बेवफा पत्नी और प्रेमी की हत्या – भाग 1

शोभाराम ने नफरत से दोनों लाशों को देखा. फिर वहीं बैठ कर बीड़ी सुलगा कर पीने लगा. एक लाश उस की पत्नी रागिनी की थी और दूसरी रिंकू की थी. छत पर उस ने दोनों को रंगेहाथ रंगरलियां मनाते पकड़ा था. उस के बाद उस ने दोनो की ईंट से सिर कूंच कर हत्या कर दी थी.

बीड़ी के कश के साथ शोभाराम के मन में तरहतरह के विचार आजा रहे थे. इन्हीं विचारों के बीच शोभाराम ने जेब में पड़ा मोबाइल निकाला और पुलिस कंट्रोल रूम के 112 नंबर पर काल की. उस समय रात के 12 बज रहे थे और आसमान में बादल गरज रहे थे.

शोभाराम की काल डायल 112 के एसआई पंकज मिश्रा ने रिसीव की. उन्होंने पूछा, ”बताइए, आप को क्या परेशानी है? आप कौन और कहां से बोल रहे हैं?’‘

”साहब, मेरा नाम शोभाराम दोहरे है. मैं गांव नंदपुर से बोल रहा हूं. मैं ने डबल मर्डर किया है. आप जल्दी से आ कर मुझे गिरफ्तार कर लो.’‘

शोभाराम के मुंह से डबल मर्डर की बात सुन कर पंकज मिश्रा दंग रह गए. फिर वह सोचने लगे, ‘कहीं शोभाराम शराबी तो नहीं और नशे में गुमराह कर रहा है.Ó अत: वह कड़कदार आवाज में बोले, ”इतनी रात बीतने के बावजूद अभी तक तेरा नशा उतरा नहीं, जो डबल मर्डर की सूचना दे रहा है.’‘

”साहब, मैं शराबी नही हूं. मैं पूरे होशोहवास में हूं. मैं सच बोल रहा हूं. मैं ने रागिनी और उस के प्रेमी रिंकू यादव को मार डाला है. दोनों लाशें मेरे मकान की छत पर पड़ी हैं. यकीन हो तो आ जाइएगा.’‘

शोभाराम ने जिस आत्मविश्वास के साथ बात की, उस से एसआई पंकज मिश्रा को यकीन हो गया कि वह जो बता रहा है, वह सच है. अत: उन्होंने सूचना से पुलिस अधिकारियों को अवगत कराया फिर सहयोगियों के साथ नंदपुर गांव पहुंच गए.

cDigamber Kushwaha (ASP)

शोभाराम का घर गांव के पूर्वी छोर पर था. पुलिस जीप वहीं जा कर रुकी. शोभाराम पुलिसकर्मियों को छत पर ले गया, जहां 2 लाशें पड़ी थीं. लाशें देख कर एसआई पंकज मिश्रा सिहर उठे. उन्होंने तत्काल शोभाराम को हिरासत में ले लिया. डबल मर्डर की यह घटना उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के नंदपुर गांव में 14 जून, 2023 की रात घटी थी.

डबल मर्डर से मचा हड़कंप

डबल मर्डर की सूचना से जिले के पुलिस अधिकारियों में भी हड़कंप मच गया था. कुछ देर बाद ही एसएचओ आर.डी. सिंह, सीओ (सिटी) प्रदीप कुमार, एसपी चारू निगम तथा एएसपी दिगंबर कुशवाहा घटनास्थल पर आ गए.

cCharu Nigam (S.P.)

पुलिस अधिकारियों ने बड़ी बारीकी से घटनास्थल का निरीक्षण किया. हत्यारे शोभाराम ने बड़ी बेरहमी से दोनों की ईंट से कूंच कर हत्या की थी. मृतकों में रागिनी व रिंकू यादव था. रागिनी की उम्र 30 वर्ष के आसपास थी. रिंकू की उम्र 22 वर्ष के आसपास थी. दोनों के शव अर्धनग्नावस्था में थे. छत पर शवों के करीब ही खून से सनी ईंट पड़ी थी, जिसे पुलिस ने सुरक्षित कर लिया.

पौ फटते ही नंदपुर गांव में सनसनी फैल गई. जिस ने भी 2 हत्याओं की बात सुनी, उसी ने दांतों तले अंगुली दबा ली. कुछ ही देर में शोभाराम के घर के बाहर भारी भीड़ जुट गई. मीना यादव को जब पता चला कि शोभाराम ने उस के बेटे रिंकू को मार डाला है तो वह बदहवास हालत में घटनास्थल पहुंची और बेटे का शव देख कर फूटफूट कर रोने लगी.

महिलाओं ने उन्हें किसी तरह संभाला. रिंकू के पिता लायक सिंह होमगार्ड थे. वह सहार थाने में ड्यूटी पर थे. उन्हें बेटे की हत्या की खबर लगी तो वह भी गांव आ गए. बेटे का शव देख कर वह भी बिलखने लगे.

रिंकू यादव की हत्या से नंदपुर गांव की यादव जाति में गुस्से की आग भड़क उठी थी. उन में आक्रोश इस बात से था कि शोभाराम जैसे छोटी जाति के व्यक्ति ने उन की बिरादरी के युवक की हत्या कर दी थी. इस हत्या से उन की प्रतिष्ठा पर आंच आई है. नवयुवकों में गुस्सा कुछ ज्यादा था.

एसपी चारू निगम व एएसपी दिगंबर कुशवाहा को जब यादव बिरादरी में जन आक्रोश की जानकारी हुई तो उन्होंने कई थानों की पुलिस फोर्स को घटनास्थल पर बुलवा लिया और नंदपुर गांव की हर गली के मोड़ पर पुलिस पहरा लगा दिया. यही नहीं, उन्होंने हर स्थिति से निपटने के लिए पीएसी का कैंप भी लगा दिया.

कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस अधिकारियों ने मृतक रिंकू व मृतका रागिनी के शवों को सीलमोहर करा पोस्टमार्टम के लिए औरैया के जिला अस्पताल भिजवा दिया.

cRote Hue Mratak Ke Parijan

शोभाराम दोहरे को पुलिस सुरक्षा में थाना सहायल लाया गया. यहां पर पुलिस अधिकारियों ने उस से घटना के संबंध में पूछताछ की. शोभाराम ने अधिकारियों के सामने दोनों हत्याओं का जुर्म कुबूल कर पूरी घटना की जानकारी दी. उस ने इस घटना में किसी अन्य के शामिल होने से साफ इंकार किया.

चूंकि शोभाराम ने जुर्म कुबूल कर लिया था और पुलिस ने आलाकत्ल खून सनी ईंट भी बरामद कर ली थी, इसलिए एसएचओ आर.डी. सिंह ने मृतक रिंकू यादव की मां मुन्नी देवी की तहरीर पर भादंवि की धारा 302 के तहत शोभाराम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा शोभाराम को विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस पूछताछ में उस ने इस हत्याकांड की जो वजह बताई, वह एक बेवफा पत्नी की कहानी निकली.

उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जनपद के थाना रसूलाबाद के अंतर्गत एक गांव है-झकर गढ़ा. रागिनी इसी गांव की रहने वाली थी. उस के पिता राजाराम दोहरे गांव के दबंग किसान थे. 3 बहनों में रागिनी सब से छोटी, सब से दुलारी और बेहद खूबसूरत थी. राजाराम अपनी 2 बड़ी बेटियों का विवाह कर चुके थे. अब वह रागिनी का घर बसाना चाहते थे. इस बारे में घर में बात भी होने लगी थी.

शादी की चर्चा चलते ही रागिनी का मन गुदगुदाने लगा. खुली आंखों से वह जीवनसाथी के सुहाने सपने देखने लगी थी. वह सोचती कि मेरे दोनों जीजा हैंडसम हैं तो पिता मेरे लिए भी सैकड़ों में से किसी एक को चुनेंगे क्योंकि अपनी बहनों से मैं ज्यादा हसीन जो हूं.

