कहानी कुछ और थी : प्रेमिका का किया अपहरण

दीवार पर लगी घड़ी की ओर देखते हुए संजय गुप्ता ने बेटी को आवाज दी, ‘‘बेटी चेतना जल्दी करो, ट्यूशन के लिए देर हो रही  है.’’ चेतना ने कोई जवाब नहीं दिया तो संजय गुप्ता ने पुन: आवाज लगाई, ‘‘जल्दी करो बेटा, देर हो रही है.’’

पिता के दोबारा आवाज लगाने पर चेतना टोस्ट का टुकड़ा मुंह में ठूंसते हुए बोली, ‘‘बस आई पापा, दो मिनट.’’

कह कर चेतना ने किताबें और नोटबुक समेटीं और जल्दी से संजय गुप्ता के पास आ कर बोली, ‘‘चलिए पापा.’’

‘‘चलो.’’ कह कर संजय गुप्ता बाहर आ गए. उन्होंने स्कूटी निकाल कर स्टार्ट की तो चेतना फुर्ती से उन के पीछे बैठ गई. इस के बाद उन्होंने स्कूटी आगे बढ़ा दी. संजय गुप्ता और चेतना का यह रोज का काम था. चेतना गुप्ता जगराओं के डीएवी कालेज से बीकौम कर रही थी. वह कालेज दोपहर के बाद जाती थी, इसीलिए सुबह साढ़े 8 बजे से साढ़े 11 बजे तक ट्यूशन पढ़ने जाती थी. यही वजह थी कि दुकान पर जाते समय संजय गुप्ता चेतना को साथ लेते जाते थे. उसे ट्यूशन वाले मास्टर की गली के मोड़ पर छोड़ कर वह अपनी दुकान पर चले जाते थे.

संजय गुप्ता शरीफ और नेकदिल इंसान तो थे ही, शहर के जानेमाने व्यवसाई भी थे. जगराओं रामनगर में ‘एस.के. टेक्सटाइल्स’ नाम से उन का कपड़ों का भव्य शोरूम था. उन के परिवार में पत्नी सीमा गुप्ता के अलावा बेटा साहिल गुप्ता और बेटी चेतना गुप्ता थी. साहिल पिता के साथ शोरूम संभालता था, जबकि चेतना अभी पढ़ रही थी. चेतना छोटी थी, इसलिए संजय गुप्ता बेटे से अधिक बेटी को प्यार करते थे.

उस दिन सुबह 8 बजे के आसपास चेतना को वह गली के मोड़ पर ले कर पहुंचे तो वहां उन्हें सफेद रंग की एक मारुति स्विफ्ट कार खड़ी दिखाई दी. ड्राइविंग सीट पर एक लड़का बैठा था, जो अपना चेहरा दूसरी ओर किए था. कार की पिछली सीट पर 2 लड़के बैठे थे और 2 लड़के कार के बाहर दरवाजे के पास खड़े थे. कार के दोनों पिछले दरवाजे खुले थे.

चेतना स्कूटी से उतर कर जैसे ही कार के पास पहुंची, बाहर खड़े दोनों लड़कों ने अचानक उसे पकड़ कर कार के अंदर झोंक दिया. चेतना के कार के अंदर गिरते ही कार में बैठे लड़कों ने उसे खींच कर दबोच लिया. इस के बाद बाहर खड़े लड़के भी फुर्ती से कार में बैठ गए तो कार तेजी से चल पड़ी. यह 29 जनवरी, 2014 की बात है.

यह सब इतनी तेजी से और अचानक हुआ था कि जल्दी न संजय गुप्ता ही समझ पाए और न चेतना ही कि यह क्या हो रहा है. जब दोनों की समझ में आया कि अपहरण हो गया तो कार के अंदर से जहां चेतना चिल्लाई, ‘पापा बचाओ,’ वहीं स्कूटी संभालते हुए संजय गुप्ता भी चिल्लाए, ‘‘अरे कार रुकवाओ भई, मेरी बेटी को बदमाश उठा ले गए.’’

संजय गुप्ता चिल्लाए ही नहीं, बेटी को इस तरह आंखों के सामने उठा कर ले जाते देख चिल्लाते हुए कार के पीछे स्कूटी लगा दी. आगे उन के भाई की दुकान थी. भाई दुकान पर आ गए थे. शोरशराबा सुन कर वह भी बाहर आ गए. भाई को चिल्लाते हुए स्कूटी से कार का पीछा करते देख वह भी अपना एक्टिवा स्कूटर उठा कर कार का पीछा करने लगे. उन्हीं के साथ कुछ अन्य लोगा भी माजरा समझ कर अपने अपने वाहनों को ले कार के पीछे लपके. लेकिन लाख प्रयास के बाद भी कार पकड़ में नहीं आई और देखते देखते आंखों से ओझल हो गई.

जो भी इस तरह सरेआम अपहरण की बात सुनता, वही दौड़ पड़ता. धीरेधीरे पूरा बाजार जमा हो गया. संजय गुप्ता तो बदहवास हो कर सड़क पर ही बैठ गए थे. व्यापारी साथियों ने उन्हें सांत्वना देने के साथ ही इस घटना की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम के साथसाथ थाना जगराओं और सिटी पुलिस को भी दे दी थी.

सूचना मिलते ही थाना सिटी के थानाप्रभारी मोहम्मद जमील पुलिस दल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए और संजय गुप्ता द्वारा की गई शिकायत के आधार पर काररवाई करते हुए उन्होंने वायरलैस द्वारा संदेश दे कर जगराओं शहर से बाहर जाने वाली सभी सीमाओं को सील करवाने के साथ चेतना गुप्ता के अपहरण की रिपोर्ट मनीष मल्होत्रा और उस के 4 अज्ञात दोस्तों के खिलाफ दर्ज करा दी.

संजय गुप्ता ने रिपोर्ट दर्ज कराते समय पुलिस को बताया था कि कार की ड्राइविंग सीट पर बैठे युवक को वह पहचानते थे. उस का नाम मनीष मल्होत्रा था, जबकि उस के साथियों को वह नहीं जानते थे, लेकिन सामने आने पर वह उन्हें पहचान सकते थे. मनीष को वह इसलिए पहचानते थे, क्योंकि वह पहले भी कई बार चेतना से छेड़छाड़ कर चुका था, जिस की उन्होंने पुलिस से शिकायत भी की थी.

संजय गुप्ता ने रिपोर्ट में मनीष और उस के दोस्तों के अलावा इस अपहरण की साजिश में मनीष के पिता जोगिंदर पाल, चाचा राज मल्होत्रा, मां ऊषा रानी, चाची, बुआ के बेटे आकाश धवन उर्फ अभी के नाम भी लिखाए थे. उन का कहना था कि इन सभी लोगों ने साजिश रच कर चेतना का अपहरण करवाया है.

चूंकि अपहरण शहर के एक प्रसिद्ध व्यवसाई के बेटी, जो छात्रा भी थी, का हुआ था, इसलिए इस मामले में छात्र भी हंगामा कर सकते थे. इस बात को ध्यान में रख कर थानाप्रभारी मोहम्मद जमील ने घटना की सूचना एसपी सिटी, डीएसपी सुरेंद्र कुमार, क्राइम टीम और स्पेशल फोर्स को भी दे दी थी.

