14नवंबर, 2022 की रात यही कोई 2 बजे की बात है. मध्य प्रदेश के भिंड जिले के गोरमी थाने के गांव सिकरौदा की रहने वाली एक महिला ने 100 नंबर पर फोन कर के कहा, ‘‘मैं कृष्णपाल केवट की पत्नी रामकली बोल रही हूं, मेरे पति की किसी बदमाश ने हत्या कर के उनकी लाश मेरे घर के पीछे डाल दी है.’’
चूंकि मामला गोरमी थाने का था, इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम ने गोरमी थाने को घटना की जानकारी दे दी.
सूचना मिलते ही गोरमी के एसएचओ सुधाकर सिंह तोमर, एसआई मनीराम, नादिर, एएसआई देवेंद्र भदौरिया, हैडकांस्टेबल कौशलेंद्र सिंह को साथ ले कर महिला द्वारा बताए पते की ओर रवाना हो गए. मौकाएवारदात पर पहुंचने के बाद एसएचओ ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी मामले की सूचना दे दी.
मृतक के शव और आसपास की जांचपड़ताल से पता चला कि कृष्णपाल केवट उर्फ टिंकू की हत्या करने के बाद हत्यारे उस की लाश को ठिकाने लगाने के लिए वहां तक घसीट कर लाए थे.
लाश को घसीटे जाने के निशान देख कर अनुमान लगाया गया कि हत्यारा किसी अन्य स्थान पर हत्या कर लाश को ठिकाने लगाने ले जा रहा होगा, लेकिन किसी ने लाश घसीटते हुए उसे देख लिया होगा. अत: वह पकड़े जाने के डर से लाश छोड़ कर भाग खड़ा हुआ. उस के पैर के दोनों अंगूठों पर बिली के करंट से जलाने के निशान थे.
कृष्णपाल सिंह को उस के दोनों हाथ साड़ी से बांधने के बाद उस के पैरों के अंगूठे में बिजली का करंट लगा कर मौत के घाट उतारा गया था, मृतक के दोनों हाथ अभी भी साड़ी से बंधे हुए थे. उस की आयु 37-38 साल के आसपास पास रही होगी.
लाश पड़ी होने का सब से पहले पता रात के अंधेरे में दिशामैदान के लिए गई एक महिला को चला था. उसी ने घर आ कर लाश के बारे में अपने पति को बताया था. फिर जानकारी मिलते ही और लोग भी वहां जुटने लगे थे. उसी भीड़ में शामिल मृतक की पत्नी ने पुलिस कंट्रोल रूम को इस हत्या की सूचना दी थी.
घटनास्थल की स्थिति और शुरुआती जांच में ही परिस्थितियां रामकली के खिलाफ थीं. एसएचओ को कृष्णपाल उर्फ टिंकू केवट की हत्या के मामले में उस की पत्नी रामकली की भूमिका स्पष्ट तौर पर दिखाई दे रही थी.
पुलिस ने रामकली के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि उस का सिकरौदा के ही 20 वर्षीय युवक राजू से पिछले 6 महीने से चक्कर चल रहा था.
कुछ महीने पहले वह उस के साथ घर से भाग गई थी, काफी प्रयास के बाद उस का पति उसे खोज लाया था. रामकली की इस करतूत के बाद पतिपत्नी में विवाद रहने लगा था, उन दोनों के रिश्तों में दरार आती चली गई. यह दरार इतनी बढ़ गई कि रामकली ने अपने पति को मौत के घाट उतारने की योजना बना डाली.
एसएचओ सुधाकर सिंह तोमर को लगा कि कहीं कृष्णपाल की हत्या प्रेम संबंध में बाधा बनने की वजह से तो नहीं हुई? अगर ऐसा हुआ तो रामकली भी शामिल रही होगी. उन्होंने बिना वक्त गंवाए शक के आधार पर रामकली को थाने बुलाया और उस से गहराई से पूछताछ की.
इस पूछताछ में उस ने प्रेम प्रसंग से ले कर राजू के साथ नाजायज ताल्लुकात की बात बेहिचक स्वीकार कर ली. लेकिन पति की हत्या में किसी तरह का हाथ होने से स्पष्ट तौर से मना करती रही.
उलटे वह एसएचओ से बोली, ‘‘साहब, मेरे ही पति की हत्या हुई है और आप मुझ से ही इस तरह पूछ रहे हैं, जैसे मैं ने ही उन्हें मारा हो. जिन लोगों ने मेरे पति को मार कर मेरे घर के पीछे उन की लाश फेंकी, उन्हें पकड़ने में आप कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे. आप ही बताइए, भला मैं अपने पति को क्यों मारूंगी? यदि मैं ने अपने पति की हत्या की होती तो इतनी रात गए पुलिस को खबर क्यों देती? अगर आप मुझे ज्यादा तंग करेंगे तो मैं एसपी साहब से आप की शिकायत कर दूंगी.’’
पूछताछ के बाद उसी दिन एसएचओ ने रामकली और राजू के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स देख कर वह हैरान रह गए. काल डिटेल्स से पता चला कि दोनों एकदूसरे से अकसर घंटों तक बातें किया करते थे.
घटना वाली रात भी घटना से कुछ देर पहले और बाद में भी दोनों की काफी लंबी बातें हुई थीं. सबूत मिल जाने के बाद सुधाकर सिंह तोमर ने रामकली से कहा, ‘‘तुम जिस से चाहो मेरी शिकायत कर देना, मुझे तो इस अंधे कत्ल की पड़ताल कर जल्द से जल्द इस का खुलासा करना है.’’
सुधाकर सिंह तोमर ने रामकली से पूछा, ‘‘अब तुम यह बताओ कि तुम्हारे पति की हत्या से पहले और बाद में राजू से तुम्हारी क्या बातें हुई थीं? तुम्हारे मोबाइल फोन में मौजूद इस नंबर के बारे में भी बताओ कि यह किस का है?’’
रामकली ने तपाक से बताया कि यह नंबर उस के प्रेमी राजू के मुंहबोले चाचा वीर सिंह का है.
इस बीच एसएचओ को अपने भरोसेमंद मुखबिर से पता चला कि घटना वाली रात सिकरौदा गांव के शातिर बदमाश वीर सिंह जिस पर अपनी पत्नी की हत्या सहित आधा दरजन आपराधिक मामले दर्ज हैं, को कृष्णपाल के घर में जाते हुए देखा गया था.
इस महत्त्वपूर्ण जानकारी से एसएचओ सुधाकर तोमर का माथा ठनका कि कहीं रामकली के प्रेमी के साथसाथ वीर सिंह भी तो कृष्णपाल की हत्या में शामिल नहीं था.
एसएचओ ने राजू और उस के मुंहबोले चाचा वीर सिंह को भी पूछताछ के लिए थाने बुला लिया. उन दोनों से कृष्णपाल की हत्या के बारे में पूछताछ की गई. राजू ने बताया कि जिस वक्त कृष्णपाल की हत्या होने की बात कही जा रही है, उस समय वह सिकरौदा में नहीं था. वह तो किसी काम से उत्तर प्रदेश गया हुआ था.
राजू बारबार यही बात दोहराता रहा, उस के मोबाइल फोन की लोकेशन चैक करने से एक बात साफ हो गई कि कृष्णपाल की हत्या के समय राजू की मौजूदगी सिकरौदा में नहीं थी. यानी कृष्णपाल का हत्यारा कोई और था.
इस के बाद तोमर ने रामकली से पूछा, ‘‘तुम मुझे यह बताओ कि तुम्हारे पति की हत्या से पहले और बाद में राजू और उस के मुंहबोले चाचा से तुम्हारी क्या बातें हुई थीं?’’
इस सवाल पर रामकली के चेहरे का रंग उड़ गया. वह खुद को संभालते हुए बोली, ‘‘नहीं, मेरी उन दोनों से कोई बात नहीं हुई. साहब, किसी ने आप को गलत जानकारी दी है.’’
‘‘गलत नहीं बताया, यह देख लो. तुम ने घटना वाले दिन, कबकब और किस से बात की है. इस कागज में पूरी डिटेल है. एक नजर मार लो,’’ एसएचओ ने काल डिटेल्स वाला कागज उस के हाथ में थमाते हुए कहा.
रामकली अब झूठ नहीं बोल सकती थी, क्योंकि सुधाकर सिंह तोमर ने सारी हकीकत उस के सामने जो रख दी थी. उस की चुप्पी से तोमर समझ गए कि उन की जांच सही दिशा में चल रही है.