रागिनी की तमन्ना थी कि उस का पति फिल्मी हीरो जैसा और खूब प्यार करने वाला हो. राजाराम की तलाश जारी थी. इसी तलाश के दौरान राजाराम को शोभाराम के बारे में पता चला.

जगदीश दोहरे औरैया जिले के नंदपुर गांव के रहने वाले थे. उन के परिवार में पत्नी सरला के अलावा 2 बेटियां व एक बेटा शोभाराम था. बेटियों की वह शादी कर चुके थे. शोभाराम अभी कुंवारा था. बापबेटे दोनों मिल कर अपनी जमीन पर मौसमी सब्जियों की खेती करते थे और शहर कस्बे में बेचते थे. शोभाराम राजमिस्त्री भी था.

राजाराम ने नंदपुर गांव जा कर जगदीश दोहरे से मुलाकात की और उन के बेटे शोभाराम के साथ अपनी बेटी रागिनी की शादी करने की बात की.

जगदीश की पत्नी सरला की मौत हो चुकी थी. इसलिए जगदीश भी बेटे का विवाह करने के इच्छुक थे. इसलिए पहले लड़की देखने की इच्छा जताई. इस के बाद उन्होंने झकर गढ़ा गांव जा कर रागिनी को देखा तो वह उन्हें पसंद आ गई. फिर सन 2012 की पहली लगन में रागिनी और शोभाराम का विवाह हो गया.

विवाह मंडप में रागिनी ने पहली बार पति को देखा था. शोभाराम सूट पहने था, सिर पर सेहरा बंधा था, उस के चारों ओर घर वालों का हुजूम था, इसलिए रागिनी उसे नजर भर कर देख नहीं पाई.

सुंदरियों के हसीन सपने – भाग 3

2 दिनों बाद बेअंत सिंह अपने ममेरे भाई एडवोकेट हरजिंदर सिंह से मिलने उस के घर गया. दोनों धूप में बैठे चाय पी रहे थे, तभी बेअंत सिंह के मोबाइल फोन की घंटी बजी.  उस ने फोन रिसीव किया तो फोन करने वाले ने उस का नामपता पूछ कर कहा, ‘‘मैं पीलीबंगा थाने का सिपाही जसवंत बोल रहा हूं. तुम्हारे खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है.’’

यह सुनते ही बेअंत सिंह घबरा गया. उस के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं. हरजिंदर समझ गया कि कुछ गड़बड़ है. उस ने खुद फोन ले कर बात शुरू की तो फोन करने वाले कांस्टेबल जसवंत ने कहा, ‘‘3 लोग एक महिला को ले कर आए थे. महिला कह रही थी कि बेअंत सिंह ने उस के साथ दुष्कर्म किया है. लेकिन घटनास्थल हमारे क्षेत्र के बाहर का था, इसलिए थानाप्रभारी ने उन्हें वापस भेज दिया.’’

बेअंत सिंह ने इस आरोप को खारिज करते हुए हरजिंदर सिंह को पूरी घटना के बारे में बता दिया. वकील होने के नाते हरजिंदर सिंह को पता था कि मामला कितना गंभीर है. कथित पीडि़ता के आरोप को एकबारगी नकारा नहीं जा सकता था. लवप्रीत कौर का फोन नंबर बेअंत सिंह के पास था ही. मामला पुलिस तक जाए, इस के पहले ही हरजिंदर ने सुलटाने की कोशिश शुरू कर दी.

सूचना मिलने पर बेअंत सिंह का बहनोई बौड़ा सिंह भी आ गया. बौड़ सिंह लवप्रीत कौर और उस के उन दोनों साथियों को जानता था, जो उस की मदद कर रहे थे. बातचीत शुरू हुई तो लवप्रीत ने मामला सुलटाने के लिए 40 लाख रुपए या 2 बीघा जमीन मांगी. जबकि बेअंत सिंह 2 लाख रुपए देने को तैयार था.

लवप्रीत का एक साथी था जबन सिंह उर्फ रोड़ा चाचा, जो स्वयं को पूर्व सरपंच बता रहा था, उस ने कथित पीडि़ता लवप्रीत का एक औडियो कैसेट तैयार कर रखा था. उस कैसेट में लवप्रीत कह रही थी कि मांग पूरी होने पर वह बेअंत के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं कराएगी. जबन सिंह लवप्रीत को अपनी नौकरानी बता रहा था.

लवप्रीत की इस मांग से बेअंत सिंह, बौड़ा सिंह और हरजिंदर सिंह परेशान थे. वहीं हरजिंदर का कहना था कि यह सरासर ब्लैकमेलिंग है. अन्य लोगों के न चाहते हुए भी हरजिंदर सिंह ने ब्लैकमेल करने वालों लवप्रीत और उस के साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्णय ले लिया. इस के बाद 27 दिसंबर को बेअंत ने थाना हनुमानगढ़ में प्रकट सिंह पुत्र मुख्तयार सिंह निवासी 2 जीजीआर, जबन सिंह उर्फ रोड़ा चाचा पुत्र मखन सिंह निवासी 3 जीजीआर तथा लवप्रीत कौर उर्फ हरप्रीत उर्फ रानी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया.

थानाप्रभारी भंवरलाल ने इस मामले की जांच सबइंसपेक्टर चंद्रप्रकाश को सौंप दी. अगले दिन उन्होंने बेअंत सिंह से जबन सिंह व प्रकट सिंह को रुपए ले जाने के लिए फोन करवा दिया. वे रुपए लेने आए तो पुलिस ने जाल बिछा कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया. उसी दिन शाम को पुलिस ने लवप्रीत को भी गिरफ्तार कर लिया. तीनों अभियुक्तों को अदालत में पेश कर के पूछताछ के लिए 2 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया गया. पूछताछ के बाद तीनों को जेल भेज दिया गया.

दूसरी ओर विजयनगर से एएसआई बलवंतराम ने सपना को भी महिला पुलिस की मदद से गिरफ्तार कर लिया था. पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे भी अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया था.

पुलिस पूछताछ में सपना ने जो बताया था, वह इस प्रकार था. सपना उर्फ सोना पंजाब के मुक्तसर जिले के गांव लूलबाई के रहने वाले सतनाम सिंह की बेटी थी. सपना की शादी हनुमानगढ़ के रहने वाले अशोक के साथ हुई थी. सपना उस के एक बच्चे की मां भी बनी, लेकिन उस की सास माया समाज की मर्यादाओं को तोड़ कर असलम के साथ लिव इन रिलेशन में रहने लगी थी. अशोक को मां की तरह पत्नी का भी चरित्र ठीक नहीं लगता था. इस से आहत हो कर उस ने घर छोड़ दिया. इसी सपना को चारा बना कर असलम ने भूपेंद्र को फांस कर लूटने की योजना बनाई थी.

लवप्रीत कौर की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी. उस की शादी गंगूवाला सिरवान में हुई थी. पति से अनबन होने के बाद वह हनुमानगढ़ आ कर अकेली ही रहने लगी थी. यहीं उस का संपर्क प्रकट सिंह और जबन सिंह उर्फ रोड़ा चाचा से हुआ. लवप्रीत कथित रूप से जबन सिंह की रखैल थी. लवप्रीत को चारा बना कर बेअंत सिंह को ब्लैकमेल करने की योजना जबन सिंह की थी.

लवप्रीत से जबन सिंह ने कहा था कि पैसे मिलने पर वह उस के लिए घर बनवा देगा. लेकिन उस का यह सपना पूरा नहीं हुआ. दिल्ली में हुए दामिनी कांड के बाद जो नया कानून बना है, इस तरह के अराजक तत्व उस का गलत फायदा उठाना चाहते हैं. इन तत्वों के खेल में 2 निर्दोष महिलाएं फंस गई हैं. कथा लिखे जाने तक इन में से कुछ अभियुक्तों की जमानतें हो चुकी थीं.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

एक अधूरी प्रेम कहानी – भाग 1

4 जुलाई, 2023 का दिन था. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पोक्सो एक्ट) प्रमेंद्र  कुमार की कोर्ट में काफी गहमागहमी थी. घटना होने के मात्र 116 दिनों बाद उस दिन एक ऐसे मामले में फैसला सुनाया जाना था, जिस में दोस्ती परवान चढऩे से पहले ही तारतार हो गई थी. आइए, कोर्ट का फैसला जानने से पहले इस मामले के बारे में जान लेते हैं.

