4 साल बाद मिले कंकाल ने बयां की इश्क की कहानी – भाग 1

गाजियाबाद के थाना नंदग्राम के गांव सिकरोड का रहने वाला चंद्रवीर बहुत खुश था. क्योंकि उस ने अपनी पैतृक जमीन का छोटा सा टुकड़ा अच्छे दामों में एक बनिए को जो बेच डाला था. बनिया वहां अपनी दुकान बनाना चाहता था. अब बनिया वहां दुकान खोले या कुछ और बनवाए, चंद्रवीर को इस से कोई मतलब नहीं रह गया था. वह तो नोटों को अपने अंगौछे में बांध कर घर की ओर लौट पड़ा था. रास्ते से उस ने देशी दारू की बोतल भी खरीद कर अंटी में खोंस ली थी.

घर के पास पहुंच कर उस ने अपने पास वाले घर के दरवाजे पर जोर से आवाज लगाई, ‘‘अरुण…ओ अरुण.’’

कुछ ही देर में दरवाजा खोल कर दुबलापतला गोरे रंग का युवक सामने आया. चंद्रवीर के चेहरे की चमक और खुशी देख कर ही वह ताड़ गया कि चंद्रवीर ने बेकार पड़ा जमीन का वह टुकड़ा बेच डाला है, जिसे बेचने की वह पिछले एक महीने से कोशिश कर रहा था. फिर भी अरुण उर्फ अनिल ने पूछा, ‘‘क्या बात है भैया, काहे पुकार रहे थे मुझे? और इतने खुश काहे हो आप?’’

‘‘अरुण, मैं ने अपनी जमीन का बलुआ रेत वाला वह टुकड़ा बनिए को एक लाख रुपए में बेच डाला है. आज मैं बहुत खुश हूं.यह लो 2 सौ रुपए, दौड़ कर चिकन ले आओ. तुम्हारी भाभी से चिकन बनवाएंगे. जब तक चिकन पकेगा, हमारी महफिल में जाम छलकते रहेंगे, आज जी भर कर पीएंगे.’’

अरुण हंस पड़ा, ‘‘होश में रहने तक ही पीनी होगी भैया. ज्यादा पी ली तो भाभी बाहर चौराहे पर चारपाई लगा देंगी.’’

ही..ही..ही.. चंद्रवीर ने खींसें निपोरी, ‘‘होश में ही रहूंगा अरुण, तुम्हारी भाभी के गुस्से का शिकार थोड़े ही होना है. अब तुम देर मत करो, जल्दी चिकन खरीद लाओ.’’

‘‘यूं गया और यूं आया भैया.’’ अरुण ने हाथ नचा कर कहा और भीतर घुस गया.

कुछ ही देर में वह थैला ले कर बाहर आया, ‘‘भैया, आप पानी गिलास तैयार करिए, मैं दौड़ कर चिकन ले आता हूं.’’

अरुण तेजी से मुरगा मंडी की तरफ चला गया तो चंद्रवीर ने अपने घर में प्रवेश किया.

बैठक में पहुंच कर उस ने पत्नी को आवाज लगाई, ‘‘सविता…’’

नहाते समय देख लिया था सविता को

उस की पत्नी चुन्नी के पल्लू से हाथ पोंछती हुई बैठक में आ गई. वह सुंदर और गेहुंए रंग की थी. चेहरे पर अब उम्र की रेखाएं उभरने लगी थीं लेकिन उस के भरे हुए मांसल जिस्म की बनावट के कारण वह प्रौढ़ावस्था में भी जवान ही दिखाई पड़ती थी.

‘‘यह एक लाख रुपया है, संभाल लो. अपने लिए कान के झुमके बनवा लेना. एक अच्छा सा सूट, स्वेटर और शाल भी खरीद लाना. इस में से 500 रुपए मैं ने अपने शौक के लिए लिया है. अरुण को चिकन लेने बाजार भेजा है.’’

‘‘अरुण!’’ सविता ने मुंह बिगाड़ा, ‘‘उसे काहे भेजा बाजार?’’

‘‘भाई है मेरा, वो काम नहीं करेगा तो कौन करेगा?’’ चंद्रवीर ने कहा, ‘‘वैसे तुम काहे इस बात पर नाराज हो रही हो. कुछ कहा क्या उस ने?’’

‘‘आज…’’ सविता कुछ कहतेकहते रुक गई और पति की ओर देखने लगी.

‘‘क्या हुआ आज?’’ चंद्रवीर ने उस की ओर प्रश्नसूचक नजरों से देखा.

‘‘आज मैं ने बालों में डालने के लिए तेल की शीशी उठाई तो उस में तेल खत्म था. मैं ने अरुण को बुला कर तेल लाने के लिए कहा तो वह मना कर के चला गया. कह रहा था कि उसे नींद आ रही है.’’

चंद्रवीर हंस पड़ा, ‘‘अरे नींद आ ही रही होगी उसे, तभी तो मना कर दिया होगा. इस में नाराज क्या होना, जाओ यह रुपए बक्से में रख दो और ताला लगा देना. हां, मिर्चमसाला भी पीस लो, चिकन पकेगा आज.’’

सविता ने रुपए लिए और अंदर के हिस्से में बने उस बैडरूम में आ गई, जिस में वे लोग सोते थे. उस में एक संदूक रखा था. सविता ने रुपए संदूक में संभाल कर रख दिए.

इस के बाद सविता किचन में आ गई. उस ने आज पति चंद्रवीर से झूठ बोला था, बात को वह बड़ी सफाई से घुमा गई थी जबकि मामला दूसरा ही था.

बात यह थी कि आज जब वह दोपहर में घर के आंगन में लगे हैंडपंप पर नहाने बैठी थी तो उस ने अपने अंगवस्त्र तक उतार कर धोने के लिए डाल दिए थे. वह अपनी देह को मल रही थी. कड़क धूप में बाहर बैठ कर नहाना उसे अच्छा लगता था. उस की पीठ चारदीवारी के दरवाजे की तरफ थी.

उस का देवर अरुण न जाने कब आंगन में आ गया था और उसे बड़ी ललचाई नजरों से नहाते हुए देख रहा था. वह उस के नग्न जिस्म को घूर रहा था.

सविता को इस की भनक तक नहीं लगी थी, नहाने के बाद वह तौलिया उठाने के लिए खड़ी हो कर घूमी तो उस की नजर अरुण पर चली गई. वह घबरा गई. उस ने जल्दी से तौलिया उठाया और शरीर पर लपेट कर कमरे की ओर भागी.

अरुण उस की बदहवासी देख कर खिलखिला कर हंस पड़ा. सविता ने कमरे में आ कर किवाड़ बंद कर लिए. तौलिया उस के हाथों से नीचे गिर पड़ा. उस ने अपने बदन को देखा तो खुद ही लजा गई. उस की सांसें अभी भी धौंकनी की तरह चल रही थीं.

वह यह सोच कर ही शर्म से जमीन में गड़ी जा रही थी कि उस के इसी नग्न जिस्म को अरुण ने बड़ी बेशर्मी से देखा है. अरुण की आंखों में वासना और चेहरे पर वहशी चमक थी. सविता को उस समय लगा था कि यदि वह क्षण भर भी और आंगन में रह जाती तो अरुण लपक कर उसे बांहों में भर लेता.

अरुण उर्फ अनिल था तो चचिया ससुर का लड़का, लेकिन था तो मर्द और यह सविता की जिंदगी का पहला वाकया था कि उस के पति चंद्रवीर के अलावा किसी दूसरे मर्द ने उस की नग्न देह को देखा था.

कमरे में वह काफी देर तक अपनी उखड़ी सांसों को दुरुस्त करती रही, उस के बाद अपने कपड़े पहन कर उस ने दरवाजा खोल कर बाहर झांका था. अरुण आंगन से जा चुका था. सविता ने राहत की सांस ली और बाहर आई थी. फिर वह अपने कपड़े धोने बैठ गई थी. सारा दिन यही सोच कर वह शरम महसूस करती रही कि अब अरुण से वह नजरें कैसे मिलाएगी.

कुसूर इस में अरुण का नहीं था. वह नहाने बैठी थी तो उसे दरवाजा अंदर से बंद कर लेना चाहिए था. अरुण अचानक आ गया तो इस में दोष उस का कैसे हुआ? हां, यदि वह नग्न नहा रही थी तो अरुण को तुरंत वापस चले जाना चाहिए था.

नादान मोहब्बत का नतीजा – भाग 3

शिल्पी को लगा कि उस ने गलती कर दी है. लेकिन अब उसे जिंदगी इरफान के साथ ही गुजारनी थी. आखिर हिम्मत कर के वह मायके गई और रोरो कर मां को अपना दुख सुनाया. उस ने कहा कि इरफान पर काफी कर्जा हो गया, जिस से वह तनाव में रहता है. मां ने बेटी का दुख सुना और उसे माफ भी कर दिया. लेकिन जब रामअवतार को पता चला कि बेटी घर आई थी तो वह गुस्से से भर उठा. उस ने पत्नी से साफ कह दिया कि जिस आदमी को उस ने दामाद माना ही नहीं, वह उस की मदद कतई नहीं कर सकता.

घर में अब आए दिन झगड़े होने लगे थे. ससुराल में शिल्पी का कोई हमदर्द नहीं था. मायके वाले भी नहीं अपनाएंगे, शिल्पी यह भी जानती थी. वह तनाव में रहने लगी. उसे लगने लगा कि जिंदगी कैद के सिवाय कुछ नहीं है.

इरफान की समझ में आ गया कि मोहब्बत का खेल बहुत हो चुका है. उसे जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए पैसे की जरूरत थी, जिस के लिए मेहनत जरूरी थी. बेटी ने भले ही परिवार को दर्द दिया था, पर ममता मरी नहीं थी. मांबाप बेटी के लिए परेशान थे, पर वह उसे अपनाना नहीं चाहते थे.

12 दिसंबर, 2016 को रामअवतार को किसी ने फोन कर के बताया कि शिल्पी को मार दिया गया है. बेटी की मौत की खबर से रामअवतार सदमे में आ गया. उस ने तुरंत माया को यह खबर सुनाई और पत्नी के साथ शब्बीर के घर पहुंच गया, जहां मकान की ऊपरी मंजिल पर बेटी का शव पलंग पर पड़ा था. उस के गले पर जो निशान थे, उस से साफ लग रहा था कि उसे गला घोंट कर मारा गया है. बेटी की लाश देख कर वह फूटफूट कर रोने लगा.

पुलिस को भी खबर मिल गई थी. थाना छत्ता के थानाप्रभारी शैलेंद्र सिंह मय फोर्स के घटनास्थल पर पहुंच गए थे. उन्होंने रामअवतार से पूछताछ की तो उस ने बताया कि करीब सवा महीने पहले बेटी को फोन कर के बताया था कि इरफान उसे मारतापीटता है और मायके से पैसा लाने को कहता है.

बेटी ने परिवार को बड़ा जख्म दिया था, इस कारण वह बेटी से नाराज था. इसलिए उस समय उसने उस से ज्यादा बात नहीं की थी. वह यह नहीं जानता था कि इरफान उसे जान से ही मार डालेगा.

इरफान और उस के घर वाले फरार हो चुके थे. पुलिस ने रामअवतार और मोहल्ले वालों की मौजूदगी में घटनास्थल की काररवाई पूरी कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

रामअवतार की तरफ से थाना छत्ता में शब्बीर और उस के बेटों इरफान, जमीर, फुरकान व शाहनवाज के खिलाफ भादंवि की धारा 498ए, 304बी, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो पता चला कि शिल्पी की मौत दम घुटने से हुई थी. इस से पुलिस को विश्वास हो गया कि यह हत्या का मामला था. पुलिस अब आरोपियों के पीछे लग गई. पुलिस ने आरोपियों के कई ठिकानों पर छापे मारे, लेकिन कोई भी हाथ नहीं लगा.

घटना के हफ्ते भर बाद शब्बीर पुलिस की गिरफ्त में आ गया. इस के बाद धीरेधीरे सभी आरोपी पकड़े गए. शब्बीर ने बताया था कि उस ने बहू को नहीं मारा. अगर उसे कोई परेशानी होती तो वह बेटे का विवाह हिंदू लड़की से न होने देता. उस ने उसे सम्मान के साथ घर में रहने की जगह दी.

शब्बीर के अनुसार शिल्पी की मौत में उस का कोई हाथ नहीं है. इरफान शिल्पी के साथ ऊपर के कमरे में रहता था. जबकि अन्य लोग नीचे रहते थे. चूंकि रिपोर्ट नामजद दर्ज कराई गई थी, इसलिए पुलिस ने उस का बयान ले कर उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. इस के बाद पुलिस ने एकएक कर के सभी को जेल भेज दिया.

सिर्फ इरफान पुलिस की गिरफ्त से दूर था. पुलिस ने उस की भी सरगर्मी से तलाश शुरू की तो जून, 2017 में उस ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया. लेकिन उस ने अपना अपराध स्वीकार नहीं किया. उस का कहना था कि वह शिल्पी से मोहब्बत करता था. शिल्पी को खुश रखने के लिए वह मेहनत कर के पैसा कमा रहा था. उस ने खुद ही फांसी लगा कर जान दी है.

इरफान भी जेल चला गया. शिल्पी मोहब्बत में इस कदर बागी हुई कि अपनों के मानसम्मान की भी परवाह नहीं की, पर उस को यह नहीं मालूम था कि समाज के नियमों को तोड़ने वालों को समाज माफ नहीं करता.

रामअवतार भले बेटी से नाराज था, पर अपनी गुमराह बेटी को उस की मौत के बाद माफ कर चुका है, अब वह बेटी के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा है. वह नादान बेटी को गुमराह करने वालों को माफ नहीं करना चाहता बल्कि उन्हें सजा दिलाना चाहता है.

अय्याशी की चाहत बनी आफत

मालदार और रसूखदार लोग पैसों के दम पर दुनिया की हर चीज खरीद सकते हैं लेकिन उन की जिंदगी में जरूरी नहीं  कि सैक्स सुख भी वैसा ही हो जैसा कि वे चाहते हैं. पैसे से सैक्स सुख हासिल करना कितना महंगा पड़ता है, यह आएदिन उजागर होता रहता है.

लेकिन यह अंदाजा कोई नहीं लगा पाएगा कि सैक्स सुख जान जाने की वजह भी बन सकता है. लोग यहीं तक उम्मीद कर सकते हैं कि जो पैसे वाले सैक्स का मजा लेने बाजार जाते हैं, पकड़े जाने पर उन के हिस्से में बदनामी ही आती है और एहतियात न बरतें तो उन्हें ब्लैकमेल भी होना पड़ता है, लेकिन मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके के छतरपुर जिले की इस वारदात ने सभी को चौंका दिया कि ऐसा भी हो सकता है.

दास्तां एक सेठ की

आनंद जैन उर्फ सुकुमाल जैन मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके के छतरपुर जिले के जानेमाने लोहा व्यापारी थे.

50 साला इस अधेड़ के पास करोड़ों की दौलत थी और शहर में अच्छीखासी इज्जत भी थी. धार्मिक इमेज वाले आनंद जैन रोजाना मंदिर जाते थे. यहां तक कि रात को दुकान बंद करने के बाद भी वे शहर की पहाड़ी पर बने मंदिर में दर्शन करते हुए घर जाते थे.

9 अक्तूबर, 2018 की रात आनंद जैन की हत्या उन की ही दुकान में हो गई, तो शहरभर में सनाका खिंच गया. उस रात वे घर वालों को ‘थोड़ी देर में वापस आता हूं’ कह कर कहीं चले गए थे.

देर रात तक जब आनंद जैन नहीं लौटे तो घर वालोें को चिंता हुई, क्योंकि बारबार फोन करने पर भी उन का मोबाइल नंबर नहीं लग रहा था.

उन का जवान बेटा पीयूष जैन ढूंढ़ता हुआ दुकान में पहुंचा तो वहां उस ने पिता की खून से लथपथ लाश देखी.

सदमे में आ गए पीयूष जैन ने खुद को संभालते हुए पिता की हत्या की खबर पुलिस और दूसरे जानपहचान वालों को दी तो भीड़ इकट्ठा होना शुरू हो गई.

पुलिसिया जांच में लाश के पास एक हथौड़ा पड़ा मिला जिस से अंदाजा यह लगाया गया कि उसी से हत्यारे ने उन की हत्या की होगी, क्योंकि आनंद जैन का सिर किसी तरबूज की तरह फटा हुआ था.

दुकान की तलाशी लेने पर जो चौंका देने वाली चीजें बरामद हुईं वे थीं औरतों की पहनने वाली एक ब्रा और एक इस्तेमाल किया हुआ कंडोम जिस में वीर्य भरा हुआ था.

ये चीजें हालांकि उन की इज्जतदार और धार्मिक इमेज से मेल खाती हुई नहीं थीं, लेकिन यह अंदाजा लगाना पुलिस वालों की मजबूरी हो गई थी कि जरूर आनंद जैन ने किसी कालगर्ल को बुलाया होगा और उस से किसी बात पर झगड़ा हुआ होगा जो उन की बेरहमी से की गई हत्या की वजह बना, लेकिन जब सच सामने आया तो हर कोई चौंक पड़ा.

यह थी लत

आनंद जैन के मोबाइल फोन के सहारे पुलिस ने चंद घंटों में ही कातिल को ढूंढ़ निकाला जिस के नंबर पर उन की अकसर रात को ही देर तक बातें होती रहती थीं.

वह कातिल एक बेरोजगार नौजवान राजेश रैकवार था जिस की हैसियत राजा भोज जैसे आनंद जैन के सामने गंगू तेली सरीखी भी नहीं थी. पुलिस उसे गिरफ्तार करने तो शक की बिना पर गई थी लेकिन पुलिस वालों को देखते ही उस के होश फाख्ता हो गए और मामूली पूछताछ में ही उस ने खुद मान लिया कि आनंद जैन की हत्या उस ने ही की है.

हत्या क्यों की? इस सवाल के जवाब में राजेश ने जो बताया वह और भी हैरान कर देने वाला था.

बकौल राजेश, ‘‘आनंद जैन उस के साथ सैक्स करते थे और इस के एवज में उसे हर बार के 400 रुपए देते थे.’’

राजेश के मुताबिक, वह कुछ दिनों पहले ही काम मांगने के लिए आनंद जैन की दुकान पर गया था. काम देने में तो उन्होंने मजबूरी जता दी लेकिन उस के हाथ में खर्चे के लिए 200 रुपए रख दिए थे.

राजेश इस बात पर हैरान हुआ था क्योंकि वह जहां भी काम मांगने जाता था वहां लोग उसे झिड़क कर भगा देते थे और 200 रुपए तो दूर की बात है, 2 रुपए भी नहीं देते थे. जितनी इज्जत इन सेठजी ने दी थी, उतनी आज तक किसी बड़े आदमी ने उसे नहीं दी थी.

ज्यादा हैरानी की बात तो यह थी कि इस के एवज में सेठजी उस से कोई हम्माली या बेगारी नहीं करवा रहे थे बल्कि जातेजाते उन्होंने कहा था कि जब भी पैसों की जरूरत पड़े तो ले जाना.

इस बात और हमदर्दी का राजेश पर वाजिब असर पड़ा था कि काश, दुनिया में सभी पैसे वाले आनंद सेठ जैसे हो जाएं तो कहीं बेरोजगारी और जातपांत का नाम नहीं होगा.

अब जरूरत पड़ने पर राजेश आनंद जैन के पास जाने लगा जिन्होंने कभी उसे निराश नहीं किया था. लेकिन अब वे  पैसे लेने उसे रात में बुलाने लगे थे.

ऐसे ही एक दिन बातें करतेकरते आनंद जैन ने उसे अपना हस्तमैथुन करने के लिए कहा तो वह अचकचा उठा. उस ने मना करने की कोशिश की लेकिन आनंद जैन के बारबार कहने पर मना नहीं कर सका.

राजेश को इस बात का भी डर था कि अगर वह मना करेगा तो सेठजी पैसे देना छोड़ देंगे और मुफ्त की मलाई मारी जाएगी. लिहाजा, जब भी देर रात को आनंद जैन फोन कर के उसे बुलाते तो वह उन का हस्तमैथुन कर आता था.

राजेश जैसे बेरोजगार नौजवान के लिए यह कोई घाटे का सौदा नहीं था लेकिन एक रात आनंद जैन ने उस से सैक्स करने की बात कही तो वह सकपका उठा.

भले ही राजेश झुग्गीझोंपड़ी में रहता था लेकिन ऐसा गंदा काम उस ने पहले कभी नहीं किया था. मना कर देने पर आनंद जैन ने उसे पेशकश की कि अगर वह इस के लिए तैयार हो जाए तो वे हर बार 400 रुपए उसे देंगे.

पैसों की जरूरत के चलते राजेश के सामने उन की बात मान लेने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था. लिहाजा, वह इस काम के लिए भी तैयार हो गया. फिर तो आनंद जैन उसे कभी भी दुकान में बुला कर अपनी ख्वाहिश पूरी करने लगे.

इस दौरान वे उसे वैसा ही प्यार करते थे और डौयलौग बोलते थे जैसे कोेई मर्द औरत को प्यार करते वक्त करता और बोलता है.

9 अक्तूबर, 2018 की रात को घर जाने के बाद आनंद जैन को फिर से सैक्स की तलब लगी तो उन्होंने राजेश को फोन किया. इस पर राजेश ने जवाब दिया कि नवरात्र के दिनों में वह ऐसा गंदा काम नहीं कर सकता. इस से व्रत टूट जाएगा.

यह जवाब सुन कर आनंद जैन ने उसे ढील देते हुए कहा कि ठीक है तो फिर हाथ से ही कर जाना.

राजेश के सिर फिर डर का यह भूत सवार हो गया कि अगर नहीं गया तो पैसे मिलना बंद हो जाएगा और इतने पैसे वाले सेठ के लिए लड़कों की क्या कमी, वे किसी दूसरे को फांस लेंगे.

‘सिर्फ हस्तमैथुन ही तो करना है,’ यह सोचते हुए राजेश वारदात की रात उन की दुकान पर पहुंच गया. लेकिन उसे आया देख आनंद जैन ने फिर सैक्स की जिद पकड़ ली तो उस ने साफ मना करते हुए पहले वाला जवाब दोहरा दिया.

इस पर आनंद जैन जबरदस्ती करने लगे तो उसे और गुस्सा आ गया और उस ने दुकान में पड़ा हथौड़ा उठा कर उन के सिर पर दे मारा. सिर तरबूज की तरह फट गया और आनंद जैन जमीन पर गिर कर तड़पने लगे.

आनंद जैन को उन के हाल पर छोड़ कर राजेश उन के पास से 20,000 रुपए और सोने की चैन गले से उतार कर ले गया. गिरफ्तार होने के बाद पुलिस ने वे चीजें बरामद कर लीं.

क्या करें ऐसे मर्द

राजेश अब जेल में बैठा अपने किए पर पछता रहा है, पर सवाल आनंद जैन जैसे खातेपीते रईस मर्दों का है जिन्हें कई वजहों के चलते बीवी या औरतों के साथ सैक्स में मजा नहीं आता तो वे लड़कों को सैक्स सुख का जरीया बना लेते हैं. कई लोग मुंहमांगे पैसे दे कर अपना हस्तमैथुन करवाते हैं तो कई लोग मुखमैथुन और गुदामैथुन करते और करवाते हैं.

रजामंदी से हो तो इस सौदे में कोई हर्ज नहीं क्योंकि अब तो सुप्रीम कोर्ट भी इसे कानूनी मंजूरी दे चुका है लेकिन जबरदस्ती होगी तो ऐसी वारदातें भी होंगी.

ऐसे काम चूंकि चोरीछिपे होते हैं इसलिए किसी को हवा भी नहीं लगती. हवा तब लगती है जब कोई बड़ा कांड हो जाता है.

ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री रह चुके भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता राघवजी भाई का सुर्खियों में रहा था जो अपने घरेलू नौकर राजकुमार के साथ वही सब करते थे जो आनंद जैन राजेश के साथ कर रहे थे.

तब राघवजी की ज्यादतियों से तंग आ गए राजकुमार ने उन की करतूतों की सीडी बना कर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवा दी थी. इस के चलते राघवजी को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और उस कांड की बदनामी का दाग आज तक उन के दामन पर लगा है.

बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने जैसे ही समलैंगिक संबंधों को कानूनी मंजूरी दी तो राघवजी ने राहत की सांस लेते हुए कहा था कि अब उन पर चल रहा धारा 377 का मुकदमा बंद हो जाएगा.

लेकिन लौंडेबाजी के आदी हो गए मर्दों का कोई इलाज नहीं है. भोपाल के सैक्स में माहिर एक नामी डाक्टर की मानें तो यह कोई बीमारी नहीं है लेकिन इस के लिए जोरजबरदस्ती करना ठीक नहीं. दूसरे, नाबालिगों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह अभी भी कानूनन जुर्म है.

इन्हीं डाक्टर का यह भी कहना है कि कई वजहों के चलते कुछ मर्दों को औरतों के साथ सैक्स करने में मजा नहीं आता है इसलिए वे लड़कों को फंसाते हैं. यह उन की मजबूरी हो जाती है.

ज्यादातर मर्द दूसरे के हस्तमैथुन से संतुष्ट हो जाते हैं क्योंकि वह पूरे फोर्स से होता है लेकिन कुछ को सैक्स में ही मजा आता है.

अब कानून भी उन के साथ है लेकिन इस के बाद भी उन्हें फूंकफूंक कर कदम रखने होंगे. इस में उन का पार्टनर ब्लैकमेल भी कर सकता है और नाजायज मांगें भी मनवाने का दबाव बना सकता है क्योंकि उन की कमजोरी वह समझ चुका होता है कि ये पैसे वाले लोग अपने चेहरे से शराफत का नकाब उतरने से बहुत डरते हैं.

योगेश सक्सेना मर्डर : प्यार में किये कई अपराध

उमा ने अपने भाई के दोस्त योगेश सक्सेना से अवैध संबंध बना लिए थे. योगेश के चक्कर में वह अपने पति को भी छोड़ आई थी. कुछ दिनों बाद उमा के संबंध सुनील शर्मा से हो गए. फिर उमा ने सुनील के साथ मिल कर पहले प्रेमी योगेश को ठिकाने लगाने की ऐसी साजिश रची कि… बरेली के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के भूड़ पड़रिया मोहल्ले में रहने वाला योगेश सक्सेना उर्फ मुन्नू नाथ

मंदिर के पास रेडीमेड कपड़ों की एक दुकान में सेल्समैन की नौकरी करता था. पहली मार्च, 2020 की रात वह दुकान से घर नहीं लौटा तो परिजनों को चिंता हुई. योगेश का बड़ा भाई अंशू भी घर के बाहर था. उसे फोन कर के बताया गया तो उस ने योगेश जिस दुकान पर काम करता था, उस के मालिक जितेंद्र से पता किया तो उस ने बताया कि योगेश तबीयत खराब होने की बात कह कर जल्दी दुकान से घर जाने के लिए निकल गया था. जब वह दुकान से जल्दी निकल गया तो गया कहां, यह प्रश्न योगेश के परिजनों के सामने मुंह बाए खड़ा था. उस की काफी तलाश की लेकिन कोई पता नहीं चला.

2 मार्च की सुबह बरेली थाना कोतवाली और कुमार टाकीज के बीच में खाली पड़े मैदान में एक पेड़ के नीचे एक अज्ञात युवक की अधजली लाश पड़ी मिली. किसी ने लाश की सूचना थाना कोतवाली को दे दी.

सूचना पा कर सीओ (प्रथम) अशोक कुमार और कोतवाली इंसपेक्टर गीतेश कपिल पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. पुलिस ने लाश व घटनास्थल का निरीक्षण किया. मृतक की उम्र यही कोई 30 से 35 वर्ष रही होगी.

मृतक के गले व चेहरे पर धारदार हथियार के 4 गहरे घाव दिखाई दे रहे थे. मारने के बाद उस की पहचान छिपाने के लिए उस की लाश को जलाया गया था, जो कि पूरी तरह से नहीं जल पाई  थी. पास में ही मृतक का मोबाइल भी जला हुआ बरामद हुआ.

लाश की शिनाख्त के लिए आसपास के दुकानदारों को बुलाया गया. उन में जितेंद्र नाम का एक दुकानदार भी था. उस ने लाश देखी तो वह लाश पहचान गया. क्योंकि वह लाश उस के शोरूम के सेल्समैन योगेश सक्सेना की थी. उस ने तुरंत योगेश के भाई अंशू सक्सेना को योगेश की लाश मिलने की सूचना दे दी.

सूचना पर योगेश की मां मुन्नी देवी व भाई अंशू मौके पर पहुंच गए और लाश की शिनाख्त कर दी. शिनाख्त होने के बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दी गई. इंसपेक्टर गीतेश कपिल ने अंशू से पूछताछ की तो उस ने बताया कि योगेश अपने दोस्त की बहन उमा से फोन पर बात करता रहता था. अपनी कमाई भी उसी पर लुटाता था. कई बार उसे समझाया लेकिन वह मानता ही नहीं था.

कोतवाली आ कर इंसपेक्टर गीतेश की तरफ से अज्ञात के खिलाफ भादंवि की धारा 302/201 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया.

इंसपेक्टर गीतेश ने जांच शुरू की. पुलिस ने योगेश के फोन नंबर की काल डिटेल्स की जांच की. योगेश के नंबर पर अंतिम काल जिस नंबर से की गई थी, उस नंबर से रोज योगेश की बात होने का प्रमाण मिला. घटना की रात उस नंबर से काल आने के बाद ही योगेश दुकान से निकला था. वह नंबर उस की प्रेमिका उमा शुक्ला का था जोकि योगेश के मकान से कुछ दूर भूड़ पट्टी में रहती थी.

इस के बाद 3 मार्च को इंसपेक्टर गीतेश कपिल ने उमा शुक्ला को घर से हिरासत में ले कर कोतवाली में महिला कांस्टेबल की मौजूदगी में कड़ाई से पूछताछ की तो उस ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया.

पूछताछ में उमा ने बताया कि योगेश की हत्या उस ने अपने दूसरे प्रेमी सुनील शर्मा से कराई थी. उस के बाद सुनील शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया गया. इन दोनों से पूछताछ के बाद जो कहानी निकल कर सामने आई, कुछ इस तरह थी—

उत्तर प्रदेश के महानगर बरेली के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के भूड़ पड़रिया मोहल्ले में अशोक सक्सेना सपरिवार रहते थे. वह एक प्राइवेट बस औपरेटर के यहां कंडक्टर थे.

परिवार में पत्नी मुन्नी देवी के अलावा 2 बेटे और 2 बेटियां थीं. अशोक सक्सेना ने अपनी बड़ी बेटी शालिनी का विवाह कर दिया. इस से पहले कि वह अन्य बच्चों की शादी की जिम्मेदारी से मुक्त होते, 3 साल पहले उन की मृत्यु हो गई.

बड़ा बेटा अंशू शादीबारातों में बैंड बाजा बजाने का काम करने लगा. हाईस्कूल पास योगेश नाथ मंदिर के पास स्थित रेडीमेड कपड़ों की एक दुकान में सेल्समैन की नौकरी कर रहा था. वह इस दुकान पिछले 5 सालों से काम कर रहा था.

योगेश के मकान से कुछ दूरी पर भूड़ पट्टी में महेशचंद्र शुक्ला रहते थे. वह प्राइवेट जौब करते थे. परिवार में उन की पत्नी जानकी और एक बेटी उमा और बेटा अमर उर्फ गुरु था.

20 जुलाई 1990 को जन्मी उमा काफी खुबसूरत और महत्त्वाकांक्षी युवती थी. उस ने बरेली यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन की थी. बरेली जैसे महानगर में पलीबढ़ी होने के कारण उस के वातावरण का असर भी उस पर पड़ा था.

उमा का भाई अमर और योगेश एक ही मार्केट में अलगअलग रेडीमेड कपड़ों की दुकान पर काम करते थे. इसी वजह से योगेश और अमर में दोस्ती हो गई. दोनों एकदूसरे के घर भी आते जाते थे. इसी आने जाने में योगेश और उमा एकदूसरे को जानने लगे. दोनों का दिन में कईकई बार आमनासामना हो जाता था.

दोनों की निगाहें आपस में टकराती थीं तो उमा लजा कर अपनी निगाहें नीची कर लेती थी. योगेश की आंखों की गहराई वह ज्यादा देर बरदाश्त नहीं कर पाती थी. शर्म से पलकें झुक जातीं और होंठों पर हल्की मुसकान भी अपना घर बना लेती थी. उमा की इस अदा पर योगेश का दिल बेचैन हो उठता था.

उमा को योगेश अच्छा लगता था. वह उसे दिल ही दिल में चाहने लगी थी. उस की चाहत की तपिश योगेश तक पहुंचने लगी थी. योगेश को तो उमा पहले से ही पसंद थी. इस वजह से योगेश भी अपने कदम बढ़ने से रोक न सका. वह भी उमा को अपनी बांहों में भर कर उस की आंखों की गहराइयों में उतर जाने को आतुर हो उठा.

एक दिन योगेश उमा के कमरे से निकल कर बाहर की ओर जाने लगा कि अचानक वह फिसल गया. इस से उस के दाएं हाथ के अंगूठे में काफी चोट लग गई और अंगूठे से खून निकलने लगा. वहीं आंगन में खड़ी उमा ने देखा तो दौड़ीदौड़ी आई. खून निकलता देख कर वह तुरंत अपने रुमाल को पानी में भिगो कर उस के अंगूठे में बांधने लगी. उसके द्वारा ऐसा करते समय योगेश उस की तरफ प्यार भरी नजरों से देखता रहा.

उमा रुमाल बांधने के बाद बोली, ‘‘जरा संभल कर चला करो. अगर आप इस तरह गिरोगे तो जिंदगी की राह पर कैसे संभल कर चलोगे?’’

‘‘जिंदगी की डगर पर अगर मैं गिरा भी तो जिंदगी भर साथ देने वाले हाथ मुझे संभालने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे. ये हाथ किस के होंगे और कौन जिंदगी भर साथ निभाने के लिए मेरे साथ होगा, यह तो अभी मुझे भी नहीं पता.’’ योगेश ने उमा की निगाहों में निगाहें डालते हुए कहा.

योगेश की इस रारत से उस की नजरें शर्म से थोड़ी देर के लिए झुक गईं. फिर वह बोली, ‘‘छोड़ो इस बात को. आप रुमाल को थोड़ीथोड़ी देर बाद पानी से गीला जरूर कर लेना. इस से आप के अंगूठे का जख्म जल्दी ठीक हो जाएगा.’’

‘‘अंगूठे का जख्म तो ठीक हो जाएगा लेकिन दिल का जख्म…’’ इतना कह कर योगेश तेजी से दरवाजे से बाहर निकल गया.

रूहानी तौर पर एकदूसरे से बंधे होने के बावजूद खुल कर अभी तक न तो योगेश ने प्यार का इजहार किया था और न ही उमा ने. लगन की आग दोनों ओर लगी थी, बस देर थी तो आग को शब्दों की जुबां दे कर बयां करने की.

योगेश जब घर में आता तो उमा का मन अधिक से अधिक उस के पास रहने को करता था. जब भी दोनों मिलते, इधरउधर की बातें करते रहते थे. इस से धीरेधीरे दोनों एकदूसरे से काफी खुल गए और उन में काफी निकटता आ गई. उमा मिलने व बात करने के उद्देश्य से योगेश के पास पहले से अधिक जाने जाने लगी. एक दिन योगेश घर में अपने कमरे में बैठा कुछ पढ़ रहा था. उमा भी उस से मिलने वहां पहुंच गई.

उमा को देख कर योगेश खुश होते हुए बोला, ‘‘आओ उमा, बहुत देर लगा दी. मैं काफी देर से तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था.’’

‘‘घर का काम निपटाने में मम्मी की मदद करने लगी थी, इसीलिए देर हो गई.’’ वह बोली.

‘‘ठीक है, तुम थोड़ी देर बैठो. मैं तुम्हारे लिए चाय बना कर लाता हूं.’’ कह कर योगेश चाय बनाने चला गया.

उमा वहीं मेज पर रखी पत्रिका उठा कर उस के पन्ने पलटने लगी. थोड़ी ही देर में योगेश चाय बना कर ले आया. मेज पर चाय रखते हुए योगेश बोला, ‘‘उमा, क्या पढ़ रही हो?’’

योगेश की बात सुन कर उमा ने सिर उठाया और योगेश की तरफ देखते हुए बोली, ‘‘ इस पत्रिका में एक बहुत ही अच्छी कहानी छपी है, वही पढ़ने लगी थी.’’

यह सुन कर योगेश भी उमा के पास बैठ कर चाय पीते हुए उसी पत्रिका को पढ़ने में तल्लीन हो गया. पूरी कहानी पढ़ने के बाद ही योगेश ने पत्रिका के सामने से सिर हटाया और उमा की तरफ देखते हुए बोला, ‘‘सही कहा था तुम ने. काफी दिल को छू लेने वाली प्रेम कहानी है. दोनों में कितना प्यार था? अच्छा उमा यह बताओ कि आज के समय में भी इतना पवित्र प्यार करने वाले लोग मिलते हैं?’’

योगेश की बात सुन कर उमा भावुक होते हुए बोली, ‘‘वे बड़ी किस्मत वाले होते हैं, जिन्हें किसी का प्यार मिलता है.’’

उमा की बात बीच में ही काटते हुए योगेश बोला, ‘‘कुछ मेरी तरह बदनसीब होते हैं. जिन्हें प्यार के नाम पर सिर्फ जमाने की ठोकरें मिलती हैं.’’ यह कह कर योगेश के आंसू छलक आए. योगेश की आंखों में आंसू देख उमा तड़प उठी.

योगेश का हाथ अपने हाथों में ले कर वह बोली, ‘‘तुम ऐसा क्यों सोचते हो? तुम तो इतने अच्छे हो कि तुम्हें हर कोई प्यार करना चाहेगा. मैं तुम से कई दिनों से एक बात करना चाहती थी लेकिन इस डर से चुप रही कि कहीं तुम बुरा न मान जाओ. तुम कहो तो कह दूं.’’

योगेश ने जब उस की ओर प्रश्नवाचक निगाहों से देखा तो वह बोली, ‘‘मैं तुम से बहुत प्यार करती हूं. लेकिन तुम से कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी. दिल की बात आज जुबां पर आ ही गई.’’

उमा की बात पर योगेश को विश्वास नहीं हो रहा था. वह उमा की तरफ देखते हुए बोला, ‘‘क्यों तुम मेरा मजाक उड़ा रही हो. अगर मैं मान भी लूं कि तुम मुझ से प्यार करती हो तो क्या समाज के ठेकेदार हम दोनों को एक होने देंगे क्योंकि हम एक जाति के नहीं हैं.’’

‘‘जब हम प्यार करते हैं, तो इस जमाने से भी टक्कर ले लेंगे. प्यार तो प्यार होता है. इसे धर्म और जाति के तराजुओं में नही तोला जा सकता है. प्यार तो दो दिलों के मिलन का नाम है.’’

उमा की बात सुन कर योगेश की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े. फिर उस ने उमा को बांहों में भर कर सीने से लगा लिया. उमा भी उस के शरीर से लिपट गई. दोनों एकदूसरे का साथ पा कर काफी खुश थे. दोनों का प्यार दिनोंदिन परवान चढ़ने लगा.

दोनों के परिवारों को भी इस बात का पता चल गया. योगेश की बहनों और भाई ने योगेश को काफी समझाया कि वह उमा के चक्कर में न पड़े, लेकिन योगेश नहीं माना. दूसरी ओर उमा के पिता ने भी उस के लिए रिश्ता तलाशना शुरू कर दिया. जल्द ही बुलंदशहर के रमेश (परिवर्तित नाम) से उमा का रिश्ता पक्का कर दिया. उमा और योगेश कुछ न कर सके, सिर्फ हाथ मलते रह गए. प्रेमिका की शादी किसी और से तय होने पर योगेश पर तो जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. वह दिन रात उमा की यादों में खोया रहता और उस की कही गई बातें याद करता.

27 नवंबर, 2014 को उमा का विवाह रमेश से हो गया. उमा बेमन से अपनी ससुराल चली गई. लेकिन विवाह के बाद उस का पति से मनमुटाव होने लगा. फिर एक वर्ष बीततेबीतते उमा पति का घर हमेशा के लिए छोड़ कर अपने मायके आ गई. इसी बीच उमा ने एक बेटी को जन्म दिया, जिस का नाम उस ने सौम्या रखा.

उमा अब पति रमेश से हमेशा के लिए छुटकारा पाना चाहती थी, लिहाजा उस ने अपने तलाक का मुकदमा भी दायर कर दिया.

एक बार फिर से उमा व योगेश एकदूसरे से मिलने लगे. अब योगेश उमा को अपने से दूर जाने नहीं देना चाहता था, किस्मत ने उसे फिर से उमा का साथ पाने के लिए उसे उमा से मिला दिया था. योगेश उस पर अब अपने से विवाह करने का दबाव बनाने लगा.

उमा मायके आई तो वह अपना खर्च उठाने के लिए गंगाचरण अस्पताल के पास पास स्थित एक कैफे में काम करने लगी. इसी बीच उमा की दोस्ती भूड़ पट्टी में रहने वाले सुनील शर्मा से हो गई.

32 वर्षीय सुनील शर्मा अविवाहित था और बरेली के इज्जतनगर में स्थित इंडियन वेटिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई) में संविदा पर स्टोर कीपर के पद पर तैनात था. दोनों की दोस्ती जल्द ही प्यार में बदल गई. उमा और सुनील एक ही जाति के थे और सुनील अच्छी नौकरी करता था. इसलिए उमा उस से शादी करना चाहती थी. योगेश उस की जाति का भी नहीं था और सेल्समैन की छोटी सी नौकरी करता था.

उमा ने योगेश को समझाया कि वह उस से शादी नहीं कर सकती लेकिन योगेश मान ही नहीं रहा था. उमा भले ही बदल गई हो और योगेश के प्यार को भुला बैठी हो, लेकिन वह तो उमा को दिलोजान से अभी भी चाहता था. वह उमा को हर हाल में पाना चाहता था.

जब योगेश किसी तरह से मानने को तैयार नहीं हुआ तो योगेश से पीछा छुड़ाने के लिए उमा ने सुनील से बात की तो वह योगेश को ठिकाने लगाने के लिए तैयार हो गया. इस के बाद दोनों ने उस की हत्या की योजना बना ली.

योजनानुसार पहली मार्च को उमा अपने औफिस में थी. योजना के अनुसार, रात साढे़ 8 बजे उमा ने योगेश को मिलने के लिए कुमार टाकीज के पीछे खाली पड़े मैदान में बुलाया. योगेश उस समय दुकान पर था. वह अपने मालिक जितेंद्र से तबीयत खराब होने का बहाना बना कर दुकान से निकल आया और कुमार टाकीज के पीछे मैदान में पहुंच गया.

वहां सुनील शर्मा पहले से मौजूद था. योगेश नजदीक आया तो सुनील ने उस की आंखों में लाल मिर्च का पाउडर फेंक दिया, जिस से योगेश बिलबिला उठा. इस के बाद सुनील ने साथ लाए चाकू से योगेश के गले, चेहरे व शरीर पर 4 प्रहार किए, जिस से योगेश जमीन पर गिर कर तड़पने लगा.

कुछ ही पलों में उस की मौत हो गई. सुनील ने पास ही पड़े पत्थर से उस के चेहरे को कुचला. उस के बाद वह साथ लाई टीवीएस अपाचे बाइक से उमा के पास गया. उसे पूरी बात बता दी. इस के बाद उमा रात 9 बजे उस के साथ बाइक पर बैठ कर घटनास्थल पर आई.

उमा ने सुनील से कहा कि वह बाइक से पैट्रोल निकाल कर योगेश की लाश जला दे, जिस से उस की पहचान न हो सके. इस पर सुनील ने बाइक से पैट्रोल निकाल कर योगेश की लाश पर डाल दिया और आग लगा दी. इस के बाद दोनों वहां से चले गए. लेकिन पुलिस आसानी से उन दोनों तक पहुंच ही गई.

सुनील की निशानदेही पर इंसपेक्टर गीतेश कपिल ने हत्या में प्रयुक्त चाकू, लाश जलाने में प्रयुक्त माचिस की डब्बी, रक्तरंजित कपड़े और सुनील की अपाचे बाइक नंबर यूपी25सी एम3263 बरामद कर ली.

फिर कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दोनों को सीजेएम की कोर्ट में पेश किया गया, वहां से दोनों को जेल भेज दिया गया.

प्यार का मतलब सिर्फ शारीरिक संबंध नहीं – भाग 4

जवान बेटी के भाग जाने से शिवशंकर की बिरादरी व रिश्तेदारों में थूथू होने लगी थी. इसलिए वह पूनम की खोज में जीजान से जुटे थे. 2 दिन बाद शिवशंकर को आस्था नर्सिंग होम की एक महिला कर्मचारी से पता चला कि पूनम की दोस्ती बैक के जनरेटर औपरेशन नीरज से थी. पूनम शायद उसी के साथ गई होगी.

यह अहम जानकारी मिली तो शिवशंकर ने नीरज के संबंध में जानकारी जुटाई. पता चला कि नीरज भी गायब है. शिवशंकर नीरज के गांव नयापुरवा (हिंगूपुर) गए तो उस के घर वालों ने बताया कि नीरज एक सप्ताह के लिए कहीं बाहर घूमने गया है. इस से शिवशंकर को पक्का यकीन हो गया था कि नीरज ही पूनम को बहलाफुसला कर भगा ले गया है. इस पर शिवशंकर ने थाना बिठूर में नीरज के विरुद्ध प्रार्थना पत्र दे कर बेटी की बरामदगी की गुहार लगाई.

पुलिस पूनम को बरामद कर पाती, उस के पहले ही पूनम अपने ननिहाल आजादनगर (कानपुर)  पहुंच गई. उस ने अपने नाना बाबूलाल को बताया कि उस ने अपने प्रेमी नीरज से मंदिर में शादी कर ली है. बाबूलाल ने इस की जानकारी शिवशंकर को दी तो वह पूनम को समझा कर घर ले आए.

इस के बाद घर वालों के दबाव और पुलिस हस्तक्षेप से नीरज और पूनम अलगअलग रहने को राजी हो गए. दरअसल, पुलिस ने जब नीरज को जेल भेजने की धमकी दी तो वह घबरा गया और पुलिस की बात मान ली.

इस घटना के बाद कुछ समय के लिए नीरज और पूनम का मिलनाजुलना बंद हो गया. लेकिन बाद में दोनों चोरीछिपे फिर मिलने लगे. इसी बीच नीरज ने वक्त बेवक्त बात करने के लिए पूनम को एक मोबाइल फोन दे दिया. फोन में सिम उसी के नाम का था.

पूनम को मोबाइल मिला तो दोनों में बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया. पूनम को जब भी मौका मिलता, वह नीरज से लंबी बातें करती और प्यार की दुहाई देती.

शिवशंकर ने पूनम की अस्पताल वाली नौकरी अब छुड़वा दी थी, इसलिए पूनम घर पर ही रहती थी. शिवकांती भी बेटी पर कड़ी नजर रखने लगी थी. इसी बीच शिवशंकर को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की जानकारी मिली तो उस ने अपनी बेटीपूनम का रजिस्टे्रशन करा दिया. इस योजना के तहत वरवधू को 20 हजार रुपए का चेक, घरगृहस्थी का सामान तथा वधू को आभूषण व वस्त्र दिए जाने का प्रावधान था.

वरवधू का परिचय सम्मेलन हुआ तो शिवशंकर भी अपनी पत्नी शिवकांती व बेटी पूनम को साथ ले कर पहुंचा. शिवशंकर ने उन्नाव जिले के परागी खेड़ा गांव निवासी राजवीर मौर्या के पुत्र अंकुश मौर्या को अपनी बेटी पूनम के लिए पसंद कर लिया.

पूनम और अंकुश ने भी एकदूसरे को देख कर हामी भर दी. 17 फरवरी, 2018 को सामूहिक विवाह में पूनम की शादी अंकुश से हो गई.

शादी के बाद पूनम, अंकुश की दुलहन बन कर ससुराल पहुंच गई. चूंकि पूनम सुंदर थी. उसे जिस ने भी देखा उसी ने उस के रूप सौंदर्य की तारीफ की. अंकुश स्वयं भी सुंदर पत्नी पा कर खुश था. सजीला पति पा कर पूनम भी खुश थी. फिर भी उसे अपने प्रेमी नीरज की रहरह कर याद आ रही थी. सुहागरात को भी वह नीरज को भुला नहीं पाई थी.

ससुराल में पूनम मात्र 3 दिन ही रही. इस बीच नीरज फोन कर के उस से बातें करता रहा. अंकुश ने बारबार फोन आने पर पूनम को टोका तो वह बोली, ‘‘गोलू का फोन आता है. गोलू मेरी मौसी का लड़का है.’’ अंकुश ने सहज ही पूनम की बात पर यकीन कर लिया.

20 फरवरी को शिवशंकर अपनी बेटी पूनम को ससुराल से लिवा लाया. दरअसल परंपरा के हिसाब से नवविवाहिता ससुराल में पहली होली जलती नहीं देख सकती थी. इसी परंपरा की वजह से शिवशंकर होली से 8 दिन पहले ही पूनम को ले आया था. मायके आते ही पूनम स्वतंत्र रूप से विचरण करने लगी. उस पर किसी तरह की बंदिश नहीं थी.

पूनम के पास मोबाइल फोन पहले से ही था. पहले जब वह अपने पूर्व पे्रेमी नीरज से बात करती थी तो उसी के दिए गए मोबाइल से फोन करती थी. वह नीरज से दिन में कईकई बार बात करती थी. बातचीत के दौरान वह खूब खिलखिला कर हंसती थी और नीरज को शादी करने की सलाह देती थी.

चूंकि पूनम ने नीरज के साथ बेवफाई की थी सो उसे पूनम की खिलखिलाहट और सलाह नागवार लगती थी. वह नफरत से भर उठता था. जैसेजैसे दिन बीतते गए उस की नफरत भी बढ़ती गई. आखिर उस ने पूनम को सबक सिखाने की ठान ली.

7 मार्च, 2018 की दोपहर नीरज ने पूनम  से मीठीमीठी बातें कीं और शाम को मिलने के लिए बैंक बुलाया. दोपहर बाद पूनम ने साज शृंगार किया, फिर मां को बताया कि उस के पेट में दर्द है. वह दवा लेने आस्था नर्सिंग होम सिंहपुर जा रही है. शिवकांती ने उसे जल्दी घर लौट आने की नसीहत दे कर दवा लाने की इजाजत दे दी.

पूनम शाम साढ़े 4 बजे सिंहपुर स्थित भारतीय स्टेट बैंक शाखा पहुंची. नीरज वहां जनरेटर के पास कुरसी डाले बैठा था. पूनम के आते ही उस ने कुटिल मुसकान बिखेरी, फिर पूनम को बैंक के बगल से जाने वाले जीने की सीढि़यों पर ले गया. वहां बैठ कर दोनों बातें करने लगे. बातचीत के दौरान नीरज ने पूनम से छेड़छाड़ शुरू की तो उस ने विरोध करते हुए कहा कि अब वह किसी और की अमानत है. लेकिन नीरज नहीं माना और उस ने शारीरिक भूख शांत कर ली.

शारीरिक संबंध बनाने के बाद नीरज ने पूनम पर बेवफाई का आरोप लगाया तो पूनम झगड़ने लगी. फलस्वरूप दोनों में हाथापाई होने लगी. गुस्से में नीरज ने पूनम का सिर जोर से दीवार पर टकरा दिया, जिस से वह बेहोश हो कर गिर पड़ी. यह देख वह बुदबुदाया, ‘‘बेवफा औरत, तू मेरी नहीं हुई तो मैं तुझे किसी और की भी नहीं होने दूंगा. आज मैं तुझे बेवफाई की सजा दे कर रहूंगा.’’ कहते हुए नीरज ने पूनम के गले में उसी का दुपट्टा कस दिया और फिर गला घोंट दिया.

पूनम को मौत के घाट उतारने के बाद नीरज ने उस के शरीर से सारे आभूषण उतारे और मोबाइल फोन अपने पास रख लिया. इस के बाद वह लाश को सीढि़यों पर ही छोड़ कर चला गया.

लगभग 3 घंटे तक लाश सीढि़यों पर ही पड़ी रही. रात लगभग साढ़े 9 बजे नीरज पुन: बैंक आया. सन्नाटा देख कर उस ने पूनम का शव कंधे पर लाद कर सीढि़यों से उतारा और उसे बाइक पर रख कर गंगा बैराज रोड के किनारे झाडि़यों में फेंक कर फरार हो गया.

इधर जब देर रात तक पूनम दवा ले कर घर नहीं लौटी तो शिवशंकर व उस की पत्नी शिवकांती को चिंता हुई. रातभर दोनों परेशान रहे. दूसरे रोज शिवशंकर पूनम को पता लगाने आस्था नर्सिंगहोम जा ही रहा था कि पुलिस जीप उस के दरवाजे पर आ कर खड़ी हो गई. जीप में बैठे पुलिसकर्मी शिवशंकर व उस की पत्नी शिवकांती को गंगा बैराज स्थित हरी चौराहा ले गए. जहां उन को पूनम की लाश मिली.

शिवशंकर ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो नीरज उर्फ गोलू संदेह के घेरे में आ गया. उसे गिरफ्तार कर जब पूछताछ की गई तो उस ने हत्या का जुर्म कबूल कर मृतका पूनम के आभूषण व मोबाइल बरामद करा दिए.

12 मार्च, 2018 को थाना बिठूर पुलिस ने अभियुक्त नीरज उर्फ गोलू को कानपुर कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया.