तीन साल बाद खुला रहस्य – भाग 3

जयकुमार 2 दिन घर नहीं आया तो उस की मां गंजू के घर गई. उस ने बताया कि जयकुमार 2 दिनों से घर नहीं आया है और उस का फोन भी नहीं लग रहा है तो गंजू को भी चिंता हुई. उस ने रीना से प्रीति के बारे में पूछा तो पता चला कि वह तो परीक्षा देने अलीगढ़ गई है. जब उसे पता चला कि देवेंद्र भी घर पर नहीं है तो उस ने देवेंद्र को फोन कर के कहा कि वह जयकुमार को वापस भेज दे.

गंजू के इस फोन से देवेंद्र शर्मा घबरा गया. वह क्या जवाब दे, एकदम से उस की समझ में नहीं आया. लेकिन अचानक उस के मुंह से निकल गया, ‘‘प्रीति भी घर से गायब है. लगता है, वह उसे कहीं भगा ले गया है.’’

यह सुन कर संध्या परेशान हो उठी. उसे विश्वास नहीं हुआ कि उस का बेटा ऐसा भी कर सकता है. दूसरी ओर देवेंद्र परेशान था. वह गुनाह का ऐसा जाल बुनना चाहता था, जिस में जयकुमार का परिवार इस तरह फंस जाए कि कोई काररवाई करने के बजाए वह बचने के बारे में सोचे. उस ने पड़ोस में रहने वाले चौकीदार राकेश को बताया कि जयकुमार नाम का एक लड़का उस की बेटी को भगा ले गया है.

इस के बाद वह वकील मुन्नालाल के पास पहुंचा और उसे सारी बात बता दी. वकील मुन्नालाल देवेंद्र का परिचित था. उस ने उसे सलाह दी कि वह जयकुमार के खिलाफ बेटी को भगाने का मुकदमा दर्ज करा दे.

इस के बाद देवेंद्र मुन्नालाल वकील और कुछ पड़ोसियों को साथ ले कर थाना गांधीपार्क पहुंचा और जयकुमार के खिलाफ अपनी नाबालिग बेटी प्रीति को भगा ले जाने का मुकदमा दर्ज करा दिया. यह मुकदमा 12 दिसंबर, 2013 में दर्ज हुआ था. मुकदमा दर्ज होने के बाद इस मामले की जांच एसआई अभय कुमार को सौंपी गई.

अभय कुमार ने जयकुमार को नाबालिग प्रीति को भगाने का दोषी मानते हुए जांच शुरू की तो देवेंद्र को लगा कि उस ने जो किया है, पुलिस उस बारे में जान नहीं पाएगी. लेकिन चिंता की बात यह भी थी कि प्रीति का वह क्या करे. अब उसे घर में रखना ठीक नहीं था. दूसरी ओर उसे पता भी चल गया था कि जयकुमार की हत्या हो चुकी है.

पूछताछ में प्रीति सच्चाई उगल सकती थी, इसलिए उस ने उसे धमकाया कि अगर उस ने किसी को भी यह बात बताई तो वह उस की भी हत्या कर के उस की लाश को जयकुमार की लाश की तरह रेल की पटरी पर डाल आएगा. प्रीति डर गई. उस ने पिता से वादा किया कि वह मर सकती है, लेकिन यह बात किसी को बता नहीं सकती.

अब प्रीति को छिपा कर रखना था. इस के लिए देवेंद्र ने प्रीति को थाना सादाबाद, जिला हाथरस के गांव करसोरा स्थित अपने साले प्रमोद कुमार की ससुराल भिजवा दिया. चूंकि प्रमोद उस के साथ जयकुमार की हत्या में शामिल था, इसलिए देवेंद्र जो चाहता था, उसे वैसा ही करना पड़ता था. प्रीति मामा की ससुराल पहुंच गई, जबकि पुलिस जयकुमार और प्रीति की तलाश में दरदर भटकती रही.

प्रीति से छुटकारा पाने के लिए देवेंद्र उस के लिए लड़का तलाशने लगा. थोड़ी कोशिश कर के थाना वृंदावन के मोहल्ला चंदननगर के रहने वाले पूरन शर्मा का बेटा राहुल उसे पसंद आ गया तो करसोरा से ही उस ने प्रीति की शादी राहुल से कर दी. प्रीति की यह शादी 27 फरवरी, 2014 को हुई.

इस तरह प्रीति को ससुराल भेज कर देवेंद्र निश्चिंत हो गया. मजे की बात यह थी कि वह शांत नहीं बैठा था. वह महीने, 15 दिनों में थाने पहुंच जाता और पुलिस से बेटी की तलाश के लिए गुहार लगाता. यही नहीं, वह फरीदाबाद में रहने वाले जयकुमार के घर वालों को भी धमकाता कि वे जयकुमार के बारे में पता कर के उस की बेटी को बरामद कराएं, वरना वह उन्हें शांति से जीने नहीं देगा.

भले ही जयकुमार का कत्ल हो गया था और प्रीति की शादी हो गई थी. फिर भी पुलिस का डर तो देवेंद्र को सताता ही रहता था. कहीं जयकुमार की हत्या का रहस्य खुल न जाए, इस बात से परेशान देवेंद्र एक बार फिर वकील मुन्नालाल से मिला. उस ने कहा कि अगर पुलिस को प्रीति के बारे में पता चल गया तो उस की परेशानी बढ़ सकती है. पुलिस उस पर शिकंजा कस सकती थी. अब तक प्रीति गर्भवती हो चुकी थी.

मुन्नालाल ने पूरी कहानी पर एक बार फिर नए सिरे से विचार किया. इस के बाद उस ने सलाह दी कि वह प्रीति को पुलिस के सामने पेश कर के उस से कहलवाए कि वह जयकुमार के बच्चे की मां बनने वाली है. वह उसे धोखा दे कर मथुरा रेलवे स्टेशन पर छोड़ कर कहीं भाग गया है. उस के बाद वह पिता के पास आ गई है.

प्रीति के अपहरण के मामले की जांच अब तक कई थानाप्रभारी कर चुके थे. लेकिन कोई मामले की तह तक नहीं पहुंच सका था. शायद उन्होंने कोशिश ही नहीं की थी. जबकि पुलिस ने कई बार फरीदाबाद जा कर जयकुमार की मां एवं रिश्तेदारों से पूछताछ की थी.

पूछताछ में जयकुमार की विधवा मां ने हर बार यही कहा था कि जयकुमार और प्रीति एकदूसरे को प्यार करते थे. दोनों को प्रीति के पिता देवेंद्र ने ही गायब किया है. मुकदमा दर्ज कराने के बाद देवेंद्र फरीदाबाद छोड़ कर बल्लभगढ़ में रहने लगा था. उस ने प्रीति को फोन कर के कहा कि वह सासससुर से लड़ाई कर के उस के यहां आ जाए. प्रीति पिता के हाथ की कठपुतली थी, इसलिए पिता ने जैसा कहा, उस ने वैसा ही किया.

इस की वजह यह थी कि वह नहीं चाहती थी कि उस के प्रेमसंबंधों की जानकारी उस की ससुराल वालों को हो. क्योंकि जानकारी होने के बाद वे उसे घर से निकाल सकते थे. पिता के कहने पर प्रीति ने सास से लड़ाई कर ली तो उसी दिन देवेंद्र उसे विदा कराने उस की ससुराल पहुंच गया.

वकील की सलाह के अनुसार देवेंद्र ने 1 सितंबर, 2015 को प्रीति को एसएसपी के सामने पेश कर दिया. प्रीति ने पुलिस के सामने वही सब कहा, जैसा उसे वकील ने सिखाया था. एसएसपी के आदेश पर प्रीति का मैडिकल कराया गया. जिस समय प्रीति को एसएसपी के सामने पेश किया गया था, उस समय थाना गांधीपार्क के थानाप्रभारी अमित कुमार थे. मजे की बात यह थी कि उन्होंने प्रीति से यह भी जानने की कोशिश नहीं की थी कि जयकुमार के साथ भागने के बाद वह उस के साथ कहांकहां रही.

पुलिस की देखरेख में ही प्रीति ने बच्चे को जन्म दिया. पुलिस ने अदालत में भी प्रीति के बयान करा दिए. वहां भी प्रीति ने वही कहानी सुना दी. अदालत ने प्रीति को उस के पिता को सौंप दिया. अब तक वैसा ही हो रहा था, जैसा देवेंद्र चाह रहा था. लेकिन इसी के बाद जब अलीगढ़ के एसएसपी बन कर राजेश पांडेय आए तो सब उलटा हो गया और वह पकड़ा गया.

मृतक जयकुमार के घर वालों को भी उस की हत्या की सूचना दे दी गई थी. पुलिस ने उस की मां को बुला कर जब जयकुमार के रखे सामान को दिखाया तो उस ने बेटे के जूते और कपड़ों की पहचान कर के फोटो में भी उस की शिनाख्त कर दी.

इस के बाद पुलिस ने प्रीति, देवेंद्र और प्रमोद को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. एसएसपी ने इस मामले का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 10 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की है, साथ ही थानाप्रभारी दिनेश कुमार दुबे को शाबाशी दी.

प्रीति की ससुराल वालों को जब सच्चाई का पता चला तो वे हैरान रह गए. प्रीति ने प्रेम क्या किया, अपनी तो जिंदगी बरबाद की ही, प्रेमी को भी मरवा दिया जो विधवा मां का एकलौता सहारा था.

तीन साल बाद खुला रहस्य – भाग 2

मां ने भले ही समझाया, लेकिन जयकुमार के प्यार में डूबी प्रीति को मां की बात समझ में नहीं आई. परेशान हो कर रीना ने सारी बात पति को बता दी. बेटी की आशिकी के बारे में सुन कर देवेंद्र तिलमिला उठा. वह मकान मालिक गंजू से मिला और उन से कहा कि वह जयकुमार को घर आने से मना करें, क्योंकि वह उस की बेटी प्रीति को बरगला रहा है.

‘‘आप का कहना ठीक है, लेकिन अपने किसी रिश्तेदार को मैं घर आने से कैसे रोक सकता हूं. आप अपनी बेटी को थोड़ा संभाल कर रखिए.’’ मकान मालिक गंजू ने कहा.

गंजू की इस बात से देवेंद्र ने खुद को काफी अपमानित महसूस किया. अब वह मकान मालिक से तो कुछ नहीं कह सकता था, लेकिन जयकुमार उसे जब भी मिलता, उसे धमकाता कि वह जो कर रहा है, ठीक नहीं है. वह उस की बेटी का पीछा छोड़ दे वरना उसे पछताना पड़ सकता है. लेकिन जयकुमार भी प्रीति के प्रेम में इस तरह डूबा था कि देवेंद्र की चेतावनी का उस पर कोई असर नहीं पड़ रहा था. जबकि देवेंद्र मन ही मन बौखलाया हुआ था.