संजय गुप्ता ने चेतना के अपहर्त्ताओं में से मुख्य अभियुक्त का नाम बता दिया था, इसलिए थानाप्रभारी मोहम्मद जमील ने तुरंत मनीष मल्होत्रा के बारे में पता किया. प्राप्त जानकारी के अनुसार, मनीष मल्होत्रा जगराआें के रायकोटा रोड पर भट्ठा गुरु के नजदीक मकान नंबर 2982 में रहने वाले शहर के प्रसिद्ध व्यवसाई जोगिंदर पाल मल्होत्रा का बेटा था. उन का जगराओं में मल्होत्रा फिल स्टेशन के नाम से पेट्रेल पंप तो था ही, उन के पास कोकपेप्सी की ऐजेंसी भी थी.

जोगिंदर पाल का संयुक्त परिवार था. भाई राज मल्होत्रा भी उन्हीं के साथ रहते थे. उन के 2 बेटे थे. बड़ा बेटा विशाल शादीशुदा था. वह चाचा राज मल्होत्रा के साथ पैट्रोल पंप का कामकाज देखता था. छोटा बेटा मनीष पढ़ाई पूरी करने के बाद मटरगश्ती करता था.

थानाप्रभारी मोहम्मद जमील ने एएसआई जरनैल सिंह के साथ मनीष के घर छापा मारा तो वह घर से फरार मिला. उस के बारे में पता करने के लिए वह जोगिंदर पाल के पेट्रोल पंप और कोकपेप्सी ऐजेंसी के औफिस गए तो पुलिस के डर से वह भी भूमिगत हो गए थे. पुलिस अपनी काररवाई कर रही थी, लेकिन जनता उस से संतुष्ट नहीं थी. इसलिए आम लोगों में पुलिस के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा था. शहर के व्यवसाई ही नहीं, आम लोग भी एकत्र होने लगे थे.

जब अच्छीखासी भीड़ जमा हो गई तो उन्होंने हाईवे और शहर की प्रमुख सड़कों पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया. शहर के बाजार और व्यापारिक गतिविधियां बंद करा दी गईं. लोग सड़कों पर ही धरने पर बैठ गए. धरने पर बैठे लोग पुलिसप्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे. इस तरह पुलिस के लिए परेशानी खड़ी हो गई. प्रदर्शनकारियों को भी संभालना था और अपहर्त्ताओं की तलाश कर चेतना को सकुशल बरामद भी करना था.

जांच में परेशानी हो रही थी, क्योंकि कहींकहीं पुलिस और जनता के बीच झड़पें हो रही थीं. एक एएसआई जोगा सिंह से जनता काफी नाराज थी, क्योंकि सूचना देने के बावजूद वह घटनास्थल पर काफी देर से पहुंचे थे. धरने पर बैठे लोग अपहर्त्ताओं को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर के चेतना को बरामद करने की मांग कर रहे थे.

जनता को धरनाप्रदर्शन करते देख नेता भी अपनी रोटियां सेंकने पहुंच गए. इनकलाबी क्लब पंजाब के नेता कमलजीत खन्ना ने धरना पर बैठे लोगों को संबोधित करते हुए यहां तक कह डाला कि यह घटना भी पंजाब के चर्चित श्रुति अपहरण कांड की ही तरह है. अपहर्त्ताओं ने पुलिस और सत्ता पार्टी में बैठे नेताओं के साथ मिल कर इस घटना को अंजाम दिया है.

विधायक एस.आर. कलेर ने हाथ जोड़ कर प्रदर्शनकारियों और धरना पर बैठे लोगों से शांत रहने की अपील की. लेकिन उन की बातों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया. डीएसपी सुरेंद्र कुमार जब धरना पर बैठे लोगों को समझाने पहुंचे तो गुस्साए लोगों ने उन के विरोध में नारे तो लगाए ही, उलझने की भी कोशिश की.

शाम होतेहोते यह आक्रोश इस कदर बढ़ गया कि लोगों ने थाने का घेराव करने के साथ थानाप्रभारी मोहम्मद जमील के औफिस के बाहर चादर बिछा कर भीख मांगते हुए जोरजोर से चिल्ला कर कहने लगे, ‘‘हम जानते हैं, पुलिस बिना पैसा लिए कोई काम नहीं करती, इसलिए हमें भिक्षा में पैसे दो, जिसे दे कर हम चेतना बिटिया को वापस ला सकें.’’

लोग उस चादर में 10, 20, 50 और सौ रुपए डालते हुए कह रहे थे कि ‘चाहे जितने पैसे ले लो, लेकिन चेतना को अपहर्त्ताओं के चंगुल से मुक्त करा दो.’ जनता की इस हरकत से परेशान हो कर एसपी और डीएसपी ने आ कर धरना पर बैठे लोगों से माफी मांगी और अपहर्त्ताओं को शीघ्र गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया. इस के बाद भीड़ थोड़ा शांत हुई.

पुलिस ने उस रात अपहर्त्ताओं की तलाश में कई जगह छापे मारे, लेकिन अपहर्त्ता पुलिस के हाथ नहीं लगे. उन के परिजनों और निकट संबंधियों पर शिकंजा कसा गया. मनीष के परिजनों और मित्रों को थाने ला कर पूछताछ की गई. इस तरह मनीष और पुलिस के बीच पूरी रात चूहे बिल्ली का खेल चलता रहा. अंत में 30 जनवरी की सुबह एएसआई जरनैल सिंह से मनीष के ताऊ विजय मल्होत्रा ने फोन कर के कहा कि मनीष पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना चाहता है. इस के लिए वह कचहरी चौक पर आ जाएं. मनीष के आत्मसमर्पण की सिफारिश एक अकाली नेता ने भी की थी.

बहरहाल, पुलिस अधिक झमेले में नहीं पड़ना चाहती थी, क्योंकि वैसे ही इस मामले में अब तक पुलिस की काफी किरकिरी हो चुकी थी. इसलिए थानाप्रभारी मोहम्मद जमील के आदेश पर एएसआई जरनैल सिंह पुलिस टीम के साथ कचहरी चौक पर पहुंच गए. मनीष के कुछ रिश्तेदार वहां पहले से ही मौजूद थे.

पुलिस किसी से कुछ पूछताछ करती, उस के पहले ही वहां मौजूद लोगों में भगदड़ सी मच गई. पुलिस उन्हें संभालती, भगदड़ का फायदा उठा कर एकएक कर के सभी रिश्तेदार खिसक गए. लेकिन मनीष और चेतना पुलिस के हाथ लग गए. इस तरह चेतना सकुशल बरामद हो गई. एएसआई जरनैल सिंह दोनों को ले कर थाने आ गए.

थानाप्रभारी मोहम्मद जमील ने दोनों का सिविल अस्पताल में मैडिकल चेकअप कराया. रिपोर्ट के अनुसार मनीष और चेतना के बीच किसी प्रकार के सैक्स संबंध की पुष्टि नहीं हुई. मैडिकल चैकअप के बाद उसी दिन दोनों को इलाका मजिस्ट्रेट श्री गुरमीत सिंह की अदालत में पेश किया गया. पूछताछ के लिए पुलिस ने मनीष को 2 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया. जबकि चेतना गुप्ता को धारा 164 के अंतर्गत बयान दिला कर उसे उस के पिता संजय गुप्ता को सौंप दिया गया. रिमांड के दौरान मनीष से की गई पूछताछ में जो कहानी प्रकाश में आई, वह अपहरण की न हो कर आपसी प्रेमसंबंधों में आई खटास की थी.

दरअसल, चेतना गुप्ता और मनीष मल्होत्रा के बीच पिछले काफी समय से प्रेमसंबंध थे. पुलिस के अनुसार, मनीष ने चेतना गुप्ता को बड़ेबड़े सपने दिखाए थे. कहने को तो उस के पिता जोगिंदर पाल के पास पेट्रोल पंप ही नहीं, कोकपेप्सी की ऐजेंसी भी थी, लेकिन सच्चाई यह थी कि उन पर काफी कर्ज था.

चूंकि मनीष चेतना को पसंद करता था और उस से शादी करना चाहता था, इसलिए लगातार उस से झूठ बोलता आ रहा था. जबकि हकीकत यह थी कि चेतना को घुमानेफिराने के लिए वह अपने यारोंदोस्तों की गाडि़यां तो मांग कर लाता ही था, उसे गिफ्ट देने के लिए भी उन्हीं से उधार पैसे ले कर खरीद कर लाता था.

चेतना को बिलकुल पता नहीं था कि मनीष और उस के परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी डांवाडोल हो चुकी है. हां, अगर मनीष सच्चाई बता कर अपनी स्थिति स्पष्ट कर देता तो शायद बात कुछ और होती. लेकिन वह उस के झूठ के मकड़जाल में फंसती चली गई और उसे दिल से चाहने लगी. जबकि मनीष उसे लगातार धोखा देता आ रहा था.

मनीष और चेतना आपस में शादी करना चाहते थे. लेकिन इस शादी में सब से बड़ी अड़चन चेतना के मातापिता की ओर से थी. क्योंकि दोनों की जाति अलग थी. चेतना गुप्ता जहां बनियों की बेटी थी, वहीं मनीष पंजाबी झांगी जाति से था. चेतना अच्छी तरह जानती थी कि उस के मातापिता इस शादी के लिए हरगिज तैयार नहीं होंगे.

अंत में काफी सोचविचार कर दोनों ने फैसला लिया कि वे चोरी से कोर्टमैरिज कर लेंगे. इस बात का जिक्र वे घर में नहीं करेंगे. अगर उन के मातापिता शादी के लिए राजी हो जाएंगे, तब तो ठीक है, अन्यथा वे मैरिज प्रमाण पत्र दिखा कर बता देंगे कि उन्होंने पहले ही शादी कर ली है. तब मजबूरन उन्हें झुकना होगा.

इस के बाद चेतना और मनीष ने वकील से बात की. वकील ने उन्हें सलाह दी कि अगर वे किसी मंदिर या गुरुद्वारे में शादी कर के वहां से शादी का प्रमाण पत्र प्राप्त कर लेते हैं तो उन्हें कोर्टमैरिज में आसानी होगी. दोनों किसी ऐसे मंदिरगुरुद्वारे की तलाश में लग गए, जहां से विवाह का प्रमाण पत्र मिल जाए. आखिर उन्हें एक ऐसा गुरुद्वारा मिल गया, जो उन के मातापिता की गैरमौजूदगी में उन की शादी करा सकता था. वह जगराओं के शेरपुरा रोड पर डीएवी कालेज के पास स्थिति गुरुद्वारा साहिब बाल खेतारामजी था.

12 सितंबर, 2013 को मनीष चेतना को ले कर गुरुद्वारा साहिब बाल खेतारामजी पहुंचा और शादी कर के कुछ फोटो खिंचवाने के बाद विवाह का प्रमाणपत्र हासिल कर लिया. इस के बाद दोनों ने चंडीगढ़ हाईकोर्ट जा कर किसी वकील के माध्यम से गुरुद्वारा द्वारा दिए गए शादी के प्रमाणपत्र के आधार पर नोटरी से शादी रजिस्टर्ड करवा ली.

अपनेअपने मातापिता से जान का खतरा बता कर उन्होंने सुरक्षा के लिए उच्च न्यायालय में आवेदन भी कर दिया. लेकिन इस के बाद जब चेतना को मनीष की आर्थिक स्थिति का पता चला तो उसे उस से नफरत हो गई. क्योंकि मनीष ने उसे प्रेमजाल में फंसाने के लिए झूठ बोला था. उसे यह भी पता चल गया था कि उसे तोहफे देने के लिए वह दोस्तों से पैसे उधार लेता रहता था.

चेतना ने जब इस बारे में मनीष से पूछा तो वह साफ मुकर गया. उस ने कहा कि यह सब झूठ है. उस के लगातार झूठ पर झूठ बोलने से चेतना को उस से इतनी घृणा हो गई कि उस ने उस से मिलना तक बंद कर दिया. यही नहीं, उस ने अपने पिता से भी कह दिया कि वह उस के लिए कोई अच्छा सा लड़का देख कर उस की शादी कर दें.

दूसरी तरफ मनीष के वे दोस्त, जो उस की शादी में गवाह थे, उसे ताना देने लगे, ‘‘यार! तू कैसा पति है. तू यहां अकेला पड़ा सड़ रहा है और पत्नी मायके में ऐश कर रही है.’’

मनीष चेतना को लाना चाहता था, जबकि वह आने को तैयार नहीं थी. क्षुब्ध हो कर उस ने दोस्तों के साथ मिल कर चेतना के अपहरण की योजना बना डाली. इस में उस ने लुधियाना के शिमला पुरी के रहने वाले अपनी बुआ के बेटे अभी की मदद लेने के साथ अपने 3 दोस्तों कालू, सीता और आकाश को शामिल किया. जिस स्विफ्ट कार से चेतना का अपहरण किया गया था, वह उस की बुआ के बेटे आकाश उर्फ अभी की ही थी. घटना के समय आकाश उर्फ अभी भी साथ था.

चेतना का अपहरण कर के वे उसे ले कर जगराओं से रायकोट पहुंचे. वहां कालू और सीता को उतार कर वे मुल्लापुर होते हुए लुधियाना के शिमलापुरी स्थित अभी के घर पहुंचे. वहां सभी ने चायनाश्ता किया. वहीं से फोन कर के मनीष ने जगराओं के मित्रों से वहां होने वाली गतिविधियों की जानकारी ली.

शाम को जब मनीष को पता चला कि पुलिस को उस के लुधियाना के शिमलापुरी में होने की जानकारी मिल गई है तो उस ने अभी से बात की. अभी ने जालंधर के रहने वाले अपने जीजा ललित मेहता को सारी बात बता कर सहायता मांगी. ललित ने उन्हें फौरन जालंधर आने को कहा.

मनीष और अभी तुरंत चेतना को ले कर जालंधर के लिए निकल पड़े. लेकिन लाडोवाल टोल ब्रिज पर पहुंच कर चेतना शोर मचाने लगी. उस के शोर मचाने पर कई लोगों का ध्यान उस की ओर चला गया. टोलनाका पर लगे कैमरों में भी चेतना का फोटो आ गया था. इसलिए डर के मारे मनीष ने वह कार वहीं छोड़ दी और ललित को फोन से स्थिति बताई तो उन्होंने अपनी टवेरा कार भेज कर उन्हें वापस जगराओं जा कर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने की सलाह दी. इस के बाद मनीष ने जगराओं आ कर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. पुलिस ने ललित की टवेरा भी बरामद कर ली है.

मनीष ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए कहा था कि अगर चेतना ने उस के साथ बेवफाई न की होती तो शायद आज उसे यह अपराध न करना पड़ता. भला कौन अपनी पत्नीप्रेमिका का अपहरण करना चाहेगा. रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद पुलिस ने मनीष को पुन: अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासम में भेज दिया गया. फरार अभियुक्तों की पुलिस तलाश कर रही थी.

— कथा पुलिस सूत्रों व जन चर्चा पर आधारित

लिवइन पार्टनर का यह कैसा लव

सुहागन से पहले विधवा बनी स्नेहा

प्रेमियों के लिए मचलने वाली विवाहिता

इश्क के दरिया में पति को बहाया

दोस्त की खातिर : प्रेमिका को उतारा मौत के घाट

लिवइन पार्टनर का यह कैसा लव – भाग 3

करीब 2 साल के लौकडाउन में रिया एक बच्ची की मां भी बन गई. उस के बाद रिया का यौवन और उभर गया था. साथ ही उस में खुलापन बढ़ गया था.

दूसरी तरफ रिया की कई आदतें पति पुष्पेंद्र और उस के घर वालों को पसंद नहीं थी. रिया की आजाद खयाली और गैरमर्दों के साथ दोस्ती करना पसंद नहीं था. वह इस के लिए उसे हमेशा टोकता रहता था. कई बार इस बात पर दोनों के बीच नोकझोंक भी हो जाती थी.

एक दिन पुष्पेंद्र रिया की आदतों से ऊब गया और उस से तलाक ले लिया. रिया अपनी छोटी बेटी को ले कर मायके आ गई. उस की मां पर फिर से नई जिम्मेदारी आ गई. रिया का इस पर कोई असर नहीं हुआ. उस ने फिर से कंपनी जौइन कर ली.

औफिस आतेजाते एक बार रिया ऋषभ सिंह से टकरा गई. ऋषभ को रिया की खूबसूरती भा गई थी, जबकि रिया को ऋषभ के बात करने का सलीकेदार तरीका और स्टाइलिश लाइफस्टाइल पसंद आ गई थी. उन्होंने लिवइन में रहने का फैसला ले लिया. इस के बाद वह सुशांत गोल्फ सिटी के क्रिस्टल पैराडाइज अपार्टमेंट में 203 नंबर का फ्लैट किराए पर ले कर रहने लगा. रिया ने ऋषभ से अपने दिल की सारी बातें कीं, लेकिन तलाकशुदा बीवी होने की बात छिपा ली.

बहुत जल्द ही ऋषभ को रिया की वैसी आदतों की भी जानकारी हो गई, जो उसे अच्छी नहीं लगती थीं. इंस्टाग्राम के जरिए रिया की गैरमर्दों के साथ मौजमस्ती की एक तरह से पोल खुल गई, जो उस के साथ रहते हुए भी जारी थी.

उस की शर्मसार करने वाली फूहड़ और अश्लील वीडियो को देख कर ऋषभ ने विरोध जताया तो वह उल्टे उस की कमजोरियों का हवाला देने लगी और अपनी आदत को सही ठहराने लगी. जबकि ऋषभ रिया के साथ शादी करने का मन बना चुका था और उस के साथ अच्छी जिंदगी जीना चाहता था.

रिया की गलत आदतों से तंग आ कर ऋषभ ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन रिया अपनी जिद पर अड़ी रही. जब भी उन के बीच इसे ले कर नोकझोंक होती रिया एक ही राग अलापती, ”मुझ से शादी कब करोगे?’‘

बगैर बताए घर से घंटों गायब रहने के बारे में पूछने पर वह ऋषभ को ही भलाबुरा कहने लगती थी. इस कारण ऋषभ उस से नाराज रहने लगा था और उस के साथ शादी करने का जुनून भी उतर चुका था.

ऋषभ सिंह ने जब रिया की हकीकत का पता किया, तब यह जान कर उस के पैरों तले की जमीन जैसे खिसक गई कि वह न केवल तलाकशुदा है, बल्कि एक बच्ची की मां भी है. इस सच ने ऋषभ की जिंदगी में भूचाल ला दिया था. उस के बाद उस का रिया के प्रति विचार और व्यवहार बदलने लगा था.

रिया का भी अपना एक प्रोफेशनल करिअर था. उस ने मेकअप डिजाइन में डिप्लोमा कर रखा था. इस फील्ड में अपना करिअर बनाने के लिए लुलु माल के एक भव्य मेकअप सैलून खोलना चाहती थी, किंतु पैसे नहीं थे. उस ने पैसे के लिए ऋषभ पर दबाव बनाना शुरू किया. जबकि ऋषभ की आर्थिक स्थिति इस लायक बिलकुल नहीं थी.

एक रोज ऋषभ ने रिया को रात में बीएमडब्लू कार में एक अधेड़ व्यक्ति के साथ जाते देखा. देर रात नशे की हालत में वापस लौटने पर उस के बारे में पूछने पर सफाई देते हुए उस ने ताना दिया, ”चाहे जैसे भी हो, मुझे सैलून के लिए पैसे जुटाने हैं. तुम तो पैसे देते नहीं तो मुझे ही कुछ करना पड़ेगा. जो मैं तो करूंगी ही.’‘

इतना सुनते ही ऋषभ के तनबदन में आग लग गई. उस रोज तो ऋषभ ने जैसेतैसे कर खुद को संभाला, लेकिन 16 अगस्त की रात को तो हद ही हो गई.

रिया अपने एक दोस्त की पार्टी में गई हुई थी. साथ में ऋषभ भी था. पार्टी में रिया ने अपने दोस्तों के साथ छक कर शराब पी और जम कर डांस भी किया. यह देख कर ऋषभ बौखला गया. उस ने पार्टी में ही उसे समझाने की कोशिश की. दोस्तों के साथ अभद्रता और अश्लील हरकतों वाला डांस करने से मना किया. अपनी मर्यादा में रहते हुए पार्टी एंजौय करने की सलाह दी, जबकि रिया नशे में धुत थी.

वह ऋषभ को ही ताने देने लगी. उस से वहीं उलझ गई. यहां तक कह डाला कि वह उस की कोई गुलाम नहीं है, जो जब देखो तब उसे मानमर्यादा का पाठ पढ़ाता रहता है.

वह दोनों भारी मन से घर आ गए, लेकिन आते ही फिर उलझ गए. एकदूसरे पर तीखे आरोप लगाने लगे. गुस्से में ऋषभ भी बोला, ”मेरे साथ रहना है तो ढंग से रहो, वरना मुझे छोड़ कर चली जाओ.’‘

यह सुनते ही रिया का गुस्सा भी सातवें आसमान पर चढ़ गया था. वह बोली, ”चली जाऊं? क्यों चली जाऊं मैं…कई महीनों तक मेरे शरीर के साथ खेला और अब कहते हो चली जाओ, मेरा पीछा छोड़ दो. इस का खामियाजा तो तुम्हें भुगतना पड़ेगा. मैं कोर्ट जाऊंगी, तुम्हारे खिलाफ रेप का मुकदमा करूंगी. फिर सड़ते रहना जिंदगी भर जेल में.’‘

इस धमकी के साथ रिया ने तुरंत अपने एक परिचित वकील को भी फोन मिला दिया. रोती हुई बोलने लगी. ऋषभ की शिकायत करती हुई उस के खिलाफ तगड़ा केस बनाने को बोली.

