लाली मेरे प्यार की : प्यार की राह में मिली मौत – भाग 4

लाली बगीचे में पहुंची तो वहां मंदिर के पास विकेश खड़ा था. एक पल दोनों खामोश एकदूसरे को निहारते रहे. विकेश ने ही चुप्पी तोड़ी, ‘‘कैसी हो भाभी?’’

‘‘मुझे भाभी मत कहो,’’ बुझे मन से लाली ने उत्तर दिया, ‘‘तुम्हारे भाई ने यह हक खो दिया है.’’ लाली बोली.

‘‘जानता हूं, तभी तो आप से मिलने के लिए महीनों से परेशान था.’’ विकेश ने कहा.

‘‘वह क्यों?’’

‘‘यही कि आप के जख्मी दिल को सहानुभूति का मरहम लगा कर आप की पीड़ा को कुछ कम कर सकूं.’’

‘‘आप ने मेरे लिए इतना सोचा, शुक्रिया.’’

‘‘इस में शुक्रिया की क्या बात है.’’

‘‘अब तो उन के बिना मैं ने जीना सीख लिया है, कह देना उन से.’’

‘‘क्या मैं आप की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा सकता हूं?’’ विकेश ने सकुचाते हुए उस की ओर अपना दाहिना हाथ बढ़ाया तो लाली कुछ सोचने लगी. फिर कुछ देर बाद उस ने भी अपना दाहिना हाथ उस की ओर बढ़ा दिया.

‘‘बताओ, क्यों बुलाया था मुझे?’’ अपना हाथ छुड़ाते हुए लाली ने पूछा.

‘‘मुझे आप का दुख देखा नहीं जा

रहा था.’’

‘‘कहा न मैं ने, किसी के बगैर जीना सीख लिया है.’’

‘‘लेकिन मैं…मैं आप से…’’

‘‘तुम मुझ से क्या?’’

‘‘मैं आप से प्यार करने लगा हूं.’’

‘‘लेकिन मैं तुम से प्यार नहीं करती.’’

‘‘मैं बिट्टू जैसा नहीं हूं, जो आप को धोखा दूं.’’

‘‘मेरा ‘प्यार’ शब्द से भरोसा उठ गया है. इस शब्द ने बहुत दुख दिया है मुझे. टूट गई हूं मैं. कोई ऐसा कंधा भी नहीं, जिस पर अपना सिर रख कर आंसू बहा सकूं.’’

‘‘है न मेरा कंधा, जिस पर सिर रख कर आप जी भर कर रो सकती हैं. मैं बिलकुल भी बुरा नहीं मानूंगा.’’

‘‘बहुतबहुत शुक्रिया विकेशजी,जो मेरे जख्मों पर आप ने प्यार का मरहम लगाने की कोशिश की. मेरे लिए सहानुभूति के दो बोल बोले. अच्छा, मैं चलती हूं. बहुत देर हुई घर से निकले.’’

‘‘ठीक है, निकलिए यहां से. मैं भी चलता हूं पर अपने आप को भी अकेला मत मानिएगा. इस मुश्किल दौर में मैं आप के साथ हूं.

जब याद करेंगी, तब मुझे अपने सामने पाएंगी. बाय.’’

‘‘बायबाय,’’ कहती हुई लाली अपने घर निकल गई और विकेश अपने घर. वह आज बहुत खुश था. उस ने अपने मन की बात लाली से जो कह दिया था.

विकेश ने भी तोड़ दिया लाली का दिल

दरअसल, बिट्टू जब लाली से प्यार करता था और प्यार भरी बातें विकेश से किया करता था, तभी से विकेश लाली से प्यार करने लगा था. लेकिन अपने मन की बात वह कभी उस के सामने जाहिर नहीं कर सका था. वह मौका आज उसे मिल गया था. मौका मिलते ही उस ने चौका मार दिया और उस का तीर सही निशाने पर जा लगा था.

आहिस्ताआहिस्ता विकेश ने लाली को अपने प्यार के शीशे में उतार लिया था. बिट्टू के प्यार और यादों को भुला कर लाली ने अपने दिल में विकेश को मुकाम दे दिया था. लाली विकेश का पहला प्यार था.

लाली के करीब आ कर विकेश को महसूस हुआ कि प्यार कितना खूबसूरत एहसास है, जिस के बूते जीवन जीना कितना सुहावना हो जाता है. दुनिया कितनी हसीन हो जाती है. लाली विकेश की नजदीकी से बेहद खुश थी और विकेश लाली को पा कर खुश था.

न जाने लाली के प्यार को किस की नजर लगी थी जो उस का प्यार मुकम्मल हो ही नहीं रहा था. इस बार भी लाली के साथ कुछ ऐसा ही हुआ और वह अधूरी रह गई.

दरअसल, लाली और विकेश के बीच 2 साल तक प्यार का खेल चलता रहा. विकेश के घर वालों को जब इस की जानकारी हुई तो उन्होंने उसे बेंगलुरु अपने रिश्तेदार के यहां भेज दिया था. इस के बाद एक बार फिर लाली अकेली रह गई विरह की अग्नि में जलने के लिए.

इसी बीच लाली के घर वालों ने सयानी हो चुकी बेटी के हाथ कहीं और पीले कर दिए. लाली ब्याह कर कहीं और चली गई. वह पति की बांहों के झूले में बहुत खुश थी.

एक साल बाद जब विकेश बेंगलुरु से वापस घर लौटा तो उसे यकीन था कि उस का प्यार लाली उस के आने के इंतजार में होगी. लेकिन जब उसे यह पता चला कि लाली ने किसी और से शादी कर ली है तो नफरत की आग में जलभुन गया. उसे अब भी यकीन नहीं हो रहा था कि लाली उस की नहीं, तीसरे की हो चुकी है.

विकेश को लाली का घर बसाना रास नहीं आया. उस का सोचना था कि अगर लाली उस की नहीं हो सकती तो वह किसी और की भी नहीं हो सकती. लाली को तो मरना ही होगा.

लाली के प्यार में पागल विकेश ने मन में खतरनाक योजना बना ली और इस योजना में उस ने बड़े चचेरे भाई बिट्टू को शामिल कर लिया था.

दोनों भाई बने लाली की जान के प्यासे

योजना के मुताबिक विकेश और बिट्टू ने 6 अगस्त, 2022 की सुबह बाजार से एक फलदार चाकू खरीदा और अपने पास रख लिया. इन दिनों लाली मायके आई हुई थी. यह बात विकेश और बिट्टू को पता थी. पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों सूरज ढलने का इंतजार करने लगे कि कब सूरज ढले और वे अपने मंसूबे को अंजाम दें.

आखिरकार, शाम साढ़े 7 बजे विकेश ने लाली को फोन कर के आखिरी बार मिलने के लिए बगीचे में बुलाया और उस से यह भी वादा किया कि आज के बाद उसे कभी न तो तंग करेगा और न ही उसे फोन करेगा. अगर उस से मिलने नहीं आई तो वह अपने प्यार का राज उस के पति के सामने खोल कर रख देगा.

विकेश की धमकी से लाली उस से मिलने के लिए मजबूर हो गई. फिर वह बहाना कर के अपना फोन साथ ले कर विकेश से मिलने बगीचे में पहुंच गई. वहां विकेश उस का इंतजार कर रहा था और बिट्टू मंदिर की ओट में छिप गया था.

थोड़ी देर तक दोनों के बीच नोकझोंक होती रही. तब तक बिट्टू भी बाहर निकल आया. दोनों को देख लाली खतरे को भांप गई और वहां से भागने की सोची. लेकिन बिट्टू ने उसे कस कर पकड़ लिया और उस के मुंह पर कस कर हाथ रख उसे घसीट कर कुछ दूर आगे ले गया. बिट्टू की पकड़ से छूटने के लिए वह जद्दोजहद कर रही थी.

बिट्टू ने उसे जमीन पर पटक दिया. विकेश ने उस के दोनों पैर पकड़ लिए. इधर कमर में खोंस कर रखा धारदार चाकू बिट्टू ने निकाला और उस का कवर दूसरी ओर फेंक चाकू से लाली का गला रेत कर उसे मौत के घाट उतार दिया.

फिर उस की लाश वहीं छोड़ कर चाकू और उस का फोन साथ ले कर रामपुर कालेज के सामने स्थित चौर के गहरे पानी में चाकू और फोन फेंक दिए और अपने घर लौट आए और आराम से सो गए.

विकेश और बिट्टू ने फूलप्रूफ योजना बनाई थी. मगर पुलिस ने उन की योजना पर पानी फेर दिया और घटना के 20 दिनों बाद वे गिरफ्तार कर लिए गए. उन की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त चाकू बरामद कर लिया.

