प्रेमियों के साथ रची पति को मारने की साजिश

2 बच्चों की मां पूजा संखवार एक नहीं बल्कि 3-3 प्रेमियों के साथ गुलछर्रे उड़ा रही थी. ससुराल वालों ने जब उस पर लगाम लगाने की कोशिश की तो उस ने अपने तीनों प्रेमियों के साथ मिल कर ऐसी खूनी योजना को अंजाम दिया कि…

पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. मृतक गुरुचरण की उम्र 38 वर्ष के आसपास थी. उस का शव झाडिय़ों के पास पड़ा था. पैरों पर बाइक पलटी पड़ी थी. शव के पास ही शराब का एक क्वार्टर पड़ा था. वह सफेद रंग की कमीज व पैंट पहने था. उस के शरीर पर चोट के निशान थे.  शुरुआती जांच में पुलिस को यही लगा कि गुरुचरण की मौत दुर्घटना नहीं है. क्योंकि उस के शरीर पर कोई गंभीर चोट नहीं थी. 

सूचना पा कर एसपी (कानपुर देहात) बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति तथा सीओ शिव ठाकुर भी मौका ए वारदात पर आ गए. उन्होंने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया. उस दिन जुलाई 2024 की 26 तारीख थी. सुबह से ही आसमान में काली घटाएं छाई थीं. पुरवइया की ठंडी हवा भी चल रही थी. ऐसे सुहावने मौसम में मनकापुर गांव का युवक जसवंत अपने कंधों पर दोनों हाथों से लाठी टिकाए कोई गीत गुनगुनाता हुआ और मस्ती में झूमता हुआ अपने खेत की ओर जा रहा था. वह जैसे ही खेत पर पहुंचा तो उस के मुंह से चीख निकल पड़ी. खेत में झाडिय़ों के पास एक लाश पड़ी थी. उस के पैरों पर बाइक पलटी पड़ी थी. उस ने लाश को गौर से देखा तो उस के आश्चर्य का ठिकाना न रहा. क्योंकि वह लाश गांव के ही युवक गुरुचरण संखवार की थी. 

जसवंत खेत से भागता हुआ गांव आया. उस ने गुरुचरण की लाश खेत में पड़ी होने की सूचना उस के घर वालों को दी. इस के बाद तो घर व गांव में कोहराम सा मच गया. जिस ने भी सुना, वही खेत की ओर दौड़ पड़ा. देखते ही देखते खेत पर लोगों की भीड़ जुट गई. घर वाले भी हांफते हुए वहां पहुंचे. लाश देख कर मृतक की पत्नी पूजा छाती पीटपीट कर रोने लगी. मां रानी देवी भी जवान बेटे का शव देख कर फफक पड़ी. इसी बीच किसी व्यक्ति ने इस की सूचना कानपुर देहात के थाना मंगलपुर पुलिस को दे दी. 

एसएचओ संजय कुमार गुप्ता ने इस सूचना से वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अवगत कराया. फिर सहयोगी पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. सीओ शिव ठाकुर ने मौके पर मौजूद मृतक के घर वालों से पूछताछ की. मृतक की पत्नी पूजा देवी इस बात से सहमत थी कि उस के पति की मौत दुर्घटना है. लेकिन उस के भाई राजकुमार व मां रानी देवी को शक था कि गुरुचरण की हत्या की गई है. गुरुचरण की हत्या हुई या उस की मौत दुर्घटना में हुई, इस का पता तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही चल सकता था. इसलिए पुलिस ने घटनास्थल की जरूरी काररवाई पूरी कर गुरुचरण के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल माती भिजवा दिया.

राजकुमार ने क्यों जताया भाभी के ऊपर हत्या का शक

शाम 6 बजे एसएचओ संजय कुमार गुप्ता गश्त पर निकलने वाले ही थे, तभी कांस्टेबल अशोक त्रिपाठी मृतक गुरुचरण की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ले कर उन के पास पहुंचा. उत्सुक्तावश संजय कुमार गुप्ता ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ी तो पह चौंक पड़े. क्योंकि रिपोर्ट के अनुसार गुरुचरण की हत्या गला दबा कर की गई थी. गले की हड्डी टूटी पाई गई थी और चोटों का भी उल्लेख था. इस के बाद एसएचओ ने मृतक के भाई राजकुमार को थाने बुलवा लिया. उन्होंने उसे बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार तुम्हारे भाई की हत्या गला कस कर की गई है. क्या तुम्हें किसी पर शक है?

हां साहब, मुझे भाई गुरुचरण की पत्नी पूजा पर शक है.’’

वह कैसे?’’ संजय कुमार गुप्ता ने पूछा.

”साहबजी, पूजा बदचलन औरत है. उस के एक नहीं 3-3 युवकों शिवम, गुलाब और विष्णुदयाल के साथ अवैध संबंध हैं. गुरुचरण पूजा के नाजायज रिश्तों का विरोध करता था तथा उसे पीटता भी था. विरोध के कारण ही पूजा ने अपने यारों के साथ साजिश रच कर मेरे भाई को मरवा दिया.’’

इस के बाद एसएचओ संजय कुमार गुप्ता ने राजकुमार की तहरीर पर धारा 103(1), 61(2) भारतीय न्याय संहिता तथा धारा 3(2)(अ) एससी/एसटी ऐक्ट के तहत गुलाब संखवार, पूजा संखवार, शिवम उर्फ ज्वाला तथा विष्णुदयाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और जांच शुरू कर दी. रिपोर्ट दर्ज होने के बाद एसपी बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति ने हत्यारोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक टीम सीओ शिव ठाकुर की निगरानी में गठित कर दी. इस टीम में एसएचओ संजय कुमार गुप्ता, इंसपेक्टर (क्राइम) रजनीश कुमार, एसआई नेम सिंह, हेडकांस्टेबल अशोक त्रिपाठी, निजामुद्ïदीन, सुनील कुमार व महिला कांस्टेबल आरती परिहार को शामिल कीं. 

पुलिस टीम ने देर रात नामजद आरोपी गुलाब, शिवम उर्फ ज्वाला व विष्णुदयाल के घरों पर छापा  मारा, लेकिन वे फरार थे. शायद उन्हें उन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी मिल गई थी. इसलिए वे गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हो गए थे. दूसरे दिन सुबह 11 बजे पुलिस टीम आरोपी पूजा के घर पहुंची. पूजा उस समय घर पर ही थी. पुलिस टीम को देख कर वह त्रियाचरित्र कर जोरजोर से रोने लगी. एसएचओ संजय कुमार गुप्ता ने कहा, ”पूजा, मुझे तुम्हारे साथ पूरी हमदर्दी है. अब रोने से क्या फायदा. रोने से पति तो मिल नहीं जाएगा. तुम्हें पता है कि तुम्हारे पति की हत्या हुई है. इसलिए अब तुम हमारी मदद करो. ताकि हम हत्यारों को पकड़ सकें.’’

पूजा ने आंसू पोंछते हुए बताया, ”साहब, मेरे पति शराबी थे. बीती शाम 7 बजे वह घर से बाइक ले कर निकले थे. फिर रात भर घर नहीं आए. अगले दिन हमें खबर मिली कि उन की लाश खेत में पड़ी है. साहब, अब आप मुझे परेशान क्यों कर रहे हैं. जो कुछ मुझे मालूम था, मैं ने आप को बता दिया. मेरा तो सब कुछ लुट गया है. मैं अपने पति की मौत का सदमा बरदाश्त नहीं कर पा रही हूं. आप लोग पूछताछ कर मुझे क्यों दुखी कर रहे हैं. प्लीज, आप मुझ पर रहम कीजिए.’’

पूजा, मैं ने सुना है कि तुम्हारा पति तुम्हें मारतापीटता था.’’ संजय कुमार ने पूछा. 

नहीं, यह सरासर गलत है. जब कभी शराब का नशा ज्यादा चढ़ जाता था, तभी मारपीट करते थे.’’

क्या तुम गुलाब, शिवम व विष्णु को जानती हो?’’ उन्होंने अगला सवाल किया.

साहब, गुलाब हमारे परिवार का है. बाकी 2 को मैं नहीं जानती.’’ पूजा ने जवाब दिया. 

क्या गुलाब से तुम्हारा नाजायज रिश्ता है?’’

कैसी बात करते हैं साहब. आप मुझे बदनाम कर रहे हैं. लगता है, आप के किसी ने कान भरे हैं.’’ पूजा तमतमाते हुए बोली. 

देखो पूजा, तुम्हें सब पता है, लेकिन तुम सब कुछ जानते हुए भी सच्चाई बताना नहीं चाहती.’’ 

तब पूजा ने कहा, ”साहब, मुझे परेशान न करें. मेरी तबीयत ठीक नहीं है.’’

पुलिस चाहती तो पूजा को उसी समय गिरफ्तार कर सकती थी, लेकिन टीम बिना ठोस सबूत के उसे गिरफ्तार नहीं करना चाहती थी. इसलिए पुलिस पूछताछ कर वापस आ गई. गुलाब, शिवम व विष्णुदयाल को पकडऩे के लिए पुलिस टीम ने अनेक स्थानों पर छापे मारे, लेकिन वे हाथ नहीं आए. पुलिस ने मुखबिरों का जाल बिछा दिया. इधर पूजा को आशंका हुई कि पुलिस को सारे रहस्यों का पता लग गया है. वह उसे कभी भी गिरफ्तार कर सकती है. इसलिए गिरफ्तारी से बचने के लिए वह रात में घर से फरार हो गई. उसे अपने आशिकों का ठिकाना पता था. अत: वह भी उन्हीं के साथ छिप गई. 

पुलिस टीम को पूजा के फरार होने कीे जानकारी हुई तो पुलिस का शक विश्वास में बदल गया. इस के बाद पुलिस टीम सतर्क हो गई. अब आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए टीम ने अकबरपुर, झींझक, रूरा आदि स्थानों पर छापा मारा. लेकिन आरोपी गिरफ्त में नहीं आए. 31 जुलाई, 2024 की सुबह 6 बजे एसएचओ संजय कुमार को मुखबिर के जरिए सूचना मिली कि सभी आरोपी रेलवे स्टेशन झींझक रोड तिराहा के पास मौजूद हैं. पूजा भी उन के साथ है. इस सूचना पर संजय कुमार गुप्ता पुलिस टीम के साथ झींझक रोड तिराहा पर पहुंच गए और गुलाब, शिवम, विष्णुदयाल को हिरासत में ले लिया. पूजा ने घूंघट निकाल कर भागने का प्रयास किया, लेकिन महिला सिपाही आरती परिहार ने उसे दबोच लिया. सभी को थाने लाया गया.

जब उन सभी से गुरुचरण की हत्या के संबंध में पूछताछ की गई तो सभी ने सहज ही हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. जिस गमछे से आरोपियों ने गुरुचरण का गला घोंटा था, उन्होंने वह गमछा भी बरामद करा दिया, जिसे उन्होंने संदलपुर स्थित बंबा की झाडिय़ों में छिपा दिया था. केस का खुलासा होने पर पुलिस सभागार में एसपी तथा सीओ ने भी आरोपियों से पूछताछ की. पुलिस जांच में एक ऐसी औरत की कहानी सामने आई, जिस ने देह सुख पाने के लिए अपने पति के साथ घात कर अपनी ही मांग का सिंदूर मिटा दिया. 

उत्तर प्रदेश के कानपुर (देहात) जनपद के थाना मंगलपुर के अंतर्गत आता है एक गांव मनकापुर. इसी गांव में रामप्रकाश संखवार अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी रानी देवी के अलावा 2 बेटियां तथा 2 बेटे गुरुचरण व राजकुमार थे. रामप्रकाश किसान था. कृषि उपज से ही वह अपने परिवार का भरणपोषण करता था. रामप्रकाश की तमन्ना थी कि वह दोनों बेटों को पढ़ालिखा कर योग्य बना दे ताकि वह अपने पैरों पर खड़े हो जाएं, लेकिन उस की यह तमन्ना पूरी न हो सकी. कारण, गुरुचरण व राजकुमार का मन पढ़ाई में लगता ही नहीं था. फिर वह पिता के साथ किसानी करने लगे. बेटों का साथ मिला तो रामप्रकाश की गृहस्थी ठीक से चलने लगी. 

पत्नी से गुरुचरण की क्यों शुरू हुई कलह

गुरुचरण अब तक 20 वर्ष का हो चुका था. अत: रामप्रकाश ने जून, 2012 में उस का विवाह पूजा देवी के साथ कर दिया. पूजा सांवले रंग की जरूर थी, लेकिन शरीर मांसल व नैननक्श आकर्षक थे. इसलिए रामप्रकाश व उस की पत्नी रानी देवी ने पूजा को अपने बेटे के लिए पसंद कर लिया था. पूजा के कामकाज से जहां सासससुर खुश थे तो वहीं गुरुचरण भी उस से संतुष्ट था. शुरूशुरू में शारीरिक आकर्षण होता ही है. अत: उन दोनों ने भी प्यार से जिंदगी की शुरुआत की. 

धीरेधीरे 5 साल बीत गए. इन 5 सालों में पूजा एक बेटे और एक बेटी की मां बन गई. गुरुचरण खेतीकिसानी में जो कमाता था, वह अपनी ही फैशनपरस्ती पर खर्च कर देता था. उसे न तो बच्चों की परवरिश की चिंता थी और न ही पत्नी की. पूजा को अपनी जरूरतों के लिए सास रानी देवी के आगे हाथ फैलाने पड़ते थे. सास कभी तो उसे पैसे दे देती, कभी ताना भी कसती, ”मेरे आगे हाथ क्यों फैलाती है, अपने खसम से पैसे क्यों नहीं मांगती?’’ 

सास के ताने से पूजा तिलमिला उठती. उसे पति पर भी खूब गुस्सा आता. लेकिन वह मन मसोस कर रह जाती. पूजा को अब बच्चों की परवरिश की चिंता कुछ ज्यादा ही सताने लगी थी, लेकिन पति का रवैया पहले जैसा ही रहा. पूजा अब और अधिक तंगहाली बरदाश्त नहीं करना चाहती थी. इसलिए इस बाबत उस की पति से तूतूमैंमैं होने लगी थी. दोनों के बीच भरोसा भी टूट गया था. पतिपत्नी के बीच स्थापित भरोसे की बुनियाद का ढहना, दांपत्य जीवन की सब से दुखद त्रासदी होती है. इस से गुरुचरण का परिवार भी अछूता नहीं रहा. कलह ने उस के घर में पैर पसार लिए थे. आए दिन पतिपत्नी एकदूसरे से लड़तेझगड़ते नजर आते थे. 

