यूट्यूबर नामरा लुटेरी गर्लफ्रेंड – भाग 1

गुरुग्राम के बादशाहपुर में रहने वाला बिजनैसमैन दिनेश यादव एडवरटाइजिंग एजेंसी चलाता है. उसे नए कंटेंट क्रिएटर और फीमेल मौडल की तलाश थी. साल 2022 के 2 महीने निकल गए थे. उस के दिमाग में कुछ अलग और नया करने का कांसेप्ट कुलबुला रहा था. 8-9 मौडल्स का वह इंटरव्यू ले चुका था. लेकिन बात नहीं बनी थी.

एक दिन लंच के बाद सोशल मीडिया के इंस्टाग्राम पर स्क्राल करते हुए 6 सेकेंड के एक रील पर उस की नजर टिक गई थी.

रील एक बेहद सुंदर मौडल की थी. चेहरा जितना खूबसूरत, फिगर उतनी ही तराशी हुई. चंद शब्दों के संवाद अदायगी का अंदाज और उच्चारण गजब का था. दिनेश के चेहरे पर एक मुसकान फैल गई. उस ने महसूस किया कि शायद अब उस की तलाश पूरी होने वाली है.

तुरंत रील पोस्ट करने वाले का प्रोफाइल देखने लगा. नाम नामरा कादिर, आर्टिस्ट, यूट्यूबर इंफ्लूएंसर, दिल्ली निवासी, 480 पोस्ट, इंस्टा पर 2 लाख से ज्यादा फालोअर और यूट्यूब पर 6 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर. उम्र मात्र 22 साल.

उस ने तुरंत अपने असिस्टेंट को यूट्यूबर से कौंटेक्ट कर जल्द मीटिंग अरेंज करने का आदेश दे दिया. उस की नजर में नाम बड़ा था और पहचान भी बड़ी थी, इसलिए उस से औफिस के बाहर कहीं मीटिंग के लिए कहा था.

असिस्टेंट ने घंटे भर के भीतर ही गुरुग्राम के एक रेस्टोरेंट में नामरा कादिर की दिनेश के साथ 2 दिनों बाद शाम के वक्त मीटिंग अरेंज करवा दी.

दिनेश और नामरा की मीटिंग निर्धारित समय पर हो गई. दोनों के बीच अच्छी बातचीत हुई. दोनों के हमउम्र होने के कारण प्रोफेशन के बारे में सहज बातचीत हुई. दिनेश ने नामरा के वीडियो और रील्स की काफी तारीफ की. साथ ही वह उस की तारीफ करने से भी नहीं चूका.

वह बोला, ‘‘आप तो बौलीवुड की हीरोइन को मात करती हैं. आप का साथ मिला तो भविष्य में मैं ही आप को ले कर कोई फिल्म लांच कर दूंगा.’’

उन्होंने एकदूसरे के सहयोग के लिए न केवल हाथ बढ़ाया, बल्कि हाथ भी मिला लिया. एक छोटी सी बिजनैस डील हुई. डील के मुताबिक दिनेश के बिजनैस को प्रमोट करने के लिए नामरा ने 2 लाख रुपए मांगे, ताकि वह नामरा के लाखोंकरोड़ों व्यूअर्स के पास पहुंच बना कर अपनी कंपनी का प्रमोशन कर सके.

पहली मीटिंग में नामरा से प्रभावित हो गया दिनेश

उसी दिन उन्होंने एक सप्ताह बाद अगली मीटिंग की तारीख भी तय कर ली, जिस में प्रमोशन संबंधी कंटेंट पर बातों करनी थी और उसी दिन 2 लाख रुपए पेमेंट भी किया जाना था. इस बार दिनेश को नामरा ने अपनी पसंद की जगह गुरुग्राम के मल्टीप्लेक्स रेस्टोरेंट में मिलने के लिए बुलाया.

निर्धारित समय पर नामरा मल्टीप्लेक्स के रेस्टोरेंट में दिनेश के इंतजार में बैठी थी. कुछ देर बाद वहां दिनेश पहुंच गया. मिलते ही दिनेश ने कहा, ‘‘सौरी नामरा मुझे थोडी देर हो गई.’’

‘‘आइए, कोई बात नहीं, बिजनैस में 5-7 मिनट की देरी कोई मायने नहीं रखती है.’’ नामरा अदब के साथ बोली, ‘‘क्या मंगवाऊं आप के लिए कौफी या कुछ और?’’

‘‘फिलहाल तो कौफी ही, फिर आगे देखता हूं.’’ दिनेश बोला.

नामरा ने बैरे की ओर इशारा किया और मेनू में कौफी की लिस्ट देखने लगी.

‘‘आप के वीडियो में एकएक अदा पर लाइक्स और कमेंट की बारिश होती है.’’ दिनेश ने नामरा की तारीफ के साथ बात शुरू की.

‘‘मैं तो हूं ही ऐसी.’’ नामरा इतराई.

‘‘इस समय कौन से नए प्रोजैक्ट पर काम कर रही हैं?’’ दिनेश ने पूछा.

‘‘है एक, उसे सीरीज में बनाऊंगी… आजकल के लड़कों पर आधारित होगा.’’

‘‘उस में मुझे जगह मिलेगी क्या?’’ दिनेश ने कहा.

‘‘हैंडसम हो. डैशिंग पर्सनैल्टी है. चाहेंगे तो जरूर कोई न कोई जगह निकाल लूंगी.’’ नामरा बोली.

‘‘वेब सीरीज होगी क्या?’’ दिनेश ने पूछा.

‘‘नहींनहीं, उस में तो बहुत पैसा खर्च होता है. यूं ही दिल्ली और उस के आसपास के 2-4 लोकेशनों पर शूट करवा लूंगी. ज्यादा से ज्यादा एक सीरीज 10-12 मिनट की होगी. यूट्यूब पर डाल दूंगी.’’ नामरा बोली.

‘‘सब्जेक्ट क्या होगा?’’ दिनेश ने उत्सुकता दिखाई.

‘‘यही तो राज है मेरा. लेकिन हां, एक में 2-3 कलाकार ही होंगे. उस में लड़कियों के पीछे भागने वाले लार टपकाते अमीरजादों को सबक मिलेगा.’’ नामरा बोली.

‘‘नाम तो बता दो, मैं कोई गैर थोड़े हूं. आप को अपनी कंपनी के प्रमोशन का जिम्मा दिया है. इतना तो जानना चाहूंगा ही कि मेरी कंपनी को किस जगह प्रमोट किया जाने वाला है.’’ दिनेश ने एक बार फिर उत्सुकता दिखाई.