आगरा के सिकंदरा क्षेत्र के रुनकता के पास मांगरौल गूजर का जंगल करीब 6 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है. यमुना का किनारा है और अकसर जंगली जानवर यहां घूमते रहते हैं. जंगल की सन्नाटे भरी सर्द रात में जंगली जानवरों के खतरे के बीच कांटेदार झाड़ियों के बीच पड़ी घायल 14 वर्षीय नीलम को जब हलका सा होश आया, तब चारों ओर घना अंधेरा छा चुका था.

नीलम दर्द से कराह रही थी. उस के अंगअंग में दर्द हो रहा था. वह रातभर तड़पती रही. वह अस्मत जाने के बाद भी टूटती सांसों को संजोए हुए थी. प्यास से उस का गला सूख रहा था, वहीं घावों से खून बह रहा था.

इस हालत में भी नीलम ने हिम्मत नहीं हारी. बेसुध शरीर ने हिम्मत कर हिलने की कोशिश की तो कांटे चुभ उठे. वह असहनीय दर्द को पी गई और कांटों के बिस्तर पर पड़ीपड़ी भोर होने का इंतजार कर ने लगी.

जीवन और मृत्यु से संघर्ष के बीच सुबह जब सूरज की रोशनी दिखाई दी तो इतनी हिम्मत आ गई कि वह करीब 100 मीटर घिसट कर रोड तक पहुंच गई. आखिर नीलम जंगल में कैसे पहुंची? उस की यह हालत कैसे और किस ने की?

गांव देहात में होली का पर्व कई दिनों तक मनाया जाता है. 9 मार्च, 2023 को  आगरा जिले के थाना सिकंदरा के मांगरौल गूजर निवासी 14 वर्षीय नीलम गांव में रहने वाली अपनी मौसी के यहां होली खेलने को कह कर घर से अपराह्नï लगभग ढाई बजे निकली थी.

शाम 7 बजे तक जब नीलम घर वापस नहीं आई तो घर वालों को चिंता हुई. इस बारे में मौसी से संपर्क किया तो पता चला कि वह उन के यहां भी नहीं पहुंची थी. घबराए हुए घर वालों ने उस की सहेलियों व परिचितों के यहां तलाश किया, लेकिन नीलम का गांव में कोई सुराग नहीं मिला.

पूरी रात घर वाले गांव वालों के साथ उस की तलाश करतेे रहे, लेकिन नीलम का कोई सुराग नहीं लगा. सारी रात घर वालों को नींद भी नहीं आई.

10 मार्च की सुबह 8 बजे  पास के ही गांव का रहने वाला सिक्योरिटी गार्ड जयप्रकाश ड्यूटी समाप्त कर अपने गांव जा रहा था. उस के गांव का रास्ता मांगरौल हो कर ही जाता है. उसे सिकंदरा के जंगल के रास्ते में सड़क किनारे मांगरौल गांव से करीब 3 किलोमीटर दूर एक किशोरी लहूलुहान अर्द्धबेहोशी की हालत में पड़ी मिली. गार्ड जयप्रकाश को देखते ही किशोरी ने हाथ हिलाया. गार्ड ने अपनी साइकिल खड़ी कर दी और किशोरी के पास पहुंचा.

किशोरी के खून से सने और फटे हुए कपड़े देख कर जयप्रकाश ने अपने गमछे से उस का बदन ढक दिया. जयप्रकाश के कई बार पूछने पर कि कौन हो तुम बेटी? किशोरी सही ढंग से बोल नहीं पा रही थी. उस ने किसी तरह अपना नाम बताया. पूछने पर अपने पिता व गांव का नाम भी बता दिया.

गार्ड से किशोरी ने कहा कि मेरे भाई को फोन कर दो. किशोरी ने नंबर बताया तब गार्ड जयप्रकाश ने उस के भाई को फोन कर घटना की जानकारी दी. इसी बीच वहां से आ जा रहे राहगीर एकत्र हो गए.

इस पर जयप्रकाश ने उस के घर फोन कर दिया. जानकारी मिलते ही घर वाले घटनास्थल पर पहुंच गए. घर वालों नेे पुलिस को भी नीलम के मिलने की जानकारी दे दी. कुछ ही देर में थाना सिकंदरा के एसएचओ आनंद कुमार शाही, पुलिस उपायुक्त (नगर) विकास कुमार भी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए.

सड़क से करीब 100 मीटर अंदर झाड़ी पर नीलम की चुन्नी पड़ी थी. पास में ही चप्पलें और कुछ कपड़े थे. उस की आंखों, नाक और सिर से खून बह रहा था. उसे कई बार उल्टियां भी हुईं. गंभीर हालत को देखते हुए एंबुलेंस बुलाकर नीलम को पहले जिला अस्पताल और बाद में आगरा के एस.एन. मैडिकल कालेज ऐंड हौस्पिटल की इमरजेंसी भरती कराया गया.

घटनास्थल पर भी खून पड़ा था. फोरैंसिक टीम को भी बुला लिया गया. नीलम के चेहरे और गले पर खरोंचें थीं, उस का गला सूजा हुआ था, जिस से वह बोल नहीं पा रही थी. बेटी को इस हालत में देख कर मां के आंसू नहीं रुक रहे थे.

पुलिस का अनुमान था कि कल नीलम होली खेलने घर से निकली थी. रास्ते में ही उस का अपहरण कर जंगल में उस के साथ दरिंदगी की गई थी. इतना ही नहीं उसे बुरी तरह पीटा गया और गला घोंट कर जान से मारने की कोशिश भी की गई. किसी तरह नीलम की जान तो बच गई थी, लेकिन उस की हालत चिंताजनक थी.

आरोपी उसे मरा समझ कर झाडिय़ों में डाल कर फरार हो गए थे. रात भर नीलम जंगल में पड़ी रही. इस संबंध में गांव मझली पार्टी, थाना सिकदंरा, जिला आगरा निवासी नीलम के पिता ने थाने में अज्ञात के खिलाफ भादंवि की धारा 376(3), 307 व 3/4 पोक्सो एक्ट के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज कराई, जिस में बेटी से सामूहिक दुष्कर्म, जान से मारने के लिए गंभीर चोटें पहुंचाने का आरोप लगाया गया था.

नीलम को दोपहर में होश आ गया. उस का गला सूजा हुआ था इसलिए वह बोल नहीं पा रही थी.  फिर भी किसी तरह उस ने बताया कि वह कल दोपहर को मौसी के यहां जाने के लिए अपने घर से निकली थी, तभी एक बाइक सवार उसे मिला. उस ने पूछा, ”कहां जा रही हो?’‘

”गांव में मौसी के यहां.’‘

”चलो, बाइक पर बैठ जाओ. मैं उधर ही जा रहा हूं, तुम्हें छोड़ दूंगा.’‘ बाइक सवार बोला.

तब वह उस की बाइक पर बैठ गई. वह उसे जंगल में ले गया. पीने को बोतल से पानी दिया. पानी पीने के बाद वह बेहोश हो गई. उस के बाद उसे कुछ याद नहीं.

पुलिस को नीलम की बातों पर विश्वास नहीं हो रहा था. क्योंकि अनजान व्यक्ति की बाइक पर वह क्यों बैठ गई? फिर जब वह गांव से बाहर ले जाने लगा तो उस ने शोर क्यों नहीं मचाया?

जंगल में कैसे पहुंची नीलम?

