जी.बी. रोड कोठे में खून – भाग 1

7 मार्च, 2023 को दोपहर 2 बज कर 10 मिनट पर पीसीआर द्वारा थाना कमला मार्किट को सूचना दी गई कि जी.बी. रोड (श्रद्धानंद माग) पर स्थित कोठा नंबर 52 में किसी ने ताबड़तोड़ गोलियां चला दी हैं, जिस में एक महिला और एक युवक घायल हो गए हैं. जल्दी घटनास्थल पर पहुंचें.

यह काल एएसआई मीनू बाला ने अटेंड की. उस ने तुरंत इसे एसआई नूर हसन खान को बता कर उचित निर्णय लेने के लिए कह दिया. अपनी रवानगी जी.बी. रोड के लिए दर्ज करने के बाद एसआई नूर हसन खान, हैडकांस्टेबल धर्मेंद्र को साथ ले कर जी.बी. रोड के लिए रवाना हो गए.

घटनास्थल ज्यादा दूर नहीं था. 15-20 मिनट में ही एसआई नूर हसन खान कोठा नंबर 52 पर पहुंच गए. यह रेड लाइट एरिया था, यहां जिस्म का बाजार लगता है. मनचले शौकीन लोग कामना की भूख शांत करने के लिए इस बाजार की सीढिय़ां नापते हैं. दिन में तमाशबीन कोठों के छज्जों पर जिस्म की नुमाइश करने वाली देहबालाओं को ललचाई नजरों से देख कर आहें भरते रहते हैं. जिन की जेब में नोटों की गरमी होती है, वह पसंद आने वाली देह बाला को बाहों में भरने के लिए कोठे की सीढिय़ां चढऩे में संकोच नहीं करते.

पहले रात को तो यहां पूरी रौनक होती थी, घुंघरुओं की खनक और तबलों की धमक से कोठे गूंजते रहते. मुजरे महफिलें सजतीं, जाम छलकते और नर्तकी अपने नृत्य व अदा से लोगों का दिल जीतने की कोशिश करती थी, लेकिन यहां के कोठों में मुजरा तो लगभग बंद ही हो चुका है. अब तो मुख्य धंधा जिस्मफरोशी का ही रह गया है.

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एसआई नूर हसन खान और हैडकांस्टेबल सीढिय़ां चढ़ कर ऊपर आए. दरवाजे के साथ वाले कमरे में खून बिखरा हुआ था, सीढिय़ों पर और सामने वाले कमरे में भी ताजा खून पड़ा था. जो लोग गोली लगने से घायल हुए थे, वे वहां नहीं थे.

पुलिस को ऊपर आया देख कर इस कोठे की संचालिका पार्वती उन के सामने आ गई.

“घायल कहां है?” नूर हसन खान ने कोठा संचालिका को ऊपर से नीचे तक देख कर पूछा.

“उन्हें पीसीआर वैन एलएनजेपी हौस्पीटल ले गई है. मेरी बेटी राधा की हालत बहुत खराब है साहब.” पार्वती रुआंसी आवाज में बोली, “मैं वहीं जा रही थी कि आप आ गए.”

“यहां क्या लफड़ा हुआ था? गोली किस ने चलाई?” खान ने पार्वती को घूरते हुए पूछा.

“वे 3 लडक़े थे साहब, शक्लसूरत से गंवार और बदमाश नजर आ रहे थे. उन्होंने राधा की डिमांड की तो बात 1500 रुपए में तय हो गई. फिर पता नहीं क्यों उन में से एक ने पिस्टल निकाल कर गोलियां चलानी शुरू कर दीं. गोली राधा और इरफान को लगी. दोनों नीचे गिरे तो मैं दौड़ी. तब तक वे तीनों पिस्टल लहराते हुए भाग निकले. कुछ लोगों ने उन का पीछा किया, लेकिन वे हाथ नहीं आए.”

“गोलियां चलीं, उस वक्त का कोई चश्मदीद यहां मौजूद है क्या?”

“जी हां.” पार्वती ने 2-3 नाम ले कर आवाज लगाई तो 2 व्यक्ति वहां आ गए. उन में से एक का चेहरा लंबूतरा और दागदार था. उस का रंग सांवला था. दूसरे के चेहरे पर दाढ़ीमूंछ नहीं आई थी. वह पहले वाले की अपेक्षा नाटा और गोरी रंगत वाला युवक था.

“शंकर, भूरे साहब तुम से कुछ पूछना चाहते हैं.” पार्वती ने उन दोनों से कहा फिर एसआई खान से बोली, “साहब, घटना के वक्त यही दोनों यहां मौजद थे.”

“तुम दोनों यही रहते हो?” खान ने पूछा.

“जी साहब,” उन्होंने सिर हिला कर एक साथ कहा.

“राधा और इरफान पर हमला करने की वजह क्या थी?”

“साहब, यह हम नहीं जानते. राधा के साथ उन लडक़ों का किस बात पर झगड़ा हुआ, हमें नहीं मालूम. राधा और इरफान ने उन के पास पिस्टल देख कर शोर मचाया था कि पुलिस को बुलाओ. उन की तेज आवाजें सुन कर हम दोनों दौड़ कर आए तो हम ने एक लडक़े के हाथ में पिस्टल देखा.

अपने को घिरा देख कर और पुलिस बुलाने की बात सुन कर उन में से एक ने चीख कर कहा था, ‘काके गोली चला.’ बस उस लडक़े ने जिस का नाम काका था, ताबड़तोड़ फायरिंग करनी शुरू कर दी.

“गोली राधा के सीने में लगी, दूसरी इरफान के कंधे में. वे दोनों नीचे गिरे तो तीनों भाग निकले. काका नाम का लडक़ा पिस्टल लहरा कर चीख रहा था, “पीछे मत आना वरना मैं भून कर रख दूंगा.” साहब वे तीनों भागते हुए अजमेरी गेट की तरफ निकल गए और भीड़ में गायब हो गए.”

“अगर वे पकड़ में आएं तो तुम दोनों उन्हें पहचान लोगे?”

“हां साहब.”

पुलिस अधिकारियों ने किया घटनास्थल का निरीक्षण

एसआई खान ने सब से पहले यहां की घटना से एसएचओ कमला मार्किट सत्येंद्र दलाल, डीसीपी संजय कुमार सैन और एडिशनल डीसीपी, पुलिस का स्पैशल स्टाफ, फोरैंसिक टीम को अवगत करा दिया. वे सब थोड़ी देर में ही घटनास्थल पर आ गए.

घटनास्थल का उन्होंने बारीकी से निरीक्षण किया. हत्या करने वाले अज्ञात लडक़े संख्या में 3 बताए गए थे, लेकिन वे कहां से आए थे, कौन थे, सब कुछ अंधेरे में था.

डीसीपी संजय कुमार सैन ने एसएचओ सत्येंद्र दलाल को कुछ निर्देश दिए. इंसपेक्टर सत्येंद्र दलाल ने एसआई खान को एलएनजेपी हौस्पीटल के लिए रवाना कर दिया और खुद वहां की काररवाई निपटाने में व्यस्त हो गए.

एसआई नूर हसन खान जब एलएनजेपी हौस्पीटल में पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि कोठे से यहां पहुंचाते वक्त राधा ने बीच रास्ते में ही दम तोड़ दिया था. कोठे पर दलाली करने वाला इमरान चौधरी बुरी तरह जख्मी था. डाक्टर उस के कंधे में धंसी गोली निकाल कर ड्रेसिंग कर चुके थे, लेकिन अभी वह बयान देने की स्थिति में नहीं था.

एसआई नूर हसन खान ने राधा की डैडबौडी की अच्छे से जांच की. उस के सीने में गोली लगी थी, अत्यधिक गहरा जख्म और खून काफी मात्रा में बह जाने से उस की मौत हो गई थी.

राधा देखने में सुंदर, युवा सैक्स वर्कर थी. उस की उम्र 30 वर्ष थी. अब उस के ऊपर हमला करने की धारा 302 में तब्दील हो गई थी. उस के हत्यारे को पकडऩा बहुत आवश्यक हो गया था.

15 दिन में सुनाया फैसला : मुजरिम को सजा ए मौत – भाग 1

इस धरती पर इंसान के रूप में ऐसे हैवान भी मौजूद हैं, जो अपनी काम पिपासा शांत करने के लिए किसी भी लडक़ी अथवा लडक़े को अपना शिकार बना लेते हैं. उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले का रहने वाला सैफ नाम के दरिंदे ने तो एक ऐसे मासूम पर नुकीले दांत गड़ा दिए, जो मात्र 9 साल का था. अभी उस ने न दुनिया को ठीक से देखा था, न समझा था. हंसतेखेलते उस मासूम के साथ सैफ ने कुकर्म ही नहीं किया, बल्कि उसे मौत की नींद भी सुला दिया था.

इस कृत्य और जघन्य हत्या के लिए सैफ को पोक्सो कोर्ट के कटघरे में खड़ा किया गया. यह पोक्सो कोर्ट मथुरा में थी और इस के जज थे राम किशोर यादव. उन की कोर्ट में 28 अप्रैल, 2023 को इस केस की चार्जशीट दाखिल की गई थी. 2 मई को अभियुक्त पर चार्ज लगाया गया.

अभियुक्त सैफ की ओर से बचाव पक्ष के रूप में बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव साहब सिंह देशकर पैरवी कर रहे थे और अभियोजन पक्ष का जिम्मा जिला शासकीय अधिवक्ता (स्पैशल) अलका उपमन्यु ने संभाला था. इस केस में 14 गवाह पेश किए गए. पहली गवाही 8 मई को हुई और अंतिम गवाह 18 मई को पेश हुआ.

आज 22 मई, 2023 का दिन था. उस दिन इस जघन्य मामले में फाइनल बहस होनी थी. सुबह से ही कोर्टरूम में मीडियाकर्मी, मथुरा बार एसोसिएशन के वकील, पुलिस के आला अधिकारी. मृतक बच्चे के घर वाले, पासपड़ोस के लोग और शहर के कई प्रतिष्ठित नागरिक जमा हो गए थे.

इस केस की शासन और प्रशासन की ओर से मौनिटरिंग हो रही थी. डीएम पुलकित खरे, एसएसपी शैलेष कुमार पांडे, संयुक्त निदेशक अभियोजन सहसेंद्र मिश्रा इस मामले पर पैनी नजर रख रहे थे. वह इस वक्त कोर्टरूम में मौजूद थे. वहीं जिला शासकीय अधिवक्ता शिवराम तरकर तथा सदर कोतवाल जसवीर सिंह (जिन्होंने इस केस की छानबीन की थी) कोर्ट रूम में उपस्थित थे.

कोर्ट रूम में बने कटघरे में इस जघन्य कांड का आरोपी सैफ खड़ा था. बीच में लंबी मेज के पास लेखाकार के साथ बचाव पक्ष के वकील साहब सिंह देशकर बैठे हुए थे. उन के सामने मेज की दूसरी ओर अभियोजन पक्ष की वकील अलका उपमन्यु बैठी हुई इस केस की फाइल को गहरी नजरों से देख रही थीं.

दिलचस्प रही वकीलों की जिरह

जैसे ही कोर्टरूम की घड़ी ने 10 बजाए, अपने चैंबर से निकल कर माननीय जज राम किशोर यादव अपनी कुरसी के पास आ गए. कोर्ट में मौजूद हर शख्स ने सम्मान में उठ कर उन का अभिवादन किया. अभिवादन स्वीकार कर के जज महोदय अपनी कुरसी पर बैठ गए.

“कोर्ट की काररवाई शुरू की जाए. बचाव पक्ष अपनी दलील पेश करें.” माननीय जज ने साहब सिंह की ओर देख कर कहा.

साहब सिंह देशकर अपने काले कोट को दुरुस्त करते हुए उठे और गंभीर आवाज में बोले, “मी लार्ड, मैं मानता हूं मेरे मुवक्किल सैफ ने जघन्य गुनाह किया है. उस के विरुद्ध पुलिस ने ठोस साक्ष्य भी एकत्र कर के कोर्ट में पेश किए हैं, लेकिन मैं यही कहूंगा कि जिस वक्त सैफ ने यह गुनाह किया, वह बहुत नशे में था. नशा करने वाला व्यक्ति नशे में यह भूल जाता है कि वह जो कर रहा है या करने जा रहा है, वह गलत है. मेरे मुवक्किल ने जो भी किया वह नशे में किया है, उसे इस का अफसोस भी है.”

“इस के अफसोस करने से क्या वह मासूम बच्चा जीवित हो कर वापस आ जाएगा, जो इस की हैवानियत की भेंट चढ़ गया.”

अभियोजन पक्ष की वकील अलका उपमन्यु तमक कर खड़ी होते हुए गुस्से से बोलीं, “मी लार्ड, इस व्यक्ति ने ऐसा गुनाह किया है, जो क्षमा करने योग्य नहीं है. ऐसे व्यक्ति को कठोर से कठोर दंड मिलना चाहिए.”

“नहीं मी लार्ड,” बचाव पक्ष के वकील देशकर विनती करते हुए बोले, “मेरा मुवक्किल शादीशुदा है इस के छोटेछोटे बच्चे हैं. यह अपने बूढ़े मांबाप का बोझ भी उठाता है. इस के जेल चले जाने से इस के परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ेगा.”

“यह सब कुछ गुनाह करने से पहले सोचना चाहिए,” अलका उपमन्यु व्यंग्य से बोलीं.

“मैं ने कहा न, यह उस समय गहरे नशे में था. नशे में ही इस से गुनाह हो गया है.”