ऐसे माहौल में एक बुराई और घर में घुस आई, वह थी गुरुचरण की शराबखोरी. गुरुचरण जब शराब पी लेता था तो उस में हैवान समा जाता था. वह पूजा को इतना पीटता था कि पड़ोसियों का कलेजा दहल जाता था. एक बार तो उस ने पूजा को घर से भी खदेड़ा था. पर पूजा थी कि सब कुछ सह लेती थी. इन्ही दिनों गांव के एक शादी समारोह में पूजा की मुलाकात शिवम उर्फ ज्वाला से हुई. वह पड़ोसी गांव जरिहां का रहने वाला था. पहली ही मुलाकात में दोनों एकदूसरे के प्रति आकर्षित हुए. उस के बाद उन की मुलाकातें चोरीछिपे होने लगीं. चूंकि शिवम उर्फ ज्वाला शरीर से हट्टाकट्टा व जवान था. इसलिए पूजा भी उस पर फिदा हो गई. 

उस के बाद जल्द ही दोनों के बीच अवैध रिश्ता बन गया. वह चोरीछिपे शारीरिक भूख मिटाने लगे. संबंध कायम होने के बाद शिवम पूजा की आर्थिक मदद करने लगा. साथ ही उस की डिमांड भी पूरी करने लगा.  पूजा ने अब पति से दूरियां बना ली थीं और आशिक शिवम की बांहों में झूलने लगी थी. लेकिन कुछ ही समय बाद पूजा और शिवम के अवैध रिश्तों की चर्चा मोहल्ले में होने लगी तो गुरुचरण के कान खड़े हो गए. उस ने इस बाबत पूजा से सवालजवाब किया तो वह साफ मुकर गई. झूठ बोलने पर गुरुचरण ने उस की जम कर पिटाई की और उस पर नजर रखनी शुरू कर दी. इस का नतीजा यह हुआ कि दोनों का मिलन बंद हो गया. इस के बाद दोनों बेचैन रहने लगे. इसी बीच शिवम उर्फ ज्वाला ने पूजा को फुसलाया और साथ भाग चलने को कहा. पूूजा इश्क में अंधी हो चुकी थी, इसलिए वह शिवम के साथ जाने को राजी हो गई. वह शिवम के साथ महाराष्ट्र भाग गई. वह 2 माह तक महाराष्ट्र में रही, फिर वापस गांव आ गई. 

एक बार बहकने के बाद क्यों नहीं संभल पाई पूजा

गुरुचरण पूजा को घर में रखना नहीं चाहता था, लेकिन मां के समझाने व बच्चों की खातिर वह उसे रखने को राजी हो गया. वापस आने के बाद पूजा कुछ समय तो ठीक से रही, उस के बाद वह फिर से शिवम से मिलने लगी. शिवम को ले कर अकसर दोनों में झगड़ा होता और वह पूजा की पिटाई करता. कई बार शिवम से भी उस की रार हुई. कहते हैं औरत एक बार फिसल जाए तो वह फिसलती ही जाती है. पूजा के साथ भी ऐसा ही हुआ. पूजा की आशिकी शिवम से अभी चल ही रही थी कि पूजा की नजर पड़ोसी युवक गुलाब संखवार पर पड़ी. 20 वर्षीय गुलाब गबरू जवान था. पारिवारिक रिश्ते में वह पूजा का चचेरा देवर था. उस का पूजा के घर आनाजाना था. पूजा का उस पर दिल आया तो वह उस पर डोरे डालने लगी. 

चूंकि उन के बीच देवरभाभी का रिश्ता था, इसलिए पूजा गुलाब से हंसीमजाक व छेड़छाड़ भी करने लगी. गबरू जवान गुलाब को भी पूजा की बातों में रस आने लगा था. वह भी पूजा को चाहने लगा था. अत: जल्द ही दोनों के बीच शारीरिक रिश्ता बन गया. 

गुलाब को अब जब भी मौका मिलता तो वह पूजा के साथ मौजमस्ती करता. चूंकि गुलाब पूजा से कम उम्र का था, सो पूजा को उस से ज्यादा ही लगाव हो गया. गुलाब का एक साथी था विष्णुदयाल. वह पड़ोस के गांव फरीदपुर निटर्रा का रहने वाला था. शराब ठेके पर अकसर उन दोनों की मुलाकात होती थी. दोनों साथ बैठ कर पीते थे. गुलाब ने एक दिन शराब के नशे में विष्णुदयाल को पूजा के बारे में बताया और कहा कि यदि वह चाहे तो वह पूजा के साथ ऐश कर सकता है. 

विष्णुदयाल की दोस्ती शिवम से भी थी. शिवम और पूजा के अवैध रिश्तों की जानकारी भी उसे थी. इसलिए जब गुलाब ने पूजा के साथ ऐश की बात की तो वह राजी हो गया. इस के बाद गुलाब ने विष्णुदयाल की भी दोस्ती पूजा से करवा दी. अब पूजा अपने 3 आशिकों की बांहों में झूलने लगी, लेकिन वह गुलाब को ही ज्यादा तवज्जो देती थी. वह उस के साथ घर बसाने के सपने देखने लगी थी. एक शाम ठेके पर शराब पीने के दौरान गुरुचरण को उस के एक शराबी साथी ने चेताया, ”गुुरुचरण, शराब में इतना मत डूब जाओ कि घर ही बरबाद हो जाए. आजकल तुम्हारे परिवार का लड़का गुलाब तुम्हारी बीवी के साथ गुलछर्रे उड़ा रहा है. उसे रोको, वरना हाथ मलते रह जाओगे.’’

साथी की बात सुन कर गुरुचरण का माथा ठनका. देर शाम वह घर लौटा तो गुलाब उस के घर में मौजूद था. गुलाब पर नजर पड़ते ही उस के तनबदन में जैसे आग लग गई. उस ने गुलाब से तो कुछ नहीं कहा, पर तड़ाक से पूजा के गाल पर थप्पड़ जड़ दिया. वह उस के बाल पकड़ कर खींचने ही वाला था कि गुलाब ने उसे झपट कर दूर ढकेल दिया. 

खबरदार! जो अब पूजा भाभी को हाथ लगाया.’’ गुलाब गुर्रा उठा. 

हरामजादे, तेरी यह मजाल. तू होता कौन है मेरे और मेरी बीवी के बीच बोलने वाला. यह मेरी बीवी है. मैं इसे खूब मारूंगा.’’ कहते हुए गुरुचरण गुलाब से गुंथ गया. किसी तरह पूजा ने उन दोनों को अलग किया. फिर गुलाब चला गया.इस घटना के बाद गुरुचरण चोरीछिपे पूजा की निगरानी करने लगा था. वह पूजा को रंगेहाथ पकडऩा चाहता था. एक रोज सुबह गुरुचरण बाइक से अकबरपुर कस्बा जाने और देर रात तक लौटने को कह कर घर से चला गया. पूजा उस की तरफ से बेफिक्र हो गई. 

पूजा प्रेमी के साथ कैसे पकड़ी गई रंगेहाथ

दोपहर को अचानक ही गुरुचरण लौट आया. वह उढ़के हुए किवाड़ खोल कर दबे पांव अंदर दाखिल हुआ. कमरे का नजारा देख कर उस का खून खौल उठा. पूजा और गुलाब आलिंगनबद्ध लेटे हुए थे. उस पर नजर पड़ते ही गुलाब तो भाग खड़ा हुआ. फिर गुरुचरण ने लातघूंसों से पूजा की जम कर पिटाई की. पूजा ने रोरो कर पूरा मोहल्ला इकट्ठा कर लिया. उस रोज पूरा मोहल्ला जान गया कि पूजा और गुलाब के बीच नाजायज रिश्ता है. 

गुरुचरण का भाई राजकुमार पूजा की बदचलनी के बारे में जानता था. उस ने उसे समझाने का भी प्रयास किया. लेकिन वह नहीं मानी. राजकुमार सख्ती से इसलिए पेश नहीं आया कि कहीं वह उस पर ही कोई इलजाम न लगा बैठे. रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद गुरुचरण पूजा और गुलाब पर कड़ी नजर रखने लगा. जिस दिन गुलाब घर के आसपास दिख जाता तो वह गुलाब को खूब गालियां बकने लगता. कभीकभी तो मारपीट भी हो जाती. कड़ी निगरानी की वजह से अब पूजा और गुलाब का मिलन बंद हो गया. अब दोनों फोन पर ही बात करते थे और दिल की लगी बुझाते थे. पूजा को मोबाइल फोन व सिम गुलाब ने ही दिया था. मौका पा कर ही वह गुलाब से फोन पर बात करती थी.

एक रोज दोपहर को गुलाब को पता चला कि गुरुचरण घर से बाहर है तो गुलाब हिम्मत जुटा कर पूजा के पास जा पहुंचा. पूजा अपनी चारपाई पर लेटी हुई बारबार करवटें बदल रही थी. उस की बेचैनी भांप कर गुलाब ने पूछा, ”पूजा भाभी, तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है क्या?’’ पूजा उठ कर बैठ गई. वह कुछ देर तक गुलाब के चेहरे पर नजर गड़ाए रही, फिर सपाट स्वर में बोली, ”गुलाब, तुम मुझ से प्यार करते हो न?’’

अरे भाभी, यह भी कोई पूछने की बात है?’’ गुलाब भी उठ बैठा, ”तुम्हें मेरे प्यार पर भरोसा नहीं है क्या? मेरी चाहत में कहीं कोई खामी नजर आई तुम्हें?’’ उस ने पूजा का चेहरा अपने हाथों में थाम लिया. 

नहीं गुलाब, मुझे तुम पर पूरा भरोसा है लेकिन…’’

लेकिन क्या भाभी?’’

हम इस तरह कब तक मिलते रहेंगे गुलाब? जब तक वह हरामी जिंदा है, मैं तुम्हारी पत्नी तो नहीं बन सकती.’’

तुम्हारा मतलब गुरुचरण..?’’

हां, मेरा पति तो वही है. तुम्हारा और मेरा रिश्ता तो नाजायज ही है.’’

तो फिर?’’

कुछ करना पड़ेगा गुलाब. अगर तुम साथ दो तो…’’

तुम बोलो तो सही. मैं तुम्हारे लिए कुछ भी करने को तैयार हूं.’’

तो सुनो मेरी बात.’’ वह गुलाब को अपनी ओर खींच कर उस के कान में कुछ फुसफुसाने लगी. 

इस के बाद गुलाब ने पूजा के प्रेमी शिवम उर्फ ज्वाला के साथ मिल कर गुरुचरण की हत्या की योजना बनाई. गुरुचरण शिवम व पूजा के देह मिलन में रोड़ा बनता था, सो वह उस की हत्या करने को राजी हो गया. योजना बनी कि देर शाम गुरुचरण को खेत पर शराब पीने के बहाने बुलाया जाए, फिर मौत की नींद सुला देंगे. लेकिन समस्या यह थी कि शराब के लिए उसे किस के जरिए बुलाया जाए. क्योंकि गुलाब व शिवम से तो वह खुन्नस खाता था और देखते ही भड़क जाता था. काफी सोचविचार के बाद गुलाब को फरीदपुर निटर्रा निवासी विष्णुदयाल का नाम याद आया. वह गुरुचरण का साथी था. वह उस के साथ कई बार जाम से जाम टकरा चुका था. 

पूजा ने प्रेमियों के साथ क्यों उजाड़ा सुहाग

गुलाब और शिवम ने उस से बात की तो विष्णुदयाल ने साफ मना कर दिया. इस पर गुलाब ने पूजा से बात की. पूजा ने विष्णुदयाल को मिलन का लालच दे कर राजी कर लिया. उस के बाद शिवम, गुलाब व विष्णुदयाल ने कान से कान जोड़ कर गुरुचरण की हत्या की पूरी रूपरेखा तैयार की और जानकारी पूजा को भी दे दी. 25 जुलाई, 2024 की शाम 6 बजे विष्णुदयाल मनकापुर गांव के बाहर खेत में पहुंच गया. उस के हाथ में शराब का क्वार्टर भी था. वहीं से उस ने गुरुचरण से मोबाइल फोन पर बात की और शराब पीने के लिए गांव के बाहर खेत पर बुलाया. शराब का शौकीन गुरुचरण अपनी बाइक से शाम 7 बजे पहुंच गया. गुरुचरण व विष्णुदयाल आपस में बात कर शराब पीने लगे. 

अभी आधा घंटा ही बीता था कि गुलाब व शिवम भी वहां आ गए. गुलाब व शिवम को देख कर गुरुचरण का पारा चढ़ गया. वह उन दोनों को गाली बकने लगा. इसी समय उन तीनों ने गुरुचरण को दबोच लिया और उसे मारनेपीटने लगे. जान जोखिम में देख गुरुचरण छूटने का प्रयास करने लगा. तभी विष्णुदयाल ने गुरुचरण के पैर दबोच लिए और गुलाब तथा शिवम उस का दोनों हाथों से गला कसने लगे. लेकिन वह मरा नहीं. तब उन लोगों ने उस के गले में पड़ा गमछा निकाला फिर उसी गमछे से उस का गला घोंट दिया. 

हत्या करने के बाद गुलाब, शिवम व विष्णुदयाल ने गुरुचरण के शव को झाडिय़ों के समीप घूरे के ढेर के पास फेंक दिया. उस की बाइक पैरों पर उलट दी ताकि लगे मौत दुर्घटना से हुई है. शव को ठिकाने लगाने के बाद गुलाब ने फोन के जरिए पूजा को सूचना दी कि उस के पति का काम तमाम हो गया है. फिर तीनों फरार हो गए. अगले दिन 10 बजे मंगलपुर पुलिस को मनकापुर गांव के बाहर खेत पर गुरुचरण की लाश पड़ी होने की सूचना मिली. लाश को कब्जे में ले कर जांच शुरू की. जांच में अवैध रिश्तों में हुई मौत का खुलासा हुआ. 

