रिश्तों पर भारी पड़ी मोहब्बत – भाग 1

‘‘मियां, क्या बात है बड़े खुश नजर आ रहे हो आजकल? मुझे नहीं बताओगे अपने दिल की

बात?’’ दाऊद ने अपने दोस्त नदीम को छेड़ा.

‘‘तुम्हीं तो मेरे हमदम, मेरे दोस्त हो. अपने दिल की बात तुम से नहीं बताऊंगा तो और किसे बताऊंगा.’’ नदीम ने मुसकराते हुए जवाब दिया.

‘‘तो दिल की बात कह भी डालो यार, अब और बरदाश्त नहीं होता.’’

‘‘बताता हूं, बताता हूं, थोड़ा सब्र करो भाई. मैं सब बताता हूं.’’

‘‘भाई, कहीं इश्कविश्क का चक्कर तो नहीं है?’’

‘‘हां दाऊद भाई, मुझे किसी से इश्क हो गया है. बेपनाह इश्क. मैं उसे चाहने लगा हूं, वो भी मुझे चाहती है.’’

‘‘कौन है वो खुशकिस्मत, जिस से मेरा यार दिल लगा बैठा है? मुझे उस के बारे में नहीं बताएगा?’’

‘‘भाई, बताऊंगा भी और मुलाकात भी कराऊंगा. बस, सही वक्त आने दो मेरे यार.’’

‘‘नाम क्या है उस नाजनीन का और कहां रहती है?’’ दाऊद ने बेसब्री से पूछा.

‘‘नुसरत जहां.’’ नदीम ने जवाब दिया.

‘‘नुसरत जहां! कौन नुसरत जहां?’’

‘‘अरे वो ही वकील इम्तियाजुल की बेगम, जहां बच्चों को अरबी की ट्यूशन पढ़ाने जाता हूं.’’

‘‘अच्छा तो मियां बच्चों की अम्मी से दिल लगा बैठे?’’

‘‘क्या करूं यार, पहल तो नुसरत ने की थी. और फिर मैं ठहरा बांका जवान. उस के प्यार को अपनी जवानी की जंजीर से कैद न करता तो मुझे नामर्द समझती. मैं ऐसावैसा थोड़े न हूं. लपक कर उसे अपनी बाहों में भर लिया.’’

इस के बाद नदीम अहमद और दाऊद घंटों नुसरत को ले कर बातें करते रहे. यहां बता दें कि नदीम अहमद एक मसजिद का मुअज्जिन (सेवादार) था और नुसरत जहां के बच्चों को उस के घर अरबी की तालीम देता था जबकि दाऊद उसी मसजिद का इमाम था. हमउम्र होने के नाते दोनों के बीच गहरा याराना था.

नदीम उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की दरगाह शरीफ थाना के मुसल्लमपुर राम गांव  का रहने वाला था, जबकि दाऊद कोतवाली नगर थाने के काजीपुरा में रहता था. दोनों एक ही मसजिद के सेवक थे. वहीं दोनों का आपस में परिचय हुआ था.

बहरहाल, 17 अक्तूबर, 2022 की तारीख थी उस दिन और सुबह के यही कोई 8 बज रहे थे. दरगाह शरीफ थाने के मुंशी और दीवान औफिस में आ चुके थे और अपने काम में जुट गए थे. तभी एक महिला, जिस की उम्र 35-36 साल के आसपास थी, थाना परिसर में रोतीबिलखती दाखिल हुई.

महिला के रोने की आवाज सुन कर दीवान (हैडकांस्टेबल) दयाराम की नजर औफिस से बाहर गेट की ओर गई तो उन्होंने संतरी दिनेश को आवाज दे कर महिला को औफिस भेजने के लिए कहा.

2 मिनट बाद महिला दीवान दयाराम के सामने खड़ी थी. दीवान ने उस से रोने का कारण पूछा तो महिला ने रोते हुए बताया, ‘‘साहब, मैं तो लुट गई बरबाद हो गई.’’

‘‘अरे भई, पहले रोनाधोना बंद करो. जो पूछता हूं उसे साफसाफ बताओ. तुम्हारे साथ क्या हुआ? तुम्हारा नाम क्या है और कहां रहती हो?’’

‘‘नुसरत जहां नाम है मेरा. मैं सलारगंज की जमील कालोनी में रहती हूं. मैं अपने शौहर और बच्चों के साथ बरामदे में सो रही थी. रात में न जाने कब किसी ने मेरे शौहर की गला काट कर हत्या कर दी साहब. मैं तो बरबाद हो गई. मेरे दोनों छोटेछोटे बच्चे बिखर गए.’’ इतना कह कर नुसरत जहां दहाड़ मार कर फिर से रोने लगी थी.

दीवान दयाराम ने समझाबुझा कर किसी तरह उसे चुप कराया.

हत्या की बात सुनते ही दीवान दयाराम बुरी तरह चौंक गए. फौरन उन्होंने इस की सूचना एसएचओ मनोज कुमार को दी. हत्या की सूचना मिलते ही मनोज कुमार हैरान रह गए. गश्त कर के सुबहसुबह लौटे थे और सो रहे थे जैसे ही सूचना मिली. नींद आंखों से कोसों दूर हो गई थी.

एसएचओ मनोज फटाफट बिस्तर से उतरे और हाथमुंह धो कर बिना चाय पीए ही टीम के साथ घटनास्थल की तरफ रवाना हो गए. घटनास्थल की दूरी थाने से 7-8 किलोमीटर रही होगी. थोड़ी देर में ही वह टीम के साथ वहां पहुंच गए और जांच में जुट गए.

मरने वाले का नाम था इम्तियाजुल हक और वह पेशे से सिविल कोर्ट बहराइच में वकील थे. पुलिस जांच में जुटी हुई थी. हत्यारों ने बड़ी बेरहमी से गला रेत कर उन की हत्या की थी. सिर के पिछले हिस्से में भी किसी भारी चीज से वार किया था.

लेकिन हैरान करने वाली बात यह थी कि बीवी पास में सोई थी और उसे घटना की भनक तक नहीं लगी. ऐसा कैसे हो सकता है? यह सोच कर एसएचओ मनोज कुमार का माथा ठनक गया.

उन्होंने घटना की जानकारी एसपी केशव कुमार चौधरी और एएसपी कुंवर ज्ञानंजय सिंह को दे दी थी. साथ ही डौग स्क्वायड और फोरैंसिक टीम को सूचना दे कर मौके पर बुला लिया था. दोनों टीमें मौके पर पहुंच कर जांच में जुट गई थीं.

इसी दौरान एसपी केशव कुमार चौधरी और एएसपी कुंवर ज्ञानंजय सिंह भी मौके पर पहुंच कर जांचपड़ताल में जुट गए थे. घटनास्थल की जांच के बाद दोनों पुलिस अधिकारियों के मन में भी वही सवाल उठा था, जो इंसपेक्टर मनोज कुमार के मन में उठ चुका था.

खैर, लाश का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया गया और मृतक की पत्नी नुसरत जहां की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ हत्या की धारा 302 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया.

पुलिस के घटनास्थल पर पहुंचने के बाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गयाप्रसाद मिश्र और मृतक के तमाम साथी वकील भी मौके पर पहुंच गए थे.

मौके पर मृतक का छोटा भाई रिजवानुल हक भी मौजूद था. गयाप्रसाद ने एसपी केशव कुमार चौधरी को चेतावनी दी कि अगर जल्द से जल्द इम्तियाजुल हक के कातिल नहीं पकड़े गए तो सारे वकील हड़ताल पर बैठ जाएंगे.

वकीलों की इस चेतावनी का पुलिस पर गहरा असर पड़ा. एसपी केशव कुमार चौधरी ने आननफानन में पुलिस की 4 टीमें गठित कर दीं, जिस में एक टीम दरगाह शरीफ, दूसरी एसओजी, तीसरी स्वाट विभाग और चौथी टीम सर्विलांस की बनाई थी.

एसपी ने शाम को चारों टीमों के साथ अपने आवास पर बैठक की. बैठक में घटना की समीक्षा की. उसी बैठक में एक बात खुल कर सामने आई कि जब पति और पत्नी एक ही बिस्तर पर साथसाथ सो रहे थे तो इतनी बड़ी वारदात की जानकारी पत्नी को क्यों नहीं हुई. इस प्रश्न ने मृतक की पत्नी नुसरत जहां को शक के दायरे में ला कर खड़ा कर दिया था.

130 मिस्ड काल का रहस्य

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की एक तहसील है मोहनलालगंज, जो लखनऊ से 23 किलोमीटर दूर है. तहसील में कोषागार यानी ट्रेजरी होने की वजह से वहां सिपाहियों की ड्यूटी लगती है. उस रात कोषागार की सुरक्षा के लिए सिपाही रामकिशोर और रामप्रकाश वर्मा की ड्यूटी थी.

रात ढाई बजे के करीब सिपाही रामकिशोर की नींद खुली तो वह लघुशंका के लिए बाहर निकला. उस की नजर तहसील परिसर में बने कुएं की ओर गई तो उस ने देखा कि कुएं के ऊपर लगे लोहे के जाल पर उस का साथी सिपाही रामप्रकाश वर्मा लटक रहा है.

यह देख रामकिशोर स्तब्ध रह गया. उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. रामप्रकाश वर्मा बहुत ही खुशदिल युवा सिपाही था. उस से ऐसी उम्मीद कतई नहीं थी. रामकिशोर कुएं के नजदीक पहुंचा तो पता चला कि मफलर का फंदा बना कर रामप्रकाश वर्मा ने आत्महत्या कर ली है.

कोतवाली परिसर में सिपाही द्वारा आत्महत्या करने की घटना ने उसे परेशान कर दिया. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे. उस ने यह बात कोतवाली जा कर सभी को बताई. घटना के बारे में पता चलते ही इंसपेक्टर धीरेंद्र प्रताप कुशवाहा और सीओ राजकुमार शुक्ला वहां पहुंच गए.

सिपाही की लाश देख कर हंगामा मच चुका था. तरहतरह की बातें होने लगी थीं. लोगों को लगा कि किसी दुश्मन ने सिपाही को मार कर इस तरह लटका दिया है. पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका. इस के बाद पुलिस रामप्रकाश के बारे में व्यक्तिगत जानकारी जुटाने में लग गई.

रामप्रकाश वर्मा उत्तर प्रदेश के जिला प्रतापगढ़ के भोगापुर गांव का रहने वाला था. वह मध्यमवर्गीय परिवार का था. घर वालों को उस से बहुत उम्मीदें थीं. सन 2015 में 21 साल की उम्र में रामप्रकाश वर्मा की भरती उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के रूप में हुई थी. वह उपासना नाम की एक लड़की (बदला हुआ नाम) से प्यार करता था. उस ने उपासना से वादा किया था कि नौकरी लगते ही वह उस से शादी कर लेगा.

उपासना और रामप्रकाश वर्मा की शादी में परेशानी यह थी कि दोनों अलगअलग जाति के थे, जिस की वजह से उपासना के घर वाले रामप्रकाश वर्मा से उस की शादी के लिए तैयार नहीं थे. शादी को ले कर दोनों के बीच कभीकभी झगड़ा भी हो जाता था.

रामप्रकाश की मौत के बाद आसपास रहने वालों ने बताया कि पिछली रात वह बारबार किसी को फोन कर रहा था और बेचैन सा इधरउधर घूम रहा था. पुलिस ने रामप्रकाश वर्मा का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले कर जांच की तो पता चला कि उपासना के नंबर से शाम 8 बज कर 38 मिनट से ले कर रात 11 बज कर 51 मिनट तक 130 बार काल की गई थीं. मोबाइल से साफ पता चल रहा था कि रामप्रकाश वर्मा ने उस से बात नहीं की थी. उपासना के नंबर से 7 मैसेज भी आए और रामप्रकाश ने भी 17 मैसेज किए.

पुलिस को रामप्रकाश के फोन में एक रिकौर्डिड मैसेज भी मिला. यह रात को 11 बज कर 33 मिनट पर रिकौर्ड हुआ था. मैसेज में कहा गया था, ‘तुम मुझे भूल जाना. हम मर जाएंगे, जो होगा वह तुम्हें सुबह पता चल जाएगा.’

सिपाही रामप्रकाश वर्मा की जेब से पुलिस को एक लवलेटर भी मिला. यह उपासना का लिखा हुआ था, जिस में कहा गया था, ‘तुम मुझे भूल जाना.’ जानकारों के मुताबिक रामप्रकाश वर्मा और उपासना को यह पता चल चुका था कि परिवार वालों की मरजी से उन की शादी नहीं हो सकती. इसलिए वे एकदूसरे को भूल जाने की सलाह दे रहे थे. रामप्रकाश को जब उपासना का पत्र मिला तो वह दुखी हो गया. इस के बाद उस ने तय किया कि अब वह उस से बात नहीं करेगा.

उपासना को लग रहा था कि पत्र पा कर उस को दुख होगा, क्योंकि वह बहुत ही सीधा सरल और भावुक था. ऐसे में वह कोई भी फैसला ले सकता था. इसी डर से वह रामप्रकाश को बारबार फोन कर रही थी. रामप्रकाश को लग रहा था कि अगर अब उस ने बात की तो वह अपने मन के भावों को छिपा नहीं पाएगा. ऐसे में उस के सामने एक ही रास्ता था कि वह आत्महत्या कर ले.

गुस्से में उसे यह भी नहीं सूझ रहा था कि इस बात को कैसे बताए. अंतत: उस ने रिकौर्डिड मैसेज में उपासना को यह बात बताई. अपनी बात कहने के बाद रामप्रकाश ने गले में मफलर का फंदा डाल कर आत्महत्या कर ली.

रामप्रकाश की मौत की जिम्मेदार जातिवादी सोच है. आज भी समाज में ऊंचीनीची जाति का फर्क बना हुआ है. इस के साथ ही जिन परिवारों के बच्चे सरकारी नौकरी में आ जाते हैं, उन की प्रतिष्ठा बढ़ जाती है. उन के परिवार वाले दिल में दहेज की चाहत ले कर बैठ जाते हैं. सामाजिक प्रतिष्ठा, दहेज और जातिवाद जैसी सोच हमारे समाज में अभी भी दिलों में गहरे तक बैठी है.

यही वजह है कि युवा अपनी पसंद की शादी नहीं कर पाते. कुछ मामलों में जब लड़के या लड़की की मनपसंद शादी नहीं हो पाती तो वे भावुक हो कर आत्महत्या जैसे फैसले कर लेते हैं. रामप्रकाश वर्मा के सामने यही परेशानी थी. वह योग्य था, उपासना को पसंद था, पर उपासना के घर वाले रुढि़वादी सोच का शिकार थे. ऐसे में वह उस से अपनी लड़की की शादी करने को तैयार नहीं थे.

रामप्रकाश अपनी इस सोच के आगे खुद को मजबूर पा रहा था. ऐसे में वह न तो उपासना को कुछ कह पा रहा था और न ही खुद कुछ कर पा रहा था. आखिर उस ने परेशान हो कर खुद की जान देने का फैसला कर लिया.

रामप्रकाश वर्मा की मौत ने एक बार फिर से यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि योग्य लड़के भी मानसिक दबाव का शिकार हो कर मौत को गले लगा रहे हैं. जबकि आमतौर पर यह समझा जाता है कि केवल टीनएज लड़के ही प्रेम संबंधों के दबाव में आ कर आत्महत्या जैसे फैसले कर लेते हैं.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कुछ पात्रों के नाम बदल दिए गए हैं.

बेपनाह इश्क की नफरत : 22 साल की प्रेमिका का कत्ल – भाग 1

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के थाना अहरौला के अंतर्गत एक गांव अशहाकपुर पड़ता है. इसी गांव में केदार प्रजापति अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के छोटे परिवार में पतिपत्नी और 2 बच्चे थे, जिस में एक बेटी थी. उस का नाम आराधना रखा गया था और एक बेटा सुनील था, जो आराधना से छोटा था.

यही केदार प्रजापति का घरसंसार था. वह बेहद निर्धन किसान थे. गांव में झोपड़ी डाल कर परिवार के साथ रहते थे. बेटी आराधना थी तो लड़की लेकिन वह पिता के कंधे से कंधा मिला कर चलती थी.

संस्कार और असीम गुणों की खान आराधना ने पढ़ते हुए सिलाईकढ़ाई की ट्रेनिंग ले ली थी. पढ़ाई और घरगृहस्थी के कामों से फुरसत पाने के बाद वह कपड़ों की सिलाई करती थी. सिलाई से वह अपना और घर का खर्च निकाल लेती थी. बेटी के इन्हीं गुणों से पिता का सीना चौड़ा हुए जा रहा था.

बात 9 नवंबर, 2022 की दिन के 12 बजे के आसपास की है. आराधना के फोन पर एक काल आई थी. काल उस के बचपन की सहेली मंजू यादव ने की थी, ‘‘हैलो..’’ काल रिसीव करते हुए आराधना चहक कर बोली, ‘‘हाय मंजू, तुम कैसी हो? बड़े दिनों बाद मेरी याद आई?’’

‘‘मैं तो तुम्हें फोन कर के याद भी कर लेती हूं,’’ मंजू जवाब देती हुई बोली, ‘‘तुम बताओ, कितनी दफा मुझे याद करती हो या मुझे फोन करती हो?’’

‘‘अरे बाप रे बाप, जरा सा मजाक किया तो इतना गुस्सा?’’

‘‘गुस्सा न करूं तो क्या करूं. बात ही तुम ऐसी करती हो यार कि किसी को भी गुस्सा आ जाए.’’

‘‘सौरी बाबा, सौरी,’’ खिलखिलाती हुई आराधना आगे बोली, ‘‘कान पकड़ती हूं. अब तो गुस्सा थूक दो. अब मैं मजाक के मूड में नहीं हूं.’’

‘‘तो अब साहिबा किस मूड में हैं?’’

‘‘सच्ची बाबा, तेरी कसम. अब मजाक के मूड में नहीं हूं. वह तो तुम्हें छेड़ने के लिए थोड़ी दिल्लगी कर लेती हूं वरना मेरी क्या मजाल जो तुम्हें छेड़ूं?’’

‘‘अगर वाकई सीरियस हो चुकी हो तो कुछ कहूं?’’ मंजू गंभीर हो कर बोली.

‘‘हां, हूं. बोलो, क्या कहना चाहती हो?’’ आराधना ने सवाल किया.

‘‘मैं क्या कह रही थी कि मैं भैरोधाम मंदिर दर्शन करने जा रही थी, सोचा कि तुम से भी पूछ लूं. क्या तुम भी चलोगी?’’

‘‘नेकी और पूछपूछ?’’ आराधना ने चहकते हुए जवाब दिया, ‘‘कब से मेरा मन भैरोधाम घूमने का हो रहा था. साथ में कोई मिल ही नहीं रहा था, इसलिए सोचसोच कर मन मसोस कर रह जा रही थी.’’

‘‘खैर, बाकी बातें हम रास्ते में भी कर लेंगे. तुम फटाफट तैयार हो कर गांव के बाहर पुलिया के पास मिलो, मैं वहीं पहुंच रही हूं, बाय.’’ कहती हुई मंजू ने काल डिसकनेक्ट कर दी.

आराधना का छोटा भाई सुनील उस समय घर पर ही था. उस ने भाई से मंजू के साथ भैरो मंदिर जाने की बात बता दी. मोबाइल फोन उस ने अपने पास रख लिया और जल्दी घर वापस लौटने की बात कह कर निकल गई थी.

रात के करीब 8 बज गए थे. मंदिर से दर्शन कर आराधना अब तक घर नहीं लौटी थी तो उस के पिता केदार प्रजापति और छोटा भाई सुनील बुरी तरह परेशान हो गए थे. मां इस हालत में नहीं थी कि वह बेटी के बारे में चिंता करे. क्योंकि बीमार होने की वजह से वह तो खुद ही दूसरे के ऊपर आश्रित थी.

रात जैसेजैसे शबाब पर चढ़ रही थी, बूढ़े पिता केदार की चिंता की लकीरें वैसेवैसे बढ़ती जा रही थीं.

मुख्यद्वार पर टकटकी लगाए केदार ने पूरी रात आंखों में काट दी थी. लेकिन न तो बेटी का फोन ही आया और न ही उस के बारे में पता चला कि वह कहां है. बेटी के घर न लौटने से बूढ़े बाप परेशान थे.

केदार ने बेटे सुनील को मंजू के घर भेज कर बेटी के बारे में पता लगाने को कहा तो सुनील कठही में मंजू के घर पहुंच गया. उस ने उस से आराधना के बारे में पूछा तो उस ने बताया, ‘‘हम तो शाम को ही मंदिर से घर लौट आए थे. वह अपने घर लौट गई और मैं अपने घर. क्या हुआ, आप इतने परेशान क्यों हैं?’’

‘‘आराधना अब तक घर नहीं लौटी है,’’ सुनील ने उसे बताया.

यह सुन कर मंजू हैरान होते हुए बोली, ‘‘वो तो मेरे साथ ही लौट आई थी. पता नहीं फिर वो कहां चली गई?’’

इस के बाद सुनील अपने घर लौट आया और पूरी बात पिता को बता दी.

बेटे की बात सुन कर केदार को यह समझते देर न हुई कि बेटी किसी मुसीबत है. केदार बेटे सुनील को ले कर तुरंत थाना अहरौला पहुंच गए और वहां मौजूद एसएचओ योगेंद्र बहादुर सिंह से मिले. उन्होंने अपनी 22 वर्षीय बेटी के रहस्यमय ढंग से गुम होने की बात उन्हें बताई.

उन्होंने आगे यह भी कहा कि बीते कल दोपहर 12 बजे उस की सहेली मंजू का फोन आया था. उस के साथ भैरोधाम मंदिर जाने को कह कर निकली थी और अब तक घर नहीं लौटी.

यह सुन कर एसएचओ का माथा ठनका. उन्होंने केदार को उचित काररवाई करने का आश्वासन दे कर घर भेज दिया और लिखित तहरीर के आधार पर उस की गुमशुदगी दर्ज कर के आगे की काररवाई में जुट गए.

आराधना को लापता हुए 5 दिन बीत चुके थे. अब तक उस का कहीं पता नहीं चला था. 6ठें दिन यानी 15 नवंबर, 2022 को अहरौला थानाक्षेत्र के पश्चिपट्टी स्थित गौरी का पुरा गांव स्थित सड़क के किनारे कुएं से किसी चीज के सड़ने की जबरदस्त बदबू आ रही थी. आतेजाते लोग अपनी नाक पर रुमाल रख कर गुजरते थे.

हिम्मत जुटा कर ग्रामीणों ने कुएं के भीतर झांक कर देखा तो अंदर का दृश्य देख कर आश्चर्य के मारे आंखें फटी की फटी रह गईं. कुएं के भीतर पानी में कई टुकड़ों में सिरविहीन लाश तैर रही थी.

टुकड़ों में कटी लाश की खबर जंगल में आग की तरह चारों तफ फैल गई थी. गांव वाले दहशत के मारे सन्न थे. चौकीदार राम नयन ने दिल दहला देने वाली घटना की सूचना अहरौला थाने के एसएचओ योगेंद्र बहादुर सिंह को मोबाइल से दी.

2 आशिको की एक ही आशा – भाग 1

8जनवरी, 2023 का दिन था. पीलीगंगा, हनुमानगढ़ राजस्थान के एसएचओ विजय कुमार अपने कार्यालय मैं रोजमर्रा की फाइलों को निपटा रहे थे, तभी एक बदहवास से दिखने वाले युवक ने उन से कमरे में आने की गुजारिश की. एसएचओ की नजर जब उस युवक पर पड़ी तो वह काफी दुखी व परेशान दिखाई दे रहा था. एसएचओ ने उस युवक को अपने पास बुला कर सामने पड़ी कुरसी पर बैठने का इशारा किया. फिर उस से बोले, ‘‘हां, बोलिए क्या काम है आप का? यहां कैसे आना हुआ?’’

‘‘साहब, मेरा नाम सुनील कुमार है और मैं पीलीगंगा के ही वार्ड नंबर 2 में रहता हूं. मेरे 26 साल के चचेरे भाई राजू का कल रात किसी ने खून कर दिया. रात में ही कुछ लोग उसे सरकारी अस्पताल में ले गए थे. वहां बाद में डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया और उस की लाश अभी मोर्चरी में है. मुझे सुबह पता चला तो मैं अस्पताल में पहुंचा. वहां मैं ने जब लाश देखी तो उस के शरीर पर काफी चोटों के निशान थे. आप से प्रार्थना है कि आप इस केस को दर्ज कर हत्यारों के खिलाफ कठोर कानूनी काररवाई करें,’’ कहतेकहते उस युवक की आंखें आंसुओं से छलछला उठी थीं.

‘‘आप चिंता न करें, अभी आप की रिपोर्ट दर्ज कर हम उचित काररवाई करेंगे. जो भी दोषी होगा, उस के खिलाफ जरूर काररवाई की जाएगी,’’ एसएचओ ने भरोसा दिया.

मामला हत्या का लग रहा था, इसलिए एसएचओ विजय कुमार एसआई मोहन लाल को साथ ले कर सरकारी अस्पताल पहुंच गए. उन्होंने लाश का निरीक्षण किया तो पाया कि मृतक राजू की लाश का मुंह थोड़ा सा खुला हुआ था तथा उस के मुंह से झाग भी निकल कर बाहर आया हुआ था. मृतक के बाएं कान व नाक में भी खून आया हुआ था. गरदन पर रस्सी बांधने जैसे गहरे निशान थे और उन निशानों में खून जमा हुआ था. कमर पर भी 3 जगहों पर खरोंचों के निशान पाए गए. उन्हें भी मामला संदिग्ध लगा तो उन्होंने इस की सूचना एसपी अजय सिंह और सीओ को भी दे दी.

पुलिस ने अस्पताल में मौजूद मृतक की पत्नी आशा से भी पूछताछ की. पुलिस ने मौत की संदिग्धता को देखते हुए लाश का पोस्टमार्टम मैडिकल बोर्ड से करवाने के बाद और अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर के जांच शुरू कर दी.

यह घटना काफी दिल को दहलाने वाली थी. हत्या के विरोध में लोग जगहजगह धरनाप्रदर्शन करने में लगे थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी अजय सिंह ने एएसपी सुरेश चंद्र व सीओ सुश्री पूनम के सुपरविजन में एक पुलिस टीम का गठन किया. टीम में एसएचओ विजय कुमार, एसआई मोहनलाल, हैडकांस्टेबल बलतेज सिंह, कांस्टेबल अविनाश, रमेश कुमार, संदीप, अमनदीप, प्रदीप, गुरतेज सिंह एवं महिला कांस्टेबल कैलम को शामिल किया.

पुलिस सरगर्मी से इस ब्लाइंड मर्डर की तहकीकात में जुटी हुई थी. पुलिस ने इस केस में अपने विश्वस्त मुखबिरों को भी सतर्क कर दिया था. 9 जनवरी, 2023 को एक मुखबिर अपने साथ एक 25-26 साल के नौजवान को ले कर थाने आया. उस ने एसएचओ से कहा, ‘‘साहब, यह निरंजन है. यह भिखारी है. इस ने उस रात की वारदात को देखा था.’’ मुखबिर ने उस युवक का परिचय कराया.

‘‘क्या देखा है तुम ने ? मुझे साफसाफ बताओ.’’ एसएचओ ने साथ आए युवक से पूछा.

‘‘साहब, मेरा न कोई आगे है और न पीछे. बस भीख मांग कर गुजारा करता हूं. कभी मंदिर की चौखट पर या कभी सड़क किनारे बने चबूतरों पर सो जाता हूं. साहब, मुझे इस बात का डर है कि यदि मैं ने आप को कुछ बताया तो वे लोग मुझे भी जान से मार सकते हैं. वे लोग बड़े निर्दयी हैं.’’ निरंजन ने घबराते हुए कहा. वह उस समय एक अज्ञात डर से कांप रहा था.

‘‘देखो निरंजन, तुम्हें पुलिस पर विश्वास है न, तुम्हें कुछ नहीं होगा. तुम मुझे बस यह बता दो कि तुम ने क्या देखा? तुम्हारा नाम या तुम्हारे बारे में हम किसी को भी नहीं बताएंगे,’’ एसएचओ विजय कुमार ने कहा.

‘‘साहब, रात के लगभग 12 बजे का समय हो रहा था. मैं उस दिन भागीरथी बोर्ड की एक दुकान के चबूतरे पर सोया हुआ था. अचानक एक आदमी की चीखों से मेरी नींद खुल गई. मैं ने कंबल से सोते हुए ही अपना सिर बाहर निकाला तो देखा कि 3 लोग एक युवक को पीट रहे थे. तीनों के हाथों में डंडे भी थे. फिर उसे मार कर वे तीनों वहां से भाग गए.’’ निरंजन ने कहा.

‘‘वे कौन थे?’’ एसएचओ ने पूछा.

‘‘साहब उन में 2 आदमी थे और एक औरत थी.’’ निरंजन ने कहा.

‘‘क्या तुम उन तीनों को पहचान सकते हो?’’

‘‘नहीं साहब, वहां पर अंधेरा था और मैं डर भी रहा था कि कहीं उन की नजर मुझ पर पड़ गई तो वे मुझे भी मार डालेंगे. इसलिए मैं डर के मारे फिर से सो गया. साहब, इस से ज्यादा मुझे कुछ भी मालूम नहीं है.’’ निरंजन ने हाथ जोड़ते हुए कहा.

‘‘ठीक है निरंजन, तुम बेफिक्र रहो. हम तुम्हारे बारे में किसी को भी कुछ नहीं बताएंगे. तुम भी यह बात किसी को मत बताना. तुम अपनी जिंदगी वैसे ही जीते रहो, जैसी तुम जीते आए हो. तुम अब जा सकते हो.’’ कहते हुए एसएचओ ने निरंजन को वहां से वापस भेज दिया.

ज्योतिषी के चक्कर में प्रेमी की हत्या – भाग 1

केरल भारत का दक्षिणी राज्य है. केरल-तमिलनाडु सीमा के दूसरी ओर कन्याकुमारी जिले के काराकोरम की रहने वाली थी 23 वर्षीया ग्रीष्मा. वह कन्याकुमारी के एक कालेज से एमए इंग्लिश की पढ़ाई कर रही थी. वह द्वितीय वर्ष की टौपर थी. वहीं परसाला के पास मुरयांगरा का रहने वाला था 24 वर्षीय जेपी शैरोन राज. वह नेयूर क्रिश्चियन कालेज में बीएससी रेडियोलौजी अंतिम वर्ष का छात्र था.

कालेज अलगअलग होने के बावजूद पढ़ाई के दौरान दोनों का अकसर मिलना हो जाता था. इसी दौरान दोनों की दोस्ती हुई और फिर प्यार भी. दोनों के ही परिवार पढ़ेलिखे व संपन्न थे.

ग्रीष्मा और शैरोन राज लगभग रोज ही मिलते. फिर वे घूमते, खातेपीते, बतियाते और मस्ती करते थे. दूसरे दिन मिलने का वायदा कर अलग हो जाते थे. धीरेधीरे दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा. शैरोन ग्रीष्मा को बेपनाह प्यार करने लगा था.

दिन में जब तक वह ग्रीष्मा से एक बार मिल नहीं लेता था, उसे चैन नहीं मिलता था. यही हाल ग्रीष्मा का था. ये दोनों की ही जिंदगी का सब से खुशगवार हिस्सा था. वे एकदूसरे के बेहद करीब थे. इसी तरह उन की दोस्ती और प्यार को एक साल यूं ही बीत गया.

इसे संयोग कहें या कुछ और क्योंकि पिछले कुछ दिनों से जब भी शैरोन अपनी प्रेमिका के साथ घूमने के दौरान कुछ खातापीता तो उस से मिलने के बाद उस की तबियत बिगड़ जाती थी. शैरोन को उल्टी होने लगती. शैरोन के घर वाले जब उस की तबियत के बारे में पूछते तो वह इसे इत्तफाक बता कर बात को टाल देता था.

जूस पीने से शैरोन की बिगड़ी तबियत

14 अक्तूबर, 2022 को ग्रीष्मा ने शैरोन को फोन कर अपने घर काराकोरम में बुलाया. शैरोन प्रेमिका ग्रीष्मा के घर पहुंचा. वहां ग्रीष्मा ने शैरोन की खातिरदारी की और उसे पीने के लिए जूस दिया. शैरोन ने जूस पी लिया लेकिन जूस में कड़वाहट थी, इसलिए ग्रीष्मा ने उसे मैंगो जूस भी पिलाया. ग्रीष्मा से मिलने के बाद शैरोन अपने घर के लिए चल दिया. रास्ते में उसे उल्टियां होने लगीं. खैर, किसी तरह शैरोन अपने घर पहुंचा.

घर वापस आने के बाद शैरोन की तबियत ज्यादा खराब हो गई. घर वालों ने उसे रात को परसाला के अस्पताल में, बाद में तिरुवनंतपुरम मैडिकल कालेज में भरती कराया.

डाक्टरों ने शैरोन की जांच करने के बाद उसे दवाइयां दीं. उस के खून का टेस्ट भी कराया. कई बार उल्टियां होने के बाद उसे राहत मिली. खून की रिपोर्ट भी सामान्य आई. इस पर अस्पताल से शैरोन को छुट्टी दे दी गई.

मगर 17 अक्तूबर को शैरोन की तबियत फिर से बिगड़ गई. उसे फिर से अस्पताल में भरती कराया गया. खून की जांच की गई तो उस में कई कौंप्लीकेशंस (जटिलताएं) दिखीं. शैरोन की हालत को देखते हुए उसे आईसीयू में भरती करना पड़ा.

अस्पताल में हो गई शैरोन की मौत

इस के बाद डाक्टर लगातार शैरोन को बचाने के प्रयास में जुट गए. लेकिन उस की तबियत बिगड़ती चली गई. बौडी और्गन फेल होने से उसे हार्टअटैक पड़ा और आखिर में 11 दिन इलाज के बाद 25 अक्तूबर को शैरोन की मौत हो गई.

शैरोन की मौत से तो उस के घर वालों पर जैसे आसमान टूट पड़ा. लेकिन प्रश्न यह था कि आखिर अचानक ये कैसे हुआ? शैरोन की तबियत एकाएक खराब होना महज इत्तफाक था या इस के पीछे कोई साजिश थी?

चूंकि शैरोन की तबियत तब खराब हुई थी, जब वह अपनी प्रेमिका ग्रीष्मा के बुलावे पर उस से मिलने उस के घर गया था. तब शैरोन के घर वालों को शक हुआ कि शायद बेटे की इस हालत के पीछे उस की प्रेमिका ग्रीष्मा का ही हाथ है. हालांकि अपनी मौत से पहले शैरोन की अपने घर वालों से बात हुई थी और उस ने किसी पर भी, खासकर अपनी प्रेमिका ग्रीष्मा पर तो बिलकुल भी शक नहीं जताया था.

लेकिन शैरोन की मौत के 4 दिन बाद यानी 29 अक्तूबर को उस की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई, जिस से बाजी पूरी तरह से पलट गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई कि मौत से पहले शैरोन को जहर दिया गया था, जो उस की मौत का कारण बना.

29 अक्तूबर को मामले की जांच डिस्ट्रिक्ट क्राइम ब्रांच ने अपने हाथ में ले ली. पोस्टमार्टम के बाद डाक्टरों ने शैरोन की बौडी के कैमिकल एग्जामिनेशन की सिफारिश की थी. शैरोन का इलाज करने वाले डाक्टर ने घर वालों को बताया कि शैरोन की उल्टी का रंग हरा था. आमतौर पर ऐसा तब होता है जब कोई जहरीला पदार्थ किडनी या लीवर को नुकसान पहुंचाता है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ खुलासा

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने शैरोन के परिजनों को हिला कर रख दिया. रिपोर्ट में शैरोन की मौत का कारण जहर आया था, जहर के कारण उस की तबियत खराब हुई और धीरेधीरे उस के शरीर के अांतरिक अंगों ने काम करना बंद कर दिया, जिस के चलते उसे हार्टअटैक आया और उस की मौत हो गई.

सवाल यह था कि शैरोन की हत्या करने के लिए उसे जहर किस ने दिया और इस से उस का क्या फायदा होने वाला था?

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद शैरोन के पिता जयराम ने इस संबंध में ग्रीष्मा और उस के घर वालों के खिलाफ साजिश के तहत धीमा जहर दे कर हत्या करने का आरोप लगाते हुए थाना नेडुमंगाड में रिपोर्ट दर्ज करा दी.

आरोप में यह भी कहा गया कि ग्रीष्मा से मिलने के बाद शैरोन की तबियत खराब हो जाती थी और वह अकसर उल्टी कर देता था. रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने पूछताछ के लिए 30 अक्तूबर को ग्रीष्मा, उस के मातापिता व एक रिश्तेदार को सुबह 10 बजे एसपी औफिस बुलाया. डीएसपी जौनसन और एएसपी सल्फिकर के नेतृत्व में जांच दल ने उन से पूछताछ की.

इस के बाद ग्रीष्मा को हिरासत में ले लिया गया. हिरासत में लिए जाने के बाद ग्रीष्मा पुलिस स्टेशन के बाथरूम में फ्रैश होने के बहाने गई और उस ने वहां रखा बाथरूम क्लीनर पी कर खुदकुशी करने की कोशिश की.

इस बात की जानकारी होते ही थाने में हड़कंप मच गया और आननफानन में ग्रीष्मा को नेदुमंगाड तालुक अस्पताल में उपचार के लिए ले जाया गया. हालत गंभीर होने पर उसे आईसीयू में भरती कर लिया गया. 31 अक्तूबर को पुलिस ने इस बात की पुष्टि कर दी कि शैरोन की हत्या उस की गर्लफ्रैंड ने ही की थी. कुछ दिन बाद ग्रीष्मा की स्थिति ठीक हुई. अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

ये दिल आशिकाना : क्या कसूर था शिल्पा का – भाग 1

मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर भेड़ाघाट धुआंधार जलप्रपात के लिए विख्यात है. प्रसिद्ध भेड़ाघाट रोड पर ही मेखला रिसोर्ट नाम का एक भव्य होटल है. 8 नवंबर, 2022 को इसी रिसोर्ट में एक ऐसी घटना घटी कि सभी हैरान रह गए. उस दिन इस होटल का रूम नंबर 5 न तो खुला और न ही वहां से दोपहर 12 बजे तक किसी तरह का और्डर बुक हुआ तो होटल के कर्मचारियों को शंका हुई.

उस होटल के एक कर्मचारी ने कमरे का दरवाजा खटखटाया. दरवाजा खटखटाने के बाद भी अंदर से कोई जबाव न मिला तो इस की सूचना मैनेजर को दी गई. मैनेजर ने होटल के रजिस्टर को चैक किया तो पता चला कि 6 नवंबर, 2022 को रूम नंबर 5 को  अभिजीत पाटीदार नाम के शख्स ने बुक कराया था, उस के साथ उस की गर्लफ्रैंड भी थी.

होटल के रिसैप्शनिस्ट ने मैनेजर को बताया कि रूम बुक करते समय अभिजीत ने अपने आप को गुजरात का निवासी बताते हुए अपने साथ आई युवती का नाम राखी मिश्रा बताया था और दोनों के आधार कार्डों की फोटोकापी भी पहचान के तौर पर जमा कराई थी.

रूम लेते समय अभिजीत ने बताया था कि वे गुजरात के रहने वाले हैं और किसी काम से जबलपुर आए हैं. दोनों ने चैकइन के लिए आधार कार्ड देते हुए रिसोर्ट काउंटर पर 1500 रुपए जमा किए, उस के बाद उन्हें होटल में कमरा दिया गया था.

होटल के मैनेजर को कुछ गड़बड़ होने का शक हुआ तो उस ने तुरंत ही तिलवारा थाने में फोन कर के सूचना दे दी. सूचना पा कर कुछ ही देर में टीआई लक्ष्मण सिंह झारिया पुलिस टीम के साथ मेखला रिसोर्ट पहुंच गए.

मौके पर पहुंचे टीआई लक्ष्मण सिंह झारिया की मौजूदगी में मास्टर चाबी से रूम का दरवाजा खोला गया तो अंदर बैड पर रजाई से ढका एक महिला का सिर दिखाई दे रहा था.

जैसे ही पुलिस टीम ने रजाई हटाई तो वहां एक युवती की खून से सनी लाश पड़ी हुई थी. कमरे की तलाशी लेने पर पुलिस को कमरे से शराब की 2 बोतलें मिलीं. इन में से एक बोतल खाली, जबकि दूसरी आधी भरी हुई थी. घटनास्थल पर 2 गिलास और खून से सने 2 ब्लेड भी पलंग के नजदीक पड़े मिले, जिस से यह जाहिर हो रहा था कि इन्हीं से युवती की कलाई और गला काटा गया है.

इसी बीच टीआई ने घटना की जानकारी एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा और सीएसपी प्रियंका शुक्ला (आईपीएस) को दे दी. आला अधिकारियों के निर्देश पर फोरैंसिक टीम भी रिसोर्ट में पहुंच गई.

फोरैंसिक एक्सपर्ट ने रूम नंबर 5 का बारीकी से निरीक्षण कर वहां मिले कांच के गिलास, शराब की बोतलों और ब्लेड से फिंगरप्रिंट ले लिए. पुलिस टीम ने जब होटल के स्टाफ से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि 6 नवंबर दोपहर 2 बजे होटल में दोनों ने चैक इन किया था.

कुछ घंटे होटल के रूम में रुकने के बाद शाम को दोनों साथ होटल से बाहर घूमने निकले थे, परंतु रात में युवक अकेला लौटा. अगले दिन 7 नवंबर को अभिजीत ने होटल में ही खाना खाया और फिर दोपहर में बाहर निकल गया.

शाम 4 बजे वह युवती के साथ होटल लौटा और रूम में चला गया. करीब ढाई घंटे बाद शाम साढ़े 6 बजे अभिजीत होटल से निकला और फिर वापस नहीं लौटा. 8 नवंबर को जब दोपहर तक रूम नहीं खुला तो पुलिस को सूचना दी गई.

पुलिस ने जब होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी तो होटल में रुकने के पहले दिन वे सीसीटीवी में साथ जाते साफ नजर आए. हालांकि रात में युवक अकेले ही होटल लौटा था.

होटल में मिले दस्तावेजों से पुलिस को पता चला कि जो राखी नाम की युवती अभिजीत पाटीदार के साथ होटल में रुकी थी, वह जबलपुर के ओमती इलाके की रहने वाली थी.

पुलिस ने जब युवती के घर वालों को इस बात की जानकारी दी तो उस के घर वालों ने बताया कि राखी तो घर पर ही है. यह जबाब सुन कर पुलिस का माथा ठनका और पुलिस टीम ने राखी से वीडियो काल कराने को कहा.

टीआई ने राखी से वीडियो काल करते हुए होटल में मिली युवती की लाश का फोटो दिखाते हुए पूछा, ‘‘क्या तुम इसे जानती हो?’’

तो राखी ने युवती का फोटो देख कर चौंकते हुए पुलिस को बताया, ‘‘सर, ये तो शिल्पा झारिया है,जो गोरखपुर में ब्यूटी पार्लर चलाती है.’’

‘‘उस के पास तुम्हारा आधार कार्ड कैसे आया?’’ टीआई झारिया बोले.

‘‘सर, शिल्पा से मेरी जानपहचान करीब 3 साल से है. मैं उस के ब्यूटी पार्लर जाती थी, कुछ समय पहले मेरा आधार कार्ड गुम हो गया था तो मैं ने उस की दूसरी कौपी निकलवा ली थी.’’

राखी से हुई वीडियो काल से पुलिस को मालूम हुआ कि जबलपुर के होटल में जिस युवती का शव मिला था, वह राखी मिश्रा का नहीं, बल्कि 21 साल की शिल्पा झारिया का था, जो कुंडम थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली थी.

जबलपुर पुलिस ने कुंडम पुलिस की मदद से शिल्पा के घर वालों को यह सूचना दी और लाश मोर्चरी में रखवा दी. खबर मिलने पर देर रात शिल्पा के पिता गुलाब झारिया तिलवारा थाने पहुंचे, जहां से पुलिस उन्हें मोर्चरी ले कर पहुंची. मोर्चरी में रखे अपने बेटी के शव को देख कर वे फूटफूट कर रोने लगे.

इसी दौरान 11 नवंबर, 2022 को इस हत्याकांड से जुड़े 2 वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए. एक वीडियो में हत्या करने वाला युवक रजाई उठा कर खून से लथपथ युवती को दिखा रहा था.

वहीं दूसरे वीडियो में आरोपी युवक वारदात की वजह बताते हुए इस में अपने एक बिजनैस पार्टनर के शामिल होने की बात कह रहा था. उस का कहना था कि शिल्पा मेरे पार्टनर से बारबार पैसों की डिमांड कर रही थी. उसी के कहने पर मैं ने उसे मार दिया.

11 नवंबर की सुबह सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में मृत युवती बेड पर रक्तरंजित अवस्था में पड़ी हुई थी और आरोपी बौयफ्रैंड गुस्से में कह रहा था, ‘बेवफाई नहीं करने का…’

इस के बाद उस ने गाली देते हुए कहा, ‘बेवफाई करने वालों का हश्र ऐसा ही होता है.’

उस वीडियो में बैकग्राउंड में पंजाबी गाना भी चल रहा था. वीडियो में युवती अंतिम सांसें लेते हुए भी दिख रही थी. चारों तरफ बैड पर खून फैला हुआ था.

खुशी के लिए मासूम खुशी का खून

दोपहर का एक बज चुका था, लेकिन खुशी अभी तक घर नहीं आई थी. घर के कामकाज निपटाने के बाद मिथिलेश की नजर घड़ी पर पड़ी तो वह चौंकी, क्योंकि खुशी एक बजे तक स्कूल से लौट आती थी. परेशान सी मिथिलेश भाग कर यह देखने दरवाजे पर आई कि शायद बेटी स्कूल से आ रही हो, लेकिन वह दूरदूर तक दिखाई नहीं दी तो वह और ज्यादा परेशान हो गई.

मिथिलेश मां थी, इसलिए उस का चिंतित होना स्वाभाविक था. खुशी स्कूल छूटने के बाद सीधे घर आ जाती थी. मिथिलेश सोच रही थी कि क्या किया जाए कि तभी उस के ससुर रामसावरे आते दिखाई दिए. उन के नजदीक आते ही मिथिलेश ने कहा, ‘‘बाबूजी, एक बज गया, खुशी अभी तक स्कूल से नहीं आई.’’

रामसावरे चौंके, ‘‘खुशी अभी तक नहीं आई? कोई बात नहीं बहू, बच्ची है, सखीसहेलियों के साथ खेलनेकूदने लगी होगी. तुम चिंता मत करो, मैं स्कूल जा कर देखता हूं.’’ कह कर रामसावरे खुशी के स्कूल की ओर निकल गए. यह 12 अक्तूबर, 2017 की बात है.

उत्तर प्रदेश के जिला फैजाबाद की कोतवाली बाकीपुर का एक गांव है असकरनपुर. मास्टर विजयशंकर यादव इसी गांव में रहते थे. वह शिक्षामित्र थे. उन के परिवार में पत्नी मिथिलेश, बेटा संजय कुमार, बेटी खुशी तथा उस से छोटा बेटा शिवा था. रामसावरे भी उन्हीं के साथ रहते थे.

उन का भरापूरा परिवार था. अध्यापक होने के नाते विजयशंकर की गांव में इज्जत थी. वह भले ही शिक्षामित्र थे, लेकिन उन्हें सब मास्टर साहब कहते थे.

विजयशंकर का बड़ा बेटा संजय बीएससी कर रहा था. उन की बेटी खुशी गांव से ही 2 किलोमीटर दूर कोछा बाजार स्थित एमडीआईडीयू स्कूल में कक्षा 4 में पढ़ती थी. वह औटो से स्कूल आतीजाती थी, इसलिए घर वालों को उसे स्कूल से लाने या पहुंचाने का कोई झंझट नहीं था.

विजयशंकर के यहां सब ठीक चल रहा था. लेकिन 12 अक्तूबर, 2017 का दिन उन के परिवार के लिए विपत्ति ले कर आया. खुशी का पता करने रामसावरे स्कूल पहुंचे तो वहां सन्नाटा पसरा हुआ था.

सभी बच्चे अपनेअपने घर जा चुके थे. स्कूल में 2-4 मास्टर बचे थे, वह भी जाने की तैयारी कर रहे थे. रामसावरे ने उन से खुशी के बारे में पूछा तो पता चला कि छुट्टी होते ही खुशी घर चली गई. उन्होंने यह भी बताया कि खुशी औटो से जाने के बजाय स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका विमलेश कुमारी के साथ गई थी.

विमलेश के साथ जाने की बात सुन कर रामसावरे के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं. वजह यह थी कि खुशी रोजाना औटो से स्कूल आतीजाती थी. फिर वह विमलेश के साथ क्यों गई? जबकि बच्चों को लाने ले जाने वाला औटो अपने समय पर स्कूल आया था और बच्चों को ले गया था.

रामसावरे तेज कदमों से चलते हुए सीधे विमलेश के घर पहुंचे, पता चला कि विमलेश घर में नहीं है. वह स्कूल तो गई पर लौट कर नहीं आई. यह जानने के बाद रामसावरे को चिंता होने लगी. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर विमलेश खुशी को ले कर कहां चली गई?

खुशी के गायब होने की खबर पा कर खुशी के पिता विजयशंकर भी गांव आ गए. गांव के कुछ लोगों को साथ ले कर वह खुशी की तलाश में निकल पड़े. सब से पहले वह खुशी के स्कूल गए. इस बार स्कूल के कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि खुशी घर जाने के लिए स्कूल के औटो के बजाए स्कूल की अध्यापिका विमलेश कुमारी के साथ निकली थी. स्कूल के बाहर एक लड़का मोटरसाइकिल लिए खड़ा था, विमलेश खुशी को ले कर उसी के साथ गई थी.

सवाल यह था कि उस लड़के के साथ विमलेश खुशी को ले कर कहां गई? वह लड़का कौन था? इस से लोगों को आशंका हुई कि कुछ गड़बड़ जरूर है, वरना खुशी को मोटरसाइकिल से क्यों ले जाया जाता. तब तक शाम हो गई थी. अब विजयशंकर के सामने पुलिस के पास जाने के अलावा कोई दूसरा उपाय नहीं बचा था. वह गांव वालों के साथ कोतवाली बीकापुर की ओर चल पड़े.

अभी वे रास्ते में ही थे कि पता चला, विमलेश खुशी को मोटरसाइकिल से मोहम्मद भारी तक आई थी. उस के बाद वहां खड़ी सफेद रंग की एक पुरानी मार्शल जीप में बैठ कर कहीं चली गई थी. इसी के साथ ही यह भी पता चला कि विमलेश खुशी को जिस लड़के की मोटरसाइकिल से मोहम्मद भारी तक लाई थी, वह लड़का मुमारिजनगर के रहने वाले सुबराती का बेटा मोहम्मद अनीस था.

इस के बाद रामसावरे ने अपनी 10 वर्षीय पोती खुशी के अपहरण की तहरीर कोतवाली प्रभारी सुनील कुमार सिंह को दे दी. उन के आदेश पर उसी दिन अपराध संख्या 436/2017 पर भादंवि की धारा 363 के तहत विमलेश और मोहम्मद अनीस के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया.

मुकदमा दर्ज होते ही सुनील कुमार सिंह ने इस मामले की जांच एसआई घनश्याम पाठक को सौंप दी. जब इस मामले की जानकारी एसपी (ग्रामीण) संजय कुमार को मिली तो उन्होंने इस केस में दिलचस्पी लेते हुए एसओजी टीम को भी खुशी के बारे में पता लगाने की जिम्मेदारी सौंप दी.

14 अक्तूबर, 2017 को पुलिस को मुखबिर से पता चला कि अनीस और विमलेश थाना कुमारगंज के गांव बवां में ठहरे हैं और वहां से कहीं जाने की फिराक में हैं. सूचना मिलते ही पुलिस टीम थाना कुमारगंज पुलिस को साथ ले कर बवां पहुंच गई. लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही विमलेश और मोहम्मद अनीस वहां से निकल चुके थे.

फलस्वरूप पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा. इस बीच पुलिस को विमलेश और अनीस के मोबाइल नंबर मिल गए थे. पुलिस ने उन्हें सर्विलांस पर लगा दिया था. सर्विलांस से उन के हरियाणा के गुरुग्राम में होने का पता चला.

इस पर घनश्याम पाठक के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गुरुग्राम भेज दी गई. लेकिन वहां भी पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा. वहां पुलिस टीम को पता चला कि वे दिल्ली चले गए हैं. पुलिस टीम दिल्ली पहुंची, लेकिन वे दोनों वहां भी नहीं मिले.

विमलेश और अनीस की तलाश में पुलिस दिल्ली में भटकती रही, लेकिन वे पकड़े नहीं जा सके. पुलिस टीम दिल्ली में ही थी कि वे दोनों फैजाबाद आ गए. इस के बाद दिल्ली गई पुलिस टीम भी फैजाबाद आ गई.

दूसरी ओर खुशी के बारे में पता न चलने से दुखी घर वाले अधिकारियों के यहां चक्कर लगा रहे थे. इस से स्थानीय लोगों का गुस्सा बढ़ता गया. पुलिस पर दबाव भी बढ़ रहा था. परिणामस्वरूप रविवार 22 अक्तूबर, 2017 को सुनील कुमार सिंह ने मोहम्मद अनीस और विमलेश को फैजाबाद रेलवे स्टेशन से उस वक्त गिरफ्तार कर लिया, जब दोनों ट्रेन पकड़ कर कहीं भागने की फिराक में थे.

दोनों को गिरफ्तार कर के कोतवाली बीकापुर लाया गया. पूछताछ में पहले तो दोनों खुद को बेकसूर बताते रहे, लेकिन जब पुलिस ने उन के सामने सबूत रखे तो दोनों ने सच्चाई उगल दी.

विमलेश ने बताया कि मोहम्मद अनीस, जो उस का प्रेमी था, की मदद से उस ने खुशी को ठिकाने लगा दिया है. उस की लाश को उन्होंने जंगल में फेंक दिया था. उन्होंने खुशी की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी—

उत्तर प्रदेश के जिला फैजाबाद के कोछा बाजार में वैसे तो कई निजी स्कूल हैं, लेकिन एमडीआईडीयू की अपनी अलग पहचान है. यही वजह है कि इलाके के ज्यादातर बच्चे इसी स्कूल में पढ़ते हैं. खुशी के ही गांव असकरनपुर की रहने वाली 24 साल की विमलेश कुमारी इस स्कूल में अध्यापिका थी. खुशी वहां कक्षा-4 में पढ़ती थी. गांव के रिश्ते से खुशी विमलेश की भतीजी लगती थी.

कुंवारी विमलेश मोहम्मद अनीस से प्यार कर बैठी थी. जबकि वह शादीशुदा ही नहीं, एक बच्चे का बाप भी था. एमडीआईडीयू स्कूल में पढ़ाने से पहले विमलेश एक अन्य स्कूल में पढ़ाती थी. मोहम्मद अनीस वहां बस चलाता था. साथ आनेजाने में दोनों में प्यार हो गया. जब इस बात की जानकारी स्कूल वालों को हुई तो दोनों को नौकरी से निकाल दिया गया ताकि स्कूल का माहौल खराब न हो.

वहां से निकाले जाने के बाद विमलेश एमडीआईडीयू स्कूल में पढ़ाने लगी, अनीस वहां  भी अकसर उस से मिलने आता था. अनीस से मिलने के लिए ही विमलेश स्कूल खुलने से पहले आ जाती थी, इसलिए उसे अनीस से मिलने में कोई परेशानी नहीं होती थी.

एक दिन खुशी ने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया तो यह बात उस ने अपने घर वालों को बता दी. इस के बाद तो विमलेश और अनीस के संबंधों की जानकारी पूरे गांव वालों को हो गई.

इस से विमलेश की काफी बदनामी हुई. इसी बात से नाराज हो कर विमलेश ने खुशी को सबक सिखाने का मन बना लिया. इस के बाद उस ने अनीस से सलाह की.

उसी सलाह के अनुसार गुरुवार 12 अक्तूबर, 2017 को विमलेश ने मार्शल गाड़ी बुक कराई. यह गाड़ी अनीस के मामा साकिर की थी. स्कूल से छुट्टी होने के बाद विमलेश खुशी को बरगला कर अनीस की मोटरसाइकिल से मार्शल तक ले आई.

वहां वह खुशी को ले कर उस में बैठ गई. अनीस उस के साथ ही था. अनीस खुशी को ले कर थाना कुमारगंज के गांव बवां पहुंचा, जहां वह अपनी एक रिश्तेदार जुलेखा के यहां पहुंचा. जुलेखा के घर के बगल में ही उस के बहनोई का पुराना मकान खाली पड़ा था. खुशी को ले कर वह उसी मकान में छिपा रहा.

शाम होते ही दोनों खुशी को बवां गांव के जंगल में ले गए और वहां उस की हत्या कर के उस की लाश वहीं एक गड्ढे में फेंक दी.

खुशी को ठिकाने लगा कर विमलेश और अनीस रुदौली रेलवे स्टेशन पहुंचे, जहां से ट्रेन पकड़ कर दिल्ली चले गए. दिल्ली से दोनों गुरुग्राम गए, जहां इधरउधर घूमते रहे. 22 अक्तूबर को दोनों फैजाबाद लौटे तो पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

विमलेश और अनीस से पूछताछ के बाद पुलिस ने दोनों की मदद करने वाली जुलेखा और मार्शल गाड़ी लाने वाले अनीस के मामा साकिर को भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने अनीस की मोटर साइकिल तथा उस के मामा साकिर की मार्शल गाड़ी भी बरामद कर ली थी.

विमलेश और अनीस की निशानदेही पर पुलिस ने बवां के जंगल से खुशी का कंकाल और स्कूल ड्रेस बरामद कर ली थी. खुशी की लाश को शायद जंगली जानवर खा गए थे. पुलिस ने कंकाल को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. इस के बाद पहले से दर्ज मुकदमे में धारा 367, 302, 201 दफा 34 भी जोड़ दी गई थी. सारी काररवाई निपटा कर पुलिस ने चारों अभियुक्तों को अदालत में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया था.

– कथा पुलिस तथा मीडिया सूत्रों पर आधारित

सपना को नहीं मिला अमन और फिर – भाग 1

29 सितंबर, 2016 को उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर के थाना सहजनवा के गांव रहीमाबाद  के पास सड़क के किनारे, एक लाश पड़ी होने की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों के तमाम लोग इकट्ठा हो गए. सूचना पा कर थाना सहजनवा के थानाप्रभारी ब्रजेश यादव भी पुलिस बल के साथ आ गए.

उन्हें लाश की शिनाख्त कराने में जरा भी दिक्कत नहीं हुई, क्योंकि वहां जमा भीड़ में मृतक का एक दोस्त था, जिस ने लाश की शिनाख्त ही नहीं कर दी, बल्कि यह भी बताया कि उस ने मृतक के घर वालों को सूचना भी दे दी है. लाश की शिनाख्त जिला देवरिया के थाना बरहज के गांव नवापार के रहने वाले जितेंद्र सिंह के बेटे अमनप्रताप सिंह के रूप में हुई थी. जितेंद्र सिंह मध्य प्रदेश में रहते थे.

गांव में उन के भाई राजू सिंह रहते थे. मृतक अमन के दोस्त ने उन्हें ही फोन कर के उस की हत्या के बारे में बताया था. सूचना मिलते ही वह परिवार के कुछ लोगों के साथ तुरंत चल पड़े थे.

थाना सहजनवा के थानाप्रभारी ब्रजेश यादव ने लाश का निरीक्षण किया तो पता चला कि सिर और सीने में गोली मारी गई थी. इस के अलावा पेचकस जैसी नुकीली चीज से उस के सीने में कई वार किए गए थे. वह घटनास्थल की काररवाई कर रहे थे, तभी मृतक अमन के चाचा राजू सिंह आ गए थे.

उन्होंने भी लाश की पहचान अपने भतीजे अमनप्रताप सिंह के रूप में कर दी तो पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था. इस के बाद राजू सिंह की तहरीर पर थाना सहजनवा में अज्ञात के खिलाफ अमन की हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया था.

मृतक का मोबाइल गायब था. पुलिस ने फोन किया तो पता चला कि वह बंद है. पुलिस ने उसे सर्विलांस पर लगवाने के साथ उस के नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि उस के फोन की आखिरी लोकेशन सिंहडि़या के एक पेट्रोल पंप के पास की थी.

काल डिटेल्स के अनुसार आखिरी बार उस के मोबाइल पर जिस नंबर से फोन आया था, वह गोरखपुर के थाना कैंट के मोहल्ला सिंहडि़या के रहने वाले संजय पांडेय उर्फ जगदंबा का था. थाना सहजनवा पुलिस ने थाना कैंट पुलिस से संपर्क कर के पूरी बात बताई तो पता चला कि 2 साल पहले जगदंबा ने मृतक के खिलाफ बेटी के साथ छेड़छाड़ का मुकदमा थाना कैंट में दर्ज कराया था.

इस जानकारी से ब्रजेश यादव को लगा कि इस हत्या में कहीं न कहीं से जगदंबा का हाथ जरूर हो सकता है. शक के आधार पर ब्रजेश यादव ने जगदंबा के घर छापा मारा तो वह अपने घर से फरार मिला. उस के साथ उस की वह बेटी भी गायब थी, जिस के साथ छेड़छाड़ का उस ने मुकदमा दर्ज कराया था. पुलिस ने जब मुखबिरों से बापबेटी के बारे में पता कराया तो पता चला कि बाप के साथ गायब बेटी सपना से मृतक के प्रेमसंबंध ही नहीं थे, बल्कि वह उस के साथ भागी भी थी.

इस के बाद ब्रजेश यादव को समझते देर नहीं लगी कि यह हत्या प्रेमसंबंधों की वजह से हुई है और हत्या भी जगदंबा ने ही बेटी के साथ मिल कर की है.

वह जगदंबा के पीछे हाथ धो कर पड़ गए तो करीब 15 दिनों बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया. जगदंबा और सपना को थाने ला कर पूछताछ की गई तो उन्होंने अमन की हत्या का अपना अपराध स्वीकार कर लिया और सपना से प्रेम से ले कर हत्या तक की पूरी कहानी सुना दी.

इस के बाद उसी दिन यानी 17 अक्तूबर, 2016 की शाम को गोरखपुर के एसएसपी रामलाल वर्मा ने पत्रकारवार्ता कर अमन की हत्या का जो खुलासा किया, उस के अनुसार इस हत्याकांड में जगदंबा का बेटा नितेश पांडेय और साला संजीव द्विवेदी भी शामिल था. लेकिन ये दोनों भी फरार थे, इसलिए इन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका था. इस पूछताछ में सपना और संजय पांडेय उर्फ जगदंबा ने अमन की हत्या की जो कहानी सुनाई थी, वह इस प्रकार थी—

अमन प्रताप सिंह उर्फ सोनू उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के थाना बरहज के गांव नवापार का रहने वाला था. उस के पिता जितेंद्र सिंह मध्य प्रदेश के जबलपुर में सड़क निर्माण विभाग में कंस्ट्रक्शन सेक्शन में इंजीनियर थे. अमन गोरखपुर के थाना कैंट के मोहल्ला रुस्तमपुर में किराए का कमरा ले कर पढ़ाई के लिए अकेला ही रह रहा था.

एकलौता बेटा होने की वजह से अमन के पिता चाहते थे कि बेटा उन्हीं की तरह पढ़लिख कर इंजीनियर बने. इसलिए उस की पढ़ाई पर वह विशेष ध्यान दे रहे थे. लेकिन गोरखपुर में जिस कोचिंग में वह पढ़ रहा था, वहां उस की मुलाकात खूबसूरत सपना से हुई तो वह उसे दिल दे बैठा.

खूबसूरत सपना गोरखपुर के थाना कैंट के मोहल्ला सिंहडि़या के रहने वाले संजय पांडेय उर्फ जगदंबा की बड़ी बेटी थी. वह पढ़ने में अन्य भाईबहनों से ठीक थी, इसलिए प्राइवेट नौकरी कर के गुजरबसर करने वाले जगदंबा ने उस से कह रखा था कि वह जितना चाहे, पढ़ सकती है. लेकिन एक ही कोचिंग में पढ़ रहे अमनप्रताप सिंह उर्फ सोनू ने जब उस से प्यार का इजहार किया तो वह उस के प्रस्ताव को ठुकरा नहीं सकी और उस ने भी मुसकराते हुए कह दिया, ‘‘इट्स ओके, आई लाइक यू वैरी मच.’’

‘‘रियली.’’ अमन ने कहा तो सपना ने आगे बढ़ कर कहा, ‘‘यस, रियली आई लाइक यू वैरी मच. आई लव यू.’’

इस के बाद दोनों की मुलाकातें होने लगीं और हर मुलाकात के बाद उन के बीच प्यार बढ़ता गया. यही नहीं, दोनों प्यार का घरौंदा बनाने के सपने भी देखने लगे. उन का यह घरौंदा बन पाता, उस के पहले ही सपना के घर वालों को उस के प्यार का पता चल गया.

दरअसल, हमेशा गुमसुम रहने वाली सपना का चेहरा अमन से प्यार होने के बाद खिलाखिला रहने लगा था और उस की चालढाल भी बदल गई थी. बेटी में आए बदलाव को देख कर मां को हैरानी होने के साथ संदेह भी हुआ था कि बेटी में अचानक यह बदलाव कैसे आ गया, वह मोबाइल पर घंटों चिपकी किस से बातें करती रहती है? पूछने पर कुछ बताती भी नहीं है.

बबिता का खूनी रोहन – भाग 1

10 मार्च, 2021 की सुबह करीब 9 बजे का वक्त था. दक्षिणी दिल्ली के एंड्रयूजगंज इलाके में हर रोज की तरह उस वक्त भी चहलपहल काफी बढ़ गई थी.

उस दिन बुधवार होने के कारण वर्किंग डे था, इसलिए सरकारी और निजी औफिसों में काम करने वाले लोगों का आवागमन शुरू हो चुका था. धंधा करने वाले लोग भी अपने कारोबारी ठिकानों की तरफ निकल रहे थे.

सिलवर टेन कलर की एक वैगनआर कार सड़क पर भीड़ के कारण रेंगते हुए चल रही थी, जिस की ड्राइविंग सीट पर बैठा चालक गाड़ी में इकलौता सवार था. अचानक वैगनआर गाड़ी की ड्राइविंग सीट के बगल की तरफ एक बाइक पीछे से तेजी के साथ आ कर धीमी हो गई, उस पर भी हेलमेट लगाए इकलौता सवार था. वैगनआर के चालक ने अचानक बगल में आ कर धीमी हुई बाइक के सवार की तरफ देखा तो उस के मुंह से निकला, ‘अबे साले तू यहां?’

वैगनआर चालक के आगे के शब्द हलक में ही फंसे रह गए, क्योंकि तब तक बाइक सवार ने हाथ में लिए हुए पिस्तौल से उस के ऊपर बेहद नजदीक से फायर कर दिया था. गोली वैगनआर चालक की गरदन में लगी और अचानक उस के पैर खुदबखुद गाड़ी के ब्रेक पर जाम हो गए. गोली चलने की आवाज और अचानक वैगनआर का तेजी से ब्रेक लगना दोनों ऐसी घटनाएं थीं, जिन्होंने सड़क पर चल रहे हर राहगीर का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर लिया.

एक पल के लिए लोग हतप्रभ रह गए, लेकिन अगले ही पल लोग वैगनआर की तरफ दौड़ पड़े. लेकिन तब तक वैगनआर चालक पर फायर झोंकने वाला बाइक सवार हवा से बात करते हुए भीड़ के बावजूद बाइक लहराते हुए नौ दो ग्यारह हो चुका था.

वारदात दिल्ली के बेहद पौश इलाके में हुई थी. वक्त भी ऐसा था कि उस वक्त सड़कों पर भीड़भाड़ भी काफी रहती है. बाइक सवार ने वैगनआर चालक से किसी तरह की लूटपाट का प्रयास भी नहीं किया था, साफ था कि बाइक सवार हमलावर का मकसद केवल कार चालक की जान लेना था.

राहगीरों में से किसी ने उसी समय पुलिस कंट्रोल रूम को फोन कर दिया. अगले 10 मिनट में पुलिस कंट्रोल की जिप्सी मौके पर पहुंच गई. पीसीआर के जवानों ने देखा कि वैगनआर में ड्राइविंग सीट पर गोली लगने के बाद खून से लथपथ अचेत पड़े चालक की सांसें अभी चल रही थीं.

लिहाजा उन जवानों ने चालक को वैगनआर से निकाल कर अपनी गाड़ी में डाला . पीसीआर के 2 जवान कागजी खानापूर्ति करने के लिए मौके पर ही रुक गए और बाकी स्टाफ वैगनआर के घायल चालक को ले कर एम्स अस्पताल की तरफ रवाना हो गया.

पीसीआर ने तत्काल इस घटना की सूचना डिफेंस कालोनी थाने को दी. क्योंकि गोली चलने की वारदात जिस जगह हुई थी, वह इलाका दक्षिणी दिल्ली के डिफेंस कालोनी थाना क्षेत्र में पड़ता है.

सुबह के 9 बजे का समय दिल्ली में पुलिस थानों में सब से अधिक व्यस्तता का समय होता है. क्योंकि उस समय नाइट ड्यूटी पर तैनात स्टाफ के रिलीव होने और डे ड्यूटी करने वालों के थाने में आगमन का समय होता है. थानों में तैनात वरिष्ठ अधिकारी भी उसी समय पहुंच कर स्टाफ की ब्रीफिंग लेने की तैयारी में जुटे होते हैं.

डिफेंस कालोनी थाने के ड्यूटी औफिसर को जैसे ही एंड्रयूजगंज में वैगनआर चालक को गोली मारे जाने की सूचना पीसीआर से मिली. ड्यूटी औफिसर ने तत्काल डिफेंस कालोनी थाने के थानाप्रभारी जितेंद्र मलिक को उन के आरामकक्ष में जा कर सूचना से अवगत कराया.

मलिक वरदी पहन कर कुछ देर पहले ही तैयार हुए थे और अपनी डेली डायरी में पूरे दिन के शेड्यूल पर सरसरी नजर डाल रहे थे.

इलाके में सरेराह किसी को गोली मार देने की घटना किसी थानाप्रभारी के लिए गंभीर वारदात होती है. लिहाजा थानाप्रभारी जितेंद्र मलिक अपने सहयोगी इंसपेक्टर पंकज पांडेय, एसआई वेद कौशिक, प्रमोद कुमार तथा दूसरे स्टाफ को ले कर घटनास्थल पर पहुंच गए. घटनास्थल पर पीसीआर की दूसरी गाडि़यां भी पहुंच गई थीं. वैगनआर गाड़ी के इर्दगिर्द राहगीरों का जमघट लग चुका था. पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीद राहगीरों से पूछताछ और जानकारी एकत्र करने का काम शुरू कर दिया.

दूसरी तरफ इंसपेक्टर पंकज पांडेय पुलिस की एक टीम को ले कर तत्काल एम्स  अस्पताल की तरफ रवाना हो गए. वहां जाने के बाद पता चला कि घायल वैगनआर चालक की गरदन में गोली लगी है और उस की हालत चिंताजनक है. डाक्टर इमरजेंसी आईसीयू में उस का औपरेशन कर गोली निकालने की कोशिश में जुटे थे. डाक्टरों ने वैगनआर चालक की जेब से जो पर्स तथा दूसरे दस्तावेज बरामद किए थे, वे सभी पुलिस को सौंप दिए.

घायल व्यक्ति की हुई शिनाख्त

दस्तावेजों को देखने के बाद पता चला कि जिस शख्स को गोली लगी है, उस का नाम भीमराज (45) है और वह चिराग दिल्ली गांव का रहने वाला है. बीएसईएस में संविदा पर ड्राइवर की नौकरी करने वाला भीमराज कहां जा रहा था, उसे गोली किस ने और क्यों  मारी? इस का तो तत्काल पता नहीं चल सका, लेकिन पुलिस को यह पता चल चुका था कि वह कहां का रहने वाला है.

लिहाजा उस के परिवार वालों से संपर्क कर उन्हें सूचना देने का काम आसान हो गया था. दूसरी तरफ भीमराज का मोबाइल फोन पुलिस ने उस की गाड़ी से ही बरामद कर लिया था, जिस में उस की पत्नी का नंबर था. पुलिस ने उस नंबर पर काल कर के भीमराज की पत्नी  को सूचना दे दी.

थोड़ी ही देर में भीमराज की पत्नी बबीता अस्पताल पहुंच गई. सूचना पा कर उस के अन्य रिश्तेदारों व जानपहचान वालों का भी अस्पताल में हुजूम जमा हो गया.

इधर, थानाप्रभारी मलिक ने इस घटना के बारे में डीसीपी अतुल ठाकुर व डिफेंस कालोनी के एसीपी कुलबीर सिंह को सूचना दे दी थी. सूचना मिलने के बाद दोनों सीनियर अफसर भी मौके पर पहुंच गए. उन्होंने फोरैंसिक टीम को भी मौके पर बुलवा लिया. आसपास के थानों की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई.

भीमराज का इलाज करने वाले डाक्टरों ने यह बात साफ कर दी थी कि उस के बचने की उम्मीद बेहद कम है क्योंकि गरदन में जो गोली लगी थी, उस से सांस की नली पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है, जिस कारण उसे सांस लेने में बेहद तकलीफ हो रही है, जिस से उसे वैंटीलेटर पर रखा गया है.

बहरहाल, पुलिस को तत्काल भीमराज से बयान ले कर उस के हमलावर तक पहुंचने की कोई उम्मीद नहीं दिखी तो इंसपेक्टर पंकज पांडेय टीम के साथ वापस घटनास्थल पर पहुंच गए, जहां डीसीपी अतुल ठाकुर ने आसपास के थानों की पुलिस के अलावा जिले के तेजतर्रार पुलिस अफसरों को भी बुलवा लिया था.

आसपास मौजूद चश्मदीद लोगों से पूछताछ के बाद यह बात साफ हो गई कि भीमराज पर गोली चलाने वाला शख्स एक बाइक पर सवार था और उस ने हेलमेट लगा रखा था.

चश्मदीदों से पूछताछ और घटनास्थल के निरीक्षण से पुलिस को तत्काल ऐसा कोई सुराग नहीं मिल रहा था, जिस से पुलिस हमलावर तक पहुंच सके. लिहाजा डीसीपी अतुल ठाकुर ने डिफेंस कालोनी थाने पहुंच कर तेजतर्रार पुलिसकर्मियों की 6 टीमों का गठन कर दिया. पहली टीम में डिफेंस कालोनी थाने के थानाप्रभारी जितेंद्र मलिक तथा एसआई प्रमोद को रखा गया. जबकि दूसरी टीम में इंसपेक्टर पंकज पांडेय और एसआई वेद कौशिक को शामिल किया गया.

6 टीमों ने शुरू की जांच

मैदान गढ़ी थाने के थानाप्रभारी जतन सिंह के नेतृत्व में तीसरी टीम बनाई गई. दक्षिणी जिले के स्पैशल स्टाफ इंसपेक्टर गिरीश भाटी को चौथी टीम का नेतृत्व सौंपा गया. एंटी नारकोटिक्स सेल के इंसपेक्टर प्रफुल्ल झा पांचवी टीम का नेतृत्व कर रहे थे और कोटला मुबारकपुर थाने के थानाप्रभारी विनय त्यागी के नेतृत्व में छठी टीम गठित कर के सभी टीमों को अलगअलग बिंदुओं पर जांच करते हुए काम बांट दिए गए.

भीमराज को गोली मारने वाला हमलावर बाइक पर सवार हो कर आया था. पुलिस को चश्मदीदों से इस बात की जानकारी तो मिल गई थी, लेकिन कोई भी बाइक का नंबर नहीं बता सका था. इसलिए पुलिस टीमों ने सब से पहले हमलावर की बाइक को ट्रेस करने का काम शुरू किया.

पुलिस की टीमों ने घटनास्थल के आसपास की सीसीटीवी फुटेज खंगालनी शुरू की तो अगले कुछ ही घंटों में पुलिस को सफलता मिलती दिखने लगी. जिस स्थान पर घटना हुई थी, वहां एक सीसीटीवी फुटेज में हमलावर बाइक सवार कैमरे में कैद हो गया था. लेकिन इस फुटेज में बाइक का नंबर स्पष्ट नहीं हो सका.

क्योंकि हमलावर ने बड़ी चालाकी से आगे और पीछे की दोनों नंबर प्लेटों को मोड़ रखा था. जिस कारण बाइक का नंबर स्पष्ट दिखाई नहीं पड़ रहा था. पुलिस को जो नंबर दिखाई पड़ रहे थे, उसी के आधार पर अलगअलग सीरीज बना कर नंबरों को जोड़ कर यह पता लगाने का काम शुरू कर दिया कि उन बाइक नंबर के मालिक कौन लोग हैं.

पुलिस की एक दूसरी टीम ने सीसीटीवी खंगालने का काम जारी रखा. भीमराज का हमलावर जिस दिशा में बाइक ले कर भागा था, उसी दिशा में बढ़ते हुए पुलिस ने जितने भी रास्ते गए, वहां से करीब 5 किलोमीटर तक एकएक कर 200 सीसीटीवी फुटेज की जांचपड़ताल कर डाली.

अगले भाग में पढ़ें- जांच में आए नए तथ्य

अपना घर लूटा, पर मिली मौत – भाग 1

24नवंबर, 2022 को शाम करीब साढ़े 4 बज रहे होंगे, जब कमलजीत सिंह खेत से और उन की पत्नी जस्सू कौर स्कूल से घर लौटीं. घर में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था. शमिंदर सिंह, जो कमलजीत सिंह का बेटा था, सिर झुकाए परेशान हाल में कुरसी पर बैठा कुछ सोच रहा था. उस की तंद्रा तब भंग हुई थी, जब किसी के चलने की आहट उस के कान के परदे से टकराई थी. सिर उठा कर देखा तो सामने मांबाप खड़े थे.

‘‘बात क्या है बेटा, बड़े परेशान नजर आ रहे हो. सब ठीक तो है न घर में?’’ सवाल करते हुए कमलजीत ने बेटे से पूछा.

‘‘पापा…आप? आप कब आए? मुझे तो आप दोनों के आने का पता ही नहीं चला.’’ टूटेटूटे शब्दों में शमिंदर ने जवाब दिया था.

‘‘पहले मैं फिर तुम्हारी मां घर में दाखिल हुई थी. घर का दरवाजा भी खुला पड़ा था. बल्कि तुम्हारी मां ने तुम्हें और बेटी जसपिंदर को आवाज भी लगाई थी लेकिन न तो तुम ने कोई जवाब दिया और न ही जसपिंदर ने. अंदर आए तो देखा कि तुम यहां सिर झुकाए बैठे किसी गहरी सोच में डूबे हुए हो. सब ठीक तो है न बेटा?’’

‘‘जसपिंदर कहां है पुत्तर, कहीं दिख नहीं रही है?’’ इस बार जस्सू कौर ने बेटे से सवाल किया था.

‘‘आप बैठिए, आप दोनों के लिए मैं पानी ले कर आ रहा हूं.’’

‘‘ठीक है बेटा, पानी रहने दो. उसे बुला कर ले आओ. कहां है वो?’’ इस बार कमलजीत ने बोले. उन की आवाज में कुछ बेचैनी शामिल थी.

‘‘हां बेटा, कहां है वो? तुम कुछ बताते क्यों नहीं हो?’’ जस्सू ने फिर सवाल किया बेटे से.

‘‘क्या बताऊं मां, मैं तो उसे दोपहर से ही ढूंढढूंढ कर थक चुका हूं, लेकिन मुझे न मिली और न ही कहीं नजर ही आई. पता नहीं किस बिल में जा कर दुबकी बैठी है.’’ शमिंदर ने दुखी मन से जवाब दिया तो मांबाप दोनों चौंके बिना नहीं रहे.

‘‘जसपिंदर दोपहर से गायब है, उस का कहीं पता नहीं है और तुम अब बता रहे हो हमें?’’ पिता कमलजीत बेटे को डांटते हुए बोले. इस पर उस ने चुप्पी साध ली, कुछ न बोला.

बेटे शमिंदर की बात सुन कर मांबाप दोनों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच आई थीं. बात चिंता वाली थी भी सयानी बेटी घर से लापता थी. वैसे भी जिस घर से सयानी बेटी रहस्यमय ढंग से गायब हो जाए, उन मांबाप की हालत क्या होती है या उस का दर्द क्या होता है? यह वही महसूस करते होंगे.

कुछ पल के लिए कमलजीत सिंह ठहर गए. फिर उन्हें किसी काम के लिए उन्हें पैसे याद आ गए तो वह अपने कमरे में रखी अलमारी के पास पहुंचे. अलमारी खोल कर जब उन्होंने लौकर खोला तो उन के होश उड़ गए. उन्होंने लौकर के भीतर 20 हजार रुपए रखे थे. वे रुपए वहां नहीं मिले, गायब थे. फिर उन्होंने अलमारी के चोर दराज को खोल कर देखा, जिस में सोने के गहने रखे थे, जो करीब 12 तोले थे. वे भी वहां से गायब था.

बेटी को ले कर घर वाले हुए परेशान

यह देख कमलजीत सिंह माथे पर हाथ रखे बिस्तर पर जा गिरे. उन्हें यह समझते देर नहीं हुई कि बेटी ने समाज बिरादरी में इन की नाक कटा दी. रुपए और गहने ले कर भाग गई. आखिरकार जिस का डर था, वही हुआ. समाज में अब क्या मुंह दिखाएंगे. इतना ही दुखी मांबेटे भी हुए थे.

फिर पत्नी ने पति को समझाया कि यह घड़ी मातम मनाने की नहीं है. इस की शिकायत थाने को दे कर बेटी का पता लगाने की है. इस पर शमिंदर ने मां से कहा कि आप सब नाहक परेशान न हों, वह थाने जा कर शिकायत दर्ज करवाएगा.

शमिंदर सिंह पंजाब के लुधियाना जिले की तहसील जगराओं के रसूलपुर गांव का रहने वाला था. यह इलाका हठूर थाने के अंतर्गत पड़ता था. उसी समय पिता को शमिंदर बाइक पर बिठा कर हठूर थाने पहुंच गया. उस समय शाम के करीब साढ़े 5 बज रहे थे. गश्त से लौट कर इंसपेक्टर जगजीत सिंह थाने पहुंचे ही थे और अपने औफिस में मौजूद थे.

शमिंदर पिता कमलजीत को साथ ले कर एसएचओ जगजीत सिंह के सामने खड़ा हो गया. उन्होंने उन से इस वक्त थाने आने का कारण पूछा तो शमिंदर ने पूरी बात बताते हुए लिखित तहरीर उन्हें सौंप दी.

इंसपेक्टर जगजीत सिंह ने शमिंदर से तहरीर ले कर उसे यह कहते हुए थाने से वापस घर भेज दिया कि आवश्यक काररवाई की जाएगी. वैसे जसपिंदर बालिग है, 2-4 दिन में जब उस के पैसे खर्च हो जाएंगे, तब वह वापस लौट ही आएगी. बेकार में परेशान होते हो.

इंसपेक्टर जगजीत सिंह के समझाने पर शमिंदर पिता कमलजीत को साथ ले कर घर वापस आ गया. 10 दिन बीत जाने के बाद भी न जसपिंदर घर लौटी और न ही उस का कहीं पता चला. और तो और हठूर पुलिस ने घोर लापरवाही बरतते हुए उस की तहरीर को ठंडे बस्ते में डाल दिया.

इधर शमिंदर और कमलजीत अपनी तरफ से जसपिंदर को ढूंढढूंढ कर थक चुके थे और उसे उस की किस्मत पर छोड़ भी दिए थे कि अगर वह हमारे नसीब में होगी तो एक न एक दिन लौट ही आएगी.

बात 4 दिसंबर, 2022 की है. सुबह के 10 बज रहे थे. नाश्ता कर के कमलजीत सिंह अपने कमरे में कुरसी पर बैठे बेटी की सोच में डूबे थे. उसी वक्त उन का मोबाइल फोन बज उठा. उन्होंने स्क्रीन पर डिसप्ले हो रहे नंबर को ध्यान से देखा तो वह नंबर उन के मनीला के एक रिश्तेदार हरपिंदर सिंह का था. काल रिसीव कर के वह उन से बातचीत करने लगे. बातचीत के आखिर में उन्होंने कमलजीत सिंह से एक ऐसी बात कही, जिसे सुन कर कमलजीत भौचक्के रह गए.

हरपिंदर सिंह ने कमलजीत सिंह से कहा था कि जिस बेटी को ले कर वह इतना परेशान हो रहे हैं, उस की तो 24 नवंबर को ही हत्या हो चुकी है. जसपिंदर के शव को सुधार और बोपाराय लिंक रोड पर स्थित फार्महाउस में दफनाया गया है. यह हत्या उस के बेटों परमप्रीत और भवनप्रीत ने अपने 2 दोस्तों एकमप्रीत सिंह तथा हरप्रीत सिंह के साथ मिल कर अंजाम दी थी. इस के बाद फोन डिसकनेक्ट हो गया.

हरपिंदर सिंह की बात सुन कर काटो तो खून नहीं जैसी हालत कमलजीत सिंह की हो गई थी. अचानक उन्हें अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था कि फोन पर अभीअभी जो कुछ सुना, वह सच हो सकता है. इतना बड़ा और ऐसा भयानक मजाक हरपिंदर नहीं कर सकता है, जरूर दाल में कुछ काला है.

बेटी की हत्या की खबर ने कमलजीत को सिर से पैर तक हिला दिया था. उस वक्त उन की पत्नी जस्सू स्कूल पढ़ाने गई थीं और बेटा शमिंदर घर पर ही था. कमलजीत ने बेटे को सारी बातें विस्तार से बता दीं.