इस के बाद उन्होंने उस से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की तो रामकली ने कुबूल कर लिया कि पति की हत्या उस ने अपने प्रेमी के मुंहबोले चाचा वीर सिंह के साथ मिल कर की थी. उस ने पति के पैर के अंगूठे पर हीटर का तार बांधने के बाद एक घंटे तक करंट लगाया था. उस ने इस हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—
तकरीबन 9 साल पहले घर वालों ने रामकली का विवाह सिकरौदा के कृष्णपाल केवट के साथ कर दिया था. रामकली इस विवाह से काफी खुश थी. उस ने बेहतर जिंदगी के सपने संजो लिए थे.
उस का लालनपालन भले ही एक गरीब परिवार में हुआ था, लेकिन उसे उम्मीद थी कि विवाह के बाद उस की सभी इच्छाएं पूरी हो जाएंगी और उस का पति उस के हर शौक को पूरा करेगा.
लेकिन ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि कृष्णपाल सिंह अव्वल दरजे का शराबी था. वह जो कुछ कमाता था, शराब में उड़ा देता था. ऐसी स्थिति में उस के सारे अरमान चकनाचूर हो गए. समय अपनी गति से चलता रहा. रामकली 4 बच्चों की मां बन गई.
रामकली जितनी सुंदर थी, उस से कहीं ज्यादा चंचल भी थी. वह ज्यादा पढ़ीलिखी तो नहीं थी, मगर उस की खासियत यह थी कि वह गजब की चालाक थी. उसे जो भी करना होता था, बेहिचक हो कर करती थी. उस के इसी स्वभाव की वजह से जो भी उस से एक बार मुलाकात कर लेता था, वह उस का दीवाना हो जाता था.
राजू भी पहली ही मुलाकात में उस का दीवाना हो गया था. यही नहीं, वह मन ही मन उसे अपनी जीवनसंगिनी बनाने के सपने संजोने लगा था. वह जब भी अल्हड़ रामकली को देखता तो उस के दिल की धड़कनें बढ़ जातीं और वह रामकली का मादक जिस्म पाने के लिए छटपटा उठता.
हालांकि शुरू में तो राजू रामकली से ठीक तरह नजर भी नहीं मिला पाता था. लेकिन जब उसे पता चला कि रामकली अपने पति से खुश नहीं है तो उस की हिम्मत बढ़ गई. जैसा कि कहा जाता है कि जहां चाह होती है, वहां राह निकल ही आती है. राजू के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.
रामकली के पति कृष्णपाल केवट को शराब पीने का शौक था. इसी के जरिए राजू को उस के करीब पहुंचने का मौका मिल गया. राजू भी अपने मुंहबोले चाचा वीर सिंह के साथ रोज कृष्णपाल के संग उस के घर पर शराब पीने जाता था.
इसी दौरान रामकली से उस की आंखें चार हो जाती थीं. फिर इसी बहाने वह रामकली के पति से ही नहीं, रामकली से भी घुलमिल गया. राजू उस की आर्थिक मदद भी करने लगा. हालांकि वीर सिंह भी रामकली से जिस्मानी संबंध बनाना चाहता था, मगर 40 वर्षीय वीर सिंह के आपराधिक चरित्र को देखते हुए रामकली इस के लिए तैयार नहीं हुई.
रामकली कोई दूधपीती बच्ची नहीं थी. वह राजू के दिल की बात अच्छी तरह से समझ रही थी. राजू को अपनी तरफ आकर्षित होते देख वह भी उस की ओर खिंची चली गई. राजू और रामकली के दिल में प्यार के अंकुर फूटे तो जल्द ही वह समय भी आ गया, जब दोनों का एकदूसरे के बिना रहना मुश्किल हो गया.
रामकली अकसर पति के नशे में मदहोश होते ही प्यार का अनैतिक खेल खेलने और अपने जिस्म की प्यास बुझाने के लिए राजू को अपने घर पर बुलाने लगी थी. जैसेजैसे यह खेल आगे बढ़ रहा था, उन दोनों के प्यार का बंधन मजबूत होता जा रहा था.
धीरेधीरे स्थिति यह हो गई कि रामकली को अपने पति कृष्णपाल की बाहों की अपेक्षा राजू की बाहें सख्त और ज्यादा अच्छी लगने लगी थीं. जो जिस्मानी सुख उसे राजू की बाहों में मिलता था, वह अपने पति की बाहों में नहीं मिल पाता था.
यही वजह थी कि उन दोनों को लगने लगा था कि अब वे एकदूसरे के बिना नहीं रह सकते. हालांकि राजू ने तो कुछ नहीं कहा लेकिन एक रोज रामकली ने उस से कहा, ‘‘राजू, अब मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती. मैं अब तुम से शादी करना चाहती हूं.’’
इस पर राजू ने उस से मजाक करते हुए कहा, ‘‘ऐसा कभी नहीं हो सकता, क्योंकि तुम सिर्फ शादीशुदा ही नहीं, बल्कि बालबच्चेदार भी हो.’’
‘‘मुझे इस से कोई मतलब नहीं. तुम अगर मुझ से सच में प्यार करते हो और मुझे हमेशाहमेशा के लिए अपना बनना चाहते हो तो इस के लिए तुम्हें मेरे पति की हत्या करनी पड़ेगी.’’ रामकली ने साफ कह दिया.
अपनी प्रेमिका के मुंह से यह सब सुन कर राजू की सिट्टीपिट्टी गुम हो गई. उस ने रामकली से दोटूक शब्दों में कहा, ‘‘मुझ से ऐसा निहायत ही घिनौना काम नहीं हो सकेगा. ऐसा करने पर हम दोनों को ही सारी उम्र जेल में गुजारनी पड़ेगी.’’
राजू ने रामकली से कहा, ‘‘हम दोनों को जो चाहिए वह हमें मिल रहा है तो फिर हम ऐसा काम क्यों करें?’’
राजू ने उसे समझाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन इस का उस पर लेश मात्र भी असर नहीं हुआ. क्योंकि वह अपने शराबी पति से हमेशा के लिए पीछा छुड़ाना चाहती थी. राजू के प्यार में अंधी हो चुकी रामकली कभी राजू से कहती कि मेरे पति को शराब में जहर दे कर मार दो, तो कभी कहती गला घोट कर किस्सा हमेशा के लिए खत्म कर दो.
रामकली किसी भी तरह अपने पति को हटाना चाहती थी. लेकिन राजू इस के लिए तैयार नहीं हो रहा था. रामकली इस बात को अच्छी तरह जानती थी कि जब तक शराबी पति जिंदा रहेगा, वह तसल्ली से अपने प्रेमी को अपना जिस्म सौंप कर तनमन की प्यास नहीं बुझा सकेगी.
13 नबंबर, 2022 की रात रामकली ने राजू को फोन कर के कहा, ‘‘राजू, कृष्णपाल इस वक्त शराब के नशे में बेसुध हो कर बिस्तर पर पड़ा है. आज अच्छा मौका है उसे रास्ते से हटाने का. जल्दी से तुम यहां आ जाओ.’’
मगर राजू ने रामकली से कहा, ‘‘आज मैं सिकरौदा में नहीं हूं, अत: मैं नहीं आ सकूंगा. तुम मेरे मुंहबोले चाचा वीर सिंह को तो जानती ही हो, उन्हें फोन कर के अपने घर पर बुला लो. उन की मदद से अपने पति का खेल खत्म कर दो.’’
कहते हैं कि औरत जब चरित्रहीनता पर उतर आती है तो उसे किसी लोकलाज का भय नहीं रहता. रामकली भी ऐसी ही औरत थी. जिस वक्त रामकली ने अपने प्रेमी के मुंहबोले चाचा वीर सिंह को फोन किया, उस समय रात के 11 बज रहे थे.
रामकली ने पहले तो उस से इधरउधर की बातें कीं, इस के बाद उस ने बिना किसी हिचकिचाहट के वीर सिंह से कहा, ‘‘मुझे आज अपने पति को अपने और राजू के रास्ते से हटाना है. पति नहीं रहेगा तो मैं राजू के साथ हमेशा के लिए रह सकूंगी.’’
उस का इतना कहना था कि वीर सिंह ने कहा, ‘‘मैं तेरी इच्छा के मुताबिक रास्ते के कांटे को आज ही हटाए देता हूं. मगर इस के बदले में तुझे मेरे संग सोना होगा.’’
रामकली पति को ठिकाने लगाने के एवज में वीर सिंह के साथ शारीरिक संबंध बनाने को तैयार हो गई. वीर सिंह खुशी से चहका और मोबाइल फोन बंद कर के सीधे रामकली के घर जा पहुंचा.
उस ने रामकली के दरवाजे पर दस्तक दी और धीरे से दरवाजे को धकेला. दरवाजा खुल गया. वीर सिंह के दिल की धड़कनें बेकाबू होने लगीं. वह उन पलों की कल्पना कर के ही रोमांचित होने लगा, जब रामकली उस की बाहों में समाने वाली थी. अब वह क्षण बहुत करीब था.
रामकली के घर पहुंच कर वीर सिंह ने रामकली की मदद से शराब के नशे में मदहोश पड़े कृष्णपाल के दोनों हाथ साड़ी से बांध दिए. उस के बाद पैर के अंगूठों पर हीटर के तार से करंट देना शुरू कर दिया. जब कृष्णपाल की सांसें थम गईं, तब रामकली ने अपनी साड़ी से उस का गला घोंट दिया.
इस के बाद वादे के मुताबिक रामकली ने अपने पति की लाश के सामने ही वीर सिंह के साथ सहवास कर उस की कामोत्तेजना शांत की.
इस के बाद रामकली ने पति की नब्ज टटोलने के बाद नफरत से उस की लाश पर थूकते हुए कहा, ‘‘मर गया कमीना. मेरे और राजू के रास्ते का कांटा हमेशा के लिए निकल गया. चलो वीर सिंह, अब इसे कुंवारी नदी में फेंक कर देते हैं.’’
रामकली ने सोचा कि लाश नदी के पानी के साथ बह जाएगी, जिस से इस की पहचान नहीं हो पाएगी तो मामला रफादफा हो जाएगा’ लेकिन जब 14 नवंबर, 2022 की रात कृष्णपाल की लाश को रस्सी से बांध कर घसीटते हुए पास में बहने वाली नदी में प्रवाहित करने दोनों ले जा रहे थे, तभी उन्हें किसी के आने की आहट सुनाई दी. तब दोनों लाश को रास्ते में ही पड़ा छोड़ कर भाग खड़े हुए.
रामकली, राजू और वीर सिंह से विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने मृतक की पत्नी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त बिजली का तार, रस्सी और 3 मोबाइल फोन बरामद कर लिए.
इस के बाद उन्हें आईपीसी की धारा 302, 201 के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. द्य
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित
दिसंबर का महीना था. रात के 12 बज रहे थे. ठंड भी ज्यादा थी, जिस के कारण मुंबई जैसे व्यस्त महानगर को भी ठंड ने अपनी आगोश में ले लिया था. लोग अपने घरों में रजाई, कंबल में सो रहे थे. कुछ अभी सोने की तैयारी में लगे थे.
मुंबई का ही एक इलाका है मीरा रोड. मीरा रोड में ही एक बंगला था शांति विला. जहां अभी लोग इतनी रात को ठंड के कारण रजाई में दुबके हुए थे, वहीं शांति विला के एक कमरे में अभी भी बहुत हलचल मची हुई थी.
16 साल की एक लड़की जिस का नाम कृति था, अपने हाथ में लिए चाकू से एक आदमी पर बदहवास अपनी पूरी ताकत लगा कर वार पे वार किए जा रही थी, जिस से खून के छींटे उस के चेहरे और कपड़ों पर फव्वारे की तरह आ रहे थे.
उसी कमरे में एक आलीशान पलंग भी था, जिस पर 14 साल की एक लड़की जिस का नाम नयना था, इन बातों से बेखबर बेसुध अभी भी सो रही थी. जबकि खून के छींटे उस के भी कपड़ों पर गिर रहे थे. खून की कुछ बूंदें उस के चेहरे पर भी आ गई थीं.
कृति इतनी बेसुध हो कर सामने वाले इंसान को चाकू घोंपती जा रही थी कि उसे जरा भी आभास नहीं हुआ था कि वह आदमी तो कब का मर चुका है. मगर वह अभी भी उस के पूरे जिस्म पर चाकू से अनगिनत जख्म बनाए जा रही थी. पता नहीं उसे उस आदमी से कितनी नफरत थी, जो वह उसे छलनी बना रही थी.
जब कृति के अंदर का गुस्सा कुछ कम हुआ तो वह रुक कर जोरजोर से सांसें लेने लगी. मगर जैसे ही उस की नजर खून से रंगे अपने हाथों और कपड़ों पर पड़ी तो पता नहीं क्या सोच कर वह जोरजोर से चीखने लगी.
पास के पलंग पर नयना अभी भी कमरे में हो रहे खूनखराबे से अनजान कुंभकरण की नींद सो रही थी. ऐसा लग रहा था, मानो वह नींद की गोली खा कर सो रही हो. पलंग के पास ही फर्श पर उस मृत आदमी का जिस्म खून से लथपथ पड़ा था. उस के शरीर पर एक महंगा नाइट गाऊन था.
शांति विला के चारों ओर ऊंची चारदीवारी थी. चारदीवारी और मकान के बीच में 25 से 30 फीट का फासला था. जिस के कारण कृति के रोनेचिल्लाने की आवाज आसपास के घरों एवं फ्लैटों में नहीं के बराबर ही जा रही थी. वैसे भी जाड़े की रात में लोग ज्यादा ओढ़ढांक कर सोते हैं.
कृति के चीखने एवं जोरजोर से रोने की आवाज सुन कर नयना की नींद आखिर टूट ही गई. वह हड़बड़ा कर झट से उठ कर बैठ गई.
सामने का दृश्य देख कर उस के होश उड़ गए. कृति नयना की बड़ी बहन थी. और कमरे में मृत पड़ा इंसान कोई और नहीं बल्कि दोनों का पिता गजेंद्र मेहरा था. कृति ने अभी अपने ही डैडी का खून किया था.
आखिर उस ने अपने ही डैडी का इतनी बेरहमी से कत्ल क्यों किया था? नयना के दिमाग में भी ऐसे ही अनगिनत सवाल उमड़ रहे थे.
‘‘दीदी, यह तुम ने क्या किया? तुम ने अपने ही हाथों से डैडी का खून…’’
‘‘नयना, यह इंसान हमारा डैडी नहीं था, बल्कि डैडी के वेश में छिपा हुआ एक जालिम भेडि़या था. जिस की घिनौनी हरकतों के बारे में सिर्फ सोच कर ही रूह कांप जाती है. दुनिया में इस से ज्यादा कमीना और गिरी हुई सोच वाला बाप कोई नहीं होगा.’’ कृति अपने अंदर की धधकती हुई ज्वालामुखी को शांत करती हुई बीच में ही बोल पड़ी थी.
‘‘दीदी, तुम ऐसा क्यों बोल रही हो? मुझे पूरी बात बताओ, आखिर हुआ क्या था?’’ नयना अपनी बड़ी बहन कृति के पास आ कर उस के कंधे पर धीरे से हाथ रखते हुए बोली.
कृति अभी भी गुस्से पर काबू पाने की कोशिश कर रही थी. कृति फर्श से धीरे से उठ कर पलंग पर आ कर बैठ गई. पीछे से नयना भी उसी के बगल में बैठ गई.
उन के डैडी गजेंद्र मेहरा, जोकि मुंबई के एक बहुत बड़े बिजनैसमैन थे, की लाश अभी भी वैसे ही फर्श पर खून से लथपथ पड़ी थी.
‘‘नयना, हर एक इंसान के बरदाश्त और धैर्य करने की सीमा एक न एक दिन टूट ही जाती है. आखिर इंसान तो इंसान ही होता है न. यह मरा हुआ हम दोनों का डैडी, मगर पता नहीं अब मैं इसे किस नाम से पुकारूं, पापी पापा, ब्लडी डैडी, कुकर्मी बाप या पता नहीं और क्याक्या उपमा दूं इसे. मुझ जैसी बेटी ऐसे कुकर्मी बाप को कुछ भी कहेगी, कम ही होगा. काश! ऐसा डैडी किसी का न हो.’’ कृति अपने चेहरे पर जमाने भर के कठोर भाव लाते हुए बोली.
‘‘नयना, आज मैं ने जो काम किया है न, वह मुझे बहुत पहले ही कर देना चाहिए था. कम से कम मुझ जैसी बेटी की उस का अपना सगा बाप ही इज्जत तो नहीं लूटता.’’
कृति की बात सुन कर नयना के पैरों तले की जमीन जैसे खिसक गई.
‘‘दीदी, यह तुम क्या कह रही हो, डैडी ने तुम्हारी…’’
‘‘हां, एक बार नहीं बहुत बार. आज यह कमीना बाप तुम्हारी भी इज्जत लूटने इस कमरे में आया था. तुम्हें आज इस ने दूध में नींद की गोलियां मिला कर दी थीं, ताकि तुम बेफिक्र हो कर सो जाओ और यह कुकर्मी अपनी हवस आराम से मिटा ले. मगर आज मेरी सहनशक्ति की सीमा टूट गई और मैं ने इसे मार दिया.’’
यह सुन कर नयना पर तो मानो पहाड़ ही टूट कर गिर पड़ा.