“मी लार्ड, जिस मासूम बच्चे को इस नराधम ने मौत के घाट उतारा है, वह अपने मांबाप की इकलौती संतान था. उस के पिता उसे इस उम्मीद से पालपोस कर बड़ा कर रहे थे कि वह बड़ा हो कर उन के बुढ़ापे की लाठी बनेगा. इस ने उन की लाठी तोड़ दी. उन के बुढ़ापे का सहारा छीन लिया. इसे कठोर से कठोर दंड मिलना ही चाहिए.”

माननीय जज राम किशोर यादव ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद गंभीर स्वर में कहा, “यह सिद्ध हो गया है कि कटघरे में खड़े इस शख्स सैफ ने जघन्य गुनाह किया है. स्वयं इस के वकील मिस्टर देशकर अपने मुंह से कुबूल कर रहे हैं कि इस ने जघन्य अपराध किया है, लेकिन नशे में किया है.

“मिस्टर देशकर यह नशे में था, इस बात को पुलिस नहीं मानती. इसे गिरफ्तार किया गया, तब यह पूरी तरह होशोहवास में था और यह बात इस से भी सिद्ध होती है कि बच्चे के साथ कुकर्म करने के बाद इस का दिमाग सचेत था, तभी तो इस ने सोचा कि यदि बच्चे को जिंदा छोड़ा तो बच्चा इस की पहचान और नाम बता सकता है.

“इसी भय से इस ने बच्चे की गला घोंट कर हत्या कर दी. इसलिए नशे में अपराध करने वाली बात का कोई तर्क नहीं बनता. इस पर रहम नहीं किया जा सकता. मैं इसे दोषी मानता हूं. 26 मई, 2023 को इस पर आरोप तय होगा और सोमवार 29 मई को इसे सजा सुनाई जाएगी. कोर्ट तब तक के लिए स्थगित की जाती है.”

कोर्ट की काररवाई समाप्त कर के जज महोदय अपने चैंबर में चले गए. कोर्ट रूम में मौजूद लोग एकदूसरे से बातें करते हुए बाहर निकल गए.

मुजरिम को सजा ए मौत

26 मई, 2023 को एक बार फिर से पोक्सो कोर्ट में जज राम किशोर यादव की अदालत लगी. 22 मई को कोर्ट रूम में जितनी भीड़ थी, उस से कहीं अधिक भीड़ कोर्ट रूम में उस दिन आई. जज महोदय ने ठीक 10 बजे अपनी कुरसी पर आ कर बैठे तो सभी की निगाहें उन की ओर हो गईं कि पता नहीं जज साहब क्या आरोप तय करेंगे.

उन्होंने अभियुक्त सैफ पर आरोप तय करने के लिए कहना शुरू किया, “सैफ को बच्चे के साथ कुकर्म कर के तार से उस का गला घोंट कर मार देने का आरोप सिद्ध हो गया है. इसे भारतीय दंड विधान की धारा 302 में आजीवन कारावास और 50 हजार रुपयों का जुरमाना लगाया जाता है.

धारा 377 भादंवि में 10 वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार रुपए का आर्थिक दंड लगाया जाता है. धारा 363 में 5 वर्ष सश्रम दंड और 20 हजार का आर्थिक जुरमाना. धारा 201 में 7 वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार रुपए का जुरमाना लगाया जाता है. वसूली का 80 प्रतिशत हिस्सा प्रतिकर के रूप में मृतक के मांबाप को दिया जाएगा.”

इस के बाद कोर्ट की अगली तारीख सोमवार तय कर के कोर्ट स्थगित कर दी गई.

29 मई, 2023 को पोक्सो कोर्ट के जज राम किशोर यादव ने सैफ को सभी धाराओं में दोषी करार देते हुए कहा, “मासूम के साथ कुकर्म और उस की हत्या का दोषी मोहम्मद सैफ धारा 6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 (यथा संशोधित 2019) के अंतर्गत मृत्युदंड से दंडित किया जाता है. सैफ को फांसी के फंदे पर तब तक लटकाया जाए, जब तक इस के प्राण न निकल जाएं.” जज महोदय ने सजा सुनाने के बाद अपने पैन की निब तोड़ दी और उठ कर अपने चैंबर में चले गए.

पोक्सो कोर्ट ने त्वरित न्याय का उदाहरण पेश कर के मात्र 15 दिन में अपना फैसला सुनाया. इस फैसले की सभी ने भूरिभूरि प्रशंसा की. मृतक बच्चे की मां नाजिस और पिता अफजल फूटफूट कर रोने लगे. उन का कहना था कि आज हमारे बेटे अरहान को न्याय मिला है. त्वरित काररवाई से हम संतुष्ट हैं. आज न्यायाधीश ने सच्चा न्याय किया है. उन के रुदन को देख कर एडवोकेट अलका उपमन्यु की भी आंखें भर आईं. वह मुंह घुमा कर रूमाल से अपने आंसू पोंछने लगीं.

शराफत का इनाम – भाग 5

हारुन ने अपने आप को संभाल कर ढिठाई से कहा, ‘‘ओके, अब तुम बेसहारा नहीं रहोगी. तुम्हारे पास करीमभाई जैसा अमीर शौहर है.’’

‘‘हां, वह बहुत दौलतमंद है. लेकिन उन की दी हुई सब से कीमती चीज यह है.’’ रूमाना ने पेट पर हाथ रख कर कहा. हारुन को गहरा झटका लगा. उस ने हकलाते हुए पूछा, ‘‘तु…तुम सचमुच मां…?’’

‘‘हां, यह सच है. मैं मां बनने वाली हूं. इसी सच ने मुझे बदल दिया है. मुझे अपनी परवाह नहीं थी, लेकिन  बच्चे के लिए तो बाप का साया चाहिए. इसी की वजह से मैं करीमभाई जैसे मासूम और शरीफ आदमी को  धोखा देने से बच जाऊंगी.’’

‘‘अच्छा, वह मासूम आदमी है, तभी तुम्हारे जाल में फंस गया है.’’ हारुन ने व्यंग किया.

‘‘हां, वह मासूम है, तभी उस ने आंखें बंद कर के मुझ पर यकीन किया.’’ रूमाना ने पूरे यकीन से कहा.

‘‘अगर उसे मालूम हो गया कि तुम अतीत में क्या करती रही हो, कैसे लोगों को उल्लू बनाती रही हो? क्या तब भी वह तुम पर यकीन करेगा?’’ हारुन ने पूछा.

‘‘कर भी सकता है और नहीं भी कर सकता. मगर इस से तुम्हें कोई फायदा नहीं होगा. आज से हमारे रास्ते अलग हैं. तुम साइन करो और अंगूठे का निशान लगाओ.’’ रूमाना ने पेन और इंकपैड उस के सामने रख कर कहा.

हारुन ने मुसकराते हुए पूछा, ‘‘क्या मैं इस के लिए मजबूर हूं?’’

‘‘हां, अगर तुम्हारा इशारा रकम की ओर है तो वह मौजूद है. लेकिन इस से पहले तुम्हें मुझे बाकायदा तलाक देना होगा.’’

‘‘कहां है रकम?’’ इस बार हारुन का अंदाज बदल गया.

‘‘साइन करो, निशान लगाओ. मैं तुम्हें रकम दे कर जाऊंगी.’’

रुन कुछ देर सोचता रहा. अचानक उस ने पेन उठाया और सभी जगहों पर साइन कर दिए. उस के द अंगूठे का निशान लगा कर पेपर्स रूमाना की ओर बढ़ा दिए.

गौर से सारे पेपर्स चैक कर के रूमाना खड़ी हो कर बोली, ‘‘आओ मेरे साथ.’’

रूमाना उसे बैंक में ले गई और मैनेजर से सेफ से बैग निकलवाया. उसी ने वह रकम का बैग सेफ में रखवाया था. मैनेजर उसे जानता था. उस ने बैग ले कर हारुन को दे दिया. हारुन ने बैग मेज पर खोल कर देखा और तसल्ली हो कर उसे बंद कर दिया.

‘‘इस का मतलब यह हमारी आखिरी मुलाकात है?’’

‘‘बिलकुल आखिरी. तुम्हारे लिए बेहतर यही होगा कि अब तुम इस शहर में नजर न आओ.’’  रूमाना ने कहा तो हारुन मुसकराया, ‘‘अभी तो मैं जा रहा हूं, लेकिन मुझे यहां वापस आने से कोई नहीं रोक सकता.’’

उस के जाने के बाद रूमाना घर के लिए रवाना हो गई. उस ने जानबूझ कर हारुन को डराया था कि वह करीमभाई से दूर रहे. इसीलिए वह खुद रकम देने आई थी. रूमाना को सचमुच करीमभाई से मोहब्बत हो गई थी, इसलिए अब वह उन्हीं की बीवी बन कर रहना चाहती थी.

रूमाना घर पहुंची तो करीमभाई ने उसे बांहों में भर लिया. रूमाना ने सोचा, ‘‘अब यही मेरी दुनिया और जिंदगी है.’’

करीमभाई बहुत खुश थे. उन्हें 2 करोड़ रुपए का जरा भी गम नहीं था, क्योंकि अब रूमाना को उन से कोई नहीं छीन सकता था. सुबह जब आंख खुली तो बराबर लेटी रूमाना को देख कर उन्हें उस पर बहुत प्यार आया. उस का सोया हुस्न गजब ढा रहा था.

सुबह के 8 बज रहे थे. करीमभाई को मालूम था कि दुबई के लिए अभी एक फ्लाइट उड़ने वाली है. इसी फ्लाइट में जा रहे हारुन के बैग में एयरपोर्ट पर उन की पहचान का एक औफिसर तलाशी के दौरान एक छोटा सा पैकेट रख कर उस के सामान को क्लीयर कर देगा. दुबई पहुंचने पर उस का सामान चैक होगा तो उस में से हेरोइन निकलेगी.

करीमभाई घर में सीधेसादे थे, लेकिन जब वह घर से निकलते थे तो बहुत स्मार्ट और चालाक हो जाते थे. रूमाना से शादी के बाद उन्होंने उस के बारे में पूरी छानबीन कर ली थी और वह उस के बारे में सब कुछ जान गए थे. मगर उन्होंने रूमाना को न कुछ बताया था और न व्यवहार में फर्क आने दिया था. वह उसी तरह उसे प्यार करते रहे.

वह देखना चाहते थे कि आगे क्या होता है. वह रूमाना से मोहब्बत करने लगे थे, इसलिए बिना किसी तफ्तीश के उस से शादी कर ली थी. उस के बारे में पता करने का खयाल तो उन्हें बाद में आया था. अगर रूमाना धोखा देती या बेवफाई करती तो हेरोइन की स्मगलिंग में हारुन के साथ वह भी पकड़ी जाती. अच्छा हुआ कि उस ने उन के साथ रहने का फैसला कर लिया था.

रूमाना के इस फैसले के बदले उन्होंने उस के अतीत के सारे गुनाह माफ कर दिए थे. बाथरूम की तरफ जाते हुए वह सोच रहे थे कि अतीत को भुला कर नई जिंदगी बहुत अच्छी गुजरेगी.

करीमभाई को मालूम था कि हारुन बहुत कमीना और चालबाज आदमी है. उस से हमेशा के लिए छुटकारा पाने का सब से बढि़या तरीका यही था कि उसे इस तरह फंसाया जाए कि उस के लिए निकलना मुश्किल हो जाए. अगर रूमाना भी धोखा देती तो वह भी सजा भुगतती. करीमभाई को भी उन की शराफत का इनाम मिला कि रूमाना को उन से मोहब्बत हो गई.

गोवा की खौफनाक मुलाकात

शराफत का इनाम – भाग 4

करीमभाई ने जैसे ही फोन काटा. संयोग से उसी वक्त हारुन का फोन आ गया. उस ने कहा, ‘‘करीमभाई, तुम मेरे ही फोन का इंतजार कर रहे थे न?’’

‘‘काम की बात करो.’’ करीमभाई ने सख्ती से कहा.

‘‘बताइए, आप ने क्या फैसला किया?’’

‘‘कैसा फैसला?’’

‘‘यही कि आप रूमाना को वापस कर रहे हैं या नहीं?’’

‘‘यह अब मुमकिन नहीं है. वह मेरे बच्चे की मां बनने वाली है.’’ करीमभाई ने कहा तो हारुन हंसा, ‘‘तब तो मेरा मामला और भी मजबूत हो गया. अभी तक तो आप दोनों मुकर सकते थे, लेकिन अब बच्चे की वजह से इनकार नहीं कर सकते.’’

‘‘हारुन, तुम मेरे औफिस आ जाओ. हम मिलबैठ कर मसले का हल निकाल लेंगे. अदालत जाने से बात नहीं बनेगी. मैं तो बदनाम हो ही जाऊंगा, लेकिन तुम भी मुश्किल में पड़ जाओगे. तुम्हारा मकसद भी पूरा नहीं होगा.’’ करीमभाई ने नरमी से कहा.

‘‘आप दोनों सिर्फ बदनाम ही नहीं होंगे, आप दोनों पर मुकदमा भी चलेगा, शादीशुदा औरत से शादी करने का.’’

‘‘यह बात तो तुम भूल जाओ. तुम झूठ बोल सकते हो. मेरे पास दौलत है, मैं बड़े से बड़ा गवाह खड़ा कर सकता हूं. कई झूठे गवाह गवाही को तैयार हो जाएंगे. मैं साबित कर दूंगा कि तुम ने रूमाना को तलाक दे दिया है.’’