पूछताछ करने के बाद पहली अगस्त, 2024 को पुलिस ने हत्यारोपी शिवम उर्फ ज्वाला, गुलाब संखवार, पूजा संखवार व विष्णुदयाल को कानपुर देहात की माती कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया.

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

 

लोहे की रौड से 10 बार मारा, फिर खोदी मां की कब्र

फोरेस्ट रेंजर भुवनेंद्र पचौरी और ऊषा के बच्चा न हुआ तो उन्होंने अनाथालय से एक बच्चा गोद ले लिया. बच्चे को दीपक नाम दे कर उस की अच्छी परवरिश की. उच्चशिक्षा हासिल कर दीपक सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी कर रहा था. इसी दौरान ऐसा क्या हुआ कि दीपक ने अपनी मां ऊषा की हत्या कर लाश अपने घर में ही दफन कर दी?

65 वर्षीय ऊषा देवी की तलाश में पुलिस टीम युद्धस्तर पर जुटी थी. जहांजहां उन के मिलने की संभावना थी, वहांवहां तो उन के बारे में पता किया गया, साथ ही तमाम सारे नएपुराने अपराधियों को भी कोतवाली में बुला कर पूछताछ की गई. लेकिन ऊषा देवी के बारे में कोई सुराग नहीं लगा. मुखबिर भी ऊषा देवी के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दे सके.

ऊषा देवी की गुमशुदगी की रिपोर्ट 8 मई, 2024 को उन के द्वारा ग्वालियर के अनाथालय से 23 साल पहले गोद लिए दीपक पचौरी (25) ने स्वयं ग्वालियर की श्योपुर कोतवाली में अपने 2 मुंहबोले रिश्तेदारों के साथ दर्ज कराई थी. दीपक ने एसएचओ योगेंद्र सिंह जादौन को जो कुछ बताया, उस के अनुसार उस की मां कोतवाली थाने के अंतर्गत आने वाले वार्ड-7 की रेलवे कालोनी में अपने सेवानिवृत्तवन विभाग में रेंजर पति भुवनेंद्र पचौरी के साथ रहती थीं, लेकिन 2021 में हार्टअटैक से पति की हुई मौत के बाद मैं और मां साथ रह रहे थे.

दीपक पचौरी ने बताया कि 6 मई, 2024 की सुबह 10 बजे जिस वक्त मां अपनी आंखें चेक कराने अस्पताल जाने के लिए निकलीं तो वह घर पर ही था. शाम होने तक भी मां जब अस्पताल से लौट कर नहीं आईं तो उस ने अपने स्तर से उन्हें अस्पताल से ले कर हर संभावित स्थानों पर तलाशा, मगर उन का कुछ भी पता नहीं चला. ऊषा देवी के लापता होने की घटना को एसएचओ योगेंद्र सिंह जादौन ने गंभीरता से लेते हुए गुमशुदगी दर्ज कर ली. उन्होंने ऊषा देवी की गुमशुदगी की सूचना एसपी अभिषेक आनंद, एडिशनल एसपी सतेंद्र सिंह तोमर एवं एसडीओपी राजीव गुप्ता को देने के बाद तेजी से ऊषा देवी की तलाश शुरू कर दी.

ऊषा देवी की पारिवारिक पृष्ठभूमि और उन के गोद लिए बेटे दीपक के बारे में जानने के लिए उन्होंने हैडकांस्टेबल रवींद्र सिंह तोमर को लगा दिया. तोमर ने बिना समय गंवाए ऊषा देवी के किराएदार, पड़ोसियों और रिश्तेदारों से पूछताछ की तो ऊषा और दीपक से जुड़ी तमाम महत्त्वपूर्ण जानकारी पता चली.

किराएदार ने दी महत्त्वपूर्ण जानकारी

ऊषा देवी के किराएदार पुरुषोत्तम राठौर ने बताया कि 2 महीने बाद दीपक 5 मई को दिल्ली से लौट कर घर आया था और आते ही उस ने कमरे में लगे ताले तोड़ दिए थे. देर रात मांबेटे में ताले तोडऩे और एफडी तुड़वाने को लेकर तूतूमैंमैं हुई थी. आखिरी बार 6 मई की सुबह उस ने ऊषा देवी को नल से पानी भरते हुए देखा था, इस के बाद किसी ने भी ऊषा देवी को नहीं देखा था.

राठौर ने बताया कि दुकान से रात को कमरे पर लौटने पर जब उसे ऊषा देवी दिखाई नहीं दीं तो उस ने दीपक से पूछा था कि अम्मा के कमरे का ताला खुला हुआ है लेकिन अम्मा दिखाई नहीं दे रहीं. इस पर पलट कर उस ने कोई जवाब नहीं दिया और बात को नजरंदाज करते हुए अपनी जेब से मोबाइल फोन निकाल कर किसी से बात करने का दिखावा करने लगा था.

वन विभाग में रेंजर के पद पर नौकरी करने वाले भुवनेंद्र पचौरी और उन की पत्नी ऊषा को कोई औलाद नहीं थी. वे मूलरूप से मुरैना जिले के सबलगढ़ के रहने वाले थे. 5 भाइयों में दूसरे नंबर के भुवनेंद्र अपने किसी रिश्तेदार या भाई के बच्चे को गोद लेना चाहते थे, लेकिन उन की पत्नी ऊषा देवी इस के लिए तैयार नहीं थीं. ऊषा देवी ने सुझाव दिया कि किसी अनाथाश्रम से अनाथ बच्चे को गोद ले लेते हैं.

भुवनेंद्र को पत्नी की हठ के आगे झुकना पड़ा और ग्वालियर जा कर एक अनाथालय से विधिवत 3 साल के मासूम बच्चे को गोद ले लिया. पचौरी दंपति मासूम बच्चे के मुख से तोतली भाषा में बातें सुन कर बेऔलाद होने का सारा गम भूल गए. पतिपत्नी ने बड़े लाड़प्यार से गोद लिए बच्चे को पालापोसा और उस का नाम रखा दीपक. दीपक नाम रखने के पीछे भी खास वजह थी कि गोद लिया बच्चा ही उन के घर का चिराग था.

दीपक पढ़ाई में तेज था. 10वीं में उस ने 94 प्रतिशत अंक और 12वीं में 98 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. श्योपुर से ग्रैजुएशन करने के बाद दीपक यूपीएससी की तैयारी करने इंदौर चला गया. समय अपनी गति से चलता रहा. 2016 में भुवनेंद्र पचौरी वन विभाग से सेवानिवृत्त हो गए.

सब कुछ ठीकठाक चल रहा था, लेकिन 2021 में भुवनेंद्र की हार्ट अटैक से मौत हो गई. उस वक्त दीपक की उम्र 21 साल थी. भुवनेंद्र पचौरी ने अपने गोद लिए बेटे को अपने बैंक अकाउंट्स और प्रौपर्टी में उत्तराधिकारी बना रखा था. इतना ही नहीं, दीपक के नाम पर तकरीबन 16 लाख रुपए की एफडी भी उन्होंने करवा रखी थी.

2021 में भुवनेंद्र पचौरी के निधन के बाद दीपक ने उक्त एफडी को भुना कर धनराशि को शेयर खरीदने और शेष बची रकम अय्याशी और नशा करने में उड़ा दी. इस के बाद वह अपनी मां ऊषा देवी पर 32 लाख रुपए की एफडी तुड़वा कर पैसा देने के लिए दबाव बनाने लगा था. बेटे की इन हरकतों से ऊषा देवी बहुत दुखी रहने लगीं थीं. वह मन ही मन घुटती रहती थीं. हालांकि वह यह सोच कर दिल पर पत्थर रख लेती थीं कि पति द्वारा की वसीयत के मुताबिक उन के मरने के बाद दीपक ही सारी जायदाद और 32 लाख की एफडी का हकदार होगा. 

वैसे भी ऊषा देवी दीपक को समझासमझा कर थक चुकी थीं, लेकिन दीपक की अय्याशियों और नशा करने की आदतों में जरा भी कमी नहीं आई थी. इसी बात को ले कर ऊषा देवी और दीपक के बीच आए दिन विवाद होने लगा था. ऊषा देवी के जेठ और देवर श्योपुर शहर की वकील कालोनी में रहते थे. यहां ऊषा देवी के भतीजे संजय दत्त शर्मा का परिवार रहता था. संजय कई बार दीपक और उस की मां ऊषा देवी के बीच तकरार होने पर सुलह करवाकरवा कर आजिज आ चुका था. 

दीपक का पैसों को ले कर अपनी मां से विवाद थमने के बजाय बढ़ता चला गया. कुछ दिन पहले ही संजय ने मांबेटे के बीच मकान का बंटवारा करा कर दोनों को अलगअलग कमरे में शिफ्ट करवा दिया था. शेष कमरों में से 2 कमरों को पुरुषोत्तम राठौर को भाड़े पर दिलवा कर खाली बचे कमरों में ताला लगा कर उस की चाबी ऊषा देवी को थमा दी थी.

मां से दीपक क्यों करता था मारपीट

हालांकि ऊषा देवी बेटे के द्वारा पैसों को ले कर आए दिन किए जाने वाले विवाद से परेशान हो कर श्योपुर वाले मकान को बेच कर सबलगढ़ में शिफ्ट होने का मन बना चुकी थीं. बताया जाता है कि दीपक पैसों के लिए ऊषा देवी के साथ अकसर मारपीट करता था. यहां तक कि कुछ महीने पहले वह मां के खाने में चूहामार दवाई मिला कर मारने का प्रयास भी कर चुका था. मगर संयोग से उल्टी हो जाने से ऊषा देवी की जान बच गई थी. समझने वाली बात यह थी कि भुवनेंद्र पचौरी की मृत्यु के बाद अब दीपक को मां के अलावा कोई रोकनेटोकने वाला नहीं था.

दीपक ऐसा नशा करता था, जिस में एक ही बार में 4-5 हजार रुपए खर्च हो जाते थे, जबकि उस के पास इतने रुपए नहीं होते नहीं थे, क्योंकि उस के पास आमदनी का कोई जरिया नहीं था. लेकिन नशा तो नशा है, उसे तो उस की लत लग चुकी थी. मां की 32 लाख की एफडी तुड़वाने को ले कर मांबेटे के संबंधों में कड़वाहट घुल चुकी थी. पैसों और जायदाद को ले कर खटास लगातार बढ़ रही थी. पुलिस जांच के समय इस बात को भी समझने की कोशिश कर रही थी कि आखिर ऊषा देवी की गुमशुदगी अथवा हत्या से किसे फायदा पहुंचेगा.

ऊषा देवी की गुमशुदगी की बात एसएचओ से ले कर ऊषा देवी के रिश्तेदारों तक के गले कतई नहीं उतर रही थी, क्योंकि ऊषा देवी कोई छोटी बच्ची नहीं थीं, जो अस्पताल से गुम हो जातीं. ऊषा देवी के लापता होने की खबर लगते ही उन का भाई 8 मई, 2024 को सिटी कोतवाली पहुंचा और एसएचओ योगेंद्र सिंह जादौन से मिल कर बताया कि उस ने जब अपनी बहन के बारे में दीपक से पूछा तो वह कभी कहता है कि वह घर से अस्पताल जाने के लिए निकली थीं तो कभी मंदिर जाने की बात कहता है. उस के द्वारा कही जा रही बातें संदेह को जन्म देती हैं. 

उस ने आशंका जताई कि दीपक ने पैसों के लालच में ऊषा देवी की हत्या कर दी है. इसलिए उस ने दीपक को शक के दायरे में लेते हुए बहन ऊषा देवी के घर की जांच करवाए जाने की मांग की. उस की बातें सुन कर एसएचओ को भी ऊषा देवी की गुमशुदगी का रहस्य काफी हद तक समझ में आ गया. बिना एक पल गंवाए वह एसआई कमलेंद्र, हैडकांस्टेबल रवींद्र सिंह तोमर को साथ ले कर ऊषा देवी के रेलवे कालोनी स्थित आवास पर पहुंच गए. ऊषा देवी के भाई संजय दत्त शर्मा की मौजूदगी में आवास की तलाशी ली. घर के प्रत्येक हिस्से की बारीकी से जांच करनी शुरू कर दी.

हत्या कर घर में दफनाया

इस दौरान उन्हें सीढिय़ों के नीचे बने बाथरूम में ईंटों की ताजा चिनाई और और उस पर सीमेंट का प्लास्टर दिखाई दिया. एसएचओ ने दीपक से पूछा कि ये चिनाई और प्लास्टर कब कराया

”3 दिन पहले ही.’’

इस की जरूरत तुम्हें क्यों पड़ी?’’ 

इस सवाल पर दीपक चौंका जरूर, लेकिन बहुत जल्द उस ने जबाब दिया, ”सर, बाथरूम का प्लास्टर खराब हो गया था.’’ 

पुलिस उस के हावभाव देख कर समझ गई थी कि वह झूठ बोल रहा है.

एसएचओ ने कड़ी नजरें करते हुए कहा, ”अब तुम्हारी भलाई इसी में है कि ऊषा देवी की गुमशुदगी के पीछे की कहानी का सच साफसाफ बता दो, वरना मुझे दूसरा तरीका अपनाना पड़ेगा.’’ 

दीपक ने खुद को चारों ओर से पुलिस के घेरे में घिरा देख कर सच्चाई उगलने में ही भलाई समझी. दीपक ने हाथ जोड़ कर कहा, ”सर, मेरी मां ऊषा देवी लापता नहीं हुई हैं, कड़वा सच तो यह है कि वह अब इस दुनिया में नहीं हैं.’’

क्या मतलब?’’

”मुझे माफ कर दीजिए सर. मैं ने 6 मई, 2024 की सुबह जब रोज की तरह मां छत पर रखे तुलसी के गमले में पानी डाल कर लौट रही थीं, तभी उन्हें सीढिय़ों से उतरते वक्त धक्का दे कर नीचे गिरा दिया था. सिर के बल गिरने से वह बेहोश हो गई थीं. इसी दौरान मैं ने उन के सिर पर लोहे की रौड से ताबड़तोड़ 10-12 वार कर के मौत के घाट उतार दिया था. 

”उन्हें उफ करने तक का मौका नहीं मिला. मां को मौत के घाट उतार कर शव को साड़ी में लपेट कर घर की सीढिय़ों के नीचे बने पुराने बाथरूम में गड्ïढा खोद कर दफना दिया था और ऊपर से चबूतरा बना दिया था.’’