‘‘ये मैं क्या सुन रही हूं, यह इंसान जिसे आज तक मैं अपना डैडी समझती आ रही थी, वह इतना घिनौना और ब्लडी था. इसे तो अब डैडी कहने में भी शर्म आ रही है. दुनिया की कोई भी बेटी कभी ऐसे डैडी की कल्पना भी नहीं कर सकती है.’’ नयना भी गुस्से में मृत पड़े अपने डैडी को खा जाने वाली निगाहों से देखती हुई बोली.
‘‘दीदी, आज तुम मुझे पूरी बात बताओ. आखिर यह इंसान ऐसा कर क्यों रहा था? ’’
‘‘नयना, पता नहीं इस कुकर्मी बाप के कत्ल के इल्जाम में मुझे फांसी होगी या उम्रकैद की सजा. लेकिन मैं सीने में सच्चाई रूपी बोझ को दबाए नहीं मरना चाहती हूं. इसलिए आज मैं तुम को पूरी बात बताऊंगी.’’
कृति ने एक लंबी सांस ली. उस समय रात के एक बज रहे थे. ठंड अधिक होने के कारण बाहर श्मशान सा सन्नाटा पसरा हुआ था. कृति उसी समय अपनी बहन को पूरी बात विस्तार से बताने लगी.
कृति ने कहा कि जानती हो नयना, यह शांति विला मां की मां यानी नानी के लिए नाना ने ही बनवाया था. शांति नानी का ही नाम था. मां अपने मम्मीपापा की इकलौती संतान थीं. इसलिए नानानानी के मरने के बाद यह घर और उन की पूरी जायदाद मां को ही मिली थी.
मां बचपन से ही बहुत जिद्दी थीं. उन्होंने कालेज में अपने साथ पढ़ने वाले एक गरीब परिवार के युवक गजेंद्र मेहरा यानी हम दोनों के इस कुकर्मी बाप से अपने मम्मीपापा से झगड़ा कर के शादी की थी. नानानानी को भी अंत में अपनी इकलौती बेटी की जिद के आगे झुकना ही पड़ा था.
शुरूशुरू में तो सब कुछ ठीक रहा. नाना ने भी अपना सारा बिजनैस डैडी को सौंप दिया था. डैडी भी मन लगा कर बिजनैस की अच्छी तरह से देखभाल कर रहे थे.
शादी के 2 साल बाद मेरा और मेरे जन्म के 2 साल बाद तुम्हारा जन्म हुआ था. तुम्हारे जन्म के एक साल बाद ही एक कार दुर्घटना में नानानानी मर गए थे. नानानानी के मरते ही पता नहीं क्यों डैडी का स्वभाव एकदम से बदल गया था. अब वह बातबात पर मां से झगड़ा करने लगे थे. फिर भी मां हम दोनों की खातिर सब कुछ चुपचाप सहती जा रही थी.
उधर डैडी की हरकतें दिनप्रतिदिन और बदलती जा रही थीं. अब वह काम के बहाने अकसर घर से रात में भी बाहर ही रहने लगे थे. जबकि ये सब झूठ था. उन का अपनी ही सेक्रेटरी के साथ चक्कर चल रहा था और वो रात उसी के पास गुजारते थे.
जब मां को इस बात का पता चला तो उन्होंने गुस्से में डैडी से तलाक के लिए कोर्ट में अरजी दी. सारा कारोबार एवं यह घर भी मां के नाम पर ही था और मां यदि डैडी से तलाक ले लेतीं तो वह कंगाल बन कर सड़क पर आ जाते. इसीलिए वह किसी भी हालत में तलाक नहीं लेना चाहते थे. इस के लिए उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी. पैसे से वकील और जज को खरीद कर बारबार तलाक की अरजी को नामंजूर करवा दे रहे थे.
तारीख दर तारीख सिर्फ सुनवाई की तिथि बढ़ रही थी. देखते ही देखते तलाक के लिए कोर्ट का चक्कर लगाते मां को 7 साल बीत गए. फिर भी तलाक पर कोर्ट का कोई फैसला नहीं हुआ.
इसी बीच मां का बिना तलाक लिए ही दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. मगर अब हमें लगता है कि नाना, नानी और मां को भी डैडी ने ही पूरी प्लानिंग के साथ सिर्फ जायदाद हड़पने के लिए मरवा दिया था.
यह सुनातेसुनाते कृति की आखों से फिर आंसू निकलने लगे. जबकि नयना ध्यान से पूरी बात सुन रही थी. उस ने कहा, ‘‘डैडी के साथ आए दिन होने वाले झगड़े के कारण ही शायद मां ने हम दोनों बहनों को बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने को भेज दिया था. जिस के कारण ही हम दोनों आज तक घर के सारे हालात से अनजान थे. मां को शायद अपने मरने का भी आभास हो गया था, इसीलिए उन्होंने अपनी सारी जायदाद मेरे नाम कर दी थी.
‘‘यह जायदाद बाद में जब तुम्हारी भी उम्र 20 साल की हो जाओगी तो इस में से आधी तुम्हारे नाम हो जाएगी. इसीलिए डैडी मां के मरते ही मुझे तुरंत हौस्टल से अपने पास बुला लिया था, ताकि वो मुझ से बहलाफुसला कर सारी जायदाद अपने नाम करवा सके.’’ कहतेकहते फिर से कृति सिसकने लगी.
‘‘जानती हो नयना, मुझे मां की एक दोस्त जाह्नवी आंटी ने सारी बातें मेरे घर आने के ठीक अगले ही दिन बता दी थीं. इसीलिए मुझे डैडी की सारी सच्चाई और उन की काली करतूतों का पता चल गया था. अब तो मुझे भी उन से नफरत हो गई थी. तभी उन के लाख कोशिश के बावजूद भी मैं जायदाद उन के नाम नहीं की थी.
‘‘इस के बाद ही डैडी का घिनौना चेहरा मेरे सामने उजागर हुआ था. मेरा घर से निकलना बंद करवा दिया गया था. मुझे तुम से फोन पर डैडी अपने सामने बैठा कर ही बात करवाते थे. उस के बाद फिर मुझे कमरे में भूखेप्यासे बंद कर दिया जाता था.
‘‘इस पर भी जब इस जालिम बाप का दिल नहीं भरा तो वह जायदाद को जबरदस्ती अपने नाम करवाने के लिए मुझे मारनेपीटने भी लगा था. मगर मैं ने भी फैसला कर लिया था कि जीते जी मां की अमानत को इस निर्दयी इंसान के नाम कभी नहीं लिखूंगी.’’
कृति ने रुक कर एक लंबी सांस ली और कहा, ‘‘नयना, इस के बाद तो इंसानियत की सारी मर्यादाएं ही टूट गईं, जब यह बेशर्म बाप अपनी ही बेटी की अस्मत रोज तारतार करने लगा.’’
उस की बात सुन कर नयना दंग रह गई. वह बोली, ‘‘दीदी, इस इंसान को तो डैडी कहते हुए भी अब शर्म आ रही है. आखिर कोई इंसान इतना घिनौना काम कैसे कर सकता है? क्या आज आदमी के अंदर की इंसानियत एकदम खत्म हो गई है, जो उसे अपनी बेटी को भी हवस का शिकार बनाने में जरा भी शर्म और ग्लानि महसूस नहीं हो रही थी.’’
नयना का क्रोध भी सारी बातें सुन कर सातवें आसमान पर पहुंच गया था.
‘‘नयना, पूरी बात सुनोगी तो तुम भी दंग रह जाओगी. तुम को भी हौस्टल से यहां इसीलिए इस जालिम ने बुलाया था, ताकि यह तुम्हें भी अपनी हवस का शिकार बना कर मुझे जायदाद अपने नाम लिखने को मजबूर कर सके.’’ कहतेकहते कृति नयना से लिपट कर जोरजोर से रोने लगी.
‘‘नयना, अब इस दुनिया में तुम्हारे सिवाय मेरा था ही कौन. मैं खुद तो रोज तिलतिल कर मर ही रही थी, आखिर तुम्हें भी कैसे यह जिल्लत भरी जिंदगी जीने देती, इसीलिए मैं ने इस जालिम इंसान का खून कर दिया.’’
कृति नयना से लिपटी रोती हुई अपने दिल की भड़ास निकाले जा रही थी. बीचबीच में नयना भी रोती हुई अपनी बहन को सांत्वना दे रही थी.
रात के सन्नाटे को चीरती हुई दोनों बहनों की सिसकियां धीरेधीरे संपूर्ण वातावरण में फैलने लगी थीं, मगर उसे कोई सुनने वाला नहीं था.
आज दौलत के चक्कर में इंसान की इंसानियत इतनी गिर गई है कि उसे अपने खून के रिश्ते भी नहीं दिख रहे. शायद सच में वह ब्लडी डैडी ही था.
अगली सुबह खुद कृति ने ही पुलिस को फोन कर के पिता की हत्या की सूचना दे दी. पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंच कर गजेंद्र मेहरा के शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
पुलिस ने हत्या की आरोपी कृति को हिरासत में ले कर बाल न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया. बाल सुधार गृह से कृति को 2 साल बाद रिहा कर दिया गया. इस के बाद कृति और नयना ने मिल कर एक्सपोर्ट बिजनैस शुरू कर दिया. दोनों बहनें अब अपने बीते हुए कल को भूल चुकी हैं. द्य
खोजी कुत्ता शव को सूंघ कर भौकता हुआ शराब ठेके तक गया. वहां वह चक्कर लगाता रहा. उस के बाद वापस आ गया. पुलिस ने शराब ठेका मालिक दिनेश गुप्ता से पूछताछ की तथा शराब ठेके पर सीसीटीवी के फुटेज भी खंगाले. इस में एक संदिग्ध ललित के घर में घुसते नजर आया. लेकिन सीसीटीवी कैमरा दूर लगा होने व अंधेरे के चलते फुटेज स्पष्ट नहीं हो सकी.
पुलिस अधिकारी अभी जांच कर ही रहे थे कि मृतका के पिता कालीचरन व मां जयदेवी घटनास्थल पर आ गई. बेटी का शव देख कर वे फफक पड़े. पुलिस अधिकारियों ने उन दोनो को धैर्य बंधाया और उन से बेटी की हत्या के संबंध में पूछताछ की.
सौतेली बेटी ने दिया सुराग
कालीचरन ने बताया कि उन की बेटी सरोजनी की हत्या दामाद ललित के छोटे भाई राजेश व उस की पत्नी अंजू देवी ने की है. दामाद व राजेश के बीच संपत्ति को ले कर कई बार विवाद हुआ था. संपत्ति के लालच में ही राजेश व अंजू ने मिल कर सरोजनी की हत्या की है.
पुलिस अधिकारियों ने ललित की 12 वर्षीय बेटी अनन्या से पूछताछ की तो उस ने बताया कि बगल में रहने वाले चाचा राजेश व चाची अंजू की मम्मीपापा से नहीं पटती थी. कुछ माह पहले दोनों में संपत्ति को ले कर विवाद हुआ था.
उस ने बताया जब से मम्मी (सौतेली मां सरोजनी) ब्याह कर घर आई थी, चाचाचाची खुश नहीं थे. छोटीछोटी बात पर झगड़ा करने की कोशिश करते थे. उन्होंने बाबा को भी पापा के खिलाफ कर दिया था.
चाची ने कुछ दिन पहले मम्मी से कहा था कि तुम्हारे घर पर दीपक जलाने वाला नहीं बचेगा. चाहे जितना बड़ा मकान बना लो, इस में राज करने वाला कोई नहीं बचेगा.
चाची ने एक बार मम्मी को बहुत मारा था. पापा और चाचा में भी कई बार लड़ाई हो चुकी है. शक है कि चाचाचाची ने ही मम्मी की हत्या की है.
हालांकि जब ललित पासवान से पुलिस अफसरों ने पूछताछ की तो उस ने स्वीकार किया कि उस की अपने छोटे भाई राजेश से नहीं पटती है. लेकिन वह हत्यारा नहीं हो सकता. उन दोनों की नाराजगी का फायदा कोई तीसरा भी उठा सकता है. लेकिन वह तीसरा व्यक्ति कौन हो सकता है, इस की जानकारी उसे भी नहीं है.
पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने सरोजनी के शव को पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय अस्पताल भिजवा दिया. उस के बाद एसएचओ योगेश कुमार सिंह को आदेश दिया कि वह इस मामले की गहन पड़ताल करें और हत्यारों को गिरफ्तार करें.
आदेश पाते ही योगेश कुमार सिंह ने जांच शुरू कर दी. चूंकि मृतका के पिता कालीचरन तथा ललित की बेटी अनन्या ने राजेश व उस की पत्नी अंजू पर हत्या का शक जाहिर किया था. अत: उन्होंने उन दोनों को हिरासत में ले लिया. थाने में उन से सख्ती से पूछताछ की. लेकिन वे दोनों खुद को बेकुसूर बताते रहे.
उन्होंने लड़ाईझगड़ा व संपत्ति विवाद की बात तो स्वीकार की, पर हत्या जैसे जघन्य अपराध से साफ इनकार कर दिया. योगेश कुमार सिंह को लगा कि ये दोनों दोषी नहीं हैं. उन्होंने उन दोनों को सशर्त थाने से घर भेज दिया.
एसएचओ योगेश कुमार सिंह को अभी तक मृतका का मोबाइल फोन बरामद नहीं हुआ था. उन्होंने मृतका सरोजनी के मोबाइल फोन नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. जिस से पता चला कि 29 अक्तूबर को शाम 4 से रात 12 बजे के बीच एक नंबर पर 3 बार तथा दूसरे नंबर पर एक बार बात हुई.
जिस नंबर पर 3 बार बात हुई थी, उस की जानकारी जुटाई गई तो पता चला वह नंबर तुलसियापुर (विधनू कस्बा) निवासी अंकुर श्रीवास्तव के नाम दर्ज है. दूसरा नंबर जिस पर एक बार बात हुई, वह नंबर राजू निवासी मेन रोड (विधनू) के नाम था.
अंकुर ने उगल दी सच्चाई
अब अंकुर व राजू पुलिस के रडार पर आ गए. पुलिस ने खबरियों को उन की टोह में लगा दिया. अंकुर तो पुलिस के हाथ नहीं लगा, लेकिन राजू हाथ आ गया.
राजू ने बताया कि उस ने रात 12 बजे सरोजनी को फोन किया था. लेकिन उस ने बात करने से नानुकुर की और फोन बंद कर दिया. उस के बाद क्या हुआ, उसे पता नहीं. सरोजनी की हत्या में उस का कोई हाथ नही है. वह बेकसूर है. श्री सिंह को भी लगा कि वह निर्दोष है. अत: सशर्त उसे थाने से जाने दिया.
2 नवंबर, 2022 की सुबह 5 बजे एसएचओ योगेश कुमार सिंह ने अंकुर श्रीवास्तव को समाधि पुलिया के पास से नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया. जब उस से सरोजनी की हत्या के संबंध में पूछा गया तो वह साफ मुकर गया.
लेकिन सख्ती करने पर वह टूट गया और उस ने हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया. इस के बाद एसपी (आउटर) तेजस्वरूप सिंह ने आननफानन प्रैसवार्ता की और सरोजनी हत्याकांड का खुलासा कर दिया. अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि सरोजनी से उस के नाजायज संबंध थे. 29 अक्तूबर को जब ललित अपनी बेटी अनन्या के साथ ससुराल चला गया तो पति के जाने की जानकारी सरोजनी ने उसे दी. उस के बाद उस की 2-3 बार सरोजनी से फोन पर बात हुई. उस के बुलाने पर वह रात 11 बजे उस के घर पहुंच गया.
दोनों के बीच प्रेमालाप शुरू हो गया. उस ने प्रणय निवेदन किया तो नानुकुर के बाद वह राजी हो गई. वह चारपाई पर पहुंचा ही था कि इसी समय सरोजनी के मोबाइल फोन पर किसी की काल आई. सरोजनी ने उस से ‘हां, नहींनहीं, अभी मत आना’ कह कर बात की फिर फोन बंद कर दिया.
अंकुर ने बताया कि जब उस ने फोन के बारे में पूछा तो वह बहाने बनाने लगी. तभी उसे गुस्सा आ गया और वह उस की छाती पर सवार हो गया. उस ने उस का टेंटुआ दबा कर पूछा, ‘‘बता, फोन किस का था?’’
जान पर बन आई तो सरोजनी ने बता दिया कि फोन राजू मैकेनिक का था. यह सुनते ही अंकुर के तनबदन में आग लग गई. वह जान गया कि उस का टांका राजू से भी भिड़ा है.
उस ने सरोजनी से कहा कि वह विश्वासघातिनी है. पहले पति को धोखा दे कर उस से संबंध बनाए. अब उसे धोखा दे कर राजू के साथ रंगरलियां मनाना चाहती है. आज तुझे विश्वासघात की सजा जरूर मिलेगी. इस के बाद उस ने उस का गला कस दिया. फिर वह रसोई में गया और मीट काटने वाले चाकू से उस का गला रेत दिया. हत्या के बाद उस के शव को चारपाई के नीचे छिपा दिया. बाथरूम में जा कर खून सने हाथ व चाकू को धोया. उस के बाद कमरे का दरवाजा बाहर से बंद किया, फिर रात के अंतिम पहर में घर से बाहर आ गया.
कोई देख कर पहचान न ले, इस के लिए उस ने गमछा मुंह पर लपेट लिया. सरोजनी के मोबाइल फोन को तोड़ कर उस ने विधनू नहर में फेंक दिया. इस के बाद वह फरार हो गया. लेकिन पुलिस से बच न सका और पकड़ा गया.
चूंकि अंकुर श्रीवास्तव ने हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था, अत: एसएचओ योगेश कुमार सिंह ने मृतका के पति ललित पासवान की तहरीर पर आईपीसी की धारा 302 के तहत अंकुर श्रीवास्तव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और उसे विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया. 4 नवंबर, 2022 को थाना विधनू पुलिस ने हत्यारोपी अंकुर श्रीवास्तव को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया.
कथा लिखने तक अनन्या अपने पिता के साथ रह रही थी. प्यार पाने की उस की तमन्ना अधूरी ही रह गई. क्योंकि जब वह मात्र 5 साल की थी, तब जन्म देने वाली मां के प्यार से वंचित हो गई और अब जब वह थोड़ी बड़ी हो कर 12 साल की हुई तो सौतेली मां का प्यार भी छिन गया. द्य
-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में अनन्या नाम परिवर्तित है.
बापबेटे में लंबे वक्त से मनमुटाव, झगड़े और संपत्ति को ले कर विवाद होता रहता था. रावतमल जैन ने इस का हल यह निकाला कि उन्होंने संदीप को अब रुपए देने बंद कर दिए. पैसे न मिलने से संदीप तिलमिला गया. वह साड़ी की दुकान चला रहा था, लेकिन उस से इतनी आमदनी नहीं होती थी कि वह अपनी जरूरतें पूरी कर सके. वह तनाव में रहने लगा.
संदीप पिता को समझने लगा दुश्मन
इस का असर यह हुआ कि वह पिता को अपना सब से बड़ा दुश्मन मानने लगा. एकांत में वह यही सोचता था, ‘यदि उस के पिता जिंदा रहेंगे तो वह पैसेपैसे को मोहताज हो जाएगा. उसे अपने पिता की पूरी संपत्ति का मालिक बनना है तो पिता को रास्ते से हटाना ही होगा.’
यह बात उस के दिमाग में बैठ गई. अब वह अपने पिता को रास्ते से हटाने के लिए तरहतरह की योजनाएं बनाने लगा.
अंत में उस ने ठोस योजना बना कर हत्या करने के लिए रिवौल्वर की तलाश शुरू कर दी. किसी से मालूम हुआ कि देशी कट्टे, पिस्तौल बेचने वाला भगत सिंह गुरुदत्ता है. संदीप भगत से जा कर मिला. गुरुदत्ता अग्रसेन चौक, दुर्ग में ही रहता था. संदीप ने उस से एक लाख 35 हजार रुपए में देशी रिवौल्वर और कारतूस खरीद लिए.
योजनानुसार संदीप ने अपनी पत्नी संतोष कुमारी को बेटे के साथ 27 दिसंबर, 2017 को अपनी ससुराल दल्ली राजहरा, जिला बालोद भेज दिया. संदीप ने 31 दिसंबर की रात को ही चौकीदार रोहित देशमुख को घर से जाने के लिए कह दिया. चौकीदार रात को उन के घर की चौकसी करता था. संदीप ने उस से कहा कि उस की मां और पिताजी कहीं रिश्तेदारी में 2 दिन के लिए जा रहे हैं, वह खुद ही घर की देखभाल कर लेगा. चौकीदार रोहित के जाने के बाद संदीप के लिए रास्ता साफ था.
रात को वह ऊपरी मंजिल पर रहा और मौका तलाश करता रहा. पूरी रात गुजर गई, तब सुबह साढ़े 5 बजे संदीप नीचे पिता रावतमल के कमरे में दबेपांव आ गया. उस के पिता फ्रैश होने के लिए बाथरूम में गए थे. संदीप ने अपनी मां के कमरे की बाहर से कुंडी लगा दी, उस के पिता बाथरूम से गैलरी में आए तो संदीप ने उन की पीठ में 2 फायर कर दिए. रावतमल गोली लगते ही लहरा कर गिरे.
गोली की आवाज से सूरजी देवी जाग गईं और चिल्लाने लगीं. संदीप डर कर ऊपरी मंजिल पर भाग गया. मां उसे फोन कर रही थीं, उस ने काल अटेंड नहीं की. कुछ देर बाद वह यह देखने के लिए नीचे आया कि स्थिति क्या है. उस की मां कमरे में बंद थीं और अपने नाती सौरभ गोलछा को फोन लगा कर कुछ बता रही थीं.
संदीप ने मां का मुंह बंद करने के लिए उस के कमरे का दरवाजा खोला और मां के सीने में 3 फायर झोंक दिए. मां नीचे गिर कर तड़पने लगीं तो संदीप वहां से भाग निकला.
कुछ ही देर मे सूरजी देवी का नाती सौरभ गोलछा वहां आया तो कमरे में नानानानी के शव देख कर घबरा गया. उस ने तुरंत पुलिस को काल कर के इस हत्याकांड की जानकारी दे दी. सुबहसुबह नए साल पर 2-2 कत्ल की सूचना मिलने पर पुलिस सकते में आ गई.
कोतवाली थाने के तत्कालीन एसएचओ भावेश साव अपने अधिकारियों को इस घटना की सूचना देने के बाद घटनास्थल पर आ गए.
सौरभ गोलछा के अलावा पासपड़ोस के लोग घटनास्थल पर मौजूद थे. एसएचओ ने दोनों लाशों का बारीकी से निरीक्षण किया. वहां पर 14 कारतूस और 2 खाली कारतूस के खोखे पड़े थे. उन्हें कब्जे में ले लिया गया.
यह हत्या दुर्ग के जानेमाने समाजसेवी रावतमल जैन की हुई थी, उन की पत्नी को भी गोलियां मारी गई थीं. थोड़ी देर में पुलिस आईजी दीपांशु काबरा, तत्कालीन एसपी अमरेश मिश्रा, एडिशनल एसपी शशिमोहन सिंह, डीएसपी एस.एस. शर्मा आदि घटनास्थल पर आ गए.
संदीप के खिलाफ मिले ठोस सबूत
आसपास पूछताछ की गई. सौरभ गोलछा वहां आने वाला पहला इंसान था. उस ने अपने मामा संदीप जैन पर शक जाहिर किया. पड़ोसियों से भी यही मालूम हुआ कि संपत्ति के लिए संदीप अपने पिता रावतमल से लड़ाई करता था.
पुलिस की नजर में संदीप का नाम आने पर उसे संदेह के घेरे में ले कर जांच शुरू कर दी गई.
रावतमल जैन और सूरजी देवी की लाशें पंचनामा बना कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी गईं.
आईजी दीपांशु काबरा ने पूरी रणनीति बना कर तत्कालीन एसपी अमरेश मिश्रा के निर्देशन में एडिशनल एसपी शशिमोहन सिंह की अगुवाई में एक टीम गठित कर दी, जिस में एसएचओ भावेश साव, इंसपेक्टर एस.आर. पठारे, आर.डी. मिश्रा, जांच इकाई के एएसआई नारायण सिंह व अन्य पुलिसकर्मियों को शामिल कर के संदीप जैन की तलाश शुरू कर दी गई.
पुलिस ने पूरे शहर की नाकाबंदी कर दी. संदीप जैन के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया गया.
दिन चढ़ने तक पूरे दुर्ग में समाजसेवी रावतमल जैन और उन की पत्नी सूरजी देवी की हत्या की खबर आग की तरह फैल गई. मीडिया जगत ने इस कांड को उछालना शुरू कर दिया. पुलिस मामले को जल्द से जल्द हल कर के मीडिया को शांत करना चाहती थी. पुलिस की मुस्तैदी के कारण 4 घंटे में ही संदीप जैन को धर दबोचा गया.
उसे थाने में ला कर कड़ी पूछताछ शुरू हुई तो उस ने अपना जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि उस के पिता बातबात पर उसे संपत्ति से बेदखल करने की धमकी देते रहते थे. उस की मनपसंद शादी पिता की रूढि़वादी विचारधारा के कारण नहीं हो पाई.