प्रीति की अर्द्धवार्षिक परीक्षा की तारीख आ गई तो वह परीक्षा देने अपने मामा प्रमोद कुमार के यहां अलीगढ़ चली गई. उस के मामा अलीगढ़ के थाना गांधीपार्क की बाबा कालोनी में रहते थे. घर वाले तो यही जानते थे कि प्रीति बस से अलीगढ़ गई है, लेकिन घर से निकलने से पहले उस ने जयकुमार को फोन कर दिया था, इसलिए वह मोटरसाइकिल ले कर उसे रास्ते में मिल गया था. उस के बाद प्रीति उस की मोटरसाइकिल से अलीगढ़ गई थी.

मामा के घर रह कर प्रीति ने परीक्षा दे दी. उसी बीच प्रीति के मामामामी अपने एक रिश्तेदार के यहां शादी में चले गए तो घर खाली देख कर उस ने जयकुमार को फोन कर के अलीगढ़ बुला लिया. प्रेमिका के बुलाने पर घर में बिना किसी को कुछ बताए जयकुमार उस से मिलने अलीगढ़ पहुंच गया. प्रेमी को देख कर प्रीति का दिल बल्लियों उछल पड़ा. वह प्रेमी के आगोश में समा गई.

जयकुमार और प्रीति को उस दिन पहली बार एकांत और आजादी मिली थी, इसलिए उन्होंने सारी सीमाएं तोड़ दीं. ऐसे में जयकुमार ने प्रीति से वादा किया कि कुछ भी हो, हर हालत में वह उसे अपना कर रहेगा. प्रीति को भी प्रेमी पर पूरा विश्वास था. लेकिन उस दिन दोनों ने एक गलती कर दी. जयकुमार को प्रेमिका से मिल कर वापस आ जाना चाहिए था, लेकिन वह तो उस दिन और पिला दे साकी वाली स्थिति में था. प्रीति भी भूल गई थी कि अगले दिन मामामामी लौट आएंगे.

दोनों एकदूसरे में इस तरह खो गए कि सब कुछ भूल गए. याद तब आया, जब दरवाजे पर दस्तक हुई. प्रीति ने दरवाजा खोला तो मामामामी को देख कर सन्न रह गई. जयकुमार घर में ही था. प्रमोद ने अपने घर में जयकुमार को देखा तो पूछा, ‘‘यह कौन है?’’

‘‘यह जयकुमार है. मेरे मकान मालिक का साला.’’ प्रीति ने बताया.

प्रमोद को जब पता चला कि जयकुमार एक दिन पहले उस के घर आया था और प्रीति के साथ रात में रुका था तो उसे इस बात की चिंता हुई कि यह लड़का यहां क्यों आया था? उसे दाल में कुछ काला लगा तो उस ने जयकुमार को एक कमरे में बंद कर दिया और अपने बहनोई देवेंद्र को फोन कर के सारी बात बता दी. देवेंद्र उस समय उत्तराखंड के रुद्रपुर में था. उस ने कहा, ‘‘जब तक मैं आ न जाऊं, तब तक उसे उसी तरह कमरे में बंद रखना.’’

प्रीति डर गई. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि प्रेमी को छुड़ाने के लिए वह क्या करे. उस ने मामामामी से बहुत विनती की कि वे जयकुमार को छोड़ दें, लेकिन प्रमोद कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहता था, इसलिए उस ने जयकुमार को नहीं छोड़ा.

शाम को देवेंद्र अलीगढ़ पहुंचा तो उस ने पहले ही मन ही मन तय कर लिया था कि बेटी के इस प्रेमी के साथ उसे क्या करना है? उस ने रास्ते में ही शराब की बोतल खरीद ली थी और साले के यहां पहुंचने से पहले ही उस ने शराब पी कर मूड बना लिया था.

नशे में धुत्त वह साले के यहां पहुंचा तो जयकुमार को कमरे से निकाल कर बातचीत शुरू हुई. इस बातचीत में जयकुमार ने साफसाफ कह दिया कि वह प्रीति से प्यार करता है और उस से शादी करना चाहता है. यह सुन कर देवेंद्र का खून खौल उठा और वह जयकुमार की पिटाई करने लगा.

पिटाई करते हुए ही उस ने जयकुमार से कहा, ‘‘इस बार तुम ने जो किया, माफ किए देता हूं. अब दोबारा ऐसी गलती मत करना. चलो, हम तुम्हें दिल्ली जाने वाली बस में बिठा देते हैं. फरीदाबाद आऊंगा तो तुम्हारी मां से बात करूंगा.’’

प्यार में बड़ी उम्मीदें होती हैं, जयकुमार को भी लगा कि शायद प्रेमिका का बाप मां से बात कर के शादी करा देगा. लेकिन देवेंद्र के मन में तो कुछ और था. अब तक अंधेरा गहरा चुका था. देवेंद्र और प्रमोद जयकुमार को ले कर पैदल ही चलते हुए नगला मानसिंह होते हुए रेलवे लाइन की ओर नई बस्ती के अवतारनगर में रहने वाले अपने एक परिचित विनोद के घर पहुंचे.

विनोद ने चाय बनवाने के लिए कहा तो देवेंद्र ने सिर्फ पानी लाने को कहा. विनोद ने जयकुमार के बारे में पूछा तो देवेंद्र ने बताया कि यह उस के दोस्त का बेटा है. विनोद पानी ले आया तो प्रमोद और देवेंद्र ने शराब पी. नशा चढ़ा तो दोनों जयकुमार को ले कर रेलवे लाइन की ओर चल पड़े. अब तक काफी अंधेरा हो चुका था. जयकुमार कुछ समझ पाता, उस के पहले ही सुनसान पा कर दोनों ने उसे एक गड्ढे में गिरा दिया.

वह संभल भी नहीं पाया, उस के पहले ही दोनों ने उस की गला दबा कर हत्या कर दी. इस के बाद दोनों वहीं बैठ कर ट्रेन के आने का इंतजार करने लगे. थोड़ी देर बाद उन्हें ट्रेन आती दिखाई दी तो जयकुमार की लाश को उठा कर दोनों ने पटरी पर रख दिया. ट्रेन लाश के ऊपर से गुजर गई तो वह कई टुकड़ों में बंट गई.

देवेंद्र और प्रमोद ने राहत की सांस ली, क्योंकि अब कांटा निकल गया था. लेकिन अब क्या करना है, अभी देवेंद्र को इस बारे में सोचना था. उस ने जो किया था, उसे भले ही किसी ने नहीं देखा था, लेकिन उसे होशियार तो रहना ही था. सुबह प्रीति ने उस से पूछा, ‘‘पापा, जयकुमार चला गया क्या?’’

देवेंद्र ने उसे खा जाने वाली नजरों से घूरते हुए कहा, ‘‘तू अपनी पढ़ाई से मतलब रख. कौन कहां गया, इस से तुझे क्या मतलब?’’

प्रीति को शक हुआ. अगले दिन उस ने जयकुमार को फोन किया. लेकिन उस का तो फोन बंद था, इसलिए बात नहीं हो सकी. अब प्रीति की समझ में आ गया कि जयकुमार के साथ क्या हुआ है. वह बुरी तरह डर गई.

                                                                                                                                 क्रमशः

आशिक पति ने ली जान

तीन साल बाद खुला रहस्य – भाग 1

पिछले साल सन 2016 के सितंबर महीने में अलीगढ़ का एसएसपी राजेश पांडेय को बनाया गया तो चार्ज लेते ही उन्होंने पुलिस अधिकारियों की एक मीटिंग बुला कर सभी थानाप्रभारियों को आदेश दिया कि जितनी भी जांचें अधूरी पड़ी हैं, उन की फाइलें उन के सामने पेश करें. जब सारी फाइलें उन के सामने आईं तो उन में एक फाइल थाना गांधीपार्क में दर्ज प्रीति अपहरण कांड की थी, जिस की जांच अब तक 10 थानाप्रभारी कर चुके थे और यह मामला 12 दिसंबर, 2013 में दर्ज हुआ था.

राजेश पांडेय को यह मामला कुछ रहस्यमय लगा. उन्होंने इस मामले की जांच सीओ अमित कुमार को सौंपते हुए जल्द से जल्द खुलासा करने को कहा. अमित कुमार ने फाइल देखी तो उन्हें काफी आश्चर्य हुआ. क्योंकि इतने थानाप्रभारियों ने मामले की जांच की थी, इस के बावजूद मामले का खुलासा नहीं हो सका था. उन्होंने थानाप्रभारी दिनेश कुमार दुबे को कुछ निर्देश दे कर फाइल सौंप दी.

मामला काफी पुराना और रहस्यमयी था, इसलिए इसे एक चुनौती के रूप में लेते हुए दिनेश कुमार दुबे ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए अपनी एक टीम बनाई, जिस में एसएसआई अजीत सिंह, एसआई धर्मवीर सिंह, कांस्टेबल सत्यपाल सिंह, मोहरपाल सिंह और नितिन कुमार को शामिल किया.

फाइल का गंभीरता से अध्ययन करने के बाद उन्होंने मामले की जांच फरीदाबाद से शुरू की, क्योंकि प्रीति को भगाने का जिस युवक जयकुमार पर आरोप था, वह फरीदाबाद का ही रहने वाला था. दिनेश कुमार दुबे फरीदाबाद जा कर उस की मां संध्या से मिले तो उस ने बताया कि जयकुमार उस का एकलौता बेटा था. उस पर जो आरोप लगे हैं, वे झूठे हैं. उस का बेटा ऐसा कतई नहीं कर सकता. उस ने उस की गुमशुदगी भी दर्ज करा रखी थी.

संध्या से पूछताछ के बाद दिनेश कुमार दुबे को मामला कुछ और ही नजर आया. अलीगढ़ लौट कर उन्होंने 13 जनवरी, 2016 को प्रीति के पिता देवेंद्र शर्मा को थाने बुलाया, जिस ने जयकुमार पर बेटी को भगाने का मुकदमा दर्ज कराया था. पुलिस के सामने आने पर वह इस तरह घबराया हुआ था, जैसे उस ने कोई अपराध किया हो. जब सीओ अमित कुमार, एसपी (सिटी) अतुल कुमार श्रीवास्तव ने उस से जयकुमार के बारे में पूछताछ की तो पुलिस अधिकारियों को गुमराह करते हुए वह इधरउधर की बातें करता रहा.

लेकिन यह भी सच है कि आदमी को एक सच छिपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं. ऐसे में ही कोई बात ऐसी मुंह से निकल जाती है कि सच सामने आ जाता है. उसी तरह देवेंद्र के मुंह से भी घबराहट में निकल गया कि कहीं जयकुमार ने घबराहट में ट्रेन के आगे कूद कर आत्महत्या तो नहीं कर ली.