‘‘मि. करीम, यह इतना आसान भी नहीं है. दौलत मेरे पास भी है. मैं भी बड़े से बड़ा वकील कर सकता हूं, जो तुम्हारे गवाहों की धज्जियां उड़ा देगा.’’ उस ने सपाट लहजे में कहा.

‘‘इस तरह यह मामला बरसों चलेगा.’’

‘‘यही तो मैं चाहता हूं. अगर रूमाना मुझे नहीं मिलती है तो तुम भी सुकून से नहीं बैठ सकते. यह मीडिया का दौर है, हर चैनल पर मामला उछलेगा.’’

करीमभाई सोच में पड़ गए. अगर ऐसा हुआ तो उन की साख और इज्जत का क्या होगा? उन्होंने धीमे से कहा, ‘‘तुम रूमाना की वापसी के अलावा कोई हल सोचो. जो रकम तुम कहो, मैं देने को तैयार हूं. तुम अपनी डिमांड बताओ, मैं पूरी करूंगा.’’

हारुन कुछ देर सोचता रहा. उस के बाद बोला, ‘‘2 करोड़ रुपए. अगर तुम 2 करोड़ रुपए दे दो तो मैं पीछे हट जाऊंगा.’’

‘‘यह तो बहुत बड़ी रकम है.’’

‘‘लेकिन आप की आमदनी के सामने कुछ भी नहीं है. 2-3 महीने में फिर कमा लोगे.’’

करीमभाई ने सोचते हुए कहा, ‘‘ठीक है, मैं 2 करोड़ रुपए दे दूंगा, लेकिन ऐसे नहीं. पेपर्स मैं खुद तैयार करूंगा. तुम उन पर 2 गवाहों के सामने साइन कर के तलाक दोगे. यह सारा काम मेरे औफिस में होगा.’’

‘‘नहीं, मैं सामने नहीं आऊंगा. तुम रकम और पेपर्स ले कर रूमाना को भेजोगे.’’

‘‘वह नहीं जाएगी.’’ करीमभाई ने कहा.

‘‘अगर वह नहीं आएगी तो कोई डील नहीं होगी.’’ हारुन ने सख्ती से कहा.

‘‘ठीक है, चली जाएगी वह. आगे बोलो.’’

‘‘रकम और पेपर्स ले कर रूमाना आएगी. रकम डौलर्स में होगी और वह उस बैंक में आएगी, जहां मैं बुलाऊंगा. मैं बैंक मैनेजर के सामने साइन करूंगा. वह मेरे साइन की तस्दीक करेगा, उस के बाद रूमाना पैसे मेरे एकाउंट में डाल देगी. मैं नंबर उसी वक्त बताऊंगा.’’

करीमभाई उस की बात सुन कर चिंता में पड़ गए . उन्होंने कहा, ‘‘बैंक मैनेजर तुम्हारा गवाह है तो बाद   में वह तुम्हारा फेवर करेगा.’’

‘‘नहीं, वह सिर्फ साइन सर्टिफाई करेगा. वह हमारा आदमी नहीं, बैंक का मुलाजिम है.’’ हारुन ने कहा.

‘‘ठीक है, लेकिन रूमाना के साथ मैं आऊंगा.’’ करीमभाई ने कहा.

‘‘नहीं, वह अकेली आएगी. कल मैं इसी समय फोन करूंगा. अगर तुम मेरी शर्तें मानते हो तो ठीक है, नहीं तो मामला अदालत में जाएगा.’’ हारुन ने अपनी बात कह कर फोन काट दिया.

हारुन ने बड़ी चालाकी से पूरा प्लान बनाया था. वह पहले ही सोच चुका था कि उसे कैसे और क्या करना है. जैसे ही करीमभाई 2 करोड़ रुपए देने को राजी हुए, उस ने पूरा प्लान बता दिया. सारा काम बैंक में होना था. इस के बावजूद हारुन को भरोसा नहीं था. करीमभाई बेदिली से औफिस का काम करने लगे. उन का सुकून जैसे खत्म हो गया था. उन्होंने संक्षेप में रूमाना को हारुन की बात बता दी थीं.

करीमभाई घर पहुंचे तो रूमाना बेचैनी से इंतजार कर रही थी. उन्होंने सारी बात बताई. 2 करोड़ की बात सुन कर उस ने कहा, ‘‘मुझे पता था कि वह बहुत लालची आदमी है. मैं ने अब तक शादी नहीं की थी तो चुप था. शादी होते ही खुल कर सामने आ गया.’’

करीमभाई ने कहा, ‘‘मेरे लिए परेशानी यह है कि उस ने तुम्हें अकेली बुलाया है. पर मैं साथ चलूंगा, जो होगा देखा जाएगा.’’

रूमाना ने प्यार से उस के सीने पर सिर रख कर कहा, ‘‘आप परेशान न हों. मुझे कोई खतरा नहीं है. सारा काम बैंक में होगा, मैं सब संभाल लूंगी.’’

करीमभाई का दिल तो नहीं मान रहा था, लेकिन रूमाना ने अकेली जाने की बात उन से मनवा ली कि वह जा कर उस से तलाक के पेपर्स पर साइन करवा लाएगी और रकम दे देगी.

अगले दिन हारुन का फोन आया तो उन्होंने कहा कि वह तैयार हैं. 2 करोड़ रुपए डौलर में तैयार हैं. हारुन ने कहा, ‘‘कल सुबह रूमाना रुपए ले कर कार से बैंक पहुंचे. किस बैंक में आना है, यह कल बताऊंगा.’’

अगले दिन रूमाना और हारुन किसी बैंक में नहीं, एक शानदार रेस्टोरेंट में कोने की मेज पर बैठे थे. सुबह का वक्त था, लोग बहुत कम थे. हारुन ने पूछा, ‘‘रकम कहां है?’’

हारुन ने यह बात इसलिए पूछी थी, क्योंकि रूमाना के पास कोई बैग नहीं दिख रहा था. रूमाना ने तलाक के पेपर्स हारुन के सामने रखते हुए कहा, ‘‘ये रहे तलाक के पेपर्स, जो करीमभाई ने खासतौर से बैक डेट में तैयार कराए हैं.’’

हारुन ने हैरानी से कहा, ‘‘क्या तुम सचमुच तलाक..?’’

‘‘हां, तुम मुझे सच में तलाक दोगे. वैसे तुम मुझे पहले भी जबानी तलाक दे चुके हो.’’

‘‘वह तो मैं ने तुम्हारी तसल्ली के लिए दिया था. हम दोबारा शादी कर सकते हैं.’’ हारुन ने कहा.

‘‘मैं अब ऐसा नहीं चाहती.’’ रूमाना ने कहा.

हारुन ने व्यंग से कहा, ‘‘क्यों, इसलिए कि करीमभाई अरबपति है. वह आराम से करोड़ों किसी के मुंह पर मार सकता है.’’

‘‘नहीं, इसलिए कि कल दुबई जाने वाली फ्लाइट में तुम्हारी अकेले की सीट बुक है.’’ रूमाना ने तीखे लहजे में कहा.

रूमाना की बात सुन कर हारुन का चेहरा उतर गया, ‘‘तुम्हें कैसे पता चला?’’

‘‘अब यह सब पता करना कोई मुश्किल काम नहीं है. मुझे पहले से ही पता था कि यह आखिरी काम होगा और उस के बाद तुम पैसे ले कर चुपके से खिसक जाओगे. सारी रकम पहले से ही तुम्हारे पास थी. इसलिए अब मैं यह काम नहीं करना चाहती थी. तुम मुझे तनहा और बेसहारा छोड़ कर भाग जाने वाले थे न, था न तुम्हारा यही प्लान?’’ रूमाना ने कहा.

समस्या समाधान के नाम पर ठगी

42 वर्षीय इंदरजीत कौर अकसर बीमार रहती थी. तमाम डाक्टरों से उस का इलाज चला, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ. उस के पिता हरवंश सिंह एक सरकारी मुलाजिम थे. बेटी को ले कर वह बड़ा परेशान रहते थे. इंदरजीत कौर के अलावा उन के 2 बेटे भी थे.

हरवंश सिंह दक्षिणी दिल्ली के नेहरूनगर में परिवार के साथ रहते थे. छोटा परिवार होने के बावजूद वह हमेशा परेशान रहते थे. उन की यह परेशानी बेटी इंदरजीत कौर को ले कर थी. अब तक शादी के बाद उसे ससुराल में होना चाहिए था, लेकिन बीमारी की वजह से उस की शादी नहीं हो पाई थी. इस के अलावा दूसरी परेशानी बड़े बेटे को ले कर थी, जो शादी के 8 सालों बाद भी बाप नहीं बन पाया था. तीसरी परेशानी छोटे बेटे को ले कर थी, जो अभी तक बेरोजगार था.

इंदरजीत कौर पिता को अकसर समझाती रहती थी कि वह चिंता न करें, सब ठीक हो जाएगा. लेकिन वह ङ्क्षचता से उबर नहीं पा रहे थे. परिवार की जिम्मेदारी एक तरह से इंदरजीत ही संभाले थी. हरवंश सिंह सेवानिवृत्त हुए तो फंड के उन्हें जो 15 लाख रुपए मिले, उन में से 12 लाख रुपए उन्होंने इंद्रजीत के नाम जमा करा दिए थे. इस पर बेटों ने कोई ऐतराज नहीं किया था.

रिटायर होने के कुछ ही महीने बाद हरवंश सिंह की मौत हो गई थी. उन के मरने के 4 महीने बाद ही उन की पत्नी की भी मौत हो गई. 4 महीने में ही मांबाप दोनों की मौत हो जाने से इंदरजीत को गहरा सदमा लगा था. उन के मरने के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उसी पर आ पड़ी थी.

हरवंश सिंह ने अपना एक फ्लैट कुसुमा को किराए पर दे रखा था. उन के मरने के बाद इंदरजीत ने वह फ्लैट खाली कराना चाहा तो उस ने फ्लैट खाली करने से साफ मना कर दिया, जिस का मुकदमा रोहिणी कोर्ट में चल रहा है.

इंदरजीत शारीरिक रूप से तो परेशान थी ही, मानसिक तौर पर भी परेशान रहने लगी थी. उस के छोटे भाई की उम्र 36 साल हो चुकी थी, उस की अभी तक न तो नौकरी लगी थी और न ही शादी हुई थी. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि इन परेशानियों से कैसे निजात पाया जाए.

6 सितंबर को इंदरजीत के मोबाइल फोन पर एक एसएमएस आया, जिस में लिखा था, ‘जानिए कैसे होगा आप की समस्या का समाधान? नौकरी, व्यापार में घाटा, शादी, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्यार में असफलता, शौतन से छुटकारा, मुठकरनी आदि समस्याओं के समाधान की 100 प्रतिशत गारंटी.’

इंसान तमाम तरह की परेशानियों से घिरा हो और कोशिश करने के बावजूद उस की मुश्किलें कम न हो रही हों तो इस तरह के मैसेज में उसे समस्याओं का हल दिखाई देने लगेगा. मैसेज के अंत में एक फोन नंबर भी दिया था. मैसेज पढऩे के बाद इंदरजीत ने सोचा कि क्यों न वह एक बार उस फोन नंबर पर बात कर के देखे. शायद यहां उस की समस्याएं हल ही हो जाएं. इसी उम्मीद में इंदरजीत ने अपने फोन से मैसेज में दिए नंबर 012048823333 पर फोन किया.

दूसरी ओर से फोन रिसीव किया गया तो उस ने अपनी सारी समस्याओं के बारे में विस्तार से बता दिया. उधर से बाबा त्यागी, जिस ने फोन उठाया था, भरोसा दिया कि उस की समस्या का समाधान तो हो जाएगा, लेकिन वह एक घंटे बाद दोबारा करे. बाबा त्यागी ने दोबारा बात करने के लिए दूसरा फोन नंबर दे दिया था.

इंदरजीत कौर ने एक घंटे बाद बाबा द्वारा दिए नंबर पर फोन किया तो उधर से बाबा त्यागी ने कहा, “बच्चा, हम ने अपनी गद्दी पर बैठ कर अपने ईष्ट से बात कर ली है, पता चला है कि तुम परेशानियों से घिरी पड़ी हो.”

“हां बाबा, आप बिलकुल सही कह रहे हैं.” इंदरजीत ने कहा.

“तुम्हारे ऊपर दुष्ट प्रेतात्माओं के साथ एक भयानक जिन्न कब्जा जमाए है, इसी वजह से तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं रहती. बच्चा अगर तुम ने इन से छुटकारा पाने का कोई उपाय नहीं किया तो तुम्हारे घर में जल्दी ही 3 मौतें और हो सकती हैं.” तांत्रिक ने कहा.

“मौतेंऽऽ,” इंदरजीत कौर ने घबरा कर पूछा, “किसकिस की?”

“तुम्हारे बड़े भाईभाभी और छोटे भाई की,” बाबा ने कहा, “अगर तुम इस कहर से बचना चाहती हो तो तुम्हें तुरंत पूजा करवानी होगी.”

“पूजा में कितना खर्च आएगा बाबा?”

“यही कोई 80-90 हजार रुपए.”

घर की परेशानियों से छुटकारा के लिए इंदरजीत तैयार हो गई. उस ने कहा, “ठीक है बाबा, मैं पूजा कराने को तैयार हूं. आप तैयारी कीजिए. बताइए, पैसे ले कर कहां आना है?”