कथा लिखे जाने तक दोनों आरोपी जेल की सलाखों के पीछे अपने जुर्म की सजा काट रहे थे.     द्य

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

जब चढ़ा प्यार का नशा : नाजायज संबंधों की फिसलन भरी राह – भाग 3

नारायणी की दोनों बहुओं मीनाक्षी और अंजू के पास मोबाइल फोन नहीं थे. केवल घर के पुरुषों के पास ही मोबाइल फोन थे. लेकिन अब्दुल ने अपनी प्रेमिका मीनाक्षी को सिमकार्ड के साथ एक मोबाइल फोन खरीद कर दे दिया था, जिसे वह अपने घर वालों से छिपा कर रखती थी. उस का उपयोग वह केवल अब्दुल से बात करने के लिए करती थी. बातों के अलावा वह उस से वाट्सऐप पर भी चैटिंग करती थी. पति ने जब उस के जिम जाने पर रोक लगा दी तो वह फोन द्वारा अपने प्रेमी के संपर्क में बनी रही.

एक तो मीनाक्षी का अपने प्रेमी से मिलनाजुलना बंद हो गया था, दूसरे पति ने जो उस के मायके वालों से उस की शिकायत कर दी थी, वह उसे बुरी लगी थी. अब प्रेमी के सामने उसे सारे रिश्तेनाते बेकार लगने लगे थे. पति अब उसे सब से बड़ा दुश्मन नजर आने लगा था. उस ने अब्दुल से बात कर के पति नाम के रोड़े को रास्ते से हटाने की बात की. इस पर अब्दुल ने कहा कि वह उसे नींद की गोलियां ला कर दे देगा. किसी भी तरह वह उसे 10 गोलियां खिला देगी तो इतने में उस का काम तमाम हो जाएगा.

एक दिन अब्दुल ने मीनाक्षी को नींद की 10 गोलियां ला कर दे दीं. मीनाक्षी ने रात के खाने में पति को 10 गोलियां मिला कर दे दीं. रात में अनूप की तबीयत खराब हो गई तो उस के बच्चे परेशान हो गए. उन्होंने रात में ही दूसरे मकान में रहने वाले चाचा राज सिंह को फोन कर दिया. वह उसे मैक्स अस्पताल ले गए, जहां अनूप को बचा लिया गया. पति के बच जाने से मीनाक्षी को बड़ा अफसोस हुआ.

इस के कुछ दिनों बाद मीनाक्षी ने पति को ठिकाने लगाने के लिए एक बार फिर नींद की 10 गोलियां खिला दीं. इस बार भी उस की तबीयत खराब हुई तो घर वाले उसे मैक्स अस्पताल ले गए, जहां वह फिर बच गया.

मीनाक्षी की फोन पर लगातार अब्दुल से बातें होती रहती थीं. प्रेमी के आगे पति उसे फूटी आंख नहीं सुहा रहा था. वह उस से जल्द से जल्द छुटकारा पाना चाहती थी. उसी बीच अनूप की मां नारायणी को भी जानकारी हो गई कि बड़ी बहू मीनाक्षी की हरकतें अभी बंद नहीं हुई हैं. अभी भी उस का अपने यार से याराना चल रहा है.

अनूप तो अपने समय पर औफिस चला जाता था. उस के जाने के बाद पत्नी क्या करती है, इस की उसे जानकारी नहीं मिलती थी. उस के घर से कुछ दूर ही मकान नंबर 74 में छोटा भाई राज सिंह अपने परिवार के साथ रहता था. मां भी वहीं रहती थी. कुछ सोचसमझ कर अनूप पत्नी और बच्चों को ले कर राज सिंह के यहां चला गया. मकान बड़ा था, पहली मंजिल पर सभी लोग रहने लगे. यह घटना से 10 दिन पहले की बात है. उसी मकान में ग्राउंड फ्लोर पर अनूप का ट्रांसपोर्ट का औफिस था.

इस मकान में आने के बाद मीनाक्षी की स्थिति पिंजड़े में बंद पंछी जैसी हो गई. नीचे उस का पति बैठा रहता था, ऊपर उस की सास और देवरानी रहती थी. अब मीनाक्षी को प्रेमी से फोन पर बातें करने का भी मौका नहीं मिलता था. अब वह इस पिंजड़े को तोड़ने के लिए बेताब हो उठी. ऐसी हालत में क्या किया जाए, उस की समझ में नहीं आ रहा था?

एक दिन मौका मिला तो मीनाक्षी ने अब्दुल से कह दिया कि अब वह इस घर में एक पल नहीं रह सकती. इस के लिए उसे कोई न कोई इंतजाम जल्द ही करना होगा. अब्दुल ने मीनाक्षी को नींद की 90 गोलियां ला कर दे दीं. इस के अलावा उस ने जहांगीरपुरी में अपने पड़ोसी से एक छुरा भी ला कर दे दिया. तेजधार वाला वह छुरा जानवर की खाल उतारने में प्रयोग होता था. अब्दुल ने उस से कह दिया कि इन में से 50-60 गोलियां शाम के खाने में मिला कर पूरे परिवार को खिला देगी. गोलियां खिलाने के बाद आगे क्या करना है, वह फोन कर के पूछ लेगी.

अब्दुल के प्यार में अंधी मीनाक्षी अपने हंसतेखेलते परिवार को बरबाद करने की साजिश रचने लगी. वह उस दिन का इंतजार करने लगी, जब घर के सभी लोग एक साथ रात का खाना घर में खाएं. नारायणी के पड़ोस में रहने वाली उन की रिश्तेदार कुसुम की बेटी की शादी थी. शादी की वजह से उन के घर वाले वाले भी खाना कुसुम के यहां खा रहे थे. मीनाक्षी अपनी योजना को अंजाम देने के लिए बेचैन थी, पर उसे मौका नहीं मिल रहा था.

इत्तफाक से 19 जून, 2017 की शाम को उसे मौका मिल गया. उस शाम उस ने कढ़ी बनाई और उस में नींद की 60 गोलियां पीस कर मिला दीं. मीनाक्षी के दोनों बच्चे कढ़ी कम पसंद करते थे, इसलिए उन्होंने कम खाई. बाकी लोगों ने जम कर खाना खाया. देवरानी अंजू ने तो स्वादस्वाद में कढ़ी पी भी ली. चूंकि मीनाक्षी को अपना काम करना था, इसलिए उस ने कढ़ी के बजाय दूध से रोटी खाई.

खाना खाने के बाद सभी पर नींद की गोलियों का असर होने लगा. राज सिंह सोने के लिए बालकनी में बिछे पलंग पर लेट गया, क्योंकि वह वहीं सोता था. अनूप और उस की मां नारायणी ड्राइंगरूम में जा कर सो गए. उस के दोनों बच्चे बैडरूम में चले गए. राज सिंह की पत्नी अंजू अपनी 12 साल की बेटी के साथ अपने बैडरूम में चली गई.

सभी सो गए तो मीनाक्षी ने आधी रात के बाद अब्दुल को फोन किया. अब्दुल ने पूछा, ‘‘तुम्हें किसकिस को निपटाना है?’’

‘‘बुढि़या और अनूप को, क्योंकि इन्हीं दोनों ने मुझे चारदीवारी में कैद कर रखा है.’’ मीनाक्षी ने कहा.

‘‘ठीक है, तुम उन्हें हिला कर देखो, उन में से कोई हरकत तो नहीं कर रहा?’’ अब्दुल ने कहा.

मीनाक्षी ने सभी को गौर से देखा. राज सिंह शराब पीता था, ऊपर से गोलियों का असर होने पर वह गहरी नींद में चला गया था. उस ने गौर किया कि उस की सास नारायणी और पति अनूप गहरी नींद में नहीं हैं. इस के अलावा बाकी सभी को होश नहीं था. मीनाक्षी ने यह बात अब्दुल को बताई तो उस ने कहा, ‘‘तुम नींद की 10 गोलियां थोड़े से पानी में घोल कर सास और पति के मुंह में सावधानी से चम्मच से डाल दो.’’

मीनाक्षी ने ऐसा ही किया. सास तो मुंह खोल कर सो रही थी, इसलिए उस के मुंह में आसानी से गोलियों का घोल चला गया. पति को पिलाने में थोड़ी परेशानी जरूर हुई, लेकिन उस ने उसे भी पिला दिया.

आधे घंटे बाद वे दोनों भी पूरी तरह बेहोश हो गए. मीनाक्षी ने फिर अब्दुल को फोन किया. तब अब्दुल ने सलाह दी कि वह अपनी देवरानी के कपड़े पहन ले, ताकि खून लगे तो उस के कपड़ों में लगे. देवरानी के कपड़े पहन कर मीनाक्षी ने अब्दुल द्वारा दिया छुरा निकाला और नारायणी का गला रेत दिया. इस के बाद पति का गला रेत दिया.

इस से पहले मीनाक्षी ने मेहंदी लगाने वाले दस्ताने हाथों में पहन लिए थे. दोनों का गला रेत कर उस ने अब्दुल को बता दिया. इस के बाद अब्दुल ने कहा कि वह खून सने कपड़े उतार कर अपने कपड़े पहन ले और कढ़ी के सारे बरतन साफ कर के रख दे, ताकि सबूत न मिले.

बरतन धोने के बाद मीनाक्षी ने अब्दुल को फिर फोन किया तो उस ने कहा कि वह उन दोनों को एक बार फिर से देख ले कि काम हुआ या नहीं? मीनाक्षी ड्राइंगरूम में पहुंची तो उसे उस का पति बैठा हुआ मिला. उसे बैठा देख कर वह घबरा गई. उस ने यह बात अब्दुल को बताई तो उस ने कहा कि वह दोबारा जा कर गला काट दे नहीं तो समस्या खड़ी हो सकती है.

छुरा ले कर मीनाक्षी ड्राइंगरूम में पहुंची. अनूप बैठा जरूर था, लेकिन उसे होश नहीं था. मीनाक्षी ने एक बार फिर उस की गरदन रेत दी. इस के बाद अनूप बैड से फर्श पर गिर गया. मीनाक्षी ने सोचा कि अब तो वह निश्चित ही मर गया होगा.

अपने प्रेमी की सलाह पर उस ने अपना मोबाइल और सिम तोड़ कर कूड़े में फेंक दिया. जिस छुरे से उस ने दोनों का गला काटा था, उसे और दोनों दस्ताने एक पौलीथिन में भर कर सामने बहने वाले नाले में फेंक आई. इस के बाद नींद की जो 10 गोलियां उस के पास बची थीं, उन्हें पानी में घोल कर पी ली और बच्चों के पास जा कर सो गई.

मीनाक्षी और अब्दुल से पूछताछ कर के पुलिस ने उन्हें भादंवि की धारा 307, 328, 452, 120बी के तहत गिरफ्तार कर 22 जून, 2017 को रोहिणी न्यायालय में महानगर दंडाधिकारी सुनील कुमार की कोर्ट में पेश कर एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि में अन्य सबूत जुटा कर पुलिस ने उन्हें फिर से न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

मीनाक्षी ने अपनी सास और पति को जान से मारने की पूरी कोशिश की थी, पर डाक्टरों ने उन्हें बचा लिया है. कथा लिखे जाने जाने तक दोनों का अस्पताल में इलाज चल रहा था.

मीनाक्षी के मायके वाले काफी धनाढ्य हैं. उन्होंने उस की शादी भी धनाढ्य परिवार में की थी. ससुराल में उसे किसी भी चीज की कमी नहीं थी. खातापीता परिवार होते हुए भी उस ने देहरी लांघी. उधर अब्दुल भी पत्नी और एक बेटी की अपनी गृहस्थी में हंसीखुशी से रह रहा था. उस का बिजनैस भी ठीक चल रहा था. पर खुद की उम्र से 10 साल बड़ी उम्र की महिला के चक्कर में पड़ कर अपनी गृहस्थी बरबाद कर डाली.

बहरहाल, गलती दोनों ने की है, इसलिए दोनों ही जेल पहुंच गए हैं. निश्चित है कि दोनों को अपने किए की सजा मिलेगी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

काजल का असली रंग : बेटे को पढ़ाने वाले टीचर से बनाए संबंध – भाग 3

योजना बनाने के बाद काजल ने पति को इस पूजा के लिए मना लिया. दिलीप इसलिए तैयार हुआ था क्योंकि उस की आर्थिक स्थिति एकदम जर्जर हो चुकी थी. वह पैसेपैसे के लिए मोहताज था. उस ने सोचा कि संभव है ऐसा करने पर उसे आर्थिक लाभ मिल जाए.

बहरहाल, सब कुछ योजना के मुताबिक चल रहा था. काजल ने 25 नवंबर, 2017 को दिन में एक तेज धार वाला गंडासा दिलीप की मोटरसाइकिल की डिक्की में छिपा कर रख दिया. उस ने यह बात फोन कर के लक्ष्मण को बता दी. अब केवल योजना को अमलीजामा पहनाना बाकी था. लक्ष्मण ने काजल को भरोसा दिलाया कि आज काम तमाम हो जाएगा.

25 नवंबर की शाम साढ़े 6 बजे के करीब दिलीप बेटे के लिए कौपी खरीदने के लिए घर से अकेला निकला. घर से निकल कर जब वह चौर बाजार पहुंचा तो पीछे से लक्ष्मण पंडित बन कर उस की मोटरसाइकिल के पास पहुंच गया.

दरअसल, दिलीप के घर से निकलते ही काजल ने लक्ष्मण को फोन कर के बता दिया था कि शिकार घर से निकल चुका है. चौर में उस से मुलाकात हो जाएगी. आगे क्या करना है, यह उसे पता था ही.

चौर बाजार में उस की मुलाकात दिलीप से हुई तो उस ने काजल का परिचय देते हुए उसे पूजा वाली बात बताई. दिलीप समझ गया कि यह वही पंडित है, जिस से पूजा करानी है.

लक्ष्मण उसे बाइक पर बैठा कर चौर (तेघरा) से समस्तीपुर ले आया, जहां उस ने पूजा की सामग्री खरीदी. सामग्री खरीदने के बाद वह दिलीप को ले कर मोटरसाइकिल से रानीटोल स्थित माधोपुर बूढ़ी गंडक नदी के किनारे पहुंच गया. यह इलाका जिला समस्तीपुर में आता था.

योजना के अनुसार, लक्ष्मण ने पहले दिलीप से पूजा करवाई. पूजा की प्रारंभिक विधि समाप्त होने के बाद उस ने पैसे पाने के लिए दिलीप से 15 मिनट तक आंखें बंद कर ध्यानमग्न होने को कहा. साथ यह भी कहा कि आंखें बंद करने के बाद ही पैसे मिलेंगे.

दिलीप ध्यानमग्न हो गया. तभी लक्ष्मण बाइक की डिक्की में रखा धारदार गंडासा ले आया. उस ने पीछे से दिलीप की गरदन पर जोरदार वार किया. गरदन कटने से दिलीप की मौके पर ही मौत हो गई.

दिलीप की हत्या करने के बाद लक्ष्मण वहां से बाइक से वापस बेगूसराय लौट गया. बेगूसराय जाते वक्त लक्ष्मण ने दिलीप का मोबाइल फोन गरुआरा चौर की झाडि़यों में फेंक दिया. वहां से आगे जा कर उस ने गंडासा दलसिंहसराय के पास एनएच-28 के किनारे एक झाड़ी में फेंक दिया, ताकि पुलिस उस तक कभी न पहुंच सके.

इत्मीनान होने के बाद वह मोटरसाइकिल ले कर प्रेमिका काजल के घर रानीटोल पहुंचा. काजल उस के आने का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी. लक्ष्मण को देखते ही उस का चेहरा खुशी से खिल उठा. घर में सभी सो गए थे. उस ने दबे पांव मोटरसाइकिल बरामदे में चढ़ा दी. उस वक्त रात के करीब 10 बज रहे थे.

मोटरसाइकिल खड़ी करवाने के बाद काजल ऊपर खाली पड़े कमरे में गई तो पीछेपीछे लक्ष्मण भी हो लिया. वहां दोनों एकदूसरे की बांहों में समा गए. बाद में लक्ष्मण अपने घर चला गया.

दोनों के रास्ते का रोड़ा साफ हो चुका था. दोनों यह सोच कर खुश थे कि पुलिस उन तक कभी नहीं पहुंच पाएगी. लेकिन कानून के लंबे हाथों ने उन के मंसूबों पर पानी फेर दिया और दोनों वहां पहुंच गए, जहां उन का असली ठिकाना था यानी जेल की सलाखों के पीछे. अंश अपने दादा अनिल के साथ अपने पैतृक गांव बूढ़ीवन आ गया और दादादादी के साथ रह रहा है.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

फर्जी पत्रकार की दीवानगी – भाग 3

अनिभा ने बादल से सदा इसी तरह साथ निभाने का वादा भी किया था. फरजी पत्रकारों के गैंग के सदस्यों के साथ बादल जब जेल चला गया तो अनिभा का झुकाव आईटी पार्क स्थित पेटीएम कंपनी के मैनेजर अंबुज शर्मा की तरफ हो गया. अंबुज भी स्मार्ट था और साथ में काम करता था, लिहाजा दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई.

बादल की मां घर में पापड़ बनाने का काम करती थी और उस के पिता इस काम में उस की मदद करते थे. बादल की मां को कैंसर की बीमारी थी, जिस का इलाज भी चल रहा था. बादल के जेल जाने से उस की मां को बहुत सदमा पहुंचा और वह धीरेधीरे गंभीर रूप से बीमार हो गई.

6 महीने के बाद जेल से बादल बाहर आया, तब तक उस की मां बिस्तर पकड़ चुकी थी. बादल को यह देख कर बहुत दुख हुआ, वह मां के इलाज के लिए पैसे जुटाने के लिए फिर से फरजी पत्रकारों के गैंग में शामिल हो गया, मगर 2 महीने बाद ही उस की मां की मौत हो गई.

इस के बाद बादल काफी टूट चुका था. परिवार की माली हालत भी मां के इलाज में पतली हो चुकी थी. मां की मौत के बाद पापड़ बनाने का काम बंद हो गया.

अनिभा को भी जब मालूम हुआ कि बादल फरजी पत्रकारों के गिरोह में शामिल है, जिन का काम आए दिन लोगों के साथ धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग के जरिए पैसा कमाना है तो उस ने बादल से दूरियां बनानी शुरू कर दीं.

अनिभा का प्यार अब अंबुज के साथ परवान चढ़ रहा था. जब बादल को इस बात का पता चला तो वह भड़क गया.

एक दिन बादल ने कंपनी के औफिस में जा कर मैनेजर अंबुज को धमकाते हुए मारपीट भी कर दी. इस वारदात की शिकायत तिलवारा घाट थाने में दर्ज हुई. इस घटना के कुछ दिन बाद पेटीएम कंपनी ने मैनेजर अंबुज शर्मा का ट्रांसफर भोपाल कर दिया.

अंबुज का ट्रांसफर भोपाल हो जरूर गया था, लेकिन अनिभा मैनेजर के संपर्क में बनी रही.

फरजी पत्रकार बना बादल भले ही शादीशुदा था, मगर उस के कोई औलाद नहीं हुई थी. अपनी बीवी की अनदेखी कर वह अनिभा का दीवाना बना हुआ था.

अंबुज शर्मा के ट्रांसफर के बाद भी उसे यह शक बना रहता था कि कहीं अनिभा फोन के जरिए उस के संपर्क में तो नहीं रहती. जब कभी वह अनिभा को फोन मिलाता और उस का फोन व्यस्त रहता तो बादल का यह शक और गहरा जाता.

पुलिस जांचपड़ताल में यह जानकारी भी सामने आई है कि वारदात से 13-14 दिन पहले अनिभा ने मोबाइल पर बादल की पत्नी से बात की थी. कौन्फ्रैंस में अनिभा का प्रेमी अंबुज था. अनिभा व अंबुज ने फोन पर उस की पत्नी को जानकारी दी कि बादल अनिभा को परेशान करता है.

अनिभा ने कहा कि वह बादल से किसी तरह का संबंध नहीं रखना चाहती है, मगर बादल उस का पीछा नहीं छोड़ रहा. अनिभा व अंबुज से हुई बातचीत की जानकारी पत्नी ने जब बादल को दी, बादल गुस्से से पागल हो गया.

23 जुलाई, 2022 को वह सुबह 6 बजे घर से कंपनी की ड्यूटी के लिए गई थी. वह अपने काम में बिजी थी. दोपहर के लगभग 3 बजे होंगे. इंद्रानगर रांझी निवासी बादल पटेल अपने साथी त्रिपुरी चौक गड़ा निवासी केतन रजक के साथ आईटी पार्क पहुंचा था. बादल व केतन की दोस्ती जेल में हुई थी.

पेटीएम कंपनी औफिस के सामने कार खड़ी कर के बादल गार्ड से बोला, ‘‘मैं अनिभा मैडम के घर से आया हूं. अनिभा को बाहर बुला दो, अर्जेंट मिलना है.’’

गार्ड ने तुरंत ही जा कर अनिभा के केबिन का दरवाजा खटखटाया और बोला, ‘‘मैडम, आप के घर से कोई मिलने आया है.’’

अनिभा ने सोचा शायद उस का भाई अंकित उस से मिलने आया होगा, इसलिए वह अपने काम को अधूरा छोड़ कर तुरंत ही केबिन से बाहर निकल औफिस के गेट पर आ गई.

जैसे ही अनिभा गेट पर पहुंची, वहां से बादल और केतन ने उसे जरूरी काम के लिए जाने को कह कर अपनी कार में बिठा लिया. अनिभा कार की पिछली सीट पर बैठी थी. वहीं बादल कार चला रहा था, उस के बगल की सीट पर उस का दोस्त केतन बैठा था.

आईटी पार्क से कुछ दूर चलने पर ही बरगी हिल्स में पान गुटखा के एक टपरे के पास बादल ने केतन को कार से उतार दिया था. बादल ने उस से कहा कि अनिभा से अकेले में बात करना चाहता है. 5 मिनट बाद लौट आएगा, जिस के बाद बादल अनिभा को ले कर कार से इधरउधर घूमता रहा. अनिभा बादल की हरकतों से अंजान नहीं थी.

एक साल पहले भी बादल अपने 3 साथियों के साथ जबरन उसे साथ ले गया था. उस समय भी बादल ने उस के साथ एक होटल में जबरदस्ती संबंध बनाए थे और बाद  में उसे छोड़ दिया था. अनिभा उस दिन भी यही समझ कर खामोश कार में बैठ गई कि बादल उस के साथ जोरजबरदस्ती कर के ही मानेगा.

अपने दोस्त विजय कुमार की स्विफ्ट कार में अनिभा को बिठा कर बादल उसे शहर घुमाता रहा. इस दौरान वह बारबार अनिभा से यही कहता रहा, ‘‘तुम अंबुज से दूर रहो, उस से फोन पर भी बात मत करो.’’

बादल अनिभा को ले कर शाम करीब 4 बजे मंगेली गांव में बाईपास पर बने नर्मदा पुल पर  पहुंचा. किसी बात को ले कर दोनों में तकरार इस कदर बढ़ी कि बादल ने कार की डिक्की में रखी पिस्तौल से उस पर 2 गोलियां चला दीं.

एक गोली अनिभा के सीने में लगी और उस के सीने से खून की धार फूट पड़ी. इस के बाद बादल ने पिस्तौल कार की सीट पर फेंक कार का दरवाजा खोला और हड़बड़ी में चप्पल वहीं छोड़ कर पुल की रेलिंग पर खड़े हो कर नर्मदा नदी में छलांग लगा दी.

परिवार का सहारा बनी अनिभा जहां 2 नावों की सवारी कर अपनी जान से हाथ धो बैठी, वहीं पत्रकारिता के पेशे को कलंकित करने वाला बादल शादीशुदा होने के बाद भी प्रेमिका के संबंध को किसी दूसरे मर्द के साथ न देख सका और उस की हत्या कर नर्मदा नदी में छलांग लगा कर उस ने खुदकुशी कर ली.  द्य

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

रागिनी को मार कर प्रिंस को क्या मिला – भाग 3

रागिनी की बातें नीरज के दिल को लग गई थी. उसे कतई उम्मीद नहीं थी कि रागिनी उसे ऐसा जवाब दे सकती है. रागिनी की बातों से उसे काफी गहरा आघात पहुंचा था. चूंकि मामला उस के भाई के प्यार से जुड़ा हुआ था इसलिए उस ने रागिनी के अपमान को अमृत समझ कर पी लिया था. उस समय तो नीरज और उस के दोस्तों ने उसे कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन नीरज ये बात अपने तक सीमित नहीं रख सका.

उस ने घर जा कर यह बात प्रिंस से बता दी. भाई की बात सुन कर प्रिंस गुस्से से उबल पड़ा कि रागिनी की ऐसी मजाल जो उस ने उस के प्यार को ठुकरा दिया. अगर वो मेरे प्यार को ठुकरा सकती है तो मैं भी उसे जीने नहीं दूंगा. अगर वो मेरी नहीं हो सकती तो मैं किसी और की भी नहीं होने दूंगा.

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प्रिंस के गुस्से को नीरज और उस के दोस्तों ने और हवा दे दी थी. रागिनी के प्यार में मर मिटने वाला जुनूनी आशिक प्रिंस ठुकराए जाने के बाद एकदम फिल्मी खलनायक बन गया था.

उस दिन के बाद से रागिनी जब भी कहीं आतीजाती दिखती थी, प्रिंस चारों दोस्तों के साथ मिल कर अश्लील शब्दों की फब्तियां कस कर उसे जलील करता, उसे छेड़ता रहता था. और तो और वह दोस्तों को ले कर उस के घर तक धमकाने के लिए पहुंच जाता था.

लिख दिया मौत का परवाना

प्रिंस के इस रवैये से उस के घर वाले परेशान हो गए थे. डर के मारे रागिनी ने घर से बाहर निकलना छोड़ दिया था. उस ने स्कूल जाना भी  बंद कर दिया था. प्रिंस का खौफ रागिनी के दिल में बैठ गया था. जब बात हद से आगे बढ़ गई तो रागिनी ने पिता जितेंद्र दुबे ने बांसडीह रोड थाने में प्रिंस और उस के दोस्तों के खिलाफ लिखित शिकायत की.

लेकिन प्रधान कृपाशंकर की राजनैतिक पहुंच की वजह से मामला वहीं रफादफा हो गया था. इस के बाद प्रिंस और भी उग्र हो गया. वह सोचता था कि जितेंद्र दुबे ने उस के खिलाफ थाने में शिकायत करने की जुर्रत कैसे की.

बात अप्रैल, 2017 की है. प्रिंस अपने तीनों दोस्तों नीरज, सोनू और दीपू यादव को ले कर जितेंद्र दुबे के घर गया और उन्हें धमकाया कि आज के बाद तुम्हारी बेटी रागिनी अगर स्कूल पढ़ने गई तो वो दिन उस की जिंदगी का आखिरी दिन होगा.

इस की धमकी के बाद रागिनी के घर वाले डर गए. उन्होंने उसे स्कूल भेजना बंद कर दिया. वह कई महीनों तक स्कूल नहीं गई.

इस वर्ष उस का इंटरमीडिएट था. स्कूल में परीक्षा फार्म भरे जा रहे थे. परीक्षा फार्म भरने के लिए वह 8 अगस्त, 2017 को छोटी बहन सिया के साथ स्कूल जा रही थी. पता नहीं कैसे प्रिंस को रागिनी के आने की खबर मिल गई और उस ने उस का गला रेत कर हत्या कर दी.