देवेंद्र की इस बात ने पुलिस अधिकारियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि इसे कैसे पता चला कि जयकुमार ने ट्रेन के आगे कूद कर आत्महत्या कर ली है. पुलिस ने दिसंबर, 2013 के ट्रेन एक्सीडेंट के रिकौर्ड खंगाले तो पता चला कि थाना सासनी गेट पुलिस को 7 दिसंबर, 2013 को ट्रेन की पटरी पर एक लावारिस लाश मिली थी.

इस के बाद पुलिस अधिकारियों ने देवेंद्र के साथ थोड़ी सख्ती की तो उस ने जयकुमार की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद उस ने जयकुमार की हत्या की जो कहानी सुनाई, उस की शातिराना कहानी सुन कर पुलिस हैरान रह गई. देवेंद्र ने बताया कि अपनी इज्जत बचाने के लिए उसी ने अपने साले प्रमोद कुमार के साथ मिल कर जयकुमार की हत्या कर दी थी. इस बात की जानकारी उस की बेटी प्रीति को भी थी.

इस के बाद पुलिस ने देवेंद्र शर्मा की बेटी प्रीति और उस के साले प्रमोद को भी गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में प्रीति और प्रमोद ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया था. तीनों की पूछताछ में जयकुमार की हत्या की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश के जिला अलीगढ़ के थाना गांधीपार्क के नगला माली का रहने वाला देवेंद्र शर्मा रोजीरोटी की तलाश में हरियाणा के फरीदाबाद आ गया था. उसे वहां किसी फैक्ट्री में नौकरी मिल गई तो रहने की व्यवस्था उस ने थाना सारंग की जवाहर कालोनी के रहने वाले गंजू के मकान में कर ली. उन के मकान की पहली मंजिल पर किराए पर कमरा ले कर देवेंद्र शर्मा उसी में परिवार के साथ रहने लगा था. यह सन 2013 के शुरू की बात है.

उन दिनों देवेंद्र शर्मा की बेटी प्रीति यही कोई 17-18 साल की थी और वह अलीगढ़ के डीएवी कालेज में 12वीं में पढ़ रही थी. फरीदाबाद में सब कुछ ठीक चल रहा था. देवेंद्र शर्मा की बेटी प्रीति जवान हो चुकी थी. मकान मालिक गंजू की पत्नी गुडि़या का ममेरा भाई जयकुमार अकसर उस से मिलने उस के यहां आता रहता था. वह पढ़ाई के साथसाथ एक वकील के यहां मुंशी भी था. इस की वजह यह थी कि उस के पिता शंकरलाल की मौत हो चुकी थी, जिस से घरपरिवार की जिम्मेदारी उसी पर आ गई थी. वह अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा भी रहा था.

जयकुमार अपनी मां संध्या के साथ जवाहर कालोनी में ही रहता था. फुफेरी बहन गुडि़या के घर आनेजाने में जयकुमार की नजर देवेंद्र शर्मा की बेटी प्रीति पर पड़ी तो वह उस के मन को ऐसी भायी कि उस से प्यार करने के लिए उस का दिल मचल उठा. अब वह जब भी बहन के घर आता, प्रीति को ही उस की नजरें ढूंढती रहतीं.

एक बार जयकुमार बहन के घर आया तो संयोग से उस दिन प्रीति गुडि़या के पास ही बैठी थी. जयकुमार उस दिन कुछ इस तरह बातें करने लगा कि प्रीति को उस में मजा आने लगा. उस की बातों से वह कुछ इस तरह प्रभावित हुई कि उस ने उस का मोबाइल नंबर ले लिया.

जयकुमार देखने में ठीकठाक तो था ही, अपनी मीठीमीठी बातों से किसी को भी आकर्षित कर सकता था. उस की बातों से ही आकर्षित हो कर प्रीति ने उस का मोबाइल नंबर लिया था. इस के बाद दोनों की बातचीत मोबाइल फोन से शुरू हुई तो जल्दी उन में प्यार हो गया. फिर खतरों की परवाह किए बिना दोनों प्यार की राह पर बेखौफ चल पड़े. दोनों घर वालों की चोरीछिपे जब भी मिलते, घंटों भविष्य के सपने बुनते रहते.

जल्दी ही प्रीति और जयकुमार प्यार की राह पर इतना आगे निकल गए कि उन्हें जुदाई का डर सताने लगा था. उन के एक होने में दिक्कत उन की जाति थी. दोनों की ही जाति अलगअलग थी. उन की आगे की राह कांटों भरी है, यह जानते हुए भी दोनों उसी राह पर आगे बढ़ते रहे.

देवेंद्र गृहस्थी की गाड़ी खींचने में व्यस्त था तो बेटी आशिकी में. लेकिन कहीं से प्रीति की मां रीना को बेटी की आशिकी की भनक लग गई. उन्होंने बेटी को डांटाफटकारा, साथ ही प्यार से समझाया भी कि जमाना बड़ा खराब है, इसलिए बाहरी लड़के से बातचीत करना अच्छी बात नहीं है. अगर किसी ने देख लिया तो बिना मतलब की बदनामी होगी.

                                                                                                                                   क्रमशः

माँ का प्रेमी गया जान से

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद के गांव नेखुआ बनवीरकाछ में 27 फरवरी, 2023 की सर्द रात को अचानक एक चीख सन्नाटे को चीरती हुई निकल गई थी. चीख काफी तेज थी. रात का पहला पहर ही था और गांव के लोग अपनेअपने घरों में सोने की तैयारी कर रहे थे. अचानक तेज चीख सुन कर कुछ लोग घरों से बाहर निकल आए.

“चीख किधर से आई?’’ एक व्यक्ति ने पड़ोसी से पूछा, जो हड़बड़ाता हुआ घर से बाहर निकला था. जवाब देने के बजाय उस ने भी सवाल कर दिया, ‘‘कौन चीखा?…क्या हुआ इतनी रात को?’’

“अरे लगता है, चीखने की आवाज खजांची के घर से आई है…’’ उसी वक्त तीसरा व्यक्ति बोल पड़ा.

“हां…हां… चलो, चल कर देखते हैं. न जाने क्या हुआ उस के घर पर?’’ पहला व्यक्ति बोला.

“लगता है कोई गिर पड़ा है.’’

“जो भी हुआ हो, चलो देखते हैं.’’ कहते हुए तीनों ग्रामीण खजांची वर्मा के घर की ओर जाने के लिए मुड़ गए .तभी उन्होंने खजांची के घर की तरफ से आते हुए कुछ लोगों को देखा. वे कितने लोग थे, गिनती नहीं कर पाए. उन्हें लगा कि वे भी चीख सुन कर ही उस के घर पर आए होंगे. लेकिन यह क्या वे तो अंधेरे में ही कहीं गुम हो गए. खजांची के घर जाने वाले ग्रामीण समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर बात क्या है?

खजांची के बारे में जानने के लिए सभी की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी. थोड़ी देर में ही वे खजांची के घर के बाहर पहुंच गए. वहां सन्नाटा था. दरवाजा भी बंद था. अंधेरा भी था. कुछ पल ठिठक कर उन लोगों ने घर के भीतर से किसी के कराहने की आवाज सुनी.

लोगों ने बुलाई पुलिस

पहले तेजी से चीखने और अब कराहने की आवाज सुन कर सभी सशंकित हो गए. उन्हें कोई गड़बड़ी या अनहोनी की आशंका हुई. खजांची के घर के बाहर मौजूद ग्रामीणों के बीच खुसरफुसर होने लगी. आवाज देने पर भी घर से कोई बाहर निकल नहीं रहा था और वे रात होने के चलते घर के अंदर जा नहीं पा रहे थे. ऐसे में ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना देना सही समझा. आपसी निर्णय के बाद उन्होंने लीलापुर थाने को किसी अनहोनी की आशंका की सूचना दे दी. कुछ देर बाद ही वहां पुलिस भी आ गई.

कुछ पुलिसकर्मियों के साथ पहुंचे एसएचओ एसएचओ सुभाष कुमार यादव ने पहले खजांची के घर के बाहर जमा लोगों से बात की. थाने में काल करने वाले से मामले की जानकारी ली. वहां मौजूद लोगों ने खजांची के घर में होने वाली गतिविधि के बारे में अनभिज्ञता जताई. आखिर में साथ आए सिपाहियों ने खजांची के बंद दरवाजे को खटखटाना शुरू किया. वे कुंडी को बारबार खडक़ा कर आवाज देने लगे. आवाज देने पर अंदर से एक घबराई हुई महिला की आवाज आई, ‘‘कौन है?’’

एसएचओ यादव ने अपना परिचय दे कर तुरंत दरवाजा खोलने को कहा. भीतर से दोबारा आवाज आई, ‘‘क्या.. पुलिस? इतनी रात को? क्या बात है साहब?’’

“हांहां! हमें सूचना मिली है कि तुम्हारे घर में कोई घटना हो गई है, इसलिए आना पड़ा. बाहर आओ, घर में कोई मर्द नहीं है क्या?’’ यादव के कहने पर दरवाजा थोड़ा खुला. अंदर से एक औरत झांकने लगी. बाहर खड़ी पुलिस ने बाहर से दरवाजे को धक्का दिया और पूरा दरवाजा खुल गया. दरवाजा खुलते ही एसएचओ यादव महिला पुलिस के साथ घर में घुस गए. उन के साथ कुछ ग्रामीण भी चले गए. अंदर का नजारा देख कर सभी हैरान रह गए.

वहां का माजरा देख कर कुछ पल के लिए सभी की सांसें थम सी गईं. सभी अवाक रह गए. घर में जमीन पर एक युवक मरणासन्न लहूलुहान पड़ा था, वह कराह रहा था. उस का एक हाथ कटा हुआ था और दोनों आंखें किसी नुकीली चीज से फोड़ी गई थीं. युवक की दशा देख कर एसएचओ ने फौरन उसे इलाज के लिए अस्पताल भिजवाने का इंतजाम करवाया. लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में युवक की मौत हो गई.

मृतक के भाई ने लिखाई रिपोर्ट

कुछ घंटे में ही खजांची के घर मरणासन्न युवक की बात पूरे गांव में फैल गई. जल्द ही उस की पहचान भी हो गई. वह कोई और नहीं, उसी गांव का 32 वर्षीय अभिनंदन सिंह था. इस खबर के फैलते ही अभिनंदन के घर वाले भी खजांची के घर आ गए. गांव का माहौल पूरी तरह से तनावपूर्ण हो गया था. पुलिस को अभिनंदन के घर वालों ने बताया कि उसे फोन कर खजांची के घर बुलाया गया था. मौका देख कर खजांची पत्नी समेत मौके से फरार हो गया. उन की तलाश की जाने लगी, लेकिन वे दोनों नहीं मिल पाए. दोनों की तलाशी के लिए पुलिस टीम लगा दी गई. इस के साथ ही यादव ने मामले की पूरी जानकारी उच्चाधिकारियों को भी दे दी. मौके की आवश्यक काररवाई करने के बाद वह थाने लौट आए.

पुलिस ने उसी रात मृतक अभिनंदन सिंह के बड़े भाई आनंद सिंह की तरफ से खजांची वर्मा, उस की पत्नी सपना, बेटे संजय वर्मा (28 साल), सपना के भाई व उस के साथियों शंकर वर्मा, सुरेश वर्मा, कमलेश वर्मा सहित 8 लोागें के खिलाफ भादंवि की धाराओं 147, 148, 149 और 302 के तहत रिपोर्ट लिखवा दी. लाश को भी पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. मामले की जानकारी पा कर एसपी (प्रतापगढ़) सतपाल अंतिल, एएसपी (पश्चिमी) रोहित मिश्रा ने मौके का मुआयना किया. पीडि़त परिवार से मिल कर सारी जानकारी हासिल की तो मामले की तह में प्रेम प्रसंग की बात सामने आई.

पुलिस अधिकारियों ने अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए फौरन टीमें गठित कर कड़े निर्देश जारी कर दिए. पुलिस टीम को तीसरे दिन ही सफलता मिल गई. एसएचओ यादव ने पहली मार्च, 2023 को मुखबिर की सूचना पर देवीघाट पुल भुवालपुर के पास से एक अधेड़ महिला के साथ युवक को पकड़ लिया. पूछताछ में पता चला कि औरत खजांची वर्मा की पत्नी सपना (50) और युवक उस का बेटा संजय वर्मा (28) था. वे बनवीर काछनेखुआ निवासी हैं. उन्हें थाने ला कर पूछताछ की गई. थोड़ी सख्ती के बाद ही उन्होंने अभिनंदन मर्डर केस का खुलासा कर दिया. उन्होंने अभिनंदन सिंह की हत्या की जो कहानी बताई, वह प्रेम और अपराध से जुड़ी थी. उन की कहानी इस प्रकार निकली—

अधेड़ उम्र में सपना को हुआ प्यार

उत्तर प्रदेश का प्रतापगढ़ जिला राजनैतिक और सामाजिक गतिविधियों की गहमागहमी से भरा रहने वाला इलाका है. वहीं नेखुआ बनवीरकाछ गांव में मिश्रित आबादी है. उन में खजांची वर्मा का भी परिवार रहता है. उसी गांव में अभिनंदन सिंह (32) भी अपने परिवार के साथ रहता था. वह 2 बच्चों का पिता भी था. दुबलेपतले कदकाठी का अभिनंदन खुशमिजाज और मिलनसार व्यक्तित्व का युवक था. वह सुखीसंपन्न परिवार से था. उस के खजांची के परिवार से भी अच्छे संबंध थे.

अभिनंदन की मुलाकात सपना से भी होती रहती थी. वह 50 की उम्र हो जरूर गई थी, लेकिन कदकाठी की वजह से 10 साल कम उम्र की दिखती थी. उस के बदन की कसक बरकरार थी. हर किसी के साथ गर्मजोशी के साथ मिलती थी. हंसहंस कर बातें करने और अपनी मनमोहिनी अदाओं से सब को लुभा लेती थी. अकसर जब वह हंसती थी, तब उस के चेहरे की रौनक और भी बढ़ जाती थी. खेती के काम में खेतों पर भी आतीजाती रहती थी.

गांव के कई युवा उसे प्यार से भाभी कह कर बुलाते थे. उन में अभिनंदन भी था. बात कुछ साल पहले की है, सपना खेतों से घर की ओर लौट रही थी, उस के सिर पर घास का गट्ïठर था. अचानक उसे सामने से अभिनंदन आता हुआ दिखा. गट्ïठर भारी था, सिर पर संभल नहीं रहा था. उस ने अभिनंदन से गट्ïठर नीचे उतारने के लिए मदद मांगी, ताकि थोड़ी देर पगडंडी पर बैठ कर सुस्ता ले. अभिनंदन ने उस की मदद की और सिर से घास का गट्ïठर उतार दिया. तभी वह थोड़ा लडख़ड़ा गई.

अभिनंदन ने उसे संभालते हुए पकड़ लिया. इसी दौरान उस का हाथ सपना के वक्षों से छू गया. सपना शरमा गई, लेकिन उस ने इस का जरा भी बुरा नहीं माना. अपना आंचल संभालती हुए मुसकरा दी. हालांकि ऐसा अभिनंदन से भी अनजाने में हुआ था. फिर उस ने जमीन पर बैठते हुए अभिनंदन को भी हाथ पकड़ कर बिठा लिया. अभिनंदन झिझकते हुए बैठ गया. थोड़ा सांस लेते हुए बोला, ‘‘बहुत भारी गट्ïठर था. इतना भारी मत लिया करो…गरदन में मोच आ सकती है.’’

“अरे क्या करूं, काम तो करना है. यह तो रोज का हो गया है.’’ सपना बोली.

“इस गट्ïठर के 2 बना दूं क्या?’’ अभिनंदन ने हमदर्दी जताई.

“अरे नहीं, थोड़ी देर बैठूंगी, उस के बाद सिर पर उठा देना…वैसे तुम कहां से आ रहे थे?’’ सपना बोली.

“कुछ काम के लिए बाजार चला गया था, वहीं से लौट रहा था.’’ अभिनंदन बोला.

“जब भी बाजार जाना हो तो मुझ से एक बार मिल लेना. मुझे भी कुछ मंगवाना होता है.’’

“तुम्हें बता दूंगा. कहो तो गट्ïठर सिर पर उठा कर रख दूं या घर तक पहुंचा दूं?’’ अभिनंदन का इतना कहना ही था कि सपना बोली, ‘‘क्या देवरजी, इतनी जल्दी जाने की क्यों पड़ी है. थोड़ी देर बैठते हैं. बाते करते हैं.’’

अभिनंदन उस के कहने पर वहीं बैठ गया. दोनों कुछ समय तक बैठे रहे. इधरउधर की बातें करते रहे. थोड़ी देर बाद अभिनंदन ने सपना के सिर पर गट्ïठर उठा दिया और लंबे कदमों से आगे बढ़ गया. सपना आवाज दे कर बोली, ‘‘शाम को घर पर आना तुम से कुछ काम है.’’

अवैध संबंधों की फैल गई बात

अभिनंदन को भी क्या सूझी शाम को सपना के घर जा धमका. सपना ने भी उस की खूब खातिरदारी की. जाने लगा तब हाथ में कुछ पैसे पकड़ाती हुई बाजार से अपने सामान की एक लिस्ट पकड़ा दी. अभिनंदन लिस्ट खोल कर पढऩे लगा, लेकिन हैंडराइटिंग समझ में नहीं आई, तब उसे पढ़ कर बताने को कहा. सपना उस की हाथ से लिस्ट ले कर पढऩे लगी. उस में उस के कुछ निजी इस्तेमाल के सामान थे. अभिनंदन ने झेंपते हुए लिस्ट अपनी जेब में रख ली और चला गया.

पहले दिन की 2 मुलाकातों ने सपना और अभिनंदन के दिल के तार झनझना दिए थे. उन के दिल में एकदूसरे की भावनाओं ने थोड़ी जगह बना ली थी. उस के बाद से दोनों जब भी मिलते, उन की मुलाकातें काफी हसीन और रंगीन बातों से शुरू होती थीं. बातोंबातों जब कभी अभिनंदन सपना के रूपरंग और मादकता की तारीफ करता, तब सपना इठलाने लगती थी. मस्त अदा से मजाकिया अंदाज में जवाब देती और अभिनंदन खुश हो जाता था. दोनों बहुत जल्द ही काफी खुल गए थे. मौका देख कर अभिनंदन ने सपना के साथ शारीरिक संबंध भी बना लिए.

सपना और शादीशुदा बालबच्चेदार अभिनंदन की उम्र में काफी अंतर था. अभिनंदन बांका युवक था, जबकि सपना अधेड़ उम्र की थी. दोनों यौन पिपासा से भरे हुए थे. बावजूद इस के दोनों को जब भी समय मिलता, 2 जिस्म एक जान हो जाया करते थे.

मां के प्रेमी का किया मर्डर

दोनों का मिलना दिनप्रतिदिन बढ़ता चला गया. नतीजा यह हुआ कि उन के इश्क के चर्चे गांव में एक कान से होते हुए दूसरे कान तक फैल गए. यह बात अभिनंदन और सपना के घरवालों के कानों तक भी जा पहुंची. फिर क्या था, अच्छाखासा विवाद खड़ा हो गया. वहीं दोनों का चोरीछिपे मिलना जारी रहा. इस की भनक जब खजांची और उस के बेटे संजय को लगी, तब वे बौखला गए. इस से निपटने के लिए दोनों ने एक गहरी साजिश रची.

उन्होंने सजिश के तहत ही 27 फरवरी, 2023 की रात अभिनंदन को सपना से फोन करवा कर बुला लिया. सपना भी बहुत बदनाम हो चुकी थी. वह भी अब अभिनंदन से पीछा छुड़ाना चाहती थी. उसे भी अपने पति और बेटे की साजिश की भनक लग गई थी. अभिनंदन सपना के बुलाने पर भागाभागा चला आया. घर वाले उस का इंतजार कर रहे थे. जैसे ही अभिनंदन आया, उस पर घर वालों ने मिल कर लाठी, डंडा, कुल्हाड़ी से वार कर दिया था, जिस से वह मरणासन्न हो गया था.

उसे ठिकाने लगाने की बात हो ही रही थी कि तभी गांव वालों को भनक लग गई थी और पुलिस मौके पर आ गई थी. पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ करने के बाद उन की निशानदेही पर कुल्हाड़ी और डंडा, सफेद कपड़ा बरामद कर लिया गया. पुलिस ने दोनों मांबेटे को सक्षम न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायायिक हिरासत में ले कर जेल भेज दिया गया.

कहानी लिखे जाने तक पुलिस अन्य फरार हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी करने में जुटी हुई थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

ज्योति ने बुझाई पति की जीवन ज्योति – भाग 4

सीसीटीवी कैमरे लग जाने से ज्योति और संजय डर गए. संजय और ज्योति का मिलन भी बंद हो गया, लेकिन ज्योति शातिरदिमाग की थी. उस ने प्रेमी से मिलन का दूसरा रास्ता निकाल लिया. वह सामान खरीदने के बहाने घर से निकलती और कस्बा के होटल में रूम बुक करा कर संजय को बुला लेती, फिर मिलन कर वापस आ जाती.

घर के बाहर जाने को ले कर ज्योति और प्रदीप में खूब बहस होती और मारपीट भी हो जाती. ज्योति कहती तुम मेरे पांव में बेडिय़ां डालना चाहते हो, लेकिन मैं स्वतंत्र जीना चाहती हूं. मैं तुम्हारा जुल्म बरदाश्त नहीं करूंगी.

घर में कलह के कारण प्रदीप परेशान रहने लगा. वह शराब भी अधिक पीने लगा. संपत्ति को ले कर वह अपने छोटे भाई संदीप चौरिहा से भी भिड़ जाता और मारपीट करता. मां को भी खरीखोटी सुनाता. जमीन के एक टुुकड़े को ले कर उस का विवाद चल रहा था. मां उस टुकड़े को संदीप को देना चाहती थी, जबकि प्रदीप उस पर अपना अधिकार जमा रहा था.

ज्योति अब तक पति की शराबखोरी, मारपीट व शक से ऊब चुकी थी. वह पति से छुटकारा पा कर प्रेमी संजय सिंह के साथ खुशहाल जीवन बिताने के सपने संजोने लगी थी. यही नहीं, वह पति को हलाल कर उस की सरकारी नौकरी तथा संपत्ति पर भी कब्जा करना चाहती थी. इस के लिए वह हर रोज तानेबाने बुनने लगी थी.

इधर ज्योति और प्रदीप में इतनी ज्यादा दरार पड़ गई थी कि उन का झगड़ा हर रोज किसी न किसी बात को ले कर होने लगा था. प्रदीप घर में खाना भी नहीं खाता था और बाजार से खाना ले कर घर आता था. वह पहले शराब पीता, ज्योति को गालियां बकता फिर खाना खाता था.

पति के मर्डर की रची साजिश

17 अप्रैल, 2023 की सुबह अवैध संबंधों को ले कर ज्योति और प्रदीप में खूब झगड़ा हुआ. मारपीट कर जब प्रदीप कालेज चला गया तो ज्योति ने संजय को फोन कर घर बुला लिया. उस ने संजय से स्पष्ट कहा कि वह यदि उसे अपनी बनाना चाहता है तो उसे उस के पति को ठिकाने लगाना होगा. उस की मौत के बाद उसे सरकारी नौकरी तथा संपत्ति मिल जाएगी. फिर वह उस से शादी कर जीवन भर ऐश करेगी.

चूंकि संजय सिंह ज्योति का दीवाना था, इसलिए वह ज्योति के पति प्रदीप चौरिहा की हत्या करने को राजी हो गया. इस के बाद दोनों ने मिल कर हत्या की योजना बनाई. संजय सिंह ने हत्या की इस योजना में अपने दोस्त राघवेंद्र सिंह को भी शामिल कर लिया. वह बांदा जिले के थाना मैलानी के रसड़ा गांव का रहने वाला था. दोस्ती और पैसों के लालच में वह उस का साथ देने को राजी हो गया.

योजना के तहत संजय सिंह ने फोन कर राघवेंद्र सिंह को अतर्रा बुला लिया. फिर दोनों ने मिल कर एक तेजधार वाला चाकू अतर्रा बाजार से खरीदा और उसे सुरक्षित रख लिया. रात 10 बजे दोनों ने शराब पी और होटल में खाना खाया. फिर वह नरैनी रोड आए और ज्योति के फोन का इंतजार करने लगे.

इधर गुस्से में आगबबूला प्रदीप चौरिहा देर शाम खाना व शराब की बोतल ले कर घर आया. कमरे में बैठ कर उस ने शराब पी और ज्योति को खूब गालियां बकीं. उस के बाद वह आधाअधूरा खाना खा कर पलंग पर पसर गया. प्रदीप जब नशे में खर्राटे भरने लगा तो ज्योति ने योजना के तहत सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए और डीवीआर गायब कर दिया.

इस के बाद वह दूसरे कमरे में आ कर लेट गई. उस ने दोनों बेटियों को भी सुला दिया. रात 12 बजे जब सन्नाटा पसर गया, तब ज्योति ने संजय सिंह को फोन कर घर बुलाया. संजय अपने दोस्त राघवेंद्र के साथ घर आया तो ज्योति ने चुपके से पीछे वाला दरवाजा खोल कर उन दोनों को घर के अंदर कर लिया.

रात 2 बजे के लगभग ज्योति चौरिहा, संजय सिंह और राघवेंद्र सिंह प्रदीप के कमरे में पहुंचे. ज्योति और राघवेंद्र सिंह ने गहरी नींद सो रहे प्रदीप के पैर दबोच लिए तथा संजय सिंह ने उस का गला रेत दिया. चूंकि लाश ठिकाने लगाना नामुमकिन था, अत: उन तीनों ने प्लान बी तैयार किया. इस प्लान के तहत संजय सिंह ने ज्योति को दूसरे कमरे में बंद कर दिया, फिर दोनों फरार हो गए.

प्लान के तहत ज्योति ने सुबह दरवाजा पीटना शुरू किया तथा प्रदीप को आवाज दी. उस के बाद ज्योति ने किराएदार राखी राठी को फोन कर बुलाया और बाहर से बंद दरवाजा खुलवाया. राखी के साथ ज्योति जब पति के कमरे में गई तो पलंग पर पति की लाश देख कर वह रोनेधोने का नाटक करने लगी.

21 अप्रैल, 2023 को पुलिस ने हत्यारोपी ज्योति चौरिहा, संजय सिंह तथा राघवेंद्र सिंह को बांदा कोर्ट में पेश किया, जहां से उन को जिला जेल भेज दिया गया. पिता की हत्या व मां के जेल जाने से मासूम दोनों बेटियां सहम गईं. वे दोनों दादी निर्मला देवी के संरक्षण में रह रही हैं.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

संगीता के प्यार की झंकार – भाग 3

अवशिष्ट को जब संगीता के गांव से लौट आने की जानकारी मिली, तब वह भागाभागा उस से मिलने आ गया. उस वक्त घर पर श्रीराम भी था. संगीता ने पति के सामने ही उसे रूखेपन के साथ कहा कि वह श्रीराम के रहने पर ही यहां आए. इस पर श्रीराम और अवशिष्ट चुप रहे. जैसे ही श्रीराम कुछ मिनट के लिए कमरे से बाहर गया अवशिष्ट ने जेब से एक मोबाइल निकाल कर संगीता को पकड़ा दिया. बोला, ‘‘इसे छिपा कर रखना. जब बात करनी हो तो इसी से फोन करना.’’

उस रोज चायनाश्ते के बाद अवशिष्ट चला गया. कुछ दिन बीत गए. इस बीच जब श्रीराम ड्यूटी पर होता था तब वह अवशिष्ट के दिए फोन से बातें करती. अस्पताल में श्रीराम की ड्यूटी शिफ्ट में होती थी. उस रोज उस की ड्यूटी रात को होने वाली थी. अवशिष्ट को इस की सूचना संगीता ने फोन कर दे दी और उसे अपने घर पर बुला लिया.

शाम ढलते ही अवशिष्ट आ गया. उस से काफी देर तक बातें कीं. आगे की योजना बनाई. रात के 8 बजने वाले थे. संगीता ने अवशिष्ट को रात में वहीं रुकने के लिए कहा.

संगीता ने प्रेमी के साथ गटके पैग

अवशिष्ट तुरंत बाजार गया और बच्चों के लिए खानेपीने का कुछ सामान ले आया. साथ में शराब की एक बोतल भी खरीद लाया. पहले भी वह श्रीराम के साथ बैठ कर कई बार शराब की महफिल जमा चुका था.

इस में संगीता भी साथ दिया करती थी. उस रोज भी वह शराब की बोतल देख कर खुश हो गई. काफी दिनों बाद अवशिष्ट के साथ पैग लगाने का मौका जो मिल गया था. वह भी अकेले में. अवशिष्ट ने फटाफट शराब के 2 पैग गटक लिए और कमरे में पड़े बैड पर पसर गया. थोड़ी देर में संगीता प्लेट में कुछ नमकीन ले आई. गिलास खाली देख कर बोली, ‘‘अकेलेअकेले गटक लिए.’’

अवशिष्ट लेटालेटा बोला, ‘‘एक और बना दो.’’

संगीता गिलास में 2 पैग शराब डालने के बाद अपने साथ गिलास में एक पैग बना लिया. गिलास को छोटे टेबल पर रख कर अवशिष्ट को उठने के लिए कहा. अवशिष्ट ने उठने के बजाए अपना हाथ बढ़ा दिया, ‘‘ये लो, खींच कर उठाना जरा.’’

संगीता मुसकराती हुई उस का हाथ खींचने लगी, लेकिन वह अपनी ताकत लगाती कि इस से पहले अवशिष्ट ने उसे ही खींच कर अपने ऊपर गिरा लिया, ‘‘अरे..अरे, यह क्या करते हो…’’ कहती हुई संगीता अवशिष्ट के शरीर पर गिर पड़ी. संगीता उठने का प्रयास करने लगी. हालांकि अवशिष्ट की मदद से ही वह उठ पाई और अपने अस्तव्यस्त कपड़े को संभालने लगी.

इस क्रम में अवशिष्ट की निगाह उस की मांसल शरीर पर गई. एक नजर उस ने उभार पर भी डाली और दूसरी नजर उस की शरमाई हुई आंखों पर. संगीता ने चुपचाप शराब का गिलास उसे पकड़ा दिया.

‘‘अपना गिलास तो उठाओ. चीयर्स करते हैं,’’ अवशिष्ट बोला. झेंपती हुई संगीता ने अपना गिलास उठा लिया और चीयर्स करने के बाद उन्होंने अपनेअपने गिलास को एक साथ होंठों से लगा लिया.

उस के बाद संगीता ने 3 और पैग बनाए. उन्होंने नमकीन खाई. चीयर्स किया फिर पैग दर पैग गटकते रहे. अवशिष्ट पर शराब का नशा छाने लगा था, जबकि संगीता पर शराब के साथसाथ यौवन का नशा भी छा चुका था. दोनों कब दो जिस्म एक जान हो गए, पता ही नहीं चला.

आधी रात को जब संगीता को होश आया तब उस ने खुद को अवशिष्ट की बलिष्ठ बाहों में पाया. लंबे अरसे के बाद उस ने अपनी कामुकता को इतना शांत महसूस किया था. अवशिष्ट की भी आंखें खुल चुकी थीं. उसे भी संगीता के समर्पण को ले कर आश्चर्य हुआ.

दोनों एकदूसरे से अलग हुए. अपनेअपने कपड़े पहने और बैठ कर इधरउधर की बातें करने लगे. संगीता ने पति को ले कर आशंका जताई. चिंतित हो कर बोली, ‘‘हमारे संबंध के बारे में श्रीराम को नहीं मालूम पड़ना चाहिए, वरना वह हमें कहीं का नहीं छोड़ेगा.’’

‘‘उसे कैसे मालूम होगा?’’ अवशिष्ट बोला.

हालांकि सवाल तो दोनों के मन में था कि वे श्रीराम की नजरों से बचते हुए इस नए रिश्ते को कायम कैसे रखें. इस का हल संगीता ने ही निकाला कि वे चोरीछिपे मिलेंगे. उसे छिपा कर फोन पर बातें होंगी.

वे बातों में इतने खो गए कि उन्हें पता ही नहीं चला सुबह के 4 बजने वाले हैं. वे अपने संबंधों के आड़े आने वाली समस्या का समाधान निकालने लगे थे, तभी दरवाजा खटखटाने की आवाज आई.

संगीता ने ‘कौन है’ पूछा तो बाहर से श्रीराम की आवाज आई. उस ने भाग कर शराब की बोतल, नमकीन के प्लेट, गिलास आदि हटा कर बिस्तर ठीक किया और दरवाजा खोला. अवशिष्ट श्रीराम को आया देख कर सकपका गया. श्रीराम भी उसे घर में देख कर पूछ बैठा, ‘‘तुम यहां? रात को यहीं थे?’’

‘‘अरे, नहीं. मैं तो अभीअभी आया हूं. तुम्हारे बारे में पूछ ही रहा था. असल में मेरी गाड़ी चौराहे के पास ही खराब हो गई थी. मैं ने सोचा कि तुम से किसी मैकेनिक की मदद मिल जाएगी. यहां तुम्हारी जानपहचान का कोई मैकेनिक होगा ही, इसलिए आ गया.’’ अवशिष्ट ने रुकरुक कर अपनी बात पूरी की.

संगीता आश्चर्य से उस का चेहरा देखने लगी. श्रीराम बोला, ‘‘अभी तो नहीं, सुबह 9 बजे के करीब ही मैकेनिक मिल पाएगा. तब तक तुम यहीं रुक जाओ.’’

‘‘नहींनहीं, मैं टैंपो से घर चला जाता हूं, सुबह तो होने वाली ही है.’’ कहता हुआ अवशिष्ट चला गया. उस के जाने के बाद श्रीराम ने गुस्से में संगीता से पूछा, ‘‘सचसच बताओ, वह यहां कब आया था? संगीता ने हाथ जोड़ लिए. माफी मांगते हुए बोली, ‘‘उस ने जो बताया सही था. मेरा उस के साथ कोई नाजायज संबंध नहीं है, जैसा तुम समझ रहे हो.’’

उस वक्त तो श्रीराम और ज्यादा कुछ नहीं बोला. सिर्फ हिदायत दी कि आगे से वह उसे अवशिष्ट के साथ देखना नहीं चाहता है.

पति से दूरियां, प्रेमी से नजदीकियां

उस के बाद अवशिष्ट कुल 2 महीने तक श्रीराम की नजरों से छिपा रहा, लेकिन संगीता से उस का मिलना बंद नहीं हुआ. वह श्रीराम के नहीं रहने पर अवशिष्ट को बुला लेती थी. इस तरह से उन के बीच नाजायज रिश्ते की रेल चलती रही. पति की नजरों में अच्छी बनी रहने के लिए वह उस की हर बात मान लेती थी.

इस की जानकारी श्रीराम को भी हो गई थी, लेकिन अपनी बदनामी के डर से चुप लगाए हुए था. धीरधीरे उस ने संगीता को सही रास्ते पर लाने की काफी कोशिशें कीं, मगर संगीता पर तो इश्क का भूत और जिस्म का नशा सवार था.

जब कभी पति शारीरिक संबंध के लिए कहता तो सिरदर्द का बहाना बना लेती थी. जबकि वह प्रेमी संग गुलछर्रे उड़ाया करती थी. शर्मसार श्रीराम उन के बीच के रिश्ते को रोक पाने में असफल था. वह विवश भी था. धीरेधीरे अवशिष्ट पहले की तरह बेधड़क संगीता के पास आनेजाने लगा.

फिर से अवशिष्ट को ले कर घर में श्रीराम और संगीता के बीच कलह होने लगी. एक दिन श्रीराम दोपहर के समय घर पहुंचा, तो संगीता को आधेअधूरे कपड़े में पाया. उस वक्त अवशिष्ट भी मौजूद था. उस ने उसे  काफी भलाबुरा कहा. उस के जाने के बाद संगीता को भी समझाया.

घर में रोजरोज के कलह से बचने के लिए संगीता जरूरी काम का बहाना बना कर मायके चली गई. मायके वालों को जब संगीता के अवैध रिश्ते के बारे में जानकारी मिली, तब उन्होंने भी उसे समझाने की कोशिश की. फिर वह मायके से वापस आ गई. लखनऊ आते ही उस का पुराना खेल फिर शुरू हो गया.

अगली बार जब संगीता और अवशिष्ट मिले, तब उन्होंने अपने भविष्य की योजना बनाई कि कैसे श्रीराम से छुटकारा पाया जाए. संगीता ने कहा कि श्रीराम के रहते एक साथ बगैर रोकटोक के सुखशांति से जीवन गुजारना मुश्किल है. अवशिष्ट ने जब पूछा कि क्या किया जाना चाहिए, तब संगीता ने 2 प्रस्ताव रखे कि कहीं भाग चलें या फिर श्रीराम को रास्ते से हटाने का वही कोई तरीका बताए. दोनों की किसी भी बात पर रजामंदी नहीं बनी.

अवशिष्ट ने संगीता को सपने दिखाते हुए कहा कि वह उस के कहने पर श्रीराम को हमेशा के लिए रास्ते से हटा देगा. इस से उस के जीवन भर के लिए कांटा तो दूर हो जाएगा. साथ ही उस के मरने के बाद मकान, प्लौट, धन उस के नाम हो जाएगा. यहां तक कि अनुकंपा पर उसे नौकरी भी मिल जाएगी. इस तरह से वह श्रीराम की सारी संपत्ति की वारिस बन जाएगी.

यह प्रस्ताव संगीता को अच्छा लगा. जबकि सच तो यह भी था कि इस से अवशिष्ट को भी फायदा होने वाला था. वह चाहता था कि श्रीराम की मौत के बाद उस से शादी कर लेगा और फिर उस की संपत्ति का हकदार भी बन जाएगा.

भाड़े के हत्यारों को किया शामिल

संगीता के हामी भरने के बाद योजना बनाई गई. इस में संतोष और सुशील को पैसे का लालच दे कर योजना में शामिल किया गया. दोनों राजकीय पौलीटेक्निक के जहांगीराबाद कैंपस के तालाब से मछली का कारोबार करते थे.

श्रीराम अपनी कार बेचना चाहता था. यह बात उस ने अवशिष्ट को भी बता दी थी. तय कार्यक्रम के अनुसार 18 दिसंबर, 2021 की शाम राम मनोहर लोहिया मैडिकल संस्थान से अवशिष्ट ने श्रीराम से कहा कि कार खरीदने के लिए 2 युवक मैडिकल संस्थान में आए हैं. वे कार की टेस्ट ड्राइव करना चाहते हैं. उन के साथ उन के परिवार की एक महिला भी है.

वे युवक कोई और नहीं बल्कि अवशिष्ट द्वारा भेजे गए भाड़े के बदमाश सुशील और संतोष थे जो कुंती नाम की महिला को इसलिए अपने साथ लाए थे ताकि श्रीराम को उन पर शक न हो. टेस्ट ड्राइव के बहाने दोनों युवक श्रीराम को कार में बिठा कर फैजाबाद रोड पर ले गए इस के बाद वे किसान पथ से कार को इंदिरा नगर की ओर ले गए. वहां एक सुनसान जगह पर कार रोक दी.

अवशिष्ट अपनी कार से उन के पीछेपीछे चल रहा था. उस के साथ प्रेमिका संगीता थी. सुनसान जगह पर श्रीराम को कार से उतारने के बाद सुशील ने तमंचे से श्रीराम पर फायर झोंक दिया. लेकिन फायर मिस हो जाने के कारण अवशिष्ट के दिए हुए पिस्टल से श्रीराम को गोली दाग दी. उस की घटनास्थल पर ही मौत हो गई.

उन्होंने शव को इंदिरा नहर में फेंक दिया. तीनों उस की कार को लखनऊ हाईवे से लिंक रोड पर करौली के पास छोड़ कर चले गए, जिसे बाद में पुलिस ने बरामद किया. अवशिष्ट ने भी अपनी कार दूसरी जगह ले जा कर खड़ी कर दी. वह कार भी 24 दिसंबर, 2021 को पुलिस ने बरामद कर ली थी. उसी कार कार से मिले कुछ दस्तावेजों के आधार पर संगीता और अवशिष्ट कुमार की गिरफ्तारी हो पाई. उन्होंने श्रीराम हत्याकांड में संतोष, सुशील और कुंती का नाम लिया, जिन की भी अगले दिन गिरफ्तारी हो गई.

इस पूरे मामले को निपटाने में एसआई उदयराज निषाद, अतिरिक्त क्राइम ब्रांच इंसपेक्टर विनोद यादव और पवन सिंह समेत महिला एसआई दीपिका सिंह व सिपाही पूजा देवी की सराहनीय भूमिका रही.

पुलिस सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी. कथा संकलन तक श्रीराम की लाश बरामद नहीं हो पाई थी.

ज्योति ने बुझाई पति की जीवन ज्योति – भाग 3

प्रदीप चौरिहा सरकारी नौकरी में था. घर में किसी चीज की कमी भी न थी. सब कुछ ठीकठाक था. इस के बावजूद ज्योति को यह बात हमेशा सालती रहती थी कि उस का पति उम्र में उस से बड़ा है. यही टीस कभी दर्द बन जाती तो पतिपत्नी में झगड़ा हो जाता. हालांकि लड़ाईझगड़ा प्रदीप को पसंद न था, लेकिन वह मजबूर था.

प्रदीप शराब का भी लती था. शराब पी कर घर आना फिर बकवास करना ज्योति को कतई पसंद न था. इस बात को ले कर भी दोनों में कलह होती थी. लड़ाईझगड़ा बढ़ता गया तो उन के संबंधों में दरार आने लगी. ज्योति को मोबाइल का शौक था. वह अकसर फेसबुक खोल कर चैटिंग करने बैठ जाती. रात में घर के सारे काम निपटा कर ज्योति चैटिंग करने बैठती तो दूसरी ओर संजय सिंह औनलाइन मिलता, जैसे वह पहले से ज्योति का इंतजार कर रहा होता.

ज्योति से चैटिंग करने में संजय सिंह को भी बड़ा मजा आता था. ज्योति की प्यार भरी बातों से संजय की दिन भर की थकान दूर हो जाती थी. ज्योति से चैटिंग कर के वह तरोताजा महसूस करता था. चैटिंग द्वारा ज्योति और संजय एकदूसरे से घुलमिल गए थे.

एक दिन संजय ज्योति से चैटिंग कर रहा था, तभी उस के मोबाइल की घंटी बजी. उस ने पूछा, “हैलो, कौन?”

“हैलो संजय, मैं ज्योति बोल रही हूं. वही ज्योति जिस से आप चैट कर रहे हो.”

“अरे ज्योतिजी आप, आप को मेरा नंबर कहां से मिल गया?” संजय ने खुश होते हुए पूछा.

“लगन सच्ची हो और दिल में प्यार हो तो सब कुछ मिल जाता है. नंबर क्या चीज है?” ज्योति ने कहा.

ज्योति की आवाज में मिठास थी. उस से बातें करते हुए संजय को बहुत अच्छा लग रहा था. इसलिए उस ने चौटिंग बंद कर के पूछा, “ज्योतिजी, आप रहती कहां हैं?”

“अतर्रा कस्बे के नरैनी रोड पर राजेंद्र नगर मोहल्ले में. मेरे पति प्रदीप चौरिहा हिंदू इंटर कालेज में लिपिक हैं. पति के साथ ही मैं रहती हूं. और आप?”

“मैं बांदा शहर के शुकुल कुआं मोहल्ले में अपने मातापिता के साथ रहता हूं. मैं प्राइवेट जाब करता हूं. जाब के सिलसिले में कभीकभी दिल्ली भी जाना पड़ता है.”

फेसबुक फ्रैंड से बन गए प्रेमी

दोनों के बीच बातचीत हुई तो दोनों के दिल एकदूसरे के लिए धडक़ने लगे. अब उन की रोज मोबाइल फोन पर बात होने लगी. कभी ज्योति संजय सिंह को फोन करती तो कभी संजय ज्योति को. उन के बीच अब रसभरी बातें होने लगीं. हंसीठिठोली भी होने लगी. उन के बीच प्रेम संबंध हो गए. उन्माद की तरंगें दोनों तरफ से उठने लगीं तो दोनों मिलने को उत्सुक हो उठे.

एक रोज फोन पर बतियाते समय संजय सिंह ने आमनेसामने मिलने की इच्छा जताई. ज्योति ने पहले तो आनाकानी की, फिर मिलने को राजी हो गई. दोनों ने दिन, तारीख व समय भी निश्चित कर लिया. पहचान के लिए उन्होंने अपने पहनावे की भी जानकारी एकदूसरे को दे दी.

निश्चित दिन तारीख पर संजय सिंह अतर्रा कस्बा स्थित एक रेस्तरां में आ गया. वहां से उस ने ज्योति को फोन किया तो ज्योति भी कुछ देर बाद रेस्तरां आ गई. पहनावे से दोनों ने एकदूसरे को पहचान लिया. खूबसूरत ज्योति को संजय सिंह ने देखा तो पहली ही नजर में वह उस के दिल में रचबस गई.

ज्योति भी हैंडसम संजय सिंह को देख कर खुश हुई. उस रोज संजय व ज्योति के बीच खूब प्यार भरी बातें हुईं. ज्योति ने संजय को अपना घर भी दिखा दिया लेकिन सचेत किया कि वह घर तभी आए, जब वह फोन कर बुलाए. इस के बाद संजय व ज्योति की मोहब्बत दिनप्रतिदिन बढऩे लगी.

एक रोज ज्योति का पति प्रदीप कालेज के काम से प्रयागराज गया तो ज्योति ने संजय को अपने घर बुला लिया. उस रोज न संजय अपने पर काबू रख सका और न ही ज्योति. दोनों सारी मर्यादाएं तोड़ कर एकदूसरे में समा गए. संजय जहां जवानी में होश खो बैठा, वहीं ज्योति भूल गई कि वह ब्याहता है. उसे न तो बच्चों के भविष्य की चिंता हुई और न पति के साथ विश्वासघात की.

प्रेमी को घर पर ही बुलाने लगी ज्योति

अवैध संबंधों का सिलसिला एक बार शुरू हुआ तो फिर बढ़ता ही गया. प्रदीप जिस दिन कस्बे से बाहर जाता, उस दिन ज्योति आशिक संजय को घर बुला लेती और उस के साथ खूब रंगरलियां मनाती. संजय जब भी आता, ज्योति मकान के पिछले हिस्से का दरवाजा खोल देती और फिर उसी दरवाजे से बाहर भेज देती. वह ऐसा इसलिए करती, जिस से किसी को उस के आने की खबर न हो.

दरअसल, मकान का मेन गेट सडक़ की ओर था, जिस से चहलपहल रहती थी जबकि पीछे का दरवाजा सुनसान रहता था. ज्योति मकान के प्रथम तल पर रहती थी, जबकि भूतल पर किराएदार राखी राठी रहती थी. वही मेन गेट खोलती व बंद करती थी. ज्योति की सास निर्मला छोटे बेटे के साथ अलग मकान में रहती थीं. गरममिजाज के कारण उस की ज्योति से नहीं पटती थी.

ज्योति बड़ी सावधानी से अपने आशिक से मिलन करती थी. इस के बावजूद एक रोज उस का भांडा फूट गया. उस रोज घर के पिछले दरवाजे से किसी युवक को घर से बाहर निकलते समय सास निर्मला ने देखा तो उन का माथा ठनका. वह जान गई कि बहू कुलच्छिनी है. उन्होंने ज्योति से तो कुछ नहीं कहा, लेकिन प्रदीप से शिकायत कर दी. इस पर प्रदीप ने ज्योति से सवालजवाब किया और पिटाई भी कर दी.

पति की पिटाई ने आग में घी डालने जैसा काम किया. वह प्रदीप को नापसंद तो पहले से करती थी, अब उस ने उसे पूरी तरह दिल से निकाल कर प्रेमी संजय को दिल में बसा लिया. इधर ज्योति की निगरानी के लिए प्रदीप ने घर में सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए और अपने मोबाइल से कनेक्ट कर लिए, ताकि वह पत्नी की गतिविधियों पर नजर रख सके.

                                                                                                                                              क्रमशः

संगीता के प्यार की झंकार – भाग 2

अवशिष्ट जब श्रीराम के घर गया, तब उन्होंने उस की खूब खातिरदारी की, जिस से उन के बीच का आत्मीय संबंध और गहरा हो गया. फिर तो अवशिष्ट का श्रीराम के घर अकसर आनाजाना भी होने लगा. वह श्रीराम और संगीता के कागजी काम में मदद कर दिया करता था. जैसे बैंक, मोबाइल, बिजली बिल, गैस आदि के काम में पतिपत्नी दोनों अवशिष्ट की मदद लिया करते थे. इसलिए जरूरत पड़ने पर श्रीराम या संगीता उसे गाहेबगाहे फोन कर बुला लिया करते थे.

ऐसे में कई बार अवशिष्ट को संगीता के साथ अकेले में समय गुजारने का भी मौका मिल जाता था. जल्द ही दोनों आपस में काफी घुलमिल गए थे. संगीता को अवशिष्ट की अदाएं, बातचीत करने का अंदाज, पहनावा, बोलचाल व बर्ताव काफी अच्छा लगता था. अवशिष्ट को भी संगीता एक सभ्य महिला की तरह लगती थी, जबकि वह बहुत कम पढ़ीलिखी थी.

संगीता जब कभी अवशिष्ट की तुलना पति श्रीराम से करती तब अवशिष्ट के मुकाबले पति बेवकूफ नजर आता था. संयोग से वह श्रीराम से अच्छे ऊंचे पद पर सरकारी नौकरी में था. फिर क्या था, दोनों को जब कभी मौका मिलता वे साथसाथ खरीदारी करने या यूं ही सैरसपाटे के लिए निकल जाते थे. वे आपस में काफी खुल गए थे. उन के बीच हंसीमजाक भी होने लगा था. संगीता को वह कई बार गिफ्ट भी दे चुका था.

श्रीराम इन सब से अनजान बना रहा. सच तो यह था कि संगीता को अवशिष्ट काफी पसंद आने लगा था. जब कभी वह घर नहीं आता था, तब संगीता उसे किसी काम के लिए श्रीराम से फोन करवा कर बुला लेती थी. इधर दोनों की मुलाकातों का सिलसिला बढ़ने लगा, उधर श्रीराम की संगीता के साथ तूतूमैंमैं होने लगी. फिर भी संगीता की लव स्टोरी परवान चढ़ रही थी.

कहने को संगीता 3 बच्चों की मां बन चुकी थी. उम्र भी 40 के करीब पहुंच चुकी थी, लेकिन वह यौवन के चरम पर थी. उस की जरूरतों को पूरी करने में श्रीराम असमर्थ था. वह घरेलू जरूरतों की पूर्ति में लगा रहता था. वह न तो संगीता की भावनाओं का खयाल रख पाता था और न ही उसे यौनसुख ही दे पाता था.

प्रेमी की मर्दानगी की कायल हो गई थी संगीता

संगीता की स्थिति एक जल बिन प्यासी मछली जैसी हो गई थी. ऐसे में वह अवशिष्ट का साथ पा कर कुछ पल के लिए सुखद एहसास का अनुभव करती थी. वह उस से एक दिन भी मिले बगैर नहीं रह पाती थी. श्रीराम को इस बात का एहसास होने लगा था कि संगीता का लगाव अवशिष्ट के प्रति कुछ अधिक ही हो गया है. वह उसे एक भरपूर मर्द के नजरिए से देखने लगी है.

सच तो यह भी था कि संगीता श्रीराम की उपेक्षा कर उसे कमजोर मर्द का ताना भी कसने लगी थी, जबकि उसे संगीता की यह हरकत बुरी लगने लगी थी. वह नहीं चाहता था कि संगीता उस के दोस्त के साथ मेलजोल रखे. पानी उस के सिर के ऊपर से बहने लगा था.

श्रीराम को संगीता का अवशिष्ट के साथ मिलनाजुलना अखरने लगा था. यह देख कर श्रीराम संगीता पर अंकुश लगाने लगा. बातबात पर टोकने लगा. जब उस से बात नहीं बनी, तब उस ने इस बारे में अवशिष्ट से भी बात की. उस से कहा, ‘‘यार, तुम्हारी मेरी दोस्ती है. मैं चाहता हूं कि वह हमेशा बनी रहे, लेकिन तुम्हारी खातिर मेरा पत्नी के साथ झगड़ा होता रहता है. इसलिए तुम उस से नहीं मिलो तो अच्छा होगा… उस से फोन पर बातें भी मत किया करो… ’’

इस पर अवशिष्ट ने उसे खरा सा जवाब दिया, ‘‘इस में मेरी क्या गलती है. तुम अपनी पत्नी संगीता पर क्यों नहीं अंकुश लगाते हो. उसे क्यों नहीं समझाते हो. वही मुझे फोन कर बुलाती रहती है.’’

श्रीराम को अवशिष्ट की बात बुरी लगी. वह समझ गया कि उसे संगीता पर ही किसी तरह से अंकुश लगाना होगा. उसे अवशिष्ट से दूर करना होगा.

वैवाहिक जीवन और नाजायज रिश्ता

इस के लिए उस ने एक तरीका निकाला और संगीता को उस के मायके कंचनपुर भेज दिया, लेकिन संगीता भी कहां मानने वाली थी. वह तो अवशिष्ट को दिल से चाहती थी. उस के खयालों में खोई रहती थी. दिल में उस के प्रति प्यार का तूफान उठ चुका था. शरीर में यौनांनद की काल्पनिक अनुभूति के गुबार उठते रहते थे. उसे मिले बगैर रह ही नहीं सकती थी.

दूसरी तरफ अवशिष्ट की भी कुछ ऐसी ही स्थिति बनी हुई थी. संगीता के रूपयौवन से वह भी काफी प्रभावित था. जब कभी सजीसंवरी संगीता के मांसल शरीर के साथ कमसिन अल्हड़ जैसी हरकतें देखता था, तब उसे के कुंवारेपन में एक टीस की अनुभूति होती थी. यही कारण था कि वह उस के एक बुलावे पर दौड़ादौड़ा मिलने चला आता था.

श्रीराम यादव का विवाह संगीता के साथ 1996 में सामाजिक रीतिरिवाज के अनुसार हुआ था. तब से वह उस के साथ लखनऊ में ही रह रही थी. विवाह होने के कई सालों बाद गांव गई थी. वहां उस का मन नहीं लगा. 2 सप्ताह में ही वह अपने पति के पास आ गई. आते ही उस ने पति से माफी मांगते हुए कहा कि वह उस का हर कहा मानेगी.

ज्योति ने बुझाई पति की जीवन ज्योति – भाग 2

संदीप चौरिहा संदेह के घेरे में आया तो पुलिस टीम ने उसे हिरासत में ले कर कड़ाई से पूछताछ की. लेकिन संदीप ने भाई की हत्या से साफ इंकार कर दिया. उस ने बताया कि भाई की हत्या में ज्योति भाभी का ही हाथ है. भाभी का चरित्र पाकसाफ नहीं है.

भाभी से मिलने कोई युवक आता था. भाभी उस के साथ घूमने भी जाती थी. उस युवक को ले कर भैयाभाभी के बीच झगड़ा भी होता था. संदीप ने कहा कि सुरागसी के लिए भैया ने कमरे के अंदरबाहर सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए थे और अपने मोबाइल फोन से कनेक्ट करा लिए थे ताकि वह भाभी की गतिविधियों पर नजर रख सकें. लेकिन शातिर भाभी ने फिर भी भैया को मरवा दिया. उन्होंने ही कैमरे बंद किए और डीवीआर गायब कर दिया.

ज्योति के चरित्र पर हुआ शक

मृतक की मां निर्मला देवी तथा अड़ोसपड़ोस के लोगों से भी पुलिस ने पूछताछ की. निर्मला देवी तथा पड़ोसियों ने भी ज्योति के चरित्र पर संदेह जताया. उन्होंने बताया कि ज्योति से मिलने अकसर एक युवक आता था. ज्योति उस की बाइक पर बैठ कर बाजारहाट भी जाती थी, लेकिन प्रदीप के घर आने से पहले ही वह वापस आ जाती थी.

अब तक की जांच पड़ताल में पुलिस इस नतीजे पर पहुंच चुकी थी कि प्रदीप की हत्या किसी नजदीकी ने की है. प्रदीप की सब से ज्यादा नजदीकी उस की पत्नी ज्योति ही थी. अत: पुलिस का शक ज्योति पर ही गया. पुलिस ने ज्योति से एक बार फिर पूछताछ की, लेकिन वह रोनेधोने का नाटक करने लगी और संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी.

इस बीच पुलिस टीम ने बहाने से ज्योति का मोबाइल फोन ले लिया. पुलिस ने ज्योति का मोबाइल फोन खंगाला तो पता चला कि वह सोशल मीडिया से जुड़ी थी. फेसबुक के जरिए वह कई युवकों के संपर्क में थी. इन में से संजय सिंह नाम के युवक से वह ज्यादा बात करती थी. इस के बाद पुलिस ने ज्योति के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस में एक फोन नंबर ऐसा मिला, जिस पर उस की सब से ज्यादा और लंबीलंबी बातें हुई थीं.

पुलिस ने उस नंबर के बारे में पता किया तो वह नंबर बांदा के शुकुल कुआं निवासी संजय सिंह का निकला. पुलिस को घरवालों और पड़ोसियों की पूछताछ में पहले ही पता चल चुका था कि प्रदीप की गैरमौजूदगी में ज्योति के पास एक युवक आता था.

ज्योति पर पुलिस का शक यों ही नहीं गहराया था, बल्कि कई ठोस कारण थे. प्रथम उस ने हत्या की जानकारी अपनी सास, देवर व पड़ोसियों को नहीं दी थी. दूसरा घर के अंदरबाहर जाने के 2 रास्ते थे, मेन गेट तथा पीछे का दरवाजा. मेन गेट किराएदार राखी राठी खोलती व बंद करती थी, जबकि पीछे का दरवाजा ज्योति. संभवत: पीछे के दरवाजे से ही हत्यारे आए थे और दरवाजा ज्योति ने ही खोला था. तीसरा अहम कारण था कि घटना सीसीटीवी फुटेज में न दिखे, इसलिए ज्योति ने ही कैमरे बंद किए और डीवीआर गायब कर दिया था.

पुलिस टीम ने एक बार फिर से ज्योति चौरिहा से पूछताछ की, लेकिन वह रोनेधोने का नाटक करने लगी. उस ने कहा कि पति की हत्या में उस का कोई हाथ नहीं है. उस के पति की हत्या देवर संदीप ने की है, लेकिन पुलिस अब उस की इस बात पर विश्वास नहीं कर रही थी. लिहाजा पुलिस उस से सख्ती से पूछताछ करने लगी.

इस पर ज्योति ने कहा, “सर, मेरे ही पति की हत्या हुई और आप लोग मुझे ही धमका रहे हैं, जैसे मैं ने ही उन्हें मारा है. मेरे देवर ने पति की हत्या की है, आप लोग उसे क्यों नहीं पकड़ते, मुझे क्यों परेशान कर रहे हैं? भला मैं अपने पति को क्यों मारूंगी? जांच के नाम पर आप लोग मुझे ज्यादा परेशान करेंगे तो मैं आप लोगों की शिकायत बड़े साहब से कर दूंगी.”

ज्योति की बात सुन कर इंसपेक्टर मनोज कुमार शुक्ला का चेहरा तमतमा गया और वह बोले, “तुम हम लोगों की शिकायत कप्तान साहब से भले कर देना, लेकिन फिलहाल तुम मुझे यह बताओ कि तुम संजय सिंह से मोबाइल फोन पर इतनी अधिक और लंबीलंबी बातें क्यों करती थी? संजय सिंह तुम्हारा कौन है?”

“संजय सिंह मेरे मायके में पड़ोस में रहता है. अगर उस से बात कर लेती हूं तो इस में बुरा क्या है?” ज्योति ने कहा.

“मैं यह कहां कह रहा हूं कि किसी से बात करना बुरा है. मैं सिर्फ यह जानना चाहता हूं कि प्रदीप की हत्या से पहले और बाद में संजय से तुम्हारी क्या बातें हुई थीं?” मनोज कुमार शुक्ला ने पूछा. इस बात से ज्योति के चेहरे का रंग उड़ गया. खुद को संभालते हुए उस ने कहा, “संजय सिंह से तो पिछले एक सप्ताह से मेरी कोई बात नहीं हुई है. आप को किसी ने गलत जानकारी दी है.”

“मेरे पास गलत जानकारी नहीं है. यह देखो, काल डिटेल्स, इस में सब लिखा है कि तुम ने कबकब उस से बातें की हैं.” काल डिटेल्स दिखाते हुए इंसपेक्टर शुक्ला ने उस पर मनोवैज्ञानिक दबाव डाला तो वह चुप हो गई. उन्होंने थोड़ी और सख्ती की तो ज्योति टूट गई और उस ने पति की हत्या प्रेमी द्वारा कराने का जुर्म कुबूल कर लिया.

ज्योति चौरिहा से पूछताछ के बाद पुलिस ने इस हत्या में शामिल उस के प्रेमी संजय सिंह और संजय के दोस्त राघवेंद्र सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिस पूछताछ में इस प्रेम प्रसंग की ऐसी कहानी सामने आई, जिस में ज्योति ने प्यार के भंवर में फंस कर अपने ही पति की जीवन ज्योति बुझा दी.

इंटर कालेज में क्लर्क था प्रदीप

बुंदेलखंड का बांदा जिला यूपी राज्य का एक चर्चित जिला है. केन नदी के किनारे बसा यह शहर कई मायनों में मशहूर है. केन नदी से निकलने वाला ‘शजर’पत्थर आभूषणों की शोभा बढ़ाता है. इस बहुमूल्य पत्थर का व्यवसाय बड़े पैमाने पर होता है. इसी बांदा जिले का एक व्यवसायिक कस्बा अतर्रा है. अतर्रा से धार्मिक नगरी चित्रकूट काफी नजदीक है.

इसी अतर्रा कस्बे के नरैनी रोड पर राजेंद्र नगर मोहल्ले में रामप्रताप चौरिहा अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी निर्मला के अलावा 4 बेटे प्रदीप व संदीप थे. रामप्रताप की आर्थिक स्थिति मजबूत थी. कस्बे में उन का दोमंजिला मकान था, साथ ही कुछ कृषि भूमि भी थी. उन्होंने अपने जीवन काल में ही घर और जमीन का बंटवारा दोनों भाइयों के बीच कर दिया था. उन की पत्नी निर्मला छोटे बेटे संदीप के साथ रहती थीं.

रामप्रताप चौरिहा का बड़ा बेटा प्रदीप चौरिहा उर्फ रामू अतर्रा कस्बा के हिंदू इंटर कालेज में लिपिक पद पर कार्यरत था. उस की शादी ज्योति से करीब 8 साल पहले हुई थी. शादी के बाद कुछ सालों तक सब ठीकठाक चलता रहा. इस बीच ज्योति ने 2 बेटियों को जन्म दिया. बेटियों के जन्म से जहां ज्योति खुश थी, वहीं उस का पति प्रदीप और सास निर्मला खुश नहीं थे. वे दोनों बेटा चाहते थे, ताकि वंशबेल गतिमान बनी रहे.

ज्योति खूबसूरत, पढ़ीलिखी, जवान व आधुनिक विचारों वाली युवती थी. वह 2 बच्चों की मां जरूर थी, लेकिन उस की सुंदरता में कोई कमी नहीं आई थी. ज्योति ने शादी के पहले जिस खूबसूरत राजकुमार के सपने संजोए थे, वैसा उस का पति नहीं था. उम्र में वह उस से बड़ा था और रंग भी सांवला था. बेमेल होने के कारण वह उसे पसंद नहीं करती थी.

                                                                                                                                                क्रमशः