“तुम्हें मेरे पास आने की कोई जरूरत नहीं है. मैं तुम्हें आईसीआईसीआई बैंक का एक एकाउंट नंबर बता रहा हूं. तुम उसी में पैसे जमा कर के मुझे फोन कर दो. इस के बाद मैं पूजा शुरू कर दूंगा.” कह कर तांत्रिक ने आईसीआईसीआई बैंक का एकाउंट नंबर मैसेज कर दिया.

अगले दिन यानी 7 सितंबर को इंदरजीत कौर ने आईसीआईसीआई बैंक के एकाउंट में 80 हजार रुपए जमा करा कर तांत्रिक को फोन कर दिया. तांत्रिक ने बताया था कि पूजा श्मशान में होगी और पूरे 3 दिनों तक चलेगी.

पैसे जमा कराए एक महीने से ज्यादा हो गया, लेकिन इंदरजीत कौर को कोई फायदा नजर नहीं आया. उस ने बाबा को फोन किया तो फोन बाबा के बजाय उन के किसी चेले ने उठाया. उस का नाम सुनील कुमार था. उस ने कहा, “अभी तो बाबा पूजा करने उज्जैन गए हैं, वहां से एक महीने बाद लौटेंगे.”

इंदरजीत कौर ने 2 बार फोन किया तो दोनों बार फोन सुनील ने ही रिसीव किया. उस ने दोनों बार वही बताया. इस के बाद उस ने जब भी फोन किया, फोन सुनील ने ही रिसीव किया. हर बार उस ने वही बहाना बना दिया.

आखिर एक दिन बाबा ने फोन रिसीव किया. उस ने कहा, “कहो बच्चा, कैसे हो?”

“बाबा, मैं जैसी पहले थी, वैसी ही अभी भी हूं. मुझे कोई फर्क नजर नहीं आया.” इंदरजीत ने कहा.

“मैं तुम्हें फोन करने वाला था,” बाबा ने कहा, “मुझे लगा था कि दुष्ट आत्माएं काबू में आ गई होंगी, लेकिन वे इतनी दुष्ट हैं कि उन्हें काबू करने के लिए हमें बड़ी पूजा करनी पड़ेगी. अगर यह पूजा न की गई तो तुम्हारे यहां होने वाली मौतों को रोका नहीं जा सकता.”

इंदरजीत कौर बुरी तरह घबरा गई. वह अपने घर को उजड़ता नहीं देखना चाहती थी, इसलिए उस ने पूछा, “बाबा, बड़ी पूजा में कितना खर्च आएगा?”

“यही कोई एक लाख 30 हजार रुपए.” बाबा ने कहा.

इंदरजीत कौर ने अगले दिन अपने भारतीय स्टेट बैंक के खाते से एक लाख 30 हजार रुपए निकाल कर श्री शिवसेना समिति धार्मिक संस्थान के खाते में जमा करा दिए.

एक सप्ताह बीत गया, लेकिन इंदरजीत कौर की एक भी समस्या का समाधान नहीं हुआ. उस ने बाबा को फोन किया तो फोन सुनील ने रिसीव किया. उस ने बताया कि बाबा अभी श्मशान में शव साधना कर रहे हैं.

एक दिन बाद बाबा त्यागी ने खुद इंदरजीत कौर को फोन कर के कहा, “मैं ने जो शव साधना की है, उस से दुष्ट आत्माएं तो हमारी गिरफ्त में आ गई हैं, लेकिन वह जिन्न अभी काबू में नहीं आया है. उस के लिए हमें एक विशेष तरह का अनुष्ठान करना होगा, जिस के लिए कामाख्या मंदिर से गुरुजी को बुलाना होगा. गुरुजी श्मशान में 11 दिनों तक अनुष्ठान करेंगे.”

“बाबा आप को जो भी करना है, जल्दी कीजिए. इस में कितना खर्च आएगा, यह बता दीजिए.”

“इस अनुष्ठान में करीब 3 लाख रुपए खर्च हो जाएंगे.” बाबा त्यागी ने कहा.

“मैं कल ही 3 लाख रुपए आप के खाते में जमा करा दूंगी.” उस ने कहा और अगले दिन 3 लाख रुपए बाबा के बैंक खाते में जमा करा दिए.

अब तक इंदरजीत पूजा के नाम पर करीब 9 लाख रुपए बाबा के बताए बैंक खाते में जमा करा चुकी थी. पैसे जमा कराने के अगले दिन ही बाबा त्यागी ने फोन कर के कहा, “बेटा गजब हो गया, जो गुरुजी श्मशान में अनुष्ठान कर रहे थे, उन पर जिन्न ने हमला कर दिया. वह मरणासन्न हालत में हैं. उन का इलाज नहीं कराया गया तो उन की मौत हो सकती है. अगर उन की मौत हो गई तो इस का पाप तुम्हें ही लगेगा.”

“इस के लिए मुझे क्या करना होगा बाबा?”

“गुरुजी के इलाज के लिए संजीवनी बूटी मंगानी होगी, जिस पर 2 लाख रुपए का खर्च आएगा.”

इंदरजीत कौर अब तक पूजा के नाम पर 12 लाख रुपए तांत्रिक बाबा त्यागी के खाते में जमा करा चुकी थी. लेकिन फायदा कुछ नहीं हुआ था, इसलिए उसे शक होने लगा था कि कहीं वह किसी ठग के जाल में तो नहीं फंस गई है. इसलिए उस ने 2 लाख रुपए जमा करा दिए.

इंदरजीत कौर का छोटा भाई अपना कोई कारोबार शुरू करना चाहता था. उसे 8 लाख रुपए की जरूरत थी. उसी बीच उस ने बहन से ये रुपए मांगे तो उस ने रुपए बाबा त्यागी के खाते में जमा कराने की बात बता कर पैसे देने से मना कर दिया.

बहन की बात सुन कर छोटा भाई हैरान रह गया. उस ने अपना सिर पीट कर कहा, “पढ़ीलिखी होने के बावजूद दीदी तुम उस ढोंगी के जाल में कैसे फंस गईं? कम से कम मुझे तो बता देतीं. 3 साल से बाबा तुम्हें ठग रहा है और तुम ने कभी मुझ से चर्चा तक नहीं की.”

“क्या करूं भाई, उस ने मुझे इतना डरा दिया था कि मैं किसी से कुछ कह नहीं सकी.” कह कर इंदरजीत रोने लगी तो भाई ने उसे समझाते हुए कहा, “दीदी, तुम्हें अब पुलिस के पास जा कर उस ठग के खिलाफ रिपोर्ट लिखानी होगी. 12 लाख रुपए भले ही वापस न मिलें, लेकिन कम से कम उसे अपने किए की सजा तो मिलेगी.”

छोटे भाई की बात इंदरजीत कौर की समझ में आ गई. 24 नवंबर की शाम वह भाई के साथ थाना लाजपतनगर पहुंची और वहां मौजूद थानाप्रभारी रमेश कुमार कक्कड़ को पूरी बात बताई. इस के बाद इंदरजीत कौर की तहरीर पर थानाप्रभारी ने भादंवि की धारा 420/384/506134 के तहत मुकदमा दर्ज करा कर डीसीपी मंदीप सिंह रंधावा को पूरे वाकये से अवगत करा दिया.

एक पढ़ीलिखी महिला को जिस तरह से एक तांत्रिक ने ठगा था, उस से डीसीपी को लगा कि ढोंगी तांत्रिक बेहद शातिर है. उस तांत्रिक को गिरफ्तार करने के लिए उन्होंने एसीपी एस.के. केन के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित कर दी, जिस में थानाप्रभारी रमेश कुमार कक्कड़, इंसपेक्टर मानवेंद्र सिंह, प्रवीण कुमार, एसआई अमित भाटी, हैडकांस्टेबल सुधाकर, कांस्टेबल नीरज, संतोष, सुधीर आदि को शामिल किया गया.

इंदरजीत कौर के पास बाबा त्यागी का केवल फोन नंबर था. रमेश कुमार कक्कड़ ने उस ठग तांत्रिक को इंदरजीत के माध्यम से ही घेरने की योजना बनाई. उन्होंने इंदरजीत से बाबा त्यागी को फोन कराया. बाबा ने फोन उठाया तो इंदरजीत ने कहा,

“बाबा, अभी तक मुझे कोई फायदा नहीं हुआ. आप कुछ ऐसा कीजिए कि हमारे सारे दुख मिट जाएं. मैं इस के लिए कुछ भी करने को तैयार हूं.”

“कामाख्या मंदिर वाले गुरुजी ने अनुष्ठान पूरा करने के बाद मुझे बताया था कि जिन्न और आत्माएं काबू में आ गई हैं. लेकिन जब तक तुम्हारे पिता का पिंडदान रामेश्वरम में नहीं कराया जाता, तब तक समस्याएं बनी रहेंगी.”

“तो फिर आप यह भी करवा दीजिए.”

“इस के लिए 33 ब्राह्मïणों को यज्ञ के लिए रामेश्वरम ले जाना होगा. ब्राह्मïणों का किराया, यज्ञ आदि पर कुल 1 लाख 80 हजार रुपए का खर्च आएगा.”

“ठीक है, मैं कल ही यह रकम दे दूंगी. लेकिन इस बार रकम बैंक में जमा नहीं करा सकती. क्योंकि मैं जब भी वहां पैसे जमा कराने जाती हूं, बैंक वाले पूछते हैं कि तुम इतनी बड़ीबड़ी रकम इस खाते में क्यों जमा कराती हो?” इंदरजीत कौर ने कहा.

बाबा त्यागी ने यूनियन बैंक औफ इंडिया का खाता नंबर दे कर उस में पैसे जमा कराने को कहा. इंदरजीत कौर थानाप्रभारी के कहे अनुसार काम कर रही थी. उन्होंने पैसे जमा कराने से मना किया तो शाम को बाबा त्यागी को फोन कर के इंदरजीत ने कहा, “बाबा, मैं बैंक में पैसे जमा कराने गई थी, बैंक वाले कह रहे थे कि इस खाते में 25 हजार रुपए से ज्यादा जमा नहीं कराए जा सकते. इसलिए आप कल अपना कोई आदमी भेज दीजिए, मैं उसे पूरे पैसे दे दूंगी.”

“ठीक है, कल सुबह मेरा आदमी तुम्हारे घर पहुंच जाएगा. तुम अपना पता मैसेज कर दो. लेकिन वह जिस टैक्सी से जाएगा, उस का किराया तुम्हें ही देना होगा.” बाबा त्यागी ने कहा.

“यही ठीक रहेगा. आप उन्हें भेज दीजिए. मैं उन्हें किराए के पैसे भी दे दूंगी.” कह कर इंदरजीत कौर ने फोन काट दिया.

25 नवंबर की सुबह थानाप्रभारी टीम के साथ आम कपड़ों में इंदरजीत कौर के घर के आसपास लग गए. सुबह 9 बजे के करीब एक टैक्सी इंदरजीत कौर के घर के सामने आ कर रुकी. टैक्सी से एक लडक़ा उतरा और इंदरजीत कौर के घर की डोरबैल बजा दी. इंदरजीत कौर ने दरवाजा खोला. युवक ने अपना नाम सुनील कुमार बताया.

इंदरजीत कौर उसे ड्राइंगरूम में ले आई. थानाप्रभारी अंदर ही बैठे थे. इंदरजीत ने उसे पानी पिलाया तो उस ने कहा, “मैडम, पैसे जल्दी दे दीजिए. बाबा ने मुझे जल्दी बुलाया है. अभी हमें पूजा का सामान वगैरह भी खरीदना है.”

इंदरजीत कौर ने अपने पर्स से थानाप्रभारी के हस्ताक्षर किए 5 हजार रुपए निकाल कर सुनील को देते हुए कहा, “पहले तुम टैक्सी के किराए के पैसे ले लो, बाकी के पैसे अभी दे रही हूं.”

पैसे गिन कर जैसे ही सुनील ने अपनी जेब में रखे, थानाप्रभारी ने उसे पकड़ लिया. इशारा करने पर मकान के बाहर मौजूद पुलिसकर्मी भी अंदर आ गए. सुनील को पूछताछ के लिए थाने लाया गया.

थाने में हुई पूछताछ में सुनील कुमार ने जो बताया, उस के बाद पुलिस ने उसी दिन उत्तर प्रदेश के महानगर गाजियाबाद की कालोनी राजनगर स्थित एक मकान में छापा मारा. वहां का नजारा देख कर पुलिस हैरान रह गई. वहां इस तरह के लोगों को फंसाने के लिए एक काल सेंटर चल रहा था. अलगअलग 12 केबिन बने थे, जिन में 5 लडक़े और 7 लड़कियां बैठी थीं.

पुलिस को देख कर सभी के होश उड़ गए. उन्हीं के बीच एक भव्य औफिस बना था, जिस में शेष नारायण दुबे और पवन कुमार पांडेय नाम के 2 लोग बैठे थे. सुनील की निशानदेही पर पुलिस ने उन दोनों को हिरासत में ले लिया. इस के अलावा काल सेंटर में काम करने वाले लडक़ेलड़कियों को भी पूछताछ के लिए थाने लाया गया.

थाने में हुई पूछताछ में पता चला कि ठगी का यह सारा मायाजाल शेष नारायण दुबे उर्फ बाबा त्यागी का रचा था.

32 वर्षीय शेष नारायण दुबे गाजियाबाद की इंदिरापुरम कालोनी में रहने वाले रामबहादुर दुबे का बेटा था. रामबहादुर पंडिताई करते थे. पिता की देखादेखी शेष नारायण कोई ऐसा काम करना चाहता था, जिस में कम खर्च में अच्छी आमदनी हो.