बहरहाल, पुलिस ने रागिनी हत्याकांड के नामजद 5 आरोपियों में से 2 आरोपियों प्रिंस और दीपू यादव को तो गिरफ्तार कर लिया. बाकी के 3 आरोपी प्रधान कृपाशंकर, नीरज तिवारी और सोनू फरार होने में कामयाब हो गए. आरोपियों को गिरफ्तार करने को ले कर मृतका की बड़ी बहन नेहा तिवारी सैकड़ों छात्रछात्राओं के साथ कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची और धरने पर बैठ गई.

उन लोगों ने परिवार के सदस्यों को मिल रही धमकी के लिए पुलिस प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया. कांग्रेस के नेता सागर सिंह राहुल ने भी लापरवाही बरतने के लिए पुलिस प्रशासन को कोसा. तब कहीं जा कर बाकी के आरोपियों प्रधान कृपाशंकर तिवारी, सोनू तिवारी और नीरज तिवारी ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया.

कथा लिखे जाने तक पांचों में से किसी भी आरोपी की जमानत नहीं हुई थी. होनहार बेटी की मौत से पिता जितेंद्र दुबे काफी दुखी हैं. उन्होंने शासनप्रशासन से गुहार लगाई है कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली सरकारें यदि बेटियों की सुरक्षा नहीं कर सकतीं तो उन्हें पैदा होने से पहले ही कोख में मार देने की इजाजत दे दें, ताकि बेटियों को ऐसी जिल्लत और जलालत की मौत रोजरोज न मरना पड़े.        ?

  – कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

प्रिया की बाकी जिंदगी भी बर्बाद कर गया फेसबुकिया आशिक

28 वर्षीय प्रिया ( बदला नाम ) भोपाल के एशबाग इलाके में रहती है उसकी शादी कुछ साल पहले अनिमेश ( बदला नाम ) से धूमधड़ाके से हुई थी. शादी के बाद कुछ वक्त तो अच्छे से गुजरा लेकिन इसके बाद पति पत्नी में खटपट होने लगी जिसके चलते प्रिया ने अनिमेश के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज करा दिया और मायके भाई भाभियों के पास आकर रहने लगी .

वक्त काटने प्रिया सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने लगी जहां उसकी जान पहचान मुंबई निवासी आरिफ़ उर्फ अरमान शेख से हुई . जल्द ही दोनों की जान पहचान दोस्ती से होते प्यार में तब्दील हो गई और वे फोन और व्हाट्स एप पर लंबी लंबी अंतरंग बातें और चेटिंग करने लगे. यह फेसबुकिया प्यार अंतरंगता की तमाम सीमाएं पार कर जैसा कि अक्सर होता ही है शरीर की जरूरत तक आ पहुंचा तो नवंबर 2018 में आरिफ प्रिया से मिलने भोपाल आ पहुंचा और अस्सी फीट रोड स्थित एक होटल में ठहरा . प्रिया उससे मिलने होटल गई और उसी दिन दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए .

4 जून 2018 को प्रिया ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि आरिफ उसे ब्लेकमेल कर रहा है और 50 हजार रुपये के लिए उस पर अड़ी डाल रहा है. दरअसल में होटल में अंतरंग लम्हों के दौरान  आरिफ ने प्रिया की अश्लील फिल्म बना ली थी और उसे वायरल करने की धमकी देने लगा था. प्रिया ने पैसे नहीं दिये तो आरिफ ने अपनी धमकी पर खरा उतरते उसकी अश्लील फोटो उसकी बहिन, बहनोई और भाई को भेज भी दीं. ये फोटो देख सभी स्वभाविक रूप से सकते में आ गए.  एक तो वे पहले से ही प्रिया को लेकर तनाव में थे ऊपर से यह बैठे ठाले की मुसीबत नया सरदर्द साबित हो रही थी .

प्रिया के घर बालों को समझ आ गया था कि मामला उलझ गया है और इस बात की कोई गारंटी नहीं कि एक बार 50 हजार लेने के बाद आरिफ मान जाएगा क्योंकि ऐसे मामलों में ब्लेकमेलर का पेट कभी भरता नहीं और वे हर कभी पैसों की मांग करने लगते हैं. लिहाजा आरिफ़ नाम की बला से छुटकारा पाने उन्होंने पुलिस का सहारा लेना मुनासिब समझा जो एक समझदारी भरा कदम था लेकिन जैसे ही अनिमेश को यह बात पता चली तो उसने प्रिया पर तलाक का मुकदमा ठोक दिया .

अनिमेश को बेहतर मालूम है कि कोई इस बात पर भरोसा नहीं करेगा कि आरिफ़ ने प्रिया के साथ ज़ोर ज़ोर जबरजसती से ही संबंध बनाए होंगे क्योंकि प्रिया कोई दूध पीती बच्ची नहीं है जो इस कथित जबरजस्ती का विरोध नहीं कर पाती और दूसरे वह खुद अपनी मर्जी से अपने मुंबइया आशिक से चोरी छिपे मिलने होटल गई थी और सहमति से संबंध बनाए थे. और अगर ऐसा था भी तो उसने तुरंत क्यों रिपोर्ट नहीं लिखाई और तभी क्यों लिखाई जब आरिफ ने अपना असली रंग दिखाया .

फेसबुकिया प्यार का  इस तरह का यह कोई पहला या आखिरी मामला नहीं है जिसमें औरत यूं दौराहे पर आ खड़ी हुई हो.  पति से अलगाव झेल रही प्रिया को आरिफ़ में कोई भावनात्मक सहारा दिखा था या वह भी अपनी शारीरिक जरूरत पूरी करने आरिफ़ को ढील और शह दे रही थी यह तो वही जाने लेकिन वह कतई बुद्धिमानी का काम नहीं कर रही थी .

आए दिन फेसबुकिया लव के ऐसे मामले उजागर होते रहते हैं जिनमें ब्लेकमेलिंग होती रहती है और अक्सर इसका खामियाजा महिला को ही भुगतना पड़ता है क्योंकि उसकी अर्धनग्न तस्वीरें ब्लेकमेलिंग की वजह या हथियार बनती हैं . नतीजतन महिला जो थोड़ी सी मौजमसती या सुख के लिए अंजान चेहरे और किरदार पर भरोसा कर उससे से संबंध बनाती है वह एक अंतहीन शारीरिक और मानसिक शोषण का शिकार हो जाती है .

अब पुलिस आरिफ़ की तलाश कर रही है जो आज नहीं तो कल कभी उसके हत्थे चढ़ ही जाएगा लेकिन प्रिया को इससे कुछ हासिल होगा ऐसा लग नहीं रहा वजह वह यह साबित नहीं कर पाएगी कि सब कुछ उसकी मर्जी के खिलाफ हुआ था. ब्लेकमेलिंग का आरोप जरूर साबित हो सकता है जिसमें आरिफ़ को मामूली ही सजा होगी वह भी प्रिया को कोई राहत देने बाली नहीं होगी क्योंकि गेंद अब अनिमेष के पाले में है जो कोर्ट में उसे चरित्रहीन साबित करने का मौका चूकेगा नहीं और प्रिया का उस पर प्रताड्ना का आरोप भी खोखला सिद्ध हो जाएगा .

नैतिक , चारित्रिक , पारिवारिक और सामाजिक रूप से भी प्रिया कमजोर पड़ गई है जिसे जरूरत पूरी करने के लिए संबंध बनाने की भी तमीज या सलीका नहीं मालूम था.

फेसबुकिया प्यार के इस तरह के साइड इफेकटों से आगाह करने वक्त वक्त पर खासतौर से लड़कियों और महिलाओं के लिए टिप्स मीडिया देता रहता है लेकिन इसके बाद भी वे नहीं समझतीं, संभलतीं या नहीं मानती तो उनका अंजाम प्रिया जैसा ही होता है जो घर की रहतीं न घाट की.

 (कहानी सौजन्य- मनोहर कहानियां) 

प्यार का मतलब सिर्फ शारीरिक संबंध नहीं – भाग 3

नीरज उर्फ गोलू बिठूर थाने के नयापुरवा (हिंगूपुर) गांव का रहने वाला था. उस के पिता केशव मौर्या मेहनतमजदूरी कर के अपना परिवार चलाते थे. 3 भाईबहनों में नीरज सब से बड़ा था. साधारण पढ़ा लिखा नीरज पेशे से मैकेनिक था.

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बैंक में मनोज नाम के व्यक्ति का जनरेटर लगा था. इस जनरेटर का औपरेटर नीरज था. बिजली चली जाने पर वह जनरेटर चालू करता था. सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक उस की ड्यूटी बैंक में रहती थी.

पूनम और नीरज पहली ही मुलाकात में एकदूसरे के प्रति आकर्षित हो गए. पूनम ने जब नीरज से खाता खुलवाने की बात कही तो उस ने भारतीय स्टेट बैंक की सिंहपुर शाखा में पूनम का खाता खुलवा दिया.

खाता खुला तो पूनम का बैंक में आनाजाना शुरू हो गया. नीरज जब भी पूनम को देखता, मदहोश सा हो जाता था. वह उस से एकांत में मिलने का मौका तलाश करने लगा. पूनम जब बैंक आती तो वह नजरें चुरा कर पूनम को निहारता रहता था.पूनम नीरज की नजरों की भाषा खूब समझती थी. एक दिन जब पूनम आई तो वह उस का हाथ पकड़ कर उसे बैंक के जीने के नीचे ले गया. वहां एकांत था. वहां नीरज ने पूनम का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘पूनम मैं तुम से बहुत प्यार करने लगा हूं.’’

पूनम खामोश रही तो उस ने अपनी बात दोहराते हुए फिर कहा, ‘‘पूनम, अगर तुम ने मेरे प्यार को स्वीकार नहीं किया तो मैं अपनी जान दे दूंगा. अब एक पल भी तुम्हारे बिना अच्छा नहीं लगता.’’

‘‘कैसी बात करते हो नीरज, इस तरह किसी लड़की का हाथ पकड़ना कहां की सभ्यता है?’’ पूनम ने मुस्कराते हुए कहा, ‘‘तुम प्यार करते हो तो यह ठीक है, पर मैं तुम से प्यार नहीं करती.’’ पूनम की मुसकराहट से नीरज की हिम्मत बढ़ गई. उस ने पूनम को अपने आगोश में भर लिया.

पूनम उस के सीने से चिपट कर बोली, ‘‘नीरज, मैं भी तुम से प्यार करती हूं और काफी दिनों से तुम मेरे दिल में बसे हुए हो, मैं चाहती थी कि शुरुआत तुम करो. बताओ, मुझे जीवन के किसी मोड़ पर धोखा तो नहीं दोगे.’’

‘‘तुम मेरे मन में बस गई हो पूनम, भला मैं तुम्हें कैसे धोखा दे सकता हूं. तुम तो मेरी जिंदगी हो.’’

नीरज की ये विश्वास भरी बातें सुन कर पूनम समर्पण की भावना के साथ उस से लिपट गई. धीरेधीरे दोनों का प्यार अमरबेल की तरह बढ़ने लगा. पूनम के दिल में नीरज गहराई तक उतरता चला गया. बैंक के जीने के नीचे का एकांत स्थल उन के मिलने की पसंदीदा जगह बन गया. इस सब के चलते एक दिन दोनों के बीच मर्यादा की सारी दीवारें भी ढह गईं.

उस रोज जैसे ही पूनम अस्पताल की ओर बढ़ी, नीरज बीच रास्ते में उस का हाथ पकड़ कर बोला, ‘‘शाम 6 बजे बैंक आ जाना. मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा.’’

पूनम को लगा, जैसे उस का दिल उछल कर सीने से बाहर आ जाएगा. अस्पताल में उस का पूरा दिन बेचैनी से गुजरा. वह सोचती रही कि नीरज ने बुलाया है तो जाना तो पड़ेगा ही. वह खुद भी नीरज से मिलना चाहती थी.

ज्योंज्यों दिन ढलने लगा, पूनम की बेचैनी बढ़ने लगी. मिलने का तयशुदा वक्त आया तो पूनम तेज कदमों से बैंक की ओर बढ़ गई. बैंक के करीब पहुंचते ही नीरज उसे दिख गया. वह बैंक के जीने की सीढि़यों पर बैठा था. तब तक बैंक बंद हो गई थी और सन्नाटा पसरा था. नीरज, पूनम का हाथ पकड़ कर जीने की सीढि़यां चढ़ते हुए छत पर पहुंचा.

वहां घुप अंधेरा था. नीरज ने बिना कुछ कहे सुने उसे बांहों में भर लिया और उस के नाजुक अंगों से खेलने लगा. दोनों ही खुद पर काबू न रख सके और अपनी हसरतें पूरी कर लीं. कुछ देर बाद जब नीरज ने पूनम को खुद से अलग किया तो उस ने महसूस किया कि वह अपना बहुत कुछ खो बैठी है.

वह फफकफफक कर रोने लगी तो नीरज ने उस के आंसू पोंछते हुए कहा, ‘‘पूनम, मैं तुम से प्यार करता हूं. मेरा वादा है कि मैं तुम से ही शादी करूंगा. रोने की जरूरत नहीं है, जो मेरी अमानत थी, वह मैं ने ले ली. वादा करो फिर मिलोगी.’’

पूनम ने नीरज को गहरी नजरों से देखा और उस से फिर मिलने का वादा कर के अपने घर चली गई. इस के बाद पूनम अकसर शाम को नीरज से उसी जगह एकांत में मिलती. नीरज से मिलने के चक्कर में पूनम को घर आने में देर हो जाती थी. मां पूछती तो पूनम बहाना बना देती. लेकिन धीरेधीरे सब कुछ शिवकांती की समझ में आने लगा था. शिवकांती ने अपने पिता शिवशंकर से कहा, ‘‘जल्दी से पूनम के हाथ पीले कर दो, वरना हाथ मलते रह जाओगे. लड़की के पर निकल आए हैं.’’

पत्नी की बात शिवशंकर को सही लगी. वह पूनम के ब्याह के लिए दौड़धूप करने लगा. पूनम को विवाह की जानकारी हुई तो वह घबरा गई. उस ने अपने विवाह की जानकारी नीरज को दे कर कहा, ‘‘गोलू, जल्दी से कोई उपाय खोजो, वरना मैं किसी और की दुलहन बन कर चली जाऊंगी और तुम ताकते रह जाओगे.’’

‘‘ऐसा कभी नहीं होगा पूनम. तुम्हें अपना बनाने का मेरे पास एक उपाय है.’’

‘‘क्या उपाय है?’’ पूनम ने पूछा.

‘‘यही कि तुम मेरे साथ भाग चलो. कहीं जा कर हम दोनों शादी कर लेंगे. इस के बाद कोई भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा.’’

‘‘ठीक है, मुझे सोचने समझने का मौका दो.’’

फिर एक दिन नीरज की मीठीमीठी बातों में आ कर पूनम घरपरिवार से नाता तोड़ कर सपनों की सजीली दुनिया में जीने के लिए उस के साथ उड़ गई. वह बैंक से पैसा निकाल कर भी अपने साथ ले गई.

इधर देर रात तक जब पूनम घर नहीं पहुंची तो मां शिवकांती को चिंता हुई मां ने उसे तलाश भी किया, लेकिन पूनम का कोई पता न चला. शिवशंकर घर आए तो शिवकांती ने उन्हें बताया कि पूनम अभी तक अस्पताल से नहीं आई है. शिवशंकर ने  आस्था नर्सिंग होम की औपरेटर से बात की.

उस ने बताया कि पूनम आज ड्यूटी पर नहीं आई थी. यह जानकारी पा कर शिवशंकर भौचक्के रह गए. उन्होंने अपने स्तर पर पूनम को सभी जगह तलाश किया, लेकिन उस का कुछ भी पता नहीं चला.

लाली मेरे प्यार की : प्यार की राह में मिली मौत – भाग 3

करीब 20 वर्षीय बिट्टू अहमदपुर (घाघरा) के सुरेश महतो के परिवार में जन्मा उन का सब से बड़ा बेटा था. सुरेश के परिवार में कुल 6 सदस्य थे. पतिपत्नी और 4 बच्चे. उन में बिट्टू सब से बड़ा था और उस से 3 छोटे बच्चे थे जिन में एक बेटी भी थी.

बिट्टू जब भी स्कूल जाता था तो वह अकसर सादिकपुर के टोला रामपुर के रास्ते से हो कर ही जाताआता था. लाली भी उसी रास्ते से हो कर स्कूल जातीआती थी. दरअसल, वह भी उसी स्कूल में पढ़ती थी, जिस स्कूल में बिट्टू पढ़ता था. यही नहीं बिट्टू के चाचा उमेश महतो का मंझला बेटा विकेश भी उसी स्कूल में 6ठी क्लास में पढ़ता था.

लाली और बिट्टू करते थे बेपनाह प्यार

उम्र के जिस मोड़ पर बिट्टू और लाली खड़े थे, उस उम्र में पांव का बहक जाना कोई बड़ी बात नहीं थी. यही वह उम्र होती है, जिस ने खुद को संभाल लिया, उस की जिंदगी संवर गई. जिन के पांव फिसल गए, उन का जीवन दलदल में फंस गया.

जातेआते रास्ते में बिट्टू और लाली एकदूसरे को दिल दे बैठे थे. पहल बिट्टू की तरफ से हुई थी और हरी झंडी लाली ने दिखाई थी. मतलब दोनों तरफ इश्क की आग बराबर लगी हुई थी. मौका देख कर दोनों ने अपनी मोहब्बत का इकरार एकदूसरे से कर दिया था.

जिस दिन से लाली बहार बन कर बिट्टू के जीवन में आई थी, उस की खुशियों का कोई ठिकाना नहीं था. वह इतना खुश रहता था कि उस की खुशियां संभाले नहीं संभल रही थीं.

चचेरा भाई विकेश था तो बिट्टू से उम्र में छोटा, लेकिन दोनों में दोस्ती थी. दोनों 2 जिस्म एक जान थे. एकदूसरे के हमराज भी थे. दोनों अपनेअपने सीने में एकदूसरे के अच्छीबुरी बातों को दफन किए हुए थे.

ऐसा नहीं था कि उस ने लाली से हुए प्यार वाली बात विकेश से न बताई. जब तक अपने दिल की बात उसे नहीं बताता, उस का खाना हजम नहीं होता था.

बिट्टू ने लाली से हुए प्यार वाली बात विकेश से बता दी थी. यही नहीं, उस ने लाली से भी बता दिया कि उस का चचेरा भाई विकेश उस की जान है. उस का राजदार है. उस के दिल की एकएक बात वह जानता है. यहां तक कि हमारे प्यार के बारे में भी उसे सब कुछ पता है. यह भी उस ने लाली से बता दिया था कि अगर कभी भी कोई बात हो या संदेशा देना हो, जब मैं न मिलूं तो बेहिचक उस से कह सकती हो.

बिट्टू लाली को छोड़ गया मझधार में

बिट्टू और लाली का प्यार पंख लगाए नीले गगन की ऊंचाइयों में उड़ रहा था. आलम यह था कि दोनों को एकदूसरे को देखे बिना चैन नहीं मिलता था.

ऐसा लगता था जैसे उन के शरीर का कोई अंग कट कर अलग हो गया हो. जैसेतैसे कर के दोनों एकदूसरे से मिल ही लेते थे.

कहते हैं इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपते, ऐसा ही कुछ बिट्टू के साथ भी हुआ. जब बिट्टू के घर वालों को पता चली तो उन के पैरों तले से जमीन खिसक गई थी. वे भले ही गरीब थे, मध्यमवर्गीय परिवार में जीते थे लेकिन उन का आत्मसम्मान उन्हें बहुत प्यारा था.

बिट्टू के पिता सुरेश महतो ने उसी समय फैसला किया कि कोई अच्छी सी लड़की देख कर उस की शादी करा देंगे ताकि जड़ से मामला खत्म हो जाएगा. अपने फैसले के अनुरूप सुरेश ने वही किया जो निश्चय कर चुके थे. बेटे की शादी कर के उन्होंने उस की जिंदगी से लाली नाम की बला हमेशाहमेशा के लिए दूर कर दी.

पत्नी का प्यार पा कर बिट्टू धीरेधीरे लाली को अपने दिल से दूर करता गया और उसे एकदम से भुला दिया था.

लाली ने जब से प्रेमी बिट्टू के शादी रचाने और उसे दिल से निकाल फेंकने की बात सुनी थी, वह अंदर ही अंदर बुरी तरह टूट गई थी. उस ने सपने में भी कभी सोचा नहीं था कि 7 जनमों तक एक साथ जीनेमरने की कसमें खाने वाला कुछ पलों में ही उस के प्यार को भुला देगा.

बिट्टू उस का पहला प्यार था. उसे वह अपने दिल से निकाल नहीं पा रही थी. जितना उसे भुलाने की कोशिश करती, वह उतना ही याद आता था. लाली बिट्टू की यादों में घुटघुट कर जी रही थी.

ऐसे में विकेश लाली के जख्मों पर मरहम बन कर आया. एक दिन की बात है. साइकिल से विकेश लाली के घर की ओर से अपने स्कूल जा रहा था. घर के बाहर दालान में लाली उदास बैठी थी. उस दिन विकेश कुछ नहीं बोला और स्कूल चला गया.

शाम के समय जब स्कूल से वापस लौट रहा था, तब भी उसे उसी हालत में देखा तो विकेश का दिल उस के लिए पिघल गया.

विकेश किसी तरह लाली से मिलना चाहता था. उस से मिल कर उस के जख्मों पर अपने प्यार का मरहम लगाना चाहता था. आखिरकार, वह अपने मकसद में कामयाब हो गया. गांव के श्यामसुंदर नाम के एक लड़के को विकेश ने अपने पक्ष में कुछ पैसे दे कर कर लिया. उस ने लाली को विकेश का संदेशा दिया तो वह गांव के बाहर बगीचे में उस से मिलने पहुंच गई.

लाली विकेश को अच्छी तरह जानती थी. हर बात में बिट्टू लाली के सामने अपने चचेरे भाई विकेश का नाम लेता था, इसलिए उसे विकेश को पहचानने में कोई मुश्किल नहीं हुई. उसे यकीन था कि उस के प्यार बिट्टू ने उस के लिए कोई संदेशा भेजा होगा.

लाली इस बात पर भी राजी हो गई थी कि बिट्टू ने भले ही शादी कर ली, वह फिर भी उस की प्रेमिका बनने को तैयार है. उस के दिल में अभी भी उस के लिए पहले जैसा प्यार जिंदा है.

विकेश आ गया लाली की लाइफ में

मीठा जहर : आखिर वह जांच कराने से क्यों घबरा रहा था ?

रविवार की सुबह 6 बजे अलार्म की आवाज ने मेरी नींद खोल दी. मेरा पार्क में घूमने जाने का मन तो नहीं था पर मानसी और वंदना के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के मजबूत इरादे ने मुझे बिस्तर छोड़ने की प्रेरणा दी.

करीब 4 महीने पहले वंदना के पति रोहित से मेरा परिचय एक पार्टी में हुआ था. वह बंदा ऐसा हंसमुख और जिंदादिल निकला कि उसी दिन से हम अच्छे दोस्त बन गए थे. जल्द ही मानसी और वंदना भी अच्छी सहेलियां बन गईं. फिर हमारा एकदूसरे के घर आनाजाना बढ़ता चला गया.

करीब 2 हफ्ते पहले रोहित को अपने एक सहयोगी दोस्त की बरात में शामिल हो कर देहरादून जाना था. तबीयत ढीली होने के कारण वंदना साथ नहीं जा रही थी.

‘‘मोहित, तुम मेरे साथ चलो. हम 1 दिन के लिए मसूरी भी घूमने चलेंगे.’’ सारा खर्चा मैं करूंगा. यह लालच दे उस ने मुझ से साथ चलने की हां करवा ली थी.

घूमने के लिए अकेले उस के साथ घर से बाहर निकल कर मुझे पता लगा कि वह एक खास तरह की मौजमस्ती का शौकीन भी है.

दिल्ली से बरात की बस चलने के थोड़ी देर बाद ही मैं ने नोट कर लिया था कि निशा नाम की एक स्मार्ट व सुंदर लड़की के साथ उस की दोस्ती कुछ जरूरत से ज्यादा ही गहरी है वे दोनों एक ही औफिस में काम करते थे.

‘‘इस निशा के साथ तुम्हारा चक्कर चल रहा है न?’’ रास्ते में एक जगह चाय पीते हुए मैं ने उसे एक तरफ ले जा कर पूछा.

‘‘मैं तुम्हें सच बात तभी बताऊंगा जब वापस जा कर तुम वंदना से मेरी शिकायत नहीं लगाओगे,’’ उस ने मेरी पीठ पर दोस्ताना अंदाज में 1 धौल जमा कर जवाब दिया.

‘‘तुम्हारा सीक्रेट मेरे पास सदा सेफ रहेगा,’’ मैं भी शरारती अंदाज में मुसकराया.

‘‘थैंकयू. आजकल इस शहंशाह की खिदमत यह निशा नाम की कनीज ही कर रही है. तुम्हारा भी इस की सहेली के साथ चक्कर चलवाऊं?’’

‘‘अरे, नहीं. ऐसे चक्कर चलाने में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है,’’ मैं ने घबरा कर जवाब दिया.

‘‘चक्कर मत चलाना पर हंसबोल तो लो उस रूपसी के साथ,’’ शरारती अंदाज में मेरी कमर पर 1 और धौल जमाने के बाद वह निशा और उस की सहेली की तरफ चला गया.

निशा की सहेली शिखा ज्यादा सुंदर तो नहीं थी पर उस में गजब की सैक्स अपील थी. यात्रा के दौरान वह बहुत जल्दी खुल कर मेरी दोस्त बन गई तो बरात में शामिल होने का मेरा मजा कई गुना बढ़ गया.

अगले दिन सुबह बरात के साथ वापस न लौट कर हम दोनों टैक्सी से मसूरी पहुंच गए. जिस होटल में हम रूके वहां निशा और शिखा को पहले से ही मौजूद देख कर मैं बहुत हैरान हो उठा.

‘‘इन दोनों के साथ मसूरी में घूमने का मजा ही कुछ और होगा,’’ ऐसा कह कर रोहित ने मेरे सामने पहली बार निशा को अपनी बांहों में भरा.

दोस्तों की सोच और व्यवहार का हमारे ऊपर बहुत प्रभाव पड़ता है. अपनी पत्नी मानसी को धोखा दे कर कभी किसी और लड़की के साथ चक्कर चलाने का विचार मेरे मन में नहीं आया था. यह रोहित की कंपनी का ही असर था कि शिखा के साथ की कल्पना कर मेरे मन में गुदगुदी सी होने लगी थी.

हम दिन भर उन दोनों साथ मसूरी में घूमे. रात को रोहित उन दोनों के कमरे में चला गया. फिर शिखा मेरे कमरे में आ गई.

रोहित के साथ मैं ने जो शराब पी थी उस के नशे ने मेरे मन की सारी हिचक और डर को गायब कर दिया. उस पल ये विचार मेरे मन में नहीं उठे कि मैं कोई गलत काम कर रहा हूं या मानसी को धोखा दे रहा हूं.

शिखा ने पूर्ण समर्पण से पहले ही अपने पर्स से 1 कंडोम निकाल कर मुझे थमा दिया. उस की इस हरकत से मुझे तेज झटका लगा. मेरे मन में फौरन यह विचार उठा कि वह कौलगर्ल है और फिर देखते ही देखते उस के साथ मौजमजस्ती करने का भूत मेरे सिर से उतर गया.

‘‘मेरा मन बदल गया है. प्लीज, तुम सो जाओ,’’ पलंग से उतर मैं बालकनी की तरफ चल पड़ा.

‘‘आर यू श्योर?’’ वह मुझे विचित्र सी नजरों से देख रही थी.

‘‘बिलकुल.’’

‘‘सुबह रोहित से किसी तरह की शिकायत तो नहीं करोगे?’’

‘‘अरे, नहीं.’’

‘‘ वैसे मन न माने तो मुझे कभी भी उठा लेना.’’

‘‘श्योर.’’

‘‘पैसे वापस मांगने का झंझट तो नहीं खड़ा करोगे?’’

‘‘नहीं,’’ उस के प्रोफैशनल कौलगर्ल होने के बारे में मेरा अंदाजा सही निकला.

अगली सुबह मेरी प्रार्थना पर शिखा हमारे

बीच यौन संबंध न बनने की बात रोहित व निशा को कभी न बताने के लिए राजी हो गई.

सुबह उठ कर रोहित ने आंखों में शरारती चमक भर कर मुझ से पूछा, ‘‘कैसा मजा आया मेरे यार? मसूरी से पूरी तरह तृप्त हो कर चल रहा है न?’’

‘‘बिलकुल,’’ मैं ने कुछ शरमाते हुए जवाब दिया तो उस के ऊपर हंसी का दौरा ही पड़ गया.

‘‘अपना इस मामले में नजरिया बिलकुल साफ है, दोस्त महीने में 1-2 बार मुंह का स्वाद बदल लो तो पत्नी से ऊब नहीं होती है.’’

‘‘तुम ठीक कह रहे हो, गुरूदेव.’’

‘‘चेले, एक बात साफ कह देता हूं. अगली बार ऐसी ट्रीट तुम्हारी तरफ से रहेगी.’’

‘‘श्योर, पर…’’

‘‘पर क्या?’’

‘‘मुझे इस रास्ते पर नहीं चलना हो तो तुम नाराज तो नहीं हो जाओगे न?’’

‘‘अब तो तुम्हारे मुंह खून लग गया है. तुम मेरे साथ मौजमस्ती करने निकला ही करोगे,’’ अपने इस मजाक पर उस का ठहाका लगा कर हंसना मुझे अच्छा नहीं लगा.

हम दोनों वापस दिल्ली आए तो पाया कि वंदना की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी.

‘‘खांसीबुखार अभी भी था. रात से पेट भी खराब होने के कारण बहुत कमजोरी महसूस हो रही थी,’’ अपने रोग के लक्षण बताते हुए वंदना की आवाज बहुत कमजोर लगा रही थी.

‘‘तुम ने जरूर कुछ गड़बड़ खा लिया होगा,’’ रोहित ने उस का माथा चूमते हुए कहा.

‘‘आप मेरी खराब तबीयत को हलके में ले रहो हो…. आप को मेरी चिंता है भी या नहीं?’’ कहतेकहते वंदना रो पड़ी.

‘‘मैं आराम करने से पहले तुम्हें डाक्टर को दिखा लाता हूं.’’ रोहित का यह आदर्श पति वाला बदला रूप देख कर मैं ने मन ही मन उस के कुशल अभिनय की दाद दी.

वंदना की तबीयत सप्ताह भर के इलाज के बाद भी नहीं सुधरी तो मैं उन दोनों को अपने इलाके के नामी डाक्टर उमेश के पास ले गया.

डाक्टर उमेश ने वंदना की जांच करने के बाद कुछ टैस्ट लिखे और फिर गंभीर लहजे में रोहित से बोले, ‘‘एचआईवी का टैस्ट आप को भी कराना पड़ेगा.’’

डाक्टर की बात सुन कर वंदना ने जिस डर, गुस्से व नफरत के मिलेजुले भाव आंखों में ला कर रोहित को घूरा था, उस रोंगटे खड़े करने वाले दृश्य को मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकूंगा.

मैं तो डाक्टर की बात सुन कर मन ही मन बहुत बुरी तरह से डर गया था. मैं ने उसी रात मन ही मन कभी न भटकने का वादा खुद से कर लिया. क्षणिक मौजमस्ती

के लिए अपनी व अपनों की जान को दांव पर लगाना कहां की समझदारी हुई?

रोहित और वंदना दोनों की एचआईवी की रिपोर्ट नैगेटिव आई थी. इस कारण उन के 3 साल के बेटे राहुल की एचआईवी जांच नहीं करानी पड़ेगी.

वंदना के लगातार चल रहे बुखारखांसी का कारण उसे टीबी हो जाना था. अंदाजा यह लगाया गया कि यह बीमारी उसे अपने ससुरजी से मिली थी, जिन का देहांत कुछ महीने पहले ही हुआ था.

यह देख कर मुझे बहुत अफसोस होता है कि रोहित ने पूरे घटनाक्रम से कोई सीख नहीं ली. कई बार शादी के बाद पतिपत्नी के रिश्ते बहुत ज्यादा मजबूत नहीं होते पर रोहित यह समझने को तैयार नहीं कि कौलगर्ल से संबंध बना कर अपनी व अपने जीवनसाथी की जिंदगी को दांव पर लगाना बहुत खतरनाक है.

आजकल वंदना से उस का बहुत झगड़ा होता है.

‘‘मैं इधरउधर मुंह मारने वाले इस इंसान को अपने साथ सोने का अधिकार अब कभी नहीं दूंगी.

मानसी से मुझे पता चला है कि वंदना अपने इस कठोर फैसले से हिलने को कतई तैयार नहीं है.

रोहित मुझ से मिलते ही वंदना की शिकायत करने लगता है, ‘‘वह मुझे अपने पास नहीं आने देती है. बेड़ा गर्क हो इस डाक्टर उमेश का जिस ने वंदना के मन में एचआईवी का वहम डाला. मेरी कमअक्ल पत्नी की जिद है कि मैं हर महीने उसे एचआईवी से मुक्त होने की रिपोर्ट ला कर दिखाऊं, नहीं तो अलग कमरे में सोऊं.’’

‘‘उस का डरना व गुस्सा करना अपनी जगह ठीक है. एचआईवी का संक्रमण तुम्हारी पत्नी को ही नहीं, बल्कि आने वाली संतान को भी यह खतरनाक बीमारी दे सकता है.’’

‘‘तुम्हें तो पता ही है कि इस मामले में मैं बचाव का पूरा ध्यान रखता हूं.’’

‘‘गलत काम करना पूरी तरह से छोड़ ही दो न.’’

‘‘तुम ऐसे दूध के धुले नहीं हो जो मुझे लैक्चर दो,’’ वह चिढ़ कर नाराज हो गया तो मैं ने चुप्पी साथ ली.

अब वंदना का स्वास्थ्य धीरेधीरे सुधर रहा था. वह अब हमारे साथ घूमने जाने लगी थी.

मैं ने मानसी के व्यक्तित्व को आकर्षक बनाने का जिम्मा अपने ऊपर ले लिया है. मोटापा कम करने के लिए मैं उसे सदा उत्साहित करता रहता हूं. नियमित रूप से ब्यूटीपार्लर जाया करे, ऐसी जिद भी मैं करने लगा हूं.

अलार्म की आवाज सुन कर मानसी उठना चाहती थी पर मैं ने उसे बांहों में कैद कर के अपनी छाती से लगा लिया. कुछ मिनट के रोमांस के बाद ही मैं ने उसे बिस्तर छोड़ने की इजाजत दी.

मानसी ने मेरे कान से मुंह सटा कर प्यार भरे स्वर में कहा, ‘‘आप बहुत बदल गए हो.’’

‘‘मुझ में आया बदलाव तुम्हें पसंद है न?’’ मैं ने शरारती लहजे में पूछा तो वह शरमाती हुई बाथरूम में चली गई.

मानसी की बात में सचाई है. उसे देखते ही मेरा मन भावुक हो जाता है. फिर उसे छाती से लगाए बिना मन को चैन नहीं मिलता है.

मौजमस्ती का शौकीन रोहित परस्त्री से यौन संबंध बनाने से बाज नहीं आ रहा है. मेरे लाख समझाने के बावजूद वह इस मीठे जहर के खतरे को देखना ही नहीं चाहता है.

जिस दिन उस की एचआईवी की रिपोर्ट पौजिटिव आ गई, उस दिन क्या वह बुरी तरह नहीं पछताएगा? उस जैसे जिंदादिल आदमी का एड्स का शिकार बन अपनी जिम्मेदारियां अधूरी छोड़ कर दुनिया से विदा हो जाना सचमुच एक बहुत बड़ी ट्रैजेडी होगी.