‘‘लुटेरी गर्लफ्रैंड… खुश.’’ नामरा चहकती हुई बोली और हरियाणवी गाना गुनगुनाने लगी, ‘तेरी लाट लग जागी…’

‘‘अच्छा! अभी तक तो लुटेरी दुलहन सुना था …और अब लुटेरी गर्लफ्रैंड! क्या खूब नाम सोचा है.’’ दिनेश चहकते हुए बोला.

‘‘आखिर मैं कंटेंट क्रिएटर भी हूं. देखना उसे इतने मजेदार और ग्लैमर के लटकेझटके के साथ शूट करूंगी कि एक बार जो देखना शुरू करेगा अंत तक देखेगा.’’ नामरा हीरोइन जैसी अदाकारी के साथ बोली.

‘‘फिर तो सब्सक्राइबर्स की बरसात हो जाएगी.’’ दिनेश ने कहा.

‘‘अरे, उस में भीगती लड़की और लचकती कमर का भी सीन रखूंगी.’’ नामरा बोली.

दिनेश ने उस के चेहरे को आश्चर्य से देखा.

‘‘एक कौफी और मंगवाऊं क्या?’’ नामरा उस की तंद्रा को तोड़ते हुए बोली.

‘‘नहींनहीं, अब मुझे चलना चाहिए…’’ स्मार्टवाच पर आए मैसेज को देखते हुए कहा.

‘‘तुम्हारी स्मार्टवाच बहुत महंगी दिखती है.’’

‘‘हां, 80के की है.’’

‘‘आजकल लोग हजार को ‘के’ क्यों बोलते हैं?’’ नामरा बोली.

‘‘बस ऐसे ही चलन हो गया है. अरे हां, तुम्हें पमेंट देनी है. कुछ औनलाइन करता हूं और बाकी कैश. चलेगा न?’’ दिनेश ने कहा.

‘‘हांहां, मेरे मोबाइल नंबर पर कर दो.’’ नामरा बोली.

उस ने बैरे को पेमेंट के लिए इशारा किया. कुछ मिनटों में ही बैरा बिल ले कर आ गया. नामरा अपना पर्स खोलने लगी, तब तक दिनेश ने अपना कार्ड उसे दिया.

‘‘अरे तुम क्यों? मैं ने तुम्हें बुलाया था.’’

‘‘कोई बात नहीं, मकसद तो हम दोनों का एक ही था. अच्छा लगा, तुम ने मुझे तुम कहा.’’ कहते हुए दिनेश की हंसी फूट गई.

उन की दूसरी प्रोफैशनल मीटिंग एक मजेदार मुलाकात में बदल गई थी. दोनों अपनेअपने मकसद को पूरा होने की खुशी से सराबोर हो चुके थे.

फरेबी प्यार में हारी अय्याशी – भाग 1

26नवंबर, 2022 की सुबह मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के छोटे से नगर सोहागपुर में मार्निंग वाक पर निकले कुछ बुजुर्गों की नजर कृषि उपज मंडी के पास बने नाले में पड़े युवक पर गई तो उन लोगों ने अनुमान लगाया कि शायद यह शराब के नशे में धुत पड़ा है.

देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई. नाले में पड़ा युवक महंगे कपड़ों के साथ ब्रांडेड जूते पहने हुए था. उस का सिर व चेहरा धूलमिट्टी से सना हुआ था. कुछ लोगों ने युवक के करीब जा कर देखा तो उस के शरीर पर खून के निशान दिखे. युवक को हिलाडुला कर उसे जगाने का प्रयास किया, मगर वह टस से मस नहीं हुआ. इस बीच भीड़ में से किसी ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन से इस की खबर कर दी.

सोहागपुर थाने के टीआई प्रवीण चौहान को कंट्रोल रूम से जब यह खबर मिली, उस समय वह अपने क्वार्टर से थाने में आने की तैयारी कर रहे थे. सूचना पा कर उन्होंने अपने स्टाफ को निर्देश दिए और खुद सीधे कृषि उपज मंडी पहुंच गए. टीआई चौहान और उन के स्टाफ ने नाले के पास पड़े युवक को देखा तो उस के शरीर पर किसी धारदार हथियार के निशान मिले.

इस बीच फोरैंसिक टीम भी घटनास्थल पर पहुंच चुकी थी. फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया तो नाले से ले कर कृषि उपज मंडी के शेड नंबर 1 तक घसीटे जाने के निशान साफसाफ दिख रहे थे. इसे देख कर पुलिस टीम ने यह अंदाजा लगाया कि शेड नंबर 1 में युवक की हत्या करने के बाद उसे घसीटते हुए नाले में फेंका गया होगा. पुलिस का यह भी अनुमान था कि हत्याकांड में एक से अधिक लोग शामिल रहे होंगे.

मृतक की जेब की तलाशी लेने पर उस का मोबाइल या कोई पहचान संबंधी जानकारी नहीं मिली. युवक की दाईं कलाई पर अंगरेजी में क्कह्वठ्ठठ्ठद्ब (पुन्नी) नाम का टैटू गुदा था.

पुलिस थाने से महज कुछ मीटर दूर स्थित कृषि उपज मंडी सोहागपुर में खून से लथपथ 25-26 साल के युवक की लाश मिलने की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही शहर में सनसनी फैल गई.

टीआई चौहान ने भी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी तो जिले के एसपी डा. गुरुकरण सिंह ने सोहागपुर के एसडीपीओ चौधरी मदनमोहन समर को घटनास्थल पर पहुंचने के निर्देश दिए. एसएसपी के निर्देश पर एसडीपीओ समर भी घटनास्थल पर पहुंचे और पुलिस टीम को आवश्यक दिशानिर्देश दिए.

मंडी के चौकीदार और कर्मचारियों से पूछताछ करने पर पता चला कि समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का समय छोड़ दिया जाए तो साल में बाकी के महीनों में कृषि उपज मंडी सोहागपुर का परिसर ओपन बार के रूप में शराबियों द्वारा उपयोग किया जाता है.

देर शाम से ही यहां शराबियों का जमावड़ा शुरू हो जाता है, जो देर रात तक लगा रहता है. शाम से ही यहां जाम छलकने शुरू हो जाते हैं. इस के सबूत पूरे क्षेत्र में जगहजगह पड़ी शराब की बोतलें, डिस्पोजल व खानपान सामग्री के पैकेटों से साफ देखे जा रहे थे.

पुलिस के सामने सब से बड़ी चुनौती मृतक की पहचान करने की थी. मंडी कर्मचारियों और वहां काम करने वाले चौकीदार और आसपास रहने वाले लोगों से पूछताछ के बाद भी कोई कामयाबी पुलिस टीम को नहीं मिली.  पुलिस प्रेम प्रसंग के ऐंगल पर भी जांच कर रही थी.

आसपास के थाना क्षेत्रों में भी मृतक की फोटो भेज कर गुमशुदगी के केस की जांच करने के निर्देश एसडीपीओ मदन मोहन समर ने थानाप्रभारियों को दिए थे.

दिन भर की मशक्कत के बाद रात 10 बजे रेहटी थाने के के हैडकांस्टेबल राजेश विश्वकर्मा ने टीआई प्रवीण चौहान को फोन पर बताया, ‘‘सर, पुन्नी नाम के टैटू वाले एक शख्स को मैं जानता हूं. उस का नाम पुनीत तिवारी है, जो आंचलखेड़ा गांव का रहने वाला है. एक केस के सिलसिले में कुछ दिनों पहले उसे मैं ने गिरफ्तार किया था, मुझे मृतक की शक्ल पुनीत तिवारी से मिलतीजुलती लग रही है.’’

इस खबर से पुलिस के लिए सफलता की कड़ी मिल गई. टीआई चौहान ने बाबई थाने के एसआई खुमान सिंह से बात की तो उन्होंने आंचलखेड़ा गांव के पुनीत तिवारी के घर पर संपर्क किया. वहां पता चला कि पुनीत कल शाम किसी काम को कह कर घर से निकला था लेकिन अभी तक वापस नहीं आया.

पुनीत के घर वालों को बाबई थाने बुला कर मृतक की फोटो दिखाई तो उन्होंने उस की पहचान पुनीत तिवारी के रूप में कर ली. इस के बाद सोहागपुर पुलिस ने पुनीत के घर वालों को सोहागपुर बुलवा कर लाश की शिनाख्त कर पोस्टमार्टम करवा कर वह उन के सुपुर्द कर दी.

पुलिस पूछताछ में पुनीत के घर वालों ने बताया कि उस ने सोहागपुर की अंजू से घर वालों की मरजी के खिलाफ प्रेम विवाह किया था, इस वजह से उस के पिता राजाराम गोस्वामी व अन्य मायके वाले पुनीत से रंजिश पाले हुए थे.

जब पुलिस ने राजाराम गोस्वामी के परिवार के लोगों से पूछताछ की तो नाबालिग लड़के प्रदीप के बयान संदेहास्पद लगे. पुलिस ने प्रदीप से अलग से पूछताछ की तो पहले तो वह गुमराह करता रहा, परंतु पुलिस की सख्ती के आगे वह जल्द ही टूट गया. पुलिस पूछताछ में प्रदीप ने जो कहानी बताई, वह त्रिकोणीय प्रेम संबंधों से जुड़ी हुई थी.

नर्मदापुरम जिले की सोहागपुर में राजाराम गोस्वामी का परिवार रहता है. राजाराम के बड़े बेटे मुकेश की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी, जबकि 17 साल का छोटा बेटा प्रदीप आवारागर्दी करता है.

राजाराम की 21 साल की बेटी अंजू खूबसूरत थी, जिस के कदम जवानी की दहलीज पर रखते ही बहक गए. जवान बेटी की शादी करने के लिए राजाराम वर की तलाश में दिनरात एक कर रहा था, मगर रिश्ता तय नहीं हो पा रहा था.

2021 की बात है. अंजू अपने रिश्तेदार के यहां बाबई एक शादी समारोह में गई हुई थी, वहां वरमाला के मंच पर उस की मुलाकात पुनीत नाम के युवक से हुई. पुनीत ने दुलहन के आगेपीछे चलने वाली अंजू का रूपयौवन देखा तो वह अपने दिल पर काबू नहीं रख सका.

वह शादी के मंडप में फोटो खींचने के बहाने अंजू से नजदीकियां बनाने लगा. अंजू भी पुनीत के इस तरह भाव देने को नोटिस कर रही थी. पुनीत आंचलखेड़ा गांव में रहने वाले तिवारी का बेटा था, जो अपने दोस्त की शादी में बाबई आया था.

मौका पा कर पुनीत ने अंजू को देख कर प्रेम का इजहार करते हुए कहा, ‘‘डियर, तुम तो गजब की खूबसूरत हो आई

लव यू.’’

उम्मीदों से दूर निकला लिवइन पार्टनर – भाग 1

पहली दिसंबर 2022 की सुबह जब चटक धूप खिली तो पश्चिमी दिल्ली के थाना तिलक नगर क्षेत्र में स्थित गणेश नगर में रहने वाली नीतू की आंखें खुलीं. उसे अपने सिर में भारीपन और हलका दर्द महसूस हुआ तो उस ने कस कर आंखें बंद कर लीं. इस से उसे थोड़ी राहत मिली. वह उठ कर पलंग पर बैठ गई. नजर सामने दीवार घड़ी पर गई तो चौंक पड़ी, घड़ी में साढ़े 8 बज रहे थे.

उसे हैरानी हुई. इतना समय हो गया था, आज मां ने उसे चायनाश्ते के लिए नहीं जगाया था. रोज तो मां साढ़े 6-7 बजे के बीच उसे उठा कर चायनाश्ता करवा देती थीं. आज मां को क्या हुआ, कहीं बीमार तो नहीं हो गईं. उसे याद आया, कल शाम को मां को हरारत थी. मां ने खुद कहा था कि आज उसे अच्छा नहीं लग रहा है.

नीतू पलंग से नीचे उतरी तो उसे चक्कर आ गया. उस ने अगर जल्दी से पलंग न पकड़ा होता तो गिर ही पड़ती. सिर में अभी भी भारीपन था. ऐसा रोज ही होता था लेकिन आज कुछ ज्यादा ही महसूस हो रहा था.

कुछ देर तक नीतू पलंग पकड़ कर खड़ी रही. फिर धीरेधीरे कदम रखती हुई वह बाहर आ गई. जिस कमरे में मां सोती थीं, वह बंद था. कमरे के दरवाजे पर उस का अंकल मनप्रीत कुरसी पर अधलेटा पड़ा ऊंघ रहा था.

आहट सुन कर वह हड़बड़ा कर उठ बैठा. नीतू को सामने देख कर उस की आंखों में गुस्सा भर आया, ‘‘तुम बाहर क्यों आई, क्या तुम्हें नहीं मालूम कि डाक्टर ने तुम्हें आराम करने की हिदायत दे रखी है. जाओ, जा कर सो जाओ.’’ मनप्रीत अंकल की आवाज में तीखापन था.

‘‘मां कहां है अंकल?’’ अंकल की बात को अनसुना करते हुए नीतू ने पूछा.

‘‘बाजार गई है, तुम जा कर सो जाओ.’’ मनप्रीत उसे डांटते हुए बोला, ‘‘जाओ अंदर.’’

नीतू के चेहरे पर डर की परछाइयां उभर आईं. वह जल्दी से पलटी और अपने पलंग पर आ कर लेट गई. उस ने आंखें बंद कर लीं लेकिन जेहन में मां का ही खयाल रखा. मां इतनी सुबह बाजार क्यों गईं? आज मां ने उसे उठा कर नाश्ता भी नहीं करवाया. खयालों में उलझी हुई नीतू को नींद ने फिर से अपने आगोश में समेट लिया.

दरअसल, वह मानसिक रोगी थी. उस का इलाज एक मनोरोग चिकित्सक से चल रहा था. डाक्टर की दी हुई दवाई कल रात को अंकल ने अपने हाथों से उसे खिलाई थी. दवा खा लेने के बाद वह कब सोई, उसे होश नहीं था. सुबह भी शायद दवा का ही असर था कि वह फिर से सो गई.

करीब 11 बजे उस की दोबारा से आंखें खुलीं. अब सिर का भारीपन न के बराबर था. मां बाजार से आ गई होंगी. यह सोच कर वह पलंग से उतरी और दबेपांव दरवाजे की तरफ बढ़ गई. वह मनप्रीत अंकल से डरती थी. अगर मनप्रीत अभी भी बाहर बैठा होगा तो उसे फिर डांटेगा. वह डरतेडरते दरवाजे पर आई और गरदन बाहर निकाल कर उस ने मनप्रीत अंकल की टोह ली. मनप्रीत अब कुरसी पर नहीं था.

मां के कमरे का दरवाजा अभी भी बंद था. वह बाहर निकल आई. अंकल मनप्रीत बालकनी में भी नहीं था. मनप्रीत का डर नीतू के दिमाग से जाता रहा. वह मां के कमरे के दरवाजे पर आई तो उसे दरवाजे पर ताला लगा दिखाई दिया.

मां ताला लगा कर तो नहीं जातीं, साढ़े 8 बजे वह उठी थी तब से अब तक ढाई घंटे बीत गए थे. मां का अतापता नहीं था. अगर मां सुबहसुबह बाजार गईं तो अब तक उन्हें लौट आना चाहिए था.

मां के लिए परेशान नीतू दरवाजे के पास पड़ी कुरसी पर बैठ गई. उस के हाथ कुरसी के हत्थे से टकराए तो हाथ में कुछ चिपचिपा सा लगा. उस ने हाथ को हत्थे से उठा कर देखा तो उस पर खून लगा था. नीतू घबरा गई. उस ने देखा कुरसी का हत्था खून से सना हुआ था. इसी कुरसी पर अंकल मनप्रीत बैठा हुआ था.

‘क्या यह खून उस के द्वारा कुरसी के हत्थे पर लगा है? अगर हां तो यह खून किस का है.’ यह विचार आने के बाद नीतू की घबराहट बढ़ती गई. मन में आशंकाएं उमड़ने लगीं. वह तेजी से अपने मकान से निकली और किसी जानने वाले के फोन से अपने चचेरे भाई राकेश को फोन किया. उस ने भाई से कहा कि वह तुरंत यहां गणेश नगर आ गया.

चचेरा भाई राकेश आधे घंटे में ही गणेश नगर आ गया. नीतू मकान के बाहर ही उसे मिल गई.

‘‘क्या हुआ नीतू, मुझे तुरंत आने को क्यों कहा? घर में तो सब ठीक है न?’’ राकेश ने प्रश्नों की झड़ी लगा दी.

‘‘कुछ ठीक नहीं है भाई, मां सुबह से नजर नहीं आ रही हैं. मैं सुबह साढ़े 8 बजे सो कर उठी थी, तब मनप्रीत अंकल कुरसी पर बैठा था. उस ने मुझे डांटा और सो जाने को कहा. मैं अपने कमरे में आ कर लेटी तो सो गई. जब आंखें खुलीं तो मनप्रीत अंकल को गायब पाया, वह जिस कुरसी पर बैठा था, उस का हत्था खून से सना है.’’

‘‘मांजी कहां जा सकती हैं,’’ राकेश बड़बड़ाया. फिर नीतू से पूछा, ‘‘वह कुरसी कहां है जिस पर खून लगा हुआ है?’’

नीतू उसे घर के अंदर ले आई. वह 2 कमरों का सैट था. एक कमरा नीतू के लिए था, दूसरे में नीतू की मां रेखा, मनप्रीत के साथ रहती थी. कमरे के दरवाजे पर ताला और कुरसी पर लगा खून देख कर राकेश को समझते देर नहीं लगी कि कुछ न कुछ गड़बड़ है.

उस ने मकान मालकिन और 2-3 पड़ोसियों को यह बात बताई तो उन्होंने पुलिस को फोन करने की सलाह दी. राकेश ने अपने मोबाइल फोन से पीसीआर का नंबर मिला कर उन्हें सारी बात बताई और गणेश नगर आने की प्रार्थना की.

पुलिस के आने तक आसपास इस बात की खबर फैल गई थी कि रेखा रानी सुबह से लापता है, उस के दरवाजे पर ताला लगा है और दरवाजे पर रखी कुरसी का हत्था खून से सना है. रेखा का पति मनप्रीत भी कहीं नजर नहीं आ रहा था, इसलिए अनेक प्रकार की आशंकाएं वहां चर्चा का विषय बनी हुई थीं.

पुलिस जब गणेश नगर के ए-651 मकान के सामने पहुंची तो मकान के बाहर अच्छीखासी भीड़ जमा हो चुकी थी.

ASI के फरेेबी प्यार में बुरे फंसे थाना प्रभारी – भाग 1

सामान्य दिनों की तरह शुक्रवार 24 जून, 2022 को इंदौर महानगर के पुलिस कमिश्नर के औफिस में चहलपहल बनी हुई थी. पुलिसकर्मी दोपहर बाद के अपने रुटीन वाले काम निपटाने में व्यस्त थे. साथ ही उन के द्वारा कुछ अचानक आए काम भी निपटाए जा रहे थे.दिन में करीब 3 बजे का समय रहा होगा.

वहीं पास में स्थित पुलिस आयुक्त परिसर में गोली चलने की आवाज आई. सभी पुलिसकर्मी चौंक गए. कुछ सेकेंड में ही एक और गोली चलने की आवाज सुन कर सभी दोबारा चौंके. अब वे अलर्ट हो गए थे और तुरंत उस ओर भागे, जिधर से गोलियां चलने की आवाज आई थी. पुलिस आयुक्त के कमरे के ठीक बाहर बरामदे का दृश्य देख कर सभी सन्न रह गए.

पुलिस कंट्रोल रूम में ही काम करने वाली एएसआई रंजना खांडे जमीन पर अचेत पड़ी थी. उस के सिर के नीचे से खून रिस रहा था. कुछ दूरी पर ही भोपाल श्यामला हिल्स थाने के टीआई हाकम सिंह पंवार भी अचेतावस्था में करवट लिए गिरे हुए थे.खून उन की कनपटी से तेजी से निकल रहा था. उन्हें देख कर कहा जा सकता था कि दोनों पर किसी ने गोली चलाई होगी. किंतु वहां किसी तीसरे के होने का जरा भी अंदाजा नहीं था. हां, टीआई के पैरों के पास उन की सर्विस रिवौल्वर जरूर पड़ी थी.

एक महिला सिपाही ने रंजना खांडे के शरीर को झकझोरा. वह उठ कर बैठ गई. उसे गोली छूती हुई निकल गई थी. वह जख्मी थी. उस की गरदन के बगल से खून रिस रहा था. उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया. जबकि टीआई के शरीर को झकझोरने पर उस में कोई हरकत नहीं हुई. उन की सांसें बंद हो चुकी थीं.

रंजना के साथ टीआई को भी अस्पताल ले जाया गया.गोली चलने की इस वारदात की सूचना पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र को भी मिल गई. वह भी भागेभागे घटनास्थल पर पहुंच गए. तब तक की हुई जांच के मुताबिक टीआई हाकम सिंह के गोली मार कर खुदकुशी करने की बात चर्चा में आ चुकी थी. सभी को यह पता था कि यह प्रेम प्रसंग का मामला है. मरने से पहले टीआई ने ही एएसआई रंजना खांडे पर गोली चलाई थी.

इस के बाद अपनी कनपटी पर रिवौल्वर सटा कर गोली मार ली थी. रंजना खांडे की गरदन को छूती हुई गोली निकल गई थी. गरदन पर खरोंच भर लगी थी, किंतु वह वहीं धड़ाम से गिर पड़ी थी. रंजना के गिरने पर टीआई ने उसे मरा समझ लिया था. परंतु ऐसा हुआ नहीं था. पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई कि रंजना ने टीआई पंवार पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था. जबकि पंवार रंजना पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगा चुके थे.

रंजना टीआई को कर रही थी ब्लैकमेल,रंजना और टीआई पंवार के बीच गंभीर विवाद की यही मूल वजह थी. इसे दोनों जल्द से जल्द निपटा लेना चाहते थे. इस सिलसिले में उन की कई बैठकें हो चुकी थीं, लेकिन बात नहीं बन पाई थी.टीआई पंवार तनाव में चल रहे थे. इस कारण 21 जून को बीमारी का हवाला दे कर छुट्टी पर इंदौर चले गए थे. उन्हें घटना के दिन रंजना ने 24 जून को मामला निपटाने के लिए दिन में डेढ़ बजे कौफीहाउस बुलाया था.

जबकि रंजना खुद अपने भाई कमलेश खांडे के साथ 10 मिनट देरी से पहुंची थी. उन के बीच काफी समय तक बातचीत होती रही. उसे बातचीत नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वे एकदूसरे से बहस कर रहे थे, जो आधे घंटे बीत जाने के बाद भी खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी. बगैर किसी नतीजे पर पहुंचे दोनों सवा 2 बजे कौफीहाउस से बाहर निकल आए थे.

पुलिस कमिश्नर औफिस के पास रीगल थिएटर है. उसी के सामने कौफीहाउस बना हुआ है. यह केवल पुलिस वालों के लिए ही है. बाहर निकलने पर भी दोनों में बहस होती रही. बताते हैं कि वे काफी तैश में थे. बहस करीब 40 मिनट तक चलती रही.

बेवफा प्रेमी का बदला

रोजाना की तरह लखनऊ के जीआरएम मैरिज लौन के मालिक रोशन लाल का बेटा महेंद्र मौर्या उर्फ पुष्कर मौर्या 25 जुलाई, 2022 को अपनी कपड़े की दुकान बंद कर कार से घर लौट रहा था. उस की कार ज्यों ही भुअर पुल के नीचे पहुंची, गाड़ी के सामने 2 बाइक आ कर रुक गईं.

खराब रास्ते के चलते पुष्कर की कार धीरेधीरे चल रही थी. अचानक आई बाइकों के चलते पुष्कर ने भी कार रोक दी. उस समय आसपास कोई और नजर नहीं आ रहा था.

बाइक से मास्क लगाए दोनों सवार उतरे और कार पर अंधाधुंध फायरिंग करने लगे. आगे का शीशा तोड़ती कुछ गोलियां सीधे कार में बैठे महेंद्र को भी जा लगीं और पलक झपकते ही उस का सिर स्टीयरिंग पर जा टकराया.

यह घटना उस की दुकान से महज 500 मीटर की दूरी पर भुअर अंडरपास के निकट हुई थी. दोनों हमलावर पहले से ही घात लगाए रुके हुए थे. घटनास्थल पर ही महेंद्र को मौत के घाट उतार चुके दोनों बाइक सवार वहां से फरार हो गए थे.

गोलियां चलने की आवाजें सुन कर नजदीक के भुअर पुलिस चौकी पर तैनात पुलिस वाले भागेभागे वहां पहुंच गए. गोलीबारी की वारदात की सूचना चौकी इंचार्ज परवेज अंसारी ने थाना ठाकुरगंज के प्रभारी हरिश्चंद्र को मोबाइल से दे दी.

सूचना पाते ही थानाप्रभारी हरिश्चंद्र भी डीसीपी शिवा शिम्मी चिनअप्पा, एसीपी इंद्रप्रकाश सिंह और एडिशनल डीसीपी चिरंजीव नाथ सिन्हा को सूचना दे कर एडिशनल इंसपेक्टर (क्राइम) विजय कुमार यादव, एसआई राजदेव प्रजापति, कांस्टेबल सुबोध सिंह के साथ कुछ समय में ही घटनास्थल पर पहुंच गए.

खबर मिलने पर कुछ देर में ही मृतक के घर वाले भी आ गए. थानाप्रभारीने महेंद्र के पिता रोशन लाल मौर्या से भी आवश्यक पूछताछ की. घटनास्थल और लाश का निरीक्षण करने के बाद लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. थानाप्रभारी ने रोशन लाल की तहरीर पर भादंवि की धारा 302 के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज कर ली.

थानाप्रभारी हरिश्चंद्र ने विवेचना अपने हाथों में ले कर आगे की जांच शुरू की. इस के लिए मुखबिरों को भी लगा दिया.

जल्द ही महेंद्र की हत्या के बारे में कुछ जानकारियां उन्हें मिल गईं. उस के मुताबिक उसे सुपारी दे कर मरवाया गया था. यह काम उस की पत्नी के ममेरे ससुर संजय मौर्या के इशारे पर किया गया था. इस जानकारी के आधार पर ही पुलिस टीम ने इस हत्याकांड की जांच को आगे बढ़ाया.

थानाप्रभारी हरिश्चंद्र ने महेंद्र मौर्या के पिता को साथ ले कर पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की. उन से गहन पूछताछ हुई. रोशन लाल ने भी हत्या का मुख्य कारण परिवारिक निजी कारणों की ओर इशारा किया. उन्होंने पुलिस को कुछ गोपनीय बातें भी बताईं.

जांच का सिलसिला आगे बढ़ा. मुखबिरों के जाल बिछाए गए और सर्विलांस प्रभारी राजदेव प्रजापति के माध्यम से महेंद्र के फोन नंबर की काल डिटेल्स जुटाने का काम किया गया. पुलिस को जल्द ही सफलता मिल गई और महेंद्र के सभी हमलावरों के बारे में पता लगा लिया गया.

पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक, हमलावरों के नाम सतीश गौतम और मुकेश रावत थे. जांच अधिकारी हरिश्चंद्र ने सहयोगी विवेचक इंसपेक्टर विजय कुमार यादव और भुअर पुलिस चौकी के इंचार्ज परवेज अंसारी को हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए लगा दिया. सर्विलांस से मिली लोकेशन के आधार पर दोनों 31 जुलाई, 2022 को आईआईएम रोड से करीब ढाई बजे दिन में गिरफ्तार कर लिए गए.

हमलावरों में सतीश गौतम लखनऊ की मलिहाबाद तहसील के अहमदाबदा कटोरी का रहने वाला था, जबकि दूसरा हमलावर मुकेश रावत लखनऊ के काकोरी थानांतर्गत सैफलपुर गांव का रहने वाला निकला.

दोनों से जब पुलिस अधिकारियों ने गहन पूछताछ की, तब जो कहानी सामने आई, वह काफी चौंकाने वाली थी.

इसी के साथ उन्होंने महेंद्र मौर्या को गोली मार कर हत्या करने का जुर्म भी स्वीकार कर लिया. साथ ही यह भी बताया कि संजय मौर्या ने महेंद्र मौर्या की हत्या की सुपारी दी थी. उस से मिली जानकारी के आधार पर हमलावरों ने महेंद्र की हत्या से पहले उस के रोजाना की रुटीन के आधार पर वारदात की योजना बनाई थी.

संजय मौर्या ने बचाव और पुलिस को गुमराह करने के लिए कई इंतजाम भी किए थे. जैसे उस ने बाराबंकी जेल में बंद एक अपराधी ज्ञानसिंह यादव की जमानत करवा कर दिनेश सिंह नामक युवक से उस की आईडी प्रूफ पर एक सिम लिया था.

कथा लिखे जाने तक सआदतगंज निवासी संजय मौर्या और हत्याकांड में नाम आने वाले दूसरे आरोपियों में ज्ञानसिंह यादव और दिनेश सिंह ठाकुर फरार थे.

सतीश गौतम और मुकेश रावत के बयानों के आधार पर हत्याकांड के पीछे की सच्चाई इस प्रकार उजागर हुई—

बुद्धेश्वर मंदिर से गुजरता हुआ हरदोई बाईपास दुबग्गा के पास मिलता है. वहीं दूसरी ओर हरदोई से आने वाला सीधा राजमार्ग आगे बालागंज चौक से होता हुआ केजीएमयू मैडिकल कालेज केंद्र को जा कर निकलता है.

महेंद्र मौर्या के पिता रोशन लाल का दुबग्गा बाईपास के किनारे अपना मकान है. वहीं उन का मैरिज लौन जीआरएम बना हुआ है. उन का बड़ा बेटा महेंद्र उन के कारोबार को सालों से संभाले हुए था.

लखनऊ हरदोई राजमार्ग के किनारे लखनऊ से 25 किलोमीटर की दूरी पर मलिहाबाद में राम प्रसाद मौर्या रहते हैं. उन के 2 बेटे राहुल और पंकज के अलावा एक बेटी पल्लवी है. संजय मौर्या की चचेरी बहन रामश्री इसी खानदान को ब्याही गई थी.

पल्लवी और संजय का परिचय एक शादी के दौरान हुआ था. पहली नजर में ही पल्लवी संजय के दिल में उतर गई थी. उसे ले कर संजय सपने सजाने लगा था.

संजय मौर्या के पिता शिवकुमार मौर्या को जब इस की जानकारी हुई, तब वह बेहद नाराज हो गए. शिवकुमार ने पल्लवी के घर वालों से संजय के रिश्ते की बात करने से सिरे से इनकार कर दिया. वह संजय की शादी पल्लवी से करने के लिए हरगिज तैयार नहीं हुए.

कारण, रिश्ते का घालमेल और उलटा पड़ जाना था, जो सामाजिक तौर पर मान्य नहीं होता. दरअसल, संजय जिस रिश्तेदारी में था, उस के मुताबिक उस की पल्लवी से शादी नहीं हो सकती थी.

इसे देखते हुए शिवकुमार ने अपने बेटे संजय का विवाह लखनऊ शहर में दूसरी जगह से कर दिया, जो जून 2022 में संपन्न हुआ था. हालांकि रामप्रसाद ने पहले ही जनवरी 2022 में अपनी बेटी पल्लवी की शादी दुबग्गा निवासी रोशन लाल के बेटे महेंद्र मौर्या के साथ कर दी थी.

शादी के बाद संजय पल्लवी से मिलने के बहाने से उस की ससुराल आने लगा था, जो उसे अच्छा नहीं लगता था और तब उस ने अपने पति महेंद्र मौर्या से उन के अपने रिश्तेदार संजय मौर्या के घर आने पर रोक लगाने को कहा.

संजय अकसर महेंद्र की गैरमौजूदगी में पल्लवी के पास आने लगा था. शादी से पहले संजय और पल्लवी के बीच के प्रेम संबंध के बारे में रोशन लाल, महेंद्र और परिवार के किसी सदस्य को कोई जानकारी नहीं थी.

सामाजिक मर्यादा के कारण पल्लवी ने संजय से दूरी बनाना ही उचित समझा और पति से उसे घर आने से मना करने का आग्रह किया. ऐसा करते हुए उस ने अपने दिल पर पत्थर रख लिया था. संजय और महेंद्र के बीच भी रिश्तेदारी थी. वह महेंद्र का रिश्ते में मामा लगता था. इस लिहाज से संजय पल्लवी का ममेरा ससुर बन गया था.

जबकि संजय एक रसिक किस्म का युवक था. वह पल्लवी की सुंदरता और जवानी पर लट्टू हो चुका था. पल्लवी भी उसे बेहद पसंद करती थी. वे डिजिटल जमाने के प्रेमी थे. सोशल मीडिया से जुड़े थे. फेसबुक फ्रैंड भी थे. उन की डेटिंग मैसेजिंग बौक्स में गुड मौर्निंग और गुडनाइट से होती थी.

इस सिलसिले में दोनों फेसबुक के जरिए अपने दिल की भावनाएं प्रदर्शित करते रहते थे. देर रात तक उन की चैटिंग होती रहती थी. किंतु उसे वह जीवनसाथी नहीं बना पाई थी.

जुलाई 2020 तक सब कुछ ठीकठाक चलता रहा. पल्लवी और संजय की बातचीत केवल सोशल मीडिया तक ही सीमित रही, लेकिन यह बात उस की मां रामश्री से छिपी न रह सकी और एक दिन रामश्री ने अपने पति रामप्रसाद से पल्लवी का विवाह किसी अन्य स्थान पर करने को कहा. और फिर रामप्रसाद ने अपने एक रिश्तेदार रोशन लाल से उस के बेटे का हाथ अपनी बेटी के लिए मांग लिया.

पल्लवी जनवरी, 2022 में अपनी ससुराल आ गई. उस के बाद से संजय काफी परेशान रहने लगा. उस के मन में महेंद्र के प्रति ईर्ष्या और घृणा होने लगी. वह उस की प्रेमिका छीनने वाला दुश्मन की तरह नजर आने लगा. उस ने मन में ठान लिया कि वह उस के वैवाहिक जीवन में जहर घोल कर ही रहेगा, ताकि पल्लवी का संबंध उस से टूट जाए.

उस के दिमाग में यहां तक खुराफाती कीड़ा कुलबुलाने लगा कि यदि उसे खत्म कर दिया जाए, तब वह विधवा पल्लवी का हाथ लेगा. बताते हैं कि वह इसी उधेड़बुन में लग गया.

एक दिन संजय और महेंद्र का आमनासामना आगरा एक्सप्रेसवे पर हो गया. संजय ने उस पर नाराजगी दिखाते हुए कहा कि तू अपनी नईनवेली बीवी के बहकावे में हमारे रिश्ते को खत्म करना चाहता है.

संजय ने कहा, ‘‘आज की लौंडिया हमारे मामाभांजे के रिश्ते में आग लगाना चाहती है, और तू उस की हर बात मान रहा है. अभी से ही बीवी का गुलाम बन गया. कल को तो अपने मांबाप को भी उस के चक्कर में छोड़ देगा.’’

महेंद्र को यह बात चुभ गई, क्योंकि उस ने पल्लवी में न केवल एक आदर्श पत्नी का रूप देखा था, बल्कि एक आज्ञाकारी बहू को भी पाया था. यही नहीं वह अपने मामा की रंगीनमिजाजी और फरेबी आदतों को पहले से ही जानता था.

उसे जैसे ही पल्लवी ने बताया कि तुम अपने मामा संजय को यहां आने से मना कर दो, वैसे ही उस की मंशा को समझ गया था.

उस रोज हाईवे पर संजय के साथ महेंद्र की तीखी नोकझोंक हुई. गुस्से में संजय ने धमकी दी कि उसे उस के घर आनेजाने से कोई नहीं रोक सकता है. उस की जब मरजी होगी, वह आएगा और जाएगा.

पल्लवी को ले कर हुए विवाद के बाद महेंद्र ने भी संजय को चेतावनी दी थी कि वह उसे और पल्लवी को परेशान न करे.

दरअसल, महेंद्र को भी तब तक संजय और पल्लवी के बीच के प्रेम संबंध की जानकारी हो गई थी, लेकिन वह इसे तूल नहीं देना चाहता था. क्योंकि उस ने महसूस किया था कि पल्लवी  शादी के बाद उस रिश्ते को खत्म कर चुकी है. महेंद्र ने संजय से साफ लहजे में कह दिया था कि वह उस के वैवाहिक जीवन के रास्ते से हट जाए. उस की गृहस्थी में जहर न घोले.

यह बात संजय को और भी कचोट गई. उस घटना के बाद उस ने महेंद्र मौर्या की हत्या करने की योजना बना ली. इसे कार्यरूप देते हुए कुछ माह निकल गए और इसी बीच उस की भी शादी हो गई. फिर भी संजय पल्लवी को हासिल करने की फिराक में लगा रहा.

योजना के मुताबिक पहले उस ने बाराबंकी जेल में बंद अपने दोस्त ज्ञानसिंह यादव की जमानत करवाई. जमानत पर बाहर आने के बाद बदले में उस से महेंद्र की हत्या को अंजाम देने के लिए कहा.

उस के बाद ही ज्ञान सिंह यादव ने अपने कुछ सहयोगियों की मदद ली. उन से पहले महेंद्र की रेकी करवाई. उसे महेंद्र की हत्या के लिए संजय से 35 हजार रुपए मिले. जबकि संजय ने भाड़े पर लिए गए मुकेश रावत को मकान बनवाने के लिए 75 हजार रुपए देने का वादा किया. इस में से उसे 20 हजार दे दिए थे. बाकी पैसे काम हो जाने के बाद देने के लिए कहा था.

इस तरह से निर्धारित तारीख पर भाड़े के हत्यारों ने महेंद्र की गोली मार कर हत्या कर दी. रोशन लाल ने पूछताछ में बताया कि संजय ने उसे भी फोन पर धमकी दी थी कि वह महेंद्र की हत्या करने के बाद उस की विधवा बहू से शादी करेगा.

इसे उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया था. पल्लवी के साथ उस के संबंध और संजय की धमकियों की पुष्टि को ले कर जांच अधिकारी ने उस से भी पूछताछ की थी.

इस कहानी के लिखे जाने तक हत्याकांड की योजना बनाने वाला आरोपी संजय पुलिस की पकड़ में नहीं आ पाया था. बाकी आरोपियों के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त मोटरसाइकिलें बरामद कर ली गई थीं. पुलिस ने महेंद्र की अल्टो कार भी अपने कब्जे में ले ली थी

लखनऊ पुलिस कमिश्नर डी.के. ठाकुर ने हत्याकांड का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपए के ईनाम देने की घोषाणा की.  द्य

(कथा विवेचक तथा समाचार पत्रों से प्राप्त सूचना पर आधारित. कथा में कुछ नाम

काल्पनिक हैं)

चार्ल्स शोभराज : जिसका 11 मुल्कों की पुलिस इंतजार करती थी

हतचंद भाओनानी गुरुमुख यानी चार्ल्स शोभराज  एक बार फिर नेपाल की सुप्रीम कोर्ट से रिहाई के आदेश के बाद चर्चा में आ गया है .दरअसल, बहुत कम ऐसे जीवंत किरदार होते हैं जो लोगों के आकर्षण का केंद्र हो जाते हैं.

चार्ल्स शोभराज  उन्ही भाग्यशाली अपराधिक कृत्य कारित करने वाले शख्सियत में से एक है, जो हमेशा से मीडिया में सुर्खियां बटोरते रहे हैं. और आमजन मानस  के आकर्षण का केंद्र बनी रहे. अब जब नेपाल सुप्रीम कोर्ट से लंबे समय तक जेल के सीखचों में बंद रहने के बाद के चार्ल्स शोभराज की रिहाई को बड़े ही आकर्षण के साथ देखा जा रहा था पर अचानक ग्रहण लग गया और काठमांडू के जेल प्रशासन ने चार्ल्स शोभराज की रिहाई नहीं कर आदेश को अस्पष्ट बता दिया.

दरअसल, चार्ल्स शोभराज की जिंदगी इसी तरह उतार-चढ़ाव की  रही है कब क्या होगा कोई नहीं जानता अभी जब यह खबर सुर्खियों में है कि रिहाई नहीं हो पाई तो हो सकता है यह रिपोर्ट प्रकाशित होते होते वह रिहा हो जाए और हो सकता है भारत अथवा फ्रांस की पुलिस को  अन्य मामलों में कार्रवाई के लिए सुपुर्द भी कर दिया जाए.

वस्तुतः चार्ल्स शोभराज एक ऐसा किरदार है जिसने  लाखों लोगों को प्रभावित किया है. लोग उसे देखना सुनना और पढ़ना पसंद करते हैं .  पुलिस ने जब फिल्मी स्टाइल में उसकी गिरफ्तारी की थी वह भी अपराधिक इतिहास में एक दस्तावेज के रूप में सुरक्षित है.

आइए, आज आपको उस घटनाक्रम से वाकिफ कराते हैं. अमाडो गौसांल्येस गोवा पणजी का वह शख्स है जिसने पुलिस को चार्ल्स शोभराज को बांधने के लिए रस्सी उपलब्ध कराई थी. उसको आज भी छह अप्रैल, 1986 की शाम स्मरण है जब मुंबई अपराध शाखा के मौजूदा इंस्पेक्टर मधुकर जेंडे ने चार्ल्स शोभराज को पकड़ने के लिए उस पर रिवाल्वर तान दी थी.

वह गोवा में पोरचोरिम के एक रेस्टोरेंट मे चार्ल्स शोभराज के बगल वाली मेज पर बैठा हुआ था. इस घटना के वक्त सब कुछ सामान्य था और और  ‘कोकेरियो’ केसिनो हमेशा की तरह ग्राहकों से भरा हुआ था. व्यवसायी अमांडो को वह दिन वह समय अब भी याद है जब  शोभराज को मुंबई अपराध शाखा की टीम ने गोवा में  उसके सामने ही गिरफ्तार किया था.

उस घटना को लगभग 35 साल से ज्यादा व्यतीत हो चुके हैं मगर कैसिनो के व्यवसायी को सारी घटना आज भी आंखों के सामने झूल रही है और जब चार्ल्स शोभराज अब रिहाई के कगार पर है उसने अपनी भावना साझा की है.

बताते हैं कि उस दिन ‘रेस्तरां के दूसरी तरफ शादी का कार्यक्रम चल रहा था. घटना जब घटी उस दरमियान लोग भोजन का आनंद उठा रहे थे सब कुछ सामान्य था.

गोवा के पणजी में अब उस केसिनो में आने जाने वाले लोग उत्सुकता से बातें करते हैं. यही नहीं रेस्टोरेंट प्रबंधन ने एक कौन में चार्ल्स शोभराज की प्रतिमा भी स्थापित कर दी है जो पर्यटकों के लिए ‘सेल्फ प्वाइंट’ बना हुआ  है.

भारतीय और वियतनामी माता-पिता की संतान  चार्ल्स शोभराज  हत्या के मामले में लंबा समय जेल में बिता चुका है. वह  दो विदेशी नागरिकों की हत्या के आरोप में 2003 से उम्रकैद की सजा काट रहा है. शोभराज सन् 1972 से 76 के दौरान एशिया आने वाले पश्चिमी देशों के पर्यटकों को अपने जाल में फांस लेता था और उन्हें मादक पदार्थ खिला कर कर उनकी हत्या कर दिया करता था.

उसने जिन लोगों की हत्या की थी उनमें से दो महिलाओं के शव केवल विकिनी में मिले थे. शातिर तरीके से लोगों को धोखा देने और छलने के अपने कृत्य के कारण शोभराज ‘विकिनी किलर’ और ‘द सपेट’ के नाम से जाना जाता है . यह अपराध की दुनिया एक ऐसा नाम है जिसे शायद कभी भुलाया नहीं जा सकेगा.

दरअसल, उस दिन शोभराज और उसके साथी ने बिना लड़े ही हार मान ली लेकिन पुलिस उसे कोई मौका नहीं देना चाहती थी इसलिए उसे कुर्सी से बांधने के लिए रस्सी उन्होंने मांगी, जिसे रेस्टोरेंट प्रबंधन ने उपलब्ध कराई। जिससे शोभराज को बांधा गया.

———————————

जिसकी सचमुच 11 मुल्कों की पुलिस इंतजार करती थी

—————————–

बिकिनी किलर के नाम से दुनिया में मशहूर चार्ल्स शोभराज को  नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने रिहा करने का आदेश दिया इसके बावजूद चार्ल्स शोभराज का भाग्य देखिए वह जेल से रिहा नहीं हो पाया क्योंकि जेल प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को जब बारीकी से देखा तो यह पाया कि उसमें स्पष्ट आदेश नहीं है. अतः सर्वोच्च अदालत के आदेश के बावजूद जेल प्रशासन ने चार्ल्स शोभराज को रिहा करने से इंकार कर दिया . यही नहीं इसके अलावा शोभराज के वकीलों को भी उससे मिलने नहीं दिया गया .

जेल प्रशासन ने दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अस्पष्ट है. और उसमें यह उल्लेख नहीं है कि किस मुकदमे में रिहा करने को कहा गया है. दरअसल नेपाल में इस समय शोभराज दो विदेशी युवतियों की हत्या के आरोप में उम्र कैद की सजा काट रहा है. इसके अलावा शोभराज एक हत्या के प्रयास और जेल में हुए मर्डर अटेम्ट मामले में भी दोषी पाया गया था.

जेल प्रशासन ने नेपाल उच्चतम न्यायालय से अनुरोध करते हुए आग्रह किया है सब कुछ स्पष्ट होने के साथ ही चार्ल्स शोभराज को छोड़ दिया जाएगा. वस्तुत: शोभराज ने जेल से रिहा होने के लिए याचिका दायर की थी. उसका कहना था कि वह निर्धारित समय से ज्यादा समय तक जेल में बंद है इसलिए उसे रिहा कर दिया जाए.

नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने उसकी अर्जी स्वीकार कर ली थी और इसी आधार पर चार्ल्स शोभराज को जेल से रिहा करने का आदेश दे दिया गया. सचमुच चार्ल्स शोभराज एक ऐसा अपराधिक शख्स था जिसकी एक समय में ग्यारह मुल्कों की पुलिस इंतजार  करती थी. अपनी रिहाई के आदेश के साथ एक बार फिर यह शख्स दुनिया भर में चर्चा में है.