नाबालिग की मां का दर्द उस की आंखों से छलक रहा था. मां ने रोते हुए कहा कि उस की बेटी के साथ जिस ने भी यह कृत्य किया है उसे फांसी की सजा मिले. उस की बेटी गांव में होली खेलने निकली थी. वहीं से उस का अपहरण कर लिया गया. यह बात बेटी को पूरी तरह होश आने के बाद ही पता चलेगी कि कितने लोग थे? सुबह वह केवल इतना बता पाई थी कि उसे कोई नशीला पदार्थ पिलाया गया था. इस के बाद वह बेहोश हो गई थी.

महिला पुलिस द्वारा तब नीलम को विश्वास में ले कर उस से बातचीत की गई. तब नीलम ने हकीकत बताई. उस ने बताया कि घटना वाले दिन उस के दोस्त गणेश का फोन आया था. उस ने कहा कि गांव के बाहर आ जा होली खेलेंगे.

इस के बाद वह अपने घर मौसी के घर जाने की बात कह कर गांव से बाहर गणेश से मिलने पहुंच गई. गणेश के साथ उस का दोस्त संतोष भी था. गणेश ने उस से कहा, ”यहां बहुत भीड़ है, रुनकता चलते हैं, वहां होली खेलेंगे.’‘

इस के बाद वह गणेश और संतोष के साथ बाइक पर बैठ गई. रुनकता ले जा कर उन्होंने उसे बर्फी (मिठाई) खिलाई. फिर उस ने बाइक जंगल की ओर मोड़ दी. जंगल में ले जा कर दोनों ने उस के साथ जोर जबरदस्ती की और यह हाल गणेश व उस के दोस्त ने किया है.

नीलम से दुष्कर्म और हत्या के प्रयास की घटना बड़ी थी. पुलिस आयुक्त डा. प्रीतिंदर सिंह ने सिकंदरा पुलिस की कई टीमों को घटना के खुलासे के लिए लगाया. इस जानकारी के बाद कि गणेश से नीलम की बातचीत होती थी, पुलिस ने नीलम के घर वालों के फोन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई.

सुंदरियों के हसीन सपने – भाग 2

लुटापिटा भूपेंद्र बुझे मन से अपनी कार ले कर घर आ गया. गाड़ी की आरसी, एटीएम कार्ड, नगदी और आभूषण लुटेरों ने छीन लिए थे. भूपेंद्र को गुमसुम देख कर घर वालों ने उस से पूछा भी. लेकिन तबीयत खराब होने का बहाना बना कर वह बात टाल गया. जब अगली सुबह उस के बड़े भाई ने पास बैठा कर उस से परेशानी की वजह पूछी तो उस ने उन से पूरी बात बता दी.

सलाहमशविरा कर के दोनों भाई उसी समय हनुमानगढ़ के लिए रवाना हो गए. 10 दिसंबर की दोपहर थाना हनुमानगढ़ के थानाप्रभारी भंवरलाल को भूपेंद्र ने अपनी व्यथा बताई. मामला गंभीर था, लेकिन थानाप्रभारी को लग रहा था कि इस मामले में अभियुक्त शीघ्र ही पकड़ लिए जाएंगे. थानाप्रभारी ने इस मामले की जांच एएसआई बलवंतराम को सौंप दी. बलवंतराम ने उसी समय भूपेंद्र से सपना को रुपयों की व्यवस्था हो जाने का फोन करवा दिया. सपना ने आधे घंटे में अबोहर रोड पर जहां भूपेंद्र के साथ घटना घटी थी, पहुंचने को कहा.

भूपेंद्र अपनी कार से वहां पहुंच गया. एएसआई बलवंतराम भी पुलिस टीम के साथ प्राइवेट वाहन से बिना वर्दी के वहां पहुंच कर थोड़ी दूर खड़े हो गए थे. कुछ देर बाद भूपेंद्र के पास एक कार आ कर रुकी. उस में से 3 लोग उतरे और पैसे लेने के लिए भूपेंद्र के पास पहुंच गए. भूपेंद्र का इशारा पाते ही पुलिसकर्मियों ने तीनों को घेर कर पकड़ लिया. तीनों के नाम थे असलम, तुफैल मोहम्मद और गुरप्रीत सिंह उर्फ गोगी.

इस के बाद भूपेंद्र की तहरीर पर पुलिस ने सपना, असलम, तुफैल मोहम्मद और गुरप्रीत सिंह उर्फ गोगी के खिलाफ भादंवि की धारा 342, 385, 382, 323 व 34 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. लेकिन सपना पुलिस के हाथ नहीं लगी थी. शायद उसे अपने साथियों के पकड़े जाने की खबर लग गई थी, इसलिए वह फरार हो गई थी. गिरफ्तार तीनों अभियुक्तों को अदालत में पेश किया गया, जहां से विस्तृत पूछताछ और माल बरामद करने के लिए उन की 2 दिनों की रिमांड की मांग की गई.

रिमांड के दौरान की गई पूछताछ में तीनों अभियुक्तों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इसी पूछताछ में उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले इसी तरह सपना से फोन करवा कर उन्होंने पंजाब के अबोहर  के एक आदमी को लूटा था. उस ने पुलिस को सूचना दे दी थी तो पंजाब पुलिस ने उन्हें पकड़ कर जेल भिजवा दिया था. अदालत से जमानत मिलने पर जब ये लोग बाहर आए तो इन्होंने भूपेंद्र को शिकार बनाया. रिमांड खत्म होने के बाद पुलिस ने तीनों अभियुक्तों को जेल भिजवा दिया. सपना अभी भी फरार थी.

27 दिसंबर को थानाप्रभारी भंवरलाल एएसआई बलवंतराम से सपना की गिरफ्तारी के बारे में चरचा कर रहे थे, तभी 3 लोग उन से मिलने आए. उन में से एक व्यक्ति ने अपना परिचय हरजिंदर सिंह एडवोकेट (पूर्व बार संघ उपाध्यक्ष हनुमानगढ़) के रूप में दिया. थानाप्रभारी ने उस से पूछा, ‘‘कहिए, मैं आप की क्या सेवा कर सकता हूं?’’

हरजिंदर सिंह ने अपनी बगल में खड़े व्यक्ति की ओर इशारा कर के कहा, ‘‘यह बेअंत सिंह है. मेरी बुआ का बेटा. भूपेंद्र सोनी की तरह इसे भी एक गिरोह ने फांस रखा है, वह गिरोह इस से 40 लाख रुपए नकद या फिर 2 बीघा जमीन देने पर इसे छोड़ने की बात कर रहा है. न देने पर इसे रेप के केस में झूठा फंसाने की धमकी दे रहा है.’’

सूचना गंभीर और चौंकाने वाली थी. एक बार थानाप्रभारी को लगा कि यह काम भी सपना के गिरोह का हो सकता है. लेकिन उस गैंग के सदस्य तो जेल में थे. इसी बात पर चरचा हो रही थी कि तभी बलवंतराम के फोन की घंटी बजी. फोन उन के मुखबिर का था. उस ने सपना के विजयनगर (श्रीगंगानगर) में होने की सूचना दी थी. थानाप्रभारी से अनुमति ले कर बलवंतराम विजयनगर के लिए निकल पड़े.

बलवंतराम चले गए तो बेअंत सिंह ने थानाप्रभारी भंवरलाल को अपनी जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी:

12 दिसंबर, 2013 की दोपहर की बात है. चक सुंदरसिंह वाला (पीलीबंगा) का रहने वाला 50 वर्षीय बेअंत सिंह अपने खेतों में पानी लगा रहा था. उस की 2 संतानें हैं, जिन की शादियां हो चुकी हैं. हाड़तोड़ मेहनत और मितव्ययी स्वभाव का होने की वजह से इलाके में उस की पहचान एक समृद्ध किसान की है. बेअंत सिंह खेतों में जाने वाले पानी की निगरानी कर रहा था, तभी उस के फोन की घंटी बजी. उस ने फोन रिसीव किया तो दूसरी ओर से किसी औरत की आवाज आई, ‘‘सरदारजी, मैं आप से मिलना चाहती हूं.’’

‘‘आप कौन बोल रही हैं और मुझ से क्यों मिलना चाहती हैं?’’ बेअंत सिंह ने पूछा.

‘‘जी मैं लवप्रीत कौर बोल रही हूं. पिछले दिनों आप को पीलीबंगा के गुरुद्वारे में देखा था. तभी से मैं आप पर लट्टू हूं. किसी तरह आप का फोन नंबर हासिल कर के आप को फोन किया है. रही बात मिलने की तो आप खुद ही समझ लीजिए कि कोई जवान लड़की किसी मर्द से क्यों मिलना चाहेगी.’’

बेअंत सिंह के प्रौढ़ शरीर में एकबारगी सिहरन सी दौड़ गई. औरत हो या मर्द, एकदूसरे के प्रति आकर्षण स्वाभाविक ही है. उसी आकर्षण में बंधे बेअंत सिंह ने कहा, ‘‘लवप्रीतजी अभी तो मैं खेतों में पानी लगा रहा हूं. मैं कल आप को फोन करता हूं.’’

कह कर बेअंत सिंह ने फोन काट दिया. लवप्रीत के मीठे बोल और खुले आमंत्रण से प्रौढ़ बेअंत सिंह का रोमरोम पुलकित था. वह जवान लवप्रीत से मिलने को लालायित हो उठा.

अगले दिन सुबह बेअंत सिंह ने खेतों पर जा कर लवप्रीत को फोन किया. दूसरी ओर से फोन रिसीव हुआ तो उस ने कहा, ‘‘लवप्रीत, मैं बेअंत बोल रहा हूं.’’

‘‘सरदारजी, मुझे लवप्रीत नहीं सिर्फ लव कहिए. अब आप के लिए मैं सिर्फ लव हूं. मैं 2 घंटे बाद पीलीबंगा बसस्टैंड पर पहुंच रही हूं. मेहरबानी कर के आप वहीं आ जाइए. आगे का प्रोग्राम मिलने पर बनाएंगे.’’ इतना कह कर लवप्रीत ने फोन काट दिया.

खेतों से लौट कर बेअंत सिंह ने मोटरसाइकिल उठाई और पीलीबंगा के बसस्टैंड पर पहुंच गया. बेअंत सिंह ने बसस्टैंड से लवप्रीत को फोन किया तो सामने खड़ी लड़की को फोन रिसीव करते देख वह सकपका गया. लड़की उस की बेटी की उम्र की थी. उस ने पूछा, ‘‘सरदार जी, आप कहां हो?’’

बेअंत सिंह ने पहचान बताई तो वही लड़की उस के पास आ कर खड़ी हो गई. उसे देख कर लवप्रीत के चेहरे पर कई रंग आए और गए. वह भी बेअंत सिंह की ही तरह सकपका गई थी. पास आ कर उस ने कहा, ‘‘अभीअभी उन का फोन आया था. मेरे ससुर को दिल का दौरा पड़ गया है. मुझे तुरंत वहां पहुंचना होगा. कृपया मुझे पुराने बसस्टैंड तक अपनी मोटरसाइकिल से छोड़ दीजिए. समय मिलते ही मैं आप को फोन करूंगी.’’

बेअंत सिंह ने मोटरसाइकिल से लवप्रीत को पुराने बसस्टैंड पर छोड़ दिया और अपने घर आ गया. लाख कोशिशों के बाद भी बेअंत सिंह लवप्रीत को इस तरह कन्नी काट कर चली जाने का कारण समझ नहीं पाया. हां, इतना जरूर हुआ कि उस ने लवप्रीत को सपना समझ कर भुला दिया.

जोरू और जमीन : लालची प्रेमी ने पहुंचाया जेल

जवानी बनी जान की दुश्मन – भाग 4

भूपेंद्र की पत्नी मायके गई हुई थी. इसलिए अकेला लेटा वह योजनाएं बनाता रहता था. ऐसे में ही उस ने सोचा कि क्यों न वह शीला नाम की इस बला को ही खत्म कर दे. इस में पकड़े जाने की संभावना कम रहेगी. इस योजना को अंजाम देने के लिए उस ने शीला से एक बार फिर मेलजोल बढ़ा लिया. अब वह उस से सिर्फ बातें करता था. रात में उस के पास आने के लिए कभी नहीं कहता था.

शीला भी अब फिर उस में दिलचस्पी लेने लगी. एक दिन बातचीत में शीला ने भूपेंद्र से कहा कि वह जल्दी ही विजय सिंह के साथ भाग जाएगी. बच्चों को भी वह साथ ले जाएगी. तब भूपेंद्र ने मन ही मन सोचा जब वह उसे भागने के लिए जिंदा छोडे़गा, तब न वह भागेगी. वह कमजोर था क्या, जो इस ने विजय सिंह का दामन थाम लिया.

शीला अपने बच्चों को ले कर भागे, उस के पहले ही वह उसे खत्म कर देना चाहता था. 30 जुलाई को उसे पता चला कि शीला दवा लेने डा. बंगाली के यहां जाएगी. तब भूपेंद्र ने उस से कहा, ‘‘तुम डा. बंगाली की दवा कब से खा रही हो. इस से तुम्हें कोई फायदा नहीं हो रहा है. ऐसा करो, तुम किसी बहाने से गांव के बाहर आ जाओ. मैं तुम्हें शहर ले जा कर अच्छे डाक्टर से दवा दिला देता हूं.’’

पिछले कई महीनों से शीला खुजली से परेशान थी. गांव के डा. बंगाली की दवा से उसे कोई फायदा नहीं हो रहा था. इसलिए वह भूपेंद्र के साथ किसी अच्छे डाक्टर के पास जाने को तैयार हो गई. फिर उसे पता भी तो नहीं था कि भूपेंद्र के मन में क्या है.

भूपेंद्र पर शीला को पूरा विश्वास था, इसलिए 31 जुलाई को बच्चों को स्कूल से ला कर वह भूपेंद्र के साथ डाक्टर के पास जाने के लिए तैयार हो गई. चलते समय उस ने बड़े बेटे सतीश को 20 रुपए दे कर कहा, ‘‘सतीश, तुम भाइयों को संभालना. मैं शमसाबाद के डा. बंगाली से दवा लेने जा रही हूं. वहां से लौटने में 2 घंटे तो लग ही जाएंगे. अगर तुम लोगों को भूख लगे तो बाजार से कुछ ला कर खा लेना.’’

इस के बाद शीला ने भूपेंद्र को फोन किया तो उस ने कहा, ‘‘तुम शमसाबाद चौराहे पर आ जाओ. मैं वहीं खड़ा तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं.’’

भूपेंद्र ने शीला को खत्म करने की तैयारी पहले से ही कर रखी थी. वह शीला को कोई तेज जहर दे कर मारना चाहता था. जब उसे कोई जहर नहीं मिला तो उस ने छिपकली मार कर सुखा कर उस का जहर तैयार कर लिया था. शमसाबाद चौराहे पर शीला उसे मिली तो उस ने वहां से रबड़ी खरीदी और उस में छिपकली का चूर्ण मिला कर पौलीथीन में पैक कर लिया.

भूपेंद्र शीला को मोटरसाइकिल पर बैठा कर निबोहरा रोड पर चल पड़ा. दोपहर की वजह से सड़क पर आवागमन काफी कम था.

अपनी योजना को अंजाम देने लायक जगह देख कर भूपेंद्र ने मोटरसाइकिल खराब होने के बहाने रोक दी. इस के बाद दोनों वहीं बने एक चबूतरे पर बैठ गए. भूपेंद्र ने कहा, ‘‘शीला मैं बाप बनने वाला हूं. इस खुशी में मैं तुम्हारा मुंह मीठा कराने के लिए रबड़ी खरीद कर लाया हूं.’’

‘‘मुबारक हो, इतनी बड़ी खुशखबरी है. तब तो मुंह मीठा करूंगी ही.’’ शीला ने कहा.

इस के बाद भूपेंद्र ने मोटरसाइकिल की डिक्की से रबड़ी और बोतल का पानी निकाल शीला को थमा दिया. शीला ने उस से भी रबड़ी खाने को कहा, लेकिन उस ने मना करते हुए कहा, ‘‘यह पूरी रबड़ी मैं तुम्हारे लिए लाया हूं. मैं ने तो दुकान पर ही खा ली थी.’’

शीला ने आराम से पूरी रबड़ी खाई और बोतल का पानी पी कर प्रेमिल नजरों से भूपेंद्र की ओर देखा. तब भूपेंद्र ने कहा, ‘‘शीला, मैं तुम से एक बात कहना चाहता हूं.’’

‘‘कहो क्या कहना है?’’ शीला ने पूछा.

‘‘मैं चाहता हूं कि अब हमारा मिलना ठीक नहीं है. मेरी शादी हो गई है, इसलिए मैं अपना परिवार देखूं. तुम्हारा अपना परिवार है, इसलिए तुम अपना परिवार देखो.’’

‘‘यही तो मैं भी कह रही थी. भई तुम्हारी नईनई पत्नी है. उस के साथ मौज करो. कहां मेरे पीछे पड़े हो.’’ शीला ने भूपेंद्र को समझाया.

इसी तरह की बातें करते करते आधा घंटा बीत गया. अब तक जहर शीला पर अपना असर दिखाने लगा था. जहर का असर होते देख भूपेंद्र ने अपने दोस्त फतेह सिंह को फोन कर के वहां आने को कहा. करीब आधे घंटे में फतेह सिंह वहां पहुंचा तो भूपेंद्र उसे फतेह सिंह की मोटरसाइकिल पर बिठा कर उस के पीछे खुद बैठ गया.

इस तरह बेहोश शीला को बीच में बैठा कर सड़क से कुछ अंदर जा कर शीला को जमीन पर पटक दिया. वहीं पर उस की गला दबा कर हत्या कर दी गई. इस के बाद लाश को कंजी के पेड़ के नीचे इस तरह रख दिया कि वह आसानी से दिखाई न दे.

इस के बाद भूपेंद्र ने फतेह सिंह को इस मदद के लिए एक हजार रुपए नकद और शीला का मोबाइल फोन दे कर विदा कर दिया. फतेह सिंह अपने घर चला गया तो भूपेंद्र भी अपनी मोटरसाइकिल से अपने घर चला गया.

शीला के घर वाले क्या कर रहे हैं, भूपेंद्र को सब पता चलता ही रहता था. लेकिन शीला की लाश का क्या हुआ, यह देखने के लिए वह अगले दिन घटनास्थल पर गया. तेज गरमी की वजह से अगले दिन ही शीला की लाश सड़ने लगी थी. प्रेमिका की लाश को सड़ते देख भूपेंद्र बेचैन हो उठा. जिस शरीर से उसे इतना सुख मिला था, उसे वह सड़ता गलता नहीं देखना चाहता था.

फिर भी उस दिन वह चुप रहा. लेकिन जब उस के परिवार के 4 निर्दोष लोग जेल चले गए तो उस से रहा नहीं गया और उस ने फतेह सिंह से फोन कर के लाश की जानकारी पहले शीला की बुआ और उस के बाद उस के भाई श्रीनिवास को दे दी. शायद उसे पता नहीं था कि इस तरह फोन करने से वह पकड़ा जाएगा. अगर उसे पता होता तो वह यह गलती कतई न करता.

पूछताछ के बाद पुलिस ने भूपेंद्र एवं फतेह सिंह को अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. पुलिस ने फतेह सिंह के पास से शीला का वह मोबाइल भी बरामद कर लिया था, जिस से निबोहरा रोड पर लाश पड़ी होने की सूचना दी गई थी. कथा लिखे जाने तक दोनों अभियुक्त जेल में थे.

— कथा पुलिस सूत्रों पर आधार

जमीन हड़पने वाले भूमाफिया

सुंदरियों के हसीन सपने – भाग 1

शाम होते ही ठंड बढ़ने लगी तो राजस्थान के जिला श्रीगंगानगर के कस्बा नरसिंहपुरा में गहनों की  दुकान चलाने वाले भूपेंद्र सोनी ने घर जाने का मन बना लिया. क्योंकि ठंड की वजह से अब ग्राहक आने की कोई उम्मीद नहीं थी. भूपेंद्र दुकान बंद कर के खडे़ हुए थे कि उन का मोबाइल बज उठा. स्क्रीन पर जो नंबर दिख रहा था, वह अंजान था, फिर भी उन्होंने फोन रिसीव कर लिया.

‘‘हैलो, जी… मुझे भूपेंद्रजी से बात करनी थी.’’ दूसरी ओर से किसी महिला ने कानों में शहद सा घोल दिया.

‘‘जी बोलिए, मैं भूपेंद्र ही बोल रहा हूं.’’ भूपेंद्र ने कहा.

‘‘अरे यार! मैं सपना बोल रही हूं. बड़ी मुश्किल से आप का नंबर ढूंढ पाई हूं. नंबर मिलते ही आप को फोन किया है. आप तो मुझे भूल ही गए. कभी पूछा भी नहीं कि मैं जिंदा हूं या मर गई?’’ सपना ने एक ही सांस में शिकायत भरे लहजे में उलाहना दे डाला.

‘‘लेकिन मैं ने आप को पहचाना ही नहीं. शायद आप को गलतफहमी हुई है. आप ने गलत नंबर मिला दिया है.’’ भूपेंद्र ने कहा.

‘‘आप चुन्नीराम अंकल के बेटे भूपेंद्र बोल रहे हैं न?’’ सपना ने पूछा.

‘‘हां, मैं उन्हीं का बेटा भूपेंद्र ही हूं.’’ भूपेंद्र ने कहा.

‘‘यह हुई न बात, भला ऐसा कैसे हो सकता है कि मैं जिस भूपेंद्र की फैन हूं. वह मुझे न जाने.’’ सपना ने कहा, ‘‘तुम मर्दों की यही तो फितरत होती है. मतलब निकलने के बाद एकदम से भूल जाते हो.’’

भूपेंद्र जवाब में कुछ कहता, उस के पहले ही सपना ने धीरे से कहा, ‘‘शायद वह आ गए हैं. अभी फोन रखती हूं. कल इसी समय फिर फोन करूंगी. और हां, आप भूल कर भी फोन मत करना.’’

इतना कह कर सपना ने फोन काट दिया.

भूपेंद्र ने एक बार फोन को देखा, फिर गाड़ी में सवार हो कर घर की ओर चल पड़ा. पूरे रास्ते वह सपना के बारे में ही सोचता रहा. घर आने पर भी उस के दिमाग में सपना ही घूमती रही. उस की नसनस में सनसनी सी फैल गई थी.

भूपेंद्र की गहनों की दुकान थी, उस के ग्राहकों में ज्यादातर महिलाएं ही थीं. उसे लगा कि सपना भी उस की कोई ग्राहक होगी. कभी लगता, कोई कालगर्ल तो नहीं है. यही सब सोचते हुए भूपेंद्र सपना की सुंदरता और शारीरिक बनावट को विभिन्न आकार देता रहा. उसी के बारे में सोचते हुए उसे न जाने कब नींद आ गई.

अगले दिन भूपेंद्र का मन न जाने क्यों दुकान पर जाने का नहीं हुआ. उस ने बड़े भाई को दुकान पर जाने के लिए कहा और स्वयं खेतों की ओर चला गया. उस का कई बार मन हुआ कि वह स्वयं सपना को फोन करे, लेकिन उस ने मना किया था, इसलिए वह मन मार कर रह गया. वैसे भी उस ने कहा था कि वह शाम को स्वयं फोन करेगी. शाम तक इंतजार करना उस के लिए मुश्किल था.

दोपहर बाद जब भूपेंद्र घर लौट रहा था तो उस के मोबाइल फोन की घंटी बजी. नंबर सपना का ही था. उस के फोन रिसीव करते ही सपना ने कहा, ‘‘हैलो, भूपेंद्रजी.’’

‘‘जी बोलिए, मैं बोल रहा हूं.’’ भूपेंद्र ने कहा.

‘‘भूपेंद्रजी, मैं आप से मिलना चाहती हूं. इस समय कहां हैं आप?’’

‘‘मैं इस समय खेतों पर हूं. यहीं आ जाओ.’’ भूपेंद्र ने कहा.

‘‘पागल हो गए हैं क्या आप. मैं अपनी ससुराल हनुमानगढ़ में हूं. मैं वहां कैसे आ सकती हूं? आप को ही यहां आना होगा. वह आज किसी काम से दिल्ली गए हैं. कल तक लौटेंगे.’’ सपना ने कहा.

‘‘सपना, आज तो नहीं, मैं कल सुबह ही आ पाऊंगा.’’ भूपेंद्र ने कहा.

‘‘सुबह 10 बजे तक पहुंच कर फोन करना. मैं स्वयं आप को लेने आ जाऊंगी. घर खाली है. पूरा दिन आप के लिए… ओके बाय…’’ कह कर सपना ने फोन काट दिया.

सुंदरी से मिले आमंत्रण से भूपेंद्र का रोमरोम रोमांचित हो रहा था. अगले दिन भूपेंद्र को किसी काम से हनुमानगढ़ जाना भी था. उस ने सोचा लगे हाथ यह काम भी हो जाएगा. अगले दिन यानी 9 दिसंबर, 2013 की सुबह भूपेंद्र अपनी कार से हनुमानगढ़ पहुंच गया. उस ने फोन किया तो सपना ने कहा, ‘‘मैं तुम्हें रिसीव करने चूना फाटक पहुंच रही हूं, आप वहीं इंतजार करें.’’

भूपेंद्र चूना फाटक पहुंच गया. कार को सड़क के किनारे खड़ी कर के वह सपना का इंतजार करने लगा. थाड़ी देर बाद सपना वहां पहुंच गई तो चाहत की उम्मीदों के सहारे दोनों ने एकदूसरे को पहचान लिया. आते ही सपना भूपेंद्र की बगल वाली सीट पर बैठ गई. उस के बैठते ही भूपेंद्र ने पूछा, ‘‘बताओ, कहां चलें?’’

‘‘मेरे पड़ोस में एक बुढि़या मर गई है, उस की वजह से मोहल्ले में काफी भीड़ है. ऐसे में घर चलना ठीक नहीं होगा. घंटे, 2 घंटे मटरगस्ती कर के समय गुजारते हैं.’’ सपना ने कहा.

भूपेंद्र ने कार लिंक रोड से अबोहर जाने वाली मुख्य सड़क की ओर मोड़ दी. कुछ दूर आगे सड़क पर एक कार खड़ी दिखाई दी तो सपना ने भूपेंद्र से गाड़ी रोकने को कहा. कार के पास 3 लोग खड़े थे. उन्हें अपना परिचित बता कर सपना उन के पास चली गई.

भूपेंद्र कुछ समझ पाता, इस से पहले ही उन में से 2 लोग उस के पास आ गए. उन्होंने भूपेंद्र को कार की पिछली सीट पर धकेला और उन में से एक ड्राइविंग सीट पर बैठ गया तो दूसरा उस की बगल में. इस के बाद कार फिर रिंग रोड पर चल पड़ी. उस के पीछेपीछे वह कार भी चल पड़ी, जो वहां पहले से खड़ी थी. उस में सपना अपने तीसरे साथी के साथ सवार थी.

अब भूपेंद्र को समझते देर नहीं लगी कि वह किसी शातिर गिरोह के चक्कर में फंस गया है. वहां शोर मचाना भी बेकार था, क्योंकि सड़क लगभग सुनसान थी.  दोनों कारें एक खेत में बनी सुनसान ढांपी (घर) में जा कर रुकीं.

उन तीनों ने भूपेंद्र को खींच कर कार से बाहर निकाला. पहले तो उन्होंने उस की जम कर पिटाई की. उस के बाद उस की चेन, अंगूठी और जेब में पड़ी नकदी छीन ली. साथ ही गाड़ी की आरसी और 2 बैंकों के एटीएम भी ले लिए. उन लोगों ने एटीएम के कोड नंबर पूछे तो भूपेंद्र ने शून्य बैलेंस वाले कार्ड का नंबर बता दिया. जिस में बैलेंस था, उस के कोड नंबर के बारे में उस ने कह दिया कि याद नहीं है.

सारा माल छीन लेने के बाद उन में से एक ने कहा, ‘‘शोहदे, तूने इस लड़की के साथ दुष्कर्म किया है. हम तेरे खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएंगे.’’

मुकदमे की बात सुनते ही भूपेंद्र की घिग्घी बंध गई. वह गिड़गिड़ाते हुए बोला, ‘‘मैं बाल बच्चेदार आदमी हूं. मेरी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी. प्लीज ऐसा मत करो.’’

‘‘अब तू एक ही सूरत में इस मुकदमे से बच सकता है. अगर तू 10 लाख रुपयों की व्यवस्था कर के हमें दे दे तो हम मुकदमा नहीं करेंगे.’’

भूपेंद्र के काफी गिड़गिड़ाने पर मामला 50 हजार रुपए में तय हो गया. जान से मारने की धमकी दे कर चारों ने भूपेंद्र को 2 दिनों में रुपए की व्यवस्था कर के फोन करने को कहा.

जवानी बनी जान की दुश्मन – भाग 3

सर्विलांस से मिली जानकारी के अनुसार, शीला का फोन 31 जुलाई की शाम को बंद हो गया था. 2 दिनों बाद फोन चालू हुआ तो उस की लोकेशन गांव अमर सिंह का पुरा की थी. फोन की लोकेशन तो बदलती रही थी, लेकिन ज्यादातर उस की लोकेशन अमर सिंह का पुरा की ही बता रही थी. इस का मतलब फोन उसी गांव के किसी आदमी के पास था. थानाप्रभारी ने अमर सिंह का पुरा में अपने मुखबिरों को तैनात कर दिया.

इस के बाद उन्होंने काल डिटेल्स का अध्ययन किया तो पता चला कि शीला के फोन पर 30 जुलाई से 31 जुलाई की दोपहर तक एक नंबर से लगातार बात हुई थी. मुनीष कुमार ने उस नंबर के बारे में पता किया तो वह नंबर शीला के ही परिवार के एक लड़के भूपेंद्र कुमार का था. रिश्ते में वह उस का भतीजा लगता था. भूपेंद्र शीला के जेठ लगने वाले रामलाल का बेटा था. थानाप्रभारी मुनीष कुमार सोचने लगे कि आखिर भूपेंद्र ने शीला को फोन क्यों किए थे? उन्होंने जब इस सवाल पर गहराई से सोचा तो भूपेंद्र पर उन्हें शक हो गया.

भूपेंद्र पर शक होते ही थानाप्रभारी पुलिस टीम के साथ शाहपुर के लिए निकल पड़े. थाना फतेहाबाद पुलिस टीम शाहपुर गांव पहुंची तो गांव वाले परेशान हो उठे, क्योंकि शीला की हत्या के मामले में पहले से ही 4 लोग जेल जा चुके थे. पुलिस किसे पकड़ने आई है, गांव में इसी बात की चर्चा होने लगी.

पुलिस गांव वालों से पूछ कर रामलाल के घर पहुंची. भूपेंद्र घर पर ही था. पुलिस ने उसे जीप में बैठा लिया. गांव वालों ने इस बात का काफी विरोध किया, लेकिन पुलिस के आगे किसी की भी एक नहीं चली और थानाप्रभारी उसे थाने ले आए. थाने ला कर उन्होंने उस से सीधे पूछा, ‘‘शीला की हत्या तुम ने क्यों की?’’

मुनीष कुमार ने भूपेंद्र से यह बात इस तरह पूछी जैसे उन्हें पता हो कि शीला की हत्या इसी ने की है. उन के इस सवाल से भूपेंद्र परेशान हो उठा कि इन्हें कैसे पता चला कि शीला की हत्या उसी ने की है. उस ने सुना था कि अपराध उगलवाने के लिए पुलिस आरोपियों को बहुत बुरी मार मारती है. पुलिस की मार से बचने के लिए उस ने तुरंत स्वीकार कर लिया कि अपने दोस्त फतेह सिंह के साथ मिल कर उसी ने शीला की हत्या की है.

अमर सिंह का पुरा के रहने वाले फतेह सिंह के पास ही शीला का मोबाइल फोन है. उसी ने फोन कर के पहले शीला की बुआ और उस के बाद श्रीनिवास को लाश के बारे में बताया था.

थानाप्रभारी मुनीष कुमार ने अमर सिंह का पुरा जा कर भूपेंद्र की निशानदेही पर उस के दोस्त फतेह सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया. इस के बाद भूपेंद्र और फतेह सिंह से की गई पूछताछ में शीला की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी.

थाना डौकी गांव कटोरा के रहने वाले रामसनेही के परिवार में पत्नी रामदेवी के अलावा 7 संतानों का भरापूरा परिवार था. संतानों में बेटी मुन्नी देवी सब से बड़ी थी तो कल्लो सब से छोटी. शीला रामसनेही की दूसरे नंबर की बेटी थी. बेटियों में वह सब से खूबसूरत थी. विवाहयोग्य होते ही रामसनेही ने उस के घरवर की तलाश शुरू कर दी थी.

खूबसूरत होने की वजह से रामसनेही को उस के लिए ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी पड़ी. शाहपुर के रहने वाले छोटेलाल का बेटा जयपाल उन्हें शीला के लिए पसंद आ गया. जयपाल को शीला पहली ही नजर में भा गई थी. इस के बाद दोनों का विवाह हो गया. यह 10-11 साल पहले की बात है.

शीला ससुराल आ गई. ससुराल में एक जेठ और 3 देवरों का भरापूरा परिवार था. जयपाल दिल्ली में नौकरी करता था. महीने, 2 महीने में ही उस का गांव आना होता था. समय के साथ शीला 3 बच्चों सतीश, मनोज और हरीश की मां बनी.

हरीश के पैदा होने के बाद जयपाल की तबीयत खराब रहने लगी. लेकिन परिवार की जिम्मेदारी उसी पर थी, इसलिए दिल्ली में रह कर नौकरी करना उस की मजबूरी थी. उस की इस बीमारी का असर सब से ज्यादा शीला पर पड़ा. क्योंकि बीमारी की वजह से उस का शरीर इस लायक नहीं रहा कि घर जाने पर वह शीला को खुश कर पाता.

शीला को जब लगा कि पति अब उसे खुश नहीं कर सकता तो वह अपनी खुशी किसी और में तलाशने लगी. उस की यह तलाश जल्दी ही खत्म हो गई, क्योंकि इस के लिए उसे कहीं बाहर नहीं जाना पड़ा. परिवार के ही जेठ रामलाल का 20-22 साल का बेटा भूपेंद्र उसे भा गया. वह सेल्समैन था. उस का शहर भी आनाजाना लगा रहता था. गांव में वह सब से ज्यादा स्मार्ट था. शहर आनेजाने की वजह से वह रहता भी बनठन कर था.

शीला को भूपेंद्र भा गया तो वह उस पर डोरे डालने लगी. खूबसूरत शीला का गदराया बदन था. चाची का खुला आमंत्रण पा कर जवानी की दहलीज पर खड़ा कुंवारा भूपेंद्र उस के मोहपाश में बंधता चला गया. फिर तो वह दिन आते देर नहीं लगी, जब चाचीभतीजे ने सारी मर्यादाएं तोड़ कर 2 जिस्म एकजान कर दिए.

शीला गांव में बच्चों के साथ अकेली ही रहती थी, इसलिए भूपेंद्र से उसे मिलने में कोई परेशानी नहीं होती थी. भूपेंद्र उस के घर से मात्र 20 मीटर की दूरी पर रहता था. बच्चों के सो जाने पर वह फोन कर के भूपेंद्र को अपने घर बुला लेती. दोनों का मिलन रात में ही होता था. यही वजह थी कि उन के इन संबंधों की जानकारी गांव या परिवार के किसी भी आदमी को नहीं हो पाई.

इसी तरह एकएक कर के 3 साल बीत गए. भूपेंद्र से संबंध बनने के बाद शीला को जयपाल की कोई फिकर नहीं रह गई थी. लेकिन जब घरवालों ने भूपेंद्र के लिए लड़कियां देखनी शुरू कीं तो एक बार शीला फिर परेशान हो उठी. फिर वह भी अपने लिए नया यार खोजने लगी, क्योंकि उसे पता था कि भूपेंद्र की शादी हो जाएगी तो वह उसे घास डालना बंद कर देगा. जबकि अब उसे दूसरों का ही सहारा था. जयपाल तो अब कईकई महीने बाद घर आता था.

इस बार शीला की नजर गांव के ही विजय सिंह पर जम गई. विजय सिंह भी कुंवारा था, इसलिए जल्दी ही वह शीला के प्रेमजाल में फंस गया. इस तरह शीला के अब 2 यार हो गए. विजय सिंह को अपने प्रेमजाल में फांस कर शीला निश्चिंत हो गई. भूपेंद्र उस के पास आना छोड़ देगा तो विजय सिंह तो रहेगा ही. वह विजय को भी भूपेंद्र की ही तरह सब के सो जाने पर रात को बुलाती थी.

गर्मियों में जयपाल घर आया तो जायदाद को ले कर भाइयों से विवाद हो गया. जयपाल अकेला था, जबकि भाई 4 थे. उन्होंने जयपाल की पिटाई कर दी. शीला पति को बचाने गई तो उन लोगों ने उसे भी जमीन पर गिरा कर मारापीटा. इस के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा तो जेठ और देवरों ने सब के सामने अपनी गलती के लिए लिखित रूप से माफी मांग ली. इस के बाद पूरा परिवार शीला से नफरत करने लगा. ठीक होने के बाद जयपाल दिल्ली चला गया तो शीला अपने पुराने ढर्रे पर चल पड़ी.

भूपेंद्र ने मांबाप से विवाह का काफी विरोध किया, लेकिन उम्र का वास्ता दे कर मांबाप ने उस की एक नहीं सुनी और 13 जुलाई, 2013 को उस का विवाह कर दिया. पत्नी के आने के बाद वह शीला की ओर से लापरवाह तो हुआ, लेकिन उस के पास जाना नहीं छोड़ा. ऐसे में ही किसी दिन उसे शीला और विजय सिंह के संबंधों का पता चला तो वह बौखला उठा.

उस ने यह बात शीला से कही तो शीला ने कहा, ‘‘मैं तुम्हारी ब्याहता तो हूं नहीं कि सिर्फ तुम्हारी हो कर रहूं. मैं ने जिस के साथ 7 फेरे लिए, जब उस की नहीं हुई तो तुम्हारी क्यों होऊंगी. मेरे मन में जो आएगा, वह करूंगी. रौबदाब दिखाना है तो अपनी पत्नी को दिखाओ. उसे पल्लू में बांध कर रखो. तुम उस के पास सोते हो तो मैं ने तो नहीं मना किया. फिर तुम मुझे क्यों रोक रहे हो.’’

शीला की ये बातें भूपेंद्र को अच्छी नहीं लगीं. फिर भी वह कुछ नहीं बोला. लेकिन मन ही मन उस ने तय कर लिया कि शीला जिस शरीर और सुंदरता के बल पर कूद रही है, उसे वह ऐसा कर देगा कि छूने की कौन कहे, कोई उस की ओर देखेगा तक नहीं. इस के लिए उस ने तेजाब डालने की योजना बनाई. लेकिन इस में उसे लगा कि वह फंस जाएगा. क्योंकि तेजाब डालते समय शीला उसे पहचान लेगी. फंसने के डर से उस ने इस योजना पर पानी डाल दिया और कोई नई योजना बनाने लगा.