उस ने अपने करीबी रिश्तेदार पवन कुमार पांडेय और सुनील कुमार से बात की तो उन्होंने तंत्रमंत्र के नाम पर ठगी का कारोबार करने की सलाह दी. इस के बाद शेषनारायण को बाबा त्यागी बना कर कारोबार शुरू भी कर दिया गया. इन्होंने शहर के राजनगर में एक कमरा किराए पर लिया, जिस में उन्होंने दरजन भर कंप्यूटर लगा कर लड़कियों व लडक़ों को नौकरी पर रख लिया.

इस के बाद मोबाइल कंपनी से हजारों ग्राहकों के फोन नंबर और पते हासिल किए. उन में से रोजाना कुछ नंबरों पर कालसेंटर द्वारा समस्याओं के समाधान के मैसेज भेजे जाने लगे. हर कोई किसी न किसी समस्या से ग्रस्त होता ही है, इसलिए अंधविश्वासी लोग मैसेज में दिए फोन नंबर पर समस्या के समाधान के लिए फोन करने लगे. ये लोग उन्हें परिवार के सदस्यों की मौत का भय दिखा कर बैंक खाते में मोटी रकम जमा करवाने लगे.

दिल्ली के लाजपतनगर के नेहरूनगर की रहने वाली इंदरजीत कौर को भी इन्होंने उस के भाइयों व भाभी की मौत का भय दिखा कर 12 लाख रुपए ठग लिए थे. पूछताछ में पता चला कि ये लोग अब तक करीब 3 सौ लोगों को इसी तरह ठग चुके हैं.

इन के कालसेंटर पर नौकरी करने वाले लडक़ेलड़कियों को पुलिस ने हिदायत दे कर छोड़ दिया. शेष नारायण दुबे उर्फ बाबा त्यागी, पवन कुमार पांडेय और सुनील कुमार को 26 नवंबर को न्यायालय में पेश कर के जेल भेज दिया गया है.

पुलिस ने इन के कालसेंटर को सील कर दिया है. कथा लिखे जाने तक इन में से किसी की भी जमानत नहीं हुई थी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

शराफत का इनाम – भाग 3

करीमभाई को कुछ सालों पहले ऐनजाइमा की तकलीफ हुई थी. डाक्टर ने उन्हें जुबान के नीचे रखने वाली गोली दी थी. उन्होंने कांपते हाथों से गोली जुबान के नीचे रखी. आंखें बंद कर के गहरीगहरी सांसें लेने लगे. थोड़ी तबीयत संभली तो घर के लिए रवाना हो गए.

‘‘क्या बात है, आप कुछ परेशान से लग रहे हैं?’’ रूमाना ने उन के घर पहुंचते ही पूछा.

‘‘हां, कुछ परेशानी है. तुम बहुत खुश लग रही हो?’’

‘‘हां, खबर ही खुशी की है. लेकिन पहले आप बताइए कि क्यों परेशान हैं?’’

करीमभाई कुछ देर टहलते रहे, उस के बाद सोच कर बोले, ‘‘आज हारुन हमारे औफिस में आया था.’’

‘‘हारुन आया था?’’ रूमाना ने हैरानी से पूछा. इस के बाद बिफर कर बोली, ‘‘आप ने उसे औफिस से निकलवा क्यों नहीं दिया?’’

‘‘मैं यही करता, लेकिन रूमाना, तुम यह बताओ कि हारुन ने तुम्हें जबानी तलाक दिया था या लिख कर दिया था?’’

‘‘जबानी दिया था. मगर इस से क्या फर्क पड़ता है. तलाक तो तलाक है, जबानी दे या लिख कर दे. तलाक तो हो जाता है.’’ वह सादगी से बोली. करीमभाई ने सिर पर हाथ मार कर कहा, ‘‘तुम बड़ी मासूम हो. तुम्हें नहीं मालूम कि आजकल जमाना कितना खराब हो गया है. अगर तुम्हारे पास कोई सुबूत नहीं है तो अदालत में यही माना जाएगा कि उस ने तुम्हें तलाक नहीं दिया है.’’

रूमाना हैरान रह गई, ‘‘आप…आप का मतलब है कि वह कमीना आदमी 4 साल बाद यह दावा ले कर आया है कि तलाक नहीं हुआ है.’’

‘‘हां, उस के पास निकाहनामे की कौपी है. रजिस्ट्रार औफिस की रजिस्टर्ड कौपी है.’’ यह कह कर निकाह की कौपी रूमाना के हाथ में दे दी, जो हारुन छोड़ कर गया था.

‘‘बकवास करता है कमबख्त.’’ रूमाना ने गुस्से से निकाहनामा फाड़ कर फेंक दिया. इस के बाद गुस्से से कांपते हुए बोली, ‘‘कोई संबंध नहीं है हारुन से मेरा, मैं आप की बीवी हूं.’’ कह कर रूमाना रोने लगी.

‘‘मैं जानता हूं.’’ करीमभाई ने कहा और रोती हुई रूमाना को सीने से लगा कर चुप कराने लगे.

‘‘आज मैं आप को एक खुशखबरी सुनाने वाली थी कि यह मनहूस खबर आ गई.’’

‘‘कैसी खुशखबरी?’’ सेठ करीमभाई ने पूछा.

रूमाना ने शरमाते हुए कहा, ‘‘मैं मां बनने वाली हूं. आज ही मैं डाक्टर के पास गई थी.’’

करीमभाई खुश हो गए. उन्होंने बड़े विश्वास के साथ कहा, ‘‘अब तुम फिक्र मत करो, मैं सारा मामला निपटा लूंगा.’’

‘‘आप क्या करेंगे? पुलिस में जाएंगे?’’

‘‘नहीं, पुलिसअदालत में जाने से मामला बिगड़ जाएगा. मेरे पास एक तरीका है, मैं उस का मुंह बंद कर दूंगा.’’

बाद में हारुन ने रूमाना को फोन कर के कहा, ‘‘तुम ने अपनी भूमिका बहुत अच्छी तरह अदा की है. बच्चे के बारे में सुन कर बुड्ढा तो दीवाना हो गया होगा?’’

‘‘हां हारुन, लेकिन मुझे डर लग रहा है. उस ने कहा है कि उस के पास उस का मुंह बंद करने का एक तरीका है.’’

‘‘अरे वह रकम दे कर मुंह बंद कराने की बात कर रहा होगा.’’ हारुन ने कहा.

‘‘नहीं, सोचो वह अरबपति है. उस के पास दौलत की ताकत है. अगर उस ने इस ताकत को तुम्हारे खिलाफ इस्तेमाल किया तो..? मैं ने 2 बार पूछा कि कौन सा तरीका है तो उस ने कोई जवाब नहीं दिया. रकम की बात होती तो वह मुझ से जरूर बता देता.’’

रूमाना की इस बात से हारुन परेशान हो गया. इस से पहले उन्होंने जिन 5 लोगों को इसी तरह फांसा था, उन में से कोई भी इतना दौलतमंद नहीं था.

वैसे तो करीमभाई देखने में बहुत शरीफ था, दौलत का इस्तेमाल कर के पुलिस को मिलाने और किराए के किलर की व्यवस्था करने में उसे कोई परेशानी नहीं होगी. उस के पास कई औप्शन थे. हारुन बुनियादी तौर पर बुजदिल आदमी था. उस ने रूमाना से पूछा, ‘‘तुम क्या सोचती हो?’’

‘‘मेरी सलाह तो यही है कि अब तुम उस के सामने मत जाना. फोन पर बात करो और यह सिम बंद कर दो या जब बात करनी हो तभी चालू करो, क्योंकि यह सिम तुम्हारे नाम है. वह तुम्हें ब्लैकमेलिंग में फंसा सकता है. एक बात और याद रखना हारुन, तुम ने वादा किया था कि यह आखिरी बार है. इस के बाद हम बाहर चले जाएंगे.’’

हारुन ने एक बार फिर वही यकीन दिलाया, जो पहले भी कई बार दिला चुका था. वह चालबाज, शातिर आदमी था. उस का और रूमाना का 7 साल से ज्यादा का साथ था.

दोनों ने घर से भाग कर शादी की थी. रूमाना एक बहुत अच्छे खानदान की लड़की थी, लेकिन कमउम्र में मोहब्बत के जज्बात में आ कर उस के साथ भाग गई थी और शादी कर ली थी. रूमाना के घर वाले हारुन को बिलकुल नहीं पसंद करते थे. हारुन को घरगृहस्थी में कोई दिलचस्पी नहीं थी. उस का मकसद बस दौलत कमाना और अय्याशी करना था.

दोनों कई शहरों में रहे और हर जगह इसी तरह चक्कर चला कर कई लोगों को ब्लैकमेल किया. रूमाना मजबूर थी. वह घर भी वापस नहीं जा सकती थी. घर जाने पर उस के दोनों भाई उसे जिंदा जला देते.

हारुन ने रूमाना को जिस रास्ते पर चलाया था, वह उस पर चलने को मजबूर थी. इसी वजह से उन्होंने काफी दौलत जमा कर ली थी. इस के अलावा भी हारुन उल्टेसीधे तरीकों से पैसे कमाता रहता था. ऐसे कामों में रूमाना उस का साथ देतेदेते तंग आ चुकी थी. यह भी कह सकते हैं कि वह थक चुकी थी. उस का कहना था कि यह आखिरी बार है, इस के बाद वे बाहर चले जाएंगे.

करीमभाई लगातार कोशिश कर रहे थे, लेकिन हारुन का नंबर नहीं लग रहा था. वह लगातार बंद बता रहा था. उस ने 2 दिन का समय दिया था. एक ही दिन उन के पास था. वह सोच रहे थे कि हारुन न जाने कितनी रकम पर राजी होगा? काम में उन का मन बिलकुल नहीं लग रहा था. उन्होंने फाइलें बंद कर दीं. बारबार उन का ध्यान मोबाइल पर जा रहा था. इस के पहले वह कभी इतना परेशान नहीं हुए थे.

कहां खुशी मनाने का मौका था और वह परेशान थे. फोन की घंटी बजी तो उन्होंने लपक कर उठाया. लेकिन यह रूमाना का फोन था. उस ने पूछा, ‘‘हारुन का कोई फोन आया? मुझे डर लग रहा है.’’

‘‘तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है, मैं सब संभाल लूंगा. अगर घी सीधी अंगुली से नहीं निकला तो मुझे अंगुली टेढ़ी करना भी आता है. मुझे पता है कि मुझे क्या करना है.’’ करीमभाई ने दृढ़ता से कहा.

रूमाना ने धीरे से कहा, ‘‘शादी के बाद मैं बहुत खुश थी. खुद को बहुत महफूज समझ रही थी, लेकिन यह बखेड़ा खड़ा हो गया.’’

‘‘तुम बिलकुल फिक्र मत करो, सब ठीक हो जाएगा.’’

बेईमान बनाया प्रेम ने

अगर पत्नी पसंद न हो तो आज के जमाने में उस से छुटकारा पाना आसान नहीं है. क्योंकि दुनिया इतनी तरक्की कर चुकी है कि आज पत्नी को आसानी से तलाक भी नहीं दिया जा सकता. अगर आप सोच रहे हैं कि हत्या कर के छुटाकारा पाया जा सकता है तो हत्या करना तो आसान है, लेकिन लाश को ठिकाने लगाना आसान नहीं है.

इस के बावजूद दुनिया में ऐसे मर्दों की कमी नहीं है, जो पत्नी को मार कर उस की लाश को आसानी से ठिकाने लगा देते हैं. ऐसे भी लोग हैं जो जरूरत पडऩे पर तलाक दे कर भी पत्नी से छुटकारा पा लेते हैं. लेकिन यह सब वही लोग करते हैं, जो हिम्मत वाले होते हैं.

हिम्मत वाला तो पुष्पक भी था, लेकिन उस के लिए समस्या यह थी कि पारिवारिक और भावनात्मक लगाव की वजह से वह पत्नी को तलाक नहीं देना चाहता था. पुष्पक सरकारी बैंक में कैशियर था. उस ने स्वाति के साथ वैवाहिक जीवन के 10 साल गुजारे थे. अगर मालिनी उस की धडक़नों में न समा गई होती तो शायद बाकी का जीवन भी वह स्वाति के ही साथ बिता देता.

उसे स्वाति से कोई शिकायत भी नहीं थी. उस ने उस के साथ दांपत्य के जो 10 साल बिताए थे, उन्हें भुलाना भी उस के लिए आसान नहीं था. लेकिन इधर स्वाति में कई ऐसी खामियां नजर आने लगी थीं, जिन से पुष्पक बेचैन रहने लगा था. जब किसी मर्द को पत्नी में खामियां नजर आने लगती हैं तो वह उस से छुटकारा पाने की तरकीबें सोचने लगता है. इस के बाद उसे दूसरी औरतों में खूबियां ही खूबियां नजर आने लगती हैं. पुष्पक भी अब इस स्थिति में पहुंच गया था.

उसे जो वेतन मिलता था, उस में वह स्वाति के साथ आराम से जीवन बिता रहा था, लेकिन जब से मालिनी उस के जीवन में आई, तब से उस के खर्च अनायास बढ़ गए थे. इसी वजह से वह पैसों के लिए परेशान रहने लगा था. उसे मिलने वाले वेतन से 2 औरतों के खर्च पूरे नहीं हो सकते थे. यही वजह थी कि वह दोनों में से किसी एक से छुटकारा पाना चाहता था.