पिता की इस बात से भी उसे चिढ़ थी कि वह अपनी पूजा के लिए नौकर से शिवनाथ नदी से जल मंगवाते थे, जबकि उन के घर में साफ पानी का नल लगा था. उन्होंने कुछ समय से उसे खर्चा देना भी बंद कर दिया था, इसी से परेशान हो कर उस ने पिता को गोली मार दी. मां को वह मारना नहीं चाहता था, लेकिन उस ने घटना की सूचना फोन से अपने नाती को देनी चाही तो मैं ने उन्हें भी गोलियों से भून दिया.
मीडिया ने यह शोर मचाया कि पुलिस ने अपनी पीठ थपथपाने के लिए निर्दोष संदीप जैन को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने संदीप जैन को रिमांड पर ले कर उसे हथियार देने वाले भगतसिंह गुरुदत्ता और सहयोगी शैलेंद्र सागर को गिरफ्तार किया तो संदीप को निर्दोष बताने वालों के मुंह बंद हो गए.
संदीप जैन की पत्नी संतोष, भांजा सौरभ गोलछा, चौकीदार रोहित देशमुख, ड्राइवर राजू सोनवानी पुलिस के मुख्य गवाह बने.
संदीप को जेल भेज कर इस मामले की चार्जशीट कोर्ट में लगाई गई. 5 साल बाद आखिर अपने जन्मदाता की हत्या करने वाले संदीप जैन को मृत्युदंड की सजा सुना दी गई.
एक लोक अभियोजक बालमुकुंद चंद्राकर के अनुसार कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि ऐसे अपराधों को गंभीरतापूर्वक और कठोरता से हतोत्साहित किया जाना उचित होगा, जिस से समाज में ऐसे अपराध और ऐसे अपराधी पनप न सकें या ऐसे अपराध करने की हिम्मत कोई व्यक्ति न कर सके.
सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने तीनों मुजरिमों को हिरासत में ले लिया और उन्हें जेल भेज दिया. द्य
—कथा अधिवक्ताओं से की गई बातचीत पर आधारित
ऋषभ रात 8 बजे अपने दोस्त मनीष के साथ चकरपुर पंचायत घर पहुंच गया. उस ने स्कूटी पंचायत घर के बाहर खड़ी कर दी. कुछ देर बाद राजकपूर भी सत्येंद्र सिंह को साथ ले कर बाइक से चकरपुर पहुंच गया. वहां उन दोनों ने सूआ से ऋषभ की स्कूटी पंक्चर कर दी.
रात 10 बजे ऋषभ और मनीष खापी कर शादी समारोह के बाहर आए तो देखा कि उन की स्कूटी का पहिया पंक्चर है. पंक्चर बनवाने के लिए वे स्कूटी पैदल ही हाईवे तक लाए.
वे जैसे ही शिवा होटल की तरफ चले तभी घात लगाए बैठे राजकपूर व सत्येंद्र सिंह ने ऋषभ पर चापड़ से कातिलाना हमला कर दिया. ऋषभ की गरदन व कंधे पर गहरी चोट लगी और वह वहीं खून से लथपथ हो कर गिर पड़ा.
मनीष ने थाना सचेंडी पुलिस को सूचना दी तो एसएचओ प्रद्युम्न सिंह पुलिस दल के साथ आ गए. उन्होंने घायल अवस्था में ऋषभ को हैलट अस्पताल में भरती कराया. मनीष की सूचना पर सपना भी अस्पताल पहुंच गई और रोनेपीटने का नाटक करने लगी.
कुछ समय बाद ऋषभ को होश आया तो सपना ने उसे कानपुर के चर्चित मधुराज नर्सिंग होम में भरती करा दिया. रात में राजकपूर ने सपना को मैसेज भेजा कि काम हो गया. जवाब में सपना ने मैसेज किया कि वह तो बच गया.
दूसरे रोज सपना ने अपने पड़ोसी रामकिशन विश्वकर्मा के खिलाफ पति पर जानलेवा हमला करने की रिपोर्ट दर्ज करा दी. सपना ने एसएचओ प्रद्युम्न सिंह को बताया कि रामकिशन विश्वकर्मा से उस का पैसों के लेनदेन को ले कर विवाद चल रहा है. इसी रंजिश में उस ने हमला करवाया है.
ससुर की तरह पति ऋषभ को भी निपटा दिया लेकिन…
ऋषभ लगभग 3 दिन तक मधुराज नर्सिंगहोम में रहा. उस के बाद उसे छुट्टी मिल गई. सपना ऋषभ को घर ले आई. ऋषभ की जान बच गई तो उस ने पति को मारने के लिए बी प्लान तैयार किया. इस प्लान में उस ने प्रेमी राजकपूर व मैडिकल स्टोर संचालक सुरेंद्र सिंह को शामिल किया.
उस ने जिस तरह दवा में ओवरडोज दे कर ससुर को मारा था, उसी तरह पति को भी मारने का जतन करने लगी. सपना ने ऋषभ को दवा की ओवरडोज देनी शुरू कर दी. ऋषभ शुगर का भी मरीज था, फिर भी सपना ने उसे ग्लूकोज का इंजेक्शन लगवा दिया.
मैडिकल स्टोर संचालक सुरेंद्र सिंह यादव सपना का आशिक था. वही सपना को ऐसी घातक दवाएं मुहैया करा रहा था. जिस से उस के पति ऋषभ की किडनी तथा लीवर में संक्रमण फैल जाए और उस की मौत हो जाए. मौत के इस खेल में सपना का प्रेमी राजकपूर भी सहयोग कर रहा था.
3 दिसंबर, 2022 को ऋषभ की हालत बिगड़ी तो सपना ने प्रेमी राजकपूर को वाट्सऐप मैसेज भेजा कि ऋषभ की हालत बिगड़ रही है. उस की समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करे.
इस पर राजकपूर ने जवाब भेजा कि वह ऋषभ को ले कर किसी अस्पताल भागे, इलाज का नाटक करे जिस से सभी को लगे कि उस की बीमारी से मौत हुई है. इस के बाद सपना ऋषभ को ले कर हैलट अस्पताल गई, जहां उस की मौत हो गई.
चूंकि 5 दिन पहले ऋषभ पर जानलेवा हमला हुआ था और उस की पत्नी सपना ने पड़ोसी रामकिशन के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी, इसलिए शक के आधार पर एसएचओ प्रद्युम्न सिंह ने ऋषभ के शव का पोस्टमार्टम कराया. लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट चौंकाने वाली थी.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ऋषभ की मौत प्राणघातक हमले में आई चोटों से नहीं, बल्कि लीवर और किडनी में संक्रमण होने से हुई थी.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी एसएचओ ने पुलिस अधिकारियों को दी तो डीसीपी (पश्चिम) विजय ढुल तथा एसीपी (पनकी) निशंक शर्मा घटनास्थल पर मौकामुआयना करने पहुंचे. इस के बाद उन्होंने ऋषभ की संदिग्ध मौत की जांच हेतु एक पुलिस टीम गठित कर दी.
इस गठित पुलिस टीम ने अपनी जांच ऋषभ पर हुए हमले से शुरू की. सर्विलांस के जरिए जब टीम ने हाईवे घटनास्थल पर घटना के समय एक्टिव मोबाइल नंबरों को खंगाला तो पता चला, वहां पर आरोपी रामकिशन विश्वकर्मा का मोबाइल एक्टिव नहीं था, लेकिन 2 अन्य संदिग्ध नंबर एक्टिव थे.
पुलिस टीम ने उन नंबरों की काल डिटेल्स का मिलान मृतक ऋषभ की पत्नी सपना की काल डिटेल्स से किया तो पता चला कि एक नंबर पर सपना की बात होती थी. घटना के कुछ देर बाद ही उस से सपना को काल गई थी.
पुलिस ने उस नंबर की छानबीन की तो वह रायपुर (नर्वल) निवासी राजकपूर का निकला. पुलिस ने जब राजकपूर की छानबीन की तो पता चला कि वह सपना का प्रेमी है. सपना के उस से शादी के पहले से प्रेम संबंध है.
शक के आधार पर पुलिस ने सपना और राजकपूर को पकड़ा और सख्ती से पूछताछ की तो दोनों टूट गए और ऋषभ की हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया.
सपना ने बताया कि उस ने पति की हत्या के लिए 3 लाख की सुपारी प्रेमी राजकपूर को दी थी. उस ने अपने कर्मचारी सत्येंद्र सिंह के साथ ऋषभ पर हमला किया था. लेकिन जब उस की जान बच गई तो उस ने पति को दवा की ओवरडोज दे कर मार दिया. दवाइयां उसे आशा मैडिकल स्टोर संचालक सुरेंद्र सिंह यादव ला कर देता था.
सपना के बयान के आधार पर पुलिस टीम ने सत्येंद्र सिंह व सुरेंद्र सिंह को भी उन के घरों से गिरफ्तार कर लिया. राजकपूर व सत्येंद्र की निशानदेही पर पुलिस टीम ने हमले में प्रयोग किया चापड़, बाइक तथा सूआ बरामद कर लिया.
एसएचओ प्रद्युम्न सिंह ने ऋषभ की हत्या का खुलासा करने तथा आरोपियों को पकड़ने की जानकारी डीसीपी (वेस्ट) विजय ढुल को दी तो उन्होंने प्रैसवार्ता आयोजित कर ऋषभ की हत्या का खुलासा किया. उन्होंने खुलासा करने वाली टीम को 50 हजार रुपए ईनाम देने की घोषणा भी की.
चूंकि आरोपियों ने हत्या का जुर्म कुबूल कर लिया था, अत: एसएचओ प्रद्युम्न सिंह ने भादंवि की धारा 302 के तहत सपना, राजकपूर, सत्येंद्र सिंह व सुरेंद्र सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर सभी को विधिसम्मत गिरफ्तार कर लिया.
10 दिसंबर, 2022 को पुलिस ने सभी आरोपियों को कानपुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया. द्य
-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित
अपनी योजना के मुताबिक पूनम अपने बच्चों के साथ 29 जनवरी, 2023 की सुबह बिंदकी कस्बा वाले घर आ गई. पूनम अपने प्रेमी अविनाश के संपर्क में थी और अमित की हर गतिविधि की जानकारी उसे मोबाइल फोन पर दे रही थी.
दिन कोलाहल में बीत गया. रात 8 बजे पूनम ने पति अमित व बच्चों के साथ खाना खाया. इस बीच पूनम ने किसी को आभास नहीं होने दिया कि वह कितने खतरनाक मंसूबे ले कर मुंबई से आई है.
खाना खाने के बाद पूनम मकान दूसरी मंजिल पर पहुंची. वहां एक कमरे में उस ने 10 वर्षीय बेटे व 8 वर्षीया बेटी को लिटा दिया तथा दूसरे कमरे में पूनम अमित के साथ लेट गई. कुछ देर बाद अमित तो खर्राटे मार कर सो गया, लेकिन पूनम की आंखों से नींद कोसों दूर थी.
पूनम फोन पर अविनाश के संपर्क में थी. रात 12 बजे के बाद शेरा अपने साथी केशव, मोहित, शीलू व अंशुल के साथ लोडर पर सवार हो कर आ गए और अमित के घर के आसपास छिप गए.
अविनाश व रामखेलावन पहले ही बाइक से पहुंच गए थे और रेकी कर रहे थे. रात एक बजे पूनम दूसरी मंजिल से उतर कर नीचे आई. उस ने मुख्य दरवाजा धीरे से खोल कर अपने जीजा रामखेलावन व प्रेमी अविनाश को घर के अंदर कर लिया.
अविनाश ने फोन कर सुपारी किलर अंकित उर्फ शेरा तथा उसके साथियों को भी घर के अंदर बुला लिया. फिर सधे कदमों से सभी दूसरी मंजिल पर पहुंच गए, जहां अमित गहरी नींद सो रहा था.
अंकित सिंह उर्फ शेरा ने अपने बैग से लोहे का छोटा सब्बल निकाला और अमित के सिर पर भरपूर वार किया. अमित चीख न सके, इसलिए मोहित, अंशुल ने उस का मुंह दबोच लिया और शीलू तथा अविनाश ने पैर दबोच लिए. पूनम पति की छाती पर सवार हो गई. शेरा ने जहां अमित के सिर पर कई प्रहार किए, वहीं केशव ने नुकीली चीज से अमित का गला छेद डाला. अमित कुछ देर तड़पा, उस के बाद ठंडा हो गया.
अमित की हत्या के बाद शेरा और उस के साथी तो फरार हो गए, लेकिन पूनम का जीजा व प्रेमी अविनाश कुछ देर तक कमरे में रुके रहे. उन्होंने पूनम के हाथ रस्सी से बांधे फिर दरवाजे की कुंडी बाहर से लगा कर वे दोनों भी फरार हो गए.
सुबह 4 बजे पूनम जोरजोर से चीखने लगी और दरवाजा पीटने लगी. उस की आवाज सुन कर सास माधुरी देवी व ननद अनीता पूनम के कमरे के बाहर पहुंचीं. दरवाजे की कुंडी बाहर से लगी थी.
कुंडी खोल कर दोनों कमरे के अंदर पहुंचीं तो उन के मुंह से चीख निकल गई. सामने पलंग पर अमित की लाश खून से लथपथ पड़ी थी. माधुरी ने बहू के हाथ से रस्सी खोली और पूछा, ‘‘अमित की हत्या किस ने की?’’
पूनम रोते हुए बोली, ‘‘सासू मां, मुझे पता नहीं कि उन की हत्या किस ने की. कुछ लोग आए, उन्होंने इन के सिर पर वार कर मार डाला. विरोध करने पर उन्होंने मेरे हाथ बांध दिए और दरवाजे की कुंडी बाहर से बंद कर फरार हो गए.’’
अमित का शव देख कर मांबेटी पछाड़ें मार कर रो पड़ीं. दूसरे कमरे में सो रहे बच्चे सुरक्षित थे.
पुलिस जांच में पूनम आई निशाने पर
सुबह का उजाला फैलते ही अमित की हत्या की खबर जंगल की आग की तरह पूरे बिंदकी कस्बे में फैल गई. कुछ देर में वहां भीड़ जुट गई. थाना बिंदकी पुलिस को खबर लगी तो एसएचओ शमशेर बहादुर सिंह भारी पुलिस बल के साथ महाजनी गली में अमित गुप्ता के मकान पर पहुंच गए.
उन की सूचना पर कुछ ही देर बाद एसपी राजेश कुमार सिंह व सीओ परशुराम भी आ गए. उन्होंने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और मृतक की मां व पत्नी से पूछताछ की. घटनास्थल पर मृतक का ममेरा भाई अभय मौजूद था.
पुलिस अधिकारियों ने अभय से पूछताछ की तो उस ने बताया कि नानी ने उसे फोन पर बताया था कि अमित की किसी ने हत्या कर दी है. तब वह यहां आया. उसे शक है कि अमित की हत्या में उस की पत्नी पूनम का हाथ है. मृतक की मां माधुरी देवी ने भी पूनम पर ही शक जाहिर किया. मृतक के 10 साल के बेटे ने भी बताया कि मम्मीपापा में अकसर लड़ाई होती रहती थी. पुलिस अधिकारियों ने पूनम से पूछताछ की तो वह आंसू बहाने लगी. बारबार बयान भी बदल रही थी. शक होने पर पुलिस ने पूनम को हिरासत में ले लिया और शव को निरीक्षण के बाद पोस्टमार्टम हाउस फतेहपुर भेज दिया.
थाना बिंदकी पर पुलिस अधिकारियों ने जब पूनम से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गई और पति की हत्या करने की बात कुबूल कर ली. उस ने हत्यारों के नाम भी बता दिए.
हत्या का भेद खुलते ही पुलिस ने ताबड़तोड़ छापा मार कर अंकित सिंह उर्फ शेरा और उस के साथी केशव व अंशुल को गिरफ्तार कर लिया. भोर पहर में साड़ चौराहे से पूनम के प्रेमी अविनाश उर्फ उमेंद्र को भी गिरफ्तार कर लिया लेकिन पूनम का जीजा रामखेलावन, मोहित तथा शीलू पुलिस को चकमा दे कर फरार हो गए. गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों ने हत्या का जुर्म कुबूल किया.
हत्यारोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने आलाकत्ल लोहे का सब्बल मय बैग, 315 बोर के 2 तमंचे, 2 जिंदा कारतूस, 3 अदद मोबाइल फोन, 2 बाइकें, एक पिकअप (लोडर) यूपी78 एफटी 8157 तथा 30 हजार रुपया नकद बरामद किया.
अमित हत्याकांड का खुलासा होते ही एसपी राजेश कुमार सिंह ने पुलिस लाइन में प्रैसवार्ता की और केस की पूरी जानकारी दी.
एसएचओ शमशेर बहादुर सिंह ने मृतक की मां माधुरी देवी को वादी बना कर धारा 302 आईपीसी के तहत पूनम, अविनाश उर्फ उमेंद्र, रामखेलावन, अंकित सिंह उर्फ शेरा, मोहित, अंशुल, केशव व शीलू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली.
3 फरवरी, 2023 को सभी आरोपियों को फतेहपुर की जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.
कथा लिखने तक शीलू, मोहित व रामखेलावन फरार थे. पुलिस उन को तलाश रही थी. मृतक के दोनों बच्चे अपनी दादी के संरक्षण में थे. द्य
—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित