और किंजल साथ में फिल्म देखने मौल आए थे. शो खत्म होने के बाद वह किंजल के साथ बाहर निकला तो कुछ लोग कारों में वहां आए और किंजल को जबरदस्ती कार में बैठा कर अपने साथ ले गए.

एक चर्चित गायिका के अपहरण की शिकायत मिलने के बाद पुलिस तुरंत सक्रिय हो गई. पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और वहां आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जाने लगी. सीसीटीवी की फुटेज में किंजल एक कार की ओर जाती और फिर एक कार में बैठती दिखाई दी. इस के बाद कार उसे ले कर वहां से चली गई.

सीसीटीवी के इस दृश्य ने शिकायत में बताए गए घटनाक्रम को उलझा दिया. हालांकि फुटेज केवल घटनास्थल पर हुई गतिविधि को ही दिखा रही थी, इसलिए उस से यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं था कि किंजल अपनी इच्छा से कार में बैठी थी या किसी दबाव में.

उसी बीच सोशल मीडिया पर किंजल का एक वीडियो सामने आया, जिस में वह अपहरण से इनकार करते हुए कह रही थी कि वह अपनी मरजी से अपने पहले पति अशोक चौधरी के पास गई है.

शिकायत, सीसीटीवी फुटेज और किंजल के वीडियो ने मामले को नया मोड़ दे दिया था. दरअसल, इस विवाद की पृष्ठभूमि करीब ढाई साल पहले प्रेम विवाह और उस के बाद हुए घटनाक्रम में छिपी थी.

राधनपुर तहसील के सीनाड गांव में किंजल रबारी का मायका है. उस ने एक साधारण परिवार से निकल कर संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाई थी. किंजल ने गांव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से 8 तक पढ़ाई की थी. उस के बड़े भाई किरण रबारी स्कूल में भजन गाते थे. भाई को गाते देख कर किंजल की भी संगीत में रुचि बढ़ी.

उस ने भी स्कूल में भजन गाने की इच्छा जताई. शिक्षकों ने उस की प्रतिभा को पहचाना और उसे प्रार्थना सभा तथा गीतसंगीत प्रतियोगिताओं में अवसर दिया. स्कूल के तत्कालीन प्रधानाचार्य तेजाभाई जादव ने बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए स्कूल में साउंड सिस्टम लगवाया था. माइक पर गाने के अवसर ने किंजल का मंच के प्रति संकोच दूर कर दिया था.

छोटी उम्र में शुरू हुआ संगीत का यह सफर आगे चल कर लोकगीतों, विवाह गीतों और देवी जागरण के गीतों तक पहुंचा. उस की आवाज लोकप्रिय हुई और उसे ‘कोयल कंठी’ गायिका के रूप में पहचान मिली. संगीत ने उसे प्रसिद्धि दी, लेकिन निजी जीवन में परिस्थितियां धीरेधीरे जटिल होती चली गईं.

पढ़ाई के सिलसिले में किंजल का राधनपुर आनाजाना होता था. उसी दौरान उस की मुलाकात अशोक चौधरी से हुई. परिचय बढ़ा और दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गया. दोनों ने विवाह करने का फैसला किया.

किंजल के अनुसार, उस के परिवार को यह रिश्ता मंजूर नहीं था. बाद में पुलिस को दिए लिखित पत्र में उस ने दावा किया था कि उस ने परिवार को मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन परिवार उस की पसंद के रिश्ते को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था.

2 मई, 2024 को किंजल और अशोक चौधरी ने हिंदू रीतिरिवाज से विवाह कर लिया. विवाह के बाद दोनों साथ रहने लगे थे. किंजल के कहे अनुसार, परिवार से विवाह स्वीकार करने का अनुरोध करने के बावजूद विरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ. इसी बीच उस का संगीत करिअर आगे बढ़ता रहा, जबकि निजी जीवन में तनाव बना रहा.

किंजल के अनुसार, वह अपने पापा का घर छोड़ कर अशोक के साथ चली गई थी और अशोक चौधरी के साथ उस की पत्नी की तरह रहने लगी थी. किंजल का दावा था कि बाद में मायके पक्ष के लोग उसे अशोक से अलग कर के अपने घर ले गए. उस ने फेमिली वालों पर आरोप लगाया कि उसे घर में रखा गया, उसे बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई और उस का मोबाइल फोन भी ले लिया गया.

किंजल ने सब से गंभीर आरोप तलाक की प्रक्रिया को ले कर लगाए. उस के अनुसार, उस पर अशोक से तलाक लेने के लिए दबाव बनाया गया. उस से राधनपुर की अदालत में तलाक की अरजी दाखिल करवाए जाने के बाद हाईकोर्ट की काररवाई में उस की इच्छा के विपरीत बयान दिलवाए जाने का दावा किया.

उस ने पुलिस को दिए लिखित पत्र में स्पष्ट किया है कि वह अशोक से तलाक नहीं लेना चाहती थी.

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उस समय नहीं हुई थी. इसलिए इन्हें किंजल के दावे के रूप में ही देखा जा रहा था.

उसी बीच नरसिंह उर्फ मुकेश देसाई की एंट्री हुई. प्राप्त जानकारी के अनुसार, किंजल और मुकेश मैत्री करार के तहत साथ रहने लगे थे. मुकेश उसे अपनी पत्नी बताता था. बाद में किंजल ने इस संबंध को ले कर भी गंभीर आरोप लगाए.

उस का कहना था कि उसे परिवार की ओर से जबरदस्ती मुकेश के साथ भेजा गया था. उस ने मुकेश पर अपने साथ जबरदस्ती करने का भी आरोप लगाया.

यही संबंध आगे चल कर 6 सितंबर की घटना में महत्त्वपूर्ण बन गया. 6 सितंबर, 2026 को किंजल और मुकेश अहमदाबाद के चांदखेड़ा स्थित सीबीडी मौल पहुंचे. दोनों फिल्म देखने गए थे. फिल्म खत्म होने के बाद वे बाहर निकले.

मुकेश के अनुसार, उसी दौरान कुछ लोग कारों में वहां आए और जबरदस्ती किंजल को अपने साथ ले गए. इस के बाद उस ने पुलिस को सूचना दे कर अपहरण की शिकायत की.

पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच शुरू की. फुटेज में एक व्यक्ति मुकेश को पकड़े हुए दिखाई दे रहा था. उसी बीच किंजल एक कार की ओर जाती नजर आईं और उस में बैठ गईं. उस के बाद कार वहां से चली गई.

सीसीटीवी में दिखाई देने वाले इस दृश्य से पुलिस के सामने शिकायत की परिस्थितियों को समझने की चुनौती पैदा हो गई. हालांकि फुटेज यह तय नहीं कर सकती थी कि किंजल किस मानसिक या परिस्थितिजन्य स्थिति में कार में बैठी.

सीसीटीवी की जांच के दौरान ही सोशल मीडिया पर किंजल का एक वीडियो सामने आया. वीडियो में वह कह रही थी कि उस का अपहरण नहीं हुआ है. वह अपनी मरजी से अशोक चौधरी के पास गई है. वह अपने पुराने विवाह और परिवार के साथ हुए कथित विवाद का उल्लेख करते हुए कह रही थी कि परिवार उस के और अशोक के विवाह से खुश नहीं था. उस ने आरोप लगाया कि उसे अशोक से जबरन अलग किया गया और उस के ऊपर तलाक के लिए दबाव बनाया गया.

किंजल ने यह भी दावा किया कि बाद में उसे मुकेश देसाई के साथ रहने के लिए मजबूर किया गया था. उस के कहे अनुसार इस स्थिति से परेशान हो कर उस ने अशोक से संपर्क किया और 6 सितंबर को अपनी मरजी से उस के पास चली गई. वह साफसाफ कह रही थी कि उस का अपहरण नहीं हुआ था.

हालांकि पुलिस के लिए सोशल मीडिया पर आया वीडियो अपने आप में अंतिम प्रमाण नहीं था. वीडियो कब और कहां बनाया गया तथा किन परिस्थितियों में बनाया गया, इस की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती थी.

थाना चांदखेड़ा के इंसपेक्टर जयेश मकवाना के अनुसार, पुलिस को मुकेश की ओर से अपहरण की शिकायत मिली थी. किंजल का वीडियो और उस का पत्र भी पुलिस तक पहुंचा था, लेकिन उस ने पुलिस के सामने व्यक्तिगत रूप से बयान दर्ज नहीं कराया था.

इसलिए पुलिस उस की लोकेशन तलाश रही थी. मामले में उस का प्रत्यक्ष बयान महत्त्वपूर्ण था, क्योंकि एक ओर मुकेश अपहरण का आरोप लगा रहा था, जबकि दूसरी ओर किंजल वीडियो में अपनी इच्छा से अशोक के पास जाने की बात कह रही थी.

मुकेश ने किंजल के कथित अपहरण में अशोक चौधरी की भूमिका होने की आशंका जताई थी. उस का दावा था कि किंजल को अशोक के पास ले जाया गया है. इस के विपरीत किंजल का कहना था कि वह स्वयं अशोक के पास गई थी.

इस विरोधाभास के बीच पुलिस को यह जानना जरूरी था कि वीडियो किन परिस्थितियों में बनाया गया था और किंजल ने उस में स्वतंत्र रूप से अपनी बात कही थी या किसी के दबाव में यह सब कहा था.

किंजल की ओर से अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर और चांदखेड़ा पुलिस इंसपेक्टर को दिए गए पत्र में उस ने अपनी उम्र 25 साल बताई है और बीएससी एमएलटी की पढ़ाई पूरी करने का भी उल्लेख किया है. पत्र में उस ने अशोक से परिचय, प्रेम और विवाह से ले कर बाद की घटनाओं का विवरण दिया है.

पत्र में उस ने बताया है कि 2 मई, 2024 को उस ने अशोक चौधरी से विवाह किया था. परिवार की कथित असहमति के बावजूद दोनों साथ रहे. 10 मार्च, 2026 को अशोक के साथ जाने और उस के बाद परिवार द्वारा उसे वापस ले जाने का भी उस ने उल्लेख किया है.

उस का आरोप है कि उसे जबरदस्ती घर में रखा गया, बाहर जाने से रोका गया और मोबाइल फोन भी ले लिया गया. उस ने तलाक की प्रक्रिया में भी दबाव डाले जाने का दावा किया है और कहा है कि वह अशोक से तलाक नहीं चाहती थी.

मुकेश के साथ रहने के संबंध में भी उस ने फेमिली वालों पर गंभीर आरोप लगाए. उस के अनुसार, मौका मिलने पर उस ने अशोक से संपर्क किया और 6 सितंबर को अपनी मरजी से उन के पास चली गई. उस ने पुलिस से अनुरोध किया कि उस के परिवार या मुकेश की ओर से उस के या अशोक के खिलाफ की गई झूठी शिकायत पर कोई काररवाई न की जाए. इन आरोपों की सच्चाई की जांच करना अब पुलिस का काम है.

अहमदाबाद के मौल से शुरू हुआ विवाद अब किंजल के मायके सीनाड गांव तक पहुंच गया था.

7 सितंबर को गांव का माहौल तनावपूर्ण हो गया था. रिपोर्टों के अनुसार, गांव के करीब 60 लोगों की भीड़ ने जांच करने आई पुलिस पर हमला कर दिया. पता चला है कि यह हमला चौधरी समुदाय से जुड़े एक एसआई पर किया गया था.

इस घटना के बाद गांव में पुलिस व्यवस्था बढ़ा दी गई. अब पुलिस के सामने किंजल से जुड़े विवाद की जांच के साथ कानूनव्यवस्था बनाए रखने की भी चुनौती थी. निजी रिश्ते का विवाद धीरेधीरे 2 समाजों के बीच तनाव की आशंका में बदल गया था. पुलिस पर हमले के मामले में काररवाई करते हुए 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया.

गिरफ्तारी के बाद गांव में पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई थी, ताकि स्थिति दोबारा न बिगड़े. मामला सामाजिक तनाव का रूप न ले, इस के लिए रबारी समाज के नेता नागजी देसाई ने लोगों से संयम बरतने की अपील की थी. उन्होंने युवाओं से भावनाओं में बह कर आंदोलन या टकराव का रास्ता न अपनाने को कहा था.

इसी क्रम में मेहसाणा हाईवे पर स्थित वडवाला छात्रावास में रबारी समाज की बंद कमरे में चिंतन बैठक आयोजित होने की बात भी सामने आई है. बैठक में स्थिति को बिगडऩे से रोकने और दोनों समाजों के बीच टकराव टालने पर जोर दिया गया था.

किंजल के प्रेम विवाह को ले कर पहली बार विवाद नहीं हुआ. करीब 6 महीने पहले भी उस ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने विवाह को ले कर अपनी बात रखी थी. उस ने परिवार की मरजी के खिलाफ अशोक चौधरी से विवाह करने की बात कही थी और अपने तथा पति की सुरक्षा को ले कर चिंता जताते हुए पुलिस से सुरक्षा की मांग की थी. उस ने विवाह को ले कर अपने खिलाफ अफवाहें फैलाए जाने की बात भी कही थी.

दूसरी ओर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई थी, जिस में किंजल पर समाज का नाम खराब करने का आरोप लगाया गया था. उस पोस्ट में दावा किया गया था कि वह 10 मार्च, 2026 को दूसरे समाज के युवक के साथ चली गई है और राजस्थान के आबू की ओर गई है. लोगों से उन्हें तलाशने में मदद करने की अपील भी की गई थी. इस से पता चलता है कि उस के निजी जीवन से जुड़ा विवाद पहले ही सोशल मीडिया पर सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन चुका था.

इस तरह प्रेम विवाह, परिवार की कथित नाराजगी, तलाक को ले कर आरोप, मुकेश के साथ मैत्री करार, अपहरण की शिकायत, सीसीटीवी फुटेज और अशोक के पास अपनी मरजी से जाने का उन का दावा, इन सभी घटनाओं ने किंजल की निजी जिंदगी को सार्वजनिक विवाद में बदल दिया था.

कथा लिखे जाने तक पुलिस के सामने कई महत्त्वपूर्ण कडिय़ां थीं— मुकेश की शिकायत, सीसीटीवी फुटेज, किंजल का सोशल मीडिया वीडियो और उन का पुलिस को दिया गया पत्र. लेकिन सब से महत्त्वपूर्ण कड़ी उन का प्रत्यक्ष बयान था. पुलिस को यह पता लगाना था कि 6 सितंबर को मौल के बाहर वास्तव में क्या हुआ, किंजल किस परिस्थिति में कार में बैठी और उस के बाद कहां गई?

इस के साथ परिवार पर लगाए गए आरोपों और मुकेश के साथ उस के संबंधों से जुड़े दावों की जांच भी जरूरी थी.

इस के अलावा किंजल ने परिवार और मुकेश के खिलाफ जो आरोप लगाए थे, उन की स्वतंत्र पुष्टि तथा मुकेश की अपहरण शिकायत की सच्चाई भी जांच का हिस्सा थी.

इस तरह मामला केवल यह पता लगाने तक सीमित नहीं था कि किंजल किस के साथ गई, बल्कि यह भी महत्त्वपूर्ण था कि उस ने किन परिस्थितियों में वह निर्णय लिया.

लोक गायिकाओं के प्रेम विवाह और सामाजिक विवाद

गुजरात में लोक गायिकाओं के प्रेम विवाह, सगाई और मैत्री करार से जुड़े विवाद समयसमय पर चर्चा में रहे हैं. इन मामलों में परिवार और समाज के विरोध के साथसाथ संबंधित युवतियों ने भी अपने फैसले के पक्ष में खुल कर अपनी बात रखी.

आरती सांगाणी का मैत्री करार

सूरत में रहने वाली पाटीदार युवती और लोकगायिका आरती सांगाणी ने अपने साथ स्टेज प्रोग्राम करने वाले तबला वादक देवांग गोहेल के साथ मैत्री करार कर के साथ रहना शुरू किया था. इस के बाद आरती के परिजनों और पाटीदार समाज के अग्रणियों की ओर से विरोध के स्वर उठे थे.

समाज के कुछ अग्रणियों के विरोध के बाद आरती सांगाणी ने वीडियो के माध्यम से जवाब दिया था. उस ने अलगअलग 3 वीडियो पोस्ट किए थे. आरती ने कहा था कि उसे कुछ भी नहीं कहना है, लेकिन उसे लगता है कि लोग अंगुली उठा कर उस से बोलने के लिए मजबूर करेंगे.

उस ने कहा था कि हाल ही में उस के पापा का एक वीडियो वायरल किया गया, जिस में वह रो रहे थे और कह रहे थे कि उन की बेटी ने उन के साथ विश्वासघात किया है. आरती ने सवाल किया था कि जिस दिन वह घर से निकली थी, क्या उस दिन उस ने घर वालों को यह नहीं बताया था कि वह जा रही हैं? उस ने घर पर मैसेज भी छोड़ा था कि उस ने अपने जीवन के लिए यह निर्णय लिया है.

आरती ने कहा था कि आज वह खुश है तो यह पूरी दुनिया से देखा नहीं जा रहा. उन्हें ऐसा लग रहा है, जैसे सोशल मीडिया पर एक काम मिल गया हो और हर जगह सिर्फ आरती सांगाणी के बारे में ही बात होनी चाहिए.

उन्होंने समाज के लोगों से कहा था कि उन के घर में भी बेटियां हैं और आगे भी बेटियां आएंगी. जब किसी के घर से बेटी जाएगी और उस की वेदना महसूस होगी, तब उन्हें इस बात का पता चलेगा.

रिद्धि राजपरा की लव मैरिज पर विवाद

आरती सांगाणी का विवाद अभी मुश्किल से शांत हुआ था कि सूरत के पाटीदार समाज में एक और लोक गायिका रिद्धि राजपरा के लव मैरिज करने पर विवाद खड़ा हो गया था. सूरत की उभरती लोकगायिका रिद्धि राजपरा ने म्यूजिक रिदम आर्टिस्ट जयेश वाघेला के साथ शादी कर ली थी.

इस घटना के बाद पाटीदार समाज में भारी रोष देखने को मिला था. समाज के अग्रणियों ने सख्त रुख अपनाते हुए रिद्धि राजपरा के लिए स्टेज पर नो एंट्री की बात कही थी और उन के बहिष्कार की अपील की गई थी.

विवाद के बीच सूरत के पाटीदार लोकगायक भी सामने आए थे. उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा था कि पाटीदार समाज में बेटियों को सिंगर नहीं बनाना चाहिए. उन का कहना था कि यहां बेटियों को सिर्फ बलि का बकरा ही बनना पड़ता है.

किंजल दवे की सगाई पर ब्रह्म समाज का विरोध

गुजरात की लोकप्रिय सिंगर किंजल दवे ने अपनी जाति से बाहर के ऐक्टर और बिजनैसमैन ध्रुविन शाह के साथ सगाई की थी. इस के बाद 5 परगना ब्रह्म समाज में विरोध के स्वर उठे थे. समाज की ओर से किंजल दवे के परिवार का बहिष्कार किए जाने की बात सामने आई थी.

लेकिन किंजल दवे समाज के इस फैसले के सामने चुप नहीं बैठी. उस ने सवाल उठाते हुए कहा था कि बेटियों के पंख काटने की बातें होती हैं. उस ने यह भी कहा था कि वह खुद साटा प्रथा यानी अदलाबदली विवाह की प्रथा से पीडि़त है.

किंजल ने आगे कहा था कि आज बेटियां तेजस जैसे विमान उड़ा रही हैं, युद्ध कर रही हैं, रण मैदान में हैं और संसद में हैं. हाल ही में हुए औपरेशन सिंदूर में भी 2 बेटियों ने नेतृत्त्व कर के देश को गौरवान्वित किया है. ऐसे में क्या 2-4 असामाजिक तत्त्व यह तय करेंगे कि किसी बेटी का जीवनसाथी कौन होगा? क्या एक बेटी को अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार नहीं है?

काजल मेहरिया का प्रेम विवाह और परिवार से विवाद

कुछ समय पहले जानीमानी लोक गायिका काजल मेहरिया द्वारा अल्पेश ठाकोर नाम के युवक से प्रेम विवाह किए जाने के बाद उस के परिवार की नाराजगी सामने आई थी. परिवार की ओर से गंभीर आरोप भी लगाए गए थे. काजल के फेमिली वाले उस की ससुराल पहुंच गए थे, जिस के बाद मामला थाने तक पहुंच गया था.

इस के बाद काजल मेहरिया ने वीडियो जारी कर के अपनी बात रखी थी. उस ने वीडियो की शुरुआत ‘जय हिंद, जय भीम, जय विहत मां’ से की थी.

काजल ने कहा था कि वह लोक गायिका है और काफी समय से जिस मुद्दे की चर्चा हो रही है, वह उस की पारिवारिक और घर की बात थी. इसलिए उस की इच्छा थी कि यह बात घर तक ही सीमित रहे और उस ने कभी इस बारे में सार्वजनिक रूप से अपनी बात नहीं रखी.

लेकिन उस के अनुसार अब हद पार हो गई थी. उस ने वीडियो के माध्यम से बताया था कि 10 अक्तूबर, 2025 को उस ने अपनी मरजी से, पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में, भारतीय संविधान के नियमों और भारत की स्वतंत्र नागरिकता के नियमों के मुताबिक वयस्क उम्र में अल्पेश के साथ शादी की थी.

काजल ने स्पष्ट किया था कि उस ने न किसी डर या धमकी में और न ही किसी दबाव में आ कर शादी की थी. उस के अनुसार अल्पेश और उस का रिश्ता पिछले डेढ़ साल से था. इस की जानकारी उस ने अपनी फेमिली को भी दी थी, लेकिन उन की सहमति नहीं होने के कारण उस ने अपने दम पर अपने भविष्य, अपनी जिंदगी और अपने महत्त्वपूर्ण फैसले खुद लेने का निर्णय किया.

काजल ने कहा था कि इस मामले में उन का पहला जवाब हो या आखिरी, जवाब आज भी यही है और आगे भी यही रहेगा.

उस ने विशेष रूप से कहा था कि वह और अल्पेश दोनों राजीखुशी से रह रहे हैं. वह अपनी इस निजी बात में न किसी समाज को और न ही किसी बड़ेबुजुर्ग को गुमराह करना चाहती है.

काजल ने कहा था कि वह सनातन धर्म में विश्वास करती है और सनातन धर्मप्रेमी जनता से साथ और सहयोग मांगती है. उस ने यह भी स्पष्ट किया था कि वह धर्म परिवर्तन नहीं करना चाहती थी और इसी कारण अब तक चुप थी. उस ने कहा था कि वह अपने इस निर्णय पर अडिग रहेगी, क्योंकि वह सनातनी है.

काजल के अनुसार उस के परिवार की ओर से अल्पेश और उस के खिलाफ अलगअलग आरोप लगाए गए थे. उसे और अल्पेश को मार डालने तथा उठा लेने जैसी धमकियां भी दी गई थीं. उस के मुताबिक उस के ससुराल यानी शेरथा जा कर भी परिवार की ओर से कई बातें कही गईं और धमकियां दी गईं.

इन सभी बातों से परेशान हो कर उस ने वीडियो के माध्यम से अपनी बात सार्वजनिक की थी. अंत में काजल ने कहा था कि इस के बाद ऐसी किसी भी फालतू बात का जवाब देना वह जरूरी नहीं समझती. अब तक उस ने लोगों और अपने परिवार के बारे में सोचा है, लेकिन अब वह अपने बारे में सोचेगी. उस ने चेतावनी दी थी कि यदि कोई खराब टिप्पणी करता है या उन्हें परेशान करता है तो भारतीय न्याय प्रणाली की मदद से कानूनी काररवाई की जाएगी. Gujarat Singer Controversy

Kanpur Chemist Murder Case: कारोबारी मर्डर मिस्ट्री सात फेरे सौ साजिशें

Kanpur Chemist Murder Case. कानपुर का चर्चित दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड महज एक जुर्म नहीं, बल्कि रिश्तों के कत्ल की खौफनाक दास्तान है. घर संभालने की जिम्मेदारी के लिए शालिनी उर्फ शालू नाम की जिस बहू को विनीत मिनोचा अपने घर लाए थे, उसी की खौफनाक साजिश का वह शिकार हो गए. लालच, बेवफाई में अंधी और स्वच्छंद विचारों वाली बहू शालू ने अपने ससुर की मौत की प्लानिंग तो फुलप्रूफ की थी, लेकिन पुलिस जांच में वह ऐसी फंसी कि उस ने हत्या की पूरी कहानी बयां कर दी. इस केस की हर परत ने रूह कंपा देने वाला ऐसा सच उजागर किया कि…

शालिनी उर्फ शालू करोड़पति दवा व्यापारी विनीत मिनोचा की बहू थी. आलीशान फ्लैट में रहती थी. घर में सभी भौतिक सुखसुविधाएं भी थीं. इस के बावजूद वह खुश नहीं थी. वह जिस तरह की खुशहाल जिंदगी जीना चाहती थी, वैसी जी नहीं पा रही थी. उस की खुशहाल जिंदगी में बाधक थे उस के ससुर विनीत मिनोचा. वह शालू को आर्थिक व मानसिक रूप से टौर्चर करते रहते थे. ससुर की टोकाटाकी से शालू परेशान रहती थी. कभी कहते यह मत पहनो, कभी कहते पार्टी में मत जाया करो. ससुर के कमेंट्स से शालू तिलमिला उठती थी.

दरअसल, शालू खुले विचारों की महिला थी. उसे बंदिशों में रहना पसंद न था. पति सुब्रत के साथ किटी पार्टी में जाना, वहां डांस करना, शराब पीना तथा देर रात घर वापस आना उस के शौक में शामिल था, जबकि विनीत मिनोचा को यह सब पसंद न था. वह चाहते थे कि बहू मर्यादा में रहे.

शालिनी उर्फ शालू को यह भी मलाल था कि ससुर विनीत मिनोचा उस के पति सुब्रत के साथ भी नौकरों जैसा व्यवहार करते हैं. करोड़ों का व्यापार था. कानपुर शहर के बिरहाना रोड स्थित दवा मार्केट में ‘फार्मा ट्रेडर्स’ नाम से दवा फर्म थी. 50-60 करोड़ का सालाना टर्न ओवर था, लेकिन अपने ही काम में पति सुब्रत को 40 हजार रुपए वेतन मिलता था. घर खर्च के लिए उसे मात्र 15 हजार रुपए मिलते थे. उस का भी पाईपाई का हिसाब ससुर विनीत मिनोचा मांगते थे. अतिरिक्त पैसा मांगने पर जलील करते थे.

एक रोज रुपयों की डिमांड को ले कर शालू और विनीत के बीच बात बढ़ गई. विनीत ने शालू को रुपए तो दिए, लेकिन जलील भी खूब किया. शालू तब तिलमिला उठी.

उस का गुस्सा अभी चरम पर था, तभी उस से मिलने विशाल गौतम आ गया. वह उस के ससुर की दवा फर्म में काम करता था, लेकिन 4 साल पहले विनीत मिनोचा ने उसे चोरी के आरोप में नौकरी से निकाल दिया था. शालू और उस के पति घर के काम के लिए उसे जबतब बुला लेते थे.

शालू को गुस्से में देखा तो विशाल ने पूछा, ”शालू भाभी, आप बेहद परेशान लग रही हो. क्या सुब्रत भैया से झगड़ा हुआ है या फिर कोई और बात है?’’

शालू बोली, ”विशाल, तुम्हारे भैया से मेरा कोई झगड़ा नहीं हुआ है. मेरे ससुर ने मेरा जीना दूभर कर दिया है. हर समय टोकाटाकी और जलील करते रहते हैं. उन्हें मेरा घूमनाफिरना, खानापहनना, उठनाबैठना कुछ भी अच्छा नहीं लगता. घर खर्च देने में भी कंजूसी करते हैं. अतिरिक्त खर्च मांगने पर जलील करते हैं. आज भी इसी बात को ले कर बात बिगड़ी, जिस से मैं बेहद परेशान हूं. समझ में नहीं आता कि क्या करूं, क्या न करूं.’’

”भाभी, जो दर्द तुम्हारा है, वही मेरा भी है. 4 साल पहले बड़े साहब (विनीत) ने मुझे चोरी के आरोप में नौकरी से निकाल दिया था, तब से मैं बेरोजगार हूं. दरदर भटक रहा हूं. 2 लाख रुपए का कर्ज चढ़ गया है. वह तो आप और भैया छोटेमोटे काम के बदले आर्थिक मदद करते रहते हैं, वरना चूल्हा जलाना भी दूभर हो जाए. मैं भी बड़े साहब के कारण परेशान रहता हूं,’’ विशाल बोला.

इस के बाद विशाल कुछ देर मौन रहा, फिर बोला, ”भाभी, हमारे तुम्हारे दर्द का कोई उपाय नहीं है?’’

तभी शालू ने गंभीर हो कर कहा, ”एक उपाय है..?’’

”वह क्या भाभी?’’ विशाल ने पूछा.

”यही कि मेरे ससुर विनीत मिनोचा को मार डालो. चाहे एक्सीडेंट में मारो या फिर सोते समय तकिया से मुंह दबा कर उन की सांसें बंद कर दो.’’

”शालू भाभी, आप यह क्या कह रही हैं?’’ विशाल के माथे पर पसीना आ गया.

”मैं जो कह रही हूं, वह सच कह रही हूं. ससुर की मौत के बाद मैं आजाद पंछी की तरह उड़ान भरूंगी और खुशहाल जिंदगी जीऊंगी. तुम्हें भी नौकरी पर रख लूंगी और सैलरी भी दुगनी दूंगी. तुम दरदर भटकोगे नहीं और आराम से रहोगे.’’

”लेकिन भाभी, जिस  अपार्टमेंट में आप रहती हैं, वह बेहद सेफ जगह है. चौबीस घंटे गार्ड रहते हैं. ऐसे में उन की हत्या करना आसान नहीं है. पकड़े जाने का डर रहेगा. वैसे भी अकेला आदमी उन्हें काबू में नहीं कर सकता, किसी साथी को तलाशना होगा.’’

शालू ने विशाल को टूटते देखा तो बोली, ”तुम घबराओ नहीं, मैं तुम्हारे साथ हूं. दोनों मिल कर मर्डर का प्लान बनाएंगे. कोई कुछ नहीं जान पाएगा. तुम साथी की तलाश करो या फिर किसी सुपारी किलर को हायर करो. 4-6 लाख रुपए जो भी खर्च होगा, वह भी दूंगी.’’

इस के बाद दोनों मिल कर विनीत मिनोचा के मर्डर का प्लान बनाने लगे. दोनों के बीच कौल व वाट्सऐप पर बात होने लगी. इन के बीच चैटिंग भी होने लगी.

शालू अपने पति सुब्रत व मासूम बेटे के साथ गुमटी नंबर 5 शौपिंग के लिए कार से जाती थी. यहीं पर फोन कर वह विशाल गौतम को भी बुला लेती थी. पति सुब्रत बेटे के साथ कार में बैठा रहता और शालू विशाल के साथ सामान खरीदती. विशाल थैले में सामान रखता और कार तक पहुंचाता था.

शौपिंग के दौरान ही शालू ने विशाल को फ्लैट की चाबी दी और डुप्लीकेट चाबी बनवाने को कहा. चाबी बनवाने के लिए उस ने विशाल को 1,200 रुपए भी दिए. विशाल ने तब गुमटी स्थित कंप्यूटरीकृत शौप से डुप्लीकेट चाबी बनवाई और दुकानदार को 1,200 रुपए दिए.

डुप्लीकेट चाबी को विशाल ने अपने पास सुरक्षित रख लिया. गुमटी मार्केट में ही शालू ने ससुर के मर्डर का प्लान ‘ए’ व ‘बी’ बनाया.

प्लान ‘ए’ के तहत शालू ने विशाल को बताया कि उस के ससुर विनीत मिनोचा कार से आतेजाते हैं. रास्ते में उन का एक्सीडेंट कर दो, लेकिन इस प्लान पर विशाल राजी नहीं हुआ.

उस ने कहा कि टक्कर मारने से उस की जान भी जा सकती है. मौके पर पकड़ा गया तो लोग उसे पीट भी सकते हैं.

प्लान ‘ए’ पर सहमति न बनने पर शालू ने प्लान ‘बी’ बताया. उस ने कहा कि 5 सितंबर, 2026 को पति सुब्रत के साथ उसे कपल किटी पार्टी में जाना है. उस के जाने के बाद वह डुप्लीकेट चाबी से फ्लैट का दरवाजा खोल कर अंदर दाखिल हो जाए और उस के कमरे में छिप कर बैठ जाए. ससुर विनीत मिनोचा जब अपने कमरे में सो जाएं, तब तकिया से मुंह दबा कर उन की सांसें बंद कर देना.

पार्टी से जब वह देर रात लौटेगी तब शोर मचा देगी कि ससुर की हार्ट अटैक से मौत हो गई है. इस से किसी को शक भी नहीं होगा. पुलिस एंट्री का तो सवाल ही नहीं उठेगा.

इस के बावजूद यदि वह पकड़ा जाए तो उस का नाम न ले कर वह पति सुब्रत का नाम बताए कि हत्या की साजिश उन्हीं ने रची थी.

विशाल को शालू का ‘बी’ प्लान पसंद आ गया और वह विनीत मिनोचा का मर्डर करने को राजी हो गया. इस के बाद शालू और विशाल के बीच हत्या की सुपारी की डील 6 लाख रुपए में तय हुई. शालू ने विशाल से वादा किया कि वह 2 लाख रुपए ससुर की हत्या के दूसरे दिन तथा 4 लाख रुपए 15 दिन बाद देगी. विशाल इस पर राजी हो गया.

हत्या की सुपारी लेने के बाद विशाल गौतम अपने दोस्त राजकिशोर से मिला और 30 हजार रुपए का लालच दे कर उसे वारदात में शामिल होने को राजी कर लिया. राजकिशोर अपराधी किस्म का था. विभिन्न थानों से वह कई बार जेल जा चुका था. विशाल मथुरी मोहल्ले में रहता था.

राजकिशोर उस के पड़ोस में ही रहता था. दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी. दोनों चाकूबाज थे और अपनी सुरक्षा के तौर पर सदैव चाकू साथ में रखते थे.

5 सितंबर, 2026 को शालू के पति सुब्रत मिनोचा ने तिलक नगर स्थित कास्मोजिन लाउंज में कपल किटी पार्टी बुक की थी. इसी दिन मर्डर का प्लान भी बना था. शालू और विशाल सुबह से ही मोबाइल फोन के जरिए संपर्क में थे. सुब्रत भी विशाल के संपर्क में था.

शालू ने रात 8 बजे विशाल को फोन किया और कहा कि उसे रात साढ़े 9 बजे पार्टी में जाना है. अत: वह उस के लिए गजरा ले कर आ जाए. गेट पर तैनात गार्ड को वह अपना नाम विशाल के बजाय शिवम बताए.

रात 9 बजे विशाल गौतम गजरा ले कर अपने दोस्त राजकिशोर के साथ इंदिरा नगर (कल्याणपुर) स्थित रतन आर्बिट अपार्टमेंट पहुंचा. गार्ड ने उसे गेट पर ही रोक लिया और नाम तथा आने का मकसद पूछा.

इस पर विशाल ने कहा कि उस का नाम शिवम है और फ्लैट नंबर सी-104 में रहने वाली शालू मेमसाहब को गजरा देने आया है.

इस पर गार्ड ने शालू से बात की तो उस ने कहा शिवम गजरा ले कर आया है, उसे आने दो, उस की गेट पर एंट्री मत करना. इस के बाद गार्ड ने उसे जाने की इजाजत दे दी.

विशाल तब अपने दोस्त राजकिशोर के साथ गेट के अंदर चला गया. राजकिशोर तो लौबी में टहलता रहा, लेकिन विशाल गजरा देने शालू के पास पहुंच गया. वहां उन दोनों के बीच लगभग 5 मिनट तक गुपचुप बातें होती रहीं. उस के बाद विशाल भी नीचे आ गया और राजकिशोर से बतियाने लगा.

रात करीब साढ़े 9 बजे शालू अपने पति सुब्रत व मासूम बेटे के साथ किटी पार्टी के लिए फ्लैट से निकल गई. उस के जाने के बाद करीब पौने 10 बजे विशाल अपने दोस्त राजकिशोर के साथ शालू के फ्लैट पर पहुंचा. उस ने डुप्लीकेट चाबी से फ्लैट का दरवाजा खोला और दोस्त राजकिशोर के साथ फ्लैट के अंदर दाखिल हो गया. दोनों शालू के कमरे में जा कर छिप गए और लाइट बंद कर दी.

विशाल और राजकिशोर ने दवा कारोबारी विनीत मिनोचा के आने का लगभग सवा घंटे तक इंतजार किया.

रात लगभग 11 बजे विनीत मिनोचा फ्लैट में दाखिल हुए. उन्होंने अपने कमरे में जा कर कपड़े बदले. फिर वह किचन में गए, खाना खाया फिर फ्रिज से निकाल कर मिठाई खाई और वापस अपने कमरे में आते समय उन की नजर बहू शालू के कमरे पर पड़ी. वहां अंधेरा था. वह कमरे में गए और लाइट जला दी.

लाइट जलते ही उन की निगाह विशाल और उस के दोस्त पर पड़ी. उन्होंने आंखें तरेर कर विशाल से पूछा, ”तू यहां क्या कर रहा है? तेरे साथ यह दूसरा कौन है?’’

इतना सुनते ही विशाल और राजकिशोर विनीत मिनोचा पर टूट पड़े. दोनों ने उन्हें दबोच लिया और घसीट कर उन के कमरे में ले आए. इसी समय विशाल ने चाकू निकाल लिया और पीठ में वार कर दिया. विनीत मिनोचा विशाल का इरादा समझ गए, अत: वह जान बचा कर कमरे में इधर उधर भागने लगे, लेकिन असफल रहे.

हमलावरों ने उन्हें फिर से दबोच लिया और चाकू से ताबड़तोड़ प्रहार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया.

विनीत मिनोचा की हत्या के बाद विशाल और राजकिशोर ने बाथरूम में जा कर खून से सने हाथपांव धोए, उस के बाद रात करीब साढ़े 11 बजे फ्लैट से बाहर आ गए. वहां से  निकलते समय दोनों सीसीटीवी कैमरे की जद में आ गए. जीने से उतर कर दोनों मेन गेट से बाहर नहीं गए, क्योंकि उन के कपड़ों पर खून के दाग नजर आ रहे थे.

गार्ड के द्वारा पकड़े जाने के डर से वे पार्क की दीवार फांद कर बाहर आ गए. इसी समय विशाल ने शालू को मैसेज किया, ‘हम घर से निकल रहे हैं.’

शालू समझ गई कि ससुर का काम तमाम हो गया है. उस समय शालू नशे के सुरूर में कपल पार्टी में पति सुब्रत के साथ थिरक रही थी. उस ने सुब्रत को आभास नहीं होने दिया कि उस के बाप का कत्ल हो गया है और लाश फ्लैट में पड़ी है.

रात 3 बजे पार्टी समाप्त हुई, तब वह पति के साथ वापस घर आई. फ्लैट का दरवाजा खुला था. शालू अपने बच्चे के साथ गेस्टरूम में पड़े सोफे पर बैठ गई. इसी बीच शालू ने पति से पानी मांगा.

पानी लेने किचन में गए सुब्रत ने अपने पापा विनीत के कमरे के बाहर खून देखा तो वह चीख पड़ा. चीख सुन कर शालू आ गई. कमरे में गए तो पापा विनीत की फर्श पर लहूलुहान लाश पड़ी थी. उन के गले, सीने, सिर और चेहरे से खून बह रहा था.

सुब्रत ने पापा की हत्या की सूचना सब से पहले पड़ोसी पंकज तिवारी, परिजनों फिर थाना कल्याणपुर पुलिस को दी. शालू ने भी ससुर की हत्या की सूचना अपने  पापा नरेश अरोड़ा को दे दी.

सूचना पाते ही कल्याणपुर थाने के एसएचओ केशव कुमार तिवारी पुलिस बल के साथ इंदिरा नगर स्थित रतन आर्बिट अपार्टमेंट पहुंच गए. चूंकि हत्या का यह मामला करोड़पति दवा कारोबारी का था, अत: इंसपेक्टर केशव कुमार तिवारी ने मर्डर की सूचना पुलिस के आला अधिकारियों को दी.

कुछ ही देर बाद पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल, जौइंट सीपी विपिन ताडा, डीसीपी (पश्चिम) एस.एम. कासिम आबिदी तथा एसीपी दिलीप सिंह घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया.

पुलिस अधिकारियों ने बड़ी बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण किया. मृतक विनीत मिनोचा की लाश उन के कमरे में फर्श पर पड़ी थी. उन की हत्या बड़ी बेरहमी से की गई थी. उन्हें चाकू से गोदा गया था. शरीर पर 20 से ज्यादा घाव थे. गले, सीने, सिर व चेहरे से खून रिस रहा था. बेड पर बिछी चादर व फर्श खून से लाल था.

मृतक की उम्र 63 वर्ष के आसपास थी. घर का सारा सामान सुव्यवस्थित था. लूटपाट नहीं की गई थी. हत्यारों का मकसद केवल हत्या करना था. उन्होंने हत्या की और फरार हो गए. फोरैंसिक टीम ने भी जांच की और साक्ष्य जुटाए. उस के बाद मौके की काररवाई पूरी कर शव पोस्टमार्टम के लिए हैलट अस्पताल भिजवा दिया.

इधर सूर्य की पौ फटते ही दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या की खबर कानपुर शहर में जंगल की आग की तरह फैल गई. बिरहाना रोड स्थित दवा की दुकानों के शटर गिर गए. दवा व्यापारी व कर्मचारी मृतक के घर की ओर दौड़ पड़े. कुछ समय बाद वहां भीड़ जुट गई.

अपार्टमेंट के लोग भी उमड़ पड़े. वह इस बात से सकते में थे कि इतनी हाईफाई सिक्योरिटी के बावजूद दवा कारोबारी की हत्या कैसे हो गई?

चूंकि हत्या का मामला हाई प्रोफाइल था, इसलिए पुलिस अधिकारियों ने बड़ी सावधानी से जांच शुरू की. डीसीपी (पश्चिम) एस.एम. कासिम आबिदी ने सब से पहले मृतक के बेटे सुब्रत से पूछताछ की.

उस ने बताया कि वह पत्नी शालू के साथ कपल पार्टी में रात पौने 10 बजे गया था. रात 3 बजे के बाद वापस आया तो फ्लैट का दरवाजा खुला था. पापा की उन के कमरे में लाश पड़ी थी. उन की हत्या किस ने और क्यों की, वह नहीं बता सकता.

मृतक के छोटे भाई पुनीत ने बताया कि वह नवाबगंज में रहते हैं. उन्हें भाई की हत्या के संबंध में कोई जानकारी नहीं है.

मृतक की पत्नी पुनीता ने बताया कि वह एक महीने से गाजियाबाद में थी. वह जब घर से गई थी, तब सब कुछ सामान्य था. पति की हत्या किस ने और क्यों की, उन्हें पता नहीं है.

शालू के पिता नरेश अरोड़ा ने बताया कि उन की बेटी शालू ने फोन पर समधी की हत्या की जानकारी दी थी. उस के बाद वह लखनऊ से कानपुर आए. समधी की हत्या किन परिस्थितियों में हुई, वह नहीं बता सकते.

परिजनों से पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने मृतक विनीत मिनोचा के फ्लैट के अंदर बाहर लगे खुफिया कैमरों को खंगाला तो 2 युवक फ्लैट के अंदर जाते, फिर बाहर निकलते नजर आए. उन की पहचान के लिए पुलिस अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज मृतक के बेटे सुब्रत को दिखाए, लेकिन सुब्रत ने उन दोनों को पहचानने से इंकार कर दिया.

पुलिस अधिकारियों के जोर देने पर सुब्रत ने बताया कि फुटेज में दिखने वाला एक युवक विशाल गौतम है, जो मथुरी मोहाल में रहता है. विशाल उस के पापा की दवा फर्म में काम करता था, लेकिन 4 साल पहले पापा ने चोरी के आरोप में उसे नौकरी से निकाल दिया था. हालांकि वह घर पर आताजाता था. घर के छोटेमोटे काम भी करता था. दूसरे युवक को वह नहीं जानता.

विशाल गौतम व उस के साथी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधिकारियों ने एसीपी दिलीप सिंह की अगुवाई में एक पुलिस टीम बनाई, जिस में कल्याणपुर इंसपेक्टर केशव कुमार तिवारी सहित तेजतर्रार पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया.

पुलिस की इस टीम ने सब से पहले विशाल के मथुरी मोहाल स्थित घर पर छापा मारा. विशाल घर से फरार था. घर पर उस की मम्मी सुशीला तथा भाई आकाश था. पुलिस ने उन दोनों से सख्ती से पूछताछ की तो सुशीला ने बताया कि विशाल बीती रात 8 बजे घर से निकला था, तब से वह घर वापस नहीं आया. पुलिस टीम तब हताश हो कर लौट आई.

रात 8 बजे पुलिस टीम को इलेक्ट्रौनिक साक्ष्य व सर्विलांस के जरिए विशाल के मोबाइल फोन की लोकेशन पहले पनकी मंदिर फिर जवाहरपुरम की मिली.

इसी लोकेशन के आधार पर पुलिस टीम जवाहरपुरम पहुंची और घेराबंदी की. इस के बाद मुठभेड़ में विशाल व उस के साथी को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस टीम ने विशाल की निशानदेही पर खून से सने कपड़े व आलाकत्ल चाकू भी बरामद कर लिया. विशाल ने हत्या में शामिल अपने साथी का नाम राजकिशोर बताया.

मुठभेड़ के दौरान पुलिस की गोली से दोनों आरोपी जख्मी हो गए थे. उन्हें उपचार के लिए पहले हैलट अस्पताल ले जाया गया, फिर प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें पूछताछ के लिए थाना कल्याणपुर लाया गया.

रात करीब 10 बजे पुलिस कमिश्नर  रघुवीर लाल व डीसीपी (पश्चिम) एस.एम. कासिम आबिदी ने विशाल गौतम व उस के साथी राजकिशोर से पूछताछ की.

पूछताछ में विशाल गौतम ने जो खुलासा किया उस से पुलिस अधिकारी भौचक्के रह गए. उन्होंने दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—

विशाल गौतम मथुरी मोहाल का निवासी है. 4 साल पहले दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की फर्म में वह काम करता था. लेकिन उन्होंने साल 2022 में चोरी का इलजाम लगा कर उसे नौकरी से निकाल दिया था. कुछ दिन तक उस ने दूसरी जगह पर काम किया, लेकिन 4 साल से बेरोजगार था. कभीकभार उन के बेटे सुब्रत छोटेमोटे काम के लिए उसे बुला लेते थे. आर्थिक तंगी से जूझते हुए विशाल पर 2 लाख रुपए का कर्ज हो गया था.

विशाल ने पुलिस को बताया कि एक दिन वह काम के सिलसिले में सुब्रत भैया के घर गया. तब शालू भाभी घर पर थी. उन्होंने उस से कहा कि वह अपने ससुर विनीत मिनोचा की हरकतों से परेशान है. बहुत रोकटोक करते हैं. निगरानी के लिए घर में सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए हैं. शालू भाभी ने उसे पैसों का लालच दे कर उन की हत्या करने को कहा. पैसों के लालच में उस ने अपने दोस्त राजकिशोर के साथ मिल कर चाकू से गोद कर उन की हत्या कर दी.

पुलिस अधिकारी मृतक कारोबारी की बहू शालू के खिलाफ कुछ और सबूत जुटाना चाहते थे, अत: उन्होंने शालू और विशाल के मोबाइल नंबरों की कौल डिटेल्स निकलवाई, जिस में चौंकाने वाली जानकारी हासिल हुई. पता चला कि शालू और विशाल के बीच पिछले 3 माह में 309 बार बात की गई. इस में वाट्सऐप कौल भी थी.

इस के साथ ही दोनों के मोबाइल पर वाट्सऐप चैट मिली, जिन की संख्या 49 थी. यह सभी चैट डिलीट कर दी गई थीं. पुलिस ने किसी तरह एक चैट रिकवर की. यह चैट मैसेज शालू ने विशाल को भेजा था. मैसेज में उस ने लिखा था, ‘तुम यार हो तो स्मार्ट. तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं. अभी तक तुम ने शादी क्यों नहीं की?’

पुलिस ने अनुमान लगाया कि इसी तरह के मैसेज भेज कर शालू ने विशाल को हत्या के लिए राजी किया होगा. घटना वाले दिन भी शालू और विशाल के बीच 12 बार मोबाइल पर बात हुई थी.

पुलिस ने शालू के पति सुब्रत के मोबाइल फोन की कौल डिटेल्स निकलवाई, जिस से पता चला कि सुब्रत भी विशाल से मोबाइल फोन पर बात करता था. वह उसे वाट्सऐप कौल भी करता था.

22 अगस्त, 2026 से 5 सितंबर, 2026 तक दोनों के बीच 25 बार बात हुई. डिटेल्स में उस ने भी 3 मैसेज डिलीट किए थे. पुलिस के शक के घेरे में अब सुब्रत भी आ गया था.

विशाल के कबूलनामा तथा मैसेज देखने के बाद महिला पुलिस अधिकारी ने 7 सितंबर, 2026 की सुबह शालू को हिरासत में ले लिया और उसे पूछताछ के लिए थाना कल्याणपुर लाया गया. फेमिली वालों के सामने इंसपेक्टर केशव कुमार तिवारी ने शालू से कहा, ”विशाल गौतम ने बताया है कि उस ने तुम्हारे कहने पर ही तुम्हारे ससुर की हत्या की है.’’

”नहीं सर, विशाल झूठ बोल रहा है.’’ शालू ने जवाब दिया.

”विशाल ने बताया कि डुप्लीकेट चाबी बनवाने के लिए तुम्हीं ने उसे ओरिजनल चाबी दी थी.’’ इंसपेक्टर ने कहा.

”मैं ने उसे कोई चाबी नहीं दी.’’

”तुम झूठ बोल रही हो. विशाल व राजकिशोर ने बताया कि 6 लाख रुपए में तुम ने ससुर की हत्या की सुपारी दी थी.’’

”सुपारी दी थी तो रुपए भी दिए होंगे. क्या वे रुपए बरामद हुए?’’

”तो तुम यह कहना चाहती हो कि तुम ने ससुर विनीत की हत्या की सुपारी नहीं दी?’’

”बिल्कुल नहीं सर, वे दोनों झूठ बोल रहे हैं.’’

”तुम यह बताओ कि विशाल को शिवम बता कर सोसाइटी में एंट्री कराने के लिए तुम ने सिक्योरिटी गार्ड को फोन किया था?’’

”नहीं सर, मैं ने गार्ड को कोई फोन नहीं किया.’’

”तुम अभी भी झूठ बोल रही हो. तुम्हारे फोन की कौल डिटेल्स हमारे पास है और गार्ड मदन सिंह राणा ने भी हमें सब कुछ बता दिया है.’’

शालू चुप रही, उस ने कोई जवाब नहीं दिया.

”हमें यह भी पुख्ता जानकारी मिल चुकी है कि गुमटी मार्केट में 3 बार तुम विशाल से मिली. इस बात को तुम नकार नहीं सकती, क्योंकि इस के सीसीटीवी फुटेज हमारे पास हैं.’’ इंसपेक्टर केशव कुमार ने कहा तो शालू ने कोई जवाब नहीं दिया.

उन की नजर शालू की बौडी लैंग्वेज पर थी. कुछ सेकेंड की शांति के बाद वह बोले, ”विशाल से तुम्हारी लगातार बात होती थी. तुम्हारे दोनों के फोन नंबरों की डिटेल्स हमारे पास है.’’

चूंकि पुलिस के पास शालू के खिलाफ अहम सबूत थे, इसलिए उस ने पुलिस के सामने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उस के बाद पुलिस ने शालू को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ कि जिस समय करोड़पति दवा व्यापारी विनीत मिनोचा के शरीर को कातिल चाकू से गोद रहे थे, उस समय उन की बहू शालू किटी पार्टी में पति सुब्रत के साथ मस्ती में ठुमके लगा रही थी.

पुलिस जांच करने के लिए तिलक नगर स्थित कास्मोजिन लाउंज पहुंची तो वहां पुलिस को स्टाफ ने 2 वीडियो मुहैया कराए. एक वीडियो 39 सेकेंड का, जबकि दूसरा वीडियो 17 सेकेंड का था.

पहले वीडियो में शालू पति सुब्रत के साथ ‘तुम तो धोखेबाज हो, वादा कर के भूल जाते हो…’ गीत पर नशे के सुरूर में ठुमके लगाती दिखी. जबकि दूसरे वीडियो में वह अपनी महिला मित्रों के गले में हाथ डाल कर ‘जुम्मे के दिन किया चुम्मे का वादा…’ गीत पर मस्ती में झूम रही थी.

पुलिस ने पार्टी के बारे में लाउंज संचालक लवी मिश्रा व जनरल मैनेजर सौरभ त्रिपाठी से पूछताछ की. सौरभ ने बताया कि 5 सितंबर, 2026 की रात दवा व्यापारी सुब्रत ने पार्टी बुक की थी. पार्टी का बिल 80 हजार का बना था, जिसे रतनपुर निवासी उन के साथी दवा व्यापारी ने अदा किया था. पार्टी में करीब 35 गेस्ट आए थे.

सौरभ ने बताया कि पार्टी रात करीब साढ़े 11 बजे से शुरू होनी थी, लेकिन सुब्रत और उस की पत्नी शालू एक घंटा पहले साढ़े 10 बजे ही आ गए थे. करीब सवा 11 बजे सुब्रत के गेस्ट आने लगे थे. पार्टी शुरू होने के बाद शालू और सुब्रत अपने मेहमानों के साथ गेम खेलने लगे.

इस दौरान उन्हें ड्रिंक्स सर्व की गई. सुुब्रत और शालू ने भी खूब शराब पी. इस के बाद सभी डीजे फ्लोर पर पहुंचे और डांस शुरू हुआ. शालू भी पति के साथ पुराने गानों पर थिरकती रही. रात करीब 3 बजे पार्टी समाप्त हुई. उस के बाद सभी चले गए.

अब तक पुलिस ने हत्या का खुलासा कर दिया था और आलाकत्ल सहित कातिलों को भी गिरफ्तार कर लिया था. साथ ही साजिशकर्ता बहू भी गिरफ्त में थी. अत: एसएचओ केशव कुमार तिवारी ने मृतक विनीत के बेटे सुब्रत की तहरीर पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत विशाल गौतम, राजकिशोर व शालिनी उर्फ शालू के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया और उन्हें विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस जांच एवं आरोपियों के बयानों से एक ऐसी कलयुगी बहू की कहानी सामने आई, जिस ने अपनी खुशहाल जिंदगी के लिए रिश्तों का खून कर दिया.

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के कल्याणपुर थाना अंतर्गत एक पौश इलाका है— इंदिरा नगर. इसी इंदिरा नगर में स्थित है रतन आर्बिट अपार्टमेंट. इस बड़े अपार्टमेन्ट में 1056 फ्लैट और 27 बंगले हैं. यहां लगभग 5 हजार लोग रहते हैं. एक एंट्री व एक एग्जिट गेट है. पूरे परिसर में 45 सुुरक्षाकर्मी है. परिसर के अंदर स्कूल, डौक्टर का क्लीनिक तथा 30 दुकानें हैं. परिसर के अंदरबाहर जाने वालों की गार्ड रजिस्टर में एंट्री दर्ज करते हैं.

इसी रतन आर्बिट अपार्टमेंट के सी-104 फ्लैट में विनीत मिनोचा परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी पुनीता के अलावा एक बेटा सुब्रत तथा एक बेटी सुरभि थी. विनीत स्वयं तो दवा व्यापारी थे, जबकि उन की पत्नी पुनीता गाजियाबाद में मैरिज काउंसलर थीं. विनीत अपनी इंजीनियर बेटी सुरभि की शादी कर चुके थे. वह अपने इंजीनियर पति के साथ गुरुग्राम में सुखपूर्वक रह रही थी.

विनीत मिनोचा कानपुर शहर के बड़े दवा कारोबारी थे. उन की बिरहाना रोड पर थोक दवा मार्केट में ‘फार्मा ट्रेडर्स’ के नाम फर्म थी. फर्म में 20-22 कर्मचारी काम करते थे. वह दवा के थोक विक्रेता थे. कानपुर शहर के अलावा तमाम शहरों के मैडिकल स्टोर संचालक उन के यहां दवा खरीदने आते थे. उन का सालाना टर्न ओवर 50-60 करोड़ के ऊपर का था.

विनीत मिनोचा का एकलौता बेटा सुब्रत जब पढ़लिख कर जवान हुआ तो उन्होंने उसे भी अपने व्यापार में लगा लिया. इस के बाद उन्होंने सुब्रत का विवाह लखनऊ के ठाकुरगंज निवासी बेकरी व्यापारी नरेश अरोड़ा की छोटी बेटी शालिनी उर्फ शालू से कर दिया. शादी 23 नवंबर, 2020 को नैनीताल में हुई थी.

शादी के बाद शालू ससुराल आई तो बेहद खुश थी, क्योंकि वह करोड़पति व्यापारी की बहू थी. संपन्न घर था. घर में नौकरचाकर थे. पढ़ालिखा और स्मार्ट कारोबारी पति था. उस ने घर की जिम्मेदारियां भी संभाल ली थीं.

शालू की सास पुनीता मैरिज काउंसलर थीं. वह अधिकतर घर के बाहर रहती थीं. अत: घर की कमान शालू के हाथ में ही थी. शादी के एक साल बाद शालू ने एक बेटे को जन्म दिया. बेटे के जन्म के बाद परिवार की खुशियां और भी बढ़ गईं.

लगभग 2 साल तक शालू ससुराल में खुश रही. उस के बाद उस की खुशियों को ग्रहण लगना शुरू हो गया. कारण उस के ससुर विनीत मिनोचा उस की खुशियों में बाधक बनने लगे थे. शालू को पति के साथ घूमना, किटी पार्टी में जाना, आधुनिक फैशन के कपड़े पहनना, सजधज कर रहना पसंद था, जबकि ससुर इन्हीं सब को ले कर टोकाटाकी करने लगे थे.

वह कहते कि यह मत पहनो, किटी पार्टी मत जाया करो. खर्च पर कंट्रोल करो. कभीकभी तो इतना जलील कर देते कि शालू आंसू बहाने लगती. पति से कुछ कहती तो वह चुप्पी साध जाता, क्योंकि वह खुद अपने ही पिता की फर्म में नौकर था और उसे 40 हजार रुपए सैलरी के तौर पर मिलते थे.

शालू को भी घर खर्च के लिए 15 हजार रुपए मिलते थे. उस का भी पाईपाई का हिसाब देना पड़ता था. अतिरिक्त खर्च के लिए उसे ससुर के सामने हाथ फैलाने पड़ते थे. इन सब के कारण शालू परेशान रहने लगी थी. वह समझ नहीं पा रही थी कि इस समस्या से वह कैसे निजात पाए.

विनीत मिनोचा की फर्म में विशाल गौतम नाम का एक कर्मचारी था. वह मथुरी मोहाल में रहता था. उस का शालू के फ्लैट पर भी आनाजाना था. सुब्रत को वह भैया और शालू को भाभी कहता था. सुब्रत और शालू का वह चहेता था, लेकिन वर्ष 2022 में विनीत मिनोचा ने उसे चोरी के आरोप में नौकरी से निकाल दिया था.

नौकरी से निकाले जाने के बावजूद विशाल का शालू के घर आनाजाना लगा रहता था. सुब्रत और शालू उस से घरेलू काम करा लेते थे और उस की आर्थिक मदद कर देते थे. वे दोनों मोबाइल के जरिए भी विशाल के संपर्क में रहते थे.

शालू परेशान तो रहती ही थी, लेकिन उस की परेशानी तब और बढ़ गई, जब विनीत मिनोचा ने फ्लैट के अंदरबाहर सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए. शालू को लगा कि उन्होंने कैमरे उस की निगरानी के लिए ही लगवाए हैं, अत: वह ससुर से नफरत करने लगी.

इस के बाद उस ने ससुर विनीत मिनोचा की हत्या का प्लान तैयार किया और 6 लाख की सुपारी अपने पूर्व नौकर विशाल गौतम को दी. विशाल गौतम ने शालू की योजना के तहत अपने साथी राजकिशोर को साथ मिला कर शालू के ससुर विनीत मिनोचा की 5 सितंबर, 2026 की रात उन के ही फ्लैट में हत्या कर दी और फरार हो गए, लेकिन पुलिस की जांच में वे बच नहीं पाए और पकड़े गए. साजिश रचने वाली शालू ने भी शुरुआत में रोनेधोने का खूब नाटक किया, लेकिन उस की साजिश का भी परदफाश हो गया और वह पकड़ी गई.

घटना के 5 दिन बाद शालू का भाई धीरज अरोड़ा व बड़ी बहन सोनिया शालू की ससुराल कानपुर आए, लेकिन परिजनों ने उन्हें बहनोई सुब्रत से मिलने नहीं दिया. उस के बाद उन्होंने प्रैसवार्ता की और मीडिया को बताया कि उन की बहन शालू पर हत्या की साजिश रचने का आरोप गलत है.

धीरज ने कहा कि जो लड़की चींटी तक नहीं मार सकती, वह हत्या की साजिश कैसे रच सकती है. विशाल ने शालू का नाम किसी के कहने पर लिया था या फिर धन के लालच में लिया. यह पुलिस जांच का विषय है. उन्हें इस बात का भी आश्चर्य है कि सुब्रत अभी तक शालू से मिलने क्यों नहीं गया.

बड़ी बहन सोनिया ने बताया कि उन की छोटी बहन शालू घर को अच्छी तरह संभालती थी. उस के ससुर विनीत मिनोचा शुगर रोगी थे. शालू ही उन के खानपान का ध्यान रखती थी. उस ने घर खर्च या ससुर की टोकाटोकी की शिकायत कभी हम लोगों से नहीं की. सुब्रत ने ही शालू को विशाल का मोबाइल नंबर दिया था. बहनोई की जानकारी में ही शालू विशाल से बात करती थी और घरेलू काम करने को बुलाती थी. सोनिया ने शालू पर लगे हत्या के आरोपों को सिरे से नकार दिया.

8 सितंबर, 2026 को पुलिस ने आरोपी विशाल गौतम, राजकिशोर तथा शालिनी उर्फ शालू को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन को जिला जेल भेज दिया गया.

पुलिस को बेटे पर शक, लेकिन ठोस सबूत नहीं

करोड़पति दवा व्यापारी विनीत मिनोचा की हत्या के मामले में पुलिस को उन के बेटे सुब्रत पर भी शक है, लेकिन ठोस सबूत न होने से पुलिस असहज है. पुलिस की जांच में कुछ अहम जानकारियां सामने आईं, जिस से उस पर शक गहराया.

सुब्रत के घर 2 नौकर व एक मेड काम करती थी, फिर सुब्रत और शालू हत्यारोपी विशाल गौतम को हर काम के लिए घर क्यों बुलाते थे? वह भी तब जब विनीत मिनोचा उसे पसंद नहीं करते थे. उन्होंने उसे चोरी के आरोप में नौकरी से निकाल दिया था. आखिर सुब्रत का विशाल से ऐसा क्या याराना था, जो सुब्रत हर काम के लिए विशाल को ही बुलाता था?

हत्या के पहले शालू 3 बार गुमटी मार्केट गई. तब शालू के साथ सुब्रत भी गया. हर बार सुब्रत और विशाल मिले. गुमटी मार्केट में ही शालू और विशाल ने हत्या का प्लान बनाया. फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी भी यहीं बनवाई गई. ऐसा कैसे संभव है कि हत्या जैसी साजिश रची जाए और सुब्रत को भनक न लगे.

विनीत मिनोचा की हत्या के बाद पुलिस ने सुब्रत को सीसीटीवी फुटेज दिखाए और फुटेज में दिख रहे हत्यारों को पहचानने के लिए कहा, लेकिन उस ने उन्हें पहचानने से इंकार कर दिया. पुलिस के जोर देने पर ही विशाल का नाम बताया. आखिर सुब्रत ने विशाल को पहचानने से इंकार क्यों किया? क्या दोनों के बीच कोई राज था?

सुब्रत अपनी पत्नी शालू से ज्यादा विशाल के संपर्क में रहता था. सर्विलांस सेल की जांच के अनुसार सुब्रत ने विशाल से 300 से अधिक बार मोबाइल फोन से बात की तथा वाट्सऐप कौल की. घटना वाले दिन शालू जहां सुबह से रात तक विशाल के संपर्क में रही, वहीं सुब्रत भी 29 अगस्त से 5 सितंबर तक विशाल के संपर्क में रहा. इन 6 दिनों में सुब्रत ने विशाल को 25 बार कौल व वाट्सऐप कौल की.

शालू ने जहां 49 मैसेज डिलीट किए, वहीं सुब्रत ने भी 3 मैसेज डिलीट किए. तो क्या डिलीट मैसेज हत्या के राजदार थे? क्या सुब्रत को हत्या की पूरी जानकारी थी?

इन्हीं सब कारणों से सुब्रत शक के दायरे में है. पुलिस ने उसे क्लीन चिट नहीं दी है. ठोस सबूत हाथ लगा तो पुलिस उस के खिलाफ भी काररवाई करेगी.

Delhi Murder Case : बौयफ्रेंड की सनक मारी गई मौडल मुसकान

Delhi Murder Case. रेस्तरां वाली मुलाकात के बाद मुसकान ने अपने प्रेमी आकिब से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया था. इतना ही नहीं, उस ने आकिब का फोन नंबर ब्लौक कर दिया था. अब वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रही थी, लेकिन आकिब को उस का यह कदम इतना बुरा लगा कि…

मुसकान औटो से उतरी, औटो वाले को पर्स से निकाल कर किराया दिया और फिर अनमने भाव से सामने नजर आ रहे रेस्तरां की तरफ बढ़ गई. यह रेस्तरां उत्तम नगर में स्थित था.

21 बसंत देख चुकी मुसकान बेहद शोख और चंचल थी. उसे कुदरत ने जैसे फुरसत में गढ़ा था. एकएक अंग सांचे में ढला प्रतीत होता था. गोल चेहरा, तीखी नाक, पतले संतरे की फांक जैसे होंठ, नशीली आंखें और गठा हुआ शरीर, जो जवानी के उफान पर था.

मुसकान खूबसूरत थी, इसलिए जवानी की दहलीज पर आते ही उस का झुकाव मौडलिंग की ओर हो गया था. वह छोटेमोटे ऐड करती थी. उस को खुद पर यकीन था कि एक दिन वह रुपहले परदे पर भी नजर आएगी, जहां शोहरत और दौलत दोनों ही कलाकार की झोली में होते हैं.

वह डीयू की छात्रा थी. स्नातक की पढ़ाई कर रही थी. 18 से 21 वर्ष की उम्र बहुत नाजुक होती है, यहां आ कर मन में हसरतें उमडऩे लगती हैं, दिल सीने से फिसलने को बेताब रहता है. इसी उम्र में आ कर युवा वर्ग को प्यार का रोग लग जाता है.

मुसकान का भी यही हाल था. उस के भी कदम बहक गए थे. उसे भी किसी से प्यार हो गया था, लेकिन जितनी तेजी से उस पर प्यार का रंग चढ़ा था, उतनी ही तेजी से वह रंग फीका भी पडऩे लगा था. इस फीके पड़ते प्यार का रंग रेस्तरां में नजर आने वाला था, जिस की ओर मुसकान के कदम धीरेधीरे बढ़ रहे थे. उस के दिल में अजीब सी हलचल थी. चेहरे के भाव मन में उठ रहे तरहतरह के खयालों के कारण रहरह कर बदल रहे थे. उस के पैर रेस्तरां तक आतेआते बहुत भारी हो गए थे.

रेस्तरां में आ कर उस ने इधरउधर नजरें दौड़ाईं. उसे एक टेबल पर वह युवक नजर आ गया, जिस के लिए वह यहां आई थी.

यह 24 साल का हैंडसम युवक था. इस की गठी हुई देह इस बात की ओर इशारा कर रही थी कि यह जिम जाने का शौकीन है.

मुसकान उस की टेबल की तरफ बढ़ गई. टेबल के पास आ कर उस ने हायहैलो नहीं की, सीधा सा सवाल कर दिया, ”तुम ने मुझे यहां क्यों बुलाया है आकिब?’’

”लडऩे के मूड में आई हो क्या मुसकान?’’ आकिब गंभीर स्वर में बोला  ”बैठ जाओ, हम बैठ कर बातें कर लेते हैं.’’

मुसकान अनमने भाव से बैठ गई. आकिब की ओर देख कर उस ने रूखे स्वर में पूछा  ”बताओ, मुझे यहां क्यों बुलाया है तुम ने आकिब?’’

”तुम मुझ से नाराज हो मुसकान. मुझे तुम से यही जानना है मुसकान कि इस के पीछे क्या कारण है. तुम तो मुझ से बहुत प्यार करती रही हो और करती हो.’’ आकिब अभी भी गंभीर था.

”प्यार करती थी आकिब, उम्र ही ऐसी थी कि मैं प्यार जैसे फिजूल के लफड़े में पड़ गई, मुझे अपने करिअर की तरफ ध्यान देना चाहिए था.’’ मुसकान बहुत गंभीर हो गई थी.

”तुम ग्रैजुएशन कर रही हो. बस लड़कियों के लिए इतना पढऩा ही मैं बहुत समझता हूं मुसकान.’’ आकिब बहुत सुलझे हुए अंदाज में बोल रहा था, ”मैं तुम से शादी के बाद कोई नौकरी थोड़ी करवाऊंगा, मैं तुम्हारी जरूरतों का खुद खयाल रखने के लिए काम करूंगा. इतना कमाऊंगा कि हर खुशी तुम्हारी झोली में डाल सकूं.’’

”यह तुम्हारे खयालात हैं आकिब.’’ मुसकान धीरे से बोली, ”तुम से पहले भी कह चुकी हूं और अब फिर कह रही हूं कि मैं तुम से शादी नहीं करना चाहती.’’

”लेकिन क्यों मुसकान? आखिर मेरे प्यार में तुम्हें कहां कमी नजर आ रही है कि तुम मेरे साथ शादी करने में ऐतराज कर रही हो?’’ आकिब की आवाज में तड़प थी.

”आकिब, इसे लड़कपन का प्यार समझ कर भूल जाने का प्रयास करो. मुझे अब अपना करिअर बनाने दो. मैं शादी नहीं करना चाहती.’’ मुसकान ने दृढ़ स्वर में कहा और कुरसी से खड़ी हो गई.

”मुसकान हमारी मोहब्बत डेढ़ साल पुरानी है. मैं ने टूट कर तुम्हें प्यार किया है, तुम्हारी हर जरूरतों को पूरा किया है. तुम मुझ से इस तरह किनारा करोगी तो मैं जीते जी मर जाऊंगा.’’ आकिब अब जैसे रो ही पडऩे वाला हो, वह भर्राए स्वर में गिड़गिड़ाया, ”मुझे तड़पने के लिए रास्ते में मत छोड़ो मुसकान, तरस खाओ मुझ पर.’’

”कोई किसी के लिए नहीं मरता आकिब. जो मरते भी हैं तो वह कायर होते हैं. हम दोनों डेढ़ साल एकदूसरे को प्यार करते रहे. क्या हम एकदूसरे को सच्चा दोस्त मान कर अब अपना करिअर नहीं बना सकते? तुम कुछ बनोगे तो मुझे खुशी होगी. प्यार में उलझने से जिंदगी नहीं संवरा करती. समझो और आगे बढ़ो, मुझे भी अपनी जिंदगी में आगे बढऩे दो. अब मैं चलती हूं. घर पर मम्मी मेरे लिए परेशान हो रही होंगी.’’ मुसकान कह कर तेजी से रेस्तरां के दरवाजे की तरफ बढ़ गई.

आकिब उस के पीछे दौड़ा. कौन सुन रहा है, कौन देख रहा है, इस की परवाह उसे नहीं थी. वह पागलों की तरह मुसकान के पीछे आ कर गिड़गिड़ाता रहा, ”मुझे बीच मझधार में मत छोड़ो मुसकान, मैं मर जाऊंगा. तुम मेरी जिंदगी हो, तुम मेरी मोहब्बत हो.’’

मुसकान सुन कर अनसुना करती हुई सड़क पर आ गई. उस ने आते हुए एक औटो को हाथ दिया और उस में बैठते हुए बोली, ”तिलक नगर चलो.’’

औटो उसे ले कर आगे बढ़ गया. आकिब भीगी आंखों से अपनी मोहब्बत को जाता हुआ देखता रहा. उस के दिल में दर्द था, तड़प थी. यही दर्द और तड़प आशिक को एक दिन गलत कदम उठाने को उकसा देते हैं. मुसकान के इस आधेअधूरे प्यार का भी ऐसा ही हश्र हुआ.

रेस्तरां वाली मुलाकात के बाद मुसकान ने आकिब की ओर से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया था.

आकिब का फोन नंबर उस ने ब्लौक कर दिया. उस से चैटिंग बंद कर दी. सोशल मीडिया पर भी वह अब कोई पोस्ट नहीं डालती थी. वह अब अपनी पढ़ाई की ओर ध्यान लगा रही थी.

इधर आकिब मुसकान की मोहब्बत भुला नहीं पा रहा था. वह उसे नएनए नंबरों से फोन करने की कोशिश करता था. भूल से मुसकान यदि अनजानी कौल उठा लेती थी तो आकिब की आवाज सुनते ही कौल काट देती थी. इस से आकिब और तड़प जाता था.

मुसकान की राहों में वह पागलों की तरह खड़ा रहता, वह नजर आ जाती तो उस का पीछा करता. अकेली होती तो अपने प्यार की भीख मांगता. मुसकान नजरअंदाज करती हुई आगे बढ़ जाती. आकिब से बचने के लिए वह सहेलियों का साथ पकडऩे लगी थी.

26 अगस्त, 2026 की शाम को मुसकान घर पर अकेली थी. वह अपने मोबाइल में फेसबुक देखने में मग्न थी. उस की मम्मी छोटे भाई आकाश के साथ बाजार गई हुई थी.

अचानक मुसकान के इंस्टाग्राम पर आकिब ने लाइव आ कर मुसकान को जान से मारने की धमकी दी. मुसकान ने इसे गंभीरता से नहीं लिया.

वह जानती थी आकिब ऐसी पागलों वाली हरकतें करता रहता है. कुछ दिन पहले जब मुसकान का सोशल मीडिया ऐप खुला हुआ था. आकिब ने धमकी दी थी कि ‘यदि तुम शादी के लिए हां नहीं करोगी तो मैं अपनी जान दे दूंगा.’ उस ने कहा किया नहीं था. मुसकान ने उस दिन से मोबाइल पर सोशल मीडिया ऐप भी लौक कर दिया था.

इंस्टाग्राम की धमकी को मुसकान ने आकिब का पागलपन समझा, लेकिन इस धमकी देने के डेढ़ घंटे बाद आकिब उस के घर में आ गया.

”तुम यहां तक आ गए आकिब!’’ मुसकान पलंग से उठते हुए गुस्से से बोली.

”हां. मैं आज फैसला करने आया हूं मुसकान.’’ आकिब कठोर स्वर में बोला,  ”मुझे बताओ तुम मुझ से शादी करोगी या नहीं?’’

”नहीं, कभी नहीं!’’ मुसकान का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया, ”तुम यह सवाल मुझ से कितनी बार करोगे?’’

”यह आखिरी बार है मुसकान.’’ आकिब ने कहने के बाद जेब में रखा खुला चाकू निकाला और मुसकान के सोचनेसमझने से पहले ही उस पर ताबड़तोड़ चाकू के वार करने लगा.

मुसकान उस का विरोध करने लगी, लेकिन पेट में हुए 2-3 वार में ही वह निढाल पड़ गई. गुस्से में पागल आकिब उस पर वार पर वार करता रहा. मुसकान खून में नहा गई, उस की चीखें गले में ही फंस गईं, आंखें भय और पीड़ा से सिकुड़ गईं. वह धराशाई हो कर फर्श पर गिर पड़ी.

आकिब तब घबरा कर भाग निकला.

करीब पौने 7 बजे मुसकान के यहां काम करने वाली सहायिका घर में आई तो वह मुसकान की मां को पुकारती हुई मुसकान के कमरे तक आ गई. कमरे में नजर पड़ते ही वह चीखती हुई घर से बाहर भागी,  ”खून… दीदी का खून हो गया… खून हो गया…’’ उस की चीखपुकार सुन कर आसपड़ोस के लोग भाग कर दरवाजे पर आ गए.

2-4 पड़ोसी अंदर घुसे. अंदर खून से नहाई हुई मुसकान को देख कर उन लोगों ने तुरंत आपस में बात की.

पड़ोसी विजय इस परिवार के बहुत करीब था. उस ने खून में लथपथ मुसकान को उठाया और बाहर ले आया. एक औटो द्वारा वह और 2-3 अन्य लोग मुसकान को ले कर जनकपुरी के अमर लीला अस्पताल पहुंच गए.

स्ट्रेचर पर डाल कर मुसकान को वे लोग अंदर एमरजेंसी में ले आए. डौक्टरों ने तुरंत मुसकान को चैक किया. उन्होंने मुसकान को मृत घोषित कर दिया.

घर में काम करने वाली सहायिका ने मुसकान को चाकू मारने की सूचना मुंबई में उस की बड़ी बहन को फोन द्वारा दे दी. उस ने यह खबर चंडीगढ़ में अपनी छोटी बहन को दे दी.

किसी ने तिलक नगर पुलिस को मुसकान के साथ हुई वारदात की जानकारी दे दी थी. वहां से तुरंत तिलक नगर थाने की पुलिस मौका ए वारदात पर पहुंच गई.

पुलिस को मालूम हुआ कि मुसकान को पासपड़ोस के लोग जनकपुरी के अमर लीला अस्पताल ले गए हैं तो पुलिस की वैन अमर लीला अस्पताल पहुंच गई. डौक्टर मुसकान को मृत घोषित कर चुके थे, इसलिए पुलिस ने मुसकान के शव को अपने कब्जे में ले लिया और जांच शुरू कर दी.

यहां जौइंट पुलिस कमिश्नर सुमन गोयल भी सूचना मिलने पर पहुंच गई थीं. उन्होंने पुलिस के आला अफसरों से बात की और दिशानिर्देश दिए.

पुलिस वारदात की जांच करने के लिए घटनास्थल पर आ गई थी. यहां पर फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया गया, जिन्होंने बड़ी बारीकी से यहां से साक्ष्य एकत्र करने शुरू कर दिए.

पुलिस ने पासपड़ोस से वारदात से जुड़ी जानकारी जुटानी शुरू की, तब तक मुसकान की मम्मी और भाई आकाश घर लौट आए थे. घर में बेटी के साथ घटी घटना की बात सुन कर मुसकान की मम्मी दहाड़े मार कर रो पड़ी. छोटा भाई आकाश भी रोने लगा.

पड़ोसी विजय ने बताया कि वह घर में टीवी देख रहा था. किसी महिला की चीखपुकार सुन कर बाहर आया तो मालूम हुआ मुसकान को किसी ने चाकू मार दिया है. अंदर जा कर देखा तो मुसकान खून में लथपथ पड़ी थी.

कुछ लोगों की मदद से वह मुसकान को तुरंत डौक्टरी सहायता दिलवाने के वास्ते जनकपुरी के अमर लीला अस्पताल ले कर भागा. वहां डौक्टरों ने मुसकान को मृत घोषित कर दिया.

उस ने यह भी बताया कि मुसकान के पिता पवन शर्मा का 2007 में निधन हो गया था. उन की पत्नी कमलेश शर्मा ने बड़ी मेहनत से अपने बच्चों की परवरिश की. इन के 4 बच्चे हुए. 2 बेटियां ब्याह दी गई थीं. इन में से सब से बड़ी मुंबई में है. एक चंडीगढ़ में ब्याही गई है.

मुसकान और इकलौता बेटा आकाश मम्मी के साथ ही रह रहा था. मुसकान डीयू से स्नातक (ग्रैजुएशन) कर रही थी. उस का कत्ल हो गया है. आकाश पढ़ रहा है. कमलेश शर्मा नर्स का काम करती हैं.

”क्या उन को किसी पर संदेह है, उन्होंने घर में किसी को आतेजाते देखा है?’’ इस पर विजय ने इंकार में सिर हिला दिया. किसी दूसरे पड़ोसी के पास भी इस बात का कोई जवाब नहीं था.

सामान्य होने पर मुसकान की मम्मी ने हत्यारे के विषय में पुलिस को बताया कि आकिब उर्फ इमरान नाम का युवक मुसकान को तंग करता था. वह उन की बेटी मुसकान का पीछा करता था और उस पर शादी करने का दबाव भी बना रहा था. उन्हें आकिब पर ही शक है कि उन की बेटी की हत्या उसी ने की है. उस ने पहले भी अपराध कर रखे हैं, वह बदमाश है.

आकाश का भी कहना था कि उस की बहन की हत्या आकिब उर्फ इमरान ने ही की है. उसे आकिब पर ही शक है.

पुलिस के सामने हत्यारे का नाम निकल कर सामने आ रहा था, लेकिन सिर्फ इसी आधार पर वह आकिब पर हाथ नहीं डाल सकते थे. उस के खिलाफ ठोस आधार होना आवश्यक था.

जौइंट पुलिस कमिश्नर सुमन गोयल ने हत्यारे की पहचान करने और उसे पकडऩे के लिए पुलिस थाना तिलक नगर के अलावा स्पैशल स्टाफ और एएटीएस की एक संयुक्त पुलिस टीम बना दी. इस टीम का दायित्व श्री राजेश कुमार (एसीपी- औपरेशंस), इंसपेक्टर राजेश कुमार मयूर (स्पैशल स्टाफ, वेस्ट डिस्ट्रिक्ट) और इंसपेक्टर मुकेश मीना (इंचार्ज एएटीएस वेस्ट) संभाल रहे थे.

इस पुलिस टीम में एसआई गजेंद्र, हैडकांस्टेबल नंद किशोर (एएटीएस वेस्ट) और स्पैशल स्टाफ से हैडकांस्टेबल जितेंद्र, दिनेश, देवेंद्र कुमार, दिनेश, कांस्टेबल दिनेश, एसआई नरेश अहलावत, एसआई संजीत राणा, इंसपेक्टर राजेश कुमार मौर्या को शामिल किया गया.

इस संयुक्त पुलिस टीम ने घटनास्थल से अपनी जांच शुरू की. यहां लगे सीसीटीवी कैमरे चैक किए गए. मुसकान के घर के सामने लगे एक सीसीटीवी में सफेद शर्ट में एक युवक पौने 6 बजे मुसकान के घर में प्रवेश करता और सवा 6 बजे घर से निकल कर भागता नजर आया.

सीसीटीवी कैमरे से वह फुटेज निकाल कर देखने पर युवक का चेहरा साफसाफ नजर आने लगा. इसे आकाश और उस की मां ने पहचान कर बताया कि यही आकिब उर्फ इमरान है.

अब शक की कोई गुंजाइश नहीं रह गई थी. मुसकान का कातिल पुलिस टीम के सामने था.

आकाश द्वारा उन्हें बताया गया कि आकिब उर्फ इमरान डब्ल्यूजेड-2ए/1 चौखंडी, तिलक नगर में रहता है.

मुसकान मर्डर केस को अपराध संख्या 328/2026 को अंडर सेक्शन 103 (1) बीएनएस तिलक नगर थाने में दर्ज कर लिया गया. इस में हत्यारे का नाम आकिब उर्फ इमरान लिखा गया.

पुलिस टीम आकिब के घर चौखंडी पहुंची. वहां उस का पिता जावेद अख्तर मिला. इमरान घर से गायब था. पुलिस उस के पिता जावेद अख्तर को उठा कर थाने ले आई. थाने में उस के रिश्तेदारों के पतेठिकाने और आकिब के खास दोस्तों के विषय में पूछताछ की गई. सब कुछ नोट कर के पुलिस टीमें इन जगहों पर छापेमारी करने लगीं.

डीसीपी हरेश्वर वी. स्वामी ने संयुक्त टीम को 4 भागों में बांट दिया था. इस टीम को आसपास के थाने भी सपोर्ट कर रहे थे.

आकिब के 4 राज्यों में जा कर छिपने की आशंका थी. वह यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड और दिल्ली में हो सकता था. पुलिस टीमें हर संभावित जगहों पर उसे तलाश कर रही थीं.

कौल डिटेल्स और सीसीटीवी फुटेज की मदद से उस पर तकनीकी निगरानी रखी जा रही थी. टेक्निकल सर्विलांस की मदद भी ली जा रही थी, लेकिन उस का कहीं सुराग नहीं मिल रहा था.

इधर 27 अगस्त, 2026 को मुसकान का शव परिजनों को सौंप कर पुलिस ने कड़ी सुरक्षा के बीच तिलक नगर के श्मशान घाट पर मुसकान का अंतिम संस्कार करवा दिया. इस बीच दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल (जहां मुसकान का पोस्टमार्टम करवाया गया) से ले कर श्मशान घाट तक पुलिस ने कड़ी सुरक्षा कर दी थी.

मुसकान तिलक नगर में ओल्ड महावीर में रहती थी. चूंकि उस की हत्या में आकिब उर्फ इमरान का नाम सामने आ रहा था, इसलिए हिंदू संगठन इस पर कड़ा विरोध दर्ज करवा रहे थे. उन की मांग थी कि जिहादी आकिब उर्फ इमरान को गिरफ्तार कर के कोर्ट में पेश किया जाए और ऐसे सिरफिरे व्यक्ति को फांसी की सजा दिलवाई जाए. पुलिस पर पूरा दबाव बनता जा रहा था. इलाके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर दी गई थी.

पुलिस टीमें इमरान को जल्द से जल्द पकडऩे के लिए हाथपैर मार रही थीं, लेकिन इमरान न जाने कहां जा कर छिप गया था.

आखिर पुलिस को उस की मौजूदगी की सूचना मिल ही गई. थाना राजौरी गार्डन में चेकिंग के दौरान 27 अगस्त, 2026 की रात लगभग 11 बजे हैडकांस्टेबल जितेंद्र (स्पैशल स्टाफ) को मालूम हुआ कि इमरान रघुबीर नगर के नाला रोड पर मौजूद है.

इस सूचना के मिलते ही पुलिस की 2 टीमें बना कर आकिब उर्फ इमरान को नाला रोड पर दोनों ओर से घेरने की योजना बना ली गई.

इस वक्त रात के 11 बजे का समय था. नाला रोड सुनसान और अंधेरे में डूबा हुआ था. चांद की मद्धिम रोशनी में रास्ता हलका और अस्पष्ट नजर आ रहा था.

पुलिस की 2 टीमें बना कर पुलिस वाले सावधानी से आगे की तरफ बढ़े. आकिब को शायद इस की भनक लग गई. उस के पास भागने का कोई रास्ता नहीं बचा था. वह अपने बचाव का रास्ता तलाशने में लगा था.

पुलिस ने उसे ललकारा,  ”आकिब, भागने की कोशिश मत करना. तुम्हें दोनों ओर से पुलिस ने घेर लिया है, सरेंडर कर दो.’’

आकिब की ओर से इसी बीच फायरिंग शुरू हो गई. पुलिस ने अपना बचाव करते हुए जवाबी फायर किए. आकिब की तरफ से पुलिस पर 4 फायर किए गए और पुलिस ने 7 राउंड गोलियां चलाईं.

हैडकांस्टेबल नंद किशोर और हैडकांस्टेबल जितेंद्र की ओर से किए गए फायर में से आकिब के पैरों में 3 गोलियां लगीं. वह नीचे गिर पड़ा. तब पुलिस ने उसे काबू में कर लिया. उस के दोनों पैरों में गोलियां लगी थीं. पुलिस ने उसे अस्पताल पहुंचाया.

पुलिस दल के लिए यह बड़ी कामयाबी थी. मुसकान पर किए गए खूनी हमले के बाद 24 घंटे में आकिब को गिरफ्तार कर लिया गया था.

वह राजौरी गार्डन इलाके में मुठभेड़ में काबू किया गया था. उस के खिलाफ राजौरी गार्डन थाने में अंडर सेक्शन 221/132/109(1) बीएनएस और आम्र्स एक्ट 25/27 दर्ज की गई.

पुलिस पूछताछ में यह भी जानकारी सामने आई कि उस के खिलाफ 2018 में तिलक नगर थाने में एफआईआर नंबर 385/2018 अंडर सेक्शन 323/341/354/354डी/509/34 आईपीसी और सेक्शन 8 पोक्सो एक्ट के तहत एक केस तथा एफआईआर नंबर 225/2021 अंडर सेक्शन 308 आईपीसी के तहत दूसरा केस पहले भी दर्ज हो चुका है.

आकिब उर्फ इमरान जिम ट्रेनर का काम करता था. वह 12वीं क्लास पढ़ा हुआ था. उस का पिता जावेद अख्तर वशिष्ठ हौस्पिटल चौखंडी में मुंशी का काम करता है. उस के 4 भाई और 2 बहनें हैं.

वह जिस जिम में ट्रेनर का काम करता था, उस का नाम ‘सेवन जोन’ है. इसी जिम में मुसकान सुबह की शिफ्ट में अपनी फिटनैस के वास्ते जाती थी. उस की दोस्ती इसी जिम में इमरान से डेढ़ साल पहले हुई थी. यह दोस्ती धीरेधीरे प्यार में बदल गई थी.

दोनों एकदूसरे से मोहब्बत में बहुत कसमेवादे खाते थे. लेकिन जब आकिब उर्फ इमरान मुसकान पर शादी का दबाव बनाने लगा तो मुसकान ने उस से किनारा करना शुरू कर दिया.

इमरान उसे अपना बनाने की धुन में इतना पागल हो चुका था कि मुसकान के बारबार शादी से इंकार करने और दूरी बनाने से वह चिढ़ गया.

उसे लगने लगा कि मुसकान उस से किनारा कर के किसी दूसरे युवक से प्यार करने लगी है.

परेशान हो कर उस ने अंत में मुसकान की हत्या करने का मन बना लिया और 26 अगस्त, 2026 को जब मुसकान घर में अकेली थी, घर में घुस कर उस की बेरहमी से चाकू से गोद कर हत्या कर दी.

पुलिस उस को इलाज के बाद कोर्ट में पेश कर के जेल भेजने का मन बना चुकी है. उस के खिलाफ पुख्ता सबूत एकत्र किए जा रहे हैं ताकि उसे सख्त से सख्त सजा दिलवाई जा सके. Delhi Murder Case

Haridwar love crime case : ये कैसा प्यार जो प्रेमी ने दी मौत

Haridwar love crime case. भावनाओं की कद्र न करने वाले पति पप्पू निषाद से बांदा निवासी कौशल्या निषाद असंतुष्ट थी, तभी तो वह मोहल्ले के ही रहने वाले ओमप्रकाश निषाद उर्फ रामप्रकाश उर्फ गोविंदा को दिल दे बैठी थी. प्रेमी को उस के साथ मौजमस्ती करना तो पसंद था, लेकिन कौशल्या ने जब उस पर शादी का दबाव डाला तो प्रेमी ने घर से 700 किलोमीटर दूर हरिद्वार ले जा कर ऐसी मौत दी कि…

ओमप्रकाश यह सोचसोच कर परेशान था कि उस के गले आ पड़ी प्रेमिका कौशल्या निषाद से कैसे छुटकारा पाया जाए, क्योंकि वह उस पर शादी करने का लगातार दबाव बना रही थी.

उत्तर प्रदेश के जिला बांदा में एक मोहल्ला है ग्योड़ी बाबा. यहीं के रहने वाले ओमप्रकाश निषाद उर्फ रामप्रकाश उर्फ गोविंदा की तारीफ इलाके के एक अच्छे राजमिस्त्री के रूप में होती थी. दरअसल, वह मजबूत और सुंदर मकान बनाने में महिर था. उस का मोहल्ले में ही रहने वाले पप्पू निषाद की पत्नी कौशल्या निषाद के साथ लव अफेयर चल रहा था.

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एक दिन ओमप्रकाश का बड़ा बहनोई छेदीलाल सुबहसुबह उस के घर आया था. घर में घुसते ही एक युवती से वह टकरा गया. वह अपने अस्तव्यस्त कपड़े सहेजती हुई जल्दबाजी में थी. छेदीलाल उस से कुछ कहता कि इस से पहले ही वह तेज कदमों से बगल के घर की ओर बढ़ गई. वह उसे मटकती हुई चाल में जाते हुए देखता रह गया.

तभी ओमप्रकाश की नजर उस पर पड़ी तो वह बोला, ”अरे!अरे!… जीजाजी, आप अचानक सुबहसुबह आए? क्या बात है?’’

”अभी मैं तुम्हारे लिए एक काम लाया हूं.’’ छेदीलाल बोला. बोलते हुए उस की नजर ओमप्रकाश के हाथ पर चली गई.

वह हाथ में लेडीज अंडरगारमेंट ब्रा लिए था, जिसे उस ने हाथ पीछे कर छिपाने की कोशिश की. सकपकाता हुआ बोला, ”यह पड़ोसन कौशल्या की है. मेरे पीछे अपने कपड़े यहीं सुखाने चली आती है. इसे ही लेने आई थी, यह छूट गया था. आओ न, भीतर चलो. मैं इसे लौटा कर आता हूं.’’ ओमप्रकाश बोला और पड़ोसी के घर की ओर चला गया.

कुछ मिनट में ओमप्रकाश कमरे में बैठे छेदीलाल को पीने के लिए पानी ले कर आया. छेदीलाल कमरे को ऐसे निहार रहा था, मानो जासूसी कर रहा हो. उस की नजर बैड पर बिछे सिलवटों वाले चादर पर पड़ी… तकिया बिस्तर से नीचे की ओर लटका हुआ था, मानो गिरने ही वाला हो.

छेदीलाल ने उसे संभालने के लिए हाथ बढ़ाया ही था कि उस की नजर सफेद खोल वाले तकिए पर चिपकी हुई लाल बिंदी पर टिक गई. इस पर उस ने अधिक ध्यान नहीं दिया, लेकिन मन में संदेह का कीड़ा कुलबुलाने लगा था. अचानक बोल पड़ा, ”पत्नी और बच्चे नजर नहीं आ रहे? पत्नी मायके गई है क्या?’’

”लो न! पानी पी लो!’’ ओमप्रकाश बोला और जीजा के हाथ में पानी का गिलास पकड़ा दिया. इस के बाद वह जल्दीजल्दी बैड की चादर ठीक करने लगा.

”ओमप्रकाश, पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लग रहा है, जैसे कि तुम कुछ छिपा रहे हो. वह तुम्हारी पड़ोसन जिस तरह से घर से निकली थी, वह मुझे कुछ ठीक नहीं लगा. वह मुझ से टकरा भी गई थी…तुम्हारे हाथ में उस के कपड़े थे. कपड़े भी साधारण नहीं थे. कुछ तो बात है.’’ छेदीलाल बोला.

”बात तो कुछ नहीं है, अगर मानो तो बड़ी भी है.’’ ओमप्रकाश बोला. ”तुम जो बोल रहे हो, वह मेरी समझ से बाहर है.’’ छेदीलाल बोला.

”अब जीजाजी तुम से क्या छिपाना. समझो मैं किसी मुसीबत के जाल में फंसने वाला हूं.’’ ओमप्रकाश चिंतित हो कर बोला.

”वह कैसे?’’ ”इसी पड़ोसन के कारण!’’ ”क्या किया उस ने?’’

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”क्या नहीं करती है? समझो, उस के कारण मेरी जमीजमाई गृहस्थी बरबाद हो सकती है.’’ ओमप्रकाश ऐसे बोला, जैसे मन में काफी समय से जमा गुबार बाहर निकालने के लिए छटपटा रहा हो.

”पहेलियां बुझाने से काम नहीं चलेगा… सहीसही बताओ!’’ छेदीलाल उसे कुरेदने लगा था.

”बताता हूं…सब कुछ बताऊंगा. उस बदचलन कौशल्या के बारे में भी बताऊंगा.’’ ओमप्रकाश धाराप्रवाह बोलने लगा, लेकिन बीच में ही छेदीलाल बोला, ”कौशल्या कौन? वही तुम्हारी पड़ोसन!’’

”हांहां, वही पड़ोसन कौशल्या निषाद, एक बदचलन औरत है वो. अपने पति से संतुष्ट नहीं है. मौका पाते ही मेरे बिस्तर में घुस आती है. रात…दिन…जब चाहे चली आती है. न चाहते हुए भी मुझे उस के साथ…’’ ओमप्रकाश बोलतेबोलते रुक गया.

”अब समझा! तुम्हारे घर से निकलते वक्त वह अपने ब्लाउज के हुक क्यों बंद कर रही थी..!’’ छेदीलाल संदेह दूर करता हुआ बोला.

”मेरी मदद करो, मैं उस से छुटकारा पाना चाहता हूं.’’ ओमप्रकाश की आवाज में गिड़गिड़ाहट थी.

”अच्छा, तो यह बात है. मैं तुम्हारे मन की पीड़ा समझ गया हूं. कुछ न कुछ तो तरीका निकालना होगा.’’ छेदीलाल बोला.

”जो भी करो, मगर जल्द…पत्नी और बच्चे के मायके से लौटने से पहले, वरना बहुत देर हो जाएगी.’’ ओमप्रकाश बोला.

”ठीक है, कुछ खाने के लिए लाओ…और हां, चाय भी बना लेना, मैं तब तक सोचता हूं कि कौशल्या से तुम्हारा पिंड कैसे छुड़ाया जाए?’’

कुछ देर में दोनों सालेबहनोई नाश्ता कर रहे थे और चाय की चुस्कियों के साथ  कौशल्या के कारण पैदा हुई प्रौब्लम को दूर करने के लिए विचारविमर्श कर रहे थे. इस प्रौब्लम से छुटकारा पाने के लिए छेदीलाल ने उसे एक प्लान बताया. उस पर रामप्रसाद ने हामी भर दी. बोला, ”यही ठीक रहेगा. इस तरह कौशल्या से छुटकारा मिलेगा.’’

”तो फिर उसे हरिद्वार घुमाने ले जाने के लिए तैयार करो.’’ छेदीलाल बोला.

”वो तो मैं आज ही उसे राजी कर लूंगा. आगे का काम तुम्हें ही संभालना होगा.’’ ओमप्रकाश बोला.

ओमप्रकाश ने इस योजना के अनुसार 2 दिनों के भीतर ही न केवल कौशल्या निषाद को हरिद्वार घूमने जाने के लिए राजी कर लिया, बल्कि अपने भाई राकेश निषाद को भी योजना में शामिल कर लिया. उन्होंने 4-5 दिनों का कार्यक्रम बनाया था.

कौशल्या निषाद ने हरिद्वार जाने के लिए अपने पति पप्पू निषाद को यह कह कर राजी कर लिया कि उस ने बच्चे के लिए मन्नत मांगी है. पप्पू निषाद को उस के ओमप्रकाश के साथ जाने पर कोई आपत्ति नहीं थी. इस तरह हरिद्वार जाने का कार्यक्रम बन गया.

वह 5 मई, 2026 का दिन था. उस दिन  ओमप्रकाश निषाद, राकेश निषाद व छेदीलाल अपने साथ कौशल्या को हरिद्वार ले जाने के लिए शाम के वक्त घर से चल पड़े. रात की बस द्वारा बांदा से पहले लखनऊ पहुंचे. इस के बाद वे लखनऊ से हरिद्वार जाने वाली ट्रेन में सवार हो गए. वे लोग 7 मई की सुबह हरिद्वार पहुंच गए. वहां वे एक होटल में ठहरे.

पूरे दिन हरिद्वार के तीर्थस्थलों पर घूमते रहे. इस के बाद चारों 8 मई की शाम को पैदल ही चंडी देवी मंदिर के लिए चले थे. वे चंडी देवी के दर्शन कर वापस बांदा लौट आए, किंतु इन के साथ कौशल्या नहीं थी.

गांव में कौशल्या निषाद के नहीं लौटने की चर्चा होने लगी. पहले से ही उस के बारे ग्रामीण तरहतरह की बातें किया करते थे. उस के पति को छोड़ कर किसी गैरमर्द के साथ घूमने जाने की भी चर्चा हो रही थी.

उस के वापस बांदा नहीं लौटने के बारे में ओमप्रकाश ने पप्पू निषाद को बताया कि वह हरिद्वार से ट्रेन से लौटते वक्त न जाने किसी स्टेशन पर उतर गई. साथ में अपना सामान भी ले गई थी. वह अपने मायके के किसी रिश्तेदार के यहां जाने के बारे में बता रही थी. उसे नहीं मालूम कि रात के वक्त वह किस स्टेशन पर उतरी.

पप्पू ने 2 दिनों तक पत्नी के लौटने का इंतजार किया. उसे फोन किया. उस का फोन नहीं लगने पर उस ने बांदा पुलिस में उस के लापता होने की सूचना दर्ज करवा दी.

कई हफ्ते गुजर गए, लेकिन कौशल्या बांदा नहीं आई. मई का पूरा महीना बीत गया. बांदा पुलिस कौशल्या की तलाश नहीं कर पाई. 6 जून, 2026 को सुबहसुबह बांदा पुलिस ग्योड़ीबाबा में ओमप्रकाश के घर पहुंची. वह काम पर जाने वाला था. पुलिस ने उसे रोका और पूछताछ करने लगी. पुलिस ने वोटर आईडी कार्ड की फोटोकौपी दिखाई. वह आईडी कौशल्या की थी. उस पर पता उसी गांव का था. पति का नाम दर्ज था.

बांदा पुलिस उस पते पर जाने के बजाय ओमप्रकाश के पास पहुंची और उस से कौशल्या के बारे पूछा.

पुलिस का कहना था कि 8 मई को चंडी में उस के साथ सीसीटीवी कैमरे में देखी गई यही युवती है. उस के बारे में वह सचसच बताए.

सीसीटीवी में अपनी तसवीर आने के बारे में सुनते ही ओमप्रकाश घबरा गया. उस के सूखे कंठ से आवाज नहीं निकल पा रही थी. पुलिस ने उसे पानी पीने के लिए दिया.

”ओमप्रकाश, तुम जो कुछ इस युवती के बारे में जानते हो, बताओ. हरिद्वार में यह युवती तुम्हारे साथ थी.’’ उत्तराखंड पुलिस के एसआई संतोष सेमवाल ने उस से पूछा.

थाना श्यामपुर (उत्तराखंड) पुलिस सब से पहले थाना कोतवाली बांदा पहुंची थी. फिर बांदा पुलिस को साथ ले कर गांव ग्योड़ी बाबा में स्थित ओमप्रकाश के घर पहुंची थी.

यहां पर पुलिस को ओमप्रकाश से जो जानकारी मिली, उस से पुलिस टीम की बांछें खिल गई थीं. पुलिस ने इस ब्लाइंड कौशल्या निषाद मर्डर केस को सुलझा ही नहीं लिया, बल्कि हत्यारों तक पहुंच भी गई थी.

इस तरह बांदा पुलिस ने लापता कौशल्या निषाद के बारे में अपनी तहकीकात पूरी कर उस के पति पप्पू निषाद के साथ ओमप्रकाश से पूछताछ की. उन्हें बताया कि कौशल्या की मौत हो चुकी है. उस की लाश चंडी की एक पुलिस बूथ पर तैनात पुलिस ने बरामद कर चुकी है.

यह सुनते ही पप्पू निषाद सदमे में आ गया, जबकि ओमप्रकाश बुरी रह से डर गया. वह समझ गया कि कौशल्या की मौत का इलजाम उस के माथे लगने से बच नहीं सकता है.

बांदा और हरिद्वार की पुलिस की संयुक्त तहकीकात से न केवल कौशल्या निषाद और ओमप्रकाश के एक साथ हरिद्वार घूमने जाने के बारे में कई बातों की पुष्टि हो गई थी.

कौशल्या की नग्न लाश चंडी के वन विभाग के कर्मचारी सुरेश और अमन को उस समय मिली थी, जब वह अपनी नियमित गश्त पर थे. उन्हें घनी झाडिय़ों के बीच सड़ीगली अवस्था में लाश मिली थी. उस की पहचान बहुत मुश्किल थी.  इसी स्थान के पास चंडी देवी मंदिर का रोपवे भी था. वनकर्मियों ने इस की सूचना थाना श्यामपुर (हरिद्वार) पुलिस को दी थी.

सूचना पा कर एसएचओ नितेश शर्मा घटनास्थल पर पहुंच गए थे. उन्होंने इस बारे में सीओ शिशुपाल नेगी और एसपी (सिटी) अभय प्रताप, एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर को भी सूचित कर दिया था. नितेश शर्मा एसएसआई मनोज रावत पुलिस फोर्स के साथ घटनास्थल का मुआयना किया था.

शव के निरीक्षण के दौरान घटनास्थल से शर्मा ने 2 कुंडल, टूटा मंगलसूत्र, सफेद रंग का एक गमछा तथा मृतका के गले में कस कर बांधा हुआ ब्लाउज बरामद किया.

शव की प्रारंभिक जांच में उस के दाहिने हाथ पर ‘KAUSHILYA’ और फूलदान का चिह्नï, जबकि बाएं हाथ पर ‘K. R.’गुदा था.

नितेश शर्मा ने इस के बाद वनकर्मियों के बयान दर्ज किए. इस की सूचना पा कर कंट्रोल रूम से एसपी (क्राइम) निशा यादव, सीआईयू इंसपेक्टर नरेंद्र बिष्ट और सीओ शिशुपाल सिंह सहित फोरैंसिक टीम भी मौके पर पहुंच गई.

पुलिस के लिए सब से बड़ी समस्या शव की पहचान की थी. गले में बंधे ब्लाउज से इतना स्पष्ट था कि उस की हत्या गला घोंट कर की गई है. उस की पहचान का एकमात्र जरिया उस का टैटू ही था.

अज्ञात महिला के शव का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. साथ ही शव के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने का काम किया जाने लगा.

एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने एसपी (सिटी) अभय सिंह के नेतृत्व और सीओ शिशुपाल सिंह नेगी की अध्यक्षता में एक पुलिस टीम बनाई.

टीम में एसएचओ नितेश शर्मा, इंसपेक्टर नरेंद्र सिंह (सीआईयू), एसएसआई मनोज रावत, एसआई संतोष सेमवाल, मोहन कठैत, रचना पठानिया, एएसआई रवींद्र गौड़, दरम्यान सिंह, हैडकांस्टेबल प्रेम सिंह, पंकज देवली, कांस्टेबल राहुल देव, विनीत कुमार, अनिल रावत, सुशील चौहान, तेजेंद्र सिंह, ओमवीर सिंह, जितेंद्र घिल्डियाल, अजय चौहान, मनमोहन सिंह, माधुरी त्रिपाठी, वसीम, उमेश, हरवीर सिंह, दीप गौड़ आदि को शामिल किया गया.

इस मामले को सुलझाने के लिए गठित  पुलिस टीम की बैठक मीटिंग बुलाई गई. मीटिंग में एसपी (सिटी), सीओ, एसएचओ, सीआईयू इंसपेक्टर आदि पुलिस अधिकारियों ने अज्ञात महिला की पहचान करने का खाका तैयार किया.

इसी क्रम में बांदा में लापता कौशल्या के बारे में भी नए सिरे से तहकीकात की जाने लगी और उस की तसवीर और हुलिए से इस लाश के हुलिए का मिलान किया गया.

पुलिस टीम ने गुमशुदगी रिकौर्ड, निर्वाचन सूची, सोशल मीडिया और विभिन्न सरकारी पोर्टलों की जांच की.

2019 से अब तक कौशल्या नाम की 164 गुमशुदा महिलाओं का रिकौर्ड और 3,540 महिलाओं का डेटा खंगाला गया. इस के अतिरिक्त लगभग 144 घंटे का डंप डेटा जुटा कर 1,44,605 मोबाइल नंबरों की जांच की गई.

दूसरी तरफ सीसीटीवी फुटेज से इस जांच टीम को सहयोग मिला. उस में 8 मई, 2026 की रात 3 संदिग्ध युवकों के साथ एक महिला के साथ चंडी देवी की तरफ जाती दिखी, लेकिन लौटते वक्त वह उन के साथ नहीं थी.

उक्त महिला की कदकाठी भी बरामद महिला की लाश की कदकाठी से काफी मेल खा रही थी. अत: पुलिस ने उन तीनों पर ही अपना फोकस कर उसी ओर अपनी जांच मोड़ दी. इस के बाद पुलिस की टीमें उन्हीं तीनों व्यक्तियों की छानबीन करने तथा उन की पहचान करने के प्रयास में जुट गईं.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका की मौत का कारण उस का गला घोंटना बताया गया. संदिग्ध मोबाइल नंबरों की लिस्ट में पुलिस को एक ऐसा मोबाइल नंबर मिला, जिस से पुलिस हत्यारों तक पहुंचने में कामयाब हो गई.

पुलिस टीम को मोबाइल फोन धारक का नाम ओमप्रकाश निषाद पुत्र राजा निषाद, निवासी ग्राम ग्योड़ी बाबा कालोनी, जिला बांदा (उत्तर प्रदेश) के नाम पाया गया. इस के बाद पुलिस की टीम बांदा के लिए निकल पड़ी.

इस तरह से हरिद्वार और बांदा की पुलिस के सामने ओमप्रकाश उर्फ रामप्रकाश उर्फ गोविंदा का कारनामा सामने आ गया. उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. इस में शामिल 2 व्यक्तियों के भी नाम बता दिए.

उस ने बताया कि उस के पड़ोस में रहने वाले पप्पू निषाद की पत्नी कौशल्या निषाद के साथ नाजायज संबंध बन गए थे. वह उस पर शादी करने की जिद किए हुए थी. वह कई बार पति को छोड़ कर दूसरे युवकों के साथ घर से भाग चुकी थी. फेमिली वालों के काफी समझाने के बाद भी कौशल्या अपने प्रेमी ओमप्रकाश उर्फ रामप्रकाश उर्फ गोविंदा पर शादी करने का दबाव बनाए हुए थी.

इस कारण अकसर ओमप्रकाश तनाव में रहने लगा था. वह कौशल्या से हर हाल में पिंड छुड़ाना चाहता था. इस बारे में उस ने जीजा छेदीलाल से बात की थी. योजना के तहत कौशल्या निषाद को हरिद्वार के चंडी देवी मंदिर घुमाने के लिए ले जाया गया. वहीं पर उस की जंगल में रात को सुनसान स्थान पर हत्या कर दी गई. लाश को जंगल में फेंक कर सभी वापस लौट आए.

इस काम को अंजाम देने वालों ओमप्रकाश का भाई राकेश निषाद और बहनोई छेदीलाल भी शामिल था.

तीनों कौशल्या के साथ पैदल चलते हुए उस पर झपट पड़े थे. तीनों उसे खींच कर 100 मीटर अंदर जंगल की ओर ले गए. इस के बाद जब कौशल्या चिल्लाई थी, तब राकेश ने उस के हाथ पकड़ लिए. बाद में छेदीलाल और ओमप्रकाश ने उसी के ब्लाउज से उस का गला घोंट दिया.

कौशल्या की हत्या करने के बाद तीनों ने उस के कपड़े उतार दिए, ताकि उस की कोई पहचान न कर सके.

ओमप्रकाश के बयान पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 103 (1), 61 (2) बी  के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया. इस के बाद जल्द ही ओमप्रकाश के भाई राकेश निषाद व छेदीलाल को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

कथा लिखे जाने तक कौशल्या हत्याकांड के तीनों अभियुक्त ओमप्रकाश उर्फ रामप्रकाश उर्फ गोविंदा, राकेश निषाद और छेदीलाल हरिद्वार जेल में बंद थे.Haridwar love crime case

UP Crime News : दहेज का लालच जिंदा जली निक्की

UP Crime News : एक तरफ पूरे देश में दहेज हत्या के झूठे मामलों में परिजनों को फंसाने जैसे अपराधों पर बहस छिड़ी है, वहीं इसी बीच ग्रेटर नोएडा में विपिन भाटी और उस के फेमिली वालों पर 27 वर्षीय पत्नी निक्की को जला कर मारने का आरोप लगा है. क्या वास्तव में निक्की दहेज लोभियों के लालच में जलाई गई या इस के पीछे की सच्चाई कुछ और है? पढ़ें रोंगटे खड़े कर देने वाली यह कहानी.

दिल्ली के पास ग्रेटर नोएडा के दादरी इलाके के रूपवास गांव की रहने वाली निक्की और उस की बड़ी बहन कंचन की शादी 27 दिसंबर, 2016 में ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव में एक ही परिवार के 2 भाइयों से हुई थी. बड़े भाई रोहित से भिखारी सिंह की बड़ी बेटी कंचन और छोटे भाई विपिन से छोटी बेटी निक्की की शादी हुई थी. भिखारी सिंह पायला कभी गांव के बड़े काश्तकार थे, लेकिन ग्रेटर नोएडा के विकास के साथ उन की जमीनें ग्रेटर नोएडा अथौरिटी ने अधिग्रहीत कर लीं.

मुआवजे के रूप में मिली करोड़ों की रकम ने भिखारी सिंह के परिवार की जिंदगी का कायाकल्प कर दिया. परिवार में पत्नी वसुंधरी के अलावा 2 बेटियां और 2 बेटे रोहित व अतुल थे. रोहित की 2016 में शादी भी हो चुकी है, लेकिन पारिवारिक विवाद के कारण अब उस की पत्नी मीनाक्षी अपने मायके में है.

दूसरी तरफ ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव में रहने वाले सत्यवीर सिंह के परिवार में पत्नी दयावती के अलावा 2 बेटे हैं रोहित व विपिन. सत्यवीर सिंह अपने गांव के एक छोटे काश्तकार थे. उन की हैसियत भिखारी सिंह जैसी तो नहीं थी, लेकिन उन की जमीन का भी कुछ मुआवजा मिला था, जिस से उन्होंने गांव में अच्छा सा घर बनवा लिया. साथ ही घर के बाहरी इलाके में कुछ दुकानें बना कर किराए पर दे दीं. इस के अलावा उन्होंने एक किराना की दुकान खुद भी खोल ली. इसी दुकान पर सत्यवीर व उन के दोनों बेटे रोहित और विपिन भी बैठने लगे. उन की आमदनी के बस यही जरिया था.

निक्की (27 वर्ष) व कंचन (29 वर्ष)  की शादी दोनों सगे भाइयों से तब हुई, जब देश में नोटबंदी के बाद ज्यादातर लोगों के पास नकदी की कमी थी. इसीलिए उस वक्त दोनों बहनों की शादी सादगीपूर्ण तरीके से जरूर हुई, लेकिन नोटबंदी के बावजूद भिखारी सिंह ने दिल खोल कर पैसा खर्च किया.

बाद में हालात सामान्य होने पर निक्की के पिता भिखारी सिंह ने शादी में दिए जाने वाले सामान की भरपाई कर दी. निक्की के पति को शादी के बाद एक स्कौर्पियो कार के अलावा आभूषण, नकदी और भोग विलास की हर चीज दी. वक्त धीरेधीरे गुजरता गया. निक्की की बहन कंचन के 2 बच्चे हुए. बेटी लाव्या (7 साल) व बेटा विनीत (4 साल), जबकि निक्की का एक बेटा है जो अब करीब 6 साल का है.

विपिन कोई काम नहीं करता था,  इसलिए निक्की ने कुछ साल पहले अपनी बहन के साथ मिल कर ससुराल के घर की ऊपरी मंजिल पर एक ब्यूटी पार्लर खोला था. पार्लर का काम काफी अच्छा चल रहा था, लेकिन ससुराल वालों के दबाव में कुछ ही महीने पहले उन्हें ब्यूटी पार्लर बंद करना पड़ा.

शादी के 9 साल बाद अचानक 21 अगस्त, 2025 की देर शाम को बड़ी बहन कंचन ने ग्रेटर नोएडा के पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी कि शाम करीब साढ़े 5 बजे उस की सास दयावती और देवर विपिन ने उस की बहन निक्की को ज्वलनशील पदार्थ डाल कर जला दिया है. सास ने अपने हाथ में ज्वलनशील पदार्थ लिया और विपिन को पकड़ाया, जिसे विपिन ने निक्की के ऊपर डाल दिया. साथ ही निक्की के गले पर हमला किया. जिस के बाद उस की बहन बेहोश हो गई. जब मैं ने इस का विरोध किया तो मेरे साथ भी मारपीट की गई. कंचन ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि उस का पति रोहित भाटी और ससुर सत्यवीर मौके पर मौजूद थे.

गंभीर हालत में निक्की को पड़ोसियों की मदद से वह फोर्टिस हौस्पिटल एच्छर, ग्रेटर नोएडा ले गई, जहां हालत बिगडऩे पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया. वहां इलाज के दौरान उस की मौत हो गई. कंचन ने पुलिस को बताया कि जिस समय उस की बहन की हत्या की गई, वह मौके पर थी, लेकिन वह चाह कर भी कुछ नहीं कर सकी.

बहन की मौत से गुस्साई कंचन ने अगली सुबह ससुरालियों पर दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए कासना कोतवाली में तहरीर दे कर पिता सतवीर भाटी, सास दयावती और दोनों बेटों रोहित व विपिन के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) (हत्या), 115(2) (चोट पहुंचाना) और 61(2) के तहत केस दर्ज कर दिया.

ससुराल वालों द्वारा दहेज की मांग के लिए निक्की की जला कर हत्या करने की खबर अगली सुबह पूरे नोएडा व एनसीआर के साथ गुर्जर समाज के बीच जंगल की आग की तरह फैल गई थी. जगहजगह निक्की के हत्यारों की गिरफ्तारी और न्याय की मांग के लिए धरनेप्रर्दशन होने लगे. हाथों में ‘जस्टिस फौर निक्की बहन’ की तख्ती और बैनर ले कर दरजनों  बसों, कारों, ट्रैक्टर ट्रौली, दोपहिया ले कर सैकड़ों ग्रामीणों के साथ परिजन कासना कोतवाली जा पहुंचे. इस दौरान उन के साथ किसान संगठन और समाजवादी छात्र से जुड़े लोग भी रहे.

मृतका की बहन कंचन का साफ कहना था कि उस की बहन को कई दिनों से परेशान किया जा रहा था. साजिश के तहत जला कर उस की हत्या की गई है. उस का पति विपिन उस से पूरी रात मारपीट करता था. वह अपनी बहन को इंसाफ दिलाना चाहती है. जिस तरह से उस की बहन तड़पतड़प कर मरी, उसी तरह से आरोपियों को भी फांसी की सजा मिलनी चाहिए.

कोतवाली प्रभारी धर्मेंद्र शुक्ल व ग्रेटर नोएडा जोन के एडिशनल डीसीपी सुधीर कुमार पर आरोपियों को पकडऩे का दबाव लगातार बढ़ रहा था. फेमिली वालों का सीधा आरोप था कि विपिन भाटी व उस के घर वाले निक्की को दहेज के लिए लगातार परेशान कर रहे थे. पिछले कुछ समय से वे निक्की पर दबाव डाल रहे थे कि जो मर्सिडीज गाड़ी भिखारी सिंह ने अपने लिए खरीदी है, वह उसे गिफ्ट की जाए तथा कामधंधा शुरू करने के लिए 35 लाख रुपए नकद दिए जाएं.

परिजनों का साफ आरोप है कि शादी के बाद से ही विपिन लगातार कुछ न कुछ मांग करता रहता था, लेकिन शादी के 9 साल बाद अब उस की मांगें पूरी करना उन के वश से बाहर हो गया था.

वायरल वीडियो से पेचीदा हुआ मामला

घटना के दौरान घर में मौजूद कंचन ने अपनी छोटी बहन के साथ मारपीट और आग के हवाले करने का वीडियो भी बनाया था. इस दौरान निक्की का बेटा भी मौजूद था. महिला को आग लगाने का वीडियो सोशल मीडिया पर अगले दिन जम कर वायरल हो गया. वीडियो में दिखाई दे रहा है कि विपिन और मृतका की सास निक्की के बाल खींच कर मारपीट करते हैं. साथ ही एक दूसरे वीडियो में आग लगने के दौरान निक्की सीढिय़ों से उतरती हुई दिख रही है.

वीडियो में देखा जा सकता है कि आग में झुलसने के दौरान उस के शरीर के कपड़े भी जल जाते हैं. वह पूरी तरह से झुलसने के बाद बदहवास हालत में जमीन पर बैठी है. वहीं एक अन्य वीडियो में निक्की के बेटे को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उस के पापा ने मम्मा को लाइटर से जलाया.

कंचन के बयान और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद ग्रेटर नोएडा पुलिस पर दबाव इस कदर बढ़ा कि पुलिस की कई टीमें गठित कर दबिशें शुरू की गईं. परिणामस्वरूप निक्की की हत्या में नामजद चारों आरोपियों विपिन भाटी, उस के पिता सत्यवीर भाटी, भाई रोहित भाटी व मां दयावती को अलगअलग इलाकों से गिरफ्तार कर लिया गया.

लेकिन विपिन भाटी को जब पुलिस ज्वलनशील पदार्थ बरामद करने के लिए ले जा रही थी तो उस ने एक दरोगा का रिवौल्वर छीन कर भागने की कोशिश की. विपिन ने पुलिस टीम पर फायर किया तो आत्मरक्षा में पुलिस ने भी जवाबी फायर किया, जिस में पुलिस की गोली विपिन की टांग में लगी. इस के बाद विपिन पर एक अन्य केस भी दर्ज हो गया. लेकिन पुलिस हिरासत में विपिन ने जो बयान मीडिया को दिया, वह इशारा करता है कि दाल में कुछ काला जरूर है. उस ने मीडिया से कहा कि उस ने अपनी पत्नी को नहीं जलाया और मारा, बाकी लड़ाईझगड़ा तो हर फेमिली में होता है. इस से ज्यादा मैं कुछ नहीं कहूंगा.

एक कत्ल 2 कहानी से गहराता रहस्य

निक्की भाटी मर्डर केस की जांच जैसेजैसे आगे बढ़ रही है, नए सबूत, लोगों के बयान और कुछ नए वीडियो सामने आ रहे हैं, वैसेवैसे कहानी एक रहस्यमयी पहेली में बदलती जा रही है. 27 वर्षीय निक्की की मौत के बाद आरोपप्रत्यारोप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. मायके वाले इसे साफसाफ दहेज हत्या करार दे रहे हैं. दूसरी तरफ आरोपी विपिन भाटी तथा उस के कुछ पड़ोसियों का कहना है कि दोनों के बीच तनाव की असली वजह सोशल मीडिया पर निक्की और कंचन की मौजूदगी थी.

इस केस की जांच कर रही कासना पुलिस असमंजस में है. अभी पुलिस भी मिले सबूतों के आधार पर पैसों और गाड़ी की मांग को ही हत्या की वजह मान रही है, लेकिन साथ ही पुलिस नए सिरे से जांच भी कर रही है. दरअसल, जांच टीम के सामने अब 2 परस्पर विरोधी कहानियां हैं.

पहली कहानी यह कि निक्की भाटी को उस के पति और ससुराल वाले लगातार दहेज के लिए प्रताडि़त करते थे. उस से 35 लाख रुपए की मांग की जा रही थी और यही प्रताडऩा उस की मौत का कारण बनी. दूसरी कहानी यह है कि निक्की और उस की बड़ी बहन कंचन इंस्टाग्राम पर रील्स बनाया करती थीं. यह बात उन के पति और ससुराल वालों को बुरी लगती थी. इस वजह से उन के बीच अकसर तनाव होता था, जो खूनी अंजाम तक पहुंच गया.

निक्की भाटी की ससुराल सिरसा गांव में है. उस के ससुराल के आसपास के लोगों का कहना है कि निक्की और कंचन अपने घर से छोटा ब्यूटी पार्लर चलाती थीं. इस के साथ ही दोनों बहनें इंस्टाग्राम पर मेकओवर रील्स बना कर पोस्ट करती थीं. इन रील्स में वे साधारण लुक से ट्रांजिशन कर तैयार और स्टाइलिश अंदाज में नजर आती थीं. ये रील्स उन के पतियों, विपिन और रोहित भाटी को नागवार गुजरती थीं. एक पड़ोसी ने बताया, रील्स बनाने को ले कर उन के बीच अकसर झगड़ा हुआ करता था.

बताया जा रहा है कि इसी साल 11 फरवरी को निक्की व विपिन और कंचन व रोहित के बीच जम कर झगड़ा हुआ था. इस दौरान दोनों बहनों के साथ मारपीट भी हुई थी. इस वजह से दोनों बहनें अपने मायके रूपबास गांव चली गई थीं.

लड़कियों को मायके में देख कर आसपास के लोग आवाज उठाने लगे तो पंचायत बैठाई गई. 18 मार्च, 2025 को सुलह इस शर्त पर हुई कि दोनों बहनें आगे से रील्स नहीं बनाएंगी. वे मान भी गईं, लेकिन चंद दिनों बाद दोनों ने फिर से वीडियो पोस्ट करना शुरू किया और तनाव दोबारा गहराने लगा.

विपिन भाटी के चचेरे भाई देवेंद्र ने बताया कि जिस समय घटना हुई, उस समय विपिन घर पर नहीं था. इधर, निक्की को जिस अस्पताल में भरती कराया गया था, उस अस्पताल की रिपोर्ट भी सामने आ गई है. उस में बताया गया है कि निक्की की मौत सिलेंडर फटने के कारण आग लगने से हुई है. हालांकि जब पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो वहां सिलेंडर फटने के कोई सबूत नहीं मिले. पर ज्वलनशील पदार्थ का डिब्बा और लाइटर मिला है. वहीं, जिस वक्त घर में निक्की को आग लगी, उस वक्त के सीसीटीवी में उस का पति विपिन घर के पास एक दुकान के बाहर खड़ा दिखाई दे रहा है. इन तमाम सबूतों ने निक्की की मौत को बुरी तरह उलझा दिया है.

मौत की जांच में आया नया मोड़

नया मोड़ लेती निक्की भाटी की मौत में निक्की के कमरे से बरामद ज्वलनशील पदार्थ और कई नए वीडियो क्लिप ने पुलिस जांच की दिशा ही बदल दी है. अब नए सिरे इस घटना की जांच की जा रही है. इस मामले की जांच कर रही पुलिस को निक्की के कमरे से ज्वलनशील तरल पदार्थ बरामद हुआ, जिसे फोरैंसिक जांच के लिए भेजा गया. इस के साथ ही 21 अगस्त की घटना से जुड़े कई छोटे वीडियो क्लिप भी सामने आए हैं.

इन की वजह से पूरी जांच की दिशा बदल गई है. एक नया वीडियो सामने आया है, जिस में सास दयावती अपने बेटे विपिन और बहू निक्की को झगड़े के दौरान अलग करती नजर आ रही है. एक दूसरा वीडियो, जिसे निक्की की बहन कंचन ने शूट किया था, उस में एक आवाज सुनाई देती है, ‘ये क्या कर लिया.’ इस बयान और वीडियो के सामने आने के बाद अब नए सिरे से केस जांच की जा रही है. पुलिस जांच के दौरान एक सीसीटीवी फुटेज भी मिला है. इस में विपिन घटना से ठीक पहले अपने घर के बाहर खड़ा नजर आया है. इस के अलावा ग्रेटर नोएडा के जारचा इलाके में पिछले साल अक्तूबर में दर्ज एक पुराने मामले की भी जांच की जा रही है, जिस में विपिन पर प्रीति नामक लड़की के साथ मारपीट करने और उसे धमकी देने का आरोप लगा था.

इस के साथ ही एक निजी अस्पताल के मेमो के अनुसार निक्की घर में गैस सिलेंडर फटने से झुलसी थी. उसे विपिन का चचेरा भाई देवेंद्र अस्पताल ले कर पहुंचा था. वहीं दूसरी ओर बहन कंचन का आरोप है कि यह सुनियोजित दहेज हत्या थी. देवेंद्र का बयान भी मामले को उलझा रहा है. उस का कहना है कि निक्की बारबार पानी मांग रही थी. उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. इसी बीच निक्की और कंचन के पिता भिखारी सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि उन की बेटी को दहेज के लिए जिंदा जला दिया गया.

पुलिस की जांच अब 3 बिंदुओं पर टिक गई है. पहला ज्वलनशील पदार्थ की फोरैंसिक रिपोर्ट, नए वीडियो क्लिप और कंचन के बदलते बयान. यही 3 कडिय़ां यह तय करेंगी कि निक्की की मौत गैस सिलेंडर हादसा थी या एक साजिश के तहत की गई दहेज हत्या. निक्की भाटी की डेथ मिस्ट्री उलझती क्यों जा रही है, इस का जवाब सिर्फ निक्की की मौत के सच से ही नहीं लगेगा, बल्कि निक्की की भाभी यानी भाई की पत्नी के आरोप भी इस मामले को उलझा रहे हैं.

यह मामला अब महज एक केस नहीं, परिवार के भीतर छिपी 2 सच्चाइयों की जंग का रूप ले चुका है. दरअसल, निक्की की भाभी मीनाक्षी ने कहा कि दहेज की आग ने उस की शादी को भी खत्म कर दिया है. मीनाक्षी का कहना है कि साल 2016 में भिखारी सिंह पायला के बेटे रोहित पायला से उस की शादी हुई. पिता ने दहेज में सियाज कार और 20 तोला सोना दिया. लेकिन एक्सीडेंट का बहाना बना कर कार एक हफ्ते में बेच दी गई.

इस के बाद ताने, मारपीट और अपमान का सिलसिला शुरू हुआ और इस की रफ्तार बढ़ती गई. सास और दोनों ननद उस के बाल पकड़ कर घसीटती थीं. पति भी मारपीट करता था. एक बार तो उस ने गोली तक चला दी. मीनाक्षी का आरोप सिर्फ हिंसा तक सीमित नहीं है. वह दोहरी नीति की बात करती है. वह कहती है, ”मुझे फोन रखने तक की इजाजत नहीं थी, लेकिन बेटियों के लिए पार्लर, सोशल मीडिया पर रील्स, इंस्टाग्राम, सब मंजूर था. यदि बहू के लिए नियम थे तो बेटियों के लिए क्यों नहीं? एक जैसी सख्ती क्यों नहीं?’’

मीनाक्षी के मुताबिक उस की शादी के 9 साल हो गए, लेकिन वह मुश्किल से 9 महीने ही ससुराल में रह पाई. दहेज पर पंचायतें बैठीं. एक नहीं, 100 बार पंचायत हुई. हर बार नतीजा यही कि बहू घर छोड़ दे. साल 2018 में दहेज प्रताडऩा का मामला दर्ज हुआ, लेकिन साल 2020 में दबाव और समझौते की राजनीति के बीच केस वापस लेना पड़ा. उसी साल पिता चल बसे. मीनाक्षी कहती है, ”जिस दिन पापा गए, उसी दिन मेरे लिए सब कुछ खत्म हो गया. मुझे बेघर कर दिया गया. मेरी सारी उम्मीदें खत्म हो गईं. तब से मैं अपने मायके में हूं.’’

मीनाक्षी के सारे आरोपों के बीच ससुर भिखारी सिंह पायला जवाब देते हुए कहते हैं, ”मेरे बेटे रोहित ने कभी मीनाक्षी पर हाथ नहीं उठाया. मेरे पास सारे सबूत हैं. हमारे दरवाजे हमेशा मीनाक्षी के लिए खुले हैं. मीनाक्षी कभी भी आ कर यहां रह सकती है.’’ वे अपने परिवार के पक्ष में खड़े दिखते हैं और मीनाक्षी की बातों को साफतौर पर खारिज करते हैं. फिलहाल ग्रेटर नोएडा पुलिस नए सबूतों और बयानों के आधार पर इस केस की जांच नए सिरे से कर रही है. कंचन व निक्की के तीनों बच्चे अपने नाना के पास हैं. परिवार अब कंचन को भी उस की ससुराल में भेजना नहीं चाहता.

विरोधाभासी सबूतों के कारण कासना पुलिस भले ही विपिन भाटी व उस के परिजनों को निक्की भाटी की दहेज के लिए हत्या करने के आरोप में जेल भेज कर उन पर मुकदमा चलाए. लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी हो सकती है कि निक्की की मौत एक सोचीसमझी साजिश है. हो सकता है यह एक हादसा भी हो.

दहेज ने ली संजू की जान, बच्ची संग जल मरी

राजस्थान के जोधपुर में ग्रेटर नोएडा जैसी दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है. यहां दहेज प्रताडऩा से तंग आ कर एक स्कूल टीचर ने अपनी मासूम बच्ची के साथ जान दे दी. पीडि़ता की पहचान 32 वर्षीय संजू बिश्नोई के रूप में हुई है. उस ने अपनी 3 साल की बेटी को गोद में ले कर पेट्रोल डाला और खुद को आग के हवाले कर दिया. बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उस ने अस्पताल में दम तोड़ दिया.

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह घटना 22 अगस्त, 2025 की है. महिला ने जब खुद को और अपनी बेटी को आग लगाई, उस वक्त उस का पति दिलीप बिश्नोई घर पर मौजूद नहीं था. अचानक धुआं उठता देख पड़ोसी घबराए और तुरंत महिला के पापा को फोन किया. जब परिवार घर पहुंचा तो उन्होंने संजू को जलती हालत में पाया. बच्ची ने उन की आंखों के सामने ही दम तोड़ दिया.

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची. मंडोर के एसीपी नागेंद्र कुमार ने बताया कि बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि महिला का जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में इलाज के दौरान शनिवार को निधन हो गया. उस के पिता ने 24 अगस्त को स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई. इस में साफतौर पर आरोप लगाया गया कि उस की बेटी को लगातार दहेज के लिए प्रताडि़त किया जा रहा था. इस से तंग आ कर बेटी ने बच्ची सहित जान दे दी.

पुलिस ने पीडि़ता के पिता की शिकायत के आधार पर उस के पति दिलीप बिश्नोई, सास, ससुर और ननद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है. पीडि़ता के फेमिली वालों ने यह भी आरोप लगाया है कि ससुराल वालों ने मिल कर संजू को आत्महत्या के लिए उकसाया. पुलिस को घटनास्थल से एक नोट भी बरामद हुआ है, जिस में संजू ने अपने ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. एसीपी ने बताया कि मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है और जांच के लिए फोरैंसिक साइंस लैब भेजा गया है. मोबाइल से कई अहम जानकारियां सामने आने की उम्मीद है.

बताया जा रहा है कि संजू बिश्नोई साल 2021 से एक सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में टीचर के पद पर तैनात थी. 10 साल पहले उस की शादी दिलीप बिश्नोई के साथ हुई थी. उसी समय से उस का पति और ससुराल वाले उसे प्रताडि़त कर रहे थे. पिछले कुछ समय से ससुराल वालों के साथ झगड़ा ज्यादा बढ़ गया था. शनिवार को भी उन के बीच विवाद हुआ था. इस की वजह से संजू बहुत नाराज और दुखी थी. उस ने स्कूल से वापस आने के बाद अपनी बच्ची को गोद में लिया और अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा ली. दोनों शवों का महात्मा गांधी अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया.

गाड़ी न मिलने पर शालवी की बलि

बीहार के पश्चिमी चंपारण में बगहा जिले के चौतरवा थाना क्षेत्र के अहिरवलिया गांव में 24 अगस्त की रात दहेज के लिए एक विवाहिता शालवी देवी की हत्या का मामला प्रकाश में आया है. मृतका लगुनाहा-चौतरवा पंचायत की मुखिया शैल देवी की 23 वर्षीय बहू शालवी देवी थी.  घटना के संबंध में बताया जाता है कि मुखिया शैल देवी के बेटे अमित शाही की शादी जनवरी, 2023 में शालवी के साथ धूमधाम से हुई थी. शादी के बाद शालवी अपनी ससुराल अहिरवलिया आई, जहां कुछ दिनों तक उसे ठीक से रखा गया.

इधर, मृतका के चाचा व बेतिया के सिकटा थाने के जगीरहा निवासी तथा बलथर पंचायत के मुखिया सुनील सिंह ने आरोप लगाया कि 27 जनवरी, 2023 को उन की भतीजी शालवी की शादी अहिरवालिया निवासी स्व. घनश्याम शाही एवं वर्तमान मुखिया शैल देवी के बेटे अमित शाही से हुई थी. शादी के बाद से ही चार पहिया वाहन की मांग को ले कर शालवी को बारबार प्रताडि़त किया जा रहा था. बीच में कई बार मेरे द्वारा अहिरवलिया आ कर मामले में दोनों परिवार के बीच कई बार पंचायत भी हुई. शालवी द्वारा बारबार फोन पर कहा जाता था कि आप लोग गाड़ी दे दीजिए. नहीं तो ये लोग मुझे मार डालेंगे.

2 महीने पहले अहिरवलिया आ कर अमित शाही से उन्होंने खुद कहा था कि मुझे 6 महीने का समय दीजिए, आप को मैं स्वयं गाड़ी दूंगा. अभी 2 माह भी नहीं हुए कि ससुराल वालों ने मेरी भतीजी को बड़ी बेरहमी से प्रताडि़त कर मार डाला. आरोप लगाया कि मेरी भतीजी के हत्यारों ने आंखें फोडऩे के बाद उस का हाथ भी तोड़ दिया था. संभावना है कि उस की हत्या तकिया से मुंह दबा कर की गई थी. कारण कि ससुराल का कोई भी व्यक्ति घर पर नहीं है. लोगों ने पुलिस को फोन किया. तब पुलिस ने पहुंच कर शव को अपने कब्जे में लिया है.

शादी के अभी मात्र 17 महीने हुए हैं. उसे 7 माह की एक बच्ची भी है. अस्पताल में डौ. अशोक कुमार तिवारी के नेतृत्व में 3 सदस्यीय टीम डौ. अरुण कुमार, डौ. तारिक नदीम ने मृतका का पोस्टमार्टम किया. मामले में एसएचओ राहुल कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का पता लग पाएगा. UP Crime News

 

 

Best Crime Story : स्मार्टवाच में छिपा हत्या का राज

Best Crime Story : हत्यारा अपने गुनाह के सबूत को मिटाने की चाहे जितनी भी कोशिशें कर ले, उस से कोई न कोई सुराग छूट ही जाता है. ब्रिटिश युवती कैरोलिन क्राउच की हत्या का राज खोलने में बायोमैट्रिक घड़ी पुलिस के लिए ऐसी मददगार साबित हुई कि…

ग्रीस में 20 वर्षीया युवती कैरोलिन क्राउच की हत्या हुई थी. उस के 33 वर्षीय पति बाबिस एनाग्नोस्टोपोलोस, जोकि हेलीकौप्टर पायलट था, ने 11 मई को पुलिस को फोन द्वारा सूचना दी थी कि उस की पत्नी की हत्या अज्ञात लुटेरों ने ग्लयका नेरा स्थित उस के ही घर के बैडरूम में कर दी है. सूचना पा कर ग्रीक पुलिस मौके पर पहुंच गई. पुलिस ने देखा कि घर में बाबिस की पत्नी कैरोलिन की लाश के अलावा एक कुत्ता भी मरा पड़ा था. घर का सामान भी बिखरा पड़ा था. पुलिस को मामला लूट का ही लग रहा था. बाबिस ने पुलिस को बताया कि उन्हें लुटेरों ने बांध दिया था. वे 3 थे. उन्होंने घर से पैसे लूटने के बाद उस की पत्नी का गला घोंट डाला था. उस ने लुटेरों से अपने परिवार को नुकसान नहीं पहुंचाने की गुहार भी लगाई थी.

पुलिस ने घटनास्थल से सारे सबूत इकट्ठे कर जांच शुरू कर दी. इतना ही नहीं, पुलिस ने इस हाईप्रोफाइल अपराध की जानकारी देने वाले को 2,57,000 पाउंड स्टर्लिंग (करीब 2 करोड़ 65 लाख रुपए) ईनाम देने की भी घोषणा कर दी. इस ईनाम की घोषणा एथेंस की पुलिस औफिसर्स एसोसिएशन के डिप्टी चेयरमैन निकोस रिगास ने की थी. उन्होंने मीडिया को भी जांच में अपनाई जाने वाली तमाम लेटेस्ट सिस्टम इस्तेमाल करने की बात कहते हुए दावा किया कि बहुत जल्द ही वे इस मामले का पता लगा लेंगे. इस पर मीडिया ने उन्हें निशाने पर ले लिया था. कारण कोरोना वायरस संक्रमण के कारण हुए लौकडाउन के बाद से महिलाओं की हत्या और घरेलू अपराध की घटनाएं वहां काफी बढ़ गई थीं.

इसे देखते हुए रिगास ने घटनास्थल से मोबाइल उपकरणों, एक स्मार्टवाच और कैमरों की जांच करने के लिए एक समयरेखा भी निर्धारित कर दी. घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद एथेंस पुलिस  की क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम इस नतीजे पर पहुंची थी कि युवती की हत्या जिन 3 लुटेरों ने की, उन्हें दबोचा जाना बाकी है. क्योंकि पुलिस को वहां से काफी सबूत मिल चुके थे. इसी बीच पुलिस के अधिकारी ने अपने सहकर्मियों से सवाल किया, ‘‘तुम यह कैसे कह सकते हो कि हत्या प्रोफैशनल लुटेरों ने ही की है?’’

‘‘सर घटनास्थल पर मिले सारे प्रमाण तो यही बताते हैं. इस के अलावा, लुटेरों ने युवती के हाथपांव बांध दिए थे, और…’’ एक सहकर्मी पुलिस ने कहा.

‘‘… और उस ने पालतू कुत्ते को भी मार डाला था. तुम तो यही कहोगे न?’’ अधिकारी ने दूसरे सहकर्मी को देखते हुए सवाल किया.

‘‘ यस सर! ’’

‘‘वाट यस सर..? लुटेरों ने घर से जो रुपए लूटे, वे कहां रखे थे? तुम लोगों को तो केवल 13 हजार पाउंड अमाउंट के बारे पता चला है.’’

‘‘उस की डिटेल्स नहीं मिली सर. कोई निशान नहीं मिल पाया.’’ फोरैंसिक जांच वाले ने सफाई दी.

‘‘तुम्हें तो यह भी पता नहीं चला है कि लुटेरों के गिरोह ने युवती को कैसे बांधा, उस की मौत दम घुटने से हुई या फिर कोई और वजह थी.’’ अधिकारी ने सभी को जबरदस्त डांट पिलाई.

‘‘सर, सीसीटीवी कैमरे घटना के समय बंद थे,’’ तकनीकी जांच करने वाले ने बताया.

‘‘अब तुम लोग मुझे यह समझाओ कि मृत युवती की बगल में सिरहाने 11 माह की बच्ची चुपचाप कैसे लेटी थी?’’ जांच अधिकारी ने सख्ती के साथ पूछा. ग्रीक जांच अधिकारी की बात सुन कर सभी चुप हो गए थे. क्योंकि यह मामला साधारण नहीं था. मृतका के पति पायलट बाबिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पुलिस ने जांच शुरू की, जिस में कई विरोधाभास देखने को मिले. बाबिस ने मीडिया को बताया था कि वह घटना के समय लुटेरों से घिरा हुआ था. जबकि पुलिस जांच में पता चला कि उस दौरान वह घर के बाहर चारों ओर घूम रहा था. उस का आवागमन बेसमेंट से ले कर बालकनी तक हुआ था. इस विरोधाभास पर पुलिस को बाबिस पर ही शक हो गया.

डेटा एनालिस्ट की ली मदद इस आधार पर पुलिस औफिसर निकोस रिगास ने अपने सहकर्मियों को नए सिरे से जांच करने का आदेश दिया. उन्होंने जांच टीम से कहा, ‘‘संदिग्ध युवती का पति भी हो सकता है. यह भी हो सकता है कि क्राइम सीन उस के द्वारा बनाया गया हो. वह खुद को बचाने की कोशिश में हो.’’

‘‘…लेकिन सर, इस पालतू कुत्ते को किस ने मारा होगा?और सर वह छोटी बच्ची..?’’ एक सहकर्मी ने जिज्ञासा जताई.

‘‘यही तो समझने की बात है, जिस ओर तुम लोगों का ध्यान ही नहीं गया?’’ निकोस रिगास बोले.

‘‘वह कैसे सर?’’ फोरैंसिक जांचकर्ता ने सवाल किया.

‘‘मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि पालतू कुत्ते को संदिग्ध ने ही मारा होगा और हत्या को सही ठहराने के लिए बच्ची को उस की मां के मृत शरीर के बगल में रख दिया. हैरत की बात है कि उसे कोई चोट नहीं आई. यह भी हो सकता है उस वक्त बच्ची कहीं और सो रही हो.’’ रिगास ने समझाया.

‘‘तो सर, हमें अब क्या करना चाहिए?’’

‘‘आप लोग इस में अब कुछ अधिक नहीं कर पाएंगे. इस केस को डेटा एनलिस्ट की मदद से हैंडल किया जाएगा.’’

‘‘वह कैसे सर?’’ सभी चौंक पड़े.

‘‘बस आप सभी देखते जाइए और अपनीअपनी रिपोर्ट का डेटा सौफ्ट कौपी के साथ हार्ड कौपी में 12 घंटे के भीतर उपलब्ध करवाइए.’’ रिगास ने आदेश दिया.

‘‘यस सर!’’ सभी सहकर्मियों ने एक साथ कहा.

‘‘और हां, आईटी के क्राइम सेल के साथ अभी घंटे भर के अंदर मीटिंग तय करवाइए.’’ यह आदेश उन्होंने अपने पीए को दिया.

इसी दौरान एक सहकर्मी ने उत्सुकता के साथ बताया, ‘‘सर, क्या मृतका के पति बाबिस एनाग्नोस्टोपोलास से पूछताछ की जाए?’’

‘‘अभी उस पर नजर रखिए. मुझे जानकारी मिली है कि वह इस समय ग्रीस में नहीं है, लेकिन इंस्टाग्राम पर सक्रिय है. उस ने पुर्तगाल यात्रा के दौरान अपनी पत्नी के साथ एक तसवीर पोस्ट की है.’’

‘‘जी सर, मैं ने वह तसवीर देखी है. उस में उस ने लिखा है— हमेशा एक साथ! विदाई, मेरे प्यार!’’ महिला सहकर्मी तपाक से बोल पड़ी.

‘‘तुम उस पर नजर रखो. उस के डेटा का कलेक्शन करो. हर तरह की डिटेल्स जुटाओ… जैसे उन के आपसी संबंध, शादीब्याह, अफेयर, डेटिंग, चैटिंग, डिनर, साथसाथ ट्रैवलिंग, फैमिली बैकग्राउंड, हौबी, उन के फ्रैंड सर्कल, प्रोफेशन इत्यादिइत्यादि. इंस्टाग्राम के अतिरिक्त दूसरे सोशल साइट्स और डेटिंग ऐप को भी खंगालो.’’

जांच दल की महिला सहकर्मी के द्वारा हेलीकौप्टर पायलट बाबिस और कैरोलिन के बारे में जुटाई गई जानकारी के बाद पता चला कि कैरोलिन क्राउच और बाबिस का प्रेम विवाह हुआ था. उन की शादी जुलाई, 2019 में अलगार्वे में हुई थी. सोशल साइट पर उस की शादी की कई यादगार तसवीरें देखने को मिलीं. उन में एक मार्मिक तसवीर उस की शादी के लिए तैयार होने की है, जिस में उस के बाल और मेकअप 2 स्थानीय स्टाइलिस्टों द्वारा किया गया था. इस तसवीर को उतारने वाले फोटोग्राफर को जब कैरोलिन की हत्या की जानकारी मिली तो वह स्तब्ध हो गया था, क्योंकि उसे मिला वह पहला असाइनमेंट था.

कैरोलिन जब 15 साल की थी, तभी उस की मुलाकात बाबिस से हुई थी. उन के बीच प्यार हो गया. उन की शादी एथेंस के उसी अपमार्केट इलाके में हुई थी, जहां कैरोलिन मृत पाई गई. शादी के समय वह 18 साल की थी. बाबिस के मातापिता एथेंस में रहते हैं, जबकि कैरोलिन के मातापिता एलोनिसोस द्वीप पर वहां से 6 घंटे की दूरी पर रहते हैं. हालांकि कैरोलिन का जन्म यूके में हुआ था, जिस से वह ब्रिटिश नागरिक बन गई थी. शादी के बाद वह अपने पति और बच्ची के साथ ग्लाइका नेरा में रह रही थी. इसी तरह से पुलिस ने उन के बारे में कई जानकारियां जुटाईं, जिन में कैरोलिन द्वारा लिखी गई डायरी भी थी. डायरी में उस ने अपने से करीब दोगुनी उम्र के पति के साथ संबंधों की अंतरंगता के बारे में लिखा था.

कैरोलिन की हत्या की जांच ग्रीक पुलिस ने नए सिरे से शुरू की. उन्होंने तमाम तकनीकी उपकरणों को अपने कब्जे में ले लिया और उन में दर्ज डेटा का विश्लेषण किया. इसी क्रम में पुलिस अधिकारी को वह सुराग मिल गया, जिस की उन्हें तलाश थी. वह सुराग कैरोलिन के स्मार्टवाच में छिपा था.  खास तरह की उस बायोमैट्रिक घड़ी में उन की मौत का दिन और उन की नाड़ी के जीवित रहने तक चलने की रीडिंग दर्ज थी. उस के साथ बाबिस के मोबाइल की काल डिटेल्स आदि का मिलान किया गया. इस काम के लिए पुलिस ने गूगल के सर्विलांस सिस्टम का उपयोग किया.

इस तरह से की गई तकनीकी जांच में संदिग्ध के तौर पर कैरोलिन के पति बाबिस के होने का शक पुख्ता हो गया. बाबिस ने भले ही कहा कि उसे लुटेरों ने बांध दिया था, लेकिन जांच में इस बात का पुष्टि हो गई कि उस दौरान उस का फोन इस्तेमाल में था. उस का डेटा उस की पत्नी के स्मार्टवाच के डेटा से मेल नहीं खा रहा था. कैरोलिन की स्मार्टवाच से पता चला कि कैरोलिन का दिल उस वक्त भी धड़क रहा था, जिस वक्त उस के पति द्वारा हत्या किए जाने का दावा किया गया था. उस के फोन पर गतिविधि ट्रैकर ने उसे घर के चारों ओर घूमते हुए दिखाया, जबकि उस ने कहा कि वह बंधा हुआ था. इस तरह से रिकौर्ड किए गए समय, जिस पर घर के सीसीटीवी कैमरे से डेटा कार्ड निकाल लिए गए थे, से घटना की अलग ही कहानी सामने आई.

बाबिस ने पुलिस को बताया था कि 11 मई, 2021 की सुबह 5 बजे के आसपास लुटेरों ने उस के घर में दरवाजा तोड़ कर प्रवेश किया और उस के साथ कैरोलिन को बांध दिया. घर में लूटपाट की और कैरोलिन की गला घोंट कर हत्या कर दी. सुबह 6 बजे पुलिस को बुलाने पर लुटेरे भाग गए. दिल की धड़कनें घड़ी में हुईं कैद इस के विपरीत जांच में पाया गया कि आधी रात को 12 बज कर 35 मिनट पर दंपति की ग्राउंड फ्लोर पर लगी सीसीटीवी कैमरे ने आखिरी तसवीर उतारी थी. उस में बाबिस सोफे पर बैठा दिखा था. उस की गोद में बेटी बैठी थी, उस के हाथ में फोन था. उस समय उस की कैरोलिन से बातचीत चल रही थी, जो किसी बात को ले कर कड़वी बहस में बदल गई थी.

रात 1.20 बजे कैमरे की डिवाइस में स्टोर डेटा के अनुसार उस में से मेमोरी कार्ड हटा दिया गया था. पुलिस का कहना है कि ऐसा कैरोलिन द्वारा स्टूपिड कहने के बाद किया गया. पुलिस ने पाया कि मेमोरी कार्ड को आधा काट कर शौचालय में बहा दिया गया था. इसे अधिकारी ने पूर्वनियोजित हत्या की योजना बताया. रात 12.35 बजे से सुबह 4 बजे तक बाबिस और कैरोलिन के बीच टेक्स्ट मैसेज के साथ बहस होती रही. उस दौरान कैरोलिन ने अपने एक दोस्त को भी मैसेज किया, जिस में उस ने लिखा कि वह अपने पति को छोड़ रही है और अभी रात में ही घर से किसी होटल में चली जाएगी. उसी बहस में बात इतनी बिगड़ गई कि कैरोलिन ने बाबिस से तलाक लेने तक के लिए कह दिया.

कैरोलिन की कलाई से जुड़े फिटनैस ट्रैकर से पुलिस को पता लग गया कि उस दिन सुबह 4 बजे कैरोलिन के दिल की धड़कनें बढ़ गई थीं. अचानक दिल की बदली हुई गतिविधि से पता चला कि इस से दंपति के बीच लड़ाई बढ़ गई थी. बाबिस ने इस बारे में पूछने पर बताया कि कैरोलिन ने उसे मारा, जिस से उसे भी उस पर गुस्सा आ गया और उसे बिस्तर पर धकेल दिया. उस के बाद उस ने तकिए से चेहरा दबा दिया. कैरोलिन के फिटनैस ट्रैकर से ही पता चला कि 4.11 बजे उस के दिल की धड़कनें रुक गईं. उस समय वह मर चुकी थी. पुलिस जांच में पता चला कि बाबिस ने उस के मुंह में रुई भर दी थी और फिर उस का गला घोंट दिया था.

इस के बाद बाबिस ने ठंडे दिमाग से हत्या को नाटकीय रूप देने की योजना बनाई. पुलिस जांच के अनुसार, उस ने खिड़की के नीचे की कुंडी तोड़ी और अलमारी में थोड़ी तोड़फोड़ की. घर में लूटपाट का सीन बनाया. इसी तरह से उस ने अपने पालतू कुत्ते को मार कर सीढ़ी के डब्बे में लटका दिया. उसे दिखा कर ही पुलिस को बताया लुटेरों ने उसे रास्ते में ही मार डाला होगा. फिर उस ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली और खुद को बिस्तर से बांध लिया. उस के बाद पड़ोसी को फोन कर लुटेरों के बारे में बताया.  इस डेटा ट्रेल के आगे बाबिस की एक नहीं चली. हालांकि उसे दबोचने में भी पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी. कारण जब तक पुलिस को उस के आरोपी होने का प्रमाण मिला था, तब तक वह दूसरे देश में जा छिपा था. इस तरह से स्मार्टवाच ने कैरोलिन के अंतिम क्षण की जानकारी दे कर इस केस को खोलने में मदद की.

बाद में पुलिस ने बाबिस को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली. उसे ग्रीक की बड़ी जेल कोरयाडालोस में रखा गया. उस की गिरफ्तारी एक बहुचर्चित घटना थी. मीडिया जगत से ले कर सोशल एक्टिविस्टों में उन की घोर निंदा हुई. सामाजिक संस्थाओं ने उसे सख्त सजा देने की मांग के साथ प्रदर्शन किए. पुलिस के सामने बाबिस को जेल से कोर्ट तक ले जाने की समस्या थी. इस की वजह यह थी कि प्रदर्शनकारी बाबिस को अपने हाथों से सजा देने की मांग कर रहे थे. रास्ते में बाबिस की जान को खतरा भी था, इसलिए भारी पुलिस सुरक्षा के बीच बाबिस को बुलेटपू्रफ जैकेट पहना कर जेल ले जाया गया और जज के सामने पेश किया.

वकीलों की शुरू हुई बहस में वह जल्द ही टूट गया और उस ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. उस ने 17 जून, 2021 को अपनी पत्नी को गला घोंट कर मारने की बात स्वीकार कर ली. साथ ही भावुकता के साथ कहा कि वह उस दौर के 6 मिनट का समय कभी नहीं भूल सकता है. क्योंकि पत्नी का गला घोंटते वक्त उस की बेटी लिडिया का चेहरा उस के सामने ही था. हालांकि उस ने हत्या का नाटक रचने के बारे में बताया कि ऐसा उस ने इसलिए किया, क्योंकि वह जेल नहीं जाना चाहता था और अपनी बेटी की परवरिश करना चाहता था. पूछताछ में बाबिस ने अपने पालतू कुत्ते का गला घोंटने की भी बात स्वीकार ली. उस ने कहा कि उस ने ऐसा बनावटी घटना को प्रभावशाली दिखाने के लिए किया.

हैलीकौप्टर पायलट बाबिस एनाग्नोस्टोपोलोस के अपना जुर्म स्वीकार करने के बाद अदालत ने 17 जून, 2021 को उसे कैरोलिन क्राउच और पालतू कुत्ते की हत्या का दोषी ठहराते हुए 15 साल जेल की सजा सुनाई. खूबसूरत पत्नी की हत्या के बाद बाबिस को अब पछतावा हो रहा है, जबकि उस की बेटी लिडिया के पालनपोषण की जिम्मेदारी कैरोलिन क्राउच के ब्रिटिश पिता ने उठा ली है. हालांकि बाबिस चाहता है कि सजा काटने के बाद वही अपनी बेटी की देखभाल करे, लेकिन लिडिया के नानानानी नहीं चाहते कि वह अपनी ही मां के हत्यारे पिता की बेटी कहलाए.

 

अधेड़ उम्र का खूनी प्यार

अधेड़ उम्र का खूनी प्यार – भाग 3

सविता के दर्द का कारण जान कर आशीष हैरत में पड़ गया कि इतने सालों से सविता अपने पति के जुल्म को सहती आई, उस ने उफ्फ तक नहीं की. अब भी वह दर्द छिपाए अंदर ही अंदर घुट रही थी. वह तो खुद सविता को चाहने लगा था, प्यार करने लगा था.

ऐसे में उस का प्यार अपने आप को रोक नहीं सका और आशीष की जुबान से बाहर आ ही गया, “सविता, मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं और तुम्हारे साथ पूरी जिंदगी बिताना चाहता हूं. मैं इस दुनिया की सारी खुशियां तुम्हारे कदमों में डालना चाहता हूं. लेकिन यह तभी हो पाएगा, जब तुम मेरा साथ देने को तैयार होगी. मैं तो तैयार हूं साथ देने के लिए, अब तुम बोलो, तैयार हो…”

“आशीष, मैं भी तुम्हें बेइंतहा चाहती हूं, मुझे तुम्हारा साथ, तुम्हारा प्यार सब मंजूर है लेकिन हम एक नहीं हो पाएंगे, जहां तुम मुझ से बहुत छोटे हो, वहीं मैं वैवाहिक बंधन में बंधी हूं और 3 जवान बच्चों की मां हूं. ऐसे में हमारा प्यार ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाएगा. ये समाज भी हम को ताने देगा और दुत्कारेगा. समाज हमारे प्यार और परिस्थितियों को नहीं समझेगा.”

“उम्र केवल एक बस संख्या भर है, प्यार तो किसी बंधन को नहीं मानता, न उम्र, न जातपात और न समाज के कायदेकानूनों को. हम अपनी मरजी से एक साथ जिंदगी गुजारना चाहते हैं, ये हमारा आपसी फैसला है, दुनिया और समाज का इस से कोई लेनादेना नहीं. तुम बस हां करो, तुम्हारे लिए मैं किसी से भी लड़ जाऊंगा. तुम्हारा साथ कभी न छोड़ूंगा.” आशीष ने भरोसा दिलाया.

सविता आशीष की बात सुन कर भावविभोर हो गई और उस के सीने से लग गई. सविता को ऐसा करते देख कर आशीष भी हौले से मुसकरा गया और उसे भी अपनी बांहों के घेरे में ले लिया. कुछ देर दोनों और रेस्टोरेंट में रुके, फिर वहां से निकल आए.

प्रेमी से कराना चाहती थी बेटी की शादी

इस के बाद दोनों का प्यार परवान चढऩे लगा. दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए. आशीष अब सविता के घर भी आनेजाने लगा. चूंकि आशीष सविता के स्कूल में टीचर था, इसलिए मधुसूदन को उस के आनेजाने पर कोई ऐतराज नहीं था. मधुसूदन यह समझता था कि स्कूल में बच्चों को पढ़ाने से संबंधित बातें करने के लिए आशीष सविता से मिलने घर आता है. आशीष की उम्र भी कम थी, इसलिए उन दोनों के रिश्ते पर मधुसूदन को शक नहीं हुआ.

ऐसे कब तक मिलतेजुलते दोनों? ज्यादा समय साथ बिताने के लिए सविता ने आशीष को रिश्ते में बांधने का फैसला किया. खुद तो आशीष के साथ सामाजिक तौर पर एक हो नहीं सकती थी, इसलिए उस ने अपनी 21 वर्षीय बेटी रवीना की शादी अपने प्रेमी आशीष के साथ करने की सोची. इस से दोनों आसानी से मिल सकते थे और सास दामाद का रिश्ता बनने के कारण कोई उन पर शक भी नहीं करता.

सविता अपने प्यार को पाने के लिए अपनी ही सगी बेटी को बलि का बकरा बनाने की सोच रही थी. आशीष भी उस की बेटी से शादी करने को तैयार था. तैयार होता भी क्यों नहीं, इस फैसले से उस के दोनों हाथों में लड्डू ही लड्डू होते. एक तरफ वह अपनी प्रेमिका से मजे लेता, वहीं दूसरी तरफ उस की बेटी के साथ भी मजे लेता. सविता ने बेटी की शादी की बात अपने पति और बेटी के सामने चलाई तो दोनों ने शादी करने से साफसाफ मना कर दिया.

प्लान ‘ए’फेल होने पर बनाया प्लान ‘बी’

इस से सविता और आशीष के सारे मंसूबे फेल हो गए. इस के बाद भी दोनों एकदूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा साथ रहने की तरकीबें तलाशते रहें लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. इस पर सविता ने आशीष से कहा कि अब एक ही रास्ता है कि पति मधुसूदन को ही अपने रास्ते से हटा दिया जाए.

सविता तो हमेशा से यही चाहती थी. सविता ने कहा तो आशीष भी तैयार हो गया. घटना से 20 दिन पहले दोनों ने मधुसूदन की हत्या की योजना बनाई. इस के लिए आशीष ने बाजार से एक छाता और लोहे की छोटी वजनदार रौड खरीदी, साथ ही 400 रुपए का शेविंग करने वाला उस्तरा भी खरीदा.

26 जून, 2023 की दोपहर आशीष और सविता दोनों स्कूल में थे. एक से 2 बजे के बीच का समय ऐसा था, जब मधुसूदन घर पर अकेला होता था. एक बजे के बाद सविता प्रेमी आशीष के साथ स्कूल से घर जाने के लिए निकली. आशीष के हाथ में छाता था जो कि बंद था और दाएं हाथ में उस ने छाते को पकड़ रखा था. उसी बंद छाते में लोहे की रौड और उस्तरा रख रखा था.

घर पहुंचने पर आशीष ने मधुसूदन के पीछे खड़े हो कर छाते से लोहे की रौड निकाली और मधुसूदन के सिर पर कई ताबड़तोड़ तेज प्रहार कर दिए, जिस से मधुसूदन चीख भी न सका और जमीन पर गिर गया. मधुसूदन मरणासन्न हालत में था. तभी आशीष ने छाते से उस्तरा निकाला और उस से मधुसूदन का गला रेत दिया.

प्रेमी संग पति की हत्या करने के बाद सविता ने घर का सारा सामान बिखेर दिया और अलमारियां खोल दीं, जिस से मामला लूट के बाद हत्या का लगे. इस के बाद सविता और आशीष दोनों घर से निकल गए और वापस स्कूल पहुंच गए. लेकिन इस से पहले उन्होंने हत्या में प्रयुक्त रौड, उस्तरा और छाता कहीं ठिकाने लगा दिया था. लेकिन तमाम चालाकियों के बाद भी दोनों पकड़े गए.

पूछताछ के बाद कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं, फिर दोनों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक आला कत्ल बरामद करने का पुलिस प्रयास कर रही थी.

—कथा में रवीना परिवर्तित नाम है

अधेड़ उम्र का खूनी प्यार – भाग 2

पिछले 8 सालों से सविता पास के ज्ञान भारती स्कूल में बच्चों को पढ़ाती थी. स्कूल से वापस आने के बाद उसे पति की गालियां सुनने को तो मिलती ही थीं, साथ में अपने पीटे जाने का दर्द भी झेलना पड़ता. 3-3 जवान बच्चों के पिता होने के बाद भी मधुसूदन की हरकतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही थीं.

सविता को अब मधुसूदन के साथ जिंदगी का एकएक पल बिताना भारी पड़ रहा था. लेकिन वह करे भी तो क्या करे, उस का कोई और ठिकाना नहीं था. वैसे भी वह घर जितना मधुसूदन का था, उतना ही सविता का का भी. वह घर छोड़ कर जाना नहीं चाहती थी. सविता के दिमाग में अजीब सी उथलपुथल मची रहती थी.

लगभग 2 साल पहले एक खूबसूरत हैंडसम नौजवान सविता के स्कूल में बच्चों को विज्ञान और गणित पढ़ाने के लिए आया. उस नौजवान का नाम था आशीष वर्मा उर्फ टीनू. वह अविवाहित था और बादशाहपुर में ही रहता था.

आशीष सविता से 10 साल छोटा था. एक ही स्कूल में दोनों पढ़ाते थे, इसलिए दोनों का पहले मिलना जुलना, फिर बात करना शुरू हुआ. दोनों को एकदूसरे का साथ और बातें करना ऐसा भाया कि दोनों दोस्त बन गए. सविता को आशीष में एक अच्छे हमसफर के गुण दिखने लगे. हर लिहाज से आशीष साधारण से दिखने वाले शराबी पति मधुसूदन से लाख गुना अच्छा लगा था.

आशीष जैसे हमसफर की सविता ने कामना की थी, लेकिन समय और किस्मत ने कुछ ऐसा खेल खेला कि उस की शादी उस से 13 साल बड़े साधारण से दिखने वाले टेलर मास्टर मधुसूदन से हो गई. उस से शादी कर के मधुसूदन को खुश होना चाहिए था, अपनी पलकों पर बैठा के रखना चाहिए था, लेकिन हुआ इस का उल्टा. मधुसूदन ने कभी उस की कद्र नहीं की, प्यार देने के बजाय उसे गाली देता रहता और मारतापीटता रहता था.

आशीष ने दिल में बसा लिया था सविता को

जहां मधुसूदन ऐसा था, वहीं दूसरी तरफ आशीष सविता की परवाह करता था, उस की कद्र करता है, उस के लिए पलक पावड़े बिछाए रहता था. उस की तारीफ करता, उस के काम की सराहना करता, हर काम में उस की मदद करता. ऐसा इंसान जिंदगी में आ जाए तो इंसान खुशी से फूला नहीं समाता. सविता भी खुशी से फूली नहीं समा रही थी.

वह आशीष के नजदीक रहतेरहते उस से प्यार करने लगी थी, उस के साथ ही आगे की जिंदगी बिताना चाहती थी. आशीष के प्रति उस का प्यार उस की आंखों से साफ झलकता था. आशीष भी उसे चाहने लगा था, क्योंकि सविता जितनी अच्छी तरह से उसे समझती थी, अपनापन जताती थी, उतना समझने वाला अपनापन जताने वाला कोई नहीं था. सविता की खनकती हंसी और उस की मीठी बोली उस के दिल को लुभाती थी.

सविता उम्र में उस से बड़ी जरूर थी, लेकिन देखने में उस से बड़ी लगती नहीं थी. सविता उस से लाख हंस कर बातें करती थी, लेकिन आशीष उस की आंखों में उस के बात करने के लहजे में कभीकभी बहुत दर्द महसूस करता था. सविता के दिल में कैद दर्द जब भी उस के चेहरे और आवाज में झलकता तो आशीष भी बेचैन हो उठता था. घूमने, खानेपीने दोनों अकसर साथ बाहर जाते रहते थे.

एक दिन जब दोनों रेस्टोरेंट में बैठे हुए थे, तब आशीष ने सविता को थोड़ा कुरेदा और उस के दर्द की वजह जानने के उद्देश्य से सविता से पूछा, “सविता, मैं ने कई बार तुम्हारी आवाज में दर्द महसूस किया है. ऐसा क्या दर्द है तुम को, जो असहनीय है. वह समयसमय पर छलक कर बाहर आ ही जाता है. कहते हैं दर्द बांटने से हल्का होता है, तुम मुझे बता कर अपना दर्द कम कर सकती हो, अगर मुझे अपना मानती हो तो…”

आशीष ने सविता के दिल के जख्मों पर लगाया प्यार का मरहम

आशीष ने सविता की आंखों में झांकते हुए अपना मानने वाली बात कही. जैसे वह सविता के अंदर की बात जानने का प्रयास कर रहा हो कि सविता के लिए वह कितना मायने रखता है. सविता भी उस से अपना दर्द छिपातेछिपाते परेशान हो गई थी और वह भी चाहती थी कि वह अपना हाल आशीष को बता दे, फिर देखे आशीष क्या प्रतिक्रिया देता है.

आशीष उस के साथ रिश्ता बना कर आगे बढऩे का इच्छुक होगा तो उस के दर्द को समझेगा और उस के दर्द पर अपने प्यार का मरहम लगाएगा और उसे दर्द से निजात दिलाएगा, नहीं तो वह पीछे हट जाएगा.

सविता को भी आशीष की प्रतिक्रिया जानने की जल्दी थी, इसलिए उस ने आशीष से कहा, “क्या करोगे जान कर, मेरा दर्द दूर नहीं होगा, बल्कि कुरेदने से और बढ़ जाएगा. तुम भी नाहक परेशान हो जाओगे. तुम इस में कुछ कर भी नहीं सकते. वैसे तुम्हें अपना ही मानती हूं, इसीलिए तुम्हारे साथ बैठ कर बातें कर लेती हूं, घूम लेती हूं. वरना सब होते हुए भी मेरा कोई सहारा नहीं, न ही मुझे कोई समझने वाला.”

आशीष तड़प उठा, “ये कैसी बातें कर रही हो सविता. एक पल में मुझे अपना कहती हो, दूसरे ही पल मुझे पराया कर देती हो. मैं तुम्हारा अपना हूं, मैं तुम्हें अपना मानता हूं इसलिए तुम्हारे साथ समय बिताता हूं, बातें करता हूं. मेरे रहते हुए तुम्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं. कोई दिक्कत है तो मैं बनूंगा तुम्हारा सहारा.” आशीष ने सविता को विश्वास दिलाते हुए कहा.

आशीष की बातों से सविता के अंदर का विश्वास जागा कि आशीष उस का साथ जरूर निभाएगा तो उस ने अपना दर्द बयान कर दिया. पति मधुसूदन के शराबी होने की बात और उस के द्वारा रोज गालियां देते हुए पिटाई करने की बात बता दी.

अधेड़ उम्र का खूनी प्यार – भाग 1

देश की राजधानी दिल्ली की सीमा से सटा हरियाणा का एक जिला है गुरुग्राम. इसी गुरुग्राम जिले के बादशाहपुर के बड़ा बाजार में सिटी हेल्थ सेंटर के पास रहता था मधुसूदन सिंगला. मधुसूदन की उम्र करीब 52 वर्ष थी. मधुसूदन घर में ही टेलरिंग शौप चलाता था. 22 वर्ष पहले मधुसूदन का विवाह सविता से हुआ था. सविता बादशाहपुर के ज्ञान भारती स्कूल में टीचर थी.

उन के 3 बच्चे हुए, जिन में 2 बेटियां और एक बेटा है. इस समय बड़ी बेटी 21 साल की, दूसरी बेटी 19 साल की और बेटा 18 साल का है. तीनों बच्चे पढ़ रहे थे. रोज तीनों बच्चे कालेज चले जाते थे. सविता भी स्कूल बच्चों को पढ़ाने के लिए चली जाती थी. घर दुकान में अकेला रह जाता था मधुसूदन.

26 जून 2023 को भी मधुसूदन रोज की तरह घर में अकेला था. दोपहर ढाई बजे के करीब मधुसूदन की बड़ी बेटी रवीना कालेज से वापस घर आई तो घर का मेन गेट खुला हुआ था. गेट से जब वह अंदर पहुंची तो कमरे में सामने ही अपने पिता को खून से लथपथ पड़ा देखा. अपने पिता को उस हाल में देख कर उसकी चीख निकल गई. वह फौरन वहां से तेजी से बाहर निकली और थोड़ी दूर पर रहने वाले अपने चाचा सोनू के पास पहुंच गई.

उस ने रोतेबिलखते चाचा को पिता के खून से लथपथ कमरे में पड़े होने की बात बता दी. यह सुनते ही सोनू और घर के अन्य लोग तेज कदमों से मधुसूदन के घर पहुंच गए. सोनू और घर वालों ने जब मधुसूदन को देखा तो पता चला कि मधुसूदन की मौत हो चुकी है. चीखपुकार सुन कर आसपास के लोग भी वहां एकत्र हो गए. उन में से ही किसी व्यक्ति ने स्थानीय बादशाहपुर थाने को घटना की सूचना दे दी.

खून से लथपथ मिली लाश

बादशाहपुर पुलिस और पुलिस के आला अधिकारीगण घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस अधिकारियों ने लाश का निरीक्षण किया. मृतक मधुसूदन के सिर पर किसी भारी वस्तु से प्रहार किया गया था, यह बात उस के सिर के घाव देखने के बाद पता चली. इस के अलावा उस के गले को किसी तेज धारदार हथियार से काटा गया था.

कमरे का सारा सामान बिखरा पड़ा था, अलमारियां खुली पड़ी थीं. शुरुआती जांच में मामला लूट के बाद हत्या का लग रहा था. अनुमान लगाया जा रहा था कि मधुसूदन घर में अकेले थे, इसलिए कोई बदमाश लूट के इरादे से घर में घुसा, मधुसूदन ने विरोध किया तो बदमाश ने उन की हत्या कर दी होगी.

बदमाश घर से कोई सामान ले जाने में सफल हुआ कि नहीं, ये पता नहीं चला. पति की हत्या की खबर मिलने पर सविता भी घर आ गई थी. पुलिस ने उस से पूछताछ की तो उस ने किसी पर शक नहीं जताया. घर से क्या कुछ गायब हुआ है तो सविता भी कुछ न बता सकी.

पुलिस ने आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई तो पता चला कि मृतक के घर की जमीन के लेनदेन को ले कर कुछ समझौता हुआ था, जिस के एवज में कई लाख रुपए मिले थे, जिस की सूचना उन के परिचित व कुछ निजी लोगों को थी. हो सकता है, उन पैसों के कारण यह घटना तो अंजाम नहीं दी गई. यह बात भी पता चली कि घटना से पहले मधुसूदन के पास बिना मूंछों वाला एक व्यक्ति बैठा देखा गया था.

क्राइम ब्रांच ने की जांच शुरू

फिलहाल पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई पूरी कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया. फिर थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. इस हत्याकांड की जांच क्राइम ब्रांच सेक्टर 39 की यूनिट को सौंप दी गई. इस यूनिट के प्रभारी थे पंकज कुमार.

थाना पुलिस के सहयोग से क्राइम ब्रांच यूनिट ने केस की जांच शुरू कर दी. पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगाले. उन कैमरों की फुटेज में कोई भी संदिग्ध व्यक्ति नहीं दिखा, लेकिन घटना से पहले मधुसूदन की पत्नी जरूर घर आतीजाती एक युवक के साथ दिखी. उस युवक के हाथ में एक छाता था.

घटना से पहले और बाद में भी उन का साथ जाना पुलिस वालों के जेहन में शक पैदा कर गया. आनेजाने के बीच का समय काफी ज्यादा था. घटना भी दोपहर एक बजे से दो बजे के बीच अंजाम दी गयी थी. घटना का समय और उन दोनों के आने जाने का समय इस बात का यकीन दिला रहा था कि मधुसूदन की हत्या इन दोनों द्वारा ही की गई है.

सविता के साथ वाले युवक के बारे में पता किया गया तो पता चला कि सविता के साथ दिखने वाला युवक आशीष वर्मा उर्फ टीनू है. वह सविता के स्कूल में ही टीचर है. जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ और सुबूत जुटाने शुरू किए.

पुलिस ने सविता के फोन नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई, जिस में सविता द्वारा एक नंबर पर हर रोज ज्यादा बात किए जाने की बात पता चली. घटना वाले दिन भी उस फाने पर बातें हुई थीं. घटना के समय दोनों के नंबरों की लोकेशन भी घटनास्थल पर पाई गई. जांच करने पर वह नंबर किसी और का नहीं, बल्कि आशीष वर्मा का ही निकला. आशीष बादशाहपुर में ही रहता था.

इस के बाद अगले ही दिन 27 जून, 2023 को पुलिस ने सविता और आशीष वर्मा को गिरफ्तार कर लिया. बादशाहपुर थाने ला कर जब सविता और आशीष से पूछताछ की गई तो दोनों पुलिस को बरगलाने लगे, लेकिन जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, काल डिटेल्स और लोकेशन रिपोर्ट दोनों के सामने सुबूत के तौर पर रखी तो दोनों समझ गए कि इन का भांडा फूट गया है. तब दोनों ने इस मर्डर केस का जुर्म स्वीकार करते हुए हत्या के पीछे की पूरी कहानी बयान कर दी.

स्कूल के टीचर से हो गया प्यार

मधुसूदन सिंगला के साथ सविता 22 साल से किसी तरह निभा रही थी. मधुसूदन शराब का शौकीन था. ये शौक उस की आदत में इस कदर शुमार था, कि वह हर रोज शराब पीता था. यहां तक तो चलो कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन इस के बाद जो होता था, वह बरदाश्त के बाहर वाला मामला था. शराब पीने के बाद मधुसूदन हैवान बन जाता था, वह रोज किसी न किसी बात को ले कर सविता से झगड़ पड़ता था और उस की जम कर पिटाई कर देता था.