जब उस ने मालिनी से छुटकारा पाने के बारे में सोचा तो उसे लगा कि वह उसे जीवन के एक नए आनंद से परिचय करा कर यह सिद्ध कर रही है. जबकि स्वाति में वह बात नहीं है, वह हमेशा ऐसा बर्ताव करती है जैसे वह बहुत बड़े अभाव में जी रही है. लेकिन उसे वह वादा याद आ गया, जो उस ने उस के बाप से किया था कि वह जीवन की अंतिम सांसों तक उसे जान से भी ज्यादा प्यार करता रहेगा.

पुष्पक इस बारे में जितना सोचता रहा, उतना ही उलझता गया. अंत में वह इस निर्णय पर पहुंचा कि वह मालिनी से नहीं, स्वाति से छुटकारा पाएगा. वह उसे न तो मारेगा, न ही तलाक देगा. वह उसे छोड़ कर मालिनी के साथ कहीं भाग जाएगा.

यह एक ऐसा उपाय था, जिसे अपना कर वह आराम से मालिनी के साथ सुख से रह सकता था. इस उपाय में उसे स्वाति की हत्या करने के बजाय अपनी हत्या करनी थी. सच में नहीं, बल्कि इस तरह कि उसे मरा हुआ मान लिया जाए. इस के बाद वह मालिनी के साथ कहीं सुख से रह सकता था.

उस ने मालिनी को अपनी परेशानी बता कर विश्वास में लिया. इस के बाद दोनों इस बात पर विचार करने लगे कि वह किस तरह आत्महत्या का नाटक करे कि उस की साजिश सफल रहे. अंत में तय हुआ कि वह समुद्र तट पर जा कर खुद को लहरों के हवाले कर देगा. तट की ओर आने वाली समुद्री लहरें उस की जैकेट को किनारे ले आएंगी. जब उस जैकेट की तलाशी ली जाएगी तो उस में मिलने वाले पहचानपत्र से पता चलेगा कि पुष्पक मर चुका है.

उसे पता था कि समुद्र में डूब कर मरने वालों की लाशें जल्दी नहीं मिलतीं, क्योंकि बहुत कम लाशें ही बाहर आ पाती हैं. ज्यादातर लाशों को समुद्री जीव चट कर जाते हैं. जब उस की लाश नहीं मिलेगी तो यह सोच कर मामला रफादफा कर दिया जाएगा कि वह मर चुका है. इस के बाद देश के किसी महानगर में पहचान छिपा कर वह आराम से मालिनी के साथ बाकी का जीवन गुजारेगा.

लेकिन इस के लिए काफी रुपयों की जरूरत थी. उस के हाथों में रुपए तो बहुत होते थे, लेकिन उस के अपने नहीं. इस की वजह यह थी कि वह बैंक में कैशियर था. लेकिन उस ने आत्महत्या क्यों की, यह दिखाने के लिए उसे खुद को लोगों की नजरों में कंगाल दिखाना जरूरी था. योजना बना कर उस ने यह काम शुरू भी कर दिया.

कुछ ही दिनों में उस के साथियों को पता चला गया कि वह एकदम कंगाल हो चुका है. बैंक कर्मचारी को जितने कर्ज मिल सकते थे, उस ने सारे के सारे ले लिए थे. उन कर्जों की किस्तें जमा करने से उस का वेतन काफी कम हो गया था. वह साथियों से अकसर तंगी का रोना रोता रहता था. इस हालत से गुजरने वाला कोई भी आदमी कभी भी आत्महत्या कर सकता था.

पुष्पक का दिल और दिमाग अपनी इस योजना को ले कर पूरी तरह संतुष्ट था. चिंता थी तो बस यह कि उस के बाद स्वाति कैसे जीवन बिताएगी? वह जिस मकान में रहता था, उसे उस ने भले ही बैंक से कर्ज ले कर बनवाया था. लेकिन उस के रहने की कोई चिंता नहीं थी. शादी के 10 सालों बाद भी स्वाति को कोई बच्चा नहीं हुआ था. अभी वह जवान थी, इसलिए किसी से भी विवाह कर के आगे की जिंदगी सुख और शांति से बिता सकती थी. यह सोच कर वह उस की ओर से संतुष्ट हो गया था.

बैंक से वह मोटी रकम उड़ा सकता था, क्योंकि वह बैंक का हैड कैशियर था. सारे कैशियर बैंक में आई रकम उसी के पास जमा कराते थे. वही उसे गिन कर तिजोरी में रखता था. उसे इसी रकम को हथियाना था. उस रकम में कमी का पता अगले दिन बैंक खुलने पर चलता. इस बीच उस के पास इतना समय रहता कि वह देश के किसी दूसरे महानगर में जा कर आसानी से छिप सके.

लेकिन बैंक की रकम में हेरफेर करने में परेशानी यह थी कि ज्यादातर रकम छोटे नोटों में होती थी. वह छोटे नोटों को साथ ले जाने की गलती नहीं कर सकता था, इसलिए उस ने सोचा कि जिस दिन उसे रकम का हेरफेर करना होगा, उस दिन वह बड़े नोट किसी को नहीं देगा. इस के बाद वह उतने ही बड़े नोट साथ ले जाएगा, जितने जेबों और बैग में आसानी से जा सके.

पुष्पक का सोचना था कि अगर वह 20 लाख रुपए भी ले कर निकल गया तो उन्हीं से कोई छोटामोटा कारोबार कर के मालिनी के साथ नया जीवन शुरू करेगा. 20 लाख की रकम इस महंगाई के दौर में कोई ज्यादा बड़ी रकम तो नहीं है, लेकिन वह मेहनत से काम कर के इस रकम को कई गुना बढ़ा सकता है.

जिस दिन उस ने पैसे ले कर भागने की तैयारी की थी, उस दिन रास्ते में एक हैरान करने वाली घटना घट गई. जिस बस से वह बैंक जा रहा था, उस का कंडक्टर एक सवारी से लड़ रहा था. सवारी का कहना था कि उस के पास पैसे नहीं हैं, एक लौटरी का टिकट है. अगर वह उसे खरीद ले तो उस के पास पैसे आ जाएंगे, तब वह टिकट ले लेगा. लेकिन कंडक्टर मना कर रहा था.

पुष्पक ने झगड़ा खत्म करने के लिए वह टिकट 50 रुपए में खरीद लिया. उस टिकट को उस ने जैकेट की जेब में रख लिया.

आत्महत्या के नाटक को अंजाम तक पहुंचाने के बाद वह फोर्ट पहुंचा और वहां से कुछ जरूरी चीजें खरीद कर एक रेस्टोरैंट में बैठ गया. चाय पीते हुए वह अपनी योजना पर मुसकरा रहा था. तभी अचानक उसे एक बात याद आई. उस ने आत्महत्या का नाटक करने के लिए अपनी जो जैकेट लहरों के हवाले की थी, उस में रखे सारे रुपए तो निकाल लिए थे, लेकिन लौटरी का वह टिकट उसी में रह गया था.

उसे बहुत दुख हुआ. घड़ी पर नजर डाली तो उस समय रात के 10 बज रहे थे. अब उसे तुरंत स्टेशन के लिए निकलना था. उस ने सोचा, जरूरी नहीं कि उस टिकट में इनाम निकल ही आए इसलिए उस के बारे में सोच कर उसे परेशान नहीं होना चाहिए. ट्रेन में बैठने के बाद पुष्पक मालिनी की बड़ीबड़ी कालीकाली आंखों की मस्ती में डूब कर अपने भाग्य पर इतरा रहा था. उस के सारे काम बिना व्यवधान के पूरे हो गए थे, इसलिए वह काफी खुश था.

फर्स्ट क्लास के उस कूपे में 2 ही बर्थ थीं, इसलिए उन के अलावा वहां कोई और नहीं था. उस ने मालिनी को पूरी बात बताई तो वह एक लंबी सांस ले कर मुसकराते हुए बोली, “जो भी हुआ, ठीक हुआ. अब हमें पीछे की नहीं, आगे की जिंदगी के बारे में सोचना चाहिए.”

पुष्पक ने ठंडी आह भरी और मुसकरा कर रह गया.

ट्रेन तेज गति से महाराष्ट्र के पठारी इलाके से गुजर रही थी. सुबह होतेहोते वह महाराष्ट्र की सीमा पार कर चुकी थी. उस रात पुष्पक पल भर नहीं सोया था, उस ने मालिनी से बातचीत भी नहीं की थी. दोनों अपनीअपनी सोचों में डूबे थे. भूत और भविष्य, दोनों के अंदेशे उन्हें विचलित कर रहे थे.

दूर क्षितिज पर लाललाल सूरज दिखाई देने लगा था. नींद के बोझ से पलकें बोझिल होने लगी थीं. तभी मालिनी अपनी सीट से उठी और उस के सीने पर सिर रख कर उसी की बगल में बैठ गई. पुष्पक ने आंखें खोल कर देखा तो ट्रेन शोलापुर स्टेशन पर खड़ी थी. मालिनी को उस हालत में देख कर उस के होंठों पर मुसकराहट तैर गई.

हैदराबाद के होटल के एक कमरे में वे पतिपत्नी की हैसियत से ठहरे थे. वहां उन का यह दूसरा दिन था. पुष्पक जानना चाहता था कि मुंबई से उस के भागने के बाद क्या स्थिति है. वह लैपटौप खोल कर मुंबई से निकलने वाले अखबारों को देखने लगा.

“कोई खास खबर?” मालिनी ने पूछा.

“अभी देखता हूं.” पुष्पक ने हंस कर कहा.

मालिनी भी लैपटौप पर झुक गई. दोनों अपने भागने से जुड़ी खबर खोज रहे थे. अचानक एक जगह पुष्पक की नजरें जम कर रह गईं. उस से सटी बैठी मालिनी को लगा कि पुष्पक का शरीर अकड़ सा गया है. उस ने हैरानी से पूछा, “क्या बात है डियर?”

पुष्पक ने गूंगों की तरह अंगुली से लैपटौप की स्क्रीन पर एक खबर की ओर इशारा किया. समाचार पढ़ कर मालिनी भी जड़ हो गई. वह होठों ही होठों में बड़बड़ाई, “समय और संयोग. संयोग से कोई नहीं जीत सका.”

“हां संयोग ही है,” वह मुंह सिकोड़ कर बोला, “जो हुआ, अच्छा ही हुआ. मेरी जैकेट पुलिस के हाथ लगी, जिस पुलिस वाले को मेरी जैकेट मिली, वह ईमानदार था, वरना मेरी आत्महत्या का मामला ही गड़बड़ा जाता. चलो मेरी आत्महत्या वाली बात सच हो गई.”

इतना कह कर पुष्पक ने एक ठंडी आह भरी और खामोश हो गया.

मालिनी खबर पढऩे लगी, ‘आर्थिक परेशानियों से तंग आ कर आत्महत्या करने वाले बैंक कैशियर का दुर्भाग्य.’

इस हैडिंग के नीचे पुष्पक की आर्थिक परेशानी का हवाला देते हुए आत्महत्या और बैंक के कैश से 20 लाख की रकम कम होने की बात लिखते हुए लिखा था—

‘इंसान परिस्थिति से परेशान हो कर हौसला हार जाता है और मौत को गले लगा लेता है. लेकिन वह नहीं जानता कि प्रकृति उस के लिए और भी तमाम दरवाजे खोल देती है. पुष्पक ने 20 लाख बैंक से चुराए और रात को जुए में लगा दिए कि सुबह पैसे मिलेंगे तो वह उस में से बैंक में जमा कर देगा. लेकिन वह सारे रुपए हार गया.

इस के बाद उस के पास आत्महत्या करने के अलावा कोर्ई चारा नहीं बचा, जबकि उस के जैकेट की जेब में एक लौटरी का टिकट था, जिस का आज ही परिणाम आया है. उसे 2 करोड़ रुपए का पहला इनाम मिला है.

सच है, समय और संयोग को किसी ने नहीं देखा है.’

शराफत का इनाम – भाग 2

उस ने 3 साल बड़ी मुश्किल से गुजारे. इस के बाद एक दिन हारुन ने उसे नशे में तलाक दे दिया. उस के तलाक को चार साल हो चुके थे. अभी उस की उम्र 30 साल थी. एक ही रिश्तेदार डैडी थे, 4-5 साल पहले उन का भी इंतकाल हो गया. डैडी काफी कुछ छोड़ गए थे. जिंदगी आराम से गुजर रही थी. खाने के बाद उस ने ग्रीन टी बनाई, जो करीमभाई को बहुत पसंद आई. वैसे भी वह बस ग्रीन टी ही पीते थे.

खुशीखुशी घर पहुंच कर करीमभाई रूमाना के खयालों में डूबे रहे. औरत जब खुद बढ़ती है तो मर्द की हिचक खत्म हो जाती है. तीसरी मुलाकात में बात शादी तक पहुंच गई. रूमाना ने कहा कि पहले तजुर्बे के बाद उसे शादी से डर लगने लगा था. कई लोग उस की तरफ बढ़े, पर वही पीछे हट गई. उस ने स्वीकार किया कि उन्होंने उस के दिल पर दस्तक दी और उसे वह बहुत भले इंसान लगे.

रूमाना ने शादी के लिए हां कर दी. शादी बहुत साधारण तरीके से हुई. करीमभाई के बच्चे और कुछ दोस्त ही शामिल हुए. रूमाना सिर्फ हसीन ही नहीं, बल्कि बहुत समझदार और मोहब्बत करने वाली बीवी साबित हुई.

नौकरानी के साथ मिल कर खाना वगैरह खुद पकाती. करीमभाई का खयाल था कि रूमाना शादी के बाद कुछ शर्तें रखेगी या सिक्योरिटी के लिए कुछ खास रखने को कहेगी. लेकिन उस ने न कुछ मांगा, न कुछ कहा. करीमभाई ने मेहर 10 लाख रखा था, जो मुंह दिखाई से पहले दे दिया. उसे जो अंगूठी पहनाई थी, उस का हरा पत्थर ही करीब 50 लाख का था. बाकी जेवर अलग थे.

इस शादी से रूमाना बहुत खुश थी. करीम भाई की जिंदगी खुशियों से भर उठी. रूमाना घर की मलिका थी, जो चाहे कर सकती थी. शादी के बाद दोनों वर्ल्ड टुअर पर गए. एक महीने खूब घूमेफिरे, ऐश किया. उस के बाद रूटीन जिंदगी शुरू हो गई.

शुरूशुरू में करीमभाई के बच्चे जरा खिंचेखिंचे रहे, लेकिन जल्दी ही सब नौर्मल हो गए. पहले की तरह आनेजाने लगे. उन्होंने रूमाना को नई कार गिफ्ट की. करीमभाई को लगता था कि वह फिर से जवान हो गए हैं. जिंदगी बेपनाह खूबसूरत लगने लगी थी. रूमाना भी उन का खूब खयाल रखती और खूब प्यार लुटाती. दिन हंसीखुशी गुजरते रहे.

एक दिन काम के दौरान एक अजनबी नंबर से करीमभाई को फोन आया. फोन उठा कर उन्होंने कहा, ‘‘हैलो, कौन बोल रहा है?’’

‘‘हारुन.’’ दूसरी ओर से सपाट लहजे में कहा गया.

करीमभाई शौक्ड रह गए.

‘‘मुझे पहचाना करीमभाई?’’

‘‘हां, फोन क्यों किया?’’

‘‘यह बताने के लिए कि मैं तुम्हारे औफिस के बाहर खड़ा हूं. तुम से मिलने आ रहा हूं. कुछ जरूरी बातें करनी हैं.’’

करीमभाई सोच में डूब गए. उन के माथे पर पसीना चमकने लगा. उन्होंने सेक्रेटरी से कहा, ‘‘हारुन नाम का एक आदमी आ रहा है. गार्ड से चैक करवा कर उसे अंदर भेजो.’’

2 मिनट बाद एक 35-36 साल का स्मार्ट सा आदमी अंदर आया. उस की आंखों में चालाकी और कमीनापन साफ झलक रहा था. करीमभाई ने उसे बैठने को भी नहीं कहा, लेकिन वह बैठ गया.

करीमभाई ने बेरुखी से कहा, ‘‘मैं बहुत मसरूफ हूं, जो कहना है जल्दी कहो.’’

‘‘मैं अपनी बीवी के बारे में बात करने आया हूं.’’

‘‘यह क्या बकवास है? अब वह तुम्हारी बीवी कहां है?’’

‘‘जो औरत पहले से ही शादीशुदा हो, अगर वह दूसरी शादी कर लेती है, तब भी वह पहले शौहर की बीवी कहलाएगी.’’

‘‘पहले से शादीशुदा थी. लेकिन तुम तो उसे तलाक दे चुके हो.’’

‘‘अगर मैं ने रूमाना को तलाक दिया है तो इस का तुम्हारे पास कोई तो सुबूत होगा?’’

करीमभाई को खयाल आया कि ऐसी कोई चीज रूमाना ने उन्हें नहीं दिखाई थी और दूसरे निकाह के वक्त पहले निकाह का कोई जिक्र भी नहीं किया था. वैसे भी एक निकाह पर दूसरा निकाह हराम है, इसलिए दूसरे निकाह के वक्त तलाकनामा पेश करना जरूरी होता है. उन का लहजा कमजोर पड़ गया, ‘‘तुम ने रूमाना को मुंहजबानी तलाक दिया था.’’

‘‘अदालती मामलों में जबानी तलाक का कोई महत्त्व होता है क्या? यह तुम अच्छी तरह जानते हो. लगता है, रूमाना के हुस्न ने तुम्हारी अक्ल को घास चरने भेज दिया था. तुम ने उस से पूछा तक नहीं.’’ हारुन ने कहा.

‘‘रूमाना ने मुझे बताया था कि 4 साल पहले तुम ने उसे तलाक दे दिया था.’’ करीमभाई ने कहा.

‘‘…और तुम ने मान लिया. तुम इतना बड़ा बिजनैस चलाते हो, इतने जहीन आदमी हो, ऐसी गलती कैसे कर सकते हो?’’ वह बोला.

करीमभाई ने जल्दी से कहा, ‘‘तुम्हारे पास क्या सुबूत है कि रूमाना तुम्हारी बीवी है?’’

हारुन ने लिफाफे से निकाहनामे की फोटोकौपी सामने रखते हुए कहा, ‘‘यह है निकाहनामा. इस पर रूमाना के दस्तखत हैं. उस के आईडी कार्ड की कौपी भी मौजूद है. यह निकाह रजिस्ट्रार औफिस में बाकायदा रजिस्टर्ड है. काजी ने निकाह करवाया था. निकाह औफिस के रिकौर्ड के अनुसार रूमाना आज भी मेरी बीवी है. यह तो हुआ कानूनी सुबूत. अब कहो तो बता दूं कि रूमाना के बदन पर कहां और कितने तिल हैं?’’

करीमभाई ने मुश्किल से खुद को जब्त किया. उन्हें लगा कि हार्टअटैक आ जाएगा. उन की दराज में पिस्तौल रखा था. उन का दिल कह रहा था कि उठा कर हारुन को गोली मार दें. वह उन की बीवी के बारे में ऐसी गंदी बातें कर रहा था. उन्होंने पानी पिया और बेरुखी से कहा, ‘‘कहो, चाहते क्या हो तुम?’’

‘‘मैं क्या चाहता हूं. मैं अपनी बीवी वापस चाहता हूं.’’

‘‘वह 4 साल पहले तुम्हारी बीवी थी. अब उस से तुम्हारा कोई संबंध नहीं है.’’

‘‘4 साल की जुदाई को तलाक नहीं मान लिया जाता. वह आज भी मेरी बीवी है.’’

‘‘तुम उसे तलाक दे चुके हो. तुम ने उसे जबानी तलाक दिया है. अब मैं तुम्हारा मतलब समझ गया हूं. बोलो, कितना चाहिए 10 लाख, 20 लाख, बोलो?’’

‘‘मुझे अपनी बीवी वापस चाहिए. मैं तुम्हें 2 दिन की मोहलत देता हूं. इस के बाद मैं अदालत जाऊंगा. अगर तुम नहीं जानते तो वकील से पूछ लेना, तुम पर कौनकौन से केस बनेंगे.’’ हारुन ने सपाट लहजे में कहा और कमरे से बाहर निकल गया.

ट्यूटर ही निकला अपहर्ता

उत्तराखंड के शहर जसपुर की नई बस्ती कालोनी में रहने वाले इकरामुल हक एक एनजीओ में मैनेजर थे, जिस की वजह से उन की समाज में अच्छी पकड़ थी. समाज के लोग भी उन का काफी सम्मान करते थे. लेकिन 21 नवंबर को उन के परिवार में एक ऐसी घटना घटी कि वही नहीं, उन के घर तथा मोहल्ले वाले भी परेशान हो उठे.

दरअसल, हुआ यह कि उस दिन इकरामुल हक का 11 साल का बेटा रिहानुल हक उर्फ रिहान अचानक अपने घर के मुख्य दरवाजे के पास खेलतेखेलते गायब हो गया था. घर वालों ने उसे गली में इधरउधर देखा, लेकिन वह दिखाई नहीं दिया. दरवाजे के सामने खेलतेखेलते वह कहां गायब हो गया, यह बात किसी की समझ में नहीं आ रही थी.

रिहानुल हक के गायब होने की जानकारी मोहल्ले वालों को हुई तो वे भी उसे ढंूढऩे में मदद करने लगे. सभी ने मोहल्ले की गलीगली छान मारी, पर बच्चे का पता नहीं चला. इकरामुल हक उस समय नजीबाबाद स्थित संस्था के औफिस में थे. बेटे के लापता होने की जानकारी उन्हें मिली तो वह तुरंत घर के लिए चल पड़े. घर पहुंचने तक शाम हो चुकी थी. उन की पत्नी और घर के अन्य लोग चिंता में बैठे थे.

इकरामुल हक ने अपने सभी रिश्तेदारों को फोन कर के बेटे के बारे में पूछा, पर कहीं से भी उस के बारे में कुछ पता नहीं चला. देर रात तक उन्होंने बेटे को संभावित जगहों पर तलाशा, पर कोई नतीजा नहीं निकला. पूरी रात घर के लोग परेशान होते रहे. सुबह होते ही इकरामुल हक रिश्तेदारों और मोहल्ले के कुछ लोगों के साथ शहर की कोतवाली पहुंचे. थानाप्रभारी डी.आर. आर्य को बच्चे के रहस्यमय ढंग से गायब होने की बात बता कर उस के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की.

बच्चे को गायब हुए 20 घंटे से ज्यादा हो चुके थे, इसलिए डी.आर. आर्य ने अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर लिया. उन्होंने इस मामले की जानकारी एसएसपी केवल खुराना को दी तो उन्होंने इस संवेदनशील मामले को सुलझाने के लिए 4 टीमें बनाईं.

पहली टीम में थानाप्रभारी डी.आर. आर्य के नेतृत्व में एसआई योगेंद्र कुमार, मदन सिंह विवट, कांस्टेबल मोहम्मद आसिफ को शामिल किया गया. दूसरी टीम काशीपुर के थानाप्रभारी वी.के. जेठा के नेतृत्व में और तीसरी टीम परतापपुर के चौकीइंचार्ज जसवीर सिंह चौहान के नेतृत्व में बनाई गई.

चौथी टीम में एसओजी के तेजतर्रार पुलिस अधिकारियों को भी शामिल किया गया. चारों टीमों का नेतृत्व सीओ (काशीपुर) जी.सी. टम्टा कर रहे थे. एसएसपी ने पूरे केस की कमान एएसपी कमलेश उपाध्याय के हाथों सौंपी थी.

चारों पुलिस टीमें अलगअलग एंगल से इस मामले में लग गईं. चूंकि इकरामुल हक सम्मानित आदमी थे, इसलिए पुलिस को पूरी संभावना थी कि बच्चे का अपहरण फिरौती के लिए किया गया है. इस संभावना को देखते हुए पुलिस ने इकरामुल हक से कह दिया था कि अगर उन के पास किसी का फिरौती के लिए फोन आता है तो उन्हें किस तरह बात करनी है.

इकरामुल हक ने पुलिस को बताया था कि उन की किसी से कोई रंजिश नहीं है. इस के बावजूद पुलिस मोहल्ले में और जहां वह नौकरी करते थे, वहां के लोगों से पूछताछ की. रिहान को गायब हुए कई दिन बीत गए, पर पुलिस को उस के बारे में कोई सुराग नहीं मिला, इस से घर वालों की चिंता बढ़ती जा रही थी.

पुलिस रिहान की खोज में लगी थी, तभी जसपुर से एक और बच्चा गायब हो गया. उस बच्चे के गायब होने के बाद शहर में यह अफवाह फैल गई कि शहर में बच्चे उठाने वाला गैंग सक्रिय है. इस के बाद लोगों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया. उन का पुलिस से भी विश्वास उठने लगा.

पुलिस ने भी अपनी जांच बच्चा चोरी करने वाले गैंग की ओर मोड़ दी. बिजनौर, धामपुर, नजीबाबाद तक छानबीन की गई, लेकिन बच्चे का कुछ पता नहीं चला. आगे की जांच में पुलिस ने इकरामुल हक के घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकाली. फुटेज में रिहान घर से निकलते हुए खुश दिखाई दे रहा था. उस के साथ उसे ट्यूशन पढ़ाने वाला रवि कुमार भी था.

पुलिस ने पूछताछ के लिए रवि कुमार को थाने बुला लिया. उस से भी पूछताछ की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. पुलिस ने उसे दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया तो उस ने पुलिस को आत्महत्या की धमकी दे दी.

काफी खोजबीन के बाद भी जब रिहान का कहीं कुछ पता नहीं चला तो 28 नवंबर को जसपुर वालों ने एएसपी कमलेश उपाध्याय का घेराव किया, साथ ही रिहान के जल्दी न मिलने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी. इस चेतावनी के बाद एसओजी टीम ने जसपुर में डेरा डाल दिया. पुलिस अभी बच्चे की खोज में इधरउधर हाथपांव मार ही रही थी कि उसी बीच 21 दिसंबर को रिहान के पिता को फिरौती का एक पत्र मिला. फिरौती के उस पत्र ने जांच की दिशा मोड़ दी.

पत्र में लिखा था, ‘बधाई हो आप का बेटा मिल गया. वह अभी जिंदा है. वह बारबार आप को याद कर रहा है. आप उसे सहीसलामत वापस पाना चाहते हैं तो दोपहर 12 बजे जसपुर से हरिद्वार को जाने वाली रोडवेज बस में एक बैग में 6 लाख रुपए रख दीजिए. जैसे हमें 6 लाख रुपए मिल जाएंगे, आप का बच्चा आप को सहीसलामत मिल जाएगा. अगर आप ने भूल से भी इस बात का जिक्र पुलिस से किया तो अपने बच्चे की मौत के आप खुद जिम्मेदार होंगे. इस पत्र को गंभीरता से लेना, क्योंकि आप के बच्चे की जिंदगी का सवाल है.’