दीपक ने यह भी बताया कि उसे उम्मीद थी कि मां की हत्या एक पहेली बन कर रह जाएगी और वह कभी भी मां की हत्या के आरोप में पकड़ा नहीं जाएगा. लेकिन हत्या के बाद मां के शव को घर के ही बाथरूम में गहरा गड्ढा खोद कर दफनाने और उस पर चबूतरा बनाने की गलती उसे भारी पड़ गई.

दीपक के इकबालिया बयान के बाद पुलिस ने 9 मई, 2024 को हत्या और साक्ष्य छिपाने का मामला दर्ज कर उसे उस के घर से अपनी हिरासत में ले लिया. वहीं ऊषा देवी की गुमशुदगी के मामले को हत्या के मामले में परिवर्तित कर दिया. 

उधर मोहल्ले के लोगों को जैसे ही पता लगा कि ऊषा देवी की हत्या कर उन की लाश गोद लिए बेटे दीपक ने उन्हीं के घर के बाथरूम में दफना थी, सभी हतप्रभ रह गए. थोड़ी ही देर में सैकड़ों लोगों की भीड़ घर के बाहर जमा हो गई, जो नारे लगा रही थी. भीड़ की मांग थी कि मां के हत्यारे बेटे को फांसी दो फांसी दो. 

इस के बाद एसएचओ योगेंद्र सिंह जादौन ने एसडीएम से अनुमति ले कर तहसीलदार और एफएसएल टीम की मौजूदगी में दीपक की निशानदेही पर मजदूरों से बाथरूम की खुदाई करा कर चबूतरे के नीचे से ऊषा देवी का शव नष्ट होने से पहले बरामद करने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था.

पोस्टमार्टम के बाद ऊषा देवी का शव पुलिस ने उन के भतीजे संजय दत्त शर्मा को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया था. पूछताछ के बाद पुलिस ने दीपक से मां की हत्या में प्रयुक्त लोहे की रौड बरामद करने के बाद न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया,

दीपक की करतूत पर हर कोई हैरान था, उस के नातेरिश्तेदारों ने निर्णय लिया है कि उस ने हैवानियत भरा जो काम किया है, इसलिए जेल में परिवार का कोई सदस्य उस से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेगा. हत्या के इस बहुचर्चित मामले की विवेचना सिटी कोतवाली के एसएचओ योगेंद्र जादौन कर रहे थे.

 

एक्ट्रैस लैला खान से गहरा रिश्ता था 6 कंकालों का

परवेज टाक ने सौतेली बेटी ऐक्ट्रैस लैला खान, पत्नी सेलिना सहित 6 जनों की हत्या कर लाशें फार्महाउस में दफना दी थीं. वह बेफिक्र हो कर मुंबई से कश्मीर चला गया तो बाद में यह केस कैसे खुलाï? इस बहुचर्चित केस में ऐसे कौन से सबूत मिले, जिन के जरिए हत्यारे को हुई सजा ए मौत.

24 मई, 2024, दिन शुक्रवार. मुंबई की सेशन कोर्ट में 13 साल पहले ईगतपुरी के फार्महाउस में हुई 6 लोगों की हत्या का फैसला सुनाया जाना था. यह 6 लोग थे बौलीवुड की मशहूर ऐक्ट्रैस लैला खान (31 वर्ष), मां सेलिना खान (51 वर्ष), बहन अजमीना (32 वर्ष), जुड़वा भाईबहन इमरान और जारा (दोनों 25 वर्ष) कजिन रेशमा 24 वर्ष.

मुंबई से 130 किलोमीटर की दूरी पर ईगतपुरी में ऐक्ट्रैस लैला खान का फार्महाउस था. ये 6 हत्याएं फार्महाउस में ही की गई थीं, जिस का सुराग डेढ़ साल बाद लगा. इन 6 हत्याओं का दोषी सेलिना खान का तीसरा पति परवेज टाक था. उस पर मई महीने की शुरुआत में आरोप सिद्ध हो गया था. अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. 24 मई को अंतिम बहस के बाद परवेज टाक को अदालत की ओर से सजा दी जा सकती थी.

परवेज टाक को उम्रकैद मिलती है या फांसी, इसी फैसले का इंतजार कोर्टरूम में मौजूद सभी लोगों को था. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सचिन बलवंत पवार अपने चैंबर में आ चुके थे.

अदालती काररवाई देखने के लिए कोर्टरूम पूरी तरह भर गया था. कोर्टरूम में पांव रखने की भी जगह नहीं बची थी. इन में सेलिना खान के दोनों पति और परवेज टाक के बीवीबच्चे तथा बूढ़ी मां भी थी. परवेज टाक कोर्ट के कटघरे में सिर झुका कर खड़ा था. वह पहले से ही शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप था.

जज महोदय ने अदालत की काररवाई शुरू करने का इशारा किया तो परवेज टाक के वकील ने उठ कर कोट दुरुस्त करते हुए झुक कर जज साहब को अभिवादन किया फिर परवेज टाक के पास पहुंच कर बहुत सधे हुए शब्दों में कहना शुरू किया, ”मी लार्ड! मेरा मुवक्किल परवेज टाक दुबलापतला डेढ़ पसली का इंसान है. इस पर पुलिस ने 6 हत्याओं का दोष मढ़ा है. आप ही बताइए कि यह 6 लोगों की हत्याएं कैसे कर सकता है? यह तो…’’

”मी लार्ड!’’ विशेष सरकारी वकील उज्जवल निकम ने अपनी जगह से उठ कर बचावपक्ष के वकील की बात काटते हुए कहा, ”एक दुबलापतला व्यक्ति किसी की हत्या नहीं कर सकता, ऐसा कोई उदाहरण इतिहास में नहीं है. जब आदमी पर जुनून और क्रोध सवार होता है तो वह कुछ भी कर सकता है. फिर यह अकेला कहां था, उस वक्त इस का साथ सिक्योरिटी गार्ड शाकिर वाणी ने दिया था, जो फरार चल रहा है.’’

”मी लार्ड,’’ बचाव पक्ष के वकील ने कहा, ”मेरे मुवक्किल पर जिन 6 लोगों की हत्याओं का दोष मढ़ा जा रहा है, उस का कोई प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाह पुलिस के पास नहीं है. जिस वक्त ये 6 हत्याएं हुईं, मेरा मुवक्किल 8 फरवरी को ईगतपुरी में नहीं था, वह मुंबई में था.’’

”परवेज टाक 8 फरवरी को ईगतपुरी फार्महाउस में नहीं था, इस का कोई ठोस सबूत है आप के पास?’’ एडवोकेट उज्जवल निकम ने पूछा.

”नहीं!’ बचाव पक्ष के वकील ने इंकार में सिर हिलाया.

”मी लार्ड, मेरे काबिल दोस्त के पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि 8 फरवरी को रात में 6 लोगों के कत्ल किए गए, परवेज टाक वहां ईगतपुरी में नहीं था.’’

कुछ क्षण के लिए खामोश होने के बाद उज्जवल निकम बोले, ”यह 8 फरवरी की रात को ईगतपुरी के फार्महाउस में मौजूद था, मी लार्ड. इस ने जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ थाने के पुलिस अफसर को बताया है कि 8 फरवरी की रात उस ने मुंबई के ईगतपुरी के फार्महाउस में पत्नी, बच्चों सहित 6 जनों की हत्या कर शव वहीं दफना दिए. यह 6 निर्दोष इंसानों के कत्ल का दोषी है मी लार्ड!’’

कुछ क्षण रुकने के बाद उन्होंने आगे कहा, ”मेरे अजीज दोस्त सरकारी वकील श्री पंकज रामचंद्र चह्वïाण शुरू से इस केस की पैरवी करते आए हैं. आज बेशक वह रेस्ट पर हैं, लेकिन उन्होंने पिछले दिनों कोर्ट में यह साबित कर दिया था कि सेलिना खान और उस की बेटियां, बेटा और भतीजी का हत्यारा परवेज ही है.

कुछ क्षण रुक कर उन्होंने फिर कहना शुरू किया, ”बौलीवुड अभिनेत्री सेलिना खान ने अपनी संपत्ति की पौवर औफ अटोर्नी अपने पूर्व पति आसिफ शेख के नाम लिखवा दी थी. सेलिना की इस बात से परवेज टाक चिढ़ गया था. इस को आसिफ शेख जरा भी पसंद नहीं था.

”6 हत्याएं करने के बाद यह ईगतपुरी से भाग कर किश्तवाड़ में अपने गांव बौंजुआ पहुंचा. यह अपने साथ लैला खान की कीमती कार आउटलैंडर भी ले गया था. उसे इस ने लावारिस छोड़ा तो इसी चक्कर में फंस गया.

”इस ने बड़ी बेरहमी से उन लोगों का खून किया है, जो इसे रिश्ते में अपना मानने लगे थे. यह सेलिना खान का पति था तो लैला खान और उस के भाईबहनों का सौतेला पिता भी था. इस ने रिश्तों और विश्वास का खून किया है, इसलिए मैं अदालत से गुजारिश करूंगा कि परवेज टाक को फांसी की सजा दी जाए. दैट्स आल.’’

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माननीय जज महोदय सचिन बलवंत पवार ने अपना फैसला सुनाया, ”सभी गवाहों और परिस्थितिजन्य साक्ष्य देख लेने और सुन लेने के बाद यह जाहिर हो गया है कि परवेज टाक ने जघन्य गुनाह किया है. यह मामला रेयरेस्ट औफ रेयर की श्रेणी में आता है. इसलिए आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत परवेज टाक को फांसी की सजा दी जाती है. शवों को छिपाने और सबूत नष्ट करने का गुनाह भी इस ने किया है. इस के लिए इस पर आईपीसी की धारा 201 लगाई जाती है, जिस के तहत सश्रम 7 साल की सजा और 10 हजार रुपए का आर्थिक दंड देना होगा. सजा पूरी होने पर इसे फांसी दे दी जाए.’’

न्यायाधीश द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद अदालत के कटघरे में खड़ा परवेज टाक स्तब्ध खड़ा रहा. उस के चेहरे पर उदासी के भाव छा गए. जज साहब के उठ कर चैंबर में चले जाने के बाद पुलिस ने उसे अपनी कस्टडी में ले लिया और कोर्टरूम से बाहर की तरफ ले कर जाने लगे तो मुजरिम परवेज टाक ने धीमे से कहा, ”मैं अपनी बीवीबच्चों और मां से मिलना चाहता हूं.’’

परवेज टाक की मां, बीवी और 3 बेटियां उस वक्त अदालत के कक्ष में मौजूद थीं. परवेज टाक को उस के परिवार के पास ले कर आ गए. परवेज टाक ने अपनी मां को नम आंखों से देखा, उस के होंठ कांपे, ”मेरे बच्चों का ध्यान रखना मां. मैं अब लौट कर नहीं आऊंगा.’’

परवेज टाक की बूढ़ी मां की लरजती आंखों से आंसुओं की धारा बह निकली. उस ने परवेज टाक को अपनी बांहों में समेट लिया. गले लगा कर वह फूटफूट कर रोने लगी. कुछ क्षण बाद उस ने परवेज टाक को कंधे से हटा कर उस का माथा चूमा और चेहरा घुमा लिया.

परवेज टाक अपनी बीवी की तरफ पलटा, ”मैं तुम्हारा गुनहगार हूं… हो सके तो मुझे माफ कर देना. मेरी बेटियों की अच्छी परवरिश करना.’’ इस के बाद उस ने बीवी का हाथ पकड़ कर हथेली को चूमा और फिर तीनों बेटियों के सिर पर हाथ रख कर उस ने चेहरा घुमा लिया.

वह उन 6 हत्याओं का दोषी तो था ही, जो उस ने की थीं, 5 लोगों का भी गुनहगार था, जिन्हें बीच मझधार में छोड़ कर वह जा रहा था. इन से नजरें मिलाने की उस में ज्यादा हिम्मत नहीं बची थी.

इस छोटी सी मुलाकात के बाद पुलिस के साथ वह कोर्ट से बाहर आ गया और कैदियों की वैन में चुपचाप बैठ गया. कुछ देर बाद ही वैन उसे ले कर मुंबई की आर्थर रोड जेल की तरफ रवाना हो गई.

कौन है परवेज टाक और उस ने 6 लोगों का मर्डर क्यों किया? कौन थे मृतक? यह सब जानने के लिए घटना के अतीत में जाना होगा.

मूलरूप से पाकिस्तान की रहने वाली सेलिना भारत में अपनी खूबसूरती को भुनाने के लिए आई थी. इस की सही कद्र फिल्म इंडस्ट्री में हो सकती है, यह सोच कर उस ने कई स्टूडियो के चक्कर काटे तो कुछ फिल्मों में उसे छोटेमोटे रोल मिलने लगे. इन से न शोहरत मिल सकती थी और न शानोशौकत भरी जिंदगी. कुछ वर्षों बाद सेलिना ने आसिफ शेख से निकाह कर लिया.

आसिफ शेख धनी आदमी था. सेलिना को उस से हर सुख मिला, लेकिन उस की शेख से ज्यादा समय तक नहीं पटी. सेलिना ने उसे छोड़ दिया और नादिर शाह पटेल को शौहर बना लिया. लैला खान इसी नादिर शाह पटेल की बेटी थी. सेलिना को यह शौहर भी नहीं भाया. फिर उस से भी अलग हो गई. अब सेलिना की जिंदगी में जिस व्यक्ति ने कदम रखा वह परवेज टाक था.

परवेज टाक जम्मूकश्मीर के किश्तवाड़ का निवासी था. वह वहां वन ठेकेदारी करता था. सेलिना से निकाह होने के बाद वह मुंबई में सेलिना के साथ ही रहने लगा. 4 बच्चों की मां सेलिना की रेशमा पटेल (लैला खान) बड़ी बेटी थी, जो अब जवान हो गई थी.

अपनी मां सेलिना की तरह लैला खान भी बहुत सुंदर थी. उस का एकएक अंग सांचे में ढला प्रतीत होता था. जब वह पैदा हुई थी, उस का नाम रेशमा पटेल रखा गया था. वह नादिर शाह पटेल की बेटी थी. परवेज टाक उस का सौतेला पिता था. रेशमा पटेल यानी लैला खान उसे पसंद नहीं करती थी. चूंकि वह उस की मां सेलिना का शौहर था, इसलिए वह मजबूरी में उस के साथ रह रही थी.

लैला को राजेश खन्ना से मिली पहचान

रेशमा पटेल को मालूम था, उस की मां की फिल्मी दुनिया में अच्छी जानपहचान है, वह कुछ फिल्मों में काम भी कर चुकी है. इसलिए उस ने भी अपनी किस्मत फिल्मी दुनिया में आजमाने की कोशिश शुरू कर दी.

सेलिना ने बेटी की फिल्मों की तरफ रुचि देख कर कुछ पुराने जानपहचान वालों से बात की. उन्होंने सेलिना को आश्वासन दिया कि वह रेशमा पटेल को फिल्मों में चांस देंगे. रेशमा पटेल दिन भर फिल्मी स्टूडियो के चक्कर काटती थी, उस की खूबसूरती देख कर कन्नड़ फिल्म के एक प्रोड्यूसर ने उसे अपनी कन्नड़ फिल्म में चांस दे दिया. यह फिल्म थी ‘मेकअप’ जो सन 2002 में बनाई गई थी.

‘मेकअप’ फिल्म खास नहीं चली. इस से रेशमा खान को कोई पहचान नहीं मिल पाई. इस के बाद सन 2008 में रेशमा पटेल को हिंदी फिल्म में चांस मिला. फिल्म का नाम था ‘वफा: ए डेडली लव स्टोरी’. यह फिल्म उस वक्त के सुपरस्टार अभिनेता राजेश खन्ना के साथ थी. इस फिल्म से रेशमा पटेल को एक नया नाम मिला लैला खान.

लैला खान को एक जानेपहचाने अभिनेता राजेश खन्ना के साथ फिल्म करने की वजह से पहचान मिल गई. वह लैला खान के नाम से मशहूर हो गई. लैला खान फिल्मी सफर पर चल निकली तो उस की मां सेलिना ने राहत की सांस ली. उसे अब बेटी के भविष्य की चिंता नहीं थी.

सेलिना रंगीनमिजाज महिला थी. तीसरी शादी करने के बाद भी उस का अपने पहले पति आसिफ शेख के साथ घनिष्ठ रिश्ता कायम था. आसिफ शेख उस के पास जबतब मिलने चला आता था. यह बात सेलिना के तीसरे पति परवेज टाक को पसंद नहीं थी. वह आसिफ शेख से नफरत करता था, क्योंकि आसिफ शेख हर मामले में परवेज टाक से इक्कीस था.

एक दिन परवेज ने अपनी बीवी सेलिना से पूछा, ”यह आसिफ शेख यहां क्यों आता है?’’

सेलिना ने उसे घूर कर देखा, फिर कंधे झटक कर बोली, ”यह पूछने वाले तुम कौन होते हो?’’

”मैं तुम्हारा शौहर हूं.’’ परवेज टाक ने फुफकार कर कहा.

”शौहर उसे कहते हैं जो शौहर का फर्ज पूरा करता है, तुम मेरे या मेरे बच्चों के लिए क्या कर रहे हो?’’

”मेरे पास जो था, वह मैं सब तुम पर पहले ही लुटा चुका हूं सेलिना. अब मैं कश्मीर में नहीं, यहां मुंबई में हूं. तुम ने मुझे अपनी जरूरत के लिए यहां रखा है तो मुझ पर खर्चा भी तुम्हें ही करना होगा. समझी.’’

”समझ रही हूं. तुम खाना खाओ और सो जाओ.’’ सेलिना बोली.

पत्नी और बेटियों को दुबई क्यों भेज रहा था परवेज

लैला खान उन दिनों राखी सावंत के भाई राकेश सांवत की एक फिल्म ‘जिन्नत’ में काम कर रही थी.

फिल्मों से शोहरत मिलने के कारण लैला खान चर्चा में थी. उस को मुनीर नाम के युवक से प्यार हो गया था. थोड़े दिन मुनीर से प्यार कर लेने के बाद लैला खान ने उस से शादी कर ली. लेकिन उस के नसीब में मुनीर का संग नहीं था.

मुनीर प्रतिबंधित बांग्लादेशी संगठन ‘हरकत उल जिहाद अल इसलामी’ से जुड़ा हुआ था. एक दिन उसे बांग्लादेश की खुफिया एजेंसी ने पकड़ लिया और बांग्लादेश ले गई. लैला खान के दिल पर इस से गहरा आघात लगा, वह परेशान रहने लगी.

उधर उस की मां सेलिना अपने तीसरे पति परवेज से परेशान थी. परवेज लैला खान के फिल्मी संबंध से काफी नाराज था, उस का कहना था कि यह फिल्मी लाइन काफी बदनाम और गंदी है. लैला खान फिल्मों से नाता तोड़ ले और अपनी दोनों बहनों अजमीना और जारा को ले कर दुबई चली जाए. दुबई में वह किसी शेख के पास रहेगी तो लाखों रुपया मिलेगा, जिस से सभी खुशहाल हो जाएंगे.

सेलिना अपनी बेटियों को शेखों के सामने नहीं ढकेलना चाहती थी. वह परवेज की इस बात का विरोध करती रहती थी, जबकि परवेज टाक लैला खान, अजमीना और जारा की जवानी को दुबई में कैश करने के लिए पूरा जोर लगा रहा था.

इसी बात पर सेलिना, लैला खान और उस की दोनों बहनें काफी तनाव में रहने लगी थीं. इस तनाव से मुक्ति पाने के लिए लैला खान ने फरवरी में मुंबई से ईगतपुरी जाने का मन बना लिया. ईगतपुरी मुंबई से 130 किलोमीटर की दूरी पर है. यहां पर उन का फार्महाउस था.

लैला खान ने अपने काम से छुट्टियां ले लीं और अपनी मां सेलिना, बहन अजमीना, जारा, भाई इमरान और कजिन बहन रेशमा को साथ लिया और छुट्टियां बिताने के लिए ईगतपुरी के फार्महाउस में रहने आ गई.

यहां आ कर उसे काफी सुकून मिला, लेकिन जल्दी ही परवेज टाक भी ईगतपुरी आ गया, जिस से उस की खुशियों में खलल पड़ गई.

डायरेक्टर राकेश सावंत के जरिए बढ़ गई हलचल

फिल्म ‘जिन्नत’ की शूटिंग चल रही थी, लेकिन लैला खान सैट पर नहीं पहुंची थी तो राकेश सावंत ने लैला को कई बार फोन किया. लेकिन लैला खान का फोन हर बार स्विच्ड औफ आ रहा था. काफी देर ट्राई कर लेने के बाद राकेश सांवत अपनी गाड़ी ले कर लैला खान के बंगले की ओर रवाना हो गया.

‘जिन्नत’ फिल्म का सैट तैयार था. उस सैट पर लैला खान की मौजूदगी जरूरी थी. लैला खान के न आने से राकेश को लाखों रुपए की चपत लग सकती थी. यही कारण था कि राकेश सावंत लैला खान को लाने उस के बंगले पर पहुंच गया.

वहां मौजूद सिक्योरिटी गार्ड राकेश सांवत को पहचानता था. उस से राकेश सावंत ने लैला खान के विषय में पूछा तो उस ने बताया कि मालकिन अपनी मां तथा भाईबहनों के साथ ईगतपुरी फार्महाउस छुट्टियां बिताने गई हुई हैं. उस ने ईगतपुरी फार्महाउस का पता दे दिया. राकेश सांवत उसी वक्त ईगतपुरी के लिए निकल गया. ईगतपुरी में लैला खान के फार्महाउस पर उन्हें लैला खान का सौतेला पिता परवेज टाक मिला.

परवेज टाक ने बताया कि उस की पत्नी सेलिना अपनी पूरी फैमिली को ले कर दुबई चली गई है.

”दुबई में वे कहां गए हैं, वहां का संपर्क सूत्र या एड्रैस मुझे बताएं. दुबई में मेरी पहचान के लोग हैं, उन्हें भेज कर मैं लैला खान से संपर्क कर लूंगा.’’

”मुझे नहीं मालूम सेलिना कहां है. दुबई पहुंच कर उस ने मुझ से फोन कर के कुछ कहनेसुनने की भी जरूरत नहीं महसूस की है. मुझे सेलिना और बच्चों की बहुत फिक्र हो रही है, सांवत साहब.’’

”ओह! यह तो बहुत गड़बड़ वाली बात है. मेरा फिल्म का सैट लगा पड़ा है. लैला खान नहीं लौटी तो मैं बरबाद हो जाऊंगा.’’ राकेश सांवत ने परेशान होते हुए कहा.

”मैं आप की कोई मदद नहीं कर सकता सांवत साहब. मैं खुद परेशान हूं.’’ परवेज टाक मायूसी से बोला.

राकेश सावंत के लिए वहां रुकना बेकार था. वह मुंबई लौट आया. राकेश सांवत को मालूम था कि लैला खान की मां सेलिना ने पहली शादी आसिफ शेख और दूसरी शादी नादिर शाह पटेल से की थी. नादिर शाह पटेल ही लैला खान का बायोलौजिकल पिता था, इसलिए दुबई में लैला खान कहां जा कर ठहरी है, यह बात नादिर शाह को मालूम हो सकती है.

राकेश सावंत ने तुरंत नादिर शाह से फोन पर बात की और लैला खान के विषय में पूछा. उस ने नादिर शाह पटेल को यह भी बताया कि लैला खान की तलाश में वह उस के मुंबई वाले बंगले और ईगतपुरी फार्महाउस पर हो कर निराश लौट आया है. सेलिना के तीसरे पति परवेज टाक का कहना है कि सेलिना अपनी बेटियों और बेटे के साथ दुबई चली गई है.

नादिर शाह पटेल बेशक सेलिना से तलाक के बाद अलग रह रहा था, लेकिन वह अपनी बेटी लैला खान से हमेशा बातचीत करता रहता था. उसे लैला खान के बारे में चिंता हुई तो वह सब कुछ भूल कर लैला खान की तलाश में निकल गया.

पूर्वपति ने थाने में लिखाई रिपोर्ट

हर तरह से उस ने 2-3 दिनों तक इधरउधर भागदौड़ कर के लैला खान, उस की मां सेलिना और भाईबहनों के बारे में मालूम करने की कोशिश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली.

हार कर वह ओशिवारा पुलिस स्टेशन पहुंच गया और वहां सेलिना तथा उस की बेटियों लैला खान, जारा, अजमीना और बेटे इमरान की गुमशुदगी दर्ज करवा दी. शक में उस ने आसिफ शेख और परवेज टाक का नाम लिखवाया था. लैला खान फिल्मी जगत में जानीपहचानी अभिनेत्री थी. इसलिए पुलिस सभी का पता निकालने के लिए तुरंत हरकत में आ गई.

 

पुलिस ने आसिफ शेख को उस के घर से हिरासत में ले लिया गया और पूछताछ की गई, लेकिन आसिफ शेख किसी भी रूप में संदिग्ध नहीं निकला.

पुलिस ने उसे छोड़ दिया और ईगतपुरी फार्महाउस का रुख किया. वहां अकेला परवेज टाक रह रहा था. उस ने पुलिस को वही कहानी बताई, जो राकेश सांवत को बता चुका था.

पुलिस ने हर तरह से सेलिना और उस के बच्चों की तलाश की, लेकिन उन के बारे में कोई भी सुराग जुटाने में नाकामयाब रही. यह जांच 2-3 महीने चली. कुछ पता न चलने पर पुलिस ने यह फाइल बंद कर दी.

सेलिना उस की बेटी लैला खान, अजमीना, जारा और बेटे इमरान के साथ एक कजिन बेटी रेशमा को लापता हुए डेढ़ साल हो गया था. उन्हें जमीन निगल गई थी या आसमान खा गया था, कुछ पता नहीं था. मुंबई पुलिस खामोश बैठ गई थी. लेकिन 7 फरवरी, 2011 में लापता हुआ इस परिवार का 8 जुलाई, 2012 को सनसनीखेज खुलासा हुआ. दरअसल, एक आपराधिक मामले में जम्मूकश्मीर पुलिस ने परवेज टाक को पकड़ा तो उस के पास लैला खान की 2 महंगी कारें मिलीं.

बौंजुआ थाने के डीएसपी (हेडक्वार्टर) अबरार चौधरी ने इस से पूछा कि इतनी महंगी कार उस के पास कहां से आई तो यह कोई सही उत्तर नहीं दे पाया. जब मार पड़ी तो इस ने बताया कि वह ईगतपुरी में 6 कत्ल कर के यहां आया है. यह कार लैला खान की है. किश्तवाड़ पुलिस ने इसे जब महाराष्ट्र पुलिस के हवाले किया तो इन 6 हत्याओं का रहस्य खुला. तब जम्मू कश्मीर पुलिस ने परवेज टाक को मुंबई पुलिस के हवाले कर दिया.

फार्महाउस से बरामद हुए 6 कंकाल

मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा परवेज से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि उस ने फरवरी, 2011 में ही ईगतपुरी के फार्महाउस में सेलिना और उस के बच्चों की हत्याएं कर दी थीं. फिर 6 लाशें उस ने फार्महाउस में ही गड्ढा खोद कर दफन कर दी थी.

मुंबई पुलिस ने उस की निशानदेही पर फार्महाउस में खुदाई करवाई तो गड्ढे से 6 कंकाल बरामद हो गए.

परवेज टाक से इन के बारे में पूछा गया तो उस ने इन के नाम सेलिना, लैला खान, अजमीना, जारा, इमरान और कजिन रेशमा बताए. इन कंकालों के ऊपर कपड़ों के अवशेष, हाथ में कंगन, अंगूठियां मिलीं. इन्हें कब्जे में ले कर शवों को डीएनए जांच के लिए भेजा गया. इस जांच से मालूम हुआ कि इन में 5 फीमेल और एक कंकाल मेल का है. यह सब आपस में एक ही परिवार से हैं.

परवेज टाक से ये हत्याएं करने का कारण पूछा गया तो उस ने बताया कि वह सेलिना का पति था, लेकिन सेलिना ने उसे प्यार में इसलिए फांसा कि मैं 35 साल का जवान था. सेलिना की सैक्स पूर्ति मैं कर सकता था. इस के बाद भी सेलिना अपने पहले पति आतिफ शेख से मेलजोल रखती थी. यह परवेज को पसंद नहीं था. इस के अलावा उस ने शेख के नाम अपनी सारी प्रौपर्टी की पावर औफ अटार्नी भी बनवा दी थी. वह सब कुछ शेख को सौंप कर दुबई चली जाना चाहती थी.

परवेज सोचता था कि ये सब दुबई चले जाएंगे तो वह अकेला रह जाएगा. उसे फांके मिले, मैं यह कभी बरदाश्त नहीं कर सकता था. इसलिए उस ने पहले ही योजना बना ली थी कि सेलिना को वह सबक सिखाएगा.

परवेज किश्तवाड़ अपने गांव गया. वहां से अपनी पहचान के व्यक्ति शाकिर वाणी को ला कर ईगतपुरी के फार्महाउस पर चौकीदार रख दिया. पहले वाले चौकीदार की उस ने छुट्टी कर दी थी.

7 फरवरी, 2011 को जब लैला खान अपनी मां और भाईबहनों के साथ ईगतपुरी में छुट्टियां बिताने आई तो 3 दिन बाद ही परवेज की आसिफ शेख और प्रौपर्टी को ले कर सेलिना से गरमागरम बहस हो गई. गुस्से में परवेज ने सेलिना को रौड से पीटना शुरू किया. वह चीखने लगी तो ऊपर के फ्लोर पर पार्टी कर रही लैला खान, उस की तीनों बहनें और भाई इमरान नीचे आ गए.

रौड की मार से सेलिना के प्राण निकल गए थे. ये सब गवाह बन सकते थे इस मर्डर के. इसलिए परवेज ने शाकिर वाणी की मदद से सभी को मौत के घाट उतार दिया. फिर इन लाशों को गड्ढा खोद कर फार्महाउस के कोने में दफन कर दिया. सबूत मिटाने के लिए उस ने फार्महाउस का वह हिस्सा जला दिया, जहां हत्याएं की गई थीं.

परवेज कुछ दिन यहीं फार्महाउस में रहा, फिर लैला खान की दोनों कारें ले कर किश्तवाड़ चला गया, लेकिन एक साल बाद एक अपराध में जम्मूकश्मीर पुलिस ने परवेज को पकड़ा और कारों के द्वारा शक होने पर उसे मुंबई पुलिस के हवाले कर दिया.

शाकिर वाणी फरार था. अपराध शाखा उस की तलाश में लग गई. परवेज टाक को न्यायालय में पेश कर के जेल भेज दिया गया.

केस की जांच करने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की. मामला 13 सालों तक कोर्ट में चला. जघन्य हत्याओं का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था, किंतु परवेज टाक की ईगतपुरी में मौजूदगी, वहां उस की 18 फरवरी से हत्या होने के बाद तक की फोन लोकेशन का होना. रौड, खून सने चाकू का मिलना और अन्य मजबूत साक्ष्य पुलिस ने जुटा लिए थे. फिर सरकारी वकील उज्जवल निकम तथा पंकज रामचंद्र चह्वण की सूझबूझ भरी पैरवी ने कोर्ट में 42 गवाह पेश किए.

इन्हीं सबूतों के आधार पर 24 मई, 2024 को मुंबई के सत्र न्यायालय के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सचिन बलवंत पवार ने बौलीवुड की उभरती कलाकार लैला खान और उस के 4 भाईबहन तथा मां सेलिना की हत्या पर फैसला सुनाया.

फैसला सुनाए जाने के बाद पुलिस ने मुजरिम परवेज टाक को आर्थर रोड जेल पहुंचा दिया.

 

 

एआई से खुली मर्डर मिस्ट्री

एआई से खुली मर्डर मिस्ट्री – भाग 3

मृतक हितेंद्र के भाई राहुल यादव से जिन संदिग्ध युवकों के एड्रैस मिले थे, उन के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई. लेकिन रौकी और जेम्स अपने घरों से फरार मिले. इन के घरों से इन के फोन नंबर मालूम कर के इन्हें फोन करने की कोशिश की गई, किंतु दोनों के फोन भी स्विच्ड औफ आ रहे थे.

पुलिस टीम ने इन के फोन नंबर सर्विलांस पर लगा दिए. इन के उठने बैठने के ठिकानों की भी जानकारी जुटाई गई और दिल्ली एनसीआर में विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की गई. आखिर में जेम्स और हरजीत सिंह उर्फ रिकी उर्फ रौकी को गिरफ्तार कर लिया गया.

इन से मिली जानकारी द्वारा इन के साथी विपिन और जेम्स को प्रेमिका प्रियंका उर्फ एनी के साथ पकड़ लिया गया. कोतवाली में इन से कड़ी पूछताछ की गई तो बहुत ही चौंकाने वाली जानकारी सामने आई.

हितेंद्र कैसे बना लड़कियों का दलाल

परमवीर सिंह उर्फ नमन उर्फ जेम्स ने बताया, ”सर, मैं ने अपनी प्रेमिका एनी और रौकी के साथ मिल कर हितेंद्र की हत्या की है. उस की हत्या कर के मुझे थोड़ा सा भी पछतावा नहीं हुआ, क्योंकि हितेंद्र था ही इस लायक कि उसे जीवित नहीं छोड़ा जा सकता था. वह मतलबपरस्त व्यक्ति था. उसे दोस्तों की कद्र नहीं थी.

”आप को शायद अभी तक यह पता नहीं होगा कि हितेंद्र का काम क्या था. उस के भाई राहुल यादव ने आप लोगों को बताया होगा हितेंद्र एक बड़ी कंपनी में औडिट का काम करता था, लेकिन यह गलत है. हितेंद्र कालगर्ल के धंधे में लिप्त रहा है. वह लड़कियों का बहुत बड़ा दलाल था. एकएक लड़की को 50-50 हजार और एकएक लाख रुपए में होटलों में सप्लाई करता था.

”देह व्यापार में अपने जिस्म की कीमत वसूलने उतरी लड़कियों को वह बड़ेबड़े होटलों में भेजता था. उन लड़कियों को होटल वाले मोटे कमीशन पर अपने यहां बुक करते थे. अपना हिस्सा ले कर हितेंद्र अगले शिकार की तलाश में एक शहर से दूसरे शहर के चक्कर लगाता था.

”घर में उस ने यही कह रखा था कि वह कंपनी की ओर से विभिन्न शहरों में औडिट का काम करने जाता है. उस की बीवी पूजा उसे देवता मानती थी. उसे मालूम ही नहीं है कि उस का पति हितेंद्र वास्तव में लड़कियों का दलाल है.’’

”तुम इतना कुछ किस दावे के साथ कह रहे हो?’’ इंसपेक्टर जगदीप सिंह ने हैरानी से पूछा.

”साहब, मैं खुद हितेंद्र के साथ इसी अनैतिक धंधे में लगा हुआ था. मेरे साथ रौकी, विनीत, मेरी पार्टनर, मेरी लवर एनी भी इसी धंधे में हैं. हम ही नहीं और भी कुछ लोग इस काम में हितेंद्र के साथी रहे हैं.’’

”तुम हितेंद्र के लिए क्या काम करते थे?’’ एसआई सतेंद्र सिंह ने पूछा.

”हमारा काम शहरों में लड़कियां फंसाने का था. गरीब घरों की लड़कियां मोटा रुपया मिलने के लालच में जल्दी फंस जाती थीं, उन्हें नौकरी दिलाने के नाम पर शहरों में ला कर देह बेचने के लिए राजी किया जाता था. उन्हें हम हितेंद्र के हवाले कर देते थे. हितेंद्र के अनेक होटलों में अच्छे संपर्क थे. वह उन लड़कियों को कौंट्रैक्ट पर अच्छा कमीशन मिलने के नाम पर होटलों में बुक करवा देता था.’’

”हूं… हितेंद्र एक प्रकार से तुम लोगों का हैड था. यही बात है न?’’ एसआई सतेंद्र ने पूछा.

”जी हां.’’

”तो फिर तुम्हें अपने बौस की हत्या क्यों करनी पड़ी?’’

”साहब, 5 महीने पहले हितेंद्र 4 युवकों के साथ उस वक्त बेंगलुरु के ललित होटल में पकड़ा गया था, जब वह लड़की की सप्लाई दे रहा था. बेंगलुरु पुलिस ने लड़की के बयान पर उसे गिरफ्तार किया था. फिर उसे कोर्ट में पेश कर के जेल भेज दिया था.

”हितेंद्र को जेल में 3 महीने हो गए थे. वह डर रहा था कि लंबे समय तक जेल में रहा तो घर वालों के आगे उस के धंधे का भेद खुल जाएगा. हितेंद्र ने मुझ से कहा कि मैं उस की जमानत करवाऊं. मैं ने भागदौड़ कर के किसी तरह हितेंद्र की जमानत करवा दी थी. उस समय रौकी ने भी मेरा साथ दिया था. हम ने हितेंद्र की जमानत करवाने में एक लाख रुपया खर्च कर दिया था.

”हितेंद्र जमानत के बाद जेल से बाहर आ कर फिर अपने धंधे में रम गया. वह मांगने पर भी हमारा एक लाख रुपया नहीं दे रहा था. इसी बात पर हमारी हितेंद्र से कहासुनी होती थी. एक बार हमारे बीच जबरदस्त झगड़ा हुआ. मैं ने हितेंद्र की कार छीन ली और उसे पीटा भी.

”हितेंद्र की एक शादीशदा औरत से दोस्ती थी. मैं ने उस औरत के पति को मय सबूत के बता दिया कि तुम्हारी औरत के हितेंद्र से नाजायज संबंध हैं. तभी से हितेंद्र मुझ से खार खाने लगा. मैं ने सोचा कहीं हितेंद्र मेरे लिए कोई गलत कदम न उठा ले, इसलिए मैं ने उसे निपटाने का प्लान बना लिया. मैं ने हितेंद्र से माफी मांगी और उसे विश्वास दिलाया कि अब मैं उस से रुपयों की मांग नहीं करूंगा.

”प्लान बना कर मैं ने हितेंद्र को 9 जनवरी को रौकी के घर टैगोर गार्डन बुलाया. वह मंजीत के साथ आया तो हम ने मंजीत को वापस भेज दिया और हितेंद्र को कार में ड्रिंक करने के बहाने बैठा लिया. मेरे साथ रौकी, एनी और विपिन भी थे. हितेंद्र को बेवजह कार में इधरउधर तब तक घुमाता रहा, जब तक अंधेरा नहीं हो गया.

”अंधेरा होते ही मैं ने पीछे सीट पर हितेंद्र को दबोच लिया और उस की गरदन दबोच ली. उस की गरदन मैं ने तब तक दबाई, जब तक उस की मौत नहीं हो गई. इस के बाद हम ने रात के अंधेरे में उस की लाश गीता कालोनी फ्लाईओवर के नीचे झाडिय़ों में फेंक दी.’’

जेम्स के द्वारा जुर्म की स्वीकृति कर लेने के बाद पुलिस ने चारों को कोर्ट में पेश कर के जेल भिजवा दिया.

हितेंद्र की लाश पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दी गई थी. वे खुश थे कि पुलिस ने हितेंद्र के हत्यारों को जेल भेज दिया है. हितेंद्र का असली चेहरा क्या है, यह उन के लिए राज ही बना रहा. पुलिस टीम अब लड़कियों की सप्लाई में लिप्त गैंग के दूसरे फरार लोगों की तलाश में छापेमारी कर रही थी.

एआई से खुली मर्डर मिस्ट्री – भाग 2

राहुल यादव ने छावला पुलिस स्टेशन के नोटिस बोर्ड पर लगे पैंफ्लेट को देख कर मृतक की पहचान अपने बड़े भाई हितेंद्र उर्फ हितु के रूप में की. उसे थाने से बताया गया कि यह फोटो थाना कोतवाली लालकिला एरिया के हैडकांस्टेबल प्रशांत द्वारा लगाया गया है. इसलिए उन्हें कोतवाली से संपर्क करना चाहिए.

वह लोग थाना कोतवाली (लालकिला) पहुंच गए. वहां उन की मुलाकात एसआई सतेंद्र सिंह से हुई. राहुल यादव ने जेब से एक फोटो निकाल कर एसआई सतेंद्र सिंह की ओर बढ़ाते हुए कहा, ”सर, यह मेरे बड़े भाई हितेंद्र उर्फ हितु की फोटो है. यह इस सप्ताह घर नहीं आए तो मेरी भाभी पूजा रानी ने मुझ से उन का पता लगाने के लिए कहा. चूंकि भाई हितेंद्र का फोन स्विच्ड औफ आ रहा है, इसलिए मैं घबरा गया.

”हम भाई का फोटो ले कर उन की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाने थाना छावला गए थे. वहां नोटिस बोर्ड पर अपने भाई का फोटो लगा देख कर मालूम किया तो बताया गया उन की लाश मिली है. पहचान नहीं हो पा रही थी, इसलिए पुलिस ने यह पैंफ्लेट चस्पा किया है. हमें यहां संपर्क करने को कहा गया, तब हम यहां आ गए हैं.’’

”आप मृतक के छोटे भाई हैं?’’ एसआई सतेंद्र सिंह ने पूछा.

”जी हां, मेरा नाम राहुल है. साथ में मेरी भाभी पूजा है. मेरे पिता का नाम नरेंद्र सिंह है. मेरे पिता सीआरपीएफ में हैं. मैं मानेसर (हरियाणा) में एक फर्म में प्राइवेट जौब करता हूं. हमारा घर दौलतपुर, दिल्ली में है.’’

”आप पूरे विश्वास से कह रहे हैं कि नोटिस बोर्ड पर आप ने जो फोटो देखी है, वह आप के बड़े भाई की है.’’

”जी हां, मैं ने अपने बड़े भाई की फोटो आप को दी है. आप देख लीजिए.’’

एसआई सतेंद्र सिंह ने फोटो देखी. वह मृतक के साथ हूबहू मिल रही थी.

”आप चल कर पहले मृतक की लाश देख लीजिए, फिर हम बैठ कर बात करेंगे.’’

”ठीक है साहब.’’

एसआई सतेंद्र सिंह ने राहुल यादव और उस की भाभी पूजा को हैडकांस्टेबल प्रशांत और ओमपाल के साथ सब्जी मंडी मोर्चरी भेज दिया.

सब्जी मंडी मोर्चरी में उस अज्ञात युवक की लाश का पोस्टमार्टम नहीं किया गया था. युवक की लाश जब राहुल यादव और उस की भाभी पूजा को दिखाई गई तो लाश की पहचान उन्होंने अपने बड़े भाई और पति हितेंद्र के रूप में की.

लाश को देख कर दोनों रोने लगे. किसी तरह उन्हें शांत करवा कर हैडकांस्टेबल प्रशांत और ओमपाल वापस कोतवाली ले आए. एसआई सतेंद्र सिंह उन्हीं का इतंजार कर रहे थे. एसआई सतेंद्र सिंह ने दोनों को सामने बैठा कर पूछताछ शुरू की.

”पूजा, तुम्हारे पति हितेंद्र की लाश हमें रिंग रोड पर गीता कालोनी फ्लाईओवर के नीचे झाडिय़ों में मिली थी. तुम्हारे पति की हत्या हुई है, यह मेरा मानना है. हत्या कैसे हुई, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मालूम होगा. पहले यह बताओ वह क्या काम करते थे?’’

”साहब, वह किसी कंपनी में औडिट का काम करते थे. उस कंपनी ने उन्हें नोएडा से उत्तराखंड तक का एरिया औडिट के लिए दिया हुआ था, इसलिए वह अधिकतर समय घर से बाहर ही रहते थे. एक सप्ताह में एक बार ही वह घर आते थे.

”सर, पिछले 10 दिनों से वह घर नहीं आए थे. मुझे उन की चिंता सता रही थी. 8 दिन गुजर जाने पर वह घर नहीं आए थे, न उन का फोन लग रहा था. तब तब मैं ने राहुल को अपनी चिंता से अवगत करवाया.

”2 दिन तक यह उन के विषय में मालूम करता रहा, फिर मुझे ले कर छावला पुलिस स्टेशन आ गया. यहां से मालूम हुआ कि मेरे पति की किसी ने हत्या कर दी है.’’ पूजा कहने लगी, ”सर, मेरे पति की हत्या किस ने की, आप यह पता लगा कर उसे फांसी पर चढ़ाइए, तभी मेरे मन को तसल्ली मिलेगी.’’

”मैं पूरी कोशिश करूंगा कि आप के पति के कातिल को कड़ी से कड़ी सजा मिले. आप मुझे बताइए, आप के पति हितेंद्र की किसी से कोई दुश्मनी थी, जो उस की मौत का कारण बनी.’’

”वह तो बहुत सीधेसादे थे, सर. उन का भला कौन दुश्मन होगा.’’ पूजा ने बताया.

”भाई साहब सचमुच बहुत सीधे इंसान थे. अपने आप में व्यस्त रहने वाले, लेकिन मुझे जेम्स और रौकी पर संदेह जा रहा है.’’ राहुल गंभीर हो कर बोला.

”यह जेम्स और रौकी कौन हैं?’’ एसआई सतेंद्र सिंह ने राहुल के चेहरे पर नजरें जमा कर पूछा.

”भाई के गहरे दोस्त रहे हैं ये. आजकल इन का भाई के साथ पैसों के लेनदेन पर क्लेश चल रहा था.’’

”क्या तुम्हारे भाई ने इन लोगों से कर्ज लिया था?’’

”यह तो नहीं मालूम साहब, लेकिन इतना मालूम हुआ है कि जेम्स और रौकी भाई से एक लाख रुपए मांग रहे थे. उन्होंने भाई की कार भी इसी चक्कर में छीन रखी थी.’’

एसआई सतेंद्र सिंह ने सिर हिलाया, ”इन दोनों को चैक करना पड़ेगा. क्या तुम इन के पते ठिकाने जानते हो?’’

”हां साहब, इन 2 दिनों में मैं ने यही मालूम किया है. मुझे परमवीर उर्फ नमन उर्फ जेम्स के घर का पता मालूम है, वह खरबंदा प्रौपर्टीज के पास संत कबीर के सामने वाली गली, चंदर विहार, दिल्ली में रहता है.’’

”…और रौकी?’’

”इस का असली नाम हरजीत सिंह है. लोगों में रौकी नाम से मशहूर है. पिता का नाम सतविंदर सिंह है. यह सी-27, थर्ड फ्लोर, टैगोर गार्डन एक्सटेंशन, दिल्ली में रहता है.

”साहब, मेरे भाई हितेंद्र का एक गहरा दोस्त है मंजीत. मैं ने जब भाभी पूजा से सुना कि इस हफ्ते भाई घर नहीं आए हैं और उन का फोन भी स्विच्ड औफ आ रहा है तो मैं मंजीत से मिला. उस ने मुझे बताया कि 9 जनवरी, 2024 को भाई उस के साथ था. वे दोनों टैगोर गार्डन गए थे. वहां से भाई रौकी और जेम्स के साथ उन की गाड़ी में बैठ कर कहीं चला गया था. मंजीत अकेला घर लौट आया था.’’

”यह बहुत महत्त्वपूर्ण खुलासा किया है तुम ने.’’ एसआई सतेंद्र सिंह खुश हो कर बोले, ”मैं अब रौकी और जेम्स की गरदन नापता हूं. तुम अपनी भाभी को ले कर घर जाओ. जैसे ही पोस्टमार्टम हो जाएगा, तुम्हारे भाई की लाश तुम्हें अंतिम क्रिया के लिए मिल जाएगी.’’ एसआई सतेंद्र सिंह कुरसी छोड़ते हुए बोले. राहुल यादव अपनी भाभी को ले कर बाहर निकल गया.

ACP Vijay kumar                           HC PRASHANT BHIDURI

एसीपी (कोतवाली) विजय सिंह                             एसआई  प्रशांत    

हितेंद्र उर्फ हितु की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई थी. उस की मौत का कारण दम घुटना बताया गया, जिस से हत्या की संभावना बनती थी. एसआई सतेंद्र सिंह ने इस हत्या के मामले को आईपीसी की धारा 302/201 के तहत दर्ज कर लिया. उन्होंने उच्चाधिकारियों को अपनी तरफ से की गई अब तक की जांच का पूरा विवरण दे दिया.

एसीपी (कोतवाली) विजय सिंह और औपरेशन सेल के एसीपी धर्मेंद्र कुमार के नेतृत्व में एडिशनल डीसीपी (नौर्थ) श्वेता के. सुगाथन के निर्देशन में एक पुलिस टीम का गठन किया गया.

इस टीम में जतन सिंह एसएचओ (कोतवाली), इंसपेक्टर नीरज कुमार, जगदीप सिंह, राज मलिक (औपरेशन सेल), एसआई रोहित सारस्वत, सतेंद्र सिंह कोतवाली, देवेंद्र,  विनीत, योगेश कुमार, सुरेश कुमार, प्रीति, हैडकांस्टेबल अनिल, ओमपाल, सौरव, प्रशांत, कांस्टेबल रितु और राहुल को शामिल किया गया.

एआई से खुली मर्डर मिस्ट्री – भाग 1

उत्तरी दिल्ली के कोतवाली थानाक्षेत्र में गीता कालोनी फ्लाईओवर की झाडिय़ों में मिली इस अज्ञात लाश की सूचना किसी व्यक्ति ने थाना कोतवाली में फोन कर के दी थी. यह बात 10 जनवरी, 2024 की थी. यह काल लाल किला पुलिस चौकी  के इंचार्ज सतेंद्र सिंह को ट्रांसफर कर दी गई. यह सूचना मिलते ही पुलिस चौकी लाल किला के इंचार्ज एसआई सतेंद्र सिंह 4 कांस्टेबलों को ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए थे.

जब वह मौके पर पहुंचे तो गीता कालोनी फ्लाईओवर के नीचे झाडिय़ों के पास लोगों की भीड़ जमा थी. वहां पर झाडिय़ों में एक 35-40 साल के युवक का शव नजर आ गया. उस युवक का सिर एक पेड़ के तने से सटा था और पांव पश्चिम दिशा की तरफ थे. उन्होंने पास जा कर उस लाश का गहनता से निरीक्षण किया गया.

युवक के गले पर खरोंच के निशान साफ दिखाई दे रहे थे. वह जिस स्थिति में पड़ा था, उस से अंदाजा लगाया गया कि इस की हत्या कहीं और कर के लाश इस सुनसान जगह पर झाडिय़ों में फेंक दी गई है. युवक के शरीर पर कोई ऐसा निशान नहीं नजर आ रहा था, जिस से उस की मौत का कारण समझा जा सकता था.

युवक की आंखें बंद थीं. एसआई सतेंद्र ने अनुमान लगाया कि इसे अवश्य ही गला घोंट कर मारा गया है. लाश के पास डबल बेड की प्रिंटेड चादर पड़ी थी, शायद इसी चादर में इसे लपेट कर यहां लाया गया होगा.

युवक के कपड़ों की तलाशी ली गई. उस की जेब में मोबाइल की लीड और लोहे की एक चाबी मिली. चाबी पर एक ओर गोदरेज लिखा था, दूसरी ओर 0879350 नंबर गुदा था. जेब में युवक का न तो मोबाइल फोन था, न पर्स. उस की पहचान की कोई भी चीज हत्यारों ने उस के पास नहीं छोड़ी थी.

पुलिस के सामने एक प्रकार से यह ब्लाइंड मर्डर केस था. फिर भी एसआई सतेंद्र सिंह ने वहां उपस्थित भीड़ की ओर देख कर पूछ लिया, ”क्या आप में से कोई इस युवक को पहचानता है?’’

जैसा कि उन्होंने सोचा था, वही उत्तर मिला, ”नहीं साहब.’’

आगे की जांच के लिए एसआई सतेंद्र सिंह ने फोरैंसिक टीम और फोटोग्राफर को फोन कर के वहां आने के लिए कह दिया. उन्होंने नार्थ जोन की एडिशनल डीसीपी श्वेता के. सुगाथन और एसीपी (कोतवाली) विजय सिंह तथा औपरेशन सेल के एसीपी धर्मेंद्र कुमार को भी इस अज्ञात युवक की लाश की सूचना दे दी. आधा घंटा में ही फोरैंसिक टीम, फोटोग्राफर और पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए.

केस सुलझाने में एआई ने कैसे की मदद

अधिकारियों ने लाश का बारीकी से निरीक्षण किया. उन की नजरों में भी यह ब्लाइंड मर्डर केस था. ऐसे मामलों में जांच का दायरा बढ़ जाता है. बारीक से बारीक बात पर ध्यान रख कर कदम बढ़ाया जाता है. ऐसे केस मुश्किल हो सकते हैं, लेकिन असंभव नहीं. पुलिस अत्यंत कड़ी मेहनत कर के मृतक का पता भी निकाल लेती है और उस की हत्या किस ने की है, यह भी मालूम कर लेती है.

        एसआई सतेंद्र

इस पेचीदा केस की जांच का काम एसआई सतेंद्र को सौंप दिया गया. औपरेशन सेल के एसीपी धर्मेंद्र कुमार ने एसआई सतेंद्र को आदेश दिया कि इस युवक की पहचान के लिए सार्वजनिक स्थानों पर पैंफ्लेट चिपकाए जाएं. लाश को यहां लाने के लिए किसी न किसी वाहन का भी प्रयोग हुआ होगा. वाहन की जांच के लिए सीसीटीवी कैमरों को खंगाला जाए.

एसआई सतेंद्र सिंह ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह इस ब्लाइंड मर्डर केस की जांच के लिए रातदिन एक कर देंगे. फोरैंसिक टीम अपने काम में जुटी हुई थी. फोटोग्राफर ने विभिन्न कोणों से लाश के फोटो ले लिए थे.

सभी काम पूरा होने के बाद एसआई सतेंद्र सिंह ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए सब्जीमंडी की मोर्चरी में भिजवा दिया. सारा काम निपटा तो उच्चाधिकारी वहां से चले गए. एसआई सतेंद्र सिंह भी अपने दल के साथ कोतवाली के लिए रवाना हो गए.

युवक कौन है, कहां रहता है, इस की जानकारी 2 दिन बाद भी नहीं हो पाई थी. एसआई सतेंद्र सिंह की देखरेख में कोतवाली के 30 पुलिसकर्मियों की विशेष टीम का गठन कर दिया गया था. इस टीम को दिल्ली के सार्वजनिक स्थानों पर पैंफ्लेट चिपकाने का काम सौंपा गया था.

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                मृतक

फोटो में चूंकि मृतक की आंखें बंद थीं, इसलिए मृतक की फोटो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से सुधार कर फोटो का बैकग्राउंड चेंज किया गया व आंखों को खोला गया.

ऐसा करने से मृतक का चेहरा जीवित व्यक्ति जैसा लगने लगा, जिस से पहचान में आसानी हो सके. इस फोटो के 2000 पैंफ्लेट तैयार कराए गए.

30 व्यक्तियों की टीम ने इन पोस्टरों को आईएसबीटी, रेलवे स्टेशन, पार्कों, सड़क किनारे, बस स्टैंड, आटो स्टैंड के पास विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर चिपका दिया. दिल्ली के प्रत्येक पुलिस स्टेशन को भी सूचित किया गया.

जिस संदिग्ध वाहन में आरोपी द्वारा शव को फेंका गया था, उस का पता लगाने के लिए पुलिस की इस विशेष टीम ने लगभग 800 से अधिक सीसीटीवी कैमरे देखे. चूंकि शव को एकांत इलाके में फेंका गया था, इसलिए वहां कोई सीसीटीवी कैमरा कनेक्टिविटी नहीं थी. इसलिए वहां सीसीटीवी से किसी प्रकार की सफलता नहीं मिली.

गए थे रिपोर्ट लिखाने, मिल गई लाश

पैंफ्लेट 4 राष्ट्रीय अखबारों में प्रकाशित हुआ था. इस के बावजूद भी किसी ने मृतक को पहचानने का दावा नहीं किया था.

पुलिस इस इंतजार में थी कि कोई न कोई व्यक्ति मृतक का इश्तहार देख कर थाने तक पहुंचेगा, लेकिन 2 दिन बीत जाने के बाद भी मृतक के किसी परिचित के पहुंचने की जानकारी नहीं मिली थी. एसआई सतेंद्र सिंह सब्र किए बैठे थे. अपनी तरफ से उन्होंने मृतक की पहचान का हरसंभव प्रयास किया था. देर बेशक हो रही थी, लेकिन सतेंद्र सिंह जानते थे कि उन्हें मृतक की पहचान में सफलता जरूर मिलेगी.

हुआ भी यही. 14 जनवरी, 2024 को बाहरी दिल्ली के छावला पुलिस स्टेशन में राहुल यादव नाम का युवक घबराया हुआ आया. उस के साथ उस की भाभी पूजा भी थी. वह भी उस समय काफी बदहवास नजर आ रही थी.

अधेड़ उम्र का खूनी प्यार

अधेड़ उम्र का खूनी प्यार – भाग 3

सविता के दर्द का कारण जान कर आशीष हैरत में पड़ गया कि इतने सालों से सविता अपने पति के जुल्म को सहती आई, उस ने उफ्फ तक नहीं की. अब भी वह दर्द छिपाए अंदर ही अंदर घुट रही थी. वह तो खुद सविता को चाहने लगा था, प्यार करने लगा था.

ऐसे में उस का प्यार अपने आप को रोक नहीं सका और आशीष की जुबान से बाहर आ ही गया, “सविता, मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं और तुम्हारे साथ पूरी जिंदगी बिताना चाहता हूं. मैं इस दुनिया की सारी खुशियां तुम्हारे कदमों में डालना चाहता हूं. लेकिन यह तभी हो पाएगा, जब तुम मेरा साथ देने को तैयार होगी. मैं तो तैयार हूं साथ देने के लिए, अब तुम बोलो, तैयार हो…”

“आशीष, मैं भी तुम्हें बेइंतहा चाहती हूं, मुझे तुम्हारा साथ, तुम्हारा प्यार सब मंजूर है लेकिन हम एक नहीं हो पाएंगे, जहां तुम मुझ से बहुत छोटे हो, वहीं मैं वैवाहिक बंधन में बंधी हूं और 3 जवान बच्चों की मां हूं. ऐसे में हमारा प्यार ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाएगा. ये समाज भी हम को ताने देगा और दुत्कारेगा. समाज हमारे प्यार और परिस्थितियों को नहीं समझेगा.”

“उम्र केवल एक बस संख्या भर है, प्यार तो किसी बंधन को नहीं मानता, न उम्र, न जातपात और न समाज के कायदेकानूनों को. हम अपनी मरजी से एक साथ जिंदगी गुजारना चाहते हैं, ये हमारा आपसी फैसला है, दुनिया और समाज का इस से कोई लेनादेना नहीं. तुम बस हां करो, तुम्हारे लिए मैं किसी से भी लड़ जाऊंगा. तुम्हारा साथ कभी न छोड़ूंगा.” आशीष ने भरोसा दिलाया.

सविता आशीष की बात सुन कर भावविभोर हो गई और उस के सीने से लग गई. सविता को ऐसा करते देख कर आशीष भी हौले से मुसकरा गया और उसे भी अपनी बांहों के घेरे में ले लिया. कुछ देर दोनों और रेस्टोरेंट में रुके, फिर वहां से निकल आए.

प्रेमी से कराना चाहती थी बेटी की शादी

इस के बाद दोनों का प्यार परवान चढऩे लगा. दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए. आशीष अब सविता के घर भी आनेजाने लगा. चूंकि आशीष सविता के स्कूल में टीचर था, इसलिए मधुसूदन को उस के आनेजाने पर कोई ऐतराज नहीं था. मधुसूदन यह समझता था कि स्कूल में बच्चों को पढ़ाने से संबंधित बातें करने के लिए आशीष सविता से मिलने घर आता है. आशीष की उम्र भी कम थी, इसलिए उन दोनों के रिश्ते पर मधुसूदन को शक नहीं हुआ.

ऐसे कब तक मिलतेजुलते दोनों? ज्यादा समय साथ बिताने के लिए सविता ने आशीष को रिश्ते में बांधने का फैसला किया. खुद तो आशीष के साथ सामाजिक तौर पर एक हो नहीं सकती थी, इसलिए उस ने अपनी 21 वर्षीय बेटी रवीना की शादी अपने प्रेमी आशीष के साथ करने की सोची. इस से दोनों आसानी से मिल सकते थे और सास दामाद का रिश्ता बनने के कारण कोई उन पर शक भी नहीं करता.

सविता अपने प्यार को पाने के लिए अपनी ही सगी बेटी को बलि का बकरा बनाने की सोच रही थी. आशीष भी उस की बेटी से शादी करने को तैयार था. तैयार होता भी क्यों नहीं, इस फैसले से उस के दोनों हाथों में लड्डू ही लड्डू होते. एक तरफ वह अपनी प्रेमिका से मजे लेता, वहीं दूसरी तरफ उस की बेटी के साथ भी मजे लेता. सविता ने बेटी की शादी की बात अपने पति और बेटी के सामने चलाई तो दोनों ने शादी करने से साफसाफ मना कर दिया.

प्लान ‘ए’फेल होने पर बनाया प्लान ‘बी’

इस से सविता और आशीष के सारे मंसूबे फेल हो गए. इस के बाद भी दोनों एकदूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा साथ रहने की तरकीबें तलाशते रहें लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. इस पर सविता ने आशीष से कहा कि अब एक ही रास्ता है कि पति मधुसूदन को ही अपने रास्ते से हटा दिया जाए.

सविता तो हमेशा से यही चाहती थी. सविता ने कहा तो आशीष भी तैयार हो गया. घटना से 20 दिन पहले दोनों ने मधुसूदन की हत्या की योजना बनाई. इस के लिए आशीष ने बाजार से एक छाता और लोहे की छोटी वजनदार रौड खरीदी, साथ ही 400 रुपए का शेविंग करने वाला उस्तरा भी खरीदा.

26 जून, 2023 की दोपहर आशीष और सविता दोनों स्कूल में थे. एक से 2 बजे के बीच का समय ऐसा था, जब मधुसूदन घर पर अकेला होता था. एक बजे के बाद सविता प्रेमी आशीष के साथ स्कूल से घर जाने के लिए निकली. आशीष के हाथ में छाता था जो कि बंद था और दाएं हाथ में उस ने छाते को पकड़ रखा था. उसी बंद छाते में लोहे की रौड और उस्तरा रख रखा था.

घर पहुंचने पर आशीष ने मधुसूदन के पीछे खड़े हो कर छाते से लोहे की रौड निकाली और मधुसूदन के सिर पर कई ताबड़तोड़ तेज प्रहार कर दिए, जिस से मधुसूदन चीख भी न सका और जमीन पर गिर गया. मधुसूदन मरणासन्न हालत में था. तभी आशीष ने छाते से उस्तरा निकाला और उस से मधुसूदन का गला रेत दिया.

प्रेमी संग पति की हत्या करने के बाद सविता ने घर का सारा सामान बिखेर दिया और अलमारियां खोल दीं, जिस से मामला लूट के बाद हत्या का लगे. इस के बाद सविता और आशीष दोनों घर से निकल गए और वापस स्कूल पहुंच गए. लेकिन इस से पहले उन्होंने हत्या में प्रयुक्त रौड, उस्तरा और छाता कहीं ठिकाने लगा दिया था. लेकिन तमाम चालाकियों के बाद भी दोनों पकड़े गए.

पूछताछ के बाद कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं, फिर दोनों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक आला कत्ल बरामद करने का पुलिस प्रयास कर रही थी.

—कथा में रवीना परिवर्तित नाम है

अधेड़ उम्र का खूनी प्यार – भाग 2

पिछले 8 सालों से सविता पास के ज्ञान भारती स्कूल में बच्चों को पढ़ाती थी. स्कूल से वापस आने के बाद उसे पति की गालियां सुनने को तो मिलती ही थीं, साथ में अपने पीटे जाने का दर्द भी झेलना पड़ता. 3-3 जवान बच्चों के पिता होने के बाद भी मधुसूदन की हरकतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही थीं.

सविता को अब मधुसूदन के साथ जिंदगी का एकएक पल बिताना भारी पड़ रहा था. लेकिन वह करे भी तो क्या करे, उस का कोई और ठिकाना नहीं था. वैसे भी वह घर जितना मधुसूदन का था, उतना ही सविता का का भी. वह घर छोड़ कर जाना नहीं चाहती थी. सविता के दिमाग में अजीब सी उथलपुथल मची रहती थी.

लगभग 2 साल पहले एक खूबसूरत हैंडसम नौजवान सविता के स्कूल में बच्चों को विज्ञान और गणित पढ़ाने के लिए आया. उस नौजवान का नाम था आशीष वर्मा उर्फ टीनू. वह अविवाहित था और बादशाहपुर में ही रहता था.

आशीष सविता से 10 साल छोटा था. एक ही स्कूल में दोनों पढ़ाते थे, इसलिए दोनों का पहले मिलना जुलना, फिर बात करना शुरू हुआ. दोनों को एकदूसरे का साथ और बातें करना ऐसा भाया कि दोनों दोस्त बन गए. सविता को आशीष में एक अच्छे हमसफर के गुण दिखने लगे. हर लिहाज से आशीष साधारण से दिखने वाले शराबी पति मधुसूदन से लाख गुना अच्छा लगा था.

आशीष जैसे हमसफर की सविता ने कामना की थी, लेकिन समय और किस्मत ने कुछ ऐसा खेल खेला कि उस की शादी उस से 13 साल बड़े साधारण से दिखने वाले टेलर मास्टर मधुसूदन से हो गई. उस से शादी कर के मधुसूदन को खुश होना चाहिए था, अपनी पलकों पर बैठा के रखना चाहिए था, लेकिन हुआ इस का उल्टा. मधुसूदन ने कभी उस की कद्र नहीं की, प्यार देने के बजाय उसे गाली देता रहता और मारतापीटता रहता था.

आशीष ने दिल में बसा लिया था सविता को

जहां मधुसूदन ऐसा था, वहीं दूसरी तरफ आशीष सविता की परवाह करता था, उस की कद्र करता है, उस के लिए पलक पावड़े बिछाए रहता था. उस की तारीफ करता, उस के काम की सराहना करता, हर काम में उस की मदद करता. ऐसा इंसान जिंदगी में आ जाए तो इंसान खुशी से फूला नहीं समाता. सविता भी खुशी से फूली नहीं समा रही थी.

वह आशीष के नजदीक रहतेरहते उस से प्यार करने लगी थी, उस के साथ ही आगे की जिंदगी बिताना चाहती थी. आशीष के प्रति उस का प्यार उस की आंखों से साफ झलकता था. आशीष भी उसे चाहने लगा था, क्योंकि सविता जितनी अच्छी तरह से उसे समझती थी, अपनापन जताती थी, उतना समझने वाला अपनापन जताने वाला कोई नहीं था. सविता की खनकती हंसी और उस की मीठी बोली उस के दिल को लुभाती थी.

सविता उम्र में उस से बड़ी जरूर थी, लेकिन देखने में उस से बड़ी लगती नहीं थी. सविता उस से लाख हंस कर बातें करती थी, लेकिन आशीष उस की आंखों में उस के बात करने के लहजे में कभीकभी बहुत दर्द महसूस करता था. सविता के दिल में कैद दर्द जब भी उस के चेहरे और आवाज में झलकता तो आशीष भी बेचैन हो उठता था. घूमने, खानेपीने दोनों अकसर साथ बाहर जाते रहते थे.

एक दिन जब दोनों रेस्टोरेंट में बैठे हुए थे, तब आशीष ने सविता को थोड़ा कुरेदा और उस के दर्द की वजह जानने के उद्देश्य से सविता से पूछा, “सविता, मैं ने कई बार तुम्हारी आवाज में दर्द महसूस किया है. ऐसा क्या दर्द है तुम को, जो असहनीय है. वह समयसमय पर छलक कर बाहर आ ही जाता है. कहते हैं दर्द बांटने से हल्का होता है, तुम मुझे बता कर अपना दर्द कम कर सकती हो, अगर मुझे अपना मानती हो तो…”

आशीष ने सविता के दिल के जख्मों पर लगाया प्यार का मरहम

आशीष ने सविता की आंखों में झांकते हुए अपना मानने वाली बात कही. जैसे वह सविता के अंदर की बात जानने का प्रयास कर रहा हो कि सविता के लिए वह कितना मायने रखता है. सविता भी उस से अपना दर्द छिपातेछिपाते परेशान हो गई थी और वह भी चाहती थी कि वह अपना हाल आशीष को बता दे, फिर देखे आशीष क्या प्रतिक्रिया देता है.

आशीष उस के साथ रिश्ता बना कर आगे बढऩे का इच्छुक होगा तो उस के दर्द को समझेगा और उस के दर्द पर अपने प्यार का मरहम लगाएगा और उसे दर्द से निजात दिलाएगा, नहीं तो वह पीछे हट जाएगा.

सविता को भी आशीष की प्रतिक्रिया जानने की जल्दी थी, इसलिए उस ने आशीष से कहा, “क्या करोगे जान कर, मेरा दर्द दूर नहीं होगा, बल्कि कुरेदने से और बढ़ जाएगा. तुम भी नाहक परेशान हो जाओगे. तुम इस में कुछ कर भी नहीं सकते. वैसे तुम्हें अपना ही मानती हूं, इसीलिए तुम्हारे साथ बैठ कर बातें कर लेती हूं, घूम लेती हूं. वरना सब होते हुए भी मेरा कोई सहारा नहीं, न ही मुझे कोई समझने वाला.”

आशीष तड़प उठा, “ये कैसी बातें कर रही हो सविता. एक पल में मुझे अपना कहती हो, दूसरे ही पल मुझे पराया कर देती हो. मैं तुम्हारा अपना हूं, मैं तुम्हें अपना मानता हूं इसलिए तुम्हारे साथ समय बिताता हूं, बातें करता हूं. मेरे रहते हुए तुम्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं. कोई दिक्कत है तो मैं बनूंगा तुम्हारा सहारा.” आशीष ने सविता को विश्वास दिलाते हुए कहा.

आशीष की बातों से सविता के अंदर का विश्वास जागा कि आशीष उस का साथ जरूर निभाएगा तो उस ने अपना दर्द बयान कर दिया. पति मधुसूदन के शराबी होने की बात और उस के द्वारा रोज गालियां देते हुए पिटाई करने की बात बता दी.