यह सुन कर ऋषभ बुरी तरह से घबरा गया. उसे मालूम था कि एक बार शिकायत दर्ज हो गई तो उस की गिरफ्तारी तय है…और उस की जमानत भी नहीं होगी. उस रात वह सो भी नहीं पाया और सुबह होते ही सीधा अपने दोस्त अमनजीत के पास चला गया. उस से रिया के बारे में सारी बतों बता दीं.

अमनजीत ने ऋषभ सिंह को शांत रहने को कहा और रिया को समझाने के मकसद से उस के घर आ गया. लेकिन बात नहीं बनी, जबकि उस ने दोनों को काफी समझाने की कोशिश की. बात बिगड़ती देख अमनजीत वापस अपने घर आ गया.

उस के निकलते ही दोनों के बीच फिर तकरार शुरू हो गई. ऋषभ ने गुस्से में तमंचा निकाल लिया. वह काफी तैश में आ गया था. उस ने तड़ातड़ रिया पर गोलियां दाग दीं. उस के बाद फ्लैट में ताला लगा कर लुलु मौल चला गया.

ऋषभ से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया. वहां से उसे जेल भेज दिया गया. कथा लिखे जाने तक विवेचना जारी थी.

सुहागन से पहले विधवा बनी स्नेहा – भाग 3

राहुल ने अप्रत्यक्ष तौर पर अपने घर वालों को बता भी दिया था कि अमर यादव नाम का एक लड़का स्नेहा को बदनाम करने के एवज में उसे परेशान करता रहता है. घर वालों ने इस बात को हल्के में लिया और समझा दिया कि शादी हो जाने के बाद सब ठीक हो जाएगा. नाहक परेशान होने की जरूरत नहीं है. इस के बाद राहुल भी थोड़ा बेफिक्र हो गया था.

शादी के दिन जैसे जैसे नजदीक आ रहे थे, अमर को प्रेमिका स्नेहा से जुदाई के दिन साफ नजर आ रहे थे. यह सोच कर गुस्से से पागल हो जाता था कि उस के जीते जी कोई उस के प्यार को उड़ा ले जाए, ये कैसे हो सकता है. क्यों न रास्ते के कांटे को ही जड़ से ही उखाड़ दिया जाए. न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी.

जैसे ही उस के दिमाग में यह विचार आया, खुशी से उछल पड़ा. उस ने अपने दोस्तों को रायल गेस्टहाउस बुला लिया. यह गेस्टहाउस टिब्बा थाने के टिब्बा रोड पर स्थित था, गेस्टहाउस एक डीसीपी (पुलिस अधिकारी) का था, जो इन दिनों उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में तैनात है.

नौकर क्यों समझता था खुद को डीसीपी

अमर यादव मूलरूप से बिहार के दरभंगा जिले का रहने वाला था, लेकिन सालों से वह लुधियाना के शेषपुर मोहल्ले में किराए का मकान ले कर रहता था. उस के मांबाप घर रहते थे. उज्जवल भविष्य की कामना ले कर ही वह दरभंगा से लुधियाना चला था. पहले से वहां उस के कई परिचित रहते थे. उन्हीं के सहारे वह यहां रहने आया था.

देखने में तो वह एकदम दुबलापतला मरियल जैसा लगता था, लेकिन था वह अपराधी प्रवृत्ति वाला. बातबात पर हर किसी से झगड़ जाना उस की आदत थी और अपराधियों और नशे का कारोबार करने वालों से उस की खूब बनती थी.

जिस दिन से डीसीपी के गेस्टहाउस पर काम करना शुरू किया था, खुद को ही अमर डीसीपी समझ बैठा. दूसरों पर डीसीपी जैसा रौब झाड़ता था और इसी गेस्टहाउस के तले नशे का कारोबार भी करता था.

कुछ महीनों पहले भी यह गेस्टहाउस खासी चर्चा का विषय बना था. उस के दोस्तों में अभिषेक राय, अनिकेत ऊर्फ गोलू और मनोज खास थे. अमर जब भी कोई जुर्म करता था तो इन्हीं को अपना हमराज बनाता था. इन के मुंह बंद करने के लिए वह इन पर खर्च भी खूब करता था.

बहरहाल, राहुल को रास्ते से हटाने के लिए अमर ने अभिषेक राय, अनिकेत उर्फ गोलू और मनोज को 14 सितंबर, 2023 को रायल गेस्टहाउस बुलाया और चारों ने आपस में बैठ कर मीटिंग की कि राहुल की हत्या कैसे करनी है और फिर लाश को कैसे ठिकाने लगाना है.

सब कुछ तय हो जाने के बाद 15 सितंबर, 2023 को अमर ने बाजार से लोहे का दांत और रौड खरीद लाया और गेस्टहाउस के एक कमरे में छिपा दिए.

15 सितंबर, 2023 की शाम करीब 5 बजे अमर यादव ने राहुल को फोन किया और उसे मिलने के लिए रायल गेस्टहाउस बुलाया. इस पर राहुल ने कोई जवाब नहीं दिया और उस का फोन काट दिया था. इस के बाद उस ने 3 बार और उसे फोन कर के गेस्टहाउस बुलाया, लेकिन राहुल नहीं गया.

किस वजह से राहुल अपने दुश्मन के पास जाने को मजबूर हुआ

16 सितंबर की शाम को अमर यादव ने फिर से राहुल को फोन किया और बताया कि उस के पास स्नेहा के साथ आपत्तिजनक स्थिति का एक वीडियो है, जो उसे देना चाहता है. आ कर ले जा सकता है.

इस पर राहुल ने कहा, ”ठीक है, वह आज मिलने जरूर आएगा.’’

और फिर ड्यूटी से राहुल जल्दी छुट्टी ले कर घर पहुंच आया. ड्यूटी से निकलते हुए राहुल ने गुलशन को भी फोन कर दिया कि अमर ने फोन कर के बताया है कि स्नेहा की कोई खास वीडियो उस के पास है, आ कर ले जाए. मेरे दोस्त, वो वीडियो किसी तरह से हासिल करनी है तो तुम्हें मेरे साथ उस से मिलने टिब्बा रोड रायल गेस्टहाउस चलना होगा.

साढ़े 8 बजे गुलशन गुप्ता जब घर से अपनी बाइक ले कर निकला तो मम्मी को बता दिया था कि वह राहुल से मिलने उस के घर जा रहा है, थोड़ी देर बाद वह लौट आएगा. कौन जानता था इस के बाद वह कभी नहीं आएगा.थोड़ी देर बाद वह राहुल के सामने खड़ा था. दोनों ने चाय की चुस्की ली और अमर से मिलने टिब्बा रोड पहुंच गए.

सनद रहे, गुलशन ने अपनी बाइक राहुल के घर खड़ी कर दी थी और राहुल अपनी एक्टिवा ले कर गया था. आधे घंटे बाद राहुल और गुलशन रायल गेस्टहाउस के बाहर खड़े थे. उस ने अपनी एक्टिवा गेस्टहाउस के बाहर खड़ी कर दी थी.

”अमर…अमर…’’ की आवाज लगाते हुए राहुल गेस्टहाउस के अंदर दाखिल हुआ तो गुलशन भी उसी के पीछे हो लिया था. 2 मिनट बाद एक लड़का बाहर निकला और राहुल के सामने खड़ा हो गया. उसे अपनी बातों में उलझा लिया. तब तक वहां अभिषेक राय और मनोज भी पहुंच गए और स्नेहा को ले कर राहुल से भिड़ गए.

अभी यह सब हो ही रहा था कि तभी अचानक अमर यादव लोहे का दांत लिए बाहर निकला और राहुल की गरदन पर जोरदार तरीके से वार किया. वहां कटे वृक्ष के समान हवा में लहराते हुए धड़ाम से फर्श पर जा गिरा. उस के बाद अभिषेक उसे लोहे की रौड से मारता गया.

राहुल को देख कर अमर गुस्से से इतना पागल हो गया था कि लोहे के दांत उस के बाईं आंख में घुसेड़ कर आंख बाहर निकाल दी थी. राहुल मर चुका था. उस के सिर से खून बह रहा था. यह देख गुलशन सन्न रह गया और वहां से भागने लगा लेकिन चारों ने उसे घेर लिया और उसे भी मार डाला. अमर यादव उसे नहीं मारना चाहता था. चूंकि पूरी घटना गुलशन की आंखों के सामने घटी थी और हत्या का वह एकमात्र चश्मदीद गवाह था, इसलिए अमर और उस के साथियों ने उसे भी उसी लोहे के दांत से मौत के घाट उतार दिया था.

इस के बाद चारों ने मिल कर राहुल और गुलशन की लाश कंबल में लपेट दीं. राहुल की ही एक्टिवा पर दोनों की लाश बारीबारी से सेंट्रल जेल के ताजपुर रोड स्थित कक्का धौला बुड्ढा नाले में फेंक आए.

फिर गेस्टहाउस में फर्श पर फैले खून को पानी से धो कर सारे सबूत मिटा दिए और राहुल की एक्टिवा टिब्बा रोड कूड़ा डंप के पास खड़ी कर दी. स्विच औफ कर के उस के मोबाइल फोन को भी गाड़ी के बगल में गिरा दिया.

अमर वहीं गेस्टहाउस में ही रुका रहा जबकि अभिषेक राय, मनोज और अनिकेत उर्फ गोलू अपने घर शेषपुर निकल गए. घर जाते हुए तीनों ने गुलशन के मोबाइल को वर्धमान कालोनी में स्विच औफ कर के फेंक दिया था.

इश्क की जंग में पागल प्रेमी अमर यादव इस कदर हैवान बन चुका था कि उसे स्नेहा के अलावा कुछ नहीं दिख रहा था जबकि स्नेहा ने उस से अपना संबंध तोड़ लिया था. वह एक नई जिंदगी बसाने का हसीन ख्वाब देख रही थी, लेकिन सुहागन बनने से पहले ही विधवा बन गई.

खैर, कथा लिखे जाने तक पुलिस चारों आरोपियों अमर यादव, अभिषेक राय, अनिकेत उर्फ गोलू और मनोज को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी और हत्या में प्रयुक्त लोहे की दांत, रौड, 2 मोबाइल फोन बरामद कर लिए थे. पुलिस ने अपहरण की धारा को 302, 201, 120बी व 34 आईपीसी में तरमीम कर दिया.

लिवइन पार्टनर का यह कैसा लव – भाग 2

किस ने मारी थी रिया को गोली

थोड़ी देर बाद अमन ने बोझिल मन से दोनों से विदा ली और अपने घर चला गया. उस के जाते ही दोनों फिर उलझ गए. तूतूमैंमैं होने लगी. दोनों एकदूसरे पर आरोप मढऩे लगे कि उन के आपसी झगड़े के बीच अमन को क्यों लाया? इसी बात पर उन दोनों में काफी समय तब बहस होती रही.

वे चीखचीख कर बातें कर रहे थे. उन की आवाजें अपार्टमेंट के दूसरे फ्लैटों में भी जा रही थीं, लेकिन उन के पास कोई भी ऐसा नहीं था, जो उन्हें झगडऩे से रोक सके. उन को शांत कर सके या उन्हें समझाबुझा सके. पड़ोसियों के लिए तो उन के झगड़े आए दिन की बात हो चुकी थी.

कुछ देर बाद उसी फ्लैट से गोली चलने का आवाज आई और अचानक एकदम से शांति छा गई. अपार्टमेंट के लोग भी एकदम से चौंक गए थे. किसी ने अपने घरों की खिड़कियां खोल लीं तो कोई तुरंत बालकनी में आ गए. उन में से कुछ लोग भाग कर उस फ्लैट के दरवाजे पर भी आए, लेकिन वहां उन के पैर ठिठक गए, क्योंकि उन के फ्लैट नंबर 203 पर बाहर से ताला लगा हुआ था.

उन्हें यह समझ में नहीं आया कि थोड़ी देर पहले इस फ्लैट से आवाजें आ रही थीं तो बाहर ताला कैसे लगा है? अंदर गोली चलने की वारदात हुई. उस में कोई जख्मी हो सकता है या किसी की मौत भी हो सकती है? थोड़ी देर पहले तो वहां 3 लोग थे. उन्होंने तुरंत पुलिस को खबर कर दी. जबकि कुछ पड़ोसियों के पास रिया के मायके का मोबाइल नंबर था. उन्होंने तुरंत इस की सूचना उन्हें दे दी.

थोड़े समय में ही पुलिस की टीम पहुंच गई. उन में एसएचओ अतुल कुमार श्रीवास्तव, एसएसआई ज्ञानेंद्र कुमार, एसआई दीपक कुमार पांडेय, नरेंद्र कुमार कनौजिया, संतोष कुमार गौड़ और महिला सिपाही दीपा चौधरी थी.

एसएचओ अतुल कुमार के सामने फ्लैट का ताला तोड़ा गया. पुलिस टीम ड्राइंगरूम होती हुई बेडरूम में चली गई. रिया फर्श पर खून से लथपथ पड़ी थी. चारों ओर खून फैल चुका था. पुलिस की शुरुआती जांच में पता चल गया कि रिया की मौत हो चुकी है. उसे 2 गोलियां मारी गई थीं. एक माथे पर, जबकि दूसरी सीने पर.

ऋषभ क्यों बना प्रेमिका का कातिल

घटनास्थल का मुआयना करने के बाद इंसपेक्टर श्रीवास्तव ने इस की सूचना डीसीपी विनीत जायसवाल और एडीसीपी (दक्षिणी) शशांक सिंह को दे दी. वे फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्हें वहां 4 जिंदा कारतूस और 4 खोखे भी मिले. पुलिस ने रिया के कमरे की गहन खोजबीन की. इसी बीच लखनऊ सदर कैंट निवासी रिया के पापा शिवशक्ति गुप्ता भी पत्नी गीता गुप्ता के साथ वहां पहुंच गए.

उन्होंने पुलिस को बताया कि उन की बेटी रिया विभूतिखंड स्थित एक कंपनी में काम करती थी. वहीं उस की मुलाकात ऋषभ सिंह से हुई थी. वह उसी के साथ रहती थी. उस वक्त फ्लैट में कोई नहीं था. निश्चित तौर पर ऋषभ ही रिया की मौत का गुनहगार हो और उस की हत्या के बाद फरार हो गया हो.

पुलिस ने जरूरी काररवाई पूरी कर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. इसी के साथ 18 अगस्त, 2023 को भादंवि की धारा 302, आम्र्स एक्ट की धारा 3/25 का मामला दर्ज कर लिया गया.

मामले की विवेचना का कार्य इंसपेक्टर ने संभाल लिया. उन की पहली काररवाई ऋषभ को गिरफ्तार करने की थी. इस में पुलिस को जल्द सफलता मिल गई. वह लुलु मौल के पास पार्क में दबोच लिया गया.

उसे थाने ला कर पूछताछ की तो बगैर किसी विरोध या नाटकीयता के ऋषभ सिंह ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. इस का कारण उस ने रिया की बेवफाई बताया. इस मामले में ऋषभ के दोस्त अमनजीत का नाम भी शामिल हो गया था.

पूछताछ में उस ने रिया की हत्या की जो कहानी बताई, उस में चरित्रहीनता, लिवइन रिलेशन में रहते हुए जीवन को अपनी मरजी से जीने की जिज्ञासा भी उजागर हो गई. वह इस प्रकार से सामने आई—

क्यों बहके रिया के पैर

रिया लखनऊ कैंट के ओल्ड गोता बाजार स्थित मकान में रहने वाले शिवशक्ति गुप्ता की बेटी थी. गुप्ता का एक छोटा परिवार था. पत्नी के अलावा इकलौती संतान के रूप में रिया ही थी. गुप्ता बीमार रहते थे, जिस से परिवार की जिम्मेदारी पत्नी गीता पर आ गई थी.

मम्मी की देखरेख में रिया ने पढ़ाई की थी, लेकिन वह फैशनपरस्त थी. बिंदास किस्म का आचरण और चालचलन था. कोई भी उस की अदा पर मर मिटने को तत्पर रहता था. बोलचाल से ले कर चलनेफिरने तक से सैक्स अपील का एहसास करवा देती थी.

उस पर सोशल मीडिया का भी चस्का लग चुका था. फेसबुक पर दोस्ती करना, रील बनाना और फैंसी कपड़ों में इंस्टाग्राम पर फोटो और वीडियो पोस्ट करने में माहिर थी.

जबकि उस की मम्मी उसे समाज की मानमर्यादा को ध्यान में रख कर रहने की सलाह दिया करती थीं. मम्मी की हर हिदायत को वह बेवजह की रोकटोक और लड़की पर अंकुश लगाना ही समझती थी. उसे हमेशा लगता था कि मम्मी उस की आजादी में खलल डाल रही हैं.

धीरेधीरे मम्मी भी उस की आदतों से ऊब गई और उसे अपने हाल पर छोड़ दिया. अपनी जिद, पसंद और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते रिया काफी स्वच्छंद हो गई थी. खुलेपन की जिंदगी के मजे लेने को आतुर रहती थी. बहुत जल्द ही उसे एक चस्का नए लोगों से संपर्क बनाने और उन से दोस्ती करने का भी लग गया था.

वह कइयों से फोन पर मीठीमीठी बातें करने लगी थी. इसी बीच 2019 में उस की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी भी लग गई. कुछ दिनों में ही उस ने साथ काम करने वाले कई युवकों को अपना दीवाना बना लिया था. उन्हीं में पुष्पेंद्र सिंह बत्रा भी था. वह सदर कैंट का रहने वाला था.

रिया उस के साथ घुलमिल गई. पुष्पेंद्र उसे अपना दिल दे बैठा. रिया भी उसे बेहद प्यार करने लगी. बहुत जल्द ही उन्होंने शादी करने का फैसला भी कर लिया. उन की लवमैरिज को घर वालों ने भी स्वीकार लिया.

इसे संयोग ही कहें कि उन की शादी के कुछ दिनों बाद ही कोरोना का दौर आ गया और लौकडाउन का असर उन की जिंदगी पर भी पडऩे लगा. वैवाहिक जिंदगी की मिठास में कमी आने लगी. खासकर रिया की आजादी और मौजमस्ती की स्वच्छंद रहने की आदतों पर इस का असर पड़ गया.

सुहागन से पहले विधवा बनी स्नेहा – भाग 2

पुलिस ने बरामद कीं दोनों दोस्तों की लाशें

फिर देर किस बात की थी. पुलिस रायल गेस्टहाउस पहुंच गई, जो मौके से कुछ ही दूरी पर स्थित था. गेस्टहाउस पहुंच कर इंसपेक्टर सिंह अमर यादव को पूछते हुए सीधे अंदर घुस गए. मैनेजर वाले कमरे में एक 23 वर्षीय सांवले रंग का दुबलापतला गंदलुम कपड़े पहने युवक बैठा मिला. सामने पुलिस को देख उस को पसीना छूट गया.

”अमर यादव तुम हो?’’ गुर्राते हुए इंसपेक्टर सिंह बोले.

”हां जी सर, मैं ही अमर यादव हूं.’’ बेहद सम्मानित तरीके से उस ने जवाब दिया था, ”बात क्या है, क्यों मुझे खोज रहे हैं.’’

”अभी पता चल जाएगा बेटा. राहुल और गुलशन कहां हैं? तुम ने कहां छिपा कर दोनों को रखा है? सीधे तरीके से बता दे वरना…’’

”बताता हूं सर, बताता हूं. दोनों अब इस दुनिया में नहीं हैं,’’ बिना किसी डर के वह आगे कहता गया, ”मैं ने अपने साथियों के साथ मिल कर दोनों को मौत के घाट उतार दिया है और मैं करता भी क्या. मेरे पास इस के अलावा कोई और रास्ता भी नहीं बचा था.

”राहुल मेरे प्यार को मुझ से छीनने की कोशिश कर रहा था, इसलिए मैं ने अपने रास्ते का कांटा सदा के लिए हटा दिया. यहीं नहीं जो जो भी मेरे प्यार के रास्ते का रोड़ा बनेगा, मैं उसे ऐसे ही मिटाता रहूंगा.’’ और फिर अमर ने पूरी पूरी घटना विस्तार से उन्हें बता दी.

इंसपेक्टर कुलवीर सिंह ने अमर यादव को गिरफ्तार कर लिया और उसी की निशानदेही पर 3 और आरोपियों अभिषेक राय, अनिकेत उर्फ गोलू और नाबालिग मनोज को शेषपुर से गिरफ्तार कर लिया. चारों को हिरासत में ले कर पुलिस ताजपुर रोड स्थित सेंट्रल जेल के पास बहने वाले कक्का धौला बुड्ढा नाला (भामियां) पास पहुंची, जहां आरोपियों ने हत्या कर राहुल और गुलशन की लाश कंबल में लपेट कर बोरे में भर कर फेंकी थीं.

थोड़ी मशक्कत के बाद राहुल और गुलशन गुप्ता की लाशें बरामद कर ली थीं. इस के बाद दोहरे हत्याकांड की घटना पल भर में समूचे लुधियाना में फैल गई थी. घटना से जिले में सनसनी फैल गई थी. लोगबाग कानूनव्यवस्था पर सवाल उठाने लगे थे.

खैर, इस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस कमिश्नर मनदीप सिंह सिद्धू, डीसीपी (ग्रामीण) जसकिरनजीत सिंह तेजा, एडीसीपी (सिटी-2) सुहैल कासिम मीर और एसीपी (इंडस्ट्रियल एरिया-15) संदीप बधेरा मौके पर पहुंच गए थे.

खुशियां कैसे बदलीं मातम में

मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने लाशों का निरीक्षण किया. दोनों में से राहुल की लाश विकृत हो चुकी थी. हत्यारों ने धारदार हथियार से उस की गरदन पर हमला किया था. उसे इतनी बेरहमी से मारा था कि उस की बाईं आंख बाहर निकल गई थी.

मौके पर मौजूद मृतक राहुल के पापा ने दिल पर पत्थर रख कर बेटे की पहचान कर ली थी. 4 महीने बाद उस की शादी होने वाली थी, उस से पहले ही वह दुनिया से विदा हो गया. घर में शादी की खुशियां मातम में बदल गई थीं. घर वालों का रोरो कर हाल बुरा हुए जा रहा था.

बहरहाल, पुलिस ने दोनों लाशों का पंचनामा तैयार कर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए लुधियाना जिला अस्पताल भेज दिया और चारों आरोपियों को अदालत में पेश कर उन्हें जेल भेज दिया. आरोपियों से की गई कड़ी पूछताछ के बाद इस दोहरे हत्याकांड की जो कहानी पुलिस के सामने आई, वह मंगेतर के बीच मोहब्बत की जंग पर रची हुई थी.

25 वर्षीय राहुल सिंह मम्मीपापा का इकलौता था. वही मांबाप के आंखों का नूर था और उन के जीने का सहारा भी. वह जवान हो चुका था और एक प्राइवेट कंपनी में एचआर की नौकरी भी करता था. अच्छा खासा कमाता था.

चूंकि राहुल जवान भी हो चुका था और कमा भी रहा था, इसलिए पापा अशोक सिंह ने सोचा कि बेटे की शादी वादी हो जाए. घर में बहू आ जाएगी तो उस की मम्मी को भी सहारा हो जाएगा. यही सोच कर अशोक सिंह ने अपने जानपहचान और रिश्तेदारों के बीच में बेटे की शादी की बात चला दी थी कि कोई अच्छी और पढ़ीलिखी बहू मिले जो घरगृहस्थी संभाल सके.

जल्द ही राहुल के लिए कई रिश्ते आए. उन में से जमालपुर थाना क्षेत्र स्थित मुंडिया कलां के रहने वाले अजय सिंह की बेटी स्नेहा घर वालों को पसंद आ गई. खुद राहुल ने भी उसे पसंद किया था.

स्नेहा पढ़ीलिखी और सुंदर थी. 2 बहनों और एक भाई में वह सब से बड़ी थी. राहुल और स्नेहा की शादी पक्की हो गई और फरवरी 2023 में दोनों की मंगनी भी हो गई और शादी फरवरी 2024 में होने की बात पक्की हुई.

इंस्टाग्राम के किस फोटो को ले कर हुई कलह

अपनी शादी तय होने से राहुल बहुत खुश था. अपने दिल का हर राज अपने खास दोस्तों गुलशन और सूरज के बीच शेयर करता था. मंगनी के दिन राहुल ने स्नेहा को देखा तो अपनी सुधबुध खो दी थी. वह थी ही इतनी सुंदर. उस की सुंदरता पर वह फिदा था.

उस के बाद दोनों के बीच फोन पर अकसर दिल की बातें होती रहती थीं. वह अपने दिल की बात स्नेहा से करता और स्नेहा अपने दिल की बातें मंगेतर से करती. धीरेधीरे दोनों के बीच प्यार हो गया था और वे चाहते थे कि उन का मिलन जल्द से जल्द हो जाए.

लेकिन उन का मिलन होने में अभी 4 महीने बचे थे. जैसे तैसे वे अपने दिल पर काबू किए थे. वह जून-जुलाई, 2023 का महीना रहा होगा, जब राहुल के परिवार पर दुखों के बादल मंडराने लगे थे.

एक दिन की बात थी. इंस्टाग्राम पर गुलशन अपना अकाउंट देख रहा था. अचानक उस की एक नजर ठहर गई और 2 फोटो देख कर वह चौंक गया.फोटो में स्नेहा किसी अमर यादव के साथ गलबहियों में चिपकी पड़ी थी. फिर उस ने फोटो का स्क्रीनशौट ले कर सेव कर लिया और सूरज को दिखाया. फोटो देख कर वह हैरान था, ये तो राहुल की होने वाली पत्नी स्नेहा है. उस के पीठ पीछे क्या गुल खिलाया जा रहा है. दोनों ने राहुल से सारी बातें साफसाफ बता दीं.

फिर राहुल ने समझदारी का परिचय देते हुए इंस्टाग्राम पर स्नेहा का अकाउंट चैक किया तो बात सच साबित हो गई थी. इस के बाद उस ने स्नेहा से बात की.

स्नेहा अपनी ओर से सफाई देती हुई बोली, ”आप ने जिस फोटो को देखा था, वो उस का अतीत था. कभी अमर नाम के लड़के से वह प्यार करती थी, लेकिन शादी पक्की होने के बाद से उस ने उस से अपनी ओर से रिश्ता तोड़ लिया है. वह अब अमर से नहीं मिलती. पुरानी बातों को मुद्दा बना कर वह उसे हर समय परेशान करता रहता है.’’

पूर्व प्रेमी और मंगेतर के बीच बढ़ता गया विवाद

राहुल को अपनी मंगेतर स्नेहा की बातों पर पूरा विश्वास हो गया था कि वह जो कह रही है, सच कह रही है. उस के बाद राहुल ने अमर यादव को सावधान करते हुए पोस्ट लिखा कि स्नेहा उस की होने वाली पत्नी है. आने वाले साल 2024 में हमारी शादी होनी है. तुम उस का पीछा करना छोड़ दो. उसे बदनाम न करो वरना इस का परिणाम बुरा हो सकता है.

इस पर अमर यादव ने भी पलट कर जवाब दिया था, ”स्नेहा उस का प्यार है. उसे वह टूट कर प्यार करता है. तेरे कारण उस ने उस से बात करनी बंद कर दी है और दूरदूर रहती है. मुझ से इस की जुदाई, उस की तन्हाई जीने नहीं देती. मेरे और मेरे प्यार के बीच में जो भी रोड़ा बनने की कोशिश करेगा, उसे हमेशा हमेशा के लिए मिटा दूंगा और तू भी समझ ले, अभी वक्त है हम दोनों के बीच से हट जा, उसी में तेरी भलाई है. नहीं तो मैं किस हद तक चला जाऊंगा, मुझे खुद भी नहीं पता.’’

उस दिन के बाद राहुल और अमर यादव के बीच स्नेहा को ले कर वर्चस्व की टेढ़ी लकीर खिंच गई थी. बारबार राहुल इंस्टाग्राम पर फोन कर के स्नेहा से दूर रहने को धमकाता था. वहीं अमर भी स्नेहा से दूर हट जाने को धमकाता था.