इकरामुल हक नहीं चाहते थे कि उन के इकलौते बेटे की जिंदगी पर कोई आंच आए, इसलिए उन्होंने फिरौती के पत्र के बारे में पुलिस को कुछ नहीं बताया. उन्होंने एक बैग में 6 लाख रुपए भर कर अपने एक निजी संबंधी इकराम को दे दिए. इकराम वह पैसे ले कर दोपहर 12 बजे हरिद्वार जाने वाली परिवहन निगम की एक बस में बैठ गया.

हरिद्वार डिपो में पहुंचते ही इकराम नोटों से भरा बैग सीट पर छोड़ कर नीचे उतर गया. काफी देर बाद भी जब कोई उस बैग को लेने नहीं आया तो इकराम ने इकरामुल हक को फोन कर के पूछा कि अब वह क्या करे? जब पैसे लेने कोई नहीं आया तो इकरामुल हक ने पैसे ले कर उसे घर आने को दिया. इकराम वह बैग ले कर घर लौट आया.

उधर पुलिस के शक की सुई बारबार रिहान को ट्यूशन पढ़ाने वाले रवि कुमार पर जा रही थी. लेकिन रिहान के घर वालों को रवि पर इतना विश्वास था कि वे पुलिस से यही कह रहे थे कि वह रवि को परेशान न करे. इस के बाद पुलिस ने रवि के बारे में खुफिया जानकारी इकट्ठी करनी शुरू कर दी. पुलिस को पता चला कि जिस दिन से रिहान लापता हुआ था, रवि का उसी दिन से मोबाइल बंद था. रिहान को रवि से बेहद लगाव था. लेकिन उस के लापता होने के कई दिनों बाद भी रवि रिहान के बारे में पूछने उस के घर नहीं गया.

रवि को जब लगने लगा कि पुलिस उस के पीछे पड़ी हुई है तो वह जसपुर छोड़ कर धामपुर चला गया. इकरामुल हक के घर से कुछ दूरी पर किसी के घर के बाहर सीसीटीवी कैमरा लगा था. पुलिस ने उस कैमरे की फुटेज देखी तो उस में काले रंग की एक स्कूटी, जिस का नंबर यूपी 020 एएल 9540 था, नजर आई. उस पर 2 लोग सवार थे. रिहान उन दोनों के बीच बैठा था.

पुलिस ने वह वीडियो रिहान के घर वालों को दिखाई तो उन्होंने रिहान के आगेपीछे बैठे दोनों लोगों की पहचान रिहान के टीचर रवि कुमार और उस के मौसेरे भाई उमेश के रूप में की. उमेश जसपुर के छिपियान मोहल्ले में रहता था. इस फुटेज को देखने के बाद पुलिस को पूरा विश्वास हो गया कि रिहान के अपहरण में रवि का ही हाथ है. इस के बाद रिहान के घर वालों को भी रवि कुमार पर शक हो गया था.

पुलिस रवि की तलाश करने लगी तो पता चला कि वह धामपुर में किसी कोचिंग सेंटर में पढ़ा रहा है. इस के बाद पुलिस ने कांस्टेबल आसिफ और रिहान के मामा सरफराज को उस के पीछे लगा दिया. दोनों ही धामपुर के उस कोचिंग सेंटर पहुंच गए, जहां रवि पढ़ाता था. वह कोचिंग सेंटर किसी अनिल कुमार का था.

रहस्य खुलवाने के लिए आसिफ और सरफराज ने स्टूडेंट बन कर उस कोचिंग सेंटर में 2 दिनों की डैमो क्लास अटैंड करने का फैसला लिया. कांस्टेबल आसिफ ने क्लास अटैंड करने के बाद पहले दिन ही रवि कुमार से दोस्ती गांठ ली. 2 दिनों में ही वह उस से इतना घुलमिल गया कि आसिफ ने उस के पेट की सारी हकीकत निकाल ली.

रवि आसिफ और सरफराज के बारे में नहीं जानता था. वह परेशान नजर आ रहा था, इसी का फायदा दोनों ने उठाया था. कांस्टेबल आसिफ ने सारी बातें थानाप्रभारी डी.आर. आर्य को बता दीं. इस के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. उस की निशानदेही पर उस के मौसेरे भाई उमेश को भी पुलिस ने पकड़ लिया.

दोनों से रिहान के बारे में पूछताछ की गई तो उन्होंने स्वीकार कर लिया कि रिहान का अपहरण उन्होंने ही किया था और अब वह इस दुनिया में नहीं है. उन दोनों से उस की लाश के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उस की लाश आजमगढ़ के जंगल में है.

रात में ही उन दोनों को ले कर पुलिस आजमगढ़ पहुंची. उस घने जंगल में रवि और उमेश वह जगह भूल गए, जहां उन्होंने रिहान की लाश छिपाई थी. वह पुलिस को जंगल में घुमाते रहे. सर्च लाइट में कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आखिर एक जगह रिहान के कपड़े मिल गए. जहां पर कपड़े मिले थे उस जगह पर पहुंच कर रवि और उमेश को जगह याद आ गई.

वे पुलिस को जंगल में एक ऐसी जगह ले गए, जहां जमीन में एक बड़ी बिल बनी थी. उसी बिल में ही उन्होंने रिहान की लाश छिपाई थी. पुलिस ने उस बिल की खुदाई कराई तो उस में से एक कंकाल बरामद हुआ. वह कंकाल रिहान का ही हो सकता था. डेढ़ महीने में उस के शरीर को जंगली जानवर खा गए होंगे.

29 दिसंबर की सुबह पुलिस ने घटनास्थल की आवश्यक काररवाई कर के कंकाल और उस के कपड़ों को अपने कब्जे में ले लिया. इस के बाद दोनों अभियुक्तों को ले कर जसपुर लौट आई. रेहान के घर वालों को उस की हत्या का पता चला तो घर में कोहराम मच गया.

पुलिस द्वारा दोनों अभियुक्तों से की गई पूछताछ में रिहान के अपहरण और हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—

रवि उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर के कस्बा नजीबाबाद निवासी गजराम का बेटा था. गजराम सरकारी स्कूल में अध्यापक थे. उन के 4 बच्चों में रवि सब से छोटा था. रवि ने बिजनौर के वर्धमान डिग्री कालेज से बीएससी की थी. इस के बाद वह नौकरी के लिए तैयारी करने लगा था. काफी कोशिश के बाद भी उसे नौकरी नहीं मिली तो वह अप्रैल से जसपुर के एक निजी स्कूल में पढ़ाने लगा. खाली समय में वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ा दिया करता था.

रवि कोई ऐसा काम करना चाहता था, जिस से उसे अच्छी कमाई हो. वह सोचता था कि अगर वह अपना कोचिंग सैंटर खोल ले तो उस से उसे अच्छी कमाई हो सकती है. लेकिन कोचिंग सेंटर खोलने के लिए उस के पास पैसे नहीं थे. पैसे कहां से आएं, इस के लिए वह अपने दिमागी घोड़े दौड़ाने लगा.

उस के दिमाग में आया कि अगर वह किसी बच्चे का अपहरण कर के मोटी फिरौती ले कर अपना कोचिंग सेंटर खोल सकता है. उसे यह उपाय तो सही लगा, लेकिन पकड़े जाने के डर की वजह से वह किसी बच्चे के अपहरण का साहस नहीं कर पा रहा था. उस ने जब भी हिम्मत की, हर बार हिम्मत जवाब दे गई.

इस बारे में उस ने अपने मौसेरे भाई उमेश से सलाह की. उमेश जसपुर के मोहल्ला छिपियान में रहता था. उस के पिता राकेश कुमार का कुछ साल पहले निधन हो चुका था. उस के बाद उस के यहां आर्थिक समस्या खड़ी हो गई थी. उस की मां घर का खर्च चलाने के लिए कुछ लोगों के घरों में काम करती थी.

उमेश थोड़ा बड़ा हुआ तो काशीपुर में एक कलर लैब में नौकरी करने लगा. परिवार की सीमित आमदनी थी, जिस से उस के शौक पूरे नहीं हो पाते थे. यही वजह थी कि जब रवि ने उस से किसी बच्चे के अपहरण के बारे में सलाह मांगी तो वह खुद यह काम करने के लिए तैयार हो गया.

बिना मेहनत के अमीर बनने की बात आई तो वे सोचने लगे कि किस बच्चे को निशाना बनाया जाए. जिस के अपहरण से उन्हें मोटी रकम मिल जाए. उसी बीच रवि की निगाहों में रिहानुल हक उर्फ रिहान चढ़ गया. वह रिहान को ट्यूशन पढ़ाता ही था. उस के घर में उस की अच्छी पैठ भी थी. एक तरह से रिहान के घर वाले उसे अपने घर का सदस्य मानते थे. रवि उसे उसी के घर में ट्यूशन पढ़ाने के बाद अपने साथ स्कूल भी ले जाता था.

इसी वजह से उसे लगा कि रिहान का अपहरण करने से उस के घर वाले व अन्य लोग उस पर शक नहीं करेंगे. इस के बाद उस ने उमेश से बात की. रिहान के पिता अच्छी हैसियत वाले थे, इसलिए फिरौती में उन से मोटी रकम मिल सकती थी. वह उन का एकलौता बेटा था. योजना बनाने के बाद दोनों मौके की तलाश में लग गए.

21 नवंबर को रवि और उमेश ने रिहान के अपहरण की योजना बनाई और स्कूटी ले कर उस के घर की ओर चल पड़े. रिहान अपने दरवाजे पर खड़ा था. उन्हें देखते ही वह उन के पास आ गया. रवि ने उसे स्कूटी पर बैठा लिया. उस के बैठते ही वे तुरंत वहां से निकल गए. रिहान ने उन से पूछा कि वे कहां जा रहे हैं तो रवि ने कह दिया कि वे घूमने जा रहे हैं.

बच्चों को घूमना अच्छा लगता है. इसलिए जब वह पतरामपुर वाली रोड से होते हुए जंगल की तरफ चले तो जंगल देख कर रिहान खुश हो गया. उस समय वह अपने घर वालों को भूल गया. रिहान को घुमातेफिराते उस से बातें करते वे शहर से 20 किलोमीटर दूर कालू सिद्ध की मजार से आगे अमानगढ़ के जंगल में पहुंच गए. यह जंगल जिला बिजनौर में पड़ता है. रवि और उमेश रिहान को नदी तक स्कूटी से ले गए. इस के बाद नदी पार कर के जंगल में चले गए.

जंगल में रिहान डरने लगा. वह रोने लगा तो रवि ने उसे समझाने की कोशिश की. लेकिन वह चुप होने का नाम ही नहीं ले रहा था. वह जोरजोर से रोनेचिल्लाने लगा तो कहीं कोई उस के रोनेचिल्लाने की आवाज सुन न ले, रवि और उमेश डर गए. उन्होंने उस के मुंह पर कपड़ा बांध दिया. वह कहीं भाग न जाए, इस के लिए उन्होंने उसे एक पेड़ से बांध दिया. इस के बाद वहीं बैठ कर आगे की योजना बनाने लगे.

उसी बीच दम घुटने से रिहान की मौत हो गई. उस के मरने से दोनों बुरी तरह घबरा गए. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि अब वे क्या करें. फिरौती मांगने वाली बात उन के दिमाग से उड़ गई. उन्होंने जल्दी से उस के कपड़े उतारे और उसे वहीं किसी जानवर की बिल में डाल दिया. वहां से कुछ दूरी पर उस के कपड़े फेंक दिए.

रिहान को ठिकाने लगाने के बाद रवि ने 6 लाख की फिरौती के लिए इकरामुल हक के पते पर एक पत्र भेजा. उन्होंने फिरौती की रकम एक बैग में रख कर जसपुर से हरिद्वार को दोपहर 12 बजे जाने वाली बस में रखने को कहा. वह बस हरिद्वार करीब 4 बजे पहुंचती थी. इसलिए निर्धारित समय पर वह हरिद्वार के बसअड्डे पर खड़े हो कर जसपुर से आने वाली बस का इंतजार करने लगे.

वह बस हरिद्वार बसअड्डे पर पहुंची तो उन्होंने देखा कि उस में से एक आदमी नहीं उतरा था. रवि को लगा कि शायद वह पुलिस वाला है, इसलिए बैग लेने के लिए वह बस में नहीं घुसा और उमेश को ले कर वहां से चला गया.

जब लोगों को पता चला कि रिहान की हत्या किसी और ने नहीं, उस के टीचर ने की है तो लोग हैरान रह गए. गांवसमाज के ही नहीं, राजनैतिक लोग भी सांत्वना देने इकरामुल हक के यहां आने लगे. जिस स्कूल में रिहान पढ़ता था, उस स्कूल की प्रधानाचार्य मीनाक्षी चौहान भी शोक प्रकट करने आईं. शहर के अन्य स्कूलों के बच्चों ने कैंडिल मार्च निकाला.

कुमाऊं रेंज के डीआईजी ने मामले का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 5 हजार रुपए तो एसएसपी केवल खुराना ने ढाई हजार रुपए का पुरस्कार दिया है. इस के अलावा एसएसपी ने कांस्टेबल मोहम्मद आसिफ को 1000 रुपए का नकद पुरस्कार दे कर उस के कार्य की सराहना की.

पूछताछ के बाद दोनों अभियुक्तों को पुलिस ने भादंवि की धारा 364ए/302/201 के तहत गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. पुलिस ने शव के अवशेष को फोरेंसिक जांच व डीएनए जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया है. इस केस की जांच एसएसआई एस.सी. जोशी कर रहे हैं.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित